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ईरान-अमेरिका जंग में फंसा रेस्क्यू मिशन, सी-130 विमान गिरने का दावा, पायलट को बचाने पर दोनों देशों के अलग सुर

 नई दिल्ली ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के बीच एक रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर दोनों देशों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। ईरान ने इसे अपनी जीत बताया है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इसे बड़ी सैन्य सफलता करार दिया है। ईरान ने रविवार को दावा किया कि दक्षिण इस्फहान में अमेरिका को कड़वी हार का सामना करना पड़ा। यह बयान उस समय आया जब एक अमेरिकी एफ-15 विमान के दूसरे क्रू सदस्य को बचा लिया गया, जो विमान गिरने के बाद लापता हो गया था। ईरान के खातम अल-अनबिया मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघरी ने कहा कि इस घटना ने अमेरिकी सेना की कमजोरी को उजागर कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि डोनल्ड ट्रंप जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस ऑपरेशन के दौरान एक सी-130 श्रेणी का विमान भी मार गिराया गया। जोल्फाघरी ने इसे ईरानी सेना की बहादुरी और साहस का उदाहरण बताया। ट्रंप ने बताया बड़ी सफलता जहां ईरान इसे अपनी जीत बता रहा है, वहीं डोनल्ड ट्रंप ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन को अमेरिकी सेना की बड़ी सफलता कहा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि घायल पायलट अब सुरक्षित है और यह मिशन अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी बचाव अभियानों में से एक है। ट्रंप ने कहा कि इस अभियान में कई विमान और अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि दुश्मन के इलाके में जाकर दो अमेरिकी पायलटों को अलग-अलग बचाना सेना की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन ईरान के आसमान में अमेरिका की ताकत और नियंत्रण को दिखाता है। ऑपरेशन के दौरान टकराव ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस ऑपरेशन के दौरान दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और एक सी-130 विमान को निशाना बनाया गया। कुछ तस्वीरों में रेगिस्तानी इलाके में धुआं उठता हुआ भी दिखाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय ईरानी लोगों ने भी अमेरिकी हेलीकॉप्टरों पर गोलीबारी की। इस घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं। युद्ध का बढ़ता असर इस संघर्ष का असर अब आम लोगों तक भी पहुंचने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य समेत कई अहम समुद्री रास्ते प्रभावित हुए हैं, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र की खाद्य और कृषि संस्था ने चेतावनी दी है कि अगर यह युद्ध जून तक जारी रहा, तो दुनिया भर में 4.5 करोड़ और लोग भूख के संकट में फंस सकते हैं। पहले से ही 32 करोड़ लोग खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं। इस बीच मिस्र और पाकिस्तान जैसे देश कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं।

पाकिस्तान का मध्यस्थता का ढोंग बेनकाब, ईरान ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मिलने से किया इनकार, यूएई ने मांगा कर्ज वापस

वाशिंगटन अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव में जल्द ही एक नया दौर देखने को मिल सकता है, क्योंकि यूएस ने अधिक लंबी दूरी की मिसाइलों को ईरान के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले बेसों पर तैनात करने का फैसला किया है। ईरान युद्ध के लिए तैनात की गई यह लंबी दूरी की हथियार प्रणाली बेहद सटीक हमला करने वाले हथियारों में से एक है। लॉकहीड मार्टिन की ओर से निर्मित JASSM-ER क्रूज मिसाइलों की रेंज 930 किलोमीटर से अधिक है। यह मिसाइल दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम से बाहर रहते हुए टारगेट को नष्ट करने के लिए बनाई गई है। चलिए JASSM-ER क्रूज मिसाइलों की खासियत जानते हैं… 1. JASSM-ER क्रूज मिसाइल 1000 पाउंड वजन वाले पेनेट्रेटिंग ब्लास्ट-फ्रैगमेंटेशन वारहेड से लैस है, जो मजबूत ठिकानों को भेदने में सक्षम है। 2. मिसाइल को अमेरिकी वायुसेना के फाइटर जेट जैसे F-15E, F-16 और बॉम्बर जैसे B-1B, B-2, B-52H से लॉन्च किया जा सकता है। 3. JASSM-ER मिसाइल की स्टेल्थ क्षमता इसे दुश्मन के रडार से बचाती है, जिससे पायलट सुरक्षित दूरी पर रहकर हमला कर सकते हैं। 4. प्रत्येक मिसाइल की कीमत लगभग 1.5 मिलियन डॉलर (12.7 करोड़ रुपये) है। 5. ईरान संघर्ष के पहले चार हफ्तों में अमेरिका ने एक हजार से अधिक JASSM-ER मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। अमेरिका अपनी कुल JASSM-ER इन्वेंट्री का लगभग 82 प्रतिशत हिस्सा ईरान युद्ध के लिए समर्पित कर चुका है। युद्ध से पहले करीब 2300 मिसाइलों में से अब केवल 425 मिसाइलें ही अन्य जगहों के लिए बची हैं। प्रशांत क्षेत्र और अमेरिकी भूमि से इन मिसाइलों को सेंट्रल कमांड बेस और ब्रिटेन के फेयरफोर्ड तक पहुंचाया जा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने या शांति समझौता करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। इस संदर्भ में B-52H बॉम्बर की तैनाती भी देखी जा रही है। JASSM परिवार की यह विस्तारित रेंज वाली वैरिएंट 2001 से लॉकहीड मार्टिन की ओर से बनाई जा रही है और दो दशकों से अमेरिकी सेना में सेवा दे रही है। इसका इस्तेमाल न केवल ईरान बल्कि वेनेजुएला जैसे अन्य अभियानों में भी हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मिसाइलों का उपयोग अमेरिका की अन्य क्षेत्रों जैसे चीन के खिलाफ तैयारियों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन ईरान जैसे मजबूत एयर डिफेंस वाले देश के खिलाफ यह अत्यंत प्रभावी साबित हो रही है। संयुक्त अरब अमीरात में भारत के पूर्व राजदूत संजय सुधीर ने पाकिस्तान की पश्चिम एशिया कूटनीति की सच्चाई उजागर करते हुए कहा है कि ईरान-अमेरिका संघर्ष में इस्लामाबाद कभी मध्यस्थ नहीं था, बल्कि अधिक से अधिक एक मैसेंजर की भूमिका ही निभा रहा था। ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान खुद को बिचौलिया बता रहा था और दावा कर रहा था कि वह ईरान अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। लेकिन अब सच्चाई सामने आ गई है। संयुक्त अरब अमीरात में भारत के पूर्व राजदूत संजय सुधीर ने पाकिस्तान की पश्चिम एशिया कूटनीति की सच्चाई उजागर करते हुए कहा है कि ईरान-अमेरिका संघर्ष में इस्लामाबाद कभी मध्यस्थ नहीं था, बल्कि अधिक से अधिक एक मैसेंजर की भूमिका ही निभा रहा था। न्यूज एजेंसी एएनआई से विशेष बातचीत में सुधीर ने कहा कि पाकिस्तान कल तक खुद को मध्यस्थ बताकर ढोल पीट रहा था, लेकिन असल में वह मध्यस्थ होने से बहुत दूर था। वह ज्यादा से ज्यादा एक संदेशवाहक ही था। मध्यस्थता का मतलब होता है कि दोनों पक्ष आमने-सामने मध्यस्थ के साथ बैठकर बात करें, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। इसलिए ईरान ने पाकिस्तान का ढोंग बेनकाब कर दिया है। दरअसल, ईरान ने कथित तौर पर पाकिस्तानी धरती पर किसी भी अमेरिकी नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार कर दिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने अमेरिकी मांगों को 'अस्वीकार्य' बताया है, जिससे शीघ्र समाधान की संभावना लगभग समाप्त हो गई है और पाकिस्तान के राजनयिक प्रयास हाशिए पर चले गए हैं। यह कूटनीतिक झटका ऐसे समय में लगा है जब पाकिस्तान आर्थिक रूप से बेहद कमजोर स्थिति में है। संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान से एक महीने के अंदर अपने बकाया ऋणों का भुगतान करने की मांग की है।

व्यक्तिगत अधिकार बनाम धार्मिक परंपरा, सीजेआई सूर्य कांत की बेंच तय करेगी धर्म और संवैधानिक नैतिकता की नई परिभाषा

नई दिल्ली 2018 में तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा की बेंच ने 4:1 के बहुमत से सबरीमाला में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कहा था कि भक्ति को लैंगिक भेदभाव का शिकार नहीं बनाया जा सकता। सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री पर SC की 9 जजों की पीठ करेगी सुनवाई, मस्जिदों पर भी होगा असर सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से शुरू हुआ विवाद अब एक ऐतिहासिक संवैधानिक मोड़ पर खड़ा है। 7 अप्रैल 2026 से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 9 जजों की संविधान पीठ उन व्यापक कानूनी सवालों पर सुनवाई शुरू करने जा रही है। यह न केवल हिंदू धर्म, बल्कि मुस्लिम, पारसी और दाऊदी बोहरा समुदायों की धार्मिक प्रथाओं को भी प्रभावित करेंगे। सुप्रीम कोर्ट की यह पीठ केवल सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर विचार नहीं कर रही है। अदालत के सामने असल चुनौती यह तय करना है कि क्या व्यक्तिगत मौलिक अधिकार किसी समुदाय के धार्मिक अधिकारों से ऊपर हैं। इस फैसले का असर मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, पारसी महिलाओं के अधिकारों और दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित प्रथाओं पर भी पड़ेगा। 2018 में तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा की बेंच ने 4:1 के बहुमत से सबरीमाला में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कहा था कि भक्ति को लैंगिक भेदभाव का शिकार नहीं बनाया जा सकता। एकमात्र महिला जज, जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने तब असहमति जताते हुए कहा था कि धार्मिक प्रथाओं की तर्कसंगतता की जांच करना अदालतों का काम नहीं है। नवंबर 2019 में पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि यह मुद्दा बहुत व्यापक है और इसे बड़ी बेंच (9 जजों) को भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के सामने कई सवाल संविधान पीठ कुछ मुद्दों पर स्पष्टता लाने की कोशिश कर सकती है। धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का दायरा और सीमा क्या है? अनुच्छेद 25 (व्यक्तिगत अधिकार) और अनुच्छेद 26 (धार्मिक संप्रदाय के अधिकार) के बीच तालमेल कैसे बैठेगा? क्या धार्मिक संप्रदाय के अधिकार संविधान के 'भाग-III' (मौलिक अधिकार) के अधीन हैं? अनुच्छेद 25 और 26 में प्रयुक्त 'नैतिकता' शब्द का अर्थ क्या है? क्या इसमें संवैधानिक नैतिकता शामिल है? क्या अदालतें यह तय कर सकती हैं कि कोई धार्मिक प्रथा उस धर्म का अनिवार्य हिस्सा है या नहीं? अनुच्छेद 25(2)(b) में हिंदुओं के वर्गों का वास्तविक अर्थ क्या है? क्या कोई व्यक्ति जो उस विशेष धार्मिक संप्रदाय का हिस्सा नहीं है, उसकी प्रथाओं को कोर्ट में चुनौती दे सकता है? अन्य धर्मों पर भी होगा असर यह सुनवाई इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इसमें कई अन्य विवादों को जोड़ दिया गया है। मुस्लिम महिलाओं के मस्जिदों में प्रवेश का अधिकार। दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित 'बहिष्कार' और अन्य प्रथाओं की वैधता। गैर-पारसी से शादी करने वाली पारसी महिलाओं के 'अग्नि मंदिर' में प्रवेश का अधिकार। आपको बता दें कि अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और कई जैन संगठनों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है, क्योंकि कोर्ट का फैसला उनके व्यक्तिगत कानूनों को प्रभावित कर सकता है। नई बेंच का गठन CJI सूर्य कांत के नेतृत्व वाली इस बेंच में विविधता का ध्यान रखा गया है। इसमें जस्टिस बीवी नागरत्ना सहित देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों से आए अनुभवी जज शामिल हैं। 7 अप्रैल से होने वाली यह दैनिक सुनवाई भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक व्याख्याओं में से एक साबित होगी। अदालत के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह है कि संविधान का अनुच्छेद 25 धर्म मानने की आजादी देता है, लेकिन साथ ही यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि कोई भी प्रथा जो महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है, वह धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं हो सकती। धार्मिक संस्थाओं का तर्क है कि धर्म की अपनी आंतरिक स्वायत्तता होती है और अदालतों को सदियों पुरानी परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

अमेरिका में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान पर, अमेजॉन और एयरलाइंस ने बढ़ाया बोझ, 2026 में आर्थिक संकट गहराया

  इन्फ्लेशन  ईरान के खिलाफ जंग लड़ रहे अमेरिका में लोगों पर महंगाई की मार पड़ी है. पेट्रोल की कीमतें 1 डॉलर से ज्‍यादा और डीजल की कीमतें 1.89 डॉलर बढ़ गई हैं. इसका असर कृषि और उद्योंगों पर तो पड़ ही रहा है, ट्रांसपोर्टेशन भी महंगा हो गया है. इन वजहों से युद्ध का असर अब सीधे अमेरिकी नागरिकों की जेब तक पहुंच गया है. जेट फ्यूल की कीमतें भी आसमान पर पहुंच ईंधन की बढ़ती कीमतों के चलते ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजॉन ने डिलीवरी पर अतिरिक्त चार्ज लगाने का ऐलान किया है, वहीं प्रमुख एयरलाइंस ने भी टिकटों के दाम बढ़ा दिए हैं. पेट्रोल-डीजल कितना महंगा हुआ? अमेरिका में महंगाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि  पेट्रोल की औसत कीमत बढ़कर 4.09 डॉलर प्रति गैलन (करीब 3.8 लीटर) पर पहुंच गई है, जो अगस्त 2022 के बाद सबसे उच्च स्तर है. वहीं, अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के आंकड़ों के अनुसार, डीजल की कीमत एक साल पहले के 3.64 अमेरिकी डॉलर प्रति गैलन से बढ़कर 5.53 अमेरिकी डॉलर प्रति गैलन हो गई है. डीजल का उपयोग कृषि, निर्माण और परिवहन के साथ-साथ अन्य उद्योगों में भी व्यापक रूप से होता है. अमेजॉन और डाक सेवा ने लगाया सरचार्ज दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेलर अमेजॉन ने पुष्टि की है कि वह 17 अप्रैल से तीसरे पक्ष के विक्रेताओं (थर्ड-पार्टी सेलर्स) पर 3.5 फीसदी का ईंधन और लॉजिस्टिक्स सरचार्ज लागू करेगा अमेजॉन ने एक बयान में कहा, 'ईंधन और लॉजिस्टिक्स में बढ़ी हुई लागत ने पूरे उद्योग में परिचालन की लागत बढ़ा दी है.' कंपनी ने कहा कि उसने अब तक इन बढ़ोतरी को खुद ऑब्‍जर्ब किया है, लेकिन अब लागत कम करने के लिए येअस्थाई कदम उठाना जरूरी हो गया है. अमेजॉन अकेली ऐसी कंपनी नहीं है. अमेरिकी डाक सेवा (USPS) ने भी पार्सल और एक्सप्रेस मेल डिलीवरी पर 8 फीसदी का अस्थायी ईंधन सरचार्ज लगाने की मांग की है. यदि मंजूरी मिलती है, तो ये सरचार्ज 26 अप्रैल से प्रभावी होगा और 17 जनवरी, 2027 तक जारी रहेगा इसके अलावा, यूनाइटेड पार्सल सर्विस (UPS) और फेडएक्स (FedEx) ने भी अपने ईंधन सरचार्ज में बढ़ोतरी की है एयरलाइंस ने बढ़ाए टिकट के दाम युद्ध के कारण जेट ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, जो एयरलाइनों के लिए लेबर कॉसट के बाद दूसरा सबसे बड़ा खर्च है डेल्टा, यूनाइटेड और अमेरिकन एयरलाइंस के सीईओ ने एक कॉन्फ्रेंस में संकेत दिया कि वे बढ़ती लागत की भरपाई के लिए टिकट के दाम बढ़ा रहे हैं डेल्टा एयर लाइंस के CEO एड बैस्टियन ने कहा कि उनकी कंपनी ईंधन लागत को 'रिकैप्चर' करने के लिए अच्छी स्थिति में है. अमेरिकन एयरलाइंस ने खुलासा किया कि उसने ईंधन पर अतिरिक्त 400 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं हालांकि, हैरानी की बात यह है कि इस भारी बढ़ोतरी के बावजूद यात्रियों की मांग कम नहीं हुई है. होर्मुज संकट के बीच बढ़ी चिंता इस पूरे आर्थिक संकट की जड़ होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से है, जिससे होकर दुनिया के 20 फीसदी तेल का परिवहन होता है जानकारों का कहना है कि अगर ये संकट लंबा खिंचा तो अमेरिका में सप्लाई चेन बाधित हो सकती है. न्यूयॉर्क स्थित विश्लेषक राचेल ज़िम्बा ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि अमेरिका इससे बच पाएगा. ये वैश्विक बाजार हैं. एक हफ्ते पहले भी विशेषज्ञ चिंतित थे, अब वे और अधिक चिंतित हैं' शिकागो फेडरल रिजर्व बैंक के अध्यक्ष ऑस्टन गूल्सबी ने चेतावनी दी कि अगर परिवहन लागत बढ़ती है, तो इसका असर अन्य कीमतों पर भी पड़ेगा. उन्होंने कहा कि उपभोक्ता 'स्टिकर शॉक' (कीमतें देखकर हैरान रह जाना) का सामना करेंगे, जिससे पहले से ही बढ़ती महंगाई और भी गंभीर हो जाएगी. महंगाई का कोहराम, आगे और संकट के संकेत अभी फरवरी 2026 में अमेरिका की महंगाई (कोर इंफ्लेशन) दर 2.50 फीसदी थी , लेकिन युद्ध के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब बनी हुई हैं. पीटरसन इंस्टीट्यूट की विशेषज्ञ गैरी हुफबॉर का अनुमान है कि ईरान युद्ध के कारण महंगाई  4 प्रतिशत या उससे भी अधिक हो सकती है. सीएनएन के एक हालिया सर्वे के अनुसार, लगभग दो-तिहाई अमेरिकी नागरिकों का मानना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने आर्थिक स्थितियों को खराब किया है. जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका तेल की कमी से प्रभावित होने वाला अंतिम बाजार होगा, लेकिन कैलिफोर्निया में अप्रैल के अंत या मई से उत्पादों की कमी शुरू हो सकती है.

ब्लैक मार्केट में 10 हजार तक पहुंचा एलपीजी सिलिंडर, महाराष्ट्र और गोवा के फिशरीज सेक्टर पर छाई आर्थिक मंदी

नई दिल्ली ईरान में चल रहे युद्ध का असर दुनिया के हर एक देश पर देखा जा रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि पहले के मुकाबले एलपीजी सप्लाई में कमी आई है। वहीं डीजल और पेट्रोल को लेकर भी आशंकाएं बनी हुई हैं। गोवा और महाराष्ट्र के मछुआरे इस परिस्थिति के शिकार हुए हैं। उनकी सैकड़ों नौकाएं समंदर किनारे खड़ी रहने को मजबूर हैं। मीडिया  रिपोर्ट के मुताबिक कई मछुआरों का कहना है कि एलपीजी सिलिंडर की कमी की वजह से उनके सामने बोट पर खाना बनाने की भी समस्या है। हालांकि कई लोग अब स्टोव पर भरोसा कर रहे हैं। एलपीजी सिलिंडर की कमी एक मछुआरे ने कहा, आज एक सिलिंडर की कीमत ब्लैक मार्केट में 10 हजार के करीब है। ऐसे में हमें स्टोव का सहारा लेना पड़ रहा है। बतादें कि ईरान यु्द्ध को एक महीने से ज्यादा का वक्त हो गया है। ऐसे में कई देशों में ऊर्जा संकट गहराता ही जा रहा है। मुंबई और गोवा में बल्क फ्यूल की कीमत भी बढ़ गई है। मुंबई में रहने वाले कोली समुदाय के लोगों का कहना हैकि उनकी नाव 15 दिन में करीब 2000 से 3000 लीटर डीजल खाती है। ऐसे में उन्हें बल्क डीजल लेना पड़ता है जिसकी कीमत बढ़ गई है। बल्क डीजल की कीमतों में वृद्धि उन्होंने कहा,मुंबई में बल्क डीजल 122 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है जो कि पहले 70 से 80 रुपये प्रति लीटर ही मिल रहा था। ओएमसी ने एक बार फिर बल्क डीजल की कीमत 23 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी। बता दें कि तेल की कीमतें भारत पेट्रोलिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसी ओएमसी ही तय करती हैं। महाराष्ट्र सरकार मछुआरों को बल्क डीजल पर सब्सिडी भी उपलब्ध करवाती है। मालिम के एक मछुआरे ने बताया कि एलपीजी सिलिंडर की कमी होते ही बहुत सारे मछुआरों ने फिशिंग का समय कम करदिया। उन्होंने कहा कि अगदर कोई चार दिन के लिए फिशिंग पर जाताहै तो नाव में कम से कम 4 से 5 लोग होते हैं और उन्हें एक एलपीजी सिलिंडर की जरूरत होती है. वहीं बड़ी नावों पर 30 से 40 लोग होते हैं और वे 15 दिन के लिए निकलते हैं। ऐसे में उन्हें 3 से 4 सिलिंडर की जरूरत होती है। 2016 के आंकड़ों के मुताबिक गोवा में करीब 12651 मछुआरे परिवार हैं। फिशरी सेक्टर तटीय राज्यों की जीडीपी में करीब 2.5 फीसदी का योगदान देते हैं। अर्थव्यवस्था में फिशरीज सेक्टर का बड़ा योगदान डायरेक्टरेट ऑफ प्लानिंग स्टेटिस्टिक्स ऐंड इवैलुएशन के मुताबिक 2024-25 में गोवा के समंदर से 1.27 लाख टन मछलियां पकड़ी गईं जिनकी कीमत करीब 2300 करोड़ थी। ज्यादातर मछली का निर्यमात दक्षिण-पुर्वी एशिया, अमेरिका, चीन और यूरोप को किया गया। वहीं महाराष्ट्र में 2026 में फिशिंग कम्युनिी के करीब 3.65 लोगों को इससे रोजगार मिलता है। इनमें से 23000 से ज्यादा मुंबई के ही रहने वाले हैं। इस उद्योग का साल का टर्नओवर करीब 9121 करोड़ रुपये है। मछुआरों का कहना है कि तट के पास डीजल 138 रुपये प्रति लीटर तक बेचा जा रहा है। अगर ऐसे ही 10 दिन और चलता रहा तो स्थिति यह होगी की काम बंद ही करना पड़ेगा। बता दें कि अगर मछुआरों का काम ज्यादा प्रभावित होता है तो इसका असर महाराष्ट्र और गोवा दोनों राज्यों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

ट्रंप प्रशासन के निर्देश पर सैटेलाइट इमेजरी बंद, क्या ईरान के हमलों में हुए नुकसान को छिपा रहा है अमेरिका

वॉशिंगटन प्लेनेट लैब्स एक सैटेलाइट इमेजिंग कंपनी है जो सरकारों, कंपनियों और मीडिया कंपनियों को उपग्रह से ली गई तस्वीरें बेचता है। उसके ताजा फैसले को लेकर पेंटागन ने कहा कि 'वह इंटेलिजेंस से जुड़े मामलों पर टिप्पणी नहीं करता है।' ईरान-इजरायल युद्ध की तस्वीरें जारी नहीं करेगा प्लेनेट लैब्स वॉशिंगटन: सैटेलाइट इमेजिंग कंपनी प्लेनेट लैब्स ने बयान जारी करते हुए कहा है कि वह अमेरिकी सरकार के अनुरोध का पालन करते हुए ईरान और पश्चिम एशिया के संघर्ष वाले क्षेत्र की तस्वीरें अनिश्चित काल के लिए रोक रही है। कैलिफोर्निया स्थित प्लेनेट लैब्स ने अपने ग्राहकों को भेजे एक ईमेल में इस फैसले की घोषणा की है। इसने बताया है कि अमेरिकी सरकार ने सैटेलाइट इमेज देने वाली सभी कंपनियों से कहा है कि वे संघर्ष वाले क्षेत्र की तस्वीरें जारी करना अनिश्चित काल के लिए रोक दें। प्लेनेट लैब्स ने पिछले महीने ही पश्चिम एशिया की तस्वीरें जारी करने पर 14 दिनों की रोक लगा दी थी और अब उसे बढ़ा दिया गया है। कंपनी ने उस दौरान कहा था कि इस कदम का मकसद विरोधियों को इन इमेज का इस्तेमाल करके अमेरिका और उसके सहयोगियों पर हमला करने से रोकना है। प्लेनेट लैब्स ने कहा कि वह 9 मार्च से पहले की तस्वीरों को जारी नहीं करेगा और उसे उम्मीद है कि यह नीति तब तक लागू रहेगी जब तक संघर्ष समाप्त नहीं हो जाता। आपको बता दें कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमले की शुरूआत की थी। इसके बाद ईरानी मिसाइलों ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमलों की शुरूआत की थी। प्लेनेट लैब्स ईरान-अमेरिका युद्ध की तस्वीरें जारी नहीं करेगा ईरान के मिसाइल हमलों में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर और बहरीन जैसे देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। विरोधियों का कहना है कि ईरान के मिसाइल हमलों में अमेरिका को इतना ज्यादा नुकसान हुआ है कि वो नहीं चाहता कि तस्वीरें बाहर आएं। इसीलिए ट्रंप प्रशासन ने तस्वीरों के जारी करने पर रोक लगा दी है।आपको बता दें कि सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के मिलिट्री इस्तेमाल में टारगेट की पहचान, हथियारों को गाइड करना, मिसाइल को ट्रैक करना और कम्युनिकेशन शामिल हैं। कुछ स्पेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान कमर्शियल इमेजिंग का इस्तेमाल कर सकता है, जिसमें अमेरिका के दुश्मनों से मिली तस्वीरें भी शामिल हैं। सैटेलाइट तस्वीरें उन पत्रकारों और मिलिट्री एक्सपर्ट्स की भी मदद करती हैं जो उन जगहों का अध्ययन कर रहे हैं जहां पहुंचना मुश्किल है। सैटेलाइट इमेजिंग कंपनी प्लेनेट लैब्स क्या है? प्लेनेट लैब्स एक सैटेलाइट इमेजिंग कंपनी है जो सरकारों, कंपनियों और मीडिया कंपनियों को उपग्रह से ली गई तस्वीरें बेचता है। उसके ताजा फैसले को लेकर पेंटागन ने कहा कि 'वह इंटेलिजेंस से जुड़े मामलों पर टिप्पणी नहीं करता है।' प्लेनेट लैब्स ने कहा है कि वो ऐसी तस्वीरें जारी करेगा जो संवेदनशील ना हों और जिनसे जोखिम ना बढ़े। प्लेनेट लैब्स सैटेलाइट से पृथ्वी की तस्वीरें लेता है खासकर जिन इलाकों में संघर्ष छिड़ा हो या प्राकृतिक आपदा आई हो। यह दुनिया के सबसे बड़े अर्थ-इमेजिंग सैटेलाइट बेड़े का संचालन करती है जिसमें लगभग 200 सक्रिय उपग्रह शामिल हैं। प्लैनेट लैब्स भारत में भी सक्रिय है और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर भूमि उपयोग और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में डेटा सहायता प्रदान करती है।

प्रधानमंत्री ने घुसपैठ और बदलती डेमोग्राफी पर जताई चिंता, कहा पश्चिम बंगाल में अब टीएमसी का भय नहीं बीजेपी का भरोसा चलेगा

पश्चिम बंगाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में रैली को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिगेड ग्राउंड की ऐतिहासिक तस्वीरें, जनसैलाब, जनता का उत्साह और जुनून यह दिखाता है कि पश्चिम बंगाल में बदलाव का माहौल बन चुका है. उन्होंने कहा कि इस रैली के बाद तृणमूल कांग्रेस का 'सिंडिकेट' घबराया हुआ है और जनता ने बदलाव पर मुहर लगा दी है. प्रधानमंत्री ने कहा कि हेलीपैड से लेकर सभा स्थल तक उन्होंने जो माहौल देखा, वह अभूतपूर्व था. उन्होंने कहा कि ऐसा उत्साह कि बड़े-बड़े रोड शो भी फीके पड़ जाएं. पहले भी इस मैदान में आए हैं, लेकिन इस बार का जनसमर्थन सारे रिकॉर्ड तोड़ रहा है. उन्होंने कहा कि यह भीड़ और समर्थन नए बंगाल और उज्ज्वल भविष्य के लिए जनता के विश्वास को दर्शाता है. प्रधानमंत्री ने बंगाल के लोगों का आभार जताते हुए कहा कि वे इस आशीर्वाद के लिए सिर झुकाकर प्रणाम करते हैं. टीएमसी का भय बनाम बीजेपी का भरोसा प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस बार चुनाव में दो विकल्प साफ हैं. एक ओर टीएमसी का भय. दूसरी ओर बीजेपी का भरोसा. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि टीएमसी में 'कटमनी' और भ्रष्टाचार का डर है. बीजेपी विकास को तेज रफ्तार देने का भरोसा देती है. घुसपैठ और डेमोग्राफी का मुद्दा प्रधानमंत्री ने कहा कि एक तरफ घुसपैठ कराकर विदेशियों को बसाने का खतरा है. दूसरी तरफ बीजेपी घुसपैठ रोकने और बाहर करने का भरोसा देती है. उन्होंने यह भी कहा कि बदलती जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) के कारण लोगों को अपनी ही जमीन पर असुरक्षा का डर है. कानून, सुरक्षा और कार्रवाई की बात प्रधानमंत्री ने कहा कि मतदान के दिन लोगों को डराने की कोशिश की जाएगी, लेकिन जनता को कानून पर भरोसा रखना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि चुनाव के बाद टीएमसी के 'पापों' का पूरा हिसाब होगा और कानून अपना काम करेगा, चाहे कोई कितना भी बड़ा व्यक्ति क्यों न हो. उन्होंने कहा कि बंगाल में लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान नहीं किया जा रहा. उन्होंने मालदा की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यह कानून व्यवस्था की खराब स्थिति को दिखाता है. महिलाओं और विकास पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बंगाल शक्ति की पूजा की भूमि है और बीजेपी महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए काम करेगी. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने महिलाओं तक मूल सुविधाएं पहुंचाई हैं और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के प्रयास किए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को राजनीति में अधिक भागीदारी देने के लिए संसद और विधानसभाओं में आरक्षण का कानून बनाया गया है, जिससे आने वाले चुनावों में महिलाओं को फायदा मिलेगा. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि लंबे समय से लंबित इस अधिकार को लागू किया जाए और महिलाओं की भागीदारी को और मजबूत किया जाए. कभी सबसे आगे था बंगाल, अब पीछे क्यों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक समय बंगाल देश के सबसे विकसित राज्यों में गिना जाता था. व्यापार, उद्योग, कला और संस्कृति हर क्षेत्र में बंगाल अग्रणी था. लेकिन पहले वामपंथी शासन और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस के दौर ने इस विकास की चमक को धीरे-धीरे खत्म कर दिया. उन्होंने कहा कि पहले बंगाल के लोग देश के औसत से ज्यादा कमाते थे, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि यहां आम लोगों की आय देश के औसत से भी कम हो गई है. उनका कहना था कि जहां देश के बाकी राज्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, वहीं टीएमसी ने बंगाल को पीछे धकेल दिया है. इंडस्ट्री बंद, पलायन बढ़ा प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि जहां देश के दूसरे राज्यों में नए इंडस्ट्री लग रहे हैं, वहीं बंगाल से फैक्ट्रियां बाहर जा रही हैं. पहले लोग रोजगार के लिए बंगाल आते थे, लेकिन अब बंगाल खुद पलायन का केंद्र बन गया है. उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों में भी टीएमसी के सिंडिकेट का कब्जा है और एसएससी शिक्षक भर्ती घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें टीएमसी के मंत्री और विधायक तक शामिल थे. उन्होंने आरोप लगाया कि कट मनी और भ्रष्टाचार के कारण युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है. विकास योजनाएं अटकी, बुनियादी सुविधाएं अधूरी प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चुनाव के समय टीएमसी बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदलती. कई योजनाएं अटकी हुई हैं, जमीन के मामले लटके हैं और लोगों तक बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं. उन्होंने मालदा, बालुरघाट और हाशिमारा एयरपोर्ट के विकास का जिक्र करते हुए कहा कि ये परियोजनाएं लंबे समय से अटकी हैं क्योंकि राज्य सरकार बाधाएं डाल रही है. उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण दिनाजपुर और अलीपुरद्वार जैसे जिले अब भी मेडिकल कॉलेज के लिए इंतजार कर रहे हैं. केंद्र की योजनाओं में भी बाधा का आरोप प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने चाय बागान के श्रमिकों के लिए योजनाएं शुरू कीं, लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें भी लागू नहीं होने दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि जनजातीय समाज को भी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने उत्तर बंगाल के विकास के लिए बनाए गए 'उत्तर कन्या' का जिक्र करते हुए कहा कि इसके लिए जो पैसा रखा गया था, वह भी खर्च नहीं किया गया और विकास का वादा अधूरा रह गया. उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि टीएमसी के अन्याय और धोखे की सूची बहुत लंबी है और इसका असर पूरे बंगाल के विकास पर पड़ा है.

संकट के बीच नेपाल में बड़ा फैसला: सप्ताह में दो दिन सरकारी छुट्टी घोषित

नेपाल पड़ोसी देश नेपाल इस वक्त एक गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार हो रही भारी गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने नेपाल सरकार की नींद उड़ा दी है। इस आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए नेपाल सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर फैसला किया है कि अब से देश में हफ्ते में दो दिन (शनिवार और रविवार) को पूरी तरह से सरकारी छुट्टी रहेगी। इस कड़े फैसले का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर वाहनों की आवाजाही को कम करना और पेट्रोल-डीजल की खपत में भारी कटौती करना है। हफ्ते में केवल पांच दिन ही खुलेंगे सरकारी कार्यालय, बैंक और अन्य सार्वजनिक संस्थान नेपाल में आम तौर पर पारंपरिक रूप से सिर्फ शनिवार को ही साप्ताहिक अवकाश होता था और रविवार को वर्किंग डे माना जाता था। लेकिन नई व्यवस्था के तहत अब सरकारी कार्यालय, बैंक और अन्य सार्वजनिक संस्थान हफ्ते में केवल पांच दिन ही खुलेंगे। काम का कोई नुकसान न हो और आम जनता को परेशानी न उठानी पड़े, इसके लिए सरकार ने बाकी पांच दिनों में ऑफिस की टाइमिंग बढ़ाने का भी खाका तैयार किया है। सरकार का सीधा सा गणित है कि दफ्तर बंद रहने से सड़कों पर गाड़ियां कम निकलेंगी, जिससे हर महीने करोड़ों रुपये का ईंधन बचेगा। यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू किया जा रहा है। विदेशी आय घटने के कारण नेपाल का खजाना तेजी से खाली हुआ इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी और मुख्य वजह नेपाल का खाली होता विदेशी मुद्रा भंडार है। नेपाल अपनी जरूरत का 100 प्रतिशत पेट्रोलियम पदार्थ भारत और अन्य देशों से आयात करता है, जिसका भुगतान उसे अमेरिकी डॉलर में करना पड़ता है। हाल के महीनों में आयात के बिल बढ़ने और पर्यटन व रेमिटेंस से होने वाली विदेशी आय घटने के कारण नेपाल का खजाना तेजी से खाली हुआ है। नेपाल ऑइल कॉर्पोरेशन पहले ही भारी घाटे में चल रहा है और उस पर करोड़ों का कर्ज है। ऐसे में, ईंधन की खपत को बलपूर्वक कम करना ही सरकार के पास सबसे त्वरित और कारगर उपाय बचा था। कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में जो बेतहाशा वृद्धि हुई है, उसका सीधा असर नेपाल जैसी छोटी और आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है। नेपाल के केंद्रीय बैंक (नेपाल राष्ट्र बैंक) ने भी सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर विदेशी मुद्रा को नहीं बचाया गया, तो भविष्य में दवाइयों और खाने-पीने जैसी जरूरी चीजों का आयात भी मुश्किल हो जाएगा। श्रीलंका में हाल ही में जो आर्थिक त्रासदी देखने को मिली है, नेपाल उससे सबक लेते हुए पहले ही एहतियाती कदम उठा रहा है। अन्य प्रशासनिक खर्चों में भारी कमी आएगी सरकार को उम्मीद है कि 2 दिन की छुट्टी से न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि बिजली और दफ्तरों में होने वाले अन्य प्रशासनिक खर्चों में भी भारी कमी आएगी। इसके अलावा, प्राइवेट सेक्टर से भी अपील की गई है कि वे भी अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम या दो दिन की छुट्टी का विकल्प दें, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा की बचत की जा सके। यह नेपाल के लिए एक कड़ा इम्तिहान है और आने वाले कुछ महीने देश के आर्थिक भविष्य की दिशा तय करेंगे। अर्थशास्त्रियों ने इसे "कड़वी जरूरी दवा" बताया नेपाल सरकार के इस फैसले पर जनता और विशेषज्ञों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। अर्थशास्त्रियों ने इसे "कड़वी लेकिन जरूरी दवा" बताया है, जो विदेशी मुद्रा बचाने में मददगार साबित होगी। वहीं, आम जनता और व्यापारियों का एक वर्ग चिंतित है; उनका मानना है कि लगातार दो दिन दफ्तर बंद रहने से प्रशासनिक काम धीमे हो जाएंगे और दूर-दराज से आने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। नेपाल का वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक एक संयुक्त समीक्षा बैठक करेंगे इस फैसले के लागू होने के ठीक एक महीने बाद नेपाल का वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक एक संयुक्त समीक्षा बैठक करेंगे। इस 'फालोअप' रिपोर्ट में यह जांचा जाएगा कि दो दिन की छुट्टी के फॉर्मूले से असल में कितने बैरल पेट्रोल-डीजल की खपत कम हुई है और इससे कितने डॉलर की विदेशी मुद्रा बची है। अगर नतीजे सकारात्मक रहे, तो इसे लंबे समय तक लागू रखा जा सकता है। नेपाल के अंदर 'लोकल टूरिज्म' (घरेलू पर्यटन) को बढ़ावा मिल सकता है नेपाल की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर करती है। इस नए नियम का एक पहलू यह भी है कि लगातार दो दिन की छुट्टी मिलने से नेपाल के अंदर 'लोकल टूरिज्म' को बढ़ावा मिल सकता है। लोग वीकेंड पर घूमने निकल सकते हैं, जिससे स्थानीय होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, बशर्ते लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें।  

इजरायल के लिए एअर इंडिया फ्लाइट्स पर ब्रेक, 31 मई तक नहीं होगी उड़ानें

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में चल रही जंग के बीच एअर इंडिया ने इजरायल के लिए अपनी उड़ानें 31 मई तक निलंबित कर दी हैं। अधिकांश प्रमुख एयरलाइनों ने तेल अवीव मार्ग पर अपनी सेवाएं सस्पेंड की हुई हैं। केवल इजरायली कैरियर जैसे ईएल एएल, इस्त्रा एयर, आर्किया और एयर हाइफा ही कड़ी पाबंदियों के तहत संचालन कर रहे हैं। दिल्ली-तेल अवीव मार्ग पर उड़ानें 31 मई तक निलंबित एअर इंडिया के एक अधिकारी ने कहा कि एयरलाइन ने नई दिल्ली-तेल अवीव मार्ग पर उड़ानें 31 मई तक निलंबित कर दी हैं। उड़ानों के निलंबन ने इजरायल में रहने वाले 40,000 से अधिक भारतीयों के बीच चिंता बढ़ा दी है, जो क्षेत्र में बढ़ते तनाव से बचने या पेशेवर कारणों से भारत यात्रा करना चाहते हैं। इजरायल छोड़ने वालों को जॉर्डन या मिस्त्र जाना होगा इजरायल छोड़ने के इच्छुक भारतीयों को भूमिगत सीमा पार कर जॉर्डन या मिस्त्र जाना होगा। तेल अवीव में भारतीय मिशन उन लोगों की सहायता कर रहा है जो विभिन्न तरीकों से यात्रा करना चाहते हैं। दूतावास भारतीय समुदाय के साथ नियमित संपर्क बनाए हुए है। अंबेसडर जेपी सिंह और दूतावास की टीम ने शनिवार को इजरायल में भारतीय श्रमिकों और छात्रों के साथ वर्चुअल चर्चा की और उनकी चिंताओं-परेशानियों को सुना। साथ ही उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।

दुश्मन के इलाके में 48 घंटे, पास में सिर्फ एक पिस्टल, जानें कैसे कर्नल रैंक के अमेरिकी कर्नल ने ईरान के पहाड़ों में काटी रातें

 वॉशिंगटन अमेरिका को उस समय तब बड़ी सफलता मिली, जब उसने ईरान में फाइटर जेट से जाने बचाने को कूदे अपने एक पायलट को सफलतापूर्वक बचा लिया। यह पायलट अमेरिकी फाइटर जेट से तब नीचे कूद गया था, जब ईरान ने युद्ध के बीच उसके जेट पर हमला कर दिया था। इससे पहले, अमेरिका एक और पायलट को बचा चुका है। अमेरिकी सेना ने कई घंटों के सर्च ऑपरेशन और घातक हथियारों व दर्जनों विमानों के इस्तेमाल के बाद अपने पायलट को सकुशल बचाया। इस दौरान, ईरानी सैनिक और आम लोग भी उस पायलट की खोज में लगे हुए थे। यहां तक कि ईरान ने उसे पकड़ने पर इनाम देने की भी घोषणा की थी। बचाने के समय अमेरिकी सेना पर हमले भी किए गए। अमेरिकी पायलट ईरान में लगभग दो दिनों तक फंसा रहा और उस दौरान उसके पास सुरक्षा के लिए दी जाने वाली एक पिस्टल और अन्य कुछ चीजें ही थीं। अमेरिकी सेना ने उसे उसकी लोकेशन के जरिए खोज निकाला। पहाड़ी इलाके में ऊंची जगह छिप गया था पायलट अमेरिकी पायलट लगभग 48 घंटे तक ईरान के ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों में छिपा रहा। इस दौरान उसके पास पिस्टल, एक बीकन ही थी। उसके पास सिर्फ एक उम्मीद थी कि शायद अमेरिकी सेना का बचाव दल उसके पास पहुंच जाएगा और उसे बचा लेगा। न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया, ''वह पायलट दुश्मन के इलाके में लगभग दो दिनों तक जीवित रहा, और उन ईरानी सेनाओं से बचता रहा जो सक्रिय रूप से उसकी तलाश कर रही थीं।'' फाइटर जेट से इजेक्ट करने के बाद पायलट एक ऐसी जगह गिरा, जहां पर पहाड़ी इलाका था और वह ऊंची जगह जाकर छिप गया। अमेरिकी सेनाओं के संपर्क में रहने और बचाव अभियान को दिशा देने में मदद करने के लिए उसने एक डिस्ट्रेस बीकन, जीपीएस ट्रैकर आदि का इस्तेमाल किया। सीआईए ने बताई लोकेशन, 24 घंटे रही नजर वहीं, बीबीसी के अनुसार, अमेरिका द्वारा किए गए बचाव अभियान के सटीक हालात अभी भी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन इस अभियान से परिचित एक व्यक्ति ने इसे दक्षिणी ईरान में चलाया गया एक विशाल लड़ाकू खोज और बचाव अभियान बताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि पायलट की लोकेशन पर अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी दिन-रात 24 घंटे नजर रख रहे थे और लगातार बचाव अभियान की योजना बना रहे थे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया संस्थान सीबीएस को यह भी बताया कि इस बचाव अभियान में सीआईए ने एक अहम भूमिका निभाई। उसने पहाड़ की एक दरार में छिपे उस पायलट को ट्रैक किया और उसकी सटीक लोकेशन पेंटागन को दी। ट्रंप ने किया था पायलट को बचाने का ऐलान इस सर्च ऑपरेशन की अहमियत इसी बात से समझी जा सकती है कि अमेरिका ने इसे उस देश में अंजाम दिया, जिससे वह अभी युद्ध में है। इसी वजह से खुद ट्रंप की इस अभियान पर नजर थी। जब पायलट को बचा लिया गया तो उन्होंने ही इसका ऐलान भी किया। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ''हमने उसे बचा लिया! मेरे प्यारे अमेरिकी साथियों, पिछले कुछ घंटों में, अमेरिकी सेना ने अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी खोज और बचाव अभियानों में से एक को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। यह अभियान हमारे एक बेहतरीन क्रू सदस्य अधिकारी के लिए था, जो एक बहुत सम्मानित कर्नल भी हैं, और मुझे आपको यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि अब वह पूरी तरह से सुरक्षित और स्वस्थ हैं। यह बहादुर योद्धा ईरान के खतरनाक पहाड़ों में दुश्मन की सीमा के पीछे फंसा हुआ था, और हमारे दुश्मन उसका लगातार पीछा कर रहे थे, जो हर घंटे उसके और करीब आते जा रहे थे। लेकिन वह कभी भी सचमुच अकेला नहीं था, क्योंकि उसके कमांडर-इन-चीफ, युद्ध सचिव, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन और उसके साथी योद्धा दिन-रात 24 घंटे उसकी लोकेशन पर नजर रख रहे थे, और उसे बचाने के लिए पूरी लगन से योजना बना रहे थे।'' पायलट को बचाने के लिए भेजे गए दर्जनों विमान अमेरिकी सेना ने पायलट को वापस लाने के लिए दर्जनों विमान भेजे, जो दुनिया के सबसे घातक हथियारों से लैस थे। ट्रंप ने कहा कि उसे कुछ चोटें आई हैं, लेकिन वह जल्द ही पूरी तरह ठीक हो जाएगा। यह चमत्कारिक खोज और बचाव अभियान कल एक और बहादुर पायलट के सफल बचाव के अतिरिक्त है, जिसकी हमने कल पुष्टि नहीं की थी, क्योंकि हम अपने दूसरे बचाव अभियान को खतरे में नहीं डालना चाहते थे। सैन्य इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि दो अमेरिकी पायलटों को दुश्मन के इलाके के काफी अंदर से, अलग-अलग अभियानों में बचाया गया है। हम कभी भी किसी अमेरिकी योद्धा को पीछे नहीं छोड़ेंगे। यह तथ्य कि हम इन दोनों अभियानों को बिना किसी एक भी अमेरिकी सैनिक के मारे जाने या घायल हुए बिना सफलतापूर्वक पूरा कर पाए, यह एक बार फिर साबित करता है कि हमने ईरान के आसमान पर ज़बरदस्त हवाई वर्चस्व और श्रेष्ठता हासिल कर ली है। यह एक ऐसा क्षण है जिस पर सभी अमेरिकियों, चाहे वे रिपब्लिकन हों, डेमोक्रेट हों या कोई और, को गर्व होना चाहिए और उन्हें एकजुट होकर इसका समर्थन करना चाहिए। हमारे पास सचमुच दुनिया के इतिहास की सबसे बेहतरीन, सबसे पेशेवर और सबसे घातक सेना है।'' ईरान ने कैसे मार गिराया फाइटर जेट दो सदस्यों को ले जा रहा एफ-15E जेट दक्षिणी ईरान के ऊपर से उड़ रहा था, तभी शुक्रवार सुबह (स्थानीय समय के अनुसार) उसे मार गिराया गया। तेहरान के अनुसार, इस विमान को ईरान के नए और आधुनिक हवाई रक्षा तंत्र द्वारा मार गिराया गया। ईरान ने कहा कि अमेरिका के इस दावे के बावजूद कि यह तंत्र नष्ट हो चुका है, यह अब भी पूरी तरह से प्रभावी है। इस युद्ध के दौरान, और 2003 में इराक पर हुए आक्रमण के बाद से, यह पहला मौका था जब अमेरिका का कोई विमान मार गिराया गया हो। वॉशिंगटन ने तुरंत एक बचाव अभियान शुरू किया। हालांकि, अमेरिकी सेना ने विमान दुर्घटना के कुछ घंटों बाद ही चालक दल के एक सदस्य को बचा लिया था, लेकिन दूसरे पायलट, जिसके कर्नल रैंक का वेपन सिस्टम ऑफिसर … Read more