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नंदीग्राम आंदोलन से चमके शुभेंदु अधिकारी, अब भाजपा ने सौंपी बंगाल की कमान

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान हो गया है। भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी राज्य के अगले सीएम होंगे। कोलकाता में आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में शुभेंदु के नाम पर मुहर लगी। उनके नाम पर आठ प्रस्ताव और समर्थन प्राप्त हुए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुभेंदु के नाम का ऐलान किया और कहा कि दूसरे नाम के लिए भी विधायकों को पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन सभी से सिर्फ शुभेंदु का ही नाम मिला। सीएम पद की रेस में शुभेंदु ही सबसे आगे चल रहे थे। कई अन्य नामों पर भी अटकलें लगीं, लेकिन शुभेंदु का ही पलड़ा भारी माना जा रहा था। कांग्रेस से की शुरुआत शुभेंदु अधिकारी का पूरा परिवार राजनीति से जुड़ा है। उनके पिता शिशिर अधिकारी दिग्गज नेता रह चुके हैं और मनमोहन सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे। शुभेंदु के एक भाई सांसद और दूसरे विधायक हैं। शुभेंदु ने अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की और 1995 में कांथी नगरपालिका में पार्षद चुने गए थे। जब ममता बनर्जी ने 1997 में कांग्रेस से अलग होकर टीएमसी बनाई, तब शुभेंदु अधिकारी भी उनके साथ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसके बाद, 2006 में, अधिकारी कांथी दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुने गए। उसी वर्ष वे कांथी नगरपालिका के अध्यक्ष भी बने। नंदीग्राम आंदोलन में निभाई अहम भूमिका साल 2007 में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन की अगुवाई की। दरअसल, बंगाल की तत्कालीन लेफ्ट सरकार ने एसईजेड स्थापित करने के लिए एक गांव में दस हजार एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने की योजना बनाई थी। ममता बनर्जी ने इसके खिलाफ आंदोलन किया और उसमें शुभेंदु अधिकारी ने उनका साथ दिया। पूरे आंदोलन के दौरान अधिकारी की अहम भूमिका रही। इसी आंदोलन से ममता बनर्जी की पहली बार सरकार पश्चिम बंगाल में बनी। शुभेंदु की गिनती ममता के करीबी नेताओं में की जाने लगी। वह ममता सरकार में मंत्री भी रहे। इसके अलावा, तमलुक लोकसभा सीट से 2009 और 2014 में सांसद बने। छह साल पहले भाजपा में हुए शामिल तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक के बढ़ते प्रभाव की वजह से शुभेंदु नाराज हुए और साल 2020 में उन्होंने पार्टी छोड़ दी। 17 दिसंबर 2020 को उन्होंने टीएमसी की सदस्यता से इस्तीफा दिया। 19 दिसंबर 2020 को, उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा ज्वाइन कर ली। धीरे-धीरे वह अमित शाह के भरोसेमंद नेताओं की लिस्ट में शामिल हो गए। 2021 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु ने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराकर सभी को चौंका दिया। भले ही भाजपा को 77 सीटें मिलीं, लेकिन पार्टी का जनाधार राज्य में लगातार बढ़ता गया। 2026 विधानसभा चुनाव में शुभेंदु ने भवानीपुर से भी चुनाव लड़ा और ममता बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से पराजित कर दिया। अब वे राज्य के अगले व भाजपा के पश्चिम बंगाल में पहले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।

मौसम का कहर: 22 राज्यों में बारिश, उत्तराखंड में तूफान की चेतावनी

नई दिल्ली  भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD)ने देश के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक आंधी, तूफान और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। आईएमडी के मुताबिक, उत्तराखंड में आज 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली आंधी चलने की संभावना है। इसकी रफ्तार 70 किमी तक जा सकती है। इसके बाद 11 से 13 मई के दौरान जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। हालांकि, इस दौरान बिजली और तेज हवाओं की संभावना है। मौसम विभाग का कहना है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में 12 और 13 मई को, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 11 मई को बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। इसके अलावा, असम, मेघालय और त्रिपुरा में 9 मई तक गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश होगी। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा 8 मई की सुबह जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 12 और 13 मई को अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 9 मई तक बारिश जारी रहेगी। इस दौरान भीषण आंधी की संभावना है। आपको बता दें कि बिहार और ओडिशा में 11 मई तक दौरान गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ छिटपुट बारिश होने के आसार हैं। आईएमडी का कहना है कि मध्य प्रदेश में भी आज आंधी और बारिश की संभावना है। वहीं, छत्तीगढ़ में अगले 3 दिनों तक गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में अगले 3 दिनों तक मौसम खराब रहने और तेज हवाएं चलने का अनुमान है। केरल और तमिलनाडु में अगले 7 दिनों के दौरान छिटपुट स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, कर्नाटक में आज भारी बारिश हो सकती है। तटीय कर्नाटक में 10 और 11 मई को बिजली कड़कने के साथ बारिश का अनुमान है।

जानिए कौन-कौन नेता बन सकते हैं बंगाल में BJP के पहले मंत्रिमंडल में

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य मुख्यमंत्री कौन होगा और नया मंत्रिमंडल कैसा होगा. 294 सीटों वाली विधानसभा में 207 सीटें जीतकर बीजेपी ने न केवल ममता बनर्जी के 15 साल के सियासी किले को ढहाया है बल्कि बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत भी की है।  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की देखरेख में शुक्रवार शाम को होने वाली विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री के नाम पर फाइनल मुहर लगनी है तो साथ ही लोगों की निगाहें मंत्रिमंडल के स्वरूप पर भी है।  बंगाल की पहली बार बनने वाली बीजेपी सरकार में सीएम के साथ डिप्टीसीएम भी होंगे या फिर मुख्यमंत्री रहेंगे. इसके अलावा बंगाल मंत्रिमंडल कैसा हो सकता है और कौन से चेहरे इसमें शामिल हो सकते हैं?   बंगाल कैसा होगा मंत्रिमंडल का स्वरूप? बंगाल में बीजेपी का मंत्रिमंडल 'सोशल इंजीनियरिंग' और 'क्षेत्रीय संतुलन' का एक बेहतरीन संतुलन बनाने की कवायद है. बीजेपी का टारगेट उत्तर बंगाल से लेकर जंगलमहल और मतुआ समुदाय से लेकर शहरी मध्यवर्ग तक प्रतिनिधित्व देकर साधने का है. उत्तर बंगाल, जहां पर पार्टी का प्रदर्शन शानदार रहा है, जंगलमहल और दक्षिण बंगाल के प्रभावी जिलों को विशेष प्राथमिकता दी सकती है।  बीजेपी के मंत्रिमंडल में पुराने अनुभवी नेताओं के साथ-साथ उन युवा चेहरों को भी जगह दी जाएगी जिन्होंने जमीनी स्तर पर टीएमसी के खिलाफ लड़ाई लड़ी है. इसके अलावा बीजेपी की जीत में महिला और दलित कार्ड का अहम रोला था. ऐसे में बंगाल सरकार के मंत्रिमंडल में महिलाओं और अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) के नेताओं की बड़ी भागीदारी बीजेपी दे सकती है।  बंगाल की नई कैबिनेट को इस तरह बनाने का प्लान है ताकि वैचारिक प्रतिबद्धता और जमीनी स्तर पर लोगों को जोड़े रखा जा सके. बीजेपी और संघ के बीच हाल ही में हुई समन्वय बैठकों में आरएसएस ने वैचारिक एकता को प्राथमिकता देने पर ज़ोर दिया था.बीजेपी ऐसे नेताओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिनका संघ के साथ काम करने का लंबा इतिहास रहा है।  पार्टी ज़्यादा से ज़्यादा अनुभवी नेताओं को कैबिनेट में शामिल करने की है. इस तरह से बीजेपी की बंगाल में गठन होने वाली कैबिनेट में पार्टी के पुराने नेताओं और राजनीति में नए आए चेहरों का संतुलन बनाने की है।  मंत्री बनने की रेस में कौन-कौन नेता शामिल हैं?  भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराने के बाद शुभेंदु अधिकारी का कद पार्टी में सबसे ऊपर है. अगर वे मुख्यमंत्री नहीं बनते हैं, तो भी वे सरकार के सबसे शक्तिशाली गृह या वित्त मंत्री बनाया जा सकता है, क्योंकि उनके पास प्रशासन का लंबा अनुभव है. इसके सामिक भट्टाचार्य बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हैं और एक प्रबुद्ध चेहरा, जो मंत्री पद की रेस में है।  डिजाइनर से नेता बनीं अग्निमित्रा पॉल ने महिला वोट बैंक को साधने में बड़ी भूमिका निभाई है. ऐसे में सीएम नहीं बनती है तो मंत्री बनना लगभग उनका तय है.  बीजेपी के दिग्गज नेता दिलीप घोष के पास सांगठनिक अनुभव भी सरकार के काम आ सकता है. ऐसे में घोष को मंत्री बनाया जा सकता है।  पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री निशीथ प्रमाणिक, बैरकपुर के विधायक अर्जुन सिंह, मुर्शिदाबाद से दो बार विधायक रह चुके गौरी शंकर घोष, वीएचपी की बंगाल इकाई के पूर्व अध्यक्ष श्रुति शेखर गोस्वामी, पूर्व सांसद रूपा गांगुली, वकील कौस्तव बागची, दीपक बर्मन, सजल घोष, इंद्रनील खान और जोएल मुर्मू भी कैबिनेट की रेस में शामिल हैं।    बीजेपी से पहली बार विधायक बने लोगों में आरजी कर मामले की पीड़ित की मां रत्ना देबनाथ,भारत सेवाश्रम संघ के भिक्षु उत्पल महाराज (जिन्हें राजनीति में आने के कारण संघ से निकाल दिया गया था), पूर्व IPS अधिकारी राजेश कुमार और पूर्व एनएसजी कमांडो दीपंजन चक्रवर्ती शामिल हैं।  बीजेपी कैसे साधेगी सामाजिक समीकरण ?  बंगाल में मतुआ वोट बैंक बीजेपी की जीत का बड़ा आधार रहा है. इस समुदाय से कम से कम 2-3 मंत्री बनाए जा सकते हैं. असीम सरकार या मुकुटमणि अधिकारी जैसे मतुआ समाज के नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है. इसी तरह से उत्तर बंगाल बीजेपी का गढ़ रहा. यहां से निशिथ प्रामाणिक और दीपक बर्मन को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।  बांकुड़ा, पुरुलिया और झाड़ग्राम इलाके से किसी बड़े आदिवासी नेता को कैबिनेट में शामिल किया जाएगा ताकि 'वनवासी' कार्ड को मजबूती मिले, इसमें ज्योतिरमय सिंह महतो या उनके किसी करीबी विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।  शाह के 'मास्टर प्लान' में कौन बैठेगा फिट अमित शाह की रणनीति स्पष्ट है कि बंगाल में सरकार ऐसी होनी चाहिए जो 2026 के सियआसी जनादेश को 2029 के लोकसभा चुनाव और आगे तक बनाए रखे. मंत्रियों के चयन में उनकी व्यक्तिगत छवि पर विशेष ध्यान दिया जा कता है. कोलकाता और सिलीगुड़ी जैसे शहरी केंद्रों के विकास के लिए विजनरी नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।  बंगाल में बीजेपी की पहली सरकार केवल मंत्रियों का समूह नहीं, बल्कि पार्टी का वह 'बंगाल मॉडल' होगी, जिसका वादा उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान किया था. अब देखना यह है कि राजभवन में होने वाले शपथ ग्रहण में अमित शाह की लिस्ट में किसका-किसका नाम चमकता है।  बंगाल में शपथ ग्रहण का कार्यक्रम 9 मई को रखा गया है. बताया जा रहा है कि 9 मई को रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती (पचीसे बैसाख) के शुभ अवसर पर यह नई सरकार शपथ लेगी, जो बंगाली अस्मिता से जुड़ने का एक बड़ा संदेश देने की रणनीति है। 

राज्य कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: अरुणाचल प्रदेश सरकार ने बढ़ाया महंगाई भत्ता

ईटानगर केंद्र सरकार ने अप्रैल महीने में अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2 फीसदी की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 60 फीसदी हो गया है.केंद्र सरकार के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी के बाद अब राज्‍य सरकारें भी अपने कर्मचारियों को तोहफा देने लगी हैं।  अरुणाचल प्रदेश सरकार ने अब 7वें वेतन आयोग के तहत सेवारत कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनधारकों के लिए महंगाई राहत (DR) में दो प्रतिशत की  बढ़ोतरी का ऐलान किया है. बीते 6 मई को अरुणाचल प्रदेश ने इसका ऐलान किया।  राज्‍य सरकार पर पड़ेगा इतना बोझ  अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के एक बयान में कहा गया है कि DA और DR में बढ़ोतरी एक जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी. सरकारी बयान में कहा गया है कि मई 2026 से बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता और महंगाई राहत, मासिक वेतन और पेंशन के साथ दिया जाएगा. इससे राज्य भर में 69,248 नियमित कर्मचारी और 40,477 पेंशनभोगी लाभ मिलेगा. इस बढ़ोतरी के कारण सालान बोझ करीब 100.54 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।  किसे मिलेगा महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का लाभ?  इसके अलावा, कर्मचारियों को जनवरी से अप्रैल तक की अवधि का बकाया भी आने वाली सैलरी के साथ भेजा जाएगा. बकाया पर कुल वित्तीय बोझ करीब 33.51 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता अरुणाचल प्रदेश सरकार के तहत काम करने वाले अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों, राज्‍य सरकार में काम करने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों और राज्‍य सरकार के सभी रेगुलर कर्मचारियों को दिया जाएगा।  इस राज्‍य सरकार ने भी की है बढ़ोतरी  अरुणाचल के अलावा, अप्रैल में एक और राज्‍य सरकार ने महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का तोहफा दिया है. राजस्थान सरकार ने राज्य कर्मियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में दो प्रतिशत की वृद्धि की है. राजस्‍थान सरकार के इस फैसले से 12 लाख से ज्‍यादा कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा. सातवें वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्ता और महंगाई राहत अब 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया है और यह निर्णय एक जनवरी 2026 से प्रभावी होगा।   राज्‍य सरकार के इस फैसले से लगभग 7.02 लाख राज्य कर्मचारी और 5.44 लाख पेंशनभोगी को लाभ होगा. इस फैसले से राज्य सरकार पर लगभग 1,156 करोड़ रुपये का एक्‍स्‍ट्रा बोझ पड़ने की संभावना है। 

नया कोरोना वायरस थाईलैंड में मिला, स्वास्थ्य अधिकारियों ने जताई चिंता

बैंकाक  थाईलैंड में चमगादड़ों के अंदर एक नया कोरोना वायरस मिला है जो इंसानों को संक्रमित कर सकता है. टोक्यो यूनिवर्सिटी के वायरस एक्सपर्ट्स की टीम ने यह खोज की है. यह वायरस SARS-CoV-2 (कोविड-19 पैदा करने वाले वायरस) से मिलता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह तुरंत कोई बड़ी महामारी नहीं फैलाएगा, लेकिन भविष्य में खतरा हो सकता है. इस खोज से वैज्ञानिकों को वायरस की निगरानी बढ़ाने की चेतावनी मिली है।  टोक्यो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर केई सातो की अगुवाई वाली टीम ने थाईलैंड के चाचोएंगसाओ प्रांत में घोड़ों की नाल जैसे कान वाले चमगादड़ों (Horseshoe bats) में यह नया वायरस पाया. यह वायरस Clade B नामक ग्रुप का है. यह SARS-CoV-2 संबंधित कोरोनावायरस का नया समूह है. शोधकर्ताओं ने चमगादड़ों के नमूने लेकर लैब में टेस्ट किए. अध्ययन 6 मई 2026 को प्रतिष्ठित जर्नल 'Cell' में प्रकाशित हुआ।  इस वायरस की जेनेटिक्स कोविड-19 वायरस से काफी करीब है. प्रयोगों में पता चला कि यह मानव कोशिकाओं के ACE2 रिसेप्टर से जुड़ सकता है, यानी यह इंसानों में घुसने की क्षमता रखता है. लेकिन अच्छी बात यह है कि यह वायरस धीरे बढ़ता है और जानवरों में संक्रमण नहीं फैला पाया।  वायरस कितना खतरनाक है? प्रोफेसर केई सातो और उनकी टीम के अनुसार, यह वायरस अभी इंसानों के लिए तत्काल खतरा नहीं है. मौजूदा कोविड-19 के टीके और दवाएं इस नए वायरस के खिलाफ प्रभावी पाई गई हैं. प्रयोगशाला परीक्षणों में यह वायरस कमजोर साबित हुआ।  फिर भी वैज्ञानिक चिंतित हैं क्योंकि चमगादड़ों में वायरस लगातार बदलते रहते हैं. अगर इसमें छोटा-सा बदलाव आया तो यह ज्यादा संक्रामक और खतरनाक बन सकता है. थाईलैंड और आसपास के इलाकों में चमगादड़ों के नेटवर्क के जरिए यह वायरस युन्नान (चीन) और उत्तरी लाओस से आया हो सकता है।  प्रकृति में हजारों तरह के वायरस मौजूद हैं. चमगादड़ वायरसों के बड़े भंडार हैं. एशिया में चमगादड़ों पर लगातार निगरानी रखनी चाहिए. अभी कोई इंसान इस नए वायरस से संक्रमित होने की खबर नहीं है. फिर भी स्वास्थ्य अधिकारी सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं. अगर कोई व्यक्ति चमगादड़ों या उनके मल-मूत्र वाले इलाकों के पास जाता है तो सावधानी बरतनी चाहिए।  सीख क्या है इस खोज से? कोविड-19 महामारी के बाद पूरी दुनिया जान गई है कि वायरस कितनी तेजी से फैल सकते हैं. इस नए वायरस की खोज समय पर हुई है. इससे पहले भी थाईलैंड में RacCS203 नाम का एक और SARS-CoV-2 संबंधित वायरस मिल चुका है।  वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी खोजों से हम भविष्य की महामारियों को रोक सकते हैं. नियमित निगरानी, शोध और तैयारियां बहुत जरूरी हैं. आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जंगलों, गुफाओं या चमगादड़ों वाले इलाकों में सावधानी जरूर बरतनी चाहिए। 

तमिलनाडु में बड़ी संख्या में इस्तीफे, बंगाल की तरह 100+ अधिकारी छोड़ रहे पद

चेन्नई तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच एक बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। राज्य सरकार की पैरवी करने वाले 100 से अधिक विधि अधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। आपको बता दें कि इससे पहले पश्चिम बंगाल में भी कई अधिकारियों ने अपनी नौकरी छोड़ दी थी। वहां तृणमूल कांग्रेस को बेदखल कर भारतीय जनता पार्टी पहली बार सत्ता में आई है। तमिलनाडु में एडवोकेट जनरल पी.एस. रमन के नेतृत्व वाले इन अधिकारियों ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। दरअसल, सरकारी वकीलों और विधि अधिकारियों की नियुक्तियां काफी हद तक राजनीतिक होती हैं। परंपरा के अनुसार, जब भी राज्य में सत्ता परिवर्तन होता है या नई सरकार आने वाली होती है तो पिछली सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी पद छोड़ देते हैं ताकि नई सरकार अपनी पसंद के वकीलों को नियुक्त कर सके। अभी काम करते रहेंगे सभी वकील इस्तीफे के बावजूद, इन अधिकारियों को एक सप्ताह और पद पर बने रहने का निर्देश दिया गया है। सरकार नहीं चाहती कि अदालत में राज्य का पक्ष रखने वाला कोई न हो। सामान्य तौर पर नई सरकार अंतरिम व्यवस्था के तौर पर तीन-चार वकीलों की नियुक्ति करती है, लेकिन विजय की पार्टी (TVK) की सरकार बनने पर मचे सस्पेंस के कारण अभी तक ऐसी कोई नियुक्ति नहीं हुई है। एक विधि अधिकारी ने बताया, "राज्य को अदालत में बिना प्रतिनिधित्व के नहीं छोड़ा जा सकता, इसलिए हम तब तक काम जारी रखेंगे जब तक नई सरकार अपने अधिकारियों की नियुक्ति नहीं कर लेती।" नियम के मुताबिक, जैसे ही नई सरकार शपथ लेगी वह अपनी पार्टी से जुड़े अनुभवी वकीलों को इन महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करेगी। वर्तमान में तमिलनाडु सरकार की ओर से अदालतों में पैरवी करने वाले 100 से अधिक अधिकारियों की टीम है, जिनका भविष्य अब नई सरकार के स्वरूप पर निर्भर करता है।

ममता कैबिनेट बर्खास्त, विधानसभा पर राज्यपाल का वीटो प्रभाव

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा संवैधानिक संकट तब खड़ा हो गया, जब राज्यपाल आर.एन. रवि ने अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए मंत्रिमंडल को बर्खास्त कर दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफ़ा देने से इनकार करने के बीच, राज्यपाल ने अपनी संवैधानिक वीटो शक्ति का प्रयोग करते हुए राज्य विधानसभा को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी। यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत लिया गया। राज्यपाल के निर्देश पर मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा जारी इस आदेश के बाद, राज्य सरकार का अस्तित्व प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है। राज्यपाल के इस कड़े कदम से बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मच गई है, जिसके परिणामस्वरूप मंत्रिमंडल और विधानसभा, दोनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा हो गया, जब राज्यपाल आर. एन. रवि ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कैबिनेट को बर्खास्त कर दिया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार के बीच राज्यपाल ने संवैधानिक वीटो का इस्तेमाल करते हुए 7 राज्य विधानसभा को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी है. यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत लिया गया है. मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा राज्यपाल के निर्देशों पर जारी इस आदेश के बाद राज्य सरकार का वजूद समाप्त हो गया है. राज्यपाल के इस कड़े कदम ने बंगाल की सियासत में खलबली मचा दी है, जिससे कैबिनेट और विधानसभा दोनों तत्काल प्रभाव से भंग कर दी गई हैं।  अनुच्छेद 174(2)(b) और बंगाल का अभूतपूर्व संकट यह पूरी कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के इर्द-गिर्द घूमती है. यह अनुच्छेद राज्यपाल को राज्य विधानसभा को भंग करने की शक्ति प्रदान करता है. आमतौर पर राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर ऐसा करते हैं लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में जब सरकार और राजभवन के बीच टकराव चरम पर था, राज्यपाल ने इस वीटो जैसी शक्ति का इस्तेमाल कर ममता सरकार के अस्तित्व को ही समाप्त कर दिया. मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा जारी अधिसूचना स्पष्ट करती है कि यह निर्णय राजभवन के सीधे आदेश पर लिया गया है जो राज्य में गहरे राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध का संकेत है।  पश्चिम बंगाल गवर्नर के आदेश के मुख्‍य प्‍वाइंट्स · ऐतिहासिक बर्खास्तगी: राज्यपाल आर. एन. रवि ने ममता बनर्जी की कैबिनेट को बर्खास्त कर 7 मई, 2026 से विधानसभा भंग करने की घोषणा की है।  · संवैधानिक आधार: इस पूरी कार्रवाई को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत अंजाम दिया गया है, जो राज्यपाल को विधानसभा भंग करने का अधिकार देता है।  · अधिसूचना जारी: मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने आधिकारिक आदेश जारी कर बताया कि यह निर्णय राज्यपाल के निर्देशों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।  · संवैधानिक संकट: ममता बनर्जी द्वारा पद छोड़ने से इनकार के बाद यह कदम उठाया गया, जिससे राज्य में निर्वाचित सरकार का शासन समाप्त हो गया है।  · आगे का रास्ता: विधानसभा भंग होने के बाद अब राज्य में राष्ट्रपति शासन या जल्द चुनाव की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।  सवाल-जवाब राज्यपाल ने किस संवैधानिक शक्ति के तहत पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया है? राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया है।  पश्चिम बंगाल गवर्नर का आदेश किस तारीख से प्रभावी माना जाएगा? मुख्य सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, विधानसभा भंग करने और कैबिनेट बर्खास्त करने का यह निर्णय 7 मई, 2026 से प्रभावी हो गया है।  क्या मुख्यमंत्री की सलाह के बिना विधानसभा भंग की जा सकती है? सामान्यतः राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर काम करते हैं, लेकिन असाधारण परिस्थितियों या संवैधानिक विफलता की स्थिति में राज्यपाल अनुच्छेद 174 के तहत स्वविवेक का प्रयोग कर सकते हैं।  मुख्य सचिव की पश्चिम बंगाल के गवर्नर के आदेश में क्या भूमिका रही? मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने राज्यपाल के निर्देशों को प्रशासनिक रूप से लागू किया और विधानसभा भंग करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी की। 

गर्मी और औद्योगिक गतिविधियों से बिजली की मांग बढ़ी, इक्रा ने जताई 5-5.5% वृद्धि की संभावना

नई दिल्ली   औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों के निरंतर बढ़ने से 2026-27 में बिजली की मांग 5.0-5.5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। 2025-26 में यह वृद्धि केवल एक प्रतिशत रही थी. साख निर्धारण करने वाली एजेंसी इक्रा ने यह बात कही।  इक्रा ने बयान में कहा कि संभावित ‘एल नीनो’ के बीच सामान्य से कम वर्षा के आसार से वित्त वर्ष 2026-27 में कृषि एवं घरेलू क्षेत्रों से भी मांग को समर्थन मिलने की संभावना है. साथ ही उद्योगों तथा इलेक्ट्रिक वाहनों एवं डाटा सेंटर जैसे उभरते स्रोतों से भी मांग बढ़ेगी।  देश में तापीय बिजली संयंत्रों का ‘प्लांट लोड फैक्टर’ (पीएलएफ या क्षमता उपयोग) 2025-26 में मांग में कमी के कारण घटकर 65-66 प्रतिशत रह गया. यह 2026-27 में करीब 65 प्रतिशत पर आ सकता है. नवीकरणीय स्रोतों से उत्पादन में अच्छी वृद्धि और तापीय क्षेत्र में छह गीगावाट क्षमता वृद्धि की संभावना इसकी मुख्य वजह रहेगी।  इक्रा के उपाध्यक्ष एवं सह-समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग्स) अंकित जैन ने कहा कि भारत में तापीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश पर फिर से जोर दिया जा रहा है जबकि नवीकरणीय क्षमता तेजी से बढ़ती जा रही है।  उन्होंने साथ ही बताया कि आठ अप्रैल 2026 तक घरेलू बिजली संयंत्रों के वास्ते कोयला भंडार लगभग 19 दिन के लिए पर्याप्त था।  समूचे भारत में वितरण कंपनियों के बही-खाता घाटे में 2024-25 में 2023-24 की तुलना में सुधार हुआ. मार्च 2025 तक राज्य-स्वामित्व वाली बिजली वितरण कंपनियों का सकल ऋण घटकर 7.1 लाख करोड़ रुपये रह गया जो मार्च 2024 में 7.4 लाख करोड़ रुपये था।  वर्तमान राजस्व और लाभप्रदता को देखते हुए हालांकि इतना उच्च ऋण स्तर कंपनियों के लिए टिकाऊ नहीं है।  अप्रैल 2026 तक 28 में से 17 राज्यों में 2026-27 के लिए शुल्क आदेश जारी किए जा चुके हैं।  बिजली वितरण कंपनियों के घाटे में काम करने के बावजूद अधिकतर राज्यों में 2026-27 के लिए स्वीकृत शुल्क वृद्धि सीमित रही है।  इक्रा का अनुमान है कि सीमित शुल्क वृद्धि और अपेक्षाकृत अधिक शुल्क वाली क्षमताओं के जुड़ने से बिजली खरीद लागत बढ़ने की स्थिति में 2026-27 में प्रति इकाई नकद अंतर 30-33 पैसे के उच्च स्तर पर बना रह सकता है।  इक्रा ने कहा कि सीमित शुल्क वृद्धि और लगातार घाटे के कारण बिजली वितरण क्षेत्र के लिए उसका दृष्टिकोण नकारात्मक बना हुआ है। 

टकराव के बावजूद अमेरिका को 90 अरब डॉलर का फायदा, ट्रंप की रणनीति रंग लाई

तेहरान  ईरान के साथ बढ़ते तनाव और ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस के बीच अमेरिका के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. अमेरिका की जमीन के नीचे ऐसा खजाना मिला है, जो आने वाले कई दशकों तक उसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरी तरह बदल सकता है. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी (USGS) ने खुलासा किया है कि देश के एपलाचियन पर्वतीय क्षेत्र में भारी मात्रा में लिथियम मौजूद है. जिसकी अनुमानित कीमत करीब 90 अरब डॉलर बताई जा रही है. यह ईरान युद्ध में हुए नुकसान और खर्च लगभग 25 बिलियन डॉलर से कहीं ज्यादा है. यह खोज ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी टेक्नोलॉजी की मांग तेजी से बढ़ रही है।  अमेरिका की लिथियम खोज क्यों है खास रिपोर्ट के मुताबिक यहां करीब 2.3 मिलियन मीट्रिक टन लिथियम ऑक्साइड मौजूद है. यह मात्रा इतनी ज्यादा है कि आने वाली कई पीढ़ियों तक अमेरिका की जरूरतों को पूरा कर सकती है. यही वजह है कि इस खोज को सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक नजरिए से भी बेहद अहम माना जा रहा है. यह लिथियम मुख्य रूप से कैरोलिना क्षेत्र के ‘टिन-स्पोड्यूमीन बेल्ट’ में पाया गया है. यह इलाका पहले भी दुनिया का प्रमुख लिथियम स्रोत रह चुका है, लेकिन समय के साथ यहां खनन गतिविधियां कम हो गई थीं. अब एक बार फिर यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा के नक्शे पर लौटता हुआ नजर आ रहा है. खास बात यह है कि यहां पाया जाने वाला स्पोड्यूमीन एक ऐसा खनिज है, जिससे सीधे लिथियम निकाला जा सकता है, जो बैटरियों के लिए बेहद जरूरी होता है।  चीन की नहीं होगी जरूरत  रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक अमेरिका अपनी लिथियम जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता रहा है. खासकर चीन और चिली जैसे देशों पर उसकी निर्भरता ज्यादा रही है. लेकिन इस नई खोज के बाद अमेरिका के पास मौका है कि वह अपनी घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करे और विदेशी निर्भरता को काफी हद तक कम कर दे. दुनिया भर में लिथियम को ‘व्हाइट गोल्ड’ यानी सफेद सोना कहा जाने लगा है. इसकी वजह है इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक 2040 तक लिथियम की मांग में करीब 40 गुना तक बढ़ोतरी हो सकती है. ऐसे में अमेरिका के लिए यह खोज किसी खजाने से कम नहीं है. अनुमान है कि इस भंडार से करीब 13 करोड़ इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियां तैयार की जा सकती हैं।   

भारत-इजराइल दोस्ती को मजबूत करने वाली मेगा डील, PM मोदी ने एयर डिफेंस पर किया ऐतिहासिक सौदा

नई दिल्ली भारत ने अपनी वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए इजरायल की IAI और HAL के साथ लगभग 1.1 अरब डॉलर की बड़ी डील की है। इसके तहत छह Boeing 767 विमानों को आधुनिक एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर में बदला जाएगा। यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ रणनीति और भारत-इजरायल रक्षा… International Desk: भारत ने अपनी वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए इजरायल की IAI और HAL के साथ लगभग 1.1 अरब डॉलर की बड़ी डील की है जिससे भारत-इजरायल रणनीतिक दोस्ती में  एक नया अध्याय जुड़ गया है। इसके तहत छह Boeing 767 विमानों को आधुनिक एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर में बदला जाएगा। इस समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ रणनीति  के तहत जबरदस्त मेगा डील माना जा रहा है जिससे भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी तक मार करने और हवा में ईंधन भरने की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। भारत-इजरायल रक्षा साझेदारी को मजबूती इजरायली कंपनी IAI पिछले कई वर्षों से भारत के साथ रक्षा तकनीक पर काम कर रही है। मार्च 2024 में कंपनी ने नई दिल्ली में अपनी भारतीय शाखा Aerospace Services India (ASI) शुरू की थी। यह कंपनी भारत की सरकारी रक्षा अनुसंधान एजेंसी DRDO के साथ मिलकर भारतीय सेना के लिए कई प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। ASI में करीब 97 प्रतिशत कर्मचारी भारतीय हैं। MRSAM सिस्टम भी बना रहा है IAI । IAI और DRDO मिलकर भारत के लिए Medium Range Surface-to-Air Missile (MRSAM) सिस्टम भी बना चुके हैं। यह अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना तीनों इस्तेमाल कर रही हैं। इस सिस्टम में एडवांस रडार, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, मोबाइल लॉन्चर और इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं। Boeing 767 को टैंकर में बदलने का फायदा IAI दुनिया की बड़ी विमान कन्वर्जन कंपनियों में गिनी जाती है। कंपनी यात्री विमानों को कार्गो या विशेष सैन्य विमानों में बदलने की विशेषज्ञ मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार:     नया टैंकर विमान खरीदने की तुलना में कन्वर्जन करीब 20 प्रतिशत सस्ता पड़ता है।     Boeing 767 को अपग्रेड करने के बाद उसे कई दशकों तक उपयोग किया जा सकता है।     इससे भारतीय वायुसेना को लंबी दूरी के ऑपरेशन में बड़ी मदद मिलेगी।     इन नए टैंकर विमानों से भारतीय लड़ाकू विमान हवा में ही ईंधन भर सकेंगे। इससे:     लड़ाकू विमानों की रेंज बढ़ेगी     लंबी दूरी के मिशन आसान होंगे     युद्ध के दौरान प्रतिक्रिया क्षमता मजबूत होगी     हिंद महासागर और पश्चिम एशिया में भारत की रणनीतिक पहुंच बढ़ेगी 2030 से शुरू हो सकती डिलीवरी रिपोर्ट के मुताबिक इन विमानों की डिलीवरी 2030 से शुरू हो सकती है। HAL और IAI पहले से ड्रोन और मिसाइल प्रोजेक्ट्स पर भी साथ काम कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समझौता सिर्फ एयर टैंकर खरीद नहीं, बल्कि भारत-इजरायल रक्षा सहयोग के नए दौर की शुरुआत है।