samacharsecretary.com

ईंधन के दाम में इजाफा संभव, सरकार को हर दिन उठाना पड़ रहा 1000 करोड़ का भार

 नई दिल्‍ली ईरान अमेरिका तनाव और होर्मुज के बंद होने से ग्‍लोबल स्‍तर पर कच्चे तेल के दाम में भारी उछाल देखने को मिली है. कुछ ही समय में कच्‍चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं, जिसके बाद भी देश में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रहे हैं, लेकिन अब संभावना जताई जा रही है कि ईंधन की कीमतें जल्‍द बढ़ सकती हैं।  क्‍यों सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को हर दिन भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसका पूरा भार या तो कंपनी के ऊपर या सरकार के खजाने पर पड़ रहा है. इस कारण, पेट्रोल-डीजल के दाम में हफ्ते भर के दौरान बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।  सूत्रों ने बिजनेस टुडे को बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 15 मई से पहले बढ़ोतरी की जा सकती है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों  को प्रति माह लगभग 30,000 करोड़ रुपये के भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।  स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज ने बढ़ाई टेंशन  स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज, जिससे होकर दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुजरती है, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण हफ्तों से बुरी तरह प्रभावित है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है. कई देशों में ईंधन की समस्‍या आई है और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।  हांगकांग में पेट्रोल की कीमत लगभग 295 रुपये प्रति लीटर है, सिंगापुर में लगभग 240 रुपये, नीदरलैंड में 225 रुपये, इटली में 210 रुपये और ब्रिटेन में लगभग 195 रुपये प्रति लीटर है. वहीं, भारत में कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें बिना किसी बड़े संशोधन के लगभग 95 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई हैं।  कई देशों में इमरजेंसी लागू  कई देशों ने एनर्जी संकट से निपटने के लिए पहले ही आपातकालीन उपाय लागू कर दिए हैं. बांग्लादेश ने ईंधन की राशनिंग लागू की गई है, श्रीलंका ने चार दिन का कार्य सप्ताह शुरू किया, पाकिस्तान ने सरकारी कार्यालयों के कार्य दिवस कम किए, जबकि दक्षिण कोरिया ने दशकों में पहली बार ईंधन की कीमतों पर सीमा लागू की. हालांकि, भारत में ईंधन की कमी, लंबी कतारें या राशनिंग जैसी समस्याएं नहीं हुईं।  भारत ने उठाए सख्‍त कदम  सरकारी और उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, संकट शुरू होते ही भारत ने तेजी से कदम उठाए. घरेलू एलपीजी उत्पादन को कुछ ही दिनों में 36,000 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है. सरकार ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों से लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में भी भारी कमी की।  सरकार और तेल कंपनियां उठा रहीं भार  उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों के चरम पर, सरकार और तेल उत्पादक कंपनियां मिलकर पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का भार प्रभावी रूप से वहन कर रही थीं।  उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद भी, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को मिलाकर हर महीने लगभग ₹30,000 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है।  100 फीसदी अधिक क्षमता पर काम  भारत ने रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर आपूर्ति को स्थिर करने में भी कामयाबी हासिल की है. खबरों के मुताबिक, ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं. हालांकि, वेस्‍ट एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण पब्लिक सेक्‍टर की तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। 

नौसेना की कमान संभालेंगे वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, 31 मई से नई जिम्मेदारी

नई दिल्ली   सरकार ने वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को नया नौसेना प्रमुख (Chief of Naval Staff) नियुक्त किया है। वह एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी की जगह लेंगे, जो 31 मई को सेवा से रिटायर होने वाले हैं। वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने पिछले साल 31 जुलाई को पश्चिमी नौसेना कमान के 34वें फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर कार्यभार संभाला था। इस फ्लैग ऑफिसर को 1 जुलाई, 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था और वह संचार (Communication) और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) के विशेषज्ञ हैं। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला, जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, श्रिवेनहैम, यूनाइटेड किंगडम; कॉलेज ऑफ नेवल वॉरफेयर, करंजा; और यूनाइटेड स्टेट्स नेवल वॉर कॉलेज, न्यूपोर्ट, रोड आइलैंड के पूर्व छात्र हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से सम्मानित इस एडमिरल ने अपने नौसेना करियर में कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल, स्टाफ और प्रशिक्षण पदों पर काम किया है। इनमें मिसाइल वेसल INS विद्युत और विनाश; मिसाइल कॉर्वेट INS कुलिश; गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर INS मैसूर और विमानवाहक पोत INS विक्रमादित्य की कमान संभालना शामिल है। रियर एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद, वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि के मुख्यालय में मुख्य स्टाफ अधिकारी (traning) के रूप में कार्य किया और पूरी भारतीय नौसेना में प्रशिक्षण के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंत्रालय ने बताया कि वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने भारतीय नौसेना सुरक्षा टीम (Indian Naval Safety Team) की स्थापना में भी अहम भूमिका निभाई, जो नौसेना के सभी विभागों में ऑपरेशनल सुरक्षा की देखरेख करती है। इसके बाद उन्होंने फ्लैग ऑफिसर सी ट्रेनिंग के रूप में नौसेना के 'वर्क अप ऑर्गनाइजेशन' का नेतृत्व किया, और बाद में उन्हें पश्चिमी बेड़े का फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग नियुक्त किया गया। 'स्वॉर्ड आर्म' (Sword Arm) की कमान संभालने के बाद, उन्हें फ्लैग ऑफिसर ऑफशोर डिफेंस एडवाइजरी ग्रुप और भारत सरकार के लिए ऑफशोर सुरक्षा और रक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया। वाइस एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद, यह फ्लैग ऑफिसर पश्चिमी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ, कार्मिक सेवाओं के नियंत्रक (Controller of Personnel Services) और नौसेना मुख्यालय (NHQ) में कार्मिक प्रमुख (Chief of Personnel) रहे। अपनी वर्तमान नियुक्ति से पहले, उन्होंने नौसेना मुख्यालय में नौसेना स्टाफ के उप-प्रमुख के रूप में कार्य किया। वाइस एडमिरल स्वामिनाथन की शैक्षणिक योग्यताओं में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से BSc की डिग्री; कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कोच्चि से दूरसंचार में MSc  किंग्स कॉलेज, लंदन से रक्षा अध्ययन में MA मुंबई विश्वविद्यालय से रणनीतिक अध्ययन में MPhil  और मुंबई विश्वविद्यालय से अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन में PhD शामिल हैं।   

सुप्रीम कोर्ट में बोहरा मुस्लिम लड़कियों के खतना पर बहस, 7 साल की बच्ची की स्थिति गंभीर

नई दिल्ली मुस्लिमों के दाऊदी बोहरा समुदाय में छोटी बच्चियों का खतना किए जाने की प्रथा पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को बहस हुई। इस प्रथा पर सवाल उठाते हुए एक दाऊदी बोहरा महिला ने कहा कि इसके तहत बच्चियों के जननांग के एक हिस्से को काटा जाता है। इस दौरान उन्हें बेहद पीड़ा से गुजरना होता है। यह ट्रॉमा ऐसा होता है कि उन्हें पूरी जिंदगी इससे होने वाली शारीरिक और मानसिक पीड़ा से गुजरना होता है। उन्होंने कहा कि इस खतना के दौरान हजारों नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। महिला ने कहा कि इससे स्वास्थ्य को खतरा होता है और उनकी गरिमा से भी समझौता है। महिला ने कहा कि इस प्रथा को तो पॉक्सो ऐक्ट के तहत अपराध घोषित किया जाना चाहिए। दाऊदी बोरा समुदाय की महिला मासूमा रानालवी की ओर से पेश वकील सिद्धार्थ लूथरा ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच से कहा कि खतना की यह प्रथा 7 साल की बच्चियों के साथ होती है। उन्होंने कहा कि जब 7 साल की बच्ची के साथ इसे अंजाम दिया जाता है तो फिर सहमति का तो सवाल ही नहीं उठता है। उन्होंने कहा कि बच्ची की सहमति की बात नहीं हो सकती और उसके परिजन सामाजिक दबाव में रहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यदि वे विरोध करेंगे तो उनके सामाजिक बहिष्कार का खतरा रहता है। लूथरा ने कहा कि परिजन चुप रहते हैं क्योंकि यदि उनका बहिष्कार हुआ तो फिर वे ऐसी स्थिति में आ जाते हैं, जहां उनको समाज से बॉयकॉट झेलना पड़ा है। समाज के साथ उनके आर्थिक और सामाजिक रिश्ते खत्म हो जाते हैं। लूथरा ने कहा कि इस विषय को भले ही सामाजिक प्रथा कहा जा रहा है, लेकिन जिस तरह से एक बच्ची को पीड़ा झेलनी पड़ती है वह मामला संवैधानिक और आपराधिक दायरे में चला जाता है। ऐसे में इस पर उसी आलोक में विचार किया जाना चाहिए। जज ने जताई हैरानी- अब तक कोई कानून क्यों नहीं बना इस मामले की सुनवाई करने वाली बेंच में चीफ जस्टिस सूर्यकांत के अलावा जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस अमानुल्लाह, जस्टिस अरविंद कुमार समेत 9 जज शामिल हैं। इस केस की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने हैरानी भी जताई कि आखिर इसके खिलाफ कोई कानून क्यों नहीं बना है। उन्होंने कहा कि इस तरह से बच्चियों का जो खतना होता है, उससे उनके अंग प्रभावित होते हैं। ऐसे में कोई कानून जरूर बनना चाहिए, जिससे इस पर रोक लग सके। अदालत ने कहा कि ऐसे मामले में कानून बनाकर रोक लगाने का अधिकार तो सरकार के पास ही है।

PF पैसा आसानी से निकालेगा EPFO, ATM और UPI सुविधा जल्द उपलब्ध

नई दिल्ली ईपीएफओ के करीब 8 करोड़ सब्सक्राइबर्स के लिए गुड न्यूज है। आप अपने प्रोविडेंट फंड (PF) का पैसा ATM और UPI के जरिए निकाल सकेंगे। यह सुविधा मई के अंत तक लाइव होने की उम्मीद है, जिससे पीएफ पैसे तक पहुंच और भी आसान और तेज हो जाएगी। ईटी नाउ के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। ईपीएफओ डैशबोर्ड के मुताबिक ईपीएफओ में करीब 7,98,24,491 मेंबर हैं। इनमें 7.74 करोड़ से अधिक सदस्यों की आधार सत्यापित KYC हो चुकी है। इनमें से 82,11,182 पेंशनर हैं। क्या है EPFO 3.0 कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पिछले साल EPFO 3.0 लॉन्च किया था, जिसका उद्देश्य डिजिटल ढांचे और प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाना है। यह नया सिस्टम मिड-2026 तक पूरी तरह लागू हो जाएगी। इससे पीएफ से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं यूजर-फ्रेंडली हो जाएंगी। क्या होगा फायदा इस नए सिस्टम से ईपीएफओ के सदस्यों को पीएफ तक आसान पहुंच होगी। ऑटो-क्लेम सेटलमेंट और पसंद के बैंक खाते में फंड ट्रांसफर हो सकेगा। सबसे अहम अपग्रेड एटीएम और यूपीआई के जरिए पीएफ निकासी की सुविधा को लेकर होगा। कितना पैसा निकाल सकते हैं: EPFO निकासी की अधिकतम सीमा तय करेगा। इसके मुताबिक कुल पीएफ बैलेंस का 50% तक ही यूपीआई या एटीएम से निकाला जा सकेगा। कैसे काम करेगी यह सुविधा: EPFO सब्सक्राइबर्स को डेडिकेटेड एटीएम कार्ड जारी करेगा। यह कार्ड सीधे पीएफ अकाउंट से लिंक होगा। आप किसी भी एटीएम से जाकर अपना पीएफ पैसा निकाल सकेंगे। इसके अलावा, UPI के जरिए भी पीएफ बैलेंस ट्रांसफर किया जा सकेगा। कौन कर सकता है इस सुविधा का इस्तेमाल: ईपीएफओ सदस्यों को कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। जैसे, एक्टिव UAN होना चाहिए। UAN से KYC डॉक्यूमेंट्स आधार, PAN, बैंक खाता नंबर और IFSC कोड लिंक होने चाहिए। रिकॉर्डतोड़ क्लेम श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने पिछले महीने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में EPFO ने 8.31 करोड़ क्लेम सेटल किए हैं, जो FY25 के 6.01 करोड़ से कहीं अधिक है। इनमें से 5.51 करोड़ क्लेम एडवांस या आंशिक निकासी के थे। यह पीएफ तक आसान पहुंच का बड़ा उदाहरण है। 71.11% एडवांस क्लेम ऑटो मोड में 3 दिनों के भीतर प्रोसेस हुए (पिछले साल 59.19%)। 6.68 करोड़ सदस्यों ने चेक लीफ अपलोड किए बिना ही क्लेम दायर किए। 1.59 करोड़ सदस्यों ने बिना एम्प्लॉयर की मंजूरी के अपने बैंक अकाउंट सीड किए। 70.55 लाख ट्रांसफर क्लेम ऑटोमेटिक प्रोसेस हुए। 24.84 लाख ट्रांसफर रिक्वेस्ट सदस्यों द्वारा बिना एम्प्लॉयर के हस्तक्षेप के की गईं।

पश्चिम बंगाल फतह के बाद अमित शाह का बड़ा बयान, कार्यकर्ताओं को दी श्रद्धांजलि; ममता पर भी साधा निशाना

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी भाजपा की पहली सरकार के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। विधायक दल के नेता के रूप में उनके चयन की घोषणा के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के संघर्ष को याद किया और उन 321 कार्यकर्ताओं को श्रेय दिया जिन्होंने राज्य में भगवा पार्टी को मजबूत करने के लिए अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि यह जीत जितनी आनंददायक है, उसका रास्ता असहनीय पीड़ा से भरा हुआ है। शाह ने भवानीपुर से ममता बनर्जी की हार पर भी चुटकी ली और कहा कि शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें घर में हराया है। अमित शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मत की अभिव्यक्ति लगभग असंभव थी। सैकड़ों उदाहरण हिंसा और क्रूरता के, उसके बीच में भाजपा और हमारे नेता नरेंद्र मोदी पर जो भरोसा करके बंगाल की जनता ने जो प्रचंड विजय हमें दी है उसके लिए जनता का आभार है। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने जो अपेक्षाएं रखी हैं, पूरा प्रयास होगा कि विश्वास को तनिक भी ठेस ना पहुंचे। शाह ने कहा कि बंगाल की संस्कृति और बंगाल की परंपरा को 5 दशक से विदेशी विचाराधारा से प्रेरित शासन से मुक्त करके फिर से एक बार रामकृष्ण ठाकुर, विवेकानंद, महर्षि अरविंद और कविगुरु टैगोर की कल्पना का बंगाल बनाने की दिशा में काम करेंगे। शाह ने कहा कि जिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में जिस विचारधारा की शुरुआत 1950 में हुई, 2026 में उनकी जन्मभूमि में उनकी पार्टी की सरकार बनी है। जब धारा 370 हटी तो देशभर के कार्यकर्ताओं के मन में खुशी की लहर थी। कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने कहा कि कसक बाकी है। उन्होंने कहा था कि बंगाल में भाजपा का झंडा लहराना बाकी है। श्यामा प्रसाद जी जहां भी होंगे मुक्त मन से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को आशीर्वाद देते होंगे कि उनके नृत्व ने भाजपा को गंगोत्री से गंगासागर तक पहुंचाया। इस जीत के लिए 321 कार्यकर्ताओं ने जान गंवाई: अमित शाह बंगाल में भाजपा के खाता खुलने से सरकार बनने तक की यात्रा को याद करते हुए अमित शाह ने उनक कार्यकर्ताओं को भी नमन किया जो राजनीतिक हिंसा का शिकार हो गए। उन्होंने कहा, ‘2014 के उपचुनाव में समिक भट्टाचार्य ने उपचुनाव जीतकर हमारा खाता खोला। 16 में तीन हुए। 21 में 77 हुए और 2026 में 207 के साथ हमारा मुख्यमंत्री है। यह यात्रा जितनी भव्य है, आनंददायक है, यात्रा का मार्ग असहनीय पीड़ा से भरा हुआ है। मैं भूल नहीं सकता कि भाजपा के 321 देवतुल्य कार्यकर्ताओं ने अपनी जान इस जीत के लिए गंवाई है। केरल और बंगाल के अलावा कहीं हिंसा का क्रूर तांडव नहीं देखा। मैं हृदय के भाव के साथ उन सभी कार्यकर्ताओं के परिवार को भाजपा के करोड़ों कार्यकर्ताओं की तरफ से भावपूर्वक नमन करता हूं। आपके परिवार के स्वजन ने बलिदान करके हमारी विचारधारा को तो मजबूत किया ही है, पश्चिम बंगाल की सीमा को मजबूत करके पूरे भारत को मजबूत किया है।’ अब घुसपैठ असंभव: अमित शाह शाह ने घुसपैठ और गो तस्करी को असंभव बनाने का वादा करते हुए कहा, ‘त्रिपुरा में हमारी सरकार है, असम में सरकार है और बंगाल में भी हमारी सरकार बनी है, घुसपैठ असंभव होने वाली है। गो तस्करी असंभव होने वाली है। बंगाल सरकार और भारत सरकार सीमा को राष्ट्र की सुरक्षा के अभेद्य किले के रूप में परिवर्तित करेगी।’ गृहमंत्री ने शांतिपूर्वक चुनाव के लिए चुनाव आयोग, सुरक्षाबलों और बंगाल पुलिस की तारीफ की। ममता बनर्जी की हार पर ली चुटकी भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि 9 जिले ऐसे हैं जहां सभी सीटें भाजपा ने जीतीं और टीएमसी का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया। 23 जिलों में से 20 में भाजपा नंबर एक पार्टी है। एक भी जिला ऐसा नहीं जहां हमारा विधायक नहीं है। उन्होंने भवानीपुर से ममता बनर्जी की हार पर चुटकी ली। शाह ने कहा, 'मैं भवानीपुर की जनता का भी मैं बहुत बहुत धन्यवाद करना चाहता हूं। शुभेंदु दा ने पिछले चुनाव में दीदी को नंदीग्राम में हराया था। मैंने दीदी का एक इंटरव्यू देखा था, वह कहती थीं कि मैं उनके घर में लड़ने के लिए चली गई। दीदी इस बार तो शुभेंदु दा ने आपके घर में आकर हराया है। मैं भवानीपुर की जनता का भी हृदयपूर्वक धन्यवाद करना चाहता हूं।'

सोमनाथ मंदिर की 75वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने लिखा लेख, बताया भारत की अदम्य शक्ति

अहमदाबाद   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 मई को पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। उन्होंने यह जानकारी देते हुए एक लेख में भव्य-दिव्य सोमनाथ धाम को समर्पित अपनी भावनाएं भी व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि यह अवसर हमें स्मरण कराता है कि इस पावनस्थल की रक्षा और इसके पुनर्निर्माण के लिए किस प्रकार देश की कई पीढ़ियों ने निरंतर संघर्ष किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपना लेख शेयर किया। पोस्ट में उन्होंने लिखा, "पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 11 मई को मुझे एक बार फिर वहां जाने का सौभाग्य मिलने वाला है। यह अवसर हमें स्मरण कराता है कि इस पावनस्थल की रक्षा और इसके पुनर्निर्माण के लिए किस प्रकार देश की कई पीढ़ियों ने निरंतर संघर्ष किया।" सोमनाथ मंदिर को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में इसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने बताया कि 2026 की शुरुआत में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होना उनके लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा, जो मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया गया था। उन्होंने लिखा, "वर्ष 2026 की शुरुआत में मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला। यह सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद भी मंदिर के शाश्वत और अविनाशी होने का पर्व था।" पीएम मोदी ने उल्लेख किया कि 11 मई को वे एक बार फिर सोमनाथ जाएंगे, जहां वे पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर होने वाले कार्यक्रम में शामिल होंगे। उन्होंने कहा, "अब 11 मई को मुझे एक बार फिर सोमनाथ जाने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। इस बार यह यात्रा पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में है। मैं उस क्षण को फिर जीने जा रहा हूं, जब भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर का लोकार्पण किया था। उस दिन, सोमनाथ में विध्वंस से सृजन तक की यात्रा फिर से जीवंत होगी। छह महीनों के भीतर सोमनाथ के इतिहास से जुड़े इन दो अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी बनना मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है।" अपने लेख में प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर को केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और उसकी निरंतरता का प्रतीक बताया। उन्होंने लिखा, "सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, हमारी सभ्यता का अटूट संकल्प है। इसके सामने लहराता विशाल समुद्र अनंत काल की अनूभूति कराता है। इसकी लहरें हमें सिखाती हैं कि तूफान चाहे कितने भी विकराल क्यों न हों, मनुष्य का साहस और आत्मबल हर बार फिर से उठ खड़ा होने में सक्षम है। तट से टकराती लहरें सदियों से यह उद्घोष कर रही हैं कि मानवीय चेतना को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता है।" उन्होंने प्राचीन ग्रंथों के उल्लेख के साथ सोमनाथ की आध्यात्मिक महत्ता को भी रेखांकित किया और इसे शैव परंपरा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बताया। पीएम मोदी ने कहा, "हमारे प्राचीन शास्त्रों में लिखा है, 'प्रभासं च परिक्रम्य पृथिवीक्रमसंभवम्।' अर्थात दिव्य प्रभास (सोमनाथ) की परिक्रमा पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान है। जब लोग यहां दर्शन-पूजन के लिए आते हैं, तब उन्हें उस सभ्यता की अद्भुत निरंतरता का भी अनुभव होता है, जिसकी ज्योति कभी बुझाई नहीं जा सकी। कई साम्राज्य आए और गए, समय बदला और इतिहास ने ढेरों उतार-चढ़ाव देखे, फिर भी सोमनाथ हमारे हृदय में हमेशा बना रहा।" प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, "यह समय उन असंख्य महान विभूतियों के स्मरण का भी है, जो क्रूर आक्रांताओं के सम्मुख अडिग रहे। लकुलीश और सोम शर्मा जैसे मनीषियों ने प्रभास को शैव दर्शन का महान केंद्र बनाया। चक्रवर्ती महाराज धारसेन चतुर्थ ने सदियों पहले वहां दूसरा मंदिर बनवाया था। समय की कठिन परीक्षा के बीच भीम प्रथम, जयपाल और आनंदपाल जैसे शासकों ने आक्रमणों के विरुद्ध अपनी सभ्यता की ढाल बनकर मंदिर की रक्षा की थी। ऐसा माना जाता है कि महान राजा भोज ने भी इस पावन स्थल के पुनर्निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया था। कर्णदेव सोलंकी और जयसिंह सिद्धराज ने गुजरात की राजनीतिक और सांस्कृतिक शक्ति को पुनर्स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।" उन्होंने आगे लिखा, "भाव बृहस्पति, कुमारपाल सोलंकी और पाशुपताचार्यों ने इस तीर्थ को आराधना और ज्ञान के केंद्र के रूप में स्थापित करने में अमूल्य योगदान दिया। विशालदेव वाघेला और त्रिपुरांतक ने इसकी बौद्धिक और आध्यात्मिक परंपराओं की रक्षा की। महिपाल चूड़ासमा और राव खंगार चूड़ासमा ने विध्वंस के बाद पूजा-पाठ की परंपरा को पुनर्जीवित किया। पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर, जिनकी 300वीं जयंती मनाई जा रही है, उन्होंने सबसे चुनौतीपूर्ण समय में भी भक्ति की परंपरा को जीवंत रखा। बड़ौदा के गायकवाड़ों ने तीर्थयात्रियों के अधिकारों की रक्षा की। इसके साथ ही हमारी यह धरती वीर हमीरजी गोहिल, वीर वेगड़ाजी भील जैसे पराक्रमियों से धन्य हुई है। उनके साहस और बलिदान को आज भी याद किया जाता है।" प्रधानमंत्री ने 20वीं सदी के पुनर्निर्माण आंदोलन का भी उल्लेख किया, जिसमें सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया गया। अपने लेख में पीएम मोदी ने लिखा, "1940 के दशक में स्वतंत्रता की भावना पूरे भारत में फैल रही थी। सरदार पटेल जैसे महान नेताओं के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत की नींव रखी जा रही थी। ऐसे में एक बात जो उन्हें बहुत व्यथित करती थी, वह थी- सोमनाथ की दुर्दशा। 13 नवंबर 1947 को, दिवाली के समय, उन्होंने सोमनाथ के जर्जर अवशेषों के सामने खड़े होकर, समुद्र का जल हाथ में लेकर संकल्प लिया, 'इस (गुजराती) नववर्ष पर हमारा निश्चय है कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण होगा। सौराष्ट्र के लोगों को इसके लिए हर तरह से अपना योगदान देना होगा। यह एक पावन कार्य है, जिसमें हर किसी को भागीदारी निभानी होगी।' उनके इस आह्वान ने सिर्फ गुजरात ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष को नए उत्साह से भर दिया।" उन्होंने आगे कहा कि दुर्भाग्यवश, सरदार पटेल अपने उस सपने को साकार होते नहीं देख सके, जिसके लिए उन्होंने स्वयं को समर्पित कर दिया था। इससे पहले कि जीर्णोद्धार के बाद सोमनाथ मंदिर भक्तों के लिए खुलता, उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। इसके बावजूद, प्रभास पाटन की पावन धरती पर … Read more

पटाखा प्लांट विस्फोट चीन: 37 की मौत, पांच गंभीर रूप से घायल, राहत कार्य जारी

चांग्शा   चीन के हुनान प्रांत में एक पटाखा प्लांट में हुए भीषण धमाके में हुई मौत का आंकड़ा बढ़ गया है। धमाके में मरने वालों की संख्या अब 37 हो गई है। स्थानीय अधिकारी की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, धमाके के बाद एक व्यक्ति लापता है और 51 लोग घायल हुए हैं। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, 51 घायलों में से पांच की हालत गंभीर बनी हुई है। स्थानीय समयानुसार, यह घटना सोमवार को दिन के चार बजकर 43 मिनट पर ये धमाका हुआ, जिसे 2019 से अब तक का सबसे बड़ा ब्लास्ट माना जा रहा है। हुनान का लियुयांग चीन की पटाखों की राजधानी के तौर पर जाना जाता है। यह डिवाइस की घरेलू सप्लाई का 60 फीसदी और एक्सपोर्ट का लगभग 70 फीसदी बनाता है। 2019 में पूर्वी चीन के जिआंगसु प्रांत में एक केमिकल प्लांट में बड़ा धमाका हुआ था, जिसमें लगभग 78 लोग मारे गए थे। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, हुनान प्रांत के लिउयांग में हुए धमाके के बाद के हालात की निगरानी के लिए वाइस-प्रीमियर झांग गुओकिंग को भेजा है। झांग ने कहा कि स्टेट काउंसिल, यानी चीन की कैबिनेट, हादसे के कारणों की जांच करने और क्रिमिनल सजा दिलाने में मदद के लिए एक जांच टीम बनाएगी। झांग ने सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले पटाखे बनाने वालों को सजा देने का वादा किया है। इसके साथ ही उन रेगुलेटर्स को भी सजा देने का वादा किया है जो कंपनियों की निगरानी करने के बजाय उन पर जुर्माना लगाते हैं। सबसे ज्यादा उम्र के पीड़ित की उम्र 68 साल थी, जबकि सबसे कम उम्र के पीड़ित की उम्र बीस साल के आस-पास थी। ज्यादातर घायलों को इमरजेंसी इलाज के लिए लियूयांग पीपल्स हॉस्पिटल और लियूयांग ट्रेडिशनल चाइनीज मेडिसिन हॉस्पिटल ले जाया गया। इससे पहले चांग्शा शहर के स्वास्थ्य आयोग के कम्युनिस्ट पार्टी सेक्रेटरी लियू जियायोंग ने कहा कि घायलों में से छह इंटेंसिव केयर में हैं। चेन ने कहा कि मौके पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन काफी हद तक पूरे हो चुके हैं। ऑपरेशन में फायर, इमरजेंसी रिस्पॉन्स, पब्लिक सिक्योरिटी और स्वास्थ्य विभाग के 1,500 से ज्यादा लोग शामिल थे।

बहुमत का आंकड़ा जुटाने के बाद विजय ने राज्यपाल से की मुलाकात, सरकार गठन की तैयारी तेज

तमिलनाडु  TVK प्रमुख विजय ने गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की और तमिलनाडु में सरकार बनाने का दावा पेश किया है। तीन दिनों में विजय की राज्यपाल से यह तीसरी मुलाकात है। पहले दो बार में राज्यपाल ने विजय को जरूरी बहुमत का आंकड़ा लाने के लिए कहा था। पहले सिर्फ कांग्रेस ने विजय को समर्थन दिया था। अब सीपीआई, सीपीआईएम, वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने विजय की टीवीके का समर्थन करने का फैसला किया है। इसके बाद, विजय के पास 120 की संख्या हो गई है। तमिलनाडु में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल दोनों वामपंथी दलों- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने कहा कि यह (समर्थन देने का) निर्णय भाजपा को राज्य में पिछले दरवाजे से प्रवेश करने से रोकने के लिए लिया गया है। हालांकि, राज्य के अधिकारों के मामले में वे (वाम दल) डीएमके के साथ बने रहेंगे। वाम दलों ने घोषणा की कि वे टीवीके मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं बनेंगे। दोनों के दो-दो विधायक हैं। उन्होंने दिनभर की चर्चा के बाद अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी को अपना समर्थन देने की घोषणा की। उनके समर्थन के साथ, टीवीके प्रमुख ने बाद में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की और सरकार बनाने के अपने दावे को दोहराया। तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की 108 सीटें हैं, लेकिन यह बहुमत के आंकड़े से 10 कम है। टीवीके ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के सहयोगी वामदलों, और विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) से संपर्क किया था तथा 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद सरकार बनाने के लिए उनका समर्थन मांगा था। सीपीआई, सीपीआईएम और वीसीके, प्रत्येक के दो-दो विधायक हैं। वाम दलों ने राज्यपाल को संबोधित पत्र में टीवीके को अपना समर्थन देने की जानकारी दी। पांच विधायकों वाली कांग्रेस ने पहले ही टीवीके को समर्थन दे दिया है। विधानसभा चुनावों में टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, पार्टी संस्थापक विजय को अपनी जीती हुई दो सीटों में से एक को छोड़ना होगा। विजय को चेन्नई के पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व सीटों में से एक को छोड़ना पड़ेगा।

अमित शाह ने किया ऐलान, सुवेंदु अधिकारी होंगे पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री

कोलकाता  गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को बंगाल के सीएम के रहस्य से पर्दा हटा दिया. उन्होंने सुवेंदु अधिकारी के नाम का ऐलान करते हुए कहा कि बंगाल के अगले मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ही होंगे. साथ ही उन्होंने नाम से पहले चले मंथन के बारे में बात करते हुए कहा कि आज भाजपा की ओर से पश्चिम बंगाल विधानसभा सदस्यों की एक मीटिंग रखी गई. उन्होंने कहा कि मुझे और मोहन चरण माझी जी (ओडिशा के सीएम) को पर्यवेक्षक के तौर पर हमें यहां भेजा गया. सभी प्रस्ताव और समर्थन एक ही नाम के मिले हैं, कोई दूसरा नाम नहीं आया है. मैं सुवेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता के रुप में निर्वाचित करता हूं।  पश्चिम बंगाल दशकों तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस के ‘मां-माटी-मानुष’ के नारे के बीच अपनी जमीन तलाश रही भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार बंगाल के दुर्ग को फतह कर लिया है. प्रचंड बहुमत के साथ मिली इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब सरकार गठन की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है. बंगाल की कमान राज्य के कद्दावर नेता और ‘भूमिपुत्र’ सुवेंदु अधिकारी को मिलना तय माना जा रहा है. भाजपा आलाकमान की ओर से बस इसका औपचारिक ऐलान होना बाकी है. साथ ही खबर ये आ रही है कि भाजपा बंगाल में कोई भी उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) नहीं बनाएगी. पार्टी का यह फैसला साफ तौर पर सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास और राज्य में सत्ता के एक सशक्त केंद्र को स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।  पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज इतिहास रच दिया गया है. कोलकाता में हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी के नाम पर अंतिम मुहर लग गई है. खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुभेंदु के नाम का ऐलान किया. अमित शाह और ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी की मौजूदगी में विधायकों ने सर्वसम्मति से शुभेंदु को अपना नेता चुना. शुभेंदु अधिकारी कल यानी 9 मई को सुबह 11 बजे कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।  श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना हुआ पूरा- अमित शाह अमित शाह ने अपने संबोधन में पार्टी के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का विशेष जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आज बंगाल की धरती पर बीजेपी की सरकार बनना डॉ. मुखर्जी के संघर्षों और उनके बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि है. शाह के मुताबिक, जिस राष्ट्रवाद की नींव उन्होंने रखी थी, आज उसी पर चलकर बंगाल में पहली बार पूर्ण बहुमत की बीजेपी सरकार बनने जा रही है।  शाम 6:30 बजे राज्यपाल से मिलेंगे शुभेंदु अधिकारी, पेश करेंगे दावा कोलकाता में विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अब सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है. शुभेंदु अधिकारी आज यानी शुक्रवार शाम 6:30 बजे राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाकात करेंगे. इस दौरान वे बीजेपी विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपेंगे और आधिकारिक तौर पर पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।    9 मई का दिन बंगाल के लिए बेहद खास है, क्योंकि इस दिन रवींद्र जयंती मनाई जाती है. इसी शुभ अवसर पर राज्य की पहली बीजेपी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे. भवानीपुर में ममता बनर्जी को मात देने वाले शुभेंदु के साथ दो डिप्टी सीएम भी बनाए जाने की चर्चा है, जिससे राज्य में नए राजनीतिक समीकरण देखने को मिल सकते हैं।   बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने 7 मई को राज्य विधानसभा को भंग कर दिया है. कोलकाता गजट में जारी आधिकारिक अधिसूचना का हवाला देते हुए बताया गया है कि विधानसभा को भंग करने का यह कदम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की शानदार जीत के बाद उठाया गया है।  चुनाव के बाद प्रदेश के कई हिस्‍सों से हिंसक टकराव की घटनाएं सामने आ रही हैं. मुख्‍यमंत्री पद के प्रबल दावेदारों में शामिल बीजेपी के दिग्‍गज नेता सुवेंदु अधिकारी के निकट सहयोगी और पीए चंद्रनाथ रथ की हत्‍या ने माहौल को और गरमा दिया है. इन सबके बीच बंगाल में नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो गई है. पश्चिम बंगाल में भाजपा की संभावित पहली सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. पार्टी का नया मंत्रिमंडल अनुभवी नेताओं और राजनीति में नए चेहरों का मिश्रण हो सकता है. मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी सबसे प्रमुख दावेदारों में माने जा रहे हैं. भाजपा विधायक दल की बैठक शुक्रवार को कोलकाता में होगी, जिसमें विधायक दल का नेता चुने जाने की संभावना है. इस अहम बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और ओडिशा के मुख्‍यमंत्री मोहन चरण माझी करेंगे. चुनाव में जीत के बाद अमित शाह पहली बार बंगाल पहुंच रहे हैं।  अमित शाह शुक्रवार को कोलकाता पहुंचेंगे और बैठक से पहले राज्य भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रारंभिक चर्चा करेंगे. शाम 4 बजे नवनिर्वाचित विधायकों के साथ औपचारिक बैठक होगी, जहां मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व इस बार सरकार और संगठन दोनों में वैचारिक प्रतिबद्धता तथा संगठनात्मक अनुभव को प्राथमिकता देना चाहता है. भाजपा के संभावित मंत्रिमंडल में कई नए चेहरों को जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें पहली बार विधायक बनीं रत्ना देबनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है, जो आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले की पीड़िता की मां हैं. इसके अलावा भारत सेवाश्रम संघ के संत रहे उत्पल महाराज, पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार और पूर्व एनएसजी कमांडो दिपांजन चक्रवर्ती भी मंत्री पद की दौड़ में बताए जा रहे हैं. भाजपा इन चेहरों के जरिए सामाजिक और भावनात्मक संदेश देने की कोशिश कर सकती है।  मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, माणिकतला से विधायक तपस रॉय को विधानसभा अध्यक्ष बनाए जाने पर विचार हो रहा है. वहीं पार्टी महिला नेतृत्व को भी आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है और एक महिला विधायक को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. हालांकि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सभी नाम चर्चा के स्तर पर … Read more

चार पार्टियों के समर्थन से सरकार गठन में विजय का रास्ता आसान, जादुई आंकड़ा पूरा

चेन्नई तमिलनाडु की राजनीति में सरकार गठन को लेकर जारी हलचल के बीच थलपति विजय को बड़ा राजनीतिक समर्थन मिला है. वामपंथी दलों कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI), सीपीएम और वीसीके ने विजय की टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया है. इस तरह विजय की टीवीके जो 108 सीटों के साथ बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, अब उसे बहुमत का आंकड़ा भी मिल गया है।  तो इस तरह अब 118 के जादुई आंकड़ों पर बात करें तो विजय के पास 108 सीटें हैं. लेकिन विजय दो सीटों पर जीते थे. वहीं कांग्रेस के समर्थन से उन्हें कांग्रेस की पांच सीटें मिल गईं. इस तरह विजय के पास 113 सीटों का आंकड़ा हुआ. अब सीपीआई के दो विधायक, सीपीएम के दो विधायक और वीसीके के भी दो विधायक विजय की टीवीके के साथ हैं. इस तरह इन चार दलों के समर्थन से विजय के पास बहुमत का जादुई आंकड़ा न सिर्फ पूरा हो गया है बल्कि एक अधिक भी हो गया है।  टीवीके- 108 इंडियन नेशनल कांग्रेस-  5 कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया- 2 कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)- 2 विदुथलाई चिरिथागकुल काची- 2 टोटल – 119 बता दें कि थलपति विजय अब चार राजनीतिक दलों के सहयोग से सरकार बनाने जा रहे हैं. उनकी पार्टी तमिलिगा वेट्री कझगम (TVK) को अब कई दलों का खुला समर्थन मिला है. जानकारी के मुताबिक, आधारव अर्जुन पट्टिनपक्कम स्थित विजय के आवास पहुंचे हैं. वहीं CPI की वर्किंग कमेटी की बैठक में TVK को समर्थन देने का फैसला लिया गया है।  इसके अलावा CPI(M) की राज्य कमेटी की बैठक में भी विजय की पार्टी को समर्थन देने पर सहमति बनी है. सूत्रों के अनुसार, विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) ने भी TVK का समर्थन करने पर हामी भर दी है. बताया जा रहा है कि इन सभी दलों के नेता शाम 4:30 बजे संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं. माना जा रहा है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में विजय को समर्थन देने का औपचारिक ऐलान किया जाएगा. तमिलनाडु में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति के बीच यह घटनाक्रम सरकार गठन की दिशा में अहम माना जा रहा है।   टीवीके को मिला सीपीएम का साथ शुक्रवार को TVK चीफ विजय के लिए राहत की खबर आई। सूत्रों के अनुसार, सीपीएम ने TVK-कांग्रेस गठबंधन का समर्थन देने का फैसला किया है। इसके साथ ही विजय के पास 115 विधायक हो चुके हैं। अब उन्हें 3 विधायकों का इंतजार है। राज्यपाल ने उन्हें 10 मई तक का समय दिया है।  VCK, CPM, CPI ने किया TVK-कांग्रेस गठबंधन का समर्थन, थलपति विजय के पास 118 का जादुई आंकड़ा तमिलनाडु में अब TVK चीफ थलपति विजय की सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। 2-2 विधायकों वाले VCK, CPM, CPI ने कांग्रेस-TVK गठबंधन को समर्थन देने का फैसला किया है। साथ ही बीजेपी ने भी मतदान से दूर रहने के संकेत दिए हैं। इसके बाद विजय के लिए बहुमत हासिल करने का मार्ग प्रशस्त हो चुका है।  चेन्नई में लोकभवन के सामने TVK कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन टीवीके कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को लोकभवन के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी तमिलनाडु के गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से विजय को शपथ दिलाने की मांग कर रहे थे। बाद में पुलिस ने उन कार्यकर्ताओं को मौके से हटा दिया। TVK कार्यकर्ता सुरेश ने कहा कि अगर विजय को मुख्यमंत्री बनने का मौका नहीं दिया गया, तो भविष्य में और भी प्रदर्शन किए जाएंगे। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने के बाद से विजय की TVK तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए दूसरी पार्टियों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन से, गठबंधन के पास अब 112 सीटें हैं, जो 234 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से अभी भी छह कम हैं। इस बीच, AIADMK के राष्ट्रीय प्रवक्ता कोवई सत्यन ने TVK के सबसे बड़ी पार्टी होने के दावों पर निशाना साधा और कांग्रेस के साथ उसके गठबंधन की आलोचना की।