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India-US Trade Deal: फाइनल एग्रीमेंट का इंतजार, किन देशों को मिलेगा फायदा?

नई दिल्ली वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच मार्च में अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होंगे, जिसे अप्रैल से लागू किया जाएगा। इसके अलावा अप्रैल में यूके और ओमान के साथ भी FTA लागू होने की उम्मीद है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को भारत-अमेरिका व्यापार समझौतों को लेकर कई अहम जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच एक 'अंतरिम व्यापार समझौते' पर इस साल मार्च में हस्ताक्षर होने की प्रबल संभावना है और इसे अप्रैल के महीने से पूरी तरह लागू (ऑपरेशनल) कर दिया जाएगा। भारत-अमेरिका व्यापार समझौता इस समझौते के कानूनी मसौदे (लीगल टेक्स्ट) को अंतिम रूप देने के लिए 23 फरवरी से अमेरिका में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक शुरू होने जा रही है। गौरतलब है कि इसी महीने की शुरुआत में दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर यह स्पष्ट कर दिया था कि इस अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पहले ही तय कर ली गई है। समझौते की प्रमुख शर्तों में कहा गया है कि भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं एवं अमेरिकी खाद्य व कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क समाप्त करेगा या घटाएगा। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड सोरघम, ट्री नट्स, ताजे और प्रसंस्कृत फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं। साथ ही भारत ने अधिक अमेरिकी उत्पाद खरीदने तथा ऊर्जा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य क्षेत्रों में 500 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। 'समृद्ध भविष्य की राह' शीर्षक वाले खंड में कहा गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी जनता के हितों को आगे बढ़ाते हुए अमेरिकी निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच बढ़ा रहे हैं। साथ ही आर्थिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए शुल्क एवं गैर-शुल्क बाधाओं को कम कर रहे हैं। इसमें कहा गया- भारत ने दुनिया की किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तुलना में अमेरिका पर सबसे अधिक शुल्क बनाए रखे हैं, जहां कृषि उत्पादों पर औसतन 37 प्रतिशत तक और कुछ वाहनों पर 100 प्रतिशत से अधिक शुल्क है। भारत का इतिहास अत्यधिक संरक्षणवादी गैर-शुल्क बाधाएं लगाने का भी रहा है जिनके कारण अमेरिका के कई निर्यात भारत में प्रतिबंधित रहे हैं।' दस्तावेज के अनुसार- आने वाले हफ्तों में अमेरिका और भारत इस ढांचे को शीघ्र लागू करेंगे और अमेरिकी श्रमिकों तथा कारोबार के लिए लाभ सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पारस्परिक रूप से लाभकारी बीटीए को अंतिम रूप देने की दिशा में अंतरिम समझौते पर काम करेंगे।' ब्रिटेन और ओमान के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA): केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने यह भी जानकारी दी कि केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन (UK) और ओमान के साथ भी भारत के बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) अप्रैल महीने में लागू होने की पूरी उम्मीद है। न्यूजीलैंड के साथ समझौता: इसके अलावा, भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले व्यापार समझौते के भी इसी साल सितंबर महीने तक लागू होने की संभावना जताई गई है। इन सभी व्यापारिक समझौतों के लागू होने से भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को एक नई गति मिलने और निर्यात के क्षेत्र में बड़े अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

अजान और लाउडस्पीकर विवाद पर मंत्री दानिश अंसारी का पलटवार, बोले- मुस्लिमों को गुमराह कर रही सपा

लखनऊ उत्तर प्रदेश में रमजान के पवित्र महीने से पहले लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर सियासत गरमा गई है। एक ओर जहां समाजवादी पार्टी (सपा) इसे पाबंदी के तौर पर पेश कर रही है, वहीं सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियम सबके लिए समान हैं। योगी सरकार के मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने सपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्षी दल मुसलमानों को डराकर और गुमराह करके अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहा है। कहा कि लाउडस्पीकर पर कोई मनाही नहीं है। क्या है पूरा विवाद? विवाद की शुरुआत कल विधानसभा में हुई, जब सपा विधायक कमाल अख्तर ने मांग की कि रमजान के दौरान सहरी और इफ्तार की सूचना देने के लिए मस्जिदों पर लाउडस्पीकर बजाने की विशेष अनुमति दी जाए। उन्होंने तर्क दिया कि त्योहारों पर सरकार छूट देती है। हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत ही धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतारे गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लाउडस्पीकर की परंपरा उस दौर की है जब घड़ियां नहीं होती थीं, अब इसकी वैसी आवश्यकता नहीं है। दानिश अंसारी का सपा पर प्रहार आज इस मुद्दे पर सफाई देते हुए मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने कहा कि लाउडस्पीकर पर कोई पूर्ण पाबंदी नहीं है। उन्होंने कहा, "समाजवादी पार्टी के नेताओं को भ्रामक बयान देने में मज़ा आता है। मैं जिम्मेदारी से कहता हूं कि मानक के अनुसार और प्रशासन से विधिवत अनुमति लेकर मस्जिदों, मंदिरों, गुरुद्वारों और चर्च, सभी जगहों पर लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति है।" दानिश अंसारी ने उदाहरण देते हुए कहा, "हम अभी विधानसभा परिसर में खड़े हैं। अगर आप शाम को लोकभवन के सामने मुख्य गेट पर जाएंगे, तो आपको मगरिब की अजान साफ़ सुनाई देगी। यह इस बात का प्रमाण है कि लाउडस्पीकर बज रहे हैं, लेकिन वे तय मानकों और डेसिबल सीमा के भीतर हैं।" सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का हवाला मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार केवल सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन कर रही है, जो रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर के शोर को प्रतिबंधित करती है। उन्होंने कहा कि हर धार्मिक स्थल इन नियमों का पालन कर रहा है। सपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आज यूपी का मुसलमान खुशहाल और समृद्ध है, लेकिन सपा उन्हें काल्पनिक डर दिखाकर विकास की मुख्यधारा से दूर रखना चाहती है। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि वे सपा के बहकावे में न आएं और प्रदेश की शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का मकसद किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि न्यायालय के आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करना है।  

केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने मिलन में अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि वे समुद्री क्षेत्र में लगातार जटिल और परस्पर संबद्ध चुनौतियों का आपसी सम्मान और सहयोग की भावना से प्रेरित होकर समाधान करने के लिए सामूहिक रूप से काम करें। बृहस्पतिवार को यहां 'अभ्यास मिलन' के उद्घाटन समारोह के दौरान 74 देशों के नौसेना प्रमुखों और प्रतिनिधिमंडलों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि जल दस्यु, समुद्री आतंकवाद, अवैध रूप से मछली पकड़ने, तस्करी जैसे पारंपरिक खतरे के साथ साथ अब साइबर खतरे और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान जैसी उभरती हुई चुनौतियों भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता बढ़ा रहा है जिससे मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान दिनों दिन अत्यधिक चुनौतीपूर्ण हो रहे हैं। कल रात जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में सिंह के हवाले से कहा गया है, ''अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापना में नौसेनाओं की भूमिका समय के साथ बढ़ती ही गई है। पिछले कुछ दशकों में तीव्र आर्थिक विकास हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय व्यापार और परिवहन में भारी वृद्धि हुई है। जलडमरूमध्य और जलमार्गों पर स्वामित्व के लिए प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है, जिससे कभी-कभी संघर्ष की आशंका भी पैदा हो जाती है।'' उन्होंने कहा कि जलमग्न संसाधनों, विशेषकर दुर्लभ खनिजों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान बढ़ने से तनाव में एक नया आयाम जुड़ रहा है। सिंह ने देशों और क्षेत्रों में फैल रही आतंकवादी गतिविधियों से जलक्षेत्रों की सुरक्षा की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी नौसेना चाहे कितनी भी सक्षम क्यों न हो, वह उभरती चुनौतियों का अकेले सामना नहीं कर सकती। उन्होंने एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए नौसेनाओं के बीच बेहतर सहयोग के महत्व पर बल दिया। केंद्रीय मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से संबंधित मामलों के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) द्वारा प्रदान किए गए मजबूत कानूनी ढांचे पर प्रकाश डाला जिसे एक व्यापक वैश्विक नौसेना संरचना के माध्यम से और मजबूत किया जा सकता है। सिंह के अनुसार, यूएनसीएलओएस राष्ट्रों के बीच विवादों के निवारण और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए एक व्यापक और समय-परीक्षित तंत्र प्रदान करता है, और व्यापक वैश्विक नौसैनिक वास्तुकला सूचना साझाकरण को सुगम बनाएगी, संचार के लिंक की रक्षा करेगी और खुले समुद्र में आतंकवाद सहित आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाएगी, साथ ही वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा करने की अपनी सामान्य भूमिका भी निभाएगी। उन्होंने कहा, ''जब हमारे जहाज एक साथ यात्रा करते हैं, जब हमारे नाविक एक साथ प्रशिक्षण लेते हैं और जब हमारे कमांडर एक साथ विचार-विमर्श करते हैं, तो हम एक साझा समझ विकसित करते हैं जो भूगोल और राजनीति से परे होती है और सहयोग के इस विचार पर मंथन का एक उपयुक्त अवसर प्रदान करती है।'' उनके अनुसार, यूएनसीएलओएस राष्ट्रों के बीच विवादों के समाधान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए एक व्यापक और समय की कसौटी पर खरा उतरने वाला तंत्र प्रदान करता है। यह व्यापक वैश्विक नौसैनिक संरचना सूचना साझाकरण को सुगम बनाएगी, संचार के माध्यमों की रक्षा करेगी और खुले समुद्र में आतंकवाद सहित आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाएगी, साथ ही वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा करने की अपनी सामान्य भूमिका भी निभाएगी। सिंह ने कहा कि स्थापित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में उथल-पुथल मची हुई है। उन्होंने कहा कि मिलन जैसे मंच पेशेवर विशेषज्ञता को साथ लाते हैं, आपसी विश्वास का निर्माण करते हैं, अंतर-संचालनीयता को बढ़ाते हैं और सामान्य चुनौतियों के लिए समन्वित प्रतिक्रियाओं को सक्षम बनाते हैं। समुद्री सहयोग के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास योजना (सागर) की परिकल्पना से प्रेरित होकर देशों का दृष्टिकोण अब संपूर्ण क्षेत्र की समग्र सुरक्षा एवं विकास (महासागर) की परिकल्पना में बदल गया है। उन्होंने कहा, ''सागर से महासागर की ओर यह बदलाव इस क्षेत्र और उससे परे के क्षेत्रों के साझेदारों के साथ जुड़ने की भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता दर्शाता है।'' राजनाथ सिंह ने कहा कि 'अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026' विश्व की नौसेनाओं के बीच सद्भावना, व्यावसायिकता और पारस्परिक सम्मान की स्पष्ट पुष्टि है।  

शिवाजी जयंती जुलूस बना विवाद की वजह: 3 राज्यों में झड़प, कई जगह आगजनी

नई दिल्ली देश के तीन अलग-अलग राज्यों कर्नाटक, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में पिछले 24 घंटों के भीतर सांप्रदायिक तनाव की खबरें सामने आई हैं। शिवाजी जयंती के जुलूस और धार्मिक प्रार्थनाओं के दौरान हुई इन झड़पों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। हालांकि पुलिस की मुस्तैदी के कारण किसी भी अप्रिय घटना की खबर नहीं है और वर्तमान में तीनों स्थानों पर स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। MP में मंदिर परिसर में तोड़फोड़ के बाद बवाल जबलपुर के संवेदनशील सिहोरा तहसील में गुरुवार रात उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब एक दुर्गा मंदिर परिसर में कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब मंदिर में शाम की आरती और पास की मस्जिद में नमाज का समय एक ही था। एक युवक ने कथित तौर पर मंदिर की ग्रिल को नुकसान पहुंचाया, जिससे दो समूहों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और पत्थरबाजी शुरू हो गई। जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और एसपी संपत उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक ढांचे को बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया और अब तक 20 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है। कर्नाटक में जुलूस पर पथराव, एसपी घायल कर्नाटक के बागलकोट में शिवाजी जयंती के जुलूस के दौरान हिंसा भड़क उठी। जब यह जुलूस पंका मस्जिद के सामने से गुजर रहा था, तब कथित तौर पर पथराव किया गया। पथराव के दौरान बागलकोट के पुलिस अधीक्षक (SP) सिद्धार्थ गोयल के सिर में मामूली चोट आई है। उन्होंने बताया कि मस्जिद की ओर से दो पत्थर फेंके गए थे। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, मस्जिद के पास डीजे पर 'मंदिर बनाएंगे' जैसे गाने बजाने को लेकर मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद तनाव बढ़ा। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 8 लोगों को गिरफ्तार किया है और शहर में अगले चार दिनों के लिए धारा 144 लागू कर दी गई है। आंध्र प्रदेश में नारेबाजी पर विवाद हैदराबाद के अंबरपेट इलाके में भी शिवाजी जयंती के जुलूस और रमजान की प्रार्थना के दौरान झड़प देखने को मिली। जब जुलूस एक मस्जिद के पास से गुजर रहा था, तब वहां मौजूद लोगों ने तेज संगीत और नारेबाजी पर आपत्ति जताई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई। अंबरपेट की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया। किसी के घायल होने या संपत्ति के नुकसान की खबर नहीं है। शुक्रवार को एहतियात के तौर पर इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।  

दुनिया के सबसे बड़े AI गठबंधन में भारत शामिल, चीन-पाकिस्तान रह गए किनारे

वाशिंगटन भारत ने AI समिट से इतर शुक्रवार को अमेरिका के नेतृत्व वाले Pax Silica अलायंस को जॉइन कर लिया है। यह समझौता नई दिल्ली में हुआ और इसके साथ ही भारत सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया के सबसे बड़े गठबंधन का हिस्सा बन गया है। इस संगठन का उद्देश्य यह है कि सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ्स मैटीरियल्स की सप्लाई किसी भी तरह से बाधित ना हो। खासतौर पर ऐसे देशों पर निर्भरता कम की जा सके, डो इस अलायंस का हिस्सा नहीं हैं। किसी का नाम इस समझौते में नहीं लिया गया है, लेकिन संगठन के मकसद से साफ है कि इशारा चीन की ओर है। पाकिस्तान भी इसका हिस्सा नहीं है। अमेरिका और भारत के अलावा Pax Silica में ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजरायल, जापान, कतर, साउथ कोरिया, सिंगापुर, ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं। इस समझौते के तहत यह तय हुआ है कि संबंधित देश सप्लाई चेन को मजबूत करेंगे और एक अच्छा ग्लोबल टेक ईकोसिस्टम तैयार किया जाएगा। AI समिट के आखिरी दिन इस समझौते पर साइन किए गए हैं। 5 दिन के इस आयोजन में दुनिया भर के टेक लीडर्स पहुंचे हैं। इसके अलावा AI सेक्टर में काम करने वाले करीब 600 स्टार्टअप्स भी इसका हिस्सा बने हैं। इस समझौते की जानकारी देते हुए आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने कहा, 'दुनिया का भारत पर भरोसा है। हमारे पास एक बड़ा टैलेंट पूल है। इसके साथ ही हम ऐसी विदेश नीति अपनाते हैं, जिससे लोगों में भरोसा पैदा होता है। हमने Pax Silica में शामिल होने पर सहमति दी है। यह ग्रुप सेमीकंडक्टर की सप्लाई चेन, मैन्युफैक्चरिंग और चिप डिजाइन के लिहाज से अहम है।' उन्होंने कहा कि इसका हिस्सा बनने से भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। अश्विनी वैष्णव बोले- 10 प्लांट तैयार, बननी शुरू होगी चिप वैष्णव ने कहा कि देश में 10 प्लांट तैयार हो चुके हैं। जल्दी ही पहला सेमीकंडक्टर प्लांट उत्पादन शुरू कर देगा। फिलहाल भारत में सबसे अडवांस नैनोमीटर चिप्स को डिजाइन किया जा रहा है। भारत में तेजी से AI और सेमीकंडक्टर बिजनेस में ईकोसिस्टम खड़ा हो रहा है और Pax Silica समझौता इस दिशा में अहम कड़ी है। इस समझौते के साइन होने के मौके पर अमेरिकी राजदूत सेरजियो गोर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि हम इसमें भारत का स्वागत करते हैं। Pax Silica एक ऐसा समझौता है, जो फ्री सोसायटी तैयार करेगा। इसके माध्यम से कहीं भी आविष्कार हो, सभी लोग साथ होंगे और सप्लाई चेन में किसी भी तरह से प्रभाव नहीं पड़ेगा। बता दें कि एआई समिट में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि भविष्य में एआई यदि अहम है तो उसकी दिशा में भारत और अमेरिका का समझौता मायने रखता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की पार्टनरशिप से AI का फायदा हर किसी को मिल सकेगा। पिचाई ने कहा कि गूगल को इस बात पर गर्व है कि हम दोनों देशों के बीच संबंधों में एक सेतु बने हैं।  

ट्रैफिक से छुटकारा! भारत में एयर टैक्सी की एंट्री, AI समिट में दिखा फ्यूचर ट्रांसपोर्ट

नई दिल्ली माना जा रहा है कि भविष्य में भारत को एयर टैक्सी की सुविधा जल्दी ही मिल सकती है। चर्चा है कि जल्दी ही भारत को यह मिलेगी और यह स्वदेशी तकनीक और लोगों द्वारा ही तैयार की गई है। इसे ईप्लेन नाम की कंपनी ने आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर तैयार किया है। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI समिट में कई अलग-अलग चीजें दुनिया को देखने को मिली हैं। यहां चीनी रोबोडॉग को अपना बताने के चलते गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर सवाल उठे तो वहीं कुछ ऐसे प्रयोग भी सामने आए हैं, जिनकी काफी सराहना हो रही है। इनमें से ही एक AI संचालित एयर टैक्सी का एक मॉडल है। इसे लेकर माना जा रहा है कि भविष्य में भारत को एयर टैक्सी की सुविधा जल्दी ही मिल सकती है। चर्चा है कि जल्दी ही भारत को यह मिलेगी और यह स्वदेशी तकनीक और लोगों द्वारा ही तैयार की गई है। इसे ईप्लेन नाम की कंपनी ने आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर तैयार किया है। इसे लेकर कंपनी का कहना है कि भारी जाम वाले शहरों में इसके इस्तेमाल से राहत मिल सकेगी। दिलचस्प बात यह है कि इसके लिए किसी तरह के रनवे की भी जरूरत नहीं होगी। कंपनी का दावा है कि 8 मिनट में यह टैक्सी 36 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है। हालांकि इसका किराया थोड़ा अधिक रहेगा। कंपनी ने उदाहरण देते हुए बताया है कि यदि बेंगलुरु के केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से यूबी सिटी जाना हो तो दो घंटे का वक्त लगता है। सड़क से जाने पर कैन का किराया 1000 रुपये देना होता है। लेकिन इस एयरटैक्सी से यह सफर महज 8 मिनट में ही पूरा होगा। इसके लिए 1700 रुपये किराये के तौर पर चुकाने होंगे। एक बार की चार्जिंग पर लगा सकेगी कई राउंड इसके अलावा एक बड़ा फीचर यह भी बताया जा रहा है कि एक बार चार्ज करने के बाद यह कई ट्रिप मार सकती है। इसका नाम कंपनी ने (e-VTOL) रखा है, जिसका अर्थ है- इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ ऐंड लैंडिंग। आमतौर पर एयरप्लेन और हेलिकॉप्टर जब उड़ान भरते हैं तो काफी आवाज आती है, लेकिन इसमें ऐसा नहीं होगा। इसकी आवाज 120 डेसिबल से कम ही होगी। यहां तक कि नीचे चल रहे लोगों को यह भी अहसास नहीं होगा कि ऊपर कोई एयर टैक्सी उड़ रही है। इसका उड़ान भरना बेहद आसान होगा और उसकी लैंडिंग में भी कोई समस्या नहीं होगी। बैटरी से ही चलेगी यह टैक्सी, खर्च भी काफी कम; डिजाइन मंजूर कंपनी के फाउंडर विकल्प मित्तल का कहना है कि इसका संचालन बैटरी से ही होगा। इसके चलते इसकी परिवहन लागत भी कम होगी। हेलिकॉप्टर्स का संचालन काफी महंगा होता है क्योंकि उनमें तेल काफी खर्च होता है। मित्तल के अनुसार इस एयरटैक्सी को पूरी तरह भारत में ही मद्रास आईआईटी में तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि चिप्स और मोटर जैसी जरूरी चीजों को भारत में ही डिजाइन किया गया है। बस उनकी मैन्युफैक्चरिंग बाहर हुई थी। मित्तल ने कहा कि उड्डयन महानिदेशालय से इसके डिजाइन के लिए अप्रूवल लिया था और उसके बाद ही इसे तैयार करने का प्रयास हुआ है। उन्होंने कहा कि पहला प्रोडक्शन मॉडल जब तैयार हो जाएगा तो इसकी टेस्टिंग की जाएगी।  

नमो भारत की स्पीड का कमाल, सराय काले खां से बेगमपुल तक 39 मिनट में पहुंचेंगे यात्री

नई दिल्ली नमो भारत ट्रेन के लिए सराय काले खां स्टेशन पूरी तरह तैयार हो चुका है। 22 फरवरी से आम यात्री इस ट्रेन में सफर कर सकेंगे। सराय काले खां से मेरठ तक का सफर महज 55 मिनट में तय होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 फरवरी को मेरठ में इस पूरे कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। इस बीच, नमो भारत स्पेशल ट्रेन सराय काले खां स्टेशन से बेगम पुल स्टेशन तक महज 39 मिनट में पहुंच गई। अभी 11 स्टेशनों के बीच सर्विस प्रधानमंत्री मोदी दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम की 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। इस कॉरिडोर पर सराय काले खां, आनंद विहार, गाजियाबाद, गुलधर, मुरादनगर, मोदीनगर साउथ, मोदीनगर नॉर्थ और मेरठ साउथ जैसे 16 प्रमुख स्टेशन शामिल हैं। नमो भारत कॉरिडोर पर अभी दिल्ली के न्यू अशोक नगर से मेरठ तक 11 स्टेशनों के बीच सर्विस दी जा रही हैं। पूरे दिल्ली-एनसीआर को फायदा होगा 22 फरवरी को पूरा कॉरिडोर शुरू होने के बाद दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ ही नहीं बल्कि फरीदाबाद, गुरुग्राम और नोएडा के लाखों लोगों को भी इससे काफी फायदा मिलेगा। मेरठ के चार फ्लोर का बेगमपुल स्टेशन आधुनिक सुविधाओं से लैस है। यहां हर तरह की वह सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे कि यात्री अपने गंतव्य तक सफर करते हुए आनंद ले सकें। मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर का अद्भुत नमूना है सराय काले खां स्टेशन सराय काले खां स्टेशन मॉडर्न इंफ्रास्टक्चर का एक अद्भुत नमूना है। स्टेशन में 6 प्लेटफार्म और 4 ट्रैक, 18 एस्केलेटर और सीसीटीवी कैमरे हैं। स्टेशन आधुनिक सुविधाओं जैसे एस्केलेटर, लिफ्ट और वातानुकूलित वेटिंग एरिया से सुसज्जित है। स्टेशन में 6 प्रवेश और निकास द्वार भी हैं, जो भीड़ को नियंत्रित करने में सहायक होंगे। सराय काले खां स्टेशन नमो भारत कॉरिडोर के सबसे बड़े स्टेशनों में से एक है। यात्रा के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव की संभावना एनसीआरटीसी यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम ने इस स्टेशन को एक आधुनिक मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया है। यहां से यात्री रेलवे, बस, मेट्रो और अन्य परिवहन साधनों से आसानी से जुड़ सकेंगे। 'नमो भारत' ट्रेन सेवा से दिल्ली-एनसीआर में लोगों के यात्रा करने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव आने की संभावना है।

बांग्लादेश में सत्ता बदलाव का असर: तारिक रहमान सरकार के बड़े कदम से भारत संग संबंध पटरी पर

नई दिल्ली मोहम्मद यूनुस की रवानगी होते ही बांग्लादेश और भारत के संबंध सुधरने लगे हैं। शुक्रवार को तारिक रहमान सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए बंद पड़ीं वीजा सेवाओं को फिर से बहाल कर दिया। बांग्लादेश ने नई दिल्ली में अपने हाई कमीशन में भारतीय नागरिकों के लिए वीजा सर्विस लगभग दो महीने बाद फिर से शुरू कर दी है। इंडिया टुडे के मुताबिक, शुक्रवार सुबह वीजा सर्विस फिर से शुरू कर दी गईं। यह डेवलपमेंट बांग्लादेश में पिछले दिनों बनी बीएनपी की सरकार के ऑफिस संभालने के तीन दिन बाद हुआ है। रहमान के दौर में दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार आने की संभावना है।

क्या जंग के मुहाने पर हैं अमेरिका और ईरान: सैन्य ताकत, पलटवार की योजना और युद्ध के असर

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष की आहट बढ़ती जा रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने दो एयरक्राफ्ट कैरियर बेड़ों को ईरान की खाड़ी पर तैनात करने  के आदेश दे दिए। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। ईरान ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य में एक युद्धाभ्यास कर इस क्षेत्र को पूरी तरह बंद करने का संकेत दिया, जो वैश्विक तेल सप्लाई में बाधा पहुंचाने वाला कदम साबित हो सकता है। यानी अमेरिका से लेकर यूरोप और अफ्रीका से लेकर पूरे एशिया के लिए आने वाले दिन कूटनीतिक स्तर पर काफी अहम होने वाले हैं। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अमेरिका और ईरान के बीच हालिया विवाद क्यों और कब से उभरा है? अमेरिका की तरफ से कौन से हथियार और बेड़े पश्चिम एशिया की तरफ भेजे गए हैं? ईरान इस स्थिति से निपटने के लिए कैसे तैयारी कर रहा है? अगर दोनों देशों के बीच संघर्ष भड़कता है तो इसका क्या असर हो सकता है? पहले जानें- ईरान-अमेरिका के बीच कैसे-क्यों भड़का है तनाव? ईरान-अमेरिका के बीच तनाव ईरान में महंगाई को लेकर विरोध प्रदर्शनों और उसके खिलाफ सरकारी कार्रवाई के बीच बढ़ा। तनाव की एक और वजह इस दौरान अमेरिका की ओर से पश्चिम एशिया में की गई सैन्य तैनाती भी रही, जिसके जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के अयातुल्ला शासन को खत्म करने की चेतावनी दे रहे हैं। इन सबके साथ ही ईरान का परमाणु कार्यक्रम हमेशा से ही दोनों पक्षों में तनाव का बड़ा कारण रहा है। 1. परमाणु कार्यक्रम अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना चाहता है और राष्ट्रपति ट्रंप एक नए परमाणु समझौते के लिए दबाव बना रहे हैं। 2. आंतरिक विरोध प्रदर्शन दिसंबर 2025 में ईरान में बढ़ती कीमतों और गिरती मुद्रा के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों पर ईरानी सरकार की सख्त कार्रवाई हुई। इसमें हजारों लोगों के मारे जाने की खबर है। बताया जाता है कि इन घटनाओं को खुद अमेरिका ने भड़काया, ताकि वह ईरान के मामलों में दखल दे सके। 3. क्षेत्रीय सुरक्षा ईरान का लगातार बढ़ता बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और इस्राइल जैसे अमेरिकी सहयोगियों पर बढ़ता खतरा भी दोनों देशों के बीच तनाव का बड़ा कारण है। इसके अलावा सऊदी अरब, यूएई भी अलग-अलग मौकों पर ईरान को लेकर खतरा जताते रहे हैं। अमेरिका की तरफ से कौन से हथियार और बेड़े पश्चिम एशिया की तरफ भेजे गए हैं? अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के सूत्रों और सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से अमेरिकी मीडिया ने दावा किया है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में 2003 के इराक आक्रमण के बाद से अब तक की सबसे बड़ी सैन्य लामबंदी की गई है। इन सैन्य बेड़ों में अमेरिका के सबसे घातक एफ-22 रैप्टर लड़ाकू विमान से लेकर सबसे बड़े और खतरनाक युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड शामिल हैं। 1. नौसैनिक बेड़े विमानवाहक पोत: अमेरिका ने इस क्षेत्र में दो परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत तैनात किए हैं। पहला यूएसएस अब्राहम लिंकन है, जो जनवरी के अंत में अरब सागर पहुंच चुका है। इसके बाद दुनिया के सबसे बड़े और आधुनिक विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को भी क्षेत्र में पहुंचने का आदेश दिया गया है। यह मौजूदा समय में अटलांटिक महासागर से पश्चिम एशिया के रास्ते पर है। विध्वंसक पोत: वर्तमान में क्षेत्र में कुल 13 विध्वंसक पोत तैनात किए जा चुके हैं। इनमें यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ आए तीन प्रमुख पोत- यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, यूएसएस स्प्रुआंस और यूएसएस माइकल मर्फी शामिल हैं। ये पोत उन्नत रडार और बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों से लैस हैं। 2. वायु शक्ति और लड़ाकू विमान लड़ाकू विमान: अमेरिका ने बड़ी संख्या में एफ-22 रैप्टर और एफ-35 लाइटनिंग II जैसे स्टील्थ फाइटर जेट तैनात किए हैं। इनके अलावा एफ-15 और एफ-16  फैल्कन लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन भी भेजी गई हैं। सहायक विमान: हवाई अभियानों के संचालन के लिए ई-3 सेंट्री (अवाक्स) टोही विमान, केसी-135 रिफ्यूलिंग टैंकर और ई-11 युद्धक्षेत्र संचार विमान तैनात किए गए हैं। ड्रोन और बमवर्षक: जॉर्डन के मुवाफ्फाक साल्टी एयर बेस पर कम से कम पांच एमक्यू-9 रीपर ड्रोन देखे गए हैं। इसके अलावा, डिएगो गार्सिया द्वीप पर बी-2 स्टील्थ बमवर्षक विमानों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। इन्हीं बी-2 बमवर्षक विमानों के जरिए अमेरिका ने पिछले साल ऑपरेशन मिडनाइट हैमर को अंजाम दिया था और ईरान के परमाणु ठिकानों पर जीबीयू-57 बम बरसाए थे। 3. मिसाइल और रक्षा प्रणालियां हमलावर मिसाइलें: अमेरिकी युद्धपोत टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस हैं, जिनका इस्तेमाल पहले भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के दौरान रक्षा व्यवस्थाओं को ध्वस्त करने के लिए किया जा चुका है। हवाई रक्षा प्रणालियां: ईरानी मिसाइलों के जवाबी हमले से सुरक्षा के लिए पेंटागन ने क्षेत्र में अतिरिक्त पैट्रियट और एयर डिफेंस सिस्टम (THAAD) हवाई रक्षा प्रणालियां तैनात की हैं। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर: विमानवाहक पोतों पर इलेक्ट्रॉनिक-वारफेयर विमान और एएन/एसएलक्यू-25ए निक्सी जैसे डिकॉय सिस्टम भी मौजूद हैं, जो दुश्मन के हथियारों को भ्रमित कर सकते हैं और अपने किसी भी हथियार को हमले से बचा सकते हैं। मौजूदा समय में कहां है अमेरिका का यह सैन्य जमावड़ा? अमेरिका का यह सैन्य जमावड़ा ईरान के इर्द-गिर्द कई रणनीतिक स्थानों पर तैनात है, इनमें प्रमुख एयरबेस और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र जॉर्डन, सऊदी अरब और ओमान के पास स्थित हैं। इसके अलावा अरब सागर, हिंद महासागर, बहरीन और कतर में भी अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने और सुविधाएं मौजूद हैं। पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ईरान कैसे कर रहा अमेरिका के हमले का जवाब देने की तैयारी? अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के जवाब में ईरान ने भी अपनी सैन्य और रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। 1. सैन्य हाई अलर्ट और जवाबी हमले की चेतावनी 25 जनवरी को ईरान ने घोषणा की कि उसके सशस्त्र बल पूर्ण सतर्कता की स्थिति में आ गए हैं। ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने चेतावनी दी है कि यदि उसे उकसाया गया, तो वह ऐसा जवाब देगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया। 2. रणनीतिक नौसैनिक अभ्यास होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान ने अपनी ताकत दिखाने के लिए कई लाइव-फायर ड्रिल्स की हैं। ईरान का यह अभ्यास इसलिए भी अहम है, क्योंकि … Read more

बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

नई दिल्ली. भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुक्रवार को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की प्रभावी सुनवाई न हो, इसके लिए कई कोशिशें की गई थीं.  उन्होंने ये बातें वरिष्ठ अधिवक्ता अनिरुद्ध शर्मा और श्रीधर पोटाराजू द्वारा लिखी 'केस फॉर राम- द अनटोल्ड इनसाइडर्स स्टोरी' नामक किताब के मौके पर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में कही हैं.  'वकीलों ने किया वॉकआउट' मेहता ने कहा कि कभी-कभी अप्रत्यक्ष कोशिशें तो कभी-कभी बहुत ज्यादा स्पष्ट प्रयास किए गए, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि मामले की सुनवाई न हो. उन्होंने एक घटना का जिक्र किया, जिससे उनके मन में बहुत कड़वाहट पैदा हो गई. उन्होंने कहा, 'जब देरी करने के सभी कोशिशें विफल हो गईं तो  तो दो प्रख्यात वकीलों ने कोर्ट से वॉकआउट कर दिया, ये कुछ ऐसा था जो हमने केवल संसद में सुना था.'  सॉलिसिटर जनरल ने सुनवाई को रोकने के लिए किए गए कथित प्रयासों पर जोर देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने न्यायिक राजनेता का अद्भुत कौशल दिखाया, जिससे ये मामला सही दिशा में आगे बढ़ा. 'हर मामले में टर्निंग पॉइंट था मामला' मेहता ने कहा कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामला कई मायनों में एक महत्वपूर्ण मोड़ था और वरिष्ठ अधिवक्ता अनिरुद्ध शर्मा और श्रीधर पोताराजू द्वारा लिखित पुस्तक पूरे घटनाक्रम की पूरी कहानी बताती है. उन्होंने कहा कि ये सिर्फ तथ्यों का संकलन नहीं है. ये इतिहास नहीं, बल्कि घटनाओं की जीवंत कथा है. ये मामला इतिहास से जुड़ा था और इतिहास बनाने वाला था. कानूनी, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक- हर दृष्टि से ये एक टर्निंग पॉइंट था. उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं अनिरुद्ध शर्मा और श्रीधर पोटाराजू द्वारा लिखी गई ये किताब पूरे क्रम को बयान करती है. इस कार्यक्रम में भारतीय पुरातत्वविद् के के मोहम्मद और वरिष्ठ अधिवक्ता गुरु कृष्ण कुमार ने भी भाग लिया. दरअसल, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 2019 के ऐतिहासिक फैसले में अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण की सर्वसम्मति से अनुमति दी थी. अदालत ने अपने फैसले में पूरे 2.77 एकड़ भूखंड को मंदिर के लिए आवंटित किया गया और मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ अलग प्लॉट दिया गया था.