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असम चुनाव की तैयारी तेज, SIR पूरा; CEC बोले—EVM में होगा अहम बदलाव

नई दिल्ली असम में चुनाव की तैयारियों और हाल ही में खत्म हुई SIR प्रक्रिया पर, चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने कहा, प्योर इलेक्टोरल रोल लोकतंत्र की नींव हैं. असम में हाल ही में खत्म हुई SIR का मकसद था कि कोई भी योग्य वोटर बाहर न हो और कोई भी अयोग्य वोटर शामिल न हो. फाइनल इलेक्टोरल रोल में, लगभग 2.49 करोड़ लोगों को शामिल किया गया है. घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए: ज्ञानेश कुमार असम में SIR समाप्त हो चुका है. यहां का स्पेशल रिविजन 12 अन्य राज्यों से अलग है. बाकी 12 राज्यों के 51 करोड़ मतदाताओं के SIR का अंतिम चरण सामने आ चुका है और कई के समाप्त हो चुके हैं. असम में SIR पर चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने कहा, असम में SIR करने का सिर्फ एक ही मकसद था – सभी एलिजिबल वोटर्स को शामिल करना और इनएलिजिबल वोटर्स को बाहर करना. अवैध घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट से कटे हैं और नये वोटर जो युवा हैं, जो पहली बार वोट करेंगे उनके नाम जोड़े गए हैं. EVM पर उम्मीदवारों की रंगीन फोटो दिखाई जाएंगी : ज्ञानेश कुमार असम में चुनाव की तैयारियों के रिव्यू पर चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने कहा, इस बार, EVM पर उम्मीदवारों की रंगीन फोटो दिखाई जाएंगी, और उनके नाम और सीरियल नंबर बड़े फॉन्ट में दिखाए जाएंगे. हमने हर पोलिंग सेंटर पर 1,200 वोटरों की लिमिट भी तय की है. पहली बार, असम में वोटर वोटिंग सेंटर के एंट्री पॉइंट पर अपने मोबाइल फोन रख सकेंगे. चुनाव कार्यक्रम मार्च के मध्य में हो सकता है जारी पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में अप्रैल में अलग-अलग तारीखों पर विधानसभा चुनाव हो सकते हैं, जिससे संबंधित कार्यक्रम मार्च के मध्य में घोषित किए जाने की संभावना है. चुनाव अप्रैल में अलग-अलग तारीखों पर हो सकते हैं. पांचों विधानसभाओं का कार्यकाल मई और जून में अलग-अलग तारीखों पर खत्म हो रहा है. पुडुचेरी विधानसभा का पांच साल का कार्यकाल 15 जून को खत्म होगा, वहीं असम का 20 मई, केरल का 23 मई, तमिलनाडु का 10 मई और पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को खत्म हो रहा है.

रात 10 बजे के बाद ट्रेन में लागू हो जाते हैं ये नियम, 99% लोग होंगे अनजान

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे देश की सबसे बड़ी परिवहन सेवाओं में से एक है और हर दिन करोड़ों यात्री इससे सफर करते हैं। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने कई नियम बनाए हैं। खासकर रात के समय यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए कुछ विशेष नियम लागू किए जाते हैं। अगर आप रात में ट्रेन से सफर कर रहे हैं, तो इन नियमों की जानकारी होना जरूरी है। तो आइए जानते हैं कि रात के 10 बजे के बाद ट्रेन में कौन-कौन से नियम लागू हो जाते हैं और यात्रियों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। रात 10 बजे के बाद टिकट चेकिंग का नियम रेलवे के नियमों के मुताबिक रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक टीटीई (ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर) सो रहे यात्रियों को टिकट दिखाने के लिए परेशान नहीं कर सकता। यह नियम स्लीपर और एसी दोनों कोच पर लागू होता है। हालांकि, जो यात्री रात 10 बजे के बाद ट्रेन में चढ़ते हैं, उनसे टिकट जांच की जा सकती है। यदि कोई अधिकारी बिना कारण बार-बार परेशान करता है, तो यात्री रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। शोर-शराबे पर सख्ती रात के समय ट्रेन में शांति बनाए रखना अनिवार्य है। तेज आवाज में बात करना, मोबाइल पर लाउडस्पीकर चलाना या बिना हेडफोन गाने सुनना नियमों के खिलाफ है। यदि किसी यात्री की वजह से दूसरों की नींद या आराम में बाधा आती है, तो उस पर कार्रवाई हो सकती है। रेलवे एक्ट 1989 की धारा 145 के तहत शांति भंग करने पर 500 से 1000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। लाइट और अन्य सुविधाओं के नियम रात 10 बजे के बाद कोच की मुख्य लाइट बंद कर दी जाती है और केवल नाइट लाइट चालू रहती है। समूह में यात्रा कर रहे लोग भी ऊंची आवाज में बातचीत नहीं कर सकते। कुछ ट्रेनों में देर रात भोजन सेवा बंद कर दी जाती है। जरूरत हो तो पहले से खाना बुक किया जा सकता है।     सफाई कर्मचारियों की आवाजाही रात में सीमित रहती है।  सुरक्षा कारणों से कई ट्रेनों में रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक चार्जिंग पॉइंट बंद किए जा सकते हैं। मिडिल बर्थ से जुड़ा नियम स्लीपर कोच में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक मिडिल बर्थ वाला यात्री अपनी सीट खोल सकता है। इस दौरान लोअर बर्थ पर बैठे यात्री उसे रोक नहीं सकते। सुबह 6 बजे के बाद मिडिल बर्थ को वापस बंद करना होता है, ताकि नीचे बैठने वाले यात्रियों को सुविधा मिल सके। क्यों जरूरी हैं ये नियम? इन नियमों का उद्देश्य यात्रियों को रात के समय शांत और सुरक्षित यात्रा का अनुभव देना है। सही जानकारी होने से आप अनावश्यक विवाद और असुविधा से बच सकते हैं। अगर आप अगली बार रात में ट्रेन से सफर करें, तो इन नियमों का ध्यान रखें और दूसरों की सुविधा का भी सम्मान करें।

पीएफ निवेशकों के लिए खबर: EPFO ब्याज दर पर 11 दिन में फैसला होने वाला

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO वित्त वर्ष 2026 के लिए पीएफ अकाउंट होल्डर्स के लिए ब्याज में संशोधन करके इसे बढ़ाएगा या फिर PF Interest Rate यथावत रहेंगे, इस पर ऐलान महज 11 दिन बाद होने वाला है. इसे लेकर अगले महीने की शुरुआत में 2 मार्च को समिति की अगली बैठक होगी, जिसमें पीएफ ब्याज दर को लेकर अंतिम फैसला लिए जाने की उम्मीद है.  स्थिर रह सकता है ब्याज! बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 2 मार्च को होने वाली बैठक में PF Interest Rates पर फैसला होने की उम्मीद है.फिलहाल, पीएफ खाते पर सरकार की ओर से 8.25% का ब्याज दिया जा रहा है और ऐसे उम्मीद जताई जा रही है कि EPFO इसे इसी स्तर पर बनाए रख सकता है. अगर ऐसा होता है, तो ये लगातार तीसरी बार होगा, जब मेंबर्स को उनके भविष्य निधि जमा पर 8.25% का ही ब्याज मिलेगा. रिपोर्ट की मानें, तो EPFO ब्याज को स्थिर रखने का उद्देश्य बाजार में उतार-चढ़ाव होने पर भी ग्राहकों को स्थिर और निरंतर ब्याज दर देते रहना है. ईपीएफओ के पास इस फाइनेंशियल ईयर में 8.25% ब्याज दर बनाए रखने के लिए अपने निवेश से पर्याप्त अधिशेष होगा.  मनसुख मंडाविया करेंगे बैठक का नेतृत्व  PF Interest Rate के प्रस्ताव पर ईपीएफओ के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) द्वारा चर्चा करते हुए निर्णय लिया जाएगा. इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया करेंगे. इससे पहले सीबीटी की आखिरी बैठक बीते साल 15 अक्तूबर को हुई थी. उसमें कई बड़े ऐलान किए गए थे, जिनमें पीएफ के पैसों की निकासी को आसान आसान बनाने के उद्देश्य से कई सुधारों की घोषणा की थी. सूत्रों के अनुसार, इस बार भी बोर्ड सदस्यों के लिए लेन-देन को सरल बनाने के लिए और अधिक सुधारों पर विचार किया जा सकता है. इनमें EPFO वेबसाइट को अपग्रेड करना, विद्ड्रॉल में तेजी और क्लेम सेटलमेंट में तेजी जैसे उपाय शामिल हो सकता हैं. हालांकि, अभी तक ईपीएफओ की ओर से अगली बैठक का एजेंडा जारी नहीं किया गया है. अगले वित्त वर्ष के लिए ये अनुमान एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले सालों में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को निवेश के नए रास्तों की तलाश करनी पड़ सकती है. मतलब साफ है कि अगर इनकम पर दबाव पड़ता है तो इससे अगले वित्तीय वर्ष से कम रिटर्न पर विचार-विमर्श देखने को मिल सकता है.  ईपीएफओ कहां-कहां करता है निवेश?  गौरतलब है कि EPFO करीब 28 लाख करोड़ रुपये के कोष मैनेज करता है. संगठन नए निवेश का 45 से 65% हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों (Govt Securities) में निवेश करता है. इसके अलावा करीब 20 से 45% अन्य ऋण साधनों (Debt Instruments) में निवेश किया जाता है. वहीं 5 से 15% तक एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों के जरिए इक्विटी में लगाया जाता है, जबकि 5% तक शॉर्ट टर्म कर्ज साधनों में निवेश किया जाता है. निवेश का यह मैनेजमेंट ईपीएफओ बैलेंस को सुरक्षा और रिटर्न के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है, क्योंकि अधिकांश रकम अपेक्षाकृत स्थिर ऋण साधनों में ही निवेश की जाती है. इस तरह से आरक्षित कोष उन वर्षों में रिटर्न को सुचारू रखने में मददगार साबित होता है, जबकि निवेश से होने वाली इनकम कम होती है. 

जहां दफन था पाकिस्तान का गुरूर, वहीँ भारत का ‘निस्तार’ सीना ताने खड़ा

विशाखापत्तनम  इंडियन नेवी के इतिहास में कुछ तारीखें और कुछ जगहें ऐसी हैं, जो दुश्मन के कलेजे में हमेशा खौफ पैदा करती हैं. इस साल का इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) और ‘मिलन’ एक्सरसाइज एक बार फिर उसी इतिहास को जिंदा करने जा रहा है. इस आयोजन का सबसे बड़ा संदेश विशाखापत्तनम के उस समंदर से निकल रहा है, जहां आज से ठीक 55 साल पहले पाकिस्तान की अकड़ और उसका गुरूर पीएनएस गाजी (PNS Ghazi) हमेशा के लिए दफन हो गया था. गर्व की बात यह है कि जहां गाजी की कब्र है, आज ठीक उसी जगह भारत का अपना स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) ‘निस्तार’ सीना ताने खड़ा है. यह सिर्फ एक जहाज की मौजूदगी नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान के लिए एक ऐसा ट्रॉमा है जिसे वह कभी भूल नहीं पाएगा. 1971 की वो घटना, जब गाजी शिकार बन गया     बात 1971 की है, जब पाकिस्तान ने भारत के सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) को डुबोने के लिए अपनी सबसे घातक अमेरिकी सबमरीन पीएनएस गाजी को भेजा था. पाकिस्तान को लगा था कि गाजी चुपचाप आएगी और विशाखापत्तनम के पास विक्रांत का काम तमाम कर देगी. लेकिन इंड‍ियन नेवी की रणनीति के आगे गाजी की एक न चली.     आईएनएस राजपूत ने विशाखापत्तनम के तट के पास ही गाजी को ट्रैक किया और समंदर की गहराइयों में उसे हमेशा के लिए सुला दिया. उस वक्त जब गाजी के मलबे को खोजने और समंदर के नीचे डाइविंग ऑपरेशन चलाने की बारी आई, तो यह काम नेवी के तत्कालीन आईएनएस निस्तार ने बखूबी अंजाम दिया था. आज उसी ‘निस्तार’ का आधुनिक और स्वदेशी अवतार उसी जगह मौजूद है, जो पाकिस्तान के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है. आईएनएस निस्तार यानी समंदर का बादशाह भारतीय नौसेना को 18 जुलाई 2025 को अपना पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल मिला. इससे पहले नौसेना के पास ऐसे जहाजों की भारी कमी थी, लेकिन अब निस्तार और निपुण के आने से भारत इस क्षेत्र में सेल्फ-रिलायंट बन गया है. न‍िस्‍तार की खूब‍ियां ऐसी हैं, ज‍िससे इसे समंदर के बादशाह के नाम से भी जाना जाता है. ‘निस्तार’ क्यों है इतना खास?     संस्कृत में ‘निस्तार’ का अर्थ होता है ‘मुक्ति’ या ‘उद्धार’. इससे आप न‍िस्‍तार की ताकत का अंदाजा लगा सकते हैं. वैसे तो इसका मुख्य काम किसी भी सबमरीन इमरजेंसी के दौरान नौसैनिकों का रेस्क्यू करना है. लेकिन यह बहुत काम की चीज है.     यह जहाज अपने साथ डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल ले जाता है, जो गहरे समंदर में जाकर फंसी हुई सबमरीन से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल सकता है. हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा बनाया गया यह जहाज लगभग 80 प्रतिशत स्वदेशी है.     निस्तार 120 मीटर लंबा और 10,000 टन वजनी है. यह 18 नॉटिकल मील प्रति घंटा की रफ्तार से सफर करता है. यह अत्याधुनिक डाइविंग उपकरणों और सबमरीन रेस्क्यू सपोर्ट सिस्टम से लैस है. विशाखापत्तनम में पाकिस्तान के लिए ‘डेथ जोन’ इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में चीन और पाकिस्तान को कभी नहीं बुलाया जाता, लेकिन भारत की यह सामरिक तैयारी उनके लिए सबसे बड़ी चेतावनी है. जिस जगह गाजी डूबा था, आज वहां सिर्फ निस्तार ही नहीं, बल्कि भारत का स्वदेशी आईएनएस विक्रांत भी मौजूद है. यह वही विक्रांत है जिसे डुबोने का सपना लेकर गाजी आया था. आज विक्रांत का नया अवतार उसी जगह खड़ा होकर दुनिया को बता रहा है कि भारत की समुद्री सीमाएं अब अभेद्य हैं. निस्तार और निपुण की जोड़ी अभेद्य नेवी के इस प्रोजेक्ट के तहत दो डाइविंग सपोर्ट वेसल तैयार किए जा रहे हैं. निस्तार के बाद अब ‘निपुण’ पर काम तेजी से चल रहा है. ये दोनों जहाज भारतीय नौसेना को दुनिया की उन चुनिंदा नौसेनाओं की कतार में खड़ा कर देंगे जिनके पास अपनी सबमरीन रेस्क्यू क्षमता है. कुल मिलाकर, विशाखापत्तनम में आईएफआर (IFR) का यह आयोजन केवल एक प्रदर्शन नहीं है. यह पाकिस्तान की उस हार का जश्न है जिसने 1971 में दक्षिण एशिया का भूगोल बदल दिया था. जहां पाकिस्तान का गुरूर दफन हुआ था, आज वहां भारत का ‘निस्तार’ खड़ा होकर नए भारत की बुलंद तस्वीर पेश कर रहा है.

AMCA प्रोजेक्ट में बड़ा कदम! टाटा के हाथ में 5th Gen जेट बनाने की जिम्मेदारी

मुंबई  भारत ने पांचवीं पीढ़ी के देसी स्टेल्थ फाइटर जेट (5th Gen Fighter Jet) एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए बड़ा कदम उठाया है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने इस 5th जेन फाइटर जेट का प्रोटोटाइप डिजाइन करने के लिए तीन दावेदारों को शॉर्टलिस्ट किया है. इनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड सबसे बड़ी दावेदार के तौर पर उभरी है, जबकि लार्सन एंड टुब्रो–भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का कंसोर्टियम और भारत फोर्ज (BEML लिमिटेड) डेटा पैटर्न्स का संयुक्त समूह शामिल है. एएमसीए प्रोजेक्ट के तहत भारत का स्वदेशी सिंगल-सीटर, ट्विन-इंजन स्टेल्थ फाइटर जेट विकसित किया जाना है, जिसमें एडवांस्ड स्टेल्थ कोटिंग और इंटरनल वेपन बे जैसी अत्याधुनिक खूबियां होंगी. इस परियोजना के अंतर्गत 125 से अधिक फाइटर जेट तैयार किए जाने की योजना है, जिनके 2035 तक भारतीय वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद है. इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनके पास पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट हैं. ये विमान अमेरिका के पांचवी पीढ़ी के विमान F-35 और रूसी फिफ्थ जेन फाइटर जेट Su-57 की टक्कर के होंगे. इस 5th जेनरेशन स्टेल्थ फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) का पहला प्रोटोटाइप 2028 के आखिर तक रोल आउट होने वाला है, और पहली उड़ान 2029 में प्लान की गई है. इस प्रोजेक्ट का मकसद पांच उड़ने वाले प्रोटोटाइप डेवलप करना है, जिसका पूरा डेवलपमेंट 2034 तक पूरा होने और शुरुआती प्रोडक्शन 2035 तक होने का टारगेट है. HAL और अडाणी डिफेंस ने भी लगाई थी बोली रिपोर्ट के मुताबिक, डीआरडीओ ने अपनी एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के जरिये जुलाई 2025 में इस परियोजना के लिए टेंडर जारी किए थे. शुरुआत में सात कंसोर्टियम ने बोली लगाई थी, जिनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और अडाणी डिफेंस जैसे नाम शामिल थे. शॉर्टलिस्ट किए गए दावेदारों को अब सरकार की ओर से फंडिंग सहायता मिलने की संभावना है, ताकि वे एएमसीए के प्रोटोटाइप विकसित कर सकें. इसके बाद ही उत्पादन अधिकार दिए जाएंगे. सूत्रों के हवाले से बताया कि, HAL शुरुआती स्क्रीनिंग में एक अनिवार्य दस्तावेजी मानदंड में त्रुटि के कारण बाहर हो गया. हालांकि कंपनी को बाद में लाइसेंस निर्माण के लिए बोली लगाने का अवसर मिल सकता है. HAL के सीएमडी डीके सुनील ने हाल ही में कहा था कि एएमसीए एक 10 साल की परियोजना है और भले ही उनकी कंपनी शुरुआती चरण में चयनित न हो, वह आगे लाइसेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूर बोली लगाएगी. भारत के 5th Gen फाइटर जेट प्रोजेक्ट की खास बातें… भारत का AMCA प्रोग्राम क्या है? AMCA यानी Advanced Medium Combat Aircraft भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट प्रोग्राम है, जिसे डीआरडीओ विकसित कर रहा है. AMCA की सबसे बड़ी खासियत क्या होगी? यह एक सिंगल-सीटर, ट्विन-इंजन स्टेल्थ फाइटर जेट होगा, जिसमें एडवांस्ड स्टेल्थ कोटिंग, इंटरनल वेपन बे और आधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम शामिल होंगे. AMCA के लिए किन कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है? डीआरडीओ ने तीन दावेदारों को शॉर्टलिस्ट किया है— टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (स्टैंडअलोन), लार्सन एंड टुब्रो और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का कंसोर्टियम और भारत फोर्ज, बीईएमएल लिमिटेड और डेटा पैटर्न्स का संयुक्त समूह AMCA प्रोजेक्ट के तहत कितने फाइटर जेट बनाए जाएंगे? इस प्रोजेक्ट के तहत 125 से अधिक फाइटर जेट बनाए जाने की योजना है. AMCA कब तक भारतीय वायुसेना में शामिल हो सकता है? AMCA के 2035 तक भारतीय वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद है. भारत में बनेंगे 90 राफेल जेट एएमसीए परियोजना भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण की व्यापक योजना का हिस्सा है. इसी क्रम में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने हाल ही में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिनमें से 90 विमान भारत में बनाए जाएंगे. यह मंजूरी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 17 से 19 फरवरी के भारत दौरे से कुछ दिन पहले दी गई. इसके अलावा, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने नौसेना के लिए अमेरिका से छह अतिरिक्त पी-8आई समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी विमानों की खरीद को भी मंजूरी दी है. यह सभी फैसले भारत की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने और स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं.  

गोलियों से दहला खैबर पख्तूनख्वा, आतंकियों ने पुलिस व कस्टम कार्यालय पर बोला हमला

खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का खैबर पख्तूनख्वा प्रांत एक बार फिर भीषण आतंकी हमले से दहल उठा है। बुधवार को डेरा इस्माइल खान जिले में विद्रोहियों ने यारिक पुलिस स्टेशन और उसके पास स्थित कस्टम्स ऑफिस को निशाना बनाया। इस सुनियोजित हमले में एक कस्टम्स अधिकारी और एक पुलिस कांस्टेबल की मौत हो गई, जबकि दो अन्य सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हैं। विद्रोहियों ने अत्याधुनिक ऑटोमैटिक हथियारों से पुलिस स्टेशन और कस्टम्स ऑफिस पर एक साथ धावा बोला। हमले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आतंकियों ने न केवल सरकारी इमारतों को निशाना बनाया, बल्कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) रूट पर चल रही यात्री बसों पर भी अंधाधुंध फायरिंग की। इस दौरान आतंकियों ने कस्टम्स विभाग के एक वाहन को आग के हवाले कर दिया, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। पुलिस के अनुसार, मरने वालों में कस्टम्स अधिकारी इसरार खान और पुलिस कांस्टेबल मोहम्मद बिलाल शामिल हैं। घायल सुरक्षाकर्मियों, हजरत उमर और खयाल मोहम्मद को जिला मुख्यालय अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई के बाद हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए, जिनकी तलाश में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। यह हमला सामरिक रूप से महत्वपूर्ण CPEC रूट पर हुआ है, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। बता दें कि इसी महीने की शुरुआत में एक पुलिस पार्टी पर हुए हमले में SHO समेत चार पुलिसकर्मी मारे गए थे। वहीं, 18 जनवरी को एक सुसाइड अटैक में पांच लोगों की जान चली गई थी।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार बोले— असम में एसआर का मकसद योग्य मतदाताओं की भागीदारी

 गुवाहाटी असम में चल रही विशेष पुनरीक्षण (SR) प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि असम में कराए गए विशेष पुनरीक्षण का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना था कि सभी पात्र मतदाता सूची में शामिल हों और अपात्र नामों को हटाया जाए। तीन दिवसीय दौरे के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि चुनाव से पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण कानूनन अनिवार्य है। असम में यह प्रक्रिया इसलिए कराई गई क्योंकि यह देश का एकमात्र राज्य है जहां राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। बीहू को लेकर चुनाव तिथियों पर होगा विचार चुनाव तिथियों के निर्धारण पर पूछे गए सवाल के जवाब में ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बीहू असम का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। इसलिए समीक्षा बैठकों के दौरान विभिन्न पक्षों से प्राप्त सुझावों और प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि चुनाव कार्यक्रम तय करते समय राज्य की सांस्कृतिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा। ज्ञानेश कुमार के मुताबिक, आयोग की प्राथमिकता स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुचारु चुनाव कराना है, लेकिन इसके साथ ही स्थानीय परंपराओं और जनभावनाओं का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी पक्षों से प्राप्त सुझावों का मूल्यांकन कर संतुलित और व्यावहारिक चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। 12 राज्यों में SIR, असम में SR मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि चुनावी नियमों के अनुसार मतदान से पहले मतदाता सूची का अद्यतन जरूरी है। इसी के तहत 12 राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराया गया, जबकि असम में विशेष पुनरीक्षण (SR) आयोजित किया गया। उन्होंने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया सफल रही है। राज्य के सभी जिलों से कुल लगभग 500 लोगों ने ही अपने नाम जोड़ने या किसी अन्य नाम को हटाने के लिए अपील दायर की है, जो इस बात का संकेत है कि सूची काफी हद तक सटीक है। चुनाव तैयारियों की व्यापक समीक्षा मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी तीन दिवसीय दौरे पर असम आए थे। इस दौरान आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। आयोग ने प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर मतदान केंद्रों, सुरक्षा व्यवस्था, मतदाता सूची और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने भरोसा जताया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई जाएगी। 1200 मतदाताओं की सीमा तय चुनाव आयोग ने प्रत्येक मतदान केंद्र पर अधिकतम 1,200 मतदाताओं की सीमा तय की है। इससे मतदान प्रक्रिया अधिक सुगम और व्यवस्थित होने की उम्मीद है। आयोग का मानना है कि इससे लंबी कतारों और भीड़भाड़ की समस्या कम होगी और मतदान प्रतिशत भी बढ़ सकता है। मोबाइल फोन रखने की नई सुविधा पहली बार असम में मतदाताओं को मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार पर अपने मोबाइल फोन रखने की अनुमति दी जाएगी। अब तक कई जगहों पर मोबाइल फोन ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहता था, जिससे मतदाताओं को असुविधा होती थी। नई व्यवस्था के तहत प्रवेश द्वार पर सुरक्षित जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग का उद्देश्य केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना ही नहीं, बल्कि मतदाताओं को अधिकतम सुविधा देना भी है। रंगीन फोटो, बड़े अक्षरों में नाम, सीमित मतदाता संख्या और मोबाइल जमा सुविधा जैसे कदम उसी दिशा में उठाए गए हैं। असम में चुनावी माहौल के बीच आयोग की ये घोषणाएं प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और मतदाता-हितैषी बनाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही हैं।

भारत एआई में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है, PM से मुलाकात के बाद बोले गूगल प्रमुख पिचाई

नई दिल्ली गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने राजधानी दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात की। पिचाई भारत में आयोजित ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लेने आए हैं और 20 फरवरी को समिट में मुख्य भाषण देंगे। भारत पहुंचने पर पिचाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि एआई इम्पैक्ट समिट के लिए भारत लौटकर खुशी हो रही है और यहां हमेशा की तरह गर्मजोशी से स्वागत किया गया। भारत पहुंचने पर पिचाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि एआई इम्पैक्ट समिट के लिए भारत लौटकर खुशी हो रही है और यहां हमेशा की तरह गर्मजोशी से स्वागत किया गया।   पीएम मोदी ने क्या कहा? पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान श्री सुंदर पिचाई से मिलकर बेहद खुशी हुई। हमने एआई के क्षेत्र में भारत द्वारा किए जा रहे कार्यों और इस क्षेत्र में हमारे प्रतिभाशाली छात्रों और पेशेवरों के साथ गूगल कैसे काम कर सकता है, इस बारे में चर्चा की। गूगल देश के एआई परिवर्तन में साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध पिचाई ने कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में असाधारण प्रगति के लिए तैयार है और गूगल देश के एआई परिवर्तन में साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि एआई हमारे जीवन का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बदलाव है, जो स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर डायग्नोस्टिक्स से लेकर किसानों को रियल-टाइम अलर्ट देने जैसे बड़े स्तर की चुनौतियों को हल करने में सक्षम है। पिचाई ने भारत की विविधता, बहुभाषी पारिस्थितिकी और मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नवाचार के लिए मजबूत आधार बताते हुए कहा कि यह वैश्विक स्तर पर एआई के लोकतांत्रिक उपयोग का एक मॉडल बन सकता है। उन्होंने जोर दिया कि एआई का विकास भरोसे, सुरक्षा और समावेशिता को प्राथमिकता देते हुए होना चाहिए, ताकि तकनीक स्थानीय भाषाओं और संदर्भों में लोगों तक वास्तविक लाभ पहुंचा सके। इंडिया-अमेरिका कनेक्ट इनिशिएटिव की घोषणा इस दौरान पिचाई ने 'इंडिया-अमेरिका कनेक्ट इनिशिएटिव' की भी घोषणा की, जिसके तहत अमेरिका, भारत और दक्षिणी गोलार्ध के कई क्षेत्रों के बीच एआई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए नए सबसी केबल रूट विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि गूगल भारत में फुल-स्टैक कनेक्टिविटी पर काम कर रहा है और भविष्य को लेकर वह बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने भारत में 15 अरब डॉलर के एआई हब की योजना का भी जिक्र किया, जिसमें गीगावॉट-स्तर की कंप्यूटिंग क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सबसी केबल गेटवे शामिल होगा, जिससे रोजगार सृजन और उन्नत एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा। गूगल ने स्किलिंग कार्यक्रमों की घोषणा इसके साथ ही गूगल ने स्किलिंग कार्यक्रमों की भी घोषणा की, जिसमें अंग्रेजी और हिंदी में गूगल एआई प्रोफेशनल सर्टिफिकेट प्रोग्राम शामिल है, जो छात्रों और शुरुआती करियर के पेशेवरों को लक्षित करेगा। अन्य पहलों में कर्मयोगी भारत के साथ 2 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारियों को समर्थन, अटल टिंकरिंग लैब्स के साथ 10,000 स्कूलों में जेन एआई टूल्स की शुरुआत और 30 मिलियन डॉलर का 'एआई फॉर साइंस इम्पैक्ट चैलेंज' भी शामिल है। पिचाई ने कहा कि एआई का सबसे बड़ा प्रभाव तब होता है जब इसे समुदायों को समझने वाली संस्थाओं के साथ मिलकर विकसित और लागू किया जाए, और इसी दिशा में आईआईटी, सरकारी एजेंसियों और स्थानीय संस्थानों के साथ साझेदारी के जरिए जिम्मेदारीपूर्ण और व्यापक स्तर पर एआई पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।  

आंखों के इलाज के लिए अस्पताल में शिफ्ट होंगे इमरान खान, राहत की खबर के साथ परिवार से मुलाकात की संभावना

लाहौर  पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जल्द अस्पताल शिफ्ट किए जाने की संभावना है. सूत्रों के मुताबिक उनकी आंख के इलाज के लिए 21 फरवरी से 26 फरवरी के बीच आइलिया इंजेक्शन की एक और डोज दी जानी है. उन्हें आंखों के इलाज के लिए रावलपिंडी के अस्पताल में भर्ती किया जा सकता है. जानकारी के मुताबिक इस बार उन्हें रावलपिंडी के अल शिफा आई ट्रस्ट हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले जाया जा सकता है. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वह अस्पताल में कितने दिन रहेंगे. अंतिम फैसला डॉक्टरों से सलाह-मशविरा करने के बाद लिया जाएगा. सूत्रों का यह भी कहना है कि इलाज के दौरान या उसके बाद इमरान खान को अपने कुछ करीबी सहयोगियों और जेल में बंद उनकी पत्नी बुशरा बीबी से मुलाकात की अनुमति मिल सकती है. सरकार व्यापक मेडिकल जांच कराने की भी योजना बना रही है. इनमें एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्स-रे, हृदय संबंधी जांच और पूरे शरीर के ब्लड टेस्ट जैसे प्रमुख परीक्षण शामिल हो सकते हैं. बताया जा रहा है कि इन सभी टेस्ट के जरिए उनकी सेहत की विस्तृत और आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की जाएगी. दुनियाभर में हो रही है इमरान के इलाज की मांग इमरान खान को सरकार ने अकेले ही एक कोठरी में बंद कर रखा है, जहां न तो उनसे किसी को मिलने की इजाजत है और न ही वे वहां से निकल सकते हैं. उनसे मिलकर आए उनके वकील ने बताया था कि उनकी आंखों की रोशनी 85 फीसदी तक जा चुकी है और उन्हें दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो रही हैं. इसके अलावा उन्हें फ्रिज और टीवी जैसी बेसिक सुविधाएं भी नहीं दी गईं जबकि मच्छरों की वजह से वहां सोना तक मुश्किल हो रहा है. वकील ने मांग की थी कि उन्हें टीवी नहीं तो कम से कम किताबें ही दी जाएं, ताकि वे अपना समय बिता सकें. इमरान खान की ये हालत सामने आने के बाद पूरी दुनिया में उनके समर्थन में रैलियां हुईं और ये अपील की गई कि उनका इलाज हो. दुनिया में क्रिकेट जगत के 12 पूर्व कप्तानों ने मिलकर पाकिस्तान सरकार को चिट्ठी भी लिखी कि इमरान खान को उचित इलाज दिया जाए. खराब सेहत को बता रहे सियासी ड्रामा वहीं पाकिस्तान के पंजाब की सूचना मंत्री अज्मा बुखारी ने इमरान खान की हालिया मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि उनकी सेहत और आंखों की रोशनी पूरी तरह ठीक है. उन्होंने बताया कि खान साहब को जेल में सभी जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं, जिनमें पौष्टिक भोजन और टहलने के लिए अलग स्थान भी शामिल है. अजमा बुखारी ने कहा कि मेडिकल जांच में किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की पुष्टि नहीं हुई है. उनके मुताबिक इमरान खान एक आंख से घड़ी की सुइयां तक साफ देख सकते हैं. उन्होंने इमरान खान पर निशाना साधते हुए इसे उनका राजनीतिक ड्रामा करार दिया.

Rajya Sabha Election Schedule 2026: कब, कहाँ और कितनी सीटों पर होंगे चुनाव, जानें डिटेल्स

नई दिल्ली राज्यसभा चुनाव 2026 की तारीकों का ऐलान हो गया है. चुनाव आयोग ने आज यानी बुधवार को 10 राज्यों की राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी. राज्यसभा की ये सीटें अप्रैल 2026 में खाली होने वाली हैं और 10 राज्यों से जुड़ी हैं. राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को वोटिंग है और नतीजे भी उसी दिन आएंगे. कुल 245 सदस्यों वाली राज्यसभा में 233 चुने जाते हैं, और ये चुनाव छह साल के चक्र का हिस्सा हैं. चुनाव आयोग ने पहले ही इन राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को रिटर्निंग ऑफिसर्स की नियुक्ति के लिए पत्र भेज दिए थे. चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव का पूरा शेड्यूल जारी किया है. राज्यसभा चुनाव का नोटिफिकेशन 26 फरवरी 2026 को जारी होगा. नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 5 मार्च 2026 है. नामांकनों की जांच 6 मार्च को होगी, जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 9 मार्च 2026 है. राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग 16 मार्च 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगी. इसके बाद रिजल्ट की बारी आएगी. मतगणना उसी दिन शाम 5 बजे शुरू होगी. चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम तारीख 20 मार्च 2026 है. ये चुनाव राज्य विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा कराए जाते हैं. इसलिए विधायकों की संख्या और पार्टियों की ताकत पर निर्भर करेंगे. प्वाइंटर्स में समझें राज्यसभा चुनाव का पूरा शेड्यूल     राज्यसभा चुनाव RS चुनाव कार्यक्रम (Rajya Sabha Election 2026 Schedule)     नोटिफिकेशन जारी: 26 फरवरी 2026     नामांकन की आखिरी तारीख: 5 मार्च 2026     नामांकन की जांच (Scrutiny): 6 मार्च 2026     नाम वापसी की अंतिम तारीख: 9 मार्च 2026     मतदान (Polling): 16 मार्च 2026 (सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक)     मतगणना (Counting): 16 मार्च 2026, शाम 5 बजे     चुनाव पूरा करने की अंतिम तारीख: 20 मार्च 2026 किन राज्यों की हैं ये सीटें? राज्यसभा की कुल 37 सीटें 10 राज्यों से खाली हो रही हैं. महाराष्ट्र से सबसे ज्यादा 7 सीटें, तमिलनाडु और बिहार से 6-6, पश्चिम बंगाल से 5, ओडिशा से 4, असम से 3, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और हरियाणा से 2-2, जबकि हिमाचल प्रदेश से 1 सीट. ये सीटें अप्रैल में रिटायर हो रहे सदस्यों की वजह से खाली होंगी. महाराष्ट्र में शरद पवार जैसे दिग्गज नेताओं की सीटें भी शामिल हो सकती हैं, जहां उन्होंने दोबारा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है. महाराष्ट्र में 288 विधायकों वाली विधानसभा में एक राज्यसभा सीट के लिए 37 वोट चाहिए, जिससे यहां कड़ा मुकाबला होने की संभावना है. जिन राज्यों की सीटें खाली हो रही हैं, उनकी रिस्ट महाराष्ट्र: 7 सीटें ओडिशा: 4 सीटें तमिलनाडु: 6 सीटें पश्चिम बंगाल: 5 सीटें असम: 3 सीटें बिहार: 5 सीटें छत्तीसगढ़: 2 सीटें हिमाचल: 1 तेलंगाना: 2 हरियाणा: 2 महाराष्ट्र से कौन-कौन हो रहे रिटायर?     डॉ. भगवत किशनराव कराड (02.04.2026)     डॉ. (श्रीमती) फ़ौज़िया तहसीन अहमद खान     प्रियंका विक्रम चतुर्वेदी     शरदचंद्र गोविंदराव पवार     धैर्यशील मोहन पाटिल     रजनी अशोकराव पाटिल     रामदास बंदू अठावले ओडिशा:     ममता मोहंता     मुज़िबुल्ला खान     सुजीत कुमार     निरंजन बिशी तमिलनाडु     एन.आर. एलंगो     पी. सेल्वारासु     एम. थम्बिदुरई     तिरुची सिवा     डॉ. कनिमोझी एन.वी.एन. सोमू     जी.के. वासन पश्चिम बंगाल     साकेत गोखले     ऋतब्रत बनर्जी     बिकाश रंजन भट्टाचार्य     मौसम नूर (05.01.2026 से रिक्त)     सुब्रत बक्शी असम     रामेश्वर तेली (09.04.2026)     भुवनेश्वर कलिता     अजीत कुमार भुइयां बिहार     अमरेंद्र धारी सिंह     प्रेम चंद गुप्ता (09.04.2026)     रामनाथ ठाकुर     उपेन्द्र कुशवाहा     हरिवंश नारायण सिंह छत्तीसगढ़     कवि तेजपाल सिंह तुलसी (09.04.2026)     फूलो देवी नेताम हरियाणा     किरण चौधरी (09.04.2026)     राम चंदर जांगड़ा हिमाचल प्रदेश     इंदु बाला गोस्वामी (09.04.2026) तेलंगाना     डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी (09.04.2026     के.आर. सुरेश रेड्डी