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स्वास्थ्य से लेकर प्रौद्योगिकी तक: भारत-फ्रांस ने किए 21 महत्वपूर्ण समझौते

मुंबई: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत के दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अहम बैठक की. उनकी इस बैठक के दौरान भारत और फ्रांस के बीच कई अहम मुद्दों पर बात बनी.साथ ही, भारत-फ्रांस संबंधों को मजबूत करने की कोशिशों के बीच कई पहलों की घोषणा की. दोनों देशों ने मिलकर देश को आगे ले जानें पर विचार विमर्श किया. मैक्रों आज एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल होने के लिए नई दिल्ली जाएंगे. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारत में एच125 हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन का उद्घाटन किया. दोनों देशों के बीत इन क्षेत्रों में हुए समझौते राजनीतिक और कूटनीतिक संबंध, तकनीक और नवाचार, रक्षा और सुरक्षा, रक्षा क्षेत्र सहित महत्वपूर्ण और उभरती हुई तकनीक, अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, अक्षय ऊर्जा और कौशल विकास. सोमवार रात महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और गवर्नर आचार्य देवव्रत ने मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उनका और फर्स्ट लेडी ब्रिगिट मैक्रों का स्वागत किया. भारत ने गुरुवार को फ्रांस से राफेल फाइटर जेट खरीदने की मंजूरी दे दी, जो मैक्रों के देश दौरे से पहले उसके सबसे बड़े एयरक्राफ्ट ऑर्डर में से एक है. यह मंजूरी नई दिल्ली के 3.6 ट्रिलियन रुपये के डिफेंस खर्च पैकेज का हिस्सा थी. भारत-फ्रांस के बीच अहम समझौते की सूची 1. भारत-फ़्रांस संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर उन्नत करना 2. उन्नत साझेदारी और 'होराइजन 2047' रोडमैप के कार्यान्वयन की नियमित समीक्षा के लिए वार्षिक विदेश मंत्री स्तरीय वार्ता की शुरुआत 3. भारत-फ़्रांस नवाचार वर्ष का शुभारंभ 4. भारत-फ़्रांस इनोवेशन नेटवर्क का शुभारंभ 5. कर्नाटक के वेमगल में एच125 हेलीकॉप्टर बनाने की फैक्ट्री (असेम्बली लाइन) का उद्घाटन 6.भारत और फ़्रांस के बीच रक्षा सहयोग के पुराने समझौते का नवीनीकरण 7.भारत में हैमर मिसाइल बनाने के लिए बीईएल और सफरान के बीच जॉइंट वेंचर 8.भारत और फ्रांस की सेना के अधिकारी अनुभव साझा करेंगे 9. नई तकनीकों के विकास के लिए एक संयुक्त समूह 10. क्रिटिकल मिनरल्स और मेटल्स में आपसी सहयोग हेतु संयुक्त घोषणा पत्र 11. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और फ़्रांस के सीएनआरएस ने उन्नत सामग्री के क्षेत्र में अनुसंधान केंद्र की स्थापना के लिए आपसी सहमति 12. भारत और फ्रांस के बीच डबल टैक्स अवॉइडेंस एग्रीमेंट पर प्रोटोकॉल में संशोधन 13. स्टार्टअप इकोसिस्टम, नवाचार और तकनीक में रणनीतिक सहयोग हेतु टी-हब (T-Hub) और नॉर्ड फ्रांस के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर 14. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और सीएनआरएस के बीच वैज्ञानिक सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर 15. डिजिटल विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए इंडो-फ्रेंच सेंटर स्थापित करने हेतु संयुक्त आशय घोषणा 16. एम्स, नई दिल्ली में स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के लिए इंडो-फ्रेंच सेंटर का शुभारंभ 17. संक्रामक रोगों और वैश्विक स्वास्थ्य अनुसंधान में सहयोग हेतु डीबीटी और एएनआरएस के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर 18. मेटाबॉलिक हेल्थ साइंसेज के लिए इंडो-फ्रेंच सेंटर की स्थापना हेतु समझौते पर हस्ताक्षर 19. एरोनॉटिक्स में कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने हेतु आशय पत्र पर हस्ताक्षर 20. स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बड़ी पहल, भारत और फ़्रांस ने रिन्यूएबल एनर्जी सहयोग समझौते को आगे बढ़ाया 21.डाक सेवाओं में सहयोग हेतु भारत के डाक विभाग और फ्रांस के 'ला पोस्ट' के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर क्रिटिकल मिनरल में सहयोग के लिए एक जॉइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट की घोषणा फ्रांस में भारतीय राजदूत संजीव कुमार सिंगला ने कहा कि भारत और फ्रांस ने क्रिटिकल मिनरल में सहयोग के लिए एक जॉइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट की घोषणा की है. मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए भारतीय राजदूत ने भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और फ्रांसीसी संस्था सीएनआरएस के बीच एडवांस्ड मटीरियल पर एक सेंटर बनाने के लिए एक लेटर ऑफ इंटेंट की घोषणा की. संजीव कुमार सिंगला ने कहा,'क्रिटिकल और नई टेक्नोलॉजी पर हमने एक जॉइंट एडवांस्ड टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट ग्रुप बनाने का फैसला किया है, साथ ही क्रिटिकल मिनरल में सहयोग के लिए एक जॉइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट भी बनाया है. हमारे डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और सीएनआरएस नाम के फ्रेंच इंस्टीट्यूशन के बीच एडवांस्ड मटीरियल पर एक सेंटर बनाने के लिए एक लेटर ऑफ इंटेंट भी है, जो दुनिया के सबसे बड़े साइंटिफिक इंस्टीट्यूशन में से एक है, जो खास तौर पर बेसिक रिसर्च पर फोकस करता है. हमने दोनों देशों के बीच डबल टैक्स अवॉइडेंस एग्रीमेंट में अमेंडमेंट पर भी साइन किए हैं.' भारत और फ्रांस के जॉइंट स्टेटमेंट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ की खोज, निकालने, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए, ताकि अलग-अलग तरह की, टिकाऊ, जिम्मेदार और मजबूत सप्लाई चेन बनाई जा सकें. नेताओं ने ग्रीन और डिजिटल इकॉनमी, नई टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करने में क्रिटिकल मिनरल्स की अहम भूमिका को पहचाना. विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी जॉइंट स्टेटमेंट में कहा गया कि दोनों पक्षों ने फ्रांस और भारत के बीच क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग पर जॉइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट का स्वागत किया. मंगलवार को पीएम मोदी और इमैनुएल मैक्रों ने मुंबई में इंडस्ट्रियल, डिफेंस, क्लीन एनर्जी, स्पेस और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी सेक्टर में सहयोग पर बाइलेटरल बातचीत की. पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध 'ग्लोबल स्टेबिलिटी और प्रोग्रेस' के लिए है. फ्रांस के राष्ट्रपति और पीएम मोदी ने मिलकर मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026 का उद्घाटन किया. मैक्रों अभी भारत के अपने चौथे दौरे पर हैं. मुंबई में दोनों देशों के बीच बातचीत खत्म होने के बाद, मैक्रों अब भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल होने के लिए नई दिल्ली जाएंगे.

इजरायल का विवादित कदम: वेस्ट बैंक में कब्जा करने की तैयारी, 8 मुस्लिम देशों ने विरोध जताया

तेल अवीव इजरायल सरकार ने पश्चिमी तट में जमीन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने के हालिया फैसले की आठ मुस्लिम देशों द्वारा निंदा करने वाले संयुक्त बयान को बेबुनियाद और गुमराह करने वाला बताया है। मंगलवार को तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों ने पश्चिमी तट में जमीन को सरकारी सम्पति घोषित करने और उनके पंजीकरण और मालिकाना हक के सेटलमेंट के लिए प्रक्रिया को मंजूरी देने के इजरायली सरकार के फैसले की निंदा की। मंत्रालय ने आज एक बयान में कहा, 'यह बयान असल में बेबुनियाद और जानबूझकर गुमराह करने वाला है। फिलिस्तीनी अधिकारी ही क्षेत्र सी में गैर-कानूनी जमीन पंजीकरण प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे है, जो कानून और मौजूदा समझौतों का उल्लंघन है।' मंत्रालय ने बताया कि इजरायली सरकार ने सिविल और सम्पति कानून के तहत प्रशासनिक कदम को मंजूरी दी है। क्या बोला सऊदी अरब सऊद अरब के विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह कदम कब्जे वाले इलाके में एक नई कानूनी और प्रशासनिक हकीकत को थोपता है, जिससे द्वि-राष्ट्र समाधान और फिलिस्तीनी अधिकार कमज़ोर होते हैं। मंत्रालय ने कहा कि फिलिस्तीनी जमीन पर इजरायल का कोई हक नहीं है। मंत्रालय ने इन कदमों को फिलिस्तीनी लोगों के चार जून, 1967 की सीमाओं पर एक आजाद देश बनाने के कानूनी हक पर हमला बताया, जिसकी राजधानी पूर्वी येरुशलम हो। प्रस्ताव उल्लेखनीय है कि इजरायली सरकार ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक के बड़े इलाकों को अपनी भूमि के तौर पर वर्गीकृत करने की योजना को मंजूरी दी, अगर फिलिस्तीनी मालिकाना हक साबित नहीं कर पाते। यह प्रस्ताव दक्षिणपंथी मंत्रियों बेज़ालेल स्मोट्रिच (वित्त), यारिव लेविन (न्याय), और इजरायल काट्ज (रक्षा) ने रखा था। स्मोट्रिच ने इस योजना को 'हमारी सभी जमीनों पर नियंत्रण करने के लिए समाधान क्रांति' का अगला कदम बताया, जबकि लेविन ने इसे इज़रायल के अपने सभी हिस्सों पर अपनी पकड़ मज़बूत करने की प्रतिबद्धता का प्रदर्शन बताया। इस मंजूरी से ज़मीन के मालिकाना हक के समाधान की प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई हैं, जो 1967 में वेस्ट बैंक पर इजरायल के कब्जे के बाद से रुके हुए थे।

जम्मू-कश्मीर पर केंद्रीय मंत्री का बड़ा संकेत, अर्जुन मेघवाल बोले- जल्द सुनेंगे फैसला

श्रीनगर  जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा मिलने को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. दरअसल, केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री, अर्जुन राम मेघवाल ने  इस पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि आप बहुत जल्द कोई फैसला सुनेंगे. अर्जुन मेघवाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को जल्द ही राज्य का दर्जा वापस दिया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा एक सेंसिटिव मुद्दा है. अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहले ही संसद में भरोसा दिला चुके हैं कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को उनका हक जरूर मिलेगा। मेघवाल ने कहा, 'हमारे गृह मंत्री ने लोकसभा में कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों का जो भी हक है, वह दिया जाएगा। मुझे विश्वास है कि आप इस बारे में बहुत जल्द कोई फैसला सुनेंगे।' गौरतलब है कि अगस्त 2019 में भारत सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष दर्जा खत्म कर दिया था और तत्कालीन राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया था। तब से राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा लगातार चर्चा में है। जम्मू-कश्मीर के लोगों में नई उम्मीद केंद्रीय मंत्री के इस ताजा बयान ने राजनीतिक हलकों और जम्मू-कश्मीर के लोगों में नई उम्मीद जगाई है। जानकारों का कहना है कि अगर राज्य का दर्जा बहाल करने का फैसला वाकई जल्द ही होता है तो यह पिछले कई सालों में सबसे बड़ा राजनीतिक विकास होगा। केंद्र सरकार ने पहले भी इशारा किया था कि राज्य का दर्जा बहाल करने का फैसला विधानसभा चुनाव के बाद लिया जा सकता है। आज के बयान में हालांकि समय सीमा साफ नहीं की गयी है। फिर भी, बहुत जल्द शब्द ने राजनीतिक माहौल में हलचल मचा दी है। बड़ा कदम उठाने की तैयारी राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सरकार का यह बयान इस बात का इशारा हो सकता है कि केंद्र ने इस बारे में कोई बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। अगर आने वाले दिनों या हफ्तों में कोई औपचारिक निर्णय होता है तो यह 2019 के बाद सबसे बड़ा संवैधानिक बदलाव होगा। वहीं, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने केंद्र शासित प्रदेश में कई पर्यटन स्थलों को फिर से खोलने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा, 'इससे स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी और पर्यटन पर निर्भर आजीविका को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी।' मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में उनकी केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात के दौरान उन्होंने पिछले वर्ष बंद किए गए पर्यटन स्थलों को खोलने का आग्रह किया था। 'बहुत जल्द सुनेंगे बड़ा फैसला' दरअसल, श्रीनगर में एक कार्यक्र के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए अर्जुन राम मेघवाल ने केंद्र सरकार के वादे को दोहराते हुए कहा, "हमारे गृह मंत्री ने लोकसभा में पहले ही भरोसा दिलाया है कि सही प्रोसेस का पालन किया जाएगा, और लोगों को उनका हक मिलेगा." फैसले के समय के बारे में उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि आप इस पर बहुत जल्द कोई फैसला सुनेंगे." 2019 में आर्टिकल 370 के तहत स्पेशल स्टेटस किया था खत्म गौरतलब है कि अगस्त 2019 में, भारत सरकार ने संविधान के आर्टिकल 370 के तहत इस क्षेत्र का स्पेशल स्टेटस खत्म कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों,जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया था. उमर अबदुल्ला बोले- केंद्र से बातचीत जारी इस इवेंट में जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अबदुल्ला भी मौजूद थे। उन्होंने भी कानून मंत्री की बातों पर थोड़ी उम्मीद जताई। उमर अबदुल्ला ने कहा कि उनकी सरकार केंद्र से लगातार बातचीत कर रही है। सीएम उमर अबदुल्ला ने ये भी कहा कि इस प्रोसेस में उम्मीद से ज्यादा समय लग गया है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग डेढ़ साल से अच्छी खबर का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्रीय मंत्री का जल्द फैसले का इशारा आखिरकार सच होगा। केंद्रीय मंत्री के इस बयान के बाद जानकारों का कहना है कि अगर जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने का फैसला केंद्र सरकार जल्द लेती है तो ये अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक विकास होगा।  

महाराष्ट्र में मुस्लिम आरक्षण पर बड़ा ऐलान, सरकार का 5% आरक्षण देने का निर्णय

मुंबई  महाराष्ट्र सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम वर्ग को दिए गए 5 फीसदी आरक्षण से जुड़ा पुराना फैसला रद्द कर दिया है. साल 2014 में एक अध्यादेश के जरिए मुस्लिम समाज को विशेष पिछड़ा प्रवर्ग-ए (SBC-A) के तहत सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 5 फीसदी आरक्षण दिया गया था. इसके आधार पर जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र भी जारी किए जा रहे थे. नवंबर 2014 में हाई कोर्ट ने लगा दी थी रोक लेकिन इस अध्यादेश को मुंबई हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. 14 नवंबर 2014 को हाईकोर्ट ने इस पर रोक (स्टे) लगा दी. बाद में यह अध्यादेश 23 दिसंबर 2014 तक कानून में नहीं बदल पाया, जिससे वह स्वतः निरस्त (लैप्स) हो गया. अब सरकार ने साफ किया है कि उस अध्यादेश के आधार पर जारी सभी शासन निर्णय और परिपत्र भी रद्द माने जाएंगे. अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के दर्जे पर रोक लगाने का आदेश वहीं सोमवार (16 फरवरी) को महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने उन 75 स्कूलों को दिए गए अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के दर्जे पर रोक लगाने का आदेश दिया है, जिनके बारे में खबरें थीं कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के तुरंत बाद इन विद्यालयों को मंजूरी दी गई थी. इसके अलावा, उपमुख्यमंत्री और अल्पसंख्यक विकास मंत्री सुनेत्रा पवार ने अधिकारियों को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने में कथित अनियमितता की विस्तृत जांच करने और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया.  अल्पसंख्यक विकास विभाग सुनेत्रा पवार के पास अधिकारियों के अनुसार, 28 जनवरी से दो फरवरी के बीच 75 संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया. बताया जाता है कि पहला प्रमाण पत्र 28 जनवरी को दोपहर तीन बजकर नौ मिनट पर  जारी किया गया था, उसी दिन अजित पवार की विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. उस दिन सात संस्थानों को स्वीकृति मिली और अगले तीन दिनों में यह संख्या बढ़कर 75 हो गई. उस समय अजित पवार अल्पसंख्यक विकास विभाग का कार्यभार संभाल रहे थे. यह विभाग अब सुनेत्रा पवार के अधीन है, जिन्होंने हाल ही में उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है. 

हेट स्पीच पर SC का तीखा रुख: सिब्बल से सवाल, CJI ने किया चेतावनी भरा नोट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने  12 'प्रतिष्ठित' व्यक्तियों द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका कथित हेट स्पीच के लिए केवल भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को निशाना बना रही है, जबकि अन्य दलों के नेताओं को छोड़ दिया गया है। मामला क्या है? याचिकाकर्ताओं ने संवैधानिक नैतिकता के उल्लंघन को रोकने के लिए संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्तियों और नौकरशाहों के लिए दिशा-निर्देश तय करने की मांग की थी। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ से कहा कि देश का माहौल जहरीला हो गया है और केवल सुप्रीम कोर्ट ही इसे सुधार सकता है। हालांकि, पीठ ने तुरंत यह इशारा किया कि याचिका में समस्या को उजागर करते समय चुनिंदा रूप से केवल कुछ व्यक्तियों का नाम लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां अदालत ने याचिका के एकतरफा होने पर सवाल उठाए और कहा- यह याचिका निश्चित रूप से कुछ व्यक्तियों को निशाना बना रही है, जबकि उन अन्य लोगों को छोड़ दिया गया है जो नियमित रूप से ऐसे हेट स्पीच देते हैं। याचिकाकर्ताओं को यह आभास नहीं देना चाहिए कि वे केवल कुछ व्यक्तियों को टारगेट कर रहे हैं। CJI ने कहा कि एक निष्पक्ष और तटस्थ याचिका के साथ आएं। यह मुद्दा महत्वपूर्ण है। अंततः, सभी पक्षों की ओर से बोलने में संयम होना चाहिए। हम यह कहना चाहेंगे कि सभी राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों को संवैधानिक नैतिकता का ध्यान रखना चाहिए और अपने भाषणों में संयम बरतना चाहिए। कोई भी दिशानिर्देश सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। पीठ ने कहा कि कई राजनीतिक दल अपनी सांप्रदायिक विचारधारा के आधार पर बेशर्मी से भाषण देते हैं और खुलेआम नफरत फैलाते हैं। कोर्ट ने सिब्बल से कहा- आपने दूसरे पक्ष का एक भी उदाहरण पेश नहीं किया है। याचिका में किनका नाम था? याचिकाकर्ताओं में रूप रेखा वर्मा, मोहम्मद अदीब, हर्ष मंदर, नजीब जंग, जॉन दयाल और अशोक कुमार शर्मा शामिल थे। उन्होंने अपनी याचिका में कथित हेट स्पीच के लिए कई भाजपा नेताओं का नाम लिया था:     हिमंत बिस्वा सरमा (असम के मुख्यमंत्री)     योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री)     देवेंद्र फडणवीस (महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री)     पुष्कर सिंह धामी (उत्तराखंड के मुख्यमंत्री)     अनंत कुमार हेगड़े (पूर्व केंद्रीय मंत्री)     गिरिराज सिंह (केंद्रीय मंत्री)     इसके अलावा कुछ नौकरशाहों की टिप्पणियों का भी जिक्र था। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, 'राजनीतिक दलों के नेताओं को भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए। अदालतें आदेश पारित कर सकती हैं, लेकिन इसका असली समाधान राजनीतिक दलों और लोकतांत्रिक संस्थानों द्वारा संवैधानिक मूल्यों और नैतिकता के प्रति वफादार रहने में ही है।' उन्होंने आगे कहा, 'भाषण की उत्पत्ति विचार प्रक्रिया से होती है। क्या अदालत के आदेश से किसी व्यक्ति की विचार प्रक्रिया को बदला या प्रतिबंधित किया जा सकता है? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का क्या होगा?' जस्टिस बागची: उन्होंने सिब्बल से कहा कि यह बहुत ही अस्पष्ट याचिका है। इसे एक लोकलुभावन कवायद बनाने के बजाय, इसे एक रचनात्मक संवैधानिक प्रयास होने दें। राजनीति का शोर-शराबा जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने का आधार नहीं होना चाहिए। जब कपिल सिब्बल ने कहा कि वह याचिका से व्यक्तियों के सभी संदर्भ हटा देंगे, तो पीठ ने जवाब दिया कि आवश्यक संशोधन किए जाने के बाद ही वह जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी। सिब्बल ने याचिका में संशोधन के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है। याचिकाकर्ताओं की दो मुख्य मांगे हैं:     यह घोषणा की जाए कि संवैधानिक पदों या सार्वजनिक कार्यालयों में बैठे लोगों के सार्वजनिक भाषण संवैधानिक नैतिकता के अधीन होने चाहिए और वे दूसरों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न करें।     संवैधानिक पदधारियों और नौकरशाहों के सार्वजनिक भाषण को नियंत्रित करने के लिए दिशानिर्देश बनाए जाएं, ताकि बिना पूर्व प्रतिबंध या सेंसरशिप के संवैधानिक नैतिकता का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

हाई कोर्ट का फैसला: पति-पत्नी जैसा व्यवहार, होटल की रातों को देखते हुए आरोपी को मिली राहत

कलकत्ता  कलकत्ता हाईकोर्ट ने बलात्कार के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि अगर शादी नहीं हो पाती है और रिश्ता में कड़वाहट आती है, तो सिर्फ इसलिए ही सहमति से बने शारीरिक संबंधों को रेप नहीं माना जा सकता। जज ने कहा कि शुरुआत से ही धोखा देने का इरादा होना चाहिए था। साथ ही कहा कि जिस तरह से महिला और पुरुष बर्ताव कर रहे थे, उससे सहमति के संकेत मिल रहे थे। क्या था मामला मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार को हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दर्ज केस रद्द कर दिया। आरोप थे कि उसने शादी का वादा कर महिला के साथ बलात्कार किया और जबरन गर्भपात कराया है। कोर्ट ने कहा कि दोनों साथ में घूमे, रहे और पति पत्नी की तरह रहे। ऐसे में यह आपसी सहमति दिखाता है। जस्टिस चैताली चटर्जी (दास) मामले की सुनवाई कर रहीं थीं। अदालत ने क्या कहा उन्होंने कहा, 'शुरुआत से ही (संबंध बनते समय) धोखा देने या गलत इरादा होना चाहिए था, जिसके कारण महिला को यौन संबंध बनाने के लिए प्रेरित किया गया हो।' जज ने कहा है कि जिस तरह से उस पुरुष और महिला ने एक-दूसरे के साथ व्यवहार किया, वह 'साफ तौर पर आपसी सहमति और साथ को दिखाता है न कि 'धोखाधड़ी के से उकसावे या प्रलोभन' को।' जज ने कहा, 'रिश्ता… साल 2017 में शुरू हुआ और साल 2022 में खटास आने तक जारी रहा। रिश्ते के दौरान… उन्होंने शारीरिक संबंध बनाए, दीघा, पार्क स्ट्रीट, खड़गपुर और गोवा के कई होटलों में साथ रातें गुजारीं और पति-पत्नी की तरह रहे। यह भी स्वीकार किया गया है कि महिला गर्भवती हो गई थी और पीड़िता और आरोपी की सहमति से गर्भपात कराया गया था।' उन्होंने कहा, 'आरोपी के खिलाफ कोई शिकायत करने के बजाए महिला ने रिश्ता जारी रखा…। ऐसे में किसी भी बात से यह साफ नहीं होता कि वह बीते 5 या 6 सालों से किसी भी तरह की गलतफहमी में थीं।' शिकायत इस मामले में महिला साल 2017 में रिश्ते में आई थीं। उन्होंने आरोप लगाए थे कि साल 2018 में आरोपी ने उन्हें कुछ पिलाकर बलात्कार किया, लेकिन वह चुप रही क्योंकि उसने शादी का वादा किया था। इसके बाद दोनों दीघा और गोवा ट्रिप पर गए थे। साल 2020 में महिला गर्भवती हो गई थी और बाद में गर्भपात भी कराया गया। महिला ने आरोप लगाए कि वह शादी के वादे के कारण गर्भपात के लिए तैयार हुई थी। जब आरोपी ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया, तो महिला ने 16 फरवरी 2022 में पश्चिम मिदनापुर में पुलिस शिकायत दर्ज कराई। 23 फरवरी को आरोपी को गिरफ्तार किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने तय किया बड़ा अंतर: सलवार खोलना नहीं है रेप की कोशिश, HC का आदेश रद्द

 इलाहाबाद यौन अपराधों के मामलों में संवेदनशीलता और कानूनी व्याख्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक बेहद विवादित फैसले को पलटते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी महिला को गलत नीयत से पकड़ना और उसकी सलवार का नाड़ा खोलना महज 'छेड़छाड़' या 'रेप की तैयारी' नहीं, बल्कि सीधे तौर पर 'रेप का प्रयास' (Attempt to Rape) है। अदालत ने कहा कि ऐसे कृत्य को कम गंभीर अपराध मानकर आरोपी को हल्की सजा देना न्याय की भावना के खिलाफ है। इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मार्च 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें कोर्ट ने इसे केवल महिला की लज्जा भंग करने का मामला माना था। क्या है पूरा मामला? मामला काफी गंभीर था, जिसमें आरोपियों ने महिला के साथ न केवल अश्लील हरकतें कीं बल्कि उसके कपड़े उतारने का प्रयास भी किया। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में एक अजीबोगरीब तर्क देते हुए इसे 'रेप का प्रयास' मानने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट का मानना था कि यह कृत्य 'रेप की तैयारी' के अंतर्गत आता है, जिसके लिए सजा कम होती है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद आक्रोश फैल गया था। महिला अधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी। सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान हाईकोर्ट के इस विवादास्पद फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। यह कदम एनजीओ 'वी द वुमन' की संस्थापक और वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता द्वारा लिखे गए एक पत्र के बाद उठाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के साथ-साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया शामिल थे, ने इस मामले की सुनवाई की। SC की तीखी टिप्पणी और फैसला सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सिरे से खारिज करते हुए आरोपियों के खिलाफ पोक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत 'रेप के प्रयास' के मूल और सख्त आरोपों को बहाल कर दिया है। फैसला सुनाते हुए CJI सूर्यकांत ने न्यायिक संवेदनशीलता पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि जब कोई न्यायाधीश यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहा हो, तो उसे मामले की तथ्यात्मक हकीकत और पीड़िता की कमजोरियों के प्रति विचारशील होना चाहिए। बेंच ने अपनी टिप्पणी में कहा, "कोई भी जज या किसी भी अदालत का फैसला तब तक पूर्ण न्याय नहीं कर सकता, जब तक कि वह मुकदमे के तथ्यों की वास्तविकताओं और अदालत का रुख करने वाली पीड़िता की कमजोरियों के प्रति विचारशील न हो।" अदालत ने यह भी साफ किया कि न्यायाधीशों का प्रयास न केवल संवैधानिक और कानूनी सिद्धांतों के ठोस अनुप्रयोग पर आधारित होना चाहिए, बल्कि उसमें करुणा और सहानुभूति का भाव भी होना चाहिए। इन स्तंभों के अभाव में न्यायिक संस्थान अपने महत्वपूर्ण कर्तव्यों का निर्वहन ठीक से नहीं कर पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने केवल इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलटने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि भविष्य के लिए एक व्यापक सुधार का खाका भी खींचा है। कोर्ट ने कहा कि यौन अपराधों के मामलों में जजों को अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है। इसके लिए, सर्वोच्च न्यायालय ने नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के निदेशक और पूर्व जस्टिस अनिरुद्ध बोस से विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने का अनुरोध किया है। यह समिति यौन अपराधों और अन्य संवेदनशील मामलों में न्यायाधीशों के लिए 'संवेदनशीलता और करुणा' विकसित करने हेतु दिशा-निर्देश तैयार करेगी। अदालत ने यह विशेष निर्देश दिया कि ये दिशा-निर्देश सरल भाषा में होने चाहिए, न कि विदेशी अदालतों के जटिल कानूनी शब्दों से भरे हुए।

वकील की बेहतरीन बहस का असर! सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के आरोपी को दी आज़ादी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने छह वर्षीय सौतेली बेटी की हत्या के आरोपी व्यक्ति की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को  रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने 'जांच में गड़बड़ी' और अभियोजन पक्ष द्वारा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी सीरीज स्थापित करने में विफलता का हवाला देते हुए यह आदेश सुनाया। न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाली वकील अंकिता शर्मा की तारीफ की। कोर्ट ने 'सटीक तैयारी' और जांच में आई बड़ी बाधाओं के बावजूद "कुशलतापूर्वक और उत्साह के साथ" मामले की पैरवी करने के लिए प्रशंसा की। वकील की तारीफ पीठ ने कहा, 'हम सरकारी वकील की सराहना करना चाहेंगे, जिन्होंने हमारे अवलोकन के लिए संपूर्ण अभिलेखों-मूल भाषा और उनके अनुवाद सहित का संकलन तैयार करने का प्रयास किया।' पुलिस पर उठाए सवाल हालांकि, शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ पुलिस की 'गड़बड़ जांच' की कड़ी आलोचना की। जिसके कारण छह साल की बच्ची की हत्या के मामले में कई सवालों के जवाब नहीं मिल पाए, जहां असली अपराधी बिना सजा के बच गए और उसके सौतेले पिता को 'महज अनुमानों' के आधार पर जेल में डाल दिया गया। फैसला लिखने वाले न्यायमूर्ति चंद्रन ने कहा, 'हम इस बात से चकित हैं कि यदि जांच वकील की तैयारी के आधे स्तर की भी होती, तो उस बेचारी बच्ची के लापता होने और मृत्यु को लेकर रहस्य सुलझ सकता था। हम अपीलकर्ता के वरिष्ठ वकील द्वारा जांच के लचर रुख को प्रभावी ढंग से उजागर करने के प्रयासों की भी सराहना करते हैं।' अपील को किया स्वीकार फैसले में रोहित जांगड़े की अपील को स्वीकार कर लिया गया, जिन्हें छत्तीसगढ़ की एक निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद जेल में डाल दिया गया था। निचली अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। यह मामला छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में अक्टूबर 2018 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पांच अक्टूबर 2018 को रोहित जांगड़े और उनकी दूसरी पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था। इसके बाद पत्नी अपने माता-पिता के घर चली गई। क्या था मामला आरोप था कि जांगडे अपनी सौतेली बेटी को मोटरसाइकिल पर बिठाकर ले गया। बच्ची लापता हो गई, लेकिन औपचारिक शिकायत 11 अक्टूबर को दर्ज कराई गई। उच्चतम न्यायालय ने मामले की पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी को 13 अक्टूबर, 2018 को गिरफ्तार किया गया था।

हिमंता का मास्टरस्ट्रोक: चुनाव से पहले महिलाओं को मिलेगा सीधे लाभ, आरक्षण की घोषणा भी

गुवाहाटी  असम में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सियासत गर्मा गई है. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य की जनता के लिए बड़ी घोषणाओं की झड़ी लगा दी है.  असम कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिन्हें चुनाव से पहले सरकार का सबसे बड़ा कार्ड माना जा रहा है. सरकार ने ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता योजना’ का दायरा बढ़ाते हुए इसमें 1 लाख से ज्यादा नए लाभार्थियों को जोड़ने का फैसला किया है. इसके अलावा आदिवासी और चाय बागान समुदाय के लोगों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का रास्ता भी साफ कर दिया गया है. महिलाओं के खाते में सीधे पहुंचेगा पैसा, क्या है सरकार की स्कीम? असम सरकार की ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता योजना’ राज्य में काफी लोकप्रिय हो रही है. इस योजना के तहत राज्य की 32 लाख महिलाओं को पहले ही 10,000 रुपये की पहली किस्त मिल चुकी है. मुख्यमंत्री ने बताया कि कुछ पात्र महिलाएं इस फंड से वंचित रह गई थीं. इसी को देखते हुए कैबिनेट ने आज 1,03,500 नई लाभार्थियों को जोड़ने की मंजूरी दी है. बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की कैश ट्रांसफर योजनाओं की तर्ज पर असम की यह स्कीम भी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई है. जानकारों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को कैश देना वोट बैंक को साधने की एक बड़ी कोशिश है. नौकरियों में 3 प्रतिशत आरक्षण और नए सैनिक स्कूल की सौगात हिमंता कैबिनेट ने केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि आदिवासी और चाय बागान समुदायों के लिए भी बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य की सरकारी नौकरियों (ग्रेड 1 और ग्रेड 2) में इन समुदायों के लिए 3 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है. चाय बागान समुदाय असम की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाता है. ऐसे में यह आरक्षण चुनावी गणित को बदलने की ताकत रखता है. साथ ही कैबिनेट ने कार्बी आंगलोंग के लांगवोकु क्षेत्र में राज्य का दूसरा सैनिक स्कूल बनाने के लिए 335 करोड़ रुपये के फंड को भी हरी झंडी दिखा दी है. असम बना देश का सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य असम की वित्त मंत्री अजंता नियोग ने विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 62,294.78 करोड़ रुपये का अंतरिम बजट (लेखानुदान) पेश किया. बजट भाषण के दौरान उन्होंने आरबीआई के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि असम इस समय देश का सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य है. उन्होंने दावा किया कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय पिछले पांच वर्षों में दोगुनी से भी अधिक हो गई है. साल 2020-21 में यह 86,947 रुपये थी, जो 2025-26 में बढ़कर 1,85,429 रुपये पहुंच गई है. यह 113 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी है. सरकार का लक्ष्य असम को 2028 तक 10 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बनाना है. चुनाव आयोग की तैयारी और राजनीतिक दलों की मांग एक तरफ सरकार घोषणाएं कर रही है, तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने भी कमर कस ली है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अगुवाई में आयोग की टीम असम के दौरे पर है. मंगलवार को सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से मुलाकात की. कांग्रेस, बीजेपी और आम आदमी पार्टी समेत कई दलों ने मांग की है कि असम में चुनाव एक या अधिकतम दो चरणों में कराए जाएं. इसके साथ ही दलों ने सुझाव दिया है कि चुनाव की तारीखें तय करते समय बिहू त्योहार का खास ख्याल रखा जाए. वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को समाप्त हो रहा है, ऐसे में मार्च या अप्रैल में चुनाव होने की पूरी संभावना है.

हिल स्टेशनों पर मौसम का यू-टर्न, जल्द होगी बारिश और बर्फबारी

शिमला  हिमाचल प्रदेश में मौसम बदलने वाला है. प्रदेश में जहां दोपहर तक बादल छाए रहे. लेकिन दोपहर बाद धूप निकल आई. मौसम विभाग ने 17 और18 फरवरी को प्रदेश में बारिश और बर्फबारी के आसार जताए हैं. हालांकि,कोई अलर्ट जारी नहीं किया है. मौसम विज्ञान के शिमला केंद्र ने दोपहर को जारी बुलेटिन में बताया कि पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव हो रहा है और इसका असर पंजाब और आसपास के इलाकों में देखने को मिलेगा. विभाग ने बताता किया पश्चिमी विक्षोभ के चलते दक्षिण-पूर्व पाकिस्तान और आसपास के इलाकों में भी मौसम बदलने के आसार हैं और ऐसे में हिमाचल प्रदेश के ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों में 17 और 18 फरवरी को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है. हालांकि, अगले सात दिन तक राज्य में मौसम शुष्क रहने की संभावना है. मौसम विभाग ने बताया कि अगले 3–4 दिनों के दौरान अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है. चढ़ने लगा है पारा हिमाचल प्रदेश में अब दिन के समय तेज धूप खिल रही है. ऐसे में प्रदेश में पारा भी चढ़ने लगा है. उधऱ ज्यादातर स्थानों पर अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 7 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है. सुबह और शाम को हल्की ठंड महसूस हो रही है. लेकिन वैसे मौसम सुहावना बना हुआ है. इस बार कम बारिश हुई हिमाचल प्रदेश में विंटर सीजन में इस बार कम बारिश और बर्फबारी हुई. प्रदेश में चुनिंदा ही स्पेल देखने को मिले. अक्तूबर 2025 के बाद सीधे नए साल पर ही बारिश और बर्फबारी देखने को मिली. हालांकि, बीच में जोरदार बारिश और बर्फबारी एक स्पेल में हुई थी. मौसम विभाग ने बताया कि विंटर सीजन में इस बार सामान्य से 27 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. चंबा में सामान्य से 45 फीसदी कम बादल बरसे हैं. इसी तरह, कांगड़ा में 24 फीसदी, किन्नौर में 59, कुल्लू में 10, लाहौल-स्पीति में 26, मंडी में 2, शिमला में 30 और सिरमौर में 6 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. ऊना में 51 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है.