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ट्रंप की कार्रवाई: ईरान के समीप भेजा गया ऑपरेशन मादुरो में शामिल सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर

न्यूयॉर्क अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत के बीच तनाव फिर चरम पर है. अमेरिका ने दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड आर. फोर्ड को पारस की खाड़ी में भेजने का फैसला किया है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जानकारी चार अमेरिकी अधिकारियों ने दी है. इससे पहले खबरें थीं कि USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश को भेजा जाएगा, लेकिन अब फोर्ड को चुना गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर बातचीत फेल हुई तो अमेरिका ईरान पर हमला करने को तैयार है. क्या हुआ नया?     USS गेराल्ड आर. फोर्ड की तैनाती: यह दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर है. इसमें 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान, हजारों सैनिक और एस्कॉर्ट जहाज होते हैं.     पहले यह, यह कैरेबियन सागर में था. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी से जुड़े ऑपरेशन में शामिल था.     अब इसे मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है. अप्रैल अंत या मई तक यह घर (नॉरफोक, वर्जीनिया) नहीं लौटेगा – क्रू के लिए लंबी तैनाती और मेंटेनेंस में देरी होगी.     पहले की रिपोर्ट: वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कहा था कि USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (वर्जीनिया तट पर ट्रेनिंग कर रहा) को भेजा जा सकता है. लेकिन अब फोर्ड को चुना गया.     पहले से मौजूद ताकत: USS अब्राहम लिंकन कैरियर और कई अन्य जहाज पहले से मिडिल ईस्ट में तैनात हैं. गेराल्ड आर फोर्ड क्लास  यह अमेरिकी जंगी जहाज है दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर है. अपने क्लास का पहला विमानवाहक पोत, जिसे मई 2017 में कमीशन किया गया. इसके चार और पोत तैयार हो रहे हैं. यह 337 मीटर लंबा है. इसकी बीम 748 मीटर की है. इसका फुल लोड डिस्प्लेसमेंट 1 लाख टन है. इसपर 78 मीटर चौड़ा फ्लाइट डेक है. इसपर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्चिंग सिस्टम लगा है. एडवांस्ड अरेस्टिंग गीयर की सुविधा है. इसपर एक बार में 75 एयरक्राफ्ट तैनात किए जा सकते हैं. इसके आलावा यह 4539 सैनिकों को अपने साथ ले जा सकता है.  ट्रंप का बयान: हमला करने को तैयार ट्रंप ने इजरायली चैनल N12 को इंटरव्यू में कहा…     या तो हम डील करेंगे, या बहुत सख्त कदम उठाएंगे – जैसे पिछली बार.      अगर ईरान के साथ बातचीत फेल हुई, तो सैन्य कार्रवाई होगी.     ट्रंप मैक्सिमम प्रेशर नीति अपना रहे हैं – प्रतिबंध, सैन्य तैनाती और धमकी से ईरान को नया परमाणु समझौता करने पर मजबूर करना. क्यों हो रहा है यह सब?     ईरान का परमाणु कार्यक्रम: ईरान यूरेनियम को हथियार बनाने लायक स्तर तक समृद्ध कर रहा है. अमेरिका और इजरायल इसे बड़ा खतरा मानते हैं.     ट्रंप का रुख: 2018 में ट्रंप ने पुराना समझौता (JCPOA) तोड़ा था. अब नई डील चाहते हैं – ईरान को पुरानी से बेहतर शर्तें माननी होंगी.     रणनीतिक महत्व: मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ताकत बढ़ाकर ट्रंप ईरान को दबाव में रखना चाहते हैं. कैरियर से F-35 जैसे स्टेल्थ फाइटर इस्तेमाल हो सकते हैं.     क्षेत्रीय तनाव: इजरायल-ईरान संघर्ष, हूती हमले और गाजा युद्ध के बीच अमेरिका अपने सहयोगियों (इजरायल, सऊदी) की रक्षा कर रहा है. क्या होगा आगे? फोर्ड की तैनाती से अमेरिका की हवाई ताकत दोगुनी हो जाएगी. अगर दूसरा कैरियर (बुश) भी आया, तो क्षेत्र में अमेरिकी मौजूदगी और मजबूत होगी. विशेषज्ञ कहते हैं कि यह 'सिग्नलिंग' है – अमेरिका दिखा रहा है कि वह गंभीर है. दुनिया शांति की अपील कर रही है, ताकि बातचीत से हल निकले. अमेरिका ईरान को परमाणु डील के लिए मजबूर करने के लिए सैन्य ताकत बढ़ा रहा है. दुनिया के सबसे बड़े कैरियर की तैनाती तनाव को और बढ़ा रही है. फिलहाल बातचीत का मौका है, लेकिन फेल होने पर मिडिल ईस्ट में बड़ा संघर्ष हो सकता है.   

दुनिया की दिग्गज कंपनियों का भारत रुख: Google और Nvidia के CEO की यात्रा के मायने

 नई दिल्ली भारत में इस बार दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण AI सम्मेलन होने वाला है. हम बात कर रहे हैं India AI Impact Summit 2026 की, जो अगले हफ्ते शुरू होने वाला है. ये इवेंट 16 फरवरी को शुरू होगा और 20 फरवरी तक चलेगा. इसका आयोजन भारत मंडपम में होगा.  इस इवेंट में 100 से ज्यादा देशों के डेलिगेशन के हिस्सा लेंगे. इसमें 15 से 20 सरकारों के प्रमुख, 50 से ज्यादा मंत्री और 50 से ज्यादा दुनिया भर की प्रमुख कंपनी के CEO शामिल होंगे. इसमें भारतीय कंपनियों के प्रमुख भी शामिल होंगे. समिट में AI इकोसिस्टम से जुड़े लगभग 500 प्रमुख व्यक्ति भी शामिल होंगे. इसमें इनोवेटर्स, रिसर्चर और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर शामिल हैं. अगर चर्चित नामों की बात करें, तो गूगल CEO सुंदर पिचाई से लेकर एंथ्रॉपिक के डारियो अमोडेई तक इसका हिस्सा होने वाले हैं.  भारत इस बार AI इम्पैक्ट समिट का आयोजन कर रहा है. इस कार्यक्रम में ना सिर्फ टेक और AI सेक्टर के दिग्गज हिस्सा ले रहे हैं. बल्कि 20 देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति भी शामिल होंगे. कौन-कौन लेगा हिस्सा?      गूगल CEO सुंदर पिचाई     DeepMind के सीईओ डेमिस हसाबिस     OpenAI CEO सैम अल्टमैन     एंथ्रॉपिक के सीईओ डारियो अमोडेई     Nvidia सीईओ जेन्सेन हुआंग     माइक्रोसॉफ्ट के प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ     मेटा के चीफ AI साइंटिस्ट यान लेकुन      क्वालकॉम CEO क्रिस्टियानो एमोन और कई नाम शामिल होंगे.  कैसे रजिस्टर कर सकते हैं आप?  India AI Impact Summit 2026 के लिए रजिस्टर करना बहुत ही आसान है. इसके लिए आपको आधिकारिक वेबसाइट impact.indiaai.gov.in पर जाना होगा. यहां आपको रजिस्टर नाउ का विकल्प मिलेगा, उस पर क्लिक करना होगा. इसके बाद आपको रजिस्टर ऐज डेलिगेट पर जाना होगा. यहां आपको पर्सनल डिटेल्स देनी होंगी. इसमें नाम और कई दूसरी जानकारियां शामिल हैं. रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद आप 5 दिनों तक चलने वाले इस इवेंट में हिस्सा ले सकेंगे. इस इवेंट में 700 से ज्यादा सेसन होंगे, जिसमें AI सेफ्टी, गवर्नेंस, एथिकल फ्रेमवर्क, डेटा प्रोटेक्शन और भारत के संप्रभु AI रणनीति पर बात होगी.   

क्या लिव-इन पार्टनर पर दहेज का केस संभव? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा सवाल

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट इस समय एक बेहद महत्वपूर्ण और जटिल कानूनी प्रश्न पर विचार कर रहा है, जिसमें क्या एक विवाहित पुरुष के खिलाफ उसकी लिव-इन पार्टनर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (दहेज प्रताड़ना) के तहत मुकदमा दर्ज करा सकती है? मामले की पृष्ठभूमि यह मामला कर्नाटक के एक हृदय रोग विशेषज्ञ, डॉक्टर लोकेश बीएच से जुड़ा है। लोकेश का विवाह साल 2000 में हुआ था, लेकिन एक अन्य महिला ने दावा किया कि उसका विवाह लोकेश से 2010 में हुआ और उसने उन पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने तथा जलाने के प्रयास का आरोप लगाया। लोकेश ने इन आरोपों को नकारते हुए तर्क दिया कि उनके और महिला के बीच कभी कोई वैध विवाह नहीं हुआ, इसलिए धारा 498A लागू ही नहीं होती। हाई कोर्ट बनाम सुप्रीम कोर्ट कर्नाटक हाई कोर्ट ने डॉक्टर की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि धारा 498A के प्रावधान लिव-इन रिलेशनशिप पर भी लागू हो सकते हैं। इस फैसले को चुनौती देते हुए डॉक्टर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनके वकील का तर्क है कि कानून के स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार, केवल 'वैध पत्नी' ही पति या उसके रिश्तेदारों के खिलाफ यह शिकायत दर्ज करा सकती है। सुप्रीम कोर्ट का क्या है रुख? जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने इस सवाल को 'विचारणीय' माना है। न्यायालय ने केंद्र सरकार से इस पर जवाब मांगा है और वरिष्ठ अधिवक्ता नीना नरिमन को 'एमिकस क्यूरी' (अदालती सलाहकार) नियुक्त किया है। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या "विवाह के समान" (Marriage-like) लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले पुरुष पर दहेज प्रताड़ना का मुकदमा चलाया जा सकता है या नहीं।

आसमान में बवाल: फ्लाइट में मारपीट से मचा हड़कंप, बेल्जियम में उतारना पड़ा विमान

तुर्की तुर्की से यूनाइटेड किंगडम (UK) जा रही Jet2 की एक फ्लाइट में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब यात्रियों के बीच हवा में ही हिंसक झड़प शुरू हो गई। इस घटना के चलते विमान को रास्ते में ही Belgium में डायवर्ट करना पड़ा। फ्लाइट LS896, जो Antalya से Manchester जा रही थी, में गुरुवार को अचानक दो यात्रियों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि विमान के गलियारे में यात्री एक-दूसरे पर घूंसे बरसा रहे हैं, जबकि आसपास बैठे लोग चीखते-चिल्लाते नजर आ रहे हैं। एयरलाइन की ओर से जारी बयान में इस घटना को “बेहद शर्मनाक और अस्वीकार्य व्यवहार” बताया गया।   जेट2 के मुताबिक, झगड़े में शामिल दोनों “डिसरप्टिव पैसेंजर्स” को ब्रसेल्स में विमान से उतार दिया गया, जहां स्थानीय पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। इसके बाद फ्लाइट ने दोबारा उड़ान भरी और मैनचेस्टर पहुंची। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि झगड़े की शुरुआत किस वजह से हुई, लेकिन ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक चश्मदीद ने दावा किया है कि उड़ान के दौरान एक पुरुष यात्री ने कथित तौर पर नस्लवादी टिप्पणी की थी, जिसके बाद विवाद हिंसा में बदल गया। यह घटना एक बार फिर फ्लाइट सेफ्टी और यात्रियों के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में न सिर्फ यात्रियों की जान जोखिम में पड़ती है, बल्कि सैकड़ों लोगों की यात्रा भी प्रभावित होती है।

पढ़ाई के लिए अमेरिका गया भारतीय छात्र गायब, सैन फ्रांसिस्को में तलाश तेज

न्यू यार्क अमेरिका से भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है। कर्नाटक के रहने वाले और University of California, Berkeley में पोस्ट-ग्रेजुएट की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्र साकेत श्रीनिवासैया लापता हो गए हैं। इस मामले पर Consulate General of India, San Francisco ने गहरी चिंता जताई है। दूतावास ने बताया कि वह छात्र के माता-पिता के संपर्क में है और स्थानीय अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर साकेत की तलाश में जुटा हुआ है। भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि साकेत श्रीनिवासैया के लापता होने की जानकारी बेहद चिंताजनक है और हरसंभव सहायता की जा रही है। यह घटना कोई पहली नहीं है। बीते वर्षों में विदेशों में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों ने नस्लीय भेदभाव, हमलों और स्थानीय प्रशासन की कथित लापरवाही की शिकायतें उठाई हैं। इसी मुद्दे पर लोकसभा में सांसद असदुद्दीन ओवैसी द्वारा सवाल पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय ने बताया था कि सरकार भारतीय छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेशों में किसी भी अप्रिय घटना को तुरंत संबंधित देश की सरकार के सामने उठाया जाता है। भारतीय दूतावास छात्रों से लगातार संपर्क में रहते हैं, प्री-ओरिएंटेशन सत्र आयोजित करते हैं और MADAD पोर्टल, व्हाट्सऐप ग्रुप, इमरजेंसी हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि संकट की स्थिति में भारतीय समुदाय कल्याण कोष (ICWF) के जरिए छात्रों को मदद दी जाती है और जरूरत पड़ने पर बड़े पैमाने पर निकासी अभियान भी चलाए जाते हैं। साकेत श्रीनिवासैया की गुमशुदगी ने एक बार फिर विदेशों में भारतीय छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।  

सरकार का बड़ा फैसला: नया नाम, नया पता—PMO अब ‘सेवा तीर्थ’ से करेगा काम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का पता अब बदल गया है। कल 13 फरवरी 2026 को साउथ ब्लॉक में कैबिनेट की आखिरी बैठक हुई, जहां एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए भवन परिसर का उद्घाटन किया, जिसका नाम 'सेवा तीर्थ' रखा गया है। अब से कैबिनेट बैठकें और पीएमओ का काम इसी नए परिसर में होगा। साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण ब्रिटिश काल में हुआ था। ये भवन औपनिवेशिक शासन के प्रतीक थे, जिनके जरिए भारत को लंबे समय तक गुलामी में रखा गया। 1947 में आजादी मिलने के बाद भी प्रशासनिक ढांचा काफी हद तक उसी पुरानी व्यवस्था पर आधारित रहा। स्वतंत्रता के बाद से पीएमओ साउथ ब्लॉक से ही संचालित होता आया है। अब यह बदलाव एक ऐतिहासिक कदम है, जो औपनिवेशिक अतीत से मुक्ति और भारतीय मूल्यों पर आधारित नई शुरुआत का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा तीर्थ के उद्घाटन के दौरान कहा कि सेवा भारत की आत्मा और असली पहचान है। इस नए परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय भी एक छत के नीचे आ गए हैं। इससे प्रशासनिक कामकाज अधिक कुशल, एकीकृत और नागरिक-केंद्रित बनेगा। परिसर की दीवार पर 'नागरिक देवो भव' का आदर्श वाक्य अंकित है, जो सेवा की भावना को मजबूत करता है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह बदलाव सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा है, जिसके तहत कई अन्य नाम भी बदले गए हैं, जैसे केंद्रीय सचिवालय को कर्तव्य भवन और राजपथ को कर्तव्य पथ। सरकार का मानना है कि ये कदम औपनिवेशिक प्रतीकों से दूर हटकर आधुनिक, भारतीय जनभावना के अनुरूप शासन व्यवस्था को मजबूत करेंगे। सेवा तीर्थ में आधुनिक सुविधाएं, डिजिटल एकीकरण और बेहतर समन्वय की व्यवस्था है, जो देश की प्रगति और विकास के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगी।

PM मोदी को बुलाया जा सकता है बांग्लादेश के तारिक रहमान शपथ ग्रहण समारोह में, BNP दे सकती है न्योता

नई दिल्ली बांग्लादेश में फरवरी 2026 के चुनावों में भारी बहुमत हासिल करने के बाद तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए तैयार हैं. इस ऐतिहासिक अवसर पर BNP ने भारत के साथ संबंधों में एक 'नई शुरुआत' करने का संकेत दिया है. सूत्रों के अनुसार, पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करने की तैयारी कर रही है. इसके अलावा बीएनपी सभी क्षेत्रीय राष्ट्राध्यक्षों को भी आमंत्रित कर सकती है. तारिक रहमान के विदेशी मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने पीटीआई से बात करते हुए स्पष्ट किया है कि यह समय दोनों देशों के लिए अपनी पुरानी धारणाओं को बदलने का है. उन्होंने कहा, 'भारत को यह समझना होगा कि आज के बांग्लादेश में शेख हसीना और अवामी लीग का अस्तित्व नहीं बचा है. BNP ने भारत से अपील की है कि वह शेख हसीना जैसी "आतंकवादी" को अपनी जमीन पर पनाह न दे, जिन्होंने बांग्लादेश को अस्थिर करने का प्रयास किया. हुमायूं कबीर के अनुसार, यदि भारत 'पड़ोसी प्रथम' की नीति के तहत सम्मानजनक व्यवहार करता है, तो दोनों देश विकास के नए आयाम छू सकते हैं. पीएम मोदी और तारिक रहमान की बातचीत चुनाव परिणामों के तुरंत बाद, 13 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री मोदी ने तारिक रहमान से फोन पर बात की और उन्हें इस शानदार जीत की बधाई दी. बातचीत बेहद सौहार्दपूर्ण रही, जिसमें पीएम मोदी ने एक लोकतांत्रिक और समावेशी बांग्लादेश के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया. पीएम मोदी ने तारिक रहमान को अपनी सुविधानुसार भारत आने का निमंत्रण भी दिया है.  

CEPA पर भारत-कनाडा की बातचीत तेज, उच्चायुक्त का दावा—डील आसान और संभव

कनाडा कनाडा में भारत के उच्चायुक्त ने भारत-कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को लेकर बड़ा और सकारात्मक संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि यह डील “बिल्कुल भी मुश्किल नहीं” होनी चाहिए और इसके लिए औपचारिक व्यापार वार्ताएं फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में शुरू हो सकती हैं। कनाडा के प्रतिष्ठित अख़बार Financial Post को दिए साक्षात्कार में उच्चायुक्त पटनायक ने बताया कि भारत और कनाडा ने G20 शिखर सम्मेलन, जोहान्सबर्ग के दौरान CEPA वार्ता शुरू करने का फैसला किया था और फिलहाल दोनों देश Terms of Reference (संदर्भ शर्तों) को अंतिम रूप दे रहे हैं।  क्यों आसान होगी CEPA डील? दिनेश पटनायक ने कहा कि भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत कई वर्षों से चल रही थी, लेकिन कुछ कारणों से यह प्रक्रिया रुकी हुई थी। अब वह “पॉज” हटा लिया गया है। उन्होंने बताया कि कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney की सरकार ने संसद को 90 दिन का नोटिस दे दिया है, जिसके बाद औपचारिक वार्ताएं शुरू हो सकेंगी।  उनका कहना है कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं में आए बदलाव, भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि और दोनों देशों द्वारा अलग-अलग व्यापार समझौते किए जाने से CEPA को नया आकार मिलेगा। पटनायक ने कहा -“दोनों पक्षों की मंशा साफ है, इसलिए मुझे भरोसा है कि हम इसे बहुत जल्द पूरा कर लेंगे।”   किन सेक्टरों पर होगा फोकस? उच्चायुक्त ने बताया कि CEPA केवल एक समझौता नहीं, बल्कि लगभग हर बड़े सेक्टर को कवर करेगा। इसमें शामिल होंगे:       डिफेंस और एयरोस्पेस     माइनिंग और एनर्जी     निवेश और फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स     रिसर्च, इनोवेशन और AI     उन्होंने कहा कि समझौते का मकसद होगा:     टैरिफ कम करना     कस्टम्स और दस्तावेज़ी प्रक्रिया सरल बनाना     नॉन-टैरिफ बैरियर्स हटाना     लॉजिस्टिक्स और निवेश को आसान बनाना पटनायक ने CEPA की तुलना “शादी” से की पटनायक ने CEPA की तुलना “शादी” से करते हुए कहा कि जैसे शादी में रिश्ते को आसान बनाने वाली बाधाएं हटाई जाती हैं, वैसे ही यह समझौता व्यापार में आने वाली अड़चनों को खत्म करेगा।     भारत-कनाडा व्यापार का मौजूदा आंकड़ा     भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार:     2024 में भारत का कनाडा को निर्यात: 8.02 अरब कनाडाई डॉलर     कनाडा से भारत का आयात: 5.30 अरब कनाडाई डॉलर     यह आंकड़े बताते हैं कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। CEPA से आगे भी रिश्तों पर जोर दिनेश पटनायक ने साफ किया कि CEPA अहम जरूर है, लेकिन यही एकमात्र केंद्रबिंदु नहीं है। भारत और कनाडा जल्द ही Canada-India Friendship Society शुरू करने पर भी विचार कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों की संसदों, सांसदों, नागरिक समाज और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सीधा संवाद बढ़े।उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में रिश्तों में आई “छोटी-सी खरोंच” के बावजूद  लोगों के बीच संबंध मजबूत रहे, व्यापार बढ़ता रहा, शिक्षा, शोध और नवाचार पर कोई असर नहीं पड़ा।  यह दोनों देशों के रिश्तों की असली मजबूती दिखाता है।  

लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बनी जीत, बोले तारिक रहमान

ढाका बांग्लादेश चुनाव में मिली बंपर जीत के बाद पहली बार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) चीफ तारिक रहमान ने मीडिया के सामने देशवासियों का आभार जताया। उन्होंने इसे देश, लोकतंत्र और जनता की उम्मीदों की जीत करार दिया। बांग्ला संबोधन में रहमान ने कहा, "यह जीत बांग्लादेश की है, डेमोक्रेसी की है, और लोगों की उम्मीदों की है। मैं बांग्लादेश के लोगों को डेमोक्रेसी स्थापित करने में आई रुकावटों को पार करने के लिए बधाई देता हूं।" उन्होंने आगे कहा, "फासीवादी सरकार द्वारा संविधान और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की अनदेखी नाकाम हो गई है। हमारी सरकार अब पूरे देश में कानून और पक्की सुरक्षा व्यवस्था करेगी।" उन्होंने सत्ता की जवाबदेही का भरोसा दिलाया। बोले, "देश में डायरेक्ट वोटिंग के जरिए लोगों के प्रति जवाबदेह संसद और सरकार फिर से बनाई जा रही है। यह पक्का करने के लिए कि कोई भी बुरी ताकत देश में तानाशाही फिर से न ला सके और यह पक्का करने के लिए कि देश गुलाम देश न बन जाए, हमें एकजुट रहना होगा और लोगों की इच्छा का सम्मान करना होगा।" बीएनपी चेयरमैन तारिक रहमान ने आगे कहा, “बांग्लादेश के लोगों का बीएनपी पर दिखाया गया भरोसा दिखाता है कि नागरिकों का हम पर पूरा विश्वास है। इस भरोसे के जरिए, हम सभी बांग्लादेशियों के विकास और तरक्की के लिए अथक काम करेंगे। हमारे रास्ते और राय अलग हो सकते हैं, लेकिन देश हित में हमें एकजुट रहना होगा। मेरा पक्का मानना ​​है कि देश की एकता हमारी सामूहिक ताकत है।" तारिक रहमान ने विदेशी प्रेस से बात करते हुए अपनी मां और देश की पूर्व पीएम खालिदा जिया को भी याद किया। सभी पार्टियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि देश खालिदा जिया को बहुत याद कर रहा है। यह लोगों का जनादेश है और हम आप सभी को बधाई देते हैं। बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव हुए थे। कुल 297 सीटों के परिणाम घोषित किए गए। इनमें सबसे बड़ी पार्टी के रूप में बीएनपी उभरी। जिसने 209 सीटें हासिल की। गठबंधन को कुल 212 सीटें मिलीं। नतीजतन एक बार फिर बांग्लादेश में बीएनपी सत्ता में वापसी कर रही है।

दुबई में बड़ा विवाद: ‘100% रशियन महिला’ बयान पर हंगामा, टॉप अधिकारी ने छोड़ी कुर्सी

दुबई दुनिया के कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से कथित संबंधों को लेकर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच दुबई की एक प्रमुख बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स कंपनी के शीर्ष अधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम उस वक्त उठाया गया, जब वैश्विक निवेशकों ने कंपनी में निवेश रोकने की चेतावनी दे दी थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस्तीफा देने वाले अधिकारी को दुबई के शासक का बेहद करीबी और उनका “राइट हैंड” माना जाता था। हाल ही में सार्वजनिक हुए एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में उनके नाम का उल्लेख सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े हो गए। इन दस्तावेजों में कथित तौर पर एपस्टीन के साथ कारोबारी अवसरों पर बातचीत, निजी मुलाकातों और महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक चर्चाओं का जिक्र है।रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इन बातचीतों में एक बार “100% रशियन महिला” का संदर्भ आया था, जिसने सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दीं। इसके साथ ही एपस्टीन नेटवर्क से जुड़े कथित टॉर्चर वीडियो और महिलाओं के शोषण के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया।जैसे ही विवाद की आंच कंपनी तक पहुंची, कई अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और कारोबारी साझेदारों ने साफ कर दिया कि जब तक नेतृत्व स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होती, वे निवेश पर पुनर्विचार करेंगे। इसके बाद कंपनी के बोर्ड ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शीर्ष अधिकारी का इस्तीफा स्वीकार किया और नए नेतृत्व की नियुक्ति का ऐलान किया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाक्रम सिर्फ एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि एपस्टीन कांड की गूंज अब वैश्विक कॉरपोरेट और राजनीतिक गलियारों में भी तेज़ी से सुनाई दे रही है। खाड़ी क्षेत्र की प्रतिष्ठित कारोबारी संस्थाओं पर पारदर्शिता और जवाबदेही का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।