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उधमपुर मुठभेड़: सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों को किया समाप्त, इलाके में कड़ी सुरक्षा

 उधमपुर   जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के बंसंतगढ़ इलाके में सुरक्षा बलों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो आतंकवादियों को मार गिराया। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, यह मुठभेड़ J&K पुलिस, भारतीय सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के संयुक्त ऑपरेशन के दौरान हुई। सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने जोफर रामनगर क्षेत्र में घेराबंदी और तलाशी अभियान (कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन) शुरू किया था। तलाशी के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में दोनों आतंकवादी मारे गए। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है, ताकि किसी अन्य आतंकी के छिपे होने की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके। मुठभेड़ स्थल से हथियार और गोला-बारूद बरामद होने की भी सूचना है।  जम्मू और कश्मीर के उधमपुर जिले के अंतर्गत आने वाले जोफर इलाके में सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद के दो सक्रिय कमांडरों को मुठभेड़ में मार गिराया गया है. सेना की व्हाइट नाइट कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की ज्‍वाइंट टीम ने सटीक इनपुट के आधार पर यह ऑपरेशन शुरू किया था. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह इलाका पिछले करीब एक महीने से उनके रडार पर था और यहां हो रही संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार उनकी निगाह बनी हुई थी. यह 15 दिसंबर के बाद उधमपुर में दूसरी मुठभेड़ थी, जब सौन गांव में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी। हालांकि, घने जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकवादी भागने में कामयाब रहे थे। जनवरी में कठुआ जिले में तीन और किश्तवाड़ के चतरू वन क्षेत्र में चार मुठभेड़ें हुईं जिनके परिणामस्वरूप कठुआ में जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी आतंकवादी उस्मान को ढेर किया गया और किश्तवाड़ में एक पैराट्रूपर शहीद हो गया। ये मुठभेड़ जम्मू क्षेत्र के ऊपरी इलाकों में छिपे आतंकवादियों को पकड़ने के लिए चलाए जा रहे गहन अभियानों के बीच हुईं। उस्मान उसी गिरोह का हिस्सा था जो उधमपुर जिले में फंसा हुआ है। वह पिछले कई वर्षों से उस क्षेत्र में सक्रिय था। 'ऑपरेशन केया' के तहत भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर इस अभियान को अंजाम दिया. मंगलवार को सुरक्षाबलों को आतंकियों की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली, जिसके बाद एक व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया. जैसे ही सुरक्षाबल इलाके में पहुंचे, आतंकियों ने घने जंगलों में छिपकर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई. दो जैश-ए-मोहम्मद आतंकी मुठभेड़ में ढेर  सुरक्षाबलों ने आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए दो आतंकवादियों को मार गिराया, जो जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए थे. इस मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने हाई अलर्ट घोषित कर दिया और इलाके में एडिशनल फोर्स डिप्लॉइड की गई.  जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ऑपरेशन की निगरानी की. रात तक दोनों तरफ से गोलीबारी होती रही, लेकिन सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घेरने में आखिरकार कामयाबी हासिल की.  सुरक्षाबलों ने इस ऑपरेशन को 'ऑपरेशन केया' नाम दिया, जो खुफिया सूचना पर आधारित था. इलाके में ऑपरेशन के बाद भी पहाड़ी और जंगली क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि क्षेत्र में किसी भी तरह के खतरे से निपटा जा सके.

सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की मौत, 15 साल पहले पिता की हत्या का इतिहास दोहराया गया?

गद्दाफी लीबिया के पूर्व शासक मुअम्मर गद्दाफी का बेटा सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी, मंगलवार को एक हमले में मारा गया। समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने उनकी टीम के एक बयान का हवाला देते हुए बताया कि मुअम्मर गद्दाफी के बेटे की मंगलवार को पश्चिमी लीबिया में हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक सैफ अल-इस्लाम के घर में घुस आए चार अज्ञात बंदूकधारियों के साथ उनकी सीधी मुठभेड़ हुई और इस दौरान उनकी मौत हो गई। गद्दाफी के करीबी नेता अब्दुल्ला ओथमान अब्दुर्रहीम ने फेसबुक पर इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि चार नकाबपोश बंदूकधारियों ने दोपहर में जिंटान शहर में गद्दाफी के आवास पर धावा बोल दिया। हमलावरों ने कथित तौर पर मुठभेड़ से पहले सीसीटीवी कैमरों को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे हमलावरों की पहचान पता नहीं चल पाई। वहीं सैफ अल-इस्लाम की मौके पर ही मौत हो गई। घटना को लेकर ज्यादा जानकारी फिलहाल सामने नहीं आ पाई है। सैफ की टीम ने लीबियाई कोर्ट और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से हमले की जांच करने, अपराधियों की पहचान करने और इस ऑपरेशन की योजना बनाने वालों को जवाबदेह ठहराने की अपील की है। कौन थे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी? लीबिया में 2011 में नाटो समर्थित विद्रोह के बाद भी सैफ यहां एक अहम नेता बने रहे। बता दें कि इस विद्रोह में उनके पिता मुअम्मर गद्दाफी मारे गए थे। गद्दाफी ने चार दशकों से अधिक समय तक लीबिया में राज किया था। सैफ ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई पूरी की थी और उन्हें कभी कई सरकारों द्वारा लीबिया का स्वीकार्य, पश्चिमी-अनुकूल चेहरा माना जाता था। कोई आधिकारिक पद ना होने के बावजूद, सैफ अल-इस्लाम को एक समय मेरा तेल समृद्ध उत्तरी अफ्रीकी देश में अपने पिता मुअम्मर गद्दाफी के बाद सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माना जाता था।रिपोर्ट्स के मुताबिक सैफ अल-इस्लाम ने कई उच्च-स्तरीय, संवेदनशील राजनयिक मिशनों में मध्यस्थता की। उन्होंने पश्चिम के साथ संबंध बनाए और खुद को एक सुधारक के रूप में पेश किया। साथ ही सैफ ने संविधान और मानवाधिकारों के सम्मान का भी आह्वान किया। हालांकि जब 2011 में गद्दाफी के लंबे शासन के खिलाफ विद्रोह हुआ, तो सैफ अल-इस्लाम ने अपनी दोस्ती के बजाय परिवार और कबीले की वफादारी को चुना और विद्रोहियों पर क्रूर कार्रवाई का मास्टरमाइंड बन गया। 2015 में, त्रिपोली की एक अदालत ने सैफ अल-इस्लाम को युद्ध अपराधों के लिए फायरिंग स्क्वाड द्वारा मौत की सजा सुनाई। इसके बाद 2017 में एक माफी कानून के तहत मिलिशिया द्वारा रिहा किए जाने के बाद से, सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी अंडरग्राउंड होकर जिंटान में रह रहे थे।

भजन-गीत और नारे के बीच विधानसभा में रात गुजारी, कर्नाटक शराब घोटाले पर भाजपा-जेडीएस विधायकों का विरोध जारी

बेंगलुरु भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल-सेक्युलर (जेडीएस) के विधायकों ने कथित शराब घोटाले को लेकर आबकारी मंत्री आरबी थिम्मापुर के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कर्नाटक विधानसभा में रात गुजारी। बुधवार सुबह भी भाजपा-जेडीएस विधायकों का प्रदर्शन जारी रहा। कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष व विधायक बीवाई विजयेंद्र और विपक्ष के नेता आर. अशोक समेत कई विधायक विधानसभा परिसर में मॉर्निंग वॉक करते हुए नजर आए। बाद में सभी विधायक एक जगह इकट्ठा हुए, चाय पी और आगे की कार्रवाई पर चर्चा की। कुछ देर बाद विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू हुआ, जिसमें भाजपा और जेडीएस के विधायक विधानसभा के प्रवेश द्वार की सीढ़ियों पर बैठ गए और एक्साइज मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए। उन्होंने गाने भी गाए और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए। भाजपा विधायक चन्नाबसप्पा ने एक भक्ति गीत भी गाया। विजयेंद्र, अशोक और विधानसभा में विपक्ष के उपनेता अरविंद बेल्लाड समेत अन्य विधायक भी उनके साथ शामिल हुए। कथित शराब घोटाले के केस में भाजपा-जेडीएस के विधायक राज्य के आबकारी मंत्री आरबी थिम्मापुर का इस्तीफा मांग रहे हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने दावा किया कि कर्नाटक के इतिहास में पहली बार शराब एसोसिएशन ने खुद एक्साइज डिपार्टमेंट में 6,000 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आबकारी मंत्री हर महीने 250 करोड़ से 300 करोड़ रुपए वसूल रहे थे। उनके मुताबिक, हर डिप्टी कमिश्नर की पोस्ट के लिए कथित तौर पर 2 करोड़ रुपए और कांस्टेबल लेवल की पोस्टिंग के लिए भी 10 लाख रुपए लिए जा रहे थे। आर. अशोक ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का भी जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर एक डिप्टी कमिश्नर ने कहा था कि मंत्रियों को 'कट' देना पड़ता है। नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत दर्ज की गई है। अशोका ने आरोप लगाया, "इन सबके बावजूद मंत्री सबूत मांग रहे हैं और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, जिनके पास वित्त मंत्रालय भी है, सहित पूरी सरकार उनका साथ दे रही है। इससे पता चलता है कि कांग्रेस हाईकमान के पास बहुत सारा पैसा पहुंच रहा है। चुनावों के लिए यह भारी भरकम 6,000 करोड़ रुपए का कलेक्शन हुआ है। हम धरना दे रहे हैं और जब तक एक्साइज मंत्री थिम्मापुर इस्तीफा नहीं देते, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।"

आसमान में टकराव का खतरा! AI-इंडिगो प्लेन्स को लेकर फैली अफवाह, असल में क्या हुआ?

मुंबई  मुंबई एयरपोर्ट पर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब दो प्लेन आपस में ही टकरा गए. जी हां, एयर इंडिया और इंडिगो के प्लेन के बीच मुंबई एयरपोर्ट पर ग्राउंड कोलिजन हो गया. दोनों विमानों के पंख आपस में टकरा गए. इसके बाद विमानों को जांच के लिए ग्राउंडेड कर दिया गया. जैसे ही एयर इंडिया और इंडिगो के विंग्स आपस में टकराए, प्लेन में बैठे यात्रियों की सांसें फूल गईं. एयरपोर्ट पर हलचल मच गई. कारण कि दोनों विमान में यात्री सवार थे. राहत की बात यह रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ. चलिए जानते हैं कि आखिर कैसे दो प्लेन के विंग्स आपस में टकरा गए और कैसे एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया. कब और कैसे घटी यह घटना? मुंबई के छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर  यह असामान्य घटना घटी. जिसमें एयर इंडिया (एअर इंडिया) और इंडिगो के दो विमानों के पंखों के किनारे एक दूसरे से टकरा गए, जिसके बाद विमानों को जांच के लिए खड़ा कर दिया गया. ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, टैक्सीवे पर विमानों के पंखों के सिरे आपस में टकरा गए. यह घटना तब हुई जब एयर इंडिया की फ्लाइट AI 2732 (मुंबई-कोयंबटूर) डिपार्चर के लिए पीछे हट रही थी, उसी समय इंडिगो की फ्लाइट 6E 791 (हैदराबाद-मुंबई) लैंडिंग के बाद टैक्सी कर रही थी. असल में क्या हुआ था? दरअसल, एयर इंडिया का विमान उड़ान भरने के लिए तैयार हो रहा था. वहीं, इंडिगो का विमान लैंडिंग के बाद पार्किंग-वे की तरफ जा रहा था. मुंबई से कोयम्बटूर जा रही फ्लाइट संख्या AI 2732 उड़ान भरने के लिए पुशबैक की स्थिति में थी. ठीक उसी समय हैदराबाद से आई इंडिगो की फ्लाइट 6E 791 लैंडिंग करने के बाद टैक्सी-वे से गुजर रही थी. इसी दौरान दोनों विमानों के पंख एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए और उनमें टक्कर हो गई. दोनों विमानों के दाहिने पंख (Right Wingtips) एक-दूसरे से टकरा गए. टक्कर होते ही विमान में झटका महसूस हुआ, जिससे यात्रियों में हड़कंप मच गया. गनीमत रही कि इस घटना में किसी को कुछ नहीं हुआ. एयर इंडिया ने क्या कहा जानकारी के मुताबिक, एअर इंडिया का विमान रवाना हो रहा था, जबकि इंडिगो का विमान उतर रहा था. मुंबई एयरपोर्ट पर समानांतर रनवे हैं। दोनों ही विमान एयरबस ए320 थे. एअर इंडिया के प्रवक्ता के मुताबिक, तीन फरवरी को मुंबई से कोयंबटूर जाने वाली उड़ान एआई2732 में देरी हुई, क्योंकि निर्धारित विमान रवाना होने से पहले टैक्सीवे पर प्रतीक्षा के दौरान एक अन्य विमानन कंपनी के विमान के संपर्क में आ गया। दोनों विमानों के पंखों के किनारे टकराने से हमारे विमान के पंख के किनारे को नुकसान पहुंचा. इंडिगो ने क्या कहा? वहीं, इंडिगो के प्रवक्ता ने कहा कि हैदराबाद से मुंबई आ रही उड़ान 6ई791 के पंख का किनारा उतरने के बाद एक अन्य विमानन कंपनी के विमान से संपर्क में आ गया. इसके अलावा, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की एक टीम मौके पर मौजूद है और दोनों विमानों को जांच के लिए वापस उनके स्थान पर ले जाया गया. कितने यात्री थे सवार रिपोर्ट्स में आगे बताया गया है कि यह घटना तब हुई जब दोनों विमानों में यात्री सवार थे. किसी के घायल होने की खबर नहीं है. हालांकि, विमानों में सवार यात्रियों की संख्या का तत्काल पता नहीं चल सका है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सभी यात्री सुरक्षित हैं. यह घटना  मुंबई एयरपोर्ट पर शाम करीब 7.30 बजे हुई, जो देश के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट में से एक है. दोनों प्लेन में टक्कर के बाद क्या हुआ?     एअर इंडिया के विमान के विंगटिप को नुकसान पहुंचा, इसलिए इसे ग्राउंडेड कर दिया गया। यात्रियों को दूसरी फ्लाइट्स में रीबुक किया गया।.     इंडिगो के विमान में भी जांच हुई, लेकिन ज्यादा डैमेज नहीं था. उसके यात्री भी सुरक्षित उतारे गए.     DGCA (डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) ने तुरंत जांच शुरू कर दी.अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की छानबीन करने लगे.     दोनों एयरलाइंस ने बयान जारी कर कहा कि सभी यात्री सुरक्षित हैं और कोई घायल नहीं हुआ.  

रणनीतिक चाल: चिकन नेक को सुरक्षित करने के लिए 40 KM अंडरग्राउंड कनेक्शन का प्लान

नई दिल्ली बंगाल सिलीगुड़ी के पास ‘चिकन नेक’ भारत की वह नब्ज है, जो शेष भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है. यह एक संकरा क्षेत्र है, जिसकी चौड़ाई मात्र 20 किलोमीटर है. इसकी संकरापन देखते हुए कई लोगों ने तोड़ने की धमकी दी, हालांकि, उनको समय पर उचित जवाब दिया जाता रहा है. केंद्र की सरकार इसकी सुरक्षा को लेकर लेकर काफी गंभीर है. इसकी सुरक्षा के लिए केंद्र ना केवल आसमान और धरती पर पैनी नजर रख रही है बल्कि अब धरती के अंदर से भी इसकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी चल रही है. सरकार चिकन नेक की सुरक्षा के लिए फूल-प्रूफ प्लान लेकर आई है. अब चिकन नेक से होते हुए 40 किलोमीटर लंबे रेलवे टनल बनाने की तैयारी चल रही है. सोमवार को केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने सोमवार को टनल के बारे में जानकारी देते हुए बताया, ‘केंद्र नॉर्थ-ईस्ट को बाकी भारत से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर लंबी स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर पर अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बनाने की योजना बना रहा है. इससे नॉर्थ-ईस्ट और बाकी भारत के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत और सुरक्षित किया जा सकेगा.’ अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा देखिए कहां से कहां तक ? प्रस्तावित अंडरग्राउंड हिस्सा टिन माइल हाट और रंगापानी रेलवे स्टेशनों के बीच संकरे सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर चलेगा. इसे आमतौर पर चिकन नेक के नाम से जाना जाता है. यह नॉर्थ-ईस्ट के आठ राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा को मुख्य शेष भारत को जोड़ने का काम करता है. चिकन नेक जमीन नॉर्थ ईस्ट को जोड़ने वाली संकरी पट्टी है. इसकी लंबाई 60 किलोमीटर और चौड़ाई मुश्किल से 20 किलोमीटर है. इसकी सीमा नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से लगती है. भौगोलिक स्थिति और स्ट्रेटेजिक संवेदनशीलता के कारण, इस कॉरिडोर को लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा माना जाता रहा है. बजट पर बात करते हुए जानकारी दी रेलवे के लिए यूनियन बजट में हुए आवंटन के बारे में वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए रिपोर्टरों से बात की. वैष्णव ने कहा, ‘नॉर्थ ईस्ट को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर के स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर के लिए खास प्लानिंग है. अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बिछाने और मौजूदा ट्रैक को चार-लाइन करने की भी प्लानिंग चल रही है.’ डिफेंस के लहजे से अहम अंडरग्राउंड रेल का प्रस्ताव इंडियन रेलवे की लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी का हिस्सा है. ताकि कॉरिडोर पर भीड़ कम हो, जरूरत के हिसाब से सामान बेहतर हो. यात्रियों, के साथ-साथ सामान और डिफेंस लॉजिस्टिक्स की बिना रुकावट आवाजाही पक्की हो सकेगी. अभी, सिलीगुड़ी कॉरिडोर में कई रेलवे लाइनें, हाईवे, तेल पाइपलाइन और कम्युनिकेशन नेटवर्क हैं, जो इसे देश के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले और सेंसिटिव ट्रांजिट जोन में से एक बनाता है. सुरक्षा के लिए जरूरी नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के जनरल मैनेजर चेतन कुमार श्रीवास्तव ने इसे लेकर अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया अंडरग्राउंड रेलवे लाइनें पश्चिम बंगाल में तीन मील हाट-रंगापानी सेक्शन पर बनाई जाएंगी. श्रीवास्तव ने कहा, ‘यह अंडरग्राउंड हिस्सा सुरक्षा के नज़रिए से ज़रूरी है.’ उन्होंने कॉरिडोर की स्ट्रेटेजिक अहमियत और ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत पर ज़ोर दिया जो कुदरती और इंसानों की बनाई, दोनों तरह की रुकावटों को झेल सके.

कुछ सच वर्दी में दबकर भी नहीं मरते: पूर्व DGP का जनरल नरवणे के लिए चेतावनी संदेश

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण (मेमॉयर) पर आधारित एक लेख का हवाला देकर पिछले दो दिनों से राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करने की कोशिश की है। मंगलवार को उन्होंने लोकसभा में फिर से चीन के साथ सैन्य टकराव का मुद्दा उठाने का प्रयास किया, जिसके बाद सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामा हो गया। इस हंगामे और विवाद के बीच जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने जनरल नरवणे को नसीहत देते हुए एक बड़ा बयान दिया है। पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे को नसीहत देते हुए लिखा कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे को बेहतर समझदारी दिखानी चाहिए थी। वर्दीधारी सैनिकों के पास जो कुछ भी होता है, उसका अधिकांश हिस्सा उनके साथ कब्र तक जाने के लिए होता है। अगर हर कोई इस बारे में बोलने लगे, तो सरकारें कांप उठेंगी। बता दें कि राहुल गांधी ने मंगलवार को नरवणे की पुस्तक पर आधारित लेख को सत्यापित करने की मांग करते हुए सदन के पटल पर रखा। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि इसे सत्यापित किया जाए, मैं इसे पटल पर रख रहा हूं। इतना ही नहीं, कांग्रेस नेता ने लेख का हवाला देते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण मुद्दा है, जो चीन और पाकिस्तान से जुड़ा है तथा राष्ट्रपति के अभिभाषण का प्रमुख हिस्सा है। राहुल गांधी के बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जब आसन की ओर से व्यवस्था दी जा चुकी है, तो नेता प्रतिपक्ष को उस विषय का उल्लेख नहीं करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेताओं के साथ हुई बैठक का हवाला दिया, जिस पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने मंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। कांग्रेस अध्यक्ष ने भी सरकार को घेरा वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी को पूर्व सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे की पुस्तक के बारे में बोलने से रोके जाने पर हैरानी जताई और सवाल उठाया कि आखिर इस किताब में ऐसा क्या है जिससे मोदी सरकार के बड़े-बड़े मंत्री घबरा रहे हैं। खरगे ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट में कहा कि आरएसएस-भाजपा की वैचारिक आधारशिला ही तथ्यों को छिपाने पर टिकी है, तभी मोदी सरकार संसद में राष्ट्रीय सुरक्षा के गंभीर सवालों पर जवाब देने से ऐसे बच रही है जैसे उसकी दुखती रग पर किसी ने हाथ रख दिया हो। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद गंभीर मुद्दा उठाया है। मोदी सरकार के बड़े मंत्री क्यों घबरा रहे? उन्होंने कहा कि पूर्व सेनाध्यक्ष की किताब में ऐसा क्या लिखा है जिससे मोदी सरकार के बड़े-बड़े मंत्री घबरा रहे हैं। उनकी किताब को प्रकाशित होने से कौन रोक रहा है। पूरा देश जानता है कि भाजपा का राष्ट्रवाद झूठा है। वे देशभक्ति की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, पर 2020 में गलवान में हमारे 20 जवानों के सर्वोच्च बलिदान के बाद मोदी जी खुद चीन को क्लीन चिट थमा देते हैं। क्या ये सच नहीं है? उन्होंने सवाल किया कि क्या संसद में इससे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा तथा विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर देश को विश्वास में नहीं लिया गया है। उन्होंने मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि 'लोकतंत्र की जननी' की बात करने वाले लोकतंत्र की आत्मा को रौंदने में क्यों जुटे हुए हैं।

भारत के लिए चौंकाने वाला खुलासा: रूस ने ट्रंप के तेल दावों की पोल खोली

मॉस्को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बाद भारत-रूस संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ट्रंप ने भारत पर लगे टैरिफ को घटाते हुए सोमवार को कहा था कि भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है, लेकिन रूस ने इस दावे पर साफ शब्दों में कहा है कि भारत की ओर से उसे ऐसा कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय (क्रेमलिन) के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा कि मॉस्को भारत के साथ अपने रणनीतिक साझेदारी वाले रिश्तों को बेहद अहम मानता है और उन्हें आगे भी मज़बूत करना चाहता है।   ट्रंप का बड़ा ऐलान ट्रंप ने एक दिन पहले घोषणा की थी कि अमेरिका और भारत के बीच एक नया व्यापार समझौता हुआ है। इसके तहत अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात पर लगने वाला टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया जाएगा। इसी के साथ ट्रंप ने दावा किया था कि इसके बदले भारत रूस से तेल खरीद बंद करेगा और अमेरिका से ज़्यादा तेल खरीदेगा। ट्रंप ने यह भी कहा था कि भारत के रूसी तेल खरीदने से यूक्रेन युद्ध में रूस को अप्रत्यक्ष रूप से मदद मिल रही है। रूस की दो टूक इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए क्रेमलिन के प्रवक्ता पेसकोव ने कहा, “रूस भारत के साथ संबंधों पर ट्रंप की टिप्पणियों का ध्यान से विश्लेषण कर रहा है।” जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने का फैसला किया है, तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया, "अब तक तो हमने भारत की ओर से रूस से तेल खरीद रोकने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं सुना है।” उन्होंने कहा कि नई दिल्ली भारत-रूस साझेदारी को भी उतनी ही अहमियत देता है। पेसकोव ने कहा, "हम द्विपक्षीय अमेरिकी-भारतीय संबंधों का सम्मान करते हैं लेकिन हम रूस और भारत के बीच एक उन्नत रणनीतिक साझेदारी के विकास को भी उतना ही महत्व देते हैं। भारत के साथ हमारे रिश्ते हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और हम उन्हें आगे भी विकसित करना चाहते हैं।” तेल और कूटनीति यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद 2022 से भारत रियायती रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। पश्चिमी देशों ने इस पर नाराज़गी जताई है और रूस की ऊर्जा आय को सीमित करने के लिए कई प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि भारत का रुख हमेशा यही रहा है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। बहरहाल, तस्वीर अभी साफ नहीं है क्योंकि एक तरफ ट्रंप का बड़ा दावा है, तो दूसरी तरफ रूस का इनकार। भारत की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में यह साफ है कि तेल, व्यापार और कूटनीति का यह खेल अभी जारी रहेगा।

मिडिल स्कूल छात्र की संदिग्ध मौत, शराब पीकर घर लौटते ही 7वीं मंजिल से कूदा

बेंगलुरु कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु शहर में शनिवार रात एक दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब कक्षा 10 के एक छात्र की अपने अपार्टमेंट की सातवीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई। पुलिस इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और अब तक की जांच में इसे एक संभावित आत्मघाती कदम माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार, छात्र शनिवार शाम अपने स्कूल के कुछ दोस्तों के साथ एक पब गया था। पार्टी के बाद वह करीब रात 9 बजे घर लौटा। सीसीटीवी फुटेज में देखा गया है कि उसके दोस्त उसे अपार्टमेंट के गेट तक छोड़कर चले गए। इसके बाद छात्र अकेले लिफ्ट से सातवीं मंजिल पर गया। पुलिस का कहना है कि वह अपने फ्लैट में जाने के बजाय बालकनी की ओर गया, जहां से उसके गिरने की आशंका है। बालकनी की रेलिंग ऊंची होने के कारण हादसे की संभावना कम मानी जा रही है। छात्र की मौत रात करीब 9.40 बजे हुई। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि छात्र ने शाम को Legacy Brewing Company नामक पब में दोस्तों के साथ कथित तौर पर शराब पी और धूम्रपान भी किया। इसी आधार पर पब के मालिकों और कर्मचारियों के खिलाफ नाबालिग को शराब परोसने का मामला दर्ज किया गया है। हालांकि पब प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने नाबालिग को शराब नहीं दी और वह कथित तौर पर अपने साथ शराब लेकर आया था। पुलिस अब पब के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है ताकि घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके। इस बीच, पुलिस ने जांच पूरी होने तक पब का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। हर एंगल से जांच एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि छात्र किन परिस्थितियों में गिरा। आत्महत्या सहित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।” पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या छात्र परिवार की प्रतिक्रिया से डर रहा था, या फिर उस पर पढ़ाई का दबाव था या मानसिक तनाव या कोई निजी परेशानी इस घटना की वजह तो बनी। पुलिस छात्र के दोस्तों और परिवार के बयान दर्ज कर रही है। सभी सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच के बाद ही स्थिति साफ होने की बात कही जा रही है।  

टैरिफ डील का बड़ा खुलासा: क्या किसानों को सच में मिला फायदा?

वाशिंगटन अमेरिका के साथ सोमवार को घोषित व्यापार समझौते को लेकर कयासों का बाजार गरम है। संसद से लेकर सड़कों तक विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है। इस बीच केंद्र सरकार के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत उन देशों से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा जिन पर प्रतिबंध नहीं हैं। गौरतलब है कि भारत रूस से तेल खरीदने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, जिस पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हुए हैं। किसानों के हितों से समझौता नहीं दरअसल, भारत द्वारा अपने राजनीतिक रूप से संवेदनशील कृषि क्षेत्र को अमेरिका की अधिक पहुंच के लिए खोलने से इनकार करना मुक्त व्यापार समझौते के दौरान वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच एक प्रमुख विवाद का मुद्दा रहा है। नई दिल्ली सोयाबीन और डेयरी जैसे कृषि क्षेत्रों को खोलने के लिए अनिच्छुक रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को, जिन्हें अब तक संरक्षित रखा गया है, आगे भी संरक्षित रखा जाएगा। इससे पहले ऐसी खबरें आई थीं कि भारत ने समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं के हिस्से के रूप में कुछ कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच की पेशकश की है। भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ एक व्यापार समझौते के तहत कृषि उत्पादों के लिए चुनिंदा बाजारों तक पहुंच की पेशकश की है। प्रतिबंध-मुक्त तेल खरीदेगी सरकार वैश्विक व्यापार डेटा प्रदाता केप्लर के अनुसार, ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगाने के बावजूद भारत प्रतिदिन लगभग 1.5 मिलियन बैरल रूसी कच्चे तेल का आयात कर रहा है, जो कुल भारतीय आयात का एक तिहाई से अधिक है। सरकार के सूत्रों ने कहा कि भारत प्रतिबंध-मुक्त दुनिया भर के देशों से कच्चे तेल की खरीद को दर के आधार पर जारी रखेगा। सूत्रों ने बताया कि प्रतिबंध लागू होने के दौरान हमने वेनेजुएला से तेल नहीं खरीदी थी। अब प्रतिबंध हट गए हैं, इसलिए हम खरीदेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि नई दिल्ली ऊर्जा खरीद में अपने नागरिकों को प्राथमिकता देना जारी रखेगी। बता दें कि सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन भारतीय वस्तुओं पर अपना टैरिफ मौजूदा स्तर से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। इसके बदले में नई दिल्ली रूस से तेल की खरीद बंद करने और इसके बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदने पर सहमत हो जाएगी। 500 अरब डॉलर के व्यापार ट्रंप ने यह भी कहा कि व्यापार समझौते के तहत भारत ने कई उपायों पर सहमति जताई है, जिनमें टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को 'शून्य' तक कम करना तथा ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि उत्पाद और कोयले सहित 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी सामान खरीदना शामिल है। सूत्रों ने बताया कि अमेरिका के साथ 500 अरब डॉलर की व्यापार प्रतिबद्धता की शर्तों में विमान सौदों और अन्य संबंधित निवेशों को शामिल किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि नया व्यापार समझौता भारत के लिए अपार आर्थिक लाभ के द्वार खोलेगा। भारतीय सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-नवंबर में अमेरिका को भारत का निर्यात सालाना आधार पर 15.88 प्रतिशत बढ़कर 85.5 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 46.08 अरब डॉलर रहा। इससे पहले एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी उत्पादों को खरीदने की प्रतिबद्धता में फार्मास्यूटिकल्स, दूरसंचार, रक्षा, पेट्रोलियम और विमान जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यह प्रक्रिया कई वर्षों में पूरी की जाएगी।

बलूचिस्तान में नई तस्वीर: हथियार थामे महिलाओं की एंट्री, पाकिस्तान के लिए बढ़ी चुनौती

बलूचिस्तान पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूच विद्रोहियों के हमलों ने सरकार और सेना दोनों की स्थिति को बेहद कमजोर कर दिया है। बलूच विद्रोहियों ने बलूचिस्तान के 12 अलग-अलग स्थानों पर सुरक्षा बलों, पुलिस और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर हमले किए, जिनमें कम से कम 10 सुरक्षाकर्मी मारे गए। इन घटनाओं से प्रांत में सुरक्षा स्थिति गंभीर बनी हुई है। मुख्यमंत्री सरफराज बुगती इन हमलों के बाद सार्वजनिक रूप से बहुत व्यथित नजर आए। इन हमलों के बाद बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) द्वारा जारी की गई दो हमलावरों की तस्वीरें काफी चर्चा में रहीं। इन तस्वीरों में दोनों हमलावर महिलाएं थीं। यह बात इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि सशस्त्र उग्रवाद को लंबे समय से पुरुष-प्रधान गतिविधि के रूप में देखा जाता रहा है। समाज के भीतर गुस्सा विश्लेषकों के अनुसार, बलूच प्रतिरोध आंदोलन अब पारंपरिक जनजातीय ढांचे से आगे बढ़कर सामाजिक और रणनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उनका कहना है कि पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान की सख्त कार्रवाइयों, जबरन गुमशुदगियों और राजनीतिक संवाद की कमी ने स्थानीय लोगों में असंतोष को और गहरा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषक आयशा सिद्दीका का मानना है कि किसी विद्रोह में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी उस समाज के भीतर गहरे गुस्से और टूटते सामाजिक ढांचे की ओर इशारा करती है। हाल के दिनों में हुए हमलों में कुल 50 नागरिकों और 17 सुरक्षाकर्मियों की मौत के बाद बीएलए ने दो महिला हमलावरों की पहचान जाहिर की। इनमें से एक की पहचान 24 वर्षीय आसिफा मेंगल के रूप में हुई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी पुष्टि की कि कम से कम दो हमलों में महिला उग्रवादियों की भूमिका रही। बीएलए के अनुसार, आसिफा मेंगल ने जनवरी 2024 में फिदायीन हमले का फैसला किया था और नुश्की में एक हमला अंजाम दिया। इसी बीच सोशल मीडिया पर बीएलए से जुड़ी एक महिला लड़ाके का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वह हथियारों से लैस होकर सुरक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास गतिविधियां करती दिख रही थी। वीडियो में उसके साथ पुरुष लड़ाके भी नजर आए, जो पाकिस्तानी सरकार और सुरक्षा बलों पर तंज कसते दिखे। बलूच महिलाओं की बढ़ रही भागीदारी दरअसल, हाल के वर्षों में बलूच महिलाओं की सशस्त्र संगठनों में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब महिला आत्मघाती हमलावर सामने आई हों। वर्ष 2022 में कराची विश्वविद्यालय के कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट के बाहर हुए हमले में पहली बार एक महिला फिदायीन की भूमिका सामने आई थी, जिसमें तीन चीनी नागरिकों सहित चार लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद जून 2022 और मार्च 2025 में भी बलूचिस्तान में महिला उग्रवादियों द्वारा हमलों की घटनाएं दर्ज हुईं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इन घटनाओं ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों को और जटिल बना दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे बलूच आंदोलन का नेतृत्व जनजातीय सरदारों से हटकर शिक्षित मध्यम वर्ग की ओर बढ़ा, वैसे-वैसे महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी। वॉइस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स के अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2000 के बाद से 5000 से अधिक लोग लापता हुए हैं, जिनमें ज्यादातर पुरुष हैं। ऐसे में कई परिवारों में महिलाओं ने सामाजिक और राजनीतिक प्रतिरोध की जिम्मेदारी उठाई है। रणनीतिक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि महिला उग्रवादियों की बढ़ती भूमिका बलूच समाज में गहरी निराशा और हताशा को दर्शाती है। वहीं, पाकिस्तानी सत्ता के करीबी कुछ विश्लेषक इसे सशक्तिकरण के बजाय संगठित शोषण बताते हैं और आरोप लगाते हैं कि उग्रवादी संगठन युवा महिलाओं को भावनात्मक और वैचारिक दबाव में भर्ती कर रहे हैं। पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती सुरक्षा आंकड़ों की बात करें तो 2011 के बाद से बलूच उग्रवाद से जुड़े हमलों में पाकिस्तान में कम से कम 350 लोगों की जान जा चुकी है। वर्ष 2024 और 2025 में संघर्ष से जुड़ी मौतों में तेज इजाफा हुआ है, जिससे सुरक्षा बलों पर दबाव और बढ़ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में बलूचिस्तान में उग्रवाद की दिशा और उसमें महिलाओं की बढ़ती भूमिका पाकिस्तान के लिए एक बड़ी रणनीतिक तथा राजनीतिक चुनौती बनती जा रही है।