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भारतीय वायुसेना को जल्द मिलेगी ताकत, 5 तेजस MK1A जेट तैनाती के लिए तैयार

बेंगलुरु  स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) Mk1A की डिलीवरी में लंबे समय से देरी हो रही थी. लेकिन अब हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने बड़ा अपडेट दिया है. HAL चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. डीके सुनील ने हाल ही में बताया कि पांच तेजस Mk1A विमान पूरी तरह तैयार हैं. फायरिंग और मिसाइल ट्रायल्स भी सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं. कंपनी भारतीय वायु सेना (IAF) से इनकी स्वीकृति के लिए जल्द बातचीत करेगी. इन्हें इस वित्तीय वर्ष में ही डिलीवर करने की तैयारी है. इंजन सप्लाई की समस्या अब खत्म पहले तेजस Mk1A की डिलीवरी में मुख्य समस्या GE Aerospace से F404 इंजन की सप्लाई में देरी थी. लेकिन अब इंजन उपलब्ध हैं. HAL ने पांच विमानों को इंजन फिट करके तैयार कर लिया है. HAL का कहना है कि ट्रायल्स के बाद बाकी कुछ छोटे टेस्ट भी जल्द पूरे हो जाएंगे. उसके बाद IAF को ये विमान सौंप दिए जाएंगे.  वायु सेना की बढ़ती जरूरत और स्क्वाड्रन की कमी भारतीय वायु सेना को नए लड़ाकू विमानों की सख्त जरूरत है. वर्तमान में IAF के पास स्वीकृत 42 फाइटर स्क्वाड्रन की बजाय सिर्फ 31 स्क्वाड्रन ही हैं. पुराने MiG-21 जैसे विमान रिटायर हो रहे हैं, जिससे लड़ाकू ताकत पर असर पड़ रहा है. एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कई बार कहा है कि वे तेजस Mk1A का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. पिछले साल एयरो इंडिया में भी उन्होंने प्रोग्राम की धीमी गति पर खुलकर नाराजगी जताई थी. तेजस Mk1A के आधुनिक फीचर्स तेजस Mk1A पुराने Mk1 से काफी बेहतर है. इसमें AESA रडार, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, बेहतर एवियोनिक्स और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग की क्षमता है. ये फीचर्स इसे ज्यादा घातक और आधुनिक बनाते हैं. IAF के लिए ये विमान भविष्य की रीढ़ बनेंगे. HAL ने 83 तेजस Mk1A की डील पहले ही हासिल की है. कुल 180 तक के ऑर्डर हैं. राफेल डील से बीच का रास्ता तेजस की डिलीवरी में देरी के कारण वायु सेना ने फ्रांस से और राफेल लड़ाकू विमानों की डील पर बात शुरू की है. पहले 36 राफेल से वायु सेना की ताकत बहुत बढ़ी है. नई डील से स्क्वाड्रन की संख्या जल्दी बढ़ाई जा सकेगी, जब तक तेजस पूरे जोश से उत्पादन में नहीं आ जाता. आत्मनिर्भर भारत के लिए महत्वपूर्ण कदम स्वदेशी प्लेटफॉर्म जैसे तेजस लंबे समय में भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएंगे. लेकिन समय पर डिलीवरी सबसे जरूरी है. HAL का यह अपडेट दिखाता है कि प्रोग्राम अब सही ट्रैक पर है. अगर IAF संतुष्ट हुई और ट्रायल्स पूरे हुए, तो मार्च 2026 तक पहले पांच तेजस Mk1A वायु सेना में शामिल हो सकते हैं. 

भारत के विकास में योगदान के लिए पीएम मोदी ने HD देवगौड़ा की तारीफ की

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा से मुलाकात की। इस मुलाकात की जानकारी पीएम मोदी ने खुद दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा से मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं। सोशल मीडिया पर शेयर की गई दो तस्वीरों में से एक में पीएम मोदी देवगौड़ा को पुष्पगुच्छ देते हुए नजर आ रहे हैं, जबकि दूसरी तस्वीर में देवगौड़ा के हाथों को पकड़कर महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करते नजर आ रहे हैं। पीएम मोदी ने एचडी देवगौड़ा के साथ हुई वार्ता की जानकारी देते हुए कहा, "एचडी देवेगौड़ा के साथ बातचीत हुई। अहम मुद्दों पर उनके सार्थक विचार काफी ध्यान देने लायक हैं। भारत के विकास के लिए उनका उत्साह भी उतना ही सराहनीय है।" एचडी देवेगौड़ा 1996-1997 तक भारत के प्रधानमंत्री थे और वर्तमान में वे जनता दल (सेक्युलर) के प्रमुख हैं। उनकी पार्टी एनडीए गठबंधन का हिस्सा है और कर्नाटक में भाजपा के साथ मिलकर काम करती है। देवेगौड़ा लंबे समय से कृषि, ग्रामीण विकास और जल संसाधनों जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखते आए हैं। वे कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं और अभी राज्यसभा सदस्य हैं। उनकी उम्र और राजनीतिक अनुभव के कारण उनकी सलाह राजनीतिक हलकों में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। हाल के वर्षों में दोनों नेताओं के बीच कई बार मुलाकातें और बातचीत हुई हैं, जो एनडीए के सहयोगी दलों के बीच समन्वय को मजबूत करने का संकेत देती हैं। पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा ने अतीत में भी प्रधानमंत्री मोदी की कई योजनाओं की सराहना की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात सिर्फ सौजन्य नहीं, बल्कि रणनीतिक महत्व भी है। खासकर कर्नाटक जैसे महत्वपूर्ण राज्य में जहां जद(एस) का प्रभाव अभी भी बना हुआ है, और आगामी विधानसभा या अन्य चुनावों को देखते हुए गठबंधन की मजबूती जरूरी है।

यूएसएस अब्राहम लिंकन तेहरान के पास, अमेरिका की तैयारी इराक के बाद ईरान पर

वॉशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर से बड़े स्ट्राइक की धमकी दी है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि इस बार का हमला पिछली बार से भी बड़ा होगा। अमेरिका ने हिंद महासागर में घातक यूएसएस अब्राहम लिंकन को उतारा है, जो ईरान के करीब पहुंच रहा है। अमेरिकी मीडिया ने बताया कि यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप सोमवार को हिंद महासागर में दाखिल हुआ और ईरान के करीब जा रहा है। यह ईरान के खिलाफ किसी भी संभावित ऑपरेशन में मदद कर सकता है, चाहे वह हमलों में मदद करना हो या ईरान के संभावित जवाबी हमले से क्षेत्रीय सहयोगियों की रक्षा करना हो। अमेरिकी मीडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका और ईरान इस महीने की शुरुआत में मैसेज का लेन-देन कर रहे थे, जिसमें ओमानी डिप्लोमैट्स के जरिए और ट्रंप के विदेशी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच मैसेज का लेन-देन शामिल था। इस बातचीत में अमेरिकी हमले को रोकने के लिए एक संभावित मीटिंग के बारे में बात हो रही थी। दरअसल, यह उस अमेरिकी हमले की बात हो रही है, जिसकी धमकी ट्रंप प्रदर्शनकारियों की मौत के जवाब में दे रहे थे। ट्रंप ने हाल के दिनों में सैन्य कार्रवाई की अपनी धमकियां बढ़ा दी हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यूएस की सेना इस इलाके में एयर डिफेंस सिस्टम भेज रही है, जिसमें एक्स्ट्रा पैट्रियट बैटरी भी शामिल हैं, ताकि वहां मौजूद यूएस फोर्स को ईरान के संभावित जवाबी हमले से बचाया जा सके। अमेरिकी मीडिया ने कई सोर्स के हवाले से बताया कि अमेरिका इस इलाके में एक या ज्यादा थाड मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी तैनात किया है। इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के एएफसीईएनटी कमांडर और कंबाइंड फोर्सेज एयर कंपोनेंट कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डेरेक फ्रांस ने एक बयान में कहा, "अमेरिकी एयर फोर्स मिडिल ईस्ट में कई दिनों की एयर एक्सरसाइज करने वाली है, जिससे एयरमैन यह साबित कर सकेंगे कि वे मुश्किल हालात में भी सुरक्षित, सही तरीके से और अपने पार्टनर्स के साथ बेहतर तालमेल के जरिए काम को अंजाम दे सकते हैं।” दूसरी ओर ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर चेतावनी दे दी है कि फ्लीट ईरान की तरफ बढ़ रहा है। इसे अब्राहम लिंकन लीड कर रहा है, जो बहुत तेजी से, बहुत ताकत और मकसद के साथ आगे बढ़ रहा है।

सुरक्षित यात्रा का वादा: मचैल माता यात्रा में वैष्णो देवी जैसी आधुनिक सुविधाएं

जम्मू-कश्मीर मचैल माता की पवित्र यात्रा को अब और ज्यादा सुरक्षित बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। पिछले साल की दर्दनाक घटना से सीख लेते हुए प्रशासन ने एक अहम कदम उठाने का फैसला किया है। अब मचैल यात्रा में आरएफआईडी (RFID) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि हर श्रद्धालु की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। दरअसल, 14 अगस्त 2025 को मचैल यात्रा के दौरान बादल फटने से भारी तबाही हुई थी। इस हादसे में 60 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, 100 से अधिक लोग घायल हुए थे और कई लोग लंबे समय तक लापता रहे। राहत और बचाव कार्य करीब एक महीने तक चला। इस घटना ने साफ कर दिया कि पुरानी व्यवस्थाएं अब पर्याप्त नहीं हैं और नई तकनीक अपनाना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन अब मचैल यात्रा को वैष्णो देवी यात्रा की तरह आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना चाहता है। नई व्यवस्था के तहत हर श्रद्धालु को यात्रा के दौरान एक RFID कार्ड दिया जाएगा। इस कार्ड से यह पता लगाया जा सकेगा कि श्रद्धालु किस समय कहां मौजूद है। अगर किसी तरह की आपात स्थिति आती है, तो राहत और बचाव टीम को तुरंत सही जानकारी मिल सकेगी। जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि अप्रैल से सितंबर के बीच, मानसून से पहले, आपदा से निपटने की पूरी तैयारी कर ली जाए। खास तौर पर बाढ़, भूस्खलन और खराब मौसम से जुड़ी घटनाओं को लेकर प्रशासन हमेशा सतर्क रहे। राज्य में आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और मौसम विभाग के साथ लगातार तालमेल रखा जा रहा है। मौसम की पहले से चेतावनी, लगातार निगरानी और सही समय पर जानकारी पहुंचाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। RFID सिस्टम के साथ-साथ मचैल यात्रा मार्ग पर सुरक्षित शरण स्थल और सहायक ढांचे बनाने की भी योजना है, ताकि जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित जगहों तक पहुंचाया जा सके। इसके अलावा, वैष्णो देवी समेत सभी बड़े तीर्थ स्थलों पर नियमित मॉक ड्रिल कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। किश्तवाड़ जिला प्रशासन का कहना है कि मचैल हादसे से मिले अनुभवों के आधार पर एक पूरा आपदा प्रबंधन प्लान तैयार किया गया है। प्रशासन का साफ संदेश है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उम्मीद है कि नई तकनीक, बेहतर योजना और अलग-अलग एजेंसियों के बीच मजबूत तालमेल से मचैल माता की यात्रा आने वाले समय में आस्था के साथ-साथ सुरक्षा की मिसाल बनेगी।

जापानी पीएम ने कसी कड़ी भाषा, कहा- ताइवान संघर्ष में अमेरिका पर हमला बर्दाश्त नहीं

टोक्यो जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने ताइवान को लेकर बेहद सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि अगर ताइवान में कोई बड़ा संकट पैदा होता है और वहां अमेरिकी सेना पर हमला किया जाता है, तो जापान मूकदर्शक नहीं बनेगा, बल्कि दखल देगा। टोक्यो में एक टीवी कार्यक्रम के दौरान ताकाइची ने कहा कि ऐसी स्थिति में अगर जापान ने कुछ नहीं किया तो अमेरिका के साथ उसका सुरक्षा गठबंधन कमजोर पड़ जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ताइवान का मामला सिर्फ एक क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि जापान की सुरक्षा और उसके अंतरराष्ट्रीय रिश्तों से जुड़ा हुआ है। निक्केई एशिया के मुताबिक, ताकाइची ने यह भी कहा कि आपात स्थिति में ताइवान में फंसे जापानी और अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिकी सेना पर हमला होता है और हम दूरी बनाते हैं, तो फिर हमारे गठबंधन का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।”प्रधानमंत्री ने यह भी साफ किया कि सैन्य हमले जैसी इमरजेंसी में जापान हालात का आकलन करेगा और मौजूदा कानूनों के दायरे में रहकर जवाब देगा। उनका कहना था कि नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।ताकाइची का यह बयान ऐसे समय आया है जब चीन लगातार ताइवान पर अपना नियंत्रण जताने के संकेत दे रहा है। इससे ताइवान पर संभावित चीनी सैन्य कार्रवाई की आशंका और गहरी हो गई है।   गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में भी ताकाइची ने जापानी संसद में कहा था कि ताइवान के खिलाफ चीन की नाकेबंदी या सैन्य कार्रवाई जापान के अस्तित्व के लिए खतरा हो सकती है। उस बयान पर चीन ने कड़ी नाराजगी जताई थी और दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव बढ़ गया था।चीन के दबाव के बाद ताकाइची ने दिसंबर में कहा था कि जापान का ताइवान पर रुख 1972 से नहीं बदला है, लेकिन अब उनके ताजा बयान से साफ है कि टोक्यो ताइवान के मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। इससे एक बार फिर चीन-जापान रिश्तों में तल्खी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।  

एक हफ्ते में दूसरी बड़ी दुर्घटना: दक्षिण अफ्रीका में 11 की जान गई

दक्षिण अफ्रीका दक्षिण अफ्रीका में एक बार फिर दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पूर्वी क्वाज़ुलु-नताल प्रांत में एक मिनीबस टैक्सी और ट्रक की जोरदार टक्कर में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक स्कूली बच्चा भी शामिल है। प्रांतीय परिवहन विभाग के अधिकारी सिबोनिसो डूमा ने बताया कि यह आंकड़ा शुरुआती जानकारी पर आधारित है और मरने वालों की संख्या बढ़ भी सकती है। हादसा इतना भीषण था कि कई यात्रियों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। निजी आपातकालीन सेवा ALS पैरामेडिक्स के प्रवक्ता गैरिथ जेमिसन के अनुसार, हादसे में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मिनीबस का ड्राइवर टक्कर के बाद मलबे में फंस गया था, जिसे बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। यह हादसा ऐसे समय हुआ है, जब एक हफ्ते पहले ही दक्षिण अफ्रीका में मिनीबस टैक्सी और ट्रक की आमने-सामने की टक्कर में 14 स्कूली बच्चों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रहे इन हादसों ने देश में सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा, तेज रफ्तार और लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और लोगों से यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की है।  

SC ने आवारा कुत्तों के विवाद में सुरक्षित किया फैसला, वकीलों को दिए 7 दिन

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिनमें आवारा कुत्तों के मामले में दिए गए पहले के आदेश में बदलाव की मांग की गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों से एक हफ्ते के अंदर अपनी लिखित दलीलें जमा करने को कहा है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सभी राज्यों के सभी पक्षों, नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) द्वारा दी गई दलीलों के आखिरी दौर की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।   इससे पहले कुत्ते पालने वालों, कुत्ते के काटने की घटनाओं के पीड़ितों, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से पेश हुए वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। कोर्ट ने कल कुछ राज्यों द्वारा दायर किए गए अस्पष्ट हलफनामों पर नाराजगी जताई थी। बार एंड बेंच के मुताबिक, स्वतः संज्ञान मामले में कोर्ट ने आज NHAI से एक ऐप बनाने का भी आग्रह किया, जिसके ज़रिए लोग हाईवे पर आवारा जानवरों को देखने की रिपोर्ट कर सकें। कोर्ट ने कहा, "आप एक ऐप क्यों नहीं बनाते ताकि कोई भी जानवर को देखकर उसकी तस्वीर खींचकर अपलोड कर सके? आपके पास विज़ुअल्स होंगे।" इस पर NHAI के वकील ने जवाब दिया, "हम ऐसा करेंगे।" देश में सिर्फ 76 मान्यता प्राप्त स्टेरिलाइज़ेशन सेंटर खास बात यह है कि जैसे ही सुनवाई खत्म होने वाली थी, AWBI के वकील ने कोर्ट को बताया कि देश में सिर्फ 76 मान्यता प्राप्त स्टेरिलाइज़ेशन सेंटर हैं, जबकि विभिन्न राज्यों के डेटा से पता चलता है कि 883 आवारा कुत्तों के स्टेरिलाइज़ेशन सेंटर हैं। वकील ने कहा, “कुछ आवेदन पेंडिंग हैं। 250 से ज़्यादा आवेदन हैं… राज्यों द्वारा दिए गए डेटा के अनुसार 883 चल रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक हमारी तरफ से मान्यता नहीं दी गई है।” कोर्ट ने आखिर में पूछा, "जिन सेंटरों को आपने (AWBI) मान्यता नहीं दी है, उनमें क्या हो रहा है?" इससे AWBI के वकील ने स्टेरिलाइज़ेशन के कुछ डेटा में विसंगति की ओर इशारा किया, जिससे शायद यह पता चलता है कि संख्या उतनी सटीक नहीं थी जितनी दावा किया गया था। इससे यह चिंता भी बढ़ी कि स्टेरिलाइज़ेशन के लिए तय फंड उन लोगों द्वारा लिया जा रहा था जो असल में ऐसा काम नहीं कर रहे थे। कई राज्यों ने इस बारे में जानकारी अभी तक उपलब्ध नहीं कराई है। जहां कुत्ते कम वहां स्टेरिलाइज़ेशन ज्यादा वकील ने कहा, "आश्चर्यजनक डेटा है। जहां कुत्तों की आबादी कम है जैसे उत्तराखंड में, वहां स्टेरिलाइज़ेशन ज़्यादा है (रिपोर्ट किए गए स्टेरिलाइज़ेशन की संख्या कुत्तों की आबादी की संख्या से ज़्यादा है)।" इस पर कोर्ट ने कहा, “कारण साफ हैं। हर कोई इसके बारे में जानता है। कितनी ग्रांट दी जाती है।” इसके बाद वकील ने कहा, "जितना कम कहा जाए, उतना अच्छा।" इस पर कोर्ट ने कहा, "हां। कम कहना ही बेहतर है।" कोर्ट ने आगे कहा, "AWBI से बस यही अनुरोध है कि जो भी आवेदन पेंडिंग हैं, आप उन्हें प्रोसेस करें, और या तो उन्हें रिजेक्ट करें या एक तय समय के अंदर उन्हें मंज़ूरी दें।"  

CJI की दो टूक: ऐसा हुआ तो सब पर केस बनेगा— सुप्रीम कोर्ट ने याचिका सुनने से किया इनकार

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुरुवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें यह घोषणा करने की मांग की गई थी कि घरेलू कामगारों या घरेलू सहायकों को न्यूनतम मजदूरी पाने का मौलिक अधिकार है पेन थोजिलालारगल संगम और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य के मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि घरेलू कामगारों के लिए न्यूनतम वेतन लागू करने जैसे नीतिगत फैसले राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और इस पर न्यायपालिका का हस्तक्षेप सीमित है। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने आशंका जताई कि यदि घरेलू कामगारों के लिए अनिवार्य न्यूनतम वेतन तय किया गया, तो इसके उलटे परिणाम हो सकते हैं। CJI ने कहा, “अगर ऐसा हुआ तो हर घर मुकदमे में फंस जाएगा।” इसके आगे मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “न्यूनतम वेतन तय होते ही हर घर मुकदमेबाजी में फंस जाएगा। लोग घरेलू कामगार रखना ही बंद कर देंगे। ट्रेड यूनियनें हर घर को अदालत तक घसीटेंगी।” इसके साथ ही CJI ने उदाहरण देते हुए कहा कि कई उद्योगों में ट्रेड यूनियनों के हस्तक्षेप के बाद रोजगार के अवसर घटे हैं और घरेलू कामगारों के मामले में भी ऐसा ही हो सकता है। मौलिक अधिकार की दलील पर कोर्ट ने जताई चिंता हालांकि, सुनवाई के दौरान पीठ ने माना कि यह तर्क आकर्षक लगता है कि न्यूनतम वेतन के बिना घरेलू कामगारों के समानता, गैर-भेदभाव और निष्पक्ष रोजगार से जुड़े अधिकार (अनुच्छेद 14, 15, 16) प्रभावित होते हैं, लेकिन कोर्ट ने आगाह किया कि अति-सक्रिय ट्रेड यूनियनें इन कामगारों को और बदतर हालात में छोड़ सकते हैं। CJI ने कहा, “कृपया इसके परिणामों पर विचार करें। ट्रेड यूनियनें अंत में इन्हें छोड़ देंगी और इनके पास कहीं जाने की जगह नहीं बचेगी।” एजेंसियों के शोषण पर भी सवाल बार एंड बेंच के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू कामगारों को रोजगार देने वाली एजेंसियों की भूमिका पर भी चिंता जताई। मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में भी पहले एजेंसियों के जरिए कामगार रखे गए थे। उन्होंने कहा, “हम एजेंसियों को 40,000 रुपये प्रति कर्मचारी देते थे, लेकिन उन गरीब लड़कियों को सिर्फ 19,000 रुपये मिलते थे। यही वजह है कि भरोसा टूटता है।” उन्होंने कहा कि कई आपराधिक घटनाएं भी तब सामने आती हैं, जब घरेलू कामगार एजेंसियों के माध्यम से रखे जाते हैं, न कि सीधे मानवीय संपर्क के आधार पर। याचिका पर अदालत का रुख अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता जिस तरह का आदेश चाहते हैं, उसके लिए कानून में संशोधन जरूरी होगा और ऐसा निर्देश देना न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा, “जब तक विधायिका से कानून बनाने को नहीं कहा जाता, तब तक कोई प्रभावी आदेश पारित नहीं किया जा सकता। ऐसा निर्देश देना इस अदालत के लिए उचित नहीं है।” हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्यों को घरेलू कामगारों की स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और शोषण रोकने के लिए उपयुक्त तंत्र विकसित किया जाना चाहिए। क्या थी याचिका याचिका में मांग की गई थी कि घरेलू कामगारों को न्यूनतम वेतन का मौलिक अधिकार घोषित किया जाए और उन्हें न्यूनतम वेतन अधिनियम या वेज कोड, 2019 से बाहर रखने को असंवैधानिक ठहराया जाए। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि सिंगापुर जैसे देशों में घरेलू कामगारों के लिए छुट्टी और अन्य अधिकार अनिवार्य हैं। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि घरेलू कामगारों के लिए कोई कल्याणकारी कानून नहीं हैं। उन्होंने असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायालय आर्थिक नीतियों के मामलों में बेहद सतर्क रहता है।

भारत बनेगा इस्लामिक देशों का कूटनीतिक मंच, 22 अरब राष्ट्र जुटेंगे—किन मुद्दों पर होगी बात?

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत में इस सप्ताह के अंत में मुस्लिम देशों का जमावड़ा लगने जा रहा है। भारत आगामी शनिवार को राजधानी दिल्ली में भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक की मेजबानी करेगा जिसमें अरब लीग के सभी 22 अरब देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। बता दें कि यह बैठक दस साल बाद हो रही है। वहीं यह बात भी अहम है कि यह पहली बार होगा जब भारत इस बैठक की मेजबानी करने जा रहा है।   जानकारी के मुताबिक अरब देशों के विदेश मंत्री, राज्य मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और अरब लीग सचिवालय इस बैठक में अपने देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बताया है कि इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात मिलकर करेंगे। इसमें अरब लीग के सदस्य देशों के विदेश मंत्री और अरब लीग के महासचिव भी भाग लेंगे। वहीं बैठक से पहले शुक्रवार को भारत और अरब वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत भी होगी। एजेंडे में क्या? दोनों पक्षों की दूसरी बैठक दस सालों के अंतराल के बाद हो रही है। इससे पहले दोनों पक्षों के बीच पहली बैठक 2016 में बहरीन में हुई थी। पहली बैठक के दौरान मंत्रियों ने सहयोग के पांच प्राथमिक क्षेत्रों-अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति-की पहचान की थी और इन क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियों का प्रस्ताव रखा था। वहीं शनिवार को होने वाली बैठक से मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने और भारत-अरब साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ और व्यापक बनाने की अपेक्षा होगी। अरब लीग में पर्यवेक्षक की भूमिका में भारत गैरतलब है कि भारत 22 सदस्य देशों वाले पैन-अरब संगठन अरब लीग में पर्यवेक्षक की भूमिका में है। वहीं भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक भारत और अरब देशों के बीच साझेदारी को आगे बढ़ाने वाली सर्वोच्च संस्थागत व्यवस्था है। इस साझेदारी को मार्च 2002 में औपचारिक रूप दिया गया था जब भारत और अरब लीग के बीच संवाद प्रक्रिया को संस्थागत स्वरूप देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके बाद दिसंबर 2008 में तत्कालीन अरब लीग महासचिव अमर मूसा की भारत यात्रा के दौरान अरब-भारत सहयोग मंच की स्थापना के लिए एक सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। 2013 में इसकी संरचनात्मक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से इसमें संशोधन भी किया गया।  

UGC रूल्स पर SC की दोटूक चेतावनी, लगाई रोक; बोले– देश के सामाजिक ढांचे पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली यूजीसी रूल्स को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इन नियमों को लेकर देश भर में विवाद हो रहा था और सवर्ण समाज के लोगों ने ऐतराज जताया था। यह कहा जा रहा था कि इन नियमों में सवर्ण समाज को पहले से ही दोषी मान लिया गया है और जांच कमेटी में उनके प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित नहीं किया गया है। इसके अलावा एससी, एसटी के साथ ही ओबीसी को भी भेदभाव के दायरे में लाए जाने को लेकर भी ऐतराज था। यह मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो बेंच ने अगले आदेश तक रोक लगा दी।   अदालत ने कहा कि फिलहाल इन नियमों पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक कमेटी के गठन की सलाह दी है, जो इन नियमों की समीक्षा करे। कोर्ट ने सरकार को सलाह दी है कि वह यूजीसी के इन नियमों की भाषा को देखे और नए सिरे से नियमों को जारी किया जाए। नए नियम आने तक 2012 वाले रेगुलेशन ही जारी रहेंगे। अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए 19 मार्च की तारीख तय की है। उस दिन केंद्र सरकार और यूजीसी यह जानकारी देंगे कि वह इन नियमों में समीक्षा के लिए क्या कर रहे हैं। इस तरह सरकार के पास करीब 50 दिनों का वक्त है, जिसमें उसे इन नियमों में समीक्षा को लेकर फैसला लेना है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा, 'यदि हमने दखल नहीं दिया तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इससे समाज में बंटवारे की स्थिति पैदा होगी और उसके नतीजे खतरनाक होंगे। पृथमदृष्टया हमें लगता है कि इन रेगुलेशंस की भाषा स्पष्ट नहीं है। इसके बारे में एक्सपर्ट्स को विचार करना होगा और सही एवं स्पष्ट भाषा के साथ नए नियम जारी करने होंगे। यह भाषा ऐसी होनी चाहिए कि कोई भी इन नियमों का बेजा इस्तेमाल न कर सके।' अदालत ने कहा कि सरकार और यूजीसी हमें 19 मार्च को इस संबंध में जवाब दे। याचिका में कहा गया था- सवर्णों को सुनवाई का अधिकार क्यों नहीं दरअसल याचिका में कहा गया था कि इन नियमों में सवर्णों को किसी भी तरह के भेदभाव की स्थिति में शिकायत का मौका नहीं दिया गया है। एससी, एसटी और ओबीसी को तो भेदभाव की शिकायत का अधिकार दिया गया है, लेकिन सवर्णों को ऐसा मौका नहीं मिलेगा। इसका अर्थ यह है कि उन्हें पहले ही अपराधी मान लिया गया है। इन दलीलों के साथ प्रदर्शन हो रहे थे और इसी के साथ अदालत में अर्जी दाखिल की गई थी। इसके अलावा एक मांग यह भी थी कि यदि शिकायत झूठी पाई जाती है तो फिर गलत आरोप लगाने पर भी ऐक्शन होना चाहिए। अगर हम हस्तक्षेप नहीं करते हैं तो इसके खतरनाक परिणाम होंगे, समाज में विभाजन होगा और इसके गंभीर प्रभाव होंगे। प्रथम दृष्टया हम कह सकते हैं कि विनियमन की भाषा अस्पष्ट है और विशेषज्ञों को इसकी भाषा को संशोधित करने के लिए जांच करने की आवश्यकता है ताकि इसका दुरुपयोग न हो। चीफ जस्टिस ने कहा, ‘मान लीजिए कि एक छात्र साउथ का है और उत्तर के किसी राज्य में एडमिशन मिलता है। इसी तरह उत्तर वाले को दक्षिण में एडमिशन मिलता है। ऐसी स्थिति में जरूरी है कि कुछ टिप्पणियां दोनों को झेलनी हों। यदि दोनों की जातियों का पता ना हो तो फिर उन्हें किस नियम के तहत समाधान मिलेगा। यह भी जानकारी होनी चाहिए।’ मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमने 75 वर्षों में जिस देश को वर्गहीन समाज बनाने के लिए इतनी सारी उपलब्धियां हासिल की हैं। क्या अब हम उसे पीछे नहीं ले जा रहे हैं। रैगिंग में सबसे बुरी बात यह है कि दक्षिण या उत्तर-पूर्व से आने वाले बच्चे अपनी संस्कृति साथ लाते हैं और कोई अनजान व्यक्ति उन पर टिप्पणी करने लगता है। फिर आपने अलग-अलग छात्रावासों की बात की। अंतरजातीय विवाह भी होते हैं और हम भी ऐसे छात्रावासों में रहे हैं, जहां सभी एक साथ रहते थे। इसका भी ध्यान रखना जरूरी है। सुनवाई के दौरान वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि हमारी आपत्ति इन रेगुलेशंस के सेक्शन 3 (सी) को लेकर है। जातिगत भेदभाव की परिभाषा में एससी, एसटी और ओबीसी को शामिल किया गया है। इसमें जनरल कैटिगरी शामिल ही नहीं है। ऐसा तो संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ है, जिसमें आप पहले ही एक वर्ग को अपराधी मान लेते हैं और उनके खिलाफ होने वाले भेदभाव की शिकायत का कोई मंच ही नहीं दिया गया है।