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ग्राहक की गलती नहीं तो बैंक को 10 दिन में लौटानी होगी रकम

नई दिल्ली  राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने कहा है कि खाताधारक की गलती या लापरवाही नहीं होने के बावजूद खाते से रकम निकाली गई है तो बैंक को दस दिन में रकम वापस करनी होगी। शीर्ष उपभोक्ता आयोग ने भारतीय रिजर्व बैंक के 2017 के सर्कुलर के प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए यह फैसला दिया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एपी शाही, सदस्य भरत कुमार पांड्या की पीठ ने एक मामले में बेंगलूरु की महिला खाताधारक के हक मे फैसला देते हुए राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के फैसले के खिलाफ बैंक की अपील खारिज कर दी।ग्राहक की गलती नहीं तो बैंक को 10 दिन में लौटानी होगी रकम नई दिल्ली /राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने कहा है कि खाताधारक की गलती या लापरवाही नहीं होने के बावजूद खाते से रकम निकाली गई है तो बैंक को दस दिन में रकम वापस करनी होगी। शीर्ष उपभोक्ता आयोग ने भारतीय रिजर्व बैंक के 2017 के सर्कुलर के प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए यह फैसला दिया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एपी शाही, सदस्य भरत कुमार पांड्या की पीठ ने एक मामले में बेंगलूरु की महिला खाताधारक के हक मे फैसला देते हुए राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के फैसले के खिलाफ बैंक की अपील खारिज कर दी।

16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए गोवा सरकार की तैयारी, सोशल मीडिया पर प्रतिबंध जल्द लागू

पणजी मोबाइल और सोशल मीडिया बच्चों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। छोटे बच्चे भी घंटों Instagram, Facebook, YouTube और अन्य सोशल मीडिया ऐप्स पर समय बिता रहे हैं। इसी को देखते हुए अब गोवा सरकार एक बड़ा कदम उठाने की सोच रही है। गोवा सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने पर विचार कर रही है। इस बात का संकेत खुद राज्य के मंत्री ने दिया है। उनका कहना है कि बच्चों को मोबाइल की लत, गलत कंटेंट और मानसिक दबाव से बचाना जरूरी है। सरकार का मानना है कि कम उम्र में सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के दिमाग और व्यवहार पर गलत असर डाल सकता है। इसी वजह से गोवा में इस तरह के नियम पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि अभी यह फैसला पूरी तरह लागू नहीं हुआ है, लेकिन इस खबर के सामने आते ही पूरे देश में चर्चा तेज हो गई है। माता-पिता, शिक्षक और सोशल मीडिया यूजर्स इस मुद्दे पर अपनी राय दे रहे हैं। गोवा सरकार सोशल मीडिया पर रोक क्यों लगाना चाहती है? गोवा सरकार का कहना है कि आजकल बच्चे बहुत कम उम्र में ही मोबाइल और सोशल मीडिया के आदी हो रहे हैं। घंटों स्क्रीन देखने से उनकी आंखों, नींद और दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर कई बार गलत वीडियो, गलत बातें और गलत लोग भी मिल जाते हैं। बच्चे आसानी से इनके प्रभाव में आ जाते हैं। साइबर बुलिंग यानी ऑनलाइन परेशान करना भी एक बड़ी समस्या बन रही है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार सोच रही है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखा जाए। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया उठा चुका ऐसा कदम ऑस्ट्रेलिया जैसे देश ने पहले ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सख्त नियम बना दिए हैं। वहां बच्चों को Instagram, Facebook और TikTok जैसे ऐप्स इस्तेमाल करने की मनाही है। सरकार का कहना है कि इससे बच्चों का बचपन सुरक्षित रहेगा और वे मोबाइल से ज्यादा किताबों, खेल और परिवार के साथ समय बिताएंगे।

यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप का बयान, पुतिन की कीव रणनीति पर मिली आशंका और रूस की चुप्पी

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन की राजधानी कीव और अन्य शहरों पर एक हफ्ते तक हमला न करने पर सहमति जताई है. ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने खुद पुतिन से फोन पर बात कर यह अपील की थी. ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन में इस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है, ऐसे में उन्होंने पुतिन से मानवीय आधार पर हमले रोकने को कहा. ट्रंप का कहना है कि पुतिन ने इस पर हामी भर दी. मैंने खुद पुतिन से कहा, उन्होंने मान लिया- ट्रंप व्हाइट हाउस में गुरुवार को हुई एक कैबिनेट मीटिंग के दौरान ट्रंप ने यह दावा किया. उन्होंने कहा कि मैंने राष्ट्रपति पुतिन से व्यक्तिगत तौर पर कहा कि एक हफ्ते तक कीव और अन्य शहरों पर हमला न करें, और उन्होंने ऐसा करने पर सहमति दी. मुझे कहना होगा, यह बहुत अच्छा था. ट्रंप ने यह भी बताया कि यह बातचीत फोन कॉल के जरिए हुई थी, लेकिन इस कॉल की जानकारी पहले सार्वजनिक नहीं की गई थी. ट्रंप ने यह साफ नहीं किया कि यह एक हफ्ते की रोक कब से और कब तक लागू होगी. रूस की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हालांकि ट्रंप के इस दावे पर रूस की सरकार ने अब तक कोई पुष्टि नहीं की है. मॉस्को की तरफ से यह नहीं कहा गया है कि वह कीव या अन्य यूक्रेनी शहरों पर हमले रोकने जा रहा है. खास बात यह भी है कि रूस ने यह साफ नहीं किया है कि वह यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने को तैयार है या नहीं. जेलेंस्की ने कहा सीजफायर की सीधे तौर पर पुष्टि नहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी इस कथित सीजफायर की सीधे तौर पर पुष्टि नहीं की. हालांकि उन्होंने ट्रंप के बयान को अहम बताया. जेलेंस्की ने कहा कि ट्रंप का बयान इस सर्दी के कठिन समय में कीव और अन्य यूक्रेनी शहरों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है. यानी यूक्रेन ने बयान का स्वागत तो किया, लेकिन जमीन पर हमले रुकने की पुष्टि नहीं की. रूस ने जेलेंस्की को मॉस्को आने का न्योता दिया इसी बीच रूस ने गुरुवार को कहा कि उसने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को शांति वार्ता के लिए मॉस्को आने का इनविटेशन भेजा है. यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका की अगुवाई में युद्ध खत्म करने की कोशिशें तेज हो गई हैं. यह बयान उस वक्त आया जब क्रेमलिन ने उन खबरों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि रूस और यूक्रेन ने एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमला न करने पर सहमति बना ली है. अबू धाबी में हुई थी शांति वार्ता  पिछले सप्ताह अमेरिका की मध्यस्थता में अबू धाबी में शांति वार्ता हुई थी. इन बातचीतों का मकसद करीब चार साल से चल रहे यूक्रेन युद्ध को खत्म करने का रास्ता निकालना था. हालांकि इन वार्ताओं के बाद भी रूस और यूक्रेन के रुख में बड़े मतभेद बने हुए हैं, जिस वजह से किसी ठोस समझौते पर सहमति नहीं बन पाई है.

पाकिस्तान-बांग्लादेश की नई हवा यात्रा: कराची में लैंडिंग, भारत के एयर स्पेस पर सवाल

कराची  पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच 14 साल बाद एक बार फिर सीधी हवाई सेवा शुरू हो गई है. बांग्लादेश की राष्ट्रीय एयरलाइन बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस ने ढाका से कराची के लिए पहली सीधी उड़ान शुरू की. इस कदम को दोनों देशों के बीच रिश्तों में अहम सुधार के तौर पर देखा जा रहा है. पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी (PAA) के अनुसार, बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस का विमान गुरुवार रात कराची के जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा. विमान के पहुंचने पर पारंपरिक वॉटर कैनन सलामी दी गई, जो किसी नई या ऐतिहासिक उड़ान के स्वागत का प्रतीक मानी जाती है. पाकिस्तान कब पहुंचा प्लेन? फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, बिमान की उड़ान BG341 ने ढाका के हजरत शाहजलाल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से रात 8.15 बजे उड़ान भरी और करीब तीन घंटे बाद रात 11.03 बजे कराची पहुंची. यह उड़ान पूरी तरह भरी हुई थी. कराची एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में सिंध के गवर्नर कामरान टेसोरी ने कहा कि बांग्लादेश के साथ सहयोग सिर्फ विमानन तक सीमित नहीं रहेगा. उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में व्यापार, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ सकता है. क्या भारत के ऊपर से गया प्लेन? इससे पहले ढाका में आयोजित उद्घाटन समारोह में बांग्लादेश के नागरिक उड्डयन और पर्यटन सलाहकार शेख बशीरुद्दीन मौजूद रहे. उन्होंने कहा कि ढाका-कराची रूट का मकसद दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाना, पर्यटन को बढ़ावा देना और लोगों के आपसी रिश्तों को मजबूत करना है. उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में उड़ानों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी और किराया कम करने की कोशिश की जाएगी, ताकि आम लोगों के लिए यात्रा सस्ती हो सके. यह फ्लाइट भारत के ऊपर से गुजरी क्योंकि यही एकमात्र सीधा रास्ता है. क्योंकि फ्लाइट बांग्लादेश की थी ऐसे में उस पर कोई रोक नहीं लगी है. क्यों बंद हुई थी फ्लाइट? ढाका में पाकिस्तान के उच्चायुक्त इमरान हैदर ने कहा कि यह कदम दोनों देशों के नेतृत्व की सोच और जनता की उम्मीदों के अनुरूप है. उन्होंने बताया कि बांग्लादेश के अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच हवाई संपर्क बहाल करने को लेकर पहले भी चर्चा हो चुकी है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अगस्त में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार की ढाका यात्रा के दौरान दोनों देशों ने सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने पर सहमति जताई थी. उसी फैसले का नतीजा अब जमीन पर दिखाई दे रहा है. गौरतलब है कि राजनीतिक कारणों से पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सीधी हवाई सेवाएं करीब 14 साल पहले बंद कर दी गई थीं. अब इस सेवा की बहाली को दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है.

जापान की राजधानी टोक्यो में शर्मनाक घटना, छेड़छाड़ के आरोप में 5 की गिरफ्तारी

टोक्यो टोक्यो मेट्रोपॉलिटन पुलिस डिपार्टमेंट ने जेआर किनशिचो स्टेशन के पास महिलाओं का पीछा करने और उन्हें परेशान करने के आरोप में एक पाकिस्तानी नागरिक सलीम मलिक सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. यह ग्रुप स्टेशन के पास से गुजरने वाली महिलाओं को 3,000 येन (लगभग 23 डॉलर) प्रति घंटे की दर से कई तरह की 'सेवाओं' की पेशकश कर रहा था और उनके साथ अश्लील भाषा का इस्तेमाल कर रहा था.  जांच के मुताबिक, अकेले इस स्टेशन से पिछले एक साल में छेड़छाड़ और जबरन बुलाने की 200 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई थीं. पुलिस ने बताया कि ये लोग बार-बार महिलाओं के पास जाकर उन्हें लुभाने और परेशान करने की कोशिश करते थे.  कई महिलाओं ने शिकायत की थी कि इन दलालों (Touts) द्वारा उनका पीछा किया जाता है और आक्रामक तरीके से उनसे संपर्क किया जाता है. अधिकारियों ने जनता को चेतावनी जारी करते हुए ऐसे संदिग्ध व्यक्तियों के साथ किसी भी तरह की बातचीत न करने या उनके पीछे न जाने की सलाह दी है. 200 से ज्यादा शिकायतों के बाद एक्शन टोक्यो के व्यस्त किनशिचो स्टेशन के आसपास का इलाका महिलाओं के लिए असुरक्षित होता जा रहा था. पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले साल भर में महिलाओं ने 200 से ज्यादा बार शिकायत की कि उन्हें यहां लगातार परेशान किया जा रहा है. इसी को देखते हुए पुलिस ने एक स्पेशल कैंपेन चलाया, जिसमें इस ग्रुप को महिलाओं को आपत्तिजनक प्रस्ताव देते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया. पाकिस्तानी नागरिक सहित 5 दलाल धरे गए गिरफ्तार किए गए लोगों में एक पाकिस्तानी मूल का शख्स भी शामिल है, जो अन्य लोगों के साथ मिलकर इस अवैध गतिविधि को अंजाम दे रहा था. ये लोग महिलाओं को प्रति घंटे के हिसाब से पैसे का लालच देकर 'असली सेक्स' और अन्य अश्लील सेवाओं के लिए उकसाते थे. पुलिस का कहना है कि यह गिरफ्तारी इलाके में महिलाओं को आक्रामक (जबरन बुलाने) से बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. पब्लिक सिक्योरिटी के लिए पुलिस की चेतावनी… टोक्यो पुलिस ने इस गिरफ्तारी के बाद एक सार्वजनिक सलाह जारी की है. पुलिस ने साफ कहा है कि रेलवे स्टेशनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में तैनात ऐसे दलालों से दूरी बनाकर रखें. किसी भी परिस्थिति में उनके द्वारा दिए गए ऑफर्स को स्वीकार न करें और न ही उनके साथ कहीं जाएं. प्रशासन अब स्टेशन के आसपास सुरक्षा और गश्त बढ़ाने की योजना बना रहा है, जिससे ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सके.

इकोनॉमिक सर्वे का संकेत: US डील पर जल्द फैसला संभव, टैरिफ को लेकर राहत की खबर

नई दिल्ली अमेरिका के साथ ट्रेड डील (Trade Deal) का आर्थिक सर्वेक्षण (Economy Survey) में जिक्र किया गया है. वैसे तो दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत चल रही है, लेकिन आर्थिक सर्वे में इस डील पर साल 2026 में मोहर लगने का अनुमान लगाया गया है.  सबसे अच्छी खबर अर्थव्यवस्था को लेकर है. आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की तीन तिमाहियों में अमेरिकी टैरिफ का असर एक्सपोर्ट और मैन्यूफैक्चरिंग पर पड़ने के बावजूद ग्रोथ की रफ्तार बनी रही. क्योंकि सरकार की ओर से लगातार टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. यानी अमेरिकी टैरिफ, कमजोर वैश्विक मांग और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत की आर्थिक गति पर मामूली असर पड़ा है. जीडीपी में मजबूती के पीछे ये कारण      दरअसल, आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित किया गया है. सर्वे के मुताबिक, FY26 के फर्स्ट एडवांस एस्टीमेट में भारत की GDP ग्रोथ 7.4% रही, जो मुख्य रूप से घरेलू मांग के मजबूत बने रहने का नतीजा है. आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर में विस्तार और फिस्कल अनुशासन में सुधार की वजह से भारत की ग्रोथ टिकाऊ बनी हुई है. FY26 में राजकोषीय घाटा 4.8% रह सकता है, जो कि GDP लक्ष्य के भीतर है.   आर्थिक सर्वे के मुताबिक, घरेलू मांग भारत की विकास कहानी की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है. ग्रामीण और शहरी मांग में संतुलन दिख रहा है, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में लगातार निवेश से रोजगार और आय के अवसर बढ़े हैं. सड़क, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में सरकार के बढ़ते खर्च ने आर्थिक गतिविधियों को गति दी है.  वैश्विक दबाव के बावजूद जोरदार प्रदर्शन  सर्वे की मानें तो वैश्विक स्तर पर डाउनसाइड रिस्क बने हुए हैं. हालांकि, यह भी कहा गया है कि मौजूदा वैश्विक हालात भारत के लिए तत्काल मैक्रो-इकोनॉमिक संकट पैदा नहीं करते. मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, स्थिर बैंकिंग सिस्टम और नीति विश्वसनीयता भारत के लिए सुरक्षा कवच बने हुए हैं.  सरकार का निर्यात पर फोकस आर्थिक सर्वे के अनुसार, करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पर निर्भरता के कारण रुपया कुछ हद तक अंडरवैल्यूड है. अमेरिकी टैरिफ के दौर में कमजोर रुपया इकोनॉमी के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदेह नहीं है. लेकिन मुद्रा स्थिरता के लिए मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट बढ़ाना जरूरी होगा. खासतौर पर वैल्यू-एडेड और टेक्नोलॉजी आधारित निर्यात पर जोर देने की सिफारिश की गई है.  इसी कड़ी में पहली बार आर्थिक सर्वे में AI को लेकर एक अलग चैप्टर है, यानी नई टेक्नोलॉजी पर आने वाले दिनों में सरकार को पूरा फोकस रहने वाला है. इसके साथ सोने-चांदी की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी पर भी सरकार की नजरें हैं. कीमतों धातुओं में तेजी के पीछे ग्लोबल कारण बताए गए हैं.  आर्थिक सर्वे का मानना है कि अगर इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश, निर्यात में बढ़ावा और राजकोषीय अनुशासन इसी तरह बनाए रखे गए, तो भारत वैश्विक अस्थिरता के बीच भी तेज और संतुलित विकास की राह पर बना रह सकता है.  इस बीच आर्थिक सर्वे में राज्यों को सलाह दी गई है कि वे कैश ट्रांसफर के बजाय पूंजीगत खर्च (Capex) को प्राथमिकता दें, ताकि अर्थव्यवस्था में निजी निवेश को पीछे धकेलने यानी क्राउडिंग आउट का खतरा न बढ़े.

डिजिटल स्क्रीन का खतरा: बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर एज लिमिट जल्द लागू हो सकती है

नई दिल्ली.  भारत में सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल और बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत को लेकर सरकार अब उम्र के आधार पर नियम बनाने पर विचार कर सकती है. देश के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने अपनी सलाह में कहा है कि बच्चों और कम उम्र के यूजर्स के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक एक्सेस सीमित करना जरूरी हो सकता है. इकोनॉमिक सर्वे में चेतावनी दी गई है कि कम उम्र के यूजर्स सोशल मीडिया के बहुत ज्यादा इस्तेमाल और हानिकारक कंटेंट के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं. ऐसे में उम्र आधारित एक्सेस लिमिट पर पॉलिसी बनाई जा सकती है. इसके साथ ही सोशल मीडिया कंपनियों को एज वेरिफिकेशन और उम्र के हिसाब से सुरक्षित डिफॉल्ट सेटिंग लागू करने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए. सोशल मीडिया पर बच्चों की एंट्री सीमित हो सीईए ने परिवारों को भी भूमिका निभाने की बात कही है. उन्होंने स्क्रीन टाइम की सीमा तय करने, कुछ घंटों को डिवाइस-फ्री रखने और बच्चों के साथ ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा देने की सिफारिश की है. सोशल मीडिया कंपनियों के लिए बड़ा बाजार है भारत भारत इस समय सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार है. देश में करीब 75 करोड़ स्मार्टफोन और लगभग 1 अरब इंटरनेट यूजर्स हैं. हालांकि, अभी सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए कोई एक समान मिनिमम एज लिमिट तय नहीं है. दुनिया के कई देश इस दिशा में कदम उठा चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाई है. फ्रांस 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बैन की तैयारी में है, जबकि ब्रिटेन, डेनमार्क और ग्रीस भी इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं. इकोनॉमिक सर्वे में बच्चों की डिजिटल लत पर चिंता इकोनॉमिक सर्वे में यह भी बताया गया कि स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले युवाओं में आधे से ज्यादा डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए करते हैं, जबकि करीब 75 फीसदी सोशल मीडिया के लिए. रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल लत पढ़ाई, कामकाज की प्रोडक्टिविटी, नींद और एकाग्रता पर निगेटिव असर डालती है. CEA की सिफारिशें सरकार पर बाध्यकारी नहीं हालांकि मुख्य आर्थिक सलाहकार की सिफारिशें सरकार पर बाध्यकारी नहीं होतीं, लेकिन आमतौर पर पॉलिसी मेकिंग में इन्हें गंभीरता से लिया जाता है, इस बीच गोवा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने भी बच्चों के स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया रेगुलेशन पर स्टडी शुरू कर दिया है.

20 साल का रिवाज खत्म, रेलवे रिटायरों को गोल्ड-प्लेटेड चांदी का मेडल नहीं देगा

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे में सामने आए चांदी के नकली सिक्के (मेडल) घोटाले के बाद बड़ा असर देखने को मिला है। रेलवे बोर्ड ने इस मामले में एक अहम फैसला लेते हुए सेवानिवृत्त कर्मचारियों को चांदी के सिक्के देने की 20 साल पुरानी परंपरा को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया है। रेलवे की ओर से अब रिटायर होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को विदाई उपहार के रूप में गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं दिया जाएगा। रेलवे बोर्ड की प्रधान कार्यकारी निदेशक रेनू शर्मा ने इस संबंध में  औपचारिक आदेश जारी किया। आदेश में साफ तौर पर लिखा गया है कि रिटायर होने वाले रेलवे अधिकारियों को सोने की परत वाले चांदी के मेडल देने की प्रथा को बंद करना है। यानी, सेवानिवृत्त रेलवे अधिकारियों को गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल देने की प्रथा को समाप्त किया जाता है।  दरअसल, रेलवे ने मार्च 2006 से अपने रिटायर होने वाले कर्मचारियों को सम्मान स्वरूप लगभग 20 ग्राम वजन का स्वर्ण मढ़ा चांदी का सिक्का देना शुरू किया था। बीते करीब 20 वर्षों में हजारों कर्मचारियों को यह चांदी का सिक्का विदाई उपहार के रूप में दिया गया। यह परंपरा रेलवे में सम्मान और सेवा के प्रतीक के तौर पर देखी जाती रही है। हालांकि, इस फैसले के पीछे भोपाल मंडल में सामने आया मेडल घोटाला एक बड़ी वजह माना जा रहा है। जांच में खुलासा हुआ कि रिटायरमेंट पर कर्मचारियों को दिए गए कई मेडल नकली थे और उनमें चांदी की मात्रा महज 0.23 प्रतिशत पाई गई। यानी जिन सिक्कों को चांदी का बताकर दिया गया, वे नाम मात्र के लिए भी चांदी के नहीं थे। मामला सामने आने के बाद रेलवे ने संबंधित सप्लायर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है और उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। साथ ही, रेलवे के पास मौजूद मौजूदा मेडल स्टॉक का उपयोग अब रिटायरमेंट उपहार के तौर पर नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें अन्य प्रशासनिक या वैकल्पिक कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा। रेलवे बोर्ड के आदेश के अनुसार, यह नया नियम 31 जनवरी 2026 को रिटायर होने वाले अधिकारियों पर भी लागू होगा। यानी अब जो कर्मचारी इस तारीख या इसके बाद सेवानिवृत्त होंगे, उन्हें यह गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं मिलेगा।

FASTag में बदलाव: NHAI ने KYV का झंझट हटाया, 1 फरवरी से नए नियम लागू

  नई दिल्ली  FASTag KYV New Rule: टोल प्लाज़ा पर गाड़ी रुकी है, FASTag लगा है, पैसे भी हैं, फिर भी मशीन बीप करती है और आगे से आवाज आती है – KYV अपडेट कराइए. ड्राइवर भौंहें सिकोड़ता है, पीछे लाइन बढ़ती जाती है और मन में सवाल उठता है कि जब सब सही है तो यह झंझट क्यों. अब इसी झंझट पर NHAI ने कैंची चला दी है. नए FASTag वालों के लिए वह नियम हटा दिया गया है, जिसने लाखों निजी वाहन चालकों का बीपी बढ़ाया हुआ था. 1 फरवरी 2026 से टोल पर प्लाजाओं पर अब आसानी से गाड़ी दौड़ेगी. दरअसल नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI ने नए FASTag जारी करने के प्रोसेस को और आसान बनाने का फैसला लिया है. अथॉरिटी ने प्राइवेट वाहनों के लिए FASTag जारी होने के बाद होने वाली अनिवार्य Know Your Vehicle यानी KYV प्रक्रिया को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा. इसका सीधा फायदा यह होगा कि टोल प्लाज़ा पर रुकावटें कम होंगी, कागजी झंझट घटेगा और टोल भुगतान पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा. ये नया नियम 1 फरवरी 2026 से लागू होगा. क्या कहता है NHAI नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि,  1 फरवरी 2026 या उसके बाद जारी होने वाले सभी नए FASTag में KYV की जरूरत नहीं होगी. अथॉरिटी ने नए जारी किए गए फास्टैग वाली कारों (कार, जीप, वैन) के लिए 'नो योर व्हीकल' (केवाईवी) की प्रक्रिया को बंद करने का फैसला किया है. पहले ऐसा होता था कि FASTag चालू होने के बाद भी वाहन मालिकों से दोबारा दस्तावेज, फोटो या सत्यापन मांगा जाता था. इससे लोगों को बार-बार बैंक या कस्टमर केयर के कॉल झेलने पड़ते थे और कई बार सही डॉक्यूमेंट देने के बावजूद फास्टैग सस्पेंड कर दिया जाता था. अब यह परेशानी खत्म होने वाली है. नए नियमों के तहत FASTag जारी करने से पहले ही सारी जांच पूरी कर ली जाएगी. बैंक अब VAHAN डेटाबेस के जरिए वाहन के रजिस्ट्रेशन की पुष्टि करेंगे. यह प्रक्रिया अनिवार्य होगी. कुछ खास मामलों में आरसी का इस्तेमाल क्रॉस-वेरिफिकेशन के लिए किया जा सकता है. यानी जिम्मेदारी अब बैंकों की होगी कि टैग जारी करते वक्त सारी जानकारी सही हो. किन हालात में हो सकती है KYV हालांकि KYV को पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है. यह सिर्फ विशेष परिस्थितियों में लागू होगी. जैसे अगर FASTag किसी गलत वाहन से जुड़ा पाया जाता है, टैग सही तरीके से चिपका न हो, किसी तरह के दुरुपयोग या धोखाधड़ी की आशंका हो, या टोल प्लाज़ा पर कोई विवाद हो जाए. सामान्य हालात में वाहन मालिकों को किसी अतिरिक्त प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा. मौजूदा FASTag यूज़र्स पर नहीं होगा असर जो लोग पहले से FASTag इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके लिए नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. जब तक किसी तरह की गड़बड़ी सामने नहीं आती, तब तक उनसे भी रेगुलर KYV नहीं मांगी जाएगी. इससे टोल प्लाज़ा पर बेवजह की रुकावटें और परेशानियां नहीं होंगी. NHAI का मानना है कि इस बदलाव से निजी कार मालिकों का ड्राइविंग एक्सपीरिएंस काफी बेहतर होगा. पहले कई बार सही दस्तावेज देने के बाद भी बार-बार KYV की मांग की जाती थी, जिससे लोग परेशान हो जाते थे. नए सिस्टम से कागजी काम कम होगा, टोल पर विवाद घटेंगे, FASTag जल्दी जारी और एक्टिव होगा और नेशनल हाईवे पर सफर और भी आसान होगा. कमर्शियल वाहनों पर नहीं बदला नियम यह छूट सिर्फ प्राइवेट वाहनों जैसे कार, जीप और वैन के लिए है. बस, ट्रक और मल्टी-एक्सल जैसे कमर्शियल वाहनों के लिए KYV प्रक्रिया पहले की तरह लागू रहेगी. इसके अलावा FASTag की अनिवार्यता भी सभी वाहनों के लिए बनी रहेगी. NHAI का कहना है कि डिजिटल सिस्टम और VAHAN इंटीग्रेशन के मजबूत होने के बाद पुरानी KYV प्रक्रिया से लोग परेशान थे और शिकायत कर रहे थे. वाहन मालिकों को सलाह दी गई है कि वे अपना FASTag सही मोबाइल नंबर और बैंक खाते से लिंक रखें और समय पर रिचार्ज करें, ताकि ब्लैकलिस्टिंग या डबल टोल जैसी समस्याओं से बचा जा सके.

छोटे रनवे का बाहुबली सुपरजेट-100: रूस के साथ समझौते से भारत में बनेगा नया विमान

बेंगलुरु  फाइटर जेट ‘तेजस’ और ‘सुखोई-30 MKI’ से आसमान में अपनी ताकत का लोहा मनवाने वाली हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अब एक नई उड़ान भरने को तैयार है. एचएएल ने रूस की कंपनी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (UAC) के साथ बड़ी डील की है. अब भारत रूस के साथ मिलकर सुखोई की ड‍िजाइन वाला ‘सुपरजेट-100’ बनाएगा. वही सुखोई, जिसका नाम सुनते ही दुश्मनों के पसीने छूट जाते हैं, लेकिन सुपरजेट-100 से लोग सफर कर सकेंगे. यह डील भारत में हवाई सफर की तस्‍वीर बदलने वाली है. क्‍योंक‍ि इस विमान को छोटे रनवे का ‘बाहुबली’ कहा जाता है. यह वहां भी उतर सकता है, जहां बड़े विदेशी विमानों के पहिए थम जाते हैं. इस मेगा डील पर UAC के सीईओ वादिम बादेहा और HAL के चेयरमैन डॉ. डी.के. सुनील ने हस्ताक्षर कर द‍िए हैं. इस समझौते के तहत एचएएल को भारत में सुपरजेट-100 बनाने का लाइसेंस मिलेगा. सिर्फ निर्माण ही नहीं, बल्कि बिक्री, मरम्मत और रखरखाव का जिम्मा भी एचएएल के पास होगा. रूसी कंपनी तकनीकी मदद और डिजाइन सर्विसेस देगी, ताकि एचएएल की फैक्ट्रियों में इस वर्ल्ड-क्लास विमान का उत्पादन हो सके. क्यों कहलाता है छोटे रनवे का ‘बाहुबली’?     मुश्किल जगहों पर लैंडिंग: भारत में शिमला, कुल्लू या पूर्वोत्तर के कई हवाई अड्डे ऐसे हैं जहां रनवे छोटे हैं और बड़े बोइंग या एयरबस वहां नहीं उतर सकते. सुपरजेट-100 को खासतौर पर छोटे रनवे से उड़ान भरने और उतरने के लिए डिजाइन किया गया है. यह पहाड़ी और कठिन इलाकों का असली ‘बाहुबली’ है.     फाइटर जेट वाला डीएनए: इसे उसी ‘सुखोई’ कंपनी ने डिजाइन किया है, जो दुनिया के बेहतरीन लड़ाकू विमान बनाती है. इसलिए इसकी बॉडी बेहद मजबूत और एयरोडायनामिक्स फाइटर जेट्स जैसी है. यानी हवा चीरकर आगे बढ़ने की क्षमता बिल्‍कुल फाइटर जेट की तरह होगी.     खराब मौसम का साथी: इसमें आधुनिक एवियोनिक्स लगे हैं जो इसे घने कोहरे और खराब विजिबिलिटी में भी सुरक्षित लैंडिंग करने में मदद करते हैं. साफ है क‍ि इसकी वजह से जो अक्‍सर हादसे हो जाते हैं, उनमें कमी आएगी. 100 सीटों वाले जेट की खूबि‍यां     भारत में अभी 70 सीटर वाले टर्बोप्रॉप यानी पंखे वाले विमान और 180 सीटर वाले बड़े जेट विमान चलते हैं. इनके बीच 100 सीटों वाले जेट की भारी कमी है.     यह विमान अधिकतम 0.81 मैक यानी लगभग 870 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है. यह स्पीड इसे अपने श्रेणी के अन्य विमानों से काफी तेज बनाती है. यानी दिल्ली से पटना या मुंबई से इंदौर का सफर अब और कम समय में पूरा होगा.     भारत में बनने के कारण इसकी लागत कम होगी, जिसका सीधा फायदा यात्रियों को सस्ती टिकट के रूप में मिल सकता है.     इकोनॉमी क्लास में ‘लग्जरी’ का अहसास अक्सर छोटे विमानों में यात्रियों को जगह की कमी महसूस होती है, लेकिन सुपरजेट-100 में ऐसा नहीं है.     इसका केबिन अपनी श्रेणी के अन्य विमानों से ज्यादा चौड़ा है. सीटें 18.3 इंच चौड़ी हैं, जो यात्रियों को खुला और आरामदायक सफर देती हैं. बड़े ओवरहेड डिब्बे हैं, ताकि भारतीय यात्री अपना सामान आसानी से रख सकें. व‍िमान पर ल‍िखा होगा मेड इन इंड‍िया यह समझौता सिर्फ एक विमान बनाने का नहीं, बल्कि तकनीक हासिल करने का है. अब तक हम पैसेंजर विमानों के लिए पूरी तरह अमेर‍िका की बोइंग या फ्रांस की एयरबस पर निर्भर थे. एचएएल की यह पहल भारत को सिविल एविएशन मैन्युफैक्चरिंग के ग्लोबल मैप पर खड़ा कर देगी. यानी जल्द ही वह दिन आएगा जब आप टिकट बुक करेंगे और विमान के दरवाजे पर लिखा होगा- मेड इन इंडिया. क‍िराया सस्‍ता होगा या महंगा? लेग स्‍पेस क‍ितना होगा? जान‍िए हर सवाल का जवाब सुपरजेट-100: आखिर क्यों खास है यह विमान? सुखोई सुपरजेट-100 दुनिया के सबसे आधुनिक रीजनल जेट्स में से एक है, जिसे रूस की मशहूर कंपनी ‘सुखोई’ ने डिजाइन किया है. इसे बनाने वाले इंजीनियर वही हैं जिन्होंने दुनिया के बेहतरीन फाइटर जेट्स डिजाइन किए हैं. लेकिन, सुपरजेट-100 एक सिविलियन विमान है. इस व‍िमान की रेंज क‍ितनी होगी? सुपरजेट-100 के दो वर्जन हैं… बेसिक और लॉन्ग रेंज. बेसिक वर्जन करीब 3,000 किलोमीटर और लॉन्ग रेंज वर्जन 4,500 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है. इसका मतलब है कि यह विमान दिल्ली से चेन्नई, मुंबई से कोलकाता या बेंगलुरु से गुवाहाटी तक बिना रुके उड़ान भर सकता है. क‍ितनी ऊंचाई तक उड़ने में माह‍िर यह 40,000 फीट की ऊंचाई पर क्रूज कर सकता है, जिससे यह खराब मौसम और टर्बुलेंस के ऊपर से निकल सकता है, जो यात्रियों को एक आरामदायक सफर देता है. पैसेंजर्स के ल‍िए इसमें नया क्‍या होगा? अक्सर रीजनल जेट्स यानी छोटे विमानों में यात्रियों को तंग जगह की शिकायत होती है, लेकिन सुपरजेट-100 को यात्रियों के आराम को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इसकी केबिन की चौड़ाई 3.2 मीटर है, जो कि एम्ब्रेयर या बॉम्बार्डियर जैसे विमानों से ज्यादा है. सुपरजेट-100 में सीटिंग अरेंजमेंट कैसा है? इसमें आमतौर पर 2+3 की सीटिंग होती है. यानी एक तरफ दो सीटें और दूसरी तरफ तीन. इसका फायदा यह है कि बीच वाली सीट कम होती हैं. इसकी सीटें 18.3 इंच चौड़ी हैं, जो बड़े विमानों की इकोनॉमी क्लास के बराबर या उससे ज्यादा हैं. गलियारा इतना चौड़ा है कि केबिन क्रू और यात्री आसानी से आ-जा सकते हैं. एक साथ क‍ितने लोग बैठ सकते हैं? हमारे पास 70 सीटर टर्बोप्रॉप विमान हैं और सीधे 180 सीटर जेट हैं. इन दोनों के बीच 100 सीटों वाले जेट की भारी कमी है. लेकिन सुपरजेट-100 में 87 से 98 यात्रियों के बैठने की जगह है. एयरलाइन कंपन‍ियों के ल‍िए कैसे फायदे का सौदा? कई रूट्स पर 180 सीटर विमान उड़ाना एयरलाइंस के लिए घाटे का सौदा होता है क्योंकि सीटें नहीं भरतीं. वहीं, टर्बोप्रॉप विमान धीमे होते हैं. सुपरजेट-100, 100 यात्रियों को लेकर जेट की स्पीड से उड़ सकता है. यह एयरलाइंस के मुनाफे को बढ़ा सकता है. HAL और मेक इन इंडिया के लिए इसके क्‍या मायने? यह समझौता सिर्फ एक विमान खरीदने का नहीं, बल्कि तकनीक हासिल करने का है. UAC, HAL को डिजाइन और निर्माण की तकनीक देगा. इससे भारत में सिविल एविशन मैन्युफैक्चरिंग का इकोसिस्टम तैयार होगा. … Read more