samacharsecretary.com

भारत ने 2026 पासपोर्ट रैंकिंग में किया शानदार सुधार, पाकिस्तान को मिली बड़ी झटका

नई दिल्ली दुनिया में घूमने फिरने की आजादी किसी देश की ताकत का बड़ा संकेत बन चुकी है. इसी आधार पर जारी हुई Henley Passport Index 2026 की नई रैंकिंग ने एक बार फिर वैश्विक ताकत के संतुलन की तस्वीर दिखा दी है. इस साल सिंगापुर का पासपोर्ट दुनिया का सबसे शक्तिशाली घोषित किया गया है. यानी सिंगापुर का पासपोर्ट रखने वाला व्यक्ति बिना वीजा 192 देशों में यात्रा कर सकते हैं. एशिया की बढ़ती ताकत इस लिस्ट में साफ दिखती है. सिंगापुर के बाद दूसरे स्थान पर जापान और साउथ कोरिया हैं, जिन्हें 188 देशों में वीजा फ्री एंट्री मिलती है. यूरोप के कई देश तीसरे और चौथे पायदान पर हैं, जबकि संयुक्त अरब अमीरात ने बीते दो दशकों में 57 पायदान की छलांग लगाते हुए खुद को टॉप 5 में पहुंचा दिया है. हालांकि एक ही पायदान पर कई देश हैं. पासपोर्ट इंडेक्स में किसका हाल खराब? अमेरिका की स्थिति भी चर्चा में है. पिछले साल गिरावट के बाद अमेरिका फिर टॉप 10 में लौट आया है और 179 देशों में वीजा फ्री पहुंच के साथ 10वें स्थान पर है. ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और मलेशिया भी टॉप 10 में जगह बनाने में सफल रहे हैं. इसके उलट दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट की सूची में अफगानिस्तान सबसे नीचे है. अफगान पासपोर्ट के साथ केवल 24 देशों में बिना वीजा यात्रा संभव है. उसके बाद सीरिया (100वें), इराक (99वें), पाकिस्तान (98वें), यमन और सोमालिया जैसे देश हैं. पाकिस्तान 98वें रैंक में आकर टॉप 100 में आने में कामयाब हो गया. पिछले साल यह 103 पर था. हालांकि रैंकिंग में सुधार होकर भी पाकिस्तान फिसड्डी रहा. पिछले साल 103 रैंक पर होकर भी पाकिस्तानी 33 देशों की यात्रा वीजा फ्री कर सकते थे. इस साल जब रैंक 98 है तो सिर्फ 31 देशों की यात्रा हो सकती है, यानी 2 देश कम हुए हैं. रिपोर्ट बताती है कि आज सबसे मजबूत और सबसे कमजोर पासपोर्ट के बीच 168 देशों का अंतर हो चुका है. साल 2006 में यह अंतर केवल 118 देशों का था. भारत का क्या है हाल? भारत की स्थिति भी इस रिपोर्ट में खास है. 2026 में भारत 80वें स्थान पर है, जो पिछले साल के मुकाबले पांच पायदान ऊपर है. 2025 में भारत 85वें पायदान पर था. भारतीय पासपोर्ट धारकों को अब 55 देशों में वीजा फ्री या वीजा ऑन अराइवल सुविधा मिलती है. यह सुधार भले ही छोटा लगे, लेकिन इसे सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. टॉप 10 सबसे ताकतवर पासपोर्ट 2026 रैंकिंग देश का नाम कितने देश वीजा फ्री 1 सिंगापुर 192 देश 2 जापान, साउथ कोरिया 188 देश 3 डेनमार्क, लक्जमबर्ग, स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड 186 देश 4 ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, आयरलैंड, इटली, नीदरलैंड, नॉर्वे 185 देश 5 हंगरी, पुर्तगाल, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, यूएई 184 देश 6 क्रोएशिया, चेकिया, एस्टोनिया, माल्टा, न्यूजीलैंड, पोलैंड 183 देश 7 ऑस्ट्रेलिया, लातविया, लिकटेंस्टाइन, यूनाइटेड किंगडम 182 देश 8 कनाडा, आइसलैंड, लिथुआनिया 181 देश 9 मलेशिया 180 देश 10 अमेरिका 179 देश टॉप 10 सबसे कमजोर पासपोर्ट 2026 रैंकिंग देश का नाम कितने देश वीजा फ्री 101 अफगानिस्तान 24 देश 100 सीरिया 26 देश 99 इराक 29 देश 98 पाकिस्तान, यमन 31 देश 97 सोमालिया 33 देश 96 नेपाल 35 देश 95 बांग्लादेश 37 देश 94 इरिट्रिया, नॉर्थ कोरिया, फिलिस्तीनी क्षेत्र 38 देश 93 लीबिया, श्रीलंका 39 देश 92 ईरान 40 देश      

कश्मीर में भारी बर्फबारी, 24 फ्लाइट्स रद्द, रामबन से बरामाूला तक बर्फ की सफेद चादर, टूरिस्टों के लिए आकर्षण

नई दिल्ली  दिल्ली-एनसीआर समेत देश के अधिकांश हिस्सों में शुक्रवार सुबह-सुबह मौसम अचानक करवट बदल दी है। दिल्ली-एनसीआर में जहां सुबह सुबह झमाझम बारिश हुई, वहीं, शिमला-मनाली में में इस साल की पहली बर्फबारी हुई है। इसके अलावा जम्मू कश्मीर के भी कई पर्वतीय हिस्सों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। आइए जानते हैं देशभर के मौसम का हाल दिल्ली-एनसीआर का मौसम शुक्रवार सुबह-सुबह दिल्ली-एनसीआर में अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। शुक्रवार सुबह-सुबह कई हिस्सों में झमाझम बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार, यहां आज आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की-फुल्की बारिश हो सकती है। दोपहर या शाम के समय हल्की से मध्यम बारिश का एक और दौर आने की संभावना है। बारिश और तेज हवाओं के कारण दिल्ली-एनसीआर के तापमान में गिरावट आने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर के मौसम का हाल कश्मीर घाटी में शुक्रवार को हुई ताजा बर्फबारी ने पूरे इलाके को सफेद चादर में ढक दिया। बर्फबारी का असर हवाई और सड़क यातायात पर देखने को मिल रहा है। बारिश और बर्फबारी के कारण हीं घाटी की प्रमुख सड़कों पर भी हालात बिगड़ गए। फिलहाल जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे को नवयुग टनल के पास एहतियातन बंद कर दिया गया है। वहीं, मुगल रोड और सिंथन रोड भी कई जगहों पर बर्फ जमने के कारण बंद हैं। ट्रैफिक पुलिस ने फिसलन और सुरक्षा कारणों से ट्रैफिक को सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया गया है। कश्मीर घाटी के प्रसिद्ध स्की रिसॉर्ट गुलमर्ग और कुछ अन्य क्षेत्रों में भी ताजा बर्फबारी हुई, वहीं श्रीनगर और अन्य मैदानी इलाकों में तेज हवाएं चलीं। अधिकारियों ने बताया कि जम्मू और कश्मीर में एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते गुरुवार देर शाम उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के गुलमर्ग में ताजा हिमपात शुरू हो गया। वैष्णोदेवी में बर्फबारी भारी बारिश और बर्फबारी के कारण शुक्रवार को जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (NH-44) बंद कर दिया गया, साथ ही उधमपुर के जखानी चौक पर भी आवाजाही रोक दी गई। बर्फबारी से हवाई यात्रा भी बाधित हुई, श्रीनगर एयरपोर्ट और इंडिगो एयरलाइंस ने कई उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित और रद करने की घोषणा की। श्रीनगर में बर्फबारी के कारण, फ्लाइट ऑपरेशन, टेक-ऑफ और लैंडिंग दोनों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। श्रीनगर एयरपोर्ट के ऑफिशियल हैंडल ने X पर एक पोस्ट में शेयर किया, "कृपया ध्यान दें कि दिल्ली एयरपोर्ट पर NOTAM लागू होने और श्रीनगर में जारी बर्फबारी की वजह से आज श्रीनगर एयरपोर्ट से आने-जाने वाली कुछ फ्लाइट्स कैंसिल हैं। पैसेंजर्स को सलाह दी जाती है कि वे अपनी यात्रा प्लान करने से पहले अपनी-अपनी एयरलाइंस से फ्लाइट का लेटेस्ट स्टेटस चेक कर लें। हुई परेशानी के लिए हमें खेद है।" अधिकारियों ने बताया कि लगातार बारिश और रामसू तक बर्फ जमा होने के कारण, फिसलन भरी सड़कों को देखते हुए एहतियात के तौर पर NH-44 पर सभी तरह के ट्रैफिक को सुरक्षित जगहों पर रोक दिया गया है।

EU के दो प्रमुख नेता 25 जनवरी को भारत दौरे पर, FTA वार्ता होगी महत्वपूर्ण

नई दिल्ली   यूरोपीय संघ (ईयू) के दो बड़े नेता चार दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचने वाले हैं। ईयू नेताओं का यह दौरा ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से लेकर 28 जनवरी तक भारत में रहेंगे। इस मौके पर हैदराबाद हाउस में आयोजित कार्यक्रमों के लिए एक्सपी डिवीजन आधिकारिक स्वीकृति प्रक्रिया संचालित करेगा। विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि ज्यादा डिमांड की वजह से, एक्सपी डिवीजन हैदराबाद हाउस के अंदर लोगों की संख्या कम रखेगा और वायर सर्विस को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि सभी आउटलेट को विजुअल्स मिल सकें। हैदराबाद हाउस की तस्वीरें और वीडियो विदेश मंत्रालय के सोशल मीडिया हैंडल पर उपलब्ध होंगी और मंत्रालय को क्रेडिट देकर रिपोर्टिंग के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं। बता दें, इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने सभी मीडिया आउटलेट्स से अनुरोध किया है कि हैदराबाद हाउस में होने वाले कार्यक्रम के लिए 23 जनवरी, 2026 को 10 बजे तक गूगल शीट भर दें।इस बार यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 26 जनवरी को आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इसके अलावा, दोनों नेता 27 जनवरी को आयोजित होने वाले 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे। भारत दौरे पर उनकी मुलाकात देश की राष्ट्रपति और प्रथम नागरिक द्रौपदी मुर्मू से होगी। इसके साथ ही दोनों नेता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी करेंगे।भारत और ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर बातचीत लगभग अंतिम चरण में है। ऐसे में ईयू नेताओं के भारत दौरे से कयास लगाए जा रहे हैं कि एफटीए का ऐलान हो सकता है।

बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद चुनावी सियासी जंग शुरू, पार्टियां मैदान में उतरीं

ढाका  बांग्लादेश में 2024 के जन आंदोलन और लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद पहले राष्ट्रीय चुनाव के लिए गुरुवार से प्रचार शुरू हो गया है. बड़े राजनीतिक दलों ने 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से पहले ढाका और दूसरे शहरों में रैलियां की हैं. इस चुनाव को बांग्लादेश के इतिहास में बहुत अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह शेख हसीना के हटने के बाद अंतरिम सरकार के तहत हो रहा है और इसमें लोग प्रस्तावित राजनीतिक सुधारों पर भी फैसला करेंगे. नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार ने निष्पक्ष चुनाव कराने का वादा किया है, लेकिन उनकी सरकार ने हसीना की पार्टी अवामी लीग पर बैन लगाया है, जिससे सवाल उठे हैं. अवामी लीग और बीएनपी लंबे समय से देश की राजनीति में अहम भूमिका निभाते रहे हैं. देश में कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंता है, लेकिन सरकार का कहना है कि वोटिंग शांतिपूर्ण तरीके से होगी. सैकड़ों प्रदर्शनकारियों और लोगों की मौत के बाद हुए हिंसक कार्रवाई के बीच हसीना के 5 अगस्त 2024 को देश छोड़कर भारत जाने के तीन दिन बाद यूनुस ने पद संभाला था. जमात-ए-इस्लामी ने बनाया गठबंधन अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के बाद जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला 10 दलों का गठबंधन अपना असर बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. जमात-ए-इस्लामी को धर्मनिरपेक्ष समूहों की आलोचना झेलनी पड़ती है, जो कहते हैं कि उसकी नीतियां बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्षता को चुनौती देती हैं. जन आंदोलन के दौरान छात्र नेताओं द्वारा बनाई गई ‘नेशनल सिटिजन पार्टी’ (एनसीपी) भी इस गठबंधन में शामिल है. बीएनपी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद का बड़ा दावेदार माना जा रहा है. उनकी पार्टी को उनकी मां की राजनीतिक विरासत की वजह से मजबूत समर्थन मिला है. खालिदा जिया का पिछले महीने निधन हो गया था. रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद पिछले महीने ब्रिटेन से बांग्लादेश लौटे हैं. तारिक रहमान करेंगे अभियान की शुरुआत रहमान गुरुवार को सिलहट शहर में एक रैली से अपने चुनाव अभियान की शुरुआत कर रहे हैं और आने वाले दिनों में कई जिलों का दौरा करेंगे. जमात-ए-इस्लामी और एनसीपी भी ढाका में अपने प्रचार की शुरुआत करने वाले हैं. इस चुनाव में एक राष्ट्रीय चार्टर पर जनमत संग्रह भी शामिल है, जिसके समर्थन में अंतरिम सरकार वोटरों से अपील कर रही है. सरकार का कहना है कि यह चार्टर सुधारों पर आधारित नई राजनीतिक दिशा दिखाता है. इस चार्टर पर पिछले साल देश के 52 पंजीकृत दलों में से 25 ने हस्ताक्षर किए थे. अवामी लीग ने इसका विरोध किया था, जबकि कई दलों ने दस्तावेज पर साइन करने से मना कर दिया था. ‘जुलाई राष्ट्रीय चार्टर’ का नाम जुलाई 2024 में शुरू हुए उस जन आंदोलन के नाम पर रखा गया है, जिसने हसीना सरकार के गिरने का रास्ता बनाया. अभी यह चार्टर बाध्यकारी नहीं है, लेकिन समर्थकों का कहना है कि इसे कानूनी रूप से लागू और संविधान का हिस्सा बनाने के लिए जनमत संग्रह जरूरी है. बांग्लादेश में संविधान में बदलाव सिर्फ संसद ही कर सकती है. अंतरिम सरकार का कहना है कि यह चार्टर सत्तावादी शासन से बचने के लिए ज्यादा नियंत्रण और संतुलन लाएगा, जिसमें राष्ट्रपति को ज्यादा अधिकार देकर अब तक ताकतवर रहे प्रधानमंत्री पद का संतुलन किया जाएगा. इसमें सांसदों के कार्यकाल की सीमा तय करने और हितों के टकराव, धनशोधन और भ्रष्टाचार रोकने के उपाय भी शामिल हैं.

PF के पैसे अब ATM से होंगे निकाले, AI करेगी सुविधा प्रदान, 8 करोड़ लाभार्थियों के लिए बड़ा ऐलान

 नई दिल्ली अधिकतर लोगों की ये शिकायतें होती हैं कि PF निकालना सबसे कठिन काम है. अभी भी देश में ऐसे लाखों लोग हैं, जो केवल जटिल प्रक्रिया की वजह से पीएफ अमाउंट निकाल नहीं पाते. लेकिन अब सबकुछ आसान होने वाला है इसी साल से, सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है, और भविष्य निधि संगठन यानी EPFO अब अपने सिस्टम को पूरी तरह से बदलने जा रहा है. EPFO 3.0 के तहत ये बदलाव हो रहा है.  वैसे तो पिछले कुछ महीनों से PF निकासी से जुड़े नियम आसान हुए हैं, जिससे क्लेम सेटलमेंट में तेज उछाल आया है, क्योंकि क्लेम दौरान पहले Error के आने पर लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब ऑनलाइन गलती सुधारने की सुविधा दी गई है, जिससे सिस्टम बेहतर हुआ है, लेकिन EPFO 3.0 को अब बेहद हाईटेक माना जा रहा है, यानी सबकुछ डिजिटल होगा, और यूजर फ्रेंडली.  EPFO 3.0 में क्या-क्या बदलाव होंगे? सबसे बड़ा बदलाव यह है कि EPFO अब बैंक की तरह काम करेगा. अभी तक अगर किसी कर्मचारी को PF से जुड़ी कोई समस्या होती थी, तो उसे उसी क्षेत्रीय EPFO का दफ्तर जाना पड़ता था, जहां उसका अकाउंट जुड़ा होता था. लेकिन EPFO 3.0 लागू होने के बाद देश के किसी भी EPFO दफ्तर से अपना काम कराया जा सकेगा. यह सुविधा खासतौर पर उन कर्मचारियों के लिए बहुत फायदेमंद होगी, जो नौकरी के लिए बार-बार शहर बदलते हैं. बड़ा बदलाव EPFO की वेबसाइट में भी देखने को मिलेगा, वेबसाइट और पोर्टल को पूरी तरह से यूजर-फ्रेंडली बनाया जा रहा है, इसमें AI आधारित भाषा अनुवाद टूल जोड़ा जाएगा, जिससे कि EPFO से जुड़ी जानकारियां और दूसरी भारतीय भाषाओं में भी आसानी से उपलब्ध होगी. अंग्रेजी के अलावा हिन्दी, मराठी, तमिल समेत अन्य तमाम भाषाओं में इससे जुड़ी जानकारियों मिलेंगी.  UPI से PF निकालने की सुविधा EPFO 3.0 के तहत एक बहुत बड़ा बदलाव यह है कि अब PF का पैसा UPI के जरिए निकाला जा सकेगा. इसके लिए BHIM ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा. यह सुविधा अप्रैल-2026 तक शुरू होने की संभावना है. यानी आप PF खाते में जमा राशि ATM से भी निकाल सकेंगे.    बता दें, पहले PF से पैसा निकालने के लिए 13 अलग-अलग कारण और नियम थे, जो काफी उलझन भरे थे. अब इन्हें सिर्फ 3 कैटेगरी में बांट दिया गया है.  1. Essential Needs: यह कैटेगरी जीवन से जुड़ी अहम जरूरतों के लिए PF निकासी की जा सकती है, जिसमें गंभीर बीमारी, शिक्षा और शादी शामिल हैं.   2. Housing Needs: यह कैटेगरी घर के सपने को पूरा करने के लिए है. घर खरीदने के लिए, या घर बनवाने के लिए, या फिर होम लोन चुकाने के लिए PF अमाउंट को निकाल सकते हैं.  3. Special Situations: यह उन हालात के लिए है, जब नौकरी चली जाए.  पहले, शिक्षा, विवाह या इलाज जैसे कारणों से निकालने के लिए सदस्य को कई वर्षों की सेवा पूरी करनी पड़ती थी. लेकिन EPFO 3.0 में सेवा अवधि सभी कैटेगरी के लिए एक समान 12 महीने कर दी गई है. शिक्षा के लिए 10 बार और विवाह के लिए 5 बार निकासी कर सकते हैं.  सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब PF सदस्य 75% तक फंड तुरंत निकाल सकते हैं, जबकि शेष 25% राशि खाते में बनी रहती है, जिससे भविष्य में मिलने वाले ब्याज और सेवानिवृत्ति सुरक्षा को नुकसान न पहुंचे. अगर कोई सदस्य बेरोजगार हो जाता है और एक साल तक नौकरी नहीं पाता, तो फिर वे पूरे PF बैलेंस यानी 100% फंड को निकाल सकते हैं. खुद सुधार सकते हैं ये गलतियां  पिछले साल जनवरी में यानी जनवरी- 2025 में EPFO ने बड़े फैसले लिए थे. जिसके तहत कर्मचारी अपना नाम, जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, वैवाहिक स्थिति, जॉइनिंग और लीविंग डेट जैसी सामान्य गलतियों को खुद ऑनलाइन सुधार सकते हैं, इसके लिए न तो नियोक्ता की मंजूरी चाहिए और न ही EPFO की.  गौरतलब है कि EPFO में करीब 8 करोड़ एक्टिव सदस्य हैं और इसका कुल फंड लगभग 28 लाख करोड़ रुपये है. आने वाले समय में लेबर कोड लागू होने के बाद EPFO को असंगठित क्षेत्र के कामगारों का फंड भी संभालने की जिम्मेदारी मिल सकती है. EPFO 3.0 का पूरा डिजिटल सिस्टम अभी टेस्टिंग और रोलआउट स्टेज में है.

मुंबई मेयर की कुर्सी की दौड़ में लॉटरी के बाद 5 महिलाएं, जानें कौन है सबसे आगे?

मुंबई देश के सबसे अमीर नगर निगम मुंबई की बीएमसी में अब वर्चस्व की लड़ाई एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. आरक्षण लॉटरी के बाद यह आधिकारिक से तय हो गया है कि मुंबई का अगला मेयर 'ओपन कैटेगरी महिला' से होगा.इस फैसले ने मुंबई में राजनीतिक महिला चेहरों के लिए मेयर बनने का रास्ता खोल दिया है, लेकिन अब सवाल यही है कि किस महिला पार्षद की किस्मत का सितारा बुलंद होगा?  मुंबई की मेयर महिला बनेगी, यह बात पक्की हो गई है. बीजेपी और शिंदे की शिवसेना के पास बीएमसी में बहुमत का नंबर गेम भी है, जिसके चलते आसानी से वो अपना मेयर बना सकते हैं. इसके बावजूद बीएमसी का मेयर कौन बनेगा इसको लेकर अभी सस्पेंस बरकरार है. बीएमसी के मेयर पद का पद लॉटरी सिस्टम के जरिए महिला कोटे में गया है. ऐसे में अब बीजेपी अपनी किस महिला पार्षद को मुंबई का मेयर पद देगी ये सवाल अब उठने लगा है. ऐसे में कई नाम सियासी चर्चाओं में है, जिन्हें लेकर कयास लगाए जा रहे हैं?  बीजेपी के पक्ष में बीएमसी का नंबर गेम मुंबई नगर नगिम की 227 सीटों में से बीजेपी ने 89 और उसकी सहयोगी शिंदे की शिवसेना ने 29 पार्षद सीटों पर जीत दर्ज किए हैं. इस तरह बीजेपी-शिवसेना के पास राज्य के कुल 227 में से 118 पार्षद है, जो बहुमत के 114 से 4 पार्षद ज्यादा हैं. इस तरह महायुति आपसी सहमति से मुंबई के बीएमसी में अपना मेयर चुन सकते हैं, क्योंकि नंबर गेम उनके पक्ष में है.  उद्धव ठाकरे के अगुवाई शिवसेना (यूबीटी)के पास 65 पार्षद हैं तो कांग्रेस के 24 पार्षद हैं. इस तरह से महाविकास अघाड़ी बहुमत के नंबर से बहुत ही पीछे हैं. ऐसे में बिना शिंदे के समर्थन से उद्धव किसी भी सूरत में अपना मेयर नहीं बना सकते हैं. शिंदे फिलहाल बीजेपी के साथ है और मेयर पद को लेकर बार्गेनिंग कर रहे हैं.  मुंबई मेयर की कमान फिर महिला के हाथ महाराष्ट्र शहरी विकास विभाग के द्वारा बीएमसी सहित सभी 29 नगर निगम के मेयर पद के आरक्षण का फैसला लॉटरी ड्रॉ के जरिए तय किया गया है. पिछली बार बीएमसी में विशिष्ट आरक्षित श्रेणी के पास होने के कारण, नियमानुसार इस बार इसे अनारक्षित (Open Category) रखने का निर्णय लिया गया है. इस तरह से मुंबई के मेयर का पद महिला के लिए तो रिजर्व है, लेकिन किसी जाति के लिए नहीं है. ऐसे में कोई महिला निर्वाचित पार्षद, चाहे वह किसी भी जाति या वर्ग से आता हो, मेयर पद की दौड़ में शामिल हो सकती है.  बीएमसी में मेयर पद महिला के लिए रिजर्व किए जाने के बाद सभी प्रमुख पार्टियों शिवसेना (दोनों गुट), भाजपा, कांग्रेस और राकांपा के पास अपने सबसे कद्दावर और अनुभवी नेताओं को मैदान में उतारने की छूट होगी. लेकिन मुकाबला संख्या बल और समर्थन के जरिए तय होगा.मेयर पद के ओपन महिला होने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अब पार्टियों को किसी खास वर्ग के उम्मीदवार की तलाश नहीं करनी होगी. कौन महिला पार्षद बनेगी मुंबई की मेयर?  बीएमसी का मेयर कौन बनेगा इसको लेकर अभी सस्पेंस बरकरार है. ऐसे में सवाल उठने लगा कि बीजेपी अपनी किस महिला पार्षद को मेयर पद की कुर्सी सौंपने का फैसला करेगी. बीजेपी और शिंदे की शिवसेना में से किसी का मेयर बनना है लेकिन इन दोनों के सामने जीती गईं महिलाओं में से किसी के एक चुनना है. बीजेपी अपने महिला पार्षदों में से किसी एक को मेयर बना सकती है. बीजेपी वार्ड नंबर 2 से जीतीं तेजस्वी घोसालकर को सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है. इसके अलावा वार्ड 13 से राणी द्विवेदी, वार्ड 14 से सीमा शिंदे, वार्ड 15से जिज्ञासा शाह, वार्ड 16 से श्वेता कोरगावकर और वार्ड 17 से चुनाव जीतने वाली शिल्पा सांगुरे भी मेयर की रेस में है. रानी द्विवेदी वार्ड नंबर 13 से चुनाव जीती हैं. राणा बीजेपी महाराष्ट्र की सचिव और प्रवक्ता है. बीजेपी की उपाध्यक्ष रह चुकी और  पूर्व में राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी थी. इसके अलावा श्वेता कोरगावकर का नाम आता है जो वार्ड नंबर 16 से चुनाव जीती हैं. वार्ड नंबर 14 से जीतने वाली सीमा शिंदे का भी नाम इस लिस्ट में शामिल है. इनके अलावा वार्ड नंबर 15 से जीतने वाली जिज्ञासा शाह और वार्ड 17 से जीतने वाली शिल्पा सांगुरे भी हैं. तेजस्वी घोसालकर सबसे प्रबल दावेदार बीजेपी की जीती महिला पार्षदों में मेयर पद के लिए सबसे प्रमुख दावेदारों में से तेजस्वी घोसालकर का नाम है. तेजस्वी दिवंगत शिवसेना (यूबीटी) पार्षद अभिषेक घोसालकर की पत्नी हैं.तेजस्वी घोसालकर के पति फरवरी 2022 में फेसबुक लाइव के दौरान कारोबारी मॉरिस नोरोन्हा ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. तेजस्वी घोसालकर शिवसेना ठाकरे गुट की पूर्व कॉर्पोरेटर हैं. तेजस्वी घोसालकर 2017 के मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में शिवसेना ठाकरे गुट से वार्ड नंबर 1 से जीती थीं. इस बार बीएमसी चुनाव ऐलान से ठीक पहले तेजस्वी घोसालकर बीजेपी में शामिल हो गईं थी. उन्होंने बीजेपी ने वार्ड नंबर 1 से उम्मीदवार बनाया था, जिसके बाद से मेयर पद के प्रबल उम्मीदवार माना जा रहा है. उन्होंने इस चुनाव में जीत हासिल की है और माना जा रहा है कि बीजेपी उन्हें मेयर बना सकती है. बीएमसी में बीजेपी के कुल 49 महिला कॉर्पोरेटर्स हैं, वहीं शिंदे गुट के पास 19 महिला कॉर्पोरेटर्स हैं. ऐसे में किस महिला को बीएमसी की कमान मिलेगी, तस्वीर दिलचस्प हो गई है.

रोहिंग्या शिविर में त्रासदी: आग ने झोपड़ियां जलाकर हजारों शरणार्थियों को घर से बेदखल किया

ढाका बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार जिले में स्थित रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में मंगलवार तड़के लगी भीषण आग ने भारी तबाही मचा दी। कैंप-16 में आग से 335 अस्थायी झोपड़ियाँ पूरी तरह जल गईं और 72 अन्य को नुकसान पहुंचा। इस हादसे में 2,000 से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी बेघर हो गए। दमकल कर्मियों को आग पर काबू पाने में करीब तीन घंटे लगे। राहत की बात यह रही कि कोई मौत नहीं हुई, हालांकि कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं। लेकिन हजारों लोगों ने अपने घरों के साथ-साथ जरूरी सामान, पहचान पत्र और अहम दस्तावेज़ भी खो दिए। संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) ने कहा कि यह आग उन परिवारों के लिए नई मानवीय आपदा बन गई है, जो पहले ही कठिन हालात में जी रहे थे। IOM के बांग्लादेश प्रमुख लांस बोनो ने कहा, “भीड़भाड़ वाले शिविरों में आग लगने से असर सिर्फ ढांचे तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सुरक्षा और बुनियादी सेवाओं तक पहुंच भी खतरे में पड़ जाती है।” नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल (NRC) के अनुसार, आग से पानी और स्वच्छता केंद्र, 11 लर्निंग सेंटर, रास्ते और अन्य बुनियादी ढांचे भी क्षतिग्रस्त हुए। फिलहाल IOM, NRC और अन्य एजेंसियां कंबल, मच्छरदानी, खाना पकाने का सामान, हाइजीन किट और सोलर लाइट जैसी आपात सहायता उपलब्ध करा रही हैं। गौरतलब है कि 2017 में म्यांमार की सेना की कार्रवाई के बाद 7 लाख से अधिक रोहिंग्या बांग्लादेश आए थे। इसके बाद से म्यांमार के राखाइन प्रांत में जारी संघर्ष के चलते हजारों और शरणार्थी कॉक्स बाज़ार पहुंचते रहे हैं।राहत एजेंसियों ने बताया कि शिविरों में बने बांस और प्लास्टिक से ढके अस्थायी घर, जो सिर्फ 6–12 महीने के लिए थे, आज भी इस्तेमाल हो रहे हैं और आग के लिए बेहद संवेदनशील हैं।   एक रिपोर्ट के मुताबिक 2018 से 2025 के बीच 2,425 आग की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनसे 1 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए। NRC ने कहा कि 50,000 अर्ध-पक्के शेल्टर बनाने की योजना थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मदद में भारी कटौती के कारण यह रोकनी पड़ी। खासतौर पर अमेरिका और यूरोपीय देशों की सहायता में कटौती से फंडिंग संकट गहरा गया है। 2025 में रोहिंग्या राहत के लिए जरूरी धन का सिर्फ आधा हिस्सा मिला, जिससे 466.6 मिलियन डॉलर का घाटा रहा। राहत संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर तुरंत फंड नहीं बढ़ाया गया, तो ऐसी आग की घटनाएं बार-बार होती रहेंगी और शरणार्थियों को बार-बार शून्य से जीवन शुरू करना पड़ेगा।  

राष्ट्रीय शोक में रक्तरंजित: ऑस्ट्रेलिया में गोलीबारी से 3 की जान गई

न्यू साउथ ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स राज्य के एक कस्बे में बृहस्पतिवार को गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गयी जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने एक बयान में कहा कि गोलीबारी की सूचना मिलने के बाद आपातकालीन सेवाओं को लेक कार्जेलिगो में बुलाया गया। इस कस्बे की आबादी करीब 1,500 है। पुलिस ने बताया कि मृतकों में दो महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं। वहीं, एक अन्य पुरुष को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हमलावर या हमलावरों के फरार होने की आशंका है। पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने और स्थानीय निवासियों से घरों के अंदर ही रहने की अपील की है। स्थानीय निवासी मनीषा ने समाचारपत्र ‘द डेली टेलीग्राफ' अखबार से कहा कि कस्बे में ‘‘हर जगह पुलिस की गाड़ियां और एंबुलेंस'' नजर आ रही थीं। उन्होंने कहा, ‘‘ इस कस्बे में सिर्फ दो मुख्य सड़कें हैं। हम सायरन की आवाज़ें सुन सकते हैं।'' यह गोलीबारी ऐसे समय हुई है जब 14 दिसंबर को सिडनी में हनुक्का समारोह के दौरान गोलीबारी में मारे गए 15 लोगों को याद में ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रीय शोक है। 

इतिहास में पहला कदम: फुकुशिमा हादसे के बाद दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर प्लांट फिर से शुरू

टोक्यो दुनिया के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र को बृहस्पतिवार को फिर से बंद कर दिया गया। यह कदम 2011 के फुकुशिमा परमाणु हादसे के बाद पहली बार संचालन फिर से शुरू होने के महज कुछ घंटों बाद उठाया गया। उत्तर-मध्य जापान में स्थित काशिवाजाकी-कारिवा परमाणु संयंत्र के नंबर-6 रिएक्टर को कंट्रोल रॉड्स से जुड़ी तकनीकी खामी के कारण बंद करना पड़ा। इसके संचालक तोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी होल्डिंग्स के अनुसार, कंट्रोल रॉड्स रिएक्टर को सुरक्षित रूप से शुरू करने और बंद करने के लिए बेहद अहम होते हैं। तेप्को ने कहा कि इस तकनीकी खराबी से कोई सुरक्षा समस्या नहीं है और कंपनी स्थिति की जांच कर रही है। फिलहाल यह पता नहीं है कि रिएक्टर को फिर से चालू करने की प्रक्रिया कब से शुरू होगी। काशीवाजाकी-कारिवा में परमाणु ऊर्जा संयंत्र के नंबर-6 रिएक्टर के काम दोबारा शुरू करने पर सबकी नजरें थीं क्योंकि तेप्को वही कंपनी है जो क्षतिग्रस्त फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र का भी संचालन करती है। काशीवाजाकी-कारिवा परमाणु संयंत्र के सभी सात रिएक्टर मार्च 2011 में जापान के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित फुकुशिमा दाइची संयंत्र में भीषण भूकंप और सुनामी आने के एक साल बाद से बंद पड़े हैं।   उस हादसे में रिएक्टर पिघल गए थे और रेडियोधर्मी पदार्थों के भारी रिसाव से आसपास की जमीन इतनी दूषित हो गई कि कुछ इलाके आज भी रहने योग्य नहीं हैं। तेप्को अब भी अपनी छवि को हुए नुकसान से उबरने की कोशिश कर रही है। वह फुकुशिमा दाइची संयंत्र में सफाई कार्य भी कर रही है, जिसकी अनुमानित लागत 22 ट्रिलियन येन (लगभग 139 अरब डॉलर) है। सरकारी और स्वतंत्र जांच में फुकुशिमा त्रासदी के लिए तेप्को की खराब सुरक्षा व्यवस्था को दोषी ठहराया गया था और सुरक्षा अधिकारियों के साथ मिलीभगत के लिए कंपनी की आलोचना हुई थी।    

जम्मू-कश्मीर हादसे पर प्रधानमंत्री मोदी का शोक संदेश

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के डोडा में गुरुवार को एक सड़क हादसे में सेना के 10 जवान शहीद हो गए। इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई दिग्गज नेताओं ने दुख जताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि डोडा में हुई दुर्घटना से हम अत्यंत दुखी हैं, जिसमें हमने अपने बहादुर सैनिकों को खो दिया। राष्ट्र के प्रति उनकी सेवा को हम सदा याद रखेंगे। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स पर लिखा कि जम्मू-कश्मीर के डोडा में हुई दुखद घटना से मैं अत्यंत व्यथित हूं, जिसमें हमारे वीर सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में हुए सड़क हादसे में हमारे कई वीर जवानों के दिवंगत होने का समाचार अत्यंत दुःखद है। पूरा देश इस दुःख की घड़ी में अपने वीर सपूतों के परिवारों के साथ खड़ा है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें। घायल जवानों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि डोडा में हुए दुखद सड़क हादसे में भारतीय सेना के हमारे बहादुर जवानों की जान जाने से मैं बेहद दुखी हूं। देश उनकी निस्वार्थ सेवा को सदा याद रखेगा। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी घटना को लेकर दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के डोडा में हुए सड़क हादसे में हमारे कई बहादुर जवानों की असामयिक मृत्यु का समाचार अत्यंत हृदयविदारक और असहनीय पीड़ा देने वाला है। राष्ट्र उनकी कर्तव्यनिष्ठा का सदैव ऋणी रहेगा। उन्होंने कहा कि इस दुःखद घड़ी में मैं शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी गहन संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो। ॐ शांति। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के डोडा में हुई हृदयविदारक सड़क दुर्घटना में भारतीय सेना के 10 वीर जवानों के देहावसान से मन अत्यंत व्यथित और स्तब्ध है। शोकाकुल परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। दुर्घटना में घायल जवानों का उपचार जारी है, ईश्वर से प्रार्थना है कि वे शीघ्र स्वस्थ हों। उन्होंने कहा कि जो वीर जवान इस दुर्घटना में शहीद हुए हैं, भगवान उनकी पुण्य आत्माओं को शांति प्रदान करें। इस कठिन घड़ी में पूरा देश अपने सशस्त्र बलों और उनके परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा है।