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SC का बड़ा आदेश: हिमाचल में इस तारीख तक हर हाल में होंगे पंचायत और निकाय चुनाव

हिमाचल सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार को आंशिक राहत देते हुए राज्य में पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की अंतिम समय-सीमा 31 मई 2026 तय कर दी है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि संशोधित कार्यक्रम के अनुसार पूरी चुनाव प्रक्रिया हर हाल में 31 मई तक पूरी की जाए और इसमें किसी तरह की अनिश्चित देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी। इसमें 30 अप्रैल 2026 तक चुनाव संपन्न कराने की समय-सीमा तय की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए चुनाव की अंतिम तारीख 31 मई कर दी, लेकिन यह भी साफ किया कि आरक्षण रोस्टर 31 मार्च 2026 तक हर हाल में अंतिम रूप देकर लागू किया जाए। अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अनिश्चित काल तक टाला नहीं जा सकता और प्रशासनिक कठिनाइयों के बावजूद तय समय-सीमा के भीतर चुनाव कराना राज्य की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार ने क्या दलील दीं? सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि इस बार कड़ी सर्दी, भारी बर्फबारी, कई क्षेत्रों में सड़क संपर्क टूटने और दूरदराज जनजातीय इलाकों में आवागमन बाधित रहने के कारण जमीनी स्तर पर चुनाव की तैयारियां समय पर पूरी करना मुश्किल हो रहा था। सरकार ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा तय समय-सीमा में आरक्षण की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध नहीं था। राज्य सरकार ने यह भी प्रश्न उठाया कि आपदा जैसी परिस्थितियों में आपदा प्रबंधन कानून के प्रावधानों के तहत चुनाव प्रक्रिया को सीमित अवधि के लिए स्थगित करने की कितनी अनुमति है। हालांकि अदालत ने राज्य की दलीलों को सीमित रूप से स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि संवैधानिक संस्थाओं के चुनाव तय समय के भीतर कराना अनिवार्य है और इन्हें अनिश्चित काल तक टालना उचित नहीं है।अदालत के इस आदेश के बाद अब ध्यान राज्य निर्वाचन आयोग पर रहेगा, जिसे संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 31 मार्च तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी करनी होगी और 31 मई 2026 तक पंचायत और नगर निकाय चुनाव संपन्न कराने होंगे। जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुका है। इसके बाद प्रदेश की ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों की जिम्मेदारी अस्थायी रूप से प्रशासनिक अधिकारियों को सौंप दी गई है। राज्य सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी थी। इसके अनुसार एक फरवरी से पंचायतों की सभी शक्तियां प्रशासकों के पास हैं। कार्यकाल पूरा हो चुका है सरकार की अधिसूचना के अनुसार अधिकांश पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल पूरा हो गया है, हालांकि लाहौल-स्पीति जिले के केलांग उपमंडल की पंचायतों, चंबा जिले के पांगी उपमंडल की पंचायतों और कुल्लू जिले की चार ग्राम पंचायतों को फिलहाल इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। समय पर चुनाव न हो पाने के कारण यह अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था लागू की गई है। समितियों का गठन किया गया है राज्य सरकार ने पंचायतों के संचालन के लिए समितियों का गठन किया है। इनमें ग्राम पंचायत स्तर पर खंड विकास अधिकारी को अध्यक्ष और पंचायत सचिव को सदस्य सचिव बनाया गया है। पंचायत समितियों और जिला परिषदों में भी संबंधित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को अध्यक्ष और अन्य अधिकारियों को सदस्य और सदस्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे प्रशासनिक और वित्तीय कार्य बिना बाधा जारी रह सकें।

‘PMO बने सेवा तीर्थ?’ AAP नेता का हमला, बोले– अब पूजा ही बाकी रह गई है

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ करने पर आप नेता संजय सिंह ने तंज कसा है। कहा कि नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 साल में कोई काम तो नहीं किया है, लेकिन अब अपने कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ रखकर बता दिया कि वह भगवान का अवतार हैं। लोग नारियल-अगरबत्ती लेकर आएं और उनकी पूजा करें। लोग नारियल-अगरबत्ती लेकर उनकी पूजा करें, PM ऑफिस का नाम सेवा तीर्थ करने पर AAP नेता का तंज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ करने पर आप नेता संजय सिंह ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 साल में कोई काम तो नहीं किया है, लेकिन अब अपने कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ रखकर उन्होंने बता दिया कि वह भगवान का अवतार हैं। लोग नारियल-अगरबत्ती लेकर आएं और उनकी पूजा करें। आप सांसद ने कहा कि पिछले 12 साल में देश की जनता को ना महंगाई से राहत मिली और ना ही युवाओं को रोजगार मिला है। मोदी जी सिर्फ इमारतें बनवा रहे हैं, लेकिन उन इमारतों में कोई काम नहीं हो रहा है। वो जहां बैठेंगे वहां लोग तीर्थ के रूप में जाएंगे आप नेता ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि सेवा तीर्थ का मतलब है कि वे भगवान का अवतार हैं, आम इंसान तो हैं नहीं। वो जहां बैठेंगे वहां लोग तीर्थ के रूप में जाएंगे। काम-धाम तो कुछ होना नहीं है। 12 साल हो गया ना 24 करोड़ रोजगार मिला नौजवानों को, ना काला धन आया, ना 15 लाख मिला और ना 15 अगस्त 2022 तक सबको पक्का मकान मिला। आप सांसद ने कहा कि मोदी जी किस प्रकार से देश की सेवा कर रहे हैं, यह एक बड़ा सवालिया निशान है। बाकी वो अपने आप को अवतार मानते हैं। नॉन बाइलॉजिकल हैं। जहां वो बैठेंगे वह तीर्थ स्थान ही माना जाएगा। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। मैं तो समझता हूं कि लोग नारियल लेकर जाएं उनके पास। 12 साल में तो हमें कुछ दिखता नहीं सारे मंत्रालयों के लिए एक ही कर्तव्य भवन बनाने के सवाल पर संजय सिंह ने कहा कि कर्तव्य क्या हो रहा है। कर्तव्य भवन बना लीजिए, सेवा तीर्थ बना लीजिए, लोगों से कहिए कि नारियल-अगरबत्ती लेकर आएं, लेकिन काम क्या हो रहा है। काम तो बताइए। आपने हर साल 2 करोड़ नौकरी देने को कहा था, किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात कही थी, काला धन आएगा और 15 लाख मिलेगा, आपने कहा था कि 15 अगस्त 2022 तक सबको पक्का मकान मिलेगा। आप नेता ने कहा कि काम क्या हो रहा है। सेवा क्या हो रहा है आपके माध्यम से। क्या कर रहे हैं आप। आप पूंजीपतियों की सेवा कर रहे हैं। बड़े-बड़े लोगों को, अंबानी और अडाणी को करोड़ों कमवा रहे हैं। इमारते बनवाने से थोड़े ही न काम होगा। 12 साल में तो हमें कुछ दिखता नहीं है कि काम हो रहा है। वंदे मातरम् से इनका कोई लेना-देना नहीं वंदे मातरम् पर उन्होंने कहा कि इससे उनका लेना-देना क्या है। क्या इनके पुरखों ने कभी वंदे मातरम् गाकर जेल काटी है। क्या अंग्रेजों ने कभी उन पर धारा लगाई है। मैंने आरएसएस के चार लोगों के नाम पूछे थे जो वंदे मातरम् गाकर जेल गए थे, आज तक वे नहीं बता सके। वंदे मातरम् से इनका कोई लेना-देना नहीं है। दरअसल, एक नई चीज परोसी जा रही है, ताकि लोग पुरानी चीजें भूल जाएं। वंदे मातरम् आप दिनभर गाते रहिए, हमें कोई परेशानी नहीं है। आप नेता ने सवाल किया कि वंदे मातरम् देश के कितने लोगों को आती है। उन्होंने कहा कि इस देश के 99 प्रतिशत लोगों को पूरा वंदे मातरम् नहीं आती, तो क्या वे देशभक्त नहीं हैं। जो हमारा मजदूर है, रिक्शे वाला है, ऑटो वाला है, क्या वो देशभक्त नहीं है। ये सब सिर्फ बंगाल के चुनाव के लिए हो रहा संजय सिंह ने कहा कि भाजपा का एक काला इतिहास है जो देश के लोगों को जानना चाहिए। भाजपा ने नागपुर के मुख्यालय पर 52 साल तक तिरंगा झंडा नहीं फहराया, जो इनकी मातृ संस्था है आरएसएस। दूसरा इनका काला इतिहास है कि 28 दिसंबर 1949 में पांचजन्य में एक लेख छपा है जिसमें राष्ट्र गान जन-मन-गण को मनोरंजन का एक चीज बताया गया है। तो क्या भाजपा अपने पूर्वजों के इन गुनाहों के लिए देश से माफी मांगेगी। आप नेता ने कहा कि ये सब सिर्फ बंगाल के चुनाव के लिए हो रहा है, जिसे देश की जनता को समझ जाना चाहिए।

कश्मीर पर भारत का स्टैंड देख तिलमिलाया पाकिस्तान, US से लगाई मदद की गुहार

इस्लामाबाद संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के कार्यालय द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किए गए भारत के एक मानचित्र ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। इस मानचित्र में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन को भारतीय क्षेत्र के भीतर दिखाया गया था। इसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका से संपर्क कर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। यह घटना पाकिस्तान के लिए भारी शर्मिंदगी का कारण बनी है। मैप के सार्वजनिक होने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने तुरंत हरकत में आते हुए अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह मामला उठाया। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने एक ब्रीफिंग में कहा कि यह चित्रण गलत है और संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा मान्यता प्राप्त क्षेत्र के प्रतिनिधित्व के अनुरूप नहीं है। प्रवक्ता ने जोर देकर कहा, "मैप कुछ हैंडल्स द्वारा लगाया गया था। हमने अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क किया। उन्हें एहसास हुआ कि नक्शा गलत था।" पाकिस्तान का तर्क है कि जम्मू-कश्मीर पर अंतरराष्ट्रीय मानचित्र, जो पाकिस्तानी और भारतीय क्षेत्रों को अलग करता है, संयुक्त राष्ट्र द्वारा कानूनी रूप से स्वीकृत है। अमेरिका ने हटाया पोस्ट विवाद बढ़ने के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के कार्यालय ने उस पोस्ट को अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से पूरी तरह से हटा दिया। पाकिस्तान ने इस बात पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि अमेरिका ने आवश्यक सुधार किए। अंद्राबी ने कहा, "हम संतोष व्यक्त करते हैं कि अमेरिकी पक्ष ने हमारे क्षेत्र के कानूनी UN-स्वीकृत मानचित्र को उजागर करने के लिए आवश्यक सुधार किए, जो स्पष्ट रूप से जम्मू-कश्मीर को एक विवादित क्षेत्र के रूप में चित्रित करता है, जिसका निपटारा UNSC प्रस्तावों के अनुसार UN-प्रशासित जनमत संग्रह के माध्यम से किया जाना है।" व्यापार समझौते के बीच आया मानचित्र यह घटना तब घटी जब भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने पिछले सप्ताह एक व्यापार समझौते के ढांचे की घोषणा की, जिसमें टैरिफ को कम स्तर पर रीसेट किया गया। समझौते के विवरण जारी करते समय, USTR कार्यालय ने भारत का एक मानचित्र प्रकाशित किया था जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) सहित पूरे जम्मू-कश्मीर क्षेत्र को देश का हिस्सा दिखाया गया था। मानचित्र में अक्साई चिन भी शामिल था, जिस पर चीन दावा करता है।

‘धुरंधर’ फिल्म पर बैन के बावजूद पाकिस्तान में धड़ल्ले से हो रही है पायरेटेड बिक्री

इस्लामाबाद   रणवीर सिंह की स्पाई थ्रिलर फिल्म धुरंधर पाकिस्तान में थिएट्रिकल रिलीज के दौरान बैन कर दी गई. हालांकि, लोगों ने फिल्म के ओटीटी पर आते ही बता दिया कि इस फिल्म का वो कितना इंतजार कर रहे थे. फिल्म नेटफ्लिक्स रिलीज हुई और पाकिस्टान में टॉप ट्रेंड करने लगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिलीज के 12 दिनों के अंदर ही पाकिस्तान में इस फिल्म को 20 लाख से ज्यादा बार अवैध रूप से डाउनलोड किया गया. अब फिल्म को लेकर एक और खबर आ रही है. कराची की गलियों में आदित्य धर की इस फिल्म की पायरेटेड सीडी धड़ल्ले से बिक रही है. धुरंधर को भले ही पाकिस्तान और कुछ गल्फ देशों में सिनेमाघरों में रिलीज की इजाजत नहीं मिली, लेकिन फिल्म का क्रेज सीमाओं में बंधा नहीं. ओटीटी पर रिलीज के बाद यह स्पाई थ्रिलर अब पाकिस्तान के पायरेटेड बाजारों तक पहुंच चुकी है, जहां इसकी कॉपियां खुलेआम बेची जा रही हैं. न्यूजीलैंड के यूट्यूबर कार्ल रॉक ने कराची के रेनबो सेंटर का एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें दुकानदार खुलेआम इस फिल्म की पायरेटेड डीवीडी बेचते नजर आ रहे हैं. कराची के बाजार में ‘धुरंधर’ का जलवा यूट्यूबर कार्ल रॉक ने जो वीडियो शेयर किया है उस वीडियो में वह एक दुकानदार से बात करते नजर आ रहे हैं. वह कहते हैं- ‘पाकिस्तान में इंडियन फिल्म्स बैन हैं, लेकिन देखिए क्या मिला, ये नई फिल्म है हिंदुस्तान से.’ दुकानदार से उन्होंने बात की और उसने कहा कि ये सबसे नई फिल्म है. 16 रुपए में बिक रही पायरेटेड CD कार्ल ने रणवीर सिंह का जिक्र करते हुए बताया कि वे सिंधी हैं और उनके दादा-परदादा विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए थे. फिर उन्होंने दुकानदार से पूछा, ‘ये फिल्म कितने की है?’ दुकानदार ने जवाब दिया, ‘सिर्फ 50 पाकिस्तानी रुपये’, यानी भारतीय मुद्रा में करीब 16 रुपये.’ कार्ल ने हैरानी जताते हुए कहा, ‘बहुत सस्ता है!’ वायरल हो रहा ये वीडियो, लोग कर रहे ऐसी बात अब यह वीडियो वायरल हो रहा है और सोशल मीडिया पर लोगों ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव पर टिप्पणियां की हैं. एक यूजर ने लिखा, ‘दोनों देशों के बीच इतनी नफरत क्यों?’, जबकि दूसरे ने कहा, ‘पाकिस्तान में ये फिल्म भारत से ज्यादा हिट रही लगती है’. कुछ ने लिखा कि सियासी तनाव के बावजूद आम लोगों के बीच फिल्मों का प्यार खत्म नहीं हुआ है. बॉक्स ऑफिस पर धुरंधर का रिकॉर्ड आदित्य धर के निर्देशन में बनी ‘धुरंधर’ 5 दिसंबर 2025 को रिलीज हुई थी. इस फिल्म ने दुनियाभर में 1340 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन कर इतिहास रच दिया. महज 250-300 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का तमगा हासिल किया. रणवीर सिंह, संजय दत्त, अक्षय खन्ना, आर माधवन और अर्जुन रामपाल जैसे सितारों से सजी इस फिल्म ने ‘पुष्पा 2’ को भी पीछे छोड़ दिया है. अब ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की तैयारी फिल्म के सीक्वल ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की रिलीज डेट 19 मार्च 2026 तय की गई है. यह फिल्म यश की पैन-इंडिया फिल्म ‘टॉक्सिक’ से सीधी टक्कर लेगी. ट्रेड एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दोनों फिल्मों के बीच जबरदस्त क्लैश होने वाला है. बुक माय शो के आंकड़ों के मुताबिक, ‘धुरंधर 2’ में 1.02 लाख से ज्यादा लोग इंट्रेस्टेड हैं, जबकि ‘टॉक्सिक’ में यह आंकड़ा 3.61 लाख है . पाकिस्तान और गल्फ देशों में क्यों नहीं हुई रिलीज बता दें कि ‘धुरंधर’ को पाकिस्तान और गल्फ देशों में थिएट्रिकल रिलीज के वक्त बैन कर दिया गया था. वजह थी फिल्म में पाकिस्तान के ल्यारी इलाके की सियासत, कंधार हाईजैक, 2001 संसद हमले और 26/11 मुंबई आतंकी हमलों जैसी संवेदनशील घटनाओं को दिखाया गया है.

रियल एस्टेट रेगुलेशन पर CJI सूर्यकांत का विवादित टिप्पणी, दागी बिल्डरों को मिल रहा लाभ

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि सभी राज्यों के लिए रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) के गठन पर पुनर्विचार करने का यह सही समय है क्योंकि यह संस्था दागी बिल्डरों को सुविधा प्रदान करने के अलावा कुछ नहीं कर रही है। प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि जिन लोगों के लिए RERA बनाया गया था, वे 'पूरी तरह से निराश और हताश' हैं। पीठ ने जोर देकर कहा कि अगर इस संस्था को समाप्त कर दिया जाए तो उसे कोई आपत्ति नहीं होगी। पीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार को RERA के कार्यालय को अपनी पसंद के स्थान पर स्थानांतरित करने की अनुमति देते हुए ये टिप्पणियां कीं। हिमाचल प्रदेश सरकार और अन्य द्वारा दायर याचिका पर पीठ ने नोटिस जारी किया, जिसमें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जो राज्य के RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने से संबंधित था। उच्च न्यायालय ने इससे पहले RERA कार्यालय के स्थानांतरण से संबंधित जून 2025 की अधिसूचना पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। बाद में, 30 दिसंबर 2025 को अपने आदेश में, उच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश को जारी रखने का निर्देश दिया। उच्चतम न्यायालय ने 30 दिसंबर के उच्च न्यायालय के निर्देश पर रोक लगा दी है। CJI भड़के प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'दागी बिल्डरों को सुविधा देने के अलावा यह संस्था (RERA) कुछ नहीं कर रही है। बेहतर होगा कि इस संस्था को समाप्त कर दिया जाए, हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है …अब समय आ गया है कि सभी राज्य इस प्राधिकरण के गठन पर ही पुनर्विचार करें।' राज्य सरकार ने अधिवक्ता सुगंधा आनंद के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में दायर अपनी याचिका में कहा कि हिमाचल प्रदेश RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने का निर्णय शिमला शहर में भीड़भाड़ कम करने के लिए लिया गया था। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से प्रशासनिक कारणों पर आधारित था। प्रतिवादी की ओर से पेश एक वकील ने कहा कि प्राधिकरण जिन परियोजनाओं से संबंधित मामलों को देखता है, उनमें से 90 प्रतिशत शिमला, सोलन, परवानू और सिरमौर में हैं, जो अधिकतम 40 किलोमीटर के दायरे में आते हैं। उन्होंने कहा कि RERA के समक्ष लंबित शिकायतों में से लगभग 92 प्रतिशत इन्हीं जिलों से हैं, और धर्मशाला में केवल 20 परियोजनाएं हैं।

साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ तक: PM मोदी का नया ऑफिस, जानिए क्या होगा खास

नई दिल्ली प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को दिल्ली में सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया। इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय स्थित हैं। सेवा तीर्थ परिसर की दीवार पर ‘नागरिक देवो भव’ का आदर्श वाक्य अंकित है।   प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को दिल्ली में सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया। इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय स्थित हैं। सेवा तीर्थ परिसर की दीवार पर ‘नागरिक देवो भव’ का आदर्श वाक्य अंकित है। केंद्र सरकार ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि नई इमारतें भारत की प्रशासनिक शासन संरचना को दर्शाती हैं। बता दें कि इससे पहले, प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा समिति सचिवालय, और कैबिनेट सचिवालय अलग-अलग स्थानों पर स्थित थे। सेवा तीर्थ का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी ने 13 फरवरी को किया। असल में इस तारीख का ऐतिहासिक महत्व है। 13 फरवरी 1931 को नई दिल्ली औपचारिक रूप से भारत की आधुनिक राजधानी बनी थी। यह तारीख उद्घाटन के 95 वर्षों को दर्शाती है। सेवा तीर्थ के साथ, पीएम मोदी कर्तव्य भवन 1 और 2 का भी उद्घाटन करेंगे। इसमें कई प्रमुख मंत्रालयों के विभाग होंगे, जिनमें वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, कॉर्पोरेट मामले मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, कानून और न्याय मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, रसायन और उर्वरक मंत्रालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय शामिल हैं।  

तारिक रहमान हो सकते हैं बांग्लादेश के अगले पीएम, बचपन की जेल से लेकर सत्ता तक का अनोखा सफर

ढाका  बांग्लादेश में आम चुनाव के बाद राजनीतिक तस्वीर तेजी से साफ होती दिख रही है. मतगणना के बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने जीत का दावा किया है और कई मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि 300 सदस्यीय संसद में पार्टी 151 से ज्यादा सीट हासिल कर चुकी है, जो सरकार बनाने के लिए पर्याप्त मानी जाती है. हालांकि निर्वाचन आयोग की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है और कुछ सीटों के नतीजे आने बाकी हैं. बीएनपी ने सोशल मीडिया पर कहा कि वह बहुमत के साथ सरकार बनाने के लिए तैयार है. 200 से ज्यादा सीटों पर बढ़त की भी खबर है. चुनाव जीतने वाली पार्टी उस अंतरिम प्रशासन की जगह लेगी, जिसने अगस्त 2024 में आवामी लीग सरकार के हटने के बाद सत्ता संभाली थी. इसी बीच यह भी खबर है कि पार्टी प्रमुख तारिक रहमान शनिवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. बांग्लादेश चुनाव BNP के जीतने के साथ ही विदेशों से प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रहमान को जीत पर बधाई देते हुए कहा कि यह बांग्लादेश की जनता के उनके नेतृत्व पर भरोसे को दिखाता है और भारत साझा विकास लक्ष्यों पर साथ काम करने को तैयार है. अमेरिका ने भी चुनाव को सफल बताते हुए शुभकामनाएं दी हैं. वहीं पाकिस्तान के नेतृत्व की ओर से भी बधाई संदेश भेजे गए हैं. बांग्लादेश चुनाव को बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधी टक्कर माना गया, क्योंकि आवामी लीग मैदान में नहीं थी. जमात ने मतगणना में देरी और हेरफेर के आरोप लगाए हैं और चेतावनी दी है कि जनादेश छीना गया तो बड़ा आंदोलन होगा. नेशनल सिटिजन पार्टी ने भी कुछ सीटों पर धांधली के आरोप लगाए. दूसरी ओर निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नतीजों में उतार-चढ़ाव सामान्य है. गुरुवार को देशभर में 299 सीटों पर मतदान गुरुवार सुबह 7:30 बजे शुरू होकर शाम 4:30 बजे तक चला, जिसके बाद तुरंत मतगणना शुरू कर दी गई. चुनाव के दौरान व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए और करीब 10 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई, जिसे अब तक की सबसे बड़ी चुनावी तैनाती माना जा रहा है. आयोग के अनुसार हजारों केंद्रों से अलग-अलग समय पर नतीजे आने के कारण अंतिम तस्वीर बनने में वक्त लग रहा है. बीएनपी पिछली बार 2001 से 2006 के बीच सत्ता में रही थी. पार्टी ने पहले ही साफ किया था कि जीत मिलने पर तारीक रहमान प्रधानमंत्री बनेंगे. करीब 17 साल विदेश में रहने के बाद पिछले साल देश लौटे रहमान ने समर्थकों से जश्न के बजाय संयम रखने और दुआ करने की अपील की है. फिलहाल आधिकारिक नतीजों की घोषणा का इंतजार है, लेकिन शुरुआती संकेत बताते हैं कि बांग्लादेश की राजनीति में एक नया दौर शुरू होने की तैयारी है. 4 साल की उम्र में जेल से PM की कुर्सी तक बांग्लादेश के 2026 के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की ऐतिहासिक जीत में तारिक रहमान की रणनीतिक और करिश्माई भूमिका ने केंद्रबिंदु की तरह काम किया। लंबे निर्वासन और राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने पार्टी को एकजुट किया, युवा मतदाताओं को आकर्षित किया और जनसमर्थन की नई लहर खड़ी की। यह जीत सिर्फ बीएनपी की नहीं, बल्कि तारिक रहमान की नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक दृष्टि का प्रतीक बनकर उभरी है। इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि बांग्लादेश की राजनीति दशकों से दो मुख्य पारिवारिक‑राजनीतिक धारणाओं के बीच घूमती रही है। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत खालिदा जिया की विरासत के बीच। ऐसे में 2026 के चुनावों में बीएनपी की जीत और तारिक रहमान की उभरती भूमिका यह संकेत देती है कि अब देश का नेतृत्व एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर सकता है।  पहले तारिक रहमान के बारे में जानिए 20 नवंबर 1965 को जन्मे तारिक रहमान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता और पार्टी के चेयरमैन हैं। वह पार्टी की सर्वोच्च राजनीतिक इकाई का नेतृत्व करते हैं। उन्होंने ढाका यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना शुरू किया। वे बांग्लादेश के इतिहास में एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता जिया उर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति और स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे, जिनकी 1981 में हत्या हो गई थी। उनकी मां बेगम खालिदा जिया 1991 से 1996 व 2001 से 2006 तक बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं और बीएनपी की प्रमुख चेयरपर्सन थीं। अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों से ही तारिक अपने परिवार की राजनीति में शामिल रहे हैं और बीएनपी के भीतर स्थायी भूमिका निभाई है।  जब चार साल की उम्र में जेल गए थे तारिक तारिक रहमान, जिन्हें बांग्लादेश की राजनीति में अक्सर तारिक जिया कहा जाता है, अपने परिवार के नाम से ही पहचान रखते हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान वे केवल चार साल के थे और कुछ समय के लिए हिरासत में भी रहे। इसी वजह से उनकी पार्टी बीएनपी उन्हें युद्ध के सबसे कम उम्र के बंदियों में शामिल बताकर सम्मान देती है। उनकी राजनीतिक पहचान भी इसी पारिवारिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ी है। छोटे उम्र में संघर्ष और परिवार की विरासत ने उन्हें बांग्लादेश की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा बना दिया।  अब तारिक रहमान की मां खालिदा जिया के बारे में जानिए तारिक रहमान की मां और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने 3 जनवरी 1982 को पहली बार बीएनपी के सदस्य के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। बाद में वे बीएनसपी की अध्यक्ष बनीं और अपनी मौत तक वह इस पद पर रहीं। बांग्लादेश में सैन्य शासन के खिलाफ खालिदा जिया एक प्रमुख आवाज बनकर उभरीं। लोगों को सैन्य शासन के खिलाफ एकजुट करने में खालिदा जिया ने अहम भूमिका निभाई।  जिया 1991 में पहली बार बनीं पीएम खालिदा जिया साल 1991 में पहली बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं। इसके साथ ही बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का गौरव भी हासिल किया। इसके बाद साल 2001 से 2006 तक दूसरी बार भी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं। बताते चले कि खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1946 को अविभाजित भारत के दिनाजपुर जिले … Read more

हिमाचल कैबिनेट ने मंजूर की टोल टैक्स और आबकारी नीति, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले भी लिए

शिमला  मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में टोल टैक्स बैरियर नीति 2026-27 और आबकारी नीति 2026-27 को स्वीकृति प्रदान की गई। मंत्रिमंडल ने महिला होम गार्ड स्वयंसेवकों को 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश देने का भी निर्णय लिया। बैठक में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के आगामी बजट सत्र के दौरान दिए जाने वाले राज्यपाल के अभिभाषण को मंजूरी दी गई।  इसके साथ ही ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की गई, जिसके तहत विधवाओं की बेटियों को राज्य के भीतर और बाहर स्थित सरकारी संस्थानों में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता मिलेगी। छात्रावास सुविधा उपलब्ध न होने पर उन्हें 3,000 रुपये प्रतिमाह किराया सहायता भी दी जाएगी। मंत्रिमंडल ने ‘इंदिरा गांधी मातृ शिशु संकल्प योजना’ को लागू करने की मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य छह वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण स्तर में सुधार करना है। इसके तहत उन्नत पूरक पोषण उपलब्ध करवाया जाएगा। दिव्यांग व्यक्तियों के विवाह अनुदान में भी बढ़ोतरी की गई है। 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए अनुदान राशि 50,000 रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है, जबकि 40 से 70 प्रतिशत दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को 25,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। शिक्षा क्षेत्र में, प्रस्तावित सीबीएसई स्कूलों के लिए कुल 600 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है, जिनमें संस्कृत, शारीरिक शिक्षा, संगीत और ड्राइंग शिक्षक के 150-150 पद शामिल हैं। ये पद राज्य चयन आयोग के माध्यम से भरे जाएंगे। साथ ही, राज्य के 31 बालक एवं बालिका विद्यालयों को सह-शिक्षा विद्यालयों में विलय करने का निर्णय लिया गया। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए चिकित्सा महाविद्यालयों, सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों और आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों के आधुनिकीकरण हेतु 1,617.40 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई। इसके अतिरिक्त, शिमला, सुंदरनगर, नूरपुर, ऊना, भोरंज और बिलासपुर के अस्पतालों में आधुनिक उपकरणों की खरीद को स्वीकृति दी गई। नाहन स्थित डॉ. वाई.एस. परमार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में इम्यूनोहेमेटोलॉजी एवं ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग की स्थापना का भी निर्णय लिया गया। राज्य के सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में बायोमेडिकल उपकरण प्रबंधन एवं अनुरक्षण कार्यक्रम लागू करने, स्वास्थ्य विभाग में नर्स, फार्मेसी अधिकारी, रेडियोग्राफर और फूड सेफ्टी ऑफिसर सहित कई पदों को भरने की भी मंजूरी दी गई। इसके अलावा, 777 अतिरिक्त विद्यालयों में डिजिटल क्लासरूम परियोजना लागू करने, लोक निर्माण विभाग के लिए रोड ड्रेनेज नीति और सड़कों की मरम्मत के लिए मानक संचालन प्रक्रिया को स्वीकृति दी गई। चंबा जिले में डिस्टिल ग्लोबल स्किल्स एवं डिजिटल विश्वविद्यालय की स्थापना, विभिन्न जिलों में खेल छात्रावास खोलने और सिरमौर जिले में लोक निर्माण विभाग मंडलों के पुनर्गठन जैसे कई महत्वपूर्ण फैसले भी कैबिनेट बैठक में लिए गए।

पाकिस्तानी सेना में अंदरूनी कलह? जनरल की पिटाई पर हुक्मरानों की सफाई चर्चा में

इस्लामाबाद   पाकिस्तान में एक बार फिर से सेना की थू-थू हो रही है. पूरे देश में पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा की गंभीर चोटों को लेकर चर्चाएं हैं. वो अस्पताल में भर्ती हैं और उनका स्कल फ्रैक्चर बताया जा रहा है. जब पाकिस्तान भर में खुसुर-फुसुर शुरू हुई तो सेना और परिवार ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी करके कहा है कि ‘बाथरूम में फिसल जाने’ से उनका ये हाल हुआ है. हालांकि, भारतीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय खुफिया सूत्र को अंदर की बात पता चली है. CNN न्यूज18 को खुफिया सूत्रों ने बताया है कि बाजवा पर ये अटैक असल में फौजियों ने ही किया है. ‘बाथरूम में फिसले बाजवा’ दावा किया जा रहा है बाजवा के साथ ये घटना 10 फरवरी 2026 की सुबह तड़के 4:30 बजे हुई, ISPR और परिवार ने स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा है कि जनरल बाथरूम में फिसल गए और उनके सिर पर गंभीर चोटें आ गई. रावपिंडी के कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल (CMH) के आईसीयू में भर्ती बाजवा की खोपड़ी में फ्रैक्चर हुआ है और उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है. इस घटना ने पाकिस्तान सेना के भीतर पनप रहे आंतरिक असंतोष और बदले की आग को एक बार फिर सतह पर ला दिया है. जनरल बाजवा के साले नईम घुम्मन ने बताया कि जनरल नंगे पैर थे और बाथरूम में फिसल गए, जिससे उनके सिर पर गंभीर चोट आई. इसके बाद ISPR ने भी तुरंत पुष्टि की कि यह एक घरेलू दुर्घटना है और उनका सफल ऑपरेशन हो चुका है. Military Attack या कुछ और? हालांकि, खुफिया सूत्रों का मानना है कि यह कोई साधारण बाथरूम में फिसल जाने वाली घटना नहीं है. असल में जनरल बाजवा को तीन सैन्य कर्मियों ने घेर कर पीटा है. उन पर तब तक अटैक किया गया जब तक स्कल फ्रैक्चर नहीं हो गया. सूत्रों का दावा है कि 2022 में इमरान खान की सरकार गिराने के दौरान जनरल बाजवा ने ISI को कुछ ऐसे अधिकारियों के परिवारों को निशाना बनाने का आदेश दिया था जो इस तख्तापलट का विरोध कर रहे थे. माना जा रहा है कि यह हमला उन्हीं पीड़ित अधिकारियों के परिजनों या जूनियर कर्मियों ने किया है.

दो-तिहाई बहुमत के साथ BNP की वापसी, जमात को बड़ा झटका; मोदी ने तारिक रहमान को दी बधाई

ढाका  सत्ता के लिए 20 साल का इंतज़ार खत्म करते हुए, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) 13वें आम चुनावों में बहुमत का आंकड़ा पार करने के बाद अगली सरकार बनाने के लिए तैयार है. यह एक अहम जनादेश है, जो उथल-पुथल से जूझ रहे देश की सियासी दिशा में एक बड़ी तब्दीली की तरफ इशारा करता है.  तारिक रहमान के नेतृत्व वाली पार्टी ने आखिरी बार 2001 में चुनाव जीता था. आज पार्टी ने जीत का ऐलान कर दिया है क्योंकि गिनती के ट्रेंड्स में भारी जीत का इशारा मिल रहा था, जिससे दो दशकों के बाद सत्ता में उसकी वापसी पक्की हो गई. इस बीच, जमात-ए-इस्लामी को बड़ा झटका लगा है, जो नतीजों के धीरे-धीरे आने के बावजूद डबल-डिजिट सीटों तक ही सीमित रही. स्थानीय मीडिया ने बताया कि सुबह-सुबह हुई वोटिंग में BNP गठबंधन ने 209 सीटें जीतीं. कैसा रहा जमात-ए-इस्लामी का प्रदर्शन? BNP के प्रदर्शन ने उसे सिंपल मेजॉरिटी के लिए ज़रूरी 151 सीटों की लिमिट से आगे पहुंचा दिया, जिससे पार्टी अगली सरकार बनाने के लिए मज़बूत स्थिति में आ गई. कई चुनाव क्षेत्रों में वोटों की गिनती जारी रही, लेकिन कुल मिलाकर ट्रेंड्स से पता चला कि फ़ाइनल टैली में बड़े बदलाव की गुंजाइश कम है. सुबह करीब 4 बजे तक, जमात-ए-इस्लामी ने 56 सीटें जीत ली थीं. बांग्लादेश के रेफरेंडम के अनऑफिशियल नतीजों से जुलाई चार्टर के लिए लोगों के मज़बूत सपोर्ट का भी पता चलता है, जो 2024 के विद्रोह से बना एक सुधार डॉक्यूमेंट है जिसमें बड़े संवैधानिक बदलावों का प्रस्ताव है. The Daily Star के मुताबिक, गिने गए वोटों में से करीब 72.9 फीसदी चार्टर को अपनाने के पक्ष में थे, जबकि 27.1 परसेंट इसके खिलाफ थे.  जगह-जगह से हिंसा की खबरें लोकल मीडिया के मुताबिक, बांग्लादेश के कई हिस्सों में चुनाव के दौरान हिंसा की भी घटनाएं सामने आईं. वोटिंग से जुड़ी झड़पों में 70 से ज़्यादा लोग घायल बताए गए हैं. बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार ने कहा कि 14 अलग-अलग घटनाओं में करीब 72 लोग घायल हुए, जिनमें से कई पोलिंग स्टेशन के पास या अंदर हुए. पुलिस ने इस हंगामे के सिलसिले में कम से कम नौ लोगों को हिरासत में लिया. सबसे बुरी हिंसा नोआखली जिले के हटिया में हुई, जहां BNP और नेशनल सिटीजन पार्टी के समर्थकों के बीच हुई झड़प में 31 लोग घायल हो गए. वोटिंग सुबह 7:30 बजे शुरू हुई और नौ घंटे तक बिना रुके चलती रही. वोटरों ने दो अलग-अलग बैलेट पेपर इस्तेमाल किए- एक पार्लियामेंट्री चुनाव के लिए और दूसरा रेफरेंडम के लिए, जिन्हें देश भर के 42,659 पोलिंग स्टेशनों पर ट्रांसपेरेंट बैलेट बॉक्स में रखा गया था. देश के 300 में से 299 चुनाव क्षेत्रों में चुनाव हुए. शेरपुर-3 में एक पार्लियामेंट्री उम्मीदवार की मौत के बाद वोटिंग टाल दी गई. बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन (EC) के मुताबिक, देश भर में 60.69 फीसदी वोटिंग हुई, जिसमें पोस्टल बैलेट का इस्तेमाल 80.11 परसेंट और कुल वैलिड वोट रेट 70.25 परसेंट रहा. कई वोटरों ने कहा कि 2008 के पार्लियामेंट्री चुनावों के बाद यह पहला शांतिपूर्ण और खुशी वाला चुनाव था जो उन्होंने देखा. वोटों की गिनती के बीच, जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के चीफ, शफीकुर रहमान ने कहा कि उनकी पार्टी अपने फायदे के लिए 'विपक्ष की राजनीति' नहीं करेगी, जिससे गिनती जारी रहने पर चुनाव के नतीजों को मानने का संकेत मिला. उन्होंने रिपोर्टर्स से कहा, "हम पॉजिटिव पॉलिटिक्स करेंगे." PM मोदी ने तारिक रहमान को दी बधाई विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान को बांग्लादेश चुनावों में उनकी पार्टी की बड़ी जीत के बाद बधाई देते हुए PM मोदी का बयान दोबारा पोस्ट किया. PM मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और सबको साथ लेकर चलने वाले बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा. मैं हमारे कई तरह के रिश्तों को मजबूत करने और हमारे साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ काम करने का इंतजार कर रहा हूं." बांग्लादेश में हुए 13वें संसदीय चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रचंड जीत के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को गर्मजोशी से बधाई दी है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया (X) पर साझा किए अपने संदेश में इस जीत को बांग्लादेश की जनता का उनके नेतृत्व पर अटूट विश्वास बताया. प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, "संसदीय चुनावों में बीएनपी को निर्णायक जीत दिलाने के लिए मैं तारिक रहमान को हार्दिक बधाई देता हूं. यह जीत आपके नेतृत्व में बांग्लादेशी लोगों के भरोसे को दर्शाती है." उन्होंने आगे कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा और दोनों देशों के साझा विकास लक्ष्यों को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने को उत्सुक है. शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद यह बांग्लादेश में पहला बड़ा चुनाव था. 17 साल के वनवास के बाद तारिक रहमान की पार्टी की सत्ता में वापसी दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए एक बड़ा 'टर्निंग पॉइंट' है. भारत ने इस बधाई संदेश के जरिए स्पष्ट संकेत दिया है कि वह नई सरकार के साथ भी मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को प्राथमिकता देगा. आपको बता दें कि बांग्लादेश में गुरुवार को आम चुनाव के लिए वोट डाले गए थे और शाम को ही मतगणना शुरू हो गई है. अभी तक जो नतीजे सामने आए हैं उसमें रहमान की पार्टी वाले गठबंधन ने 209 सीटें जीतकर 300 सदस्यों वाले जातीय संसद या देश के सदन में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है.  बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने चुनाव में जीत का दावा करते हुए देशवासियों को बधाई दी है लेकिन समर्थकों से जश्न न मनाने की अपील की है.पार्टी ने कहा कि विजय उत्सव के बजाय कार्यकर्ता और समर्थक पूरे देश में शुक्रवार की नमाज़ अदा करें और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को याद करें.  तारिक रहमान को ऐतिहासिक जीत पर US ने दी बधाई बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव में ऐतिहासिक जीत के लिए तारिक रहमान और BNP को बधाई देने वाला यूनाइटेड स्टेट्स पहला देश बन गया. बांग्लादेश में US के राजदूत ने सोशल मीडिया पर लिखा, "बांग्लादेश के लोगों को सफल चुनाव के लिए और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और तारिक रहमान … Read more