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ग्रीनलैंड पर कब्जे के विरोध पर 8 देशों पर फूटा ट्रंप का टैरिफ बम

वाशिंगटन. ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की योजना पर डोनाल्ड ट्रंप का विरोध करने वाले 8 देशों पर अमेरिका ने 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूके, नीदरलैंड्स और फिनलैंड पर 10 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। अगर ग्रीनलैंड की खरीद वाली डील नहीं पूरी हो पाती है तो इस टैरिफ को बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया जाएगा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बीच कांग्रेस के एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को डेनमार्क और ग्रीनलैंड को अपने समर्थन का आश्वासन देने की कोशिश की। ट्रंप ने धमकी दी है कि आर्कटिक के रणनीतिक द्वीप पर अमेरिका के नियंत्रण का समर्थन नहीं करने पर कड़े शुल्क लगाए जाएंगे। प्रतिनिधिमंडल के नेता और डेलावेयर से डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर क्रिस कून्स ने कहा कि ग्रीनलैंड को लेकर मौजूदा बयानबाजी से डेनमार्क में चिंता का माहौल है। उन्होंने कहा कि वह हालात को शांत करना चाहते हैं। कोपेनहेगन में कून्स ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि डेनमार्क के लोग अमेरिकी लोगों में अपना विश्वास नहीं छोड़ेंगे।" उन्होंने कहा कि अमेरिका डेनमार्क और नाटो के प्रति "उन सभी कार्यों के लिए सम्मान रखता है जो हमने साथ मिलकर किए हैं।" उनकी टिप्पणियां ‘व्हाइट हाउस’ से आ रही टिप्पणियों से बिल्कुल विपरीत हैं। ट्रंप ने बार-बार यह दावा करके अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की अपनी मांगों को सही ठहराने की कोशिश की है कि चीन और रूस की ग्रीनलैंड पर नजर है, जहां महत्वपूर्ण खनिजों के विशाल अप्रयुक्त भंडार मौजूद हैं। ‘व्हाइट हाउस’ ने जबरन इस क्षेत्र पर कब्ज़ा करने की संभावना से इनकार नहीं किया है। कून्स ने कहा, ‘‘ग्रीनलैंड को फिलहाल कोई सुरक्षा खतरा नहीं है।’’ ट्रंप कई महीनों से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि अमेरिका को ग्रीनलैंड पर नियंत्रण रखना चाहिए, जो नाटो सहयोगी डेनमार्क का एक अर्द्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि ग्रीनलैंड का अमेरिकी नियंत्रण में न होना "अस्वीकार्य" होगा।

बांग्लादेश में पेट्रोल के पैसे मांगने पर हिंदू युवक की हत्या

ढाका. बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक पेट्रोल पंप पर काम करने वाले 30 वर्षीय हिंदू कर्मचारी रिपन साहा की एक एसयूवी (SUV) सवार ने कुचलकर हत्या कर दी। आरोप है कि यह हमला तब हुआ जब रिपन ने पेट्रोल भरवाने के बाद बिना पैसे दिए भाग रहे ग्राहक को रोकने की कोशिश की। पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना शुक्रवार तड़के करीब 4:30 बजे 'करीम फिलिंग स्टेशन' पर हुई। एक काली रंग की एसयूवी पंप पर आई और उसमें 5,000 टका (लगभग 3,710 भारतीय रुपये) का तेल भरवाया गया। तेल भरवाने के बाद जब ड्राइवर ने बिना भुगतान किए गाड़ी भगाना शुरू किया तो रिपन साहा उसे रोकने के लिए गाड़ी के सामने खड़े हो गए। आरोपी ने गाड़ी रोकने के बजाय रिपन के ऊपर चढ़ा दी और मौके से फरार हो गया। रिपन की मौके पर ही मौत हो गई। BNP नेता और ड्राइवर गिरफ्तार पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वाहन को जब्त कर लिया है और दो लोगों को गिरफ्तार किया है। अबुल हाशेम गाड़ी का मालिक है जो कि ठेकेदारी करता है। वह विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) का सदस्य है और इसके युवा संगठन 'जुबो दल' का पूर्व जिला अध्यक्ष रह चुका है। इसके अलावा कार ड्राइवर कमल हुसैन को भी गिरफ्तार किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जियाउर रहमान ने पुष्टि की है कि आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जा रहा है। हालांकि, पुलिस अभी इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस घटना का कोई सांप्रदायिक कोण है या यह केवल एक आपराधिक कृत्य था। चुनाव से पहले हिंसा का साया यह हत्या ऐसे समय में हुई है जब बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों से पहले सांप्रदायिक हिंसा तेजी से बढ़ रही है। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने आरोप लगाया है कि केवल दिसंबर 2025 में सांप्रदायिक हिंसा की 51 घटनाएं दर्ज की गई हैं। परिषद का कहना है कि इस हिंसा का उद्देश्य अल्पसंख्यक मतदाताओं को डराना और उन्हें अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देने से रोकना है। हाल ही में नरसिंगडी में एक जौहरी की हत्या और मैमनसिंह में एक हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है। भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर अगस्त 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से ही दोनों देशों के बीच संबंधों में खिंचाव है। भारत ने बार-बार बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। रिपन साहा जैसी घटनाएं इन कूटनीतिक संबंधों को और अधिक जटिल बना रही हैं।

मुंबई में जीत, असम में जश्न: BMC चुनाव परिणाम पर पीएम मोदी का बड़ा बयान

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के कालियाबोर में जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'आज भाजपा पूरे देश में लोगों की पहली पसंद बन गई है। बीते एक-डेढ़ वर्षों से भाजपा पर देश का भरोसा लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में बिहार में चुनाव हुए। वहां 20 वर्ष बाद भी जनता ने भाजपा को रिकॉर्ड वोट दिए हैं। रिकॉर्ड सीटें जिताई हैं। दो दिन पहले ही महाराष्ट्र के बड़े शहरों में मेयर और पार्षदों के चुनाव परिणाम आए हैं। मुंबई जो दुनिया के सबसे बड़े निगमों में से एक है, वहां की जनता ने पहली बार भाजपा को रिकॉर्ड जनादेश दिया। जीत मुंबई में हो रही है, जश्न काजीरंगा में मनाया जा रहा है। महाराष्ट्र के अधिकतर शहरों की जनता ने भाजपा को सेवा का अवसर दिया है।'   पीएम मोदी ने कहा कि बीते कुछ समय में जितने भी चुनाव परिणाम आए हैं, उनका जनादेश स्पष्ट है। देश का वोटर आज गुड गवर्नेंस चाहता है, विकास चाहता है, वो विकास और विरासत दोनों पर फोकस करता है। इसलिए वो भाजपा को पसंद करता है। उन्होंने कहा, 'इन चुनावों का एक और संदेश है। कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति को देश लगातार नकार रहा है। जिस मुंबई शहर में कांग्रेस का जन्म हुआ था वहां वो आज चौथे या पांचवें नंबर की पार्टी बन गई है।' नॉर्थ ईस्ट के विकास पर क्या बोले पीएम मोदी प्रधानमंत्री ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट की सबसे बड़ी पीड़ा हमेशा दूरी की रही है। दूरी दिलों की, दूरी स्थानों की। दशकों तक यहां के लोगों को ये महसूस होता रहा कि देश का विकास कहीं और हो रहा है और वे पीछे छूट रहे हैं। इसका असर केवल अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ा बल्कि भरोसे पर भी पड़ा। उन्होंने कहा, 'इस भावना को बदलने का काम भाजपा ने किया। डबल इंजन की सरकार ने नॉर्थ ईस्ट के विकास को प्राथमिकता बनाया। रोडवेज, रेलवे, एयरवेज और वाटरवेज के माध्यम से असम को जोड़ने का काम एक साथ शुरू हुआ, लेकिन कांग्रेस ने कभी इसकी परवाह नहीं की। जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तो असम को बहुत कम रेल बजट मिलता था। लगभग 2000 करोड़ रुपये। अब भाजपा सरकार ने इसे बढ़ाकर लगभग 10,000 करोड़ रुपये सालाना कर दिया गया है।' PM ने प्रकृति की सुरक्षा पर दिया जोर नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब प्रकृति सुरक्षित होती है तो उसके साथ अवसर भी पैदा होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में काजीरंगा में पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। होम स्टे, गाइड सेवाएं, परिवहन, हस्त शिल्प और छोटे व्यवसायों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को आय के नए साधन मिले हैं। उन्होंने कहा, 'आज मैं असम के आप लोगों की, यहां की सरकार की एक और बात के लिए खासतौर पर तारीफ करूंगा। एक समय था जब काजीरंगा में राइनो के शिकार की घटनाएं असम की सबसे बड़ी चिंता बन चुकी थी। 2013-14 में एक सींग वाले दर्जनों राइनो मारे गए। भाजपा सरकार ने तय किया था कि हम ये नहीं चलने देंगे, अब ऐसा नहीं चलेगा। हमने इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत किया, वन विभाग को आधुनिक संसाधन मिले, निगरानी तंत्र सशक्त हुआ, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई गई। इसका सुखद परिणाम भी सामने आया। 2025 में राइनो के शिकार की एक भी घटना सामने नहीं आई है।'  

ट्विटर के बाद अब रयान एयरलाइन के पीछे पड़े एलन मस्क

लंदन. टेस्ला सीईओ एलन मस्क अक्सर अपनी बेबाकी के लिए जाते हैं। कुछ साल पहले उन्होंने ट्विटर पर ही एक पोस्ट के जरिए लोगों से पूछा कि क्या उन्हें यह खरीद लेना चाहिए। इसके बाद उन्होंने ट्विटर को खरीद भी लिया इसके बाद उसका नाम बदल का एक्स कर दिया। अब एक बार फिर से मस्क ऐसी ही एक पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। दरअसल, यह पूरा मामला कुछ दिन पहले शुरू हुआ था जब रयान एयर ने अपने 600 से अधिक विमानों के लिए स्टारलिंक इंटरनेट की सेवा लेने से इनकार कर दिया। बाद में जब सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स के डाउन होने की खबरें आईं, तो ऐसी ही एक पोस्ट पर एयरलाइन ने एलन मस्क को टैग करते हुए पूछ लिया कि क्या आपको वाईफाई चाहिए? इसका जवाब देते हुए ट्रंप ने लिखा, "क्या मुझे रयान एयर खरीद लेनी चाहिए और किसी ऐसे व्यक्ति को कमान सौंपनी चाहिए, जिसका असली में नाम रयान हो?" यह टिप्पणी देखते ही देखते वायरल हो गई। सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर मजाकिया प्रतिक्रिया दी, कुछ ने इस विचार का समर्थन किया तो कुछ ने एयरलाइन खरीदने के वित्तीय जोखिमों पर मजाक किया। एक यूजर ने सलाह दी कि हां इसे खरीद लो,वहीं दूसरे ने लिखा, "इसे खरीदते समय सावधान रहना चाहिए। ये आपको इतनी कम कीमत का प्रस्ताव देंगे जो अविश्वसनीय लगेगी, और बाद में ये आपसे तरह-तरह के अतिरिक्त शुल्क वसूलेंगे।” क यूजर ने लिखा कि एक अरबपति का करोड़पति बनने का सबसे आसान तरीका है कि एक एयरलाइन खरीद लो। क्या है मस्क और रायन एयर का विवाद? स्पेसएक्स कंपनी के मालिक एलन मस्क ने रयानएयर को उनके विमानों में स्टारलिंक इंटरनेट उपलब्ध कराने का विकल्प दिया था। हालांकि, एयरलाइन के सीईओ ओलैरी ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया। आयरिश रेडियो स्टेशन न्यूस्टॉक से बात करते हुए, ओ'लेरी ने कहा कि स्टारलिंक के लिए आवश्यक एंटीना अतिरिक्त प्रतिरोध पैदा करेगा, जिससे ईंधन की लागत बढ़ जाएगी। उन्होंने अनुमान लगाया कि इस सेवा पर एयरलाइन को सालाना 200 मिलियन से 250 मिलियन डॉलर का खर्च आ सकता है। आपको विमान के ढांचे पर एक एंटीना लगाना होगा। वजन और प्रतिरोध के कारण ईंधन की खपत बढ़ जाती है।" उन्होंने आगे कहा कि रयानएयर के यात्री छोटी दूरी की उड़ानों में वाई-फाई के लिए भुगतान करने को तैयार नहीं होंगे। ओलैरी के इन बयानों के सामने आने के बाद मस्क ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सीईओ को गलत जानकारी दी गई है। रयानएयर को स्टारलिंक उपकरण के कारण ईंधन की खपत पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी नहीं है। मस्क ने ओलैरी को वेबकूफ करार देते हुए, उन्हें निकाल देने की मांग की। उनकी इस पोस्ट पर एक यूजर ने कमेंट करते हुए कहा कि मस्क को अब रयानएयर भी खरीद लेनी चाहिए और उसके सीईओ को भी ठीक उसी तरह हटा देना चाहिए, जैसे उन्होंने ट्विटर के सीईओ पराग अग्रवाल को हटा दिया था। इस पर मस्क ने इसे एक अच्छा आइडिया करार दिया था। हालांकि, मस्क के इस कमेंट पर पलटवार करते हुए ओलैरी ने लिखा कि मस्क को एयरलाइन के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इतना ही नहीं उन्होंने मस्क को एक वेबकूफ आदमी और उनके एक्स प्लेटफार्म को गंदगी का ढ़ेर करार दिया था। गौरतलब है कि रयानएयर भले ही स्टारलिंक इंटरनेट का उपयोग करने से इनकार कर दिया हो, लेकिन यूनाइटेड एयरलाइंस, कतर एयरवेज और लुफ्थांसा सहित दो दर्जन से अधिक एयरलाइंस इसे शुरू कर रही हैं। आपको बता दें, रयानएयर एक आयरलैंड की एयरलाइन है। यह एक कम बजट वाली एयरलाइन है, जो मुख्यतः पूरे यूरोप और छोटी दूरी की उड़ानों को संचालित करती है। इसकी स्थापना 1984 में हुई थी।

ग्रैप-4 की वजह से दिल्ली-NCR में गाड़ियों पर रोक

दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर में हवा एक बार फिर जहरीली हो गई। एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार जाने के बाद एक बार फिर पाबंदियों का दौर लौट गया है। हालात बिगड़ते देख 24 दिन बाद दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप-4 लागू किया गया है। इसके तहत दिल्ली-एनसीआर में कई तरह की पाबंदियां लागू हो गईं। एक तरफ जहां लाखों गाड़ियों पर प्रतिबंध लग गया है तो दूसरी तरफ स्कूलों के खुलने का रास्ता भी बाधित हो गया है। क्यों लागू किया गया ग्रैप-4 कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के मुताबिक, शनिवार शाम चार बजे दिल्ली का औसत एक्यूआई 400 पर था जो रात 8 बजे बढ़कर 428 पहुंच गया। तेजी से बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए सीएक्यूएम की इमर्जेंसी बैठक बुलाई गई। पश्चिमी विक्षोभ और हवा की धीमी गति की वजह से प्रदूषण में और तेजी से वृद्धि की संभावना को देखते हुए ग्रैप-4 की पाबंदियों को लगाने का फैसला किया गया। दिल्ली में ग्रैप 1, 2 और 3 के चरण पहले से ही लागू हैं। इसके साथ ही अब ग्रैप 4 की पाबंदियां भी लागू कर दी गई हैं। दिल्ली में ट्रकों पर पाबंदी ग्रैप-4 लागू रहने के दौरान दिल्ली में डीजल से चलने वाले ट्रकों के प्रवेश पर पाबंदी रहेगी। हालांकि, आवश्यक वस्तुओं, सेवाओं वाले ट्रकों को छूट मिलेगी। इन गाड़ियों की दिल्ली में एंट्री नहीं दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड बीएस-VI से कम स्टैंडर्ड की गाड़ियों की राजधानी में एंट्री नहीं होगी। इसका मतलब है कि यदि आपकी कार नोएडा, गाजियाबाद या गुरुग्राम आदि में रजिस्टर्ड है और BS-VI से कम की है तो इसे दिल्ली नहीं ले जा सकते हैं। हालांकि, सीएनजी गाड़ियों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं है। इस नियम का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। एनसीआर में किन वाहनों पर रोक BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल कारों पर दिल्ली, गरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा में पाबंदी रहेगी। निर्माण कार्यों पर रोक दिल्ली-एनसीआर में सभी तरह के निर्माण और ध्वस्तीकरण गतिविधियों पर रोक रहेगी। हाईब्रिड मोड में स्कूल 10वीं और 10वीं को छोड़कर अन्य सभी क्लास के लिए स्कूलों को हाईब्रिड मोड में चलाया जाएगा। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद में नर्सरी से 9वीं और 11वीं क्लास के बच्चों के लिए फिजिकल के साथ ऑनलाइन क्लास की सुविधा रहेगी। हालांकि, मौसम और प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए संबंधित सरकारें और जिला अधिकारी छुट्टियां अथवा समय में बदलाव आदि को लेकर आदेश भी जारी कर सकते हैं। 24 दिन बाद फिर लौटीं सबसे कड़ी पाबंदियां प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रैप 4 की पाबंदियां सबसे ज्यादा सख्त हैं। पिछले साल 13 दिसंबर को तेजी से बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए ग्रैप चार की पाबंदियां लगाई गई थीं। बाद में जब प्रदूषण के स्तर में हल्का सुधार हुआ तो 24 दिसंबर को ग्रैप चार की पाबंदियां वापस ले ली गईं थी। मगर शनिवार को एक बार फिर से ग्रैप 4 की पाबंदियां लगाने की जरूरत पड़ गई।

गोवा में 2 रूसी महिलाओं की हत्या से सनसनी

मुंबई. गोवा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 37 वर्षीय रूसी नागरिक एलेक्सी लियोनोव पर 2 रूसी महिलाओं की हत्या का आरोप है। पुलिस ने शुक्रवार को उसे गिरफ्तार कर लिया, जब उसकी लिव-इन पार्टनर एलेना कस्थनोवा का शव उत्तर गोवा के अरंबोल में किराए के कमरे से मिला। महिला का गला रेता गया था और उसके हाथ रस्सी से पीछे बंधे हुए थे। पड़ोसियों ने चीखें सुनकर मौके पर पहुंचकर लैंडलॉर्ड को सूचना दी, जिसके बाद लियोनोव पहले मंजिल से कूदकर भागा, लेकिन पुलिस ने उसे सुबह 4 बजे हिरासत में ले लिया। पूछताछ के दौरान उसने न केवल इस हत्या को कबूल किया, बल्कि एक अन्य रूसी महिला एलेना वानीवा की हत्या का भी खुलासा किया, जिसका शव मोरजिम गांव में बरामद हुआ। गोवा पुलिस का मानना है कि वानीवा की हत्या 14 जनवरी की रात हुई थी और दोनों हत्याओं में एक ही पैटर्न था- गला रेतना और हाथ बांधना। पूछताछ में लियोनोव ने और भी कई हत्याओं की बात कबूल की है, जिसमें गोवा के बाहर की घटनाएं भी शामिल हैं। उसने पुलिस को एक तीसरी महिला की हत्या के बारे में बताया, जो असम की 40 वर्षीय महिला है। पुलिस के अनुसार, इस महिला को नशीला पदार्थ देकर मारने का दावा किया गया है। हालांकि, आरोपी अपने बयानों में बार-बार बदलाव कर रहा है। पुलिस का कहना है कि वह नशीले पदार्थों के लंबे प्रभाव में हो सकता है। इसलिए सभी दावों की सत्यता की जांच की जा रही है। 14 दिनों की पुलिस हिरासत में आरोपी रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में अब तक 2 रूसी महिलाओं के शव बरामद हुए हैं। तीसरे मामले की पुष्टि पोस्टमॉर्टम और सबूतों से होनी बाकी है। गोवा पुलिस ने अलग-अलग मामलों में हत्या के तहत केस दर्ज किए हैं। पेरनेम की न्यायिक मजिस्ट्रेट ने लियोनोव को दो रूसी महिलाओं की हत्या के मामले में 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसी सबूत जुटा रही है, जिसमें हत्या का हथियार और अन्य फोरेंसिक डिटेल्स शामिल हैं। पुलिस अधिकारी ने कहा कि आरोपी के दावों की पुष्टि होने पर ही आगे की कार्रवाई होगी।

एकनाथ शिंदे के दांव से बीजेपी की बढ़ सकती है ‘BMC मेयर’ वाली टेंशन!

मुंबई. मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव परिणामों के बाद अब सत्ता के समीकरणों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बार किसी भी स्थिति में मुंबई पर अपना मेयर बिठाने का संकल्प लिया था। 89 सीटें जीतकर बीजेपी इस सपने के करीब भी पहुंच गई है, लेकिन सत्ता की चाबी अब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के हाथों में नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार, एकनाथ शिंदे ने बीजेपी की मजबूरी को भांपते हुए एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। खबर है कि शिंदे गुट की ओर से मुंबई के मेयर पद की मांग की जा सकती है। तर्क यह दिया जा रहा है कि यह वर्ष बालासाहेब ठाकरे का जन्मशताब्दी वर्ष है। शिंदे गुट इस मौके पर बालासाहेब की इच्छा पूरी करने का हवाला देते हुए बीजेपी से ढाई साल के लिए मेयर पद की मांग कर सकता है। इसके अलावा, स्थायी समिति के अध्यक्ष पद और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी शिंदे सेना अपना दावा ठोक सकती है। बीजेपी के लिए शिंदे अनिवार्य बीएमसी में बहुमत के लिए 114 पार्षदों की आवश्यकता है। वर्तमान स्थिति के मुताबिक, बीजेपी की 89 सीटें, शिंदे सेना की 29 सीटें, ठाकरे गुट की 65 सीटें और मनसे की 6 सीटें हैं। बीजेपी के पास 89 सीटें हैं, लेकिन बिना शिंदे गुट के 29 पार्षदों के वह बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर सकती। इसी बढ़त का फायदा उठाकर अब शिंदे सेना सौदेबाजी की तैयारी में है। होटल पॉलिटिक्स की शुरुआत एकनाथ शिंदे ने कल ही अपने सभी 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को बांद्रा के 'ताज लैंड्स एंड' होटल में शिफ्ट कर दिया है। सत्ता स्थापना की प्रक्रिया पूरी होने तक ये सभी पार्षद वहीं रहेंगे। शिंदे के इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है और इसे बीजेपी पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। फडणवीस की प्रतिक्रिया मेयर पद को लेकर मचे घमासान पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "हमें पूर्ण बहुमत मिला है। ऊपर वाले ने ही तय किया है कि मुंबई में महायुति का ही मेयर बनेगा। शिंदे साहब और हम साथ बैठकर सब तय करेंगे और मुंबई को बेहतर तरीके से चलाएंगे।" पार्षदों को होटल में रखने के सवाल पर फडणवीस ने कहा कि जैसे हमने अपने पार्षदों को साथ बुलाया, वैसे ही उन्होंने भी किया होगा। अब हमें तोड़-फोड़ की कोई जरूरत नहीं है।

एआर रहमान के ‘काम नहीं मिल रहा’ वाले बयान पर BJP और VHP ने दावे पर उठाए सवाल

मुंबई. ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान के बॉलीवुड में पिछले 8 सालों से कम काम मिलने के बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने हाल ही में बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में कहा कि उन्हें कम काम मिल रहा है और यह इंडस्ट्री में पावर शिफ्ट की वजह से हो सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इसमें सांप्रदायिक बात भी शामिल हो सकती है, हालांकि यह उनके सामने सीधे नहीं आया। रहमान ने कहा, 'मैं काम की तलाश में नहीं हूं। मैं चाहता हूं कि मेरे काम की ईमानदारी से काम खुद आए। मुझे लगता है कि चीजों की तलाश में जाना एक अभिशाप जैसा है।' उन्होंने बताया कि वे दक्षिण से बॉलीवुड में स्थापित होने वाले पहले संगीतकार थे और लंबे समय तक सफल रहे। लेकिन पिछले आठ सालों में स्थिति बदल गई है। एआर रहमान ने कहा, 'अब गैर क्रिएटिव लोग फैसले ले रहे हैं और यह सांप्रदायिक बात भी हो सकती है, लेकिन मेरे सामने नहीं। मुझे चाइनीज व्हिस्पर्स (कानाफूसी) के जरिए पता चलता है कि आपको बुक किया गया था, लेकिन म्यूजिक कंपनी ने आगे बढ़कर अपने 5 कंपोजर हायर कर लिए। मैंने कहा कि अच्छा है, मुझे परिवार के साथ आराम करने का समय मिलेगा।' उन्होंने 1990 के दशक में बॉलीवुड में एंट्री के समय किसी पूर्वाग्रह का सामना नहीं करने की बात कही। रहमान ने कहा, 'शायद तब मुझे पता नहीं चला, या भगवान ने छिपा दिया। लेकिन पिछले 8 सालों में पावर शिफ्ट की वजह से शायद ऐसा हो रहा है।' केंद्रीय मंत्री का क्या जवाब केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने एआर रहमान के दावे को बिल्कुल गलत करार दिया। उन्होंने कहा, 'रहमान का यह कहना कि मुस्लिम होने की वजह से उन्हें फिल्म म्यूजिक इंडस्ट्री में सपोर्ट नहीं मिल रहा, पूरी तरह झूठ है। देश ने उन्हें नंबर वन म्यूजिक डायरेक्टर के रूप में स्वीकार किया है और सपोर्ट किया है।' उन्होंने जोर दिया कि देश के लोग कभी रहमान को धर्म की नजर से नहीं देखते। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्होंने धर्म पर टिप्पणी की। VHP की तीखी प्रतिक्रिया विश्व हिंदू परिषद ने भी एआर रहमान पर निशाना साधा। राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि ऐसा लगता है कि एआर रहमान भी उस गुट के लीडर बन गए हैं, जिसके लीडर कभी पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी थे। बंसल ने कहा, 'हामिद अंसारी ने 10 साल तक संवैधानिक पदों पर फायदा उठाया और रिटायर होने पर भारत को नीचा दिखाया। रहमान को पूरे देश और हिंदुओं ने बहुत प्यार किया। काम न मिलने की वजह खुद में ढूंढने की बजाय वे सिस्टम को बदनाम कर रहे हैं और पूरी इंडस्ट्री को बदनाम कर रहे हैं। वे क्या साबित करना चाहते हैं?' बंसल ने आगे कहा कि वे कभी हिंदू थे। उन्होंने इस्लाम क्यों कबूल किया? अब घर वापसी कर लें। शायद फिर से काम मिलना शुरू हो जाए। ऐसे छोटे-मोटे बयान राजनेता दे सकते हैं, कलाकार को नहीं शोभा देते।

एलन मस्क का बड़ा कदम: धोखाधड़ी के आरोप में ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट से 134 अरब डॉलर हर्जाना

नई दिल्ली   टेस्ला के सीईओ और एआई कंपनी एक्सएआई के फाउंडर एलन मस्क ने ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ एक बड़ा मुकदमा दायर किया है। मस्क ने आरोप लगाया है कि ओपनएआई ने अपने गैर-लाभकारी उद्देश्य को छोड़ दिया और माइक्रोसॉफ्ट के साथ साझेदारी करके उनके साथ धोखा किया। एलन मस्क ने इस मामले में 79 अरब डॉलर से लेकर 134 अरब डॉलर तक के हर्जाने की मांग की है। मस्क के वकील ने अदालत में दाखिल दस्तावेज में इस हर्जाने की जानकारी दी। यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब एक संघीय न्यायाधीश ने ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें वे अप्रैल के अंत में होने वाले जूरी ट्रायल से बचना चाहते थे। यह मुकदमा अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के ऑकलैंड शहर में चलेगा। अदालत में दाखिल दस्तावेज के अनुसार, मस्क ने साल 2015 में ओपनएआई की स्थापना में मदद की थी और उस समय 38 लाख डॉलर की शुरुआती राशि दी थी। मस्क का कहना है कि आज ओपनएआई की कीमत करीब 500 अरब डॉलर हो चुकी है और उन्हें इस मूल्य का हिस्सा मिलना चाहिए। मस्क के वकील स्टीवन मोलो ने कहा कि जैसे किसी स्टार्टअप में शुरुआती निवेश करने वाला व्यक्ति बाद में बहुत बड़ा मुनाफा कमा सकता है, उसी तरह ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट ने जो गलत फायदा कमाया है, उस पर अब एलन मस्क का भी हक बनता है। एलन मस्क ने साल 2018 में ओपनएआई के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने साल 2023 में अपनी खुद की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी शुरू की। साल 2024 में उन्होंने ओपनएआई के प्रमुख सैम ऑल्टमैन के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू की। मस्क का आरोप है कि सैम ऑल्टमैन ने ओपनएआई को गैर-लाभकारी संस्था से मुनाफे वाली कंपनी में बदलने की योजना बनाई, जो गलत है। हालांकि, ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट ने एलन मस्क के सभी आरोपों को गलत बताया है। ओपनएआई ने अपने बयान में कहा कि एलन मस्क का मुकदमा बेबुनियाद है और यह सिर्फ कंपनी को परेशान करने की कोशिश है। कंपनी ने कहा कि वह अदालत में सच साबित करने के लिए तैयार है। ओपनएआई ने निवेशकों को पहले ही चेतावनी दी थी कि जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ेगा, एलन मस्क इस तरह के चौंकाने वाले दावे करते रहेंगे। वहीं, माइक्रोसॉफ्ट ने इस पूरे मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। चैटजीपीटी निर्माता ओपनएआई ने अक्टूबर में अपनी कंपनी की संरचना में बदलाव की घोषणा की थी। इसके तहत माइक्रोसॉफ्ट को कंपनी में 27 प्रतिशत हिस्सेदारी दी गई, लेकिन गैर-लाभकारी संस्था का नियंत्रण अभी भी बना रहेगा। सैम ऑल्टमैन ने एलन मस्क के मुकदमे को कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल बताया और कहा कि इसका मकसद सिर्फ एक प्रतिस्पर्धी कंपनी की रफ्तार को धीमा करना है। अदालत में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, ओपनएआई ने गलत तरीके से 65.50 अरब से 109.43 अरब डॉलर तक का फायदा कमाया, जबकि माइक्रोसॉफ्ट को 13.30 अरब से 25.06 अरब डॉलर तक का लाभ हुआ। एलन मस्क ने यह भी कहा है कि वे सिर्फ नुकसान की भरपाई ही नहीं, बल्कि अतिरिक्त जुर्माने की मांग भी करेंगे।

सिगरेट-बीड़ी पैकेट पर दिखता है ये नंबर, 1 करोड़ लोग कर चुके हैं कॉल, जानिए क्विट-लाइन का क्या काम है

नई दिल्ली Tobacco Quitline Number: अगर आपने ध्यान से सिगरेट, बीड़ी, गुटखा या तंबाकू और इससे बने उत्पादों के पैकेट देखा हो तो मालूम होगा कि इन सभी पैकेट्स पर एक नंबर लिखा होता है और इसके पास लिखा होता है क्विट लाइन नंबर. क्या कभी आपने सोचा है कि यह नंबर इन पैकेट्स पर क्यों लिखा होता है और क्या कभी कोई व्यक्ति इस नंबर पर कॉल भी करता है, और अगर कॉल करता भी है तो उसका क्या फायदा होता है? नहीं! तो आइए जानते हैं.. दिल्ली के वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट (VPCI) के डायरेक्टर प्रोफेसर राजकुमार ने बताया कि तंबाकू उत्पादों के पैकेटों पर दर्ज यह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत नेशनल टोबैको क्विट हेल्पलाइन (1800-112-356) नंबर है जो तंबाकू छोड़ने में लोगों की मदद करता है. यह टोल फ्री नंबर है, जिस पर अगर कोई व्यक्ति कॉल करता है तो वह कॉल तुरंत काउंसलर्स के पास जाती है और फिर आगे का काम ये काउंसलर्स करते हैं. ये लोग तंबाकू छोड़ने का मन बना चुके लोगों की लगातार काउंसलिंग करते हैं और 9 महीने तक फॉलोअप करते हैं. वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट डे के मौके पर प्रोफेसर राजकुमार ने बताया कि अस्पताल की इस हेल्पलाइन पर अभी तक 1 करोड़ लोग फोन कर चुके हैं. इनमें से 6 लाख लोग ऐसे थे, जिन्हें तंबाकू छोड़ने के लिए काउंसलिंग दी गई और इनमें से करीब 35 फीसदी लोग तंबाकू छोड़ पाए. तंबाकू छोड़ने वाले लोगों में बीड़ी-सिगरेट या बिना धुएं वाला तंबाकू छोड़ने वाले सभी लोग शामिल हैं. वे कहते हैं कि यह देश की सबसे प्रभावी तंबाकू क्विट हेल्पलाइन है लेकिन लोगों को इसके बारे में नहीं पता. सबसे बड़ी बात है कि यह हर उस उत्पाद पर मौजूद है जिसमें तंबाकू है. शुरुआत में यह सेवा VPCI से शुरू की गई थी, लेकिन इसकी सफलता के बाद इसके तीन आउटरीच सेंटर बेंगलुरु के निमहांस, मुंबई के टाटा मेमोरियल कैंसर इंस्टीट्यूट और गुवाहाटी के रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट में खोले गए हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को और कई भाषाओं में मदद मिल सके. कब से कब तक काम करता है यह क्विट लाइन नंबर यह हेल्पलाइन नंबर सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक काम करता है. सोमवार को यह बंद रहता है. फिलहाल यह 15 भारतीय भाषाओं में काउंसलिंग की सुविधा देती है.इसकी पहचान बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने यह भी अनिवार्य कर दिया है कि हेल्पलाइन नंबर सभी तंबाकू उत्पादों पर छापा जाए. ऐसे में जब भी कोई व्यक्ति तंबाकू का पैकेट उठाता है और छोड़ने के बारे में सोचता है, तो मदद का नंबर उसे वहीं मिल जाता है. कब शुरू हुई क्विटलाइन प्रोफेसर कुमार ने बताया कि यह क्विटलाइन 2016 में शुरू की गई थी. इसमें सिर्फ फोन पर काउंसलिंग ही नहीं दी जाती बल्कि बल्कि यह व्यक्ति के तंबाकू छोड़ने के पूरे सफर में उसके साथ रहती है और लगातार 7 दिन, 1 महीना, 3 महीने और 9 महीने तक फॉलोअप करती है और यही चीज इसे सफल बनाती है.