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‘केरल’ से ‘केरलम’ तक: नाम बदलने की मांग पर राजीव चंद्रशेखर का पीएम मोदी को पत्र

तिरुवनंतपुरम भारतीय जनता पार्टी के केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य का आधिकारिक नाम 'केरल' से बदलकर 'केरलम' करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 'केरलम' नाम मलयालम भाषा और राज्य की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। राजीव चंद्रशेखर ने पत्र में यह भी बताया कि जून 2024 में केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें राज्य के नाम को आधिकारिक दस्तावेजों में 'केरल' से बदलकर 'केरलम' करने की मांग की गई है। चंद्रशेखर ने यह भी बताया कि उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को भी पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा से इस महान राज्य को, जो अपनी समृद्ध परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है, 'केरलम' के रूप में ही देखती आई है। पार्टी की विचारधारा पारंपरिक, भाषाई और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सम्मान पर आधारित है। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में राजीव चंद्रशेखर ने उम्मीद जताई कि राज्य का नाम बदलने के बाद सभी राजनीतिक दल मिलकर केरलम की हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत को संजोने और पुनर्जीवित करने के लिए काम करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल से एक विकसित और सुरक्षित केरलम का निर्माण संभव होगा, जहां सभी मलयाली (चाहे वे किसी भी धर्म से हों) अपनी आस्था और परंपराओं को लेकर सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर सकें। राजीव चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि राज्य का नाम 'केरलम' रखने से उन कट्टरपंथी तत्वों के प्रयासों को कमजोर किया जा सकेगा, जो धर्म के आधार पर राज्य को बांटने और अलग-अलग जिले बनाने की मांग करते रहते हैं। उनके अनुसार, अपनी ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा केरलम, समाज को जोड़ने का काम करेगा। पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि मलयालम भाषा में निहित और विशिष्ट नाम 'केरलम' को ही राज्य का आधिकारिक नाम सुनिश्चित किया जाए। राजीव चंद्रशेखर ने विश्वास जताया कि अपनी गौरवशाली विरासत से जुड़ा 'केरलम' भविष्य में सभी मलयालियों के लिए एक उज्ज्वल, समृद्ध और सुरक्षित राज्य के रूप में आगे बढ़ेगा।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की दौड़ में नितिन नबीन, 20 जनवरी को होगा ऐलान

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में एक अहम संगठनात्मक बदलाव होने वाला है, क्योंकि इसके राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन 19 जनवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन फाइल करने वाले हैं। नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक के तौर पर मौजूद रहने की उम्मीद है, जो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच नबीन के नेतृत्व में मजबूत समर्थन और विश्वास को दिखाता है। प्रधानमंत्री की मौजूदगी को भाजपा की संगठनात्मक और वैचारिक दिशा में निरंतरता और स्थिरता पर जोर देने के तौर पर देखा जा रहा है। नामांकन प्रक्रिया भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुनने के लिए उसके स्थापित आंतरिक संगठनात्मक ढांचे का हिस्सा है। कई वरिष्ठ नेता, केंद्रीय नेतृत्व के सदस्य और प्रमुख पदाधिकारी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं, जिससे यह पार्टी के संगठनात्मक कैलेंडर में एक हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम बन जाएगा। नामांकन प्रोसेस पूरा होने के बाद, नए भाजपा अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा 20 जनवरी को होने वाली है। उम्मीद है कि इस घोषणा से आने वाली चुनावी चुनौतियों से पहले पार्टी के नेतृत्व संरचना के बारे में स्पष्टता मिलेगी और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की संगठनात्मक रणनीति को आकार मिलेगा। राजनीतिक जानकार इन घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं, क्योंकि यह नियुक्ति ऐसे अहम समय पर हो रही है जब भाजपा अपनी संगठनात्मक ताकत को मजबूत करने और अपनी नेतृत्व को लंबे समय के शासन और चुनावी लक्ष्यों के साथ जोड़ने पर ध्यान दे रही है। 20 जनवरी को आधिकारिक घोषणा के बाद और जानकारी सामने आने की उम्मीद है। बिहार के पांच बार के विधायक नितिन नबीन को 14 दिसंबर को भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, लेकिन खरमास (अशुभ समय) के कारण पार्टी अध्यक्ष के तौर पर उनका औपचारिक पदभार ग्रहण रुका हुआ था, जो 14 जनवरी को खत्म हो रहा है। कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद से, नबीन अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहे हैं और पार्टी के साथियों से मिल रहे हैं। नवीन पहले पार्टी में कई अहम संगठनात्मक पदों पर रह चुके हैं, जिसमें भारतीय जनता युवा मोर्चा के बिहार अध्यक्ष का पद भी शामिल है।

आतंकी लिंक पर सख्ती: जम्मू-कश्मीर सरकार ने 5 कर्मचारियों की नौकरी खत्म की

जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर में आतंकी संबंधों के आरोप में एलजी मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाली सरकार ने पांच सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। इनमें शिक्षक, लाइनमैन के साथ ही स्वास्थ्य विभाग का एक ड्राइवर भी शामिल है। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में शिक्षक मोहम्मद इश्तियाक, प्रयोगशाला तकनीशियन तारिक अहमद शाह, सहायक लाइनमैन बशीर अहमद मीर, वन विभाग में फील्ड वर्कर फारूक अहमद भट और स्वास्थ्य विभाग में ड्राइवर मोहम्मद यूसुफ शामिल हैं। मोहम्मद इश्तियाक एक शिक्षक था और उसे रेहबर-ए-तालीम के रूप में नियुक्त किया गया था तथा 2013 में उसे शिक्षक के रूप में स्थायी किया गया था। जांचकर्ताओं ने पाया कि वह पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करता था और लश्कर कमांडर मोहम्मद अमीन उर्फ अबू खुबैब, जो भारत सरकार द्वारा नामित एक व्यक्तिगत आतंकवादी है और पाकिस्तान से काम करता है, उसके साथ नियमित संपर्क में था। अप्रैल 2022 में उसे जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मरीन में एक घटना को अंजाम देने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। उसके साथी से हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया था। लैब टेक्नीशियन तारिक अहमद राह को 2011 में एक संविदा लैब टेक्नीशियन के रूप में नियुक्त किया गया था और 2016 में सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, बिजबेहरा, अनंतनाग में स्थायी किया गया था। वह शुरू में हिजबुल मुजाहिदीन के प्रभाव में आया। तारिक के लिंक उसके चाचा अमीन बाबा के 2005 में पाकिस्तान भागने की राज्य जांच एजेंसी की जांच के दौरान सामने आए। तारिक ने अमीन बाबा को अनंतनाग में रहने की सुविधा दी और अटारी-वाघा सीमा तक उसके परिवहन की व्यवस्था की। सूत्रों ने बताया, “तारिक ने एक वांछित आतंकवादी के देश से बाहर निकलने को सुनिश्चित किया, जिससे अमीन बाबा इस्लामाबाद पहुंचा और वहां आतंकियों को प्रशिक्षण देने में सफल हुआ।” सहायक लाइनमैन बशीर अहमद मीर 1988 में पीएचई में शामिल हुआ और 1996 में नियमित हुआ। अपनी भूमिका के बावजूद, वह गुरेज, बांदीपोरा में लश्कर-ए-तैयबा का एक सक्रिय ऑन-ग्राउंड वर्कर बन गया, जो आतंकवादी गतिविधियों का मार्गदर्शन करता था, लॉजिस्टिक्स और पनाह देता था तथा सुरक्षा बलों की जानकारी साझा करता था। उसकी भूमिका सितंबर 2021 में सामने आई, जब पुलिस ने इनपुट के आधार पर उसके घर पर एक एंटी-टेरर ऑपरेशन चलाया, जिसमें दो लश्कर आतंकवादियों को मार गिराया गया और दो एके-47 व गोला-बारूद बरामद किए गए। इसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। वन विभाग के फील्ड वर्कर फारूक अहमद भट ने पहले अनंतनाग में काम किया और हिजबुल मुजाहिदीन का सक्रिय रूप से समर्थन किया। उसने अनौपचारिक रूप से एचएम से जुड़े एक पूर्व विधायक की मदद की। जांचकर्ताओं ने कहा कि उसने तारिक अहमद राह को अमीन बाबा के पाकिस्तान भागने की योजना बनाने में मदद की, अपनी सरकारी आईडी का इस्तेमाल कर चेकपोस्टों को बाईपास किया और उसे अंतरराष्ट्रीय सीमा तक छोड़ा। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग में ड्राइवर मोहम्मद यूसुफ 2009 में नियुक्त हुआ और बेमिना, श्रीनगर में तैनात रहा। यूसुफ आतंकवादियों के साथ नियमित संपर्क में था, खासकर पाकिस्तान स्थित हिजबुल मुजाहिदीन हैंडलर बशीर अहमद भट के साथ। बशीर के निर्देशों पर उसने अपनी आधिकारिक ड्राइवर की स्थिति का उपयोग करते हुए गांदरबल में हथियारों की खरीद, फंड ट्रांसपोर्ट और अन्य लॉजिस्टिक्स के लिए हिजबुल ऑपरेटिव्स से संपर्क किया। उसने पाकिस्तान से बातचीत के लिए जेल में बंद आतंकवादियों को फोन उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क की भी मदद की। 20 जुलाई 2024 को पुलिस ने उसके सहयोगी ईशान हामिद के साथ उसके वाहन को रोका, जिसमें से एक पिस्तौल, गोला-बारूद, ग्रेनेड और पांच लाख रुपए बरामद हुए। पूछताछ में पुष्टि हुई कि यह खेप उसके हैंडलर के निर्देश पर एक आतंकवादी के लिए थी।

पाकिस्तान की राजधानी में हरियाली पर कुल्हाड़ी, 29,000 पेड़ कटे; सरकार ने दी अजीब दलील

इस्लामाबाद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 29 हजार से ज्यादा पेड़ काट दिए गए। मंगलवार को इसे लेकर संसद में खूब हंगामा हुआ। विपक्ष के मुताबिक हुक्मरान राजधानी को 'लंग्स विहीन' कर रहे हैं, तो सरकार के नुमाइंदे दावा कर रहे हैं कि ये सेहत के लिए सही नहीं थे। जाने-माने मीडिया आउटलेट डॉन ने इसके बारे में बताया। गृह मंत्रालय के राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने नेशनल असेंबली को जानकारी दी कि इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी (आईसीटी) से 29,115 पेड़ हटाए गए हैं। उन्होंने सफाई दी कि इनके बदले आगामी महीनों में ज्यादा पेड़ लगाए जाएंगे। इससे पहले पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ के अली मुहम्मद खान और पीपीपी की शाजिया मरी ने इस्लामाबाद में पेड़ काटने का मुद्दा उठाया। अली ने कहा कि अगर गृह मंत्रालय, इस्लामाबाद प्रशासन या जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने "इस्लामाबाद के नागरिकों को भरोसे में लेकर" पेड़ काटे होते, तो उनमें अविश्वास नहीं होता। सांसद ने कहा, "आपने जो पेड़ काटे हैं, वे इस्लामाबाद के फेफड़े थे।"अली ने सवाल किया कि अगर सिर्फ पेपर मलबेरी (जंगली शहतूत) के पेड़ों को हटाया जा रहा था, तो "50 से 60 साल पुराने पेड़" भी क्यों हटाए गए? मरी ने भी "इस्लामाबाद में बड़े पैमाने पर पेड़ काटने" पर अपनी पार्टी की चिंता जताई। उन्होंने कहा, "विभिन्न इलाकों से रिपोर्टें आ रही हैं कि हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं। भले ही आप यह कहकर इसे सही ठहरा रहे हैं कि पर्यावरण के लिए हानिकारक एक खास प्रजाति के पेड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन वे जवाबदेही से क्यों भाग रहे हैं?" मरी ने "असली सच्चाई" और इसकी भरपाई के लिए किए जा रहे पेड़ लगाने के आंकड़ों की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि इस मामले को आगे की बहस के लिए एनए की जलवायु परिवर्तन स्थायी समिति को भेजा जाए। पिछले कुछ दिनों से ये मुद्दा इस्लामाबाद में चर्चा-ए-आम हुआ है। आम शहरियों ने भी इसका विरोध किया था। जिसके बाद, क्लाइमेट चेंज और पर्यावरण समन्वय मंत्री डॉ. मुसादिक मलिक ने शुक्रवार को दावा किया कि करीब 29,000 पेपर मलबेरी पेड़ों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत काटा गया है, जो 2023 और 2025 में जारी किया गया था। ये पेड़ एलर्जी और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रहे थे, जिसके चलते अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही थी। मंत्री ने एक उच्च स्तरीय बैठक में कहा कि काटे गए हर पेड़ के बदले तीन नए पौधे या पेड़ लगाए जाएंगे, ताकि शहर की हरी पट्टी प्रभावित न हो। योजना के तहत कुल हरी पट्टी को बढ़ाने के लिए परिपक्व देशी पेड़ भी लगाए जाएंगे, जो पर्यावरणीय सुधार को तेज करेंगे। जनता और सिविल सोसाइटी की ओर से इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया आई है। सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से यह मुद्दा गर्माया हुआ है, जहां लोग बड़े पैमाने पर पेड़ काटने का विरोध कर रहे हैं।

आर्मी चीफ का बड़ा बयान: जम्मू-कश्मीर में बदले हालात, 31 आतंकियों का सफाया

नई दिल्ली भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति संवेदनशील है लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में यहां 31 आतंकवादी मारे गए, जिनमें से 65 प्रतिशत पाकिस्तानी मूल के आतंकी थे। यहां मारे गए आतंकियों में पहलगाम हमले के तीनों मुख्य अपराधी भी शामिल हैं। ये आतंकी जम्मू कश्मीर में शुरू किए गए ऑपरेशन ‘महादेव’ में मारे गए थे। मंगलवार को दिल्ली में एक वार्षिक प्रेसवार्ता में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि जम्मू कश्मीर में अब स्थानीय सक्रिय आतंकवादी न के बराबर है। उन्होंने बताया कि इनकी संख्या अब एकल अंक (सिंगल डिजिट) में रह गई है। यहां आतंकवादी भर्ती लगभग समाप्त हो चुकी है। सेनाध्यक्ष ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सकारात्मक बदलाव के ये स्पष्ट संकेत मिलते हैं। जम्मू कश्मीर में विकास गतिविधियां, पर्यटन का फिर से शुरू होना और शांतिपूर्ण श्री अमरनाथ यात्रा मजबूत सकारात्मक बदलावों को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि श्री अमरनाथ यात्रा में इस वर्ष 4 लाख से ज्यादा तीर्थयात्री आए। जम्मू कश्मीर में टेररिज्म टू टूरिज्म की थीम धीरे-धीरे आकार ले रही है। सेनाध्यक्ष ने यहां पूर्वोत्तर में, विशेष रूप से मणिपुर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की निष्पक्ष, पारदर्शी और निर्णायक कार्रवाई तथा सरकार की सक्रिय पहलों के कारण वर्ष 2025 में स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पूर्वोत्तर की प्रमुख उपलब्धियों में शांतिपूर्ण डुरंड कप का आयोजन शामिल हैं। यहां सामाजिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों जैसे कि शिरुई लिली और संगाई जैसे सांस्कृतिक उत्सवों की वापसी हुई। सितंबर 2025 में उग्रवादी समूहों के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (एसओओ) का नवीनीकरण किया गया। सेनाध्यक्ष ने बताया कि म्यांमार में अस्थिरता के मद्देनजर, असम राइफल्स, भारतीय सेना और गृह मंत्रालय के समन्वय से एक व्यापक बहु-एजेंसी सुरक्षा तंत्र स्थापित किया गया है। यह तंत्र इसलिए है ताकि पूर्वोत्तर को किसी भी प्रकार के सीमा-पार प्रभाव से सुरक्षित रखा जा सके। म्यांमार में चुनावों के सफल आयोजन के बाद आपसी सहयोग और प्रभावी होने की संभावना जताई गई। थल सेनाध्यक्ष ने बताया कि भारतीय सेना ने वर्ष 2025 में दो पड़ोसी देशों और देश के 10 राज्यों में मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों को अंजाम दिया। इन अभियानों में 30,000 से अधिक लोगों को बचाया गया। वहीं पंजाब में बाढ़ के दौरान पटियाला में ढहती इमारत से सीआरपीएफ कर्मियों को सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा बचाने की साहसिक कार्रवाई का विशेष उल्लेख किया गया। इस कार्रवाई ने सेना की त्वरित प्रतिक्रिया और मानवीय प्रतिबद्धता को दर्शाया। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि म्यांमार में जारी अस्थिरता के मद्देनजर भारत ने पूर्वोत्तर को किसी भी दुष्प्रभाव से सुरक्षित रखने के लिए यह व्यापक बहु-एजेंसी सुरक्षा ग्रिड स्थापित किया है। इसमें असम राइफल्स, भारतीय सेना और गृह मंत्रालय मिलकर कार्य कर रहे हैं। म्यांमार में दूसरे चरण के चुनावों के सफल आयोजन के बाद अब दोनों देशों के बीच सहयोग और समन्वय को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकेगा। जनरल द्विवेदी ने कहा कि कई सीमावर्ती राज्यों में सेना ने औपचारिक अनुरोध मिलने से पहले ही राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि यह तथ्य इस बात की पुष्टि करता है कि भारतीय सेना आपदा के समय ‘नेचुरल फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाती है। थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि चाहे वह सीमा-पार अस्थिरता हो या प्राकृतिक आपदाएं, भारतीय सेना हर परिस्थिति में राष्ट्र की सुरक्षा और नागरिकों की सहायता के लिए तत्पर रहती है।

क्या भारत ने ईरान में अशांति के चलते अफगानिस्तान के साथ व्यापार बंद कर दिया? सच्चाई विस्तार से

ईरान सरकार ने ईरान में अशांति के कारण भारत के अफगानिस्तान के साथ व्यापारिक संबंध निलंबित करने के दावों को मंगलवार को खारिज कर दिया। पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें फैलाई जा रही हैं कि ईरान में अशांति के कारण भारत ने अफगानिस्तान के साथ व्यापारिक संबंध निलंबित कर दिए हैं। सरकार ने कहा कि ये खबरें पूरी तरह झूठी हैं। इस संबंध में पाकिस्तान के दुष्प्रचार करने वाले कुछ खाते मनगढ़ंत पत्र प्रसारित कर रहे हैं। ईरान में व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। पीआईबी फैक्ट चेक ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘पाकिस्तानी दुष्प्रचार खातों की ओर से मनगढ़ंत पत्र प्रसारित किया जा रहा है, जिसमें झूठा दावा किया गया है कि ईरान में बढ़ती अशांति के कारण भारत ने अफगानिस्तान के साथ व्यापारिक संबंध अस्थायी रूप से निलंबित कर दिए हैं।’ वित्त वर्ष 2024-25 में अफगानिस्तान को भारत का निर्यात 31.891 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा जबकि आयात 68.981 करोड़ अमेरिकी डॉलर था। विदेश मंत्रालय के अधिकारी से अहम मुलाकात इस बीच, नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास के नए प्रभारी ने सोमवार को विदेश मंत्रालय के सीनियर अधिकारी के साथ बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य विषय दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करना था। नूर अहमद नूर अगस्त 2021 में काबुल की सत्ता पर तालिबान के काबिज होने के बाद भारत में अफगान दूतावास में नियुक्त होने वाले पहले वरिष्ठ अधिकारी हैं। प्रभारी ने विदेश मंत्रालय के अधिकारी आनंद प्रकाश से मुलाकात की, जो मुख्य रूप से व्यापार के विस्तार और वीजा प्रक्रियाओं को सुगम बनाने जैसे मुद्दों पर केंद्रित रही। अफगान दूतावास ने सोशल मीडिया पर इस बैठक का विवरण साझा करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय राजनीतिक और आर्थिक संबंधों, व्यापार विस्तार, वीजा प्रक्रियाओं में सुगमता और भारत में रह रहे अफगान व्यापारियों, छात्रों और नागरिकों की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की।

भारत में प्रत्यक्ष कर संग्रह में बढ़ोतरी, FY26 में अब तक 8.8% की तेजी

नई दिल्ली  आयकर विभाग ने सोमवार को बताया कि देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह एक अप्रैल से 11 जनवरी तक की अवधि में सालाना आधार पर पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 8.8 प्रतिशत बढ़कर 18.37 लाख करोड़ रुपए हो गया है। वित्त वर्ष 25 की समान अवधि में शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.88 लाख करोड़ रुपए रहा था।आयकर विभाग की ओर से जारी प्रेस रिलीज में बताया गया कि समीक्षा अवधि में शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह 8.63 लाख करोड़ रुपए रहा है। वहीं, शुद्ध व्यक्तिगत कर संग्रह 9.29 लाख करोड़ रुपए रहा है। सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) संग्रह 44,866.52 करोड़ रुपए रहा है। इसके साथ सरकार ने अन्य टैक्स के रूप में 321.23 रुपए एकत्रित किए हैं। आयकर विभाग ने कहा कि समीक्षा अवधि में 3.11 लाख करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया गया है, इसमें पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 16.92 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसमें से सरकार ने 1.83 लाख करोड़ रुपए का रिफंड कॉरपोरेट्स को, जबकि व्यक्तिगत करदाताओं को 1.28 लाख करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया गया है। वित्त वर्ष 25 की समान अवधि में यह आंकड़ा 3.75 लाख करोड़ रुपए था। अगर रिफंड को मिला दिया जाए तो सकल कर संग्रह एक अप्रैल से 11 जनवरी की अवधि में सालाना आधार पर 4.14 प्रतिशत बढ़कर 21.49 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इसमें से सकल कॉरपोरेट कर संग्रह 10.46 लाख करोड़ रुपए और सकल व्यक्तिगत कर संग्रह 10.58 लाख करोड़ रुपए रहा है। भारत में कर संग्रह मजबूत रहने की वजह देश की अर्थव्यवस्था का तेजी से बढ़ना है। मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026 के लिए रियल जीडीपी वृद्धि 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो कि एनएसओ के पहले अग्रिम अनुमान 7.4 प्रतिशत से अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के लिए बाजार का औसत अनुमान 7.5 प्रतिशत है, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का अनुमान 7.3 प्रतिशत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी खर्च और मौद्रिक नीति के समर्थन, लोगों की खरीदारी की क्षमता में सुधार और रोजगार की बेहतर स्थिति के चलते उपभोग यानी खपत में बढ़ोतरी होगी, जिससे आर्थिक सुधार को और मजबूती मिलेगी।

ट्रंप के तेवरों से भड़का मिडिल-ईस्ट, ईरान की चेतावनी के बीच इजरायल युद्ध तैयारी में

ईरान ईरान में बीते कुछ सप्ताह से जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हस्तक्षेप करने की धमकी देकर पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। वहीं अमेरिका के किसी भी हमले को लेकर ईरान ने करारा जवाब देने की कसम खाई है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर एक और जंग की आहट साफ सुनाई देने लगी है। इस बीच इजरायल ने ईरान के साथ किसी भी जंग को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसे लेकर इजरायल के उच्च अधिकारियों के बीच बैठकों का दौर शुरू हो गया है।   इजरायली सेना ने सोमवार को इस मामले की जानकारी देते हुए कहा कि सेना संभावित रूप से किसी भी स्थिति के लिए अलर्ट पर है। IDF के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने सोमवार को पर एक बयान में कहा, “ईरान में विरोध प्रदर्शन एक आंतरिक मामला है लेकिन IDF रक्षात्मक रूप से तैयार है और नियमित रूप से स्थिति का आकलन कर रहा है।” बेंजामिन नेतन्याहू ने बुलाई बैठक इस बीच कान पब्लिक ब्रॉडकास्टर के मुताबिक, इजरायली अधिकारियों का मानना ​​है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड हमले की अपनी धमकियों को पूरा जरूर करेंगे और इससे इजरायल और ईरान के बीच एक और युद्ध होने वाले वाला है। इसे लेकर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को पूर्व रणनीतिक मामलों के मंत्री रॉन डर्मर को वरिष्ठ मंत्रियों और सुरक्षा अधिकारियों के साथ एक बैठक के लिए भी बुलाया था। डोनाल्ड ट्रंप की धमकी इससे पहले ट्रंप अब तक कई बार ईरान में हस्तक्षेप की धमकी दे चुके हैं। वाइट हाउस से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ईरान के खिलाफ संभावित कदम पर विचार कर रही है, जिनमें साइबर हमले और अमेरिका या इजरायल द्वारा सीधा सैन्य हमला शामिल है। ट्रंप ने सोमवार को कहा है कि ईरान पर हमले की उनकी चेतावनी के बाद अब ईरानी सरकार उनके साथ बातचीत करना चाहता है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान में विदेशी राजनयिकों से बातचीत के दौरान कहा है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। हालांकि, अराघची ने अपने आरोप के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा है कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा और खूनखराबा इसलिए हुआ, ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति को हस्तक्षेप करने का बहाना मिल सके। हालांकि अराघची ने यह भी कहा कि ईरान कूटनीति का स्वागत करता है। ईरान में बिगड़े हालात इस बीच ईरान में सोमवार को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में लाखों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। मानवाधिकार समूहों के मुताबिक हिंसा के अब तक करीब 600 लोगों की मौत हो गई है। ईरान के सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित वीडियो में प्रदर्शनकारी ‘अमेरिका मुर्दाबाद’, ‘इजराइल मुर्दाबाद’ और ‘अल्लाह के दुश्मनों का अंत हो’ जैसे नारे लगाते दिखे।

पत्थर मारकर कुत्ते को बनाया गया हिंसक! सुप्रीम कोर्ट में पीड़िता ने रखा सच

नई दिल्ली   स्ट्रे डॉग्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आखिरी सुनवाई जारी है। मंगलवार को अदालत में कुत्ते के काटने का शिकार हुई एक महिला भी पहुंचीं, जिन्होंने जानवरों के हमले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि कुत्ते के साथ बुरी तरह से क्रूरता की गई थी, जिसके चलते उसने हमला किया। साथ ही उन्होंने डॉग्स को काबू करने के उपाय भी सुझाए हैं।   सुनवाई के दौरान कोर्ट पहुंचीं पीड़ित महिला ने कहा कि उन्हें भी कुत्ते ने काट लिया था। उन्होंने बताया कि इसके बाद वह इस हमले की वजह का पता करने निकल गईं थीं। बार एंड बेंच के अनुसार, महिला ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, 'मैं मानती हूं कि उचित तरीके से ABC लागू करने से कुत्तों की आबादी और आक्रामकता कम होगी। मुझे एक कुत्ते ने काट लिया था। मैं जानना चाहती थी कि आखिर कुत्ते ने मुझे बगैर किसी उकसावे के क्यों काटा। उस कुत्ते के साथ लंबे समय से क्रूरता की जा रही थी। लातें मारी जा रही थीं, पत्थर मारे जा रहे थे आदि।' उन्होंने आगे कहा, 'उसे डर के जवाब में बचाव वाली आक्रामकता दिखाई। मैंने किसी और की हरकतों के कारण ये झेला। एक कुत्ते में आक्रामकता कैसे आती है। एक मिलनसार कुत्ते के साथ क्रूरता करने से उसके मन में डर पैदा होता है। डर बचाव में आक्रामकता को जन्म देता है।' 8 जनवरी को हुई सुनवाई में अदालत ने एबीसी नियमों को ठीक से लागू नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया था। शीर्ष न्यायालय ने कहा था कि उसकी तरफ से सभी स्ट्रीट डॉग्स को हटाए जाने के निर्देश नहीं दिए गए हैं, बल्कि एबीसी नियमों के तहत इससे निपटने की बात कही गई है। पशु प्रेमियों और जानवरों के हितों के लिए काम करने वालों की तरफ से कोर्ट में सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए थे।  

SC में कानून पर तीखी नाराज़गी: ‘यह भ्रष्टाचार को संरक्षण देता है’, CJI तक पहुंचा विवाद

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को भ्रष्टाचार रोधी कानून पर एक लंबी और दिलचस्प बहस देखने को मिली। इस दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने भ्रष्टाचार रोधी अधिनियम की धारा 17ए को रद्द करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि यह धारा असंवैधानिक है, इसे निरस्त किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसी भी करप्शन के मामले में अथॉरिटी से मंजूरी लेने की बाध्यता भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने वाली है। ऐसी स्थिति में इस सेक्शन को रद्द किया जाना चाहिए। इससे भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई करने में देरी होती है। ऐसी स्थिति ठीक नहीं है। हालांकि इस मामले की सुनवाई में बेंच ही बंटी नजर आई।   बेंच में शामिल दूसरे जज केवी विश्वनाथन ने कहा कि प्रिवेंशन ऑफ करप्शन ऐक्ट की धारा 17A जरूरी है। इससे ईमानदार अधिकारियों को बचाने में मदद मिलती है। इस तरह बेंच का फैसला बंटा हुआ आया। अब इस मामले को चीफ जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष रखा जाएगा। वह इस केस की सुनवाई के लिए एक बड़ी बेंच का गठन करेंगे। उस बेंच की ओर से आने वाला फैसला ही इस केस में अंतिम होगा। यह बेंच दो ही जजों की थी और उनकी राय अलग होने पर कोई अंतिम फैसला नहीं आ सका। ऐसी स्थिति में अब बड़ी बेंच का गठन होना है। कब जोड़ी गई थी करप्शन ऐक्ट में यह धारा, जिस पर सवाल दरअसल भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 में नई धारा 17A को 2018 में जोड़ा गया था। तब यह बताया गया था कि इसका उद्देश्य है कि अनावश्यक मामलों को रोका जाए और ईमानदार अधिकारियों को बेवजह कानूनी मसलों में फंसने से बचाया जाए। इसे ईमानदार अधिकारियों के लिए एक सुरक्षा कवच बताया गया था। हालांकि अब इस धारा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस केस में अंतिम फैसला क्या आता है। इस पर सभी की नजर रहेगी। बता दें कि जस्टिस बीवी नागरत्ना ने सुनवाई के दौरान बेहद सख्त लहजे में कहा कि यह सेक्शन ही असंवैधानिक है और इसे निरस्त किए जाने की जरूरत है।