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ईरान का आरोप: ट्रंप और नेतन्याहू को किलर बताया, 2500 मौतों का जिम्मेदार बना अमेरिका और इज़राइल

तेहरान  ईरान की सड़कों पर हंगामा जारी है. कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भिडंत हो रही है. इस बीच ईरान में चल रहे प्रदर्शनों और टकराव की वजह से मरने वालों की संख्या 2500 को पार कर गई है. कई दिनों के बाद ईरान के लोग दूसरे देशों में अपने रिश्तेदारों को फोन कर पाने में सक्षम हो पा रहे हैं. इसके साथ ही वहीं की खौफनाक हकीकत सामने आ रही है.  ईरान में अबतक मरने वालों की संख्या 2571 हो गई है. अमेरिका की मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार बुधवार सुबह तक मरने वालों की संख्या कम से कम 2,571 हो गई थी. यह आंकड़ा कई दशकों में ईरान में किसी भी दूसरे विरोध प्रदर्शन या अशांति में हुई मौतों की संख्या से कहीं ज़्यादा है. और  देश की 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान फैली अराजकता की याद दिलाता है. पहला हत्यारा ट्रंप है… हालांकि ईरान का प्रशासन किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं दिखता है. ईरानी अधिकारियों ने एक बार फिर से अमेरिकी ट्रंप को कार्रवाई न करने की चेतावनी दी है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने अमेरिकी रवैये पर जवाब देते हुए लिखा, 'हम ईरान के लोगों के मुख्य हत्यारों के नाम बताते हैं: 1- ट्रंप 2- इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू." समाचार एजेंसी एपी के अनुसार ईरान के सरकारी टेलीविजन ने पहली बार आधिकारिक तौर पर मौतों की पुष्टि की. एक अधिकारी के हवाले से सरकारी टीवी ने कहा कि मुल्क में "बहुत सारे लोग शहीद" हुए हैं. विद्रोहियों ने खामेनेई के लिए मौत की सजा मांगी ये प्रदर्शन दिसंबर के आखिर में ईरान की खराब अर्थव्यवस्था के गुस्से में शुरू हुए और जल्द ही यहां की मजहबी शासन प्रणाली इसके निशाने पर आ गई. राजधानी में लोग सर्वोच्च धार्मिक नेता खामेनेई की मौत की मांग करने नारे लगा रहे हैं और तस्वीरें बना रहे हैं. ईरान में इस कथित 'अपराध' के लिए मौत की सजा मुकर्रर की जाती है. इस बीच अमेरिका लगातार प्रदर्शनकारियों के साथ अपना सपोर्ट जता रहा है. मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा, "ईरानी देशभक्तों, विरोध करते रहो- अपनी संस्थाओं पर कब्जा करो." ट्रंप ने कहा कि था कि उन्होंने सभी ईरानी अधिकारियों के साथ तबतक के लिए बातचीत रोक दी है जबतक इन हत्याओं को रोका नहीं जाता है. उन्होंने कहा कि ईरान को जल्द मदद मिलने वाली है. हालांकि घंटों बाद ट्रंप ने रिपोर्टर्स से कहा कि उनकी सरकार "उसी हिसाब से" कार्रवाई करने से पहले मारे गए प्रदर्शनकारियों की संख्या पर एक सही रिपोर्ट का इंतज़ार कर रही है. ट्रंप की मदद आ रही है ट्रंप ने ईरानी सुरक्षा बलों के बारे में कहा, "मुझे लगता है कि वे बहुत बुरा बर्ताव कर रहे हैं, लेकिन यह कन्फर्म नहीं है." इस बीच ईरानी सत्ता के रुख में कोई नरमी नहीं दिख रही है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने अमेरिका के रवैये पर जवाब देते हुए लिखा: "हम ईरान के लोगों के मुख्य हत्यारों के नाम बताते हैं: 1- ट्रंप 2- इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू." ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल देश की सबसे शक्तिशाली और महत्वपूर्ण संस्था है जो राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा नीतियों का निर्धारण करती है. यह 1989 में संविधान के अनुच्छेद 176 के तहत स्थापित हुई. इसके अध्यक्ष ईरान के राष्ट्रपति होते हैं, लेकिन इसके सभी निर्णय सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई लेते हैं. तेहरान के फोन लाइन खुले समाचार एजेंसी एपी के अनुसार लगभग 5 दिनों के बाद फोन लाइन खुलने के बाद तेहरान के लोग मुल्क से बाहर कॉल कर रहे हैं. एक ईरानी चश्मदीद ने सेंट्रल तेहरान में भारी सुरक्षा, जले हुए सरकारी भवन, टूटे हुए ATM और कम राहगीरों के बारे में बताया. इस बीच लोग इस बात को लेकर चिंतित थे कि आगे क्या होगा जिसमें अमेरिका के हमले की संभावना भी शामिल थी. अपनी सुरक्षा की चिंता के कारण सिर्फ़ अपना पहला नाम बताने वाले दुकानदार महमूद ने कहा, "मेरे ग्राहक ट्रंप की प्रतिक्रिया के बारे में बात करते हैं और सोचते हैं कि क्या वह इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ़ मिलिट्री हमला करने की योजना बना रहे हैं." "मुझे नहीं लगता कि ट्रंप या कोई दूसरा विदेशी देश ईरानियों के हितों की परवाह करता है." रेजा एक टैक्सी ड्राइवर जिसने सिर्फ़ अपना पहला नाम बताया, ने कहा कि कई लोगों के मन में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. उन्होंने कहा, "लोग – खासकर युवा निराश हैं, लेकिन वे विरोध प्रदर्शन जारी रखने की बात कर रहे हैं."

मोदी सरकार की नेम चेंज पॉलिसी: PMO को ‘सेवा तीर्थ’, राजपथ को ‘कर्तव्य पथ’ बनाने की घोषणा

नई दिल्ली पिछले कुछ सालों में भारत में कई सड़कों, सरकारी इमारतों, संस्थानों और शहरों के नाम बदले गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इन बदलावों को भारतीय संस्कृति, लोक भावना और कर्तव्य और सेवा की सोच को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है. राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करने से लेकर योजना आयोग को नीति आयोग बनाने तक, देशभर में नाम परिवर्तन की यह प्रक्रिया लगातार चर्चा का विषय रही है. अब इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बदलाव यह हुआ है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और उसके आसपास के प्रशासनिक ब्लॉक का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है.  यह नया परिसर पहले Executive Enclave के नाम से जाना जाता था और सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बनाया गया है. इसी नए भवन परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय स्थित होंगे. नया नाम सेवा तीर्थ इसलिए चुना गया है क्योंकि यह सरकार के कामकाज में 'सेवा की भावना' को प्राथमिकता देने का प्रतीक है. यानी शासन केवल सत्ता और अधिकार के लिए नहीं, बल्कि जनता की सेवा और कल्याण के लिए है. चर्चा में रहा नाम परिवर्तन पिछले कुछ वर्षों में भारत में कई सड़कों, सरकारी इमारतों, संस्थानों और शहरों के नाम बदले गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इन बदलावों को गुलामी के दौर की पहचान से बाहर निकलने और भारतीय संस्कृति, लोक भावना और कर्तव्य की सोच को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है. राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करने से लेकर योजना आयोग को नीति आयोग बनाने तक, देशभर में नाम परिवर्तन की यह प्रक्रिया लगातार चर्चा में रही है. सड़कें, सरकारी इमारतें, शहर या संस्थान कई जगहों पर पुराने नामों की जगह नए नाम रखे गए हैं. 1. राजपथ- कर्तव्य पथ (2022) दिल्ली का ऐतिहासिक राजपथ अब कर्तव्य पथ कहलाता है. यह बदलाव जनसेवा और कर्तव्य को प्राथमिकता देने के विचार से किया गया. 2. 7 रेस कोर्स रोड – लोक कल्याण मार्ग (2016) प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास अब लोक कल्याण मार्ग के नाम से जाना जाता है. यह नाम जनता के कल्याण का प्रतीक माना गया. 3. योजना आयोग – नीति आयोग (2015) आजादी के बाद बना योजना आयोग समाप्त कर नीति आयोग बनाया गया. इसका उद्देश्य राज्यों को साथ लेकर नीति बनाना है. 4. प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर- सेवातीर्थ (2025–26) पीएमओ के नए कॉम्प्लेक्स का नाम सेवातीर्थ (Seva Teerth) रखा गया. यह नाम सेवा भावना और सार्वजनिक जिम्मेदारी को दर्शाता है. 5. केंद्रीय सचिवालय- कर्तव्य भवन सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत नए सचिवालय भवनों को कर्तव्य भवन कहा गया. यह बदलाव सरकारी कर्मचारियों के कर्तव्य बोध को दर्शाने के लिए किया गया. 6. दलहौजी रोड- दारा शिकोह रोड ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी के नाम पर बनी सड़क का नाम बदलकर मुगल राजकुमार दारा शिकोह के नाम पर रखा गया. दारा शिकोह को भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक माना जाता है. 7. राजभवन- लोकभवन (कई राज्य) कई राज्यों में राज्यपाल के आवास राजभवन को लोकभवन कहा जाने लगा. यह बदलाव पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम जैसे राज्यों में लागू हुआ. 8. राज निवास- लोक निवास लद्दाख जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में राज निवास का नाम बदलकर लोक निवास किया गया. शहरों और स्थानों के बड़े नाम परिवर्तन 9. इलाहाबाद- प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को ध्यान में रखते हुए नाम बदला गया. 10. फैजाबाद जिला- अयोध्या जिला राम जन्मभूमि से जुड़ी धार्मिक पहचान को प्रमुखता दी गई. 11. मुगलसराय स्टेशन- पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन एक प्रमुख रेलवे स्टेशन का नाम बदला गया. 12. औरंगाबाद- संभाजीनगर (महाराष्ट्र) छत्रपति संभाजी महाराज के सम्मान में नाम बदला गया. 13. उस्मानाबाद- धाराशिव (महाराष्ट्र) प्राचीन भारतीय नाम को फिर से अपनाया गया. Indian Penal Code का भी बदला नाम भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) का नाम बदल चुका है, लेकिन यह सिर्फ नाम नहीं बदलकर पूरी तरह नई संहिता में बदल गया है. पुरानी Indian Penal Code (IPC), 1860 जिसे ब्रिटिश शासन के समय बनाया गया था और आजादी के बाद भी लागू रहा. अब 1 जुलाई 2024 से यह हटकर नई संहिता में बदल गया है. नया नाम क्या है? Indian Penal Code (IPC) की जगह अब Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023 लागू हो गया है. New criminal law (Bharatiya Nyaya Sanhita) 1 जुलाई 2024 से लागू हो गया है और इससे IPC पूरी तरह बदल गया है. सरकार का कहना है कि पुराने IPC को आधुनिक समय के अनुसार बदलने और भारत की पहचान के हिसाब से नया नाम देने की जरूरत थी.  सरकार का तर्क क्या है? केंद्र सरकार का कहना है कि देश में सड़कों, शहरों, सरकारी इमारतों और संस्थानों के नाम बदलने का निर्णय सिर्फ एक नाम बदलने तक सीमित नहीं है. इसके पीछे तीन बड़े उद्देश्य हैं.  1.  गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति कई पुरानी सड़कों, भवनों और संस्थानों के नाम ब्रिटिश शास अधिकारी के नाम पर थे. जैसे राजपथ, डलहौजी रोड, कुछ रेलवे स्टेशन आदि. सरकार का कहना है कि इन नामों से भारत की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय पहचान को ठीक तरह से नहीं दिखाया जाता था. नाम बदलकर अब ये स्वदेशी और भारतीय प्रतीकों से जुड़े हुए हैं. जैसे- राजपथ का नाम कर्तव्य पथ, डलहौजी रोड का नाम दारा शिकोह रोड. 2. भारतीय इतिहास और संस्कृति का सम्मान नाम बदलने का दूसरा उद्देश्य यह है कि इतिहास और संस्कृति को सही सम्मान मिले. पुराने नाम अक्सर उपनिवेशिक काल या विदेशी प्रभाव को दर्शाते थे. नए नाम ऐसे चुने गए हैं जो भारतीय संस्कृति, वीरता, लोककथा और राष्ट्रीय नेताओं को समर्पित हैं. जैसे-औरंगाबाद- छत्रपति संभाजीनगर, इलाहाबाद-प्रयागराज. 3. लोककल्याण और सेवा की भावना को बढ़ावा देना सिर्फ जगह का नाम बदलना ही नहीं, बल्कि सरकारी संस्थानों और भवनों के नाम बदलकर कर्तव्य और सेवा का संदेश दिया गया. जैसे 7 रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग, राजभवन  का नाम बदलकर लोक भवन, राज निवास का नाम बदलकर लोक निवास हो गया.

ईरान से व्यापार पर ट्रंप का 25% टैरिफ ऐलान, भारत सरकार ने कहा— चिंता की बात नहीं

 नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान को घेरने के लिए उसके व्यापारिक साझेदार देशों पर 25% टैरिफ (US 25% Iran Tariff) लगाने का ऐलान किया है. इसका बड़ा असर चीन, यूएई समेत भारत पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि ईरान के पांच सबसे बड़े बिजनेस पार्टनर्स में भारत भी शामिल है. लेकिन, ट्रंप के इस 25% Iran Tariff का भारत पर कितना और क्या असर होगा, इसे लेकर मोदी सरकार (Modi Govt On Trump Tariff) की ओर से बयान आ गया है और केंद्र सरकार की ओर से भारतीय निर्यातकों को भरोसा दिलाते हुए कहा गया है कि अमेरिका के इस कदम का देश के निर्यात पर बेहद सीमित असर होगा.  'ट्रंप टैरिफ से भारत पर ज्यादा असर नहीं' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने Trump 25% Tariff Bomb के भारत पर असर को लेकर अपना बयान जारी किया है और इसमें ट्रेड से जुड़े तमाम आंकड़े भी शेयर किए हैं. सरकार ने भारतीय निर्यातकों को आश्वस्त किया है कि ईरान को लेकर अमेरिकी टैरिफ अटैक का भारत पर सीमित प्रभाव पड़ेगा. बयान में कहा गया है कि भारत के अपेक्षाकृत सीमित व्यापारिक संबंधों और विविध निर्यात संबंधों को देखते हुए इस कदम का भारत पर बहुत ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है.  ये आंकड़े क्या कर रहे इशारा?  भारत पर ट्रंप के ईरान टैरिफ के असर का एक अंदाजा वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है. FY2024-25 में ईरान को भारतीय निर्यात 1.24 अरब डॉलर और आयात 440 मिलियन डॉलर रहा यानी कुल द्विपक्षीय व्यापार 1.68 अरब डॉलर का था. इस हिसाब से भारत के व्यापारिक साझेदारों की लंबी लिस्ट में ईरान बहुत नीचे 63वें स्थान पर आता है. ट्रेड आंकड़ों के मुताबिक, भारत का ईरान के साथ कारोबार तंजानिया, अंगोला, टोगो, मोजाम्बिक, सेनेगल, घाना जैसी बेहद छोटी अर्थव्यवस्थाओं से भी पीछे है. तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, भारत बासमती चावल, चाय, चीनी और दवाइयां निर्यात करता है, जबकि ईरान से सेब, पिस्ता, खजूर और कीवी के अलावा कांच के बर्तनों का आयात करता है. भारत के सबसे बड़े ट्रेड पार्टनर भारत के साथ तमाम देशों के व्यापार की बात करें तो देश के सबसे बड़े ट्रेड पार्टनर्स में अमेरिका ही टॉप पर है. US के साथ 132 अरब डॉलर से अधिक के कुल द्विपक्षीय व्यापार है, जबकि China 127 अरब डॉलर से अधिक, UAE 100 अरब डॉलर से अधिक, Russia 68 अरब डॉलर से अधिक और सऊदी अरब 41 अरब डॉलर से अधिक के व्यापार के साथ लिस्ट में आगे हैं.  सरकार का आश्वासन, फिर भी यहां बड़ी चिंता सरकार ने हालांकि, ईरान टैरिफ के सीमित असर की बात कहते हुए Indian Exporters को नो-टेंशन बोला है. इसके बावजूद कुछ सेक्टर्स में निर्यातकों में चिंता है. खासतौर पर बासमती चावल का निर्यात करने वालों में, बता दें कि पारंपरिक रूप से ईरान Indian Basmati Rice के सबसे बड़े खरीदारों की लिस्ट में शामिल रहा है. आंकड़े देखें, तो सालाना 12 लाख टन (करीब 12000 करोड़ रुपये) का निर्यात किया जाता है. ऐसे में भारत ईरान के कुल चावल आयात का करीब दो-तिहाई हिस्सा पहुंचाता है.  सरकार ने बताया- क्यों होगा कम असर? सरकारी अधिकारियों ने US Iran Tariff के असर को लेकर साफ कहा है कि भले ही इसका कुछ निर्यात क्षेत्रों को शॉर्ट टर्म प्रेशर का सामना करना पड़े, लेकिन भारत पर इसका व्यापक आर्थिक प्रभाव सीमित ही रहेगा. उन्होंने इस तथ्य की ओर इशारा किया कि भारतीय निर्यातकों ने पिछले एक दशक में पश्चिम एशिया, अफ्रीका और साउथ-ईस्ट एशिया में अपने बाजारों का लगातार विस्तार किया है, जिससे किसी एक देश पर हमारी निर्भरता काफी कम हुई है.

पोंगल समारोह में पीएम मोदी ने की भागीदारी, कहा- यह त्योहार तमिलनाडु तक सीमित नहीं, पूरे देश का हिस्सा है

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बुधवार को केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के सरकारी आवास पर आयोजित हुए पोंगल समारोह में शामिल हुए. उन्होंने वहां मौजूद सभी लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उसके बाद गौसेवा भी की. उन्होंने तमिल संस्कृति की समृद्ध विरासत पर जोर देते हुए कहा कि यह सिर्फ तमिलनाडु तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश की साझा विरासत है. राष्ट्रीय राजधानी में एल मुरुगन के आवास पर पोंगल उत्सव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पोंगल जैसे त्योहार 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को मजबूत करते हैं. वहीं, इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके सभी देशवासियों को मकर संक्रांति, भोगली बिहू और पोंगल की शुभकामनाएं भी दीं. उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ये पर्व आप सबके साथ मनाना मेरे लिए काफी सौभाग्य की बात है. प्रधानमंत्री ने कहा कि पोंगल अब एक वैश्विक त्योहार बन गया है और कहा कि उन्हें इसके जश्न का हिस्सा बनकर खुशी हुई. उन्होंने कहा कि यह त्योहार किसानों की कड़ी मेहनत को दिखाता है और प्रकृति, पृथ्वी और सूरज के प्रति आभार जताता है. पूरी दुनिया में तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति को पसंद करने वाले लोग इसे बहुत उत्साह से मनाते हैं, और मैं भी उनमें से एक हूं. आप सभी के साथ यह खास त्योहार मनाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है. हमारी जिंदगी में पोंगल एक सुखद अनुभव की तरह है. इसके साथ ही, यह त्योहार हमें प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन बनाए रखने का रास्ता दिखाता है. प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान लोहड़ी, मकर संक्रांति और माघ बिहू जैसे त्योहारों के लिए देश भर में बड़े उत्साह का भी जिक्र किया. पीएम मोदी ने कहा कि इस समय देश के अलग-अलग हिस्सों में लोहड़ी, मकर संक्रांति, माघ बिहू और कई दूसरे त्योहारों को लेकर भी बहुत उत्साह है. मैं भारत और दुनिया भर में रहने वाले तमिल भाइयों और बहनों को पोंगल और इन सभी त्योहारों की दिल से बधाई देता हूं. बता दें, पोंगल, दुनिया भर में तमिल लोगों के लिए सबसे खास त्योहारों में से एक है. यह प्रकृति, सूरज, खेत के जानवरों और किसानों को धन्यवाद देने का त्योहार है. इसे पारंपरिक रूप से परिवार के त्योहार के तौर पर मनाया जाता है, जो खुशहाली, शुक्रिया और साथ रहने का प्रतीक है. इस त्योहार को आसान बनाने के लिए, तमिलनाडु सरकार ने पहले सभी योग्य लाभार्थियों के लिए एक किलो कच्चा चावल, एक किलो चीनी और एक पूरा गन्ना वाला पोंगल गिफ्ट पैकेज देने की घोषणा की थी. पीएम मोदी ने इस संबंध में देशवासियों के नाम एक लेटर भी लिखा. जिसमें उन्होंने लिखा कि फसल से जुड़े यह पर्व आशा, सकारात्मकता और कृतज्ञता के प्रतीक हैं. मकर संक्रांति देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों और परंपराओं से मनाई जाती है, लेकिन इसके पीछे की भावना और उत्साह सबका एक ही है. 

रेल हादसा थाईलैंड: क्रेन गिरने से ट्रेन हुई तबाह, मौके पर 22 लोगों की मौत

 सिखियो  थाईलैंड में एक बड़ा रेल हादसा हुआ है. यहां एक क्रेन गिरने की वजह से यात्री ट्रेन पटरी से उतर गई, जिसमें कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई और 30 से ज्यादा लोग घायल हो गए. नाखोन रत्चासिमा प्रांत के पुलिस प्रमुख थाचापोन चिन्नावोंग ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि इस हादसे में 22 लोगों की जान चली गई है और कई घायल हैं. ये हादसा बुधवार सुबह सिखियो जिले में हुआ. यह इलाका राजधानी बैंकॉक से करीब 230 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है. हादसे का शिकार हुई यात्री ट्रेन उबोन रत्चाथानी प्रांत की ओर जा रही थी. स्थानीय मीडिया के दिखाए गए लाइव वीडियो में देखा गया कि राहतकर्मी मौके पर मौजूद हैं. रंगीन यात्री ट्रेन पटरी से उतरकर एक ओर पलटी हुई थी और मलबे से धुआं उठ रहा था. आग पर काबू पा लिया गया है और बचाव कार्य अब भी जारी है. नाखोन रत्चासिमा के जनसंपर्क विभाग ने फेसबुक पर जानकारी दी है कि अब तक चार शव मलबे से बाहर निकाले जा चुके हैं. फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है.अधिकारियों ने बताया कि क्रेन एक ऊंची हाई-स्पीड रेलवे बनाने के लिए इस्तेमाल हो रही थी, जो बैंकॉक से उबोन राचथानी प्रांत जा रही चलती ट्रेन पर गिर गई, जिससे ट्रेन पटरी से उतर गई और उसमें आग लग गई. नाखोन राचासिमा के पब्लिक रिलेशंस डिपार्टमेंट के मुताबिक आग पर काबू पा लिया गया है और बचावकर्मी ट्रेन के अंदर फंसे लोगों को ढूंढ रहे हैं.

महिलाओं को सरकार की सौगात, निकाय चुनाव से पहले मिली ₹1500 की राशि

मुंबई  महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव से पहले राज्य सरकार ने महिलाओं को बड़ी सौगात दी है. लाडकी बहन योजना के तहत दिसंबर माह की 1500 रुपये की किस्त राज्य की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में जमा करा दी गई है. इस भुगतान के साथ ही चुनाव से ठीक एक दिन पहले लाखों महिलाओं की ‘झोली भर गई’ है. महाराष्ट्र की लगभग 1 करोड़ से अधिक महिलाएं इस योजना की लाभार्थी हैं. याद दिला दें कि चुनाव आयोग के निर्देशों के चलते सरकार को जनवरी महीने की अग्रिम किस्त जारी करने से रोक दिया गया था. आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया था कि आचार संहिता की अवधि में किसी भी तरह का एडवांस पेमेंट नहीं किया जा सकता. यह फैसला नगर निगम चुनावों के कारण लागू आदर्श आचार संहिता के मद्देनजर किया गया है. सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने मकर संक्रांति के अवसर पर दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 की दो किस्तें (कुल 3,000 रुपये) लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा करने की घोषणा की थी, लेकिन इस घोषणा पर विपक्षी कांग्रेस ने आपत्ति जताई और इसे आचार संहिता का उल्लंघन करार दिया था. कांग्रेस की शिकायत पर चुनाव आयोग का एक्शन महाराष्ट्र कांग्रेस के महासचिव संदेश कोंडविलकर ने इसे लेकर राज्य चुनाव आयोग को शिकायत पत्र भेजा था, जिसमें कहा गया कि 15 जनवरी को होने वाली 29 नगर निगमों में वोटिंग से ठीक एक दिन पहले इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर करना महिला वोटर्स को प्रभावित करने जैसा है और यह ‘सामूहिक सरकारी रिश्वत’ के समान है. शिकायत मिलने के बाद राज्य चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल से रिपोर्ट तलब की और स्पष्टीकरण मांगा. मुख्य सचिव ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि लाडकी बहिन योजना एक सतत योजना है, जैसे संजय गांधी निराधार योजना और चुनाव घोषणा से पहले शुरू होने वाली ऐसी योजनाओं को आचार संहिता के दौरान जारी रखने की अनुमति है. हालांकि, आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए कि दिसंबर 2025 की नियमित किस्त (1,500 रुपये) दी जा सकती है, लेकिन जनवरी 2026 की किस्त को एडवांस में जमा नहीं किया जा सकता. साथ ही, नए लाभार्थियों का चयन या कोई अतिरिक्त लाभ भी नहीं दिया जा सकता. आयोग के इस फैसले से सरकार को जनवरी की किस्त 14 जनवरी से पहले ट्रांसफर करने की अनुमति नहीं मिली.

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कुत्ते के काटने से हुई मौत पर राज्य सरकार को भरना होगा भारी मुआवजा

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने  कहा कि कुत्ते के काटने और किसी बच्चे, बड़े या बूढ़े, कमजोर व्यक्ति की मौत या चोट लगने पर, वह भारी मुआवजा तय कर सकता है, जिसका भुगतान राज्य सरकार करेगी. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले में सुनवाई की. पीठ ने कहा कि 75 साल से सरकारों ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए कुछ नहीं किया. अदालत ने कहा कि वह इस लापरवाही के लिए राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराना चाहती है. पीठ ने कहा कि "इसके लिए उनसे जवाब तलब करें." जस्टिस नाथ ने कहा, "हर कुत्ते के काटने और बच्चे, बड़े या बूढ़े, कमजोर व्यक्ति की मौत या चोट के लिए, हम सरकार की तरफ से भारी मुआवजा तय कर सकते हैं. पिछले 75 वर्षों से कुछ नहीं किया गया." एक पशु कल्याण संगठन की तरफ से वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा, माय लॉर्ड्स, आपको ऐसा करना चाहिए, आपको बिल्कुल करना चाहिए. जस्टिस नाथ ने कहा, "साथ ही, उन सभी लोगों की जिम्मेदारी और जवाबदेही है जो दावा करते हैं कि वे कुत्तों को खाना खिला रहे हैं… उनकी रक्षा करें, उन्हें घर ले जाएं. उन्हें अपने परिसर में, अपने घर में रखें. उन्हें हर जगह कूड़ा क्यों फैलाना चाहिए और लोगों को डराना और काटना, जिससे मौत हो." जस्टिस मेहता ने कुत्तों द्वारा लोगों का पीछा करने के बारे में भी कहा. जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्ते के काटने का प्रभाव जिंदगी भर रहता है. गुरुस्वामी ने कहा कि वह भी कुत्ते के हमले का शिकार हो चुकी हैं. जस्टिस मेहता ने कहा कि भावनाएं और चिंताएं सिर्फ कुत्तों के लिए होती हैं. गुरुस्वामी ने जवाब दिया कि उन्हें इंसानों की भी उतनी ही चिंता है. गुरुस्वामी ने कहा कि जो तरीके काम करेंगे, वे हैं कुत्तों का रोगाणुनाशन (Sterilization) और उनके साथ मानव व्यवहार. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि नियामक अपना काम करने में विफल रहे. पीठ के सामने यह तर्क दिया गया कि ऐसे नियामक या केंद्र फंड का कम इस्तेमाल कर रहे हैं, और ABC रूल्स सिर्फ कुत्तों की जनसंख्या नियंत्रण के बारे में नहीं हैं, बल्कि ये जानवरों को बंद रखने के खिलाफ एक कोशिश है. सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से पूछा, जब नौ साल के बच्चे को आवारा कुत्ते मार देते हैं, जिन्हें कुत्ता प्रेमी संगठन खाना खिला रहे हैं, तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? पीठ ने आगे पूछा, क्या इस कोर्ट को अपनी आंखें बंद कर लेनी चाहिए और चीजों को होने देना चाहिए? पीठ ने कहा कि उसके पास केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से गंभीर सवाल हैं, वह उन्हें कब सुनेगी. पीठ ने यह भी कहा कि जानवरों से इंसानों को होने वाले दर्द का क्या, अगर जानवर इंसानों पर हमला कर दे तो कौन जिम्मेदार होगा?

“ये 1962 नहीं, 2026 है” — पाक-चीन साजिश पर लद्दाख LG की दो-टूक चेतावनी, बोले: खुद बिखर जाएगा दुश्मन

जम्मू लद्दाख के उप राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने मंगलवार को शक्सगाम घाटी पर चीन के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का पूरा क्षेत्र भारत का है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी विस्तारवादी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शक्सगाम घाटी में कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स शुरू करने के लिए चीन की आलोचना करते हुए गुप्ता ने कहा है कि यह इलाका भारत का हिस्सा है और ऐसी गतिविधियों को तुरंत रोका जाना चाहिए। भारत की आपत्तियों के मद्देनजर, चीन ने सोमवार को शक्सगाम घाटी पर अपने क्षेत्रीय दावों को दोहराते हुए जोर दिया कि इस क्षेत्र में चीनी अवसंरचना परियोजनाएं ‘संदेह से परे’ हैं। प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें गुप्ता ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोग भी भारत का हिस्सा बनना चाहते हैं और जल्द ही पाकिस्तान 'खुद टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा'। जम्मू में उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘पूरा कश्मीर (पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से समेत) हमारा है। हमें नहीं पता कि पाकिस्तान ने चीन के साथ क्या सौदा किया है। चीन को यह समझना चाहिए कि उसकी विस्तारवादी नीति से कुछ भी हासिल नहीं होगा। भारत सक्षम है। यह 1962 का भारत नहीं, 2026 का भारत है। ऐसे किसी भी प्रयास को विफल कर दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय इसका संज्ञान ले रहा है।’’ पहले से हम ज्यादा मजबूत, ये बात समझ ले चीन गुप्ता ने कहा कि ऐसे किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और चीन को यह समझना होगा कि आज भारत पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने पहले अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर भी दावा किया था। पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए राज्यपाल ने आरोप लगाया कि पड़ोसी देश अपने ही लोगों को छल चुका है और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त है। बेचा जा रहा पाकिस्तान गुप्ता ने कहा, “पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसे बेचा जा रहा है। उसे अपनी संप्रभुता या अपने लोगों की कोई परवाह नहीं है। बलूचिस्तान, सिंध और कराची में आवाजें उठ रही हैं और वहां पाकिस्तानी सेना द्वारा अत्याचार किए जा रहे हैं। उन क्षेत्रों पर वस्तुतः सेना का ही शासन है।’’ गुप्ता ने संवेदनशील मुद्दों पर भड़काऊ बयानों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि पीओके पर संसद का स्पष्ट रुख है। ऐसे बयान नहीं दें जो भड़काऊ हो उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे बयान नहीं दिए जाने चाहिए जो भड़काऊ प्रकृति के हों। 1994 का एक संसदीय प्रस्ताव है जो स्पष्ट रूप से कहता है कि पूरा पीओके भारत का है।’’ सेना प्रमुख के हालिया बयान (जिसमें कहा गया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जारी है) पर प्रतिक्रिया देते हुए गुप्ता ने कहा कि सशस्त्र बलों को पूर्ण राष्ट्रीय समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा, ‘‘पूरा देश सेना के साथ खड़ा है। सेना प्रमुख ने एक जिम्मेदार बयान दिया है और मैं इसका स्वागत करता हूं।’’ पाकिस्तान ने 1963 में अवैध रूप से शक्सगाम घाटी में स्थित 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र चीन को सौंप दिया था, जिसे उसने अवैध रूप से कब्जा करके हासिल किया था।

US के ईरान कदमों पर चीन की तीखी प्रतिक्रिया, 25 फीसदी टैरिफ का किया विरोध

बीजिंग बीजिंग ने ईरान के खिलाफ यूएस के रवैए पर आपत्ति जताई है। वहीं अंधाधुंध टैरिफ लगाए जाने को भी गलत करार दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को एक नियमित न्यूज ब्रीफिंग में कहा, "चीन लगातार दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में दखल का विरोध करता है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बल के इस्तेमाल या धमकी का विरोध करता है, और हमें उम्मीद है कि सभी पक्ष मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता में योगदान देने के लिए और ज्यादा करेंगे।" माओ से इस मसले पर सवाल किया गया था। अमेरिका के अपने नागरिकों से तुरंत ईरान छोड़ने के दिशानिर्देश का हवाला दिया, जिसमें व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि साइबर युद्ध और मनोवैज्ञानिक युद्ध सहित अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। इस पर ही प्रवक्ता ने कहा कि चीन ईरान को राष्ट्रीय स्थिरता बनाए रखने में उम्मीद और समर्थन करता है। दूसरी ओर, वाशिंगटन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए 25 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले की आलोचना की है। चीन के अनुसार वो "किसी भी गैर-कानूनी एकतरफा प्रतिबंधों और किसी के क्षेत्राधिकार में जबरन हस्तक्षेप" का विरोध करता है। प्रवक्ता ने एक्स पर कहा, "टैरिफ के अंधाधुंध लगाए जाने के खिलाफ चीन का रुख स्पष्ट है। टैरिफ युद्ध और व्यापार युद्ध में कोई विजेता नहीं होता, और जबरदस्ती और दबाव से समस्याएं हल नहीं हो सकतीं। चीन किसी भी गैर-कानूनी एकतरफा प्रतिबंधों और लॉन्ग-आर्म ज्यूरिस्डिक्शन का कड़ा विरोध करता है, और अपने वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।" दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप का सोशल प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर लिखा पोस्ट मंगलवार को काफी सुर्खियों में रहा। उन्होंने कहा कि अमेरिका का 25 फीसदी टैरिफ ईरान के साथ व्यापार करने वालों पर तुरंत प्रभावी होगा। ट्रंप के इस कदम का दुनिया के जिन देशों पर प्रभाव पड़ेगा, उनमें भारत और चीन का भी नाम सामने आ रहा है। भारत पर अमेरिका ने पहले ही 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ व्यापार करने वाला कोई भी देश अमेरिका के साथ किए जा रहे व्यापार पर 25 प्रतिशत का टैरिफ देगा। यह आदेश अंतिम और निर्णायक है।'

सीमा सुरक्षा सख्त: बांग्लादेश की स्थिति को लेकर असम के सीएम ने की समीक्षा बैठक

गुवाहाटी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को बांग्लादेश की ताजा स्थिति पर चिंता जताई, जहां हिंदुओं पर हिंसक हमले हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार पड़ोसी देश में अल्पसंख्यक हिंदू नागरिकों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री सरमा मंगलवार को बांग्लादेश के साथ लंबी सीमा साझा करने वाले श्रीभूमि जिले में एक सरकारी कार्यक्रम में शामिल होते हुए। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "यह हमारी चिंता है कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर बार-बार हमले हो रहे हैं और पड़ोसी देश में अल्पसंख्यक लोगों के साथ खड़ा होना और उन्हें किसी भी तरह की अवांछित स्थिति से बचाना हमारा नैतिक अधिकार है। केंद्र सरकार ने इस मामले का संज्ञान लिया है और राज्य सरकार को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।" मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि बांग्लादेश में अशांति का असम पर भी कुछ असर पड़ा है और राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में सुरक्षा निगरानी बढ़ा दी है। सीएम सरमा ने आगे कहा कि असम सरकार बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार से कदम उठाने का अनुरोध करेगी। उन्होंने कहा, "हालांकि विदेश संबंध केंद्र सरकार का मामला है, फिर भी हम बांग्लादेश में अत्याचार का शिकार हुए हिंदू लोगों की देखभाल के लिए अनुरोध कर सकते हैं। हाल की घटनाएं बहुत निंदनीय हैं।" इससे पहले, सीएम ने कहा कि इंटरनेशनल बॉर्डर पर हो रहे डेवलपमेंट को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता, खासकर ऐसे समय में जब हिंसा और असुरक्षा बढ़ती दिख रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, "बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है, वह हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय है। हिंदुओं पर अत्याचार और उत्पीड़न बढ़ रहा है और इसका असम पर भी असर पड़ सकता है।" उन्होंने ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत पर जोर दिया। पड़ोसी देश में हाल के राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए सीएम सरमा ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में भीड़ की हिंसा और अल्पसंख्यक समुदायों पर टारगेटेड हमलों की घटनाएं बढ़ गई हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहना चाहिए और राज्य में किसी भी तरह के बुरे असर को रोकने के लिए स्थिति पर लगातार नजर रखनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, "इस समय, हमें सावधान रहने और सीमा पार हो रहे घटनाक्रमों पर करीब से नजर रखने की जरूरत है। साथ ही बांग्लादेश में हिंदू समाज को नैतिक समर्थन और भरोसा देना भी जरूरी है।" 2022 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश में लगभग 13.13 मिलियन हिंदू रहते हैं, जो देश की आबादी का लगभग आठ प्रतिशत हैं। सीएम सरमा की यह टिप्पणी बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर क्षेत्र में बढ़ती चिंता के बीच आई है।