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ट्रंप का ईरान को दो टूक संदेश: बातचीत बंद, आर्थिक शिकंजा कसा, आंदोलनकारियों के साथ खड़े

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी बैठकों को रद्द कर दिया है, ईरान से जुड़े कारोबार पर नए टैरिफ लागू कर दिए हैं और ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों से आंदोलन जारी रखने की अपील की है। ट्रंप का कहना है कि यह फैसला ईरान में प्रदर्शनकारियों पर हो रही हिंसा के कारण लिया गया है। डेट्रॉइट इकोनॉमिक क्लब में अपने भाषण में ट्रंप ने कहा, "जब तक प्रदर्शनकारियों की बेमतलब हत्याएं बंद नहीं होतीं, मैंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं।" उन्होंने कहा कि ईरान में जो हो रहा है, वह अस्वीकार्य है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने 'ईरानी देशभक्तों' को संबोधित करते हुए उनसे आंदोलन जारी रखने को कहा। उन्होंने कहा, "सभी ईरानी देशभक्तों से मेरी अपील है कि प्रदर्शन करते रहिए। अगर संभव हो तो अपनी संस्थाओं पर नियंत्रण हासिल कीजिए।" ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि दोषियों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। ईरान में मौतों के आंकड़ों पर ट्रंप ने कहा कि अलग-अलग रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं। मुझे पांच तरह के आंकड़े सुनने को मिल रहे हैं, लेकिन एक मौत भी बहुत ज्यादा है। जवाबदेही तय होगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। आर्थिक मोर्चे पर ट्रंप ने बताया कि ईरान पर नया दबाव तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। उन्होंने कहा, "आपने देखा कि मैंने ईरान के साथ कारोबार करने वाले हर व्यक्ति और देश पर टैरिफ लगा दिए हैं। यह आज से लागू हो गया है।" ट्रंप ने टैरिफ को अपनी विदेश नीति का मुख्य हथियार बताया और कहा कि इसका मकसद ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना है। ट्रंप ने 'मेक ईरान ग्रेट अगेन' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए ईरान के मौजूदा नेतृत्व की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान एक महान देश है, लेकिन मौजूदा शासकों ने उसे नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बाहरी दबाव से ईरान में बदलाव आएगा और कहा, "मैं बस इतना कहता हूं कि मदद रास्ते में है।" ट्रंप ने टैरिफ को लंबी सैन्य कार्रवाई का बेहतर विकल्प बताया। उनके मुताबिक, व्यापारिक दबाव से पहले भी कई मामलों में नतीजे मिले हैं। उन्होंने ईरान को अन्य विदेशी नीति कार्रवाइयों के साथ जोड़ते हुए परमाणु ठिकानों पर हमलों और आतंकी नेताओं के खिलाफ अभियानों का जिक्र किया। ट्रंप ने यह भी कहा कि जो देश अमेरिका की व्यापार और सुरक्षा संबंधी मांगों का विरोध करते हैं, उन पर भी टैरिफ लगाए जाते हैं। ट्रंप के अनुसार, टैरिफ कूटनीति से ज्यादा असरदार दबाव बनाते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। ईरान का परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और मानवाधिकार रिकॉर्ड लंबे समय से तनाव की वजह रहे हैं। अमेरिका पहले भी प्रतिबंधों, टैरिफ और द्वितीयक प्रतिबंधों के जरिए ईरान पर दबाव बनाता रहा है ताकि सीधे सैन्य टकराव से बचते हुए अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत रखी जा सके।

कांग्रेस प्रवक्ता की टिप्पणी पर BJP का हंगामा, अमित शाह को लेकर बोले- राज्य में फैल सकती है अशांति

बेंगलुरु कर्नाटक में कांग्रेस के प्रवक्ता एम. लक्ष्मण के खिलाफ कथित रूप से भड़काऊ और भ्रामक बयान देने को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एम. ए. सलीम से मुलाकात कर की है। शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि एम. लक्ष्मण ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना के खिलाफ बिना किसी सबूत के गंभीर आरोप लगाए, जिससे राज्य में अशांति फैलने और जनता में डर और नफरत पैदा होने की आशंका है।   शिकायत के अनुसार, 8 जनवरी 2026 को मैसूर स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एम. लक्ष्मण ने दावा किया कि अमित शाह के इशारे पर ही बेल्लारी में दंगा हुआ, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं के शव मिले। लक्ष्मण ने यह भी दावा किया कि केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना ने अमित शाह का संदेश कुछ नेताओं तक पहुंचाया था। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेन्स के दौरान भाजपा पर “शव गिराकर राजनीति करने” जैसी बेहद आपत्तिजनक आरोप भी लगाए थे। उन्होंने कहा था कि अगर अमित शाह का संदेश लाने वाले केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना की ब्राउन मैपिंग की जाए, तो साजिश का पर्दाफाश हो जाएगा। उन्होंने दावा किया था कि वी. सोमन्ना के बेल्लारी जाने और जनार्दन रेड्डी और श्रीरामुलु से बातचीत करने के बाद ही दंगा हुआ। शांति भंग होने का खतरा भाजपा प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि ये बयान बिना किसी दस्तावेज़, सबूत या ठोस आधार के दिए गए हैं। शिकायत में प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ऐसे झूठे बयान (i) जनता के बीच डर, चिंता और अशांति पैदा कर सकते हैं। (ii) सरकार के खिलाफ नफरत और अविश्वास पैदा करने के इरादे से दिए गए हैं। (ii) केंद्र और राज्य सरकारों और जनता के बीच शांति और सद्भाव को बिगाड़ सकते हैं, और (iv) उच्च पदस्थ केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ झूठे आरोप फैलाकर लोगों को भड़का सकते हैं। पहले से लंबित हैं मामले प्रतिनिधिमंडल ने यह भी दावा किया कि एम. लक्ष्मण इससे पहले भी इस तरह के बयान दे चुके हैं और उनके खिलाफ मानहानि के कई मामले पहले से अदालतों में लंबित हैं। भाजपा नेताओं ने पुलिस से मांग की है कि एम. लक्ष्मण के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक फायदे के लिए समाज की शांति और सौहार्द बिगाड़ने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए। फिलहाल, पुलिस ने शिकायत को संज्ञान में ले लिया है और मामले की जांच की जा रही है।  

तीन फेज़ में बंगाल चुनाव का ऐलान, डबल फोर्स के साथ सख्त तैयारी में चुनाव आयोग

कोलकाता पश्चिम बंगाल में अगले कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं और इलेक्शन कमिशन ने इसकी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बीच जानकारी मिली है कि इलेक्शन तीन ही राउंड में इस बार कराए जा सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो यह आयोग की बड़ी सफलता होगी क्योंकि 2021 में राज्य में 8 राउंड में वोटिंग हुई थी। आमतौर पर पश्चिम बंगाल में सुरक्षा को लेकर संवेदनशील स्थिति होती है। इसके अलावा चुनावी व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। इसलिए इलेक्शन के राउंड ज्यादा होते थे, लेकिन इस बार कम चरणों में ही इन्हें निपटाने की तैयारी है। 2021 में ज्यादा राउंड होने की एक वजह कोरोना भी था, लेकिन ऐतिहासिक तौर पर भी बंगाल में ज्यादा राउंड में वोटिंग होती रही है।   चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बंगाल में अर्ध सैनिक सुरक्षा बलों के करीब ढाई लाख जवान तैनात हो सकते हैं। यह आंकड़ा पहले के मुकाबले करीब डबल होगा। इसका मकसद यही है कि कम चरणों में चुनाव कराए जा सकें। इसके अलावा राजनीतिक हिंसा के लिहाज से भी बंगाल एक संवेदनशील राज्य रहा है। फिलहाल राज्य चुनाव आयोग की ओर से तैयारियां की जा रही हैं। इसके बाद जल्दी ही केंद्रीय चुनाव आयोग का एक प्रतिनिधिमंडल बंगाल का दौरा करेगा और तैयारियों का जायजा लेगा। इस संबंध में 5 जनवरी को एक मीटिंग भी हुई थी। इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने सभी राज्यों के चुनाव अधिकारियों से बात की थी, जहां इस साल चुनाव होने हैं। सूत्रों का कहना है कि इसी दौरान बंगाल के चुनाव अधिकारियों ने दिल्ली में हुई मीटिंग में बताया कि आखिर कितने राउंड घटाए जा सकते हैं। पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने बताया कि राज्य तीन राउंड में वोटिंग के लिए तैयार है। इसके लिए सुरक्षा बलों की संख्या में थोड़ा इजाफा करना होगा। फिलहाल चुनावी पंडित इसके भी आकलन में जुट गए हैं कि यदि राउंड कम हुए तो इससे किसे फायदा मिलेगा। भाजपा सूत्र तो इससे उत्साहित दिख रहे हैं। उनका मानना है कि लंबे चलने वाले चुनाव में ममता बनर्जी के पास एडवांटेज रहता है। वह कभी बांग्ला कार्ड चलती हैं तो कभी कोई और मुद्दा ले आती हैं। लंबे चुनाव में उनके पास अपने खिलाफ बनी ऐंटी इनकम्बैंसी की काट के लिए मौका होता है। लेकिन यदि चुनाव की अवधि कम हो तो ऐसा नहीं हो पाता। बता दें कि 2021 में बंगाल में चुनाव 27 मार्च से 29 अप्रैल तक चले थे और फिर 2 मई को नतीजे आए थे। इस बार राज्य की 294 सीटों पर अप्रैल के आखिरी सप्ताह या फिर मई की शुरुआत में वोट डाले जा सकते हैं।  

ईरान संकट गहराया: बिगड़ते हालात पर भारत का अलर्ट, नागरिकों को तत्काल निकलने की सलाह

तेहरान ईरान में विरोध प्रदर्शन के चलते हालात बेकाबू हो गए हैं। अब तक इन प्रदर्शनों में दो हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। बिगड़ते हालात के बीच भारत ने ईरान में रह रहे अपने लोगों से तुरंत ईरान छोड़ने की अपील की है। ईरान में स्थित भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिक- टूरिस्ट, बिजनेसमैन, छात्र आदि से देश छोड़ने के लिए कह दिया है। दूतावास ने कहा है कि वे कमर्शियल फ्लाइट्स समेत उपलब्ध ट्रांसपोर्ट के साधनों का इस्तेमाल करके ईरान छोड़ दें। यह फैसला बदलती स्थिति को देखते हुए लिया गया है।   दूतावास ने ईरान में सभी भारतीय नागरिकों और PIO को सावधानी बरतने की सलाह दी है, और उनसे उन इलाकों से दूर रहने को कहा है जहां विरोध प्रदर्शन या धरने हो रहे हैं। नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे ईरान में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें और किसी भी नई जानकारी के लिए स्थानीय मीडिया रिपोर्ट पर नजर रखें। दूतावास ने भारतीय नागरिकों से अपने इमिग्रेशन डॉक्यूमेंट्स तैयार रखने का आग्रह किया है। एडवाइजरी में कहा गया है, "ईरान में सभी भारतीय नागरिकों से अनुरोध है कि वे अपने यात्रा और इमिग्रेशन डॉक्यूमेंट्स, जिसमें पासपोर्ट और आईडी शामिल हैं, अपने पास तैयार रखें। इस संबंध में किसी भी सहायता के लिए उनसे भारतीय दूतावास से संपर्क करने का अनुरोध किया जाता है।"

वोट के लिए कत्लेआम? 7 दिन में 500 कुत्ते मारे गए, कई गांवों में मचा हड़कंप

नई दिल्ली चुनावी वादा पूरा करने में नेताओं का रिकॉर्ड भले ही खराब रहता हो, लेकिन हाल ही में तेलंगाना से चुनावी वादा को पूरा करने के लिए कुत्तों की हत्या का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां कुछ गांव के सरपंचों ने लोगों से किया हुआ वादा निभाने के चक्कर में एक सप्ताह में करीब 500 कुत्तों को मार डाला है। घटना सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।   समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक पिछले एक हफ्ते में कई गांवों में 500 कुत्तों को जहर देकर मार दिया गया। पशु कल्याण कार्यकर्ता अडुलापुरम गौतम द्वारा 12 जनवरी को दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कामारेड्डी जिले के भवानीपेट, पालवंचा, फरीदपेट, वाडी और बंदारमेश्वरपल्ली सहित कई गांवों में आवारा कुत्तों को योजनाबद्ध तरीके से मारा गया। उन्होंने दावा किया कि पिछले दो-तीन दिनों में ही लगभग 200 कुत्तों को मारा गया है। सरपंचों ने करवाई हत्या शिकायत के मुताबिक गौतम को 12 जनवरी को दोपहर करीब 3 बजे कुत्तों की कथित सामूहिक हत्या को लेकर विश्वसनीय जानकारी मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि ये काम गांव के सरपंचों के कहने पर किए गए। हत्याओं को क्रूर बताते हुए गौतम ने इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। कुत्तों को लगाए गए जहरीले इंजेक्शन वहीं पुलिस के मुताबिक पांच गांव के सरपंचों और किशोर पांडे नाम के एक व्यक्ति सहित छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि कुत्तों को जहरीले इंजेक्शन दिए गए, जिससे उनकी मौत हो गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शवों को गांवों के बाहरी इलाकों में दफना दिया गया था और बाद में पशु चिकित्सा टीमों द्वारा पोस्टमार्टम जांच के लिए उन्हें बाहर निकाला गया। आगे की जांच जारी है। चुनाव से पहले किया था वादा ग्रामीणों के मुताबिक कुछ उम्मीदवारों ने हाल ही में हुए पंचायत चुनावों के दौरान ग्रामीणों से आवारा कुत्तों से निजात दिलाने का वादा किया था। ग्रामीणों ने बताया, "पिछले साल दिसंबर में हुए चुनावों से पहले, कुछ उम्मीदवारों ने ग्रामीणों से वादा किया था कि वे आवारा कुत्तों और बंदरों की समस्या से निपटेंगे। अब वे आवारा कुत्तों को मारकर उन वादों को 'पूरा' कर रहे हैं।"

चिल्लई कलां की शुरुआत से ठिठुरा कश्मीर, माइनस में तापमान, बर्फ की चादर बनी डल लेक

श्रीनगर पूरे उत्तर भारत में हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच जम्मू कश्मीर में पारा शून्य से बेहद नीचे गिर गया है। बुधवार को कश्मीर में न्यूनतम तापमान गिरने के बाद यहां की प्रसिद्ध डल झील के कुछ हिस्से सहित घाटी में कई जलाशयों का पानी जम गया। बता दें कि कश्मीर घाटी में इस समय ‘चिल्ला-ए-कलां’ यानी चिल्लई कलां का दौर जारी है।   मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि श्रीनगर में मंगलवार रात न्यूनतम तापमान शून्य से 5.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जो पिछली रात के दर्ज किए गए तापमान, शून्य से 4.9 डिग्री सेल्सियस नीचे से भी कम रहा। वहीं, दक्षिण कश्मीर में शोपियां घाटी का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां पारा शून्य से 7.5 डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुंच गया। उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के गुलमर्ग में रात का तापमान शून्य से 3.8 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा, वहीं मध्य कश्मीर के सोनमर्ग में यह शून्य से 2.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। वहीं कश्मीर घाटी के प्रवेश द्वार काजीगुंड में न्यूनतम तापमान शून्य से 5.3 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा। इसके अलावा कोकेरनाग में शून्य से 2.3 डिग्री सेल्सियस नीचे और कुपवाड़ा में शून्य से 6.2 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान दर्ज किया गया। और बिगड़ सकता है मौसम वार्षिक अमरनाथ यात्रा के आधार शिविरों में से एक, दक्षिण कश्मीर के लोकप्रिय पर्यटन स्थल पहलगाम में तापमान शून्य से छह डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक एक पश्चिमी विक्षोभ कश्मीर की ओर बढ़ रहा है जो 16 जनवरी से घाटी के मौसम को प्रभावित कर सकता है और बर्फबारी की संभावना भी है। क्या है चिल्लई कलां? चिल्लई कलां कश्मीर में 40 दिनों की भीषण ठंड की एक अवधि होती है। इस दौरान बर्फबारी की संभावना सबसे अधिक होती है। यह आमतौर पर 21 दिसंबर को शुरू होता है और यह जनवरी के अंत में खत्म होता है। भारी बर्फबारी की सबसे अधिक संभावना इसी समय होती है।

संसद से सावरकर की तस्वीर हटाने की याचिका पर SC भड़का, कहा– ऐसे मामलों से बचें

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संसद और अन्य सार्वजनिक स्थानों से विनायक दामोदर सावरकर के चित्रों को हटाने के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर करने वाले पूर्व अधिकारी को याचिका वापस लेने की अनुमति देने से पहले भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी दी। SC ने कहा कि इस तरह की याचिका का कोई तुक नहीं बनता।   मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने सेवानिवृत्त भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी बी बालमुरुगन को इस तरह की याचिका दायर करने के प्रति चेतावनी दी और कहा कि अदालत का समय बर्बाद करने के लिए भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘‘इस तरह की तुच्छ याचिका… मानसिकता दर्शाती है।’’ 'आप खुद को क्या समझते हैं?' वहीं पीठ याचिकाकर्ता के इस निवेदन से भी नाराज थी कि वह वित्तीय बाधाओं के कारण व्यक्तिगत रूप से मामले की बहस करने नहीं आ सकते। मुख्य न्यायाधीश ने फटकार लगाते हुए कहा, ‘‘आप आईआरएस अधिकारी थे। आप दिल्ली आकर खुद पेश हो सकते हैं और बहस कर सकते हैं। हम आप पर भारी जुर्माना लगाना चाहेंगे। आप खुद को क्या समझते हैं?’’ याचिका में क्या? बता दें कि बालमुरुगन ने अपनी जनहित याचिका में संसद के केंद्रीय कक्ष और अन्य सार्वजनिक स्थानों से सावरकर के चित्रों को हटाने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। इसके अलावा याचिका में यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया कि सरकार हत्या या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों जैसे जघन्य अपराधों के लिए आरोपित व्यक्तियों को तब तक सम्मानित न करे जब तक कि वे बरी ना हो जाएं। समाज में कुछ रचनात्मक भूमिका निभाएं- SC याचिका को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या वह मामला आगे बढ़ाना चाहते हैं या वापस लेना चाहते हैं। प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की, ‘‘कृपया इन सब झंझटों में ना पड़ें। अब अपनी सेवानिवृत्ति का आनंद लें। समाज में कुछ रचनात्मक भूमिका निभाएं।’’ इसके बाद परिणाम को भांपते हुए बालमुरुगन ने याचिका वापस लेने की इजाजत मांगी, जिसे स्वीकार कर लिया गया।  

SIR अभियान तेज़: पश्चिम बंगाल में सामने आए हजारों अवैध मतदाता, सरकार ने आंकड़े किए सार्वजनिक

बंगाल पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा है कि राज्य में जारी मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़ी सुनवाई के दौरान अब तक 11,000 से अधिक 'अवैध' मतदाताओं की पहचान की गई है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या नदिया जिले से सामने आई है। वहीं, बांकुड़ा और दक्षिण कोलकाता में कोई अवैध मतदाता नहीं मिला। राज्य सरकार द्वारा मंगलवार को साझा किए गए इन आंकड़ों पर हालांकि निर्वाचन आयोग ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।   आयोग राज्य में एसआईआर के तहत उन जगहों पर सुनवाई कर रहा है, जहां मतदाता सूचियों में तार्किक विसंगतियां पाई गई हैं। राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया में अब तक 9,30,993 मतदाताओं की सुनवाई पूरी हो चुकी है और उनकी जानकारियां ऑनलाइन अपलोड कर दी गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन सुनवाइयों और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद, राज्य सरकार के कर्मचारी निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) अब तक 11,472 मतदाताओं को 'अवैध' घोषित कर चुके हैं, जिनके नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध करने के उद्देश्य से शुरू की गई एसआईआर प्रक्रिया के तहत अब तक पूरे राज्य में 65,78,058 नोटिस तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें से 32,49,091 नोटिस पहले ही जारी किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि जिन 9,30,993 मतदाताओं को नोटिस मिला था, उनकी सुनवाई पूरी हो चुकी है और इसी प्रक्रिया में अवैध मतदाताओं की पहचान की गई। जिला-वार आंकड़ों के मुताबिक, सुनवाई के बाद नदिया में सबसे अधिक 9,228 अवैध मतदाता पाए गए हैं। इसके विपरीत, दक्षिण कोलकाता और बांकुड़ा में अब तक एक भी अवैध मतदाता नहीं मिला है। दक्षिण कोलकाता में 1,36,561 जबकि बांकुड़ा में 1,63,357 नोटिस जारी किए गए थे। आंकड़ों के अनुसार, कूचबिहार में अब तक 10, जलपाईगुड़ी में चार, दार्जिलिंग में दो, उत्तर दिनाजपुर में दो और दक्षिण दिनाजपुर में 195 अवैध मतदाता पाए गए हैं। इसके अलावा मालदा में 15, मुर्शिदाबाद में 68, उत्तर 24 परगना में 147 और दक्षिण 24 परगना में 69 मतदाता अवैध पाए गए। उत्तर कोलकाता में 54, हावड़ा में 26, हुगली में 989 और पूर्व मेदिनीपुर में दो अवैध मतदाता मिले हैं। पश्चिम मेदिनीपुर में ऐसे 105, पुरुलिया में 44, पूर्व बर्धमान में 167 और बीरभूम में 264 मतदाता चिन्हित किए गए हैं। पहाड़ी और वन क्षेत्रों वाले जिलों में, अलीपुरद्वार में नौ, कालिम्पोंग में 65, झाड़ग्राम में तीन और पश्चिम बर्धमान में चार अवैध मतदाता पाए गए हैं। एसआईआर प्रक्रिया राज्य में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। विपक्षी दलों का दावा है कि इससे फर्जी मतदाताओं की पहचान होगी, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने एसआईआर के तरीके पर सवाल उठाए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़े बहस को और तेज करेंगे, क्योंकि अब सबकी नजर इस बात पर है कि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने पर अवैध मतदाताओं की संख्या में कोई बदलाव होता है या नहीं। ये आंकड़े एसआईआर प्रक्रिया को लेकर बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच सामने आए हैं। एसआईआर के पहले चरण के पूरा होने के बाद 16 दिसंबर को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई, यानी पूरे राज्य में 58 लाख से अधिक नाम हटाए गए। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में नाम हटाने के कारणों में मृत्यु, स्थायी पलायन, दोहराव और गणना फॉर्म जमा न करना शामिल था। एसआईआर का दूसरा चरण फिलहाल जारी है, जिसमें 1.67 करोड़ मतदाताओं की सुनवाई हो रही है। इनमें 1.36 करोड़ मतदाता तार्किक विसंगतियों के कारण जांच के दायरे में हैं और लगभग 31 लाख ऐसे मतदाता हैं, जिनके रिकॉर्ड की सही ढंग से मैपिंग नहीं हो पाई है।  

अमेरिका-ईरान जंग का साइड इफेक्ट: पाकिस्तान पर मंडराया तिहरा संकट, सेना प्रमुख आसिम मुनीर अलर्ट

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को यह कहकर और हवा दे दी है कि प्रदर्शनकारी संस्थाओं पर कब्जा करें, मदद पहुंच रही है। अब इस बात को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों को किस तरह की मदद पहुंचाने जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई का भी प्लान बना रहा है। दूसरी तरफ, ईरान ने भी अमेरिका को दो टूक कहा है कि वह चुप बैठने वाला नहीं है और किसी भी सैन्य कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देगा।   इन सबके बीच, पाकिस्तान टेंशन में आ गया है। वह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से परेशान है। पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को अब चिंता सता रही है कि अगर ईरान और अइमेरिका के बीच जंग छिड़ी तो उसकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। पहले से ही कई मोर्चों पर बदहाली झेल रहे पाकिस्तान में अब नए मोर्चों पर हालात बिगड़ने की आशंका के बीच पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने आपात बैठक की है। दो सीमाई मोर्चों पर दबाव सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हाई लेवेल मीटिंग में ISI प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल असीम मलिक, साउदर्न कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राहत नसीम, मिलिट्री इंटेलिजेंस प्रमुख, चीफ ऑफ जनरल स्टाफ और अन्य वरिष्ठ जनरल शामिल हुए। इस बैठक में सबसे बड़ी चिंता पाकिस्तान–ईरान सीमा को लेकर जताई गई है। अधिकारियों ने चेताया कि पाकिस्तान पहले ही अफगानिस्तान के साथ डूरंड लाइन पर तनाव झेल रहा है और ऐसे में ईरान सीमा पर नया संकट देश के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। अमेरिका मांग सकता है पाकिस्तानी ठिकाने? सूत्रों के मुताबिक, बैठक में इस आशंका पर भी गंभीर चर्चा हुई कि अगर अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो वह पाकिस्तान से हवाई क्षेत्र या सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की मांग कर सकता है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान के लिए फैसला लेना बेहद मुश्किल होगा, क्योंकि इससे देश के भीतर राजनीतिक विरोध और क्षेत्रीय तनाव, दोनों बढ़ सकते हैं। पाक के अंदर अशांति और विद्रोह का डर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि ईरान-अमेरिका जंग में अगर पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया तो उसे आंतरिक समस्या का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि देश की लगभग 30 फीसदी आबादी शिया है, जो ईरान के प्रति सहानुभूति रखती है। ऐसे में अगर ईरान पर अमेरिकी हमला होता है या वहां सत्ता परिवर्तन की कोशिश होगी। इससे पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर शियाओं का विरोध प्रदर्शन शुरू हो सकता है। इसके अलावा, ईरान से शरणार्थियों के आने से सीमा पर दबाव और बढ़ सकता है। हाई अलर्ट पर पाक सेना सूत्रों के अनुसार, जनरल आसिम मुनीर ने सभी वरिष्ठ कमांडरों को हाई अलर्ट पर रहने और हालात पर करीबी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं ISI प्रमुख को ईरान, तुर्की, कतर, यूएई, सऊदी अरब और अमेरिका के साथ राजनयिक और सुरक्षा स्तर की बातचीत तेज करने को कहा गया है, ताकि हालात को बिगड़ने से रोका जा सके। क्षेत्रीय अस्थिरता की चेतावनी खुफिया आकलन में कहा गया है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर और तुर्की पहले ही अमेरिका को यह संदेश दे चुके हैं कि ईरान पर हमला पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर सकता है। हालांकि, अधिकारियों ने मानना कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सरकार आगे बढ़ती है और पाकिस्तान पर सहयोग का दबाव डालती है, तो इस्लामाबाद को गंभीर रणनीतिक और राजनीतिक नुकसान उठाने पड़ सकते हैं। देश के भीतर एकजुटता की कोशिश ऐसे में बाहरी दबावों के बीच पाकिस्तान की सेना ने घरेलू मोर्चे पर भी तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, सेना मुख्यालय में नेशनल पैग़ाम-ए-अमन कमेटी के तहत धार्मिक विद्वानों का एक प्रतिनिधिमंडल बुलाया गया है। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर एकजुट संदेश देने पर ज़ोर दिया गया है। बैठक में यह भी कहा गया कि भारत और सीमा पार सक्रिय आतंकी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे कथित मनोवैज्ञानिक युद्ध का जवाब एक साझा राष्ट्रीय नैरेटिव से दिया जाना चाहिए।

MEA की एडवाइजरी: ईरान में बिगड़ते हालात, भारतीयों को तुरंत देश छोड़ने की सलाह

 नई दिल्ली ईरान में जारी राजनीतिक अस्थिरता, हिंसक प्रदर्शनों और सुरक्षा हालात के मद्देनजर भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा है कि ईरान में मौजूद सभी भारतीय नागरिक-चाहे वे छात्र हों, तीर्थयात्री हों, कारोबारी हों या पर्यटक-उपलब्ध साधनों के जरिए जल्द से जल्द देश छोड़ें. दूतावास की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह एडवाइजरी भारत सरकार द्वारा 5 जनवरी 2025 को जारी की गई सलाह का ही विस्तार है. जारी एडवाइजरी में कहा गया, "ईरान में लगातार बदलते हालात को देखते हुए भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे कमर्शियल फ्लाइट्स समेत उपलब्ध किसी भी परिवहन माध्यम से ईरान छोड़ दें." भारतीय दूतावास ने यह भी दोहराया है कि ईरान में मौजूद सभी भारतीय नागरिक और पीआईओ (PIOs) पूरी सतर्कता बरतें, किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन या भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहें और स्थानीय मीडिया पर नजर बनाए रखें, ताकि हालात से जुड़े ताजा अपडेट मिलते रहें. दूतावास ने भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे अपने यात्रा और इमिग्रेशन से जुड़े सभी दस्तावेज-जैसे पासपोर्ट और पहचान पत्र-हमेशा अपने पास और आसानी से उपलब्ध रखें. साथ ही, किसी भी तरह की सहायता की जरूरत पड़ने पर तुरंत भारतीय दूतावास से संपर्क करने को कहा गया है. आपात स्थिति के लिए भारतीय दूतावास ने नंबर भी जारी किए हैं. दूतावास के अनुसार, भारतीय नागरिक इन मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं: +989128109115, +989128109109, +989128109102 और +98932179359. ईरान में हाल के दिनों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन, हिंसा और सुरक्षा कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं, जिसके चलते विदेशी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. वहीं अमेरिका ईरान को लगातार सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहा है.