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मोदी सरकार का तोहफा: पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए वित्तीय सहायता में 100% इजाफा

नई दिल्ली  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा घोषित पूर्व सैनिकों (ESM) और उनके आश्रितों के लिए वित्तीय सहायता में 100% की बढ़ोतरी अब लागू कर दी गई है. ये जानकारी रक्षा मंत्रालय (MoD) ने शनिवार यानी 10 जनवरी को दी है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, बढ़ी हुई सहायता केंद्रीय सैनिक बोर्ड के माध्यम से पूर्व सैनिक कल्याण विभाग द्वारा लागू की गई योजनाओं के तहत दी गई है. मंत्रालय ने कहा कि ये फैसला दिग्गजों की सर्विस और बलिदान का सम्मान करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में रक्षा मंत्रालय (MoD) ने कहा, 'रक्षा मंत्रालय ने पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए वित्तीय सहायता में 100% की बढ़ोतरी को पूरी तरह लागू कर दिया है. इस निर्णय के तहत केंद्रीय सैनिक बोर्ड के माध्यम से विवाह अनुदान 1 लाख रुपये और शिक्षा अनुदान 2,000 रुपये प्रति माह हो गया है. ये सरकार की पूर्व सैनिकों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है.' कब मिली थी मंजूरी? रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्व सैनिकों (ESM) के लिए वित्तीय सहायता में 100% बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी. किन ग्रांट्स में बढ़ोतरी की गई है? मंत्रालय के मुताबिक, गरीबी भत्ता को हर लाभार्थी के लिए ₹4,000 से बढ़ाकर ₹8,000 प्रति माह कर दिया गया है. ये 65 साल से अधिक उम्र के बुज़ुर्ग और नॉन-पेंशनर ESM और उनकी विधवाओं को जिंदगी भर लगातार सहायता देगा, जिनकी कोई रेगुलर इनकम नहीं है. एजुकेशन ग्रांट को प्रति व्यक्ति ₹1,000 से बढ़ाकर ₹2,000 प्रति माह कर दिया गया है. ये दो आश्रित बच्चों (कक्षा I से ग्रेजुएशन तक) या दो साल का पोस्टग्रेजुएट कोर्स करने वाली विधवाओं के लिए है. शादी ग्रांट को प्रति लाभार्थी ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 कर दिया गया है. ये ESM की दो बेटियों तक और विधवा के दोबारा शादी करने पर लागू होगा. वो भी उन शादियों के लिए जो इस आदेश के जारी होने के बाद हुई हैं. बलिदान का सम्मान, सरकार की प्रतिबद्धता इन योजनाओं को रक्षा मंत्री पूर्व सैनिक कल्याण कोष से फाइनेंस किया जाता है, ये सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष (AFFDF) का एक हिस्सा है. MoD के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए बताया कि इस फैसले से कम इनकम वाले ग्रुप के नॉन-पेंशनर पूर्व सैनिकों, विधवाओं और आश्रितों के लिए सोशल सिक्योरिटी सेफ्टी नेट बेहतर होगा. जिससे दिग्गजों की सेवा और बलिदान का सम्मान करने की सरकार की प्रतिबद्धता फिर से पक्की होती है. 

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 9.8 अरब डॉलर घटा, आरबीआई ने कहा – डॉलर की मजबूती और गोल्ड रिजर्व में कमी

नई दिल्ली  नए साल की शुरुआत भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) के लिए झटके के साथ हुई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2 जनवरी को समाप्त सप्ताह में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 9.809 अरब डॉलर घटकर 686.801 अरब डॉलर रह गया. यह गिरावट इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि इससे ठीक एक सप्ताह पहले भंडार में 3.293 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी और यह 696.61 अरब डॉलर तक पहुंच गया था. एक हफ्ते में बदली तस्वीर पिछले सप्ताह जहां विदेशी मुद्रा भंडार में मजबूती दिखी थी, वहीं महज एक हफ्ते के भीतर हालात पूरी तरह बदल गए. विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में तेज उतार-चढ़ाव, डॉलर की मजबूती और अन्य प्रमुख मुद्राओं में कमजोरी ने इस गिरावट को तेज किया है. फॉरेन करेंसी एसेट्स पर सबसे ज्यादा असर आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा आस्तियां यानी फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. FCA 7.622 अरब डॉलर घटकर 551.99 अरब डॉलर रह गईं. FCA में अमेरिकी डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी मुद्राएं शामिल होती हैं. इन मुद्राओं के मूल्य में बदलाव का सीधा असर कुल विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है. गोल्ड रिजर्व में भी आई कमी इस दौरान भारत के सोने के भंडार में भी गिरावट देखने को मिली. गोल्ड रिजर्व का मूल्य 2.058 अरब डॉलर घटकर 111.262 अरब डॉलर रह गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर के मजबूत होने से सोने के मूल्य पर दबाव बना हुआ है. IMF और SDR स्थिति कमजोर केवल विदेशी मुद्रा और सोना ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में भारत की स्थिति में भी कमी आई है. विशेष आहरण अधिकार (SDR) 2.5 करोड़ डॉलर घटकर 18.778 अरब डॉलर पर आ गए. वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भारत की आरक्षित स्थिति 10.5 करोड़ डॉलर घटकर 4.771 अरब डॉलर रह गई. क्या हैं गिरावट की वजहें विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, मुद्रा बाजार में अस्थिरता और सोने की कीमतों में कमजोरी इस गिरावट के प्रमुख कारण हो सकते हैं. हालांकि, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अब भी मजबूत स्थिति में है और यह आयात जरूरतों को लंबे समय तक पूरा करने में सक्षम माना जा रहा है.

राउरकेला में इंडिया वन एयर का चार्टर्ड प्लेन क्रैश, पायलट घायल

 भुवनेश्वर  ओडिशा के राउरकेला से भुवनेश्वर जा रहा एक 9-सीटर चार्टर्ड विमान शनिवार दोपहर दुर्घटनाग्रस्त गया. यह विमान इंडिया वन एयर का था, जो राउरकेला से उड़ान भरने के बाद 10-15 किलोमीटर की दूरी पर हादसे का शिकार हो गया, जिसमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. विमान में पायलट समेत कुल 6 लोग सवार थे, जिन्हें चोटें आई हैं. उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. फिलहाल दुर्घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है.  अधिकारियों के मुताबिक भुवनेश्वर से राउरकेला जा रहा 9-सीटर विमान उड़ान भरने के करीब 10 किलोमीटर बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया. विमान में चार यात्री और दो क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें कैप्टन नवीन कड़ंगा और कैप्टन तरुण श्रीवास्तव शामिल थे. हादसे में सभी छह लोग घायल हुए हैं. सभी को सुरक्षित बाहर निकालकर इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया गया है. घायलों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है. रेस्क्यू ऑपरेशन में दमकल विभाग की तीन टीमों को लगाया गया था, जिन्हें पुलिस और स्थानीय प्रशासन का सहयोग मिला. फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज के कमांड सेंटर ने घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्यों का समन्वय किया, ताकि विमान को सुरक्षित किया जा सके और घायलों को तत्काल सहायता मिल सके. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान ने आपातकालीन लैंडिंग की कोशिश की थी, लेकिन जालदा के पास तेजी से नीचे आ गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई. विमान को दोपहर 1:15 बजे राउरकेला में उतरना था, लेकिन उससे पहले ही यह हादसा हो गया. फिलहाल विमान दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है.

₹78,217 करोड़ की मिसाइल डिफेंस डील से भारत को मिलेगा नया सैन्य ताकतवर, Su-30MKI और MiG-29K जेट्स की ताकत बढ़ेगी

नई दिल्ली भारत का डिफेंस सेक्‍टर अभी भी मुख्‍य रूप से विदेशी खरीद पर निर्भर है. पिछले कुछ सालों में इसमें काफी बदलाव आया है. ‘आत्‍मनिर्भर भारत’ के सूत्र के साथ देश आगे बढ़ रहा है. यही वजह है कि अब भारत भी एक महत्‍वपूर्ण हथियार विक्रेता देश बनता जा रहा है. आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं. भारत के पश्चिमी बॉर्डर पर पाकिस्‍तान तो पूर्वी सीमा पर चीन स्थित है. इन दोनों देशों का रुख भारत के प्रति शत्रुतापूर्ण रहा है. अतीत में हुए युद्ध इसकी गवाही देते हैं. ऐसे में भारत के लिए एक साथ दो मोर्चों पर युद्ध जैसी स्थिति से निपटने की तैयारी करना अनिवार्य है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोस्‍त और दुश्‍मन की पहचान और भी स्‍पष्‍ट हो चुकी है. बदले सामरिक माहौल को देखते हुए भारत अपने डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत और अपडेट करना शुरू कर दिया है. आर्मी, एयरफोर्स और नेवी को महाबली बनाने की प्रक्रिया लगातार जारी है. नेवी में अब हर 6 सप्‍ताह के बाद एक युद्धपोत को शामिल करने की प्‍लानिंग है तो वहीं आर्मी ड्रोन फ्लीट बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है. एयरफोर्स के लिए भी हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. फाइटर जेट से लेकर एयर टू एयर और एयर टू सर्फेस मिसाइल को बेड़े में शामिल किया जा रहा है. प्रिसीजन गाइडेड बम की खरीद भी चल रही है. इसके अलावा एयर डिफेंस सिस्‍टम प्रोजेक्‍ट के तहत देश को किसी भी तरह के एरियल थ्रेट से सुरक्षित करने पर लगातार काम चल रहा है. इन सबके बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है. भारत मित्र देश इजरायल से कटिंग एज वेपन, मिसाइल और बम खरीदने के लिए बड़ी डील करने की तैयारी में है. इनमें से कुछ मिसाइल की रेंज 300 से 400 किलोमीटर तक है. मतलब घर बैठे बटन दबाते ही लाहौर में तबाही लाई जा सकती है. लाहौर भारतीय सीमा के करीब स्थित बड़ा शहर है. जानकारी के अनुसार, भारत और इज़राइल के बीच रक्षा सहयोग एक नए और अहम दौर में प्रवेश कर रहा है. ‘इंडियन डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वायुसेना (IAF) को और अधिक ताकतवर बनाने के लिए भारत इजरायल से लगभग 8.7 अरब डॉलर (₹78217 करोड़) की डिफेंस डील करने की तैयारी में है. इस पैकेज में अत्याधुनिक SPICE-1000 प्रिसिजन गाइडेड बम, रैम्पेज मिसाइल, एयर लोरा (Air LORA) और आइस ब्रेकर (Ice Breaker) जैसी आधुनिक मिसाइलें शामिल हैं. इस प्रस्ताव को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विज़िशन काउंसिल (DAC) से मंजूरी मिल चुकी है. यह सौदा ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत को अपनी सीमाओं पर कई तरह की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. एक ओर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की उन्नत एयर डिफेंस तैनाती है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की ओर से GPS जैमिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल देखा गया है, खासकर मई 2025 में हुए ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान. ऐसे में भारत की यह खरीद उसकी रणनीतिक जरूरतों को दर्शाती है. आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच इजरायल के कुल रक्षा निर्यात का 34 प्रतिशत भारत को गया, जिससे भारत इजरायल का सबसे बड़ा रक्षा खरीदार बन गया है. इस नए पैकेज में सिर्फ मिसाइलें ही नहीं, बल्कि एयर-टू-एयर मिसाइलें, लोइटरिंग म्यूनिशन, आधुनिक रडार, सिमुलेटर और नेटवर्क आधारित कमांड सिस्टम भी शामिल हैं. रैम्पेज मिसाइल: भरोसेमंद वेपन रैम्पेज मिसाइल, जिसे इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने विकसित किया है, पहले से ही भारतीय वायुसेना और नौसेना के पास मौजूद है. यह मिसाइल Su-30MKI, MiG-29, Jaguar और MiG-29K जैसे विमानों से दागी जा सकती है. करीब 570 किलो वजनी यह मिसाइल GPS/INS गाइडेंस से लैस है और इसमें एंटी-जैमिंग क्षमता भी है. रैम्पेज का इस्तेमाल दुश्मन के एयरबेस, बंकर, कंट्रोल टावर और लॉजिस्टिक ठिकानों पर दूर से हमला करने के लिए किया जा सकता है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर इसकी प्रभावशीलता देखी गई थी. तीन मिसाइल…तीनों एक से बढ़कर एक रैम्पेज मिसाइल एयर लोरा मिसाइल आइस ब्रेकर मिसाइल रैम्पेज मिसाइल पहले से ही भारतीय वायुसेना और नौसेना के पास मौजूद है. यह मिसाइल Su-30MKI, MiG-29, Jaguar और MiG-29K जैसे विमानों से दागी जा सकती है. करीब 570 किलो वजनी यह मिसाइल GPS/INS गाइडेंस से लैस है और इसमें एंटी-जैमिंग क्षमता भी है. एयर लोरा एक एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल है, जो जमीन से दागी जाने वाली लोरा मिसाइल का उन्नत रूप है. यह मिसाइल पहले से भारत में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और IAI के सहयोग से बनाई जा रही है. यह मिसाइल 400 से 430 किलोमीटर की दूरी तक सटीक हमला कर सकती है. लगभग 1600 किलो वजनी यह मिसाइल मैक-5 की रफ्तार से उड़ती है और दुश्मन के मिसाइल ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य अड्डों को नष्ट करने में सक्षम है. राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स द्वारा विकसित आइस ब्रेकर मिसाइल को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध को ध्यान में रखकर बनाया गया है. यह मिसाइल 400 किलो से कम वजनी है और करीब 300 किलोमीटर तक कम ऊंचाई पर उड़कर हमला कर सकती है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम, ऑटोमैटिक टारगेट रिकग्निशन और ऐसे सेंसर लगे हैं, जो GPS न होने पर भी लक्ष्य को पहचान सकते हैं. इसकी स्टील्थ डिजाइन और कम रडार पहचान क्षमता इसे दुश्मन की मजबूत एयर डिफेंस से बचाकर लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करती है. एयर LORA: दूर से सटीक वार एयर लोरा एक एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल है, जो जमीन से दागी जाने वाली LORA मिसाइल का उन्नत रूप है. यह मिसाइल पहले से भारत में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और IAI के सहयोग से बनाई जा रही है. यह मिसाइल 400 से 430 किलोमीटर की दूरी तक सटीक हमला कर सकती है और इसकी सटीकता इतनी ज्यादा है कि इसका CEP (त्रुटि सीमा) 10 मीटर से भी कम है. लगभग 1600 किलो वजनी यह मिसाइल मैक-5 की रफ्तार (6000 KMPH से ज्‍यादा की स्‍पीड) से उड़ती है और दुश्मन के मिसाइल ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य अड्डों को नष्ट करने में सक्षम है. आइस ब्रेकर: इलेक्ट्रॉनिक वॉर में भी असरदार राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स द्वारा विकसित आइस ब्रेकर मिसाइल को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध को ध्यान में रखकर … Read more

कर्मचारियों के लिए पीएफ निकासी अब होगी आसान, UPI सुविधा से जल्द मिलेगा लाभ

नई दिल्ली कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि (पीएफ) से पैसा निकालने की प्रक्रिया जल्द ही और तेज व आसान होने जा रही है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अपने 30 करोड़ से अधिक सदस्यों को यूपीआई के जरिए पीएफ की रकम निकालने की सुविधा देने की तैयारी कर रहा है। जानकारी के मुताबिक, अगले दो से तीन महीनों में यह सुविधा भीम ऐप के माध्यम से शुरू की जा सकती है। इसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य निर्धारित जरूरतों के लिए अग्रिम निकासी का अनुरोध किया जा सकेगा। दावा सबमिट होने के बाद ईपीएफओ की ओर से बैकएंड सत्यापन किया जाएगा और मंजूरी मिलते ही राशि सीधे यूपीआई से जुड़े बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। तुरंत ट्रांसफर की व्यवस्था ईपीएफओ ने इस नई प्रणाली के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के साथ साझेदारी की है। भीम ऐप पर सदस्य स्वास्थ्य, शिक्षा और विशेष परिस्थितियों के तहत निकासी के लिए रिक्वेस्ट भेज सकेंगे। सत्यापन के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से पैसा तुरंत खाते में पहुंच जाएगा। भविष्य में और ऐप्स तक विस्तार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में यह सुविधा केवल भीम ऐप तक सीमित रहेगी, लेकिन आगे चलकर इसे अन्य यूपीआई आधारित फिनटेक एप्लिकेशन तक भी बढ़ाया जा सकता है। शुरुआत में तय हो सकती है सीमा अधिकारियों का कहना है कि गलत इस्तेमाल से बचने के लिए शुरुआती चरण में निकासी की एक सीमा तय की जा सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा यूपीआई ट्रांजैक्शन पर निर्धारित सीमाओं के चलते, पूरी अनुमत राशि एक बार में निकालना संभव नहीं हो सकता। फिलहाल इस सीमा को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।  

खामेनेई की सेना द्वारा तेहरान में मौत का मंजर: ईरानी डॉक्टर का दावा- 217 लोग मारे गए

तेहरान      ईरान में इस्लामी शासन के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों ने विकाराल रूप ले लिया है. ईरानी सरकार के निर्देश पर सुरक्षाबलों द्वारा कई जगहों पर गोलीबारी करने की बात सामने आ रही है. तेहरान के एक डॉक्टर ने पहचान नहीं उजागर करने की शर्त पर टाइम मैगजीन को बताया कि राजधानी तेहरान के सिर्फ छह अस्पतालों में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें से अधिकांश गोलीबारी में मारे गए हैं. हालांकि टाइम मैगजीन ने इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है. मौतों का यह आंकड़ा, यदि सही है तो ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के एक भयानक दमन की ओर इशारा करता है. प्रदर्शन शुरू होने के बाद से सरकार ने देश में इंटरनेट और फोन कनेक्शन लगभग पूरी तरह बंद कर दिए हैं. ये विरोध 28 दिसंबर से शुरू हुए थे, जो आर्थिक संकट के खिलाफ थे, लेकिन अब ये ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं और इस्लामी शासन को उखाड़ फेंकने की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी 'आजादी' और 'तानाशाह मुर्दाबाद' जैसे नारे लगा रहे हैं.  प्रदर्शनकारियों ने अल-रसूल मस्जिद में लगा दी आग ईरानी डॉक्टर ने टाइम मैगजीन से बातचीत में दावा किया, 'जैसे-जैसे प्रदर्शन तेज हुए, कई इलाकों में सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चला दीं. शुक्रवार को अस्पतालों से शवों को हटाया गया. मरने वालों में ज्यादातर युवा थे. उत्तरी तेहरान के एक पुलिस स्टेशन के बाहर मशीनगन से की गई फायरिंग में कई प्रदर्शनकारी मौके पर ही मारे गए. इस घटना में कम से कम 30 लोगों को गोली लगी.' अधिकतर रैलियां शांतिपूर्ण रहीं, लेकिन कुछ सरकारी इमारतों में तोड़फोड़ की खबरें भी आई हैं. ईरानी प्रदर्शनकारियों ने तेहरान की अल-रसूल मस्जिद में आग लगा दी. ईरान उपद्रवियों के सामने नहीं झुकेगा: अली खामेनेई मानवाधिकार संगठनों ने मौतों की संख्या डॉक्टर के दावे से कम बताई है. वॉशिंगटन स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी के अनुसार अब तक कम से कम 63 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 49 नागरिक शामिल हैं. हालांकि, ईरान में मीडिया के सरकारी नियंत्रण में होने और विदेशी समाचार एजेंसियों पर कड़े ​प्रतिबंधों के कारण मौतों के आंकड़ों में भिन्नता बताई जा रही है. इस बीच ईरानी नेतृत्व ने सख्त संदेश दिए हैं. सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने कहा कि 'इस्लामिक रिपब्लिक उपद्रवियों के सामने नहीं झुकेगा'.  माता-पिता से बच्चों को प्रदर्शन से दूर रखने की अपील तेहरान के प्रॉसिक्यूटर (सरकारी वकील) ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा तक दी जा सकती है. वहीं, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक अधिकारी ने अभिभावकों से अपने बच्चों को प्रदर्शनों से दूर रखने, वरना गोली लगने पर शिकायत न करने को कहा है. इधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामी शासन को चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों की हत्या हुई तो परिणाम बहुत बुरे होंगे. ईरान में आर्थिक संकट, ईरानी रियाल के डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिरने, पानी की कमी और बिजली कटौती ने जनता को इस्लामी शासन के खिलाफ आक्रोशित किया है.   

रूस की घातक सबमरीन पर अमेरिका ने किया हमला, पुतिन चुप क्यों रहे – जानिए क्या हुआ?

मॉस्को  अटलांटिक महासागर में यूएस नेवी ने रूसी झंडे वाले जहाज मार‍िनेरा (Marinera) को अपने कब्जे में ले लिया. सबको लगा था क‍ि रूस जवाब देगा. हो सकता है क‍ि अमेर‍िकी नेवी पर अटैक हो जाए, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. डिफेंस एक्‍सपर्ट को एक बात सबसे ज्‍यादा परेशान कर रही है, वो है क‍ि रूस की घातक परमाणु पनडुब्‍बी (Nuclear Submarine) की खामोशी. इस सबमरीन को जहाज को बचाने के ल‍िए रूस ने भेजा था, फ‍िर ऐसा क्‍या आ क‍ि वह बचा नहीं पाई? उसकी नाक के नीचे से अमेर‍िका रूस का जहाज कैसे लेकर चला गया? रूसी राष्‍ट्रपत‍ि व्‍लादि‍मीर पुत‍िन खामोश क्‍यों रहे? कहा जा रहा क‍ि रूसी नेवी की सबसे घातक सबमरीन उस वक्त उसी क्षेत्र में मौजूद थी. उसके पास हाइपरसोनिक मिसाइलें थीं, गाइडेड टॉरपीडो थे, फिर भी वह एक ‘मूकदर्शक’ बनी रही और अमेरिकी नौसेना जहाज को खींचकर ले गई. आखिर दुनिया की सबसे ताकतवर पनडुब्बियों में से एक ने अपने ही देश के जहाज को क्यों नहीं बचाया? उसने टॉरपीडो क्यों नहीं दागा? क्या यह रूस की कमजोरी थी या कोई बहुत बड़ी रणनीति? टॉरपीडो दागना यानी थर्ड वर्ल्‍ड वॉर सबसे बड़ा और सीधा कारण है युद्ध की शुरुआत. ड‍िफेंस एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, मार‍िनेरा एक मर्चेंट वेसल यानी कार्गो जहाज था, न कि कोई वॉरश‍िप. अंतरराष्ट्रीय कानून और सैन्य प्रोटोकॉल के मुताबिक, अगर अमेरिकी नेवी किसी जहाज को रोकती है या जब्त करती है, तो यह पुलिस एक्शन या लॉ एनफोर्समेंट माना जाता है. लेकिन, अगर रूसी सबमरीन इसके जवाब में अमेरिकी जहाज पर टॉरपीडो दाग देती, तो वह सीधे तौर पर एक्ट ऑफ वॉर होता. पूर्व नौसेना अधिकारी और डिफेंस एनालिस्ट कहते हैं, एक कार्गो जहाज को बचाने के लिए कोई भी कमांडर परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच सीधा युद्ध शुरू नहीं कर सकता. अगर सबमरीन फायर करती, तो अमेरिका इसे अपने संप्रभु जहाज पर हमला मानता और नाटो आर्टिकल 5 लागू हो जाता. रूस एक जहाज के लिए दुनिया को परमाणु युद्ध में नहीं झोंक सकता. जैसे ही फायर करती, मारी जाती     पनडुब्बी का सबसे बड़ा हथियार उसकी मिसाइलें नहीं, बल्कि उसकी स्‍ट‍िल्‍थ पॉवर है. वह पानी के नीचे छिपी रहती है, इसलिए खतरनाक है. जिस वक्त मार‍िनेरा को जब्त किया जा रहा था, उस वक्त अमेरिकी नेवी के पी-8 पोसाइडन (P-8 Poseidon) एयरक्राफ्ट और एंटी-सबमरीन डिस्ट्रॉयर्स वहां मौजूद थे. सबमरीन जैसे ही टॉरपीडो लॉन्च करने के लिए अपना ट्यूब खोलती या फायर करती, उसकी ध्वनि अमेरिकी सोनार पर आ जाती.     फायरिंग करते ही सबमरीन की सटीक लोकेशन पता चल जाती. अमेरिकी जहाज और हेलीकॉप्टर तुरंत उस पर जवाबी हमला कर देते. एक मर्चेंट जहाज को बचाने के चक्कर में रूस अपनी अरबों डॉलर की अत्याधुनिक परमाणु पनडुब्बी और सैकड़ों नाविकों को खो देता. यह एक आत्मघाती कदम होता. मार‍िनेरा की कीमत vs सबमरीन की कीमत     म‍िल‍िट्री स्‍ट्रैटजी में कास्‍ट बेन‍िफ‍िट एनाल‍िस‍िस बहुत मायने रखता है. मार‍िनेरा एक कार्गो जहाज था. इसमें या तो तेल था, हथियार थे या कोई प्रतिबंधित सामान. इसकी कीमत कुछ मिलियन डॉलर हो सकती है. रूसी सबमरीन की कीमत लगभग 3 से 4 अरब डॉलर है. यह रूस का सबसे कीमती रणनीतिक हथियार है.     कोई भी समझदार नौसेना कमांडर एक मामूली जहाज को बचाने के लिए अपनी सबसे कीमती स्ट्रैटेजिक एसेट को खतरे में नहीं डालेगा. सबमरीन का काम सिर्फ जहाज बचाना नहीं, बल्कि अमेरिका के मेनलैंड पर न्‍यूक्‍ल‍ियर ड‍िटोरेंट बनाए रखना है. अमेरिका का एंटी-सबमरीन जाल अटलांटिक महासागर में अमेरिका का दबदबा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब अमेरिकी नेवी ने मार‍िनेरा को इंटरसेप्ट किया, तो उन्होंने पहले ही यह सुनिश्चित कर लिया होगा कि नीचे कोई रूसी सबमरीन उन्हें नुकसान न पहुंचा सके. अमेरिकी नेवी के पास साउंड सर्विलांस स‍िस्‍टम है, जो समुद्र के तल में लगे सेंसर का एक नेटवर्क है. संभावना है कि अमेरिकी नेवी को पहले से पता था कि रूसी सबमरीन कहां है. ऐसे में, अगर रूसी सबमरीन कोई भी हरकत करती, तो उसे तुरंत घेर लिया जाता. रूसी कमांडर यह जानते थे कि वे दुश्मन के घर में हैं और वे ‘घिरे हुए’ हैं. यह कब्जा था, हमला नहीं हमें यह समझना होगा कि अमेरिका ने जहाज को डुबोया नहीं, बल्कि जब्त किया है. अगर अमेरिका जहाज पर मिसाइल दागकर उसे डुबो रहा होता और रूसी क्रू की जान खतरे में होती, तो शायद सबमरीन कुछ आक्रामक कदम जैसे चेतावनी देना, उठा सकती थी. लेकिन यहां अमेरिका ने बोर्डिंग टीम भेजी और जहाज को अपने कंट्रोल में ले लिया. ऐसे में सबमरीन के पास करने के लिए कुछ नहीं था. वह पानी के नीचे से लाउडस्पीकर पर चेतावनी नहीं दे सकती और न ही टॉरपीडो दाग सकती है. पुतिन की खामोशी रणनीतिक रूसी सबमरीन का हमला न करना कमजोरी नहीं, बल्कि रणनीतिक संयम था. अगर रूसी सबमरीन टॉरपीडो दाग देती, तो दुनिया तीसरे विश्व युद्ध का सामना कर रही होती. रूस अब इसका जवाब कूटनीतिक तरीके से या किसी और मोर्चे जैसे यूक्रेन या साइबर अटैक पर देगा. समुद्र में उस वक्त खामोश रहना ही रूसी कमांडर के लिए एकमात्र विकल्प था. आसान शब्दों में कहें तो आप एक शतरंज के प्यादे को बचाने के लिए अपने वजीर की कुर्बानी नहीं देते, खासकर तब जब सामने वाला खिलाड़ी पूरी तैयारी के साथ बैठा हो.

महिलाओं की सुरक्षा के मामले में बेंगलुरु और चेन्नई सबसे आगे, देखें टॉप 10 शहरों की पूरी लिस्ट

नई दिल्ली महिलाओं की सुरक्षा और करियर के बेहतर अवसरों के मामले में बेंगलुरु और चेन्नई सबसे आगे निकलकर सामने आए हैं। यह जानकारी वर्कप्लेस कल्चर कंसल्टिंग फर्म अवतार ग्रुप की हालिया रिपोर्ट में सामने आई है। ‘टॉप सिटीज फॉर वीमेन इन इंडिया (TCWI)’ के चौथे संस्करण में देश के 125 शहरों की महिलाओं को शामिल किया गया। इस अध्ययन में महिलाओं से उनकी सुरक्षा, कार्यस्थल के माहौल और करियर में आगे बढ़ने के अवसरों को लेकर सवाल किए गए। इन्हीं मानकों के आधार पर शहरों को रैंकिंग दी गई। यह रिपोर्ट एक लॉन्गिट्यूडिनल इन्क्लूजन इंडेक्स के रूप में तैयार की गई है, जो यह आंकलन करती है कि कौन-से शहर महिलाओं की भागीदारी, सुरक्षा और प्रोफेशनल ग्रोथ को लगातार बेहतर बना रहे हैं। बेंगलुरु फिर बना नंबर-1 रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु ने 53.29 CIS स्कोर के साथ पहला स्थान हासिल किया है। यहां महिलाओं को करियर ग्रोथ के बेहतर मौके, मजबूत इंडस्ट्री सपोर्ट और अपेक्षाकृत सुरक्षित माहौल मिलता है। यही वजह है कि यह शहर लगातार दूसरे साल भी इस सूची में शीर्ष पर बना हुआ है। चेन्नई दूसरे स्थान पर कायम महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से चेन्नई ने दूसरा स्थान बरकरार रखा है। यह शहर साल 2024 में भी दूसरे नंबर पर था और 2025 में भी अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रहा। टॉप 10 में ये शहर शामिल रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरे स्थान पर पुणे और चौथे पर हैदराबाद रहा। मुंबई, जो 2024 में तीसरे स्थान पर थी, 2025 में फिसलकर पांचवें नंबर पर पहुंच गई। टॉप 10 सुरक्षित शहरों की सूची में इसके बाद गुरुग्राम, कोलकाता, अहमदाबाद, त्रिवेंद्रम और कोयंबटूर शामिल है। 

अमेरिका लगाएगा 500% टैरिफ? ट्रंप के फैसले पर भारत सरकार ने दिया सख्त जवाब

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने वाले बिल को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद भारत पर भी और टैरिफ लगाए जाने का खतरा मंडराने लगा है। बिल को पेश किए जाने के मामले में भारत ने अब अमेरिका को मुंहतोड़ जवाब दिया है। भारत सरकार ने साफ किया है कि बदलते ग्लोबल मार्केट हालात के बीच वह अपने 1.4 अरब लोगों के लिए किफायती ऊर्जा हासिल करने की जरूरत से निर्देशित है।   प्रस्तावित कानून पर प्रतिक्रिया देते हुए, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली को बिल के बारे में पता है और वह घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रही है। जायसवाल ने एक साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, "हमें प्रस्तावित बिल के बारे में पता है। हम घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहे हैं।" ऊर्जा सोर्सिंग पर भारत के लंबे समय से चले आ रहे रुख को दोहराते हुए, जायसवाल ने इस बात पर जोर दिया कि नई दिल्ली के फैसले ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों और बाजार की वास्तविकताओं से तय होते हैं। बयान में कहा गया है, "ऊर्जा सोर्सिंग के बड़े सवाल पर हमारा रुख जगजाहिर है। इस कोशिश में, हम ग्लोबल मार्केट की बदलती गतिशीलता और अपने 1.4 अरब लोगों के लिए अलग-अलग सोर्स से सस्ती ऊर्जा हासिल करने की जरूरत से निर्देशित होते हैं ताकि ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों को पूरा किया जा सके।" विदेश मंत्रालय का जवाब अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के उस बयान के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाइपार्टीशन रूस प्रतिबंध बिल को हरी झंडी दे दी है। बुधवार को एक्स पर एक पोस्ट में, ग्राहम ने कहा कि यह कदम यूक्रेन के लिए चल रही शांति वार्ता के बीच आया है और संकेत दिया कि अगले हफ्ते इस पर दोनों पार्टियों के बीच वोटिंग होगी। ग्राहम ने अपनी पोस्ट में क्या कहा? ग्राहम ने अपनी पोस्ट में कहा था, "राष्ट्रपति ट्रंप के साथ आज कई मुद्दों पर बहुत अच्छी मीटिंग के बाद, उन्होंने बाइपार्टीशन रूस प्रतिबंध बिल को हरी झंडी दे दी है, जिस पर मैं महीनों से सीनेटर ब्लुमेंथल और कई अन्य लोगों के साथ काम कर रहा था। यह सही समय पर आया है, क्योंकि यूक्रेन शांति के लिए रियायतें दे रहा है और पुतिन सिर्फ बातें कर रहे हैं, और निर्दोष लोगों को मारना जारी रखे हुए हैं। यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को सजा देने की अनुमति देगा जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को बढ़ावा दे रहे हैं।"  

8 बार संवाद के बावजूद भारत का कड़ा रुख, पीएम मोदी–ट्रंप बातचीत पर अमेरिकी दावे की उड़ाई हवा

नई दिल्ली भारत सरकार ने अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर दिए गए बयान को गलत बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल आठ बार बातचीत की है। दरअसल, लुटनिक ने दावा किया था कि भारत के साथ व्यापार समझौता इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया।   इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने लुटनिक की टिप्पणियों को गलत बताया और कहा कि दोनों पक्ष (भारत-अमेरिका) कई बार डील के करीब थे, फिर भी आपसी फायदे वाली डील में दिलचस्पी है। पीएम मोदी और ट्रंप ने 2025 के दौरान 8 बार बात की। इस तरह भारत सरकार ने अमेरिकी दावों की हवा निकाल दी और साफ कर दिया कि ट्रंप व मोदी के बीच बातचीत होती रही है। लुटनिक ने गुरुवार को एक ‘पॉडकास्ट’ में कहा कि उन्होंने मोदी से राष्ट्रपति को फोन करके समझौते को अंतिम रूप देने का अनुरोध किया था। हालांकि, भारत ऐसा करने में असहज महसूस कर रहा था, इसलिए मोदी ने फोन नहीं किया। वाणिज्य मंत्री ने कहा कि अमेरिका ने इंडोनेशिया, फिलीपीन और वियतनाम के साथ व्यापार समझौते किए हैं लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि भारत के साथ व्यापार समझौता इन देशों से पहले हो जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘…हमने इंडोनेशिया, फिलीपीन और वियतनाम के साथ कई समझौते किए और उनकी घोषणा भी कर दी। ये सभी समझौते इसलिए ऊंची दरों पर किए गए क्योंकि बातचीत के दौरान यह मान लिया गया था कि भारत पहले ही प्रक्रिया पूरी कर लेगा… लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नतीजतन, जिन देशों के साथ पहले समझौते हुए, वे महंगे या ऊंची दर पर तय हुए। फिर बाद में जब भारत ने संपर्क (फोन) किया और कहा, ‘‘ ठीक है, हम तैयार हैं’’ तो मैंने उनसे कहा ‘‘ किस बात के लिए तैयार हैं? ’’ दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर अब तक छह दौर की बातचीत हो चुकी है। इस समझौते में अमेरिका में प्रवेश करने वाले भारतीय सामानों पर लगने वाले 50 प्रतिशत शुल्क के समाधान के लिए एक ढांचागत समझौता शामिल है। 'हग हग न रहा’, कांग्रेस का पीएम मोदी पर तंज पीएम मोदी के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं करने की वजह से भारत के साथ व्यापार समझौता नहीं हो पाने संबंधी अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के बयान के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर फिल्मी अंदाज में कटाक्ष किया। लुटनिक की टिप्पणियों का एक वीडियो पोस्ट करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ‘‘हग हग (आलिंगन आलिंगन) ना रहा, पोस्ट पोस्ट ना रहा।’’ मोदी पर निशाना साधते हुए फिल्मी अंदाज में रमेश ने तंज कसते हुए कहा, ‘‘क्या से क्या हो गया, बेवफा तेरी दोस्ती में।’’