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सड़कों पर उमड़ा आक्रोश: प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए खामेनेई ने ट्रंप पर साधा निशाना

तेहरान ईरान की सड़कों पर उतरे आंदोलनकारियों को संबोधित करने के लिए आज खुद सुप्रीम लीर अयातुल्लाह खामेनेई सामने आए। उन्होंने सरकारी टीवी चैनल पर जनता को संबोधित करते हुए शांति की अपील की तो वहीं उपद्रव के लिए इजरायल और अमेरिका पर ठीकरा फोड़ा। उन्होंने कहा कि इजरायल और अमेरिका के आतंकी एजेंट ही ईरान में उपद्रव करा रहे हैं। उन्होंने सीधा हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर किया। खामेनेई ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के हाथ खून से रंगे हुए हैं। उन्होंने ईरान के लोगों का खून बहाया है। ट्रंप की सत्ता खत्म होगी और उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति पद से जाना होगा। यही नहीं खामेनेई ने ट्रंप को नसीहत देते हुए कहा कि वह अपने देश की समस्याओं पर ध्यान दें। इस बीच ईरान के प्रशासन ने आंदोलन करने वालों को देश विरोधी करार दिया है और उन्हें सख्त ऐक्शन की चेतावनी दी है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर उपद्रव फैलाने की अपील करने वालों पर भी ऐक्शन होगा। खामेनेई ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं के इशारों पर काम करने वालों को सहन नहीं किया जाएगा। इससे पहले ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने एक कार्यक्रम में आंदोलनकारियों को इदरायल और अमेरिका के इशारे पर काम करने वाले आतंकी एजेंट बताया था। खामेनेई बोले- दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए क्यों जला रहे अपना मुल्क टीवी चैनल का कहना था कि ये लोग आखिर हिंसा क्यों फैला रहे हैं। ऐसे ही सुर अपनाते हुए खामेनेई ने कहा कि आखिर दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए कुछ लोग अपने ही देश की गलियों पर तबाही क्यों मचा रहे हैं। बता दें कि ईरान में चल रहे आंदोलनों को लेकर भी डोनाल्ड ट्रंप का बयान आया था। उन्होंने कहा था कि यदि आंदोलनकारियों पर बर्बरता की गई तो अमेरिका उनकी रक्षा करेगा। रजा पहलवी दशकों बाद हुए ऐक्टिव, अमेरिका का हाथ होने की क्यों चर्चा वहीं ईरान की ओर से कहा गया है कि अमेरिका दूर रहे, वरना अंजाम भुगतना होगा। इस पूरे मामले में डीप स्टेट की भी चर्चा हो रही है। वजह यह है कि निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी अचानक ही ऐक्टिव हो गए हैं। उनके नाम से नारे लगाए जा रहे हैं। पहलवी अमेरिका के करीब माने जाते हैं। इसलिए माना जा रहा है कि इस आंदोलन में अमेरिका का हाथ हो सकता है।  

शिकायत अनसुनी पड़ी तो युवक ने उठाया अनोखा कदम, पुलिस की बाइक चुराकर भागा

केरल केरल में शिकायत दर्ज कराने तिरुवनंतपुरम नगर पुलिस कमिश्नर के कार्यालय में आया एक व्यक्ति अधिकारी की मोटरसाइकिल लेकर फरार हो गया। सीनियर पुलिस ऑफिसर ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरोपी की पहचान अमल सुरेश के रूप में हुई है, जिसे एक अधिकारी की बाइक चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उक्त अधिकारी ने गुरुवार को ड्यूटी पर आने से पहले अपनी मोटरसाइकल आयुक्त कार्यालय में खड़ी की थी।   पुलिस के अनुसार, यह घटना दोपहर करीब 1 बजे हुई। उन्होंने बताया कि जब अधिकारी कार्यालय पहुंचे और अपनी मोटरसाइकिल खड़ी की। जल्दबाजी में वह अपना बैग वाहन पर ही भूल गए, जिसमें चाबी रखी हुई थी। जब अधिकारी दोपहर करीब 3 बजे वापस लौटे, तो बाइक गायब थी। पुलिस ने बताया कि परिसर के सीसीटीवी फुटेज में सुरेश को वाहन ले जाते हुए देखा गया। इसके बाद, छावनी पुलिस ने शिकायत के आधार पर इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) के तहत चोरी का मामला दर्ज किया। पूछताछ में आरोपी ने क्या बताया पुलिस के अनुसार, चोरी के मामलों का पुराना रिकॉर्ड रखने वाला सुरेश अपने पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने आयुक्त कार्यालय आया था। पुलिस ने बताया कि उसे बाद में उसी रात मनावीयम वीधि से गिरफ्तार किया गया और चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की गई। पूछताछ के दौरान, सुरेश ने पुलिस को बताया कि उसने बाइक ले जाने का फैसला इसलिए किया क्योंकि कार्यालय में उसकी शिकायत स्वीकार नहीं की गई थी। पुलिस ने कहा कि रिमांड की कार्यवाही के तहत आरोपी को अदालत में पेश किया जाएगा।

बांग्लादेश की बुनियाद में भारत की भूमिका, फिर भी यूनुस सरकार के तेवरों पर सवाल

नई दिल्ली भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में आए तनाव के बीच यूनुस सरकार के रवैए से विशेषज्ञ भी हैरान हैं। भारत के पूर्व राजनयिक सुरेंद्र कुमार ने एक बयान में कहा है कि भारत के प्रति बांग्लादेश का रवैया बहुत निराशाजनक है। उन्होंने कहा है कि पड़ोसी देश भारत के बिना अस्तित्व में ही नहीं होता लेकिन मौजूदा अंतरिम सरकार इस बात को भूल चुकी है।   पूर्व राजनयिक ने कहा, "यह बहुत निराशाजनक और दुखद है। बांग्लादेश जिसके लिए भारत ने इतना कुछ किया। भारत के बिना बांग्लादेश नहीं था। यहां तक ​​कि खालिदा जिया के बेटे ने भी रिकॉर्ड पर कहा है कि 1971 में जो हुआ उसे हम नहीं भूल सकते। लेकिन मौजूदा सरकार के मुख्य सलाहकार का अपना तरीका है।” उन्होंने कहा कि इस बर्ताव के बाद भी भारत ने अपना धैर्य नहीं खोया और शांत रहा है जो काबिलेतारीफ है। ‘पाक के जख्मों को कैसे भूला दिया?’ सुरेन्द्र कुमार ने आश्चर्य जताया कि बांग्लादेश पाक के दिए जख्मों को इतनी जल्दी कैसे भूल गया। उन्होंने कहा, "अब बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ इस तरह के संबंध बना रहा है। यह वही पाकिस्तान है जिसकी सेना ने जनरल जिया के नेतृत्व में लगभग 30 लाख लोगों को मार डाला, 3 लाख महिलाओं का बलात्कार किया…। वे समझदारी की बात नहीं कर रहे हैं।” बांग्लादेश को किया आगाह पूर्व राजनयिक ने आगे बांग्लादेश को आगाह भी किया। उन्होंने कहा है कि अगर बांग्लादेश प्रगति करना चाहता है तो उसे भारत के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने होंगे। उन्होंने कहा, “आप भारत के साथ अच्छे रिश्ते रखना चाहते हैं, लेकिन यह अच्छे रिश्तों का तरीका नहीं है। हम अच्छे रिश्ते चाहते हैं। आप खुद देखिए। यहां से बिजली जा रही है। हमने बॉर्डर एग्रीमेंट साइन किया है, और पानी शेयर करने की व्यवस्था भी चल रही है। लेकिन इस तरह की कार्रवाई लंबे समय में बांग्लादेश के हित में नहीं है।” उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि जब चुनाव होंगे, तब कोई भी सरकार सत्ता में आए, उसे एहसास होगा कि उनका लॉन्ग-टर्म हित भारत के साथ अच्छे रिश्तों में है।" उन्होंने इसके लिए मालदीव का हवाला भी दिया।  

कैदियों को मिल रही मोबाइल सुविधा पर हाई कोर्ट नाराज़, जेल व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

मुंबई बम्बई हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने कहा कि यह बात अंतरात्मा को झकझोर देने वाली है कि उत्तरी गोवा के कोलवाले स्थित केंद्रीय जेल के भीतर मोबाइल चार्जिंग पॉइंट बनाए गए थे। जज श्रीराम वी. शिरसाट ने हाल में एक आदेश में जेल परिसर में मोबाइल फोन और प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी का संज्ञान लिया। उन्होंने जेल अधिकारियों को मजबूत जैमर नेटवर्क स्थापित करने का निर्देश दिया। उच्च न्यायालय ने चंदू पाटिल के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए, जो एक बच्चे की हत्या के आरोप में जेल में है। आरोप है कि पाटिल ने जेल से पीड़ित परिवार को फोन करके अप्रत्यक्ष रूप से धमकी दी थी।   जज ने कहा, ‘जेल अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ त्वरित और व्यापक कड़े उपाय करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।’ आदेश में जेल प्रशासन से 20 जनवरी, 2026 को जवाब मांगा गया है। आदेश में कहा गया, ‘यह बात स्पष्ट है कि चार्जिंग पॉइंट वहां थे, वे क्यों लगाए गए हैं।’ अदालत ने कहा कि उसके पास ऐसे ही कई मामले आए हैं जिनमें मादक पदार्थों के अलावा मोबाइल फोन भी जेल परिसर में तस्करी करके लाए गए थे। हालांकि, न्यायाधीश ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि जेल के अंदर पहले भी मोबाइल फोन मिलने के बावजूद, ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। अदालत ने दिए सख्त निर्देश न्यायाधीश ने कहा, ‘केवल एक कैदी के खिलाफ मोबाइल या प्रतिबंधित सामान रखने के आरोप में कार्रवाई करना कोई निर्णायक समाधान नहीं होगा, बल्कि मामले की तह तक जाना आवश्यक है।’ उच्च न्यायालय ने कहा कि वह इस धारणा पर आगे बढ़ रहा है कि जेल में सिग्नल जैमिंग सिस्टम स्थापित नहीं हैं। न्यायाधीश ने कहा कि अब समय आ गया है कि अधिकारी इस मुद्दे को गंभीरता से लें। अदालत ने कहा कि वह इस बात को समझने में असमर्थ है कि मोबाइल फोन इतनी आसानी से अंदर कैसे ले जाए जा सकते हैं, खासकर तब जब जेल अधिकारी नियमित रूप से निरीक्षण करते हैं। जांच और निगरानी पर उठे सवाल जज ने पूछा, ‘क्या यह निरीक्षण सतही और दिखावा है या प्रवेश द्वार पर जानबूझकर ढिलाई बरती जाती है ताकि मोबाइल फोन बिना किसी रुकावट के जेल परिसर के अंदर पहुंच सकें?’ अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की घटनाएं नियमित अंतराल पर हो रही हैं, इसलिए कुछ जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इसने कहा, ‘कुछ कड़े कदम उठाना समय की मांग है।’ चंदू पाटिल का जिक्र करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि सिर्फ कारण बताओ नोटिस से काम नहीं चलेगा। न्यायालय ने कहा कि संबंधित तिथि और समय के कॉल डेटा रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और सेल टावर लोकेशन का पता लगाना जरूरी है। एससी के न्यायाधीश ने कहा, ‘इस तरह की गतिविधियों के लिए मामूली सजा से जेल के कैदियों का हौसला बढ़ता है। ’उच्च न्यायालय ने कहा कि जेल के उप अधीक्षक या अधीक्षक को यह सुनिश्चित करना होगा कि तत्काल मजबूत फोन जैमर या सेलुलर निरीक्षण प्रणाली स्थापित की जाए और इनका संचालन सख्ती से जेल परिसर तक ही सीमित रखा जाए ताकि आसपास के निवासियों पर इसका कोई प्रभाव न पड़े। इसने यह भी निर्देश दिया कि जांच बिंदुओं पर निरीक्षण मानदंडों का उल्लंघन करने वाले कर्मियों की जवाबदेही तय करने के लिए अतिरिक्त नियम बनाए जाएं।  

ईरान में विरोध की नई आवाज़: रजा पहलवी कौन हैं और अमेरिका से उनका क्या रिश्ता है

तेहरान ईरान में इन दिनों आंदोलनों का दौर है। राजधानी तेहरान से लेकर सुदूर इलाकों तक में देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ नारेबाजी हो रही है। इन प्रदर्शनों को लेकर कहा जा रहा है कि ये महंगाई और अर्थव्यवस्था की बदहाली के खिलाफ हो रहे हैं। लेकिन ईरान की सरकार समेत दुनियावी मामलों के कई जानकार इसके पीछे अमेरिका हाथ भी मान रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इन आंदोलनों में कुछ जगहों पर ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के नाम से भी नारे लग रहे हैं। इसके बाद यह भी कयास लग रहे हैं कि क्या 46 साल से चले आ रहे ईरान में खामेनेई शासन का अब अंत होने वाला है।   अमेरिका के डीप स्टेट को लेकर दुनिया भर में चर्चाएं रही हैं। कहा जाता है कि अमेरिका ही दुनिया के कई देशों में यह तय करने की कोशिश करता है कि कौन सत्ता में रहे और कौन नहीं। इसके लिए वह अकसर पॉलिटिकल वारफेयर भी इस्तेमाल करता है और इसकी मदद से वह अपने खिलाफ जा रही सत्ताओं के विरुद्ध आंतरिक तौर पर असंतोष पैदा करने का प्रयास करता है। इसके बाद फेरबदल की स्थिति में ऐसे किसी नेता को सत्ता पर लाने के लिए माहौल तैयार करता है, जो उसकी नीतियों का समर्थक हो। ऐसा बांग्लादेश, वेनेजुएला, अफगानिस्तान, इराक और सीरिया तक में देखा जाता रहा है। अब ईरान में आंदोलन और रजा पहलवी के नाम के नारों को लेकर भी ऐसी ही स्थिति मानी जा रही है। रजा पहलवी के पिता मोहम्मद रजा पहलवी लंबे समय तक ईरान के शासक रहे थे। 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति की शुरुआत हुई थी और इसी दौरान बीमार अवस्था में ही वह अपने परिवार को लेकर निकल गए थे। तब से ही यह परिवार ईरान से बाहर बसा हुआ है। निर्वासित जीवन के दौरान ही रजा पहलवी को ईरान का क्राउन प्रिंस घोषित कर दिया गया था। इस परिवार के अमेरिका के साथ अच्छे रिश्ते माने जाते हैं, जबकि अयातुल्लाह खामेनेई के अमेरिकी सरकार खिलाफ रही है। रजा पहलवी फिलहाल 65 साल के हैं और अब भी ईरान से बाहर ही हैं। रजा पहलवी का अमेरिका से क्या रहा है कनेक्शन वह मोहम्मद रजा पहलवी के सबसे बड़े बेटे हैं और इसीलिए उन्हें उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता रहा है। रजा पहलवी के पिता को 1967 में ईरान का राजा बना गया था। वहीं रजा पहलवी ईरान की एयर फोर्स में कैडेट थे। फिर जब परिवार को ईरान से निकलना पड़ा तो उन्होंने अमेरिका में पायलट के तौर पर ट्रेनिंग ली थी। पश्चिमी मूल्यों में पला-बढ़ा यह परिवार ईरान में उदारवादी विचारों वाली सत्ता लाने का समर्थक रहा है। हालांकि बीते 45 सालों से यह परिवार ईरान से बाहर ही रहा है। अब जब रजा पहलवी के नाम के नारे लग रहे हैं तो यह सवाल उठने लगा है कि क्या करीब 5 दशक बाद ईरान में फिर से सत्ता परिवर्तन की स्थिति बन सकती है।  

तलाक मामले में वकील–मुवक्किल संबंधों की मर्यादा टूटी, महिला अधिवक्ता को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

नई दिल्ली शीर्ष अदालत ने महिला वकील की ओर से दायर आपराधिक केस में शख्स को अग्रिम जमानत दे दी है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने महिला वकील को भी फटकार लगाई और कहा कि आखिर एक लॉयर तौर पर आपका यह ऐसा कैसा व्यवहार था, जिसमें आपने उस शख्स से ही रिश्ते बना लिए, जिसके तलाक का केस आप लड़ रही थीं। बार ऐंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने पहले महिला वकील को फटकार लगाई और एक क्लाइंट के साथ अंतरंग संबंध बनाने के लिए एक वकील के तौर पर उसके आचरण पर सवाल उठाया था। खासकर तब जब वह उसे तलाक दिलाने में मदद कर रही थी।   इस दिलचस्प केस में अदालत ने आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी है। आरोपी शख्स फिलहाल लंदन में रह रहा है और बेंच ने कहा कि यदि वह भारत आता है तो उसे गिरफ्तारी से राहत रहेगी। इसके अलावा अदालत ने महिला वकील से यह भी पूछा कि आपने अपने ही मुवक्किल से अंतरंग संबंध क्यों बनाए। आखिर इस झमेले में पड़ने की आपको क्या जरूरत थी। बेंच ने यह भी कहा कि दोनों के बीच जो रिश्ता पनपा था, वह आपसी सहमति से था। दोनों में से कोई भी एक-दूसरे के साथ शादी करने के लिए तैयार नहीं था। फिर आखिर ऐसा क्यों किया गया। बेंच ने साफ कहा कि महिला वकील की आपराधिक शिकायत बेवजह थी। बेंच ने महिला वकील से कहा कि आपसे एक पेशेवर जिम्मेदारी और गरिमा की उम्मीद की जाती है। आप एक शख्स को तलाक दिलाने में मदद कर रही थीं और उससे ही आपके अंतरंग संबंध बन गए। ऐसी स्थिति भी तब हुई, जब शख्स को पत्नी से तलाक मिला भी नहीं था और मामला चल ही रहा था। उन्होंने कहा कि ऐसा हम किसी वकील के बारे में सोच भी नहीं सकते। शख्स के वकील ने कहा- 4 लोगों पर लगा चुकी हैं यौन उत्पीड़न के आरोप वहीं आरोपी शख्स के वकील ने कहा महिला वकील अब तक 4 लोगों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के केस दर्ज करा चुकी हैं। यहां तक कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी उन्हें व्यवहार पर सवाल उठाए थे और जांच की बात कही थी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि आप एक वकील हैं और आपको पता होना चाहिए कि तलाक हुए बिना तो वह किसी से शादी भी नहीं कर सकता है। आप वकील हैं, कोई अशिक्षित महिला तो नहीं हैं।  

जो प्रदेश 2017 के पहले उपद्रव से ग्रस्त था, वह अब उत्सव का प्रदेश हैः सीएम योगी

असीमित संभावनाओं को परिणाम में बदलने वाला प्रदेश बना यूपीः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह संग अशोक लेलैंड कंपनी के नवीन इलेक्ट्रिक व्हीकल विनिर्माण संयंत्र का किया उद्घाटन  डबल इंजन सरकार की फास्ट ट्रैक अप्रूवल प्रणाली और सुशासन का परिणाम, मात्र 18 महीने के रिकॉर्ड समय में देश को समर्पित हो रहा यह विश्वस्तरीय प्लांटः मुख्यमंत्री  जो प्रदेश 2017 के पहले उपद्रव से ग्रस्त था, वह अब उत्सव का प्रदेश हैः सीएम योगी   "इंडस्ट्री फर्स्ट, इन्वेस्टर्स फर्स्ट" के दृष्टिकोण से निवेशकों का पसंदीदा स्थल बन चुका है यूपीः मुख्यमंत्री  "फियरलेस बिजनेस", "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस" और "ट्रस्ट ऑफ डूइंग बिजनेस" नए यूपी की पहचान: मुख्यमंत्री  यूपी में अब 34 सेक्टरियल पॉलिसी हैं, निवेशक किसी भी सेक्टर में निवेश करके यूपी की विकास यात्रा में योगदान दे सकते हैं यूपी के 10 हजार युवाओं को प्रतिवर्ष "स्किल डेवलपमेंट" से जोड़ने के लिए हिंदुजा समूह व यूपी सरकार के साथ होने जा रहा एमओयूः योगी  उत्तर प्रदेश "ट्रस्ट एंड ट्रांसफॉर्मेशन" की नई भूमिका के रूप में खुद को स्थापित करेगा यूपीः सीएम योगी  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रक्षा मंत्री व लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह के साथ शुक्रवार को अशोक लेलैंड कंपनी के इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) विनिर्माण संयंत्र का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री व अन्य अतिथियों ने फैक्ट्री का निरीक्षण किया और सिंदूर-रुद्राक्ष के पौधे भी रोपे। सीएम योगी ने निवेश के लिए हिंदुजा परिवार को शुभकामनाएं दीं और यूपी सरकार पर विश्वास के लिए आभार जताया। सीएम ने कहा कि यूपी के लिए यह निवेश अत्यंत महत्वपूर्ण है। 2017 के पहले यूपी की अराजकता किसी से छिपी नहीं थी, निवेशक पलायन कर रहे थे परंतु 2017 में सरकार में आने पर हमने कहा कि यह अनलिमिटेड पोटेंशियल का प्रदेश है। अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए कुछ लोगों ने इसे बदनाम किया, लेकिन यूपी अब अनलिमिटेड पोटेंशियल यानी संभावनाओं को परिणाम में बदलने वाला प्रदेश बन गया है। पिछले आठ-साढ़े आठ साल में हुआ परिवर्तन इसका उदाहरण है। यह समारोह प्रदेश के प्रति उद्योगों के बढ़ते विश्वास का प्रतीक है।  5000 यूनिट प्रतिवर्ष तक इसकी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना है  सीएम योगी ने कहा कि इस इकाई की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता अभी 2500 यूनिट प्रति वर्ष है। इसे चरणबद्ध ढंग से 5000 यूनिट प्रतिवर्ष तक बढ़ाना है। यह परियोजना यूपी के औद्योगिक विकास व पर्यावरण संरक्षण के प्रति पीएम की प्रतिबद्धता और हम सभी के दृढ़ विश्वास का प्रतीक भी है। जब दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग व ग्लोबल कूलिंग से त्रस्त है। तमाम आपदाएं चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। उन स्थितियों में हम सब भी अपने आप को तैयार कर सकें, यह इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट इस दिशा में किए जाने वाला प्रयास का एक हिस्सा है। इसमें प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए नौकरी व रोजगार की संभावनाएं भी विकसित हुई हैं।  आज यूपी के सभी 75 जनपदों में हो रहा निवेश  सीएम योगी ने कहा कि आज यूपी के सभी 75 जनपदों में निवेश हो रहा है। सीएम ने बेहतर कनेक्टिविटी का जिक्र करते हुए बताया कि देश के एक्सप्रेसवे का 55 फीसदी एक्सप्रेसवे यूपी के पास है। देश में सर्वाधिक शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों व मेट्रो का संचालन यूपी में हो रहा है। देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क यूपी के पास है। देश में बन रहे दो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर यूपी से होकर जा रहे हैं। इन पर यूपी का लॉजिस्टिक टर्मिनल व लॉजिस्टिक एंड ट्रांसपोर्ट हब को भी विकसित करने का कार्य हो रहा है। देश में पहली रैपिड रेल व वाटर वे का संचालन भी यूपी में हो चुका है।  जो प्रदेश 2017 के पहले उपद्रव से ग्रस्त था, वह अब उत्सव का प्रदेश है  सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले यूपी पहचान का मोहताज और उपद्रव से ग्रसित था, लेकिन आज यूपी उत्सव का प्रदेश है। यूपी अब बीमारू राज्य नहीं, बल्कि इसने खुद को रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में स्थापित किया है। दृढ़ निश्चय से लिए गए फैसले, साफ नीयत व स्पष्ट सोच के कारण "फियरलेस बिजनेस", "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस" और "ट्रस्ट ऑफ डूइंग बिजनेस" नए यूपी की पहचान बन चुके हैं। यहां पर कोई निवेशक पॉलिसी पैरालिसिस का शिकार नहीं हो सकता। यूपी में अब 34 सेक्टरियल पॉलिसी हैं, जिनके माध्यम से निवेशक किसी भी सेक्टर में निवेश करके यूपी की विकास यात्रा में योगदान दे सकते हैं।  "इंडस्ट्री फर्स्ट, इन्वेस्टर्स फर्स्ट" के दृष्टिकोण से निवेशकों का पसंदीदा स्थल बन चुका है यूपी सीएम योगी ने पीएम मोदी के विजन-2047 का जिक्र किया और कहा कि हर देशवासी ने भारत को विकसित-आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया है। यह प्लांट मेक इन इंडिया के साथ ही आत्मनिर्भर भारत के पीएम मोदी के संकल्प को बढ़ाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। यूपी आज "इंडस्ट्री फर्स्ट, इन्वेस्टर्स फर्स्ट" के दृष्टिकोण से देश-दुनिया के हर निवेशक का महत्वपूर्ण पसंदीदा स्थल बन चुका है। पिछले 8-9 वर्ष में यूपी में 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए। इसमें से 15 लाख करोड़ के प्रस्ताव की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है। अगले महीने छह लाख करोड़ के अन्य निवेश प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग की जाएगी। पांच लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव अभी पाइपलाइन में और हैं, जिनकी यूपी में ग्राउंड ब्रेकिंग कराई जाएगी।  देश की जीडीपी में 9.5 प्रतिशत का योगदान कर रहा यूपी सीएम योगी ने कहा कि यूपी देश की जीडीपी में 9.5 प्रतिशत का योगदान कर रहा है। यूपी की जीएसडीपी इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 36 लाख करोड़ की हो जाएगी। वित्तीय अनुशासन व बेहतर वित्तीय प्रबंधन के साथ यूपी एक लक्ष्य लेकर चला है। प्रधानमंत्री जी ने 2027 में भारत की अर्थव्यवस्था को पांच ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के रूप में बदलने को कहा है तो हमने भी लक्ष्य तय किया है कि 2029-30 में यूपी वन ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनेगा।  हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ा उत्तर प्रदेश  सीएम योगी ने कहा कि यूपी अब ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक व आईटी हब बनने की राह पर तेजी से बढ़ा है। देश के मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का 55 फीसदी यूपी में बन रहा है। देश के 60 फीसदी इलेक्ट्रॉनिक आइटम यूपी में बन रहे हैं। यूपी "ईज … Read more

रूस की ओरेश्निक मिसाइल: यूक्रेन पर इस्तेमाल के बाद वैश्विक सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

कीव/मॉस्को रूस ने गुरुवार देर रात यूक्रेन पर किए गए हवाई हमलों में अपनी अत्याधुनिक नई हाइपरसोनिक ‘ओरेश्निक’ मिसाइल का इस्तेमाल किया है। कड़ाके की ठंड के बीच हुए इस हमले को रूस की सैन्य कार्रवाई में एक बड़ा और चिंताजनक कदम माना जा रहा है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है। मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा, “रूसी सशस्त्र बलों ने उच्च-सटीकता वाले लंबी दूरी के जमीनी और समुद्री हथियारों से व्यापक हमला किया, जिसमें ओरेश्निक मोबाइल मीडियम-रेंज मिसाइल सिस्टम भी शामिल था।” हालांकि रूस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ओरेश्निक मिसाइल ने यूक्रेन में किस स्थान को निशाना बनाया। यह एक साल से अधिक समय बाद ऐसा पहली बार है जब मॉस्को ने ओरेश्निक मिसाइल का उपयोग किया है। यह मिसाइल एक साथ कई वॉरहेड ले जाने में सक्षम है और इसमें पारंपरिक या परमाणु हथियार लगाए जा सकते हैं। क्या है ओरेश्निक मिसाइल? ओरेश्निक (Oreshnik) रूस द्वारा विकसित एक नई मध्यम-दूरी की हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) है। रूसी भाषा में 'ओरेश्निक' का अर्थ 'हेज़ल ट्री' (Hazel Tree) होता है। इस मिसाइल की मुख्य विशेषता इसकी हाइपरसोनिक स्पीड है। यह मिसाइल ध्वनि की गति से 10 गुना (Mach 10) से भी अधिक तेज गति से चल सकती है, जो लगभग 12,000 से 13,000 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसकी मारक क्षमता लगभग 3,000 से 5,500 किलोमीटर तक मानी जाती है। यानी यह लगभग पूरे यूरोप तक पहुँच सकती है और उसे अपनी चपेट में ले सकती है। एक साथ कई ठिकाने ध्वस्त करने में सक्षम यह मिसाइल MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicles) तकनीक से लैस है, जिसका अर्थ है कि एक ही मिसाइल हवा में अलग होकर कई अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ हमला कर सकती है। इतना ही नहीं यह मिसाइल पारंपरिक विस्फोटक और परमाणु हथियार, दोनों ले जाने में सक्षम है। यानी यह परमाणु विस्फोट कराने में सक्षम है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अनुसार, अपनी अत्यधिक गति के कारण इस मिसाइल को वर्तमान की किसी भी वायु रक्षा प्रणाली द्वारा रोकना लगभग असंभव है। यह मिसाइल संभवतः रूस की पुरानी RS-26 Rubezh मिसाइल प्रणाली का एक उन्नत संस्करण है। ल्वीव में धमाके, अहम ढांचे को नुकसान रूस ने पहली बार इसका इस्तेमाल 21 नवंबर, 2024 को यूक्रेन के निप्रो (Dnipro) शहर पर हमले के लिए किया था। अब रूस ने यूक्रेन के पश्चिमी शहर ल्वीव (Lviv) क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए फिर से इस मिसाइल का इस्तेमाल किया है। यूक्रेनी वायुसेना के वेस्टर्न एयर कमांड ने कहा कि मिसाइल करीब 13,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बैलिस्टिक मार्ग पर आगे बढ़ रही थी। यह गति आवाज़ की रफ्तार से लगभग 10 गुना अधिक है। रूस के मिसाइल बलों के प्रमुख के अनुसार, ओरेश्निक की रेंज इतनी है कि वह पूरे यूरोप तक पहुंच सकती है। पिछले महीने रूस ने अपने करीबी सहयोगी बेलारूस में ओरेश्निक मिसाइल सिस्टम की तैनाती का वीडियो भी जारी किया था।   यूरोप के लिए गंभीर खतरा रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबीहा ने कहा, “EU और NATO की सीमा के इतने करीब इस तरह का हमला पूरे यूरोपीय महाद्वीप की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। यह ट्रांस-अटलांटिक समुदाय के लिए एक परीक्षा है।” उन्होंने रूस की “लापरवाह कार्रवाई” पर कड़े जवाब की मांग की। उधर, रूस ने कहा कि यह हमला यूक्रेन द्वारा पिछले महीने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आवास को निशाना बनाने की कोशिश के जवाब में किया गया है। हालांकि, CIA और अमेरिकी अधिकारियों का आकलन है कि यूक्रेन ने पुतिन के किसी निजी निवास को निशाना नहीं बनाया था। यह दावा ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके दूत यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए बातचीत में जुटे हैं।

ट्रंप के बदले-बदले सुर: मोदी को लेकर 72 घंटे में क्यों बदला अमेरिका का रुख?

नई दिल्ली भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर हाल ही में अमेरिका की विदेश नीति पर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में कहा था दुनिया यहां तक की अपने देश के साथ डील करने का उनका तरीका काफी अलग है। जयशंकर ने यह भी कहा था कि विदेश नीति इस तरह खुलेआम नहीं होती है, जिस तरीके से प्रेसिडेंट ट्रंप करते हैं। ट्रंप की विदेश नीति पर जयशंकर का यह बयान काफी सटीक बैठता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह विदेश नीति की हर बात खुलेआम बोलते हैं। कई मौकों पर तो देखा गया है कि किसी मुद्दे पर उनकी और उनकी सरकार के स्टैंड में विरोधाभासी होता है।   बीते तीन दिनों में भारत को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के तेवर तल्खी भरे देखे गए हैं। लेकिन उनकी ही सरकार के अधिकारी के बयान ट्रंप के दावों से मेल नहीं खाते हैं। आपको बता दें कि 6 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर अपने पुराने अंदाज में प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने संबंधों का जिक्र किया। ट्रंप ने दावा किया कि भारत पर लगाए गए कड़े टैरिफ (शुल्कों) के बाद पीएम मोदी ने उन्हें फोन किया और बेहद सम्मानजनक लहजे में बातचीत की। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि मोदी ने उनसे पूछा, "सर, क्या मैं आ सकता हूं?" ट्रंप यह दिखाना चाहते थे कि उनकी टैरिफ नीति काम कर रही है और दुनिया के बड़े नेता उनके सामने झुककर समझौता करने को तैयार हैं। हालांकि तीन दिन भी नहीं बीते और उनके दावों की पोल उनकी सरकार से जुड़े लोगों ने खोल दिया। आपको बता दें कि ट्रंप का यह बयान तब आया जब भारत पहले से ही अमेरिकी सामानों पर 50% टैरिफ का सामना कर रहा है। मोदी ने कॉल नहीं किया- सचिव का दावा इसके ठीक तीन दिन बाद, 9 जनवरी को अमेरिका के वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक ने एक पॉडकास्ट में पूरी कहानी ही पलट दी। लुटनिक ने खुलासा किया कि भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा व्यापारिक समझौता होने वाला था, लेकिन वह केवल इसलिए टूट गया क्योंकि पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को फोन नहीं किया। लुटनिक ने कहा, "सब कुछ तैयार था, लेकिन मैंने कहा कि सौदे को फाइनल करने के लिए मोदी को राष्ट्रपति को फोन करना होगा। भारतीय पक्ष इसके लिए असहज था, इसलिए मोदी ने कॉल नहीं किया।" लुटनिक के अनुसार, भारत ने वह ट्रेन मिस कर दी और अब अमेरिका ने इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों के साथ डील कर ली है। आखिर इतनी कंफ्यूज क्यों है US की विदेश नीति? इस विरोधाभास के पीछे कई कारण नजर आते हैं। डोनाल्ड ट्रंप विदेशी नेताओं के साथ अपने निजी संबंधों को हमेशा बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं ताकि वह अपने घरेलू वोटरों को यह दिखा सकें कि वह एक 'स्ट्रॉन्ग मैन' हैं। वहीं, हावर्ड लुटनिक जैसे उनके अधिकारी शुद्ध रूप से 'लेन-देन' की भाषा बोलते हैं। लुटनिक का बयान बताता है कि ट्रंप प्रशासन भारत को 'पहले आओ, पहले पाओ' की नीति पर डील कर रहा है। यानी जो पहले आएगा, उसे अच्छी डील मिलेगी और जो देरी करेगा, उस पर टैक्स बढ़ता जाएगा। अमेरिका चाहता है कि पीएम मोदी खुद फोन करके झुकें और समझौता करें, जिसे लुटनिक ने क्लोजर कॉल कहा। लेकिन भारत अपनी शर्तों पर झुकने को तैयार नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, भारत ने साफ कर दिया है कि वह किसी दबाव में डील साइन नहीं करेगा, खासकर तब जब अमेरिका उसे रूस के साथ संबंधों को लेकर धमका रहा हो। भारत का रुख क्या होगा? वाशिंगटन के इन विरोधाभासी बयानों ने भारत को सतर्क कर दिया है। जहां एक तरफ ट्रंप पीएम मोदी को ग्रेट फ्रेंड बताते हैं, वहीं उनकी नीतियां भारत के निर्यात को नुकसान पहुंचा रही हैं। भारत अभी भी रूस से सस्ते तेल की खरीद पर अड़ा है। अमेरिका के इस सख्त रुख के बीच, भारत अब चीन के साथ अपने सीमा विवाद को सुलझाने और व्यापारिक रिश्तों को फिर से संतुलित करने की कोशिश कर सकता है, जैसा कि हालिया कूटनीतिक हलचलों से संकेत मिले हैं।  

वेनेजुएला से ईरान तक ‘डीप स्टेट’ की गूंज, आखिर किसे कहते हैं डीप स्टेट

नई दिल्ली वेनेजुएला में फिलहाल अमेरिकी नियंत्रण है। वहां से उत्पादन होने वाले तेल पर भी अमेरिका का ही कब्जा है और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो अगवा करके रखे गए हैं। उनके खिलाफ अमेरिकी अदालत में मुकदमा चल रहा है। इसी बीच ईरान में अयातुल्लाह खामेनेई के शासन के खिलाफ आंदोलन चल रहे हैं। सीरिया में सरकार बदल गई है और अब अमेरिका से उसके रिश्ते बेहतर हैं। बांग्लादेश में फिलहाल शेख हसीना निर्वासित हैं और वहां अंतरिम शासक के तौर पर मोहम्मद युनूस ने कमान संभाल रखी है। वहीं वेनेजुएला में चर्चा है कि अमेरिका अपने ही किसी करीबी को सत्ता पर बिठाएगा। इन देशों में जिस तरह से नाटकीय घटनाक्रम के तहत सत्ताओं का परिवर्तन हुआ है। उससे एक बार फिर से डीप स्टेट की चर्चा तेज है। आखिर क्या है यह डीप स्टेट…   डीप स्टेट का आशय उस स्थिति से होता है, जब किसी देश की शासन व्यवस्था में बाहरी तत्वों या उनसे प्रेरित लोगों की घुसपैठ हो जाए। इसके अलावा डीप स्टेट उस स्थिति को भी कहा जाता है, जब किसी अन्य ताकतवर देश से प्रेरित लोग स्थानीय जनता को सरकार के खिलाफ उकसा दें और सत्ता परिवर्तन की स्थिति पैदा करें। डीप स्टेट नाम से ही आशय है कि जिसकी जड़ें गहरी हों। आमतौर पर डीप स्टेट को अमेरिका से जोड़कर देखा जाता है, जो अकसर दुनिया के तमाम देशों में इसलिए भी सरकारें बदलवाना चाहता है कि वे उसके हित में काम करें। ईरान में फिलहाल रजा पहलवी का नाम चर्चा में है, जो निर्वासित क्राउन प्रिंस के तौर पर देश से बाहर हैं। अभी जो आंदोलन ईरान की सत्ता के खिलाफ चल रहे हैं, उनमें रजा पहलवी का नाम भी उछल रहा है। पहलवी के अमेरिका से करीबी संबंध रहे हैं। इसलिए ईरान को लेकर भी डीप स्टेट की चर्चा हो रही है। डीप स्टेट का आशय किसी देश की सत्ता, खुफिया एजेंसियों और सैन्य बलों को प्रभावित करने से है। अकसर ऐसा उदारवादी मूल्यों को बढ़ावा देने के नाम पर किया जाता है। यह प्रचार किया जाता है कि कैसे सरकार अभिव्यक्ति की आजादी को समाप्त कर रही है और कट्टरता बढ़ रही है। इसके अतिरिक्त भ्रष्टाचार जैसे मसले भी मुद्दा बना दिए जाते हैं। कैसे डीप स्टेट बदलता है नैरेटिव इस संबंध में स्टीफन किन्ज़र की पुस्तक Overthrow: America's Century of Regime Change from Hawaii to Iraq विस्तार से प्रकाश डालती है। डीप स्टेट के कारनामों में थिंक टैंक, एनजीओ और पक्षपाती मीडिया का भी इस प्रकार प्रयोग किया जाता है कि देश में नैरेटिव बदले। आम लोगों में सरकार के प्रति धारणा बदले और वह आंदोलन की शक्ल ले ले। अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, जब पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन के पश्चात इमरान खान ने ऐसे ही आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि अमेरिका के इशारे पर मेरी सरकार के खिलाफ पूरा विपक्ष और सेना एकजुट हुए हैं। फिर जिस तरह से आसिम मुनीर की अमेरिका से करीबी दिखी है, उसने भी ऐसे संदेहों को बल दिया है।