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मद्रास HC का सख्त रुख, कार्तिकेय दीपम विवाद में तमिलनाडु सरकार से कहा- राजनीति से प्रेरित न हो फैसला

चेन्नई  मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने कार्तिकेय दीपम से जुड़े मामले में सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा है. अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति से जुड़े मुद्दों के लिए सीधे तौर पर सरकार उत्तरदायी है. बेंच ने जोर देकर कहा कि सरकार को अपने फैसले राजनीतिक आधार पर नहीं लेने चाहिए. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि 'दीपथून' (Deepathun) उस स्थान पर स्थित है, जो देवस्थानम (Devasthanam) की संपत्ति के अंतर्गत आता है. कोर्ट ने स्टालिन सरकार को नसीहत देते हुए कहा, "किसी भी विवाद को सुलझाते समय निष्पक्षता जरूरी है. सार्वजनिक शांति को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर सरकार की भूमिका अहम होती है और उसे राजनीति से ऊपर उठकर काम करना चाहिए." एकल न्यायाधीश के पिछले आदेश को सही ठहराते हुए कोर्ट ने प्रशासन को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सचेत किया. देवस्थानम की जमीन पर स्थित है दीपथून विवादित स्थल के मालिकाना हक पर स्पष्टता देते हुए मदुरै बेंच ने माना कि दीपथून देवस्थानम की भूमि पर स्थित है. कोर्ट के इस फैसले से मालिकाना हक को लेकर चल रही बहस पर विराम लग गया है. कोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया है कि वह सार्वजनिक शांति सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए और यह सुनिश्चित करे कि धार्मिक परंपराओं और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बना रहे. क्या है विवाद? तमिलनाडु की थिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी पर सुब्रमण्या स्वामी मंदिर और सिकंदर बादशाह दरगाह स्थित हैं. विवाद का केंद्र दीपाथून स्तंभ (दरगाह से 15 मीटर दूर) पर कार्तिगै दीपम जलाने का है. हिंदुत्व संगठनों ने अनुमति मांगी, मद्रास हाईकोर्ट ने 2025 में छूट दे दी. तमिलनाडु सरकार ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर लागू नहीं किया, जिससे झड़पें हुईं.  अब कोर्ट की डिवीजन बेंच ने एकल जज के आदेश को बरकरार रखा और सरकार के रवैये पर सख्त टिप्पणी की है. 

उत्तर भारत में ठंड का कहर जारी, हिमाचल में सबसे सर्द रात, दिल्ली में फ्लाइट्स प्रभावित

नई दिल्ली उत्तर भारत के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में सोमवार को कड़ाके की ठंड और बर्फबारी का दौर जारी रहा. हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति और कश्मीर के गुलमर्ग में पारा फ्रीजिंग पॉइंट से 10 डिग्री नीचे दर्ज किया गया. हिमाचल के कोक्सर में 2 सेंटीमीटर ताजी बर्फबारी हुई, जिससे नदियां और झरने जमने लगे हैं.  दिल्ली में भी अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे रहा और मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए घने कोहरे की चेतावनी जारी की है. हिमाचल और कश्मीर के ऊंचे इलाकों में तापमान गिरने से जनजीवन प्रभावित हुआ है. लाहौल और स्पीति के साथ-साथ गुलमर्ग में तापमान शून्य से 10 डिग्री नीचे चला गया है.  बर्फ में तब्दील हुईं नदियां… भीषण ठंड के कारण पहाड़ों पर पानी की धाराएं, सहायक नदियां और झीलें बर्फ में तब्दील हो गई हैं. चंबा के पांगी और लाहौल के कुछ हिस्सों में नए साल से ही बर्फ की चादर बिछी हुई है. कश्मीर का पहलगाम भी माइनस 4.8 डिग्री के साथ 'चिल्ला-ए-कलां' की सख्त ठंड झेल रहा है. हवाई यात्राओं पर कोहरे का साया राजधानी दिल्ली में कड़ाके की ठंड के साथ कोहरे ने दस्तक दे दी है. दिल्ली एयरपोर्ट ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे उड़ानों की जानकारी के लिए एयरलाइंस से संपर्क करें, क्योंकि कोहरे के कारण देरी हो सकती है.  मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले दो दिनों में दिल्ली में घना कोहरा छाने की संभावना है. सोमवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्री दर्ज किया गया, और आने वाले दिनों में इसके 6 से 8 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है. हरियाणा-पंजाब में शीतलहर का येलो अलर्ट हरियाणा और पंजाब के कई हिस्सों में भी तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है. सूबे का नारनौल 3 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ठंडा स्थान रहा, जबकि हिसार में पारा 3.6 डिग्री तक गिर गया. मौसम विभाग ने सोलन, कांगड़ा, बिलासपुर और मंडी जैसे जिलों में घने कोहरे के लिए येलो अलर्ट जारी किया है. निचले पहाड़ी इलाकों में भारी पाला पड़ने से सड़कें फिसलन भरी हो गई हैं, जिससे वाहन चलाना चुनौतीपूर्ण हो गया है.

कांग्रेस के सीनियर नेता सुरेश कलमाड़ी का निधन, लंबी बीमारी के बाद चले गए

 नई दिल्ली कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री और सीनियर नेता सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार सुबह 81 साल की उम्र में निधन हो गया. वे कई दिनों से बीमार चल रहे थे. पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, उनका अंतिम संस्कार पुणे के वैकुंठ धाम श्मशान घाट में दोपहर 3 बजे किया जाएगा. बता दें कि कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले में नाम आने के बाद कलमाड़ी ने अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. इस विवाद ने उस वक्त पूरे देश में बहस और राजनीतिक उथल-पुथल मचा दी थी. सुरेश कलमाड़ी के परिवार में उनकी पत्नी, उनका बेटा और बहू, दो शादीशुदा बेटियां और दामाद, और उनके पोते-पोतियां हैं. सुरेश कलमाड़ी कौन थे? सीनियर कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी कांग्रेस के उन बड़े नेताओं में शामिल थे, जिनका आलाकमान के साथ अच्छा संबंध माना जाता था. वे रेल राज्य मंत्री रह चुके हैं और इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) के अध्यक्ष भी थे. पुणे के एक लोकप्रिय राजनीतिक नेता, कलमाडी कई बार शहर से लोकसभा के लिए चुने गए थे. कई साल तक, उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कई भूमिकाएं निभाईं और लंबे समय तक राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रशासन से जुड़े रहे. हालांकि, 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स भ्रष्टाचार मामले को लेकर IOA में उनके कार्यकाल पर सवाल उठे और उन पर फंड के कथित दुरुपयोग के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए. उन्हें अप्रैल 2011 में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया था. कॉमनवेल्थ घोटाले से छवि को लगा झटका  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार को महाराष्ट्र के पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में 81 साल की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. सुबह 3:30 बजे उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा. सूत्रों के अनुसार, वैकुंठ श्मशान भूमि में उनका अंतिम संस्कार दोपहर दो बजे के क़रीब किया जाएगा. सुरेश कलमाड़ी का जन्म 1 मई 1944 को पुणे में हुआ था. उन्होंने 1960 के दशक की शुरुआत में नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA) में एंट्री ली और भारतीय वायु सेना में पायलट के रूप में सेवा दी.  1964 से 1972 तक उन्होंने भारत की सेवा की, जिसमें 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध भी उनकी भागीदारी रही. 1974 में वायु सेना से समय से पहले सेवानिवृत्त होकर उन्होंने राजनैतिक सफर शुरू किया. स्क्वाड्रन लीडर के रैंक के पद पर रहते हुए उन्होंने सेवानिवृत्त ली थी.   

बांग्लादेश में 18 दिन में छठा मामला: हिंदू युवक की हत्या, अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ बढ़ रही हिंसा

ढाका बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. ताजा मामला नरसिंदी जिले का है, जहां किराना व्यापारी मणि चक्रवर्ती की बदमाशों ने हत्या कर दी. यह घटना सोमवार रात करीब 8 बजे की बताई जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मणि चक्रवर्ती चारसिंदुर बाज़ार में अपनी किराना दुकान चलाते थे. चारसिंदुर बाजार, नरसिंदी के पलाश उपजिला क्षेत्र में आता है. मणि चक्रवर्ती साधरचर यूनियन, शिबपुर उपजिला के रहने वाले थे और मदन ठाकुर के बेटे थे. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रोज की तरह मणि चक्रवर्ती अपनी दुकान पर बैठे थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने अचानक उन पर हमला कर दिया. इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना के बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और मणि चक्रवर्ती को बचाने की कोशिश करते हुए अस्पताल ले गए, लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई. इस वारदात के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है. स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि मणि चक्रवर्ती एक शांत और सौम्य स्वभाव के व्यक्ति थे और उनकी जानकारी में उनका किसी से कोई विवाद नहीं था. खुले बाजार में इस तरह की बेरहमी से की गई हत्या ने व्यापारियों और आम लोगों के बीच असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है. स्थानीय समुदाय के जागरूक लोगों ने इस घटना पर गंभीर चिंता जताई है. उनका कहना है कि अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के एक व्यापारी की इस तरह सार्वजनिक तौर पर हत्या बेहद चिंताजनक है. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि हमलावरों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए.

रूफ-टॉप सोलर लक्ष्य से दूर बांसवाड़ा, PM सूर्यघर योजना में 11.47% ही उपलब्धि

बांसवाड़ा प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत रूफ-टॉप सोलर स्थापना में राजस्थान का बांसवाड़ा जिला लगातार पिछड़ता नजर आ रहा है। अजमेर डिस्कॉम के बांसवाड़ा वृत्त को इस वर्ष 6,365 रूफ-टॉप सोलर संयंत्र लगाने का लक्ष्य मिला था, लेकिन अब तक केवल 730 संयंत्र ही स्थापित हो पाए हैं। यह कुल लक्ष्य का महज 11.47 प्रतिशत है, जो डिस्कॉम के औसत 23 प्रतिशत से भी काफी कम है।डिस्कॉम रिकॉर्ड के अनुसार जिले में अब तक 3,230 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो लक्ष्य का करीब 50 प्रतिशत हैं, लेकिन इनमें से 1,036 आवेदन स्थापना के लिए लंबित हैं। इसके अलावा 35 मामले लोड वेरिफिकेशन के स्तर पर अटके हुए हैं।   ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे बड़ी समस्या ऑनलाइन प्रक्रिया और भुगतान को लेकर सामने आ रही है। उपभोक्ता डिजिटल औपचारिकताएं पूरी नहीं कर पा रहे, वहीं उपखंड स्तर पर जागरूकता शिविरों की कमी भी बड़ी वजह है। अधिकारी स्तर पर अपेक्षित सक्रियता नहीं होने से योजना की गति धीमी बनी हुई है। शहरी क्षेत्र में स्थिति और जटिल है। बांसवाड़ा शहर में मीटरिंग, बिलिंग और रिकवरी का जिम्मा सिक्योर मीटर्स कंपनी के पास है, जिसका सॉफ्टवेयर डिस्कॉम के सिस्टम से अब तक लिंक नहीं हो पाया है। इस तकनीकी अड़चन के कारण राज्य सरकार की सब्सिडी का लाभ नहीं मिल पा रहा, जिससे लोग रूफ-टॉप सोलर लगवाने से पीछे हट रहे हैं। फिलहाल जिले में पांच सोलर वेंडर रजिस्टर्ड हैं, जबकि अन्य जिलों के वेंडर एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। औसतन हर महीने 100-125 संयंत्र ही लग पा रहे हैं। अधीक्षण अभियंता भगवान दास ने बताया कि जल्द ही ब्लॉक-स्तरीय कैंप लगाकर प्रक्रिया तेज की जाएगी। वहीं सिक्योर मीटर्स के प्रभारी विराग शर्मा ने कहा कि सॉफ्टवेयर लिंक के लिए जरूरी अपडेट पर काम चल रहा है और कुछ ही दिनों में समस्या दूर कर ली जाएगी।  

साउथ कोरिया का नया मास्टरपिस—KF-21 ‘बोरामे’ फाइटर जेट: तेजस से बेहतर और F-35 से सस्ता, 2300 KM/घंटा की स्पीड

सियोल  साउथ कोरिया ने अपना पहला स्वदेशी फाइटर जेट KF-21 ‘बोरामे’ तैयार कर लिया है. इसकी पहली डिलीवरी कोरियन एयरफोर्स को इसी साल शुरू होने जा रही है. यह सिर्फ एक विमान नहीं है. यह साउथ कोरिया की आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. अब उसे अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना होगा. यह 4.5 जनरेशन का फाइटर जेट है. यह किसी भी दुश्मन को पल भर में राख कर सकता है. कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने इसे बहुत आधुनिक बनाया है. इसमें रडार और मिसाइल सिस्टम बहुत एडवांस हैं. यह खबर सुनते ही चीन और नॉर्थ कोरिया में खलबली मच गई है. आइए समझते हैं कि यह विमान इतना खास क्यों है. यह भारत के तेजस से कितना अलग और ताकतवर है. क्या साउथ कोरिया का KF-21 आसमान में चीन और नॉर्थ कोरिया की दादागिरी खत्म कर देगा? साउथ कोरिया ने साल 2010 में एक सपना देखा था. वह अपना खुद का फाइटर जेट बनाना चाहता था. अब साल 2026 में यह सपना पूरा हो गया है. KF-21 बोरामे अब अपनी पहली उड़ान भरने को तैयार है. यह विमान पुराने F-4 और F-5 विमानों की जगह लेगा. यह दो इंजन वाला मल्टीरोल फाइटर जेट है. इसे बनाना साउथ कोरिया का सबसे कठिन प्रोजेक्ट था. इसमें सालों का निवेश और मेहनत लगी है. अब साउथ कोरिया को किसी दूसरे देश से विमान नहीं खरीदने होंगे. इससे उसकी सैन्य शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी. चीन के बढ़ते खतरे को देखते हुए यह बहुत जरूरी था.     KF-21 की अधिकतम रफ्तार लगभग 2,300 किलोमीटर प्रति घंटा है. यह इसे दुनिया के सबसे तेज विमानों की लिस्ट में शामिल करती है. आखिर KF-21 बोरामे में ऐसी कौन सी गुप्त तकनीक है?     KF-21 को 4.5 जनरेशन का फाइटर माना जा रहा है. इसमें स्टील्थ यानी रडार से बचने की क्षमता है.     इसका डिजाइन बहुत ही आधुनिक और शार्प है. इसमें AESA रडार लगाया गया है. यह रडार बहुत दूर से दुश्मन को पकड़ लेता है.     इसमें फ्लाई-बाय-वायर कंट्रोल सिस्टम भी मौजूद है.     हालांकि इसमें अभी इंटरनल वेपन बे नहीं है. यानी मिसाइलें बाहर की ओर ही लगी होंगी. लेकिन भविष्य में इसे और अपडेट किया जाएगा.     यह विमान F-16 से ज्यादा ताकतवर है. वहीं यह F-35 से काफी सस्ता और किफायती है. 4.5 Gen का मतलब क्या है? 4.5 जनरेशन का मतलब है कि यह विमान चौथी पीढ़ी से बेहतर है. लेकिन यह पांचवीं पीढ़ी के पूरी तरह स्टील्थ विमानों से थोड़ा पीछे है. यह उन देशों के लिए बेस्ट है जो कम बजट में हाई टेक्नोलॉजी चाहते हैं. भारत का ‘तेजस’ और तुर्की का ‘कान’ इसके सामने टिक पाएंगे? दुनिया भर में कई देश अपने विमान बना रहे हैं. भारत का तेजस मार्क 1A अभी शुरुआती चरण में है. तेजस मार्क 2 और AMCA पर अभी काम चल रहा है. वहीं तुर्की का KAAN भी अभी टेस्टिंग मोड में है. लेकिन साउथ कोरिया इन सब से आगे निकल गया है. KF-21 ने 2000 घंटे से ज्यादा की उड़ान भर ली है. इसकी टेस्टिंग बहुत ही पारदर्शी और सफल रही है. चीन का J-20 भी एक बड़ा खिलाड़ी है मगर चीन अपनी तकनीक को हमेशा गुप्त रखता है. क्या KF-21 दुनिया के फाइटर जेट मार्केट में अमेरिका के दबदबे को सीधी चुनौती देने वाला है? अब कई देश KF-21 को खरीदना चाहते हैं. अमेरिका के F-35 को खरीदना बहुत महंगा पड़ता है. साथ ही उसकी मेंटेनेंस भी बहुत मुश्किल है. KF-21 एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है. इंडोनेशिया इस प्रोजेक्ट में साउथ कोरिया का पार्टनर है. फिलीपींस और मलेशिया भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं. मिडिल ईस्ट के कई देश भी इसे खरीदना चाहते हैं. साउथ कोरिया का डिफेंस मार्केट तेजी से बढ़ रहा है. उसके K2 टैंक और K9 तोपें पहले ही हिट हैं. अब KF-21 भी दुनिया भर में एक्सपोर्ट होने को तैयार है.

होली पर ट्रेनों में सीटें फुल, दिल्ली, मुंबई और गुजरात से यूपी-बिहार जाने वाली ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल

लखनऊ  भारतीय रेलवे त्योहारी सीजन में लगातार स्पेशल ट्रेनों का परिचालन करता है. अपने घरों से दूर रहकर रोजी-रोटी कमाने वाले लोग होली, दिवाली, दशहरा और छठ पूजा जैसे त्योहारों पर अपने घर तक पहुंच सकें, इसके लिए खास इंतजाम किए जाते हैं. लेकिन तमाम स्पेशल ट्रेनों के परिचालन के बावजूद रेगुलर ट्रेनों में इन सभी त्योहारों के दौरान जबरदस्त भीड़ दिखाई देती है और कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल होता है. इस बार होली में भी यही हालत नजर आ रहे हैं. रंगों का त्योहार होली इस साल 4 मार्च को मनाया जाएगा लेकिन 2 महीने पहले ही दिल्ली, मुंबई और गुजरात की तरफ से चलकर यूपी-बिहार आने वाली ट्रेनों में सीटें अभी से फुल हो चुकी हैं. कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल लग रहा है. गौरतलब है कि छठ महापर्व की तरह होली भी एक ऐसा त्योहार है, जब दिल्ली, मुंबई और गुजरात जैसे शहरों में रहकर नौकरी व्यवसाय करने वाले यूपी, बिहार, झारखंड और बंगाल के तमाम लोग अपने घरों को लौटते हैं. लंबी दूरी के लिए अपने घर तक पहुंचाने का सबसे सुविधाजनक साधन ट्रेन ही होता है लेकिन इस बार होली के दौरान ट्रेनों में कंफर्म टिकट की जबरदस्त मारामारी दिखाई दे रही है. दिल्ली-यूपी होते हुए बिहार पहुंचने वाली ट्रेनों का हाल अगर हम दिल्ली से यूपी होते हुए बिहार पहुंचने वाली ट्रेनों की बात करें तो फरक्का एक्सप्रेस, पुरुषोत्तम एक्सप्रेस, मगध एक्सप्रेस, पूर्वा एक्सप्रेस, संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, श्रमजीवी एक्सप्रेस, नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस, ब्रह्मपुत्र मेल, दुरंतो एक्सप्रेस, सीमांचल एक्सप्रेस सहित तमाम ट्रेनों में स्लीपर क्लास के सभी टिकट बुक हो चुके हैं. इन सभी ट्रेनों में लंबी वेटिंग दिखाई दे रही है. यही हाल थर्ड और सेकंड एसी का भी है. कई ट्रेनों में वेटिंग टिकट भी उपलब्ध नहीं अगर हम मुंबई से यूपी, बिहार की तरफ जाने वाली ट्रेनों की बात करें तो इन ट्रेनों में भी होली के दौरान कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल दिखाई दे रहा है. लोकमान्य तिलक पाटलिपुत्र एक्सप्रेस, एलटीटी गोड्डा एक्सप्रेस, एलटीटी गुवाहाटी एक्सप्रेस, एलटीटी डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस भागलपुर एक्सप्रेस, एलटीटी राजगीर एक्सप्रेस, बांद्रा टर्मिनस पटना एक्सप्रेस, वास्कोडिगामा पटना एक्सप्रेस और एलटीटी अगरतला एक्सप्रेस सहित तमाम ट्रेनों में सभी सीटें फुल दिखाई दे रही हैं. यही नहीं कई ट्रेनों में तो वेटिंग टिकट भी उपलब्ध नहीं है, यानी नो रूम दिखाई दे रहा है. फरवरी के आखिरी हफ्ते से होली तक बुकिंग फुल इसी तरह अगर हम गुजरात से यूपी बिहार पहुंचने वाली ट्रेनों की बात करें, तो अहमदाबाद सिलचर एक्सप्रेस, अजीमाबाद एक्सप्रेस, अहमदाबाद आसनसोल एक्सप्रेस, अहमदाबाद पटना एक्सप्रेस, उधना दानापुर एक्सप्रेस और सूरत भागलपुर एक्सप्रेस देसी ट्रेनों में सभी फरवरी के आखिरी सप्ताह से 4 मार्च होली तक सभी सीटें फुल हैं. इस रूट की भी कई ट्रेनों में वेटिंग टिकट तक उपलब्ध नहीं है. यही हाल दिल्ली से मुंबई, लखनऊ और वाराणसी की तरफ जाने वाली ट्रेनों का भी है. इन रेल रूट पर चलने वाली तमाम ट्रेनों में स्लीपर और एसी क्लास की सभी टिकट अभी से बुक हो चुके हैं. हालांकि, इन रूट की ट्रेनों में राहत की बात यह है कि वेटिंग बहुत लंबी दिखाई नहीं दे रही है. फिलहाल होली के दौरान यूपी, बिहार की तरफ जाने वाली ट्रेनों में लंबी वेटिंग दिखाई दे रही है. ऐसे में अब लोगों की नजरें रेलवे की तरफ टिक गई हैं कि भारतीय रेलवे कब इन रेल रूट्स पर होली स्पेशल ट्रेनें चलाने की घोषणा करता है.

हरिद्वार को सनातन नगरी घोषित करने के बाद, गैर हिंदुओं के प्रवेश पर क्या हो सकता है प्रतिबंध?

हरिद्वार अगले साल जनवरी में हरिद्वार में प्रस्तावित कुंभ मेला 2027 से पहले उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार हरिद्वार-ऋषिकेश नगर निगम क्षेत्र को सनातन पवित्र नगरी घोषित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. सरकार के इस संभावित कदम ने धार्मिक, सियासी और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है. सवाल उठ रहा है कि क्या गैर हिंदुओं का हरिद्वार आना पूरी तरह बैन हो जाएगा या फिर यह सिर्फ कुंभ और चुनिंदा धार्मिक क्षेत्रों तक सीमित रहेगा? आइये इसे थोड़ा विस्‍तार से समझते हैं.. आखिर ये प्रस्ताव क्या है और क्यों आया? सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा बॉयलॉज में हर की पैड़ी और कुछ चुनिंदा घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर जो प्रतिबंध है, उसे बढ़ाकर हरिद्वार के सभी 105 गंगा घाटों और पूरे कुंभ क्षेत्र तक किया जा सकता है. इस दायरे में हरिद्वार के साथ-साथ ऋषिकेश को भी शामिल किए जाने पर विचार चल रहा है. सरकार का तर्क है कि कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान क्षेत्र की पवित्रता, धार्मिक मर्यादा और सुरक्षा बनाए रखना प्राथमिकता है. साधु-संत और अखाड़ा परिषद लंबे समय से यह मांग करते रहे हैं कि हरिद्वार को विधिवत पवित्र धर्म नगरी का दर्जा मिले. सूत्र बताते हैं कि यह प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और इस पर संतों, अखाड़ा परिषद तथा हरिद्वार में धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन करने वाली प्रमुख संस्था श्री गंगा सभा से चर्चा की जा रही है. संतों की मांग सिर्फ घाटों तक सीमित नहीं है, बल्कि गैर हिंदुओं के रात में ठहरने पर भी प्रतिबंध की बात उठाई जा रही है, ताकि धार्मिक आयोजनों के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था या कथित धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कवायद के पीछे की मंशा साफ करते हुए कहा कि हरिद्वार मां गंगा, ऋषि-मुनियों और संत परंपरा की पवित्र भूमि है. वहां से लगातार मांग उठ रही है कि उसकी पवित्रता और धार्मिक पहचान बनी रहे. सरकार सभी पहलुओं, पुराने कानूनों, धार्मिक मान्यताओं और व्यावहारिक चुनौतियों का अध्ययन कर रही है और उसी के आधार पर आगे कदम उठाएगी. क्या गैर हिंदुओं पर हमेशा के लिए रोक लगेगी? इसके बाद अब जो सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है, वह है कि क्‍या गैर हिंदुओं पर हमेशा के लिए यहां रोक लग जाएगी? अभी तक जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक पूरे शहर में स्थायी और पूर्ण प्रतिबंध का कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है. चर्चा मुख्य रूप से कुंभ क्षेत्र और गंगा घाटों तक प्रतिबंध बढ़ाने को लेकर है. चूंकि प्रस्ताव विचाराधीन है, यानी इसमें बदलाव, सीमाएं और शर्तें तय हो सकती हैं. अगर दूसरे शब्दों में बात की जाए तो यह जरूरी नहीं कि गैर हिंदुओं का हरिद्वार आना पूरी तरह बैन हो जाए, बल्कि धार्मिक आयोजनों और पवित्र स्थलों की सीमा में नियम सख्त किए जा सकते हैं. हालांकि अभी कुछ भी साफ नहीं है. विपक्ष का विरोध और गंगा-जमुनी तहजीब की दलील कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का तीखा विरोध किया है. कांग्रेस की नेशनल मीडिया पैनलिस्ट सुजाता पॉल का कहना है कि यह कदम गंगा-जमुनी तहजीब को नुकसान पहुंचाने वाला और चुनावी ध्रुवीकरण की राजनीति का हिस्सा है. उनके मुताबिक, कुंभ मेले में वैसे भी हिंदू श्रद्धालुओं की भीड़ होती है, लेकिन भारतीय परंपरा में विभिन्न समुदायों का सहयोग और सहभागिता हमेशा रही है जैसा कि अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों पर भी देखा जाता है. वहीं, महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी और हिंदूवादी नेता नितिन गौतम जैसे नेताओं का कहना है कि कुंभ क्षेत्र को गैर हिंदू प्रतिबंधित घोषित करना सुरक्षा और धार्मिक गरिमा के लिहाज से जरूरी है. उनका तर्क है कि कुंभ जैसे महाआयोजन में किसी भी प्रकार की साजिश या अव्यवस्था की आशंका को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया जाना चाहिए.

एक्सप्रेसवे से जुड़े किसानों के लिए राहत खबर, कैमूर में 6 जनवरी को लगेगा मुआवजा शिविर

भभुआ भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य को गति देने के लिए जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। डीएम के निर्देशानुसार अधिग्रहित भूमि के मुआवजा भुगतान में तेजी लाने के लिए जिले के विभिन्न अंचलों में छह जनवरी से आठ जनवरी 2026 तक विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। शिविर का मुख्य उद्देश्य रैयतों के दस्तावेजों का मौके पर ही सत्यापन कर भुगतान की प्रक्रिया को तत्काल निष्पादित करना है। प्रशासन द्वारा जारी रोस्टर के अनुसार जिले के पांच अंचलों के 73 गांवों (मौजा) के लिए शिविर स्थल निर्धारित किए गए हैं। शिविर पूर्वाह्न 10:30 बजे से शुरू होगा।   कहां किस दिन लगेगा शिविर अंचल रामपुर     रामपुर, अकोढ़ी, टेटिहां, करिगाई, नरजो, चमरियांव के लिए 06 जनवरी पंचायत भवन, अकोढ़ी     विजरा, झलखोरा, निस्जा, पाली, पतीला, रामपुर के लिए सात जनवरी पंचायत भवन, रामपुर     लोहंदी, गंगापुर, बसनी, परमालपुर के लिए आठ जनवरी को सामुदायिक भवन, ठकुरहट में शिविर लगेगा। अंचल भभुआ     भभुआ, बेतरी, कुड़ासन, ढढ़नियां, गोडहन, दुमदुम – छह जनवरी पंचायत सरकार भवन, दुमदुम     सिवों, बिलारो – सात जनवरी- पंचायत भवन, सिवों     माधोपुर, सेमरिया, धरवार, सेमरा – आठ जनवरी, पंचायत भवन, रूद्रवार कला अंचल भगवानपुर     भगवानपुर, ओरा, दुबौली, बहोरनपुर – छह जनवरी संसाधन ढेहरियां     ददरा, कोचाड़ी, कोचड़ा, कुसडेहरा – सात जनवरी – पंचायत सरकार भवन, पढौती     बबुरा, ढेकहरी, भैरोपुर – आठ जनवरी – पंचायत सरकार भवन, पढौती अंचल चांद     चाँद गोई (सहबाजपुर टोला), बैरी, गेहूंआ – छह जनवरी – पंचायत भवन, गोई     सिहोरियां, जिगना, खैटी, कड़ियरा – सात जनवरी – सामुदायिक भवन, सिहोरिया     औरईया, भेरी, लहुरी बैरी, सरैला, बघैला – आठ जनवरी- प्रखंड सभागार, चांद अंचल चैनपुर     चैनपुर, सिहोरा, विरना, करवौंदिया, दुलहरा – छह जनवरी, पंचायत भवन, जगरिया     मानपुर, गाजीपुर, विउर, खखड़ा, सिरबिट – सात जनवरी पंचायत भवन, जिगना, सामुदायिक भवन, सिरबिट     सिकन्दरपुर, डड़वा, मसोई खूर्द, मसोई कला – आठ जनवरी – सामुदायिक भवन, सिकन्दरपुर     चैनपुर सिहोरा, विरना, करवौंदिया -छह जनवरी – पंचायत भवन, जगरीया भुगतान के पूर्व होगी जमीन की मापी जिला भू-अर्जन कार्यालय के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे एलए खतियान और पंचाट सूची के साथ मौके पर मौजूद रहेंगे। शिविर में ही अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मचारी जमीन के कागजातों का मिलान करेंगे। भुगतान से पूर्व जमीन की भौतिक मापी भी सुनिश्चित की जाएगी ताकि किसी भी त्रुटि की गुंजाइश न रहे। अनुमंडल पदाधिकारी और भूमि सुधार उप समाहर्ता स्वयं इन कैंपों की निगरानी और अध्यक्षता करेंगे। वाराणसी और सासाराम परियोजना निदेशालय के अधिकारी भी कैंप में मौजूद रहेंगे ताकि तकनीकी बाधाओं को तुरंत दूर किया जा सके। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी कैंप स्थलों पर सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं। अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे गांव-गांव में लाउडस्पीकर और अन्य माध्यमों से इसका व्यापक प्रचार-प्रसार कराएं। संबंधित जमीन मालिकों (रैयतों) से अपील की गई है कि वे अपने सभी आवश्यक दस्तावेज (लगान रसीद, वंशावली, आधार, बैंक पासबुक आदि) के साथ कैंप में पहुंचें ताकि उनके मुआवजे का भुगतान त्वरित गति से हो सके।  

चुनाव से पहले बांग्लादेश में हलचल, खुफिया एजेंसियों का अलर्ट—नेपाल बॉर्डर से भारत में घुसपैठ की कोशिश

ढाका खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि बांग्लादेश में होने वाले चुनावों से पहले भारत में अवैध घुसपैठ की कोशिशें तेज हो रही हैं, और इसके लिए अब नेपाल सीमा को नया रास्ता बनाया जा रहा है। वर्ष 2025 में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें बांग्लादेशी नागरिकों को नेपाल के रास्ते भारत में घुसपैठ करते हुए सुरक्षा बलों ने पकड़ा है। अधिकारियों के मुताबिक यह एक नया ट्रेंड है। भारत-बांग्लादेश सीमा पर कड़ी निगरानी के कारण तस्कर (टाउट्स) अब नेपाल मार्ग का सहारा ले रहे हैं। ये तस्कर बांग्लादेश में मौजूद नेटवर्क और भारत में सक्रिय उनके सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में फैली हिंसा ने भारतीय एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है। इस दौरान पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिम बंगाल में घुसपैठ की कई कोशिशें नाकाम की गईं। इन्हीं नाकामियों के बाद तस्करों ने नेपाल सीमा को वैकल्पिक रास्ते के रूप में चुना।खुफिया एजेंसियों के अनुसार, बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल क्षेत्र से सटी नेपाल सीमा का इस्तेमाल सबसे अधिक किया जा रहा है। फिलहाल संख्या कम है, क्योंकि तस्कर “हालात को परख” रहे हैं, लेकिन अधिकारियों ने चेताया है कि रास्ता सफल होते ही बड़े पैमाने पर घुसपैठ की कोशिशें हो सकती हैं।   इसके अलावा, बहराइच, गोंडा और बलरामपुर जिलों के रास्ते भी अवैध घुसपैठ के प्रयास किए गए हैं। हालात को देखते हुए सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने नेपाल सीमा पर 1,700 जवानों की अतिरिक्त तैनाती की है और नेपाल से सटे जंगलों में गहन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ ही पीलीभीत, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज में कुल 9,000 जवान तैनात किए गए हैं। एक इंटेलिजेंस ब्यूरो अधिकारी ने कहा कि नेपाल सीमा गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। “हमें जानकारी मिली है कि बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में शरण लिए हुए हैं और सही मौके का इंतजार कर रहे हैं।” अधिकारियों का दावा है कि घुसपैठ का उद्देश्य केवल अवैध बसावट नहीं, बल्कि जनसांख्यिकीय बदलाव और आतंकी मॉड्यूल तैयार करना भी है। खुफिया एजेंसियों ने चेताया है कि आईएसआई बांग्लादेश में आतंकी ढांचे को दोबारा सक्रिय कर रहा है, और नेपाल की खुली सीमा का फायदा उठाकर बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में आतंकियों को भेजने की कोशिश हो रही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद आईएसआई ने अपनी रणनीति बदली है। नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) पर सख्त सुरक्षा के कारण अब नेपाल सीमा को कमजोर कड़ी मानकर इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनाव और उससे पहले संभावित हिंसा हालात को और जटिल बना सकती है। साथ ही पश्चिम बंगाल में इस वर्ष होने वाले चुनावों को देखते हुए भी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले कुछ महीने भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण होंगे।