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ऋषिकेश में नए साल पर होगा बजरंग सेतु का उद्घाटन, लक्ष्मण झूला पुल को मिलेगा प्रतिस्थापन

ऋषिकेश उत्तराखंड में नए साल की शुरुआत के साथ ही ऋषिकेश के लोगों और देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों व पर्यटकों को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। यह सेतु 1929 में बना ऐतिहासिक लक्ष्मण झूला की जगह लेगा। गंगा नदी पर निर्माणाधीन अत्याधुनिक बजरंग सेतु को जल्द ही आम जनता के लिए खोलने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। लोक निर्माण विभाग के अनुसार, पुल का निर्माण कार्य 26 जनवरी तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि किसी तकनीकी कारण से यदि मामूली देरी होती है, तो भी जनवरी के अंत या फरवरी के पहले सप्ताह तक बजरंग सेतु को जनता के लिए खोल दिया जाएगा। अंतिम चरण में निर्माण कार्य PWD अधिकारियों ने बताया कि गंगा पर बन रहा यह आधुनिक सस्पेंशन ब्रिज अब अपने अंतिम चरण में है। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि तय समयसीमा के भीतर कार्य पूरा किया जाए, ताकि वर्ष 2026 की शुरुआत में यह पुल पूरी तरह जनता को समर्पित किया जा सके। इसके शुरू होने से तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी। लक्ष्मण झूला के विकल्प के रूप में बजरंग सेतु गौरतलब है कि वर्ष 1929 में बना ऐतिहासिक लक्ष्मण झूला जर्जर स्थिति के चलते वर्ष 2019 में सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया था। इसके बाद क्षेत्र में एक सुरक्षित और आधुनिक पुल की जरूरत महसूस की गई, जिसके तहत बजरंग सेतु के निर्माण की योजना बनाई गई। ग्लास डेक होगा आकर्षण का केंद्र पुल का मुख्य ढांचा तैयार हो चुका है। डेक पर ग्लास लगाने का कार्य पूरा कर लिया गया है। फिलहाल फाइबर रिइन्फोर्स्ड पॉलिमर (FRP) का काम चल रहा है। कुल करीब 2400 वर्ग मीटर क्षेत्र में एफआरपी लगाया जाना है, जिसमें से लगभग 1200 वर्ग मीटर का कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य भी जल्द पूरा करने का दावा किया जा रहा है। करीब 132 मीटर लंबे इस आधुनिक सस्पेंशन ब्रिज की निर्माण लागत लगभग 68 करोड़ रुपये है। पुल का ग्लास डेक इसकी सबसे बड़ी खासियत है, जो गंगा के ऊपर से गुजरते समय पर्यटकों को रोमांचक अनुभव देगा। टिहरी और पौड़ी को जोड़ेगा पुल भौगोलिक रूप से ऋषिकेश क्षेत्र में स्थित यह पुल प्रशासनिक तौर पर टिहरी और पौड़ी जिलों को जोड़ेगा। पुल को और आकर्षक बनाने के लिए रंग-बिरंगी लाइटिंग की व्यवस्था की जा रही है। वहीं सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे। पर्यटन को मिलेगी नई पहचान उत्तराखंड का यह पहला आधुनिक ग्लास सस्पेंशन ब्रिज नई तकनीक का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है। इसके उद्घाटन से न सिर्फ यातायात को नई गति मिलेगी, बल्कि ऋषिकेश की पर्यटन छवि को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की भी उम्मीद है।

भारत की आर्थिक उन्नति: 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य

नई दिल्ली   भारत 4.18 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ जापान को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और अगले 2.5 से 3 वर्षों में जर्मनी को पछाड़कर तीसरी रैंक हासिल कर लेगा और 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। यह जानकारी सोमवार को एक आधिकारिक बयान में दी गई। भारतीय अर्थव्यवस्था तेज गति से विकास कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर छह तिमाही के उच्चतम स्तर पर रही है। यह दिखाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक उतार-चढ़ाव में भी मजबूत बनी हुई है। बयान के कहा गया, "भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इस गति को बनाए रखने के लिए अच्छी स्थिति में है। 2047 तक – अपनी आजादी के सौवें साल तक – उच्च मध्यम-आय वाला देश बनने की महत्वाकांक्षा के साथ, देश आर्थिक विकास, संरचनात्मक सुधारों और सामाजिक प्रगति की मजबूत नींव पर आगे बढ़ रहा है।" आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान पहले के 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। भारत की घरेलू ग्रोथ कई कारणों से ऊपर की ओर जा रही है जिसमें मजबूत घरेलू मांग, इनकम टैक्स और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) का सरलीकरण, कच्चे तेल की कम कीमतें, सरकारी पूंजीगत खर्च, साथ ही अनुकूल मौद्रिक और वित्तीय स्थितियां शामिल हैं, जिन्हें कम महंगाई का भी समर्थन मिल रहा है। बयान में कहा गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था की गति में निजी क्षेत्र मजबूत भूमिका निभा रहा है और लगातार ग्रोथ को सपोर्ट कर रहा है। इसके अलावा, सरकार देश के निर्यात को आगे बढ़ाने के लिए लगातार अन्य देश के साथ व्यापारिक समझौता कर रही है। 2025 में सरकार ने यूके, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) किया है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-सितंबर 2025 के दौरान भारत के सामान और सेवाओं का कुल निर्यात बढ़कर रिकॉर्ड 418.91 अरब डॉलर हो गया। इसमें पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 5.86 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली है।

कैंसर पर नई उम्मीद: जापानी ट्री फ्रॉग से खोजा गया ताकतवर ड्रग

नईदिल्ली  कैंसर को आज भी दुनिया की सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में गिना जाता है. विज्ञान और मेडिकल टेक्नोलॉजी में लगातार तरक्की के बावजूद अब तक कैंसर का पूरी तरह और स्थायी इलाज नहीं मिल पाया है. लेकिन अब जापान के वैज्ञानिकों की एक नई खोज ने उम्मीद की एक नई किरण जगा दी है. यह खोज सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन आने वाले वर्षों में यह लाखों जिंदगियां बचा सकती है. दरअसल, जापान के वैज्ञानिकों ने मेंढक, भेक (toad) और छिपकली की आंतों में पाए जाने वाले एक खास बैक्टीरिया की पहचान की है, जो इंसानों में होने वाले खतरनाक कोलोरेक्टल कैंसर को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज भविष्य में कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी से भी ज्यादा सुरक्षित और असरदार इलाज का रास्ता हो सकती है. क्या कहती है रिसर्च यह रिसर्च जापान की नागोया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने की है और इसे करीब 7 दिन पहले प्रकाशित किया गया. शोधकर्ताओं ने एक बैक्टीरिया की पहचान की है, जिसका नाम Ewingella americana है. यह बैक्टीरिया आमतौर पर मेंढक और छिपकली जैसे जीवों की पाचन प्रणाली में पाया जाता है. पहले इसे एक सामान्य और नुकसान रहित बैक्टीरिया माना जाता था, लेकिन अब यह कैंसर के खिलाफ एक शक्तिशाली हथियार बनकर उभरा है. रिसर्च टीम ने जापानी ट्री फ्रॉग, जापानी फायर-बेली न्यूट और जापानी ग्रास लिजर्ड की आंतों से कुल 45 अलग-अलग बैक्टीरियल स्ट्रेन अलग किए. इनमें से 9 स्ट्रेन में कैंसर विरोधी गुण पाए गए, लेकिन Ewingella americana सबसे ज्यादा प्रभावी साबित हुआ. क्या कमाल किया इस बैक्टीरिया ने?     सिर्फ एक डोज देने पर चूहों के ट्यूमर पूरी तरह गायब हो गए.     30 दिन बाद फिर कैंसर सेल डाले गए, तो भी अगले एक महीने में ट्यूमर नहीं बने. यह बैक्टीरिया दो तरीकों से काम करता है…     सीधे ट्यूमर पर हमला करता है.     शरीर की इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है – टी सेल, बी सेल और न्यूट्रोफिल्स को सक्रिय करता है.     ट्यूमर में ऑक्सीजन कम होती है, जहां कीमोथेरेपी दवाएं कम असर करती हैं.  लेकिन यह बैक्टीरिया ऐसे कम ऑक्सीजन वाले माहौल में भी अच्छा काम करता है. सुरक्षा और तुलना     चूहों में यह बैक्टीरिया जल्दी खून से साफ हो गया.     मौजूदा कीमो दवा डॉक्सोरूबिसिन से ज्यादा प्रभावी साबित हुआ.     कोई लंबे समय का नुकसान नहीं हुआ, स्वस्थ अंगों पर भी असर नहीं पड़ा.     वैज्ञानिकों ने कहा कि यह बैक्टीरिया क्लिनिकल ट्रायल के लिए एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है. अभी शुरुआत है यह खोज अभी सिर्फ चूहों पर हुई है. इंसानों पर काम करेगी या नहीं, इसके लिए और बहुत परीक्षण जरूरी हैं. वैज्ञानिक अब इसे अन्य प्रकार के कैंसर पर आजमाना चाहते हैं. दूसरी दवाओं के साथ मिलाकर देखना चाहते हैं और बेहतर तरीके से दवा पहुंचाने के तरीके ढूंढ रहे हैं. सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल है, क्योंकि Ewingella americana इंसानों में संक्रमण भी पैदा कर सकता है. इसलिए क्लिनिकल ट्रायल में बहुत सावधानी बरतनी होगी. फिलहाल ब्लैडर कैंसर के इलाज में एक बैक्टीरिया थेरेपी पहले से इस्तेमाल हो रही है. मेंढक जैसे जीव भविष्य में कैंसर की नई दवाएं दे सकते हैं. वैज्ञानिकों ने कहा कि प्रकृति की जैव विविधता में अभी बहुत सारी छिपी दवाएं हैं. हमें इसे बचाना होगा ताकि नई दवाएं मिलती रहें. यह शोध 'Gut Microbes' जर्नल में प्रकाशित हुआ है. यह खोज कैंसर के मरीजों के लिए एक नई उम्मीद जगाती है. कैसे काम करता है यह बैक्टीरिया? लैब में किए गए परीक्षणों के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि यह बैक्टीरिया सीधे कैंसर ट्यूमर पर हमला करता है. यह ट्यूमर के अंदर घुसकर शरीर की इम्यून सिस्टम को उसी जगह सक्रिय कर देता है. इसके बाद शरीर की T-Cells कैंसर कोशिकाओं को पहचान कर उन पर हमला करती हैं और उन्हें खत्म करने लगती हैं. इस प्रक्रिया से न सिर्फ ट्यूमर की बढ़त रुकती है, बल्कि समय के साथ उसका आकार भी छोटा होने लगता है. यानी शरीर खुद ही कैंसर से लड़ने लगता है. क्या कीमोथेरेपी से मिलेगी राहत? आज के समय में कीमोथेरेपी कैंसर का सबसे आम इलाज है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट्स बेहद दर्दनाक होते हैं. बालों का झड़ना, कमजोरी, उल्टी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं मरीजों की जिंदगी को मुश्किल बना देती हैं. अगर यह जापानी रिसर्च आगे के क्लिनिकल ट्रायल्स में सफल रहती है, तो भविष्य में बैक्टीरियल थेरेपी एक नया और सुरक्षित विकल्प बन सकती है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, अब तक के परीक्षणों में इस बैक्टीरिया के गंभीर साइड इफेक्ट नहीं देखे गए हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले समय में इस बैक्टीरिया पर और रिसर्च की जाएगी. भविष्य में इसे ब्रेस्ट कैंसर, पैंक्रियाटिक कैंसर जैसे अन्य गंभीर कैंसर के इलाज में भी आजमाया जा सकता है. 

8वां वेतन आयोग आज 1 जनवरी 2026 से लागू, सैलरी, पेंशन और DA पर होंगे अहम अपडेट

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच उत्सुकता तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार द्वारा मंजूर यह आयोग आज 1 जनवरी 2026 से लागू हुआ! इसके तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों और रिटायर्ड कर्मियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बदलाव किया जाएगा। सबसे ज्यादा चर्चा सैलरी बढ़ोतरी और फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि नए वेतन आयोग से लाखों परिवारों की आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा। 2025 में 8वें वेतन आयोग पर क्या हुआ? साल 2025 में सरकार ने 8वें वेतन आयोग को लेकर तीन अहम कदम जरूर उठाए।     सरकार ने यह फैसला लिया कि केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी, पेंशन और अन्य भत्तों की समीक्षा के लिए 8वां वेतन आयोग नियुक्त किया जाएगा।     इसके बाद 8वें वेतन आयोग का औपचारिक गठन किया गया और इसके चेयरमैन व अन्य सदस्यों की नियुक्ति भी कर दी गई।     तीसरे अहम कदम के तौर पर सरकार ने 8वें वेतन आयोग के लिए Terms of Reference (TOR) को भी अधिसूचित कर दिया। TOR जारी होने से पहले सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और कर्मचारी संगठनों से बातचीत की। इसमें NC-JCM स्टाफ साइड भी शामिल रहा, जिसने TOR को लेकर अपने सुझाव नोटिफिकेशन से पहले और बाद में सरकार को सौंपे। 2026 में कर्मचारियों और पेंशनर्स को क्या मिलेगा? 7वें वेतन आयोग का 10 साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को पूरा हो जाएगा। इसके बावजूद सरकार ने अब तक यह साफ नहीं किया है कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होगा या नहीं। हाल ही में संसद में सरकार की ओर से संकेत दिया गया कि 8वें वेतन आयोग की लागू होने की तारीख पर फैसला तब लिया जाएगा, जब आयोग अपनी सिफारिशें सौंप देगा। इसका सीधा मतलब यह है कि 1 जनवरी 2026 से ही नई सैलरी या नई पेंशन मिलना तय नहीं है। क्या बाद में एरियर मिलने की उम्मीद है? हालांकि, जब भी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होंगी, तब कर्मचारियों और पेंशनर्स को 1 जनवरी 2026 से एरियर मिलने की संभावना जरूर बनी रहेगी। इसके पीछे दो अहम वजहें मानी जाती हैं। पहली, 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रहा है, इसलिए सामान्य तौर पर नया वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाना चाहिए। दूसरी, सरकार आमतौर पर वेतन से जुड़े फैसले अगर देरी से लागू करती है, तो प्रभावी तारीख से एरियर देती है। हालांकि, एरियर और लागू होने की तारीख पर अंतिम फैसला पूरी तरह सरकार के हाथ में होगा। क्या 8वां वेतन आयोग 2026 में रिपोर्ट देगा? 8वें वेतन आयोग के 2026 में अपनी सिफारिशें सौंपने की संभावना काफी कम मानी जा रही है। वजह यह है कि आयोग का गठन हाल ही में हुआ है और सरकार ने उसे 18 महीने तक का समय दिया है। अगर आयोग तय समय के भीतर अपना काम पूरा करता है, तो 2027 में सिफारिशें सामने आ सकती हैं। इसके बाद भी इन्हें लागू करने से पहले सरकार की मंजूरी जरूरी होगी। सैलरी में बढ़ोतरी कब तक नहीं होगी?     सदस्यों की घोषणा के बाद कर्मचारियों को लगा कि जल्द ही सैलरी बढ़ जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं है।     आमतौर पर वेतन आयोग की सिफारिशें हर दस साल में लागू होती हैं।     कैबिनेट ने अपनी अधिसूचना में साफ कहा था कि 8वीं वेतन आयोग की सिफारिशें सामान्य तौर पर 1 जनवरी 2026 से लागू होने की उम्मीद है। लेकिन अभी आयोग की सिफारिशें आई ही नहीं हैं। आयोग को अपनी रिपोर्ट देने में करीब 18 महीने का समय दिया गया है। इसलिए 1 जनवरी से आपकी सैलरी में कोई तुरंत बढ़ोतरी नहीं होगी। अभी पुरानी 7वीं वेतन आयोग की व्यवस्था ही लागू रहेगी। कर्मचारी और पेंशनभोगी अभी भी मौजूदा डीए और अन्य भत्तों के हिसाब से ही पैसे पा सकेंगे। एरियर का क्या होगा? अच्छी खबर यह है कि आयोग लागू होने की तारीख 1 जनवरी 2026 ही मानी जा रही है। यानी जब भी सिफारिशें सरकार स्वीकार करेगी और नई सैलरी लागू होगी, तो 1 जनवरी 2026 से लेकर लागू होने की तारीख तक का एरियर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगा। पिछले वेतन आयोगों में भी ऐसा ही हुआ था। सिफारिशें आने में समय लगता है, लेकिन प्रभावी तारीख से एरियर जमा होता रहता है। इससे कर्मचारियों को एकमुश्त बड़ी रकम मिल सकती है, जब नई सैलरी लागू होगी। सैलरी हाइक कब लागू होगा? यह अभी तय नहीं है कि नई सैलरी कब से मिलनी शुरू होगी। आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, फिर सरकार उसकी समीक्षा करेगी और मंजूरी देगी। उसके बाद ही नई पे मैट्रिक्स, फिटमेंट फैक्टर और बढ़ी हुई सैलरी लागू होगी। अनुमान है कि रिपोर्ट आने के बाद 2027 या 2028 में पूरी तरह लागू हो सकता है, लेकिन एरियर 2026 से ही गिना जाएगा। कर्मचारियों को धैर्य रखना होगा, क्योंकि प्रक्रिया में समय लगता है। लाखों परिवारों की नजर इस पर टिकी है, और उम्मीद है कि नई सिफारिशें महंगाई और जीवन स्तर को ध्यान में रखकर बनेंगी।  कर्मचारियों को क्या राहत मिलती रहेगी? 8वें वेतन आयोग के लागू होने से पहले तक केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स को 7वें वेतन आयोग के नियमों के तहत महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी मिलती रहेगी। यानी जब तक नया वेतन आयोग लागू नहीं होता, तब तक DA और DR में समय-समय पर बढ़ोतरी ही कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए मुख्य राहत बनी रहेगी।

बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया का इंतकाल, पति के साथ हुआ दफन

ढाका बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया को संसद भवन के साउथ प्लाजा में नमाज-ए-जनाजा के बाद सुपुर्द-ए-खाक किया गया। बेगम जिया को उनके पति और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की कब्र के पास दफन किया गया। बेगम खालिदा जिया को ढाका के शेर-ए-बांग्ला नगर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उन्हें नमाज-ए-जनाजा के बाद शाम करीब 4:30 बजे दफनाया गया। इस दौरान उनके परिवार के सदस्य, सरकारी अधिकारी, विदेशी मेहमान, डिप्लोमैट, और बीएनपी-नॉमिनेटेड नेता मौजूद थे। खालिदा जिया के जाने से बांग्लादेश की राजनीति में एक युग का अंत हो गया है। सुपुर्द-ए-खाक में सिर्फ कुछ खास लोगों को ही आने-जाने की इजाजत थी और इस दौरान शेर-ए-बांग्ला नगर के जिया उद्यान में लोगों की आवाजाही भी सीमित रही। 23 नवंबर को खालिदा जिया का स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद ढाका के एवरकेयर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। खालिदा जिया ने 41 साल तक बीएनपी का नेतृत्व किया और 1990 के दशक के तानाशाही-विरोधी आंदोलन के दौरान उन्हें ‘समझौता न करने वाली लीडर’ का खिताब मिला। जिया पांच बार मेंबर ऑफ पार्लियामेंट रहीं, तीन बार प्रधानमंत्री और दो बार विपक्ष की नेता की जिम्मेदारी निभाई। बेगम खालिदा जिया ने अपने चार दशक से ज्यादा के राजनीतिक सफर का ज्यादातर हिस्सा सड़कों पर बिताया, आंदोलनों का नेतृत्व किया, और गिरफ्तार भी हुईं। उन्हें जेल में भी रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी देश नहीं छोड़ा। उन्होंने जो भी चुनाव लड़ा, वह कभी नहीं हारी। जिया के जनाजे में शामिल होने वाले 32 राजनयिकों में अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत मेगन बोल्डिन, ब्रिटिश हाई कमिश्नर सारा कुक, चीनी राजदूत याओ वेन और यूरोपियन यूनियन के राजदूत माइकल मिलर थे। वहीं, रूस के कार्यवाहक राजदूत एकातेरिना सेमेनोवा, जापानी राजदूत सैदा शिनिची, कैनेडियन हाई कमिश्नर अजीत सिंह, ऑस्ट्रेलियन हाई कमिश्नर सुसान रिले और रेटो सिगफ्राइड रेंगली भी शामिल हुए। इसके अलावा, नीदरलैंड, लीबिया, फिलीपींस, सिंगापुर, फिलिस्तीन, दक्षिण कोरिया, म्यांमार, इटली, स्वीडन, स्पेन, इंडोनेशिया, नॉर्वे, ब्राजील, मोरक्को, ईरान, अल्जीरिया, ब्रुनेई, थाईलैंड, कतर, डेनमार्क और मलेशिया के राजदूत और हाई कमिश्नर ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी ढाका पहुंचे थे। ढाका पहुंचने के बाद एस. जयशंकर ने खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान से मुलाकात की और पीएम मोदी का शोक संदेश सौंपा।

आधुनिक भारत श्रीराम की मर्यादा का सच्चा उत्तराधिकारी, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दी ऐतिहासिक मिसाल: राजनाथ सिंह

अयोध्या देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि श्रीराम की मर्यादा हमें सिखाती है कि युद्ध में भी मूल्य जीवित रहने चाहिए। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भी सिद्ध किया कि आधुनिक भारत राम की उस मर्यादा का सच्चा उत्तराधिकारी है। श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ बुधवार को श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत ने भी भगवान श्रीराम के इसी मर्यादा का पालन किया। जैसे राम का लक्ष्य रावण का संहार नहीं, बल्कि अधर्म का अंत था, हमारा भी वही लक्ष्य था कि हम आतंकियों और उनके आकाओं को सबक सिखा कर आएं और हमने बस वही किया। हमने अंधाधुंध प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि सीमित, नियंत्रित और उद्देश्यपूर्ण कार्रवाई की। उन्होंने अयोध्या में कहा कि भगवान श्रीराम विनम्र, शीलवान और कृपालु हैं, लेकिन जब अधर्म सिर उठाता है, तब वही राम दुष्ट-दलन की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने ‘आजानु भुज… शर चाप धर… संग्राम जित खर-दूषणं’ का उद्धरण देते हुए कहा कि आवश्यकता पड़ने पर मर्यादा के साथ शक्ति का प्रयोग ही धर्म है। उन्होंने कहा कि श्रीराम हमारी चेतना में बसे हैं; उनकी मर्यादा हमारी पहचान है। वे इतिहास के महान योद्धा थे, पर युद्ध में भी मूल्य और सीमाएं बनाए रखते थे। आधुनिक भारत ने भी वही मार्ग अपनाया है—आतंक के विरुद्ध कठोर, पर निर्दोषों के प्रति संवेदनशील। जैसे राम का उद्देश्य रावण-वध से अधिक अधर्म का अंत था, वैसे ही भारत का लक्ष्य आतंक के तंत्र को तोड़ना है, न कि अनियंत्रित संघर्ष को बढ़ावा देना। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भी सिद्ध किया कि आधुनिक भारत श्रीराम की उस मर्यादा का सच्चा उत्तराधिकारी है।राजनाथ सिंह ने श्रीराम को किसी ग्रंथ या कथा तक सीमित न मानते हुए कहा कि श्रीराम वह चेतना हैं जो मनुष्य को मनुष्य बनाए रखती है। जहां निर्णय कठिन होते हैं, वहां राम आदर्श बनते हैं। जहां शक्ति उन्माद बनने लगती है, वहां राम मर्यादा बनकर उसे रोकते हैं, और जहां अधिकारों की बात होती है, वहां राम कर्तव्य का स्मरण कराते हैं। यही कारण है कि राम सत्य, संयम, संकल्प, सुशासन और संघर्ष का समन्वय हैं। रक्षा मंत्री ने अयोध्या के विकास पर बोलते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण के बाद करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन ने अयोध्या को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में स्थापित किया है। सड़कों, आवास, हरित क्षेत्रों, हवाई अड्डे और रेलवे के सुदृढ़ीकरण से अयोध्या एक आधुनिक, सुरक्षित और समृद्ध मॉडल शहर के रूप में उभर रही है। यह विकास केवल अयोध्या का नहीं, बल्कि पूरे भारत के गौरव का प्रतीक है। उन्होंने डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में हो रहे परिवर्तन की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच के अनुरूप आस्था, संस्कृति और इतिहास को संजोते हुए विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना का निर्माण हो रहा है। साथ ही, उन्होंने राम मंदिर आंदोलन को समाज की चेतना से जन्मा ऐतिहासिक संघर्ष बताया—जो शून्य से नहीं, बल्कि धैर्य, तपस्या और आस्था की सदियों लंबी साधना से आकार लेता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि समय सबका न्याय करता है। जिन्होंने रामकाज और रामराज्य के मार्ग में अवरोध खड़े किए, उनका सत्य आज दुनिया देख रही है। आज अयोध्या की हर गली राममय है—और यह आनंद केवल अयोध्या तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे भारत और विश्व के उन हृदयों तक है, जो राम को जानते, मानते और जीते हैं। दो वर्ष पूर्व प्रभु श्रीराम का मंदिर में विराजमान होना केवल धार्मिक घटना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का पुनर्जागरण है, जिसका संदेश है मर्यादा में शक्ति और शक्ति में मर्यादा।

क्रेमलिन की सुरक्षा में सेंध? पुतिन के घर पर ड्रोन हमले का फुटेज आया सामने

मास्को  कीव के 91 ड्रोन हमलों का कथित सबूत रूस ने बुधवार को पेश किया है। फुटेज जारी कर रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि यूक्रेन ने राष्ट्रपति वोलोदिमीर पुतिन के आवास पर एक साथ कई दिशाओं से हमले का प्रयास किया था। रूसी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि ब्रायन्स्क, स्मोलेंस्क और नोवगोरोड क्षेत्रों में 91 ड्रोन मार गिराए गए। यह हमला लक्षित, सुनियोजित और चरणबद्ध तरीके से किया गया था। हालांकि इससे आवास को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। रूसी रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी फुटेज में बर्फ में पड़े काले ड्रोन का मलबा, उनके लकड़ी के हिस्से और लाल तारों को देखा जा सकता है। दावा किया गया है कि इसमें 6 किलोग्राम विस्फोटक लदा हुआ था। रूस ने दावा किया था कि 28-29 दिसंबर की मध्य रात्रि को कीव ने राष्ट्रपति के राजकीय आवास पर 91 ड्रोन भेजे थे, जिसे रूस ने मार गिराया था। विदेश मंत्री लावरोव ने पुष्टि करते हुए एक संदेश जारी किया था। उन्होंने कहा था कि नोवगोरोड क्षेत्र में राष्ट्रपति के राजकीय आवास पर हमला करने के लिए भेजे गए सभी 91 लंबी दूरी के ड्रोन को एयर डिफेंस ने मार गिराया। विदेश मंत्री लावरोव ने यह भी कहा था कि संघर्ष को सुलझाने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत के दौरान इस हमले के बावजूद मॉस्को वार्ता से पीछे नहीं हटेगा। हालांकि रूसी राष्ट्रपति आवास पर किसी भी तरह के हमले की कोशिश को यूक्रेन ने सिरे से खारिज किया था। दुनिया के कई देशों ने राष्ट्रपति आवास को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा की थी। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हमले की खबरों पर चिंता जताते हुए शांति की अपील की थी। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'रूस के राष्ट्रपति के आवास को निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट से बेहद चिंतित हूं। चल रहे डिप्लोमेटिक प्रयास युद्ध को समाप्त करने और शांति हासिल करने की दिशा में सबसे व्यवहार्य मार्ग प्रदान करते हैं। हम सभी संबंधित पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे इन प्रयासों पर ध्यान केंद्रित रखें और ऐसे किसी भी कार्य से बचें जो इन्हें कमजोर कर सकता है।' वहीं बीजिंग ने भी दोनों पक्षों से 'तनाव बढ़ाने से बचने' की अपील की थी।

कांप उठी राजधानी! दिल्ली में 6 साल बाद सबसे ठंडा दिसंबर, पारा गिरने से बढ़ी ठिठुरन

नई दिल्ली  दिल्ली बुधवार को घने कोहरे की चादर में लिपटी रही जिससे दृश्यता का स्तर 50 मीटर से भी नीचे चला गया। दिल्ली हवाई अड्डे पर करीब 150 उड़ानें रद्द कर दी गईं और 100 से अधिक ट्रेनें देरी से चलीं। धूप नहीं निकलने से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली में कई जगहों पर कोल्ड डे और कुछ जगहों पर सीवियर कोल्ड डे की स्थिति देखी गई। 6 साल में बुधवार का दिन दिसंबर का सबसे ठंडा दिन के रूप में दर्ज हुआ। यह मौसम का भी सबसे ठंडा दिन रहा। मौसम विभाग ने अगले 3 दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है और गुरुवार को हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना जताई है।   ठंड ने तोड़ा 6 साल का रिकॉर्ड मौसम विभाग की ओर से साझा किए गए आंकड़े के मुताबिक, दिल्ली में बुधवार का दिन दिसंबर महीने के लिए 6 वर्षों में सबसे ठंडे दिन के रूप में रिकॉर्ड किया गया। दिल्ली की मानक वेधशाला सफदरजंग में दिन का अधिकतम तापमान 14.2 डिग्री रिकार्ड किया गया जो सामान्य से 6.2 डिग्री सेल्सियस कम है। इससे पहले 2019 में 29 दिसंबर को अधिकतम तापमान 13.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। किन जगहों पर कोल्ड डे की स्थिति? बुधवार का दिन दिल्ली में मौसम का सबसे ज्यादा ठंडा दिन रहा। बता दें कि न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से कम होने और अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.5 डिग्री कम होने पर उसे कोल्ड डे की स्थिति मानी जाती है। अधिकतम तापमान सामान्य से 6.5 डिग्री सेल्सियस से कम हम होने पर सीवियर कोल्ड डे यानी गंभीर शीत दिवस की स्थिति मानी जाती है। बुधवार को सफदरजंग, रिज और आयानगर में शीत दिवस और पालम व लोधी रोड में गंभीर शीत दिवस की स्थिति रही। कल हल्की बारिश, 3 दिन येलो अलर्ट मौसम विभाग ने गुरुवार को दिल्ली-NCR के अलग-अलग हिस्सों में पश्चिमी विक्षोभ से हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना जताई है। दिल्ली के अधिकांश हिस्सों में सुबह के समय मध्यम और कुछ इलाकों में घना कोहरा छाया रह सकता है। दिन में कहीं-कहीं शीत दिवस की स्थिति भी बन सकती है। इसको लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। IMD ने एक से लेकर 3 तारीख तक के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। पहाड़ों पर हिमपात के बाद गलन भरी सर्दी का पूर्वानुमान है। 150 उड़ानें रद्द, 100 से ज्यादा ट्रेनें प्रभावित दिल्ली में छाए घने कोहरे का खासा असर विमान सेवाओं पर देखने को मिला है। घने कोहरे के चलते दिल्ली हवाई अड्डे पर लगभग 150 उड़ानों को रद्द कर दिया। दो उड़ानों का मार्ग परिवर्तन भी किया गया। यात्रियों को विमान सेवाओं के संपर्क में रहने और उसी अनुसार यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी गई है। रेल सेवा भी बुरी तरह प्रभावित रही। दिल्ली के अलग-अलग स्टेशनों पर लगभग 100 रेलगाड़ियां देरी से पहुंचीं।  

2026 में मोदी सरकार ने बड़े हाईवे प्रोजेक्ट्स को दी हरी झंडी, नासिक से सोलापुर तक अब होगा सुपरफास्ट सफर

नई दिल्ली  देश में इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार को और तेज करते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने साल के अंत में महाराष्ट्र और ओडिशा को बड़ी सौगात दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के दो बड़े प्रस्तावों पर मुहर लगा दी गई. इन फैसलों के तहत 20,668 करोड़ रुपये की लागत से दो अहम हाईवे प्रोजेक्‍ट को मंजूरी मिली है. सरकार के इस फैसले से जहां महाराष्ट्र में कनेक्टिविटी को नए पंख लगेंगे, वहीं ओडिशा के पिछड़े और नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास की नई इबारत लिखी जाएगी. 1. महाराष्ट्र: 6 लेन का ग्रीनफील्ड नासिक-सोलापुर कॉरिडोर कैबिनेट के फैसले में सबसे बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र के नाम रहा है. सरकार ने नासिक और सोलापुर के बीच एक बिल्कुल नए (ग्रीनफील्ड) 6-लेन कॉरिडोर को मंजूरी दी है. कुल लागत: 19,142 करोड़ रुपये कुल लंबाई: 374 किलोमीटर रूट: नासिक फाटा से खेड़ तक (पुणे और अहमदनगर होते हुए) क्यों खास है यह प्रोजेक्ट? अभी नासिक से सोलापुर जाने में लोगों को भारी ट्रैफिक और संकरे रास्तों का सामना करना पड़ता है. यह नया कॉरिडोर एक ‘ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट’ है, जिसका मतलब है कि इसके लिए नई जमीन का अधिग्रहण कर बिल्कुल नया रास्ता बनाया जाएगा. यह मौजूदा सड़कों पर दबाव कम करेगा और शहरों के बीच से गुजरने के बजाय बाईपास के जरिए कनेक्टिविटी देगा. आर्थिक और धार्मिक महत्व यह कॉरिडोर महाराष्ट्र के दो प्रमुख आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्रों को जोड़ेगा. नासिक, जो कि अंगूर की खेती और धार्मिक पर्यटन (त्र्यंबकेश्वर, शिरडी के पास) के लिए प्रसिद्ध है, अब सोलापुर जैसे टेक्सटाइल हब से सीधे जुड़ जाएगा. इससे अहमदनगर और बीड जैसे जिलों को भी बड़ा फायदा होगा. माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स) की लागत कम होगी और सब्जियों व फलों को मंडियों तक पहुंचाना आसान हो जाएगा. यह प्रोजेक्ट सूरत-चेन्नई इकोनॉमिक कॉरिडोर का भी एक अहम हिस्सा बनेगा. 2. ओडिशा: NH-326 का चौड़ीकरण और मजबूती सरकार ने पूर्वी भारत पर भी विशेष ध्यान दिया है. ओडिशा में राष्ट्रीय राजमार्ग-326 (NH-326) के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण को मंजूरी दी गई है. कुल लागत: 1,526 करोड़ रुपये कुल लंबाई: 206 किलोमीटर इलाका: मलकानगिरी से कोरापुट तक कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव यह प्रोजेक्ट सिर्फ सड़क बनाना नहीं है, बल्कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है. यह हाईवे ओडिशा के मलकानगिरी और कोरापुट जिलों से गुजरता है, जो वामपंथी उग्रवाद (LWE) या नक्सलवाद से प्रभावित माने जाते रहे हैं. अच्छी सड़कें यहां सुरक्षा बलों की पहुंच आसान बनाएंगी और स्थानीय लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ेंगी. यह हाईवे ओडिशा को दो पड़ोसी राज्यों आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है. इसके चौड़ीकरण से इन तीनों राज्यों के बीच व्यापारिक और सामाजिक आवाजाही सुगम होगी.

एक ओर भारत में विदा हुआ 2025, दूसरी ओर दुनिया में नए साल 2026 का आगाज़

नई दिल्ली  भारत के कई राज्यों में 2025 का आखिरी सूर्यास्त हो चुका है। भगवान जगन्नाथ के शहर पुरी और पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में 2025 में लोगों ने आखिरी बार आज सूर्यास्त देखा। अब नए साल 2026 के दस्तक की तैयारी है। इस बीच न्यूजीलैंड में रात्रि 12 बजे का वक्त हो गया है और नए साल की शुरुआत हो चुकी है। न्यूजीलैंड दुनिया का वह देश है, जहां टाइमजोन के हिसाब से सबसे पहले किसी दिन की शुरुआत होती है। वहीं अमेरिका के हाउलैंड आइलैंड और बेकर आइलैंड में सबसे आखिर में दिन शुरू होता है। ऑकलैंड ने 2026 का स्वागत न्यूजीलैंड की सबसे ऊंची इमारत, स्काई टॉवर से लॉन्च की गई आतिशबाजी के साथ किया। ऑकलैंड में न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में मशहूर बॉल ड्रॉप होने से 18 घंटे पहले आधी रात होती है। पांच मिनट के इस शो में 787 फुट ऊंचे स्काई टॉवर की अलग-अलग मंजिलों से 3,500 आतिशबाजी की गई। इससे पहले पैसिफिक आइलैंड देश किरिबाती दुनिया का पहला देश बन गया जिसने 2026 का स्वागत किया। लाइन आइलैंड्स द्वीप में 12 बजते ही दुनिया भर में नए साल के जश्न की आधिकारिक शुरुआत हुई थी। वहीं अगले कुछ घंटों में कई देश नए साल का स्वागत करेंगे। इसकी शुरुआत ओशिनिया के कुछ हिस्सों से होगी। उसके बाद पूर्वी एशिया, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व, यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका में नए साल का जश्न मनाया जाएगा। जश्न के अलग-अलग रूप भारत समेत कई देशों में जश्न की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। अलग-अलग देशों में नए साल को मनाने का अलग-अलग तरीका भी है। जहां स्पेन के लोग अच्छी किस्मत के लिए आधी रात को 12 अंगूर खाकर नए साल का स्वागत करते हैं, वहीं जापान में नए साल के स्वागत में मंदिरों में 108 बार घंटियां बजाई जाती हैं। इसी तरह ब्राजील के लोग नए साल पर सफेद कपड़े पहनते हैं वहीं समुद्र को फूल अर्पित करते हैं। वहीं स्कॉटलैंड में नए साल का जश्न ‘हॉगमने’ के नाम से मनाया जाता है, जिसमें सड़कों पर दावत उड़ाई जाती हैं।