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कनाडा से बड़ी खुशखबरी: नागरिकता कानून में ऐतिहासिक बदलाव, भारतवंशियों को मिलेगा फायदा

कनाडा  कनाडा ने अपने नागरिकता नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है, जिससे विदेश में पैदा हुए या गोद लिए गए बच्चों को कनाडाई नागरिकता का मार्ग खुल गया है। 15 दिसंबर से बिल C-3 लागू हो गया है, जिससे नागरिकता के अधिकार में महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है। यह कदम उन परिवारों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है जिनके सदस्य विदेश में रहते हैं या पैदा हुए हैं। कनाडा में बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय निवास कर रहा है, इसलिए यह नया नियम भारतीय मूल के नागरिकों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है, खासकर उन बच्चों के लिए जिनके माता-पिता कनाडा के नागरिक हैं लेकिन वे खुद विदेश में पैदा हुए हैं। नए नियम से क्या बदला अब कनाडाई नागरिक माता-पिता विदेश में पैदा हुए या गोद लिए बच्चों को नागरिकता दे सकते हैं, बशर्ते कि माता-पिता ने बच्चे के जन्म या गोद लेने से पहले कम से कम तीन साल (1095 दिन) कनाडा में शारीरिक रूप से निवास किया हो। यह परिवर्तन नागरिकता के प्रति देश के दृष्टिकोण को अधिक उदार और आधुनिक बनाता है। अब पहली पीढ़ी के बाहर भी नागरिकता की पात्रता का विस्तार किया गया है।   बिल C-3 क्यों जरूरी? कनाडा में 2009 में लागू “फर्स्ट-जनरेशन लिमिट” के नियम ने विदेशी जन्मे बच्चों को नागरिकता से वंचित कर दिया था, भले ही उनके माता-पिता कनाडा के नागरिक हों। यह नीति कई वर्षों से कानूनी और राजनीतिक विवाद का विषय रही है। दिसंबर 2023 में ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस ने इस सीमा के मुख्य हिस्सों को असंवैधानिक बताया था। अदालत ने कहा कि यह नियम उन नागरिक परिवारों के लिए गलत नतीजे दे रहा है जो कनाडा के बाहर बच्चे का जन्म या गोद लेने के बाद नागरिकता चाहते हैं। इसके बाद संघीय सरकार ने अपील न करने का फैसला किया और बिल C-3 को लागू कर व्यापक सुधार किया। भारतीय समुदाय पर असर कनाडा में भारतीय मूल की एक बड़ी आबादी रहती है। कई ऐसे बच्चे हैं जिनका जन्म विदेश में हुआ लेकिन उनके माता-पिता की पहचान कनाडाई नागरिक के रूप में है। इस नए नियम से वे अब नागरिकता के लिए सीधे आवेदन कर सकेंगे और उन्हें कई अधिकार मिलेंगे जो पहले प्रतिबंधित थे।

इथियोपिया में अफ्रीकी चैप्टर क्लोज, अब अरब दुनिया में भारत की सियासी पकड़ मजबूत करेंगे PM मोदी

अफ्रीका अफ्रीका में कूटनीतिक इतिहास रचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब अरब जगत में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की अपनी चार दिवसीय यात्रा के अंतिम चरण में बुधवार को इथियोपिया से ओमान के लिए रवाना हो गए। यह यात्रा भारत की अफ्रीका और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक सक्रियता का अहम संकेत मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी की यह इथियोपिया की पहली आधिकारिक यात्रा थी, जो ऐतिहासिक साबित हुई। इस दौरान भारत और इथियोपिया ने अपने पारंपरिक और ऐतिहासिक संबंधों को औपचारिक रूप से ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ा दिया। प्रधानमंत्री मोदी और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में कई अहम समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इथियोपियाई संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया, जहां उन्होंने आतंकवाद, वैश्विक शांति और विकास पर भारत का स्पष्ट दृष्टिकोण रखा। इसी दौरान उन्हें इथियोपिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘द ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री मोदी यह सम्मान पाने वाले पहले विदेशी नेता बने। अब प्रधानमंत्री मोदी ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के निमंत्रण पर मस्कट पहुंचेंगे।   ओमान में वे रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देने, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी वहां प्रवासी भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि और संस्कृति सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की व्यापक समीक्षा और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करेगा। यह प्रधानमंत्री मोदी की ओमान की दूसरी यात्रा होगी।  

कैंसर का बढ़ता खतरा: देश में 15 लाख से ज्यादा मरीज, यूपी बना हॉटस्पॉट, दिल्ली में AAI रेट हाई

नई दिल्ली  भारत में कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी तेजी से फैलती जा रही है और इसके फैलने की दर भी लगातार बढ़ ही रही है. देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कैंसर से पीड़ित मरीज हैं. एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि पिछले 5 सालों में कैंसर मरीजों की संख्या में 2 लाख का इजाफा हुआ है और यह अब 15 लाख से अधिक हो गई है. राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सांसद इंदु बाला गोस्वामी ने स्वास्थ्य मंत्रालय से देश में पिछले 5 सालों में कैंसर मरीजों की संख्या और देशभर के सभी जिलों में डे केयर कैंसर सेंटर (DCCC) खोलने की योजना को लेकर सवाल पूछा, इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)- नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (NCRP) के अनुसार, पिछले 5 सालों में देश में सभी प्रकार के कैंसर के मामलों की अनुमानित घटना 15 लाख से अधिक हो गई है. साल 2024 में कैंसर केस 15 लाख के पार सरकार की ओर से दिए गए जवाब के अनुसार, पिछले 5 सालों में कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढी है. साल 2020 में देश में 13,92,179 कैंसर मरीज थे. 2021 में यह संख्या बढ़कर 14,26,447 हो गई. साल 2022 में कैंसर मरीजों की संख्या 14,61,427 तक पहुंच गई. 2023 में कैंसर मरीजों की 15 लाख के करीब हो गई और यह संख्या 14,96,972 थी. साल 2024 में कैंसर मरीजों की संख्या 15 लाख (15,33,055) पार कर गई. साल दर साल बढ़ रहा कैंसर साल 2020     1392179 साल 2021     1426447 साल 2022     1461427 साल 2023     1496972 साल 2024     1533055 संसद को दिए जवाब के अनुसार, कैंसर पीड़ितों की सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश में है. यहां पर 2024 में कैंसर पीड़ितों की अनुमानित संख्या 2 लाख (2,21,000) से अधिक है. महाराष्ट्र में 1,27,512, पश्चिम बंगाल में 1,18,910 और बिहार में 1,15,123 कैंसर मरीज हैं. उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक DCCC एक अन्य सवाल के जवाब में केंद्र ने बताया कि बजट 2025-26 की घोषणा के अनुसार, सरकार अगले 3 सालों में जिला अस्पतालों में डे केयर कैंसर सेंटर स्थापित करने की योजना बना रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों की सलाह से डे केयर कैंसर सेंटर की स्थापना के लिए एक नेशनल गैप का अध्ययन किया है. इस मामले में सबसे अधिक पीड़ितों का सामना करने वाले जिलों को प्राथमिकता दी गई है. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से अपने-अपने प्रस्ताव दिए जाने और संसाधनों को अनुकूलित करने तथा दोहराव से बचने के लिए नेशनल प्रोग्राम कोआर्डिनेशन कमिटी (NPCC) द्वारा अंतिम रूप दिया गया. जवाब के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए, पूरे देश में 297 DCCC स्थापित करने की मंजूरी दी गई है, जिसमें हिमाचल प्रदेश में अकेले 18 DCCC शामिल हैं. उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 68 केंद्र स्थापित करने की मंजूरी दी गई है. तेलंगाना ने 27 और बिहार में 21 केंद्र स्थापित किए जाने हैं. मुंबई-कोलकाता से अधिक दिल्ली में केस दूसरी ओर, केंद्र ने संसद को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कैंसर के सबसे ज्यादा केस सामने आ रहे हैं. यहां उम्र के हिसाब से एडजस्टेड इंसिडेंस रेट (Age-Adjusted Incidence Rate, AAIR) पुरुषों के लिए 1 लाख पर 146.7 और महिलाओं के लिए 132.5 है, जो मुंबई, कोलकाता और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों से कहीं अधिक है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने राज्यसभा में दिल्ली और पंजाब में कैंसर के मामलों पर एक तारांकित सवाल के जवाब में बताया कि ये आंकड़े इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के तहत जनसंख्या-आधारित कैंसर रजिस्ट्रियों पर आधारित हैं और तुलना के लिए वर्ल्ड स्टैंडर्ड पॉपुलेशन के हिसाब से एडजस्ट किए गए हैं.   दिल्ली के अलावा अन्य मेट्रो शहरों में, हैदराबाद में पुरुषों के लिए AAIR 114.7 और महिलाओं के लिए 153.8 रहा, इसी तरह बेंगलुरु में पुरुषों के लिए 127.7 और महिलाओं के लिए 151.3 दर्ज किया गया है. जबकि मुंबई में यह दर कहीं कम थी, यहां पुरुषों के लिए 108.9 और महिलाओं के लिए 114.2, और कोलकाता में यह दर क्रमशः 105.5 और 98.6 दर्ज की गई. पंजाब के पटियाला में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, AAIR पुरुषों के लिए 69.6 और महिलाओं के लिए 80.7 था, जो दिल्ली से बहुत कम है. ब्रेस्ट कैंसर से जूझते दिल्ली और पंजाब आंकड़ों के अनुसार, राजधानी दिल्ली में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के सबसे ज़्यादा केस सामने आए, जो 2023 में 3,198 से बढ़कर 2025 में 3,321 हो गए. वहीं सर्वाइकल कैंसर के मामलों में थोड़ी कमी आई, 741 से घटकर यह संख्या 692 हो गई, जबकि फेफड़ों और मुंह के कैंसर के मामले धीरे-धीरे बढ़ने लगे हैं. पंजाब में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे आम रहे, यहां अब 3,342 से बढ़कर 3,388 केस हो गए. यहां पर पुरुषों में मुंह और प्रोस्टेट कैंसर के केस ज्यादा थे, और 2025 तक प्रोस्टेट कैंसर के मामले अनुमानित 1,170 से ज़्यादा हो जाएंगे.  

अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन का हंगामा: पेरिस अवार्ड इवेंट में ताइवान के झंडे पर भड़के दूतावास कर्मचारी

पेरिस  फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय चाय प्रतियोगिता उस वक्त कूटनीतिक विवाद में बदल गई, जब चीनी दूतावास के कर्मचारियों ने ताइवान का नाम और झंडा दिखाए जाने पर पुरस्कार समारोह बाधित करने की कोशिश की। फ्रांस के पेरिस में आयोजित ‘टीज़ ऑफ द वर्ल्ड इंटरनेशनल कॉन्टेस्ट’ के पुरस्कार समारोह के दौरान चीनी दूतावास के कर्मचारियों ने हंगामा खड़ा कर दिया। यह घटना तब हुई, जब आयोजकों ने ताइवान का उल्लेख किया और रिपब्लिक ऑफ चाइना (ताइवान) का झंडा प्रदर्शित किया। ताइवान के ताइचुंग शहर के जुशिन टी फैक्ट्री के सीईओ ह्सीह चुंग-लिन को उनकी हुआगांग स्नो सोर्स टी के लिए विशेष पुरस्कार दिया जा रहा था।   इसी दौरान चीनी दूतावास के दो प्रतिनिधि खड़े हो गए और जोर-जोर से नारे लगाने लगे “ताइवान चीन का ही एक प्रांत है” और “ताइवान चीन का हिस्सा है।”घटना का वीडियो सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी आलोचना शुरू हो गई। आयोजकों ने चीनी प्रतिनिधियों की इस हरकत को नजरअंदाज करते हुए समारोह जारी रखा, जबकि दर्शकों ने चीनी कर्मचारियों को हूट किया और ताइवान के प्रतिनिधि के समर्थन में तालियां बजाईं। समारोह के बाद आयोजित रात्रिभोज में ह्सीह चुंग-लिन ने कहा कि कई प्रतिभागियों ने उन्हें बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान ताइवान की भूमिका के चलते दुनिया में उसके प्रति सम्मान बढ़ा है। उन्होंने कहा कि चीन की ऐसी हरकतें केवल नाराजगी और विरोध को ही जन्म देती हैं।   ताइवान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ह्सियाओ कुआंग-वेई ने चीन को अंतरराष्ट्रीय शिष्टाचार का पालन करने की सलाह देते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं बीजिंग को वैश्विक मंच पर मज़ाक का पात्र बना रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन को ताइवान के साथ सम्मानजनक और समान आधार पर संवाद करना चाहिए। गौरतलब है कि AVPA (एजेंसी फॉर द वैलोराइजेशन ऑफ एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स) द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में हर साल 700 से अधिक वैश्विक उत्पादक भाग लेते हैं। इस वर्ष अमेरिका, जापान और श्रीलंका के चाय उत्पादक भी प्रतियोगिता में शामिल थे।

यूरोपीय देशों पर पुतिन का हमला: कहा—बदले की कोशिश नाकाम, कभी पूरा नहीं होगा उनका मंसूबा

रूस  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों, खासकर यूरोपीय यूनियन पर खुलकर हमला बोलते हुए उन्हें ‘छोटे सूअर’ करार दिया। एक टेलीविज़न संबोधन में पुतिन ने यूरोप पर रूस की कथित कमजोरी का फायदा उठाने और पुराने हिसाब चुकता करने की नाकाम कोशिश का आरोप लगाया।  पुतिन ने एक टेलीविज़न संबोधन में यूरोपीय देशों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यूरोप ने अमेरिका के बाइडन प्रशासन के साथ मिलकर रूस के पतन से फायदा उठाने की कोशिश की, लेकिन वह इसमें पूरी तरह नाकाम रहा। पुतिन ने यूरोपीय नेताओं का मज़ाक उड़ाते हुए उन्हें “यूरोपीय छोटे सूअर” बताया और कहा कि वे ऐतिहासिक बदले की भावना से प्रेरित होकर रूस के खिलाफ खड़े हुए लेकिन रूस को दबाने का उनका सपना कभी पूरा नहीं होगा। पुतिन ने कहा, “यूरोप के ‘छोटे सूअर’ बाइडेन प्रशासन के साथ मिलकर इस उम्मीद में काम कर रहे थे कि हमारे देश के पतन से उन्हें लाभ मिलेगा। वे वह सब वापस लेना चाहते थे, जो वे इतिहास के पिछले दौर में खो चुके हैं। यह बदले की कोशिश थी, जो असफल रही।” हालांकि कड़े और अपमानजनक शब्दों के तुरंत बाद पुतिन ने एक बार फिर कूटनीति का दरवाज़ा खुला रखने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि रूस पहले की तरह बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान के लिए तैयार है। पुतिन ने यह भी जोड़ा कि अमेरिकी प्रशासन इस दिशा में कुछ हद तक तैयार दिखाई दे रहा है, और रूस को उम्मीद है कि यूरोप भी इसी रास्ते पर आगे बढ़ेगा। विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन का यह बयान पश्चिम के खिलाफ आक्रामक नैरेटिव को मजबूत करने के साथ-साथ यह संदेश भी देता है कि रूस खुद को वैश्विक मंच पर अलग-थलग नहीं देखना चाहता।

रेलवे बोर्ड का नया बदलाव: रिजर्वेशन चार्ट से पहले वेटिंग और RAC की जानकारी मिलेगी

नई दिल्ली  रेलवे यात्रियों के लिए एक बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है। अब ट्रेन का रिजर्वेशन चार्ट पहले से ज्यादा जल्दी तैयार किया जाएगा। यानी कन्फर्म और वेटिंग टिकट को लेकर जो आखिरी वक्त तक असमंजस बना रहता था, वह अब काफी हद तक खत्म हो जाएगा। रेलवे बोर्ड ने 16 दिसंबर को इस संबंध में नया आदेश जारी किया है, जिसके तहत अब ट्रेनों का पहला रिजर्वेशन चार्ट करीब 10 घंटे पहले तैयार किया जाएगा। यह बदलाव खास तौर पर उन यात्रियों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है, जो वेटिंग लिस्ट में रहते हुए आखिरी समय तक टिकट कन्फर्म होने का इंतजार करते हैं। रेलवे ने रिजर्वेशन चार्ट का समय क्यों बदला? अक्सर देखा गया है कि ट्रेन छूटने से कुछ घंटे पहले तक यात्रियों को यह साफ नहीं हो पाता कि उनका टिकट कन्फर्म होगा या नहीं। इसी परेशानी को देखते हुए रेलवे ने पहले इस साल जून में 8 घंटे पहले चार्ट बनाने की व्यवस्था शुरू की थी। अब यात्रियों की सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए इस समय को बढ़ाकर 10 घंटे कर दिया गया है। रेलवे का मानना है कि चार्ट पहले बनने से यात्रियों को समय रहते दूसरा विकल्प चुनने का मौका मिलेगा। किस समय चलने वाली ट्रेनों का चार्ट कब बनेगा? रेलवे बोर्ड के नए आदेश के अनुसार ट्रेनों के समय के हिसाब से चार्ट बनाने का नियम तय किया गया है:-     सुबह 5:01 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक रवाना होने वाली ट्रेनों का पहला रिजर्वेशन चार्ट एक दिन पहले रात 8 बजे तक तैयार कर लिया जाएगा।     दोपहर 2:01 बजे से रात 11:59 बजे तक चलने वाली ट्रेनों के लिए पहला चार्ट कम से कम 10 घंटे पहले तैयार होगा।     रात 12:00 बजे से सुबह 5:00 बजे तक रवाना होने वाली ट्रेनों का चार्ट भी 10 घंटे पहले तैयार किया जाएगा। वेटिंग टिकट वालों के लिए यह फैसला कितना राहत भरा है? अब वेटिंग टिकट वालों को आखिरी पल तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पहले कई यात्री स्टेशन पहुंचने के बाद ही यह जान पाते थे कि टिकट कन्फर्म हुआ या नहीं। नए नियम से यात्रियों को पहले ही स्थिति साफ हो जाएगी, जिससे वे अपनी यात्रा की योजना बदल सकते हैं या रिफंड ले सकते हैं। पहली बार रिजर्वेशन चार्ट तैयार करने के समय में बदलाव रेलवे ने यात्रियों को उनकी यात्रा और रिजर्वेशन की स्थिति के बारे में पहले से जानकारी देने और खासकर दूर-दराज से आने वाले यात्रियों की चिंता कम करने के लिए पहली बार रिजर्वेशन चार्ट तैयार करने के समय में बदलाव किया है. इंडिया टुडे से बात करते हुए रेल मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा, 'यात्रियों की सुविधा के लिए चार्ट पहले तैयार किया जाएगा ताकि वे अपनी यात्रा की योजना आसानी से बना सकें.' इस संबंध में सभी जोनल रेलवे डिवीजनों को जरूरी निर्देश जारी कर दिए गए हैं. अब तक 4 घंटे पहले तैयार होता था चार्ट अब तक रेलवे में रिजर्वेशन चार्ट तैयार करने का नियम यह था कि ट्रेन के प्रस्थान से करीब 4 घंटे पहले पहला रिजर्वेशन चार्ट तैयार किया जाता था. इसका मतलब यह होता था कि वेटिंग लिस्ट या आरएसी में चल रहे यात्रियों को कन्फर्म सीट मिली है या नहीं, इसकी जानकारी बहुत आखिरी समय में मिलती थी. यात्रियों को होती थी असुविधा इस पुराने सिस्टम की वजह से खासकर दूर-दराज से स्टेशन आने वाले यात्रियों को काफी परेशानी होती थी. कई बार यात्री चार्ट बनने से पहले ही स्टेशन पहुंच जाते थे और बाद में पता चलता था कि उनका टिकट कन्फर्म नहीं हुआ है. इससे न सिर्फ समय और पैसे की बर्बादी होती थी, बल्कि यात्रा को लेकर असमंजस और तनाव भी बढ़ जाता था. रेलवे को लंबे समय से यात्रियों की ओर से शिकायतें मिल रही थीं कि चार्ट देर से बनने के कारण यात्रा की सही योजना नहीं बन पाती, इसी वजह से अब चार्ट प्रिपरेशन के समय में बदलाव किया गया है. क्या कन्फर्म टिकट वालों को भी फायदा मिलेगा? बिल्कुल। कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को भी सीट और कोच की जानकारी पहले मिल जाएगी। इससे वे समय पर स्टेशन पहुंचने, सामान पैक करने और यात्रा की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकेंगे। यात्रियों को अब क्या सावधानी रखनी चाहिए? रेलवे यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे ट्रेन यात्रा से पहले चार्ट स्टेटस जरूर चेक करें। IRCTC ऐप या वेबसाइट के जरिए कन्फर्म और वेटिंग स्थिति आसानी से देखी जा सकती है। इससे आखिरी समय की परेशानी से बचा जा सकेगा। रेलवे का यह फैसला क्या संकेत देता है? रेलवे का यह कदम साफ दिखाता है कि वह यात्रियों की सुविधाओं को प्राथमिकता दे रहा है। चार्ट जल्दी बनने से न सिर्फ भ्रम कम होगा, बल्कि यात्रा भी ज्यादा सुविधाजनक बनेगी।

वेनेजुएला अमेरिका से मुकाबले में कमजोर, फिर भी रूस-चीन और ईरान से हथियार खरीद रहा

कैरेकस वेनेजुएला की सेना मुख्य रूप से रूस, चीन और ईरान से हथियार खरीदती है. अमेरिका ने 2006 से ही वेनेजुएला पर हथियारों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है, क्योंकि उसे आतंकवाद विरोधी प्रयासों में सहयोग न करने का आरोप लगाया गया. इसलिए, राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार इन तीन देशों पर निर्भर है. अमेरिकी नौसेना की कैरिबियन में तैनाती से पैदा हुए हालिया तनाव के बीच वेनेजुएला ने इन देशों से और मदद मांगी है. मुख्य हथियार सप्लायर और हालिया डील्स रूस (सबसे बड़ा सप्लायर): पिछले 20 सालों में अरबों डॉलर के हथियार दिए, जैसे Su-30MK2 फाइटर जेट (करीब 24), T-72 टैंक, S-300VM एयर डिफेंस सिस्टम, Buk-M2E और Pantsir-S1 मिसाइल सिस्टम, Igla-S शोल्डर-फायर्ड मिसाइलें (करीब 5,000), AK-103 असॉल्ट राइफलें (स्थानीय उत्पादन भी) और Dragunov स्नाइपर राइफलें. 2025 में: मादुरो ने रूस से Su-30 जेट की मरम्मत, रडार और मिसाइलें मांगीं. रूसी सांसद ने Oreshnik बैलिस्टिक और Kalibr क्रूज मिसाइलें देने की बात कही (अभी कन्फर्म नहीं). अक्टूबर 2025 में रूसी Il-76 कार्गो प्लेन काराकास पहुंचा. कहा जा रहा था कि उसमें संभवतः हथियार थे.      चीन: बख्तरबंद वाहन (VN-4), K-8 ट्रेनर जेट, C-802 एंटी-शिप मिसाइलें, रडार सिस्टम.     2025 में: मादुरो ने चीन से रडार उत्पादन तेज करने और सैन्य सहयोग बढ़ाने की अपील की. चीन वेनेजुएला का बड़ा आर्थिक पार्टनर है, तेल के बदले लोन देता है.     ईरान: ड्रोन टेक्नोलॉजी (शाहेद जैसे मिसाइल-कैरिंग ड्रोन), CM-90 एंटी-शिप मिसाइलें, GPS जैमर, पैसिव डिटेक्शन सिस्टम.     2025 में: ईरान से ड्रोन और मिलिट्री इक्विपमेंट की डिलीवरी हुई. परिवहन मंत्री ने 1000 किमी रेंज वाले ड्रोन मांगे. SIPRI के आंकड़ों से 2023 में वेनेजुएला ने करीब 98 मिलियन डॉलर के हथियार आयात किए, लेकिन आर्थिक संकट और प्रतिबंधों से खरीद कम हुई है. पहले पुराने अमेरिकी F-16 जेट थे, लेकिन अब मेंटेनेंस मुश्किल हो गई है.  तेल टैंकरों के आने-जाने पर पूरी तरह नाकेबंदी का आदेश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने  वेनेजुएला में आने और जाने वाले सभी प्रतिबंधित किए गए तेल टैंकरों की पूरी तरह से नाकेबंदी का आदेश दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इसकी घोषणा की है। उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर आरोप लगाया कि उनकी सरकार पर चोरी की तेल संपत्ति का इस्तेमाल अपराध, आतंकवाद और मानव तस्करी को बढ़ावा देने में कर रही है। वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी सैन्य घेरा ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि 'वेनेजुएला पूरी तरह से दक्षिण अमेरिका के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े नौसैनिक बेड़े से घिरा हुआ है।' इसके साथ चेतावनी दी कि काराकस अमेरिका का तेल, जमीन और दूसरी संपत्ति वापस नहीं करता, तब तक यह घेराबंदी और बढ़ेगी। उन्होंने लिखा, 'यह और भी बड़ा होगा और उन्हें ऐसा झटका लगेगा जैसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा होगा, जब तक वे अमेरिका से चुराए गए सभी तेल, जमीन और दूसरी संपत्ति वापस नहीं कर देते।' वेनेजुएला पर आतंकवाद को फाइनेंस करने का आरोप अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि मादुरो सरकार को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है, जिसमें ड्रग तस्करी, अपहरण, मानव तस्करी और हिंसा के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि वेनेजुएला के खेतों से तेल चुराकर इसका इस्तेमाल आतंकवाद को फाइनेंस करने के लिए किया जा रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अब इस सिस्टमैटिक चोरी और आपराधिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा। अमेरिका से मुकाबला: क्या संभव है? वेनेजुएला अमेरिका का सीधा मुकाबला नहीं कर सकता. ग्लोबल फायरपावर 2025 रैंकिंग में अमेरिका नंबर 1 है, वेनेजुएला 50वें स्थान पर. मुख्य अंतर…     सैनिक संख्या: अमेरिका – 13 लाख एक्टिव + 8 लाख रिजर्व. वेनेजुएला – करीब 1.09-1.23 लाख एक्टिव + 8,000 रिजर्व + मिलिशिया (दावा 45 लाख, लेकिन असल कम और कमजोर ट्रेनिंग).     हवाई ताकत: अमेरिका – 13,000+ कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (F-22, F-35 जैसे स्टेल्थ). वेनेजुएला – सिर्फ 229 (ज्यादातर पुराने रूसी Su-30, कई ऑपरेशनल नहीं).     नौसेना: अमेरिका – 440 जहाज (एयरक्राफ्ट कैरियर, न्यूक्लियर सबमरीन). वेनेजुएला – 34 जहाज.     बजट: अमेरिका – 895 बिलियन डॉलर. वेनेजुएला – करीब 2-4 बिलियन डॉलर.     टेक्नोलॉजी और अनुभव: अमेरिका की सेना आधुनिक, ग्लोबल ऑपरेशन का  अनुभव. वेनेजुएला की सेना पुरानी, मेंटेनेंस की कमी, मुख्य काम प्रदर्शन कंट्रोल. क्या और भी देश कूदेंगे जंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर दबाव बढ़ा रहे हैं. वे ड्रग तस्करी और तेल निर्यात रोकने के नाम पर कैरिबियन सागर में बड़ा सैन्य जमावड़ा कर चुके हैं. नौसेना के जहाज तैनात किए हैं. संभव सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं. इस बीच, वेनेजुएला रूस और चीन से हथियार खरीद रहा है या मदद मांग रहा है. रूस ने पहले सुखोई जेट, S-300 मिसाइल सिस्टम और टैंक दिए हैं, जबकि हालिया तनाव में मादुरो ने रूस से मिसाइलें, रडार और जेट की मरम्मत मांगी है. चीन रडार और आर्थिक मदद दे रहा है. हालांकि रूस और चीन वेनेजुएला के करीबी सहयोगी हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वे सीधे जंग में नहीं कूदेंगे. रूस पहले ही यूक्रेन युद्ध में उलझा है. चीन अपनी घरेलू प्राथमिकताओं को जोखिम में नहीं डालेगा. ईरान ने भी ड्रोन और मिसाइलें दी हैं, लेकिन बड़ा हस्तक्षेप मुश्किल. अन्य देश जैसे क्यूबा या निकारागुआ समर्थन दे सकते हैं, लेकिन सीमित. कुल मिलाकर, अगर अमेरिका हमला करता है तो वेनेजुएला अकेला पड़ सकता है. यह संघर्ष क्षेत्रीय स्तर पर ही रहेगा. आसमान से समंदर तक अमेरिकी घेरेबंदी में है वेनेजुएला पेंटागन ने वेनेजुएला को डराने और दबाव बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कैरेबियन सागर में दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford तैनात किया गया है। अक्टूबर में दो घातक B-1 लांसर बॉम्बर्स ने वेनेजुएला के तट के पास उड़ान भरी थी, जिसे एक सीधे सैन्य संदेश के रूप में देखा जा रहा है। व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी विल्स ने एक इंटरव्यू में बेहद चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति की नीति 'तब तक घेरेबंदी की है जब तक मादुरो घुटने न टेक दें'।

भारतीय उच्चायोग को धमकी से तनाव, भारत सरकार ने बांग्लादेश से मांगा जवाब

ढाका  ढाका में भारतीय उच्चायोग को धमकी मिलने की खबर है। इस संबंध में भारत सरकार ने बांग्लादेश के हाई कमिश्नर को तलब किया है। हालांकि, अब तक साफ नहीं हो सका है कि किस तरह की धमकी दी गई थी। खास बात है कि घटनाक्रम बांग्लादेश में विजय दिवस मनाए जाने के एक दिन बाद हुआ है। फिलहाल, इसे लेकर भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। बुधवार को बांग्लादेश की राजधानी ढाका स्थिति भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा को लेकर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय ने भारत में बांग्लादेश के हाई कमिश्नर को तलब किया था। भारतीय उच्चायुक्त को भी किया गया था तलब पीटीआई भाषा के अनुसार, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने रविवार को भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब कर अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की ओर से दिए गए 'भड़काऊ बयानों' पर 'गंभीर चिंता' जताई थी। हसीना इस समय भारत में हैं। देश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। बांग्लादेश भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। बांग्लादेश के विदेश विभाग ने एक बयान में कहा था, 'विदेश मंत्रालय ने आज भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया और भारत सरकार को बांग्लादेश सरकार की इस गंभीर चिंता से अवगत कराया कि शेख हसीना को ऐसे भड़काऊ बयान जारी करने की अनुमति दी जा रही है, जिसमें वह अपने समर्थकों को बांग्लादेश में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसा रही हैं। उनके बयानों का मकसद बांग्लादेश में आगामी संसदीय चुनावों को विफल करना है।' भारत को मिली धमकियां बांग्लादेश की NCP यानी नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता हसनत अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा था कि अगर नई दिल्ली उनके देश (बांग्लादेश) को अस्थिर करने का प्रयास करती है, तो ढाका को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को 'अलग-थलग' कर देना चाहिए और क्षेत्र में अलगाववादी तत्वों को समर्थन देना चाहिए। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था, 'पिछले एक साल से उस देश से बार-बार ऐसे बयान आ रहे हैं कि पूर्वोत्तर भारत के राज्यों को अलग करके बांग्लादेश का हिस्सा बना दिया जाना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'भारत एक बहुत बड़ा देश है, परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र है और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। बांग्लादेश इसके बारे में सोच भी कैसे सकता है?' उन्होंने कहा कि इसके बारे में सोचना भी ‘गलत है, लेकिन बांग्लादेश के लोगों की सोच ही गलत है’। सीएम ने कहा कि इस मानसिकता को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए और बांग्लादेश को किसी भी तरह से ज्यादा मदद नहीं दी जानी चाहिए।  

गांधी परिवार में अंदरूनी कलह? केंद्रीय मंत्री बोले—प्रियंका से विवाद के बाद राहुल गांधी ने छोड़ा देश

नई दिल्ली  केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच विवाद का दावा किया है। उन्होंने कहा है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष परिवार से झगड़ा कर विदेश गए हैं। फिलहाल, इसे लेकर कांग्रेस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इससे पहले भी भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस से निकाले गए नेता मोहम्मद मुकीम के पत्र के हवाले से ऐसा दावा किया था। मीडिया से बातचीत में बिट्टू ने वीबी जी राम जी बिल पर कांग्रेस के प्रदर्शन की तैयारी पर सवाल पूछा गया। इसपर उन्होंने कहा, 'उनके पास लोग हैं प्रदर्शन करने के लिए? उनको महात्मा गांधी से कोई लेना देना नहीं है। उन्हें जो उनका गांधी है, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, संजय गांधी, उनको उस गांधी से दिक्कत है कि वो कहां जा रहा है।' उन्होंने कहा, 'लोग उस गांधी को भूल चुके हैं, जो उनके नाम से जुड़ा हुआ है। उसे नकार चुके हैं। और बापू गांधी थे हैं और रहेंगे।' उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी हैं कहां? अभी मैं उनकी तस्वीरें जर्मनी में देख रहा था। वहां पर एक तरफ तो प्रधानमंत्री हैं, जो देश के लिए दुनिया जहां में काम देश का नाम के लिए जाते हैं। ये जाते हैं घूमने और सैर करने।' उन्होंने आगे कहा, 'दूसरी तरफ दोनों गांधी में लड़ाई चल रही है, बड़ी भारी लड़ाई चल रही है। जो मुझे पता लगा है… सदन में जो दो तीन बार जो भाषण हुआ है, उसे भी लोगों ने प्रियंका गांधी का जो भाषण है, उसकी तुलना की है। और राहुल गांधी इस चीज से नाराज होकर परिवार और पार्टी से लड़कर यहां से चले गए हैं।' उन्होंने कहा, 'उनकी पार्टी और फैमिली में जो प्रॉब्लम है। इसलिए राहुल गांधी छोड़कर चले गए हैं।' पहले भी लगाए आरोप भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने लिखा था, 'टीम प्रियंका बनाम टीम राहुल खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस की आंतरिक कलह अब बाहर आ गई है।' उन्होंने लिखा, 'ओडिशा से वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने सोनिया गांधी को लिखा कि खरगे हटाओ, प्रियंका लाओ। साथ ही प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं।' उन्होंने लिखा, 'ओडिशा के नेता मोहम्मद मुकीम ने राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व संकट पर सवाल उठाए हैं और पार्टी को दोबारा तैयार करने के लिए संगठन और विचारधारा स्तर पर सुधार की बात कही है।'  

अहमदाबाद के स्कूलों को मिली धमकी, संदेश में लिखा ‘हम बदला लेंगे’ — खालिस्तानी कनेक्शन पर पुलिस की नजर

अहमदाबाद  बुधवार को अहमदाबाद के कई स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली। एकाएक आए इस धमरी भरे ईमेल ने सबके कान खड़े कर दिए। पुलिस बल के साथ बम स्क्वॉड भी पहुंचा, एहतियातन स्कूल खाली कराए गए और जांच अब भी जारी है। पुलिस के सूत्रों ने बताया कि बम से उड़ाने की धमकी देने वाले खालिस्तानी हो सकते हैं। उनके निशाने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का संसदीय क्षेत्र और गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का साबरमती जेल भी थी। ईमेल में बदला लेने की बात भी कही गई है।   अहमदाबाद पुलिस के एक बयान के अनुसार, बुधवार को कई स्कूलों को एक ईमेल मिला जिसमें लिखा था, "हम बदला लेंगे"। संदेश की डरावनी प्रकृति को देखते हुए, स्कूलों ने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई की गई। संयुक्त पुलिस आयुक्त शरद सिंघल ने कहा, "पुलिस की टीमें संबंधित स्कूलों में मौजूद हैं और जांच कर रही हैं।" जिन स्कूलों को ये ईमेल मिले हैं, उनमें महाराजा अग्रसेन स्कूल, जाइडस स्कूल फॉर एक्सीलेंस और जेबर स्कूल सहित कई शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, पुलिस अधिकारियों को संदेह है कि इन ईमेल के पीछे खालिस्तान से जुड़े तत्वों का हाथ हो सकता है, जिससे स्कूलों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। एक अभिभावक ने स्कूल की ओर से जारी किए गए नोटिस को साझा किया, जिसमें लिखा था: "आपको सूचित किया जाता है कि कुछ असुविधा के कारण, हमें विद्यालय परिसर को खाली करना पड़ रहा है। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि जल्द से जल्द अपने बच्चे को आकर ले जाएं।" समाचार एजेंसी 'ANI' से बात करते हुए, एक पिता ने बताया कि सूचना मिलते ही वे मात्र 10 मिनट में स्कूल पहुंच गए। जब उनसे पूछा गया कि क्या स्कूल के सुरक्षा उपाय मानकों के अनुरूप हैं, तो उन्होंने सहमति जताते हुए कहा कि वे बेहतरीन हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी ने व्हाट्सएप मैसेज नहीं देखा था, तो स्कूल के शिक्षकों ने उन्हें तुरंत फोन करके जानकारी दी। अहमदाबाद से पहले भी देश के अन्य हिस्सों में स्कूलों को इसी तरह की धमकियां मिली थीं। अमृतसर, पंजाब (12 दिसंबर): यहां के कई स्कूलों को ईमेल के जरिए बम की धमकी मिली थी। ADCP-2 श्रीवेनेला के अनुसार, एंटी-सबोटेज (भंग-रोधी) जांच के बाद ये धमकियाँ फर्जी पाई गईं। दिल्ली (10 दिसंबर): दिल्ली के दो स्कूलों को बम की धमकी मिली थी। इसमें संस्कृति स्कूल को मिला ईमेल बेहद गंभीर था, क्योंकि उसमें सीधे तौर पर खालिस्तान आंदोलन का जिक्र था।