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दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे पर अपडेट: यात्रा समय घटकर 2 घंटे, नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान

नई दिल्ली  सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ी खुशखबरी दी है। गडकरी ने बुधवार को कहा कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद दिल्ली से उत्तराखंड की राजधानी की दूरी मात्र दो घंटे में तय की जा सकेगी और इसके उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से समय मांगा गया है।   नितिन गडकरी ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के जवाब में उम्मीद जतायी कि यह एक्सप्रेसवे करीब पंद्रह दिनों में चालू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे बनाया है जिसके चलते मेरठ जाने में अब 45 मिनट लगते हैं जबकि पहले साढ़े तीन घंटे का समय लगता था। इस दौरान नितिन गडकरी ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की भी जानकारी दी और बताया कि यह कब तक चालू किया जा सकता है। गडकरी ने कहा कि सरकार अब दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे बनवा रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर से इसके प्रायोगिक परिचालन को मंजूरी दे दी गयी है। उन्होंने कहा कि यह मार्ग शुरू होने से दिल्ली से देहरादून दो घंटे में पहुंचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इस मार्ग को शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से समय मांगा गया है, और यह पंद्रह दिन में शुरू हो जाएगा। इसके शुरू होने से दिल्ली-मेरठ मार्ग पर परिवहन काफी कम हो जाएगा। गडकरी ने कहा कि लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने मेरठ में अंदरूनी रिंग रोड बनाने का जो सुझाव दिया है, सरकार उस पर विचार करेगाी। वाजपेयी ने पूरक प्रश्न के जरिये सरकार से जानना चाहा था कि क्या वह मेरठ में अंदरूनी रिंग रोड बनाने पर विचार कर रही है? दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे एक निर्माणाधीन परियोजना है, जो लगभग 210 किमी लंबी है और दिल्ली से देहरादून की यात्रा को 6-7 घंटे से घटाकर केवल 2.5 घंटे कर देगी। इसका एक हिस्सा (अक्षरधाम से ईपीई जंक्शन तक) परीक्षण के लिए खोला जा चुका है।  

जब अटल को राष्ट्रपति और आडवाणी को PM बनाने की थी तैयारी — कलाम की एंट्री ने कैसे पलट दिया पूरा खेल?

नई दिल्ली  एपीजे अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाने से पहले अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर भी विचार हुआ था। पार्टी के स्तर पर यह चर्चा हुई थी कि क्यों ना मौजूदा प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को ही राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया जाए और उनके स्थान पर पीएम का पद लालकृष्ण आडवाणी को दे दिया जाए। अब्दुल कलाम 2002 में राष्ट्रपति चुने गए थे और उस दौरान लालकृष्ण आडवाणी भाजपा में बेहद मजबूत स्थिति में थे और उन्हें आरएसएस का समर्थन भी अटल बिहारी वाजपेयी के मुकाबले ज्यादा मिला हुआ था। यही कारण था कि अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रपति बनने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे खारिज कर दिया था। अटल बिहारी वाजपेयी ने दलील दी थी कि इससे गलत परंपरा शुरू हो जाएगी। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मीडिया सलाहकार रहे अशोक टंडन ने अपनी पुस्तक अटल स्मरण में यह दावा किया है। इस पुस्तक को प्रभात प्रकाशन ने छापा है। अब्दुल कलाम को 11वें राष्ट्रपति के तौर पर चुना गया था। उनके इलेक्शन की दिलचस्प बात यह थी कि सत्ताधारी एनडीए के साथ ही विपक्षी दलों ने भी उनके नाम का समर्थन किया था। वह 2007 तक इस पद पर रहे थे। अशोक टंडन लिखते हैं कि जब अटल जी के सामने राष्ट्रपति बनने का ऑफर रखा गया तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। वह 1998 से 2004 तक प्रधानमंत्री रहे थे। कई दलों के साथ मिलकर गठबंधन सरकार अटल बिहारी वाजपेयी ने चलाई थी। उन्हें गठबंधन राजनीति में एक सफल सरकार चलाने का श्रेय अब भी दिया जाता है। अशोक टंडन लिखते हैं, 'अटल बिहारी वाजपेयी ऐसे किसी ऑफर के लिए तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि वह एक लोकप्रिय प्रधानमंत्री हैं। ऐसी स्थिति में उनका राष्ट्रपति बन जाना भारतीय लोकतंत्र के लिए अच्छी परंपरा स्थापित नहीं करेगा। यह बहुत गलत होगा और वह ऐसे किसी भी कदम का समर्थन करने वाले आखिरी व्यक्ति होंगे।' इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए गति बढ़ा दी। उन्होंने कांग्रेस से संपर्क किया और आम सहमति बनाकर कलाम को राष्ट्रपति चुनवा दिया। सोनिया गांधी भी ऐसा प्रस्ताव मिलने से हो गई थीं हैरान अशोक टंडन लिखते हैं, 'मुझे याद है कि सोनिया गांधी, प्रणब मुखर्जी और मनमोहन सिंह उनसे मिलने आए थे। इसी दौरान पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि एनडीए की ओर से अब्दुल कलाम के नाम का प्रस्ताव रखा जाएगा। इस मीटिंग में कलाम का नाम सुनते ही सन्नाटा हो गया था। इस सन्नाटे को सोनिया गांधी ने ही तोड़ा था और उनका कहना था कि हम लोग कलाम का नाम सुनकर हैरान हैं। हमारे पास उनका समर्थन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हम इस पर बात करेंगे और फिर फैसला लिया जाएगा।'  

अकड़ मुर्दों की होती है… कुंभ भगदड़ के मुद्दे पर अभिषेक बनर्जी का तीखा पलटवार, ममता के समर्थन में उतरे

कोलकाता  फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी लियोनेल मेसी के कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मची अव्यवस्था को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल सरकार का बचाव किया है। उन्होंने इसके लिए प्रयागराज महाकुंभ में मची भगदड़ का उदाहरण दिया है, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना के एक घंटे के भीतर माफी मांग ली थी, जबकि भाजपा शासित राज्यों में हुई बड़ी घटनाओं पर ऐसी जवाबदेही देखने को नहीं मिलती। अभिषेक बनर्जी ने कहा, “भाजपा शासित राज्यों में कुंभ के दौरान कितने लोग मरे, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की भगदड़ में जानें गईं, क्या वहां किसी ने जिम्मेदारी ली? क्या आपने योगी आदित्यनाथ से सवाल किया? बंगाल में जो हुआ उस पर मुख्यमंत्री ने एक घंटे के भीतर माफी मांगी।” उन्होंने एक शेर के जरिए भी हमला बोला। अभिषेक बनर्जी ने कहा, “झुकता वही है जिसमें जान है, अकड़ तो मुर्दों की पहचान है। हमने जनता के सामने सिर झुकाया है। जिन पर आरोप हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। यही वजह है कि भाजपा हारती है और तृणमूल जीतती है।” आपको बता दें कि मेसी की कोलकाता यात्रा GOAT टूर 2025 का पहला पड़ाव थी। यह अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई। विश्व कप विजेता खिलाड़ी के स्वागत का जश्न उस समय तनाव में बदल गया, जब मैदान पर बड़ी संख्या में वीआईपी और राजनेताओं की मौजूदगी से प्रशंसकों में नाराजगी फैल गई। कई दर्शकों ने आरोप लगाया कि उन्होंने टिकट खरीदने के बावजूद मेसी की एक झलक तक नहीं देखी। घटना के बाद गुस्साए प्रशंसकों ने स्टेडियम में तोड़फोड़ भी की और आयोजकों पर कुप्रबंधन के गंभीर आरोप लगाए। खेल मंत्री का इस्तीफा, SIT गठित इस पूरे मामले के बाद राज्य के खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्वीकार कर लिया। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसमें आईपीएस अधिकारी पीयूष पांडेय, जावेद शमीम, सुप्रतीम सरकार और मुरलीधर शामिल हैं। इसके साथ ही सरकार ने डीजीपी राजीव कुमार को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा है कि स्टेडियम में इतनी बड़ी अव्यवस्था क्यों हुई और निजी आयोजकों समेत संबंधित एजेंसियों के साथ समुचित समन्वय क्यों नहीं किया गया।  राज्य सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।  

विदेशी धरती पर देशभक्ति का रंग, इथियोपिया में सुनते ही ‘वंदे मातरम्’ पर झूमे PM मोदी

इथियोपिया इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली द्वारा आयोजित भोज समारोह में मंगलवार शाम एक भावुक कर देने वाला क्षण देखने को मिला, जब इथियोपिया के गायकों की टीम ने ‘वंदे मातरम्’ की मनोहारी प्रस्तुति दी। विदेशी धरती पर भारत के राष्ट्रीय गीत की गूंज ने वहां मौजूद सभी लोगों को गहराई से प्रभावित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी काफी उत्साहित नजर आए। उन्होंने तालियों से गायकों का उत्साह बढ़ाया। पीएम मोदी वीडियो शेयर करते हुए लिखते हैं, ''कल प्रधानमंत्री अबी अहमद अली द्वारा आयोजित बैंक्वेट डिनर में इथियोपियाई गायकों ने वंदे मातरम् का एक शानदार गायन किया। यह एक बहुत ही भावुक पल था, वह भी ऐसे समय में जब हम वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं।' आपको बता दें कि भारत ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है। इसके लिए कई आयोजन किए जा रहे हैं। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान भी इस विषय पर चर्चा हुई। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इथियोपिया के सर्वोच्च सम्मान 'ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया' से सम्मानित किया गया। इसके लिए उन्होंने इथियोपियाई सरकार एवं देशवासियों का आभार व्यक्त किया। पीएम मोदी मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स कहा, "कल शाम मुझे 'ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया' से सम्मानित करने के लिए इथियोपिया के लोगों और सरकार के साथ-साथ प्रधानमंत्री अबी अहमद अली का आभारी हूं। दुनिया की सबसे प्राचीन और समृद्ध सभ्यताओं में से एक द्वारा सम्मानित होना मेरे लिए बहुत गर्व की बात है। यह सम्मान उन अनगिनत भारतीयों का है जिन्होंने वर्षों से हमारी साझेदारी को मजबूत किया है।" प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत उभरती वैश्विक चुनौतियों से निपटने और नए अवसर पैदा करने के लिए इथियोपिया के साथ सहयोग को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।" उन्होंने दोनों देशों के बीच समझौतों को भारत और इथियोपिया के बीच लंबे समय से चली आ रही और भरोसेमंद साझेदारी में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा, "शासन और शांति स्थापना से लेकर डिजिटल क्षमता और शिक्षा तक, हमारा ध्यान अपने लोगों को सशक्त बनाने पर है। ज्ञान, कौशल और नवाचार पर जोर कल के कर्णधारों के रूप में युवाओं में हमारे साझा विश्वास को रेखांकित करता है।" उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सेवा में सहयोग "मानवीय गरिमा और सबसे कमजोर लोगों की देखभाल के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।" प्रधानमंत्री मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में आज सुल्तान हैथम बिन तारिक के निमंत्रण पर ओमान जायेंगे। श्री मोदी की यह ओमान की दूसरी यात्रा होगी। यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ के मौके पर हो रही है। इससे पहले दिसंबर 2023 में सुल्तान तारिक की भारत यात्रा पर आए थे।  

संसद में उठाया सवाल: 8वें वेतन आयोग का एरियर कब मिलेगा? जानें लेटेस्ट अपडेट

 नई दिल्‍ली केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर्स 8वें वेतन आयोग के लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्‍योंकि बढ़ती महंगाई और घरेलू खर्चों के उच्‍च स्‍तर पर बने रहने के कारण वेतन संशोधन से उम्‍मीदें और भी तेज हो गई हैं. इस बीच एक खास सवाल यह है कि क्‍या 1 जनवरी 2026 से ही 8th Pay Commission के तहत कर्मचारियों का एरियर मिलेगा? या फिर कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी या पिछला बकाया पाने के लिए इंतजार करना पड़ेगा.  1 जनवरी 2026 को एक संभावित डेट माना जा रहा है,  लेकिन सरकार ने अबतक इसकी अधिकारिक ऐलान नहीं किया है. इससे लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स में यह अनिश्चितता बनी हुई है कि उन्हें वास्तविक वित्तीय राहत कब मिलेगी?   संसद में सरकार ने क्‍या दिया जवाब?  8वें वेतन आयोग के लागू करने को लेकर मामला संसद के शीतकालीन सत्र में भी उठाया गया. इस पर जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि 8वें वेतन आयोग को लागू करने की तारीख सरकार उचित समय पर तय करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि आयोग की सिफारिशें स्वीकार होने के बाद उसके लिए आवश्यक बजटीय प्रावधान किए जाएंगे. इस बयान से यह संकेत तो मिल रहा है कि सरकार इसे जल्‍द लागू करने की कोशिश कर रही है, लेकिन एरियर 1 जनवरी से दिया जाएगा, यह स्‍पष्‍ट नहीं है.  कब लागू होगा आठवां वेतन आयोग?  नवंबर 2025 में सरकार ने 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस को मंजूरी दी थी और आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया है. ऐसे में देखा जाए तो आयोग की रिपोर्ट 2027 के मिड में आने की संभावना है. जब रिपोर्ट आएगी तो सरकार के सिफारिशों की समीक्षा होगी. इसके बाद कैबिनेट से मंजूरी और नए वेन स्‍ट्रक्‍चर का नोटिफिकेशन जारी करने में 3 से 6 महीने का अतिरिक्‍त समय लग सकता है. इस हिसाब से इसे आगे लागू होने की आशंका है. पिछली वेतन आयोगों का इतिहास  अभी भले ही वेतन आयोगों के लागू होने में देरी हुई हो, लेकिन पिछले एक्‍सप्रीएंस कुछ हद तक राहत देने वाल रहे हैं. पहले सैलरी आयोगों में एरियर का पेमेंट औमतौर पर उस तारीख से किया गया है, जिस दिन पहले वेतन आयोग समाप्‍त हुआ था. 7वां वेतन आयोग जून 2016 में लागू हुआ था, लेकिन सैलरी और पेंशन 1 जनवरी 2016 से दी गई थी . इसी तरह 6वां वेतन आयोग अगस्‍त 2008 में मंजूरी हुआ था, लेकिन एरियर 1 जनवरी 2006 से दिया गया था. 5वां वेतन आयोग में भी देरी के बावजूद कर्मचारियों को पिछला भुगतान मिला था. इसी वजह से उम्‍मीद की जा रही है कि 8वें वेतन आयोग का एरियर भी 1 जनवरी 2026 से दिया जा सकता है.  कर्मचारियों की कितनी बढ़ सकती है सैलरी? सैलरी में वास्तविक बढ़ोतरी फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगी, जिसे आयोग सुझाएगा और सरकार स्वीकार करेगी. अगर 2.0 के फिटमेंट फैक्टर को आधार मानें, तो एक अनुमान के जरिए वेतन में बदलाव को समझा जा सकता है. अगर किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन ₹76,500, महंगाई भत्ता ₹44,370 और मकान किराया भत्ता ₹22,950 है, तो कुल मासिक वेतन ₹1,43,820 बनता है. वेतन संशोधन के बाद बेसिक वेतन बढ़कर करीब ₹1,53,000 हो सकता है और एचआरए बढ़कर लगभग ₹41,310 तक पहुंच सकता है. इससे कुल मासिक वेतन करीब ₹1,94,310 हो जाएगा.

भारत ने AI क्षेत्र में तीसरा स्थान हासिल किया, UK और साउथ कोरिया को पछाड़ा

 नई दिल्ली भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सेक्टर में बड़ी छलांग लगाई है. Stanford University की 2025 Global AI Vibrancy Tool रिपोर्ट (2024 के डेटा पर आधारित) में भारत दुनिया में तीसरी पोजिशन पर है. रिपोर्ट की मानें, तो भारत को 21.59 स्कोर मिला है. इस लिस्ट में भारत सिर्फ अमेरिका और चीन से पीछे है.  जहां अमेरिका का स्कोर 78.6 है, जबकि चीन का स्कोर 36.95 है. एक साल पहले तक भारत 7वें स्थान पर था और महज एक साल में भारत ऊंची छलांग लगाकर तीसरे पायदान पर पहुंच गया है.  क्या है स्टैनफोर्ड का ग्लोबल AI वाइब्रेंसी टूल?  ये टूल एक ऑनलाइन डैशबोर्ड है, जो देशों को AI इकोसिस्टम में उनकी एक्टिविटी और कॉम्पिटेटिवनेस के आधार पर रैंक करता है. ये डैशबोर्ड देशों का आकलन 7 पिलर- रिसर्च, टैलेंट, इकोनॉमी, पॉलिसी, इंफ्रास्ट्रक्चर, रिस्पॉन्सिबल AI और पब्लिक ओपिनियन के आधार पर करता है.  जहां इस लिस्ट में भारत पिछले साल 7वें स्थान पर था, इस साल तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. भारत ने साउथ कोरिया और यूनाइटेड किंगडम को पीछे छोड़ दिया है.  7वें से तीसरे नंबर पर सिर्फ एक साल में भारत कैसे पहुंचा?  भारत के तेजी से आगे बढ़ने के कई कारण हैं. रिपोर्ट की मानें, तो मजबूत पॉलिसी, तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम और AI टैलेंट का बड़ा पूल भारत को आगे ले जाने में अहम भूमिका निभा रहा है.  इसकी वजह से भारत कई मोर्चों पर मजबूत हुआ है. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि भारत को AI के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए 'नई और बड़ी पहलों' का सीधा फायदा मिला है. इन्हीं कदमों के दम पर भारत ने कई विकसित देशों को पीछे छोड़ते हुए ग्लोबल AI रेस में अपनी स्थिति मजबूत की है. स्टार्टअप और प्राइवेट सेक्टर पुश कितना जरूरी है?  भारत की AI वाइब्रेंसी तेजी से आगे बढ़ते स्टार्टअप और एंटरप्राइसेस इकोसिस्टम से जुड़ी हुई है. स्टार्टअप और एंटरप्राइसेस फाइनेंस से लेकर हेल्थकेयर, एजुकेशन और लॉजिस्टिक तक विभिन्न सेक्टर्स में AI को जोड़ रहे हैं. भारत के बड़े डिजिटल बाजार और एक्टिव कंपनियां इसे उभरते मार्केट्स में सबसे अधिक कॉम्पिटेटिव AI इकोनॉमी में से एक बनाती हैं. भारत का टैलेंट एडवांटेज कितना बड़ा है?  भारत AI टैलेंट का ग्लोबल पावर हाउस है. AI हायरिंग में भारत ने दुनिया में सबसे ज्यादा ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ हासिल की है. साल 2024 में भारत AI से जुड़े GitHub प्रोजेक्ट्स में सबसे ज्यादा योगदान करने वाला दूसरा देश बन गया है. AI स्किल पेनिट्रेशन के मामले में भी भारत दुनिया के टॉप देशों में शामिल है. यह रैंकिंग भारत की मजबूत इंजीनियरिंग वर्कफोर्स को दिखाती है.  क्या भारत वास्तव में AI रिसर्च और इनोवेशन में मजबूत है?  भले ही भारत, अमेरिका और चीन से पीछे है, लेकिन AI पब्लिकेशन और पेटेंटिंग में भारत के सुधार साफ नजर आते हैं. ये दोनों ही फैक्टर R&D पिलर के लिए महत्वपूर्ण हैं. स्टैनफोर्ड के AI इंडेक्स के मुताबिक भारत लगातार अपनी AI आउटपुट क्षमता बढ़ा रहा है और खुद को एक स्ट्रैटेजिक AI डेवलपमेंट हब के तौर पर स्थापित कर रहा है. खासकर एकेडमिक-इंडस्ट्री के बीच बढ़ता सहयोग, भारत को मजबूत कर रहा है.  सरकार का क्या रोल है?  यहां IndiaAI Mission एक प्रमुख प्लेयर है. इस मिशन को केंद्रीय कैबिनेट ने अगले 5 सालों के लिए लगभग 10,300–10,372 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी थी. इसके तहत 10 हजार से ज्यादा GPUs को कंप्यूटिंग कैपेसिटी बढ़ने के लिए लगाना, एक नेशनल नॉन-पर्सनल डेटा प्लेटफॉर्म डेवलप करना और सुरक्षित और भरोसेमंद AI के लिए फ्रेमवर्क तैयार करना है. इसका सीधा असर पॉलिसी, गवर्नेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर पिलर्स पर पड़ा है.  हाई रैंकिंग के बाद भी भारत अभी कहां पिछड़ रहा है? एनालिस्ट को यहां कई गैप्स नजर आ रहे हैं. कटिंग-एज AI रिसर्च और ग्लोबल विजिबल फाउंडेशनल मॉडल्स, चीन और अमेरिकी के मुकाबले हाई-वैल्यू प्राइवेट इन्वेस्टमेंट फ्लो, डेटा क्वालिटी और एडवांस R&D कैपेसिटी में बॉटलनेक स्थिति बड़ी चुनौतियां हैं. भारत को प्रमुश शहरी केंद्रों के आगे रिस्पॉन्सिबल AI रेगुलेशन और एक्सेस पर काम करने की जरूरत है.  भारत के AI फ्यूचर के लिए ये रैंकिंग क्या मायने रखती है?  तीसरे स्थान पर होना ये दिखाता है कि भारत दुनिया की सबसे ज्यादा कॉम्पिटेटिव AI पावर में से एक है. साथ ही भारत लोअर और मिडिल इनकम वाले देशों के आगे खड़ा है. हालांकि, फ्रंटियर कैपेबिलिटी के मामले में अमेरिका और चीन के मुकाबले भारत काफी पीछे है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर भारत AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बनाए रखता है, रिसर्च और इनोवेशन पर दोगुना जोर दे और एथिकल व इन्क्लूसिव AI गवर्नेंस को मजबूत करता है, तो आने वाले में दशक में भारत की AI ग्रोथ रेट काफी तेज हो सकती है.  

2500 करोड़ में तैयार होगा मिनी ब्रह्मोस, DRDO के पिनाका Mk3 से दो मोर्चों पर हमला संभव

बेंगलुरु  भारतीय सेना की आर्टिलरी ताकत में एक नया अध्याय जुड़ने वाला है. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के नए वर्जन पर काम शुरू दिया है. रक्षा विभाग ने 120 किमी रेंज वाली पिनाका रॉकेट्स को भारतीय सेना में शामिल करने का प्रस्ताव पेश किया है. इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 2500 करोड़ रुपये है. मौजूदा पिनाका की रेंज 75-90 किमी तक है, लेकिन यह नया वर्जन पिनाका Mk3 120 किलोमीटर तक मार करेगा, जो पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसियों के लिए बड़ा खतरा साबित होगा. यह प्रोजेक्ट ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के सबक से प्रेरित है, जहां पिनाका ने पाकिस्तानी ड्रोन्स, जेट्स और फॉरवर्ड पोस्ट्स को नेस्तनाबूद किया था. अब भारतीय सेना ने डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) के सामने 2500 करोड़ का प्रस्ताव रखा है, जिसमें इन एक्सटेंडेड रेंज गाइडेड रॉकेट्स की खरीद शामिल है. इसे नए पिनाका को भारत का ‘मिनी ब्रह्मोस’ भी कहा जा रहा है, क्योंकि यह सुपरसॉनिक स्पीड से दुश्मन के गहरे इलाकों में घुसकर सटीक वार करने में सक्षम होगी. DRDO के आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ARDE) ने इन रॉकेट्स को डिजाइन किया है, और म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (MIL) टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के तहत इन्हें बनाएगी. इसके ट्रायल्स अगले कुछ महीनों में शुरू होने वाले हैं और ये मौजूदा पिनाका लॉन्चर्स से ही फायर किए जा सकेंगे… यानी इसके लिए कोई नया इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं चाहिए. क्यों कह रहे हैं ‘मिनी ब्रह्मोस’? ब्रह्मोस सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल की स्पीड Mach 3 तक है, और यह दुश्मन के घर में घुसकर सटीक हमला करती है. पिनाका की यह नई रॉकेट Mach 4.5 की स्पीड से उड़ान भरती है, 40 किमी की ऊंचाई तक जाती है और Mach 1.8 पर टारगेट हिट करती है. 250 किलो वॉरहेड के साथ GPS-गाइडेड यह रॉकेट 10 मीटर की सटीकता से हमला करेगी. पिनाका मिसाइल की मुख्य खूबियां पिनाका भारतीय सेना की स्वदेशी रॉकेट सिस्टम है, जो दुश्मन पर भारी तबाही मचा सकती है. यहां इसकी खास बातें…     मार करने की दूरी: अभी यह रॉकेट 75-90 किलोमीटर तक मार करती है, नया वर्जन 120 किलोमीटर तक जा सकेगा. आगे 300 किलोमीटर वाला भी आएगा.     स्पीड: हवा से 4.7 गुना तेज उड़ती है, 40 किलोमीटर ऊंचाई तक जाती है और टारगेट पर ध्वनि की स्पीड से ज्यादा तेज हमला करती है.     निशाना: जीपीएस और भारतीय नेविक सिस्टम से चलती है, सिर्फ 10 मीटर के दायरे में सटीक गिरती है, बिल्कुल पिन की तरह.     विस्फोटक ताकत: 250 किलो तक का बारूद ले जा सकती है, बड़े इलाके को एक साथ तबाह करने के लिए कई तरह के वॉरहेड हैं.     एक साथ फायरिंग: एक लॉन्चर से 12 रॉकेट 44 सेकंड में छोड़ सकता है. पूरी बैटरी से 72 रॉकेट एक साथ 1 वर्ग किलोमीटर को मिनटों में बर्बाद कर सकता है.     लाना-ले जाना आसान: बड़े ट्रक पर लगा होता है, गोली चलाकर तुरंत जगह बदल सकता है, जिससे दुश्मन का जवाबी हमला बेकार.     पुराने सिस्टम से काम चलेगा: नई रॉकेट्स पुराने लॉन्चर से ही चलेंगी, कोई नया सामान खरीदने की जरूरत नहीं.     किसी भी मौसम में काम: बारिश, ठंड या पहाड़ – हर जगह चलती है. कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर में इसका कमाल दिख चुका है.     पूरी तरह भारतीय: डीआरडीओ ने बनाई, भारतीय कंपनियां बनाती हैं. आर्मेनिया जैसे देशों को बेची भी जा रही है. ब्रह्मोस की तरह यह भी डीप स्ट्राइक करने में माहिर है… पाकिस्तान के सियालकोट, नारोवाल, कसूर या मुजफ्फराबाद जैसे इलाकों को भारतीय बॉर्डर से 100-120 किमी दूर से टारगेट कर सकती है. इसकी एक बैटरी 44 सेकंड में 72 रॉकेट्स फायर कर 1 वर्ग किमी एरिया को तबाह कर देगी. जहां एक ब्रह्मोस मिसाइल की कीमत 25-35 करोड़ है, वहीं पिनाका रॉकेट्स सस्ती और बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं. यही इसे ‘मिनी ब्रह्मोस’ बनाता है. पाकिस्तान पर कितना असर? पठानकोट, उधमपुर, देहरादून, अंबाला और जोधपुर जैसे नॉर्दर्न बेस से ये रॉकेट्स पाकिस्तान के स्टेजिंग एरिया, लॉजिस्टिक्स नोड्स, अम्यूनिशन डिपो और टेरर लॉन्चपैड्स को आसानी से टारगेट कर सकेंगी. सीमा के मैदानी इलाकों में पाकिस्तान के पास कवर कम है, इसलिए यह भारतीय सेना को डिटरेंस थ्रू डोमिनेंस देगी. एक रेजिमेंट (18 लॉन्चर्स) में 216 रॉकेट्स एक मिनट से कम में फायर हो सकते हैं. पांच बेस पर एक-एक रेजिमेंट तैनात करने से करीब 1100 रॉकेट्स हेयर-ट्रिगर अलर्ट पर रहेंगे. पाकिस्तान की एयर डिफेंस इसे रोकने में नाकाम रहेगी, क्योंकि लॉन्चर्स 50-70 किमी पीछे छिपे रहेंगे. चीन के खिलाफ कैसे बनेगा गेम चेंजर? भारतीय सेना की दो फ्रंट वॉर की तैयारी में ये रॉकेट्स अक्साई चिन या ईस्टर्न लद्दाख में चीनी सैनिकों को रोकेंगी. ब्रह्मोस के साथ टैग-टीम बनाकर यह हॉटन एयरपोर्ट या तियानशुईहाई के हेलीपैड्स को टारगेट कर सकती हैं. सेना चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लंबी रेंज वाली पिनाका तैयार होते ही अन्य लॉन्ग-रेंज वेपन्स की प्लानिंग ड्रॉप की जा सकती है. भविष्य में 300 किमी रेंज वाला वर्जन भी आएगा, जो ‘वेरी डीप’ टारगेट्स जैसे एयरबेस और इंडस्ट्रियल प्लांट्स को हिट करेगा. यह प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया’ का बेहतरीन उदाहरण है. पिनाका पहले ही आर्मेनिया जैसे देशों को एक्सपोर्ट हो चुकी है, और अब यूरोपीय देश भी इंटरेस्ट दिखा रहे हैं. 2500 करोड़ का यह निवेश न सिर्फ सेना को मजबूत बनाएगा, बल्कि हजारों जॉब्स क्रिएट करेगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में देसी MBRL को प्राथमिकता दी जा रही है. दुश्मन अब भारत के खिलाफ कोई भी कदम उठाने से पहले दस बार सोचेगा, क्योंकि यह ‘मिनी ब्रह्मोस’ उनके घर में घुसकर वार करने वाली है. भारतीय सेना की यह धुरंधर मिसाइल सीमाओं की रक्षा को नई ऊंचाई देगी.

रेलवे कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग से पहले सैलरी बढ़ोतरी का रास्ता साफ, जानिए क्या है नई योजना

नईदिल्ली  8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के लागू होने से पहले ही भारतीय रेलवे ने कर्मचारियों की सैलरी बढ़ोतरी से जुड़ी तैयारियां तेज कर दी हैं। वेतन और पेंशन पर भविष्य में पड़ने वाले भारी वित्तीय बोझ को देखते हुए रेलवे अभी से खर्च घटाने, बचत बढ़ाने और आय के नए स्रोत मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। संकेत साफ हैं कि 8वें वेतन आयोग के लागू होते ही रेलवे कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। कब तक आएगी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट? 8वें वेतन आयोग का गठन जनवरी 2025 में हुआ था और 28 अक्टूबर 2025 को इसके टर्म ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी किए गए। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। ऐसे में जनवरी 2026 से पहले रिपोर्ट आने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी सीमित समय को देखते हुए रेलवे ने अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है। 7वें वेतन आयोग का अनुभव रेलवे को 7वें वेतन आयोग का असर अब भी याद है। साल 2016 में आयोग लागू होने के बाद कर्मचारियों की सैलरी में 14% से 26% तक की बढ़ोतरी हुई थी, जिससे रेलवे के वेतन और पेंशन खर्च में सालाना करीब 22,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा था। अब आंतरिक आकलन के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग के बाद यह बोझ बढ़कर 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। बढ़ते खर्च से निपटने की रणनीति रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस चुनौती से निपटने के लिए पहले से ही ठोस योजना बनाई जा रही है।     ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने पर जोर     फ्रेट यानी माल ढुलाई से होने वाली आय बढ़ाने की रणनीति     आंतरिक संसाधनों का बेहतर और प्रभावी उपयोग रेलवे की मौजूदा वित्तीय स्थिति वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेश्यो 98.90% रहा, जबकि इस दौरान शुद्ध आय 1,341.31 करोड़ रुपये दर्ज की गई। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ऑपरेटिंग रेश्यो को घटाकर 98.43% करने का लक्ष्य रखा गया है और नेट रेवेन्यू 3,041.31 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। बिजली और कर्ज से होगी बड़ी बचत पूरे रेल नेटवर्क के इलेक्ट्रिफिकेशन से हर साल लगभग 5,000 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है। इसके अलावा, 2027-28 से रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) को किए जाने वाले भुगतान में भी कमी आने की संभावना है, क्योंकि हाल के वर्षों में पूंजीगत खर्च का बड़ा हिस्सा बजटीय सहायता से पूरा किया गया है। फिटमेंट फैक्टर बना अहम मुद्दा कर्मचारी संगठनों की मांगें भी रेलवे के लिए बड़ी चुनौती हैं। 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जबकि अब यूनियनें 2.86 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रही हैं। अगर यह मांग मान ली जाती है, तो वेतन खर्च में 22% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। बजट बढ़ोतरी से मिला भरोसा इन तमाम चुनौतियों के बावजूद रेलवे आश्वस्त नजर आ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में कर्मचारियों के वेतन के लिए बजट बढ़ाकर 1.28 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले साल 1.17 लाख करोड़ रुपये था। पेंशन मद में भी अधिक फंड आवंटित किया गया है। रेलवे का मानना है कि सही योजना, बढ़ती आय और बेहतर प्रबंधन के जरिए 8वें वेतन आयोग के असर को संतुलित किया जा सकेगा, जिसका सीधा लाभ 12.5 लाख से ज्यादा रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा।  

इतिहास रचने के करीब एलन मस्क: 600 अरब डॉलर से आगे बढ़ी नेटवर्थ, ट्रिलियनेयर बनने की दौड़ में सबसे आगे

नई दिल्ली  टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बनने की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और ऐसे कई फैसले ले रहे हैं, जिससे वह यह उपलब्धि आने वाले कुछ वर्षों में ही हासिल कर सकते हैं। यह जानकारी रिपोर्ट्स में दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मस्क की कंपनी स्पेसएक्स 800 अरब डॉलर की वैल्यू पर टेंडर ऑफर लाने की तैयारी कर रही है। इससे मस्क की नेटवर्थ 168 अरब डॉलर बढ़कर 677 अरब डॉलर होने का अनुमान है। फोर्ब्स के मुताबिक, मस्क दुनिया के पहले ऐसे व्यक्ति हैं, जिनकी संपत्ति 600 अरब डॉलर से अधिक हो गई है। इसके साथ ही स्पेसएक्स अगले साल 1.5 ट्रिलियन डॉलर पर इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) लाने की तैयारी कर रही है, जिससे मस्क की संपत्ति में और अधिक इजाफा होने की उम्मीद है। मस्क के पास इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला में 12 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसकी वैल्यू 197 अरब डॉलर है, जिसमें स्टॉक ऑप्शन शामिल नहीं है। इसके अलावा, मस्क की एआई कंपनी एक्सएआई होल्डिंग्स 230 अरब डॉलर की वैल्यूएशन पर नई फंडिंग जुटाने जा रही है और मस्क की इस कंपनी में हिस्सेदारी 53 प्रतिशत है और जिसकी वैल्यूएशन करीब 60 अरब डॉलर है। सितंबर 2021 में मस्क 200 अरब डॉलर की संपत्ति का आंकड़ा पार करने वाले तीसरे व्यक्ति बने थे। नवंबर 2021 में उनकी कुल संपत्ति 300 अरब डॉलर, दिसंबर 2024 में 400 अरब डॉलर और अक्टूबर में 500 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी। इस महीने की शुरुआत में, मस्क ने उन खबरों का खंडन किया जिनमें कहा गया था कि स्पेसएक्स 800 अरब डॉलर की फंडिंग जुटा रही है या नासा उनकी अंतरिक्ष कंपनी को सब्सिडी दे रही है। फोर्ब्स के मुताबिक, मस्क के बाद संपत्ति के मामले में दूसरे स्थान पर गूगल के सह-संस्थापक लैरी पेज हैं, जिनकी संपत्ति 253 अरब डॉलर है। तीसरे स्थान पर 235 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ लैरी एलिसन हैं।

तेलंगाना के आवासीय विद्यालय कार्यक्रम को मिलेगा केंद्र का सहयोग? मुख्यमंत्री ने सीतारमण से की चर्चा

हैदराबाद  तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर ‘यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल्स’ (वाईआईआईआरएस) कार्यक्रम के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि राज्य सरकार तेलंगाना में कुल 105 वाईआईआईआरएस स्थापित करने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार, इन विद्यालयों के माध्यम से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से लगभग चार लाख छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वाईआईआईआरएस और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के निर्माण पर करीब 30,000 करोड़ रुपये का व्यय आएगा। उन्होंने शिक्षा अवसंरचना में बड़े पैमाने पर निवेश को देखते हुए इस उद्देश्य के लिए लिए जाने वाले ऋणों को राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम की सीमाओं से छूट देने का अनुरोध किया। इस दौरान कांग्रेस सांसद किरण कुमार चामाला, डॉ. मल्लू रवि, सुरेश शेटकर और अनिल कुमार यादव भी मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि सितंबर में उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर 30,000 करोड़ रुपये के वाईआईआईआरएस कार्यक्रम के लिए विशेष वित्तीय सहायता और एफआरबीएम छूट की मांग की थी। उन्होंने बताया था कि यह पहल लाखों बच्चों की शिक्षा और पोषण में बदलाव लाएगी, हाशिए पर रहने वाले समुदायों को सशक्त करेगी और भारत के जनसांख्यिकीय लाभ को मजबूत करेगी। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से इस दीर्घकालिक मानव पूंजी निवेश के लिए एफआरबीएम छूट देने का आग्रह दोहराया और कहा कि यह कार्यक्रम छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पौष्टिक भोजन की चुनौतियों से निपटने के लिए शुरू किया गया है। इस बीच, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भी मुलाकात की और हैदराबाद में एक भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) की स्थापना को मंजूरी देने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि आईआईएम के लिए आवश्यक 200 एकड़ भूमि की पहचान कर ली गई है और अस्थायी परिसर में तुरंत कक्षाएं शुरू करने की व्यवस्था भी तैयार है। मुख्यमंत्री ने यह भी मांग की कि तेलंगाना में जिलों की संख्या बढ़ने के अनुरूप 9 केंद्रीय विद्यालय और 16 जवाहर नवोदय विद्यालयों को मंजूरी दी जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन विद्यालयों की स्थापना के लिए आवश्यक भूमि और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने को तैयार है।