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विकास मॉडल की जीत: बिहार चुनाव पर पीएम मोदी की पहली प्रतिक्रिया

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए के सहयोगी दलों को बधाई दिया है। उन्होंने बिहार की जनता को एनडीए की ऐतिहासिक सफलता के लिए हृदय से धन्यवाद किया। बता दें कि एनडीए ने कुल 243 सीटों में से 200 से अधिक सीटों पर मजबूत बढ़त बना ली है। पीएम मोदी ने इस सफलता को सुशासन, विकास, जनकल्याण तथा सामाजिक न्याय की अभूतपूर्व जीत करार दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "बिहार में सुशासन की जीत हुई है। विकास की जीत हुई है। जनकल्याण की भावना की जीत हुई है। सामाजिक न्याय की जीत हुई है।" उन्होंने आगे कहा कि बिहार के मेरे परिवारजनों को बहुत-बहुत धन्यवाद, जिन्होंने 2025 के विधानसभा चुनावों में एनडीए को ऐतिहासिक व अभूतपूर्व विजय का आशीर्वाद प्रदान किया है। यह अपार जनसमर्थन हमें जनता-जनार्दन की निष्ठापूर्ण सेवा करने तथा बिहार के उज्ज्वल भविष्य के लिए नए संकल्पों के साथ कार्य करने की प्रेरणा देगा। पीएम मोदी ने आगे कहा कि मैं एनडीए के प्रत्येक कार्यकर्ता का आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने अथक परिश्रम किया है। उन्होंने जनता के बीच जाकर हमारे विकास के एजेंडे को सामने रखा और विपक्ष के हर झूठ का मजबूती से जवाब दिया। मैं उनकी हृदय से सराहना करता हूं। पीएम ने कहा कि आने वाले समय में हम बिहार के विकास, यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्य की संस्कृति को नई पहचान देने के लिए बढ़-चढ़कर काम करेंगे। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि यहां की युवा शक्ति और नारी शक्ति को समृद्ध जीवन के लिए भरपूर अवसर मिले।

भारतीय वायुसेना का ट्रेनर विमान हादसे का शिकार, जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित

चेन्नई  चेन्नई के तांबरम इलाके में गुरुवार को भारतीय वायु सेना के एक बेसिक ट्रेनर विमान के क्रैश होने की खबर सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, यह विमान नियमित प्रशिक्षण मिशन पर था। पायलट ने समय रहते विमान से ईजेक्शन लिया और सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहा। जानकारी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त विमान PC-7 पिलाटस ट्रेनर था, जो वायु सेना के कैडेटों को शुरुआती उड़ान प्रशिक्षण देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हादसे के तुरंत बाद आपातकालीन टीम घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। वायु सेना ने बयान में कहा कि इस घटना की पूरी जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का आदेश दे दिया गया है। फिलहाल हादसे के कारणों, नुकसान की सीमा और सटीक स्थान की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। IAF का PC-7 फ्लीट नौसिखिए पायलटों के लिए बुनियादी उड़ान प्रशिक्षण का अहम हिस्सा है। इसलिए इस हादसे ने न केवल रक्षा अधिकारियों बल्कि नागरिक हवाई सुरक्षा एजेंसियों के बीच भी गहरी चिंता पैदा कर दी है। 

भारतीय भाषाओं को आगे ले जाने का काम कर रही विश्वरंग की पहल : संतोष चौबे

“आरंभ” – विश्वरंग मुंबई 2025 का भव्य समापन मुंबई  ‘आरंभ – विश्वरंग मुंबई 2025’ के दो  दिवसीय आयोजन मुंबई विश्वविद्यालय के ग्रीन प्रौद्योगिकी सभागार में विविध सत्रों के साथ सम्पन्न हुआ। पूरे दिन चले कार्यक्रमों में भारतीय भाषा, सिनेमा, साहित्य, विज्ञान संचार और रंगमंच की समृद्ध परंपराओं को नए दृष्टिकोण से अवगत कराया। इस अवसर पर विश्वरंग निदेशक और रबिन्द्र नाथ टैगोर यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति संतोष चौबे ने कहा कि हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की पहचान है। आज बातचीत, रचनात्मकता, पढ़ाई-लिखाई और तकनीक के क्षेत्र में इसका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में विश्वरंग की पहल हिंदी और भारतीय भाषाओं को और आगे ले जाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। कार्यक्रम की शुरुआत “भारतीय सिनेमा का भाषा और संस्कृति के विकास में योगदान” विषयक सत्र से हुई। इस अवसर पर ‘विश्वरंग संवाद – सिनेमा विशेषांक’ का विमोचन किया गया। सत्र में पुरुषोत्तम अग्रवाल, अशोक मिश्रा, अनंग देसाई, रूमी जाफरी, अजय ब्रह्मात्मज, सलीम आरिफ और छाया गांगुली की उपस्थिति रही। रूमी जाफरी ने अपनी पुस्तक ‘भोपाली टप्पे’ का एक प्रसंग साझा किया, वहीं सलीम आरिफ ने ‘शोले’ और ‘लागान’ का उदाहरण देते हुए सिनेमा के सांस्कृतिक योगदान पर प्रकाश डाला। अजय ब्रह्मात्मज ने हिंदी में लेखन और कथा–संरचना पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई, अशोक मिश्रा ने सिनेमाई भाषा और बोली के प्रयोग पर अपने विचार प्रस्तुत किए। अनंग देसाई ने सिनेमा उद्योग में अपने अनुभव साझा किए और पुरुषोत्तम अग्रवाल ने साहित्य–सिनेमा के संबंध पर विस्तार से चर्चा की, सत्र का संचालन रवींद्र कात्यायन ने किया।  इसके पश्चात "मायानगरी का रंग संसार" सत्र का आयोजन हुआ इस सत्र में वामन केंद्रे, जयंत देशमुख, प्रीता माधुर, अतुल तिवारी और अखिलेंद्र मिश्रा ने मंचकला, रंग–प्रस्तुति और नाट्य–परंपराओं पर अपने विचार साझा किए।अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा ने हिंदी रंगमंच की विशेषताओं, उसकी चुनौतियों और उसके सशक्त प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने थिएटर को रचनात्मकता की वास्तविक प्रयोगशाला बताते हुए नए कलाकारों के लिए इसकी अनिवार्यता पर बल दिया। जयंत देशमुख ने मंच को समाज का जीवंत प्रतिरूप बताया, जबकि अतुल तिवारी ने हबीब तनवीर के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस सत्र के दौरान ‘रंग संवाद – हबीब तनवीर अंक’ का विमोचन किया गया। इसके पश्चात “भारतीय भाषाओं में विज्ञान संचार” सत्र की अध्यक्षता विश्वरंग निदेशक श्री संतोष चौबे ने की। वक्ताओं में कृष्ण कुमार मिश्रा, मनीष मोहन गोरे, रमाशंकर, समीर गांगुली, नरेंद्र देशमुख, डॉ. कुलवंत सिंह और रीता कुमार शामिल रहे। सत्र में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि विज्ञान तब तक जनसामान्य तक प्रभावी रूप से नहीं पहुँच सकता, जब तक वह लोगों की भाषा में सरल, सहज और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत न हो। संतोष चौबे ने कहा कि विश्वरंग जनभाषाओं के माध्यम से विज्ञान संचार को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस अवसर पर ‘इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिये – नवंबर 2025’ अंक का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम के आखिरी सत्र में “शताब्दी समारोह – धर्मवीर भारती : विश्व साहित्य चेतना के रचनाकार” शीर्षक सत्र विशेष आकर्षण रहा। इस सत्र की मुख्य अतिथि श्रीमती पुष्पा भारती रहीं। वक्ताओं में संतोष चौबे, विश्वनाथ सचदेव, हरि मृदुल और हरीश पाठक शामिल हुए। वक्ताओं ने धर्मवीर भारती के साहित्य, उनकी दृष्टि, रचनात्मकता और सांस्कृतिक योगदान पर अपने विचार प्रस्तुत किए। श्रीमती पुष्पा भारती ने धर्मवीर भारती के लेखन को संवेदना, विचार–गहराई और सृजनशीलता का विशिष्ट उदाहरण बताया। सत्र के अंत में ‘गुनाहों का देवता’ के 189वें संस्करण का औपचारिक विमोचन किया गया। दिवस के समापन पर श्री संतोष चौबे ने घोषणा की कि आगामी भव्य आयोजन ‘विश्वरंग 2025’ का  27, 28 और 29 नवंबर को भोपाल में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “मुंबई से आरंभ हुई यह सांस्कृतिक यात्रा भोपाल में अपने उत्कर्ष पर पहुँचेगी और भारतीय भाषा, साहित्य और संस्कृति के वैश्विक विस्तार का मार्ग प्रशस्त करेगी।”

H-1B वीजाधारकों की मुश्किल बढ़ी: अमेरिकी विधेयक स्वदेश वापसी और नागरिकता का रास्ता भी प्रभावित करेगा

वॉशिंगटन एक अमेरिकी सांसद एच-1बी वीजा कार्यक्रम को "पूरी तरह से समाप्त" करने और इसके द्वारा प्रदान की जाने वाली नागरिकता के रास्ते को छीनने के लिए एक विधेयक पेश करेंगे. इससे व्यक्तियों को अपने वीजा की अवधि समाप्त होने पर "स्वदेश लौटने" के लिए मजबूर होना पड़ेगा. जॉर्जिया की कांग्रेस सदस्य मार्जोरी टेलर ग्रीन ने एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, "मेरे प्यारे अमेरिकी साथियों, मैं एच-1बी वीजा कार्यक्रम को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए एक विधेयक पेश कर रही हूं, जो धोखाधड़ी और दुरुपयोग से भरा हुआ है और दशकों से अमेरिकी कामगारों को विस्थापित कर रहा है." उन्होंने कहा कि उनके विधेयक में केवल एक छूट होगी, जो अमेरिकियों को जीवन रक्षक देखभाल प्रदान करने वाले डॉक्टरों और नर्सों जैसे चिकित्सा पेशेवरों को जारी किए जाने वाले वीजा पर प्रति वर्ष 10,000 की सीमा की ही अनुमति देगा. हालांकि, ग्रीन ने कहा कि यह 10,000 प्रतिवर्ष की सीमा भी 10 वर्षों में "चरणबद्ध तरीके से समाप्त" कर दी जाएगी, ताकि "हमें अमेरिकी डॉक्टरों और चिकित्सकों की अपनी पाइपलाइन बनाने का समय मिल सके." ग्रीन ने आगे कहा कि उनका विधेयक "नागरिकता का रास्ता भी छीन लेगा, जिससे वीजाधारकों को अपने वीजा की अवधि समाप्त होने पर स्वदेश लौटने के लिए मजबूर होना पड़ेगा." उन्होंने आगे कहा कि उनके विधेयक का उद्देश्य एच-1बी वीजा के "मूल उद्देश्य" को बहाल करना है, जो "इसे अस्थायी बनाना" था. उन्होंने कहा, "ये वीजा किसी विशेष व्यावसायिक जरूरत को पूरा करने के लिए थे. लोगों को हमेशा के लिए यहां आकर रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. हम उनकी विशेषज्ञता के लिए उनका धन्यवाद करते हैं, लेकिन हम उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना भी करते हैं, ताकि वे अपने देश लौट सकें." "अब यह एच-1बी वीजा कार्यक्रम और नौकरी और कार्यबल के सभी अन्य क्षेत्रों को पूरी तरह से समाप्त कर देगा. यह अमेरिका पहले है. अब समय आ गया है कि विदेशियों के बजाय अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता दी जाए, और यह बहुत लंबे समय से एक दुरुपयोग रहा है. अमेरिकी एक भविष्य के हकदार हैं, उन्हें एक मौका मिलना चाहिए. और मेरा मानना ​​है कि अमेरिकी दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली लोग हैं, सबसे रचनात्मक हैं, और मैं चाहती हूं कि वे अपना अमेरिकी सपना पूरा करें." देश में अमेरिकी डॉक्टरों और चिकित्सा पेशेवरों की एक नई पीढ़ी तैयार करने के लिए, ग्रीन ने कहा कि उनका विधेयक मेडिकेयर-वित्त पोषित रेजीडेंसी कार्यक्रमों में गैर-नागरिक मेडिकल छात्रों को अपने कार्यक्रमों में प्रवेश देने से रोकेगा. उन्होंने बताया कि पिछले साल ही, अमेरिका में 9000 से ज़्यादा डॉक्टर ऐसे थे, जिन्होंने मेडिकल स्कूल से स्नातक किया, लेकिन उन्हें रेजीडेंसी प्लेसमेंट नहीं मिला. उन्होंने बताया कि इस बीच, अकेले 2023 में 5000 से अधिक विदेशी मूल के डॉक्टरों को रेजिडेंसी स्थान प्राप्त हुआ. उन्होंने कहा, "यह पूरी तरह से अनुचित है, और यह अमेरिका का मामला है. मेरा विधेयक हमारे देश में डॉक्टरों और नर्सों की कमी को कम करने में मदद करेगा, जिसका हम सामना कर रहे हैं. साथ ही यह हमें अपने रेजिडेंसी कार्यक्रमों को अमेरिकी डॉक्टरों से भरने का समय देकर विदेशी कर्मचारियों पर हमारी निर्भरता को कम करने में भी मदद करेगा." कांग्रेस द्वारा निर्धारित सीमा 65,000 नियमित H-1B वीजा और अमेरिकी उन्नत डिग्री धारकों के लिए 20,000 वीजा प्रति वर्ष जारी किए जाते हैं. अमेरिकी व्यवसाय विशिष्ट व्यवसायों में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए H-1B कार्यक्रम का उपयोग करते हैं. ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा कार्यक्रम के दुरुपयोग को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की है. इसका उपयोग कंपनियां, विशेष रूप से प्रौद्योगिकी कंपनियां, अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए करती हैं. भारतीय पेशेवर, जिनमें प्रौद्योगिकी कर्मचारी और चिकित्सक शामिल हैं. H-1B वीजाधारकों के सबसे बड़े समूह में शामिल हैं. कंपनियां अपने H-1B कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास के लिए आवेदन कर सकती हैं, जो ग्रीन कार्ड प्राप्त करने के 5 साल बाद अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं. इस साल सितंबर में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी गैर-आप्रवासी वीजा कार्यक्रम में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक कदम के रूप में, 'कुछ गैर-आप्रवासी श्रमिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध' शीर्षक से एक घोषणा जारी की. इस घोषणा के तहत, 21 सितंबर, 2025 के बाद दायर की जाने वाली कुछ एच-1बी आवेदनों के साथ पात्रता की शर्त के रूप में 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त भुगतान करना होगा.

जयशंकर ने गुटेरेस को धन्यवाद दिया, भारत के विकास और प्रगति में निरंतर समर्थन के लिए सराहना

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की. साथ ही ये कहा कि वह वर्तमान वैश्विक व्यवस्था और बहुपक्षवाद पर इसके प्रभावों के बारे में संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के आकलन की सराहना करते हैं. इसके अलावा भारत के विकास के लिए निरंतर समर्थन के लिए भी उनका धन्यवाद भी किया. जयशंकर ने (स्थानीय समय) सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "आज न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासचिव @antonioguterres से मिलकर अच्छा लगा. वर्तमान वैश्विक व्यवस्था और बहुपक्षवाद पर इसके प्रभावों के उनके आकलन की सराहना करता हूं. विभिन्न क्षेत्रीय मुद्दों पर उनके दृष्टिकोण की भी सराहना करता हूं" जयशंकर ने कहा कि उन्होंने गुटेरेस को "भारत के विकास और प्रगति के लिए स्पष्ट और निरंतर समर्थन" के लिए धन्यवाद दिया और भारत में उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं. संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में गुटेरेस से मुलाकात के दौरान जयशंकर के साथ संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. ​​हरीश, संयुक्त राष्ट्र में उप-स्थायी प्रतिनिधि राजदूत योजना पटेल और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के अधिकारी भी मौजूद थे. जयशंकर ने कहाकि उन्होंने गुटेरेस को "भारत के विकास और प्रगति के लिए स्पष्ट और निरंतर समर्थन" के लिए धन्यवाद दिया. इसके साथ ये कहाकि भारत, संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के इंडिया में स्वागत करने के लिए उत्साहित हैं. गौर करें तो जयशंकर जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए कनाडा में थे. यहां उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात कर अन्य वैश्विक समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं. इससे पहले मंगलवार को गुटेरेस ने दिल्ली धमाके पर कहा था कि "वहां जो कुछ हुआ" उसके लिए भारत सरकार और लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की थी. वहीं उनके उप प्रवक्ता फरहान हक ने कहा कि इस घटना की पूरी जांच होनी चाहिए. संयुक्त राष्ट्र की दैनिक ब्रीफिंग में लाल किले के पास हुए हमले के बारे में पूछे जाने पर हक ने कहा, "हम निश्चित रूप से भारत सरकार और भारत के लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं कि वहां क्या हुआ है, और इसकी भी पूरी जांच होनी चाहिए." फरहान हक ने लाल किले पर हुए हमले को केवल "वहां जो हुआ" बताया.

व्हाइट कॉलर आतंकवाद का चौंकाने वाला मामला: डॉक्टरों ने रची PM मोदी पर प्लानिंग

लखनऊ  दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके की जांच अब एक बड़े आतंकी नेटवर्क तक जा पहुंची है. देशभर में 2,900 किलो से ज्यादा विस्फोटक बरामद हुए हैं, डॉक्टरों की गिरफ्तारी ने ‘व्हाइट कॉलर आतंकवाद’ का चेहरा दिखाया है और अब एजेंसियां उस कहानी के गुम हिस्से जोड़ने की कोशिश में जुटी हैं, जिससे लाल किले ब्लास्ट की पूरी साजिश समझ में आ सके. इसी जांच के दौरान एक बड़ी खौफनाक साजिश सामने आई है. व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल ने 4 शहरों को दहलाने की साजिश रची थी. इतना ही नहीं पीएम मोदी से लेकर आरएसएस चीफ तक निशाने पर थे. मगर, उससे पहले ही एजेंसी की सतर्कता के कारण इनका प्लान फुस्स हो गया. सूत्रों की मानें तो 4 शहर में 8 धमाकों की तैयारी की जा रही थी. आइए जानते हैं सब… जम्मू-कश्मीर पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां अब उमर नबी की हर गतिविधि पर फोकस कर रही हैं. उमर वही डॉक्टर है जिसे आत्मघाती हमलावर बताया जा रहा है. एजेंसियां ये पता लगाने में जुटी हैं कि 30 अक्टूबर से 10 नवंबर के बीच यानी उन 10 दिनों में उमर ने क्या किया, कहां गया और किससे मिला. दरअसल, यही वो वक्त था जब उसके साथी डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार किया गया था. मुजम्मिल का नाम उसके एक और साथी डॉ. आदिल राथर से पूछताछ के दौरान सामने आया था. सूत्रों का कहना है कि 30 अक्टूबर तक उमर और उसका ग्रुप गाड़ियों और विस्फोटक जैसी जरूरी चीजों की व्यवस्था नहीं कर पाए थे. लेकिन 10 नवंबर तक उन्होंने एक कार में हाई ग्रेड विस्फोटक भर दिया, जो आखिरकार लाल किले के पास फटा. सवाल ये उठ रहा था कि सिर्फ 10 दिनों में उन्होंने इतनी बड़ी तैयारी कैसे कर ली थी. एजेंसियों को शक था कि उमर को उस वक्त कुछ लोगों से मदद मिली, जिनका नाम अभी सामने नहीं आया है. मगर, अब सूत्रों की माने तो जांच एजेंसी को बड़ा सुराग हाथ लगा है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और अन्य खुफिया एजेंसियों ने एक अंतरराष्ट्रीय आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया है. जांच में सामने आया है कि व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल ने चार शहरों में आठ अलग-अलग धमाकों की योजना बनाई थी. इन धमाकों का मकसद 25 नवंबर और 6 दिसंबर को देश की सुरक्षा को दहलाना था. सूत्रों के अनुसार, 25 नवंबर को अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में राम मंदिर के मुख्य शिखर पर ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान विस्फोट की साजिश रची जा रही थी. इसके अलावा 6 दिसंबर को दिल्ली में भी आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी. जांच में यह भी पता चला है कि इस साजिश की शुरुआत 2022 में विदेश से हुई थी. विदेशी हैंडलर उकासा ने मॉड्यूल के सदस्यों उमर और मुजम्मिल को निर्देश दिए और योजना को अंजाम देने के लिए उकसाया. इतना ही नहीं इन दोनों आरोपियों ने 2023 से जनवरी 2025 तक लाल किले की कई बार रेकी भी की थी. सूत्रों ने बताया कि शुरुआत में आतंकी टेलीग्राम एप के जरिए बातचीत कर रहे थे. बाद में उन्होंने अधिक सुरक्षित माने जाने वाले सिग्नल और सेशन ऐप का इस्तेमाल शुरू किया. विस्फोटक सामग्री और पुराने वाहनों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही थी. एजेंसियों के मुताबिक, मॉड्यूल ने देश में डर और दहशत फैलाने के लिए बड़ी योजना बनाई थी, लेकिन समय रहते साजिश का पर्दाफाश कर दिया गया. जांचकर्ताओं ने कहा कि उमर और मुजम्मिल विदेश से मिले निर्देशों के तहत काम कर रहे थे और उनका मकसद सिर्फ बड़े स्तर पर आतंक फैलाना था. सरकारी सूत्रों ने बताया कि इस मामले में सभी आरोपी पकड़ लिए गए हैं और उनसे आवश्यक पूछताछ जारी है.

एयरपोर्ट टैक्सी: बेंगलुरु में कैब सेवाओं का सस्ता और आरामदायक विकल्प

बेंगलुरु बैंगलोर एयरपोर्ट टैक्सी सेवा – सुगम और समय पर यात्रा केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट , बैंगलोर का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो देवनहल्ली में स्थित है और शहर से करीब 35 किमी दूर है। यह हवाई अड्डा दो टर्मिनलों (T1 और T2) के साथ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को संभालता है और हर साल लाखों यात्रियों की सेवा करता है। बैंगलोर एयरपोर्ट टैक्सी सेवाएं याfत्रयों को शहर के प्रमुख इलाकों जैसे एमजी रोड, इंfदरानगर, व्हाइटफील्ड और इलेक्ट्र्रॉनिक सिटी से जोड़ती हैं। समय पर पिकअप, सुरfक्षत सफर और आरामदायक यात्रा के लिए एयरपोर्ट टैक्सी एक विश्वसनीय विकल्प है। अब बैंगलोर एयरपोर्ट से शहर तक के fलए टैक्सी बुक करें और पाएं एक सहज और सुविधाजनक अनुभव। Table of Contents एयरपोर्ट टैक्सी बुकिंग: बेंगलुरु एयरपोट से सस्ती और सुfवधाजनक कैब सेवाएँ क्यों जरूरी है एक भरोसेमंद एयरपोट कैब सर्विस? 1. समय की बचत 2. सुरfक्षत यात्रा 3. साफसुथरी और आरामदायक गाfड़यां कैसे बुक करें बैंगलोर एयरपोर्ट टैक्सी? 4. एयरपोर्ट टैक्सी काउंटर से ऑन स्पॉट बुकिंग एयरपोर्ट टैक्सी बुकिंग क्यों है सबसे बेहतर विकल्प? एयरपोर्ट टैक्सी की खासियतें बेंगलुरु एयरपोर्ट से शहर तक टैक्सी बुकिंग प्रोसेस टैक्सी के प्रकार: अपनी जरूरत के हिसाब से चुनें कितना खर्च आएगा? आउटस्टेशन टैक्सी की सुविधा यात्रियों के लिए सुझाव: एयरपोर्ट टैक्सी बुकिंग में ध्यान देने वाली बातें निष्कर्ष क्यों जरूरी है एक भरोसेमंद एयरपोर्ट कैब सर्विस? 1. समय की बचत फ्लाइट लेने से पहले या फ्लाइर्ट से निकलने के बाद इंतजार करना हर किसी को पसंद नहीं। प्री-बुक्ड एयरपोट टैक्सी से आपको पिकअप प्वाइंट पर कैब पहले से तैयार fमलेगी। 2. सुरक्षित यात्रा रात हो या दिन, बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में सुरक्षा महत्वपूण है। प्रोफेशनल ड्राइवस और ट्रैक की जा सकने वाली कैब्स आपके सफर को सुरfक्षत बनाती हैं। 3. साफ-सुथरी और आरामदायक गाडि़यां एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही गम , थकावट और भीड़ से राहत सिर्फ एक AC टैक्सी ही दे सकती है। कैसे बुक करें बैंगलोर एयरपोर्ट टैक्सी? बैंगलोर में एयरपोर्ट टैक्सी बुुकिंग करना आसान है आप ऑनलाइन, मोबाइल ऐप से या एयरपोर्ट पर पहुँच कर सीधे टैक्सी बुक कर सकते हैं। 1. ऑनलाइन और ऐप-आधा रत टैक्सी बुकिंग डिजटल युग में ज्यादातर यात्री मोबाइल ऐप या वेबसाइट के ज़रिए टैक्सी बुक करना पसंद करते हैं। बुfकंग में लगता है सिर्फ कुछ सेकंड रियल-टाइम ट्रैकिंग और ड्राइवर डिटेल्स डिजिटल पेमेंट और फिक्स किराया प्री-बुकिंग का विकल्प जिससे गारंटीड पिकअप सुनिश्चित होता है 2. एयरपोर्ट टैक्सी काउंटर से ऑन-स्पॉट बुfकंग अगर आपने पहले से कैब बुक नहीं की है, तो आप हवाई अड्डे पर मौजूद टैक्सी काउंटर से भी तुरंत टैक्सी बुक कर सकते हैं। इससे आपको एयरपोर्ट पहुंचने के बाद तुरंत टैक्सी मिल जाती है, और कोई ऑनलाइन या डिजिटल प्रोसेस फॉलो नहीं करना पड़ता। ध्यान देने योग्य बातें पीक टाइम (सुबह/शाम) में लंबा वेस्टिंग टाइम हो सकता है किराया ऐप बुकिंग से अधिक हो सकता है एयरपोर्ट टैक्सी बुकिंग क्यों है सबसे बेहतर विकल्प? हर तरफ टैक्सी सर्विस का विकल्प मौजूद है, लेकिन सही कैब चुनना ज़रूरी है जो समय पर पहुंचे, किराया वाजिब हो और गाड़ी साफ-सुथरी हो। ऐसी सेवाएं आपकी यात्रा को सहज और तनाव रहित बना देती हैं। एयरपोर्ट टैक्सी की खासियतें स्पष्ट और पारदर्शी किराया 24×7 उपलब्धता प्रशिक्षित और अनुभवी ड्राइवर्स GPS ट्रैकिंग से सेफ्टी सहज और आसान कैब बुकिंग अतिरिक्त शुल्क जिन पर ध्यान देना चाfहए लेट नाइट चार्ज (रात 10 बजे के बाद लागू हो सकता है) टोल और पार्किंग शुल्क अतिरिक्त प्रतीक्षा समय शुल्क कुछ सेवाओं में अतिरिक्त सामान शुल्क बेंगलुरु एयरपोर्ट से शहर तक टैक्सी बुकिंग प्रोसेस टैक्सी बुक करने के लिए आप किसी भी विश्वसनीय वेबसाइट या मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं। अधिकतर जगहों पर आपको बुकिंग के लिए बस नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो करने होते हैं: 1. यात्रा की शुरुआत और अंत का पता डालें (जैसे बेंगलुरु एयरपोर्ट से अपने गंतव्य तक) 2. अपनी यात्रा की तारीख और समय चुनें 3. कैब का प्रकार चुनें (जैसे मिनी, सेडान, SUV आदि) 4. भुगतान करें और बुकिंग कन्फर्म करें ऐसे प्लेटफॉम्स से आप मिनटों में अपनी टैक्सी बुक कर सकते हैं और फ्लाइट के हिसाब से ड्राइवर से कनेक्ट भी कर सकते हैं। टैक्सी के प्रकार: अपनी जरूरत के हिसाब से चुनें कैब मिनी- सस्ती, छोटी दूरी के लिए उपयुक्त सेडान – आरामदायक और AC वाली गाड़ी, परिवार के लिए बढ़िया SUV – बड़े ग्रुप्स या ज्यादा सामान के लिए लग्ज़री – खास मौकों या बिजनेस ट्रैवल के लिए कितना खर्च आएगा? बेंगलुरु एयरपोर्ट से शहर के प्रमुख इलाक़ों जैसे एमजी रोड इंदिरा नगर व्हाइटफील्ड इलेक्ट्रॉनिक सिटी तक टैक्सी किराया आमतौर पर ₹700 से शुरू होता है। दूरी, कैब के प्रकार, और ट्रैफिक के आधार पर कीमत में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। आउटस्टेशन टैक्सी की सुविधा अगर आप बेंगलुरु एयरपोर्ट से मैसूर, ऊटी, चिकमंगलूर या कोडाइकनाल जैसे आसपास के शहरों या हिल स्टेशन जाना चाहते हैं, तो आउटस्टेशन कैब बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। ये टैक्सी लंबी दूरी के सफर के लिए आरामदायक और भरोसेमंद विकल्प हैं। यात्रियों के लिए सुझाव: एयरपोर्ट टैक्सी बुकिंग में ध्यान देने वाली बातें ● पहले से बुकिंग करें: खासकर व्यस्त समय और छुट्टियों में ताकि सफर आरामदायक रहे। ● फ्लाइट डिटेल्स डालें: ड्राइवर आपके फ्लाइट के अनुसार तैयार रहेगा। ● कस्टमर सपोर्ट नंबर सेव रखें: अगर रास्ते में कोई परेशानी आए तो मदद ले सकें।   निष्कर्ष बेंगलुरु एयरपोर्ट से अपनी मंज़िल तक पहुंचना अब आसान हो गया है अगर आप सही एयरपोर्ट टैक्सी सेवा का चुनाव करें। एक भरोसेमंद टैक्सी सेवा न केवल आपके समय और पैसे की बचत करती है, बिल्क आपके सफर को सुरक्षित और आरामदायक भी बनाती है। तो अगली बार जब भी आप बेंगलुरु आएं या यहां से यात्रा करें, अपनी एयरपोर्ट टैक्सी पहले से बुक करके स्माट और सुरक्षित ट्रैवल का आनंद लें।

PAK-यूक्रेन ड्रोन समझौते पर भारत की पैनी नजर, ऑपरेशन सिंदूर की याद ताजा

 नई दिल्ली भारत की खुफिया एजेंसियां पाकिस्तान और यूक्रेन के बीच ड्रोन तकनीक के हस्तांतरण (ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी या TOT) समझौते पर कड़ी निगरानी रख रही हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह सौदा एक यूरोपीय ड्रोन कंपनी और पाकिस्तान की सरकारी रक्षा कंपनी हेवी इंडस्ट्रीज टैक्सिला (HIT) के बीच हो चुका है. अधिकारी ने कहा कि हम इस विकास पर पूरी नजर रखे हुए हैं. पाकिस्तान यह सौदा गुप्त रखने की कोशिश कर रहा है. यह खबर ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान अपनी ड्रोन युद्ध क्षमता को मजबूत करने की कोशिश में लगा है. मई 2025 में हुई 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी यूक्रेन, रूस और यूरोप की अन्य ड्रोन कंपनियों से संपर्क में थे. वे मध्यम ऊंचाई वाले लंबी दूरी के (MALE) ड्रोन की तलाश कर रहे थे. अगर यह सौदा पूरा होता है, तो पाकिस्तान की ड्रोन जंग लड़ने की ताकत बढ़ जाएगी. ऑपरेशन सिंदूर: ड्रोन हमलों का सबक 'ऑपरेशन सिंदूर' मई 2025 में हुआ था. उस दौरान पाकिस्तानी सेना ने पश्चिमी सीमा पर ड्रोन और अन्य हथियारों से कई हमले किए. लेकिन भारतीय रक्षा बलों ने इन हमलों को पूरी तरह नाकाम कर दिया. बिना पायलट वाले हवाई यान (UAS) ने इस जंग में मुख्य भूमिका निभाई. इस घटना ने भारत को ड्रोन युद्ध की तैयारी और मजबूत करने का संकेत दिया. रूस-यूक्रेन जंग से सबक दुनिया भर में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग में दोनों देश ड्रोन से एक-दूसरे के ऊर्जा केंद्रों, सैन्य ठिकानों और फैक्टरियों पर हमला कर रहे हैं. लंबी दूरी के ड्रोन रूस और यूक्रेन के अंदरूनी इलाकों में तेल रिफाइनरी और लॉजिस्टिक हब को निशाना बना रहे हैं. पाकिस्तान इस जंग से सीख ले रहा है और अपनी सेना को नई तकनीक से लैस करना चाहता है. उत्तरी सेना कमांड का ड्रोन रिव्यू उत्तरी आर्मी कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने गुरुवार को ड्रोन युद्ध की तैयारी की समीक्षा की. उन्हें आधुनिक ड्रोन की लड़ाकू क्षमता और तैयारियों के बारे में जानकारी दी गई. लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने सभी रैंकों की तारीफ की. उन्होंने कहा कि इनोवेशन, तकनीकी उत्कृष्टता और बहु-क्षेत्रीय संचालन (मल्टी डोमेन ऑपरेशंस) में क्षमता विकास पर जोर दिया जाए. यह कदम दिखाता है कि उत्तरी कमांड आधुनिक जंग में बढ़त बनाए रखने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है. भारत की रणनीति: सतर्कता और तैयारी भारतीय एजेंसियां इस सौदे पर इसलिए चिंतित हैं क्योंकि पाकिस्तान की ड्रोन क्षमता बढ़ने से सीमा पर खतरा बढ़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को भी अपनी ड्रोन तकनीक को और मजबूत करना होगा. ऑपरेशन सिंदूर जैसी घटनाओं से भारत ने साबित कर दिया है कि वह ड्रोन हमलों का मुकाबला करने में सक्षम है.  भविष्य के लिए लगातार निगरानी जरूरी है. यह विकास क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक नया मोड़ ला सकता है. भारत सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सैन्य स्तर पर तैयारी तेज हो गई है.

अटलांटिक महासागर की धारा रुकने से यूरोप में ठंड का कहर, भारत-अफ्रीका पर भी असर

 नई दिल्ली अटलांटिक महासागर की मुख्य समुद्री धारा (Ocean Current) जो यूरोप और कई महाद्वीपों को गर्म रखती है वो खत्म हो रही है. यानी ठंडी हो रही है. इसे आइसलैंड ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बता दिया है. यह धारा अगर रुक गई तो पूरे यूरोप में फिर से हिमयुग आ सकता है. यानी चारों तरफ बर्फ ही बर्फ.  आइसलैंड के जलवायु मंत्री जोहान पाल जोहानसन ने कहा कि यह देश की अस्तित्व के लिए खतरा है. सरकार अब सबसे बुरे हालात के लिए योजना बना रही है. क्योंकि आइसलैंड एकदम नॉर्थ पोल पर ही है. सबसे बुरा असर उसे ही होगा.  अटलांटिक धारा क्या है और क्यों महत्वपूर्ण? अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन (AMOC) नाम की यह धारा गर्म पानी को उष्णकटिबंधीय क्षेत्र से आर्कटिक की ओर ले जाती है. इससे यूरोप के सर्दियां हल्की रहती हैं. लेकिन जलवायु परिवर्तन से आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है. ग्रीनलैंड की बर्फीली चादर से ठंडा पानी समुद्र में बह रहा है. वैज्ञानिक कहते हैं कि यह ठंडा पानी धारा को बाधित कर सकता है. अगर AMOC ढह गई, तो उत्तरी यूरोप में सर्दियों का तापमान बहुत गिर जाएगा. बर्फ और बर्फीले तूफान बढ़ जाएंगे. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह धारा पहले भी ढह चुकी है. लगभग 12,000 साल पहले आखिरी बर्फीले युग से पहले यही हुआ था. आइसलैंड की चिंता: पहली बार जलवायु खतरे को सुरक्षा मुद्दा बनाया मंत्री जोहानसन ने कहा कि यह हमारी राष्ट्रीय मजबूती और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है. यह पहली बार है जब किसी खास जलवायु घटना को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सामने अस्तित्व का खतरा बताया गया. अब सभी मंत्रालय सतर्क हैं और जवाब तैयार कर रहे हैं. सरकार शोध, नीतियां और आपदा तैयारी पर काम कर रही है. खतरों में ऊर्जा और भोजन सुरक्षा, बुनियादी ढांचा और अंतरराष्ट्रीय परिवहन शामिल हैं. जोहानसन ने कहा कि समुद्री बर्फ जहाजों को रोक सकती है. चरम मौसम कृषि और मछली पकड़ने को नुकसान पहुंचा सकता है, जो हमारी अर्थव्यवस्था और भोजन के लिए जरूरी हैं. आइसलैंड इंतजार नहीं कर सकता. वैश्विक प्रभाव: सिर्फ यूरोप नहीं, पूरी दुनिया प्रभावित AMOC के ढहने का असर उत्तरी यूरोप से कहीं आगे जाएगा. अफ्रीका, भारत और दक्षिण अमेरिका के किसानों पर वर्षा पैटर्न बिगड़ सकती है. अंटार्कटिका में गर्मी तेज हो सकती है, जहां बर्फ पहले ही खतरे में है. वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि अगले कुछ दशकों में घटना पूरी हो जाएगी, क्योंकि वैश्विक तापमान बढ़ रहा है. फिनलैंड के मौसम विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक एलेक्सी नुमेलिन ने कहा कि कब होगा, इस पर बहुत शोध हो रहा है. लेकिन समाज पर असर के बारे में कम जानकारी है. जर्मनी के पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट के स्टेफन राह्मस्टॉर्फ ने कहा कि विज्ञान तेजी से बदल रहा है. समय कम है, क्योंकि टिपिंग पॉइंट करीब आ रहा है. अन्य देशों की प्रतिक्रिया: शोध बढ़ा रहे हैं उत्तरी यूरोप के अन्य देश भी सतर्क हैं. आयरलैंड के मौसम विभाग ने प्रधानमंत्री और संसदीय समिति को जानकारी दी है. नॉर्वे का पर्यावरण मंत्रालय नया शोध कर रहा है. ब्रिटेन ने 81 मिलियन पाउंड से ज्यादा शोध के लिए दिए.  नॉर्डिक काउंसिल ने अक्टूबर में 60 विशेषज्ञों के साथ "नॉर्डिक टिपिंग वीक" कार्यशाला की. वे समाज पर असर की सिफारिशें तैयार कर रहे हैं. सोमवार को 30 से ज्यादा विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की बर्फ पिघलने पर चेतावनी दी.  आगे क्या? तत्काल कार्रवाई जरूरी आइसलैंड ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ने और गर्मी तेज होने के बीच जोखिम नहीं ले रहा. सरकार जलवायु अनुकूलन योजनाओं में जोखिमों को शामिल कर रही है. विशेषज्ञ कहते हैं कि समाज को प्रभाव समझने के लिए ज्यादा शोध चाहिए. यह मुद्दा दिखाता है कि जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि सुरक्षा का सवाल है.

अमेरिका को निर्यात में गिरावट, लेकिन भारत का कुल एक्सपोर्ट 6.75% बढ़ा — नए बाजारों में बढ़ी पकड़

 नई दिल्ली  अमेरिका (America) ने भारतीय प्रोडक्ट्स पर 50 फीसदी का टैरिफ (Tariff) लगाया है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की 'दबाव नीति' के तहत भारत पर एकतरफा 50 फीसदी टैरिफ थोपा गया. लेकिन अब अमेरिकी रेटिंग एजेंसी ने ही इसकी हवा निकाल दी है.  दरअसल, अमेरिकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) की रिपोर्ट को मानें, तो अमेरिका द्वारा कुछ भारतीय प्रोडक्ट्स पर 50% तक के टैरिफ लगाने के बावजूद भारत अपने एक्सपोर्ट को बढ़ाने में सफल रहा है. सितंबर महीने में भारत का कुल निर्यात 6.75% बढ़ा, जबकि अमेरिका को भेजे गए सामान में 11.9% की गिरावट दर्ज की आई. यह दर्शाता है कि भारत ने अमेरिका-केंद्रित व्यापार निर्भरता को कम कर दूसरे बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ा ली है. यानी भारत अब केवल अमेरिका के भरोसे नहीं रहने वाला है. दुनिया में भारत का डंका वैश्विक ट्रेड तनाव और महंगाई जैसी चुनौतियों के बीच भी Moody’s Ratings ने भारत की अर्थव्यवस्था के प्रति अपना पॉजीटिव रुख दिखाया है. अपनी 'Global Macro Outlook 2026-27' रिपोर्ट में एजेंसी ने यह अनुमान लगाया है कि भारतीय इकोनॉमी अगले दो वर्षों तक सालाना लगभग 6.5% की विकास दर के साथ बढ़ती रहेगी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत इस अवधि में G-20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी रहने की संभावना रखता है.  भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती के पीछे मुख्यतौर पर तीन कारण हैं:  (i) लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश.  (ii) घरेलू उपभोक्ता मांग का मजबूत होना. (iii) एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम.  भारतीय इकोनॉमी में मजबूती के पीछे महंगाई पर काबू और ब्याज दरों में कटौती की अहम भूमिका रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि Reserve Bank of India ने अक्टूबर में रेपो दर स्थिर रखी, जो यह संकेत देता है कि महंगाई नियंत्रित है और अब विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है. इस बीच विदेशी निवेशकों के नजरिये में भी भारत को लेकर सकारात्मक रुख रहा है.  बता दें, जहां मूडीज ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर 6.5 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है, वहीं  वैश्विक जीडीपी में 2026-27 के दौरान सिर्फ 2.5-2.6% तक रहने का अनुमान है. जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाएं करीब 4% की दर तक बढ़ सकती हैं. हालांकि मूडीज की रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि प्राइवेट सेक्टर की निवेश गतिविधि अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हुई है. लेकिन घरेलू डिमांड मजबूत है. मूडीज (Moody’s) एक अमेरिकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है, इसकी रिपोर्ट पर निवेशक भरोसा करते हैं. इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में है और यह 1909 में जॉन मूडी द्वारा स्थापित की गई थी.  घरेलू डिमांड, विदेशी निवेश मजबूत मूडीज की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि मज़बूत विदेशी पूंजी प्रवाह और पॉजिटिव इन्वेस्टर सेंटीमेंट ने भारत को बाहरी झटकों से निपटने के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान की है, जिससे लिक्विडिटी बनाए रखने में बड़ी मदद मिली है. हालांकि घरेलू डिमांड अभी भी ग्रोथ का मुख्य इंजन बनी हुई है. मूडीज़ ने कहा है कि निजी क्षेत्र का पूंजीगत व्यय अभी भी धीमा है और बड़े पैमाने पर व्यावसायिक निवेश अभी पूरी तरह से नहीं उबर पाया है.