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आदिवासी वीरों के बलिदान को नमन: पीएम मोदी ने याद दिलाया उनका गौरवशाली योगदान

अहमदाबाद  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित 'जनजातीय गौरव दिवस' कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय गौरव हजारों वर्षों से हमारे भारत की चेतना का अभिन्न हिस्सा रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन में ट्राइबल समाज के योगदान को हम भुला नहीं सकते हैं। नर्मदा में भगवान बिरसा मुंडा को नमन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मां नर्मदा की ये पावन धरती आज एक और ऐतिहासिक आयोजन की साक्षी बन रही है।  अभी 31 अक्टूबर को हमने यहां सरदार पटेल की 150वीं जयंती मनाई। हमारी एकता और विविधता को सेलिब्रेट करने के लिए भारत पर्व शुरू हुआ है। आज भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के इस भव्य आयोजन के साथ हम भारत पर्व की पूर्णता के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2021 में हमने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की थी। जनजातीय गौरव हजारों वर्षों से हमारे भारत की चेतना का अभिन्न हिस्सा रहा है।  पीएम मोदी ने कहा, "जब-जब देश के सम्मान, स्वाभिमान और स्वराज की बात आई, तो हमारा आदिवासी समाज सबसे आगे खड़ा हुआ। हमारा स्वतंत्रता संग्राम इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। स्वतंत्रता आंदोलन में ट्राइबल समाज के योगदान को हम भुला नहीं सकते।" विकास और जनजातीय कल्याण से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास करने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि स्वास्थ्य, सड़क और यातायात से जुड़े कई और प्रोजेक्ट्स शुरू हुए हैं। मैं इन सभी विकास कार्यों के लिए, सेवा कार्यों के लिए, कल्याण योजनाओं के लिए आप सभी को विशेषकर के गुजरात और देश के जनजातीय परिवारों को बधाई देता हूं। पीएम मोदी ने कहा कि 2014 के पहले भगवान बिरसा मुंडा को कोई याद करने वाला नहीं था। सिर्फ उनके अगल-बगल के गांव तक ही पूछा जाता था। आज देशभर में कई ट्राइबल म्यूजियम बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि श्री गोविंद गुरु चेयर जनजातीय भाषा संवर्धन केंद्र की स्थापना भी हुई है। यहां भील, गामित, वसावा, गरासिया, कोकणी, संथाल, राठवा, नायक, डबला, चौधरी, कोकना, कुंभी, वर्ली, डोडिया… ऐसी सभी जनजातियों की बोलियों पर अध्ययन होगा। उनसे जुड़ी कहानियों और गीतों को संरक्षित किया जाएगा। इससे पहले, जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नर्मदा में भगवान बिरसा मुंडा को पुष्पांजलि अर्पित की। डेडियापाडा में 'जनजातीय गौरव दिवस' कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत किया गया।

‘घोड़े की तरह काम करो’ टिप्पणी पर आलोचना तेज़—नई PM की वर्क-कल्चर नीति पर जापान में बहस

टोकियो जापान की नई प्रधानमंत्री साने ताकाइची पहले दिन से ही अपने कठोर कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने हाल ही में सुबह 3 बजे मीटिंग बुलाई, जिसके बाद फिर से जापान के ओवरवर्क कल्चर पर बहस तेज हो गई है। ताकाइची का कहना है, “मैं 18 घंटे काम करती हूं, और चाहती हूं लोग भी ऐसे ही काम करें। वर्क-लाइफ बैलेंस कोई मायने नहीं रखता।” उन्होंने यहां तक कहा कि लोग "घोड़े की तरह काम करें"।  वर्क कल्चर को लेकर उठे सवाल जापान में लंबे समय से “करोशी” यानी काम के बोझ से मौत का कल्चर रहा है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान ने अपनी अर्थव्यवस्था खड़ी करने के लिए कर्मचारियों से ज्यादा काम की उम्मीद की थी। इस दौरान कई लोग दिल के दौरे और स्ट्रोक से अचानक मरने लगे। इन मौतों को "करोशी" कहा गया। सरकार को बाद में मजबूर होकर ओवरटाइम सीमा तय करनी पड़ी थी, महज 45 घंटे प्रति माह। हालांकि ताकाइची ने ओवरटाइम सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसकी वजह से चिंता बढ़ गई है कि पुराना अत्यधिक काम वाला कल्चर फिर लौट सकता है। रात 3 बजे मीटिंग पर विवाद 7 नवंबर को संसद में बजट पर चर्चा के लिए ताकाइची ने सुबह 3 बजे अपने सलाहकारों की मीटिंग बुलाई। इसे जापानी मीडिया ने ‘3AM स्टडी सेशन’ का नाम दिया।पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्षी नेता योशिहिको नोदा ने इस फैसले को “पागलपन” बताया। उनका कहना था, “जब मैं प्रधानमंत्री था, तब सुबह 6 या 7 बजे काम शुरू करता था। दूसरों को रात के सन्नाटे में शामिल होने के लिए मजबूर करना गलत है।” विवाद बढ़ने पर ताकाइची ने सफाई देते हुए कहा कि उनके घर की फैक्स मशीन खराब थी, इसलिए उन्हें प्रधानमंत्री आवास जाकर तैयारी करनी पड़ी। ओवरवर्क कल्चर की काली सच्चाई जापान में काम का दबाव इतना अधिक है कि लोग भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में खड़े-खड़े या फुटपाथों पर सो जाते हैं। इतिहास में 1969 का एक भीषण उदाहरण है एक 29 वर्षीय कर्मचारी की ब्रेन स्ट्रोक से मौत हो गई थी, जिसने 100 से अधिक घंटे काम किया था। ताकाइची के बयान और कार्यशैली से विशेषज्ञ चिंतित हैं कि जापान में फिर से वह दौर लौट सकता है जब लोग मानसिक और शारीरिक थकान से मौत के मुहाने पर पहुंच जाएं। ताकाइची पर आरोप है कि वह कर्मचारियों पर अनुचित दबाव डाल रही हैं और अपनी कार्यशैली को “आदर्श” बताकर गलत मिसाल पेश कर रही हैं।  

पीएम मोदी का नर्मदा दौरा: देवमोगरा मंदिर में पूजा-अर्चना, बिरसा मुंडा को दी श्रद्धांजलि

सूरत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुजरात के दौरे पर हैं, जहां वे कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। अपने गुजरात दौरे के दौरान पीएम मोदी सबसे पहले सूरत पहुंचे हैं, जहां उन्होंने अंत्रोली इलाके में बन रहे बुलेट ट्रेन स्टेशन का जायजा भी लिया है। बता दें कि, पीएम मोदी मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (एमएएचएसआर) की प्रगति की समीक्षा करेंगे। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर लगभग 508 किलोमीटर लंबा है, जिसमें 352 किलोमीटर हिस्सा गुजरात और दादरा व नगर हवेली में और 156 किलोमीटर महाराष्ट्र में है। यह कॉरिडोर साबरमती, अहमदाबाद, आणंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोईसर, विरार, ठाणे और मुंबई समेत प्रमुख शहरों को जोड़ेगा। गुजरात को देंगे 9700 करोड़ रुपये की सौगात पीएम मोदी अपने गुजरात दौरे के दौरान जनजातीय गौरव दिवस के मौके पर और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती समारोह में भी शिरकत करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नर्मदा जिले में 9700 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे। इन परियोजनाओं में आदिवासी कल्याण, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और विरासत पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पीएम मोदी के दौरे का पूरा कार्यक्रम पीएम मोदी दोपहर में डेडियापाड़ा पहुंचेंगे और एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां वह कई परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। इन परियोजनाओं में प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीए-जगुआ) के तहत बने एक लाख घरों का गृह प्रवेश शामिल है। इसके अलावा पीएम मोदी लगभग 1900 करोड़ रुपये की लागत वाले 42 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों,  डिब्रूगढ़ में असम मेडिकल कॉलेज में एक सक्षमता केंद्र और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए इंफाल में एक जनजातीय अनुसंधान संस्थान भवन का भी उद्घाटन करेंगे। 250 बस, 50 नए एकलव्य विद्यालयों की सौगात प्रधानमंत्री गुजरात के 14 आदिवासी जिलों में कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए 250 बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। वह आदिवासी क्षेत्रों में 748 किलोमीटर नई सड़कों और डीए-जगुआ के तहत 14 आदिवासी बहु-विपणन केंद्रों की आधारशिला रखेंगे। पीएम मोदी 2,320 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले 50 नए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की भी आधारशिला रखेंगे।

ट्रंप के लिए मुश्किलें बढ़ीं: पूर्व राष्ट्रपति को एक और कानूनी परेशानी

वॉशिंगटन  अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक और बड़ा कानूनी झटका लगा है। फेडरल कोर्ट ने उस निर्णय पर रोक लगा दी है, जिसके तहत ट्रंप प्रशासन कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के लिए जारी फंड को तुरंत रोकना चाहता था। यह फैसला उस समय आया है जब ट्रंप सरकार कई विश्वविद्यालयों पर यह आरोप लगाकर कार्रवाई कर रही है कि वे नस्लीय भेदभाव और यहूदी-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। सैन फ्रांसिस्को की जिला अदालत की जज रीटा लिन ने साफ कहा कि प्रशासन विश्वविद्यालय को न तो फंड में कटौती कर सकता है और न ही उस पर कोई त्वरित जुर्माना लागू कर सकता है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने उन यूनियनों और संगठनों की याचिका पर भी सहमति जताई है, जो छात्रों, कर्मचारियों और फैकल्टी के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका दावा है कि ट्रंप प्रशासन विरोधी आवाज़ों को दबाने के इरादे से कार्रवाई कर रहा है, जो अमेरिकी संविधान का उल्लंघन है। क्या था ट्रंप प्रशासन का दावा? ट्रंप ने कई प्रतिष्ठित कॉलेजों को “उदारवादी और यहूदी-विरोधी विचारधारा से प्रभावित” बताते हुए दर्जनों विश्वविद्यालयों की जांच शुरू करवाई थी। उनका कहना है कि विविधता और समावेशन के नाम पर श्वेत और एशियाई छात्रों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जो नागरिक अधिकार कानून के खिलाफ है। 1.2 अरब डॉलर का जुर्माना और फंड पर रोक ट्रंप प्रशासन ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय पर 1.2 अरब डॉलर का भारी भरकम जुर्माना भी लगाया था और रिसर्च फंड पर रोक लगा दी थी। यही नहीं, कोलंबिया सहित कुछ निजी विश्वविद्यालयों के फेडरल फंड भी इसी तरह की कार्रवाई के तहत रोक दिए गए। यूसी अध्यक्ष जेम्स बी. मिलिकेन ने इस जुर्माने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि इतना बड़ा दंड संस्था की बुनियाद को हिला देगा और उसके संचालन को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। कोर्ट का यह फैसला फिलहाल विश्वविद्यालयों को बड़ी राहत देता है और ट्रंप प्रशासन की उस नीति पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है, जिसके तहत वह विश्वविद्यालयों पर राजनीतिक और वैचारिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा था।

BJP नेता की संदिग्ध मौत: झाड़ियों में पड़ा मिला शव

गंगापुर छत्रपति संभाजीनगर के गंगापुर में नरवाड़ी शिवार के पास BJP नेता का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान भालगांव निवासी और BJP युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष गणेश रघुनाथ टेमकर के रूप में हुई है। शव हदियाबाद-नरवाड़ी मार्ग पर नलकांडी पुल के पास पाया गया। घटना की जानकारी स्थानीय सरपंच आसिफ पटेल और निवासी गौरव विधाटे ने पुलिस को दी। उन्होंने बताया कि सड़क से गुजरते समय वहां से उठती दुर्गंध को देखकर उन्होंने पास जाकर झाड़ियों में पड़े व्यक्ति को देखा। उन्होंने तुरंत अपने साथियों के साथ गाड़ी लगाई और शव को उपजिला अस्पताल तक पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच में ही उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौके पर पहुंचे पुलिस निरीक्षक कुमारसिंह राठौड़ और उनकी टीम ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल मौत का कारण स्पष्ट नहीं है, और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सही वजह सामने आएगी। पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। शव के पास मिले दस्तावेज और इलाके में फैंस और समर्थकों की भीड़ के आधार पर पहचान हुई। गंगापुर पुलिस ने मृतक की मौत को संदिग्ध मानते हुए मामला दर्ज किया है और जांच जारी है। स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं में इस घटना को लेकर गहरी चिंता और अफ़सोस का माहौल है। पुलिस ने आस-पास के CCTV फुटेज और गवाहों के बयानों के आधार पर हर एंगल से मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।

इजरा स्ट्रीट पर बड़ी आग की घटना: फायर ब्रिगेड की 25 गाड़ियां लगीं काबू पाने में

कोलकाता  कोलकाता में शनिवार को भीषण आग लग गई है। पिछले कई घंटों से आग पर काबू पाने की कोशिश की जारी है, लेकिन अब तक आग को बुझाया नहीं जा सका है। इस भयानक आग को बुझाने के लिए मौके पर 25 दमकल गाड़ियां पहुंच चुकी हैं, लेकिन अब तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। इस आगजनी में अभी तक किसी प्रकार की जनहानि की जानकारी सामने नहीं आयी है। जानकारी के अनुसार, यह भीषण आग कोलकाता के 26 इजरा स्ट्रीट की एक दुकान के वेयरहाउस में लगी है। आग की चपेट में आस-पास के कई दुकान और घर आ गए हैं। आग फैलने के कारण उस पर काबू पाना दमकलकर्मियों के लिए मुश्किल हो रहा है। अब तक आग लगने के कारणों का कुछ पता नहीं चल सका है। ज्वलनशील पदार्थ में लगी है आग बता दें कि मध्य कोलकाता के इजरा स्ट्रीट पर स्थित एक इलेक्ट्रनिक्स की दुकान पर शनिवार तड़के अज्ञात कारणों से आग लग गई, जो देखते-देखते आस-पास के दुकानों और घरों में फैल गई। ऐसे आग ने विकराल रूप ले लिया। सुबह से एक-एक करके 25 से ज्यादा दमकल की गाड़ियों की मदद से आग बुझाने की कोशिश जारी है। लेकिन अबतक आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। इमारतें, संकरी गलियों और भारी मात्रा में बिजली उपकरणों व ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण आग पर काबू पाने में मुश्किल हो रही है। तेजी से फैली आग बता दें कि जिस इलाके में यह आग लगी है, वहां बिजली उपकरणों की कई दुकानें हैं। पुलिस के अनुसार, सुबह-सुबह उठने वाले स्थानीय लोगों ने इजरा स्ट्रीट की पहली मंजिल पर आग की लपटें देखीं। लोगों ने इसकी सूचना तुरंत पुलिस व दमकल विभाग को दी। लेकिन आग की लपटें तेजी से फैली और ज्वलनशील पदार्थों तक पहुंच गई। देखते-देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। स्थिति पर काबू पाने के लिए दमकलकर्मी लगातार कोशिश कर रहे हैं। शुरूआत में आग बुझाने के लिए 6 दमकल गाड़ियां भेजी गई, लेकिन आग बेकाबू हो जाने की हालत में 25 से ज्यादा दमकल की गाड़िया मौके पर पहुंची हुई हैं। दमकलकर्मी इमारत की पहली मंजिल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि आग के बीच में पहुंचकर आग पर काबू पाया जा सके। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है।

Desh News: नौगाम विस्फोट में दर्जनभर लोगों की मौत

नई दिल्ली. नौगाम थाने में विस्फोट मामले में मरने वालों की संख्या 12 हो गई है। थोड़ी देर पहले ही डीजीपी नलिन प्रभात ने 9 मौतों की पुष्टि की थी। हालांकि उन्होंने कहा था कि कई अधिकारी और आम नागरिक घायल भी हुए हैं जिनका इलाज चल रहा है। उन्होंने यह भी बताया था कि विस्फोट इतना भयानक था कि थाना बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके अलावा आसपास की इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। डीजीपी नलिन प्रभात ने बताया, जब्त की गई सामग्री पुलिस स्टेशन में ओपन एरिया में रखी गई थी। एसएफएल की टीम इसके सैंपलिंग में लगी थी। कुछ सैंपल फॉरेंसिक लैब भेजे गए थे सैंपलिंग की प्रक्रिया दो दिन से चल रही थी। अस्थायी और संवेदनशीलता की वजह से सैंपलिंग की प्रक्रिया बहुत सावधानी से की जा रही थी। इसके बाद भी दुर्भाग्य से 11 बजकर 20 मिनट के बाद एक हादसा हुआ और विस्फोट हो गया। इस घटना में कोई और अनुमान बेकार है। इसमें 9 लोगों की मौत हुई है। इसमें कई पुलिसकर्मी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि हादसे में मारे गए लोगों में, एसआई के अलावा तीन एसएफएल टीम के सदस्य. दो फोटोग्राफर, दो रेवेन्यू ऑफिसर और एक टेलर शामिल है। डीजीपी ने बताया कि 27 पुलिसकर्मी, दो राजस्व अधिकारी और तीन नागरिक हादसे में घायल हुए हैं। उन्होंने बताया, पुलिस स्टेशन को भी नुकसान पहुंचा है और आसपास की इमारतें भी डैमेज हुई हैं। इसके कारण का पता लगाया जा रहा है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर पुलिस और फरीदाबाद पुलिस के जॉइंट ऑपरेशन में फरीदाबाद से आठ गिरफ्तारियां हुई थीं। वहीं डॉ. मुजम्मिल के पास से 300 किलो से ज्यादा विस्फोटक सामग्री जब्त की गई थी। इसमें बड़ी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट भी शामिल था। जम्मू-कश्मीर पुलिस इस विस्फोटक को लेकर नौगाम गई थी। वहीं इसकी जांच की जा रही थी। डॉ. उमर भी इन आतंकियों के साथ ही था और लालकिले के सामने वही विस्फोटक लेकर पहुंचा था। विस्फोट में उसकी मौत हो गई थी। डॉ. उमर की मां के डीएनए जांच से इसकी पुष्टि हुई है।

Desh News: नौगाम में सैंपलिंग के दौरान विस्फोट को DGP ने बताया महज हादसा

नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली में धमाके के बाद जम्मू-कश्मीर के नौगाम थाने में विस्फोट में कम से कम 9 लोगों की जान चली गई। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी नलिन प्रभात ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया है कि यह सिर्फ एक हादसा था और इस मामले में कोई और अनुमान लगाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस इस मामले की भी जांच करेगी। डीजीपी ने कहा कि यह धमका सैंपलिंग के दौरान हुआ जिसमें मामले की जांच कर रहे एसआई इसरार समेत 9 लोगों की जान चली गई। डीजीपी नलिन प्रभात ने बताया, जब्त की गई सामग्री पुलिस स्टेशन में ओपन एरिया में रखी गई थी। एसएफएल की टीम इसके सैंपलिंग में लगी थी। कुछ सैंपल फॉरेंसिक लैब भेजे गए थे सैंपलिंग की प्रक्रिया दो दिन से चल रही थी। अस्थायी और संवेदनशीलता की वजह से सैंपलिंग की प्रक्रिया बहुत सावधानी से की जा रही थी। इसके बाद भी दुर्भाग्य से 11 बजकर 20 मिनट के बाद एक हादसा हुआ और विस्फोट हो गया। इस घटना में कोई और अनुमान बेकार है। इसमें 9 लोगों की मौत हुई है। इसमें कई पुलिसकर्मी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि हादसे में मारे गए लोगों में, एसआई के अलावा तीन एसएफएल टीम के सदस्य. दो फोटोग्राफर, दो रेवेन्यू ऑफिसर और एक टेलर शामिल है। डीजीपी ने बताया कि 27 पुलिसकर्मी, दो राजस्व अधिकारी और तीन नागरिक हादसे में घायल हुए हैं। उन्होंने बताया, पुलिस स्टेशन को भी नुकसान पहुंचा है और आसपास की इमारतें भी डैमेज हुई हैं। इसके कारण का पता लगाया जा रहा है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर पुलिस और फरीदाबाद पुलिस के जॉइंट ऑपरेशन में फरीदाबाद से आठ गिरफ्तारियां हुई थीं। वहीं डॉ. मुजम्मिल के पास से 300 किलो से ज्यादा विस्फोटक सामग्री जब्त की गई थी। इसमें बड़ी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट भी शामिल था। जम्मू-कश्मीर पुलिस इस विस्फोटक को लेकर नौगाम गई थी। वहीं इसकी जांच की जा रही थी। डॉ. उमर भी इन आतंकियों के साथ ही था और लालकिले के सामने वही विस्फोटक लेकर पहुंचा था। विस्फोट में उसकी मौत हो गई थी। डॉ. उमर की मां के डीएनए जांच से इसकी पुष्टि हुई है।

प्रदूषण पर सख्ती: दिल्ली-NCR में पारंपरिक वाहनों पर प्रतिबंध की संभावना, सुप्रीम कोर्ट का झुकाव ईवी की ओर

दिल्ली-NCR दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट लगातार चिंता जता रहा है। सरकार की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब बाजार में बड़े इलेक्ट्रिक वाहन (EV) आसानी से उपलब्ध हैं, इसलिए समान आकार के आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाले पेट्रोल-डीजल वाहनों पर चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध लगाया जा सकता है। कोर्ट ने सरकार को इस दिशा में ठोस नीति तैयार करने और प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया। अदालत पहले भी कई बार पेट्रोल-डीजल वाहनों के उपयोग पर सख्ती दिखा चुकी है, खासकर जब दिल्ली-एनसीआर में AQI लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि पेट्रोल-डीजल से चलने वाले महंगे लग्जरी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़क से हटाया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ गुरुवार को उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सरकार की EV खरीद और उपयोग को बढ़ावा देने वाली नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन की मांग की गई है। पीठ ने कहा कि अब बड़े आकार के इलेक्ट्रिक वाहन भी बाजार में उपलब्ध हैं, इसलिए सरकार धीरे-धीरे ऐसे ICE वाहनों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर सकती है। अदालत ने साफ किया कि बढ़ते प्रदूषण के बीच EV को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। कई VIP और बड़ी कंपनियां कर रहीं EV का इस्तेमाल न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि कुछ मामलों से जुड़े अनुभवों के आधार पर यह विचार सामने आया है कि अब इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में भी बड़ी और प्रीमियम श्रेणी की कारें बाजार में उपलब्ध हैं। ये वाहन उतनी ही सुविधाजनक हैं जितनी कि परंपरागत ईंधन पर चलने वाली लग्जरी गाड़ियां, जिनका उपयोग कई VIP और बड़ी कंपनियों द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा, “मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता क्योंकि इससे कोई पूर्वाग्रह पैदा हो सकता है। लेकिन शुरुआत में महंगे वाहनों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जा सकता है। इससे आम आदमी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि देश की आबादी का बहुत छोटा हिस्सा ही ऐसे वाहनों को खरीदने में सक्षम है।” EV नीति की फिर से समीक्षा की जरूरत न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह भी संकेत दिया कि इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति की दोबारा समीक्षा की आवश्यकता हो सकती है। अदालत ने कहा कि इस नीति को लागू हुए पाँच साल हो चुके हैं, इसलिए मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इसे पुनः परखा जाना चाहिए। सुनवाई के अंत में अटॉर्नी जनरल ने पीठ को सूचित किया कि अब तक जारी की गई अधिसूचनाओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। कोर्ट के सुझाव से सरकार सहमत अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट के सुझाव से सहमति जताते हुए कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के संबंध में अभी भी कई महत्वपूर्ण कार्य बाकी हैं। उन्होंने बताया कि सरकार के भीतर इस विषय पर कई बैठकों का आयोजन हो चुका है, और अब इसे गहनता से देखा जाना चाहिए। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर विस्तार से विचार करके EV नीति की सम्पूर्ण रूपरेखा तैयार की जाएगी।

गृह मंत्री का हमला: वोट बैंक की राजनीति करने वालों को जनता ने दिखाया आईना

पटना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद राज्य की जनता का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि वोट बैंक के लिए घुसपैठियों को बचाने वालों को जनता ने करारा जवाब दिया है। गृह मंत्री अमित शाह ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "ज्ञान, परिश्रम और लोकतंत्र की रक्षक 'बिहार भूमि' की जनता को कोटि-कोटि नमन। बिहारवासियों की ओर से एनडीए को यह प्रचंड जनादेश, बिहार में विकास, महिलाओं की सुरक्षा, सुशासन और गरीब कल्याण की एनडीए की संकल्प सेवा पर जनता की मुहर है।  पिछले 11 सालों में मोदी जी ने बिहार के लिए दिल खोलकर कार्य किए और नीतीश जी ने बिहार को जंगलराज के अंधेरे से बाहर निकालने का काम किया। यह जनादेश ‘विकसित बिहार’ के संकल्प के लिए है।" उन्होंने लिखा, "बिहारवासियों का एक-एक वोट भारत की सुरक्षा और संसाधनों से खेलने वाले घुसपैठियों और उनके हितैषियों के खिलाफ मोदी सरकार की नीति में विश्वास का प्रतीक है। वोटबैंक के लिए घुसपैठियों को बचाने वालों को जनता ने करारा जवाब दिया है। बिहार की जनता ने पूरे देश का मूड बता दिया है कि मतदाता सूची शुद्धिकरण अनिवार्य है और इसके खिलाफ राजनीति की कोई जगह नहीं है। इसीलिए राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस आज बिहार में आखिरी पायदान पर आ गई है।" इसे 'विकसित बिहार' में विश्वास रखने वाले हर बिहारवासी की जीत बताते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा, "जंगलराज और तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले किसी भी भेष में आएं, उन्हें लूटने का मौका नहीं मिलेगा। जनता अब सिर्फ और सिर्फ 'प्रदर्शन की राजनीति' के आधार पर जनादेश देती है।" प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ-साथ एनडीए के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "अपने अथक परिश्रम से इस परिणाम को चरितार्थ करने वाले बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक के बिहार भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं का अभिवादन करता हूं।" उन्होंने कहा, "मैं बिहार की जनता और विशेषकर हमारी माताओं-बहनों को आश्वस्त करता हूं कि जिस आशा और विश्वास के साथ आपने एनडीए को यह जनादेश दिया है, मोदी जी के नेतृत्व में एनडीए सरकार उससे अधिक समर्पण से उसे पूरा करेगी।"