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बाबरी मस्जिद विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, हुमायूं कबीर को नहीं मिली रोक

कोलकाता  तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर उच्च न्यायलय से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद निर्माण केस में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने शांति की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर छोड़ दी है। कबीर ने 6 दिसंबर को बाबरी जैसी मस्जिद की नींव रखने का ऐलान किया है। विधायक ने अदालत के फैसले पर खुशी जाहिर की है। फैसले पर कबीर ने कहा, 'मैंने पहले ही कह दिया था कि मैं नींव रखूंगा। हाईकोर्ट के जज ने जो निर्णय लिया, उससे मैं बहुत खुश हूं…। मैं हाईकोर्ट के जज को बधाई देता हूं…। यह मेरा संवैधानिक अधिकार है…। जो लोग हाईकोर्ट गए थे, उन्हें मुंहतोड़ जवाब मिला है…।' TMC पर भड़के टीएमसी ने विधायक कबीर को गुरुवार को पार्टी से निलंबित कर दिया था। पीटीआई भाषा के अनुसार, निलंबन के कुछ ही देर बाद कबीर ने घोषणा की कि वह विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे, इस महीने के अंत में अपनी पार्टी बनाएंगे और प्रस्तावित कार्यक्रम को बढ़ाएंगे, भले ही इसके लिए उन्हें ‘गिरफ्तार’ किया जाए या मार ही क्यों न दिया जाए। लंबन की खबर तब सामने आई जब कबीर बहरामपुर में मुख्यमंत्री की एसआईआर विरोधी रैली के आयोजन स्थल पर बैठे थे, जहां तृणमूल ने उन्हें पहले आमंत्रित किया था। कबीर ने इसे 'जानबूझकर किया गया अपमान' बताया और कहा कि उनके खिलाफ 'साजिश' रची गई है। उन्होंने कहा, 'मुझे कोई पत्र नहीं मिला है। लेकिन मैं शुक्रवार या सोमवार को विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दूंगा।' कबीर ने कहा कि उनका नया संगठन अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कुल 294 में से 135 सीट पर उम्मीदवार उतारेगा। सत्तारूढ़ पार्टी में लौटने से पहले कभी कांग्रेस, कभी तृणमूल और कभी भाजपा में रहे कबीर ने कहा कि बेलडांगा में छह दिसंबर का शिलान्यास कार्यक्रम रद्द नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी के लहजे में कहा, '(शिलान्यास कार्यक्रम में) लाखों लोग शामिल होंगे। अगर प्रशासन हमें रोकने की कोशिश करेगा, तो एनएच-12 जाम किया जा सकता है।' उन्होंने कहा कि उन्हें चुप कराने के लिए उनकी हत्या भी की जा सकती है। कबीर ने कहा कि अगर उन्हें रोका गया, तो वह धरने पर बैठेंगे और 'गिरफ्तारी देंगे'। उन्होंने कहा कि उन्हें 'न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।'  

भारत की भूमिका पर खुलकर बोले पीएम मोदी, पुतिन से कहा—हम तटस्थ नहीं हैं

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्विपक्षीय बैठक करने जा रहे हैं। इस शिखर वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने कहा है कि भारत न्यूट्रल नहीं है, बल्कि शांति का पक्षधर है। बैठक हैदराबाद हाउस में होने जा रही है। इससे पहले रूसी राष्ट्रपति राजघाट गए थे। शिखर वार्ता से पहले राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक रूप से स्वागत किया गया। पीएम मोदी ने पुतिन के साथ शिखर वार्ता के दौरान कहा कि भारत रूस-यूक्रेन संघर्ष में तटस्थ नहीं है, बल्कि शांति के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष संवाद और कूटनीति के माध्यम से खत्म होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हम इस संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करते हैं।' इस दौरान पुतिन ने कहा कि रूस इस संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान पर काम कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'पिछले दिनों विश्व समुदाय के सभी नेताओं से जब भी मेरी बात हुई है और उन्होंने जब भी विस्तार से चर्चा की तब मैंने कहा है कि भारत न्यूट्रल नहीं है भारत का पक्ष है और वो पक्ष शांति का है। हम शांति के हर प्रयास का समर्थन करते हैं और इसके हर प्रयास के साथ हैं…मुझे पूरा भरोसा है हम आज कई विषयों पर चर्चा करने वाले हैं। भारत और रूस का आर्थिक संबंधों का अधिक विस्तार हो। हम नई-नई ऊंचाईयों को प्राप्त करे…।' उन्होंने कहा, 'यूक्रेन के संकट के बाद हमारी लगातार चर्चा होती रही है आपने भी समय-समय पर एक सच्चे मित्र के रूप में हमें सभी चीजों से अवगत कराया। मैं समझता हूं कि ये विश्वास बहुत बड़ी ताकत है और आपको मैंने अनेक बार इस विषय पर चर्चा की है….विश्व का कल्याण शांति मार्ग पर ही है हम सबको मिलकर शांति के राह तलाशने चाहिए और पिछले दिनों जो प्रयास चल रहे हैं मुझे पूरा विश्वास है कि विश्व फिर से एक बार शांति की दिशा में लौटेगा।' पीएम मोदी ने कहा, 'हमारी समिट कई नतीजों के साथ चल रही है। आपकी यात्रा बहुत ऐतिहासिक है। 2001 में जब आपने कार्यभार संभाला और पहली बार भारत की यात्रा हुई आज उसे 25 साल हो गए हैं। उस पहली यात्रा में ही स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप की मजबूत नींव रखी गई थी। मैं पर्सनली भी बहुत खुश हूं कि पर्सनल लेवल पर आपके साथ मेरे रिश्तों ने भी 25 साल पूरे कर लिए हैं। मेरा मानना ​​है कि 2001 में आपने जो रोल निभाया, वह इस बात का शानदार उदाहरण है कि एक विजनरी लीडर कैसे होता है, वह कहां से शुरू करता है और रिश्तों को कहां तक ले जा सकता है इसका एक उत्तम उदाहरण भारत और रूस के संबंध हैं।' खास बात है कि राष्ट्रपति पुतिन 4 साल बाद भारत यात्रा पर आए हैं। उनकी यात्रा ऐसे समय पर हो रही है, जब अमेरिका की तरफ से लगातार भारत को रूसी तेल की खरीद के कारण निशाना बनाया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। साथ ही अमेरिका ने जी7 देशों से अपील की है कि रूसी तेल खरीदने वालों पर कार्रवाई की जाए।  

हैदराबाद हाउस के निर्माता निजाम उस्मान अली खान की कहानी, जहां होता है वैश्विक मेहमानों का स्वागत

नई दिल्ली  कल यानी 4 दिसंबर की शाम से दिल्ली की हलचल भरी सड़कों पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का काफिला सरपट दौड़ रहा है। एयरपोर्ट से सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ निजी डिनर, फिर आज राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर, राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि और अब हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता। यह दो दिवसीय दौरा भारत-रूस के 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन का हिस्सा है, जहां रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर समझौते होने की उम्मीद है। लेकिन इस दौरे की खासियत सिर्फ समझौतों तक सीमित नहीं। पुतिन का स्वागत हो रहा है एक ऐसे ऐतिहासिक महल में, जो कभी हैदराबाद के आखिरी निजाम उस्मान अली खान की शाही ठाठ-बाट का प्रतीक था। आज यही हैदराबाद हाउस विदेशी मेहमानों की भव्य मेजबानी का केंद्र है, जहां मोदी-पुतिन की बैठक हो रही है।   मीर उस्मान अली खान, जिन्हें निजाम VII के नाम से जाना जाता है, वे ब्रिटिश भारत के सबसे धनी शासकों में शुमार थे। 1886 में हैदराबाद में जन्मे इस निजाम ने 1911 से 1948 तक हैदराबाद रियासत पर शासन किया। टाइम मैगजीन ने 1937 में उन्हें दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति घोषित किया था – उनकी संपत्ति का अनुमान आज के मूल्य में 2 खरब डॉलर से अधिक था! हीरे-जवाहरात, सोने की ईंटें, और गोलकुंडा की खदानों से कमाई गई दौलत ने उन्हें वैभव का प्रतीक बना दिया। लेकिन निजाम सिर्फ धन-दौलत के मालिक नहीं थे; वे एक दूरदर्शी शासक भी थे। उन्होंने हैदराबाद को आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभाई। उस्मानिया विश्वविद्यालय की स्थापना, उस्मानिया जनरल हॉस्पिटल और कचिगुड़ा रेलवे स्टेशन जैसे निर्माण उनके नाम से जुड़े हैं। लेकिन दिल्ली से उनका नाता खास था। 1919 में ब्रिटिश सरकार ने रियासतों के शासकों को 'चैंबर ऑफ प्रिंसेस' में शामिल किया, जिसके लिए दिल्ली में रहना जरूरी हो गया। निजाम ने 1926 में अशोक रोड पर 8.2 एकड़ जमीन खरीदी – लागत लगभग 50 लाख रुपये (आज के मूल्य में सैकड़ों करोड़)। प्रसिद्ध ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस को जिम्मेदारी सौंपी गई, जिन्होंने नई दिल्ली का अधिकांश डिजाइन किया था। हैदराबाद हाउस का निर्माण 1926-28 के बीच पूरा हुआ। यह तितली के आकार का भव्य महल है, जिसमें 36 कमरे, चार जनाना (महिलाओं के लिए) कक्ष, आलीशान सीढ़ियां, फायरप्लेस, फव्वारे और मुगल-यूरोपीय शैली का मिश्रण है। ऐसा अनुमान है कि उस समय इसकी लागत लगभग 2 लाख पाउंड (आज के मूल्य में 170 करोड़ रुपये) थी। वायसराय हाउस (अब राष्ट्रपति भवन) के अलावा यह लुटियंस द्वारा बनाया गया सबसे बड़ा राजसी महल था। लेकिन विडंबना देखिए – निजाम के बेटों को यह 'बहुत पश्चिमी' लगा, इसलिए वे शायद ही कभी यहां रुके। 1948 में ऑपरेशन पोलो के बाद हैदराबाद का भारत में विलय हो गया। निजाम ने इसे कभी-कभार इस्तेमाल किया, लेकिन 1974 में यह विदेश मंत्रालय के अधीन आ गया। आज यह प्रधानमंत्री का स्टेट गेस्ट हाउस है। भारत की कूटनीतिक राजधानी का केंद्र यह हाउस आज भारत की कूटनीतिक राजधानी का केंद्र है, जहां दुनिया के सबसे महान नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज की है। अमेरिकी राष्ट्रपतियों बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू. बुश, बराक ओबामा ने यहां द्विपक्षीय वार्ताओं के माध्यम से वैश्विक साझेदारी को मजबूत किया, जबकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी कई यात्राओं में रक्षा और ऊर्जा समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जो भारत-रूस संबंधों की नींव हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे, ब्रिटिश प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन तथा थेरेसा मे ने व्यापारिक समझौतों को आकार दिया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन जैसे अन्य महान हस्तियां भी यहां मेजबान बनीं। कुल मिलाकर भारत के राजकीय दौरे पर आए लगभग सभी विदेशी मेहमानों की यहां मेजबानी हुई है। इतना ही नहीं, इंदिरा गांधी ने भी नवंबर 1983 में ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का हैदराबाद हाउस में भव्य स्वागत किया था, जहां दोनों ने न केवल राजकीय भोज में हिस्सा लिया बल्कि कॉमनवेल्थ शिखर सम्मेलन के दौरान गोपनीय वार्ताएं भी कीं। निजाम उस्मान अली खान की बात करें तो उनकी विरासत सिर्फ इमारतों तक नहीं। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और कला को बढ़ावा दिया। 1967 में उनका निधन हुआ, लेकिन हैदराबाद हाउस आज भी उनकी भव्यता की गवाही देता है – एक शाही निवास से कूटनीतिक मंच तक का सफर। पुतिन का भारत दौरा: पुरानी दोस्ती, नई चुनौतियां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यह दौरा 2021 के बाद भारत का पहला दौरा है। यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक दबावों के बीच यह यात्रा रूस की अलगाव की नीति को तोड़ने का संकेत है। 4 दिसंबर की शाम पलम एयरपोर्ट पर उतरते ही प्रधानमंत्री मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर उनका स्वागत किया – गले मिलना, हाथ पकड़ना, और एक ही कार में सवार होकर 7, लोक कल्याण मार्ग पर निजी डिनर। आज सुबह 11 बजे पुतिन को राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात हुई। फिर राजघाट पर गांधीजी को श्रद्धांजलि देते हुए पुतिन ने फूल चढ़ाए। इसके बाद हैदराबाद हाउस पहुंचे, जहां मोदी ने उनका स्वागत किया।    

राष्ट्रपति से पहले बॉडीगार्ड चखता है खाना! पुतिन की प्लेट का सबसे बड़ा टॉप सीक्रेट आया सामने

नई दिल्ली  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय भारत दौरे पर हैं। दुनिया के हर देश की नजर इस दौरे पर है। ऐसे में कूटनीतिक एजेंडे के इतर इस यात्रा पर लोगों की नजर पुतिन की सुरक्षा और निजता पर भी है। दूसरे देशों में एक अंश तक न छोड़ने वाले पुतिन की खाने-पीने की क्या व्यवस्था है, इसको लेकर भी सवाल है। दूसरे देशों के कई नेता जहां आसानी से दूसरे भोजों में शामिल हो जाते हैं, लेकिन पुतिन के साथ ऐसा नहीं है। पुतिन जिस भी देश में जाते हैं, वहां पर अपने भोजन के लिए एक खास व्यवस्था करके जाते हैं।   रिपोर्ट के मुताबिक पुतिन जब भी किसी देश की यात्रा पर जाते हैं, तो उनके साथ उनकी पूरी टीम जाती है। इसमें उनके निजी रसोइए भी शामिल होते हैं। इसके अलावा उनके भोजन की सामग्री को पहले जांचा जाता है, उसके बाद स्वीकृत किया जाता है। इतना ही नहीं हर डिश को पुतिन तक पहुंचने से पहले गहन सुरक्षा जांच से भी गुजरना पड़ता है। पहले से ही अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने वाले पुतिन यूक्रेन युद्ध के शुरू होने के बाद और भी ज्यादा चौकन्ना हो गए हैं। विदेश यात्राओं के दौरान पुतिन की फूड सिक्योरिटी यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पुतिन ने लंबे वक्त के लिए बहुत कम ही देशों की यात्रा की है। वह जब यात्रा पर जाते हैं, तो उनकी भोजन व्यवस्था की भी सैन्य स्तर पर सुरक्षा की जाती है। इतना ही नहीं रिपोर्ट्स की मानें तो पुतिन शायद ही कभी किसी मेजबान देश के शेफ द्वारा पकाया हुआ खाना खाते हैं। उनके खाने को हमेशा एक प्रशिक्षित रूसी शेफ टीम तैयार करती है, इस खाने को पकाने के बाद सुरक्षा जांच से गुजारा जाता है। इसको आसान बनाने के लिए पुतिन की टीम अपने साथ एक मोबाइल फूड-टेस्टिंग लैब लेकर चलती है, जब भी पुतिन कुछ खाते हैं। इसका इस्तेमाल किया जाता है। इतना ही नहीं, पुतिन के लिए जो खाना पकाया जाता है, उसका कच्चा माल या तो रूप से लाया जाता है, या फिर इसे मेजबान देश से बहुत जांच परख के इस्तेमाल किया जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पुतिन किसी राजभोज में बहुत कम खाना खाते है और अगर वह खाते ही हैं, तो आम तौर पर इसे उनकी टीम द्वारा ही पकाया जाता है। क्या होती है पुतिन की डाइट रूसी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा की दृष्टि से लगातार कड़े उपायों के बीच भोजन करने वाले पुतिन की डाइट लगभग साधारण ही है। सुबह के समय वह अक्सर त्वरोग(रूसी पनीर) को शहद के साथ या दलिया के साथ खाते हैं, इसके साथ में ताजा जूस लेते हैं। इसके अलावा कभी-कभी कच्चे अंडे या ऑमलेट भी खाते हैं। उनकी डाइट में ज्यादातर खाना हाई प्रोटीन और लो फैट वाला होता है। दोपहर और रात के भोजन में वह मछली को लाल मांस से अधिक पसंद करते हैं। इसके अलावा मछली की अन्य डिश पसंद करते हैं। इसके साथ ही भोजन में ज्यादातर सलाद ही होता है, जिनमें टमाटर और बेसिक सब्जियां शामिल होती हैं।  

धमकी से बवाल: भाजपा समर्थकों पर आपत्तिजनक टिप्पणी, हुमायूं कबीर का पुराना विवादों से रिश्ता फिर चर्चा में

कोलकाता  बाबरी जैसी मस्जिद बनाने का ऐलान करने वाले विधायक हुमायूं कबीर को TMC ने निलंबित कर दिया है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब उनके खिलाफ इस तरह का ऐक्शन लिया गया है। 62 साल के कबीर का राजनीतिक करियर कई विवादों से भरा रहा है। एक मौके पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों को नदी में फेंकने तक का ऐलान कर दिया था। कबीर ने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से हुई थी। तब उन्होंने पंचायत चुनाव लड़ा था। उन्हें कांग्रेस के पूर्व सांसद अधीर रंजन चौधरी का करीबी माना जाता था। लेकिन 20 नवंबर 2012 में उन्होंने अलग होकर टीएमसी का दामन थाम लिया था। खास बात है कि उस दौरान टीएमसी लेफ्ट का 34 साल का शासन खत्म कर सत्ता में आई थी। टीएमसी में एंट्री के बाद उन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कैबिनेट में मंत्री बनाया गया था। हालांकि, 3 सालों में ही उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में टीएमसी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था। साल 2018 में वह भाजपा में आए और 2021 में दोबारा टीएमसी में लौट गए। खबर है कि वह इस दौरान समाजवादी पार्टी में भी कुछ समय रहे और निर्दलीय चुनाव भी लड़ चुके हैं। टीएमसी में विवादों में रहे मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2024 में लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान कबीर ने विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि मुर्शिदाबाद में मुस्लिम आबादी 70 फीसदी है और हिंदू सिर्फ 30 प्रतिशत हैं। साथ ही उन्होंने कहा था कि वह भाजपा समर्थकों को भागीरथी नदी में फेंक देंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा था, 'अगर मैं भाजपा (समर्थकों) को 2 घंटों के अंदर भागीरथी गंगा में नहीं फेंक पाया, तो राजनीति छोड़ दूंगा। मैं तुम लोगों को शक्तिपुर में नहीं रहने दूंगा। अगर तुम्हें लगता है कि मुर्शिदाबाद में सिर्फ 30 फीसदी लोग हैं। हम 70 फीसदी हैं।' इस साल 13 मार्च को भी विधायक कबीर के नाम पर टीएमसी की अनुशासनात्मक समिति ने शोकॉज नोटिस थमा दिया था। उनपर राज्य में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी को धमकी देने के आरोप लगे थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2015 में उन्हें टीएमसी ने बाहर कर दिया था। अब नई पार्टी बनाने की तैयारी पीटीआई भाषा के अनुसार, निलंबन के कुछ ही देर बाद कबीर ने घोषणा की कि वह विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे, इस महीने के अंत में अपनी पार्टी बनाएंगे और प्रस्तावित कार्यक्रम को बढ़ाएंगे, भले ही इसके लिए उन्हें ‘गिरफ्तार’ किया जाए या मार ही क्यों न दिया जाए। तृणमूल के वरिष्ठ नेता फिरहाद हाकिम ने कोलकाता में निलंबन की घोषणा करते हुए कहा कि इस फैसले पर मुख्यमंत्री ने मुहर लगाई है। हाकिम ने कहा, 'कबीर सांप्रदायिक राजनीति में लिप्त हैं और तृणमूल इसके सख्त खिलाफ है। तृणमूल कांग्रेस सांप्रदायिक राजनीति में विश्वास नहीं रखती। अब उनका पार्टी के साथ कोई संबंध नहीं है।'  

उत्तराखंड हादसा: शादी से लौट रहे परिवार की गाड़ी खाई में गिरने से 5 बारातियों की मौत

लोहाघाट उत्तराखंड के लोहाघाट में शुक्रवार तड़के बड़ा हादसा हो गया। राष्ट्रीय राजमार्ग में बाराकोट के समीप बारात की एक बुलेरो कार खाई में गिर गई। हादसे में पांच बारातियों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को लोहाघाट उप जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बारात चम्पावत के पाटी के बालातड़ी से गणाई गंगोली वापस जा रही थी। हादसे का पता नहीं चल सका है। जिला आपदा नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के मुताबिक बीते चार दिसंबर को गणाई गंगोली के सेराघाट से एक बारात चम्पावत के पाटी ब्लॉक के बालातड़ी गांव आई थी। विवाह की रस्म पूरी होने के बाद बारात वापस सेराघाट जा रही थी। इसी दौरान बाराकोट के समीप बागधार में बोलेरो कार गहरी खाई में गिर गई। हादसे में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि पांच घायल हो गए। सूचना मिलने पर शुक्रवार तड़के मौके पर पहुंची पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने घायलों और शवों के कड़ी मशक्कत के बाद खाई से निकाला। हादसे की वजह का पता नहीं चल सका है। मृतकों में प्रकाश चंद उनियाल (40) निवासी सुभाषनगर रुद्रपुर, केवल चंद्र उनियाल (35), सुरेश नौटियाल (32), भावना चौबे (28) और भावना का का बेट प्रियांशु चौबे (6) शामिल हैं। जबकि घायलों में चालक देवीदत्त पांडेय (38) पुत्र रामदत्त पांडेय सेराघाट अल्मोड़ा, धीरज उनियाल (12) पुत्र प्रकाश चंद्र उनियाल रुद्रपुर, राजेश जोशी (14) पुत्र उमेश जोशी, बनकोट गंगोलीहाट, चेतन चौबे (5) पुत्र सुरेश चौबे, दिल्ली और भास्कर पंडा पुत्र रमेश पंडा, सेराघाट गंगोलीहाट हैं।  

रेपो रेट में कमी से ईएमआई पर बचत, लाखों लोगों के लिए राहत की खबर

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) ने रेपो रेट में कटौती कर दी है। यह 0.25 प्रतिशत की है, जिसके बाद रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत रह गई है। मजबूत आर्थिक वृद्धि और महंगाई में नरमी के बीच RBI ने नीतिगत दर में यह कटौती की है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने समिति के फैसलों की जानकारी दी। इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ भी मजबूत- संजय मल्होत्रा RBI गवर्नर ने कहा है कि इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ भी मजबूत हुई है। बड़ी इंडस्ट्रीज़ में भी क्रेडिट ग्रोथ दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि पहले के रेट कट का असर सभी सेक्टरों में बड़े पैमाने पर हुआ है। साल 2025 में रेपो रेट में अब तक कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की जा चुकी है। इससे पहले, केंद्रीय बैंक ने इस साल फरवरी से जून तक रेपो रेट में कुल 1 प्रतिशत की कटौती की थी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI जिस रेट पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। जब RBI रेपो रेट घटाता है, तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और वो इस फायदे को ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। यानी, आने वाले दिनों में होम और ऑटो जैसे लोन 0.25% तक सस्ते हो जाएंगे। ताजा कटौती के बाद 20 साल के ₹20 लाख के लोन पर ईएमआई 310 रुपए तक घट जाएगी। इसी तरह ₹30 लाख के लोन पर ईएमआई 465 रुपए तक घट जाएगी। नए और मौजूदा ग्राहकों दोनों को इसका फायदा मिलेगा। रेट कट के बाद शेयर बाजार में तेजी RBI की ओर से रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती किए जाने के बाद शेयर बाजार में तेजी है। सुबह 11 बजे के ​करीब BSE 311.74 अंकों की बढ़त के साथ 85,577.06 पर है। सुबह यह गिरावट में खुला था। एनएसई भी 90.70 अंकों की बढ़त के साथ 26,124.45 पर है। NSE के सेक्टोरल इंडेक्सेज में गिरावट और तेजी का मिलाजुला रुख है। 1 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड की खरीद-बिक्री करेगा RBI- संजय मल्होत्रा RBI गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक कैश मैनेजमेंट के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड की खरीद-बिक्री करेगा। उन्होंने बैंक, एनबीएफसी से अपनी पॉलिसी और संचालन के केंद्र में ग्राहकों को रखने का भी निर्देश दिया। साथ ही कहा कि स्थिरता सुनिश्चित करते हुए अर्थव्यवस्था की उत्पादक जरूरतों को हम सक्रिय तरीके से पूरा करना जारी रखेंगे। रेपो रेट के घटने से हाउसिंग डिमांड बढ़ेगी रेपो रेट घटने के बाद बैंक भी हाउसिंग और ऑटो जैसे लोन्स पर ब्याज दरें कम करते हैं। ब्याज दरें कम होने पर हाउसिंग डिमांड बढ़ेगी। ज्यादा लोग रियल एस्टेट में निवेश कर सकेंगे। इससे रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट मिलेगा। RBI ने महंगाई अनुमान घटाया, GDP अनुमान बरकरार रखा इस साल 4 बार घटी रेपो रेट, 1.25% की कटौती हुई RBI ने फरवरी में हुई मीटिंग में ब्याज दरों को 6.5% से घटाकर 6.25% कर दिया था। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की ओर से ये कटौती करीब 5 साल बाद की गई थी। दूसरी बार अप्रैल में हुई मीटिंग में भी ब्याज दर 0.25% घटाई गई। जून में तीसरी बार दरों में 0.50% कटौती हुई। अब एक बार फिर इसमें 0.25% की कटौती की गई है। यानी, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने तीन बार में ब्याज दरें 1.25% घटाई। रेपो रेट क्या है, इससे लोन कैसे सस्ता होता है? RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अकसर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं। यानी, बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं। रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है। इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है। हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है। बीते दिनों रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठकों का शेड्यूल जारी किया था। इस वित्तीय वर्ष में कुल 6 बैठकें होंगी। पहली बैठक 7-9 अप्रैल को हुई थी। अब हर साल ईएमआई पर बचेंगे हजारों रुपये, इन पैसों से बनेगा मोटा फंड रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार 5 दिसंबर को इस साल का एक और बड़ा तोहफा देते हुए लोन की ब्‍याज दरों में बड़ी कटौती कर दी है. गवर्नर ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की तो बैंक से लोन लेने वाले हर आदमी के चेहरे पर मुस्‍कान खिल उठी. उन्‍हें लग गया कि अब उनके मकान खरीदने और वाहन खरीदने के सपने और भी सस्‍ते होने जा रहे हैं. गवर्नर के इस फैसले का एक आदमी पर कितना असर पड़ेगा, इसकी झलक एक छोटे से कैलकुलेशन से ही साफ समझ आ जाती है. दरअसल, रिजर्व बैंक की रेपो रेट यानी नीतिगत ब्‍याज दरों में कटौती होते ही सभी बैंकों को अपने खुदरा लोन की ब्‍याज दरें भी घटानी पड़ेंगी. इन खुदरा कर्ज में होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन सहित हर तरह के छोटे-मोटे लोन आते हैं. रिजर्व बैंक ने इस साल तीसरी बार रेपो रेट में कटौती की है और … Read more

CDF बनने के बाद आसिम मुनीर का असर बढ़ा, CJCSC की जगह ली नई प्रणाली में

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) नियुक्त करने की औपचारिक मंजूरी दे दी. उन्हें यह पद पांच साल के कार्यकाल के लिए दिया गया है. राष्ट्रपति द्वारा यह मंजूरी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा भेजी गई उस संस्तुति पर दी गई, जिसमें उन्हें सेना प्रमुख और CDF पद पर नियुक्त करने की अनुशंसा की गई थी. नए संवैधानिक संशोधन के तहत पद का गठन पिछले महीने पाकिस्तान की संसद ने 27वें संविधान संशोधन को पारित किया था, जिसके तहत CDF का पद सृजित किया गया. इस पद का उद्देश्य देश की रक्षा संरचना में यूनिटी ऑफ कमांड सुनिश्चित करना और महत्वपूर्ण परिस्थिति में त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत करना है. CDF पद ने चेयरमैन, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) के पद की जगह ले ली है, जिसे अब खत्म कर दिया गया है. राष्ट्रपति ने शुभकामनाएं दीं राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि जरदारी ने नई नियुक्ति के लिए फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को शुभकामनाएं दी हैं. इसके साथ ही राष्ट्रपति ने एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्दू को दो साल का कार्यकाल विस्तार भी मंजूर किया है, जो उनके मौजूदा कार्यकाल के 19 मार्च, 2026 को पूरा होने के बाद लागू होगा. मुनीर का कार्यकाल और नियुक्ति प्रक्रिया प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने पहले आसिम मुनीर को आर्मी चीफ और CDF दोनों पदों पर नियुक्त करने का प्रस्ताव मंजूर किया था, जिसे बाद में राष्ट्रपति को भेजा गया. आसिम मुनीर को नवंबर 2022 में COAS नियुक्त किया गया था, उस समय उनका कार्यकाल तीन वर्षों का था. लेकिन 2024 में इसे बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया गया था. सरकारी अधिसूचना जारी होने के बाद उस देरी से जुड़ी अटकलों पर विराम लगा, जिनमें कहा जा रहा था कि नए CDF की नियुक्ति समय पर नहीं हो पा रही. नियुक्ति 27 नवंबर से लंबित थी, जब पिछले CJCSC जनरल साहिर शमशाद मिर्जा सेवानिवृत्त हुए थे.

पुतिन का संदेश: भारत संग गर्मजोशी और अमेरिका को पावर शिफ्ट का संकेत — जानें 10 मुख्य पॉइंट

पुतिन–मोदी मुलाकात: वेपन, मिसाइल और S-500 पर क्या बड़ी घोषणाएँ हो सकती हैं? पुतिन का संदेश: भारत संग गर्मजोशी और अमेरिका को पावर शिफ्ट का संकेत — जानें 10 मुख्य पॉइंट पुतिन–मोदी मीटिंग: न्यूक्लियर रिएक्टर से आर्थिक साझेदारी तक कई अहम मुद्दों पर बात होगी  नई दिल्ली    आज भारत और रूस के बीच 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हो रही है. यह मुलाकात सिर्फ दोस्ती की नहीं, बल्कि रक्षा क्षेत्र में बड़े सौदों की उम्मीद जगाने वाली है. हथियार, मिसाइलें, फाइटर जेट्स और खासतौर पर रूसी Su-57 फाइटर जेट तथा S-500 एयर डिफेंस सिस्टम पर डिफेंस कंपनियों और विशेषज्ञों की नजरें टिकी हुई हैं.  अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत रूस के साथ अपनी पुरानी साझेदारी को मजबूत करने को तैयार है. आइए, जानते हैं कि इस सम्मेलन से क्या-क्या उम्मीदें हैं. सम्मेलन का बैकग्राउंड: पुरानी दोस्ती, नई चुनौतियां रूसी राष्ट्रपति पुतिन 4 दिसंबर को दिल्ली पहुंचे, जहां पीएम मोदी ने खुद एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया. यह चार साल बाद पुतिन का भारत दौरा है. सम्मेलन का मुख्य फोकस रक्षा, ऊर्जा और व्यापार पर है. रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक, 2024 में भारत के 36 फीसदी हथियार रूस से आए थे. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रूसी S-400 सिस्टम ने पाकिस्तानी ड्रोन्स को 95 फीसदी नष्ट कर दिया था, जिससे भारत को इसकी ताकत का पता चला. अब भारत और पांच और S-400 यूनिट्स खरीदने की योजना बना रहा है, साथ ही उन्नत S-500 पर बातचीत हो सकती है. रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि रूस के साथ हमारी रक्षा साझेदारी लंबे समय से चली आ रही है. इस सम्मेलन से सहयोग गहरा होगा. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भी पुष्टि की कि S-400 और Su-57 पर चर्चा होगी.  मुख्य ऐलान जिन पर नजरें टिकीं डिफेंस सेक्टर की कंपनियां जैसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) इन ऐलानों से फायदा उठाने को बेताब हैं. यहां हैं प्रमुख मुद्दे… Su-57 फाइटर जेट्स: भारत की पांचवीं पीढ़ी की ताकत रूस का Su-57 (नाटो नाम: फेलॉन) एक स्टील्थ फाइटर जेट है, जो अमेरिकी F-35 का मुकाबला कर सकता है. इसमें सुपरक्रूज, एडवांस्ड रडार और लंबी दूरी की मिसाइलें लगी हैं. भारत को कम से कम दो स्क्वाड्रन (लगभग 84 जेट्स) चाहिए, ताकि वायुसेना की कमी पूरी हो सके. कीमत: प्रति जेट करीब 30 करोड़ डॉलर. रूस 100 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर देने को तैयार है, ताकि भारत में ही इन्हें बनाया जा सके. HAL नासिक में प्रोडक्शन हो सकता है. विशेषज्ञ कहते हैं- यह भारत के स्वदेशी AMCA प्रोजेक्ट का स्टॉप-गैप होगा. क्रेमलिन ने कहा कि यह दुनिया का सबसे अच्छा फाइटर है. हम भारत के साथ जॉइंट प्रोडक्शन चाहते हैं. अगर डील हो गई, तो यह 74 अरब डॉलर का सौदा हो सकता है. S-500 मिसाइल डिफेंस सिस्टम: हाइपरसोनिक हमलों का जवाब S-500 'प्रोमिथियस' S-400 से भी आगे है. यह हाइपरसोनिक मिसाइलें, बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और लोअर ऑर्बिट के सैटेलाइट्स को नष्ट कर सकता है. रेंज: 600 किलोमीटर. भारत को 5.4 अरब डॉलर का सौदा चाहिए, जिसमें 60 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर हो. रूस की अल्माज-एंटे कंपनी के साथ जॉइंट प्रोडक्शन की बात चल रही है. अगर यह ऐलान हुआ, तो भारत की एयर डिफेंस सबसे मजबूत हो जाएगी. बीईएल जैसी कंपनियां इससे फायदा उठाएंगी. अन्य हथियार और अपग्रेड: ब्रह्मोस से लेकर टैंक्स तक       S-400 अपग्रेड: बाकी डिलीवरी पर बात, साथ ही 280 अतिरिक्त मिसाइलें (3 अरब डॉलर का डील).       ब्रह्मोस मिसाइल: रेंज बढ़ाकर 800 किलोमीटर, नई जनरेशन ब्रह्मोस-एनजी. दो और रेजिमेंट्स.       Su-30MKI अपग्रेड: 100 जेट्स का बड़ा ओवरहॉल, 7.4 अरब डॉलर. HAL के साथ रूस पार्टनरशिप.       R-37 मिसाइलें: 200 किलोमीटर रेंज वाली एयर-टू-एयर मिसाइलें.       अन्य: स्प्रूट लाइट टैंक्स, पंतसिर सिस्टम, तलवार क्लास फ्रिगेट्स (ब्रह्मोस से लैस) और अकुला क्लास सबमरीन की डिलीवरी (2028 तक).  ये सौदे मेक इन इंडिया को बढ़ावा देंगे, क्योंकि ज्यादातर में लोकल प्रोडक्शन होगा.  डिफेंस सेक्टर पर असर: शेयर बाजार में उछाल की उम्मीद ये ऐलान डिफेंस स्टॉक्स को बूस्ट देंगे. HAL, BDL, मझगांव डॉक और एलएंडटी जैसी कंपनियों के शेयर पहले से ही 5-10 फीसदी ऊपर हैं. विशेषज्ञों का कहना है, अगर Su-57 और S-500 पर डील हुई, तो सेक्टर में 20-30 फीसदी ग्रोथ हो सकती है. भारत की वायुसेना को 42 स्क्वाड्रन चाहिए, लेकिन अभी सिर्फ 30 हैं. ये डील्स कमी पूरी करेंगी. अमेरिका का दबाव, भारत की आजादी अमेरिका ने CAATSA सैंक्शंस की चेतावनी दी है, लेकिन भारत ने कहा है कि वह अपनी जरूरतें खुद तय करेगा. पुतिन ने कहा कि मोदी ने अमेरिकी दबाव नहीं माना. यह डील चीन और पाकिस्तान को भी संदेश देगी. ऊर्जा क्षेत्र में भी बात होगी: रूस भारत को सस्ता तेल देगा. रुपे-मीर पेमेंट सिस्टम को लिंक किया जाएगा.  मजबूत साझेदारी का नया अध्याय पुतिन-मोदी मुलाकात भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देगी. यह सिर्फ हथियारों का सौदा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप है. विशेषज्ञ कहते हैं कि ये ऐलान दक्षिण एशिया की सैन्य संतुलन बदल देंगे. पुतिन का संदेश: भारत संग गर्मजोशी और अमेरिका को पावर शिफ्ट का संकेत — जानें 10 मुख्य पॉइंट रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली में हैं. भारत के दौरे में पुतिन कई अहम समझौतों पर पीएम मोदी के साथ बात करेंगे. जिसमें दुनिया के बदलते पावर बैलेंस, यूरोप और अमेरिका के साथ तनाव और भारत के साथ मजबूत संबंधों के फ्यूचर ब्लूप्रिंट सबपर पुतिन ने खुलकर बात की. रूस की राजधानी मॉस्को के क्रेमलिन में  इंटरव्यू में व्लादिमीर पुतिन ने हर एक सवाल का बेबाकी से जवाब दिया. दुनिया के लिए सख्त संदेश और भारतीयों को दोस्ती का पैगाम देते पुतिन ने इस इंटरव्यू में ये 10 मैसेज दिए. बदलते वैश्विक समीकरण और भारत का महत्व 1. दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है और वक्त के साथ उसके बदलने की रफ्तार तेज होती जा रही है. ये बात सब जानते हैं. नये समीकरण और नये पावर सेंटर बन रहे हैं. इन समीकरणों पर प्रभाव डालने वाली शक्तियां भी समय के साथ बदल रही हैं. ऐसे हालात में … Read more

अब मेडिकल स्टोर होंगे हाई-टेक: QR कोड स्कैन करते ही कर सकेंगे शिकायत दर्ज

नई दिल्ली जल्द ही भारत के सभी रिटेल और होलसेल फॉर्मेसी की दुकान पर लोगों को एक खास क्यूआर कोड और टोल फ्री नंबर लगा दिखेगा। ये दवाई ऑर्डर करने या फिर पेमेंट करने के लिए नहीं बल्कि दवाईयों से होने वाले नुकसान की रिपोर्ट करने के लिए है। स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वालों के लिए सरकार एक नई सुविधा लाई है। अब वे अपने फोन से किसी भी दवाई से होने वाले नुकसान की शिकायत कर पाएंगे। देश भर के केमिस्टों पर जल्द लोगों को एक खास QR कोड लगा दिखेगा। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के दवा लाइसेंसिंग अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सभी रिटेल और होलसेल फार्मेसी में एक खास क्विक रिस्पांस (QR) कोड और टोल-फ्री नंबर लगावाएं। इस QR कोड और टोल-फ्री नंबर के जरिए लोग अपने स्मार्टफोन से ही दवाईयों से होने वाले साइड इफेक्ट्स की रिपोर्ट कर सकते हैं। CDSCO ने कहा कि इस कदम से आम लोगों और हेल्थ प्रोफेशनल को भारत के स्वदेशी PvPI एडवर्स ड्रग रिएक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए, दवाओं के प्रभाव और एडवर्स ड्रग रिएक्शन की आसानी से रिपोर्ट करने में मदद मिलेगी। आइये, पूरी खबर जानते हैं। 16वीं वर्किंग ग्रुप मीटिंग के दौरान लिया गया था फैसला आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जून, 2025 में फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया की 16वीं वर्किंग ग्रुप मीटिंग के दौरान यह फैसला लिया गया था। इसका मतलब है कि QR कोड को स्कैन करके, ग्राहक और हेल्थ प्रोफेशनल किसी भी एडवर्स ड्रग रिएक्शन जैसे रैशेज, चक्कर आना, सूजन, मतली या और गंभीर समस्याएं की सीधी रिपोर्ट ADRMS (एडवर्स ड्रग रिएक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम) में कर सकते हैं। हर रिटेल और होलसेल फार्मेसी पर लगेगा QR Code CDSCO के सर्कुलर के मुताबिक, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी दवा लाइसेंसिंग अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि देश भर की हर रिटेल और होलसेल फार्मेसी में एक ऐसी जगह यह खास QR कोड लगा हो, जहां से वह सबको दिखे। ये टोल फ्री नंबर भी होगा उपलब्ध इसके अलावा, सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि इस QR कोड के साथ फार्मेसी स्टोर पर 1800-180-3024 टोल-फ्री नंबर भी साफ तौर पर दिखाया जाना चाहिए। सर्कुलर में आगे अनुरोध किया गया है कि अपने अधिकार क्षेत्र में इन निर्देशों को तुरंत लागू करने के लिए कार्रवाई शुरू करें। कृपया सभी लाइसेंस धारकों के बीच प्रचार सुनिश्चित करें और दवा सुरक्षा को बढ़ावा देने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। क्या होगा फायदा? इस नए सिस्टम की मदद से कोई भी आसानी से दवा से होने वाले हानिकारक प्रभाव के बारे में रिपोर्ट कर पाएगा। पहले, कई लोग दवाई से होने वाले साइड इफेक्ट्स को अनदेखा कर देते थे या वे रिपोर्ट करने का तरीका नहीं जानते थे। अब, बस एक स्मार्टफोन से एक QR कोड स्कैन करके या टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके, वे अपनी चिंताएं सीधे सिस्टम तक पहुंचा सकते हैं। यह जानकारी दवा कंपनियों और नियामकों को दवाओं की सुरक्षा पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक कार्रवाई करने में मदद करेगी। मरीजों और दवा बनाने वालों दोनों के लिए है सही यह पहल भारत में दवा सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सुनिश्चित करेगा कि दवाओं के किसी भी संभावित खतरे को जल्दी पहचाना जा सके और उस पर कार्रवाई की जा सके। इससे न केवल मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि दवाओं के विकास और उपयोग में भी सुधार होगा। यह कदम भारत को दवा सुरक्षा के मामले में एक मजबूत देश बनाने की दिशा में एक अहम योगदान देगा।