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खुफिया जाल में फंसा पाक एजेंट, कोर्ट ने CID को दिया 10 दिन का रिमांड

नई दिल्ली  सोशल मीडिया के जरिए ISI से था संपर्क, तीन राज्यों से भेजता था आर्मी की सीक्रेट जानकारी जयपुर। CID इंटेलिजेंस ने श्रीगंगानगर से पकड़े गए पाकिस्तानी जासूस को मंगलवार दोपहर कोर्ट में पेश किया, जहां से आरोपी को 10 दिन की रिमांड पर सौंप दिया गया। आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए पाकिस्तानी ISI से जुड़ा हुआ था और राजस्थान, पंजाब और गुजरात में सैन्य प्रतिष्ठानों की गोपनीय जानकारी पाकिस्तान भेजता था। फिरोजपुर का रहने वाला प्रकाश सिंह उर्फ बादल गिरफ्तार डीजी (इंटेलिजेंस) प्रफुल्ल कुमार ने बताया कि जासूसी के आरोप में पकड़े गए युवक की पहचान प्रकाश सिंह उर्फ बादल (34) निवासी फिरोजपुर, पंजाब के रूप में हुई है। CID ने कोर्ट से 15 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन आदेशानुसार आरोपी को 10 दिन की रिमांड पर दिया गया है। विदेशी नंबरों से लगातार कॉन्टैक्ट में था 27 नवंबर को संदिग्ध को श्रीगंगानगर के साधूवाली सैन्य क्षेत्र के पास देखा गया। बॉर्डर इंटेलिजेंस टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे तुरंत पकड़ा।प्रारंभिक जांच में उसके मोबाइल में विदेशी और पाकिस्तानी व्हाट्सऐप नंबरों के साथ लगातार बातचीत के साक्ष्य मिले। ऑपरेशन सिंदूर से ISI के संपर्क में श्रीगंगानगर के ज्वाइंट इंटरोगेशन सेंटर में की गई पूछताछ में सामने आया कि संदिग्ध ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के समय से ही पाकिस्तान की ISI से जुड़ा हुआ था।वह कई अहम जानकारियां साझा कर रहा था—आर्मी वाहनों की मूवमेंट, सैन्य संस्थानों की लोकेशन, सीमावर्ती इलाके की भौगोलिक स्थिति, पुल, सड़कें, रेलवे लाइनें, नए निर्माण कार्यों की जानकारी, यह सभी सूचनाएं वह अपने पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजता था। OTP सप्लाई रैकेट का भी हिस्सा जांच में एक और गंभीर गतिविधि सामने आई—ISI की मांग पर प्रकाश सिंह भारतीय नंबरों के OTP पाकिस्तान भेजता था। इन OTP के जरिए पाकिस्तानी एजेंट भारतीय मोबाइल नंबरों पर व्हाट्सऐप एक्टिवेट कर जासूसी और राष्ट्रविरोधी काम करते थे।इसके बदले में आरोपी को फंडिंग भी मिलती थी। गोपनीयता अधिनियम के तहत दर्ज हुई FIR पूछताछ और मोबाइल डेटा एनालिसिस में मिले ठोस सबूतों के आधार पर आरोपी के खिलाफ शासकीय गुप्त बात अधिनियम-1923 के तहत जयपुर के स्पेशल पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई और उसे सोमवार को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। CID इंटेलिजेंस उम्मीद कर रही है कि रिमांड अवधि के दौरान ISI नेटवर्क और स्थानीय सहयोगियों से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

एयर इंडिया विमान सुरक्षा मानकों में फेल, DGCA ने लिया सख्त एक्शन

नई दिल्ली नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने बड़ी अनियमितता पकड़ी है। एयर इंडिया का एक बोइंग विमान पिछले कई दिनों तक बिना वैध ‘वायु योग्यता नवीनीकरण प्रमाणपत्र (एआरसी) के व्यावसायिक उड़ानें भरता रहा। यह प्रमाणपत्र हर विमान के लिए हर साल अनिवार्य होता है, जो यह साबित करता है कि विमान पूरी तरह सुरक्षित और उड़ने लायक है। विस्तारा के एयर इंडिया में विलय की प्रक्रिया के तहत यह तय हुआ था कि विलय के बाद विस्तारा के सभी 70 विमानों का पहला नया एआरसी खुद डीजीसीए जारी करेगा। डीजीसीए ने संतोषजनक जांच के बाद 69 विमानों को नया एआरसी दे दिया था। सत्तरवें विमान के लिए एयर इंडिया ने आवेदन दिया था, लेकिन इंजन बदलने के काम के कारण विमान को कुछ समय के लिए जमीन पर खड़ा कर दिया गया। इसी दौरान उसका पुराना एआरसी समाप्त हो गया। इंजन बदलने के बाद विमान को फिर से उड़ान सेवा में लगा दिया गया, लेकिन नया एआरसी लेना भूल गए। 26 नवंबर 2025 को एयर इंडिया ने खुद डीजीसीए को सूचना दी कि उनका यह विमान बिना वैध एआरसी के 8 यात्री उड़ानें पूरी कर चुका है। सूचना मिलते ही डीजीसीए ने तुरंत जांच शुरू कर दी और संबंधित विमान को तत्काल प्रभाव से जमीन पर खड़ा करने का आदेश दिया। अभी नया एआरसी जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। डीजीसीए ने सख्ती दिखाते हुए जांच पूरी होने तक जिम्मेदार कर्मियों को तुरंत ड्यूटी से हटा दिया है। साथ ही एयर इंडिया को निर्देश दिया गया है कि वह अपनी पूरी व्यवस्था की आंतरिक जांच करे, कमियां ढूंढे और भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो, इसके लिए ठोस सुधार करे। यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा यह मामला गंभीर है। डीजीसीए ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा नियमों में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

रूस ने पुतिन यात्रा से पहले जताया विश्वास: भारत हमारी अनूठी पार्टनर, S-400 सप्लाई 100% शेड्यूल पर

रूस  रूस ने साफ कर दिया है कि उसकी रणनीतिक रक्षा साझेदारी भारत के साथ न सिर्फ मजबूत है, बल्कि नए तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में तेजी से विस्तार कर रही है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से पहले रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव ने कहा कि को-प्रोडक्शन, जॉइंट डेवलपमेंट और लोकलाइजेशन अब भारत–रूस रक्षा रिश्तों के मुख्य आधार बन चुके हैं।मंतुरोव ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत की 30% से अधिक रक्षा खरीद रूस से हुई है, जो इस साझेदारी की गहराई को दिखाता है। उन्होंने कहा-“भारत–रूस सैन्य-तकनीकी सहयोग हर साल और मजबूत होता जा रहा है। अब हमारा मुख्य फोकस सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स के बजाय तकनीकी साझेदारी और ‘मेेक इन इंडिया’ के अनुरूप सहयोग पर है।”  S-400 पर भ्रम खत्म मंतुरोव ने S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर किसी भी तरह की देरी या विवाद की खबरों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया-“यह कॉन्ट्रैक्ट तय समयसीमा के अनुसार पूरी तरह क्रियान्वित हो रहा है।”भारत के लिए S-400 की समय पर आपूर्ति बेहद अहम है, क्योंकि यह सिस्टम देश की लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस क्षमता को कई गुना बढ़ाता है।  मंतुरोव ने याद दिलाया कि भारत–रूस संबंध 2000 में पुतिन की यात्रा के दौरान हुए “स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप डिक्लेरेशन” से नई ऊंचाइयों पर पहुंचे और 2010 में यह संबंध और अपग्रेड होकर “स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” बन गया। 

शांति की भाषा न समझने वालों को करारा जवाब—रक्षा मंत्री बोले, ऑपरेशन सिंदूर है इसका प्रमाण

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर इस बात का सबूत है कि भारत उन लोगों को करारा जवाब देता है जो शांति और सद्भाव की भाषा नहीं समझते। मंगलवार को यह बात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कही। वडोदरा में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई की तुलना सरदार वल्लभभाई पटेल की सुदृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्व से की। उन्होंने कहा, “पटेल ने हमेशा संवाद के जरिए समस्याओं को सुलझाने की कोशिश की, लेकिन जरूरत पड़ने पर कभी भी साहसी रास्ता चुनने में हिचकिचाए नहीं, जैसा कि हैदराबाद को भारत में विलय के मामले में हुआ था।” राजनाथ सिंह गुजरात के वडोदरा में सरदार सभा को संबोधित कर रहे थे। यह सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के तहत मेरा युवा (एमवाई) भारत द्वारा आयोजित ‘एकता मार्च’ का हिस्सा था। यहां रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए सशस्‍त्र बलों के साहस और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा, “आज विश्व भारतीय सैनिकों की वीरता और क्षमता को स्‍वीकार कर रहा है। इस अभियान ने स्‍पष्‍ट संकेत दिया है कि हम शांतिप्रिय राष्‍ट्र हैं, जो किसी देश को उकसाते नहीं, लेकिन यदि कोई उकसाये तो उसे बख्शा भी नहीं करते हैं।” राजनाथ सिंह ने सरदार पटेल को देश को एक करने में अहम योगदान देने वाला बताया। रक्षामंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का उनका सपना और मजबूत हुआ है। अनुच्छेद 370 के निरसन का उल्‍लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस निर्णय ने जम्मू-कश्मीर को देश की मुख्यधारा में पूरी तरह से जोड़ दिया। रक्षा मंत्री का कहना है कि सरकार सरदार पटेल द्वारा दिखाए गए रास्‍ते पर चल रही है, जिसके परिणामस्वरूप एक समय संदेहों से घिरा भारत आज अपनी शर्तों पर विश्‍व से संवाद कर रहा है। उन्होंने कहा, “आज पूर्व की तुलना में अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बात ध्‍यानपूर्वक सुनी जाती है। भारत एक बड़ी आर्थिक और सामरिक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है। यह सरदार पटेल अमूल्‍य योगदान का परिणाम है। 2014 से पहले भारत विश्‍व की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था थी और आज यह चौथी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है तथा शीघ्र ही शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ‘न्‍यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के लक्ष्य के साथ काम कर रही है, जबकि राजनीतिक और भौगोलिक एकता के जरिए यह एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र की सरदार पटेल की विरासत को आगे बढ़ा रही है। हमारी सरकार भारत को सांस्कृतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक और आर्थिक एकता के सूत्र में पिरो रही है। हम ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विजन के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हमारा लक्ष्य 2047 तक एक विकसित भारत का निर्माण करना है। रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार सरदार पटेल के राष्ट्रीय सुरक्षा विजन को आगे बढ़ा रही है, जिन्होंने रक्षा आधुनिकीकरण और रक्षा हथियारों व गोला-बारूद के स्वदेशी उत्‍पादन पर जोर दिया था। रक्षा मंत्री ने कहा, “आज, ‘मेक-इन-इंडिया’ पहल के कारण हम रक्षा उत्‍पादन में आत्मनिर्भर बन रहे हैं, जबकि मित्र देशों को सैन्य उपकरण निर्यात कर रहे हैं। पिछले 11 वर्षों में हमारा रक्षा निर्यात लगभग 34 गुना बढ़ गया है। हमारा लक्ष्य 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्‍पादन और 50,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल करना है। उन्होंने आगे कहा, "सरदार पटेल का पूरा जीवन पवित्रता और ईमानदारी का प्रतीक था और इन उच्‍च आदर्शों से प्रेरित होकर सरकार का लक्ष्य संसद में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025 को पारित कराना है, जो उच्‍चतम पदों पर आसीन लोगों से भ्रष्टाचार के खिलाफ नैतिक व्यवहार करने की मांग करता है। इसका मतलब है कि यदि पद पर आसीन किसी व्‍यक्ति को किसी गंभीर आरोप के तहत गिरफ्तार किया जाता है और 30 दिनों के भीतर जमानत नहीं मिलती है, तो वे अपने आप अपने पद से मुक्त हो जाएंगे।” रक्षा मंत्री ने युवाओं से एक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए प्रयास करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राष्‍ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता बनाए रखना एक ज़िम्मेदारी है, जिसे सरदार पटेल ने देश की भावी पीढ़ियों के लिए छोड़ा था। 

पाकिस्तान संकट की आग में घिरा: इमरान की संदिग्ध मौत के बाद रावलपिंडी में कर्फ्यू लागू

पेशावर  पाकिस्तान में राजनीतिक भूचाल तेज हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की हत्या की अफवाहों के बाद हालात काबू से बाहर होने लगे हैं। आदियाला जेल के बाहर PTI समर्थक लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि इमरान के परिवार तक को मुलाकात की अनुमति नहीं दी जा रही है, जिससे लोगों का गुस्सा बढ़ गया है। इसी डर से शहबाज शरीफ सरकार और जनरल मुनीर की सेना में दहशत फैल गई है, और रावलपिंडी जो पाक सेना का सबसे बड़ा गढ़ माना जाता है में पूरे शहर में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। सरकार को डर है कि इमरान खान के समर्थक रावलपिंडी में बड़ा बवाल खड़ा कर सकते हैं। पाक सेना की भूमिका पर लगातार बढ़ते सवालों से लोगों में भयंकर आक्रोश है।  इसलिए धारा 144 लागू कर दी गई है, और कर्फ्यू 1 से 3 दिसंबर तक रहेगा। कर्फ्यू में क्या-क्या बैन?     भीड़ जुटाना, धरना, रैली, प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित     हथियार, डंडे, पेट्रोल बम जैसी कोई भी चीज लेकर चलना मना     भड़काऊ भाषण, हथियार लहराना बैन     लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर भी रोक     सेना और पुलिस की भारी तैनाती सड़कें पूरी तरह कब्जे में     उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी    इमरान की मौत की आशंका क्यों बढ़ी? 1 महीने से किसी को इमरान से मिलने नहीं दिया गया। परिवार को भी कोई जानकारी नहीं। PTI लगातार कह रही है कि इमरान की सुरक्षा खतरे में है। इमरान के बेटे ने सरकार से पिता के जिंदा होने का सबूत मांगा है। पाक सेना और सरकार केवल “अफवाह” कहकर बचने की कोशिश कर रही है।  लेकिन पाकिस्तान में सवाल उठ रहे हैं कि क्या सेना ने जेल के अंदर ही इमरान खान को खत्म कर दिया है?  

धरती फिर डोली! पर्वतीय ‘नेचर हॉटस्पॉट’ में खतरे की घंटी तेज

ताजिकिस्तान  मंगलवार को  ‘नेचर हॉटस्पॉट’  देश ताजिकिस्तान में रिक्टर स्केल पर 3.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार यह भूकंप 75 किलोमीटर की गहराई पर आया। NCS ने एक्स (X) पर पोस्ट कर बताया “2 दिसंबर 2025, 04:35:14 IST, तीव्रता 3.9, स्थान: ताजिकिस्तान।” इससे पहले 26 नवंबर को भी 4.2 तीव्रता का भूकंप 90 किलोमीटर गहराई में दर्ज किया गया था। ताजिकिस्तान का ज़्यादातर हिस्सा पर्वतीय होने के कारण यह देश लगातार प्राकृतिक आपदाओं भूकंप, बाढ़, सूखा, हिमस्खलन, भूस्खलन और मडस्लाइड्स की चपेट में रहता है। वर्ल्ड बैंक रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन ने ताजिकिस्तान की कमजोरियों को और बढ़ा दिया है, क्योंकि 2050 तक देश की 30% ग्लेशियर बर्फ पिघलने की आशंका जताई गई है। ग्लेशियरों पर निर्भर नदी घाटियां, हाइड्रोपावर, सिंचाई तंत्र और पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।   इसके अलावा भूस्खलन, मलबा बहाव और अचानक आई बाढ़ कई बार सड़कों और पुलों को नष्ट कर देश को दुनिया से और अलग-थलग कर देती हैं।  देश का 60% से अधिक हिस्सा उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्र में आता है। ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों का पुराना बुनियादी ढांचा लगातार प्राकृतिक आपदाओं से कमजोर हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में जोखिम कम करने के लिए नए निर्माण में स्थानीय जानकारी, जलवायु परिवर्तन डेटा और खतरों का आकलन शामिल करना बेहद ज़रूरी है।   

ईडी की बड़ी कार्रवाई: 169.47 करोड़ की जब्त संपत्ति वापस मिली, सेंट्रल बैंक को राहत

कोलकाता प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मेसर्स प्रकाश वाणिज्य प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। ईडी ने इस घोटाले में कुर्क की गई 169.47 करोड़ रुपए की संपत्तियों को वापस सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को दिला दिया। यह फैसला कोलकाता की सिटी सेशन कोर्ट ने सुनाया है। यह मामला मेसर्स प्रकाश वाणिज्य प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमोटर-डायरेक्टर मनोज कुमार जैन से जुड़ा है। जांच में पता चला कि कंपनी ने फर्जी वित्तीय दस्तावेज और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए अकाउंट स्टेटमेंट के आधार पर बैंक से बड़ी क्रेडिट सुविधाएं लीं। इसके बाद इन फंड्स को नियमों के खिलाफ दूसरी जगह भेज दिया गया। इस धोखाधड़ी से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 234.57 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। ईडी ने पीएमएलए के तहत जांच शुरू की और पश्चिम बंगाल व छत्तीसगढ़ में फैली कई संपत्तियों को कुर्क किया। इनमें से 199.67 करोड़ रुपए की संपत्तियां चार अलग-अलग प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के जरिए जब्त की गई थीं, जिन्हें बाद में एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी (न्यायनिर्णयन प्राधिकारी) की मंजूरी भी मिल गई। बैंक के पैसे की तुरंत रिकवरी के महत्व को देखते हुए ईडी ने सेंट्रल बैंक के अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं। इसके बाद बैंक ने अदालत में अटैच संपत्तियों को पाने के लिए आवेदन दिया, जिसे ईडी ने भी कंसेंट पिटीशन के माध्यम से समर्थन किया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया इन संपत्तियों का सही हकदार है, क्योंकि ये धोखाधड़ी से खोए हुए फंड की भरपाई कर सकती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ईडी को इस प्रक्रिया पर कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते कि बैंक बकाया रकम पूरी तरह रिकवर कर ले और अतिरिक्त राशि होने पर उसे पीएमएलए के तहत सक्षम प्राधिकरण को जमा कराए। सेंट्रल बैंक की नई वैल्यूएशन रिपोर्ट के अनुसार, अटैच संपत्तियों की कुल कीमत 169.47 करोड़ रुपए आंकी गई है।

संविधान सदन में आज ‘वंदे मातरम’ पर मंथन—10 घंटे की चर्चा में पीएम मोदी की मौजूदगी

नई दिल्ली  भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संसद के शीतकालीन सत्र में इस ऐतिहासिक गीत पर विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी। लोकसभा में यह चर्चा सोमवार को होगी, जिसके लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस विशेष बहस में हिस्सा लेंगे। चर्चा का उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम के इस प्रेरक गीत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को रेखांकित करना है। इस निर्णय पर सहमति 30 नवंबर को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा बुलाई गई ऑल-पार्टी मीटिंग और लोकसभा व राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठकों में बनी। राज्यसभा में भी एनडीए सदस्यों ने वंदे मातरम पर विशेष चर्चा की जोरदार वकालत की। सरकार ने इसे राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए सभी राजनीतिक दलों को इसमें सहभागी बनने का आग्रह किया है। ‘वंदे मातरम’ का इतिहास भारत ने 1950 में ‘वंदे मातरम’ को अपने राष्ट्रगीत के रूप में अपनाया था। इसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1870 के दशक में संस्कृतनिष्ठ बंगाली में लिखा था। यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा है, जिसका प्रकाशन 1882 में किया गया था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम’ जनमानस में जोश भरने वाला प्रमुख गीत बना। इसके 150 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार ने पिछले दिनों स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे स्वतंत्रता संग्राम की अमर धरोहर बताते हुए युवाओं से इसका अधिकाधिक गान करने की अपील की थी। संसद में सत्र की तैयारी और राजनीतिक हलचल लोकसभा BAC की बैठक में कांग्रेस ने विशेष गहन संशोधन (SIR) और चुनावी सुधारों पर बहस की मांग की, पर सरकार ने ‘वंदे मातरम’ की चर्चा को प्राथमिकता दी। तृणमूल कांग्रेस ने भी लोकसभा में इस विशेष चर्चा का समर्थन किया। विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक सोमवार सुबह मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में अपनी रणनीति तय करेगा।   शीतकालीन सत्र का एजेंडा शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें 15 बैठकें होंगी। इस सत्र में 10 नए विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनमें परमाणु ऊर्जा, उच्च शिक्षा, राष्ट्रीय राजमार्ग और बीमा क्षेत्र सुधार से जुड़े बिल शामिल हैं। इसके अलावा, 2025–26 के प्रथम अनुपूरक अनुदान मांगों पर भी विस्तृत चर्चा होगी।  

सरकार का सख्त रुख: 8वें वेतन आयोग की इस मांग पर नहीं मिली मंजूरी

नई दिल्ली  8वें सेंट्रल पे कमीशन को लेकर बढ़ती चर्चा के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा अपडेट दिया है। लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्पष्ट कहा कि केंद्रीय कर्मचारियों को अंतरिम राहत (Interim Relief) देने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है। साथ ही, महंगाई भत्ता (DA) को बेसिक सैलरी में जोड़ने की मांग को भी सरकार ने खारिज कर दिया। कर्मचारी क्या मांग रहे हैं? केंद्रीय कर्मचारियों के संगठनों का कहना है कि तीन दशकों में महंगाई अपने सबसे अधिक स्तर पर है। उनका तर्क है कि मौजूदा DA और DR (पेंशनर्स का भत्ता) रिटेल महंगाई के मुकाबले पर्याप्त नहीं हैं। इसीलिए यूनियनों की मांग है कि DA 50% होने पर इसे बेसिक सैलरी में मिला दिया जाए। यह मांग तब और मजबूत हो गई जब सरकार ने नवंबर में 8th CPC के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस जारी किए थे। सरकार ने वायरल मैसेज को बताया फर्जी सोशल मीडिया पर हाल ही में एक संदेश वायरल हुआ जिसमें दावा किया गया था कि फाइनेंस एक्ट 2025 के बाद DA बढ़ोतरी और पे कमीशन के फायदे बंद कर दिए जाएंगे, खासकर रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए।   किन कर्मचारियों पर हुआ नियम में बदलाव? सरकार ने स्पष्ट किया कि हाल में CCS (पेंशन) रूल्स, 2021 के रूल 37 में किया गया बदलाव सिर्फ एक छोटे समूह से जुड़ा है। यह बदलाव उन PSU कर्मचारियों पर लागू है जिन्हें किसी गंभीर गलती या गलत काम के कारण नौकरी से निकाला जाता है।    ऐसे मामलों में उनके रिटायरमेंट लाभ जैसे पेंशन आदि जब्त किए जा सकते हैं। सरकार ने कहा कि यह संशोधन डिपार्टमेंट ऑफ पेंशन एंड पेंशनर्स वेलफेयर और वित्त मंत्रालय की सलाह के बाद किया गया है, और इसका आम कर्मचारियों या रिटायर्ड पेंशनरों के DA/DR पर कोई असर नहीं पड़ेगा।  

लोकसभा स्पीकर ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, महत्वपूर्ण दो बिंदुओं पर नेताओं ने मिलकर बनाया रोडमैप

नई दिल्ली संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा की विपक्ष की मांग को लेकर संसद में चल रही गतिरोध को दूर करने के लिए सर्वदलीय बैठक हुई, जिसमें कई अहम फैसले लिए गए। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक संपन्न हुई, जिसमें सभी दलों के नेता शामिल हुए। इस मीटिंग में यह सहमति बनी है कि लोकसभा में 8 दिसंबर, यानी सोमवार, को ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्ष की सालगिरह पर एक विशेष चर्चा होगी। इसके अगले दिन लोकसभा में 9 दिसंबर, यानी मंगलवार, को चुनाव सुधारों पर पूरे दिन चर्चा होगी। इस विषय पर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है, और आवश्यकता पड़ने पर इसे बढ़ाया भी जाएगा। इस पर सभी दलों में सहमति बन गई।  सर्वदलीय बैठक में लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि मैं सभी पार्टी नेताओं से एक बार फिर अपील करना चाहता हूं कि हम सब चाहते हैं कि संसद सुचारू रूप से चले। हर मुद्दे पर हर वह सदस्य जो बोलना चाहता है, उसे अवसर मिलना चाहिए। अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आने वाले सांसदों के अपने-अपने मुद्दे होते हैं, उन्हें सदन में अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी अच्छी और विस्तृत चर्चा होनी चाहिए, और फिर वे पारित होकर देश के विकास में योगदान दें, यह हम सभी की जिम्मेदारी है। बेवजह का गतिरोध नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने पहले दिन से ही कहा कि सरकार किसी भी विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन पिछले दो दिनों का जो नुकसान हुआ, उसका प्रमुख कारण यह था कि विपक्ष ने प्रश्नकाल के समय को लेकर दबाव बनाया था। मैंने आज भी स्पष्ट किया है कि जब हम चर्चा के लिए तैयार हो जाते हैं, तब एक-दो दिन का समय का निर्धारण संसद के व्यवसाय और प्रक्रिया को ध्यान में रखकर करना पड़ता है।