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न्यूक्लियर वॉर आने वाला है — मस्क की चेतावनी से दुनिया में बढ़ी बेचैनी

वाशिंगटन  टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने फिर एक बार अपने विवादित बयान से दुनिया का ध्यान खींच लिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर मस्क ने खुलकर दावा किया कि दुनिया जल्द ही एक बड़े वैश्विक युद्ध की ओर बढ़ रही है। दरअसल, एक X यूजर ने लिखा कि न्यूक्लियर हथियारों के कारण बड़ी शक्तियों के बीच युद्ध नहीं हो रहे, जिससे सरकारों का ध्यान शासन से हट गया है। इस पर मस्क ने बेहद संक्षिप्त लेकिन चौंकाने वाला जवाब दिया “War is inevitable. 5 years, 10 at most.” यानि (युद्ध अवश्यंभावी है। 5 साल में,  2030 तक या अधिकतम 10 साल 2040 में।)  मस्क के इस बयान ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। उन्होंने यह नहीं बताया कि कौन-सा युद्ध, किन देशों के बीच या किस वजह से होगा। लेकिन मस्क का इशारा इस बात की ओर था कि दुनिया धीरे-धीरे बड़े टकराव की ओर बढ़ रही है। Grok AI ने समझाया-किस तरह का युद्ध? कुछ यूजर्स ने इस बयान की व्याख्या जानने के लिए मस्क की AI-Grok से सवाल पूछे।  Grok ने मस्क के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि मस्क कई संभावित खतरों की चेतावनी पहले भी दे चुके हैं:     यूरोप और ब्रिटेन में संभावित गृहयुद्ध, बढ़ते प्रवास और पहचान राजनीति के कारण     अमेरिका-चीन के बीच ताइवान को लेकर युद्ध     यूक्रेन-रूस संघर्ष के WW3 में बदलने का खतरा     न्यूक्लियर डिटरेंस कमजोर पड़ने की आशंका     यानी, मस्क के अनुमान के अनुसार आने वाले वर्षों में दुनिया के कई हॉटस्पॉट तनाव को युद्ध में बदल सकते हैं। क्यों मस्क का बयान गंभीर? डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल के दौरान एलन मस्क अमेरिकी प्रशासन के एक विशेष प्रोजेक्ट Department of Government Efficiency (DOGE) से भी जुड़े थे। इस कारण उनका बयान न सिर्फ सोशल मीडिया टिप्पणी माना जा रहा है, बल्कि कुछ विश्लेषक इसे जियोपॉलिटिकल संकेत भी कह रहे हैं।  हालांकि मस्क ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका दावा वैश्विक चेतावनी है या सिर्फ एक राजनीतिक संकेत।   

कोई बड़ी घुसपैठ नहीं—त्रिपुरा से बाहर जाने लगे अवैध प्रवासी: मुख्यमंत्री का बड़ा बयान

अगरतला त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा है कि वर्तमान समय में बांग्लादेश की ओर से राज्य में बड़ी घुसपैठ नहीं हो रही है, बल्कि अब त्रिपुरा से लोगों के बाहर जाने (एक्सफिल्ट्रेशन) की घटनाएं सामने आ रही हैं। त्रिपुरा की 856 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा बांग्लादेश से लगती है और राज्य तीन ओर से पड़ोसी देश से घिरा हुआ है, जिसके कारण तस्करी और अन्य सीमा-पार अपराधों की आशंका लगातार बनी रहती है। मुख्यमंत्री साहा के अनुसार, पहले घुसपैठ एक बड़ा मुद्दा था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। मुख्यमंत्री ने सोमवार रात बीएसएफ के डायमंड जुबिली रेजिंग डे कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मीडिया से कहा, “सीमा पार से अब घुसपैठ नहीं हो रही है। त्रिपुरा में अब एक्सफिल्ट्रेशन की घटनाएं हो रही हैं। बीएसएफ कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड (बीजीबी) और संबंधित अधिकारियों से समन्वय कर पकड़े गए लोगों को उनके देश वापस भेज रही है।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठ के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। त्रिपुरा की भौगोलिक स्थिति और कठिन भू-भाग के कारण सीमा की सुरक्षा हमेशा चुनौतीपूर्ण बनी रहती है। मुख्यमंत्री साहा ने कहा, “सीमा के कुछ हिस्सों में अब भी फेंसिंग नहीं है, ऐसे क्षेत्रों में बीएसएफ अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। बीएसएफ अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा में सराहनीय काम कर रही है।” उन्होंने बताया कि बीएसएफ राज्य पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर समय-समय पर सभी आवश्यक कदम उठा रही है ताकि सीमा सुरक्षा मजबूत रहे। बीएसएफ के एक अधिकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में अब तक 57 रोहिंग्या अवैध प्रवासियों, 628 बांग्लादेशी नागरिकों और 280 भारतीय नागरिकों को पकड़ा गया है। इसके साथ ही ड्रग्स और अन्य अवैध सामान की कुल 51.65 करोड़ रुपये की बरामदगी भी की गई है। अधिकारी ने बताया कि विभिन्न संयुक्त अभियानों के दौरान सीमा-पार अपराधों में भारी कमी दर्ज हुई है और 452.47 एकड़ में गांजे की खेती को नष्ट किया गया। उन्होंने कहा कि बीएसएफ और बीजीबी के बीच सेक्टर कमांडर स्तर से लेकर बॉर्डर आउटपोस्ट स्तर तक नियमित बैठकें हो रही हैं, जिससे समन्वय मजबूत हुआ है और कई मुद्दों का समाधान तेजी से हो पा रहा है। बीएसएफ त्रिपुरा फ्रंटियर ने आश्वस्त किया है कि वह राज्य की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य जारी रखेगी और सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखेगी।

पुलिस की कार्रवाई पर सवाल: बांग्ला बोलने वाले युवकों को रोहिंग्या बताकर 72 घंटे का नोटिस

भुवनेश्वर पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद के कई मुस्लिम युवक सालों से ओडिशा के नयागढ़ और आसपास के जिलों में कारोबार करते हैं। ये लोग वहां अपने दोपहिया वाहनों पर गांव-गांव और शहर-शहर जाकर कंबल, मच्छड़दानी और ऊनी कपड़े बेचते हैं। आपस में ये लोग बांग्ला में बात किया करते थे, यही बात वहां की पुलिस को नागवार लग गई। पुलिस ने उन्हें रोहिंग्या और बांग्लादेशी बताकर 72 घंटे के अंदर ओडिशा छोड़ने का फरमान थमाया है। ओडागांव पुलिस ने पिछले हफ्ते इसी तरह कारोबार कर रहे चार मुस्लिम युवकों को ओडिशा छोड़ने का आदेश दिया था लेकिन वह समय सीमा सोमवार को खत्म हो गई। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि गुरुवार को ओडागांव पुलिस स्टेशन में उन मुस्लिम युवकों ने अपने आधार और वोटर कार्ड दिखाए। बावजूद इसके पुलिस अधिकारियों ने उन्हें तीन दिनों के अंदर शहर छोड़ने का अल्टीमेटम थमा दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि थाने में ही वर्दी पहने पुलिस अफसर ने कई बार उन्हें कथित तौर पर बंगाली में बात करने पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी कहा। जिन चारों युवकों को ओडिशा छोड़ने का आदेश दिया गया है वे सभी मुर्शिदाबाद के डोमकल सबडिवीजन के जलंगी ब्लॉक में सागरपारा ग्राम पंचायत के रहने वाले हैं। उधेड़बुन में मुस्लिम कारोबारी ये चारों सैकड़ों लोगों के समूह का हिस्सा हैं, जो बंगाल से आकर ओडिशा में कई सालों से कारोबार कर रहे हैं। पुलिस का आदेश मिलने के बाद ये लोग सोमवार शाम ही बस से 100 KM से ज़्यादा दूर भुवनेश्वर के लिए निकलने वाले थे, जहां से वो फिर हावड़ा के लिए ट्रेन पकड़ते लेकिन सोमवार देर रात तक, उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि घर का जो ज़रूरी सामान वे जल्दी में छोड़ आए और जो सामान अब तक नहीं बिक सका है, उसका क्या करें। सबसे बड़ी प्रॉब्लम हमारा स्टॉक उन युवकों में से 32 साल के साहेब सेख ने द टेलीग्राफ को अपनी पीड़ा बताते हुए कहा, “हमारे पास कन्फर्म ट्रेन टिकट नहीं हैं। सबसे बड़ी प्रॉब्लम हमारा स्टॉक है। हमारे मकान मालिक को हमें नोटिस देना पड़ा है। हमने स्टॉक रखने के लिए लगभग 30KM दूर दूसरी जगह ढूंढ ली थी। हमारे पास 2 लाख रुपये से ज़्यादा का स्टॉक है। अब उसका क्या करें?” उसने बताया कि हम कोई खरीदार ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं, कम से कम कोई ऐसा जो इसे सस्ते रेट पर ही सही, कुछ खरीद ले। जैसे ही हम इसे कुछ बेच पाएंगे, हम घर लौट जाएंगे। बांग्लादेशी और रोहिंग्या होने के आरोप बता दें कि इस साल ओडिशा में बंगाल से आए मुस्लिम व्यापारियों और प्रवासी मज़दूरों को कई बार पुलिस हिरासत और भीड़ के हमलों का सामना करना पड़ा है। पिछले महीने 24 नवंबर को भी मुर्शिदाबाद के 24 साल के राहुल इस्लाम को ओडिशा के गंजम जिले में भीड़ ने कथित तौर पर बांग्लादेशी कहकर पीटा था, क्योंकि उसने “जय श्री राम” का नारा लगाने से मना कर दिया था। यह जगह साहेब के ग्रुप के घर से करीब 30KM दूर है। राहुल इस्लाम भी ऊनी के कपड़े बेचता था। ओडिशा में राहुल और साहेब के जैसी और भी कहानियां हैं, जिन पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या होने के आरोप लगाए जा रहे हैं और उन्हें भगाया जा रहा है।

हाईकोर्ट आदेश के बावजूद जेलर का विरोध, शहबाज सरकार झुकी—इमरान से मिलने जाएंगी बहन

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान कहां गए? वो सही सलामत हैं भी या नहीं. 4 नवंबर के बाद से परिवार के किसी सदस्य ने या फिर उनके किसी वकील ने उनसे अदियाला जेल में मुलाकात नहीं की है. इस वजह से ही आज मंगलवार को पाकिस्तान में इस्लामाबाद हाईकोर्ट और रावलपिंडी में अदियाला जेल के बाहर इमरान खान की बहनों और समथर्कों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया. स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदर्शनों के बाद इमरान की एक बहन को मुलाकात करने की अनुमति मिल गई है. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि शायद अब इमरान खान की सेहत को लेकर चल रहा सस्पेंस खत्म हो जाएगा. दरअसल, इस्लामाबाद हाईकोर्ट के बाहर पाकिस्तानी तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के कार्यकर्ताओं, सांसदों और नेताओं की भारी भीड़ जुटी और सरकार के खिलाफ नारे लगाए. एक PTI प्रदर्शनकारी ने कहा, “यह सरकार अब सो नहीं पा रही. हम इमरान खान को रिहा कराएंगे. जब तक इमरान खान की बहनों को मुलाकात की इजाजत नहीं मिलेगी, हम यहीं बैठे रहेंगे.” अदियाला जेल के बाहर भी भारी प्रदर्शन कोर्ट के आदेश के बावजूद इमरान खान से उनकी बहनों और वकीलों को मिलने नहीं दिया जा रहा है. वहीं अदियाला जेल के बाहर भी इमरान समर्थकों ने पूर्व पीएम को रिहा करने की मांग को लेकर जबरदस्त प्ररदर्शन किया. इमरान खान की तीनों बहनों- अलीमा खान, नूरीन खान और आजमी खान का शक अब उनकी हालत को लेकर बढ़ रहा है. उनकी तीनों बहनें अदियाला जेल के बाहर चल रहे प्रदर्शन में भी शामिल हुईं. इससे पहले इमरान खान के बेटे ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि उनके पिता के साथ शायद कुछ ऐसा हुआ है, जिसे बदला नहीं जा सकता है. इस वजह से ही हुकूमत उनसे किसी को मिलने नहीं दे रही है. खैबर पख्तूनख्वा में इमरान की पार्टी की सरकार होगी बर्खास्त? बता दें कि बीते कई दिनों से न तो इमरान खान की कोई तस्वीर सामने आई है, ना ही उनसे मुलाकात के बाद किसी ने उनके सही-सलामत होने का भरोसा दिया है. पूर्व प्रधानमंत्री को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच ये खबर भी जोर पकड़ रही है कि खैबर पख्तूनख्वा में इमरान खान की पार्टी की सरकार को बर्खास्त कर राज्यपाल शासन लागू किया जा सकता है. दरअसल, खैबर पख्तूनख्वा के सीएम सोहेल अफरीदी इमरान को रिहा करने के प्रदर्शन में जोर-शोर से अपनी आवाज उठा रहे हैं. जल्‍लाद से कम नहीं ये जेलर! हाईकोर्ट के आदेश को रद्दी की टोकरी में फेंका, मिलने गए सीएम को 8 बार लौटाया पाकिस्तान की राजनीति में कब क्या हो जाए, कोई नहीं जानता. यहां प्रधानमंत्री जेल जाते हैं और जेलर ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ जाते हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही जेलर की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसका रसूख शायद इस वक्‍त पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से कम नहीं है. एक ऐसा सरकारी मुलाज‍िम, जो वर्दी तो जेल पुलिस की पहनता है, लेकिन उसके तेवर किसी तानाशाह से कम नहीं हैं. हम बात कर रहे हैं रावलपिंडी की मशहूर अडियाला जेल के सुपरिंटेंडेंट (जेलर) अब्दुल गफूर अंजुम की. वही जेल, जहां पाकिस्तान की सियासत का सबसे बड़ा चेहरा, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, ‘कैदी नंबर 804’ बनकर बंद हैं. इस जेलर की कहानी पढ़कर आपको लगेगा कि क्या वाकई पाकिस्तान में कोई कानून-कायदा बचा है या फिर वहां ‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’ वाली कहावत ही संविधान बन चुकी है. अब्दुल गफूर अंजुम कोई आम जेलर नहीं हैं. वे पंजाब प्रेसिडेंट सर्विस के अफसर हैं और इन दिनों उनकी हनक ऐसी है कि वे हाईकोर्ट के जजों के आदेशों को भी सिगरेट के धुएं की तरह हवा में उड़ा देते हैं. हाईकोर्ट का आदेश? वो क्या होता है भाई जरा सोचिए, देश का एक पूर्व प्रधानमंत्री जेल में है. उसका परिवार अदालतों के चक्कर काट रहा है, सिर्फ इसलिए कि उन्हें अपने घर के मुखिया से मिलने दिया जाए. इस्लामाबाद हाईकोर्ट, जो देश की प्रतिष्ठित अदालतों में से एक है, साफ-साफ आदेश जारी करती है. आदेश में कहा जाता है कि इमरान खान के परिवार को उनसे हफ्ते में कम से कम दो बार मिलने की इजाजत दी जाए. यह बुनियादी मानवाधिकार है. किसी भी कैदी को उसके परिवार और वकीलों से मिलने का हक होता है. लेकिन, जब यह आदेश लेकर इमरान का परिवार और वकील अडियाला जेल के दरवाजे पर पहुंचते हैं, तो वहां उनकी मुलाकात होती है जेलर अब्दुल गफूर अंजुम के फरमान से. अंजुम साहब साफ कह देते हैं कि यह आदेश पूरा नहीं किया जा सकता. आप अंदाजा लगाइए, एक जेल सुपरिंटेंडेंट हाईकोर्ट के लिखित आदेश को मानने से इनकार कर रहा है. यह सिर्फ आदेश की अवहेलना नहीं है, यह न्यायपालिका के मुंह पर करारा तमाचा है. मानो जेलर साहब कह रहे हों कि जेल के अंदर मेरी अदालत चलती है, बाहर वालों की नहीं. सीएम को एक नहीं, आठ बार बेइज्‍जत कर लौटाया अगर आपको लगता है कि यह सिर्फ इमरान खान के परिवार तक सीमित है, तो आप गलत हैं. इस जेलर का खौफ और रसूख इतना है कि वह एक चुने हुए मुख्यमंत्री को भी कुछ नहीं समझता. खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मुख्यमंत्री सुहेल आफरीदी, जी हां, एक सिटिंग सीएम अपने नेता इमरान खान से मिलने अडियाला जेल पहुंचे. एक बार नहीं, दो बार नहीं, बल्कि पूरे आठ बार. और आठों बार जेलर अब्दुल गफूर अंजुम ने उन्हें जेल के दरवाजे से ही वापस लौटा दिया. प्रोटोकॉल के हिसाब से एक मुख्यमंत्री का दर्जा बहुत बड़ा होता है. लेकिन अंजुम के सामने प्रोटोकॉल की कोई अहमियत नहीं है. सोचिए, जिस देश में एक जेलर एक मुख्यमंत्री को आठ बार मिलने से मना कर दे, वहां लोकतंत्र की क्या हालत होगी? यह घटना बताती है कि पाकिस्तान में असली ताकत चुनी हुई सरकारों के पास नहीं, बल्कि कहीं और है. 4 नवंबर से ‘कालकोठरी’ में तब्दील इमरान की सेल जेलर अंजुम की मनमानी का सिलसिला यहीं नहीं रुकता. 4 नवंबर के बाद से तो उन्होंने अडियाला जेल में इमरान खान की सेल को एक तरह से ‘ब्लैक होल’ बना दिया है. तब से लेकर अब तक, इमरान खान को पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया है. … Read more

स्वीट जन्नत विवादों में घिरीं, सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित वीडियो से मचा बवाल

 मेघालय  मेघालय की फेमस इन्फ्लुएंसर स्वीट जन्नत इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई हैं। दरअसल, बीते दिनों Viral MMS विवाद को लेकर वह सुर्खियों में है, जिसको लेकर उनको तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। MMS वाली लड़की समझकर उनके पोस्ट पर कमेंट्स किए जा रहे हैं। वायरल कपल की नहीं हुई पहचान दरअसल, हाल ही में एक कपल का 19 मिनट 34 सेकेंड का निजी वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ, जिसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया। 19 मिनट 34 सेकंड वाले वीडियो में एक कपल काफी वल्गर बातें कर रहे हैं। अब तक वीडियो में दिख रहे कपल की भी पहचान नहीं हुई है। ना यह पता चल पाया यह वीडियो कैसे वायरल हुआ। लेकिन MMS वाली लड़की समझकर मेघालय की फेमस इन्फ्लुएंसर स्वीट जन्नत की पोस्ट पर कमेंट्स किए जा रहे हैं। कई यूजर्स ने अंदाजा लगाकर दावा किया कि वीडियो में दिख रही लड़की स्वीट जन्नत हैं। वीडियो वायरल होने के बाद स्वीट जन्नत ने खुद स्पष्ट किया कि यह वीडियो AI Deepfake है। स्वीट जन्नत ने अफवाहों पर लगाया विराम अफवाहों पर विराम लगाते हुए स्वीट जन्नत ने कहा, पहले मेरी शक्ल देखो, फिर वीडियो वाली को देखो कोई मैच नहीं। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली लड़की अंग्रेजी में बात कर रही है। दावा किया जा रहा है कि 19-मिनट MMS वाली लड़की ने शर्मिंदगी से सुसाइड कर लिया है। हालांकि सच्चाई क्या है, यह अब तक सामने नहीं आई है। बता दें कि मेघालय के महेंद्रगंज की रहने वाली स्वीट जन्नत एक इंस्टाग्राम इंफ्लूएंसर हैं, जो सोशल मीडिया पर अपनी डेली लाइफ वीडियो शेयर करती हैं। 

पाकिस्तानी नेवी क्यों रह गई निष्क्रिय? भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन सिंदूर का राज खोला

नई दिल्ली  नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने मंगलवार को कहा कि मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बल के आक्रामक रुख के कारण पाकिस्तानी नौसेना को उसके बंदरगाहों के करीब रहने पर मजबूर होना पड़ा। भारतीय सेना ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद 7 मई को ऑपरेश सिंदूर के तहत जवाबी कार्रवाई की थी। एडमिरल त्रिपाठी ने अपने वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के साथ तनाव के बाद पिछले सात-आठ महीनों में पश्चिमी अरब सागर सहित अन्य स्थानों पर उच्च पैमाने पर अपने जहाजों और पनडुब्बियों को तत्परता के साथ तैनात रखा है। नौसेना प्रमुख ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अब भी जारी है, लेकिन उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विमानवाहक पोत की तैनाती समेत आक्रामक रुख और तत्काल कार्रवाई ने पाकिस्तानी नौसेना को उसके बंदरगाहों या मकरान तट के पास रहने के लिए मजबूर कर दिया।' नौसेना प्रमुख ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' से पाकिस्तान पर वित्तीय दबाव पड़ा है, क्योंकि संघर्ष के बाद बड़ी संख्या में व्यापारिक जहाजों ने पाकिस्तान की यात्रा करने से परहेज किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जाने वाले जहाजों के बीमा की लागत भी बढ़ गई है। सीजफायर में नौसेना की भूमिका वाइस एडमिरल के स्वामीनाथन ने मंगलवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय नौसेना के आक्रामक कार्रवाई के रुख के कारण पाकिस्तान संघर्ष विराम का अनुरोध करने पर मजबूर हुआ। नौसेना दिवस से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए वाइस एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहुत ही कम समय में 30 से अधिक जहाजों और पनडुब्बियों को अभूतपूर्व तरीके से तैनात किया गया। नौसेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख ने कहा, 'हमारे अग्रिम पंक्ति के जहाज, विमानवाहक पोत विक्रांत के ‘कैरियर बैटल ग्रुप’ के साथ में मकरान तट पर युद्ध के लिए तैयार थे।' कैरियर बैटल ग्रुप एक नौसैनिक समूह है जिसमें एक या अधिक विमान वाहक के साथ-साथ अन्य युद्धपोत जैसे विध्वंसक, फ्रिगेट और पनडुब्बियां शामिल होती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की आक्रामक तैनाती और रुख के कारण पाकिस्तानी नौसेना को अपने तट के करीब रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। वाइस एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा, 'वास्तव में, भारतीय नौसेना द्वारा आक्रामक कार्रवाई करने के रुख को पाकिस्तान द्वारा युद्ध विराम का अनुरोध करने के महत्वपूर्ण कारकों में से एक माना जा सकता है।'  

शादी में देरी का मिला सुझाव, 19 साल के लड़के ने उठा लिया खौफनाक कदम—जानें पूरा मामला

मुंबई  महाराष्ट्र के ठाणे से हाल ही में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक लड़के ने कथित तौर पर इसीलिए अपनी जान दे दी क्योंकि वह एक लड़की से शादी करना चाहता था, लेकिन घरवालों ने उससे 21 साल की उम्र तक इंतजार करने को कहा था। लड़के की उम्र 19 साल थी। पुलिस ने मंगलवार को बताया कि लड़के ने परेशान होकर खुद की जान ले ली।   पुलिस ने बताया कि घटना 30 नवंबर को डोंबिवली इलाके में हुई। जानकारी के मुताबिक युवक झारखंड का रहने वाला था। वह पास की एक लड़की से प्यार करता था और उससे शादी करना चाहता था। मनपाड़ा पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि उसके परिवार ने उससे शादी के लिए कानूनी तौर पर तय उम्र 21 साल होने तक इंतज़ार करने को कहा था, जिससे वह बेहद परेशान था। पुलिस ने बताया कि 30 नवंबर को युवक ने उसने कथित तौर पर अपने घर की छत से दुपट्टे का इस्तेमाल करके फांसी लगा ली। परिवार आनन फानन में उसे पास के एक अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने एक्सीडेंटल मौत का मामला दर्ज कर लिया है और घटना की जांच शुरू कर दी है।  

‘रेड कार्पेट किसे?’ रोहिंग्याओं पर सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की कड़ी नाराज़गी

नई दिल्ली  रोहिंग्या समुदाय से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार और याचिकाकर्ता दोनों से तीखे सवाल किए। अदालत ने स्पष्ट किया कि रोहिंग्याओं की कानूनी स्थिति तय किए बिना उनके अधिकारों पर चर्चा नहीं की जा सकती और यह भी पूछा कि क्या भारत सरकार ने कभी उन्हें ‘शरणार्थी’ घोषित किया है। सीजेआई ने तीखा सवाल करते हुए पूछा कि 'क्या घुसपैठियों के लिए रेड कार्पेट बिछाएं? दरअसल मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ एक हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मई महीने में दिल्ली पुलिस ने कुछ रोहिंग्या व्यक्तियों को हिरासत में लिया, जिसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल रहा। साथ ही याचिका में मांग की गई कि यदि उनको उनके देश लौटाना हो, तो यह प्रक्रिया कानून के अनुसार ही होनी चाहिए। केंद्र के पास शरणार्थी घोषित करने का कोई आदेश है?- CJI लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई की शुरुआत में ही मुख्य न्यायाधीश ने केंद्र सरकार की ओर से किसी भी आधिकारिक अधिसूचना का अभाव उठाते हुए पूछा- भारत सरकार का कौन-सा आदेश है जो उन्हें ‘शरणार्थी’ घोषित करता है? ‘शरणार्थी’ एक विधिक परिभाषित शब्द है। यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से घुसपैठ करता है, तो क्या हमारे पास उसे यहां रखने की बाध्यता है? पीठ ने पूछा- अगर किसी का कानूनी दर्जा ही नहीं है और वह घुसपैठिया है, तो क्या हमारा दायित्व बनता है कि हम उसे यहां रखें? बेंच ने आगे कहा- अगर उनके पास भारत में रहने का कानूनी अधिकार नहीं है और वे घुसपैठिए हैं, तो क्या हम उत्तर भारत की बेहद संवेदनशील सीमा पर आए किसी घुसपैठिए का रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करें? याचिकाकर्ता की वकील ने स्पष्ट किया कि वे रोहिंग्याओं के लिए शरणार्थी दर्जा मांग ही नहीं रही हैं, बल्कि केवल यह मांग कर रही हैं कि किसी भी निर्वासन की प्रक्रिया कानून के मुताबिक हो। घुसपैठ कर प्रवेश करें और फिर अधिकार मांगें?- CJI इस पर CJI ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा- पहले आप अवैध रूप से घुसते हैं। सुरंग खोदकर या बाड़ काटकर भारत में दाखिल हो जाते हैं। फिर कहते हैं कि अब मैं आ गया हूं, इसलिए भारत के कानून मेरे ऊपर लागू हों और मुझे खाना, रहने की जगह, बच्चों को शिक्षा मिले। क्या हम कानून को इस तरह खींचना चाहते हैं? उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पहले से करोड़ों गरीब नागरिक हैं जिन पर ध्यान देना आवश्यक है। हालांकि सीजेआई ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही कोई अवैध रूप से घुस आया हो, उसे थर्ड डिग्री टॉर्चर नहीं दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का तर्क- हम केवल वैधानिक प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं याचिकाकर्ता की वकील ने कहा कि वे न तो रोहिंग्याओं के लिए विशेष अधिकार मांग रही हैं और न ही किसी को वापस बुलाने की मांग है। याचिका का एकमात्र उद्देश्य है कि सरकार अपने ही बनाए निर्वासन प्रक्रिया का पालन करे। उनका कहना था कि अदालत पहले ही सलीमुल्लाह मामले (2020) में कह चुकी है कि रोहिंग्याओं को सिर्फ वहीं वापस भेजा जा सकता है जब प्रक्रिया कानून के अनुसार हो। ‘देश धर्मशाला नहीं है’- पहले की टिप्पणियां गौरतलब है कि इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने श्रीलंकाई तमिल शरणार्थी से जुड़े एक अन्य मामले में कहा था कि भारत दुनिया की धर्मशाला नहीं बन सकता जहां हर तरफ से शरणार्थियों को स्वीकार किया जाए। इसके अलावा मई में अदालत ने एक और याचिका में यह टिप्पणी भी की थी कि रोहिंग्याओं को समुद्र में फेंकने की कहानी एक सुलेख कथा जैसी लगती है। सरकार ने PIL की ‘लोकस स्टैंडी’ पर उठाए सवाल सुनवाई में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि याचिका एक ‘पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन’ के रूप में दायर की गई है, लेकिन इसे किसी प्रभावित व्यक्ति ने दाखिल नहीं किया। इस पर याचिकाकर्ता की वकील ने कहा कि PIL में ‘लोकस’ का प्रश्न नहीं उठता। पीठ ने कहा कि यह मुद्दा कई अन्य याचिकाओं से भी जुड़ा है, इसलिए इसे उन मामलों के साथ समग्र रूप से सुना जाएगा। अदालत ने संकेत दिया कि बिना कानूनी दर्जे वाले विदेशी नागरिकों से जुड़े मामले संवेदनशील और जटिल हैं, जिनमें कई लॉजिस्टिक मुद्दे शामिल होते हैं।

यूज़र्स के लिए खुशखबरी! संचार साथी ऐप डिलीट कर सकते हैं, रखना जरूरी नहीं

नई दिल्ली  संचार साथी ऐप को लेकर जारी विवाद के बीच सरकार ने कहा है कि इसे फोन में रखना जरूरी नहीं है। साथ ही यूजर इसे डिलीट भी कर सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को यह जानकारी दी है। दूरसंचार विभाग ने नवंबर में निर्देश जारी किया था कि भारत में इस्तेमाल हो रहे फोन में संचार साथी ऐप अनिवार्य होगा। विपक्ष ने इस ऐप के जरिए जासूसी के आरोप लगाए हैं।   सिंधिया ने कहा, 'इसके आधार पर न कोई जासूसी है, न कोई कॉल मॉनीटरिंग है। अगर आप चाहते हैं, तो इसे एक्टिवेट करें। अगर आप नहीं चाहते, तो इसे एक्टिवेट मत करो। अगर आप इसे अपने फोन में रखना चाहते हैं, तो रखो। अगर आप इसको डिलीट करना चाहते हो, तो डिलीट करो…। अगर आपको संचार साथी इस्तेमाल नहीं करना है, तो डिलीट कर दो। इसे डिलीट कर सकते हैं, कोई परेशानी नहीं है।' उन्होंने कहा, 'यह उपभोक्ता की सुरक्षा की बात है…। आपको डिलीट करना है, तो डिलीट कर दोगे आप। कोई अनिवार्य नहीं है। अगर आप इस ऐप का उपयोग नहीं करना चाहते, तो इस पर रजिस्टर मत करो। पर हर व्यक्ति को देश में नहीं मालूम कि चोरी से बचाने, फ्रॉड से बचाने के लिए यह ऐप है। हर व्यक्ति तक यह ऐप पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। अगर आपको डिलीट करना है, तो आप डिलीट कर दो। नहीं इस्तेमाल करना तो रजिस्टर मत करो। जब आप रजिस्टर नहीं करोगे, तो यह ऐक्टिवेट कैसे होगा।' विपक्ष पर साधा निशाना केंद्रीय मंत्री ने विरोध करने पर विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'जब विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं होता है और विपक्ष मुद्दा ढूंढना चाहता है, तो विपक्ष की मदद हम नहीं कर सकते। हमारी जिम्मेदारी है, उपभोक्ताओं की मदद और सुरक्षा की। क्या है संचार साथी। संचार साथी एक ऐप है, एक पोर्टल है। जिसके आधार पर हर एक उपभोक्ता अपनी सुरक्षा अपने हाथों से कर पाता है। यह जान भागीदारी का एक कदम है। इसमें लोगों को आपत्ति नहीं, बल्कि स्वागत करना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'इसके आधार पर जब आप मोबाइल फोन खरीदते हो, उसके आधार पर आईएमईआई नंबर फेक है या असली है, इसका पता आप संचार साथी ऐप से कर सकते हैं। आज तक संचार साथी पोर्टल के 20 करोड़ डाउनलोड हुए हैं। ऐप के डेढ़ करोड़ से ज्यादा डाउनलोड हैं। यह सफल इसलिए है, क्योंकि देश का हर नागरिक इस अभियान का साथी बनना चाहता है। वह स्वयं जन भागीदारी के आधार पर अपनी सुरक्षा नियमित रूप से कर पाए।' उन्होंने जानकारी दी, 'आज तक करीब पौने दो करोड़ फर्जी कनेक्शन इस जन भागीदारी के आधार पर ही डिसकनेक्ट हुए हैं। करीब 20 लाख फोन जो चोरी हुए थे, उन्हें ट्रेस किया गया। साढ़े सात लाख चोरी फोन को उपभोक्ता के हाथ में वापस पहुंचाया। करीब 21 लाख फोन उपभोक्ता के पहचानने और रिपोर्ट करने के आधार पर ही डिसकनेक्ट हुए हैं…।'  

भरोसे के नाम पर साजिश: आंचल के पिता व भाई ने हत्या से पहले रचा ड्रामा, CCTV में कैद नाच

मुंबई  महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक युवती के प्रेमी के शव से शादी करने का मामला चर्चा में है। इस मामले में आरोपी युवती के पिता और भाई ही हैं। खबर है कि जिस युवक की हत्या के आरोप में दोनों पर लगे हैं, युवती के पिता उस युवक के साथ ही कुछ महीनों पहले जश्न मना रहे थे। युवती ने पिता और भाई के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है और दोनों फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं। 21 साल की आंचल ममदीवार ने 20 साल के सक्षम ताटे के शव से विवाह कर लिया था। गुरुवार शाम आंचल के भाई हिमेश और सक्षम के बीच झगड़ा हुआ था। पुलिस का कहना है कि हिमेश ने सक्षम पर कथित तौर पर गोली चलाई जो उसकी पसलियों के आर-पार निकल गई, इसके बाद उसने उसके सिर पर टाइल से वार किया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उन्होंने बताया कि घटना के कुछ ही देर बाद हिमेश, उसका भाई साहिल (25) और पिता गजानन मामिडवार (45) को गिरफ्तार कर लिया गया। साथ नाच रहे थे मीडिया रिपोर्ट में एक वीडियो के हवाले से बताया गया है कि आंचल के पिता गजानन आंबेडकर जयंती मना रहे हैं। वीडियो में वह आंचल, सक्षम और उनके दोस्तों के साथ नाच रहे हैं। वीडियो में नजर आ रहा है कि कपल खुश है। जश्न के दौरान गजानन ने बेटी को गले लगाया था। वीडियो में नजर आ रहा है कि सक्षम के दोस्त आरोपी को कंधे पर उठा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि आंचल के पिता और भाई ने हत्या से पहले सक्षम का भरोसा जीतने की साजिश रची थी। पुलिस ने उकसाया सोमवार को आंचल ने इतवारा थाने के दो पुलिसकर्मियों पर युवक की हत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया। मृतक के घर पर पहुंची युवती ने प्रेमी की हत्या के लिए अपने भाई को फांसी देने की अपील की। आंचल ने पीटीआई-वीडियो को बताया, 'हत्या वाले दिन, मेरा भाई हिमेश मुझे सुबह इतवारा थाने ले गया और सक्षम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने को कहा।' युवती ने बताया कि उसने फर्जी शिकायत दर्ज कराने से इनकार कर दिया। आंचल ने कहा, 'पुलिस के दो अधिकारियों ने उसे (भाई को)यह कहकर उकसाया कि उसे दूसरे लोगों से लड़ने के बजाय उस आदमी को मार देना चाहिए जिससे मैं प्यार करती हूं।' उसने कहा कि उसके भाई हिमेश ने सक्षम की हत्या के बाद थाने वापस आने की चुनौती दी थी। आंचल ने कहा, 'मेरा भाई बहुत गुस्से में था। उसने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वह सक्षम की हत्या करने के बाद थाने आएगा। फिर उसने उसे (सक्षम को) मार डाला। मेरी बस यही मांग है कि आरोपियों (उसके भाई और पिता) को भी उसी तरह मारा जाए जैसे सक्षम को मारा गया। अब मैंने उससे शादी कर ली है और उसके परिवार के साथ रहूंगी। मैं उनका ख्याल रखूंगी।'