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200 देशों को कर्ज देने वाला चीन, अमेरिका को सबसे अधिक कर्ज, ट्रंप की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

बीजिंग  दुनिया के नक्शे पर आज चीन केवल एक प्रोडक्शन सेंटर या आर्थिक शक्ति नहीं रह गया है, बल्कि अब वह दूसरे मुल्कों को कर्ज और वित्तीय सहायता देकर दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला बड़ा खिलाड़ी बन चुका है. अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान जैसे देशों से लेकर छोटे और गरीब देशों तक, लगभग हर कोने में चीन का पैसा पहुंच चुका है. हैरानी की बात यह है कि जिन देशों को चीन उधार दे रहा है, उनमें सबसे ऊपर नाम अमेरिका का है. बढ़ते तनाव, टकराव और प्रतिस्पर्धा के बावजूद ‘अंकल सैम’ ही चीन से सबसे बड़ा उधार लेने वाला देश है, यह फैक्ट दुनिया को चौंका देने के लिए काफी है. डैन वोंग नामक एक लेखक ने अपनी किताब ब्रेकनेक (Breakneck) में लिखा है कि चीन की इंजीनियरिंग क्षमता, निर्माण की गति और शहरी बदलाव सिर्फ विकास की कहानी नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुके हैं. उनका सवाल सीधा है- “क्या चीन इतना आगे निकल चुका है कि अब अमेरिका ही पीछे छूटने से डर रहा है?” इसी बीच AidData रिसर्च लैब की रिपोर्ट ने इस बहस को और तीखा कर दिया है. रिपोर्ट बताती है कि साल 2000 से 2023 तक चीन ने दुनियाभर में कर्ज और अनुदान के रूप में 2.2 ट्रिलियन डॉलर बांटे हैं, और करीब 200 देशों व क्षेत्रों को इससे फायदा या कर्ज का बोझ मिला है. दुनिया का सबसे बड़ा आधिकारिक कर्जदाता चीन ने यह पैसा केवल आर्थिक रूप से कमजोर देशों को नहीं दिया. सिर्फ 6 फीसदी रकम की सहायता ग्रांट या सस्ते कर्ज के रूप में दी है. 47 फीसदी गरीब देशों ने और 43 फीसदी अमीर व विकसित देशों ने चीन से कर्ज लिया. यानी जितने विकासशील देश चीन पर निर्भर होते जा रहे हैं, उतने ही डेवलप हो चुके और अमीर देश भी चीन पर वित्तीय रूप से निर्भर हो गए हैं. AidData के अनुसार, चीन अब दुनिया का सबसे बड़ा आधिकारिक कर्जदाता (official creditor) बन चुका है. सिर्फ इतना ही नहीं, चीन की राज्य-स्वामित्व वाली कंपनियां और बैंक पूरी दुनिया में बुनियादी ढांचा, खनिज संसाधन, एयरपोर्ट, पाइपलाइन, डेटा सेंटर और हाई-टेक कंपनियों में निवेश कर रहे हैं. रिपोर्ट कहती है कि चीन की रकम 2,500 अमेरिकी परियोजनाओं में लगी है, जिनमें टेस्ला (Tesla), अमेज़न (Amazon), डिज्नी (Disney) और बोइंग (Boeing) जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं. टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में खूब लगाया पैसा दुनिया अक्सर बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की चर्चा करती है, लेकिन आंकड़ों के अनुसार BRI चीन की कुल विदेशी उधारी का सिर्फ 20 फीसदी हिस्सा है. चीन का बहुत सारा पैसा अमीर देशों की टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में भी जा रहा है. यानी वह केवल सड़कें और पुल नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीक पर भी अपना नियंत्रण मजबूत कर रहा है. अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया… भारत भी… सब कर्जदार 2000 में चीन का सिर्फ 11 प्रतिशत कर्ज अमीर देशों को जाता था, लेकिन 2023 तक यह बढ़कर 75 प्रतिशत हो गया. यानी अमीर दुनिया गरीब देशों की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से चीन के पैसों पर निर्भर होती गई है. चीन के 10 सबसे बड़े कर्जदार देशों की सूची में सबसे ऊपर है संयुक्त राज्य अमेरिका (202 बिलियन डॉलर), उसके बाद रूस (172 बिलियन डॉलर), ऑस्ट्रेलिया (130 बिलियन), वेनेज़ुएला (106 बिलियन) जैसे देश आते हैं. भारत भी इससे बाहर नहीं है. भारत ने चीन से 11.1 बिलियन डॉलर कर्ज और अनुदान के रूप में प्राप्त किए हैं. इन सभी आंकड़ों से एक बात साफ उभरती है कि चीन का खेल केवल डेवलपमेंट हेतु मदद का नहीं, बल्कि रणनीतिक आर्थिक प्रभाव का है. कर्ज और निवेश के माध्यम से चीन न केवल देशों में बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है, बल्कि वैश्विक राजनीतिक समीकरणों को भी अपने हित में मोड़ रहा है. और यही वजह है कि भविष्य की दुनिया की राजनीति, तकनीक और व्यापार में चीन की भूमिका पहले से कहीं अधिक निर्णायक होती जा रही है.

फर्जी गुरु ने इंजीनियर से ऐंठे 48 लाख, चमत्कारी दवा का दावा निकला ठगी

बेंगलुरु  बेंगलुरु में 29 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर के साथ लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। उसने आरोप लगाया कि स्वघोषित आयुर्वेदिक हीलर ने उसे सेक्सुअल समस्याओं के इलाज के नाम पर महंगी और हानिकारक हर्बल प्रोडक्ट्स बेचे। इसके लिए उसे 48 लाख रुपये चुकाने पड़े। शिकायतकर्ता ने बताया कि इन दवाओं के सेवन से उसकी तबीयत बिगड़ गई और किडनी में समस्या आने लगी। पीड़ित ज्ञानभारती इलाके में रहता है और शिवमोग्गा जिले का मूल निवासी है। वह पिछले तीन वर्षों से एक निजी फर्म में नौकरी कर रहा है। उसने ज्ञानभारती पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, मार्च 2023 में उसकी शादी हुई। पति-पत्नी पहले बसवेश्वरनगर में रहते थे। शादी के शुरुआती महीनों में उसे सेक्सुअल समस्याएं होने लगीं। वह केंगरी में मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के लिए गया, जहां डॉक्टरों ने टेस्ट कराए और कुछ दवाएं लिखीं। इस साल 3 मई को अस्पताल जाते समय उसने उल्लाल में लॉ कॉलेज के पास सड़क किनारे आयुर्वेदिक तंबू देखा। यहां लगे पोस्टर पर सेक्सुअल समस्याओं के तुरंत समाधान का दावा किया गया था। वह टेंट के अंदर चला गया, जहां उसे एक व्यक्ति मिला। पीड़ित ने अपनी समस्याएं उसे बताईं। उस शख्स ने कहा कि 'विजय गुरुजी' इसका तेजी से इलाज कर सकते हैं। उसने विजय से मिलने की व्यवस्था करने का वादा किया। सड़क किनारे टेंट पर पड़ी नजर रिपोर्ट के मुताबिक, उसी शाम एक व्यक्ति टेंट में आया और उसने खुद को विजय गुरुजी बताया। पीड़ित की जांच करने के बाद विजय ने कहा कि एक दुर्लभ दवा देवराज बूटि उसकी समस्या का इलाज कर देगी। उसने इसे यशवंतपुर में विजयलक्ष्मी आयुर्वेदिक मेडिसिन शॉप से खरीदने को कहा। उसने कहा कि यह दवा केवल उसी दुकान पर उपलब्ध है और वह इसे उत्तराखंड के हरिद्वार से लाता है। उसने कहा कि देवराज बूटि का एक ग्राम 1.6 लाख रुपये का है। उसने कहा कि दवा केवल नकद भुगतान से खरीदी जानी चाहिए। उसने सुझाव दिया कि पीड़ित अकेले जाए, क्योंकि दावा करते हुए कि अगर कोई साथ जाए तो उसकी शक्ति नष्ट हो जाएगी। माता-पिता से उधार लिए पैसे पीड़ित ने घर से नकद पैसे लिए और आयुर्वेदिक दुकान पर चला गया। वह दवा लेकर विजय के पास लौटा। स्वघोषित आयुर्वेदिक हीलर ने बताया कि देवराज बूटि का इस्तेमाल कैसे करना है और उसे खास तरह का तेल भी दिया। इस तेल की कीमत 76,000 रुपये प्रति ग्राम थी और 15 ग्राम तेल खरीदने को कहा। उसने हर हफ्ते अपनी पत्नी और माता-पिता से पैसे उधार लिए और कुल 17 लाख रुपये का भुगतान 15 ग्राम तेल और अन्य प्रोडक्ट्स के लिए किया। मेडिकल जांच की रिपोर्ट से हैरान विजय ने बाद में उसे अतिरिक्त 3 ग्राम देवराज बूटि' खरीदने के लिए दबाव डाला। प्रत्येक ग्राम के लिए 1.6 लाख रुपये देने को कहा। पीड़ित ने बैंक से 20 लाख रुपये का लोन लिया और कुल 18 ग्राम देवराज बूटि खरीदी। बाद में उसे देवराज रसाबूटि नामक एक अन्य दवा खरीदने के लिए मनाया गया, जिसकी कीमत 2.6 लाख रुपये प्रति ग्राम थी। इसके लिए उसने दोस्त से 10 लाख रुपये उधार लिए और चार ग्राम देवराज रसाबूटि खरीदी। इस तरह पीड़ित ने विजयलक्ष्मी आयुर्वेदिक मेडिसिन शॉप से कुल 48 लाख रुपये देकर सभी दवाएं खरीदीं। सभी दवाओं का उपयोग करने के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ। जब पीड़ित ने मेडिकल जांच कराई तो ब्लड टेस्ट के नतीजे से किडनी में समस्याएं दिखीं। अब शिकायतकर्ता का आरोप है कि विजय गुरुजी की हर्बल दवाओं के सेवन से उसकी सेहत बिगड़ी। उसने विजय, दवा दुकान मालिक और उस टेंट वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जिसने उसे विजय से मिलवाया था।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले—नौसेना के जहाज पूरी तरह भारतीय शिपयार्ड्स में तैयार

नई दिल्ली   भारतीय नौसेना के 262 विभिन्न प्रोजेक्ट डिजाइन एवं विकास परियोजनाएं उन्नत चरणों में पहुंच चुकी हैं। खास बात यह है कि जहाज निर्माण व नौसेना की यह अन्य सभी परियोजनाएं स्वदेशी रूप से विकसित की गई हैं। यह बदलाव भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रमाण हैं। नौसैनिक क्षमता व स्वदेशीकरण की यह जानकारी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी। वह  नई दिल्ली में आयोजित ‘समुद्र उत्कर्ष’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। यहां उन्होंने समुद्री विरासत पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। ‘समुद्र उत्कर्ष’ सेमिनार के आयोजन का उद्देश्य भारत की उभरती हुई जहाज निर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित करना है। इस कार्यक्रम में स्वदेशी शिपबिल्डिंग, नौसैनिक आधुनिकीकरण और समुद्री आत्मनिर्भरता पर विस्तृत चर्चा हुई। यहां रक्षामंत्री ने बताया कि कई भारतीय शिपयार्ड इस दशक के भीतर अपनी परियोजनाओं में 100 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री उपयोग करने की ओर अग्रसर हैं। इसका अर्थ है कि भारत से निर्मित किसी भी नौसैनिक प्लेटफॉर्म पर वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों का न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्हें गर्व है कि भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के सभी निर्माणाधीन जहाज भारतीय शिपयार्ड्स में ही तैयार हो रहे हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन का प्रत्यक्ष परिचायक है। उन्होंने कहा कि विश्व के समुद्री इतिहास पर भारत की गहरी छाप है। हमारे पूर्वजों ने समुद्रों को बाधा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक संवाद के सेतु के रूप में इस्तेमाल किया। आज इस विरासत का सम्मान करते हुए भारत आगे बढ़ने के संकल्प के साथ कार्य कर रहा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों समुद्री तटों पर स्थित भारतीय शिपयार्ड अब आधुनिक फैब्रिकेशन लाइन्स, उन्नत मैटेरियल-हैंडलिंग सिस्टम्स, ऑटोमेटेड डिजाइन टूल्स, मॉडल टेस्टिंग सुविधाओं और डिजिटल शिपयार्ड तकनीकों से लैस हैं, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप हैं। उन्होंने भारत की समुद्री यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि लोथल के प्राचीन बंदरगाहों से लेकर मुंबई, गोवा, विशाखापत्तनम, कोलकाता और कोचीन के आधुनिक शिपयार्डों तक का सफर भारत की तकनीकी प्रगति और धैर्य का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत की समुद्री निर्भरता अत्यधिक है। देश के 95 प्रतिशत व्यापार (वॉल्यूम) और लगभग 70 प्रतिशत व्यापार (वैल्यू) समुद्री मार्गों से ही होता है। हिंद महासागर में भारत की सामरिक स्थिति और 7,500 किमी की विस्तृत तटरेखा इसे वैश्विक व्यापार में एक महत्वपूर्ण शक्ति बनाती है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसके इंटीग्रेटेड, एंड-टू-एंड शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम में निहित है, जहां डिजाइन, मॉड्यूलर निर्माण, फिटिंग, मरम्मत और जीवन-चक्र समर्थन तक हर प्रक्रिया स्वदेशी तकनीक से संचालित है। हजारों एमएसएमई के सहयोग से भारत ने स्टील, प्रणोदन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर और एडवांस्ड कॉम्बैट सिस्टम्स तक फैली मजबूत आपूर्ति-श्रृंखला विकसित की है। उन्होंने भारतीय निर्मित सैन्य प्लेटफॉर्मों के मानवीय मिशनों में योगदान का उल्लेख किया। 2015 का ऑपरेशन राहत (यमन), महामारी के दौरान ऑपरेशन समुद्र सेतु, और 2025 में म्यांमार भूकंप के समय चलाया गया ऑपरेशन ब्रह्मा, जिसमें आईएनएस सतपुड़ा, सवित्री, घड़ियाल, कर्मुक और एलसीयू 52 ने बड़े पैमाने पर राहत सामग्री पहुंचाई थी। जल के नीचे की क्षमताओं पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कलवरी क्लास पनडुब्बियां, जिन्हें बढ़ती स्वदेशीकरण दर के साथ एमडीएल में बनाया जा रहा है, भारत की अंडरवाटर वारफेयर क्षमता और डिजाइनिंग दक्षता का उदाहरण हैं। अंत में रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ‘केवल जहाज नहीं, बल्कि विश्वास’ और ‘केवल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि साझेदारी’ बनाने में विश्वास रखता है। उन्होंने विश्व समुदाय से मिलकर एक सुरक्षित, समृद्ध और सतत समुद्री भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

अधिभार के कारण पाकिस्तान के सामने संकट, आबादी बढ़ोतरी से संभावित चुनौतियां

इस्लामाबाद दुनिया के कई देश घटती आबादी के संकट से परेशान हैं। इटली, जापान, रूस, साउथ कोरिया जैसे देशों में तेजी से आबादी कम हो रही है और हालात ऐसे हैं कि अस्तित्व के संकट तक की बात हो रही है। यहां तक कि भारत जैसे देश में भी अब प्रजनन दर तेजी से कम हो रही है। प्रति महिला जन्मदर अब भारत में 1.9 ही रह गई है, लेकिन पाकिस्तान की आबादी में तेजी से विस्फोट हो रहा है। बदलते दौर में भी पाकिस्तान की आबादी जिस तरह से बढ़ रही है, उससे देश के आगे संकट पैदा हो सकता है। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने ही अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट में पाकिस्तान की पूरी व्यवस्था ही चरमराने का अनुमान जताया है। पाकिस्तान की बढ़ती आबादी और उसके संसाधनों में असंतुलन का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह क्षेत्रफल के मामले में दुनिया का 33वां देश है। लेकिन आबादी के मामले में वह 5वें नंबर पर पहुंच गया है। कराची, लाहौर, पेशावर, रावलपिंडी, क्वेटा समेत तमाम शहरों की हालत यह है कि जरा सी बारिश भी बाढ़ जैसे हालात पैदा कर देती है। भारी आबादी के चलते कहीं भी रिहायश की सही व्यवस्था नहीं है और खेती का रकबा भी लगातार कम हो रहा है। क्लाइमेट चेंज और आर्थिक संकट जैसी समस्याएं अलग से घर रही हैं। फिलहाल पाकिस्तान की आबादी 241.5 मिलियन पर है। अब यह अगले 5 सालों में 300 मिलियन यानी 30 करोड़ तक पहुंच गई है। यही नहीं 2050 में तो यह 40 करोड़ हो जाएगी। छोटे से देश की इतनी भीषण आबादी बड़ा संकट खड़ा कर सकती है। ऐसी स्थिति इसलिए है क्योंकि पाकिस्तान में प्रजनन दर 3.6 है। यह भारत के मुकाबले लगभग दोगुनी है। साउथ एशिया के देशों में किसी भी मुल्क की आबादी बढ़ने की ग्रोथ इतनी अधिक नहीं है। पाकिस्तान के बाद अफ्रीका के मुल्कों में ही आबादी बढ़ने की रफ्तार इतनी तेज देखी जा रही है। डॉन के मुताबिक इतनी भारी आबादी का असर हर सेक्टर पर दिख रहा है। एक तरफ बच्चे कुपोषित हैं तो वहीं उनके बड़े होने पर बेरोजगारी का संकट है। इन्फ्रास्ट्रक्चर और हेल्थकेयर जैसी समस्याएं भी पैदा हो रही है। पाकिस्तान की बढ़ती आबादी के चलते हालात यह हैं कि 5 साल से कम आयु के 40 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं। इसके अलावा बच्चों को जन्म देने के दौरान ही 11 हजार माताओं की हर साल मौत हो जाती है। पाकिस्तान में गर्भ निरोधक उपायों के इस्तेमाल में कमी के चलते भी ऐसी समस्याएं पैदा हो रही हैं। इसकी वजह कुछ लोगों की कट्टरता है और वे गर्भनिरोध का इस्तेमाल नहीं करते। यही नहीं यह कट्टरता बढ़ती आबादी में एक और तरीके से खाज का काम करती है। पोलियो की दवा का विरोध किया जाता है और इसके चलते अकसर पाकिस्तान में पोलियो के केस मिल जाते हैं।

अयोध्या में ध्वजारोहण का महापर्व: डॉ. राजीव बिंदल ने राम मंदिर पूर्ण होने पर देशवासियों को बधाई दी

शिमला भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने आज श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण कार्य पूर्ण होने के उपरांत सम्पन्न हुए ध्वजारोहण के महापर्व पर संपूर्ण देशवासियों एवं विश्वभर के सनातन समाज को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने कहा कि लगभग 500 वर्षों के लंबे संघर्ष और असंख्य ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों के अप्रतिम बलिदानों के पश्चात आज वह पावन क्षण आया है जब श्रीराम जन्मस्थान पर दिव्य और भव्य मंदिर पूर्ण रूप से संसार के समक्ष खड़ा है।  यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और तपस्या का प्रतीक है। डॉ. बिंदल ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राम मंदिर के कलश पर ध्वजा चढ़ाकर पूरे देश को ऐतिहासिक और आध्यात्मिक सौगात दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्य हमारी सनातन परंपरा, संस्कृति और अस्मिता को गौरव के शिखर पर स्थापित करने वाला है। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण करोड़ों-करोड़ों भारतीयों की आस्था की पूर्णता है। यह दिवस भारत के प्रत्येक नागरिक के लिए गर्व का विषय है और इसे सदियों तक स्मरण किया जाता रहेगा। डॉ. बिंदल ने एक बार पुनः समस्त देशवासियों, भक्तों एवं सनातन धर्मावलंबियों को इस पावन अवसर पर शुभकामनाएँ और बधाई दीं।

India-UK Drill ‘Ajeet Warrior’: हेलीकॉप्टर स्ट्राइक में दुश्मन ठिकाने तबाह, जवानों ने दिखाया सुपर कमांडो ऑपरेशन

नई दिल्ली  भारत और यूनाइटेड किंगडम की सेनाएं संयुक्त युद्धाभ्यास ‘अजेय वारियर’ को अंजाम दे रही हैं। इस दौरान दोनों सेनाओं ने आतंकवादियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का अभ्यास किया है। इस अभियान में भारत और यूके के जवान हेलीकॉप्टर की सहायता से आतंकवादियों के ठिकानों पर पहुंचे, उन पर हमला किया और आतंकी ठिकाने नष्ट करके सुरक्षित वापस निकल आए। भारतीय सेना के मुताबिक, राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में ‘अजेय वॉरियर’ भारत-यूके संयुक्त सैन्य अभ्यास चल रहा है। यहां यह युद्धाभ्यास लगातार उच्च पेशेवर तीव्रता के साथ आगे बढ़ रहा है। इसमें भारतीय सेना की सिख रेजिमेंट और ब्रिटिश सेना की टुकड़ियां शामिल हैं।  दोनों सेनाएं संयुक्त राष्ट्र जनादेश के तहत संचालन क्षमता और इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने के उद्देश्य से विविध और अत्यंत मांगपूर्ण सैन्य गतिविधियों में भाग ले रही हैं। अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिकों ने विभिन्न फायरिंग प्रैक्टिस, रिफ्लेक्स शूटिंग, रॉकेट लॉन्चर फायरिंग, स्नाइपर एवं एमएमजी ड्रिल्स जैसी उन्नत युद्धक प्रक्रियाओं का अभ्यास किया। यहां हालात वास्तविक युद्ध की परिस्थितियों की तर्ज पर तैयार किए गए हैं। ऐसी स्थिति ने सैनिकों की निर्णय क्षमता और प्रतिक्रिया कौशल को और अधिक धारदार बनाया है। संयुक्त सत्रों में आईडी को निष्क्रिय करना, विभिन्न सेनाओं द्वारा अपनाई जाने वाली टेक्नीक और प्रोसीजर और समकालीन परिचालन चुनौतियों पर आधारित केस स्टडी शामिल रहे। इससे दोनों सेनाओं के बीच ज्ञान-साझेदारी और सामरिक समझ में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। शहरी और अर्ध-शहरी युद्धक प्रशिक्षण में हाउस एवं रूम इंटरवेंशन, काफिला सुरक्षा, रोड ओपनिंग गश्त जैसी जटिल ड्रिल्स के दौरान दोनों सेनाओं ने समन्वित, सटीक और अनुशासित कार्रवाई का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही लाइट हेलीकॉप्टर और एमआई-17 हेलीकॉप्टरों से स्लिदरिंग तथा स्मॉल-टीम हेलिबॉर्न ऑपरेशंस किए गए। इनके तहत आतंकवाद-रोधी अभियानों में आवश्यक तेजी से प्रवेश करके घुसने और सुरक्षित निकासी की सैन्य क्षमताओं को मजबूत किया गया। सेना के मुताबिक दैनिक दिनचर्या में योग, फिजिकल ट्रेनिंग, बैटल ऑब्स्टेकल कोर्स, तथा युद्ध भार के साथ 5 और 10 मील की दौड़ शामिल रही। इन अभ्यासों से सैनिकों की शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और टीम भावना में और निखार आया। अभ्यास स्थल पर दोनों सेनाओं के हथियारों और नई पीढ़ी के सैन्य उपकरणों का संयुक्त प्रदर्शन भी किया गया। सैन्य प्रशिक्षण के साथ-साथ खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मित्रता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। टग ऑफ वार, वॉलीबॉल और विशेष रूप से एक मैत्रीपूर्ण क्रिकेट मैच में सैनिकों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इसके अतिरिक्त बीकानेर की सांस्कृतिक यात्रा ने ब्रिटिश सैनिकों को राजस्थान की समृद्ध विरासत, कला और मेहमाननवाजी से परिचित कराया। जैसे-जैसे अजेय वॉरियर आगे बढ़ रहा है, यह अभ्यास अपने प्रमुख उद्देश्यों को मजबूती से पूरा कर रहा है। यह भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच रक्षा सहयोग और वैश्विक शांति व स्थिरता में योगदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। वहीं, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में मंगलवार को ही भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास ‘सूर्य किरण’ प्रारंभ हुआ। यह अभ्यास 25 नवंबर से 8 दिसंबर तक आयोजित किया जाएगा। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य संचालनात्मक तालमेल बढ़ाना है। इसमें पर्वतीय क्षेत्रों में जंगल युद्धक तकनीक और काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशंस पर विशेष ध्यान दिया गया है। दोनों सेनाएं आधुनिक तकनीकों के एकीकरण, पारस्परिक इंटरऑपरेबिलिटी और श्रेष्ठ प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान पर फोकस कर रही हैं।

सीमा पर तनाव चरम पर: पाक कार्रवाई के बाद अफगानिस्तान ने दी जवाबी धमकी

काबुल  पाकिस्तानी हवाई हमले से सख्त नाराज अफगानिस्तान ने दावा किया है कि वो पड़ोसी देश को इसका ठीकठाक जवाब देगा। पक्तिका, खोस्त और कुनार में पाकिस्तानी एयर स्ट्राइक को काबुल ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करार दिया। अफगान सरकार के मुताबिक इस हमले में 10 नागरिकों ने जान गंवाई, जिनमें 9 बच्चे शामिल हैं। ये हमला पाकिस्तान की ओर से खोस्त के रिहायशी इलाकों में किया गया, तो वहीं कुनार और पक्तिका को भी निशाना बनाया गया और वहां 4 लोग घायल हो गए। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि सही समय पर जरूरी जवाब दिया जाएगा। मुजाहिद ने एक्स पोस्ट में कहा, "पक्तिका, खोस्त और कुनार प्रांतों में पाकिस्तानी सेना का एयरस्ट्राइक अफगानिस्तान की संप्रभुता पर सीधा हमला है और पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से अंतरराष्ट्रीय नियमों और सिद्धांतों का साफ उल्लंघन है।" उन्होंने आगे कहा, "पाकिस्तानी सेना को कार्रवाइयों से कुछ हासिल नहीं होता; इनसे सिर्फ यह साबित होता है कि गलत खुफिया सूचनाओं से चलाए जा रहे ऑपरेशन तनाव बढ़ाते हैं और पाकिस्तान के सैन्य शासन की नाकामियों को उजागर करते हैं।" अफगान प्रवक्ता ने आगे कहा कि काबुल को अपने इलाके की रक्षा करने का अधिकार है और "सही समय पर सही जवाब दिया जाएगा।" मुजाहिद ने कहा, "इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान इस उल्लंघन और आपराधिक गतिविधि की कड़ी निंदा करता है और एक बार फिर साफ करता है कि वह अपनी हवाई और जमीनी सीमाओं और अपने देश की रक्षा को अपना जायज धार्मिक अधिकार मानता है, और सही समय पर सही जवाब दिया जाएगा।" मुजाहिद ने कहा कि यह हमला सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात 12:00 बजे खोस्त के गुरबुज जिले के मुगलगई इलाके में हुआ। उन्होंने एक्स पोस्ट में कहा कि "पाकिस्तानी हमलावर सेनाओं ने एक स्थानीय नागरिक, वलियत खान, जो काजी मीर का बेटा था, के घर पर बमबारी की। इस वजह से, नौ बच्चे (पांच लड़के और चार लड़कियां) और एक महिला मारे गए, और पूरा घर तबाह हो गया।" मुजाहिद ने यह भी स्पष्ट किया कि उसी रात अलग-अलग एयरस्ट्राइक की गई थी, और कहा, "कुनार और पक्तिका में भी एयर एयरस्ट्राइक हुई, जहां चार आम लोग घायल हुए।" अफगान प्रांतों में हुए नए हमले से अब हिंसा के एक और दौर का डर बढ़ गया है।

EU कोर्ट का फैसला: पूरे यूरोपीय संघ में सेम-सेक्स मैरिज को मिले सम्मान

नई दिल्ली  यूरोपीय यूनियन की सबसे बड़ी कोर्ट ने सेम-सेक्स मैरिज को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए पोलैंड को फटकार लगाई है। कोर्ट ने ये भी कहा कि सभी सदस्य देशों को इस तरह की शादी को मान्यता देनी चाहिए। कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि पोलैंड ने जोड़े की शादी को मान्यता न देकर गलती की। जोड़े से कहा गया था कि पोलिश कानून सेम-सेक्स मैरिज की इजाजत नहीं दे सकता। कपल ने जर्मनी में एक दूजे का हाथ थामा था और पोलैंड आकर अपनी शादी को रजिस्टर कराना चाहता था। ईयू कोर्ट ऑफ जस्टिस ने कहा, "यह न केवल आने-जाने और रहने की आजादी का उल्लंघन है, बल्कि निजी और पारिवारिक जीवन के सम्मान के मौलिक अधिकार का भी उल्लंघन है।" कैथोलिक बहुल पोलैंड में, एलजीबीटी+ बराबरी के अधिकारों की लड़ाई लंबे समय से चल रही है, लेकिन वर्षों से उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली है। हालांकि, मौजूदा सरकार सेम-सेक्स यूनियनों सहित सिविल पार्टनरशिप को नियंत्रित करने के लिए एक बिल पर काम कर रही है। पोलैंड स्थित मीडिया आउटलेट टीवीपी वर्ल्ड न्यूज के अनुसार यूरोपियन कोर्ट ने यह फैसला एक पोलिश कोर्ट के अनुरोध पर दिया। दरअसल, दो पुरुषों के विवाह की रजिस्ट्री नहीं की गई थी और जर्मन मैरिज सर्टिफिकेट को ट्रांसक्राइब करने से इनकार कर दिया गया था। 2018 में बर्लिन में शादी करने वाले इस कपल की पहचान इस केस में सिर्फ उनके नाम के पहले अक्षर से हुई है। कपल के वकील ने इस फैसले पर कमेंट करने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ईयू नागरिकों को दूसरे सदस्य देशों में जाने और अपने देश लौटने पर "एक नॉर्मल फैमिली लाइफ" जीने की आजादी दी जानी चाहिए। फैसले में कहा गया, "जब वे किसी होस्ट सदस्य देश में फैमिली बनाते हैं, खासकर शादी की वजह से, तो उन्हें अपने देश लौटने पर उस फैमिली लाइफ को जारी रखने का भरोसा होना चाहिए।" कोर्ट ने कहा कि इसके लिए सदस्य देशों को अपने राष्ट्रीय कानूनों में सेम जेंडर के बीच शादी की इजाजत देने की जरूरत नहीं है। लेकिन विदेशी शादियों को मान्यता देने के तरीके में सेम-सेक्स कपल्स के साथ भेदभाव करने की भी इजाजत नहीं है। पोलैंड के प्रधानमंत्री, डोनाल्ड टस्क, और उनकी यूरोप समर्थक गठबंधन सरकार का सेम-सेक्स यूनियन पर बिल पास कराने का काम उनके कंजर्वेटिव गठबंधन दल के विरोध की वजह से रुक गया है। पोलैंड के राष्ट्रपति, करोल नॉवरोकी ने भी कहा है कि वह “किसी भी ऐसे बिल को वीटो करेंगे जो शादी के संवैधानिक रूप से सुरक्षित स्टेटस को कमजोर करेगा।”

केरल में खुलेंगे नए स्कूल, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को तय समय में नीति लाने को कहा

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए केरल की स्कूल शिक्षा पर चिंता जताई। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि शत प्रतिशत साक्षरता का दावा करने वाला राज्य अगर इस स्थिति में है, तो ये बहुत चिंताजनक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा में कोई कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा है कि उन सभी इलाकों में जहां पहले से कोई सरकारी लोअर प्राइमरी या प्राइमरी स्कूल नहीं है, वहां नए स्कूल खोले जाएं, जिससे हर बच्चे को पढ़ाई का मौका मिले। कोर्ट ने साफ कहा कि तीन महीने के अंदर सरकार को इसके लिए एक पॉलिसी तैयार करनी होगी।  सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जहां भी हर 1 किलोमीटर के दायरे में कोई लोअर प्राइमरी स्कूल नहीं है और हर 3 किलोमीटर के दायरे में कोई अपर प्राइमरी स्कूल नहीं है, वहां नए स्कूल खोले जाएं। अगर स्कूल के लिए कोई बिल्डिंग मौजूद नहीं है तो अस्थाई तौर पर प्राइवेट बिल्डिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही स्थायी स्कूल भवनों के लिए बजट का भी इंतजाम करना जरूरी है। इसके अलावा, कोर्ट ने ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी भी तय की।  अदालत ने कहा कि पंचायतें अपनी तरफ से उपलब्ध जमीन की जानकारी सरकार को दें ताकि नए स्कूलों के लिए जगह मिल सके। स्कूलों में टीचरों की कमी न हो, इसके लिए रिटायर्ड टीचरों को अस्थायी तौर पर नियुक्त किया जा सकता है, जब तक नए टीचरों की भर्ती पूरी नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को स्पष्ट आदेश दिया है कि हर क्षेत्र में सरकारी स्कूल होने चाहिए, जिससे कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। इसके लिए अब सरकार को तीन महीने के अंदर एक पॉलिसी तैयार करनी होगी। हालांकि, सरकार के लिए यह चुनौती भी है कि वह जल्दी से जल्दी योजना तैयार करे, बजट का प्रावधान करे और नए स्कूल खोलने की प्रक्रिया शुरू करे।

ताइवान मुद्दे पर ट्रंप–शी की बात: जिनपिंग के बयान को ताइपे ने सख्ती से खारिज किया

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच सोमवार को लंबी फोन कॉल हुई। इसमें जिनपिंग ने ताइवान पर अपने अधिकार की बात कही, जिस पर ताइवान के पीएम ने रिएक्ट किया। वहीं सुर्खियों में मंगलवार (25 नवंबर) को जापानी पीएम साने ताकाइची और ट्रंप की बात-चीत भी है। चीन के आधिकारिक बयान के अनुसार, शी ने इस बातचीत में जोर देकर कहा कि ताइवान का “चीन में वापस आना” द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बने अंतरराष्ट्रीय क्रम का एक अभिन्न हिस्सा है। सिन्हुआ के अनुसार शी ने ट्रंप से स्पष्ट कहा कि 'ताइवान की वापसी' को लेकर बीजिंग का रवैया स्पष्ट है और वो इसे पोस्ट वॉर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के अनुकूल मानता है। जब यह बयान सामने आया, तो ताइवान के प्रधानमंत्री चू जंग ताई ने शी के विचार को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ताइवान के 23 मिलियन लोगों के लिए किसी “वापसी” का विकल्प ही नहीं हो सकता। उन्होंने संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनका देश स्वतंत्र है। तो वहीं, ताकाइची ने जापानी मीडिया से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें कभी कॉल करने की खुली छूट दी और ये भी कहा कि आप मेरी अच्छी दोस्त हैं। ताकाइची ने कहा कि यह कॉल ट्रंप के अनुरोध पर हुई थी, जिसमें उन्होंने अपने और जापान-की स्थिति पर विचार किया। अमेरिकी अधिकारी इस मामले में थोड़े सतर्क बने दिखे क्योंकि ट्रंप ने अपनी सोशल-मीडिया पोस्ट में कुल मिलाकर यह कहा कि चीन-संयुक्त रिश्ते “बहुत मजबूत” हैं, लेकिन उन्होंने ताइवान का नाम नहीं लिया। जापानी मीडिया ताइवान पर ट्रंप की चुप्पी पर सवाल खड़े कर रहा है। जापान टुडे ने कुछ विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि ट्रंप शायद खुल कर इसलिए नहीं बोल रहे क्योंकि उन्हें चीन के साथ अपनी ट्रेड डील की फिक्र है। हो सकता है इस वजह से ताइवान को लेकर वो कुछ न कहें और इस कदम से बीजिंग को हिम्मत मिल सकती है। नतीजतन, पूर्वी एशिया में नया संघर्ष शुरू हो सकता है। ये पूरी घटना बताती है कि चीन जापान-ताइवान-अमेरिका त्रिकोण में ताइवान को लेकर अधिक दबाव बनाना चाहता है, जबकि अमेरिका जापान के साथ अपनी गठबंधन-स्थिति को संभालते हुए चीन के साथ व्यापार व रणनीतिक संबंधों को आगे ले जाना चाहता है।