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बच्चों में उभर रहा नया इंफेक्शन: काली खांसी जैसी खांसी से बढ़ी चिंता

चंडीगढ़ काली खांसी (हूपिंग कफ) और लंबे समय से खांसी से पीड़ित मरीजों के लिए एक नई चिंता उभरकर सामने आई है। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआइ) के किए गए शोध में यह पता चला है कि उत्तर भारत में तेजी से फैल रहा नया बैक्टीरिया, बोर्डेटेला होल्मसी, अब काली खांसी के समान लक्षण उत्पन्न कर रहा है । यह संक्रमण विशेष रूप से पांच से दस वर्ष के बच्चों में फैल रहा है और इसके नियंत्रण में कठिनाई आ रही है। पीजीआइ के मेडिकल माइक्रोबायोलाजी विभाग के डॉ. विकास गौतम ने बताया कि उनकी टीम ने 2019 से 2023 के बीच 935 संदिग्ध काली खांसी के मामलों का अध्ययन किया। इस शोध में पाया गया कि लगभग 37 प्रतिशत मरीजों में संक्रमण का कारण नया जीवाणु बोर्डेटेला होल्मसी था, जबकि पारंपरिक काली खांसी का कारण बोर्डेटेला परट्यूसिस होता है। 2023 में सबसे अधिक मामले पांच से 10 वर्ष के बच्चों में देखे गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि संक्रमण का पैटर्न बदल रहा है। ये हैं लक्षण     लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक चलने वाली खांसी     खांसी के बाद सांस लेने में सीटी जैसी आवाज     थकान, कमजोरी और हल्का बुखार     पारंपरिक खांसी की दवाओं से राहत न मिलना काली खांसी के पारंपरिक मामलों में गिरावट के संकेत   पीजीआइ द्वारा 2015 से चलाए जा रहे निगरानी कार्यक्रम में यह पाया गया कि पहले बोर्डेटेला पयूसिस संक्रमण के 15-20 प्रतिशत मामले मिलते थे, जो अब घटकर दो से पांच प्रतिशत तक रह गए हैं। इसके विपरीत, बोर्डेटेला होल्मसी के मामलों में वृद्धि हो रही है। पीजीआइ के विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव संक्रमण की नई प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है, जो भविष्य में स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन सकता है। बोर्डेटेला होल्मसी के वारे में यह एक जीवाणु है जो सांस संबंधी संक्रमण उत्पन्न करता है और इसके लक्षण काली खांसी से काफी मेल खाते हैं। पहले इसे दुर्लभ माना जाता था, लेकिन अब भारत सहित कई देशों में इसके मामले बढ़ रहे हैं। यह विशेष रूप से बच्चों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को अधिक प्रभावित करता है। डाक्टरों को काली खांसी के साथ नए संक्रमण की जांच की भी जरूरत डाक्टरों को सलाह दी गई है कि वे काली खांसी के साथ-साथ नए संक्रमण की भी जांच करें। पीजीआइ की टीम ने सुझाव दिया है कि डाक्टरों को पारंपरिक काली खांसी की जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनसे मिलते-जुलते संक्रमणों की पहचान और निगरानी भी करनी चाहिए। समय पर पहचान, सही जांच और उचित दवाओं से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।  

नई पेंशन गणना: अब पेंशनर्स को मिलेगा ज्यादा लाभ, समझें पूरा कैलकुलेशन

नई दिल्ली आठवें वेतन आयोग की चर्चा शुरू होते ही सबका ध्यान सैलरी पर रहता है, लेकिन इस बार पेंशनर्स की संख्या कर्मचारियों से ज्यादा है, इसलिए उनका मुद्दा भी बड़ा हो गया है। सरकार के पेंशनर्स पोर्टल के मुताबिक, 30 अक्टूबर 2025 तक कुल 68.72 लाख पेंशनर्स हैं, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की संख्या करीब 50 लाख है। सरकार ने 8वें वेतन आयोग के टर्म ऑफ रेफ्रेंस (Terms of Reference- TOR) को मंजूरी दे दी है। रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने की समय सीमा तय की गई है और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई (Ranjana Prakash Desai) को इसका चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। अब पेंशनर्स जानना चाहते हैं कि उनकी पेंशन कितनी बढ़ेगी? तो चलिए समझते हैं पूरा कैलकुलेशन। फिटमेंट फैक्टर क्या है और पेंशन कितनी बढ़ेगी? पेंशन बढ़ाने में सबसे अहम रोल फिटमेंट फैक्टर का होता है। यह एक गुणक (Multiplier) होता है जिससे पुराने बेसिक वेतन या बेसिक पेंशन को नए वेतन में बदला जाता है। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 है। यानी अगर किसी की पुरानी बेसिक सैलरी 10,000 रुपए थी, तो नई सैलरी 10,000 × 2.57 = 25,700 रुपए होगी। आठवें वेतन आयोग में (8th Pay Commission) में फिटमेंट फैक्टर कितना होगा, यह कैबिनेट की मंजूरी के बाद तय होगा। क्या सिर्फ बेसिक पेंशन ही बदलेगी?   नहीं, पेंशनर्स के लिए सिर्फ बेसिक पेंशन ही मुद्दा नहीं है। टर्म ऑफ रेफ्रेंस में पेंशन से जुड़े कई पॉइंट शामिल हैं, जैसे— पेंशन, ग्रेच्युटी, फैमिली पेंशन, कम्यूटेड पेंशन की बहाली हर 5 साल में पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव ओल्ड पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme) की बहाली (1 जनवरी 2004 के बाद भर्ती वालों के लिए) CGHS मेडिकल सुविधा, कैशलेस इलाज और महंगाई राहत (DA/DR) को वेतन और पेंशन में जोड़ना। पेंशनर्स की प्रमुख मांगें क्या हैं? ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल बता ते हैं कि फिटमेंट फैक्टर जितना ज्यादा होगा, पेंशन उतनी ज्यादा बढ़ेगी। कम्यूटेशन 15 साल से घटाकर 12 साल होना चाहिए, क्योंकि अभी 40% पेंशन काटी जाती है। CGHS अस्पताल हर जिले में नहीं हैं। अभी सिर्फ 3,000 रुपए प्रति महीना मेडिकल लाभ मिलता है, इसे 20,000 रुपए किया जाए। पेंशन कैसे बढ़ती है? फिटमेंट फैक्टर के आधार पर पूरा कैलकुलेशन समझ लेते हैं। मान लीजिए एक शख्स की पुरानी बेसिक पे है- 40,000 रुपए, तो पुरानी पेंशन (50%) होगी यानी 20,000 रुपए। फिटमेंट फैक्टर नई बेसिक पे नई पेंशन (50%) 2.57 40,000 × 2.57 = ₹1,02,800 ₹51,400 3 40,000 × 3 = ₹1,20,000 ₹60,000 3.68 40,000 × 3.68 = ₹1,47,200 ₹73,600   25000 से ₹50000 पेंशन कैसे होगी? अगर फिटमेंट फैक्टर 2.0 माना जाए, तो ₹25,000 × 2 = 50,000 रुपए पेंशन हो सकती है। महंगाई राहत कैसे बढ़ेगी? How will the dearness relief increase DR बेसिक पेंशन का प्रतिशत होता है। पुरानी पेंशन ₹20,000 → DR 20% = ₹4,000 नई पेंशन ₹30,000 → DR 20% = ₹6,000 यानी बेसिक पेंशन बढ़ने से DR अपने आप ज्यादा मिलेगा। EPS, फैमिली पेंशन और Enhanced पेंशन में क्या होंगे बदलाव? पेंशन का प्रकार क्या होता है? नया असर EPS आखिरी बेसिक सैलरी पर आधारित नई वेतन मैट्रिक्स लागू होगी तो EPS भी बढ़ेगी फैमिली पेंशन पेंशनर की मृत्यु के बाद पत्नी/परिवार को 30% बेसिक बेसिक बढ़ेगा तो फैमिली पेंशन भी बढ़ेगी Enhanced पेंशन लंबी सेवा या कम्यूटेशन रिस्टोर होने पर Fitment Factor ज्यादा होने पर ये भी बढ़ेगी   पेंशन का प्रकार क्या होता है? नया असर EPS आखिरी बेसिक सैलरी पर आधारित नई वेतन मैट्रिक्स लागू होगी तो EPS भी बढ़ेगी फैमिली पेंशन पेंशनर की मृत्यु के बाद पत्नी/परिवार को 30% बेसिक बेसिक बढ़ेगा तो फैमिली पेंशन भी बढ़ेगी Enhanced पेंशन लंबी सेवा या कम्यूटेशन रिस्टोर होने पर Fitment Factor ज्यादा होने पर ये भी बढ़ेगी उदारणर में समझें तो- पुरानी फैमिली पेंशन: ₹20,000 → 30% = ₹6,000 नई पेंशन: ₹30,000 → 30% = ₹9,000

इनोवेशन को मिलेगा बूस्ट! R&D इकोसिस्टम के लिए मोदी सरकार लाएगी 1 लाख करोड़ रुपए की स्कीम

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को सुबह लगभग 9:30 बजे नई दिल्ली स्थित 'भारत मंडपम' में साइंस एंड टेक्नोलॉजी इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री उपस्थित जनसमूह को संबोधित भी करेंगे। देश में रिसर्च एंड डेवलपमेंट इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को एक लाख करोड़ रुपए के रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (आरडीआई) स्कीम फंड की शुरुआत भी करेंगे। इस योजना का उद्देश्य देश में निजी क्षेत्र के संचालित रिसर्च एंड डेवलपमेंट इकोसिस्टम को बढ़ावा देना है। ईएसटीआईसी का आयोजन 3 से 5 नवंबर तक किया जाएगा।  इस सम्मेलन में शिक्षा जगत, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग और सरकार के 3,000 से अधिक प्रतिभागियों के साथ-साथ नोबेल पुरस्कार विजेता, प्रख्यात वैज्ञानिक, इनोवेटर्स और पॉलिसी मेकर्स भी शामिल होंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, विचार-विमर्श 11 प्रमुख विषय सेक्टरों पर केंद्रित होगा, जिनमें एडवांस मटेरियल्स एंड मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, बायो-मैन्युफैक्चरिंग, ब्लू इकॉनमी, डिजिटल कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, उभरती एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी, एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट, हेल्थ एंड मेडिकल टेक्नोलॉजी, क्वांटम साइंस एंड टेक्नोलॉजी और स्पेस टेक्नोलॉजी शामिल हैं। प्रेस विज्ञप्ति में यह भी जानकारी दी गई कि ईएसटीआईसी में प्रमुख वैज्ञानिक अपने विचार रखेंगे। इसके अलावा पैनल डिस्कशन होगा। प्रेजेंटेशन दिखाई जाएगी और टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन होगा। यह कार्यक्रम भारत के साइंस एंड टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए शोधकर्ताओं, उद्योग और युवा इनोवेटर्स के बीच सहयोग के लिए एक मंच प्रदान करेगा। केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह के अनुसार, 'ईएसटीआईसी 2025' युवा इनोवेटर्स, स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं के लिए नए समाधान, मार्गदर्शन करने और उद्योग व स्टेकहॉल्डर से जुड़ने का एक मंच है।  

ISRO का ‘बाहुबली’ सैटेलाइट: नाम ही नहीं, काम में भी है दम — जानिए क्यों है ये खास

बेंगलुरु  इसरो कुछ ही देर में अपना सबसे भारी सैटेलाइट, सीएमएस-03 लांच करने वाला है। इसरो ने इस उपग्रह का नाम रखा है ‘बाहुबली’। इसके पीछे वजह भी बेहद दिलचस्प है। इसरो के मुताबिक यह अब तक का सबसे अधिक वजन वाला सैटेलाइट है। इसलिए ही इसे यह नाम दिया गया है। इसकी लांचिंग का वक्त करीब आता जा रहा है और उलटी गिनती चालू है। सबसे भारी उपग्रह अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि सीएमएस-03 का वजन 4,410 किलोग्राम है। वजन वाला यह उपग्रह भारत की धरती से भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में प्रक्षेपित किया जाने वाला सबसे भारी उपग्रह होगा। यह उपग्रह एलवीएम3-एम5 रॉकेट के जरिये प्रक्षेपित किया जाएगा, जिसे इसकी भारी भारोत्तोलन क्षमता के लिए ‘बाहुबली’ नाम दिया गया है। 43.5 मीटर की लंबाई वाले इस सैटेलाइट का लांचिंग टाइम पांच बजकर 26 मिनट है। कितनी है इसकी क्षमता एलवीएम3 यान अपने शक्तिशाली क्रायोजेनिक चरण के साथ 4,000 किलोग्राम वजन का पेलोड जीटीओ तक तथा 8,000 किलोग्राम वजन का पेलोड पृथ्वी की निचली कक्षा तक ले जाने में सक्षम है। एलवीएम-3 रॉकेट ने इससे पहले चंद्रयान-3 का सफल प्रक्षेपण किया था, जिसके जरिये भारत 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफलतापूर्वक उतरने वाला पहला देश बन गया। क्या है इसका उद्देश्य एलवीएम3- को इसरो के वैज्ञानिक भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) एमके3 भी कहते हैं। इसरो ने कहा कि एलवीएम3-एम5 पांचवीं अभियानगत उड़ान है। दो ठोस मोटर ‘स्ट्रैप-ऑन’ (एस200), एक द्रव प्रणोदक कोर चरण (एल110) और एक क्रायोजेनिक चरण (सी25) वाला यह तीन चरणीय प्रक्षेपण यान इसरो को जीटीओ में 4,000 किलोग्राम तक वजन वाले भारी संचार उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में पूर्ण आत्मनिर्भरता प्रदान करता है। इसरो ने कहा कि रविवार के मिशन का उद्देश्य यह है कि बहु-बैंड संचार उपग्रह सीएमएस-03 भारतीय भूभाग सहित एक विस्तृत समुद्री क्षेत्र में सेवाएं प्रदान करेगा। हालांकि यह दावा किया जा रहा है कि उपग्रह का इस्तेमाल सैन्य निगरानी के लिए भी किया जाएगा, लेकिन इस मामले पर इसरो की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।  

इजरायल ने दी नई धमकी: गाजा के बाद अब इस मुस्लिम देश पर बरसेगा कहर!

गाजा  गाजा में युद्धविराम के बाद भी इजरायल कई बार हमास के ठिकानों पर हमला कर चुका है। वहीं अब उसकी नजर लेबनान पर है। लेबनान और इजरायल के बीच हिजबुल्लाह की वजह से पहले से ही तनाव जारी है। वहीं इजरायली रक्षा मंत्री चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर हिजबुल्लाह ने हथियार नहीं डाले तो दक्षिण लेबनान में तेज हमले किए जाएंगे। इससे पहले लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि इजरायली हमले में चार लोगों की मौत हुई है।   इजरायल ने कहा, हिजबुल्लाह आग से खेल रहा है और लेबनाने के राष्ट्रपति अपना पांव पीछे खींचने में लगे हैं। किसी भी कीमत पर लेबनाने को हिजबुल्लाह के हथियार डलवाने होंगे वरना हम उत्तरी इजरायल की सुरक्षा के लिए भयंकर हमले करेंगे। इससे पहले शनिवार की रात को इजरायल ने हवाई हमला किया, जिसमें गांव के पूर्वी बाहरी इलाके में दोहा-कफर रूमाने रोड पर एक निर्देशित मिसाइल से चार पहिया वाहन को निशाना बनाया गया। एनएनए ने कहा कि एम्बुलेंस टीमें घटनास्थल पर पहुंची। एक सुरक्षा सूत्र ने सिन्हुआ से कहा कि चारों मृतक हिजबुल्लाह के सदस्य थे हालांकि उन्होंने कोई और ब्यौरा नहीं दिया। गौरतलब है कि 27 नवंबर, 2024 से, हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच अमेरिका और फ्रांस द्वारा मध्यस्थता किया गया युद्धविराम समझौता प्रभावी हो गया है जिससे गाजा पट्टी में युद्ध के बाद महीनों से चल रही सीमा पार झड़पें समाप्त हो गईं। समझौते के बावजूद, इजरायली सेना कभी-कभी लेबनान पर हमला करता है क्योंकि उनका कहना है कि वे हिजबुल्लाह के खतरों को निशाना बना रहा है और उसने लेबनानी सीमा पर पांच मुख्य ठिकानों पर सेना की तैनात किया हुआ है। जिस तरह से इजरायल सीजफायर के बाद भी लेबनान में हमले करता रहता है, वही मॉडल वह गाजा में भी लागू करना चाहता है। गाजा में भी युद्धविराम के बाद भी इजरायली हमले में पांच दर्जन से ज्यादा लोग मारे गए हैं।  

कानपुर निवासी लेफ्टिनेंट जनरल अविनाश दास ने नई दिल्ली स्थित ‘आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल’ के कमांडेंट का पदभार संभाला

नई दिल्ली , कानपुर निवासी प्रतिष्ठित ई.एन.टी. सर्जन लेफ्टिनेंट जनरल अविनाश दास, जिन्होंने सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं में लगभग चार दशकों तक अनुकरणीय सेवाये दी हैं, ने नई दिल्ली स्थित सशस्त्र बलों के प्रसिद्ध एवं महत्वपूर्ण अस्पताल, 'आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल' (आर एंड आर हॉस्पिटल) के कमांडेंट के रूप में कार्यभार ग्रहण किया है। लेफ्टिनेंट जनरल दास का सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान रहा है। अपने सेवा काल के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल दास द्वारा चिकित्सा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के साथ-साथ प्रशासनिक एवं कमांड पदों पर रहते हुये महत्वपूर्ण कार्य किया गया है।  पुणे स्थित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज से स्नातक लेफ्टिनेंट जनरल अविनाश दास ने नई दिल्ली स्थित आर्मी के बेस हॉस्पिटल एवं कमांड हॉस्पिटल लखनऊ में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में भी कार्य किया है। कमांडेंट, सी.एच. (एन.सी.) रहते हुए उन्होंने कमांड हॉस्पिटल, उधमपुर को नए अत्याधुनिक एवं सुसज्जित अस्पताल भवन में स्थानांतरित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने दीर्घ और विशिष्ट करियर के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल दास ने असाधारण नेतृत्व और सेवा भावना का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्हें चीफ आफ आर्मी स्टाफ (सी.ओ.ए.एस.), चीफ ऑफ इंटिग्रेटेड स्टाफ कमेटी (सी.आई.एस.सी.) तथा जी.ओ.सी. इन सी. प्रशस्ति पत्रों से सम्मानित किया जा चुका है। 'आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल' के कमांडेंट के रूप में उनकी नियुक्ति से अस्पताल में उत्कृष्टता के मानकों में और वृद्धि होने की अपेक्षा है, जिससे सशस्त्र बलों के साथ – साथ नागरिक समुदाय को भी उच्चस्तरीय चिकित्सा सेवाएं प्राप्त होंगी। कमांडेंट के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल दास का उद्देश्य अस्पताल की गौरवशाली परंपरा को बनाए रखते हुए चिकित्सा सेवा, अनुसंधान तथा शिक्षण के क्षेत्र में नवाचार और गुणवत्ता के उच्चतम स्तर को सुनिश्चित करना है। वे अस्पताल की सामर्थ्य को और सुदृढ़ बनाने, अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को विकसित करने तथा चिकित्सा उत्कृष्टता एवं नवाचार की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

रजत जयंती पर उत्तराखण्ड का विज़न 2050 जारी, सीएम धामी बोले—‘अगले 25 साल होंगे स्वर्णिम’

देहरादून  उत्तराखण्ड राज्य निर्माण की रजत जयंती के उपलक्ष्य में प्रदेशभर में रजतोत्सव समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। उत्तराखंड में प्रदेशभर में 01 नवंबर को इगास पर्व से 11 नवम्बर 2025 तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण कर उन्हें नमन किया और कहा कि उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान ही हमें नया राज्य प्राप्त हुआ। यह हम सबके लिए गर्व का विषय है कि उत्तराखण्ड 25 वर्षों की उल्लेखनीय यात्रा पूर्ण कर विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।   मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प देशवासियों के सामने रखा है। वर्ष 2050 उत्तराखण्ड राज्य स्थापना का स्वर्ण जयंती वर्ष होगा। आने वाले इन 25 वर्षों के लिए राज्य सरकार एक नया रोडमैप बनाकर आगे बढ़ेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देश की सीमाओं पर बलिदान देने वाले जवानों और राज्य आंदोलन के बलिदानियों को भी नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के रजतोत्सव समारोह के अंतर्गत 03 और 04 नवम्बर को देहरादून में विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 03 नवम्बर को महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु विशेष सत्र को संबोधित करेंगी, जो राज्य के लिए गौरव का विषय है। इस विशेष सत्र में राज्य को आगे ले जाने की दिशा में विचार-विमर्श होगा तथा बीते 25 वर्षों के अनुभवों पर चर्चा की जाएगी। 09 नवम्बर को राज्य स्थापना दिवस पर मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। रजतोत्सव समारोह का केंद्रबिंदु संस्कृति, पर्यटन, युवाशक्ति, प्रवासी उत्तराखण्डी तथा राज्य आंदोलनकारी रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि जनभागीदारी का उत्सव है। प्रत्येक नागरिक और जनपद को इस उत्सव से जोड़ने का उन्होंने आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रजत जयंती वर्ष केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का अवसर है। इसी क्रम में अगले 25 वर्षों के लिए खाका भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिसका लक्ष्य समृद्ध, आत्मनिर्भर और सशक्त उत्तराखण्ड का निर्माण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में राज्य सरकार द्वारा अनेक उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है जिसने समान नागरिक संहिता लागू की है। साथ ही भूमि कानून, धर्मांतरण विरोधी, नकल विरोधी और दंगारोधी कानून लागू कर सुशासन की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत और महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जबकि सहकारी समितियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में 26 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में 3.56 लाख करोड़ रुपये के एमओयू साइन हुए और एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की ग्राउंडिंग हो चुकी है। राज्य का बजट पहली बार एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्तुत किया गया है। स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य में 58 लाख आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए हैं, मातृ मृत्यु अनुपात में उल्लेखनीय कमी आई है, लखपति दीदी योजना से 1 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं और वृद्धावस्था पेंशन को बढ़ाकर 1500 रुपये किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार 26 गुना बढ़ा है और प्रति व्यक्ति आय में 17 गुना वृद्धि हुई है। धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के पुनरोद्धार के लिए केदारनाथ पुनर्निर्माण और बद्रीनाथ धाम के मास्टर प्लान और मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के तहत कार्य प्रगति पर हैं। दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन जैसी परियोजनाएं राज्य के विकास को नई दिशा देंगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार पलायन रोकथाम और सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम, स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप और मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना जैसी पहलें संचालित कर रही है।  

PM मोदी का हमला: तेजस्वी यादव को बनाया गया CM फेस दबाव में, RJD पर साधा निशाना

पटना  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने बिहार के आरा में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए RJD और कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि “आरजेडी ने कांग्रेस की कनपटी पर कट्टा रखकर मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कराया।” प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कभी नहीं चाहती थी कि RJD के उम्मीदवार को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया जाए, लेकिन RJD ने दबाव डालकर यह फैसला कांग्रेस से छीन लिया। मोदी ने कहा कि दोनों दलों के बीच पहले से ही गहरा मतभेद है और चुनाव के बाद यह टकराव और बढ़ेगा। “इन पर भरोसा नहीं किया जा सकता,” उन्होंने कहा।   बिहार के युवाओं को बिहार में ही मिलेगा रोजगार पीएम मोदी ने अपने संबोधन में युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि NDA का संकल्प है कि बिहार के युवा राज्य से बाहर न जाएं, बल्कि यहीं काम पाएं और बिहार का नाम रोशन करें। उन्होंने घोषणा की, “हम आने वाले दिनों में 1 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा करेंगे। यह सिर्फ एक घोषणा नहीं, बल्कि इसे साकार करने का ठोस प्लान तैयार है।” ‘ईमानदार घोषणापत्र बनाम जंगलराज गठबंधन’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विकसित बिहार के लिए NDA ने एक ईमानदार और दूरदर्शी घोषणापत्र पेश किया है। उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा, “एक तरफ NDA का ईमानदार घोषणापत्र है, वहीं दूसरी तरफ जंगलराज गठबंधन का घोषणापत्र धोखे और झूठ से भरा है। जनता अब सब जानती है, किसी के बहकावे में नहीं आएगी।”   सिख दंगों की दिलाई याद अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस पर 1984 के सिख दंगों की याद दिलाते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “1 और 2 नवंबर 1984 को कांग्रेस के लोगों ने दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में सिखों का नरसंहार कराया था। आज भी कांग्रेस उन्हीं दोषियों को सम्मानित कर रही है और उन्हें नए पद दे रही है।” उन्होंने कहा कि RJD और कांग्रेस दोनों को अपने पापों का कोई पछतावा नहीं है। “एक ने जंगलराज दिया, तो दूसरे ने देश को दंगों की आग में झोंका”।

ट्रंप का आग भरा बयान: आतंकवाद पर बरसे, बोले—अब गरजेगी अमेरिका की बंदूकें!

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिमी अफ्रीकी देश नाइजीरिया को वॉर्निंग देते हुए कहा है कि अब अगर ज्यादा ईसाइयों का नरसंहार किया गया तो अमेरिकी फौज टूट पड़ेगी। शनिवार को ट्रंप ने कहा कि उन्होंने रक्षा विभाग से तेज सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहने का निर्देश दे दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका तत्काल प्रभाव से नाइजीरिया को मिलने वाली सारी सहायता रोकी जाती है।   ट्रंप ने नाइजीरिया की सरकार से कहा है कि अगर वह ईसाइयों को बचाने में सक्षम नहीं है तो अमेरिका की बंदूकें गरजने के लिए तैयार हैं। अमेरिका इस्लामिक आतंकवाद को जड़ से खत्म करने को प्रतिबद्ध है। ट्रंप ने कहा, अगर हम हमला करेंगे, तो यह तेज़, भयावह और करारा होगा, ठीक वैसे ही जैसे आतंकवादी हमारे प्यारे ईसाइयों पर हमला करते हैं! चेतावनी: नाइजीरियाई सरकार तत्काल कदम उठाए!" अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि वे कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर नाइजीरिया की सरकार हिम्मत नहीं कर पा रही तो फिर अमेरिका की सेना इस्लामिक आतंकवाद फैलाने वाले संगठनों को नेस्तनाबूत कर देगी। बतादें कि ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में नाइजीरिया को उन देशों की लिस्ट में शामिल कर दिया था जिनमें धर्म के आधार पर अत्याचार किया जाता है। इस लिस्ट में पाकिस्तान, रूस, चीन, म्यांमार और उत्तर कोरिया भी शामिल हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था, नाइजीरिया में हजारों ईसाई मारे गए हैं। यहां इस्लामिक कट्टरपपंथी ईसाइयों को टारगेट कर रहे हैं और राष्ट्रपति बोला अहमद टिनुबु हर बार यही कहते हैं कि वह धार्मिक स्वतंत्रता के रक्षक हैं। नाइजीरिया के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि वह आतंकवाद के खिलाफ जंग लड़ रहा है और उसे आशा है कि अमेरिका उसका सहयोगी बना रहेगा। बता दें कि नाइजीरिया में बोको हराम आतंकवादी संगठन का सबसे ज्यादा आतंक है।  

खरीदारी के बीच मची चीख-पुकार! मेक्सिको सुपरमार्केट में लगी आग ने ली 23 जानें

मेक्सिको  मेक्सिको के सोनारा राज्य में भीषण आग ने त्योहारी खुशी को मातम में बदल दिया, जब हर्मोसिलो शहर के एक डिस्काउंट स्टोर में लगी आग से कम से कम 23 लोगों की मौत हो गई, जिनमें कई बच्चे भी शामिल हैं, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं.  यह हादसा उस वक्त हुआ जब देश भर में ‘डे ऑफ द डेड’ उत्सव मनाया जा रहा था. एक ऐसा पारंपरिक पर्व जिसमें परिवार अपने दिवंगत प्रियजनों को याद करते हैं. रंग-बिरंगे जुलूस और मोमबत्तियों के बीच यह हादसा उत्सव को त्रासदी में बदल गया. सोनारा राज्य के अटॉर्नी जनरल गुस्तावो सालास ने बताया कि अधिकांश मौतें जहरीली गैसें सांस में लेने से हुईं, क्योंकि आग लगने के बाद धुआं तेजी से पूरे स्टोर में फैल गया. उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक टीम ने शवों का परीक्षण शुरू कर दिया है. बिजली खराबी की आशंका, विस्फोट की जांच जारी स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, धमाका या आग लगने की वजह संभावित इलेक्ट्रिकल फॉल्ट बताई जा रही है. हालांकि, शहर के दमकल प्रमुख ने कहा कि अभी यह जांच की जा रही है कि विस्फोट हुआ था या नहीं. हर्मोसिलो नगरपालिका ने यह स्पष्ट किया है कि यह कोई आतंकी हमला नहीं था. राज्यपाल ने दिए जांच के आदेश सोनारा के गवर्नर अल्फोंसो दुराज़ो ने कहा, “मैंने हादसे की वजह पता लगाने के लिए एक पारदर्शी और विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं. यह बेहद दुखद घटना है, खासकर क्योंकि मृतकों में छोटे बच्चे भी शामिल हैं.” उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की. राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने जताया शोक मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने एक्स (X) पर पोस्ट कर कहा, “मेरी संवेदनाएं उन सभी परिवारों के साथ हैं जिन्होंने इस भयावह हादसे में अपने प्रियजनों को खोया है. सरकार की राहत टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं.” रेड क्रॉस और दमकलकर्मियों ने चलाया बचाव अभियान सोनारा रेड क्रॉस के अनुसार, उनकी टीम के 40 सदस्य और 10 एम्बुलेंस बचाव कार्य में जुटे रहे. छह बार अस्पताल तक घायलों को पहुंचाया गया. दमकल विभाग ने कहा कि आग पर अब काबू पा लिया गया है, लेकिन मलबे में फंसे लोगों की तलाश अभी जारी है.