samacharsecretary.com

CIBIL Score एक क्लिक में, Paytm-PhonePe-Google Pay से तुरंत जानें

  नई दिल्ली लोन लेने से पहले आपको यह जान लेना चाहिए कि आपका सिबिल स्कोर कैसे है। कई ऐसे ऐप्स हैं, जो सिबिल स्कोर देखने की सुविधा देते हैं। हालांकि, आज के समय में कोई भी अपने स्मार्टफोन में ज्यादा ऐप डाउनलोड नहीं करना चाहता है। इससे स्टोरेज फुल होने जैसी समस्या आने लगती है। क्या आप जानते हैं कि आपके फोन में ऐसी कई ऐप्स पहले से ही मौजूद हैं, जो सिबिल स्कोर बताते हैं। जी हां, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने वाले ऐप जैसे Phone Pe, Google Pay और Paytm से भी आप सिबिल स्कोर देख सकते हैं। आज हम इस आर्टिकल में आपको इन तीनों ऐप्स से सिबिल स्कोर जानने का तरीका बताने वाले हैं। आइये, जानते हैं। क्या होता है सिबिल स्कोर? सबसे पहले तो आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि सिबिल स्कोर क्या होता है। सिबिल स्कोर कुछ और नहीं बल्कि आपके क्रेडिट का लेखा-जोखा है। यानी सिबिल स्कोर क्रेडिट हिस्ट्री के आधार पर होता है। क्रेडिट हिस्ट्री इस पर निर्भर करती है कि आपने अभी तक लिए गए लोन को समय पर चुकाया है या नहीं। उसका ब्याज समय पर दिया है या नहीं। सिबिल स्कोर कई चीजों पर आधारित होता है। इसमें पेमेंट हिस्ट्री का वेटेज 30% होता है। क्रेडिट एक्सपोजर का वेटेज 25% और क्रेडिट का प्रकार और अवधि का वेटेज 25% होगा। इसके अलावा, 20 प्रतिशत और भी कई चीजों पर निर्भर करता है। बता दें कि सिबिल स्कोर की रेंज 300-900 के बीच होती है। सिबिल स्कोर को बुरा, अच्छा और एक्सीलेंट के आधार पर मापा जाता है। आपका स्कोर जितना अच्छा होगा, आपको उसके आधार पर रेटिंग मिलेगी। बैंक उसके आधार पर आपको लोन देंगे। Paytm के लिए अपनाएं यह तरीका     PhonePe की तरह ही Paytm से भी सिबिल स्कोर देख सकते हैं। इसके लिए आपको ऐप ओपन करना होगा।     होम पेज पर आपको फ्री टूल्स का सेक्शन मिलेगा। इसमें Check your latest credit score के ऑप्शन पर क्लिक करें।     फिर अपना नाम डालें और स्कोर चेक कर लें। Google Pay पर मिलता है ऑप्शन     अपने फोन में गूगल पे ऐप ओपन करने के बाद स्क्रॉल डाउन करने सबसे नीचे आना होगा।     इसके बाद आपको Check your cibil score for free का ऑप्शन दिखेगा। इस पर क्लिक कर दें।     अब Check Score पर क्लिक करके अपना सिबिल स्कोर देख लें। PhonePe से ऐसे करें चेक     PhonePe से सिबिल स्कोर जांचने के लिए सबसे पहले ऐप ओपन करें।     उसके बाद आपको होम पेज पर Loans का ऑप्शन दिखेगा। यह ऑप्शन Recharge & Bills के नीचे होगा। इसके बाद आपको check Credit Score के ऑप्शन पर क्लिक करना है।     यह आपसे कुछ डिटेल जोड़ने के लिए परमिशन मांगेगा। इसके बाद आपको आपको आपका सिबिल स्कोर दिखा देगा।  

बैरबी-सायरंग रेल परियोजना से म्यांमार बॉर्डर तक बढ़ेगा रेल मार्ग, आइजोल जुड़ा राष्ट्रीय नेटवर्क से, PM करेंगे उद्घाटन

मिजोरम   मिजोरम के एयरपोर्ट से पहली बार रेलवे स्टेशनों की कनेक्टिविटी होने जा रही है. इससे यात्रियों को काफी सहूलियत मिलेगी. ट्रेन 48 सुरंगों और 150 से ज्यादा पुलों से होकर गुजरेगी. इससे यात्री रोमांचक सफर का आनंद ले सकेंगे. देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचने वाले पर्यटकों के पास मिजोरम घूमने के बाद असम जाने के लिए सीमित विकल्प थे. अब 13 सितंबर से पर्यटकों को कई तरह की सहूलियत मिलनी शुरू हो जाएगी.मिजोरम की राजधानी आइजोल पहली बार भारतीय रेलवे के नेटवर्क से जुड़ गई है। अब यह रेल लाइन आगे बढ़कर म्यांमार बॉर्डर तक जाएगी। जिसका सर्वे किया जा रहा है।  अभी तक जो पर्यटक मिजोरम घूमने के लिए आते हैं, वे राजधानी के आइजोल के लेंगपुई एयरपोर्ट पर उतरते हैं. मिजोरम घूमने के बाद अगर यहीं से वे असम घूमने जाना चाहें तो उनके पास केवल 2 ही विकल्प होते थे. या तो वे सड़क मार्ग से सीधे असम के सिलचर तक पहुंच सकते हैं या फिर मिजोरम के एक मात्र रेलवे स्टेशन बइरबी तक सड़क मार्ग से जाकर वहां से फिर ट्रेन पकड़कर असम में कदम रख सकते हैं. अब 13 सितंबर के बाद पर्यटकों की इन समस्याओं का समाधान होने जा रहा है. 13 सितंबर को पीएम करेंगे उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 सितंबर को इस परियोजना का उद्घाटन करेंगे और पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। खासबात है कि लगभग 8071 करोड़ रुपए की लागत से तैयार यह रेल लाइन न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएगी बल्कि मिजोरम के आर्थिक और पर्यटन विकास को भी नई दिशा देगी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह लाइन राज्य के लिए लाइफलाइन साबित होगी। खास बात यह है कि इस रेल लाइन के शुरू होने से आइजोल से सिलचर तक का सफर सड़क मार्ग से 7 घंटे के बजाय ट्रेन से सिर्फ 3 घंटे में तय होगा। दावा किया जा रहा है कि, यह रेल लाइन न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएगी बल्कि मिजोरम के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल देगी। कुतुबमीनार से भी ऊंचा ब्रिज इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना इस बैराबी-सैरांग रेल लाइन को देश की सबसे कठिन परियोजनाओं में गिना जा रहा है। इस ट्रैक पर 48 सुरंगें बनाई गई हैं, जिनकी कुल लंबाई 12.8 किलोमीटर है। इसके अलावा बड़े और छोटे 142 ब्रिज तैयार किए गए हैं। इनमें से सबसे ऊंचा ब्रिज 104 मीटर का है, जो कुतुबमीनार से भी ऊंचा है और भारतीय रेलवे का दूसरा सबसे ऊंचा ब्रिज माना जा रहा है। इस लाइन पर पांच रोड ओवरब्रिज और छह अंडरपास भी बनाए गए हैं। पूरी परियोजना को आधुनिक तकनीक से डिजाइन किया गया है, जिससे ट्रेन 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेगी। खुलेगा आर्थिक विकास का नया रास्ता, मिलेगी मजबूती रेलवे से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह रेल लाइन मिजोरम के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाएगी। इसकी वजह से राज्य की जीडीपी में हर साल 2-3 फीसदी की बढ़ोतरी संभव है। वर्तमान में 25 हजार करोड़ की अर्थव्यवस्था वाले इस राज्य को इस परियोजना से करीब 500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सालाना आमदनी होगी। बताया जा रहा है कि इस नई लाइन से कोलकाता, अगरतला और दिल्ली तक सीधी ट्रेनों का रास्ता खुल जाएगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। 26 साल में पूरा हुआ सपना, चुनौतियां -रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना का काम 1999 में शुरू हुआ था। लेकिन मिजोरम की दुर्गम भौगोलिक स्थिति, घने जंगलों और भारी बारिश के कारण निर्माण बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। कई बार सर्वे रिपोर्ट बदली गई। इस पर सालभर में केवल 4-5 महीने ही काम हो पाता था। भारी मशीनों को छोटे हिस्सों में बांटकर पहाड़ियों तक पहुंचाना पड़ा और निर्माण सामग्री असम व पश्चिम बंगाल से लाई गई। वर्ष 2008-09 में इसे नेशनल प्रोजेक्ट का दर्जा मिला और वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने इसका शिलान्यास किया। इसके बाद तेजी आई और अब यह परियोजना पूरी हो गई है। परियोजना की खासबात-लागत: 8071 करोड़ रुपए -लंबाई: 51.38 किमी -गति: 100 किमी/घंटा -सुरंगें: 48 (12.8 किमी) -ब्रिज: 142 (55 बड़े, 87 छोटे) -सबसे ऊंचा ब्रिज: 104 मीटर -स्टेशन: हार्तुकी, कौनपुई, मुलखांग, सैरांग 51 किलोमीटर की नई रेल लाइन पर बने 4 स्टेशन : पर्यटकों को असम जाने के लिए सड़क मार्ग के अलावा एयरपोर्ट से कुछ ही दूरी पर बनाए गए रेलवे स्टेशन से ट्रेन मिलनी शुरू हो जाएगी. आइजोल के लेंगपुई एयरपोर्ट से पहले रेलवे स्टेशन की दूरी सिर्फ 25 किलोमीटर होगी, जो कुछ ही देर में आसानी से तय की जा सकती है. एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन का रूट भी एक ही है. इससे पर्यटकों को ट्रेन पकड़ने के लिए इधर उधर भटकने की आवश्यकता भी नहीं होगी. 51 किलोमीटर की नई रेल लाइन पर 4 नए रेलवे स्टेशन बनाए गए हैं. ईटीवी भारत ने इन चारों रेलवे स्टेशनों का विस्टाडोम कोच से दौरा किया. जानने का प्रयास किया कि इस रूट पर बने चारों स्टेशनों की वर्तमान स्थिति क्या है… विस्टाडोम कोच से दिखे मनमोहक नजारे : राजधानी आइजोल से तकरीबन 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है पहला रेलवे स्टेशन. इसका नाम सायरंग रेलवे स्टेशन है. आइजोल से ईटीवी रिपोर्टर सड़क मार्ग से होते हुए पहले सायरंग रेलवे स्टेशन पहुंचे. यहां से 196 नंबर के कुतुबमीनार से भी 42 मीटर ऊंचे ब्रिज के पास से विस्टाडोम कोच से बइरबी रेलवे स्टेशन तक की 51.38 किलोमीटर की दूरी तय की. इस रूट पर अद्भुत नजारे विस्टाडोम से देखने को मिले. ट्रैक की ऊंचाई इतनी है कि रास्ते भर पर्वत, पहाड़ और बादल आपस में गले मिलते हुए नजर आते हैं. हर पहाड़ पर बांस, केले और सुपारी के हरे भरे पेड़ आंखों को खूब सुहाते हैं. नया ट्रैक और रेलवे स्टेशन बनाने में इंजीनियरों की कारीगरी को सैल्यूट करते बनता है. मुआलखांग स्टेशन के पास बन रहे 2 हेलीपैड, आएंगे पीएम मोदी : पहाड़ों को काटकर ट्रैक तैयार किया गया है. जहां ये संभव नहीं था वहां पर सुरंगें बनाकर ट्रेन के लिए मार्ग तैयार किया गया है. सायरंग रेलवे स्टेशन अभी बनाकर तैयार हो रहा है. यहां पर तेजी से काम चल रहा है. यहां से चलने पर पहला रेलवे स्टेशन आता है मुआलखांग रेलवे स्टेशन. ये स्टेशन बनकर तैयार … Read more

क्या असीम मुनीर के परिवार को मिली अमेरिका की नागरिकता? पढ़ें पूरा मामला

न्यूयॉर्क पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों और नेताओं का लगाव अपने ही मुल्क से कम और विदेशों से ज्यादा दिखाई देता है. रिटायरमेंट के बाद ये अक्सर दूसरे देशों में जाकर बस जाते हैं. इनके बच्चे भी ज्यादातर बाहर ही पढ़ते हैं. अब सोशल मीडिया पर एक ऐसा दावा सामने आया है जिसने सबको चौंका दिया है. चर्चा यह है कि पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की पत्नी सईदा इरम ने जून के पहले हफ्ते में अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन किया था. कहा जा रहा है कि 22 अगस्त को सईदा इरम और उनके तीनों बच्चों को अमेरिकी पासपोर्ट मिल गया. यह दावा मेजर जनरल राजू चौहान से जुड़े एक एक्स अकाउंट पर किया गया. अकाउंट पर उन्होंने लिखा- ‘मैं काफी समय से कह रहा हूं कि अपने सभी पूर्ववर्तियों की तरह, वह (मुनीर) भी पाकिस्तान में सब कुछ बेचकर भाग जाएंगा.’ हालांकि न्यूज18 इंडिया इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है. याद दिला दें कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी यह रिपोर्ट सामने आई थी कि मुनीर ने अपनी पत्नी और बच्चों को विदेश भेज दिया था. वैसे, पाकिस्तान में नेताओं, अफसरों और सैन्य अधिकारियों द्वारा पश्चिमी देशों की नागरिकता लेना कोई नई बात नहीं है. दोहरी नागरिकता का खेल पाकिस्तान में दोहरी नागरिकता कानूनी तौर पर मान्य है लेकिन इसकी इजाजत सिर्फ 22 देशों तक सीमित है. इसमें अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और यूरोप के 14 देश शामिल हैं. संविधान मूल रूप से इसकी इजाजत नहीं देता था, लेकिन 1972 में संशोधन के बाद यह रास्ता खुला. दिलचस्प यह है कि दोहरी नागरिकता वाले लोगों को सरकारी नौकरी की अनुमति नहीं है, लेकिन पाकिस्तान में यह नियम अक्सर मजाक बनकर रह जाता है. पेंडोरा पेपर्स ने खोली थी पोल साल 2021 में लीक हुए पेंडोरा पेपर्स ने खुलासा किया था कि पाकिस्तानी सेना के कई वरिष्ठ अफसर और इमरान खान सरकार के मंत्री विदेशों में अरबों की संपत्ति के मालिक हैं. इसी साल जनवरी में आई एक रिपोर्ट में बताया गया कि 22,000 से ज्यादा पाकिस्तानी नौकरशाह दोहरी नागरिकता रखते हैं. कानून के मुताबिक सेना के अफसर दोहरी नागरिकता नहीं ले सकते और सेवा में रहते हुए किसी विदेशी नागरिक से शादी भी नहीं कर सकते. लेकिन असलियत कुछ और ही है. यही वजह है कि 2018 में पाक सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर सरकार को नोटिस भी भेजा था. दिल तो परदेसी है     पाक सेना के पूर्व जनरल रहील शरीफ रिटायर होते ही सऊदी अरब चले गए. पूर्व ISI प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल शुजा पाशा ने रिटायरमेंट के बाद UAE की एक मल्टीनेशनल कंपनी जॉइन कर ली. दोनों मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब तक मांगा था. कई छोटे रैंक के अफसर भी विदेश जाकर बस जाते हैं.     राजनीति की बात करें तो पूर्व पीएम नवाज शरीफ के बेटे हसन और हुसैन ब्रिटिश नागरिक हैं. खुद नवाज और उनकी बेटी मरियम नवाज के पास ब्रिटेन का ILR (Indefinite Leave to Remain) है, जो स्थायी निवास की तरह है. भुट्टो परिवार की बात करें तो बिलावल भुट्टो के पास दोहरी नागरिकता नहीं है, लेकिन उनकी मां बेनजीर भुट्टो और पिता आसिफ अली जरदारी ने पढ़ाई विदेश में की.     पाकिस्तान के पूर्व सैन्य तानाशाह परवेज मुशर्रफ की नागरिकता रद्द कर दी गई थी, लेकिन वे 2023 में अपनी मौत तक दुबई में ही रहे. वहीं इमरान खान की कैबिनेट में कई मंत्री अमेरिका, यूके और कनाडा की नागरिकता रखते थे. सांसद हारून अख्तर और सादिया अब्बासी को तो विदेशी पासपोर्ट की वजह से अपनी सदस्यता तक गंवानी पड़ी थी.  

2040 तक भारत की युद्ध शक्ति में जबरदस्त इजाफा, दुश्मन देशों में खलबली

नई दिल्ली दुनिया इस समय खतरनाक दौर से गुजर रही है. रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है, गाजा में इजरायल और हमास के बीच खूनखराबा थमने का नाम नहीं ले रहा और कुछ ही महीने पहले भारत-पाकिस्तान भी पहलगाम आतंकी हमले और उसके जवाब में ऑपरेशन सिंदूर के बाद जंग के मुहाने पर आ गए थे. ऐसे हालात में भारत के पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं जैसी क्षमता होना सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि मजबूरी भी है. इसी को ध्यान में रखते हुए रक्षा मंत्रालय ने आने वाले 15 सालों के लिए अपनी ‘टेक्नोलॉजी विजन एंड कैपेबिलिटी रोडमैप’ पेश की है. यह रोडमैप साफ बताता है कि 2040 तक भारत की थल सेना, नौसेना और वायुसेना कैसी दिखेगी और किन हथियारों से लैस होगी. यही नहीं सेना 50,000 टैंक-माउंटेड एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें, 700 से ज्यादा रोबोटिक IED-रोधी सिस्टम और 6 लाख तोप के गोले खरीदने जा रही है. ड्रोन और अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (UAS) भी बड़ी संख्या में शामिल होंगे, जिससे जमीनी ऑपरेशन और भी तेज और सटीक बन सकेंगे. नौसेना को न्यूक्लियर वॉरशिप और नया एयरक्राफ्ट कैरियर भारतीय नौसेना (Navy) आने वाले 15 सालों में एक और एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात करेगी. 2022 में INS विक्रांत के शामिल होने के बाद यह दूसरी बड़ी छलांग होगी. नौसेना 10 नेक्स्ट-जनरेशन फ्रिगेट, 7 एडवांस्ड कॉर्वेट्स और 4 लैंडिंग डॉक्स खरीदेगी. सबसे अहम बात न्यूक्लियर पावर से चलने वाले वॉरशिप को मंजूरी मिल गई है. यानी आने वाले वक्त में भारत के जहाज न सिर्फ ताकतवर होंगे, बल्कि लंबे वक्त तक समुद्र में तैनात रह पाएंगे. नौसेना को 100 नए फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट और 150 टॉरपीडो भी मिलेंगे, जिनकी मारक क्षमता 25 किमी से ज्यादा होगी. आसमान में अब होंगे स्टेल्थ ड्रोन और हाई-एल्टीट्यूड सैटेलाइट वायुसेना (Air Force) की ताकत अगले 15 सालों में और भी विस्फोटक होने वाली है. योजना के तहत 75 हाई-एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट, 150 स्टेल्थ बॉम्बर ड्रोन और सैकड़ों प्रिसिजन-गाइडेड हथियार शामिल किए जाएंगे. साथ ही 100 से ज्यादा रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट तैनात होंगे. इससे भारत की स्काई-डिफेंस मल्टी-लेयर हो जाएगी… जमीन से हवा और हवा से हवा तक हर मोर्चे पर दुश्मन को कड़ी टक्कर मिलेगी. लेजर और डायरेक्टेड एनर्जी वेपन- भविष्य के युद्ध का असली हथियार रक्षा मंत्रालय की योजना में सबसे खास बात है… लेजर वेपन और डायरेक्टेड एनर्जी सिस्टम. ये ऐसे हथियार हैं जो पारंपरिक गोलियों या मिसाइलों की बजाय ऊर्जा किरणों से दुश्मन को ध्वस्त करते हैं. चीन पहले ही इन्हें अपनी परेड में दिखा चुका है, और अब भारत भी इन्हें तेजी से विकसित करेगा. इसके अलावा सेना को 500 हाइपरसोनिक मिसाइलें भी मिलेंगी, जिनकी स्पीड इतनी तेज होगी कि दुश्मन का कोई भी डिफेंस सिस्टम उन्हें रोक नहीं पाएगा. साथ ही भारत दुश्मन के हाइपरसोनिक हथियारों को पहचानने और नष्ट करने की तकनीक भी खरीदेगा. साइबर डिफेंस और स्पेस सिक्योरिटी नई योजना में साइबर डिफेंस और सैटेलाइट सिक्योरिटी को भी प्राथमिकता दी गई है. आने वाले समय में सैटेलाइट कम्युनिकेशन को ‘साइबर-हार्डनिंग’ से लैस किया जाएगा और स्पेस-बेस्ड लेजर रेंज फाइंडर लगाए जाएंगे. यानी दुश्मन अगर सैटेलाइट्स को निशाना बनाने की कोशिश करेगा तो भारत के पास उसका तोड़ पहले से होगा. ऑपरेशन सिंदूर के बाद आई चेतावनी यह विजन डॉक्यूमेंट ऐसे समय आया है जब कुछ ही महीने पहले अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था. इसमें 26 नागरिकों की जान गई थी और भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर सटीक वार किए थे. जवाब में पाकिस्तान ने हजारों ड्रोन और रॉकेट भारत की ओर दागे, लेकिन ज्यादातर भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिए. यानी भविष्य की जंग अब सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि हवा, समुद्र, साइबर और स्पेस में भी लड़ी जाएगी. क्यों अहम है यह रोडमैप? रक्षा मंत्रालय का साफ कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और नई टेक्नोलॉजी के बिना आने वाले वक्त में कोई भी युद्ध नहीं जीता जा सकता. यही वजह है कि यह 15 साल की योजना सिर्फ हथियारों की लिस्ट नहीं है, बल्कि भारतीय प्राइवेट इंडस्ट्री और R&D सेक्टर को भी संकेत है कि उन्हें किस दिशा में काम करना होगा. मंत्रालय के मुताबिक, यह रोडमैप देश की निजी कंपनियों और उद्योग जगत को इस काबिल बनाएगा कि वे भविष्य के युद्ध के लिए जरूरी हथियार और तकनीक भारत में ही बना सकें. संक्षेप में कहें तो आने वाले 15 सालों में भारत की सेना टैंक से लेकर लेजर वेपन और हाइपरसोनिक मिसाइलों तक से लैस होगी. दुश्मन चाहे जमीन से हमला करे, आसमान से आए, समुद्र से घुसे या साइबर-स्पेस से चोट करे. भारत की तीनों सेनाएं हर मोर्चे पर तैयार खड़ी होंगी.

ED ने दायर की सहारा चिट फंड फ्रॉड चार्जशीट, जांच में कई प्रमुख लोग फंसे

नई दिल्‍ली. सहारा ग्रुप से जुड़े 1.74 लाख करोड़ रुपये के चिटफंड फ्रॉड मामले में ईडी ने आज कोलकाता की अदालत में जैसे ही चार्जशीट दाखिल की तो दो नाम काफी चर्चा में आ गए. एक नाम है अनिल वैलापरमपिल अब्राहम तो दूसरा नाम है जितेंद्र प्रसाद (जेपी) वर्मा का. दोनों शख्‍स इस पूरे फ्रॉड के जनक हैं. दोनों ही फिलहाल सलाखों के पीछे हैं. इसी साल ईडी ने दोनों को अरेस्‍ट किया है. अनिल और जेपी की क्‍या थी भूमिका? ईडी के मुताबिक अनिल अब्राहम सहारा ग्रुप के चेयरमैन कोर मैनेजमेंट (CCM) ऑफिस में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रहे. यही वो व्‍यक्ति हैं जो टॉप सर्कल में शामिल रहकर बड़े फैसलों और एसेट डील्स करते थे. दूसरी तरफ़ जेपी वर्मा को “लॉन्ग-टाइम एसोसिएट” और प्रॉपर्टी ब्रोकर बताया गया का. ईडी का दावा है कि वो फील्‍ड ऑपरेटर हैं जो सौदों को जमीन पर उतारता था. दोनों को मनी-लॉन्ड्रिंग केस में अरेस्‍ट किया गया है. दोनों ने गुपचुप बेच डाली सहारा की संपत्तियां ईडी का आरोप है कि अनिल अब्राहम ने सहारा की संपत्तियों की बिक्री कॉर्डिनेट करवाई और कई सौदों में बड़े पैमाने पर बिना हिसाब नकद घटक शामिल रहे. बाद में यह कैश फ्लो इधर-उधर कर दिया गया. जेपी वर्मा इन सौदों के एग्जिक्‍यूशन में सक्रिय रीस और नकद आय को रूट कराने में मदद की. ईडी का दावा है कि यह वही पैसा है “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम (POC)” का हिस्‍सा है. तलाशी में मिले डिजिटल/दस्तावेजों के आधार पर एजेंसी का ईडी का कहना है कि सहारा समूह की संपत्तिया एक-एक कर गुपचुप बेची जा रही थीं और इस प्रक्रिया में दोनों की केंद्रीय भूमिका थी. कैसे शुरू हुई ईडी की जांच? दरअसल, जब लोगों को स्‍क्रीम की समय-सीमा खत्‍म होने पर तय राशि नहीं दी गई तो देश भर में सहारा ग्रुप के खिलाफ सैकड़ों एफआईआरों दर्ज की गई. इन एफआईआर में सहारा-लिंक्ड संस्थाओं पर हाई रिटर्न के लालच में जमाकर्ताओं से पैसा लेने, मेच्योरिटी पर भुगतान टालने/जबरन री-डिपॉज़िट कराने जैसे आरोप गए हैं. जिसके बाद ईडी ने मनी लॉन्डिंग की जांच शुरू की. ईडी का कहना है कि HICCSL, SCCSL, SUMCS, SMCSL, SIRECL, SHICL जैसी इकाइयों के जरिए पॉन्जी ढांचा चलाया गया. बही-खाते फेरबदल कर देनदारियाँ दबाई गई, नई रकम से पुरानी देनदारियां टकी गईं. इसी केस में 2025 में अंबी वैली (707 एकड़) और सहारा प्राइम सिटी (1,023 एकड़) की जमीनें अस्थायी तौर पर ईडी ने अटैच की थी.

केंद्र सरकार का दिवाली उपहार, कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में हो सकती है 3% बढ़ोतरी

नई दिल्ली त्‍योहारी सीजन में केंद्र सरकार कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे सकती है. 8वां वेतन आयोग लागू होने से पहले एक बार फिर कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत (DR) में इजाफा किया जा सकता है, जिससे 1.2 करोड़ से ज्‍यादा केंद्रीय कमचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिल सके.  केंद्र सरकार दिवाली से ठीक पहले, अक्टूबर के पहले हफ्ते में महंगाई भत्ते में इजाफा कर सकती है. इस बदलाव के साथ कर्मचारियों के लिए DA 55 फीसदी से बढ़कर 58 फीसदी हो जाएगा, जो जुलाई 2025 से लागू होगा.  फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को तीन महीने का बकाया भी मिलेगा, जिसका भुगतान अक्टूबर के वेतन के साथ किए जाने की उम्मीद है.  2025 में महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी सरकार साल में दो बार महंगाई भत्ते में बदलाव करती है. एक बार जनवरी-जून की अवधि के लिए होली से पहले और दूसरी बार जुलाई-दिसंबर की अवधि के लिए दिवाली से पहले. पिछले साल केंद्र सरकार ने त्‍योहार से करीब 2 हफ्ते पहले 16 अक्टूबर, 2024 को महंगाई भत्ते में इजाफे का ऐलान किया थी. इस साल दिवाली 20-21 अक्टूबर को पड़ रही है.  DA का कैलकुलेशन कैसे किया जाता है? सातवें वेतन आयोग के तहत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर महंगाई भत्ते को तय किया जाता है. यह फॉर्मूला CPI-IW के 12 महीने के औसत आंकड़ों पर आधारित है. जुलाई 2024 से जून 2025 तक, औसत CPI-IW 143.6 रहा, जो 58% की महंगाई भत्ते की दर के बराबर है. इसका मतलब है कि जुलाई-दिसंबर 2025 सर्किल के दौरान केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता तीन प्रतिशत बढ़ जाएगा.  बढ़ जाएगी पेंशन और सैलरी अगर किसी कर्मचारी का बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है, तो 55% की पुरानी DA पर भत्ता 27,500 रुपये होगा. वहीं बढ़ोतरी के बाद 58% के नए डीए के साथ, यह बढ़कर 29,000 रुपये हो जाएगा यानी अब कर्मचारी हर महीने 1,500 रुपये अतिरिक्त घर ले जाएगा. इसी तरह, 30000 रुपये की बेसिक पेंशन वाले पेंशनभोगी के लिए, DR 16,500 रुपये (55%) से बढ़कर 17,400 रुपये (58%) हो जाएगा, जिससे उन्हें हर महीने 900 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे. 7वें वेतन आयोग के तहत अंतिम बढ़ोतरी यह संशोधन इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि यह सातवें वेतन आयोग के तहत अंतिम डीए बढ़ोतरी होगी, जिसकी अवधि 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हो रही है. सरकार जनवरी 2025 में आठवें वेतन आयोग की घोषणा पहले ही कर चुकी है, लेकिन इसके संदर्भ की शर्तें (टीओआर), अध्यक्ष और सदस्यों को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है. 

बारामूला के सांसद इंजीनियर रशीद तिहाड़ से करेंगे उपराष्ट्रपति चुनाव में वोट

नई दिल्ली आगामी नौ सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान करने की पटियाला हाउस की सत्र अदालत ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर के बारामूला से लोकसभा सांसद इंजीनियर रशीद को अनुमति दे दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदर जीत ने रशीद की मतदान की अनुमति मांगने वाली याचिका स्वीकार कर ली। इससे पहले अदालत ने रशीद को संसद के मानसून सत्र में भाग लेने के लिए 24 जुलाई से चार अगस्त के बीच हिरासत में पैरोल दी थी। अदालत ने अनुमति देते हुए रशीद की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता विख्यात ओबेराय से कहा कि उनके मुवक्किल को हाई कोर्ट के पूर्व आदेश के अधीन एक शपथ पत्र देना होगा कि वह अपना यात्रा खर्च का भुगतान स्वयं करेंगें। रशीद ने कस्टडी पैरोल पर संसद भवन में भाग लेने के लिए यात्रा खर्च के रूप में भुगतान करने संबंधी जेल अधिकारियों के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। रशीद को वर्ष 2017 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दर्ज किए गए में गिरफ्तार किया गया था और वह 2019 से तिहाड़ जेल में बंद है। 2024 के लोकसभा चुनावों में रशीद ने उमर अब्दुल्ला को हराया था। रशीद पर जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकी समूहों को धन मुहैया कराने का आरोप है। एनआईए की प्राथमिकी के अनुसार सह-आरोपित जहूर वटाली से पूछताछ के दौरान रशीद का नाम सामने आया था। अक्टूबर 2019 में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद एनआइए की विशेष अदालत ने मार्च 2022 में रशीद और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 121 (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना) और 124ए (देशद्रोह) के तहत और यूएपीए के तहत आतंकी फंडिंग से संबंधित अपराधों के लिए आरोप तय किए गए थे।  

मौसम का कहर: 7 सितंबर को गुजरात में भारी बारिश की संभावना, मछुआरों के लिए खतरे का संकेत

अहमदाबाद गुजरात में अगले सात दिनों तक मानसून की तेज सक्रियता का नया दौर देखने को मिल सकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने राज्य में भारी से बहुत भारी बारिश के लिए अलर्ट जारी किए हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने गुजरात में अगले सात दिनों तक लगातार बारिश की संभावना जताई है। विभाग ने बताया कि अगले 48 घंटों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। मौसम वैज्ञानिकों ने शनिवार को पूरे गुजरात में वर्षा का अनुमान जताया है। मौसम को देखते हुए कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किए गए हैं। आईएमडी ने बताया कि गुजरात में 6 और 7 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों ने शनिवार को 30 सेमी या इससे अधिक बारिश की संभावना जताई है। बनासकांठा, साबरकांठा, मेहसाणा, अरावली, सुरेंद्रनगर, राजकोट, वलसाड, दमन और दादरा नगर हवेली में रेड अलर्ट घोषित किया गया है। वहीं द्वारका, जामनगर, पोरबंदर, जूनागढ़, बोटाद, अहमदाबाद, गांधीनगर, खेड़ा, महिसागर, पाटन, नवसारी और डांग में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। अन्य जिलों को येलो अलर्ट पर रखा गया है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। इससे पहले, मौसम विभाग ने बताया था कि शनिवार को भी बारिश का दौर जारी रहेगा। भरूच, सूरत, नवसारी, वलसाड, दमन, दादरा और नगर हवेली, भावनगर और बोटाद के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। उत्तर, मध्य और सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्रों के कई अन्य जिलों में येलो अलर्ट के तहत भारी बारिश होगी। वहीं, रविवार को लेकर विभाग ने बताया कि बनासकांठा, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, नर्मदा, भरूच, नवसारी, वलसाड, तापी, डांग और सौराष्ट्र-कच्छ के कुछ हिस्सों जैसे राजकोट, जामनगर, जूनागढ़, भावनगर, कच्छ और द्वारका सहित लगभग पूरे राज्य में व्यापक बारिश होने की संभावना है। आईएमडी ने बताया कि मानसून की कम दबाव रेखा वर्तमान में गंगानगर से उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है। बंगाल की खाड़ी और उससे सटे म्यांमार तट पर एक ऊपरी हवा की चक्रवाती गतिविधि बनी हुई है।

गुजरात HC का बड़ा फैसला: महिला को 27 साल बाद मिली राहत, जानिए कारण

राजकोट 27 साल तक चली सुनवाई के बाद, एक ट्रायल कोर्ट ने बच्चे की हत्या के मामले में राजकोट की एक महिला को उम्रकैद की सजा सुनाई, लेकिन गुजरात हाईकोर्ट ने ट्रायल की कार्यवाही को जल्दबाजी करार देते हुए सजा को रद्द कर दिया। इस मामले को कोर्ट तक ले जाने में दो साल लगे थे। 1996 में अपने पड़ोसी के बच्चे की हत्या की आरोपी महिला पर आरोप तय करने में ट्रायल कोर्ट को 14 साल लगे और फिर ट्रायल चलाकर उम्रकैद की सजा सुनाने में 13 साल और लग गए। रिपोर्ट के अनुसार, ताजा सुनवाई का आदेश देते हुए जस्टिस इलेश वोरा और जस्टिस पी.एम. रावल की डिविजन बेंच ने इस हफ्ते साइन किए हुए आदेश में कहा, "हमारे विचार से, ट्रायल कोर्ट ने पुराने मामलों का निपटारा करने के इरादे से, एक छोटा रास्ता अपनाया और सेशंस ट्रायल की प्रक्रिया का पालन किए बिना जल्दबाजी में ट्रायल का निपटारा कर दिया।" यह मामला अरुणा उर्फ अनीता देवमुरारी से जुड़ा है, जिस पर फरवरी 1996 में राजकोट जिले के धोराजी शहर में एक पड़ोसी के 7 साल के बेटे की हत्या का आरोप लगा था। वह 1998 तक जेल में रही, जब हाईकोर्ट ने उसे नियमित जमानत दी। तब से वह फरार थी। जब हाईकोर्ट ने अदालतों को लंबे समय से लंबित मामलों का निपटारा करने का निर्देश दिया, तो धोराजी की एक ट्रायल कोर्ट ने 2024 में देवमुरारी के खिलाफ कार्यवाही शुरू की। चूंकि पुलिस उसे कोर्ट में पेश नहीं कर सकी, इसलिए उसकी अनुपस्थिति में ही मुकदमा चला। मुख्य रूप से उसके पति की गवाही के आधार पर कि उसने बच्चे की हत्या की बात कबूल की थी, साथ ही 16 गवाहों के बयानों के आधार पर, कोर्ट ने उसे दोषी पाया और जून, 2025 में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के कुछ ही घंटों के भीतर, पुलिस ने उसे वडोदरा से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उसने हाईकोर्ट में सजा को चुनौती देते हुए कहा कि उसे अपना बचाव करने का कभी मौका नहीं दिया गया। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि सजा उचित थी, क्योंकि आरोपी इन सभी सालों से फरार थी। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद, जस्टिस वोरा और जस्टिस रावल की एक बेंच ने बुधवार को धोराजी की सेशंस कोर्ट को देवमुरारी के खिलाफ फिर से सुनवाई करने और छह महीने के भीतर इसे पूरा करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 299 की ट्रायल कोर्ट की व्याख्या में गलती पाई। इसी के तहत कोर्ट ने 17 गवाहों की जाँच की और आरोपी की अनुपस्थिति में फ़ैसला सुनाया था। इसके अलावा, हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने CrPC की धारा 313 के चरण को नज़रअंदाज़ कर दिया, जो गवाहों से जिरह पूरी होने के बाद आरोपी को सुनवाई का मौका देती है। हाईकोर्ट ने कहा, "ऐसी परिस्थितियों में, कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए मुकदमा नहीं चलाया गया, और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत की पूरी तरह से अवहेलना करते हुए मुकदमे का समापन किया गया।" कोर्ट ने कहा कि इस तरह की लापरवाही आरोपी के अधिकार के लिए गंभीर पूर्वाग्रह का कारण बनी, क्योंकि सजा अग्राह्य (inadmissible) सबूतों के आधार पर दर्ज की गई थी और वह भी आरोपी को बचाव का मौका दिए बिना।" इन प्रक्रियात्मक चूकों (procedural lapses) के लिए, हाईकोर्ट ने कहा कि इसे वास्तविक सुनवाई नहीं कहा जा सकता और इसलिए इन असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए मामले को फिर से सुनवाई (de novo or anew) के लिए ट्रायल कोर्ट में वापस भेज दिया गया है, ताकि देवमुरारी को उचित मौका दिया जा सके। हाईकोर्ट ने पुलिस की भी आलोचना की कि वह इतने लंबे समय तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई और सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद उसे ढूंढ लिया। बेंच ने कहा, "यह ध्यान देना जरूरी है कि वारंट को थोड़े ही समय में पूरा कर लिया गया। यह दिखाता है कि धोराजी पुलिस, जो 1998 से 2025 तक वारंट को पूरा नहीं कर पाई थी, उसने सजा के बाद गिरफ्तारी वारंट को पूरा कर लिया।" बेंच ने आगे कहा, "तब, अभियोजन पक्ष के साथ-साथ कार्रवाई एजेंसी की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठता है।"  

ट्रंप के ताजा बयान पर बड़ा खुलासा, पूर्व राजनयिक बोले – ज्यादा विश्वसनीय नहीं हैं

वॉशिंगटन पूर्व राजनयिक टी.पी. श्रीनिवासन ने शनिवार को भारत-अमेरिका संबंधों के ताजा घटनाक्रम पर टिप्पणी की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति रुख में संभावित बदलाव का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि ताजा खबरें अच्छी हैं। राष्ट्रपति ट्रंप का नजरिया बदलता दिख रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के बारे में कुछ बेहद सकारात्मक बयान दिए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि इन मुद्दों पर सहमति बन सकती है। बेशक, ट्रंप इस मामले में ज्यादा विश्वसनीय नहीं हैं क्योंकि उनके बयान अलग-अलग होते हैं। जब वह नरम रुख अपनाते हैं, तब भी उनके सलाहकार सख्त रुख अपनाते हैं। उन्होंने आगे कहा, "तो, यह अभी भी बहुत अनिश्चित है, लेकिन मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि हम अमेरिका को छोड़कर चीन और रूस की ओर नहीं जा रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में यही धारणा बनी थी…आज, कुछ सुलह की उम्मीद दिख रही है। यह क्या होगा, हमें नहीं पता।" अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच बेहद खास रिश्ते की फिर से पुष्टि की। भारत-अमेरिका संबंधों को "बेहद खास रिश्ता" बताते हुए, उन्होंने कहा कि वह और प्रधानमंत्री मोदी हमेशा दोस्त रहेंगे और इस बात पर ज़ोर दिया कि चिंता की कोई बात नहीं है। हालांकि, ट्रंप ने इस बात पर नाखुशी जताई कि "वह (प्रधानमंत्री मोदी) इस समय क्या कर रहे हैं"। एएनआई द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या वह भारत के साथ संबंधों को फिर से सुधारने के लिए तैयार हैं, ट्रंप ने कहा, "मैं हमेशा ऐसा करूंगा। मैं हमेशा (प्रधानमंत्री) मोदी का दोस्त रहूंगा। वह एक महान प्रधानमंत्री हैं। मैं हमेशा दोस्त रहूंगा, लेकिन मुझे इस समय वह जो कर रहे हैं, वह पसंद नहीं है। लेकिन भारत और अमेरिका के बीच एक बेहद खास रिश्ता है। चिंता की कोई बात नहीं है। बस कभी-कभी हमारे बीच कुछ पल ऐसे आते हैं।"