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टैक्स विवाद के बाद ब्रिटेन की उप-प्रधानमंत्री एंजेला रेनर ने छोड़ा पद

लंदन  ब्रिटेन की उप-प्रधानमंत्री एंजेला रेनर ने संपत्ति कर यानी टैक्स से जुड़ी गलती स्वीकार करने के बाद शुक्रवार को अपना इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की लेबर सरकार के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है। रेनर ने कहा कि उन्होंने एक स्वतंत्र जाँच की रिपोर्ट मिलने के बाद इस्तीफा देने का फैसला किया है। इस रिपोर्ट में यह पाया गया कि उन्होंने कानूनी सलाह की पूरी सावधानी नहीं बरती और मंत्रिस्तरीय संहिता का उल्लंघन किया। क्या है मामला एंजेला रेनर पर यह आरोप था कि उन्होंने संपत्ति कर का भुगतान सही तरीके से नहीं किया। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने कई बार सफाई दी थी, लेकिन स्वतंत्र जांच में उनके खिलाफ पाया गया कि उन्होंने प्राप्त कानूनी सलाह को ठीक से नहीं समझा और उसका पालन नहीं किया। इस कारण वे मंत्रिस्तरीय संहिता के नियमों के उल्लंघन में शामिल मानी गईं। लेबर सरकार के लिए बड़ा झटका रेनर का इस्तीफा ब्रिटेन की लेबर सरकार के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। वे सरकार की दूसरी सबसे बड़ी नेता थीं और उनके इस्तीफे से सरकार की छवि पर असर पड़ा है। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया है और कहा है कि वे स्थिति को संभालने के लिए पूरी कोशिश करेंगे। 

अमेरिकी व्यापार में राहत: ट्रंप ने टैरिफ छूट के लिए आदेश जारी किया

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें निकेल, सोना समेत कई धातुओं के साथ ही साथ फार्मास्युटिकल और रसायनों के निर्यात पर व्यापारिक साझेदारों को टैरिफ में छूट देने की बात कही गई है। इस सूची में शून्य आयात शुल्क के लिए 45 से अधिक श्रेणियों की पहचान की गई है, जिन पर टैरिफ में छूट देने का फैसला लिया गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ सामानों पर दी छूट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल को लागू किए गए अपने रेसिप्रोकल टैरिफ में बदलाव किया है। व्हाइट हाउस ने बताया कि नए आदेश में एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड, रेजिन और सिलिकॉन समेत कई उत्पादों को छूट देने का फैसला लिया गया है। ट्रंप के इस आदेश के बाद अमेरिका और अन्य देशों के बीच विशिष्ट व्यापार समझौतों के क्रियान्वयन में भी तेजी आ सकती है। इससे अमेरिका के लिए विमान के पुर्जों, जेनेरिक दवाओं और कुछ ऐसे उत्पादों पर टैरिफ हटाना आसान हो जाएगा, जिन्हें घरेलू स्तर पर उगाया, खनन या प्राकृतिक रूप से उत्पादित नहीं किया जा सकता। इसमें कुछ खास मसाले और कॉफी शामिल हैं। अधिकारियों के सिफारिशों के बाद फैसला राष्ट्रपति के आदेश में यह कहा गया है कि ये बदलाव अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों की सलाह और सिफारिशों के बाद किए गए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि ये बदलाव राष्ट्रीय आपातकाल से निपटने के लिए जरूरी और उचित हैं। इस बदलाव के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि और वाणिज्य विभाग को अन्य देशों के साथ समझौतों को लागू करने के लिए कार्रवाई करने का अधिकार होगा, उदाहरण के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ किए गए समझौते। इससे ट्रंप को अपने कार्यकारी आदेशों के माध्यम से इन बदलावों को लागू करने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। दरअसल, टैरिफ और कुछ समझौते कई महीनों के दौरान आक्रामक तरीके से तैयार किए गए थे। इनमें कई खामियां थीं, जिनका असर बाजार पर पड़ रहा था। ऐसे में अमेरिका में वे वस्तुएं महंगी हो सकती थीं जिन्हें अमेरिका में उगाया या उत्पादित नहीं किया जा सकता। जिन वस्तुओं को टैरिफ से छूट दी जा रही है, उनमें एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा उपकरण, स्यूडोएफेड्रिन, एंटीबायोटिक्स और अन्य औषधियां शामिल हैं। इसके साथ ही सिलिकॉन उत्पाद, रेजिन और एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड भी शामिल हैं।  

तिहाड़ जेल में सुरक्षा पर चर्चा, ब्रिटिश एजेंसी ने किया भगोड़ों को लाने का प्लान

नई दिल्ली भारत से भागे आर्थिक अपराधियों और फरारों को वापस लाने की कोशिशों को तेज करते हुए ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) की टीम ने हाल ही में तिहाड़ जेल का दौरा किया. जानकारी के मुताबिक, यह दौरा जुलाई में हुआ था, जिसमें ब्रिटेन से आए पांच मेंबर्स शामिल थे.इस दौरे का मकसद ब्रिटेन की अदालतों को यह दिखाना था कि भारत में प्रत्यर्पित किए गए आरोपियों को तिहाड़ जेल में सुरक्षित और बेहतर माहौल मिलेगा. दरअसल, हाल ही में ब्रिटेन की अदालतों ने तिहाड़ की स्थिति को लेकर कई मामलों में भारत की प्रत्यर्पण याचिकाएं खारिज कर दी थीं. इसी वजह से भारत सरकार ने ब्रिटेन को आश्वासन दिया कि किसी भी आरोपी के साथ जेल में न तो मारपीट होगी और न ही गैरकानूनी पूछताछ की जाएगी. जेल की सुविधाओं का निरीक्षण CPS की टीम ने तिहाड़ की हाई-सिक्योरिटी वार्ड का निरीक्षण किया और वहां मौजूद कैदियों से बातचीत भी की. अधिकारियों ने टीम को भरोसा दिलाया कि अगर जरूरत पड़ी तो जेल परिसर में एक खास "एन्क्लेव" बनाया जाएगा, जहां विजय माल्या, नीरव मोदी जैसे हाई-प्रोफाइल आरोपी सुरक्षित रह सकें. प्रत्यर्पण मामलों में अहम कदम भारत के अभी तक 178 प्रत्यर्पण अनुरोध विदेशों में लंबित हैं, जिनमें से करीब 20 अकेले ब्रिटेन में फंसे हैं. इनमें विजय माल्या, नीरव मोदी, हथियार कारोबारी संजय भंडारी और कई खालिस्तानी नेताओं के नाम शामिल हैं. भारत सरकार इन मामलों को लेकर लगातार ब्रिटेन के साथ कोऑर्डिनेशन में है. भारत ने दिया भरोसा इस पूरे प्रोसेस का मुख्य उद्देश्य ब्रिटेन की अदालतों को यह विश्वास दिलाना है कि भारत प्रत्यर्पित आरोपियों को मानवाधिकारों के अनुरूप सुविधाएं देगा. सरकार ने साफ कहा है कि जेल में कैदियों के साथ किसी तरह का गैरकानूनी व्यवहार नहीं किया जाएगा. विजय माल्या और नीरव मोदी पर क्या हैं आरोप? विजय माल्या और नीरव मोदी पर भारत में धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और आपराधिक साजिश के आरोप हैं. दोनों बैंक लोन डिफॉल्ट मामलों से जुड़े हैं और आरोप सामने आने से पहले ही ब्रिटेन भाग गए. भारतीय अदालतों ने इन्हें "फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स" घोषित किया. विजय माल्या का मामला किंगफिशर एयरलाइंस के पतन से जुड़ा है, जिसने भारतीय बैंकों से लिए लगभग 9,000 करोड़ रुपये का लोन नहीं चुकाया. जांच में आरोप लगे कि उन्होंने लोन की रकम दूसरी जगह खर्च की और वसूले गए सर्विस टैक्स का भी भुगतान नहीं किया. 2020 में ब्रिटेन की अदालत ने उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी, लेकिन वह अब तक एक गोपनीय कानूनी प्रक्रिया के चलते भारत नहीं लाए जा सके हैं. नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले का मुख्य आरोपी है, जिसमें फर्जी LoU के ज़रिए लगभग 14,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. 2019 में लंदन में गिरफ्तारी के बाद 2021 में ब्रिटेन की अदालत ने उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी. हालांकि उसकी अपीलें लगातार खारिज होती रही हैं और मई 2024 तक वह ब्रिटेन की जेल में ही बंद है.

मुंबई में दोस्ती से बदले तक: फिरोज के नाम से भेजे गए मैसेज का राज FIR में सामने आया

मुंबई  मुंबई ट्रैफिक पुलिस के व्हाट्सऐप नंबर पर आए बम धमकी संदेश के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। उत्तर प्रदेश के नोएडा से 51 साल के अश्विनी कुमार को गिरफ्तार किया गया है, जिसने खुद को आतंकी बताकर मुंबई को दहलाने की धमकी दी थी। आरोपी मूल रूप से बिहार की राजधानी पटना का रहने वाला है और पिछले पांच साल से नोएडा में रह रहा था। पेशे से वह ज्योतिषी है। पुलिस ने उसके पास से 7 मोबाइल फोन, 3 सिम कार्ड, एक एक्सटर्नल स्लॉट, 6 मेमोरी कार्ड होल्डर, 2 डिजिटल कार्ड और 4 सिम कार्ड होल्डर बरामद किए हैं। आरोपी को मुंबई लाया जा रहा है। गुरुवार देर रात ट्रैफिक पुलिस के नंबर पर मैसेज आया कि मुंबई में 34 ह्यूमन बम लगाए गए हैं और 14 पाकिस्तानी आतंकी भारत में घुस चुके हैं। संदेश में यह भी लिखा था कि 400 किलो आरडीएक्स का इस्तेमाल किया जाएगा। धमकी ऐसे समय आई जब गणेश विसर्जन से पहले पूरे शहर में भीड़भाड़ रहती है। इसके बाद पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर दी और शहर को हाई अलर्ट पर रखा। दोस्ती से दुश्मनी बनी वजह जांच में पता चला कि अश्विनी कुमार ने धमकी भरे संदेश अपने दोस्त फिरोज के नाम से भेजे। दोनों में पैसों के लेन-देन को लेकर झगड़ा हुआ था। पुलिस के मुताबिक, फिरोज ने पटना के फुलवारी शरीफ थाने में अश्विनी के खिलाफ केस दर्ज कराया था, जिसके चलते अश्विनी को तीन महीने जेल में रहना पड़ा। इसी रंजिश में उसने फिरोज का नाम इस्तेमाल कर धमकी भेजी, ताकि पुलिस उसे गिरफ्तार कर ले। मुंबई पुलिस ने कहा, “आरोपी ने खुद को आतंकी संगठन ‘लश्कर-ए-जिहादी’ का सदस्य बताकर धमकी दी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसका मकसद आतंक फैलाना नहीं बल्कि अपने दोस्त को फंसाना था।”  

एस जयशंकर बोले: अमेरिका के साथ मजबूत रिश्तों को प्राथमिकता, मोदी-ट्रंप के संबंध हैं शानदार

नई दिल्ली  विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को भारत-अमेरिका संबंधों की सराहना की और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के साथ साझेदारी को अत्यधिक महत्व देते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब आज ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी के साथ अपनी दोस्ती की तारीफ की थी, लेकिन कुछ मुद्दों पर असहमति भी जताई थी।जयशंकर ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के साथ हमारी साझेदारी को अत्यधिक महत्व देते हैं। जहां तक राष्ट्रपति ट्रंप की बात है, पीएम मोदी के उनके साथ हमेशा बहुत अच्छे व्यक्तिगत संबंध रहे हैं। फिलहाल मैं इतना ही कह सकता हूं कि हम अमेरिका के साथ निरंतर संवाद बनाए हुए हैं।” वाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा था, “मैं हमेशा प्रधानमंत्री मोदी का दोस्त रहूंगा। वे एक महान प्रधानमंत्री हैं। लेकिन मुझे इस वक्त उनकी कुछ नीतियां पसंद नहीं हैं। हालांकि भारत और अमेरिका के बीच बहुत विशेष रिश्ते हैं। चिंता की कोई बात नहीं है, कभी-कभी ऐसे पल आ जाते हैं।” प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा, “मैं राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और हमारे रिश्तों के सकारात्मक आकलन की गहराई से सराहना करता हूं और उसे पूरी तरह से प्रत्युत्तर देता हूं। भारत और अमेरिका के बीच एक बहुत ही सकारात्मक और भविष्य उन्मुख व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है।” टैरिफ पर तनातनी ये बयान ऐसे समय आए हैं जब दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर तनाव गहराया हुआ है। अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है, जिसमें 25% पारस्परिक टैरिफ और 25% अतिरिक्त शुल्क रूस से तेल खरीदने पर शामिल है। भारत ने इसे अनुचित और अव्यवहारिक बताते हुए कहा है, “किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।”  

32 साल का पहला झटका: अमेरिका की रूस नीति फेल, विदेश से अंडे खरीदने पर विवश

वाशिंगटन  रूस की अर्थव्यवस्था को पंगु बनाने की कोशिश में जुटा अमेरिका अब खुद ही उसके साथ व्यापार करने के लिए मजबूर है। दरअसल अमेरिका ने इसी साल जुलाई में रूस से पहली बार मुर्गी के अंडों की खेप आयात की है। यह जानकारी रूस की सरकारी समाचार एजेंसी RIA नोवोस्ती ने अमेरिकी सांख्यिकीय सेवा के आंकड़ों का हवाला देते हुए दी। बताया जा रहा है कि यह आयात 32 वर्षों में पहली बार हुआ है। आखिरी बार अमेरिका ने 1992 में रूस से अंडे खरीदे थे। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने जुलाई महीने में रूस से ताजा मुर्गी के अंडों पर 4.55 लाख डॉलर (करीब 3.8 करोड़ रुपये) खर्च किए। यह कदम उस समय उठाया गया जब देश में बर्ड फ्लू महामारी के चलते पोल्ट्री उद्योग को भारी नुकसान हुआ और अंडों की आपूर्ति संकट पैदा हो गया। बर्ड फ्लू से संकट और महंगाई साल 2025 की शुरुआत में फैले बर्ड फ्लू प्रकोप से लाखों मुर्गियां प्रभावित हुईं। जनवरी में सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हालात इतने गंभीर थे कि कई स्टोर्स को अंडों पर खरीद की सीमा लगानी पड़ी। फरवरी तक एक दर्जन अंडों की कीमत 7 डॉलर तक पहुंच गई। हालांकि पिछले महीनों में दामों में कुछ कमी आई है, लेकिन जुलाई 2025 में अंडे पिछले साल की तुलना में अब भी 16.4% महंगे रहे। वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने इस संकट के लिए पूर्व बाइडेन प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने पद छोड़ने से पहले करीब 80 लाख मुर्गियों की अकारण कुरबानी दी, जिससे स्थिति और बिगड़ी। पाबंदियों के बीच व्यापार फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने मॉस्को पर कड़े प्रतिबंध लगाए। अमेरिका ने रूस की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने, उसकी सैन्य क्षमताओं को सीमित करने और उसे वित्तीय व कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने के लिए ये व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें रूसी सेंट्रल बैंक की अरबों डॉलर की संपत्ति को फ्रीज करना, प्रमुख रूसी बैंकों को स्विफ्ट सिस्टम से बाहर करना, रूस के ऊर्जा क्षेत्र में व्यापार और निवेश पर भारी प्रतिबंध लगाना, और प्रमुख रूसी अधिकारियों पर प्रतिबंध शामिल हैं। इन पाबंदियों के बावजूद, 2024 में अमेरिका ने रूस से करीब 3 अरब डॉलर के सामान आयात किए। इनमें उर्वरक (2025 की पहली छमाही में 927 मिलियन डॉलर), यूरेनियम व प्लूटोनियम (755 मिलियन डॉलर) और पैलेडियम जैसे कीमती धातु शामिल हैं। पिछले तीन वर्षों में अमेरिका-रूस व्यापार लगभग 90% तक गिर चुका है। लेकिन अगस्त 2025 में अलास्का में हुए ट्रंप-पुतिन शिखर सम्मेलन के बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की संभावना के संकेत मिले।  

अफगानिस्तान :शरिया कानून की पाबंदी बनी संकट, मलबे में फंसी महिलाओं को नहीं बचा पा रहे राहतकर्मी

 काबुल अफगानिस्तान में भूकंप के बाद हालात बदहाल हैं। हजारों लोगों की जान जा चुकी है। इसमें सबसे ज्यादा मुसीबत महिलाओं के लिए हो रही है। असल में अफगानिस्तान में कानून है कि गैर पुरुष महिलाओं को छू नहीं सकते। इसके चलते बचाव कार्य के दौरान महिलाओं को मलबे में ही छोड़ दिया जा रहा है। तालिबान शासन में जेंडर रूल महिलाओं की जान के लिए मुसीबत बन गया है। बता दें कि अफगानिस्तान भूकंप के चलते करीब 2200 लोग मारे जा चुके हैं। हर तरफ मलबा फैला हुआ है और लोग जिंदगी के लिए जूझ रहे हैं। नहीं हैं महिला बचावकर्मी अफगानिस्तान में महिला बचावकर्मियों की कमी है। इसके चलते महिला पीड़ितों के सामने खासी मुसीबत हो गई है। जो महिलाएं मलबे में फंसी हुई हैं, उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। वहीं, जिन महिलाओं की मौत हो गई है, उन्हें भी कपड़ों से पकड़कर खींचा जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भूकंप पीड़ितों में से एक बीबी आयशा हैं। उनका गांव कुनार प्रांत में हैं। आयशा ने कहा कि बचावकर्मी हमें जुटाकर किसी कोने में छोड़ देते हैं। इसके बाद हमें भुला दिया जाता है। महिलाओं की मदद करना तो दूर, कोई उन्हें पूछ तक नहीं रहा। जैसे महिलाएं अदृश्य हैं तहजीबुल्ला महजेब वॉलंटियर टीम के सदस्य हैं। बचाव कार्य को लेकर उन्होंने कहा कि जैसे महिलाएं अदृश्य हैं। बचाव कार्य करने वाली टीम में लोग महिलाओं को बचा ही नहीं रहे हैं। सबसे पहले पुरुषों और बच्चों को बचाया जा रहा है। वहीं, महिलाएं एक तरफ बैठी रहती हैं और अपने लिए मदद का इंतजार करती हैं। तहजीबुल्ला ने कहा कि पुरुष रिश्तेदारों के नहीं होने के चलते अजनबी बचावकर्मी उन्हें कपड़ों से पकड़कर खींच रहे हैं, ताकि स्किन टच न हो। महिलाओं की हालत है खराब गौरतलब है कि अफगानिस्तान में तालिबान शासन के दौरान महिलाएं मूल अधिकारों तक से वंचित हैं। तालिबान ने दूसरी बार जब अफगानिस्तान में शासन शुरू किया तो महिलाओं को ज्यादा अधिकार देने की बात कही थी। हालांकि अभी तक वह अपनी इस बात पर खरा नहीं उतरा है। यहां पर छठवीं क्लास के बाद लड़कियां स्कूल नहीं जा सकती हैं। वहीं, पुरुष साथी के बिना बहुत दूर तक की यात्रा करने की इजाजत भी महिलाओं को नहीं है। बहुत सारी नौकरियों में भी उन्हें मौका नहीं मिल रहा है।

पीएम मोदी का बड़ा फैसला, अब नहीं जाएंगे अमेरिका की यूनाइटेड नेशंस मीटिंग में

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल के अंत में होने जा रही संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे. उनकी जगह विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिका जाएंगे. बैठक के वक्ताओं की संशोधित सूची जारी होने के बाद यह जानकारी सामने आई है. इस फैसले से भारत ने राष्ट्रपति ट्रंप को एक और बड़ा मैसेज देने की कोशिश की है. पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की सालाना बैठक से किनारा कर लिया है. संयुक्त राष्ट्र महासभा का 80वां सत्र नौ सितंबर से शुरू होगा. इसके बाद उच्चस्तरीय बैठक 23 से 29 सितंबर तक चलेगी. इस बैठक में पहला वक्ता ब्राजील होगा जबकि इसके बाद अमेरिका महासभा को संबोधित करेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 23 सितंबर को यूएनजीए पोडियम से वैश्विक नेताओं को संबोधित करेंगे. राष्ट्रपति के तौर पर उनके दूसरे कार्यकाल में वह पहली बार संयुक्त राष्ट्र सत्र को संबोधित करेंगे.  भारत की ओर से विदेश मंत्री जयशंकर 27 सितंबर को सत्र को संबोधित करेंगे. लेकिन इससे पहले जुलाई में जारी की गई वक्ताओं की सूची में पीएम मोदी का नाम शामिल था. उस लिस्ट के मुताबिक पीएम मोदी 26 सितंबर को यूएनजीए को संबोधित करने वाले थे. हालांकि, वक्ताओं की इस सूची में आगे भी संशोधन हो सकता है.  बता दें कि चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश और इजरायल के राष्ट्राध्यक्ष 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे. यह सत्र 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ के मौके पर एक बैठक के साथ शुरू होगा. संयुक्त राष्ट्र की ओर से बताया गया है कि यह बैठक बीजिंग में 1995 के ऐतिहासिक सम्मेलन के बाद से हुई प्रगति पर भी विचार करेगी. इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस 24 सितंबर को जलवायु शिखर सम्मेलन आयोजित करेंगे, जो वैश्विक नेताओं के लिए अपनी नई राष्ट्रीय जलवायु कार्य योजनाओं को पेश करने का मंच होगा. बता दें कि यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है, जब दुनिया के कई मुल्क ट्रंप के टैरिफ वॉर, रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट में तनाव जैसे हालात से जूझ रही है.

खालिस्तानी संगठनों को फंडिंग पर खुलासा, कनाडा की रिपोर्ट से हुआ बड़ा पर्दाफाश

ओटावा खालिस्तानी आतंकियों की फंडिंग को लेकर कनाडा सरकार की अपनी ही नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। इसमें कहा गया है कि खालिस्तानी हिंसक उग्रवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन समेत कई आतंकी संगठनों को कनाडा से आर्थिक सहायता मिल रही है। यह जानकारी हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट “2025 असेसमेंट ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एंड टेररिस्ट फाइनेंसिंग रिस्क्स इन कनाडा” में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा में आपराधिक संहिता के अंतर्गत सूचीबद्ध कुछ आतंकवादी संगठन जैसे हमास, हिजबुल्लाह और खालिस्तानी चरमपंथी संगठन, राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसक उग्रवाद (PMVE) श्रेणी में आते हैं और इन्हें कनाडा से वित्तीय सहयोग प्राप्त होता रहा है। खालिस्तानी नेटवर्क और फंडिंग के तरीके रिपोर्ट में कहा गया है कि खालिस्तानी संगठन भारत के पंजाब में स्वतंत्र राज्य बनाने के लिए हिंसक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन्हें कनाडा समेत विभिन्न देशों में मौजूद समर्थकों से धन जुटाने में मदद मिलती है। रिपोर्ट ने यह भी स्वीकार किया कि पहले कनाडा में इनका बड़ा फंडिंग नेटवर्क सक्रिय था, लेकिन अब यह ऐसे छोटे-छोटे समूहों और व्यक्तियों के माध्यम से संचालित हो रहा है, जिनकी निष्ठा खालिस्तान आंदोलन के प्रति है, भले ही वे किसी विशेष संगठन से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े न हों। एनपीओ और चैरिटेबल संगठनों के जरिए धन जुटाना जांच में पाया गया है कि इन आतंकी संगठनों ने धन जुटाने के लिए गैर-लाभकारी संस्थाओं (NPOs) और चैरिटेबल संगठनों का भी इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट के अनुसार, “हमास और हिजबुल्लाह लंबे समय से चैरिटेबल और NPO सेक्टर के दुरुपयोग के लिए कुख्यात रहे हैं। इसी तरह खालिस्तानी चरमपंथी संगठनों ने भी प्रवासी समुदायों से चंदा के जरिए धन इकट्ठा करने और उसे ट्रांसफर करने के लिए ऐसे नेटवर्क का सहारा लिया है।” हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कनाडा में अधिकांश NPOs में मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग का खतरा शून्य है, लेकिन कुछ संस्थाओं के मामले में यह जोखिम अधिक हो सकता है। भारत-कनाडा संबंध खालिस्तानी उग्रवाद का उल्लेख ऐसे समय पर हुआ है जब भारत और कनाडा के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है। मार्क कार्नी की सरकार के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों ने हाल ही में एक-दूसरे के लिए नए उच्चायुक्तों की नियुक्ति की है। गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में रिश्ते गहरे संकट में आ गए थे, जब उन्होंने भारत पर कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में संलिप्त होने का आरोप लगाया था। इसके बाद भारत और कनाडा के बीच कई उच्च-स्तरीय राजनयिकों को निष्कासित कर दिया गया था। नई रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी तत्व अब भी प्रवासी सिख समुदाय और गैर-लाभकारी संगठनों के जरिए अपनी गतिविधियों को जारी रखे हुए हैं।

‘ट्रंप की भावनाओं का सम्मान…’ पीएम मोदी का संदेश, दोनों नेताओं के रिश्तों में दिखी गर्माहट

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के तनावपूर्ण संबंधों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर अब प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने दोनों देशों की साझेदारी को महत्वपूर्ण बताया है. पीएम मोदी ने भारत और अमेरिका के संबंधों पर पोस्ट करते हुए कहा कि मैं राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और दोनों देशों के संबंधों के प्रति उनके सकारात्मक आकलन की सराहना करता हूं. भारत और अमेरिका के बीच बहुत ही सकारात्मक, दूरदर्शी एवं वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है. बता दें कि पीएम मोदी का यह बयान ट्रंप को लेकर दिए गए उनके हालिया बयान के बाद आया है. ट्रंप ने कहा था कि भारत और अमेरिका के संबंध बहुत स्पेशल हैं. उन्होंने कहा था कि मौजूदा तनाव के बावजूद पीएम मोदी मेरे दोस्त रहेंगे. हमारी दोस्ती बनी रहेगी. वह बेहतरीन प्रधानमंत्री हैं. ग्रेट हैं. ट्रंप ने ये भी कहा था पीएम मोदी एक महान प्रधानमंत्री हैं. लेकिन वह फिलहाल जो कर रहे हैं, मुझे वह पसंद नहीं है. राष्ट्रपति ट्रंप से यह सवाल पूछा गया था कि क्या वह भारत के साथ फिर से संबंधों को सुधारने के लिए तैयार हैं? क्योंकि टैरिफ की वजह से दोनों देशों के संबंध बीते दो दशकों में सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं.  ट्रंप कह चुके हैं कि वह बेहद निराश हैं कि रूस से भारत बहुत तेल खरीद रहा है. हमने भारत पर बहुत टैरिफ लगाया है, पचास फीसदी टैरिफ. पीएम मोदी से मेरे रिलेशन अच्छे हैं. वह महान पीएम हैं. वह यहां कुछ महीने पहले आए थे. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इससे पहले कहा था कि लगता है कि हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है.