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NTPC को मिली हरी झंडी, 20,000 करोड़ खर्च करेगा रिन्यूएबल एनर्जी पर

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने बुधवार को एनटीपीसी लिमिटेड को एनटीपीसी रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड और उसके अन्य संयुक्त उद्यमों/सहायक कंपनियों में निवेश के लिए 20,000 करोड़ रुपए तक के परिव्यय के साथ रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता स्थापित करने के लिए बिजली के बढ़े हुए आवंटन को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट ने महारत्न सीपीएसई को विद्युत आवंटन के मौजूदा दिशानिर्देशों से एनटीपीसी लिमिटेड को विद्युत आवंटन में वृद्धि की अनुमति दी है ताकि वह अपनी सहायक कंपनी एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एनजीईएल) में निवेश कर सके और इसके बाद, एनजीईएल एनटीपीसी रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड (एनआरईएल) और उसकी अन्य संयुक्त उद्यमों/सहायक कंपनियों में निवेश कर सके। 2032 तक 60 गीगावाट क्षमता हासिल करने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी (आरई) क्षमता बढ़ाने के लिए यह राशि पूर्व में स्वीकृत 7,500 करोड़ रुपए की निर्धारित सीमा से बढ़कर 20,000 करोड़ रुपए तक हो सकती है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, एनटीपीसी और एनजीईएल को दिया गया यह विस्तारित आवंटन देश में रिन्यूएबल प्रोजेक्ट के त्वरित विकास में सहायक होगा। एक कैबिनेट नोट के अनुसार, "यह कदम पावर स्ट्रक्चर को मजबूत करने और पूरे देश में चौबीसों घंटे विश्वसनीय बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने में निवेश सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।" रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन चरण के साथ-साथ ऑपरेशन एंड मेनटेनेंस (ओ एंड एम) चरण के दौरान स्थानीय लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा करेंगे। इससे लोकल सप्लायर्स, लोकल उद्यमों/एमएसएमई को बढ़ावा मिलेगा और देश में उद्यमिता के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही देश में रोजगार और सामाजिक-आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। भारत ने अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त कर अपनी ऊर्जा परिवर्तन यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। देश का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता तक पहुंचना है। एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम और देश की अग्रणी विद्युत उपयोगिता कंपनी के रूप में, एनटीपीसी का लक्ष्य 2032 तक 60 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ना है, जिससे देश को इस लक्ष्य को प्राप्त करने और 2070 तक 'नेट जीरो' उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी। एनजीईएल, जैविक और अजैविक विकास के माध्यम से रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता वृद्धि के लिए एनटीपीसी ग्रुप की अग्रणी सूचीबद्ध सहायक कंपनी है।

बारिश और बाढ़ बनी आफत: पाकिस्तान में 116 की दर्दनाक मौत

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने बताया कि देश में मानसून की भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ ने 26 जून से अब तक 116 लोगों की जान ले ली है। इसके अलावा, 253 लोग घायल हुए हैं। एनडीएमए की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों में बारिश से संबंधित घटनाओं में 5 और लोगों की मौतें हुई हैं, जबकि 41 लोग घायल हुए हैं। समाचार के अनुसार, सबसे ज्यादा 44 मौतें पूर्वी पंजाब प्रांत में हुई हैं। इसके बाद उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा में 37, दक्षिणी सिंध में 18 और दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान में 16 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में 1 मौत हुई और 5 लोग घायल हुए, जबकि गिलगित-बाल्टिस्तान और इस्लामाबाद में कोई हताहत नहीं हुआ है। एजेंसी ने पाकिस्तान के कई राज्यों के लिए मौसम संबंधी चेतावनी जारी की है। एनडीएमए के मुताबिक, पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के कुछ हिस्सों में गुरुवार तक भारी बारिश और बाढ़ की आशंका जताई गई है। पिछले सप्ताह प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (पीडीएमए) ने खैबर पख्तूनख्वा में 11 से 17 जुलाई तक भारी बारिश का अनुमान जताया था, जिससे बाढ़ का खतरा और भी बढ़ सकता है। पाकिस्तान में मानसून जून से सितंबर तक रहता है और हर साल भारी बारिश से बाढ़, भूस्खलन और विस्थापन होता है। खासकर घनी आबादी और खराब जल निकासी वाले क्षेत्रों में ये समस्याएं बढ़ जाती हैं। सिंध के थारपारकर, मीरपुर खास, सांघर, सक्खर, लरकाना, दादू, जैकोबाबाद, खैरपुर और शहीद बेनजीराबाद में 14 से 16 जुलाई तक बारिश और तूफान के साथ भारी बारिश का पूर्वानुमान है। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार 'डॉन' के अनुसार, मौसम विभाग ने इस्लामाबाद, रावलपिंडी, गुजरांवाला, लाहौर, सियालकोट, सरगोधा, फैसलाबाद, खानेवाल, मुल्तान, साहिवाल, ओकारा, बहावलपुर, बहावलनगर, वेहारी, नौशेरा और पेशावर के लिए बाढ़ की चेतावनी जारी की है। 26 जून से 14 जुलाई के बीच बिजली का करंट लगना बारिश से जुड़ी मौतों का प्रमुख कारण रहा है। इसके बाद अचानक आई बाढ़ ने तबाही मचाई है। जून के अंत में एक दुखद घटना में 13 पर्यटकों की नदी में बहने से मौत हो गई थी। अधिकारियों ने निचले और जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वालों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। साथ ही बचाव और राहत कार्य प्रभावित क्षेत्रों में जारी हैं। हालांकि, सिंध सरकार ने नालों और सीवर लाइनों की सफाई के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए, जिससे कई इलाके जलमग्न हैं, जबकि 15 जुलाई से फिर से बारिश होने की संभावना है। पाकिस्तानी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, सिंध के हैदराबाद में घनी आबादी वाले इलाकों में मुख्य नालियां कचरे से भरी हैं और नालियों के किनारे की टूटी या गायब दीवारें ठीक नहीं की गई हैं। इस वजह से स्थानीय जनता काफी चिंतित है। मौसम विभाग ने सिंध सरकार को बारिश की चेतावनी दी थी, जिसके बाद उच्च-स्तरीय बैठकों में आयुक्तों, उपायुक्तों और स्थानीय नगर निकायों को शहरी बाढ़ की संभावना के लिए व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। इससे पहले, सिंध स्थानीय निकाय विभाग ने 10 जुलाई को हैदराबाद नगर निगम सहित विभिन्न नगर निगमों को जरूरी उपाय करने का निर्देश दिया था, लेकिन 48 घंटे बीतने के बाद भी कोई जमीन पर तैयारी शुरू नहीं हुई। सरकार से हर महीने 12 लाख रुपए अनुदान मिलने के बावजूद संबंधित यूनियन समितियों ने इस स्थिति पर ध्यान नहीं दिया। वेतन और बिजली बिलों के भुगतान के बाद भी नाली रखरखाव जैसे जरूरी सामुदायिक कार्यों के लिए यह राशि उपयोग नहीं की गई। विडंबना यह है कि हर साल सिंध सरकार और स्थानीय निकाय आपातकालीन बैठकें करते हैं और बारिश की तैयारी योजनाएं बनाते हैं, जिसके लिए बजट में लाखों रुपए आवंटित किए जाते हैं। हालांकि, वास्तव में एक भी नाले की पूरी तरह से सफाई नहीं की गई और हर साल नालों की सफाई के नाम पर फर्जी बिल भी बनाए जाते हैं।

अयातुल्ला अली खामेनेई ने इजरायल पर तीखा हमला बोला- कैंसर जैसा ट्यूमर है इजरायल

तेहरान ईरान और इजरायल के बीच कई दिनों तक चली जंग में फिलहाल सीजफायर लागू है, लेकिन जुबानी हमले जारी हैं। ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने बुधवार को इजरायल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इजरायल तो कैंसर जैसे ट्यूमर की तरह है, जिसे जड़ से खत्म करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इजरायल एक कुत्ते की तरह है, जो अमेरिका के पट्टे से बंधा है और उसके कहने पर ही सब कुछ करता है। इस तरह खामेनेई ने इजरायल के बहाने अमेरिका को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके पालतू इजरायल से लड़ने में कोई बुराई नहीं है और उससे पीछे नहीं हटना चाहिए। यही नहीं खामेनेई का कहना है कि भले ही सीजफायर है, लेकिन इजरायल पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कभी भी इजरायल हम पर हमला कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान पर कोई हमला हुआ तो हम सख्ती के साथ जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पिछले महीने हुई 12 दिनों की जंग में ईरान ने इजरायल को जमकर जवाब दिया था और अब यदि फिर से अटैक हुआ तो हम पीछे नहीं हटेंगे। बता दें कि 12 दिनों की जंग के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर का ऐलान किया था और लंबी जद्दोजहद के बाद ईरान ने इसे स्वीकार कर लिया था। इस सीजफायर से पहले अमेरिका ने उसके परमाणु ठिकानों पर हमला किया था। अमेरिका का कहना है कि इस हमले में ईरान का यूरेनियम भंडार कम हुआ और उसे नुकसान पहुंचा है। वहीं इजरायली एजेंसियों का कहना है कि अब भी ईरान के पास इतना भंडार मौजूद है कि कुछ महीनों के अभियान में ही वह पहले जैसी ताकत हासिल कर सकता है। बता दें कि इजरायल ने अब सीरिया पर हमला किया है। इसके अलावा लेबनान पर भी अटैक किए हैं और गाजा में भी सीजफायर की स्थिति नहीं बन पा रही है। उसने एक खतरनाक प्रस्ताव रखते हुए यह भी कहा है कि यदि गाजा में बसे लोग दक्षिण के एक इलाके में ही सीमित हो जाएं तो जंग थम सकती है।  

एकनाथ शिंदे की नई रणनीति: भीमराव आंबेडकर के पोते के सहारे दलित वोट बैंक पर नजर

मुंबई मराठी बनाम हिंदी के विवाद के बीच उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे दो दशक से ज्यादा की दूरी के बाद साथ आए हैं। बीते सप्ताह दोनों ने एक रैली की थी और मंच पर हाथ उठाकर संदेश दिया कि हम साथ-साथ हैं। इस एकता से एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना को लेकर सवाल खड़े हुए कि आखिर अब उनका क्या होगा। वजह यह है कि शिंदे सेना भी मराठी कार्ड की राजनीति कर रही है और अब इसी मुद्दे पर ठाकरे बंधु साथ हैं। ऐसे में एकनाथ शिंदे ने भी अब बड़ा दांव चल दिया है। मराठी एकता के बरक्स उन्होंने दलित दांव चल दिया है। बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के पोते आनंदराज आंबेडकर की पार्टी रिपब्लिकन सेना से हाथ मिला लिया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने आनंदराज अंबेडकर की रिपब्लिकन सेना के साथ गठबंधन किया है। शिंदे और अंबेडकर ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गठबंधन की घोषणा की। एकनाथ शिंदे ने कहा कि दोनों ताकतें एक साथ आ रही हैं। इसीलिए आज बहुत खुशी का दिन है। उन्होंने कहा, 'सड़कों पर अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले दो संगठन आज एक साथ आ रहे हैं। एक है बालासाहेब की शिवसेना और दूसरी है भारत रत्न बाबासाहेब अंबेडकर की रिपब्लिकन सेना। उपमुख्यमंत्री और शिवसेना के प्रमुख नेता एकनाथ शिंदे ने विश्वास जताया कि हम साथ मिलकर काम करेंगे। उनके बगल में बैठे आनंदराज अंबेडकर ने कहा कि हमारी एकता का निश्चित तौर पर असर दिखेगा। शिंदे ने कहा कि आनंदराज आंबेडकर और मैंने हमेशा कार्यकर्ता के रूप में काम किया है। जब मैं ढाई साल तक मुख्यमंत्री था, तब भी मैं एक आम आदमी था। अब डिप्टी सीएम के रूप में फिर से आम आदमी के लिए समर्पित हो गया हू। उन्होंने कहा कि एक आम आदमी और एक आम कार्यकर्ता होना ही हमारी पहचान है। हमारी प्रतिबद्धता आम आदमी के प्रति है। हमारा रिश्ता आम आदमी से जुड़ा है। आंबेडकर की वजह से ही मैं बन पाया था सीएम: शिंदे उन्होंने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान ने आम आदमी, वंचितों, शोषितों की प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया है। मेरे जैसा एक आम आदमी मुख्यमंत्री बन सका। यह बाबासाहेब द्वारा लिखे गए संविधान की वजह से ही संभव हुआ। नरेंद्र मोदी जैसा व्यक्ति प्रधानमंत्री बना। यह शक्ति संविधान की है। बाबासाहेब ने दुनिया के कई संविधानों का अध्ययन करने के बाद अपना संविधान लिखा था। दोनों नेताओं ने ऐलान किया कि शिवसेना और रिपब्लिकन सेना आगामी नगर निगम और जिला परिषद चुनाव मिलकर लड़ेंगे। शिवशक्ति और भीमशक्ति की एकता का दिया नारा शिंदे ने शिवशक्ति-भीमशक्ति गठबंधन बनाने की बात की। उनकी कोशिश है कि मराठी वोटों के साथ ही दलित वोटरों को भी साध लिया जाए। बता दें कि भीमराव आंबेडकर के एक और पोते प्रकाश आंबेडकर भी राजनीति में हैं, लेकिन उनका दल अलग है, जिसका नाम है- बहुजन वंचित अघाड़ी।  

सीरिया में इजरायली हमले से हड़कंप, ड्रोन अटैक से मचा कोहराम

दमिश्क गाजा में हमास और लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ युद्ध के बीच इजरायली सेना ने सीरिया पर हमले तेज कर दिए हैं। बुधवार को उसने सीरिया की राजधानी दमिश्क स्थित रक्षा मंत्रालय परिसर के एंट्री गेट को निशाना बनाकर ड्रोन हमले किए। इस हमले के पीछे की वजह दक्षिणी सीरिया के ड्रूज़ बहुल शहर स्वैदा में सरकारी बलों और स्थानीय ड्रूज लड़ाकों के बीच संघर्ष बताया जा रहा है। इज़रायल ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कार्रवाई ड्रूज़ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। आईडीएफ ने कहा, “हमने दमिश्क में सीरियाई शासन के सैन्य मुख्यालय परिसर के प्रवेश द्वार को निशाना बनाया। हम दक्षिणी सीरिया में ड्रूज़ नागरिकों के खिलाफ हो रही कार्रवाइयों पर करीबी नजर रखे हुए हैं।” सीरिया में लगातार तीसरे दिन इजरायली हमले इज़रायल का यह तीसरे दिन लगातार सीरियाई इलाके में हमला है। इससे पहले स्वैदा और आस-पास के इलाकों में भी कई हवाई हमले किए गए थे। बुधवार को भी पूरे दिन स्वैदा शहर और आसपास के गांवों में मोर्टार और तोपों से भारी गोलाबारी की खबरें आईं। स्थानीय समाचार के अनुसार, सुबह से ही स्वैदा के कई इलाकों में तेज़ गोलीबारी और विस्फोट सुने गए। सीरियाई रक्षा मंत्रालय के अंदर मौजूद सूत्रों ने बताया कि कम से कम दो ड्रोन हमले हुए हैं और अधिकारी मंत्रालय के तहखाने में शरण ले चुके हैं। सीरिया की सरकारी समाचार एजेंसी एलेखबरिया टीवी ने बताया कि इस हमले में दो नागरिक घायल हुए हैं। ड्रूज़ बनाम सीरियाई सरकार, इजरायल का हस्तक्षेप स्वैदा में हिंसा की शुरुआत तब हुई जब सीरियाई सरकार ने सोमवार को क्षेत्र में ड्रूज़ और बेदुइन समुदायों के बीच चल रही झड़पों को शांत कराने के लिए सैनिक भेजे, लेकिन वहां पहुंचते ही उनकी मुठभेड़ ड्रूज़ मिलिशिया से ही हो गई। इज़रायल ने इस बीच हस्तक्षेप करते हुए दावा किया है कि वह ड्रूज़ समुदाय की सुरक्षा के लिए कार्रवाई कर रहा है। जानकारों का मानना है कि इज़रायल इस बहाने से सीरिया में अपनी सैन्य सक्रियता बढ़ा रहा है, जो पहले से ही ईरानी प्रभाव को लेकर सतर्क है।  

तीन साहसिक कदम: मोदी कैबिनेट ने ग्रीन एनर्जी के लिए 27K करोड़ तय किए, स्वच्छ ऊर्जा की दिशा मजबूत

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश की कृषि और ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा देने वाले तीन बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई. इनमें एक ओर जहां कृषि जिलों के समग्र विकास की योजना को स्वीकृति दी गई, वहीं दूसरी ओर रेन्वेबल एनर्जी में बड़े पैमाने पर निवेश का रास्ता साफ किया गया. कैबिनेट ने “प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना” को 2025-26 से शुरू कर छह वर्षों के लिए मंजूरी दी है. इसका टारगेट 100 कृषि जिलों का विकास करना है. यह योजना नीति आयोग के ‘आकांक्षी जिलों’ कार्यक्रम से प्रेरित है, लेकिन यह खासतौर से कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर केंद्रित है. प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) योजना का मकसद कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल डाइवर्सिफिकेशन को प्रोत्साहित करना, टिकाऊ कृषि ऑप्शन को अपनाना, पंचायत और ब्लॉक स्तर पर भंडारण की सुविधा बढ़ाना, सिंचाई व्यवस्था को बेहतर करना शामिल है. इस योजना को 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं के कोऑर्डिनेशन के जरिए लागू किया जाएगा, जिसमें राज्य सरकारों की योजनाएं और निजी क्षेत्र की साझेदारी भी शामिल होगी. 100 जिलों का चयन कम उत्पादकता, कम फसल साइकिल और कम लोन डिस्ट्रिब्यूशन जैसे तीन प्रमुख मानकों के आधार पर किया जाएगा. हर राज्य से कम से कम एक जिला शामिल किया जाएगा. एनटीपीसी को नवीकरणीय ऊर्जा निवेश के लिए 20,000 करोड़ रुपये कैबिनेट ने एनटीपीसी लिमिटेड को रेन्वेबल एनर्जी क्षेत्र में निवेश के लिए मौजूदा सीमा से ऊपर जाकर 20,000 करोड़ रुपये तक निवेश की अनुमति दी है. यह निवेश एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (NGEL) और इसकी सहायक कंपनियों और संयुक्त उपक्रमों के जरिए किया जाएगा, ताकि 2032 तक 60 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल की जा सके. एनएलसी इंडिया लिमिटेड को 7,000 करोड़ रुपये की मंजूरी एनएलसीआईएल को भी 7,000 करोड़ रुपये के निवेश की विशेष छूट दी गई है, जो वह अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी NLC इंडिया रिन्यूएबल्स लिमिटेड (NIRL) के जरिए रेन्वेबल एनर्जी प्रोजेक्ट में लगाएगी. इससे कंपनी को संचालन और वित्तीय लचीलापन मिलेगा. ग्रीन एनर्जी पर सरकार खर्च करेगी 27 हजार करोड़ एनटीपीसी को ग्रीन एनर्जी में निवेश के लिए 20000 करोड़ के निवेश को मंजूरी: मोदी कैबिनेट ने देश की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनी NTPC को 20,000 करोड़ रुपये की मदद देने का फैसला किया है ताकि वो रिन्यूएबल एनर्जी (हरित ऊर्जा) में तेज़ी से निवेश कर सके. NLCIL को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में विस्तार को मंजूरी: वहीं मोदी कैबिनेट ने एनएलसी इंडिया लिमिटेड (NLCIL) को 7,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में विस्तार की मंजूरी दी है. 100 जिलों के लिए कृषि योजना को मंजूरी कैबिनेट ने 24 हजार करोड़ रुपये के वार्षिक खर्च वाली प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंज़ूरी दी है. कैबिनेट ने बुधवार को 6 साल के लिए प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंज़ूरी दे दी, जिसमें 24,000 करोड़ रुपये के वार्षिक परिव्यय के साथ 100 ज़िले शामिल होंगे. केंद्रीय बजट में घोषित यह कार्यक्रम 36 मौजूदा योजनाओं को एकीकृत करेगा. वहीं, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने को बढ़ावा देगा. केंद्रीय कैबिनेट में लिए गए फैसले की जानकारी साझा करते हुए, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाएगी, सिंचाई सुविधाओं में सुधार करेगी और कृषि उत्पादकता में बढ़ोतरी करेगी. इस कार्यक्रम से 1.7 करोड़ किसानों को मदद मिलने की उम्मीद है.

मॉनटेन तूफान की तबाही: NY–NJ में फ्लैश फ्लड से दो मरे, शहर का आवागमन ठप

न्यूयॉर्क   न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी में भारी बारिश और तूफान से दो लोगों की मौत हो गई। मूसलाधार बारिश होने से पूरा इलाका पानी में डूब गया। न्यूयॉर्क का सबवे सिस्टम ठप हो गया और पूरे इलाके में बिजली गुल हो गई। प्लेनफील्ड में सोमवार को तेज बारिश के कारण एक गाड़ी सेडर ब्रूक में बह गई। इससे दो लोगों की मौत हो गई। गवर्नर फिल मर्फी ने बताया कि दोनों को घटनास्थल पर ही मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने खराब मौसम के कारण आपातकाल की घोषणा की है। इस महीने शहर में तूफान से होने वाली यह तीसरी और चौथी मौतें थीं। न्यूयॉर्क डेली न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, मेयर एड्रियन मैप्प ने कहा, "पूरा प्लेनफील्ड इस नुकसान से दुखी है। इतने कम समय में चार लोगों को खोना अकल्पनीय है। हम परिवारों के साथ शोकाकुल हैं। हम अपने इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करने और अपने निवासियों को भविष्य में होने वाले नुकसान से बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" नॉर्थ प्लेनफील्ड में बाढ़ का पानी भरने के बाद एक घर में आग लग गई। हालांकि इसमें किसी के घायल होने की खबर नहीं है। गवर्नर मर्फी ने पत्रकारों से कहा, "मौसम से परेशानी में हम अकेले नहीं हैं, लेकिन हम अभी अधिक ह्यूमिडिटी, हाई टेंपरेचर और तेज तूफान वाले पैटर्न में हैं। सभी को सतर्क रहने की जरूरत है।" कुछ ही घंटों में छह इंच तक बारिश फ्लोरिडा के पास बन रहे एक ट्रॉपिकल स्टॉर्म के कारण पूर्वी तट पर नमी बढ़ गई। इससे कई जगहों पर धीरे-धीरे तूफान आया और भारी तबाही हुई। गार्डन स्टेट में कुछ ही घंटों में छह इंच तक बारिश हुई। वहां कई लोगों को बचाया गया। शहरों में मंगलवार को भी लगभग 2900 घरों और व्यवसायों में बिजली नहीं थी। मर्फी ने मंगलवार को पत्रकारों को बताया, "ढाई घंटे से भी कम समय में छह इंच बारिश हुई। पहली बारिश ने कई समुदायों को थोड़ा परेशान किया। दूसरी बारिश ने पूरी तरह से तबाही मचा दी। हम सभी समुदायों और काउंटियों का आकलन कर रहे हैं।" न्यूयॉर्क में सोमवार को सेंट्रल पार्क में लगभग 2.64 इंच बारिश हुई। इसने उसी दिन के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया, जो 1.47 इंच था। हार्लेम में बारिश के दौरान वेस्ट 149वीं स्ट्रीट और ब्रैडहर्स्ट एवेन्यू के पास एक 43 साल के न्यूयॉर्क वासी पेड़ की शाखा गिरने से घायल हो गया। सबवे स्टेशन में सीढ़ियों से पानी घुसा खराब मौसम के कारण कई सबवे लाइनें भी बंद हो गईं। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में मैनहट्टन में एक स्टेशन के प्रवेश द्वार से पानी सीढ़ियों से नीचे गिरता हुआ दिखाई दे रहा है। एक अन्य तस्वीर में यात्री बाढ़ के पानी से बचने के लिए अपनी सबवे सीटों पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। मेट्रोपॉलिटन ट्रांजिट अथॉरिटी के अध्यक्ष और सीईओ जानो लाइबर ने एबीसी 7 को बताया कि शहर का सीवर सिस्टम बारिश से भर गया और सबवे सुरंगों व स्टेशनों में पानी आ गया। न्यू जर्सी के कुछ हिस्सों में कुछ सड़कें अभी भी बंद हैं और मंगलवार को इलाके के हवाई अड्डों पर दर्जनों उड़ानें रद्द कर दी गईं या उनमें देरी हुई। फ्लाइटअवेयर के आंकड़ों के अनुसार, नेवार्क लिबर्टी हवाई अड्डे पर कुल 159 उड़ानें रद्द कर दी गईं। हालांकि ट्रिस्टेट इलाके के लिए अधिकांश चेतावनियां अब समाप्त हो गई हैं, लेकिन मौसम का पूर्वानुमान बताने वालों ने चेतावनी दी है कि वाशिंगटन डीसी से लेकर कैरोलिना तक बाढ़ की संभावना अभी भी है। आने वाले दिनों में भी बारिश होने की चेतावनी गवर्नर फिल मर्फी ने कहा कि प्लेनफील्ड में जो दो मौतें हुईं, वे बहुत दुखद हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हर संभव मदद करने के लिए तैयार है। मेयर एड्रियन मैप्प ने भी मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि शहर आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहा है। न्यूयॉर्क में हुई बारिश ने कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सेंट्रल पार्क में इतनी बारिश पहले कभी नहीं हुई थी। इससे लोगों को काफी परेशानी हुई। सबवे में पानी भर गया और कई सड़कें बंद हो गईं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में भी बारिश हो सकती है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। न्यू जर्सी और न्यूयॉर्क में हुई इस बारिश से लोगों को काफी नुकसान हुआ है। कई लोगों के घर पानी में डूब गए और कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। सरकार लोगों को मदद पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मौसम विभाग ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं। हमें इसके लिए तैयार रहना होगा।

राजनीतिक दांव-पेंच में नायडू का मास्टरस्ट्रोक, नरसिम्हा राव की भाषाओं की महारत फिर भी हिंदी में पिछड़ गए!

तमिलनाडु हिंदी भाषा को लेकर महाराष्ट्र से लेकर तमिलनाडु तक एक नया विवाद पसर गया है. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में प्रस्तावित तीन भाषा सिद्धांत में हिंदी को शामिल करने का प्रावधान है. इसी को लेकर दक्षिणी राज्यों में तीखी प्रतिक्रिया दी है. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस नीति का जोरदार विरोध करते हुए द्रविड़ संस्कृति और क्षेत्रीय अस्मिता का हवाला दिया है. उन्होंने दक्षिण के अन्य राज्यों को एकजुट करने की कोशिश की, लेकिन उनके पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इस राजनीति पर करारा प्रहार किया है. नायडू ने हिंदी को लेकर एक ऐसा बयान दिया, जिसने स्टालिन की रणनीति को ध्वस्त कर दिया. नायडू ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव हिंदी सहित 17 भाषाओं के जानकार थे. उन्होंने अपने बहुभाषी ज्ञान के बल पर देश और दुनिया में प्रतिष्ठा हासिल की. नायडू ने जोर देकर कहा कि यदि कोई व्यक्ति हिंदी जैसी भाषा सीखता है तो इसमें क्या दिक्कत है? यह बयान सीधे तौर पर स्टालिन पर निशाना है, जो हिंदी को दक्षिण पर थोपी जाने वाली भाषा बता रहे हैं. नरसिम्हा राव आंध्र प्रदेश से ताल्लुक रखते थे. वे 1991 में आर्थिक उदारीकरण के जनक के रूप में जाने जाते हैं. वे 17 भाषाओं तेलुगु, हिंदी, मराठी, तमिल, बंगाली, गुजराती, ओडिया, कन्नड़, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी, फ्रेंच, अरबी, जर्मन, फारसी और स्पेनिश के जानकार थे. उनकी यह काबिलियत उनकी बौद्धिक क्षमता का प्रतीक थी. नायडू ने इसे एक उदाहरण के तौर पर पेश किया कि भाषा सीखना व्यक्तिगत विकास और राष्ट्रीय एकता का हिस्सा हो सकता है. एनडीए के सहयोगी हैं नायडू चंद्रबाबू नायडू केंद्र में सत्ताधारी एनडीए के महत्वपूर्ण सहयोगी हैं और आंध्र प्रदेश में भी उनकी अगुआई वाली सरकार एनडीए का हिस्सा है. ऐसे में उनका यह बयान न केवल क्षेत्रीय राजनीति, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो जाता है. उनका समर्थन केंद्र की नीतियों को मजबूती देता है, खासकर तब जब तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्य हिंदी थोपने का आरोप लगा रहे हैं. स्टालिन ने दावा किया कि तीन-भाषा फॉर्मूला द्रविड़ पहचान को नुकसान पहुंचाएगा, लेकिन नायडू ने इसे व्यक्तिगत पसंद और प्रगति का मुद्दा बनाकर उनकी दलील को कमजोर कर दिया.   इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महाराष्ट्र में मराठी वाया हिंदी विवाद को शांत करने की कोशिश की. हाल ही में उन्होंने राज्यसभा के लिए नामित वकील उज्ज्वल निकम को फोन कर मराठी में बात की. यह कदम मराठी भाषा के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है. पीएम मोदी खुद गुजराती बोलते हैं, लेकिन वह हिंदी, मराठी और अन्य भाषाओं में निपुण हैं, जिससे उनकी बहुभाषी क्षमता सामने आई. पीएम मोदी का यह कदम महाराष्ट्र में शिवसेना और मनसे जैसे दलों के हिंदी विरोधी रुख को नरम करने की कोशिश मानी जा रही है. हिंदी विवाद ने दक्षिण और पश्चिमी राज्यों में सियासी तनाव बढ़ाया है. तमिलनाडु में डीएमके और महाराष्ट्र में शिवसेना-उद्धव ठाकरे गुट ने केंद्र पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया, जबकि कर्नाटक में भी विरोध देखा गया. दूसरी ओर नायडू का बयान आंध्र प्रदेश को इस विवाद से अलग रखता है.

राष्ट्रव्यापी जातिगत गणना की मांग पर कांग्रेस करेगी व्यापक आंदोलन : सिद्धरमैया

बेंगलुरु कांग्रेस की अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सलाहकार परिषद की बुधवार को हुई बैठक में केंद्र से तेलंगाना जाति सर्वेक्षण के मॉडल के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तावित जातिगत गणना कराने का आह्वान किया गया। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के नेतृत्व में यहां हुई दो दिवसीय बैठक में इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया गया।सिद्धरमैया ने परिषद में पारित प्रस्तावों को ‘बेंगलुरु घोषणा’ नाम देते हुए कहा,‘‘जनगणना में प्रत्येक व्यक्ति और जाति के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक, रोज़गार, राजनीतिक पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि दूसरा प्रस्ताव आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा को समाप्त करने का था, जिससे शिक्षा, सेवा, राजनीतिक और अन्य क्षेत्रों में ओबीसी के लिए उपयुक्त आरक्षण सुनिश्चित हो सके। सिद्धरमैया ने बुधवार को बेंगलुरु में हुई परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। सिद्धरमैया ने कहा कि बैठक में पारित तीसरे प्रस्ताव में कहा गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15(4) के अनुसार निजी शिक्षण संस्थानों में ओबीसी के लिए आरक्षण होना चाहिए। सलाहकार परिषद ने सर्वसम्मति से ‘न्याय योद्धा’ राहुल गांधी को समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों के लिए सामाजिक न्याय का मुद्दा उठाने के लिए धन्यवाद दिया। सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘राहुल जी के दृढ़ निश्चय ने मनुवादी मोदी सरकार को भारत में जातिगत गणना की न्यायोचित और संवैधानिक मांग के आगे झुकने पर मजबूर कर दिया। भारत के सभी पिछड़े वर्गों की ओर से, परिषद हृदय से उनकी सराहना करता है और इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए राहुल गांधी के योगदान को श्रेय देता है।’’ जातिगत गणना को लेकर केंद्र द्वारा किये गए फैसले को मील का पत्थर बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भारतीय संविधान द्वारा परिकल्पित सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक छोटा सा कदम है। सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘न्याय योद्धा राहुल गांधी जी के साहसी और अडिग नेतृत्व में, भारत सामाजिक सशक्तिकरण के अंतिम संवैधानिक उद्देश्य को साकार करने और प्राप्त करने के लिए नियत है, जिससे हमारे महान राष्ट्र में एक समतावादी और समान समाज का निर्माण होगा।’’  

हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर के परिवार को न्याय, हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को दी मुआवजा देने की हिदायत

गंगटोक सिक्किम उच्च न्यायालय ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के आदेश को पलटते हुए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वह सड़क दुर्घटना में मारे गए एक श्रमिक के माता-पिता को 21.89 लाख रुपये का मुआवजा अदा करे। न्यायमूर्ति भास्कर राज प्रधान ने कहा कि मृतक वाहन का केवल यात्री नहीं था, बल्कि एक कामगार था जो बीमा पॉलिसी के तहत संरक्षित था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी द्वारा कामगार देयता के लिए अतिरिक्त प्रीमियम अदा किया गया था, इसलिए बीमा कवरेज मृतक पर भी लागू होता है। यह अपील मृतक के माता-पिता द्वारा मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166 के तहत दायर की गई थी। उन्होंने एमएसीटी के उस निर्णय को चुनौती दी थी जिसमें मुआवजे का दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया गया था कि मृतक ने वाहन में केवल लिफ्ट ली थी और वह बीमा पॉलिसी के दायरे में नहीं आता। यह दुर्घटना 20 अप्रैल, 2023 को उस समय हुई जब मृतक रोराथांग से पूर्वी सिक्किम के बेरिंग की ओर जा रहे वाहन में सवार था। उच्च न्यायालय ने पाया कि मृतक को दैनिक वेतन भोगी श्रमिक के रूप में, रेत के पांच बोरों को वाहन से उतारने के लिए नियुक्त किया गया था। वाहन मालिक ने बताया कि मृतक छोटा-मोटा काम करने में मदद करता था और अपने घर की नाली की मरम्मत के लिए रेत उतारने हेतु वाहन में चढ़ा था। न्यायमूर्ति प्रधान ने कहा कि यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि मृतक एक ‘कामगार’ था। अदालत ने कहा कि कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत ‘कामगार’ की परिभाषा में सहायक, क्लीनर और वाहन से संबंधित कार्यों में लगे अन्य व्यक्ति भी आते हैं। बीमा कंपनी की इस दलील को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया कि मृतक चालक के गांव का ही निवासी था और वाहन में ‘मुफ्त सवारी’ कर रहा था। बीमा कंपनी ने एक जांच रिपोर्ट के आधार पर यह दावा किया था। अदालत ने यह भी कहा कि दुर्घटना वाहन चालक की लापरवाही एवं तेज़ गति के कारण हुई। इससे वाहन मालिक अप्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी ठहराया गया। न्यायमूर्ति प्रधान ने मुआवजे की राशि 21.89 लाख रुपये को ‘उचित मुआवजा’ करार देते हुए कहा कि उस पर दावा याचिका दाखिल करने की तारीख से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।