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भारतीयों की बैंकिंग डिटेल्स पर संकट, इंटरनेट पर उजागर हुए संवेदनशील ट्रांसफर डेटा

नई दिल्ली डेटा लीक की एक बड़ी घटना सामने आई है। इस लीक को टेक क्रंच ने रिपोर्ट किया है। इसमें बताया गया है कि एक बड़े डेटा लीक की वजह से भारत के लाखों बैंक ट्रांसफर डॉक्‍युमेंट खतरे में आ गए हैं। ये डॉक्‍युमेंट इंटरनेट पर खुले छोड़ दिए गए थे। इस डेटा लीक को अगस्‍त महीने के आखिर में साइबर सिक्‍योरिटी फर्म ‘अपगार्ड’ ने खोजा था। रिपोर्ट के अनुसार, डेटा लीक के बारे में तमाम एजेंसियों को बताया गया, लेकिन सितंबर की शुरुआत तक उसे सेफ करने के उपाय नहीं किए गए। आखिर में कंप्‍यूटर इमरजेंसी रेस्‍पॉन्‍स टीम यानी CERT-In को जानकारी दी गई, जिसके बाद डेटा को सुरक्ष‍ित किया गया। कैसे लीक हुआ डेटा, कितने डॉक्‍युमेंट रिपोर्ट के अनुसार, यह लीक एमेजॉन के एक अनसेफ सर्वर से हुआ। उस सर्वर में 2 लाख 73 हजार पीडीएफ डॉक्‍युमेंट थे। उन डॉक्‍युमेंट्स में लोगों के अकाउंट नंबर, उनकी अन्‍य डिटेल और ट्रांजैक्‍शन की जानकारी थी। लीक हुए डॉक्‍युमेंट्स में नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस (NACH) के उसके लेनदेन वाले फॉर्म थे। 38 बैंकों और वित्तीय संस्‍थाओं से जुड़ा लीक रिपोर्ट के अनुसार, यह डेटा लीक कम से कम 38 बैंकों और वित्तीय संस्‍थानों से जुड़ा है। हैरान करने वाली बात है कि लंबे वक्‍त तक बड़ी संख्‍या में पीडीएफ डॉक्‍युमेंट इंटरनेट पर खुले थे। एजेंसियों को बताने के बावजूद उनकी तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। अपगार्ड जिसने इस लीक का पता लगाया, उसने करीब 55 हजार डॉक्‍युमेंट्स की जांच की। आधे से ज्‍यादा दस्‍तावेजों में आई फाइनेंस का नाम मिला है। डॉक्‍युमेंट्स में दूसरा सबसे ज्‍यादा दिखने वाला संस्‍थान स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी एसबीआई है। NPCI को दी गई थी जानकारी रिपोर्ट के अनुसार, UpGuard के रिसर्चर्स ने डेटा लीक की जानकारी आई फाइनेंस और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) को दी थी। हालांकि सितंंबर की शुरुआत तक भी डेटा इंटरनेट पर खुला पड़ा हुआ था यानी कोई भी उसे एक्‍सेस कर सकता था। उस सर्वर पर हजारों फाइलें रोज अपलोड की जा रही थीं। अपगार्ड ने इस बारे में कंप्‍यूटर इमरजेंसी रेस्‍पॉन्‍स टीम को बताया, जिसके बाद डेटा को सेफ किया गया। किसी ने नहीं ली जिम्‍मेदारी टेक क्रंच की रिपोर्ट में दावा है कि इस सुरक्षा चूक की जिम्‍मेदारी किसी ने नहीं ली है। NPCI के प्रवक्ता अंकुर दहिया के हवाले से रिपोर्ट कहती है कि विस्तृत जांच से पता चला है कि NPCI सिस्टम से NACH मैंडेट की कोई भी जानकारी या रिकॉर्ड लीक नहीं हुआ है। आई फाइनेंस और एसबीआई ने टेक क्रंच को कोई टिप्‍पणी नहीं दी है।

बैटरी कार और हेलीकॉप्टर सेवा से मां वैष्णो देवी की यात्रा में मिली नई सुविधा

कटड़ा शारदीय नवरात्रों में हर कोई मां वैष्णो देवी के दरबार में नमन कर आशीर्वाद प्राप्त करना चाहता है। वीरवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां वैष्णो देवी भवन की ओर रवाना हुए। श्रद्धालुओं ने मां वैष्णो देवी के दरबार में नमन किया है। श्राइन बोर्ड ने मां वैष्णो देवी यात्रा को और भी आसान बना दिया है।  श्रद्धालु मां वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा चलाई जा रही हैलीकॉप्टर सेवा, बैटरी कार सेवा और भवन-भैरों घाटी रोपवे सेवा का लुत्फ उठा रहे हैं। श्राइन बोर्ड के प्रवक्ता के अनुसार पहले 3 नवरात्रों के दौरान 40,558 श्रद्धालुओं ने मां वैष्णो देवी के दरबार में नमन किया था। वहीं वीरवार को रात 10 बजे तक…… श्रद्धालु कटड़ा के विभिन्न स्थलों पर बने यात्रा पंजीकरण आर.एफ.आई.डी. काऊंटर से कार्ड हासिल कर वैष्णो देवी भवन की ओर प्रस्थान कर चुके थे। बताते चलें कि श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा किए गए प्रयासों के तहत दिव्यांग लोगों के लिए नवरात्रों में विशेष सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है, जबकि अन्य दिनों में भी दिव्यांग श्रद्धालुओं को बैटरी कार में श्राइन बोर्ड प्राथमिकता देता है। विशेष गायन प्रस्तुतियां भी बन रहीं मुख्य आकर्षण का केंद्र वैष्णो देवी भवन पर सुबह-शाम आयोजित होने वाली अटका आरती के दौरान हर दिन विद्वानों द्वारा मंत्र उच्चारण के साथ मां भगवती का गुणगान किया जाता है। इसी कड़ी के तहत नवरात्रों के दौरान प्रसिद्ध गायकों द्वारा विशेष प्रस्तुतियां भी दी जा रही हैं जोकि हर किसी के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इन प्रस्तुतियों का सीधा प्रसारण श्रद्धालु यात्रा मार्ग पर लगी एल.ई.डी. के माध्यम से देख रहे हैं।

ट्रंप का नया कदम: 1 अक्टूबर से दवाओं पर 100% और ट्रकों पर 50% तक टैक्स लागू

नई  दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी व्यापारिक नीतियों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने सीधे दवा उद्योग को निशाना बनाते हुए विदेशी फार्मा कंपनियों पर बड़ा फैसला सुनाया है, जो भारत समेत कई विकासशील और विकसित देशों को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एलान किया कि 1 अक्टूबर 2025 से अमेरिका में किसी भी ब्रांडेड या पेटेंटेड दवा उत्पाद पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा – अगर वह अमेरिका में निर्मित नहीं हो रही है। यानी, कोई कंपनी यदि अमेरिका में फार्मा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित नहीं कर रही है, तो उसे इस भारी-भरकम टैक्स का सामना करना पड़ेगा। दवा कंपनियों पर सीधा असर यह फैसला उन देशों के लिए झटका है जो अमेरिका को बड़ी मात्रा में दवा उत्पाद निर्यात करते हैं। भारत, जो विश्व के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में से एक है, उसके लिए यह निर्णय न सिर्फ आर्थिक, बल्कि रणनीतिक मोर्चे पर भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कंपनी अमेरिका में निर्माण कार्य वास्तव में शुरू कर चुकी है, तो उस पर टैरिफ लागू नहीं होगा। “IS BUILDING” का मतलब केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि निर्माण स्थल पर वास्तविक कार्य होना चाहिए। फर्नीचर और घरेलू सामान पर भी टैरिफ ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति सिर्फ दवा उद्योग तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ऐलान किया कि: -किचन कैबिनेट्स और बाथरूम वैनिटीज पर 50% टैरिफ -अपहोल्स्टर्ड फर्नीचर (गद्देदार फर्नीचर) पर 30% टैरिफ -भारी ट्रकों और अन्य घरेलू उत्पादों पर भी उच्च टैरिफ लगाए जाएंगे। ट्रंप का कहना है कि विदेशी कंपनियों ने अमेरिकी बाजार में जरूरत से ज्यादा सामान भर दिया है, जिससे स्थानीय निर्माण उद्योग पर सीधा असर पड़ा है। टैरिफ लगाना अब जरूरी हो गया है ताकि अमेरिका फिर से अपनी उत्पादन क्षमता हासिल कर सके। कई देशों पर नई टैरिफ दरें ट्रंप ने अगस्त में भी कई देशों पर टैरिफ बढ़ाए थे, जो अब लागू हो चुके हैं: भारत: 50% टैरिफ रूस: 25% अतिरिक्त जुर्माना ब्राज़ील: 50% टैरिफ दक्षिण अफ्रीका: 30% टैरिफ वियतनाम: 20% टैरिफ जापान व दक्षिण कोरिया: 15% टैरिफ अमेरिका फर्स्ट की वापसी? ट्रंप की इन घोषणाओं को उनकी पुरानी रणनीति America First का विस्तार माना जा रहा है। वे पहले भी टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं – चाहे वह चीन के साथ ट्रेड वॉर हो या यूरोपीय उत्पादों पर शुल्क। इस नई घोषणा से अमेरिका में फार्मा इंडस्ट्री को तो बढ़ावा मिलेगा, लेकिन वैश्विक व्यापार संतुलन पर इसका गहरा असर पड़ेगा।  

TikTok की चीन से विदाई, ट्रंप की चाल के बाद नया मालिक कौन?

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टिकटॉक को लेकर बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने  एक्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया है, जिसमें TikTok के अमेरिकी ऑपरेशन्स को बेचने की मंजूरी दी गई है. यानी टिकटॉक का अमेरिकी ऑपरेशन किसी अमेरिकी इन्वेस्टर ग्रुप को बेचने की मंजूरी दे दी गई है.  ये अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद था. अमेरिका ने कई बार टिकटॉक को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है. ऐसे में अगर टिकटॉक का ऑपरेशन किसी अमेरिकी कंपनी को मिलेगा, तो इससे ऐप को अमेरिका में बैन नहीं किया जाएगा.  कितनी लगाई गई है कीमत? रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि टिकटॉक अमेरिका की वैल्यू 14 अरब डॉलर लगाई गई है. ट्रंप के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर की वजह से टिकटॉक पर बैन फिलहाल के लिए टल गया है. एक्जीक्यूटिव ऑर्डर डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस को कानून को लागू करने से रोकता है, जिसके तहत टिकटॉक की पैरेंट कंपनी ByteDance को देश भर में बैन किया जाना था.  कौन होगा नया मालिक और क्या बदलेगा? डील के तहत TikTok US अब नए बोर्ड ऑफ डायरेक्ट नियुक्त करेगा. साथ ही एल्गोरिद्म रिकमेंडेशन, सोर्स कोड और कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को भी नए मालिक को ट्रांसफर किया जाएगा. ट्रंप के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर के बाद, Oracle अब TikTok US के सिक्योरिटी ऑपरेशन्स को हैंडल करेगा और क्लाउड सर्विस भी ऑफर करेगी.  इसके अलावा Oracle, Silver Lake और अबू धाबी बेस्ड MGX ग्रुप नई इकाई में 45 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी. वेंस ने रॉयटर्स को बताया, 'शुरुआत में चीन की ओर से कुछ प्रतिरोध था, लेकिन हम चाहते थे कि टिकटॉक काम करता रहे. हम ये भी चाहते थे कि अमेरिकी डेटा सुरक्षित रहे.' चीनी राष्ट्रपति से ट्रंप ने की बात ट्रंप ने भी रिपोर्टर्स ने बातचीत ने कहा कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात की और उन्होंने इस पर अपनी सहमति दी थी. डोनाल्ड ट्रंप ने बताया, 'मैंने उनसे (शी जिनपिंग) बताया कि हम ये करने जा रहे हैं और उन्होंने कहा आप करिए.' उन्होंने ये भी बताया कि अब TikTok US पूरी तरह से अमेरिका द्वारा ऑपरेट किया जाएगा.  ट्रंप ने ये भी कहा है कि टिकटॉक के नए मालिक इस बात का ख्याल रखेंगे कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल प्रोपेगेंडा फैलाने में ना हो. हालांकि, इस पूरे मामले पर ByteDance ने कोई जानकारी नहीं दी है. कंपनी ने पहले ऐसा जरूर कहा था कि वे टिकटॉक को अमेरिका में बनाए रखने के लिए पूरी तरह से कानून का पालन करेंगे.

ट्रंप का बड़ा फैसला: दवाओं और ट्रकों पर भारी टैक्स, 1 अक्टूबर से लागू

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी व्यापारिक नीतियों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने सीधे दवा उद्योग को निशाना बनाते हुए विदेशी फार्मा कंपनियों पर बड़ा फैसला सुनाया है, जो भारत समेत कई विकासशील और विकसित देशों को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एलान किया कि 1 अक्टूबर 2025 से अमेरिका में किसी भी ब्रांडेड या पेटेंटेड दवा उत्पाद पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा – अगर वह अमेरिका में निर्मित नहीं हो रही है। यानी, कोई कंपनी यदि अमेरिका में फार्मा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित नहीं कर रही है, तो उसे इस भारी-भरकम टैक्स का सामना करना पड़ेगा। दवा कंपनियों पर सीधा असर यह फैसला उन देशों के लिए झटका है जो अमेरिका को बड़ी मात्रा में दवा उत्पाद निर्यात करते हैं। भारत, जो विश्व के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में से एक है, उसके लिए यह निर्णय न सिर्फ आर्थिक, बल्कि रणनीतिक मोर्चे पर भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कंपनी अमेरिका में निर्माण कार्य वास्तव में शुरू कर चुकी है, तो उस पर टैरिफ लागू नहीं होगा। “IS BUILDING” का मतलब केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि निर्माण स्थल पर वास्तविक कार्य होना चाहिए। फर्नीचर और घरेलू सामान पर भी टैरिफ ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति सिर्फ दवा उद्योग तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ऐलान किया कि: -किचन कैबिनेट्स और बाथरूम वैनिटीज पर 50% टैरिफ -अपहोल्स्टर्ड फर्नीचर (गद्देदार फर्नीचर) पर 30% टैरिफ -भारी ट्रकों और अन्य घरेलू उत्पादों पर भी उच्च टैरिफ लगाए जाएंगे। ट्रंप का कहना है कि विदेशी कंपनियों ने अमेरिकी बाजार में जरूरत से ज्यादा सामान भर दिया है, जिससे स्थानीय निर्माण उद्योग पर सीधा असर पड़ा है। टैरिफ लगाना अब जरूरी हो गया है ताकि अमेरिका फिर से अपनी उत्पादन क्षमता हासिल कर सके। कई देशों पर नई टैरिफ दरें ट्रंप ने अगस्त में भी कई देशों पर टैरिफ बढ़ाए थे, जो अब लागू हो चुके हैं: भारत: 50% टैरिफ रूस: 25% अतिरिक्त जुर्माना ब्राज़ील: 50% टैरिफ दक्षिण अफ्रीका: 30% टैरिफ वियतनाम: 20% टैरिफ जापान व दक्षिण कोरिया: 15% टैरिफ अमेरिका फर्स्ट की वापसी? ट्रंप की इन घोषणाओं को उनकी पुरानी रणनीति America First का विस्तार माना जा रहा है। वे पहले भी टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं – चाहे वह चीन के साथ ट्रेड वॉर हो या यूरोपीय उत्पादों पर शुल्क। इस नई घोषणा से अमेरिका में फार्मा इंडस्ट्री को तो बढ़ावा मिलेगा, लेकिन वैश्विक व्यापार संतुलन पर इसका गहरा असर पड़ेगा।

सोनम वांगचुक पर सख्त एक्शन, लेह बवाल के बाद NSA के तहत हुई गिरफ्तारी

लेह लद्दाख के सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को आज गिरफ्तार कर लिया गया है. उनके खिलाफ ये एक्शन लेह हिंसा के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हुआ है. उन्हें जेल में शिफ्ट किया जाए या कोई अन्य व्यवस्था की जाए, इस पर फैसला लिया जा रहा है. वांगचुक के खिलाफ केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को उकसाने का आरोप है. सोनम वांगचुक को डीजीपी एसडी सिंह जामवाल के नेतृत्व में लद्दाख पुलिस की एक टीम ने गिरफ़्तार किया है. वांगचुक की गिरफ़्तारी के बाद एहतियात के तौर पर लेह में मोबाइल इंटरनेट बंद कर दी गई है. साथ ही ब्रॉडबैंड की स्पीड कम कर दी गई है. दरअसल, 24 सितंबर यानी बुधवार को लेह में हिंसक झड़प हुई थी. इसमें 4 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 90 लोग घायल हुए थे. हिंसक झड़प के बाद लेह में कर्फ्यू लगा दिया गया. पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने कर्फ़्यू का सख्ती से पालन कराया. अब तक 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. लेह जिला मजिस्ट्रेट ने 2 दिन के लिए सभी सरकारी और निजी स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद करने का आदेश दिया. क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लेह के अलावा कारगिल सहित अन्य शहरों में भी धारा 144 लागू कर दी गई. उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने हाईलेवल सुरक्षा बैठक की और हिंसा की घटनाओं को षड्यंत्र का नतीजा बताते हुए सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए. लेह हिंसा के बाद गृह मंत्रालय ने सोनम वांगचुक पर आरोप लगाया कि उनके भड़काऊ बयानों ने भीड़ को उकसाया, जिसके चलते प्रदर्शन हिंसक हो गए. मंत्रालय के मुताबिक वांगचुक ने अरब स्प्रिंग और नेपाल के Gen-Z आंदोलनों का हवाला देकर युवाओं को भड़काया, जिसके बाद लेह में बीजेपी कार्यालय और कुछ सरकारी गाड़ियों में आग लगा दी गई. गृह मंत्रालय ने कहा कि 24 सितंबर को सुबह 11:30 बजे वांगचुक के भाषण के बाद भीड़ उनके भूख हड़ताल स्थल से निकलकर बीजेपी ऑफिस और लेह के सीईसी दफ्तर पर हमला करने पहुंच गई. भूख हड़ताल और मांगें सोनम वांगचुक ने 10 सितंबर से भूख हड़ताल शुरू की थी, उनकी मांग थी कि लद्दाख के लिए संवैधानिक गारंटी, अधिक स्वायत्तता, राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा दिया जाए. बुधवार को हिंसा बढ़ने के बाद उन्होंने अपना 2 हफ्ते का अनशन खत्म कर दिया था. मीटिंग्स का दौर जारी सरकार ने कहा कि लद्दाख में लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस जैसे क्षेत्रीय संगठनों से उच्चस्तरीय समिति (HPC), उपसमितियों और अनौपचारिक बैठकों के जरिए बातचीत चल रही है.

ट्रंप वाइट हाउस में मौजूद, फिर भी गेट पर क्यों रुके रहे शहबाज-मुनीर?

न्यूयॉर्क पाकिस्तान का बेइज्जती शब्द से गहरा नाता है. चाहे कोई भी मंच हो, उसकी इंटरनेशनल बेइज्जती अक्सर होती है. अबकी बार अमेरिका में पाकिस्तान की बेइज्जती हुई है. जी हां, पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर ट्रंप दरबार पहुंचे थे. शुक्रवार को वाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप से शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की मुलाकात हुई. मगर इस मुलाकात के लिए पाकिस्तानी पीएम को अपनी बेइज्जती करवानी पड़ी. डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के लिए आसिम मुनीर के साथ शहबाज शरीफ को वाइट हाउस के गेट पर इंतजार करना पड़ा. काफी देर बाद उन दोनों को डोनाल्ड ट्रंप का दीदार हुआ. अब सवाल है कि आखिर शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के लिए इतना लंबा इंतजार क्यों करना पड़ा? दरअसल, पाकिस्तान की इस बेइज्जती का परोक्ष रूप से कारण चीन ही है. जी हां, डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को कुछ देर इंतजार कराया. कारण कि उस वक्त डोनाल्ड ट्रंप एक अहम डील में बिजी थे. जब वाइट हाउस की दहलीज पर शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर खड़े थे, तब अंदर ट्रंप का टिकटॉक को लेकर कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करना और प्रेस से मुलाकात जारी रहा. इसके कारण ही ट्रंप ने अपने घर आए मेहमान शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को इंतजार कराया. हालांकि, जब टिकटॉक डील पर सिग्नेचर और प्रेस वार्ता खत्म हो गई, तब जाकर ट्रंप ने शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर से मुलाकात की. ट्रंप और शरीफ के बीच वार्ता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ वार्ता की. ट्रंप और शहबाज शरीफ के बीच यह मुलाकात इस बात के संकेत हैं कि अमेरिका और परमाणु शक्ति वाले पाकिस्तान के बीच कुछ तो खिचड़ी पक रही है. शहबाज शरीफ उन आठ अरब या मुस्लिम देशों के टॉप अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर ट्रंप से मुलाकात की. अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों में सुधार होता दिख रहा है, क्योंकि रूस-यूक्रेन जंग और रूसी तेल की वजह से अमेरिका और भारत के संबंधों में खटास है. ट्रंप ने मास्को पर अप्रत्यक्ष आर्थिक दबाव डालने के प्रयास में भारत से तेल खरीद पर टैरिफ में बढ़ोतरी की है. जब ट्रंप से हुई शरीफ की मुलाकात इससे पहले अमेरिका और पाकिस्तान ने जुलाई में एक व्यापार समझौता किया था. इससे उम्मीद है कि वाशिंगटन पाकिस्तान के बड़े पैमाने पर अप्रयुक्त तेल भंडार को विकसित करने और इस्लामाबाद के लिए टैरिफ कम करने में मदद करेगा. शहबाज शरीफ गुरुवार शाम 5 बजे (अमेरिकी समयानुसार) से कुछ पहले वाइट हाउस पहुंचे. वह तब पहुंचे जब ट्रंप कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर कर रहे थे और पत्रकारों से बात कर रहे थे. दोनों नेताओं के बीच बैठक मीडिया के लिए बंद थी, और पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल शाम 6.18 बजे वाइट हाउस से रवाना हुआ. हालांकि, शहबाज शरीफ को ट्रंप से मुलाकात करने के लिए 30 मिनट तक इंतजार करना पड़ा. इसके बाद दोनों के बीच यह बैठक करीब 1 घंटे 20 मिनट चली. पाक-अमेरिका कैसे आ रहे करीब? शहबाज शरीफ ने इस साल पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव कम करने के अपने प्रशासन के प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ट्रंप का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया था. शहबाज शरीफ और मुनीर दोनों पक्के ट्रंप समर्थक बन चुके हैं. पाकिस्तान तो बार-बार यही कह रहा है कि अमेरिका ने ही सीजफायर करवाया. जबकि भारत का इसे लेकर साफ कहना है कि पाकिस्तान की गुहार पर भारत ने सीजफायर किया. शहबाज शरीफ और मुनीर सीजफायर का क्रेडिट ट्रंप को देते हैं, मगर पीएम मोदी इससे इनकार कर चुके हैं. बहरहाल, यह पहली बार नहीं है जब मुनीर ट्रंप दरबार पहुंचे हैं. इससे पहले भी ट्रंप उन्हें हलाल खिला चुके हैं.  

भाजपा ने मंडी में खोला नया पार्टी कार्यालय, लेह हिंसा पर बोले जयराम ठाकुर

मंडी, हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले मे भारतीय जनता पार्टी के नए जिला कार्यालय का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर मौजूद रहे। नए पार्टी कार्यालय के शुभारंभ उन्होंने मीडियाकर्मियों ने कहा कि भाजपा संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए हर जिले में अपना कार्यालय स्थापित कर रही है। मंडी में यह अस्थाई कार्यालय है और स्थायी भवन के लिए जमीन तलाशी जा रही है। जल्द ही इसका निर्माण भी किया जाएगा। पार्टी के नए कार्यालय के शुभारंभ की तस्वीरें शेयर करते हुए जयराम ठाकुर ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “आज मंडी में प्रदेश संगठन महामंत्री श्री सिद्धार्थन जी के साथ जिला भाजपा कार्यालय का शुभारंभ किया। यह नया कार्यालय क्षेत्र में संगठन की मजबूती के साथ-साथ जनसेवा, विकास और सुशासन के हमारे संकल्प को और गति देने का केंद्र बनेगा। उपस्थित सभी विधायकगण, पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।” कार्यालय का शुभारंभ करने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान जयराम ठाकुर ने लेह में हुई हिंसक घटनाओं की कड़ी निंदा की। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। जयराम ठाकुर ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन हिंसा का कोई स्थान नहीं। जो लोग ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। केंद्र सरकार इस मामले पर पूरी तरह नजर बनाए हुए है और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं,, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि वोट चोरी कर सत्ता चलाने वाली कांग्रेस आज भाजपा पर ही आरोप लगाने का काम कर रही है। राहुल गांधी की देश में कोई स्वीकार्यता नहीं है, उनकी बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेता। उनके आरोपों का कोई महत्व नहीं रह जाता और देश इस सच्चाई को देख रहा है। भाजपा के इस कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा संगठन मंत्री सिद्धार्थन, मंडी सदर के विधायक अनिल शर्मा, बल्ह के विधायक इंद्र सिंह गांधी, प्रदेश महामंत्री पायल वैद्य और मंडी जिला भाजपा अध्यक्ष निहाल चंद शर्मा समेत पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।  

देश में शुरू हो रहा स्वदेशी 4G, पीएम मोदी करेंगे BSNL की नई सेवाओं का उद्घाटन

नई दिल्ली  बीएसएनएल के इतिहास का एक और खास दिन नजदीक आ रहा है। शनिवार को बीएसएनएल के 4G नेटवर्क की शुरुआत होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीएसएनएल की 4G स्‍टैक का शुभारंभ करेंगे, जो देशभर में 98 हजार साइटों पर रोलआउट होगा। बीएसएनएल 4जी इसलिए भी खास है, क्‍योंकि यह पूरी तरह से स्‍वदेशी तकनीक पर तैयार हुआ है। अब भारत दुनिया का पांचवां ऐसा देश बन जाएगा जो 4G से जुड़े सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर को खुद बना सकता है और सप्‍लाई कर सकता है। सर्विस के लॉन्‍च होते ही भारत के सभी टेलिकॉम ऑपरेटर 4G से लैस हो जाएंगे। जियो, एयरटेल, वीआई जैसी कंपनियां पहले से ही 4G और 5G नेटवर्क पर हैं। ज्‍योत‍िराद‍ित्‍य सिंधिया ने किया पोस्‍ट केंद्रीय मंत्री ज्‍योत‍िराद‍ित्‍य सिंधिया ने इस संबंध में एक पोस्‍ट किया है। उन्‍होंने ल‍िखा- भारत की दूरसंचार यात्रा में एक ऐतिहासिक छलांग। बीएसएनएल के 25 साल पूरे होने के अवसर पर शनिवार को प्रधानमंत्री दो ऐतिहासिक इन‍िशिएट‍िवप को अनवील करेंगे। उन्‍होंने लिखा है कि बीएसएनएल 4G स्टैक का का नेशनवाइड रोलआउट कल 98 हजार साइटों पर किया जाएगा। इसके अलावा देश में 4G नेटवर्क की शुरुआत की जाएगी। ज्‍योत‍िरादित्‍य सिं‍धिया ने लिखा है कि बीएसएनएल 4जी से देश का कोई कोना अछूता नहीं रहेगा। TCS ने इंटीग्रेट करवाया पूरा सिस्‍टम बीएसएनएल 4जी के रोलआउट में टाटा कंसल्‍टेंसी सर्विसेज का भी अहम रोल है। रिपोर्ट के अनुसार, 4जी के लिए कोर नेटवर्क को सी-डॉट यानी सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलिमैट‍िक्‍स ने तैयार किया है। रेड‍ियो एक्‍सेस नेटवर्क को तेजस नेटवर्क ने डेवलप किया है और पूरे सिस्‍टम को टीसीएस ने इंटीग्रेट किया है। 5G में हो सकेगा अपग्रेड प्राइवेट टेलिकॉम कंपनियों के मुकाबले में बीएसएनएल 4जी लॉन्‍च करने में भले पीछे रह गई हो, लेकिन 5जी में वह बराबर की टक्‍कर दे सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बीएसएनएल के 4जी नेटवर्क को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसे आसानी से 5जी में अपग्रेड किया जा सकेगा। बीएसएनएल इस साल के आखिर तक दिल्‍ली और मुंबई से अपनी 5जी सेवाएं शुरू कर सकती है। बीएसएनएल 4जी रोलआउट का फायदा उसके 9 करोड़ से ज्‍यादा वायरलैस सब्‍सक्राइबर्स को मिलने की उम्‍मीद है। कई यूजर्स जिन्‍होंने मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्‍ट‍िविटी की वजहों से बीएसएनएल का साथ छोड़ा, वह भी वापस लौट सकते हैं, क्‍योंकि सरकारी कंपनी के रिचार्ज प्‍लान, प्राइवेट कंपनियों से सस्‍ते हैं।

लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को सेना में मिला प्रमोशन, मालेगांव ब्लास्ट केस से बरी होने के बाद नया मुकाम

नई दिल्ली मालेगांव केस में बरी हुए लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित को प्रमोशन मिला है। खबर है कि उन्हें कर्नल रैंक पर प्रमोट किया गया है। कुछ हफ्तों पहले ही NIA यानी नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की विशेष अदालत ने उन्हें पूर्व भारतीय जनता पार्टी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत 7 लोगों के साथ बरी किया है। अदालत का कहना था कि इस बात के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले थे, जिससे साबित हो कि आरडीएक्स लाने या बम बनाने में पुरोहित की भूमिका हो। सोशल मीडिया पर पुरोहित के पिपिंग समारोह की तस्वीरें भी जमकर शेयर की जा रहीं हैं। वह साल 1994 में मराठा लाइट इन्फेंट्री में शामिल हुए थे। वह जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन्स में शामिल रहे हैं। पिपिंग समारोह उस आयोजन को कहा जाता है, जहां किसी अधिकारी को उसके प्रमोशन के समय कंधे पर नए पद के चिन्ह लगाए जाते हैं। 31 जुलाई को बरी होने के बाद पुणे पहुंचे पुरोहित ने कहा था, 'एक सैन्यकर्मी के रूप में मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि कोई दुश्मन भी मेरी देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति निष्ठा पर सवाल नहीं उठा सकता। अदालत में अपनी दलीलों के दौरान मैंने इस बात पर जोर दिया कि मुझे कुछ भी कहा जाए, लेकिन आतंकवादी या देशद्रोही नहीं कहा जाए।' मालेगांव ब्लास्ट मुंबई से लगभग 200 किलोमीटर दूर मालेगांव शहर में 29 सितंबर 2008 को एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल पर लगाए गए विस्फोटक उपकरण में विस्फोट हुआ था, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई और 101 घायल हुए थे। इस मामले में कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन केवल सात लोगों पर ही मुकदमा चला, क्योंकि आरोप तय होने के समय बाकी सात को बरी कर दिया गया था। ठाकुर और पुरोहित के अलावा, आरोपियों में मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी शामिल थे। जब पुरोहित को एटीएस ने गिरफ्तार किया था तब वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर कार्यरत थे। उनके खिलाफ उन बैठकों में शामिल होने का आरोप था, जहां विस्फोट की कथित साजिश रची गई थी। पुरोहित को नवंबर 2008 में गिरफ्तार किया गया था और सितंबर 2017 में उच्चतम न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी थी। अदालत को दिए अपने अंतिम बयान में, पुरोहित ने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान एटीएस के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष ने उनके खिलाफ झूठा मामला गढ़ा है।