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53 हजार करोड़ की डील! बिहार में अडानी बनाएंगे विशाल थर्मल पावर प्लांट

पटना   गौतम अडानी की कंपनी अडानी पावर लिमिटेड ने गुरुवार को एक बड़ी घोषणा की। कंपनी को बिहार में बिजली सप्लाई करने का एक बड़ा मौका मिला है। बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड (BSPGCL) ने अडानी पावर को एक लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) दिया है। इस LoI के अनुसार, अडानी पावर बिहार को 2274 मेगावाट बिजली देगी। यह बिजली भागलपुर जिले में बनने वाले एक नए थर्मल पावर प्रोजेक्ट से आएगी। यह प्रोजेक्ट 2400 मेगावाट का होगा। कंपनी ने बताया कि यह प्लांट पीरपैंती गांव में बनेगा। इस प्लांट को बनाने में लगभग 3 अरब डॉलर (53 हजार करोड़ रुपये) का निवेश होगा। अडानी पावर ने एक बयान में कहा कि बिजली उत्तरी बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) और दक्षिणी बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) को दी जाएगी। यानी, उत्तरी और दक्षिणी बिहार में इसी प्लांट से बिजली जाएगी। कंपनी को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें औपचारिक लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) मिल जाएगा। इसके बाद राज्य सरकार के साथ पावर सप्लाई एग्रीमेंट (PSA) साइन किया जाएगा। लगाई सबसे कम बोली कंपनी ने बताया कि LoI एक बोली प्रक्रिया के बाद जारी किया गया। इस बोली में अडानी पावर सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी। अडानी पावर ने 6.075 रुपये प्रति किलोवाट आवर (KWh) की दर से बिजली सप्लाई करने की बात कही है।बिजली एक नए 3×800 मेगावाट के अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल प्लांट से आएगी। यह प्लांट डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन और ऑपरेट (DBFOO) मॉडल के तहत बनेगा। DBFOO मॉडल का मतलब है कि अडानी पावर ही इस प्लांट को डिजाइन करेगी, बनाएगी, इसमें पैसा लगाएगी, इसकी मालिक होगी और इसे चलाएगी भी। कंपनी ने कहा- उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा अडानी पावर के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) एस. बी. ख्यालिया ने कहा, 'हमें बिहार में 2,400 मेगावाट का थर्मल पावर प्रोजेक्ट बनाने और चलाने का मौका मिला है, इससे हम बहुत खुश हैं। हम लगभग 3 अरब डॉलर के निवेश से एक नया प्लांट बनाएंगे। इससे बिहार में उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। हमारा प्लांट आधुनिक होगा और कम प्रदूषण करेगा। हम बिहार को भरोसेमंद, सस्ती और अच्छी क्वालिटी की बिजली देंगे।' कम प्रदूषण, ज्यादा नौकरी ख्यालिया ने कहा कि यह प्लांट अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगा। यह तकनीक कोयले को जलाने की एक आधुनिक तकनीक है, जिससे कम प्रदूषण होता है और बिजली ज्यादा बनती है। अडानी पावर के अनुसार, इस प्रोजेक्ट से निर्माण के दौरान लगभग 10,000 से 12,000 नौकरियां मिलेंगी। जब प्लांट चालू हो जाएगा तो लगभग 3000 लोगों को रोजगार मिलेगा। कब से होगा शुरू? कंपनी ने बताया कि प्रोजेक्ट की पहली यूनिट तय तारीख से 48 महीनों के अंदर चालू हो जाएगी। वहीं, आखिरी यूनिट 60 महीनों के अंदर चालू हो जाएगी। यानी करीब 4 से 5 साल में पूरा प्लांट काम करने लगेगा। इस पावर प्लांट के लिए कोयला भारत सरकार की SHAKTI (Scheme for Harnessing and Allocating Koyala Transparently in India) पॉलिसी के तहत मिलेगा।  

शेयर बाजार ने दिखाई मजबूती, ट्रंप की धमकियां और टैरिफ भी नहीं डिगा सके भरोसा

मुंबई डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत पर लगाए गए 25 फीसदी के टैरिफ को बुधवार को बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया. इसका कोई बड़ा असर गुरुवार को शेयर बाजार में देखने को नहीं मिला. हालांकि, सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स गिरावट के साथ लाल निशान पर जरूर ओपन हुए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स जहां खुलते ही 250 अंक से ज्यादा टूटा और फिर अचानक रिकवरी मोड में नजर आने लगा, तो निफ्टी ने भी मामूली गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की. हालांकि, ट्रंप के टैरिफ का डर सिर्फ बाजार ही नहीं, बल्कि भारतीय करेंसी रुपया पर भी नहीं दिखा और ये डॉलर के मुकाबले तेजी के साथ ओपन हुआ. Rupee, अमेरिकी डॉलर की तुलना में 3 पैसे की बढ़त के साथ 87.69 पर ओपन हुआ. ट्रंप टैरिफ के डर से बेअसर बाजार ट्रंप के भारत पर टैरिफ बढ़ाने के बाद शेयर बाजार की शुरुआत सुस्ती के साथ हुई. सेंसेक्स अपने पिछले बंद 80,543.99 की तुलना में 80,262 पर ओपन हुआ, लेकिन फिर तेज रिकवरी मोड में नजर आया और कुछ ही मिनटों में ट्रंप के टैरिफ डर को दरकिनार करते हुए 80,421 पर ट्रेड करने लगा. निफ्टी की भी चाल सेंसेक्स की तरह ही रही और ये भी 24574 के अपने पिछले बंद की तुलना में बेहद मामूली गिरावट के साथ 24,464 पर खुला और फिर अचानक 24,542 पर पहुंच गया. इसकी चाल देखकर ऐसा नहीं लगता कि Trump Tarifff का बाजार में कोई डर है.   1433 शेयर गिरावट में खुले शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने पर 751 कंपनियों के शेयरों ने गिरावट के साथ लाल निशान पर कारोबार की शुरुआत की थी, तो वहीं 1433 कंपनियों के स्टॉक्स ने गिरावट के साथ लाल निशान पर कारोबार शुरू किया. इसके अलावा 150 शेयरों की स्थिति में किसी भी तरह का कोई बदलाव देखने को नहीं मिला. शुरुआती कारोबार में जिन शेयरों में तेज गिरावट आई, उनमें Kotak Mahindra Bank, Tata Steel, SBI, Coal India और Jio Financial शामिल रहे. इसके अलावा जो शेयर ट्रंप के टैरिफ के बावजूद उछाल मारते नजर आए, उनमें Hero MotoCorp, Cipla, Bajaj Finserv, Maruti Suzuki, JSW Steel शामिल थे.  एक्सपर्ट भी सीमित असर का जता रहे थे अनुमान शेयर बाजार में एक्सपर्ट्स के अनुमानों के मुताबिक ही 50% टैरिफ का मामूली असर देखने को मिल रहा है. बता दें कि ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि बाजार अब ट्रंप टैरिफ में उतार-चढ़ाव के असर को पूरी तरह से समझ चुका है और बाजार में यह गिरावट सीमित रहेगी, इसके पीछे की एक बड़ी वजह ये भी है कि भारतीय बाजारों में इससे भी खराब स्थिति का सामना भी किया है और इंडेक्स पहले से ही ओवरसोल्ड स्थिति में हैं. इन 10 शेयरों में तूफानी तेजी बाजार में शेयरों की चाल पर नजर डालें, तो टैरिफ के डर से बेअसर लार्जकैप कंपनियों में शामिल ITC, Titan, Trent जैसे शेयर ग्रीन जोन में ट्रेड कर रहे थे. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल Lupin Share (4.50%), Tornt Power Share (2%) और Coforge Share (1.95%) की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे. स्मॉलकैप कंपनियों में Rain Share (10.25%), ITI Ltd Share (6.65%), Kirlosker Brothers Share (5.75%), Data Matics Share (5.52%) की उछाल के साथ ट्रेड कर रहे थे. 

भारतीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमत में भारी उछाल, 22 कैरेट गोल्ड का रेट भी 1 लाख के पार

मुंबई  भारतीय सर्राफा बाजार में आज (बुधवार), 6 अगस्त को सोना-चांदी की कीमतों में उछाल देखने को मिला है. 24 कैरेट का 10 ग्राम शुद्ध सोना 98 हजार रुपये के पार है तो वहीं, 999 शुद्धता वाली चांदी की कीमत 1 लाख 13 हजार रुपये किलो से अधिक है. आज क्या है सोने का रेट? इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) की आधिकारिक वेबसाइट ibjarates.com के अनुसार, सर्राफा बाजार में 6 अगस्त 2025 की सुबह 999 शुद्धता वाले 24 कैरेट सोने का रेट 100672 रुपये प्रति 10 ग्राम जबकि 999 शुद्धता वाली चांदी की कीमत 113576 रुपये प्रति किलो है.

लाल निशान पर बाजार बंद, अमेरिकी टैरिफ ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

मुंबई  भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 308.47 अंक या 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80,710.25 और निफ्टी 73.20 अंक या 0.30 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,649.55 पर था। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट हुई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 225.50 अंक या 0.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,206.85 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 28.85 अंक या 0.16 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,864.55 पर था। निफ्टी में आईटी, पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा, एफएमसीजी, रियल्टी, मीडिया और एनर्जी इंडेक्स लाल निशान में थे, जबकि मेटल, ऑटो और कमोडिटी इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए। सेंसेक्स पैक में टाइटन, मारुति सुजुकी, ट्रेंट, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, एसबीआई, एलएंडटी, एचसीएल टेक और एक्सिस बैंक टॉप गेनर्स थे। रिलायंस, इन्फोसिस, आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल (जोमैटो), बीईएल, एचडीएफसी बैंक, पावर ग्रिड और आईटीसी टॉप लूजर्स थे। जानकारों के मुताबिक, बाजार के गिरने की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर और टैरिफ लगाए जाने की धमकी को माना जा रहा है। आशिका इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपने नोट में कहा, "क्षेत्रवार रुझान मिले-जुले रहे, ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में अपेक्षाकृत मजबूती देखी गई, जबकि ज्यादातर अन्य क्षेत्र नुकसान में रहे। खास तौर पर, तेल और गैस, फार्मा, निर्माण और उपभोक्ता वस्तुओं में भारी गिरावट देखी गई।" नोट में आगे कहा कि मौद्रिक नीति से पहले बाजार में निवेशकों के बीच सर्तकता देखी गई। सत्र के दूसरे भाग में बैंकिंग शेयरों में बिकवाली हुई। बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई थी। सुबह करीब 9 बजकर 58 मिनट पर सेंसेक्स 384.11 अंक या 0.47 प्रतिशत की गिरावट के बाद 80,634.61 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 113.80 अंक या 0.46 प्रतिशत की गिरावट के बाद 24,608.95 पर था।

ED की रडार पर अनिल अंबानी, लोन घोटाले में पूछताछ का दौर शुरू

मुंबई  रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी से 17,000 करोड़ रुपये के बैंक लोन फ्रॉड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) पूछताछ कर रही है. संघीय जांच एजेंसी ने 1 अगस्त को उन्हें समन जारी करके आज अपने नई दिल्ली दफ्तर में हाजिर होने के लिए कहा था. वह मंगलवार सुबह मुंबई से फ्लाइट लेकर दिल्ली पहुंचे और पूछताछ के लिए ईडी दफ्तर में पेश हुए.  पूछताछ का नेतृत्व असिस्टेंट डायरेक्टर रैंक के अफसर द्वारा किया जा रहा है. वहीं डेप्यूटी डायरेक्टर और जॉइंट डायरेक्ट रैंक के अधिकारी इस इंटेरोगेशन की निगरानी कर रहे हैं. ईडी ने कुछ दिन पहले ही अनिल अंबानी की कंपनियों से जुड़े 35 ठिकानों और व्यक्तियों के यहां छापेमारी की थी और महत्वपूर्ण दस्तावेज, कम्प्यूटर हार्ड ड्राइव समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त किए थे. जांच एजेंसी ने बैंकों को पत्र लिखकर अनिल अंबानी की कंपनियों को अप्रूव्ड लोन का ब्योरा भी मांगा है. ईडी ने 12-13 सार्वजनिक और निजी बैंकों को पत्र लिखकर रिलायंस हाउसिंग फाइनेंस, रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस को दिए गए लोन पर की गई उचित जांच-पड़ताल का विवरण मांगा है. सूत्रों ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक से भी विवरण मांगा गया है. ₹17000 करोड़ के लोन फ्रॉड का मामला ईडी की प्रारंभिक जांच में येस बैंक से लगभग 3,000 करोड़ रुपये के अवैध लोन ट्रांसफर (2017 से 2019 की अवधि) का पता चला है. बाद में अधिकारियों को रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड से जुड़े 14,000 करोड़ रुपये से अधिक के लोन फ्रॉड के बारे में पता चला. इसके बाद गत 24 जुलाई को ईडी ने दिल्ली और मुंबई में कम से कम तीन दिनों तक 35 ठिकानों पर छापेमारी की, जो 50 कंपनियों और 25 लोगों से जुड़े हैं. अनिल अंबानी की कंपनियों के कई अधिकारियों के यहां भी ईडी ने छापे मारे थे और 25 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की थी. इस कार्रवाई के बाद अनिल अंबानी की कंपनियों के शेयर बुरी तरह टूट गए. रिलायंस इंफ्रा से लेकर रिलायंस पावर तक के शेयरों में लोअर सर्किट लग गया. पिछले पांच दिनों में ही रिलायंस पावर का शेयर 11 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है. वहीं रिलायंस इंफ्रा के शेयर में 10 फीसदी की गिरावट आई है. इस मामले में ED ने की पहली गिरफ्तारी संघीय जांच एजेंसी ने पिछले सप्ताह इस केस के संबंध में पहली गिरफ्तारी की थी. ईडी ने बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर पार्थ सारथी बिस्वाल को 1 अगस्त को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 68.2 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी जमा करने के आरोप में गिरफ्तार किया था. उन्होंने बताया कि ये बैंक गारंटी रिलायंस पावर की ओर से दी गई थी. अनिल अंबानी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है. CBI के बाद ED ने दर्ज किया था मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दो एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था. ईडी सूत्रों के मुताबिक य​ह जांच मुख्य रूप से 2017-2019 के बीच अनिल अंबानी की कंपनियों को येस बैंक द्वारा दिए गए अवैध लोन डायवर्जन के आरोपों से संबंधित है. उनके मुताबिक अनिल अंबानी की कंपनियों को लोन दिए जाने से ठीक पहले, येस बैंक के प्रमोटरों को उनके व्यवसाय में धन प्राप्त हुआ था. संघीय जांच एजेंसी रिश्वत और लोन के इस गठजोड़ की जांच कर रही है. ईडी ने अपनी प्रारंभिक जांच में कई अनियमितताएं पाई हैं, जिनमें खराब या असत्यापित वित्तीय स्रोतों वाली कंपनियों को लोन जारी करना, लोन लेने वाली संस्थाओं में एक ही निदेशक और पते का उपयोग, लोन फाइलों में आवश्यक दस्तावेजों का नहीं होना, शेल कंपनियों के नाम लोन मंजूर करना, मौजूदा कर्ज को चुकाने के लिए नए लोन देना शामिल है. सेबी ने अनिल अंबानी की कंपनी, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) में गंभीर अनियमितताओं को उजागर करने वाली एक रिपोर्ट पेश की है. इसमें कहा गया है कि कंपनी का कॉरपोरेट लोन पोर्टफोलियो वित्त वर्ष 2017-18 के 3,742 करोड़ रुपये से लगभग दोगुना होकर वित्त वर्ष 2018-19 में 8,670 करोड़ रुपये हो गया. ED एक्शन पर रिलायंस ग्रुप की प्रतिक्रिया अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप की दो कंपनियों रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने 26 जुलाई को स्टॉक एक्सचेंज को सूचित करते हुए कहा था कि वे ईडी की इस कार्रवाई को स्वीकार करते हैं, लेकिन छापों का उनके बिजनेस ऑपरेशन, फाइनेंशियल परफॉर्मेंस, शेयर होल्डर्स, स्टाफ या किसी अन्य स्टेकहोल्डर्स पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. कई नियामक और वित्तीय निकायों ने अपने निष्कर्ष ईडी के साथ साझा किए हैं, जिनमें नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB), सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI), नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) और बैंक ऑफ बड़ौदा शामिल हैं. एसबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और खुद अनिल अंबानी को 'फ्रॉड अकाउंट्स' के रूप में क्लासिफाइड किया है. यह पहली बार नहीं है जब बैंक ने किसी अकाउंट को धोखाधड़ी वाला बताया है. एसबीआई ने इससे पहले नवंबर 2020 में RCom और अनिल अंबानी के बैंक खातों को फ्रॉड अकाउंट्स घोषित किया था और 5 जनवरी, 2021 को सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी. दिल्ली हाई कोर्ट ने 6 जनवरी, 2021 यथास्थिति का आदेश जारी किया, जिसके बाद शिकायत वापस ले ली गई.

आर्थिक मोर्चे पर भारत का कमाल, 110 अरब डॉलर से अमेरिका-चीन की टेंशन बढ़ी

नई दिल्ली भारत में सेमीकंडक्‍टर का उपयोग बड़े स्तर पर होता है और अब भारत कंजम्‍प्‍शन के अलावा, मैन्‍युफैक्‍चरिंग भी करने लगा है. भारत में तेजी से चिप (India Semiconductor Market) बनाने का काम हो रहा है, जिस कारण सेमीकंडक्‍टर इंडस्‍ट्री ग्रो कर रही है. घरेलू च‍िप मार्केट 2023 में 38 अरब डॉलर तक था और वित्त वर्ष 2024-25 में 45 से 50 अरब डॉलर था, जो 2030 तक 100 से 110 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.  अगर भारत यह टारगेट हासिल कर लेता है तो वह US चीन की कैटेगरी में शामिल हो जाएगा, जिनकी सेमीकंडक्‍टर इंडस्‍ट्रीज ट्रिलियन डॉलर की हैं. 2023 में चीन का सेमीकंडक्‍टर मार्केट 177.8 अरब डॉलर था, जो ग्‍लोबल मार्केट का 32 फीसदी हिस्‍सा है. वहीं मैन्‍युफैक्चरिंग की बात करें तो यह 16 से 18% उत्‍पादन करता है. अमेरिका का चिप मार्केट साल 2023 में 130 अरब डॉलर था, जो ग्‍लोबल मार्केट का 25 फीसदी है, लेकिन US 12 फीसदी ही उत्‍पादन करता है.  भारत उभरता हुआ चिप मार्केट  भारत का साल 2024 में कुल सेमीकंडक्‍टर मार्केट 45 अरब डॉलर था, जो कुल ग्‍लोबल मार्केट में 1 फीसदी उत्‍पादन करता है. हालांकि भारत का चिप मार्केट 16% ग्रोथ से बढ़ रहा है यानी 2030 तक इसकी ग्‍लोबल मार्केट में 6.21 फीसदी तक की हिस्‍सेदारी होगी. ऐसे में कहा जा सकता है कि भारत ग्‍लोबल सेमीकंडक्‍टर मार्केट में एक उभरता हुआ देश है.  इस वजह से बढ़ रहा सेमीकंडक्‍टर का उत्‍पादन  एक ऑफिशियल स्‍टेटमेंट के मुताबिक, इस ग्रोथ को 76000 करोड़ रुपये के खर्च से शुरू किए गए इंडिया सेमीकंडक्‍टर मिशन और सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम जैसी सेमीकंडक्‍टर का उत्‍पादन बढ़ रहा है. इनिशिएटिव ऑन क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (ICET) जैसे ग्‍लोबल सहयोग ने इस क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी को और बढ़ाया है.  फॉक्‍सकॉन और एचसीएल का ज्‍वाइंट वेंचर  देश का चिप निर्माण इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर धीरे-धीरे साइज बदल रहा है. मई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत सेमीकंडक्‍टर मिशन के तहत एक सेमीकंडक्‍टर निर्माण सुविधा को मंजूरी दी, जो HCL और फॉक्‍सकॉन के बीच एक ज्‍वाइंट वेंचर है. यह प्‍लांट मोबाइल फोन, लैपटॉप, कार और PC जैसे उपकरणों के लिए डिस्‍प्‍ले ड्राइवर चिप्‍स का निर्माण करेगा. इस प्‍लांट को 20 हजार वेफर मंथली की क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है. इससे मंथली 36 मिलियन चिप्‍स का उत्‍पादन होने की उम्‍मीद है.  भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप का उत्पादन भी इसी वर्ष शुरू होने वाला है और पांच मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट अभी बन रही हैं. भारत सिर्फ एक मार्केट ही नहीं, बल्कि एक उत्‍पादन सेंटर के तौर पर भी महत्‍वपूर्ण ग्‍लोबल हिस्‍सेदारी हासिल करने के लिए भी तैयार है. 

AI क्रांति या तबाही? विशेषज्ञ बोले– आने वाले 5 सालों में 80 फीसदी नौकरियां जाएंगी

 नई दिल्ली दशकों पहले कंप्यूटर के आने पर जैसी हलचल मची थी, वैसी ही स्थिति अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर देखी जा रही है। कोई इसे लेकर आशंकित है कि नौकरियां चली जाएंगी तो कुछ लोगों को लगता है कि इससे तमाम काम आसान और पारदर्शी होंगे। इस बीच भारतीय अमेरिकी निवेशक विनोद खोसला ने बड़ा अनुमान जाहिर किया है। उनका कहना है कि अगले 5 सालों में 80 फीसदी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। निखिल कामथ के साथ पॉडकास्ट में विनोद खोसला ने कहा इन नौकरियों में लगे लोगों का काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से होने लगेगा। यही नहीं उन्होंने छात्रों को भी जागरूक करते हुए कहा कि भविष्य के छात्रों को स्पेशलिस्ट बनने की बजाय जनरलिस्ट बनना होगा यानी उन्हें तमाम चीजों की जानकारी रखनी होगी। विनोद खोसला ने उम्मीद भरी एक बात भी की। उन्होंने कहा कि भले ही मौजूदा तमाम नौकरियां चली जाएंगी, लेकिन यह भी ध्यान देने की बात है कि कुछ अवसर भी इससे पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर भी पैदा होंगे, जिनके बारे में आज हम सोच भी नहीं सकते। उन्होंने कहा कि ऐसी बहुत सी शानदार नौकरियां हैं, जिन्हें इंसान कर रहे हैं। उन कामों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किया जाएगा। ऐसी करीब 80 पर्सेंट नौकरियां होंगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2040 तक बहुत सी चीजें बदल जाएंगी। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे होंगे कि कई काम तो खत्म ही हो जाएंगे। यदि कोई उन्हें करना चाहेगा तो वह उनका शौक होगा, लेकिन जरूरत नहीं होगी। विनोद खोसला का यह अनुमान ऐसे समय में आया है, जब दिग्गज टेक कंपनियों में छटनी का दौर है। इन कंपनियों का कहना है कि वे वर्कफोर्स का पुनर्गठन कर रही हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि चीजें बदल रही हैं। हाल ही में देश की सबसे बड़ी टेक कंपनी कही जाने वाली टीसीएस ने 12 हजार कर्मचारियों की छटनी का ऐलान किया है। इसके अलावा नीतियों में भी कुछ बदलाव के संकेत दिए हैं, जिससे भविष्य में भी नौकरियों पर तलवार रहेगी।

सारा तेंदुलकर को मिला इंटरनेशनल सम्मान, ऑस्ट्रेलिया टूरिज्म की बनीं ब्रांड एम्बेसडर

मुंबई  ऑस्ट्रेलिया की सरकार अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को अपने यहां छुट्टियां बिताने के लिए आकर्षित करने के लिए नया टूरिज्म कैंपेन लॉन्च करने जा रही है। इस खास अभियान के लिए उसने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर की बेटी सारा तेंदुलकर को ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया है। 13 करोड़ डॉलर के इस कैंपेन का नाम है 'कम ऐंड से जी-डे'। इस खास अभियान का मकसद अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को ऑस्ट्रेलिया में छुट्टियां बिताने और टूर प्लान करने के लिए प्रोत्साहित करना है। अभियान की शुरुआत 7 अगस्त से चीन से होगी और उसके बाद इस साल के आखिर तक भारत, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे दूसरे बड़े बाजारों में इसे लॉन्च किया जाएगा। कम ऐंड से जी डे कैंपेन का यह दूसरा सीजन है। सबसे पहले इसे अक्टूबर 2022 में लॉन्च किया गया था। ये कैंपेन अगले 2 साल तक चलेगा और इसके खत्म होने तक ऑस्ट्रेलियाई सरकार 2022 से अब तक इसमें 25 करोड़ डॉलर का निवेश कर चुकी होगी। स्पेशल टूरिज्म कैंपेन को जब भारत में लॉन्च किया जाएगा तो सारा तेंदुलकर उसका चेहरा होंगी। अमेरिका में इस कैंपेन के लिए ऑस्ट्रेलिया के महान वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशनिस्ट स्टीव इर्विन के बेटे रॉबर्टन इर्विन चेहरा होंगे। इसी तरह ब्रिटेन में फूड राइटर और टीवी कुक निजेला लॉसन इस अभियान की चेहरा होंगी। इस अभियान के तहत जिन देशों के पर्यटकों को लुभाने की कोशिश होगी, उन देशों की चर्चित हस्तियों को इसका चेहरा बनाया जाएगा। चीन में एक्टर योश हू जबकि जापान में मीडिया पर्सनैलिटी और कॉमेडियन अबरेरु कुन इस अभियान के ब्रांड एम्बेसडर होंगे।

अनिल अंबानी पर ईडी का कड़ा प्रहार, बैंकिंग नेटवर्क तक पहुंची जांच की आंच

 मुंबई केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक तरफ रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के समूह की कंपनियों के खिलाफ करोड़ों रुपये के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें 5 अगस्त को पूछताछ के लिए समन भेजा है, तो दूसरी तरफ दर्जन भर ऐसे बैंकों को चिट्ठी लिखकर उनकी मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं, जिन्होंने उनकी कंपनियों को लोन दिए थे। ईडी ने उन बैंकों को पत्र लिखकर उनकी कंपनियों को दिए गए ऋणों का विवरण मांगा है। मामले से जुड़े लोगों ने सोमवार को यह जानकारी दी।  रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने 12-13 सार्वजनिक और निजी बैंकों को पत्र लिखकर रिलायंस हाउसिंग फाइनेंस, रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस को दिए गए लोन का विवरण माँगा है। सूत्रों ने बताया कि ईडी ने जिन बैंकों को चिट्ठी लिखी है, उनमें भारतीय स्टेट बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक शामिल है। जो लोन बन गए NPA… रिपोर्ट में कहा गया है कि ईडी अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप को दिए गए ऋण के मामले में उन लोन्स को स्वीकृत करने और जारी करने वाले बैंक अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए तलब कर सकती है, जो बाद में NPA बन गए। सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय ने ऋण मंजूरी की प्रक्रिया, चूक की समय-सीमा और ऐसे खातों पर की गई वसूली कार्रवाई का विवरण भी माँगा है। पिछले हफ्ते पहली गिरफ्तारी एजेंसी ने पिछले हफ्ते अनिल अंबानी के रिलायंस समूह की कंपनियों के खिलाफ 3,000 करोड़ रुपये के ऋण धोखाधड़ी मामले में पहली गिरफ्तारी की थी। बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पार्थ सारथी बिस्वाल को शुक्रवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 68.2 करोड़ रुपये की फर्जी गारंटी जमा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि ये गारंटी रिलायंस पावर की ओर से दी गई थी। 3,000 करोड़ रुपये के कथित ऋण हेराफेरी का मामला बता दें कि ईडी 2017 और 2019 के बीच यस बैंक द्वारा रिलायंस समूह की कंपनियों को दिए गए लगभग 3,000 करोड़ रुपये के कथित ऋण हेराफेरी की जांच कर रही है। एजेंसी ने पाया है कि बैंक के प्रवर्तकों को ऋण स्वीकृत होने से ठीक पहले भुगतान भी प्राप्त हुआ था, जो एक लेन-देन व्यवस्था का संकेत देता है। एजेंसी ने पिछले महीने इस मामले से जुड़ी 50 से अधिक फर्मों पर छापे मारे थे। अंबानी के खिलाफ एक लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है।

Vivo Y400 5G की एंट्री, सुहाना खान की ग्लैमरस मौजूदगी से हुआ धमाकेदार लॉन्च

मुंबई  Vivo ने भारत में अपना नया स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है, जिसका नाम Vivo Y400 5G है. यह एक मिड रेंज स्मार्टफोन है और इसमें कई अच्छे फीचर्स दिए गए हैं. इस स्मार्टफोन के लिए कंपनी ने SRK की बेटी सुहाना खान को ब्रांड एम्बेसडर बनाया गया है. Vivo Y400 5G में 6,000mAh की बैटरी और बेहतरीन कलर ऑप्शन दिए हैं. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.  Vivo Y400 5G की भारत में शुरुआती कीमत 21,999 रुपये है, जिसमें 8GB Ram + 128GB स्टोरेज मिलती है. वहीं, 8GB RAm + 256GB स्टोरेज वेरिएंट के लिए 23,999 रुपये खर्च करने होंगे.   7 अगस्त से शुरू होगी सेल  Vivo Y400 5G  दो कलर वेरिएंट Glam White और Olive Green कलर में आता है. इसकी पहली सेल 7 अगस्त से शुरू होगी, जो Vivo India e-store, Flipkart, Amazon और चुनिंदा रिटेल स्टोर्स पर उपलब्ध होगा. प्री बुकिंग करने वाले यूजर्स को चुनिंदा बैंक के कार्ड्स पर 10 परसेंट तक का डिस्काउंट मिलेगा.  Vivo Y400 5G  के स्पेसिफिकेशन्स  Vivo Y400 5G  में 6.67-inch full-HD+ AMOLED डिस्प्ले दिया गया है. इसमें 120Hz Refresh Rate और 1800 Nits की पीक ब्राइटनेस मिलेगी.  Vivo Y400 5G  का प्रोसेसर और रैम  Vivo का यह लेटेस्ट हैंडसेट Snapdragon 4 Gen 2 चिपसेट के साथ आता है. इसमें 8GB LPDDR4X RAM और 256GB की UFS 3.1 स्टोरेज मिलेगी.  Vivo Y400 5G का कैमरा  Vivo Y400 5G के कैमरा की बात करें तो इसमें बैक पैनल पर डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है. इसमें 50-megapixel Sony IMX852 प्राइमरी कैमरा सेंसर है. सेकेंडरी कैमरा 2-Megapixel Depth सेंसर दिया है. इसमें 32MP का फ्रंट कैमरा दिया है. फोटोग्राफी और वीडियो ग्राफी के लिए खास AI Modes का यूज किया है.  Vivo Y400 5G की बैटरी और अन्य फीचर्स Vivo Y400 5G में 6,000mAh की बैटरी दी गई है, जिसके साथ 90W का वायर चार्जिंग सपोर्ट मिलता है. इसमें इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया गया है, जो बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के साथ आता है. इस स्मार्टफोन को  IP68+IP69 रेटिंग मिली है जो इसे वॉटर और डस्ट रेसिस्टेंस बनाता है.