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पेट्रोल-डीजल के साथ अब CNG और हाइड्रोजन की सख्त निगरानी: उपभोक्ता सुरक्षा के लिए नई व्यवस्था लागू

नई दिल्ली भारत में क्लीन एनर्जी और ग्रीन फ्यूल को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ CNG, LNG और हाइड्रोजन फ्यूल डिस्पेंसर की भी सख्ती से जांच और सत्यापन किया जाएगा। 24 मई 2026 को उपभोक्ता मामले विभाग (Department of Consumer Affairs) ने लीगल मेट्रोलॉजी रूल्स (Legal Metrology Rules) में बड़ा बदलाव करते हुए GATC (Government Approved Test Centres) के दायरे को बढ़ा दिया है। इसका मतलब यह है कि अब देशभर में इस्तेमाल होने वाले नए जमाने के ईंधन डिस्पेंसर भी सरकारी मानकों के तहत चेक किए जाएंगे, ताकि ग्राहकों को सही मात्रा में फ्यूल मिल सके और किसी तरह की गड़बड़ी न हो। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब भारत तेजी से क्लीन फ्यूल की ओर बढ़ रहा है। पिछले कुछ सालों में CNG और LNG वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जबकि हाइड्रोजन फ्यूल टेक्नोलॉजी को भी भविष्य का बड़ा विकल्प माना जा रहा है। सरकार पहले ही इलेक्ट्रिक और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में बड़े निवेश कर रही है। ऐसे में फ्यूल डिस्पेंसिंग सिस्टम की पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया था। नई व्यवस्था के तहत अब GATC सिर्फ वजन और माप वाले उपकरणों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पेट्रोल, डीजल, CNG, LPG, LNG और हाइड्रोजन डिस्पेंसर की भी जांच करेंगे। पहले यह व्यवस्था केवल 18 तरह के उपकरणों पर लागू थी, लेकिन अब इसमें पांच नए फ्यूल डिस्पेंसर जोड़ दिए गए हैं। इससे कुल संख्या बढ़कर 23 हो गई है। सरकार का कहना है कि इस कदम का सबसे बड़ा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलेगा। अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि पेट्रोल पंप या गैस स्टेशन पर कम मात्रा में फ्यूल दिया जाता है। अब नई जांच व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ग्राहक जितने पैसे दे रहा है, उसे उतना ही ईंधन मिले। इससे ट्रांजैक्शन में पारदर्शिता बढ़ेगी और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी। इसके अलावा सरकार ने वेरिफिकेशन फीस भी तय कर दी है। पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसर के लिए प्रति नोजल ₹5,000 शुल्क रखा गया है, जबकि CNG, LPG, LNG और हाइड्रोजन डिस्पेंसर के लिए ₹10,000 प्रति नोजल फीस निर्धारित की गई है। इससे प्राइवेट लैब और इंडस्ट्री को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा, ताकि तकनीकी विशेषज्ञता का बेहतर इस्तेमाल हो सके। राज्य सरकारों को भी नई शक्तियां दी गई हैं। अब वे अपने राज्यों की जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त उपकरणों और माप प्रणाली को GATC के तहत शामिल कर सकेंगी। इससे स्थानीय स्तर पर जांच और निगरानी की प्रक्रिया और मजबूत होगी। वहीं प्रशासनिक कामकाज को तेज करने के लिए ज्वॉइंट सेक्रेटरी (Joint Secretary) रैंक और उससे ऊपर के अधिकारियों को मंजूरी देने का अधिकार भी दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में भारत का फ्यूल मार्केट तेजी से बदलने वाला है। पेट्रोल और डीजल के साथ CNG, LNG और हाइड्रोजन जैसे विकल्पों की मांग बढ़ेगी। ऐसे में सरकार का यह कदम सिर्फ उपभोक्ता सुरक्षा ही नहीं, बल्कि देश के ग्रीन एनर्जी मिशन को मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। इससे लोगों का भरोसा बढ़ेगा और क्लीन फ्यूल अपनाने की रफ्तार भी तेज हो सकती है।

ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला: अब अमेरिका में रहकर नहीं मिलेगा ग्रीन कार्ड

नई दिल्ली आज के समय में ज्यादातर लोग भारत छोड़ विदेश का रुख कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर लोग अमेरिका जा रहे हैं या जाना चाहते हैं। लेकिन अब अमेरिका की ट्रंप सरकार (Trump Government) ने ग्रीन कार्ड को लेकर नई नीति की घोषणा की है। पहले लोग अमेरिका में अस्थाई वीजा पर रहते हुए ही ग्रीन कार्ड मिलने तक वहीं रुक सकते थे, लेकिन अब ऐसा करना नहीं होगा। ग्रीन कार्ड के लिए छोड़ना होगा अमेरिका अब तक लोग अमेरिका में रहते हुए ही “एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस” प्रक्रिया के तहत ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते थे लेकिन अब से ये मुमकिन नहीं होगा। यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS ) ने जानकारी दी कि जो लोग अपने स्टेटस में बदलाव चाहते हैं, उन्हें पहले अपने गृह देश वापिस लौटना होगा फिर अमेरिकी दूतावास या कॉन्सुलर प्रोसेसिंग के जरिए ही आवेदन करना होगा। ये प्रक्रिया पहले से अधिक जटिल हो गई है। 12 लाख भारतीयों की बढ़ी मुश्किलें मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका में इमिग्रेशन एडवोकेट अजय भुटोरिया ने PTI को बताया कि नई ग्रीन कार्ड नीति भारतीयों के लिए झटका है। उन्होंने कहा, कि "कानून का पालन करने वाले 12 लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी अब मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। अमेरिका के नए नियम के तहत ग्रीन कार्ड आवेदकों को अमेरिका छोड़कर इमिग्रेंट वीजा पर दोबारा एंट्री करना जरूरी हो गया है।" उन्होंने कहा, "पिछले दो सालों में पढ़ाई के लिए अमेरिका आने वाले छात्रों की संख्या में 35 से 40 फीसदी की कमी देखी गई है। पिछले दिसंबर से जो लोग वीजा स्टैंपिंग के लिए भारत गए वे अभी भी अटके हुए हैं। उन्हें जो डेट मिली है वो अगस्त, अक्टूबर तक की मिली है।" क्या होता है ग्रीन कार्ड? ग्रीन कार्ड को आधिकारिक तौर पर स्थायी निवासी कार्ड (Permanent Resident Card) कहा जाता है। जो किसी विदेशी नागरिक को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने का अधिकार देता है। ग्रीन कार्ड धारक अमेरिका में कहीं भी रह सकता है। ये कार्ड लोगों को ज्यादातर कंपनियों में नौकरी करने, पढ़ाई करने और नियमों के तहत अमेरिका से बाहर आने-जाने का अधिकार देता है। इस कार्ड के मिलने के बाद वह व्यक्ति अमेरिकी नागरिकता के लिए भी अप्लाई कर सकता है।  

तेल कीमतों में बढ़ोतरी पर सरकार का बड़ा दावा, कहा- वैश्विक संकट के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल सबसे कम महंगा

नई दिल्ली देश में मई 2026 में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन बार संशोधन किया गया- 15 मई, 19 मई और 23 मई को. सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन तीनों चरणों के बाद कुल मिलाकर पेट्रोल 4 रुपये 74 पैसे और डीजल 4 रुपये 82 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ. CNG की कीमत भी 1 रुपये प्रति किलो बढ़ाई गई. यह लगभग चार वर्षों में पहली बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है. लेकिन इस बढ़ोतरी को समझने के लिए उसका पूरा संदर्भ देखना जरूरी है।  कंज्यूमर्स ने नहीं सरकार ने खुद उठाया बोझ 28 फरवरी 2026 को होर्मुज संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. इतनी बड़ी वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत में 76 दिनों तक पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए. इस दौरान तेल कंपनियां रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपये का घाटा खुद वहन करती रहीं. 27 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर SAED यानी एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की. डीजल पर केंद्रीय ड्यूटी शून्य हो गई. इस फैसले से सरकार को इस वित्त वर्ष में लगभग 30,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ. यानी यह बोझ सीधे उपभोक्ता पर नहीं डाला गया, बल्कि सरकार ने खुद उठाया।  साथ ही सरकार ने डीजल पर 21 रुपये 50 पैसे और ATF पर 29 रुपये 50 पैसे प्रति लीटर एक्सपोर्ट लेवी लगाई, ताकि देश में तैयार तेल विदेश न जाए और घरेलू बाजार में आपूर्ति बनी रहे।  19 मई को सरकार ने माना कि दो चरणों की बढ़ोतरी के बाद भी तेल कंपनियों का दैनिक घाटा 1000 करोड़ से घटकर 750 करोड़ रुपये रह गया था. 23 मई की तीसरी बढ़ोतरी के बाद भी बड़ा हिस्सा तेल कंपनियां खुद वहन कर रही हैं।  अब वैश्विक तुलना देखिए. होर्मुज संकट के बाद म्यांमार में पेट्रोल लगभग 90%, मलेशिया में 56%, पाकिस्तान में 55%, अमेरिका में 44%, फिलीपींस में 40%, श्रीलंका में 38%, फ्रांस में 21% और ब्रिटेन में 19% तक महंगा हुआ. भारत में यह बढ़ोतरी केवल लगभग 5% रही।  सऊदी अरब ने दाम नहीं बढ़ाए क्योंकि वह स्वयं बड़ा तेल उत्पादक देश है और सीधे सब्सिडी देता है. उसे छोड़ दिया जाए तो भारत दुनिया में सबसे कम बढ़ोतरी करने वाले देशों में रहा. यह पहली बार नहीं है जब वैश्विक संकट के दौरान भारत ने उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की हो।  रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान, जब पूरी दुनिया में ईंधन महंगा हो रहा था, तब भारत ने नवंबर 2021 और मई 2022 में पेट्रोल 8 रुपये और डीजल 6 रुपये प्रति लीटर सस्ता किया था. G20 देशों में भारत अकेला देश था जिसने उस दौर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाई थीं।  अब सवाल आता है कि अलग-अलग राज्यों में कीमतें अलग क्यों हैं? केंद्र की एक्साइज ड्यूटी पूरे देश में समान रहती है, लेकिन हर राज्य अपनी तरफ से अलग VAT लगाता है. यही वजह है कि पंप पर कीमतें अलग दिखती हैं. 23 मई 2026 के बाद आंध्र प्रदेश में पेट्रोल लगभग 117.80 रुपये, तेलंगाना में 115.70 रुपये और केरल में 112.30 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया, जबकि गुजरात, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में यह करीब 99.50 रुपये के आसपास रहा. आंध्र प्रदेश में VAT लगभग 31% है, जिसके साथ अतिरिक्त रोड डेवलपमेंट सेस भी लगाया जाता है. इससे प्रभावी कर दर करीब 35% तक पहुंच जाती है।  सरकारी पक्ष का दावा है कि जिन दलों ने केंद्र से एक्साइज कम करने की मांग की, उनके शासन वाले कई राज्यों में VAT सबसे अधिक बना रहा. 27 मार्च की एक्साइज कटौती के बाद BJP शासित राज्यों ने पूरी राहत उपभोक्ताओं तक पहुंचाई, जबकि कांग्रेस और INDIA ब्लॉक शासित राज्यों ने VAT में समान कटौती नहीं की. इसलिए इन राज्यों में अंतिम कीमतें अपेक्षाकृत अधिक बनी रहीं।  अब 2014 के '71 रुपये वाले पेट्रोल' की चर्चा. कांग्रेस अक्सर कहती है कि 2014 में पेट्रोल 71 रुपये था और अब लगभग 98 रुपये है. लेकिन सरकारी पक्ष के अनुसार उस समय कीमतें कम रखने के लिए 2005 से 2010 के बीच लगभग 1.34 लाख करोड़ रुपये के ऑयल बॉन्ड जारी किए गए थे।  यह सीधे सरकारी उधार थे, जिनका भुगतान बाद की सरकारों और करदाताओं को करना पड़ा।  सरकारी आंकड़ों के अनुसार: FY 2021-22 में 10,000 करोड़ रुपये, FY 2023-24 में 31,150 करोड़ रुपये, FY 2024-25 में 52,860 करोड़ रुपये, और FY 2025-26 में 36,913 करोड़ रुपये ऑयल बॉन्ड भुगतान में खर्च किए गए. इसके ऊपर ब्याज अलग है. सरकारी तर्क यह है कि 2014 का सस्ता पेट्रोल वास्तव में उधारी पर आधारित था, जिसकी कीमत बाद की पीढ़ियां चुका रही हैं।  चार साल का पूरा हिसाब 2022 से 2026 के बीच भारत में पेट्रोल चार बार सस्ता हुआ और एक बार बढ़ा. केंद्र सरकार ने इस पूरे दौर में एक्साइज कटौती के जरिए करीब 30,000 करोड़ रुपये का राजस्व छोड़ा तेल कंपनियों ने रूस-यूक्रेन दौर में 24,500 करोड़ और LPG संरक्षण में 40,000 करोड़ का घाटा उठाया. कोई बॉन्ड नहीं, कोई उधारी नहीं, कोई अगली पीढ़ी पर बोझ नहीं।   

कच्चे तेल में उछाल से आम आदमी पर मार, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी; जानें ताजा भाव

नई दिल्ली  पेट्रोल और डीजल का रेट आज शनिवार, 23 मई 2026 को फिर से बढ़ गया है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 10 दिन के अंदर तीसरी बार पेट्रोल और डीजल के दाम को बढ़ाया है। आज शनिवार को पेट्रोल की कीमतों में 0.87 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 0.91 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। आइए जानते हैं कि देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल और डीजल का क्या रेट चल रहा है? पेट्रोल की कीमत (Petrol price today) दिल्ली – 99.51 रुपये नोए़़डा – 99.51 रुपये भोपाल – 96.85 रुपये चंडीगढ़- 98.95 रुपये गुवाहाटी – 103.01 रुपये जयपुर – 109.87 रुपये पटना – 110.37 रुपये लखनऊ – 99.28 रुपये पोर्टब्लेयर – 92.16 रुपये रांची – 102.60 रुपये कोलकाता – 110.64 रुपये चेन्नई – 105.31 रुपये डीजल की कीमत (Diesel price today) दिल्ली – 92.49 रुपये नोएडा – 92.84 रुपये भोपाल – 111.71 रुपये चंडीगढ़ – 86.49 रुपये गुवाहाटी – 94.39 रुपये जयपुर – 95.05 रुपये पटना – 96.53 रुपये लखनऊ – 92.64 रुपये पोर्टब्लेयर – 82.22 रुपये रांची – 97.66 रुपये कोलकाता – 97.02 रुपये चेन्नई – 96.98 रुपये 10 दिन में करीब 5 रुपये महंगा हुआ पेट्रोल और डीजल इस महीने सबसे पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले हफ्ते शुक्रवार को 3-3 रुपये का इजाफा किया गया था। उसके बाद एक बार फिर से तेल की कीमतों में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 90 पैसे की बढ़ोतरी की थी। आज हुए इजाफे को अगर मिला लें तो 10 दिन में पेट्रोल और डीजल का रेट करीब 5 रुपये प्रति लीटह महंगा हो गया है। कच्चे तेल की कीमतों में जारी तेजी  ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का रेट बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, यूएस वेस्ट टेक्सस इंटरमीडियट (WTI) का रेट 1.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद 97.46 डॉलर प्रति बैरल आज बिक रहा है। बता दें, युद्ध से पहले इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल का रेट 70 डॉलर प्रति बैरल था। क्रूड ऑयल के बढ़े हुए रेट की वजह से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर हुई हैं। आखिर क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल और डीजल के दाम? तेल कंपनियों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल बना हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है, जो बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करते हैं। पिछले कुछ दिनों में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी वजह से तेल कंपनियों ने खुदरा ईंधन कीमतों में फिर बढ़ोतरी की है। लगातार तीसरी बार कीमतें बढ़ने से परिवहन खर्च और जरूरी सामानों की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। आम लोगों और बाजार पर क्या असर पड़ेगा? पेट्रोल और डीजल महंगे होने का सबसे बड़ा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। निजी वाहन चलाने वालों का खर्च बढ़ेगा। वहीं, डीजल महंगा होने से ट्रक, बस और माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ सकता है। इसका असर सब्जियों, फल, दूध और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। माना जा रहा है कि अगर आने वाले दिनों में भी कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो महंगाई और बढ़ सकती है। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने मध्यम वर्ग और व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है।    आगे अभी और बढ़ेगा पेट्रोल और डीजल का दाम? आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा या गिरावट इंटरनेशनल मार्केट की स्थिति पर निर्भर करेगा। मौजूदा परिस्थितियों को देखकर लगता है कि पेट्रोल और डीजल का रेट अभी आगे और बढ़ सकता है। यानी कीमतों में इजाफे के लिए तैयार रहिए। कुछ रिपोर्ट्स में तेल कंपनियों को 9 से 12 रुपये प्रति लीटर के नुकसान की बात कही गई है।

कार खरीदने वालों को झटका, Maruti Suzuki ने बढ़ाए दाम

नई दिल्ली  भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki India ने गुरुवार को अपनी कारों की कीमतों में जून 2026 से 30,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की घोषणा की है. स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में, घरेलू कार बनाने वाली कंपनी ने कहा कि Maruti ने अपने पोर्टफोलियो में अपने सभी मॉडलों की कीमतें बढ़ाने का फैसला किया है।  कंपनी ने अपनी रेगुलेटरी फाइलिंग में कहा कि, "इनपुट कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए, कंपनी ने जून 2026 से अपने पोर्टफोलियो में मॉडल्स की कीमतें 30,000 रुपये तक बढ़ाने का फैसला किया है।  एक ऑफिशियल बयान में, कंपनी ने इस फैसले के लिए रॉ मटेरियल और ऑपरेशनल कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी को जिम्मेदार ठहराया, जिसका ऑटोमोटिव इंडस्ट्री पर असर पड़ रहा है।  कार बनाने वाली कंपनी ने आगे कहा कि, "पिछले कुछ महीनों से, कंपनी कॉस्ट कम करने के तरीकों से कॉस्ट पर पड़ने वाले असर को जितना हो सके कम करने की लगातार कोशिश कर रही है।  Maruti Suzuki India ने कहा कि उसने कॉस्ट का कुछ बोझ उठाने के लिए पिछले कुछ महीनों में कॉस्ट कम करने के कई कदम उठाए हैं, लेकिन कॉस्ट के खराब माहौल की वजह से कुछ हद तक असर पड़ना ज़रूरी हो गया है।  कंपनी ने आगे कहा कि उसने कस्टमर्स पर असर को जितना हो सके कम करने की कोशिश की है. अपनी फाइलिंग में उसने आगे कहा कि, "हालांकि, महंगाई का दबाव अब ऊंचे लेवल पर है और खर्च का खराब माहौल बना हुआ है, इसलिए कंपनी को बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा मार्केट पर डालना होगा, साथ ही यह भी पक्का करना होगा कि कस्टमर्स पर असर जितना हो सके कम से कम हो।  इसमें आगे कहा गया कि, "बदलाव की सही मात्रा हर मॉडल में अलग-अलग होगी." यह नई घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब भारत में कई ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों ने कमोडिटी की ज़्यादा कीमतों, लॉजिस्टिक्स खर्च और सप्लाई चेन में महंगाई के दबाव को देखते हुए कीमतों में बढ़ोतरी की है।  इससे पहले, Mahindra & Mahindra ने 6 अप्रैल से अपने SUV और कमर्शियल व्हीकल पोर्टफोलियो की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की थी. कंपनी ने कहा कि बढ़ती इनपुट और ऑपरेशनल लागत का हवाला देते हुए, कीमतों में 2.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होगी, जिसमें सभी मॉडलों में औसतन लगभग 1.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। 

ईंधन कीमतों पर बड़ा झटका संभव, IMF की रिपोर्ट ने दिए संकेत

मुंबई  पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ती भू-राजनीतिक तनाव ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पहली डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और मशहूर अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ (Gita Gopinath) ने भारत को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर जून तक यह संघर्ष जारी रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। ऐसा हुआ तो भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम, महंगाई और आर्थिक दबाव तेजी से बढ़ सकते हैं। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक मध्य-पूर्व पर निर्भर है। ऐसे में ईरान युद्ध और हार्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में सप्लाई रुकावट का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। गीता गोपीनाथ ने कहा कि यह सिर्फ महंगे तेल का मामला नहीं है, बल्कि अब सप्लाई शॉक की स्थिति बन रही है, यानी तेल, LPG, LNG और खाद की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है। अगर सप्लाई चेन टूटती है, तो उसे सामान्य होने में 2 से 3 महीने तक लग सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात में कच्चा तेल 110 डॉलर से बढ़कर 140 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो भारत में ट्रांसपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग और खेती की लागत तेजी से बढ़ेगी। इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, ट्रक किराया बढ़ेगा और रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो जाएंगी। गीता गोपीनाथ का मानना है कि सरकार हमेशा लोगों को पूरी तरह राहत नहीं दे पाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ बोझ सरकार उठाएगी, लेकिन कुछ कीमतों का असर जनता और कंपनियों को भी झेलना पड़ेगा, यानी आने वाले समय में पेट्रोल पंप पर कीमतें बढ़ सकती हैं। उन्होंने साफ कहा कि अब हम ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जहां महंगाई लगातार बढ़ सकती है। रुपये की कमजोरी पर भी उन्होंने बड़ा बयान दिया। हाल के महीनों में रुपया डॉलर के मुकाबले 91 से गिरकर करीब 97 तक पहुंच गया है और बाजार में चर्चा है कि यह 100 के स्तर तक जा सकता है। लेकिन, गीता गोपीनाथ ने कहा कि असली चिंता सिर्फ रुपये का आंकड़ा नहीं है। उनके मुताबिक, कमजोर रुपया आयात कम करने में मदद करता है और यह आर्थिक संतुलन बनाने का एक तरीका है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार और RBI जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप करेंगे, तो देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, उन्होंने लोगों से घबराने की अपील नहीं की। उनका कहना है कि भारत की घरेलू मांग मजबूत है, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार भी अभी मजबूत स्थिति में है। लेकिन, अगर युद्ध लंबा खिंचता है और तेल 140 डॉलर पर टिक जाता है, तो यह सिर्फ भारत नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ा आर्थिक संकट बन सकता है। एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले महीनों में सरकार को गरीब परिवारों और छोटे कारोबारियों के लिए राहत पैकेज, कैश ट्रांसफर और लोन सपोर्ट जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं। फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पश्चिम एशिया का तनाव जल्द खत्म होगा या दुनिया को एक नए आर्थिक झटके का सामना करना पड़ेगा।

Honda City Facelift 2026 की एंट्री, जानिए कीमत, नए फीचर्स और माइलेज डिटेल

 नई दिल्ली  Honda Cars India ने भारतीय बाजार में अपनी 2026 सिटी कार को लॉन्च कर दिया है। इस सेडार कार के अपडेटेड वर्जन की शुरुआती कीमत 11,99,900 (एक्स-शोरूम) रखी गई है। साल 2023 के बाद इस कार में किया गया यह दूसरा बड़ा अपडेट है। इसके साथ ही कंपनी ने अपनी नई ZR-V SUV को भी पहली बार पेश किया है। डिजाइन और फीचर्स यह कार पेट्रोल और e:HEV स्ट्रॉंग हाइब्रिड दोनों विकल्पों में उपल्बध होगी। इस सेगमेंट में यह 4594mm की लंबाई के साथ सबसे लंबी सेडार कार है। इसके सामने के हिस्से में नई ब्लेड आई सिग्नेचर LED लाइटिंग, Bi-LED प्रोजेक्टर हेडलैंप्स, फ्रंट ग्रिल से जुड़ा सेंटर लाइट बार और नए डिजाइन का बंपर दिया गया है। पीछे की तरफ Z-शेप वाली वाली LED टेल लैंप्स और स्पोर्टी ट्रंक लिप स्पॉइलर मिलता है। इसमें नए 16-इंच के ड्यूल-टोन अलॉय व्हील्स दिए गए हैं। कार में नया रंग क्रिस्टल ब्लैक पर्ल भी जोड़ा गया है। कैसा है इंटीरियर और सेफ्टी? कार के अंदर आइवरी और ब्लैक टू-टोन इंटीरियर दिया गया है। इसमें 25.6 सेमी (10.1 इंच) की फ्लोटिंग टचस्क्रीन, 360-डिग्री मल्टी व्यू कैमरा, वेंटिलेटेड सीट्स, वेलकम एंबिएंट लाइट और आगे-पीछे USB-C चार्जिंग पोर्ट्स दिए गए हैं। इसमें Honda SENSING इंटेलिजेंट ADAS तकनीक दी गई है जिसमें कोलिजन मिटिगेशन ब्रेकगिं, एडाप्टिव क्रूज कंट्रोल, लेन कीप असिस्ट जैसे सेफ्टी फीचर्स शामिल हैं। इंजन विकल्प और माइलेज पहला है स्ट्रॉंग हाइब्रिड (e:HEV), यह दो मोटरों वाला हाइब्रिड सिस्टम है। यह 126PS की पावर और 0 से 3000 rpm 253nm का टॉर्क देता है और इसका माइलेज 27.26kmpl है। यह कार चलाने समय अपने आप ही EV, Hybrid, और इंजन ड्राइव मोट्स के बीच बदलता रहता है। प्योर पेट्रोल इंजन ऑप्शन इसमें 1.5 लीटर का i-VTEC पेट्रोल इंजन दिया गया है। इसके साथ 6-स्पीड मैनुअल (MT) या 7-स्पीड CVT गियरबॉक्स का विकल्प मिलता है। यह स्पोर्टी परफॉर्मेंस और अच्छे माइलेज का संतुलन देता है। यह 6600 rpm पर 121 PS का पावर और 4300 rpm पर 145 nm का टॉर्क देता है। MT के साथ इसका माइलेज 17.77kmpl तो वहीं CVT के साथ इसका माइलेज 17.97kmpl है। क्या है वेरिएंट ऑप्शन? City Petrol, यह कार MT में चार वेरिएंट्स SV, V, ZX और ZX+ में उपलब्ध है। वहीं CVT ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन में यह तीन वेरिएंट्स V, ZX और ZX+ में मिलेगी। दूसरा है City e:HEV, यह स्ट्रॉंग हाइब्रिड मॉडल एक टॉप वेरिंट ZX+ में आता है। इस पर कई सारे वॉरंटी ऑफर्स भी दिए जा रहे हैं। वारंटी की जानकारी पहली है स्टैंडर्ड वारंटी जिसमें कार पर 3 साल कि अनलिमिटेड किमी की स्टैंडर्ड वारंटी दी जा रही है। अगला है एक्सटेंडेड वारंटी जिसे ग्राहक 7 साल तक बढ़वा सकते हैं। इसके बाद है एनीटाइम वारंटी जिसमें कार खरीदने की तारीख से इसे 10 साल या 1,20,000 किमी तक के लिए भी किया जा सकता है। e:HEV वेरिएंट में लिथियम-आयन बैटरी पर 8 साल या 1,60,000 किमी की स्टैंडर्ड वारंटी मिलती है। इसके अलावा, हाइब्रिड सिस्टम के पार्ट्स पर नई 5 साल या 1 लाख किमी की वारंटी दी जा रही है। इसकी बिक्री और ग्राहकों को डिलीवरी शुरू कर दी गई है। नई होंडा सिटी की कीमत (Price – Ex-Showroom, Delhi)   वेरिएंट (Grade) मैनुअल (MT) ऑटोमैटिक (CVT) हाइब्रिड (e:HEV) SV ₹11,99,900 — — V ₹13,29,900 ₹14,29,900 — ZX ₹15,25,900 ₹16,25,900 — ZX+ ₹16,14,900 ₹17,14,900 ₹20,99,900

रक्षा सेक्टर के इस शेयर पर टूटा निवेशकों का भरोसा, रॉकेट टेस्टिंग के बाद आई तेजी

बेंगलुरु  डिफेंस सिस्टम बनाने वाली कंपनी निबे लिमिटड (Nibe Limited) के शेयर शुक्रवार को भारी डिमांड में थे। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन इस शेयर में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। शेयर में यह उछाल इजरायल की डिफेंस कंपनी Elbit सिस्टम्स के साथ मिलकर बनाए और विकसित किए गए लंबी दूरी के सूर्यास्त्र (Suryastra) रॉकेट सिस्टम के सफल फ्लाइट-टेस्ट के बाद आया। इस नए रॉकेट सिस्टम का टेस्ट-फायर ओडिशा के तट के पास स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से किया गया। शेयर का परफॉर्मेंस इस खबर की वजह से शुक्रवार को शेयर 1,293.65 रुपये की पिछली क्लोजिंग के मुकाबले 14 पर्सेंट से ज्यादा उछलकर 1,469 रुपये तक जा पहुंचा। पिछले एक हफ्ते में शेयर लगभग 30 प्रतिशत बढ़ चुका है। शेयर का 52 वीक हाई 2000 रुपये और 52 वीक लो 810 रुपये है। निवेशकों में उत्साह की वजह बाजार विश्लेषकों ने शेयर को लेकर निवेशकों के उत्साह की मुख्य वजह 'सूर्यास्त्र' रॉकेट सिस्टम के सफल परीक्षण और 'वायु अस्त्र-1' लोइटरिंग म्यूनिशन के पहले ट्रायल की वजह से था। इसके अलावा, 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत भारत के रणनीतिक रक्षा निर्माण क्षेत्र में कंपनी की भविष्य की भूमिका को लेकर बढ़ती उम्मीदें भी इस तेजी की एक वजह थीं। बाजार विश्लेषकों ने कहा-हाल के वर्षों में किसी डिफेंस स्टॉक में देखी गई यह सबसे तेज उछालों में से एक हो सकती है। खासकर तब जब यह किसी उभरती हुई निजी क्षेत्र की कंपनी का स्टॉक हो। विश्लेषकों ने इस तेजी का श्रेय हथियारों के सफल परीक्षणों को लेकर निवेशकों के जबरदस्त उत्साह और भारत के स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षेत्र में बढ़ते अवसरों की उम्मीदों को दिया। सूर्यास्त्र रॉकेट सिस्टम का सफल टेस्ट रक्षा अधिकारियों ने बताया कि ओडिशा के चांदीपुर टेस्ट सेंटर से दो दिनों में सूर्यास्त्र रॉकेट सिस्टम के कई राउंड का सफल टेस्ट किया गया। इनमें 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर रेंज वाले वेरिएंट भी शामिल थे। 18 और 19 मई को लगातार हुए इन ट्रायल्स में मिशन के सभी लक्ष्य असाधारण सटीकता के साथ हासिल किए गए। इससे इस सिस्टम की लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता साबित हुई और भारत का स्वदेशी प्रिसिजन-गाइडेड रॉकेट आर्टिलरी प्रोग्राम और मजबूत हुआ। बता दें कि सूर्यास्त्र रॉकेट, एलबिट सिस्टम्स द्वारा विकसित 'प्रेसिज एंड यूनिवर्सल लॉन्चिंग सिस्टम' (PULS) टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं और इनका निर्माण भारत में निबे ग्रुप के सहयोग से किया जा रहा है। इस सिस्टम को पारंपरिक फील्ड आर्टिलरी और भारी बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम के बीच की खाई को पाटने के लिए डिजाइन किया गया है। जनवरी में सेना के साथ समझौता जनवरी में भारतीय सेना ने आपातकालीन खरीद शक्तियों के तहत निबे लिमिटेड के साथ ₹292.69 करोड़ ($31 मिलियन) का एक कॉन्ट्रैक्ट किया था। यह कॉन्ट्रैक्ट 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता वाले एक उन्नत लंबी दूरी के रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की आपूर्ति के लिए किया गया था। इस आपूर्ति को एक वर्ष के भीतर किस्तों में पूरा किया जाएगा।

8% डिस्काउंट पर सरकार बेच रही हिस्सा, बाजार खुलते ही टूटे बैंक के शेयर

मुंबई  सरकारी बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर शुक्रवार को बाजार खुलते ही धड़ाम हो गए हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर शुक्रवार को BSE में करीब 6 पर्सेंट लुढ़ककर 31.89 रुपये पर जा पहुंचे हैं। केंद्र सरकार इस बड़े सरकारी बैंक में अपना हिस्सा बेच रही है। सरकार ने शुक्रवार को ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू की है। केंद्र सरकार, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 8 पर्सेंट तक हिस्सेदारी बेच रही है। सरकार, इस सरकारी बैंक में अपनी हिस्सेदारी गुरुवार को बैंक के शेयरों के बंद स्तर से 8 पर्सेंट से अधिक सस्ते में बेच रही है। 31 रुपये प्रति शेयर के दाम पर सरकार बेच रही अपना हिस्सा सरकार ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में अपनी हिस्सेदारी 31 रुपये के फ्लोर प्राइस पर बेच रही है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर गुरुवार को BSE में 33.91 रुपये पर बंद हुए थे। सरकार 8 पर्सेंट से अधिक सस्ते (डिस्काउंट) पर अपना हिस्सा बेच रही है। डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनजमेंट (DIPAM) के मुताबिक, केंद्र सरकार इस सरकारी बैंक में अपनी 4 पर्सेंट इक्विटी हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल के जरिए बेचेगी। इसके अलावा, सरकार के पास ग्रीन शू ऑप्शन के जरिए 4 पर्सेंट और हिस्सेदारी बेचने का विकल्प है। नॉन- रिटेल निवेशक शुक्रवार 22 मई से ऑफर फॉर सेल के लिए बोली लगा सकेंगे। वहीं, आम निवेशक सोमवार 25 मई से बोली लगा सकेंगे। अभी 89.27 पर्सेंट है बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 31 मार्च 2026 को खत्म हुई तिमाही में केंद्र सरकार की सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 89.27 पर्सेंट हिस्सेदारी थी। स्टॉक एक्सचेंजों पर उपलब्ध डेटा में यह बात कही गई है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में पब्लिक शेयरहोल्डिंग 10.73 पर्सेंट है। मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नॉर्म्स का पालन करने के लिए केंद्र सरकार को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में और 14.27 पर्सेंट हिस्सेदारी बेचनी होगी। केंद्र सरकार ने पिछले साल अगस्त में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया समेत चार सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए गोल्डमैन सैक्स को ट्रांजैक्शन एडवायजर नियुक्त किया था। 5 साल में 72% उछले हैं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर सरकारी बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर पिछले पांच साल में सिर्फ 72 पर्सेंट चढ़े हैं। सरकारी बैंक के शेयर 21 मई 2021 को 18.50 रुपये पर थे। बैंक के शेयर 22 मई 2026 को 31.89 रुपये पर जा पहुंचे हैं। पिछले एक साल में बैंक के शेयरों में करीब 12 पर्सेंट की गिरावट देखने को मिली है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों का 52 हफ्ते का हाई लेवल 41.18 रुपये है। वहीं, बैंक के शेयरों का 52 हफ्ते का निचला स्तर 31.29 रुपये है।

दुनिया के सबसे बड़े App Scam पर Apple का शिकंजा, अरबों डॉलर की धोखाधड़ी रोकी

 नई दिल्ली ऐपल ने एक बड़ा दावा किया है और बताया है कि उसने बीते एक साल में करोड़ों रुपये के फर्जी ट्रांजैक्शन को ब्लॉक किया है और लोगों की मेहनत की कमाई को ठगे जाने से बचाया है. ये जानकारी ऐपल न्यूजरूम पर शेयर की है।  ऐप स्टोर ने ट्रांजैक्शन में 2.22 बिलियन डॉलर (करीब 18 हजार करोड़ रुपये) से ज्यादा की धोखाधड़ी को रोका है. कंपनी ने बीते छह साल में 11.2 बिलियन डॉलर से ज्यादा के फ्रॉड को रोकने में सफलता हासिल की है।  हर सप्ताह करोड़ों विजिटर्स आते हैं  ऐपल ने बताया है कि 175 देशों के ऐप स्टोर पर हर सप्ताह करीब 85 करोड़ से ज्यादा विजिटर्स आते हैं. लोगों की सुरक्षा के लिए ऐपल का कहना है कि वह स्कैम, खतरनाक ऐप्स, फर्जी रिव्यू और पेमेंट फ्रॉड पकड़ने के लिए रिव्यू टीम और एडवांस मशीन लर्निंग सिस्टम का यूज करते हैं।   2025 में आए 91 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन  ऐपल ने बताया ह कि ऐप रिव्यू टीम ने साल 2025 में 91 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन प्रोसेस किए और 3 लाख नए डेवलपर्स को ऑनबोर्ड किया है. फिर ऐप स्टोर गाइडलाइन्स का उल्लंघन करने पर करीब 20 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन रिजेक्ट किए हैं. इनमें 12 नए ऐप्स और 8 लाख ऐप अपडेट भी शामिल रहे हैं।  रिव्यू टीम में इंसान और AI करते हैं काम  कंपनी ने आगे बताया है कि उनके रिव्यू टीम में इंसानों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) बेस्ड सिस्टम भी काम करता है. ये सिस्टम फास्ट तरीके से खतरनाक ऐप्स की पहचान करता है और फिर उनको ब्लॉक करने में मदद करता है।  कई ऐप ने बाद में बदला अपना नेचर  ऐपल ने रिपोर्ट में बताया है कि 59 हजार ऐसे ऐप्स भी रिमूव किए जा चुके हैं, जो शुरुआत में गेम या सामान्य यूटिलिटी के रूप में मंजूर किए थे. बाद में उनको फ्रॉड प्लेटफॉर्म में बदल दिया गया।  लाखों अकाउंट्स को किया जा चुका है बंद  अमेरिका कंपनी ने बताया है कि कई साइबर ठग बॉट नेटवर्क और फर्जी अकाउंट की मदद से ऐप रैंकिंग में हेरफेर, स्पैम और नकली रिव्यू पोस्ट करने की कोशिश करते हैं. इसको लेकर कंपनी बता चुकी है कि वह साल 2025 में 1.1 बिलियन फर्जी अकाउंट बनाने की कोशिश को ब्लॉक कर चुकी है।  बच्चों की सेफ्टी वाले नियम तोड़े गए Apple ने ये भी बताया है कि बच्चों की सेफ्टी के लिए बनाए गए नियमों को तोड़ने पर Kids कैटेगरी के 5 हजार से ज्यादा ऐप्स को रिजेक्ट किया जा चुका है. पहले ऐप्स ने स्क्रीन टाइम और आस्क टू बाय जैसे पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स का भी जिक्र किया, फिर इनकी मदद से माता-पिता बच्चों की ऐप एक्टिविटी और शॉपिंग पर नजर रखते हैं।