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घरेलू गैस के दाम नहीं बदले, कमर्शियल सिलेंडर भी स्थिर

नई दिल्ली एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आज 31 मई को कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी पुरानी कीमतें ही बरकरार हैं। ईरान युद्ध की वजह से एलपीजी सिलेंडर, सीएनजी और पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बीते तीन महीने के दौरान बदलाव देखने को मिला है। बता दें, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की तरफ से जारी रेट्स के अनुसार एलपीजी सिलेंडर 913 रुपये में आज रविवार को दिल्ली में बिक रहा है। वहीं, मुंबई में इसका रेट 912.50 रुपये है। कोलकाता में एलपीजी सिलेंडर की कीमत 939 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये है। पिछले महीने कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 900 रुपये का इजाफा किया गया था। उसके बाद से रेट्स में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। बता दें, युद्ध शुरू होने के बाद से घरेलू सिलेंडर का रेट 60 रुपये महंगा हुआ है। घरेलू सिलेंडर का क्या है रेट? (Domestic LPG Cylinder Price Today) दिल्ली – 913 रुपये कोलकाता – 939 रुपये मुंबई – 912.50 रुपये चेन्नई – 928.50 रुपये गुरुग्राम – 921.50 रुपये नोएडा – 910.50 रुपये बेंगलुरू- 915.50 रुपये भुवनेश्वर – 939 रुपये चंडीगढ़ – 922.50 रुपये हैदराबाद – 965 रुपये जयपुर – 916.50 रुपये लखनऊ – 950.50 रुपये पटना – 1002.50 रुपये तिरुअनंतपुरम् – 922.50 रुपये कॉमर्शियल सिलेंडर का क्या है रेट? (Commercial LPG Price Today) नई दिल्ली – 3071.50 रुपये कोलकाता – 3202 रुपये मुंबई -3024 रुपये चेन्नई – 3237 रुपये गुरुग्राम – 3088 रुपये नोएडा – 3071.50 रुपये बेंगलुरू- 3152 रुपये भुवनेश्वर – 3238 रुपये चंडीगढ़ – 3082.50 रुपये हैदराबाद – 3315 रुपये लखनऊ- 3194 रुपये जयपुर – 3099 रुपये पटना – 3346.50 रुपये तिरुअनंतपुरम् – 3106 रुपये सरकार ने कहा पर्याप्त है एलपीजी केंद्र सरकार की तरफ से हाल ही में जारी बयान में कहा गया है कि देश में पर्याप्त मात्रा में एलपीजी है। ऐसे में किसी को भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। मौजूदा परिस्थितयों को देखते हुए केंद्र सरकार ने एलपीजी प्रोडक्शन बढ़ाने का निर्देश घरेलू कंपनियों को दिया है। मौजूदा समय में एलपीजी प्रोडक्शन 52000 टन के आल टाइम हाई पर पहुंच गया है। नियमों में कड़ाई (LPG Cylinder Bookin Rule) एलपीजी सिलेंडर को लेने के लिए पहले से नियमों को कड़ा कर दिया गया है। बिना ओटीपी के एलपीजी सिलेंडर अब किसी को नहीं मिल रहा है। सरकार ने गांव में 45 दिन और शहरों में 25 दिन की लिमिट लगाई है। इससे पहले एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग नहीं की जा सकती है।

सोना-चांदी के दाम गिरे: MCX पर सिल्वर क्रैश, गोल्ड भी नरम

नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rates) में बीते हफ्ते के चार कारोबारी दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिला. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर खासतौर पर चांदी की कीमत जमकर टूटी. इस ताजा गिरावट के साथ अब 1 किलो चांदी की वायदा कीमत (1 Kg Silver Price) अपने हाई लेवल से 1.90 लाख रुपये से ज्यादा सस्ती हो चुकी है, जिसे इस कीमती धातु ने जनवरी महीने में छुआ था. वहीं बात सोने की करें, तो तमाम उतार-चढ़ाव के बाद ये पीली धातु भी मामूली गिरावट में रही है. चांदी की कीमत में इतनी गिरावट बीते सप्ताह के ज्यादातर कारोबारी दिनों में चांदी की कीमत में गिरावट ही देखने को मिली है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 3 जुलाई वाली चांदी का एमसीएक्स पर भाव (MCX Silver Price) 2537 रुपये प्रति किलोग्राम कम होकर 2,67,000 रुपये प्रति किलो पर आ गया. इस हिसाब से हफ्तेभर में गिरावट को देखें, तो इससे पिछले सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन 1 किलो चांदी का भाव वायदा कारोबार में 2,71,846 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ था और इसकी कीमत 4,846 रुपये प्रति किलो तक गिर गई है. न केवल वायदा कारोबार, बल्कि घरेलू मार्केट में भी चांदी की कीमत में गिरावट देखने को मिली है. इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com पर अपडेटेड रेट्स देखें, तो 1 किलोग्राम की चांदी बीते सप्ताह के 2,66,000 रुपये के मुकाबले ये गिरकर 2,63,350 रुपये पर आ गई. हाई से क्रैश दिख रही चांदी वहीं अगर चांदी के ताजा भाव की तुलना इसके लाइफ टाइम हाई लेवल से करें, तो पहले बता दें कि एमसीएक्स पर जनवरी 2026 में चांदी पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक स्तर पार करने में कामयाब हुई थी और 4,57,328 रुपये के उच्चतम स्तर पर जा पहुंची थी, लेकिन यह लेवल छूने के बाद ये कीमती धातु लगातार क्रैश (Silver Price Crash From High) होती गई. फिलहाल की गिरावट के बाद अब चांदी हाई लेवल से 1,90,328 रुपये प्रति किलो सस्ती मिल रही है. Gold का दाम अब इतना एमसीएक्स पर चांदी की कीमत में जहां तेज गिरावट दर्ज की गई, तो वहीं सोने का भाव भी तमाम उतार-चढ़ाव के बाद मामूली गिरावट में रहा. MCX Gold Rate पर नजर डालें, तो 22 मई को 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1,61,320 रुपये था, जबकि बीते शुक्रवार को ये 1,61,049 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. वहीं 5 जून की एक्सपायरी वाला वायदा सोना अपने हाई लेवल 2,02,984 रुपये की तुलना में अब 41,935 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता मिल रहा है. इसके अलावा घरेलू मार्केट में बात करें, तो आईबीजेए के मुताबिक 10 ग्राम सोने का भाव 1,58,117 रुपये से कम होकर 1,56,463 रुपये पर आ गया. यानी सोना घरेलू बाजार में 1654 रुपये सस्ता हो गया है.

भारतीय आमों पर जापान की रोक से हलचल, आखिर वहां कौन-सा मैंगो है लोगों की पहली पसंद?

नई दिल्ली भारत दुनिया में आम का सबसे बड़ा उत्पादक है. यहां हर साल लगभग 24 मिलियन मीट्रिक टन आम की पैदावार होती है और इसकी बेहतरीन किस्म दुनिया भर के देशों में एक्सपोर्ट की जाती हैं. हालांकि जापान ने अब भारतीय आमों के आयात पर अस्थायी रोक लगा दी है.  इसके बाद अल्फोंसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी मशहूर किस्मों के निर्यातकों को झटका लगा है. इसी बीच अब कई लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि जापान में असल में आम की कौन सी किस्म सबसे ज्यादा खाई जाती है? आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब।  जापान का भारतीय आमों पर प्रतिबंध      जापान ने भारतीय आमों के आयात पर कड़े क्वॉरेंटाइन नियमों के कारण रोक लगाई।     यह रोक आम की गुणवत्ता या स्वाद की चिंता से नहीं, बल्कि पैकेजिंग में तकनीकी कमी से है।     जापान में घरेलू 'इरविन' किस्म के आम लोकप्रिय हैं, जिन्हें लग्जरी उत्पाद माना जाता है।     रोक से पहले भारतीय आमों की विदेशी फलों की चाहत रखने वाले ग्राहकों में काफी मांग थी। जापान का यह फैसला स्वाद या फिर गुणवत्ता से जुड़ी चिंता की वजह से नहीं बल्कि कड़े कृषि क्वॉरेंटाइन नियम की वजह से लिया गया है. मार्च 2026 में जापान के क्वॉरेंटाइन अधिकारियों ने भारत में आमों के उपचार और पैकेजिंग सुविधाओं का निरीक्षण किया और कथित तौर पर एक्सपोर्ट से पहले इस्तेमाल की जाने वाली फ्यूमिगेशन और साफ सफाई प्रक्रिया में तकनीकी कमियां पाई।  जापान आयातित फलों में कीटों और फ्रूट फ्लाइज के संबंध में काफी कड़ी जीरो टॉलरेंस नीति का पालन करता है. निरीक्षण के बाद जापान ने 25 मार्च 2026 के बाद जारी किए गए प्रमाण पत्रों के साथ आने वाली आमों की खेपों को स्वीकार करना बंद कर दिया।  जापान में आम की कौन सी किस्म सबसे ज्यादा मशहूर?  जापान में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली आम की किस्म इरविन है. इसे आमतौर पर एप्पल मैंगो के नाम से जाना जाता है. भारत के उलट जहां आम को एक मौसमी फल माना जाता है जापान में आमों को विलासिता की वस्तु माना जाता है और अक्सर इन्हें काफी बेहतरीन उपहार के तौर पर खरीदा जाता है. इरविन किस्म की खेती मुख्य रूप से जापान के ओकिनावा और मिजायाकी प्रति में ग्रीन हाउस के अंदर काफी कंट्रोल्ड परिस्थितियों में की जाती है. ये आम अपने गहरे लाल रंग, मलाईदार बनावट, जबरदस्त मिठास और पूरी तरह से रेशे रहित गूदे के लिए जाने जाते हैं।  वहीं अगर भारत की बात करें तो भारत के केसर, अल्फांसो, लंगड़ा और बंगनपल्ली आम जापान में सबसे ज्यादा भेजी जाती हैं और पसंद की जाती हैं।  जापान में कौन से इंपोर्टेड आम लोकप्रिय हैं? घरेलू तौर पर लग्जरी आमों का उत्पादन करने के बावजूद जापान अपनी कुल मांगों को पूरा करने के लिए अभी भी इंपोर्ट पर ही निर्भर है.  रोक लगने से पहले भारतीय आम उन ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय थे जो विदेशी इंपोर्टेड फलों की तलाश में रहते थे. भारत के अलावा जापान थाईलैंड, मेक्सिको और फिलिपींस जैसे देशों से भी आम इंपोर्ट करता है। 

तेल की कीमतों ने चौंकाया! पेट्रोल 115.69 और डीजल 100.92 रुपये पहुंचा, अपने शहर का रेट करें चेक

नई दिल्ली  पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों का ऐलान आज सुबह 6 बजे हो गया है। राहत की बात यह है कि तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के रेट में आज फिर कोई बढ़ोतरी नहीं की है। आखिरी बार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के द्वारा पिछले हफ्ते शनिवार को इजाफा किया गया था। इसके बाद से ही दाम स्थिर बने हुए हैं। इस बीच इंटरनेशनल मार्केट से अच्छी खबर आई है। कच्चे तेल की कीमतों में कुछ गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, युद्ध के पूर्व स्तर से यह अब भी काफी अधिक है। सबसे महंगा पेट्रोल और डीजल कहां?  26 मई 2026 के रेट के अनुसार हैदराबाद में पेट्रोल सबसे अधिक रेट पर बिक रहा है। इस शहर में लोगों को एक लीटर पेट्रोल के लिए 115.69 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं, डीजल के लिए तिरुअनंतपुरम् में लोगों को 115.49 रुपये प्रति लीटर देने पड़ रहे हैं। दूसरी तरफ चंडीगढ़ में पेट्रोल का रेट 98.10 रुपये प्रति लीटर है। जोकि दिल्ली सहित अन्य शहरों की तुलना में काफी कम है। बता दें, भुवनेश्वर में डीजल का रेट 100.92 रुपये प्रति लीटर है। देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल का क्या है रेट?  दिल्ली – 102.12 रुपये मुंबई – 111.18 रुपये कोलकाता – 113.47 रुपये चेन्नई – 107.77 रुपये गुरुग्राम – 102.77 रुपये नोएडा – 102.12 रुपये बेंगलुरू – 110.93 रुपये भुवनेश्वर – 109.92 रुपये चंडीगढ़ – 98.10 रुपये हैदराबाद – 115.69 रुपये जयपुर – 112.66 रुपये लखनऊ – 102.05 रुपये पटना – 113.35 रुपये तिरुअनंतपुरम् – 115.49 रुपये डीजल का क्या चल रहा है रेट?  नई दिल्ली – 95.20 रुपये मुंबई – 97.83 रुपये कोलकाता – 99.82 रुपये चेन्नई – 99.55 रुपये गुरुग्राम – 95.444 रुपये नोएडा – 95.56 रुपये बेंगलुरू – 98.80 रुपये भुवनेश्वर – 100.92 रुपये चंडीगढ़ – 86.09 रुपये हैदराबाद – 103.82 रुपये जयपुर – 97.79 रुपये लखनऊ – 95.55 रुपये पटना – 99.36 रुपये तिरुअनंतपुरम् – 104.40 रुपये 4 बार हो सका इजाफा  मई के महीने में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार इजाफा हो गया है। इस दौरान पेट्रोल और डीजल का रेट करीब 7.5 रुपये बढ़ गया है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने के बाद से तेल कंपनियों पर कीमतों को बढ़ाने का काफी दबाव था। कीमतों में इजाफे से पहले तेल कंपनियों को हर दिन 1000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा। जोकि अब 500 करोड़ रुपये से कम हो गया है। सरकार ने भी कीमतों को संभालने की बहुत कोशिश की। एक्साइज ड्यूटी में कटौती भी की गई। लेकिन जब इंटरनेशनल मार्केट में स्थिति सामान्य नहीं हुई उसके बाद तेल कंपनियों को यह फैसला लेना पड़ा।

पेट्रोल-एथेनॉल दोनों पर दौड़ेगी Hero की नई बाइक, लॉन्च इवेंट में शामिल होंगे पेट्रोलियम मंत्री

नई दिल्ली स्वदेशी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Hero MotoCorp आगामी 3 जून को अपनी एक नई मोटरसाइकिल बाजार में उतारने वाली है. इस बाइक को लेकर खास बात यह है कि यह बाइक 100 प्रतिशत फ्लेक्स-फ्यूल यानी E100 (100 प्रतिशत इथेनॉल) पर चलेगी और यह कंपनी की पहली फ्लेक्स-फ्यूल बाइक होने वाली है।  यह लॉन्च कंपनी के अल्टरनेटिव फ्यूल की तरफ बढ़ने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा. ध्यान देने वाली बात यह है कि इस मोटरसाइकिल को पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी और रोड ट्रांसपोर्ट और हाईवे मिनिस्टर नितिन गडकरी की मौजूदगी में लॉन्च किया जाएगा।  नए फ्यूल के विकल्प Hero MotoCorp की इस मोटरसाइकिल की सबसे बड़ी खासियत इसकी 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलने की क्षमता है. यह बात इसे भारत में अभी बिक रहे फ्लेक्स-फ्यूल टू-व्हीलर्स से बिल्कुल अलग बनाती है. उदाहरण के लिए बता दें कि Suzuki Gixxer SF 250 और Honda CB 300F फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलें हैं, लेकिन ये प्योर इथेनॉल का इस्तेमाल नहीं करती हैं, बल्कि E85 फ्यूल के लिए ट्यून की गई हैं।  कंपनी ने यह लॉन्च ऐसे समय में रखा है कि जब सरकार फ्यूल में ज़्यादा विविधता लाने पर ज़ोर दे रही है. पश्चिम एशिया संकट के बाद, तेल कंपनियों को पेट्रोल पंपों पर फ्लेक्स-फ्यूल की उपलब्धता बेहतर करने के लिए बढ़ावा दिया गया है, जिससे इन अल्टरनेटिव फ्यूल गाड़ियों को बाज़ार में ज़्यादा मज़बूत इस्तेमाल मिल रहा है।  Hero HF Deluxe का फ्लेक्स फ्यूल वर्जन किया था प्रदर्शित Hero MotoCorp ने 2025 भारत मोबिलिटी एक्सपो में अपने फ्लेक्स-फ्यूल डायरेक्शन का प्रीव्यू पहले ही कर दिया था. वहां, कंपनी ने जयपुर में अपने सेंटर फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी (CIT) में डेवलप की गई Hero HF Deluxe का इथेनॉल-बेस्ड वर्जन प्रदर्शित किया था।  कंपनी ने उस प्रोटोटाइप में 100cc का BS6 इंजन इस्तेमाल किया था और इसे E20 से E85 तक के इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल के साथ काम करने के लिए इंजीनियर किया गया था. इस मोटरसाइकिल को सरकार की क्लीनर और रिन्यूएबल फ्यूल टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने की कोशिशों के चलते डिजाइन किया गया था।  फ्लेक्स फ्यूल क्यों है जरूरी बता दें कि फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां पेट्रोल और इथेनॉल के मिश्रण पर चलने के लिए बनाई जाती हैं, जिनमें इथेनॉल की मिलावट अलग-अलग होती है. इसका उद्देश्य फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करना और स्टैंडर्ड पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों के मुकाबले उत्सर्जन को कम करना है. भारत के लिए, यह तकनीक ट्रांसपोर्ट फ्यूल में इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाने की बड़ी कोशिशों में भी फिट बैठती है। 

Tata Consultancy Services के हाथ से निकला बड़ा डील, कनाडाई बैंक के फैसले से बढ़ी चिंता

मुंबई  भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (Tata Consultancy Services) को लेकर एक बड़ी खबर आ रही है. कनाडा के सबसे बड़े बैंक, रॉयल बैंक ऑफ कनाडा (Royal Bank of Canada) ने टीसीएस के साथ अपना बरसों पुराना कॉन्ट्रैक्ट यानी काम का समझौता आंशिक रूप से खत्म कर दिया है. आसान शब्दों में कहें तो बैंक ने अपने काम का एक हिस्सा अब टीसीएस से वापस ले लिया है और उसे एक दूसरी बड़ी कंपनी एक्सेंचर (Accenture) को सौंप दिया है. इस बड़े फैसले के बाद, इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे करीब 150 कर्मचारियों को दूसरी कंपनी में शिफ्ट किया जाएगा, जिसे कॉर्पोरेट की भाषा में ‘रीबैजिंग’ कहते हैं. इसका मतलब यह है कि ये कर्मचारी काम तो उसी बैंक के सिस्टम पर करेंगे, लेकिन अब वे टीसीएस के बजाय एक्सेंचर के कर्मचारी कहलाएंगे और सैलरी भी वहीं से मिलेगी।  रॉयल बैंक ऑफ कनाडा और टीसीएस का यह साथ आज का नहीं, बल्कि करीब दो दशक पुराना है. दोनों कंपनियों का यह सफर साल 2007 में शुरू हुआ था, जब बैंक की एक सहायक कंपनी ने टीसीएस को अपना मुख्य टेक्नोलॉजी पार्टनर चुना था. उस समय टीसीएस का काम बैंक के बुनियादी ढांचे को संभालने से जुड़ा था. इसे आप कोर बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Core Banking Infrastructure) से जुड़ा काम भी कह सकते हैं. कोर बैंकिंग का मतलब बैंक का वह मुख्य सॉफ्टवेयर और सिस्टम होता है, जिससे ग्राहकों के खातों, पैसों के लेन-देन और पासबुक जैसी तमाम बुनियादी चीजें चलती हैं. टीसीएस ने तब बैंक के कई अलग-अलग सिस्टम्स को मिलाकर एक मजबूत और इकलौता प्लेटफॉर्म तैयार किया था।  शुरुआत में हुआ था हंगामा समय के साथ यह रिश्ता सिर्फ बुनियादी काम संभालने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि काफी बड़ा हो गया. साल 2012-13 के दौरान जब बैंक ने टीसीएस को अपना काम बड़े पैमाने पर आउटसोर्स किया, तब कनाडा में इस पर काफी हंगामा और सार्वजनिक चर्चा भी हुई थी क्योंकि वहां कर्मचारियों के काम में बदलाव हो रहे थे. इसके बाद भी दोनों का काम चलता रहा और साल 2020 में टीसीएस ने अपनी सालाना रिपोर्ट में बड़े गर्व से बताया था कि उसने बैंक के ग्लोबल रिसर्च प्लेटफॉर्म को पूरी तरह से नया रूप दे दिया है. टीसीएस ने उस प्लेटफॉर्म को क्लाउड पर डेटा सुरक्षित रखने वाली तकनीक और एआई (AI – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित सर्च क्षमताओं से लैस किया था, ताकि ग्राहकों को बेहतर सुझाव मिल सकें. टीसीएस खुद को इस बैंक का एक बेहद करीबी और रणनीतिक डिजिटल पार्टनर मानती थी, जो बैंक को भविष्य की तकनीक के लिए तैयार कर रहा था।  क्या है काम छिनने की वजह? अब बात करते हैं कि आखिर इतना पुराना और मजबूत रिश्ता अचानक क्यों बदला. सूत्रों के मुताबिक, ग्लोबल स्तर पर बड़े बैंक और वित्तीय संस्थान आजकल इस बात पर नए सिरे से विचार कर रहे हैं कि वे बाहरी आईटी कंपनियों से किस तरह का काम करवाएं. आजकल हर बैंक का पूरा ध्यान एआई (AI) के जरिए अपने काम को ज्यादा से ज्यादा आसान, तेज और किफायती बनाने पर है. साथ ही, ये बैंक अब अपनी मुख्य टेक्नोलॉजी यानी कोर ऑपरेशन्स पर बाहरी कंपनियों के भरोसे रहने के बजाय खुद ज्यादा कंट्रोल और नियंत्रण रखना चाहते हैं. इसी रणनीतिक बदलाव के चक्कर में रॉयल बैंक ऑफ कनाडा ने इस पुराने कॉन्ट्रैक्ट के ढांचे को बदला है, जिससे टीसीएस के हाथ से काम का एक हिस्सा निकल गया।  कनाडा के बाजार में इस तरह के बैंकिंग टेक्नोलॉजी से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट्स बहुत मजबूत माने जाते हैं और कंपनियां सालों-साल एक ही पार्टनर के साथ काम करती हैं. ऐसे में टीसीएस जैसी बड़ी कंपनी के हाथ से इस बड़े बैंक का काम निकलना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. बता दें कि टीसीएस अपनी कुल कमाई का लगभग 48 फीसदी हिस्सा उत्तरी अमेरिका के बाजार से हासिल करती है, जिसमें कनाडा भी शामिल है. हालांकि, इस पूरे मामले पर जब टीसीएस, रॉयल बैंक ऑफ कनाडा और एक्सेंचर से सवाल पूछे गए, तो किसी भी कंपनी ने अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है। 

अब रेंज की टेंशन खत्म! BYD की नई Dolphin EV पेट्रोल पर भी दौड़ेगी

 नई दिल्ली BYD की नई टेक्नोलॉजी DM-i की चर्चा इन दिनों खूब हो रही है. कंपनी इस टेक्नोलॉजी के बदौलत लोगों की रेंज एंजायटी को दूर कर सकती है. इस टेक्नोलॉजी पर बेस्ड कार कंपनी भारत में भी लॉन्च करने वाली है. खैर फिलहाल कंपनी ने इस टेक्नोलॉजी पर बेस्ड Dolphin G DM-i प्लग-इन हाइब्रिड को अनवील किया है।  ये हैचबैक यूरोपीय बाजार के लिए तैयार की गई है. बीवाईडी ने इस कार को यूरोपीय मार्केट की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया है. भारत के लिए भी कंपनी इस टेक्नोलॉजी को टीज कर चुकी है. इसका मतलब है कि बीवाईडी जल्द ही भारतीय बाजार में अपनी पहली हाइब्रिड कार को लॉन्च कर सकती है।  किनसे है कार का मुकाबला?  बात करें डॉल्फिन जी डीएम-आई की, तो ये कार 4160 एमएम लंबी है. इस कार का यूरोप में सीधा मुकाबला फॉक्सवैगन पोलो, रेनो क्लिओ (Renault Clio) और टोयोटा यारिस से होगा. जहां इस कार से मुकाबला करने वाली दूसरी गाड़ियों में माइल्ड हाइब्रिड या स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड सिस्टम मिलता है. वहीं डॉल्फिन जी प्लग-इन हाइब्रिड सेटअप के साथ आएगी।  नई कार के जरिए कंपनी उन यूजर्स को टार्गेट कर रही है, जो ईवी जैसे ड्राइविंग तो चाहते हैं, लेकिन पूरी तरह से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर नहीं रहना चाहते हैं. इस कार की डिलीवरी यूरोप में 2026 के अंत तक शुरू हो सकती है. कार की कीमतों का ऐलान फिलहाल नहीं हुआ है।  1000Km की रेंज कंपनी का दावा है कि ये कार 1000 किलोमीटर (621 मील) की रेंज के साथ आएगी. यूरोप में मिलने वाली ज्यादातर हैचबैक इलेक्ट्रिक कार के मुकाबले ये रेंज ज्यादा है. हालांकि, बीवाईडी ने अभी इस कार की सभी डिटेल्स को रिवील नहीं किया है।  ब्रांड ने बताया है कि DM-i सिस्टम इलेक्ट्रिक ड्राइविंग को तवज्जो देता है और पेट्रोल इंजन एक रेंज एक्सटेंडर की तरह काम करता है. इससे लंबी दूरी का सफर आसान से किया जा सकता है. डॉल्फिन जी डीएम-आई में भी कंपनी इसी सेटअप का इस्तेमाल कर सकती है. इसमें 1.5 लीटर का पेट्रोल इंजन दिया जा सकता है।  कार फ्रंट माउंटेड इलेक्ट्रिक मोटर और बीवाईडी ब्लेड बैटरी टेक्नोलॉजी के साथ आएगी. ऐटो 2 डीएम-आई में कंपनी इस टेक्नोलॉजी को ऑफर करती है. ये कार 164 पीएस और 212 पीएम की पावर वेरिएंट के हिसाब से ऑफर करती है. रिपोर्ट्स की मानें, तो इस कार को कंपनी यूरोप में ही तैयार कर सकती है।   

अचानक आधी कीमत पर पहुंचा LIC का शेयर, क्या है इस बड़ी गिरावट का पूरा मामला?

मुंबई   ग्लोबल टेंशन की वजह से एक बार फिर से भारतीय शेयर बाजार बिकवाली मोड में आ गया है। इस माहौल के बीच शुक्रवार को भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के शेयर में अचानक 50% तक की गिरावट देखी गई। बुधवार को एलआईसी के शेयर 830 रुपये पर बंद हुए थे तो शुक्रवार को कीमत 410 रुपये के स्तर पर थी। वहीं, गुरुवार को बकरीद की वजह से बाजार में ट्रेडिंग नहीं हुई थी। अब सवाल है कि एलआईसी के शेयर में आखिर एक ही दिन में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई है। आइए इसका भी गणित समझ लेते हैं। बोनस शेयर की वजह से दिखी गिरावट दरअसल, सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी के 1:1 बोनस इश्यू एडजस्ट होने की वजह से यह शेयर अब पहले के मुकाबले 50 पर्सेंट से ज्यादा सस्ता हो गया है। बता दें कि अप्रैल के महीने में LIC ने एक प्लान को मंजूरी दी थी, जिसके तहत रिकॉर्ड डेट तक हर योग्य शेयरहोल्डर के पास मौजूद 10 रुपये के हर पूरी तरह से पेड-अप इक्विटी शेयर के बदले, 10 रुपये का एक और पूरी तरह से पेड-अप इक्विटी शेयर जारी किया जाएगा। कंपनी ने बताया था कि वह 31 दिसंबर, 2025 तक उपलब्ध अपने रिजर्व और सरप्लस (जो लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये था) में से 6,325 करोड़ रुपये तक की पूंजी का इस्तेमाल करके बोनस शेयर जारी करेगी। कंपनी ने अपने 1:1 बोनस इश्यू के लिए 29 मई (शुक्रवार) को रिकॉर्ड डेट तय की थी। बता दें कि यह LIC का अपने 21 लाख से ज्यादा शेयरहोल्डर्स के लिए पहला बोनस इश्यू है। मई 2022 में शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद से इस सरकारी बीमा कंपनी ने अब तक 5 अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है। कौन है बोनस शेयर के लिए योग्य? सिर्फ वही शेयरहोल्डर बोनस शेयर पाने के योग्य होंगे, जिनके डीमैट अकाउंट में शुक्रवार तक LIC के शेयर मौजूद होंगे। सेबी के T+1 सेटलमेंट नियम के कारण, निवेशकों को कंपनी के शेयर रिकॉर्ड डेट से कम से कम एक ट्रेडिंग दिन पहले खरीदने होंगे ताकि यह पक्का हो सके कि उस तारीख तक शेयर उनके डीमैट अकाउंट में जमा हो जाएं और इस तरह वे कॉर्पोरेट एक्शन के लिए योग्य हो सकें। बता दें कि 28 मई (गुरुवार) को बकरी ईद के कारण बाजार बंद थे। ऐसे में LIC के शेयर खरीदने की असल में आखिरी तारीख 27 मई (बुधवार) थी। बोनस इश्यू क्या होता है? बोनस इश्यू में कंपनी अपने रिजर्व में से फ्री शेयर बांटती है। इसे आमतौर पर कंपनी की मजबूत वित्तीय सेहत और विकास की संभावनाओं का संकेत माना जाता है। बोनस शेयर जारी करने से कुल बकाया शेयरों की संख्या तो बढ़ जाती है लेकिन इससे कंपनी के मार्केट कैपिटलाइजेशन में कोई बदलाव नहीं आता है। इससे शेयरों की लिक्विडिटी और खरीदने की क्षमता बेहतर हो सकती है।

अचानक बाजार में बड़ी गिरावट, Sensex 1100 अंक टूटा; निवेशकों के डूबे लाखों करोड़

मुंबई  बाजार बंद के दौरान,शुक्रवार को अचानक स्‍टॉक मार्केट में भारी गिरावट आई. सेंसेक्‍स-निफ्टी सभी इंडेक्‍स दबाव में रहे. दोपहर 3 बजे निफ्टी करीब 400 अंक टूटकर 23,500 पर पहुंच गया. वहीं सेंसेक्‍स 1150 अंक टूटकर 74,800 के ऊपर था. सबसे ज्‍यादा दबाव मिडकैप और स्‍मॉलकैप में दिखाई दिया, जहां सबसे ज्‍यादा मुनाफावसूली हुई।  BSE टॉप 30 शेयरों में से सिर्फ 4 शेयर ही मामूली तेजी पर कारोबार कर रहे थे, बाकी सभी 26 शेयर बिखर गए हैं. सबसे ज्‍यादा गिरावट इंडिगो, टाटा स्‍टील और पावरग्रिड जैसे शेयरों में आई है।  हालांकि कारोबार बंद होने तक, निफ्टी 360 अंक या 1.50 फीसदी गिरकर 23,547 पर था और सेंसेक्‍स 1092 अंक या 1.45 फीसदी गिरकर 74775 पर था. बैंक निफ्टी में भी 600 अंकों से ज्‍यादा की गिरावट आई।  5.56 लाख करोड़ का नुकसान बीएसई मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से देखें तो बुधवार को बीएसई का मार्केट कैप 470.75 लाख करोड़ रुपये था, जो आज 5.56 लाख करोड़ रुपये गिरकर 45.19 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. इसका मतलब है कि निवेशकों की वैल्‍यूवेशन 5.56 लाख करोड़ कम हुई है।  क्‍यों गिरा शेयर बाजार?  अमेरिका ईरान जंग: अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है. रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान गुरुवार को अपने युद्धविराम को बढ़ाने और होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाजों पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए एक समझौते पर पहुंच गए हैं, हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक इसे मंजूरी नहीं किया है, और ईरानी सरकारी मीडिया ने कहा है कि इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है।  वीआईएक्‍स में तेजी: इंडिया VIX में तगड़ी बढ़ोतरी हो गई है, जो 6% बढ़कर 15.91 पर पहुंच गया है. यह एक बड़े गिरावट का संकेत देता है।  FII की सेलिंग: भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं. सबसे जयादा बिकवाली साल 2026 में देखी जा रही है, जो अभी तक 2.20 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा की है. बुधवार को 1040 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए थे।  मुनाफावसूली: सबसे बड़ा कारण दो दिनों की छुट्टी के कारण बाजार में अचानक से मुनाफावसूली मानी जा रही है. ग्‍लोबल इम्‍पैक्‍ट के कारण गिरावट के साथ ज्‍यादातर सेक्‍टर में बिकवाली देखने को मिली. ऑटो से लेकर फाइनेंशियल, मेटल, ऑयल एंड गैस सेक्‍टर में 2 फीसदी से ज्‍यादा की गिरावट रही. हालांकि, आईटी और कंज्‍यूमर गूड्स ने थोड़ा सपोर्ट देने का प्रयास किया, लेकिन यह बड़ी गिरावट को रोकने में नाकाम रहे।  मानसून देरी से आने का अनुमान  बाजार में गिरावट की एक और बड़ी वजह मानी जा रही है, वह मानसून के देरी से आने का अनुमान है. देश के बड़े हिस्से में भीषण गर्मी की लहरें जारी रहने के बावजूद, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून के पूर्वानुमान को दीर्घकालिक औसत के 92% से घटाकर 90% कर दिया, जो इस बात का संकेत है कि जून से सितंबर के दौरान भारत में सामान्य से कम वर्षा होने का खतरा है।  हैवीवेट शेयरों में बड़ी गिरावट मार्केट में हैबीवेटज रखने वाले स्‍टॉक रिलायंस के शेयरों में करीब 2 फीसदी की गिरावट रही. टीसीएस में भी 1 फीसदी से ज्‍यादा गिरावट रही. बजाज फाइनेंस के शेयर 2.45 फीसदी, सन फार्मा के शेयर 2 फीसदी और पावरग्रिड के शेयर 4 फीसदी तक गिरे, जिसने सेंसेक्‍स को बड़ी गिरावट में बड़ा योगदान दिया। 

एयर इंडिया-इंडिगो ने घटाईं उड़ानें, ईंधन संकट और युद्ध का असर; बढ़ सकता है किराया

मुंबई  भारतीय घरेलू विमानन (एविएशन) क्षेत्र इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है. वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ते ईंधन के दाम, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण देश की बड़ी विमानन कंपनियां भारी दबाव में हैं. इस गंभीर संकट से निपटने और खुद को वित्तीय घाटे से बचाने के लिए एयरलाइंस ने अब विस्तार की जगह 'सर्वाइवल मोड' अपना लिया है. इसके तहत जून 2026 से देश में रोजाना लगभग 250 घरेलू उड़ानों को बंद करने का बड़ा फैसला लिया गया है।  इस कटौती का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला है, जिससे आगामी महीनों में हवाई सफर बेहद महंगा और सीमित हो जाएगा।  किन एयरलाइंस ने कितनी की कटौती? भारत के घरेलू विमानन बाजार में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली तीन बड़ी कंपनियां—एयर इंडिया, इंडिगो और एयर इंडिया एक्सप्रेस—मिलकर अपनी उड़ानों में भारी कटौती कर रही हैं: एयर इंडिया: कंपनी जून और जुलाई के महीनों में अपने घरेलू परिचालन में करीब 22 प्रतिशत की कटौती करेगी. एयर इंडिया रोजाना लगभग 500 उड़ानों का संचालन करती है, जिसमें से हर दिन करीब 110 उड़ानें रद्द रहेंगी. आंकड़ों के अनुसार, जहां अप्रैल-मई में कंपनी ने 31,184 उड़ानें संचालित की थीं, वहीं जून-जुलाई के लिए केवल 22,868 उड़ानें ही शेड्यूल की गई हैं।  कितनी कटौती करेगी एयरलाइंस इंडिगो: देश की सबसे बड़ी बजट एयरलाइन इंडिगो भी अपनी घरेलू क्षमता में 5 से 7 प्रतिशत की कमी कर रही है. इसके तहत कंपनी रोजाना अपनी करीब 110 उड़ानों को रोक देगी।  एयर इंडिया एक्सप्रेस: टाटा समूह की यह सहयोगी एयरलाइन भी अपने घरेलू नेटवर्क से लगभग 10 प्रतिशत उड़ानों को कम करने जा रही है।  टियर-2 और टियर-3 शहरों पर गिरेगी सबसे गाज एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार, इस कटौती का सबसे पहला और गंभीर असर देश के छोटे और टियर-2 शहरों पर पड़ेगा. एयरलाइंस अब केवल उन्हीं रूटों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं जहां से उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है।  विशेषज्ञ अजय जसरा के मुताबिक, नागपुर, इंदौर, रायपुर, रांची, सूरत, वडोदरा, कोयंबटूर और विशाखापत्तनम जैसे शहरों की कनेक्टिविटी सबसे ज्यादा प्रभावित होगी. ये ऐसे रूट हैं जो मुख्य रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) के यात्रियों और बजट ग्राहकों पर निर्भर करते हैं, जहां प्रीमियम या बिजनेस क्लास के यात्री बहुत कम होते हैं।  प्रभावित होने वाले मुख्य रूट: नागपुर-बेंगलुरु, नागपुर-कोलकाता, इंदौर-अहमदाबाद, सूरत-हैदराबाद और विशाखापत्तनम-पुणे जैसे मार्गों पर उड़ानों की संख्या काफी कम कर दी जाएगी।  हवाई किराए में भारी बढ़ोतरी की आशंका उड़ानों की संख्या घटने और सीटों की उपलब्धता कम होने के कारण टिकटों के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकते हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि:     मेट्रो रूट (बड़े शहर): दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के बीच किराए में 10 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है.     टियर-2 रूट (छोटे शहर): सीमित उड़ानों के कारण इन शहरों के किराए 20 से 40 प्रतिशत तक महंगे हो जाएंगे.     लास्ट-मिनट बुकिंग: यदि कोई यात्री यात्रा से ठीक पहले या वीकेंड पर टिकट बुक करता है, तो उसे 50 से 80 प्रतिशत तक का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है. संकट के पीछे के मुख्य कारण क्या हैं? विमानन क्षेत्र के इस अचानक 'सुरक्षात्मक रवैये' के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं: एटीएफ (विमानन ईंधन) की आसमान छूती कीमतें ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव की वजह से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई है. इसके कारण घरेलू हवाई ईंधन (ATF) की कीमतों में 25 प्रतिशत तक का उछाल आया है।  अंतरराष्ट्रीय परिचालन का खर्च पश्चिम एशिया में हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लंबे रूट से जाना पड़ रहा है. इससे विदेशी उड़ानों का ईंधन खर्च करीब 100 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जिसका असर घरेलू बजट पर भी पड़ रहा है।  कैश बचाने की मजबूरी एविएशन एक्सपर्ट और एवियालाज कंसल्टेंट्स के सीईओ संजय लाजर के अनुसार, एयरलाइंस इस समय केवल नगदी (Cash) बचाने और अपने ऑपरेटिंग मार्जिन को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही हैं. जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात सामान्य नहीं होते, उद्योग के लिए अगली दो तिमाहियां बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाली हैं।  मांग में सुस्ती गर्मियों की मुख्य छुट्टियों के बाद जून और जुलाई में वैसे भी पर्यटन यात्राएं कम हो जाती हैं. आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण लोग गैर-जरूरी यात्राओं पर खर्च करने से बच रहे हैं।  अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी लगा ब्रेक घरेलू उड़ानों के साथ-साथ एयर इंडिया ने अपने कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय रूटों पर भी उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित या कम कर दिया है. दिल्ली-शिकागो, दिल्ली-शंघाई, चेन्नई-सिंगापुर और मुंबई-ढाका जैसी उड़ानों पर इसका सीधा असर पड़ा है. इसके अलावा सैन फ्रांसिस्को, टोरंटो, पेरिस और ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न व सिडनी जाने वाली उड़ानों के फेरे (Frequencies) भी घटा दिए गए हैं।  आने वाले कुछ महीने भारतीय हवाई यात्रियों के लिए काफी परेशानी भरे हो सकते हैं. यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी यात्रा की योजना काफी पहले बनाएं और किसी भी असुविधा से बचने के लिए एयरलाइंस की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी फ्लाइट का स्टेटस लगातार चेक करते रहें।