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US से जापान तक बाजार में तूफानी तेजी, भारतीय शेयर बाजार भी उछला

मुंबई  अमेरिका से लेकर एशियाई शेयर बाजारों तक में जोरदार तेजी से भारतीय शेयर बाजार का मूड भी सुधरा है और सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स तूफानी तेजी के साथ ओपन हुए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स ओपनिंग के साथ ही 500 अंक से ज्यादा की छलांग लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 150 अंक से ज्यादा की बढ़त के साथ खुला. इस तेजी के बीच बीईएल, इंडिगो से लेकर जोमैटो की पेरेंट कंपनी एटरनल और टाटा स्टील जैसे शेयक खुलते ही दौड़ लगाते नजर आए।  सेंसेक्स-निफ्टी में तेज उछाल  गुरुवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने पर बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 75,318 की तुलना में तेजी लेकर 75,732 के लेवल पर ओपन हुआ और फिर मिनटों में ये 75,945 पर कारोबार करता हुआ नजर आया. BSE Sensex की तरह एनएसई का निफ्टी इंडेक्स भी बुधवार के अपने बंद 23,659 के मुकाबले तेजी लेकर 23,830 पर ओपन हुआ।  ये 10 शेयर खुलने के साथ ही भागे Share Market की तेज शुरुआत के बीच अगर सबसे ज्यादा उछलने वाले शेयरों की बात करें, तो बीएसई लार्जकैप कंपनियों में शामिल IndiGo Share (2.60%), BEL (2.20%), Eternal Share (1.80%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहा था।  इसके अलावा मिडकैप में शामिल TI India Share (2.10%), Godrej Properties Share (1.80%), Bharat Forge Share (1.50%)और Suzlon Share (1.40%) की तेजी के साथ ट्रेड कर रहे थे. वहीं स्मॉलकैप कंपनियों में देखें, तो Samman Cap Share (7%), AIIL Share (4%), Angel One Share (3.60%) की तेजी में नजर आया।  विदेशों से मिले थे ग्रीन सिग्नल भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशों से भी ग्रीन सिग्नल मिल रहे थे, एक ओऱ जहां अमेरिकी शेयर बाजारों में बीते कारोबारी दिन तूफानी उछाल देखने को मिला था और Dow Jones 645 अंक की धुआंधार तेजी के साथ क्लोज हुआ था, तो वहीं खुलने के साथ ही गुरुवार को एशियाई शेयर बाजारों में धमाल मचा था. जापान का निक्केई 2000 अंक से ज्यादा उछलकर कारोबार कर रहा था, तो साउथ कोरिया के कोस्पी इंडेक्स में 7.70 फीसदी या 560 अंक की तेजी देखने को मिली।  (नोट- शेयर बाजार में किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें.)

MINI India का नया धमाका! Cooper S JCW GP Inspired Edition हुई लॉन्च, फीचर्स ने खींचा ध्यान

मुंबई  प्रीमियम हैचबैक निर्माता कंपनी MINI India ने इस महीने की शुरुआत में अपनी MINI Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन की बुकिंग शुरू की थी, और अब कंपनी ने इस कार को भारत में लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस स्पेशल ए़डिशन को 58.90 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर उतारा है।  भारतीय बाज़ार के लिए इस कार की सिर्फ़ 30 यूनिट्स ही सीमित रखी गई हैं. यह स्पेशल एडिशन MINI GP से इंस्पायर्ड है और विक्ट्री एडिशन के बाद MINI Cooper S पर बेस्ड दूसरा स्पेशल एडिशन है, जिसे भारतीय बाजार में पेश किया गया है।  MINI Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन का डिजाइन GP इंस्पायर्ड एडिशन को एक्सक्लूसिव लेजेंड ग्रे एक्सटीरियर शेड में फिनिश किया गया है, जिसके कंट्रास्ट में चिली रेड रूफ और मिरर कैप्स हैं. इसमें GP-इंस्पायर्ड बोनट और साइड स्ट्राइप्स भी हैं, जो रेड और ग्रे कलर में फिनिश किए गए हैं, और कार के C-पिलर पर '1/30' बैजिंग है।  MINI ने John Cooper Works के लिए कई खास कॉस्मेटिक चीज़ें भी जोड़ी हैं, जिसमें स्पॉइलर एक्सटेंशन, फ्रंट और रियर विंगलेट, साइड स्कर्ट और रियर डिफ्यूज़र शामिल हैं. इसके अलावा, हैचबैक में 17-इंच के JCW स्प्रिंट स्पोक अलॉय व्हील हैं, जिन्हें चिली रेड कलर में फिनिश किए गए GP-इंस्पायर्ड व्हील हब कैप के साथ जोड़ा गया है।  MINI Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन का इंटीरियर कार के इंटीरियर की बात करें तो, केबिन में इस एडिशन के लिए कई खास एलिमेंट्स दिए गए हैं. इनमें इल्यूमिनेटेड GP-इंस्पायर्ड डोर सिल्स, '1/30' फ्लोर मैट और JCW-स्पेसिफिक डोर लॉक पिन दिए गए हैं।  कंपनी ने इस हैचबैक में वेस्किन और कॉर्ड अपहोल्स्ट्री कॉम्बिनेशन में फिनिश की गई JCW स्पोर्ट सीट्स, JCW डैशबोर्ड ट्रिम और पैडल शिफ्टर्स के साथ एक नया JCW स्टीयरिंग व्हील दिए गए हैं।  MINI Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन के फीचर्स फीचर्स की बात करें तो, स्पेशल एडिशन में 9.4-इंच का सर्कुलर OLED टचस्क्रीन, एक हेड-अप डिस्प्ले, एक हारमन कार्डन साउंड सिस्टम, वायरलेस एप्पल कारप्ले और एंड्रॉयड ऑटो और कनेक्टेड कार टेक जैसे फीचर्स मिलते हैं. वहीं, सेफ्टी फीचर्स के तौर पर इस कार में कई एयरबैग, ABS, डायनामिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग और एक रियर-व्यू कैमरा मिलते हैं।  MINI Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन का इंजन Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन में 2.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन मिलता है, जो 204 hp का पावर और 300 Nm का टॉर्क देता है. इसे 7-स्पीड डुअल-क्लच ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ जोड़ा गया है. इस इंजन की बदौलत यह हैचबैक 6.6 सेकंड में 0-100 kmph की स्पीड पकड़ सकती है और इसकी टॉप स्पीड 242 kmph बताई गई है। 

ईंधन कीमतों की मार, क्विक डिलीवरी कंपनियां बढ़ा सकती हैं चार्ज

मुंबई  देश में 10 मिनट वाले क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी सर्विस का यूज लगभग अब हर घर में होने लगा है, लेकिन बढ़ते पेट्रोल-डीजल की कीमतों का असर अब इन कंपनियों के ऊपर भी पड़ने वाला है. हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. एलारा कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, जियो-पॉलिटिकल तनाव और ऊंचे क्रूड ऑयल दामों की वजह से यह बढ़ोतरी हुई है. इससे डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई पर दबाव पड़ेगा और प्लेटफॉर्म्स को लागत बढ़ानी पड़ सकती है।  फ्यूल बढ़ोतरी का डिलीवरी पर असर क्विक कॉमर्स में ऐवरेज डिलीवरी लागत 35-50 रुपये प्रति ऑर्डर है, जबकि फूड डिलीवरी में यह 55-60 रुपये के आसपास होती है. रिपोर्ट के मुताबिक, Eternal (Zomato) के लिए ऐवरेज डिलीवरी लागत करीब 45 रुपये और Swiggy के लिए 55 रुपये प्रति ऑर्डर है. डिलीवरी लागत में फ्यूल की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है, यानी एक ऑर्डर पर 9-10 रुपये फ्यूल का खर्च आता है।  फिलहाल 4 प्रतिशत बढ़ोतरी से प्रति ऑर्डर 0.44 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. अगर फ्यूल के दाम और बढ़कर 10 रुपये प्रति लीटर हो गए तो यह प्रभाव 1-1.2 रुपये प्रति ऑर्डर तक पहुंच सकता है. इससे कंपनियों की कमाई (EBITDA) पर 4-12 प्रतिशत तक असर पड़ सकता है, अगर लागत ग्राहकों पर नहीं डाली गई।  Eternal और Swiggy पर क्या असर? Eternal (जिसमें Blinkit शामिल है) और Swiggy दोनों ही फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स पर निर्भर हैं. FY27 में Eternal के करीब 2.7 अरब और Swiggy के 1.4 अरब ऑर्डर आने का अनुमान है. Swiggy पर असर ज्यादा हो सकता है क्योंकि वह अभी क्विक कॉमर्स में ब्रेकईवन यानी नो प्रॉफिट, नो लॉस की राह पर है।  दूसरी ओर, Eternal की स्थिति बेहतर मानी जा रही है. उसका बड़ा स्केल, ज्यादा एड आय और प्रीमियम ग्राहक आधार इसे लागत बढ़ाने में मदद करेगा. कंपनियां अतिरिक्त खर्च का कुछ हिस्सा ग्राहक चार्ज बढ़ाकर, कुछ खुद उठाएंगी और कुछ डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई पर दबाव डालकर संभालने की कोशिश करेंगी।  ग्राहकों और डिलीवरी वर्कर्स पर प्रभाव बढ़ती लागत से 10 मिनट डिलीवरी का कन्वीनियंस महंगा पड़ सकता है. ऐसे में कंपनियां डिलीवरी फीस या सर्विस चार्ज बढ़ा सकती हैं. डिलीवरी पार्टनर्स (गिग वर्कर्स) की कमाई प्रभावित होने से वे ज्यादा पेमेंट की मांग कर सकते हैं, जिससे पूरा सिस्टम प्रभावित होगा।  हालांकि, एलारा कैपिटल का कहना है कि थोड़े समय बाद यह कंट्रोल में रहेगा. लंबे समय में कंपनियां दक्षता बढ़ाकर, इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ाकर और बेहतर प्लानिंग से इस चुनौती से निपट सकती हैं. फ्यूल दामों में बढ़ोतरी अब क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री के लिए नई चुनौती बनकर आ रही है। 

Meta में बड़े पैमाने पर layoffs, कर्मचारियों की नींद खुली तो इनबॉक्स में था नौकरी खत्म होने का ईमेल

 नई दिल्ली मेटा ने बड़े स्तर पर छंटनी की शुरुआत कर दी है, जिसके लिए कंपनी ने 20 मई की सुबह 4 बजे कई लोगों को ईमेल नौकरी से निकालने का ईमेल किया. इसकी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स मिली है. पुरानी रिपोर्ट्स में भी दावा किया जा चुका था कि 20 मई को कंपनी बड़े स्तर पर छंटनी करेगी।  मेटा अपनी ग्लोबल वर्कफोर्स में से 10 परसेंट यानी करीब 8 हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ते दिखाएगी. कंपनी ने इसकी शुरुआत सिंगापुर बेस्ड टीम के साथ की है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया है कि सिंगापुर के स्थानीय समय के अनुसार सुबह 4 बजे लोगों को ईमेल आया है।  मार्क जकरबर्ग का प्लान आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) में बड़ी इनवेस्टमेंट का है और इस साल भी वह अरबों डॉलर्स की रकम इनवेस्ट करने जा रहे हैं. मेटा ने बताया है कि दुनियाभर में उसके करीब 78 हजार कर्मचारी हैं।  7 हजार कर्मचारियों को न्यू AI टीम में डालने जा रही है मेटा के चीफ पीपुल ऑफिसर जेनेला गाले ने एक इनहाउस मेमो में कहा है कि 8 हजार नौकरी खत्म करने के अलावा कंपनी करीब 7 हजार कर्मचारियों को न्यू AI टीम में डालने जा रही है. कंपनी का फोकस अब छोटी टीम्स तैयार करना है।  छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों की संख्या 16,000 तक पहुंच सकती है इन प्रस्तावित छंटनियों से अकेले शुरुआती चरण में ही मेटा के वैश्विक कर्मचारियों में से लगभग 10 प्रतिशत कमचारियों के प्रभावित होने की उम्मीद है। हालांकि कंपनी ने छंटनी की पूरी सीमा की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि 2026 में बाद में और भी नौकरियां कम होने की संभावना है, जिससे प्रभावित कर्मचारियों की कुल संख्या बढ़कर लगभग 16,000 तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, मेटा के अधिकारी अभी भी कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी और AI में हुई प्रोग्रेस के आधार पर छंटनी से जुड़ी जानकारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। हालांकि, ये छंटनी अचानक नहीं की जा रही है। मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने पिछले एक साल में कई बार इस बात पर जोर दिया है कि कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में लीडर बनना चाहती है, जेनरेटिव टूल्स से लेकर उस इंफ्रास्ट्रक्चर तक, जो बड़े पैमाने पर मशीन लर्निंग सिस्टम को चलाता है। इस बदलाव को सपोर्ट करने के लिए, मेटा कथित तौर पर बड़े पैमाने पर पैसा खर्च की योजना बना रही है, जिसका अनुमान इस साल के लिए लगभग $135 बिलियन है; इसमें से ज्यादातर हिस्सा AI से जुड़े निवेशों, जैसे डेटा सेंटर, चिप और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, के लिए रखा गया है। मेटा ने महामारी के दौर में 21,000 लोगों को निकाला था अगर Meta छंटनी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है, तो यह पिछले कुछ सालों में कंपनी में हुई नौकरियों की कटौती की एक और कड़ी होगी। यह मेटा में 2022 और 2023 में हुई छंटनी के पिछले दौर जैसा ही है, जब कंपनी ने धीमी ग्रोथ और महामारी के दौर में हुए जरूरत से ज्यादा विस्तार के नतीजों के चलते लगभग 21,000 नौकरियां खत्म कर दी थीं। उस दौर को, जिसे जकरबर्ग नें year of efficiency नाम दिया था, ऑपरेशन्स को सुव्यवस्थित करने, मैनेजमेंट के स्तरों को कम करने और वित्तीय अनुशासन को बेहतर बनाने के लिए किए गए ठोस प्रयासों के लिए जाना जाता है। हालांकि, अब होने वाली छंटनी एक ज्यादा सुगठित संगठन बनाने की बड़ी मुहिम का हिस्सा है। कहा जा रहा है कि कंपनी अधिकारी मैनेजमेंट के स्तरों को कम करने और AI-बेस्ड प्रोसेस पर ज्यादा निर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रही है। अंदरूनी तौर पर, मेटा ने अपनी AI प्राथमिकताओं के हिसाब से टीमों को फिर से व्यवस्थित करना शुरू कर दिया है। इंजीनियरों को ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए फिर से नियुक्त किया गया है जो कोड लिखने और मुश्किल कामों को संभालने में सक्षम ऑटोनॉमस सिस्टम बनाने पर केंद्रित हैं, जबकि AI-बेस्ड प्रोडक्ट्स को तेजी से बाजार में लाने के लिए नई यूनिट्स बनाई गई हैं। 2026 में बड़े पैमाने पर छंटनी, अब तक 73,000 की नौकरी गई इस बदलाव में Meta अकेली नहीं है। इन बदलावों का असर पूरी टेक इंडस्ट्री में महसूस किया जा रहा है, जहां बड़ी कंपनियां एक तरफ नौकरियों में कटौती कर रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ AI में अपना निवेश बढ़ा रही हैं। उदाहरण के लिए, Amazon ने हाल के महीनों में कथित तौर पर लगभग 30,000 कॉर्पोरेट पदों को खत्म कर दिया है, जो उसके व्हाइट-कॉलर वर्कफोर्स का लगभग 10 प्रतिशत है। इसी तरह, फिनटेक कंपनी Block ने भी अपने वर्कफोर्स में काफी कटौती की है। Layoffs.fyi के आंकड़ों से इस बदलाव के पैमाने का पता चलता है। इस प्लेटफॉर्म के अनुसार, इस साल अब तक दुनिया भर की 95 कंपनियों में 73,000 से ज्यादा टेक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा चुका है। मेटा ने बीते महीने कर दिया था कंफर्म छंटनी की रिपोर्ट्स सामने आने के बाद बीते महीने ही मेटा ने कंफर्म कर दिया था कि वह करीब 8 हजार लोगों की छंटनी करने जा रहे हैं. इसके बाद कर्मचारियों को मनोबल गिर गया।  मेटा सीईओ मार्क जकरबर्ग ने AI को कंपनी की सबसे बड़ी प्राथमिकता पर ला दिया है. दरअसल, Meta, Google और OpenAI जैसी कंपनियों की बराबरी करने के लिए AI लेवल पर नए इनोवेशन करना जरूरी है. मेटा बीते महीने ही कह चुका है कि वह इस साल 125 अरब डॉलर से 145 अरब डॉलर के बीच AI पर इनवेस्टमेंट का प्लान बना रहे हैं।  दूसरी कंपनियां भी छंटनी की तैयारी में बीते सप्ताह Cisco ने पिछले हफ्ते 4 हजार लोगों को बाहर निकालने की जानकारी दी थी. वहीं माइक्रोसॉफ्ट, ऐमेजॉन और अन्य कंपनियां भी हाल ही में छंटनी की जानकारी दे चुकी हैं। 

AI नीति पर भड़के Samsung कर्मचारी, 45 हजार वर्कर्स इस दिन से करेंगे स्ट्राइक

 नई दिल्ली दुनिया इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में तेजी से आगे बढ़ रही है. हर बड़ी कंपनी AI की रेस में लगी है और इसके पीछे सबसे बड़ी ताकत है चिप यानी सेमीकंडक्टर. लेकिन इसी बीच दुनिया की सबसे बड़ी चिप बनाने वाली कंपनियों में से एक Samsung में बड़ा संकट खड़ा हो गया है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक सैमसंग के करीब 45 हजार कर्मचारी हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं. यह कंपनी के इतिहास की सबसे बड़ी हड़ताल मानी जा रही है. खास बात यह है कि ये वही कर्मचारी हैं जो कंपनी के मेमोरी चिप प्लांट्स में काम करते हैं, यानी वही जगह जहां से AI, स्मार्टफोन, लैपटॉप और सर्वर के लिए जरूरी चिप्स बनते हैं।  AI से फायदा बढ़ा, लेकिन कर्मचारियों की सैलरी नहीं इस हड़ताल की वजह सिर्फ एक नहीं है. कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें बेहतर सैलरी, बोनस और काम के हालात चाहिए. AI बूम की वजह से कंपनी का मुनाफा बढ़ा है, लेकिन कर्मचारियों को उसका फायदा उतना नहीं मिला. यही असंतोष अब बड़े आंदोलन में बदलता दिख रहा है।  असल कहानी यहां से दिलचस्प होती है. AI की वजह से चिप्स की मांग पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है. ChatGPT जैसे टूल्स, डेटा सेंटर और नई टेक्नोलॉजी के लिए भारी मात्रा में मेमोरी चिप्स की जरूरत होती है. सैमसंग इस सप्लाई चेन का बड़ा हिस्सा है. अगर यहां प्रोडक्शन रुकता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।  लंबी चली हड़ताल तो महंगे होंगे डिवाइसेज अगर यह हड़ताल लंबे समय तक चलती है, तो सबसे पहले असर चिप सप्लाई पर दिखेगा. चिप्स कम होंगे, तो कंपनियों के लिए प्रोडक्ट बनाना मुश्किल होगा. इसका मतलब है कि स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं।  सीधे शब्दों में कहें तो अगर सैमसंग के प्लांट्स में काम रुकता है, तो आने वाले समय में मोबाइल और गैजेट्स महंगे हो सकते हैं. यह असर सिर्फ टेक इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा।  आज बैंकिंग, हेल्थकेयर, ऑटोमोबाइल और यहां तक कि सरकारी सिस्टम भी चिप्स पर निर्भर हैं. ऐसे में सप्लाई में गड़बड़ी आने से कई सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं।  फिलहाल बातचीत जारी है, लेकिन अगर कंपनी और यूनियन के बीच समझौता जल्दी नहीं होता, तो यह हड़ताल लंबी खिंच सकती है. और जितनी लंबी यह चलेगी, उतना ही बड़ा असर बाजार पर पड़ेगा।  एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सिर्फ एक कंपनी का मामला नहीं है, बल्कि आने वाले समय का संकेत है. AI की वजह से कंपनियों का मुनाफा बढ़ रहा है, लेकिन कर्मचारियों की उम्मीदें भी बढ़ रही हैं. अगर उन्हें उनका हिस्सा नहीं मिला, तो ऐसी हड़तालें और बढ़ सकती हैं।  दुनिया AI और टेक्नोलॉजी की बात कर रही है, लेकिन उसके पीछे काम करने वाले लाखों लोग भी हैं. अगर वही लोग काम रोक दें, तो पूरी डिजिटल दुनिया की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।  आम आदमी के लिए यह खबर सिर्फ एक कॉर्पोरेट विवाद नहीं है. इसका सीधा असर उसकी जेब पर पड़ सकता है. आने वाले महीनों में अगर गैजेट्स महंगे होते हैं या उनकी कमी होती है, तो इसकी एक बड़ी वजह यही हड़ताल हो सकती है। 

आम आदमी पर महंगाई की नई मार, पेट्रोल-डीजल महंगा… फिर चर्चा में आया 90 पैसे फॉर्मूला

नई दिल्ली  पेट्रोल और डीजल के दाम फिर बढ़ गए हैं। एक हफ्ते में दूसरी बार पेट्रोल और डीजल महंगा हुआ है। दिल्ली में मंगलवार को पेट्रोल के दाम 0.87 रुपये बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गए हैं। वहीं, दिल्ली में डीजल 0.91 रुपये बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। उपभोक्ताओं को फिलहाल LPG की कीमतों में राहत है। कंपनियों ने मंगलवार को LPG सिलेंडर के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। कोलकाता में मंगलवार को एक लीटर पेट्रोल का रेट अब 109.70 रुपये और डीजल का रेट 96.07 रुपये हो गया है। जबकि, चेन्नई में पेट्रोल आज 19 मई से 104.49 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 96.11 रुपये हो गई है। 5 दिन पहले 3-3 रुपये बढ़े थे पेट्रोल-डीजल के दाम अभी 5 दिन पहले ही पेट्रोल-डीजल के रेट में 3-3 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। पहले जहां तेल कंपनियों का डेली घाटा करीब 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, वहीं अब यह घटकर लगभग 750 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गया है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल और कमजोर रुपये की वजह से तेल कंपनियों पर काफी दबाव बना हुआ है। क्रिसिल के अनुमान के अनुसार, सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क में राहत और ताजा बढ़ोतरी से घाटा घटकर पेट्रोल पर लगभग 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर रह गया है। फिर भी, संघर्ष शुरू होने के बाद से कुल घाटा मई के अंत तक 1 लाख करोड़ रुपये के पार जाने का अनुमान है। देश अलग-अलग शहरों में पेट्रोल-डीजल का ताजा भाव     दिल्ली में पेट्रोल ₹0.87 महंगा होकर ₹98.64 प्रति लीटर और डीजल ₹0.91 बढ़कर ₹91.58 प्रति लीटर हो गया है.     मुंबई में पेट्रोल ₹0.91 बढ़कर ₹107.59 प्रति लीटर और डीजल ₹0.94 महंगा होकर ₹94.08 प्रति लीटर बिक रहा है.     कोलकाता में पेट्रोल ₹1 बढ़कर ₹109.70 प्रति लीटर और डीजल ₹0.94 चढ़कर ₹96.07 प्रति लीटर पहुंच गया है.     चेन्नई में पेट्रोल ₹0.79 महंगा होकर ₹104.46 प्रति लीटर और डीजल ₹0.86 बढ़कर ₹96.11 प्रति लीटर हो गया है.     गुरुग्राम में पेट्रोल ₹0.82 बढ़कर ₹99.29 प्रति लीटर और डीजल ₹0.86 महंगा होकर ₹91.80 प्रति लीटर बिक रहा है.     नोएडा में पेट्रोल ₹1.15 चढ़कर ₹98.91 प्रति लीटर और डीजल ₹1.22 बढ़कर ₹92.21 प्रति लीटर हो गया है.     बेंगलुरु में पेट्रोल ₹0.95 महंगा होकर ₹107.12 प्रति लीटर और डीजल ₹0.94 बढ़कर ₹95.04 प्रति लीटर पहुंच गया है.     भुवनेश्वर में पेट्रोल ₹0.52 बढ़कर ₹105.09 प्रति लीटर और डीजल ₹0.57 महंगा होकर ₹96.68 प्रति लीटर बिक रहा है.     चंडीगढ़ में पेट्रोल ₹0.83 बढ़कर ₹98.10 प्रति लीटर और डीजल ₹0.84 चढ़कर ₹86.09 प्रति लीटर हो गया है.     हैदराबाद में पेट्रोल ₹0.99 महंगा होकर ₹111.88 प्रति लीटर और डीजल ₹0.99 बढ़कर ₹99.95 प्रति लीटर पहुंच गया है.     जयपुर में पेट्रोल ₹1.71 बढ़कर ₹109.32 प्रति लीटर और डीजल ₹1.60 महंगा होकर ₹94.50 प्रति लीटर बिक रहा है.     लखनऊ में पेट्रोल ₹0.68 बढ़कर ₹98.40 प्रति लीटर और डीजल ₹0.72 चढ़कर ₹91.73 प्रति लीटर हो गया है.     पटना में पेट्रोल ₹1.10 महंगा होकर ₹110.02 प्रति लीटर और डीजल ₹1.08 बढ़कर ₹96.05 प्रति लीटर पहुंच गया है. 4 साल बाद बढ़े पेट्रोल-डीजल के रेट इससे पहले सरकारी तेल कंपनियों ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. करीब 4 साल बाद तेल की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिला. इससे पहले अप्रैल 2022 में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े थे. वहीं मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ने ₹2 प्रति लीटर की कटौती की थी. पेट्रोल-डीजल और LPG रेट दिल्ली पेट्रोल: ₹98.64 प्रति लीटर डीजल: ₹91.36 प्रति लीटर घरेलू LPG सिलेंडर (14.2kg): ₹913 कमर्शियल सिलेंडर (19kg): ₹3,071.50 5 किलो सिलेंडर: ₹339 पेट्रोल-डीजल और LPG रेट लखनऊ पेट्रोल: ₹98.42 डीजल: ₹91.73 घरेलू LPG: ₹950.50 कमर्शियल LPG: ₹3,194 5 किलो सिलेंडर: ₹352.50 पेट्रोल-डीजल और LPG रेट कोलकाता पेट्रोल: ₹109.70 डीजल: ₹96.07 घरेलू LPG: ₹939 कमर्शियल LPG: ₹3,202 5 किलो सिलेंडर: ₹348 पेट्रोल-डीजल और LPG रेट पटना पेट्रोल: ₹109.54 डीजल: ₹95.58 घरेलू LPG: ₹1,002.50 कमर्शियल LPG: ₹3,346.50 5 किलो सिलेंडर: ₹371.50 पेट्रोल-डीजल और LPG रेट जयपुर पेट्रोल: ₹108.94 डीजल: ₹94.14 घरेलू LPG: ₹916.50 कमर्शियल LPG: ₹3,099 5 किलो सिलेंडर: ₹341.50 पेट्रोल-डीजल और LPG रेट बेंगलुरु पेट्रोल: ₹107.14 डीजल: ₹95.04 घरेलू LPG: ₹915.50 कमर्शियल LPG: ₹3,152 5 किलो सिलेंडर: ₹340 सरकार फिलहाल सब्सिडी देने के मूड में नहीं पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ कहा कि तेल कंपनियों को राहत देने के लिए फिलहाल किसी सरकारी सब्सिडी पैकेज पर विचार नहीं हो रहा है। कंपनियां अब भी पेट्रोल, डीजल और LPG को लागत से कम कीमत पर बेच रही हैं। ईरान युद्ध से बढ़ा दबाव अमेरिका-इजराइल और ईरान संघर्ष के बाद वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। सरकार ने लंबे समय तक घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रखीं, लेकिन आखिरकार 15 मई को पेट्रोल-डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करनी पड़ी। इसके 5वें दिन ही एक बार फिर पेट्रोल-डीजल के रेट में इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बढ़ोतरी तेल कंपनियों को सीमित राहत देती है, लेकिन इससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।

बैंकिंग सेक्टर में TVS Motor की एंट्री, जन स्मॉल फाइनेंस बैंक में निवेश से शेयरों पर नजर

 नई दिल्ली  टीवीएस मोटर कंपनी लिमिटेड 193.32 करोड़ रुपये में जन स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड में 4.9 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी। टीवीएस मोटर कंपनी लिमिटेड ने सोमवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि यह अधिग्रहण ‘टीवीएस वेणु’ के एक सौदे का हिस्सा है इसके तहत वॉरंट जारी करने और द्वितीयक बाजार से खरीद के जरिये जन स्मॉल फाइनेंस बैंक में पूर्ण रूप से चुकता आधार पर 9.9 प्रतिशत तक की अल्पांश हिस्सेदारी हासिल की जाएगी। इसमें से 4.9 प्रतिशत हिस्सेदारी टीवीएस मोटर कंपनी के पास होगी। हो गया शेयर खरीद समझौता टीवीएस मोटर कंपनी के निदेशक मंडल ने सोमवार को हुई बैठक में जन होल्डिंग्स लिमिटेड के साथ शेयर खरीद समझौते (एसपीए) को मंजूरी दी। इसके तहत कंपनी 51,60,903 इक्विटी शेयरों की खरीद करेगी, जो 18 मई, 2026 तक जन स्मॉल फाइनेंस बैंक की चुकता पूंजी का 4.90 प्रतिशत है। कितने में हुई है डील? टीवीएस मोटर ने बताया कि इस सौदे की कुल लागत 193.32 करोड़ रुपये होगी। टीवीएस मोटर कंपनी के चेयरमैन सुदर्शन वेंकटरमन ने कहा कि जन में यह निवेश टीवीएस वेंचर्स की दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप है, जिसके तहत भारत की बढ़ती वित्तीय जरूरतों को पूरा करने वाली उच्च गुणवत्ता वाली इकाइयों का समर्थन किया जाता है। कितने पर हैं शेयर? आज सवा 3 बजे जन स्मॉल फाइनेंस बैंक का शेयर 5.53 फीसदी की गिरावट के साथ 462 रुपये पर है। वहीं टीवीएस मोटर कंपनी का शेयर भी 5.32 फीसदी गिरकर 3,282.55 रुपये पर है।

फूटा चांदी का बुलबुला? रिकॉर्ड हाई के बाद कीमतों में भारी गिरावट

नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rates) में गिरावट का सिलसिला जारी है. सप्ताह के पहले कारोबार दिन सोमवार को भी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर दोनों कीमती धातुओं के भाव गिर गए. चांदी, जो बीते दिनों सरकार के सोने-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के फैसले (Gold-Silver Import Duty Hike) के बाद रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए 3 लाख के पार निकल गई थी, उसका बुलबुला अब फूटा हुआ नजर आ रहा है और हर रोज ये फिसल रही है. हाई लेवल से तुलना करें, तो 1 Kg Silver Price इसके हाई से 1.92 लाख रुपये से ज्यादा कम हो गया है।  न सिर्फ चांदी, बल्कि सोने की कीमत में भी ओपनिंग के साथ ही गिरावट देखने को मिली. हालांकि, कारोबार आगे बढ़ने के साथ ये रिकवरी करता हुआ भी नजर आया. आइए जानते हैं 10 ग्राम 24 कैरेट वायदा सोना खरीदने के लिए आपको कितना पैसा खर्च करना होगा।  चांदी की कीमत में गिरावट जारी सबसे पहले बात करते हैं चांदी के भाव में आई गिरावट के बारे में, तो बीते शुक्रवार को एमसीएक्स पर 3 जुलाई की एक्सपायरी वाली 1 किलो चांदी की कीमत तेज गिरावट लेकर 2,71,866 रुपये पर क्लोज हुई थी, लेकिन सोमवार को खुलने के साथ ही ये कीमती धातु फिसलकर 2,64,949 रुपये प्रति किलो पर आ गई. इस हिसाब से कैलकुलेशन करें, तो एक झटके में चांदी 6,917 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई।  वहीं कुछ दिनों से जारी गिरावट के बाद चांदी के भाव की तुलना इसके लाइफ टाइम हाई लेवल से करें, तो ये काफी सस्ती हो चुकी है. दरअसल, MCX Silver Price पर नजर डालें, तो इसने जनवरी महीने में पहली बार 4 लाख का ऐतिहासिक आंकड़ा पार करते हुए 4,57,328 रुपये का हाई छुआ था और ये स्तर छूने के बाद तेजी से क्रैश भी हुई थी. अब ताजा गिरावट से बाद ये इस लेवल से 1,92,379 रुपये प्रति किलो सस्ती मिल रही है।  सोना पहले फिसला, फिर रिकवरी बात सोने की कीमत के बारे में करें, तो ये कीमती पीली धातु खुलने के सात ही पहले धड़ाम नजर आई, लेकिन फिर इसमें गिरावट थमने लगी. दरअसल, बीते शुक्रवार को 5 जून की एक्सपायरी वाला सोना 1,58,547 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुआ था, लेकिन सोमवार को खुलने के साथ ही ये 1000 रुपये सस्ता होकर 1,57,547 रुपये के लेवल पर आ गया. हालांकि, वायदा कारोबार शुरू होने के कुछ देर बाद इसमें रिकवरी भी देखने को मिली।   चांदी की तरह अगर सोने के ताजा भाव की तुलना इसके लाइफ टाइम हाई लेवल से करें, तो जनवरी में ही MCX Gold Rate भी पहली बार 2 लाख रुपये के पार निकला था और इसका हाई लेवल 2,02,984 रुपये है. जहां से गिरते हुए अब 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1.57 लाख रुपये पर आ गया है. यानी सोना 45,437 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता मिल रहा है। 

नई जंग के डर से शेयर बाजार धराशायी, ट्रंप के बयान के बाद सेंसेक्स में भारी गिरावट

मुंबई  शेयर बाजार के लिए विदेशों से रेड सिग्नल मिल रहे थे और जिसका डर था वही हुआ. खुलते के साथ ही शेयर मार्केट क्रैश (Stock Market Crash) हो गया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स जहां ओपन होने के कुछ देर बाद ही 1000 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया, तो वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 280 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ कारोबार करता हुआ नजर आया. इस बड़ी गिरावट के बीच पावर ग्रिड, टाटा स्टील, मारुति, एचडीएफसी बैंक, अडानी पोर्ट्स और टाइटन जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर बिखरे हुए दिखाई दिए।  सेंसेक्स-निफ्टी खुलते ही क्रैश सेंसेक्स-निफ्टी की ओपनिंग पर नजर डालें, तो BSE Sensex अपने पिछले शुक्रवार के बंद 75,237 की तुलना में तेज गिरावट के साथ 74,807 के लेवल पर खुला था और अगले पांच मिनट में ही ये भारी गिरावट के साथ फिसलते हुए 907 अंक टूट गया और 74,330 के लेवल पर आ गया और कुछ देर बाद ही 1000 अंक से ज्यादा फिसलकर कारोबार करने लगा. NSE Nifty की चाल भी सेंसेक्स के जैसे ही नजर आई और ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले बंद 23,643 की तुलना में गिरकर पहले 23,482 पर खुला और फिर अचानक इसमें गिरावट भी तेज होती चली गई. शेयर मार्केट में ट्रेडिंग शुरू होने के पांच मिनट बाद ही ये इंडेक्स भी 280 अंक टूटकर 23,361 पर कारोबार करता नजर आया।  ये बड़े शेयर बिखर गए  शेयर मार्केट में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन आई इस बड़ी गिरावट के बीच तमाम दिग्गज कंपनियों के शेयर बिखरे हुए नजर आए. बीएसई लार्जकैप पर नजर डालें, तो इसमें शामिल Tata Steel Share (3.75%), PowerGrid Share (3.50%), Maruti Share (2.40%), Trent Share (2.25%), SBI Share (2.05%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे. इसके अलावा Eternal, Titan, Adani Ports जैसे स्टॉक्स भी करीब 2 फीसदी की गिरावट में थे।  US-Iran में नई जंग की आहट से डर शेयर मार्केट के क्रैश होने के पीछे के कारण की बात करें, तो इनमें सबसे बड़ा अमेरिका और ईरान के बीच नई जंग की आहट को माना जा सकता है. दरअसल, दोनों देशों के बीच तनाव फिर से बढ़ता हुआ नजर आ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर ईरान को बड़ी धमकी दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा है कि, 'ईरान के लिए घड़ी की सुइयां तेज भाग रही हैं और उन्हें जल्द से जल्द तेजी से कदम उठाने होंगे, नहीं तो उनका कुछ भी बाकी नहीं बचेगा. वक्त बहुत कीमती है।  ट्रंप की धमकी और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला है. सोमवार को खबर लिखे जाने तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत तेजी से उछाल भरती नजर आई. Brent Crude Oil Price 112 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुका है, तो वहीं WTI Crude Oil Price 108 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचकर कारोबार कर रहा था. इसके अलावा नेचुरल गैस की कीमतों में भी करीब 3 फीसदी का उछाल आया है और ये 3.034 डॉलर पर पहुंच गई हैं।  विदेशों से मिल रहे थे रेड सिग्नल  शेयर बाजार में गिरावट के सिग्नल पहले से ही विदेशी बाजारों से मिल रहे थे. जहां Gift Nify 195 अंक फिसलकर 23,550 पर कारोबार कर रहा था. तो वहीं एशियाई मार्केट्स में भी भूचाल देखने को मिला था. Japan Nikkei करीब 600 अंक फिसलकर, तो वहीं हांगकांग का Hangseng भी 385 अंक, ब्रिटेन का मार्केट FTSE-100 भी करीब 200 अंक की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था. इसके अलावा DAX (510 अंक), तो CAC (150 अंक) की गिरावट में कारोबार कर रहा था।   (नोट- शेयर बाजार में किसी भी निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें.)

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, निवेशकों के लिए अहम होगा आने वाला सप्ताह

नई दिल्ली  भारतीय शेयर बाजार (Stock Market Outlook) के लिए अगला हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। ईरान-अमेरिका तनाव, कच्चे तेल की कीमत, एफआईआई की चाल और घरेलू आर्थिक आंकड़े बाजार की चाल निर्धारित करेंगे। आने वाले सत्रों में निवेशकों की निगाहें अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष पर होंगी। दोनों देशों के बीच लगातार तनाव बना हुआ है। वहीं, ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए एक नया प्लान पेश करने वाला है। दूसरी तरफ अमेरिका भी ईरान के लेकर आक्रामक बना हुआ है। कच्चे तेल पर निवेशकों की निगाहें बनी हुई हैं। तेल के दाम उछले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के विदेश मंत्री के बयानों के बाद शुक्रवार को तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास जहाजों पर हमलों और जब्ती को रोकने के लिए संभावित समझौते की उम्मीदें कमजोर हो गई हैं। इस सप्ताह के दौरान, ईरान-अमेरिका संघर्ष को लेकर अनिश्चितता के चलते ब्रेंट क्रूड में 7.84 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि डब्ल्यूटीआई में 10.48 प्रतिशत की वृद्धि हुई। विदेशी निवेशक भी खफा विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भी भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी अहम होने वाले हैं। एफआईआई ने इस महीने में अब तक (16 मई तक) 27,177 करोड़ रुपए की बिकवाली की है। वहीं, 2026 में अब तक 2,31,486 करोड़ रुपए सेकेंडरी इक्विटी बाजार से निकाल चुके हैं। वहीं, प्राइमरी बाजार के माध्यम से वर्ष के दौरान कुल निवेश 12,468 करोड़ रुपए रहा है। इस वर्ष एफपीआई द्वारा की गई कुल बिक्री पिछले वर्ष दर्ज की गई कुल निकासी को पार कर चुकी है। दूसरी तरफ घरेलू आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। 21 मई को एचएसबीसी पीएमआई का डेटा जारी होगा। वहीं, 22 मई को बैंक लोन, बैंक डिपॉजिट और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे आंकड़े जारी होंगे। भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता हफ्ता नुकसान वाला रहा। कैसा रहा पिछला हफ्ता? पिछले हफ्ते सेंसेक्स 2,090 अंक या 2.70 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 75,237 और निफ्टी 532 अंक या 2.20 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,643 पर बंद हुआ। इस दौरान सूचकांकों में निफ्टी रियल्टी 8.17 प्रतिशत की कमजोरी के साथ टॉप गेनर था। निफ्टी आईटी 5.71 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 4.71 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 4.36 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 4.16 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 4.12 प्रतिशत, निफ्टी ऑयलएंडगैस 3 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 2.49 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ। दूसरी तरफ निफ्टी फार्मा 2.18 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 2.17 प्रतिशत और निफ्टी मेटल 1.91 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।