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Share Market में लौटी रौनक: लगातार 3 दिन गिरने के बाद सेंसेक्स-निफ्टी ने पकड़ी तेजी, ये रही वजह

मुंबई  भारतीय शेयर बाजार में पिछले तीन दिनों से जारी गिरावट पर आज यानी 3 सितंबर को ब्रेक लग गया. ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों और एशियाई बाजारों में तेजी के दम पर आज गुरुवार को शुरुआती कारोबार में बाजार में रिकवरी देखने को मिली है. सेंसेक्स 235 से ज्यादा अंकों की बढ़त के साथ 76,806 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी भी 63 अंक चढ़कर 23,977 के करीब कारोबार करता नजर आया।  बता दें कि बीते तीन कारोबारी दिनों में दोनों इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1-1 फीसदी तक टूट चुके हैं।  बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में उछाल आज के कारोबार में बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर्स में तेजी देखनो को मिली. निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 1 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई. प्राइवेट बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज से जुड़े शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली. हालांकि, दूसरी तरफ आईटी और एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर्स के शेयरों में मामूली गिरावट रही।  लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी के साथ कारोबार हो रहा है. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 166 अंक या 0.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ 63,165 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 168 अंक या 0.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 19,981 पर था।  सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 300 अंकों की मजबूती के साथ 76,869 के करीब पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 105.50 अंक चढ़कर 24,037 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार का ओवरऑल सेंटीमेंट काफी सकारात्मक बना हुआ है, जहां करीब 2,067 शेयरों में तेजी दर्ज की गई, जबकि 789 शेयर गिरावट में रहे और 155 शेयर बिना बदलाव के कारोबार कर रहे हैं। अडानी पोर्ट्स और बैंकिंग शेयरों में जोरदार उछाल आज की इस तेजी की अगुवाई अडानी पोर्ट्स ने की, जिसका शेयर +1.51% की बढ़त के साथ टॉप गेनर बना हुआ है। इसके अलावा बैंकिंग और पावर सेक्टर के दिग्गजों ने भी बाजार को सहारा दिया।     टॉप गेनर्स (तेजी वाले शेयर): अडानी पोर्ट्स के अलावा ICICI बैंक (+1.37%), एक्सिस बैंक (+1.08%), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBIN +1.08%), पावर ग्रिड (+1.05%), HDFC लाइफ (+0.91%), अडानी एंटरप्राइजेज (+0.84%) और HDFC बैंक (+0.70%) में अच्छी लिवाली देखी जा रही है।     टॉप लूजर्स (गिरावट वाले शेयर): दूसरी तरफ आईटी और ऑटो शेयरों में कुछ दबाव नजर आया। इंडिगो (-1.02%), टेक महिंद्रा (-0.94%), HCL टेक (-0.86%), आइशर मोटर्स (-0.83%), नेस्ले इंडिया (-0.64%), टीसीएस (-0.63%), इन्फोसिस (-0.59%), बजाज ऑटो और सिप्ला के शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। सेक्टोरल इंडेक्स का हाल सेक्टर के हिसाब से देखें तो आज बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया है। निफ्टी पीएसयू बैंक में +0.93%, निफ्टी रियाल्टी में +0.91% और निफ्टी बैंक में +0.72% की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा एनर्जी और इंफ्रा सेक्टर भी हरे निशान में हैं। हालांकि, आईटी सेक्टर में बिकवाली का दौर बना हुआ है। निफ्टी IT इंडेक्स -0.90% टूटकर कारोबार कर रहा है। इसके अलावा FMCG (-0.46%) और फार्मा (-0.07%) में मामूली नरमी देखने को मिल रही है। इन शेयरों ने कराई तगड़ी कमाई टॉप गेनर्स और लूजर्स की बात करें तो सेंसेक्स पर लिस्टेड शेयरों में अदाणी पोर्ट्स, एक्सिस बैंक, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, भारती एयरटेल, इटरनल, बीईएल, कोटक महिंद्रा बैंक और ट्रेंट गेनर्स में शामिल रहे. जबकि  टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इंडिगो, इन्फोसिस, बजाज फाइनेंस, टीसीएस, टाइटन, आईटीसी, एचयूएल और एशियन पेंट्स लूजर्स थे।  शेयर बाजार में तेजी की 3 बड़ी वजहें     अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई हल्की कमी से निवेशकों का मूड सुधरा है. अमेरिका और एशिया के बाजारों में तेजी रही, जिससे भारतीय निवेशकों का भरोसा बढ़ा।      ट्रंप के बयान के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें भी नीचे आई हैं, जिससे बाजार को बड़ी राहत मिली है।      FCNR(B) स्कीम के जरिए बैंकों के पास भारी विदेशी फंड आया है,जिससे भारतीय रुपये को मजबूती मिली है और विदेशी निवेशकों (FIIs) का भरोसा बढ़ा है. इसका सीधा फायदा बैंकिंग शेयरों को मिल रहा है।   

Maruti Suzuki ला रही सस्ती इलेक्ट्रिक कार, कीमत 10 लाख से कम; शानदार रेंज से मचेगा मुकाबला

मुंबई  Maruti Suzuki जल्द ही भारत में एक छोटी और किफायती इलेक्ट्रिक कार लाने की तैयारी कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नई EV की कीमत 10 लाख रुपये से कम रखने की कोशिश की जा रही है. अगर ऐसा होता है तो ये Maruti की e Vitara के बाद कंपनी की दूसरी इलेक्ट्रिक कार होगी. अच्छी बात है कि ये ज्यादा अफोर्डेबल भी होगी. नई इलेक्ट्रिक कार को अगले दो साल के अंदर लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।  एक रिपोर्ट के अनुसार, इसकी अनुमानित एक्स-शोरूम कीमत करीब 8.5 लाख रुपये से 10.5 लाख रुपये के बीच हो सकती है. यानी इसके एक या दो वैरिएंट 10 लाख रुपये से कम कीमत में लॉन्च हो सकते हैं. हालांकि, कीमत को लेकर फिलहाल हमें इंतजार करना होगा. आइए आपको Maruti Suzuki की इस अपकमिंग ईवी के बारे में पूरी डिटेल्स बताते हैं।  315 Km तक मिल सकती है रेंज रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई Maruti EV की रेंज Tata Tiago EV के आसपास हो सकती है. इसमें बैटरी और वैरिएंट के आधार पर करीब 250 से 315 किलोमीटर तक की रेंज मिलने की उम्मीद है. फिलहाल कंपनी ने इसकी बैटरी कैपेसिटी, मोटर आउटपुट या लॉन्च डेट की भी जानकारी नहीं दी है।  e Vitara से काफी अलग हो सकती है नई EV आपको बता दें कि Maruti की पहली इलेक्ट्रिक कार e Vitara एक प्रीमियम इलेक्ट्रिक SUV के तौर पर बाजार में उपलब्ध है. हालांकि, इसकी कीमत भी काफी ज्यादा है. इसके मुकाबले नई EV को शुरुआत से ही अफोर्डेबिलिटी को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है. इसी वजह से इसमें छोटी बैटरी दिए जाने की उम्मीद है. ऐसे में 250 से 315 किलोमीटर की क्लेम्ड रेंज वाली Maruti EV सीधे तौर पर Tata Tiago EV के करीब खड़ी होगी।  डेडिकेटेड EV प्लेटफॉर्म पर होगी तैयार इस कार की सबसे बड़ी खासियत इसका डेडिकेटेड इलेक्ट्रिक आर्किटेक्चर हो सकता है. यानी इसे किसी पेट्रोल कार के प्लेटफॉर्म को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट करके तैयार करने के बजाय इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन को ध्यान में रखकर बनाया जा सकता है. इससे बैटरी, केबिन और मोटर को बेहतर तरीके से पैकेज करने में मदद मिलेगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नई EV का प्रोडक्शन Maruti Suzuki के गुजरात स्थित हंसलपुर प्लांट में किया जा सकता है. यही प्लांट e Vitara का भी प्रोडक्शन करता है और Maruti के लिए एक अहम एक्सपोर्ट हब है।  Arena नेटवर्क से हो सकती है बिक्री नई किफायती EV को Maruti के Arena नेटवर्क के जरिए बेचे जाने की उम्मीद है. अगर ऐसा होता है तो इसे Nexa तक सीमित नहीं रखा जाएगा. इससे नई इलेक्ट्रिक कार को WagonR और Swift जैसे मास-मार्केट मॉडल्स के साथ कंपनी के सबसे बड़े रिटेल नेटवर्क का फायदा मिलेगा. किफायती EV को बड़े पैमाने पर बेचने के लिए सिर्फ बड़े शहरों के ग्राहकों पर निर्भर रहना काफी नहीं होगा. छोटे शहरों और ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच बनाना जरूरी होगा. Maruti इस EV की कीमत कम रखने के लिए लोकलाइजेशन पर भी काफी जोर दे सकती है।  Tata Tiago EV और Punch EV से होगा मुकाबला भारत में अफोर्डेबल इलेक्ट्रिक कारों का सेगमेंट अभी भी काफी छोटा है. खासकर 15 लाख से 30 लाख रुपये वाले EV सेगमेंट के मुकाबले 10 लाख रुपये से कम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों के ऑप्शन काफी कम हैं।  आपको बता दें कि Tata Tiago EV की शुरुआती कीमत करीब 8 लाख रुपये है, जबकि Tata Punch EV की शुरुआती कीमत 9.69 लाख रुपये के आसपास है. MG Comet EV भी एक सस्ता ऑप्शन है. लेकिन इसका छोटा टू-डोर सिटी-कार फॉर्मेट इसे बाकी कारों से अलग बनाता है. ऐसे में Maruti की नई EV सीधे तौर पर Tata Tiago EV और Punch EV जैसे मॉडल्स को चुनौती दे सकती है. हालांकि, फिलहाल इसकी लॉन्च के आपको इंतजार करना होगा. लेकिन, अगर आप इंतजार नहीं करना चाहते हैं तो टाटा के ऑप्शन के साथ जा सकते हैं। 

Canara Bank Customers Alert: 1 सितंबर से नए ATM चार्ज लागू, 5 फ्री ट्रांजैक्शन के बाद लगेगा ₹23+GST

मुंबई  कैनरा बैंक (Canara Bank) के ग्राहकों के लिए ATM से जुड़ी जरूरी खबर है। बैंक ने 1 सितंबर 2026 से कुछ ATM ट्रांजैक्शन चार्ज में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत सामान्य सेविंग्स बैंक अकाउंट होल्डर्स को हर महीने मिलने वाले फ्री ATM ट्रांजैक्शन की संख्या घटा दी गई है। इसके अलावा फ्री लिमिट खत्म होने के बाद किए जाने वाले वित्तीय लेनदेन यानी फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन (Financial Transactions) और अपर्याप्त बैलेंस के कारण फेल होने वाले ट्रांजैक्शन पर लगने वाले शुल्क में भी बदलाव किया गया है। हालांकि, वरिष्ठ नागरिकों के लिए फ्री ATM ट्रांजैक्शन की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए अगर आप कैनरा बैंक (Canara Bank) के ग्राहक हैं और महीने में कई बार ATM का इस्तेमाल करते हैं, तो इन नए चार्ज को जानना आपके लिए जरूरी है। सबसे बड़ा बदलाव सामान्य सेविंग्स अकाउंट ग्राहकों के लिए फ्री ATM ट्रांजैक्शन की संख्या में हुआ है। पहले इन ग्राहकों को एक कैलेंडर महीने में कुल 6 फ्री ATM ट्रांजैक्शन मिलते थे। अब यह संख्या घटाकर 5 ट्रांजैक्शन कर दी गई है। इसमें फाइनेंशियल (Financial) और नॉन-फाइनेंशियल (Non-Financial) दोनों तरह के ट्रांजैक्शन शामिल हैं, यानी कैश निकालने के अलावा बैलेंस चेक करना, मिनी स्टेटमेंट जैसी कुछ नॉन-फाइनेंशियल ATM सेवाओं को भी इस लिमिट में गिना जा सकता है। हालांकि, वरिष्ठ नागरिकों के लिए हर महीने 8 फ्री ट्रांजैक्शन की सीमा पहले की तरह बरकरार रखी गई है। फ्री लिमिट पार करने के बाद कैनरा बैंक (Canara Bank) ATM पर किए जाने वाले नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन के लिए शुल्क में बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे ट्रांजैक्शन पर ₹5 प्लस GST का चार्ज लागू रहेगा। वहीं, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन (Financial Transactions) यानी कैश निकालने जैसे ट्रांजैक्शन के लिए शुल्क बढ़ाया गया है। कैनरा बैंक (Canara Bank) ATM पर फ्री लिमिट के बाद कैश विड्रॉल करने पर पहले ₹20 प्लस GST चार्ज लगता था, जिसे अब बढ़ाकर ₹23 प्लस GST कर दिया गया है। इसमें ICCW यानी UPI के जरिए कैश निकालने वाला ट्रांजैक्शन भी शामिल है। इसके अलावा अगर ग्राहक के अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस नहीं है और ATM से किया गया ट्रांजैक्शन अपर्याप्त फंड के कारण असफल हो जाता है, तो भी शुल्क बढ़ गया है। कैनरा बैंक (Canara Bank) और दूसरे बैंकों के ATM पर फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट के बाद ऐसे असफल ट्रांजैक्शन के लिए चार्ज ₹17 प्लस GST से बढ़ाकर ₹23 प्लस GST कर दिया गया है, यानी पर्याप्त बैलेंस नहीं होने पर ATM से बार-बार ट्रांजैक्शन करने वाले ग्राहकों को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। 1 कैलेंडर महीने में फ्री ट्रांजैक्शन (फाइनेंशियल और/या नॉन-फाइनेंशियल) सिर्फ सेविंग्स बैंक अकाउंट होल्डर्स के लिए लागू। ग्राहकों के लिए सीनियर सिटिजन   6 (मौजूदा) 5 (01-09-2026 से लागू) 8     मुफ़्त ट्रांज़ैक्शन (फ़ाइनेंशियल) से ज़्यादा होने पर लगने वाले चार्ज – कैश निकालना, जिसमें ICCW (UPI कैश निकासी) भी शामिल है। ₹20/- +GST(Existing)₹23/- +GST (With effect from 01-09-2026) मुफ़्त ट्रांज़ैक्शन (नॉन-फाइनेंशियल) से ज्यादा होने पर शुल्क ₹5/- + GST ग्राहक के खाते में अपर्याप्त धनराशि (01.09.2026 से लागू मुफ़्त ट्रांज़ैक्शन सीमा से अधिक) ₹17/- +GST (Existing)₹23/- +GST (Revised) 1 सितंबर से लागू बदलावों में सामान्य ग्राहकों की फ्री ATM लिमिट कम हुई है और कुछ ट्रांजैक्शन महंगे हुए हैं, जबकि वरिष्ठ नागरिकों की फ्री लिमिट बरकरार है और ग्रीन PIN रीजेनरेशन (regeneration) जैसी सेवा सस्ती हुई है। इसलिए कैनरा बैंक (Canara Bank) ग्राहकों को ATM इस्तेमाल करते समय अपनी फ्री लिमिट और लागू शुल्क का ध्यान रखना चाहिए।     हालांकि, ग्राहकों के लिए एक राहत वाली खबर भी है। कैनरा बैंक (Canara Bank) ने कुछ कार्ड वेरिएंट पर फ्री लिमिट के बाद ग्रीन PIN दोबारा जनरेट करने का शुल्क काफी कम कर दिया है। क्लासिक (Classic), स्टैंडर्ड (Standard), प्लेटिनम (Platinum), बिजनेस (Business), सेलेक्ट (Select) और वर्ल्ड (World) कार्ड के लिए यह चार्ज पहले ₹23 था, जिसे घटाकर अब ₹5 कर दिया गया है।

सोने के दाम में गिरावट का सिलसिला जारी, चौथे दिन भी फिसला भाव; ₹1.50 लाख के आसपास MCX Gold

इंदौर  पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ रहा है। इसके चलते कच्चे तेल में उबाल देखने को मिल रहा और भाव 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। नतीजनत, दुनियाभर के शेयर बाजारों में बिकवाली दर्ज की जा रही। आमतौर पर ऐसे माहौल में सुरक्षित निवेश के तौैर पर सोने की मांग बढ़ती है। लेकिन इस बार तस्वीर ऐसा नहीं नजर आ रहा। सोने और चांदी की कीमतों में भी गिरानवट देखने को मिल रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरकर 4,300 डॉलर प्रति औंस की तरफ आ गया है। घरेलू वायदा बाजार में भी सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब फिसल गया। MCX पर चांदी में भी 2,000 रुपये से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल रही। आज कितना सस्ता हुआ सोना-चांदी? MCX आंकड़ों के मुताबिक, 2 सितंबर 2026 को सुबह 10:58 बजे सोने का अक्टूबर वायदा 1,434 रुपये यानी 0.95 फीसदी गिरकर 1,50,295 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहींस चांदी का सितंबर वायदा 2,335 रुपये यानी 1.02 फीसदी टूटकर 2,27,214 रुपये प्रति किलो पर आ गया। मेटल कॉन्ट्रैक्ट ताजा भाव गिरावट दिन का निचला स्तर दिन का ऊपरी स्तर पिछला बंद भाव सोना 5 अक्टूबर 2026 ₹1,50,295 प्रति 10 ग्राम ₹1,434 या 0.95% ₹1,49,665 ₹1,50,329 ₹1,51,729 चांदी 4 सितंबर 2026 ₹2,27,214 प्रति किलो ₹2,335 या 1.02% ₹2,25,666 ₹2,27,646 ₹2,29,549 यूएस-ईरान के बावजूद टूट रहा सोना?  केडिया कमोडिटीज के अजय केडिया के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना बुधवार को गिरकर 4,300 डॉलर प्रति औंस की तरफ आ गया। यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र है, जब सोने में गिरावट आई है। भाव तीन हफ्ते से ज्यादा के निचले स्तर पर पहुंच गया है। अजय केडिया ने बताया कि बाजार इस महीने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दर बढ़ाए जाने की करीब 70 फीसदी संभावना मान रहा है। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श की महंगाई के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात ने भी ब्याज दर बढ़ने की आशंका मजबूत की है। सोने पर किसी तरह का ब्याज नहीं मिलता। जब सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ती है, तो निवेशकों को सुरक्षित बॉन्ड पर बेहतर रिटर्न मिलने लगता है। ऐसे में सोने का आकर्षण कुछ कम हो जाता है। डॉलर और बॉन्ड यील्ड ने भी बनाया दबाव  निर्मल बंग सिक्योरिटीज की डेली कमोडिटी आउटलुक रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड बढ़ने और डॉलर में मजबूती आने से सोने पर दबाव बना है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कारोबारी सत्र में डॉलर इंडेक्स 0.25 फीसदी बढ़कर 99.68 पर बंद हुआ। वहीं, कॉमेक्स पर दिसंबर वायदा सोना 85.10 डॉलर गिरकर 4,396.40 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ था। वहीं, कॉमेक्स पर दिसंबर वायदा चांदी पिछले सत्र में 2.42 फीसदी गिरकर 65.37 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई थी। घरेलू बाजार में एमसीएक्स सोने का अक्टूबर वायदा पिछले सत्र में 2,731 रुपये यानी 1.80 फीसदी गिरकर 1,51,729 रुपये पर बंद हुआ था। चांदी का दिसंबर वायदा 4,680 रुपये यानी 1.99 फीसदी गिरकर 2,35,441 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ। क्या सोने से पैसा निकाल रहे बड़े निवेशक?  निर्मल बंग की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कारोबारी सत्र में एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ईटीएफ ने अपनी होल्डिंग से 1,38,840 ट्रॉय औंस सोना कम किया। पिछले सत्र के भाव के हिसाब से इसकी कीमत करीब 61.61 करोड़ डॉलर थी। हालांकि, दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड ईटीएफ एसपीडीआर गोल्ड शेयर की होल्डिंग में पिछले सत्र के दौरान बड़ा बदलाव नहीं हुआ। सोना-चांदी पर निर्मल बंग की क्या राय?  निर्मल बंग सिक्योरिटीज का अनुमान है कि घरेलू बाजार में सोना और चांदी दिन के दौरान सीमित दायरे में रहते हुए थोड़ी और कमजोरी दिखा सकते हैं रिपोर्ट के मुताबिक,पश्चिम एशिया में हमले बढ़ने और महंगाई की चिंता से ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद मजबूत हुई है। इससे बॉन्ड यील्ड ऊपर गई है। जब तक बॉन्ड यील्ड और डॉलर में नरमी नहीं आती, तब तक सोने और चांदी पर दबाव बना रह सकता है।  

Stock Market Fall: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 700 अंक टूटा, निफ्टी पर भी दबाव

मुंबई  अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्‍चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच आज बुधवार को बाजार की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई.  शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 706 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 76,238 पर आ गया. वहीं निफ्टी में भी गिरावट देखी गई और ये 23,850 के स्तर से नीचे फिसल गया. तेल की कीमतों में उछाल के बीच निफ्टी 50 में 231 अंकों या 0.96 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. निफ्टी मिडकैप 100 में 1.16 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.97 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।  आज सभी सेक्‍टोरल इंडेक्‍स में गिरावट देखी जा रही है, जिनमें आईटी और ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा नुकसान में हैं. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के अधिकांश शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, केवल अदाणी पोर्ट्स और सन फार्मा ही अपवाद रहे। Sensex-Nifty खुलते ही क्रैश  शेयर मार्केट में बुधवार को कारोबार की शुरुआत होते ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,944 की तुलना में फिसलकर 76,471 पर ओपन हुआ और फिर पलक झपकते ही बुरी तरह क्रैश होकर 76,135 के लेवल पर आ गया. सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए एनएसई का निफ्टी भी ओपनिंग के साथ ही बड़ी गिरावट लेकर क्रैश हो गया. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 24,055 के मुकाबले रेड जोन में 23,858 पर खुला और फिर देखते ही देखते फिसलकर 23,786 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।  इन 10 शेयरों का बुरा हाल शेयर बाजार में अचानक आए इस बड़े भूचाल के बीच सबसे बुरे हाल में जो 10 शेयर नजर आए, उनमें बीएसई की लार्ज कैप कैटेगरी में शामिल IndiGo Share (2.70%), Eternal Share (1.90%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे. तो वहीं मिडकैप कैटेगरी में शामिल GVT&D Share (3.10%), Godrej Properties Share (3%), MFSL Share (2.90%), TI India Share (2.50%), Voltas Share (2.20%) फिसलकर कारोबार कर रहे थे।  बात बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के स्मॉलकैप कैटेगरी की करें, तो यहां भी ज्यादातर शेयर रेड जोन में कारोबार करते हुए दिखे. यहां पर KFIN Tech Share (3.45%), Brigade Share (3%) और Chola Holdings Share (2.50%) गिरकर ट्रेड कर रहे थे।  ट्रंप का ये ऐलान, फिर मचा कोहराम  Stock Market Crash के पीछे के कारणों की बात करें, तो इसका सीधा कनेक्शन डोनाल्ड ट्रंप से है, जो एक बार फिर से वॉर मोड में नजर आ रहे हैं. उन्होंने बुधवार को दावा किया कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट पर अब अमेरिका का लगभग पूरा कंट्रोल है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी अर्थव्यवस्था क्रैश की ओर बढ़ रही है. इसके साथ ही Donald Trump ने उस मीडिया रिपोर्ट को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया जा रहा था कि US ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करने की कोशिश कर रहे हैं।  कच्चे तेल में उबाल, बाजारों में भगदड़ Hormuz Strait को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा. ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम 96 डॉलर प्रति बैरल, तो WTI क्रूड की कीमत बढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई. मर्बन क्रूड ऑयल प्राइस भी रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए 7 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. इससे एशियाई शेयर बाजारों का सेंटीमेंट भी बिगड़ा Japan Nikkei करीब 1800 अंक से ज्यादा फिसलकर, हांगकांग का HangSeng Index करीब 300 अंक की गिरावट में और साउथ कोरिया के कोस्पी इंडेक्स (KOSPI Index) करीब 4 फीसदी फिसलकर कारोबार कर रहा था।   

Oracle कर्मचारियों के लिए बुरी खबर! हजारों नौकरियों पर मंडराया खतरा, भारत में भी पड़ सकता है असर

 नई दिल्ली Oracle एक बार फिर से एक बड़ी छंटनी करने की तैयारी कर रहा है, जिसका असर भारत समेत दुनियाभर के कर्मचारियों पर देखने को मिलेगा. हालांकि अभी तक कंपनी ने इसको लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी शेयर नहीं की है, लेकिन कई रिपोर्ट्स में बताया है कि कंपनी अपनी लागत में कमी लाना चाहती है।   Oracle में इससे पहले जो छंटनी की गई थी, उसकी काफी ज्यादा चर्चा हुई थी. इतना ही नहीं कई लोगों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर अपना एक्सपीरियंस भी शेयर किया था।  लेटेस्ट जानकारी के मुताबिक, Oracle ने अपनी टीम्स को बजट कम करने की बात कही है, जिससे लोगों में हलचल मच गई है. इससे पहले कई लोगों की टीम और रोल आदि में बदलाव किया था, लेकिन इस बार कुछ बड़ा हो सकता है।  करीब 10 हजार लोगों की होगी छंटनी  Oracle कितने लोगों की छंटनी करेगा, उसको लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी शेयर नहीं की गई है. लेकिन कई रिपोर्ट्स में दावा किया है कि दुनियाभर से कंपनी करीब 7 हजार से 10 हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा सकती है. Oracle की छंटनी का असर कितने भारतीयों पर पड़ेगा, उसको लेकर अभी कोई जानकारी नहीं है।  मई में एक बार हो चुकी है छंटनी  31 मई को कंपनी ने अपने टोटल कर्मचारियों की संख्या में से करीब 13 परसेंट कर्माचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया था. कंपनी के टोटल कर्मचारियों की संख्या करीब 1,41,000 है और 31 मई को करीब 21 हजार लोगों की छंटनी की गई थी।  ओरैकल कंपनी क्या करती है? ओरैकल कॉर्पोरेशन, असल में अमेरिका बेस्ड इंटरनेशनल टेक्नोलॉजी कंपनी है, जिसका मुख्य काम दूसरी कंपनियों और बड़े-बड़े संस्थानों को क्लाउंड, डेटाबेस और बिजनेस सॉफ्टवेयर प्रोवाइड कराना है. भारत में ओरैकल कंपनी काम करती है और कई हजार की संख्या में यहां भी कर्मचारी है। 

सोना-चांदी खरीदने वालों की बल्ले-बल्ले! 3 दिन में ₹8,400 सस्ती हुई चांदी, देखें आज का Gold Price

 नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट (Gold-Silver Rate Fall) का सिलसिला थम नहीं रहा है. साल की शुरुआत में जहां इनके भाव गदर मचा रहे थे, तो अब हाल ये हैं कि हर रोज ये कीमती धातुएं सस्ती होती जा रही हैं. बुधवार को भी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर वायदा कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही गोल्ड-सिल्वर रेट फिसल गए।  चांदी का तो मानो बुलबुला सा फूटता (Silver Bubble Burst) जा रहा है. जनवरी महीने में 4 लाख के पार निकलकर गदर मचा रही चांदी की कीमत करीब आधी 2.28 लाख रुपये प्रति किलो रह गई है. वहीं सोना भी चांदी के कदम से कदम मिलाकर फिसलता जा रहा है।  चांदी की कीमत में जारी गिरावट एमसीएक्स पर चांदी की कीमत के ताजा हाल की बात करें, तो वायदा कारोबार में 4 सितंबर की एक्सपायरी वाली चांदी का दाम बीते कारोबारी दिन मंगलवार को 2,30,857 रुपये पर क्लोज हुआ था और बुधवार को ओपनिंग के साथ ही ये फिसलकर 2,28,925 रुपये प्रति किलो पर आ गया. वहीं इस सप्ताह की तीन कारोबारी दिनों में अब तक ये 8,485 रुपये सस्ती हो गई है. बता दें कि बीते शुक्रवार को 1 Kg Silver Price 2,37,410 रुपये था।  तीन दिन में सोना इतना सस्ता चांदी ही नहीं, बल्कि वायदा कारोबार में सोने की कीमत भी फिसलती जा रही है. 5 अगस्त की एक्सपायरी वाली ये कीमती पीली धातु इस सप्ताह के तीन कारोबारी दिनों में अब तक 2578 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ती हो चुकी है. दरअसल, बीते सप्ताह शुक्रवार को 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1,47,378 रुपये था, जो बुधवार को गिरावट के साथ 1,44,800 रुपये के लेवल पर आ गया।  सोना भी अपने हाई लेवल से लगातार फिसला है. चांदी की तरह Gold Rate ने भी एमसीएक्स पर बीते जनवरी महीने में ही अपना लाइफ टाइम हाई लेवल छुआ था और पहली बार 2 लाख रुपये के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया था. लेकिन अपने हाई को छूने के बाद ये लगातार टूटा है और अब इसकी कीमत में करीब 50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है।  घरेलू मार्केट में सोना-चांदी के दाम MCX Gold-Silver Rates अपडेट के बाद अगर बात करें, घरेलू बाजारों में इन कीमती धातुओं के भाव के बारे में, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, बीते कारोबारी दिन मंगलवार तक ही 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड का रेट 1,46,344 रुपये से गिरकर 1,44,083 रुपये पर आ गया है यानी सोना दो दिन में 2261 रुपये सस्ता हुआ है. वहीं इस अवधि में चांदी की कीमत 6658 रुपये प्रति किलो घट गई है. इसका भाव बीते शुक्रवार के 2,33,858 रुपये से 2,27,200 रुपये प्रति किलो पर आ गया है।  सोना-चांदी की ज्वेलरी खरीदते समय इस बात को ध्यान में रखना जरूरी है कि आईबीजेए के अपडेटेड रेट देशभर में समान होते हैं, लेकिन आभूषण खरीदने पर ग्राहकों को इन पर लागू जीएसटी के साथ ही मेकिंग चार्ज भी देना होता है, जिससे इनकी कीमत बढ़ जाती है।  (नोट- सोना-चांदी या गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ खरीदने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.)

US-Iran जंग और महंगे तेल का असर, खुलते ही धड़ाम हुआ Stock Market, निवेशकों में मचा डर

मुंबई  शेयर बाजार में फिर से खौफ देखने को मिल रहा है और खुलने के साथ ही बड़ी गिरावट आई है. बुधवार को कारोबार की शुरुआत होते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स ओपनिंग के साथ ही 550 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला इंडेक्स निफ्टी करीब 150 अंक फिसल गया. इससे पहले बीते कारोबारी दिन भी दोनों रेड जोन में बंद हुए थे। Stock Market में इस गिरावट की आशंका पहले से ही जताई जा रही थी और इसका कनेक्शन सीधे होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा हुआ है, जो दुनिया की कुल तेल जरूरत के करीब 20 फीसदी को पूरा करने के लिए अहम है. यहां फिर से अमेरिका और ईरान आमने-सामने आ गए हैं और दोनों ओर से हमले किए जा रहे हैं. इससे न सिर्फ भारत, बल्कि जापान-कोरिया समेत अन्य एशियाई देशों के शेयर बाजार बुरी तरह टूटे हैं।  सेंसेक्स-निफ्टी खुलते ही धड़ाम  शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 78,180 की तुलना में गिरावट के साथ खुला और महज पांच मिनट के कारोबार के दौरान ही ये 550 अंक से ज्यादा फिसलकर 77,611 के लेवल पर आ गया।  सेंसेक्स की तरह ही निफ्टी इंडेक्स में भी गिरावट बढ़ती हुई नजर आई. ये इंडेक्स 24,398 के अपने पिछले बंद के मुकाबले खुलते ही गिरकर 24,259 पर आ गया और फिर सेंसेक्स की चाल से चाल मिलाकर चलते हुए 150 अंक से ज्यादा की गिरावट लेकर 24,229 पर ट्रेड करता हुआ दिखा।  बाजार में इसलिए फिर खौफ  शेयर बाजार फिर से खौफ में नजर आ रहा है और इसके तार सीधे मिडिल ईस्ट से जुड़े हुए हैं. पहला कारण अमेरिका-ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ना है. पहले ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे तीन कमर्शियल जहाजों पर मिसाइल अटैक किए, तो पलटवार करते हुए अमेरिक की ओर से भी तगड़ी स्ट्राइक ईरानी ठिकानों पर शुरू कर दी गई।  दूसरे कारण की बात करें, तो दोनों देशों के बीच फिर तनातनी ने दुनियाभर के शेयर मार्केट में हलचल बढ़ा दी और US-Japan से South Korea तक के शेयर बाजार गिरावट में कारोबार करते हुए नजर आए, जिनसे भारतीय बाजार का सेंटीमेंट खराब हुआ. जापान का निक्केई खुलते ही 500 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो साउथ कोरिया का कोस्पी भी 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट लेकर ट्रेड कर रहा था, तो वहीं Gift Nifty भी रेड जोन में था।  फिर से डराने लगा कच्चा तेल बाजार में गिरावट का तीसरा कारण देखें, तो US-Iran Attacks की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर असर डाला और अचानक इसमें तेज उछाल आ गया. Brent Crude Oil Price 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी के साथ 76 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया, तो वहीं WTI Crude Oil Price भी 72 डॉलर के पार कारोबार कर रहा था. तेल की कीमतों में फिर से लगी आग ने दुनिया में महंगाई का जोखिम बढ़ाने का डर पैदा किया है और शेयर बाजार भी इसके दबाव में नजर आ रहे हैं।  हर ओर मची दिखी भगदड़ शेयर बाजार में इस बड़ी गिरावट के बीच सबसे ज्यादा बिखरने वाले शेयरों की बात करें, तो BSE की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल IndiGo Share (2.50%), Asian Paints Share (2.42%), Reliance Share (2.10%), Bajaj Finance Share (1.70%), ITC Share (1.60%), M&M Share (1.50%) फिसलकर ट्रेड कर रहे थे. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल Hindustan Petroleum Share (3.60%), Ashok Leyland Share (2.60%) की गिरावट में कारोबार कर रहा था. स्मॉलकैप लिस्ट में NBCC Share (2.20%), PNB Housing Finance Share (2.10%) टूटकर कारोबार करता दिखा। 

कच्चे तेल पर बड़ी राहत, सऊदी अरब के फैसले से भारत को होगा फायदा; दिवाली तक बच सकते हैं हजारों करोड़

नई दिल्ली ग्‍लोबल एनर्जी मार्केट में सऊदी अरब के एक बड़े फैसले ने हलचल मचा दी है. दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में शामिल सऊदी अरब ने एशियाई ग्राहकों के लिए अपने प्रमुख अरब लाइट (Arab Light) कच्चे तेल की आधिकारिक बिक्री कीमत (Official Selling Price-OSP) में अगस्त की आपूर्ति के लिए प्रति बैरल 11 डॉलर की भारी कटौती की है. यह पिछले 26 वर्षों में एशिया के लिए की गई सबसे बड़ी मंथली कटौती मानी जा रही है. इतना ही नहीं साल 2020 के बाद पहली बार सऊदी अरब ने अपने इस प्रमुख ग्रेड को ओमान-दुबई बेंचमार्क के मुकाबले 1.50 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर उपलब्ध कराया है. एक्‍सपर्ट का मानना है कि यह फैसला केवल कीमत घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एशियाई बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है. खासकर ऐसे समय में जब रूस रियायती दरों पर तेल बेचकर भारत और चीन जैसे बड़े आयातकों के बीच अपनी मजबूत पकड़ बना चुका है. सऊदी अरब के इस ‘प्राइस वॉर’ से भारत के ऑयल इंपोर्ट बिल पर पॉजिटिव असर तय माना जा रहा है. भारत अपनी कुल जरूरतों का 85 फीसद तक आयात करता है. ‘मनीकंट्रोल’ रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-मई 2026 के दौरान भारत ने 35.5 अरब डॉलर (₹337970 करोड़) मूल्‍य का कच्‍चा तेल आयात किया था. सऊदी अरब की ओर से किए गए प्राइस कट और होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सुचारू होने के बाद इंपोर्ट बिल में कमी आने की संभावना है. आगे चलकर कंज्‍यूमर को भी इसका फायदा मिलना तय माना जा रहा है।  दरअसल, कुछ सप्ताह पहले तक वैश्विक तेल बाजार में चिंता का माहौल था. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव तथा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में शिपिंग प्रभावित होने की आशंका के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था. दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत समुद्री तेल व्यापार का रास्ता इसी स्‍ट्रेट से होकर गुजरता है. ऐसे में किसी भी तरह के खलल से ग्‍लोबल सप्‍लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया था. हालांकि, अब हालात काफी हद तक सामान्य हो चुके हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही फिर से सुचारु हो गई है, खाड़ी देशों का निर्यात सामान्य स्तर पर लौट आया है और बाजार में तत्काल आपूर्ति संकट की आशंका काफी कम हो गई है. इसके साथ ही तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक प्लस (OPEC+) ने अगस्त से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सहित अन्य उत्पादक देशों ने भी उत्पादन बढ़ाया है।  भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सऊदी का फैसला? भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक कम रहती हैं तो भारत का इंपोर्ट बिल घट सकता है, चालू खाते का घाटा नियंत्रित रह सकता है और महंगाई पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. कम कीमतों का लाभ केवल सरकार तक सीमित नहीं रहेगा. विमानन, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, मैन्‍यूफैक्‍चरिंग और पेट्रोकेमिकल जैसे उद्योगों की लागत भी घट सकती है, क्योंकि ये सभी क्षेत्र पेट्रोलियम उत्पादों पर काफी हद तक निर्भर हैं. इससे उत्पादन लागत कम होने और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना रहती है. इसका सीधा फायदा आम उपभोक्‍ताओं को मिलने की संभावन है।  क्या सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल? हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत कम होने का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल और डीजल तुरंत सस्ते हो जाएंगे. भारत में खुदरा ईंधन की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं. इनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनिंग मार्जिन, मालभाड़ा, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले कर तथा सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के मूल्य निर्धारण संबंधी निर्णय शामिल हैं. इसलिए यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक सस्ता बना रहता है और तेल कंपनियां इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाती हैं, तभी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना होगी।  भारत और चीन पर फोकस एशिया दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक क्षेत्र है. भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश सऊदी अरब के सबसे बड़े ग्राहक हैं. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस बाजार में रूस की मौजूदगी तेजी से बढ़ी है. यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते रूस ने रियायती कीमतों पर अपना तेल एशियाई देशों को बेचना शुरू किया. भारत और चीन रूस के सबसे बड़े खरीदार बनकर उभरे. ऐसे में सऊदी अरब पर दबाव बढ़ा. विश्लेषकों का मानना है कि कीमतों में इतनी बड़ी कटौती का उद्देश्य एशियाई रिफाइनरियों को आकर्षित करना और उन्हें रूस या अन्य सप्‍लायर्स की बजाय सऊदी तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना है. इसके अलावा चीन की धीमी आर्थिक वृद्धि के कारण वहां तेल की मांग में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो रही है, जिससे भी कीमतों पर दबाव बना हुआ है। 

सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए खुशखबरी! चांदी ₹6,600 लुढ़की, गोल्ड रेट में भी आई गिरावट

इंदौर  घरेलू फ्यूचर्स मार्केट MCX में सोने और चांदी के भाव मंगलवार (7 जुलाई) सुबह गिर गए। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जून नीति बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं, ताकि केंद्रीय बैंक की मोनेटरी पॉलिसी की दिशा के बारे में और सुराग मिल सकें। सुबह 9:05 बजे तक MCX पर अगस्त गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट 0.52% यानी 767 रुपये की गिरावट के साथ ₹1,46,148 प्रति 10 ग्राम पर आ गए, जबकि सितंबर सिल्वर फ्यूचर्स 1.14% यानी 2859 रुपये टूटकर ₹2,33,416 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहे थे।सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट (Gold-Silver Rate Fall) लगातार दूसरे कारोबारी दिन भी जारी है. सोमवार को फिसलने के बाद मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज का चांदी की वायदा कीमत मंगलवार को भी ओपनिंग के साथ ही तेजी से गिरी है. MCX पर कारोबार शुरू होते ही 1 Kg Silver Price झटके में 5200 रुपये से ज्यादा कम होकर 2.31 लाख रुपये के लेवल पर आ गया. दूसरी ओर सोना भी फिसला है और इसकी वायदा कीमत में 1500 रुपये से ज्यादा की गिरावट आई है।  चांदी अचानक हुई इतनी सस्ती सबसे पहले बताते हैं चांदी की कीमत में लगातार जारी गिरावट और ताजा सिल्वर प्राइस अपडेट के बारे में, तो एमसीएक्स वायदा कारोबार में 4 सितंबर की एक्सपायरी वाली चांदी की कीमत खुलते ही गिरकर 2,30,803 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई, जबकि बीते कारोबारी दिन ये फिसलते हुए 2,36,099 रुपये पर क्लोज हुई थी. इस हिसाब से 1 किलो चांदी अचानक 5296 रुपये सस्ती (Silver Cheaper) हो गई है।        दो दिन से लगातार टूट रही Silver इस सप्ताह की शुरुआत से ही चांदी के भाव में गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ और ये लगातार दूसरे दिन भी जारी है. बता दें कि बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को वायदा चांदी 2,37,410 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी और दो दिन की गिरावट में ये 6607 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो चुकी है. इस ताजा गिरावट के बाद अब चांदी अपने लाइफ टाइम हाई 4.20 लाख रुपये की तुलना में करीब आधी कीमत (Silver Price Half From High) पर मिल रही है।  सोने-चांदी में गिरावट के 3 अहम कारण फेड के मिनट्स और ब्याज दरों पर अटकलें: अमेरिकी फेड की जून बैठक के मिनट्स 8 जुलाई को जारी होंगे। अधिकतर एक्सपर्ट्स का मानना है कि फेड इस साल कम से कम एक बार ब्याज दरें बढ़ाएगा, क्योंकि मुद्रास्फीति अभी भी 2% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। जून में बाजार को इस साल तीन बार दर बढ़ोतरी की उम्मीद थी, क्योंकि अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल के दाम आसमान छू गए थे और मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ गया था। हालांकि, जून के पेरोल डेटा के उम्मीद से कमजोर आने ने इस साल आक्रामक मौद्रिक सख्ती की उम्मीदों को कम कर दिया है। निवेशकों की नजर मिनट्स पर: मास्टर कैपिटल सर्विसेज के मुख्य शोध अधिकारी रवि सिंह ने कहा कि निवेशक अब फेड की जून बैठक के मिनट्स जारी होने का इंतजार कर रहे हैं, जिससे भविष्य की ब्याज दरों के रास्ते पर स्पष्टता मिल सकती है और सोने में अगली दिशात्मक चाल तय होगी। भू-राजनीतिक तनाव का असर: इधर, ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाने की खबरों ने भू-राजनीतिक चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा है। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि ईरान की सेना ने सोमवार रात होर्मुज से गुजर रहे व्यापारिक जहाजों पर दो मिसाइलें दागीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वाशिंगटन संभवतः ईरानी ठिकानों पर हमले करके जवाबी कार्रवाई कर सकता है। सोने-चांदी के लिए क्या हैं टिप्स रवि सिंह ने बताया कि तकनीकी ढांचा अभी भी मजबूत बना हुआ है, और कीमतें ₹1,40,500 के अहम सपेार्ट जोन से ऊपर बनी हुई हैं। ऊपर की ओर तत्काल रेजिस्टेंस 21-दिवसीय EMA के करीब ₹1,48,000 पर है, और इस स्तर के ऊपर स्पष्ट ब्रेकआउट रिकवरी को ₹1,50,000–₹1,51,000 के जोन तक ले जा सकता है। पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन के अनुसार, आज के सत्र में सोने को $4,135 और $4,100 पर सपेार्ट तथा $4,194 और $4,220 पर रेजिस्टेंस है, जबकि चांदी को $61.20 और $59.80 पर सपोर्ट तथा $63.40 और $64.20 पर रेजिस्टेंस है। MCX सोने के लिए सपेार्ट ₹1,46,100 और ₹1,45,500 है, जबकि रेजिस्टेंस ₹1,47,400 और ₹1,48,200 पर है। चांदी के लिए समर्थन ₹2,33,300 और ₹2,30,000 तथा रेजिस्टेंस ₹2,38,800 और ₹2,41,000 पर है। 2026 में अब तक चांदी में बदलाव Gold-Silver Rate में इस साल 2026 में अब तक आए उतार-चढ़ाव पर नजर डालें, तो 31 दिसंबर 2025 को वायदा चांदी की कीमत 2,54,082 रुपये प्रति किलोग्राम थी, इसके बाद जनवरी में ये रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए 4 लाख रुपये के ऐतिहासिक स्तर के पार निकल गई. हालांकि, इसके बाद चांदी जमकर टूटी भी और फिलहाल के रेट से तुलना करें, तो ये 23,279 रुपये सस्ती है।         Gold रेट भी लगातार फिसल रहा न सिर्फ चांदी, बल्कि वायदा कमोडिटी मार्केट में कीमती पीली धातु (Yellow Metal) भी सस्ती होती जा रही है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर मंगलवार को सोने की कीमत में भी गिरावट आई है. ये बीते कारोबारी दिन 1,46,917 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुई थी और मंगलवार को खुलने के साथ ही फिसलकर 1,45,351 रुपये पर आ गई. इस हिसाब से 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1566 रुपये कम हो गया।         हाई से अब काफी सस्ती मिल रहा सोना सोने की कीमत में इस सप्ताह लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. सोना बीते सप्ताह शुक्रवार को 147,378 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुआ था और अब तक 2027 रुपये सस्ता हो चुका है. वहीं चांदी की तरह सोना भी अपने हाई लेवल से काफी सस्ता हो चुका है, इस कीमती धातु ने भी जनवरी महीने में पहली बार 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का आंकड़ा पार किया था.