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आज सस्ता हुआ सोना-चांदी, कितने रुपये घटे रेट? चेक करें अपने शहर के नए भाव

मुंबई  अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आज का दिन आपके लिए राहत लेकर आया है.  18 जून गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली. अमेरिका और ईरान के बीच हुए  शांति समझौते और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले के बाद निवेशकों का रुख बदला, जिससे गोल्ड-सिल्वर की कीमतों पर दबाव बढ़ गया. चांदी में 2.5 प्रतिशत से ज्यादा और सोने में करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।  MCX पर चांदी में बड़ी गिरावट, 7,000 रुपये से ज्यादा टूटा भाव गुरुवार के कारोबार में एमसीएक्स सिल्वर जुलाई फ्यूचर्स अपने पिछले बंद 2,51,807 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले 2.5 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर दिन के निचले स्तर 2,44,495 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया. चांदी ने आज 2,48,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार की शुरुआत की थी.  सुबह करीब 11:43 बजे जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 7,057 रुपये यानी 2.80 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,44,750 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।  सोने की चमक भी फीकी, 1.5% से ज्यादा गिरा MCX पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना भी दबाव में रहा. खबर लिखे जाने तक गोल्ड फ्यूचर्स 2,378 रुपये यानी 1.55 प्रतिशत गिरकर 1,51,501 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया.कारोबार के दौरान सोना अपने पिछले बंद 1,53,879 रुपये प्रति 10 ग्राम से फिसलकर 1,51,348 रुपये प्रति 10 ग्राम के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया।  आज आपके शहर में सोने और चांदी का क्या है भाव? दिल्ली में सोने-चांदी का रेट दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव 1,52,340 रुपये प्रति 10 ग्राम है. वहीं 22 कैरेट सोना 1,39,645 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है. चांदी का भाव 2,47,170 रुपये प्रति किलोग्राम है।  मुंबई में सोने-चांदी का रेट मुंबई में 24 कैरेट सोना 1,52,600 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,39,883 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है. चांदी का भाव 2,47,600 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया।  पटना में सोने-चांदी का रेट पटना में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,52,520 रुपये प्रति 10 ग्राम है. 22 कैरेट सोना 1,39,810 रुपये प्रति 10 ग्राम पर मिल रहा है. वहीं चांदी का भाव 2,47,470 रुपये प्रति किलोग्राम है।  जयपुर में सोने-चांदी का रेट जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,52,580 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,39,865 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है. चांदी का भाव 2,47,570 रुपये प्रति किलोग्राम है।  कानपुर में सोने-चांदी का रेट कानपुर में 24 कैरेट सोने का भाव 1,52,640 रुपये प्रति 10 ग्राम है. 22 कैरेट सोना 1,39,920 रुपये प्रति 10 ग्राम पर मिल रहा है. चांदी का भाव 2,47,660 रुपये प्रति किलोग्राम है।  लखनऊ में सोने-चांदी का रेट लखनऊ में भी 24 कैरेट सोना 1,52,640 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,39,920 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है. चांदी का भाव 2,47,660 रुपये प्रति किलोग्राम है।  आखिर क्यों गिर रहे सोना और चांदी के दाम? जानें वजह कमोडिटी मार्केट के जानकारों के मुताबिक सोना और चांदी पर कई वजहों से दबाव बना।  सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम शांति समझौता रहा. इससे वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी और सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर सोने की मांग कमजोर पड़ी।  इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने लगातार चौथी बैठक में ब्याज दरों को 3.5-3.75 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखा, लेकिन साथ ही आगे और ब्याज दर बढ़ाने के संकेत भी दिए. बढ़ती ब्याज दरें आमतौर पर सोने और चांदी जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं।  एक्सपर्ट का कहना है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती ने भी कीमती धातुओं की चमक कम की है।  COMEX पर भी गोल्ड-सिल्वर लुढ़के अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी कमजोर कारोबार करते दिखाई दिए.COMEX पर चांदी करीब 3 प्रतिशत गिरकर 68.76 डॉलर पर कारोबार कर रही थी. वहीं COMEX गोल्ड 1 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट के साथ 4,318.90 डॉलर पर ट्रेड करता नजर आया।  हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर, रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम में बढ़ते निवेश के कारण चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड मजबूत बनी हुई है. खासकर चीन से मांग बढ़ने की उम्मीद के चलते चांदी में गिरावट सीमित रही। 

Stock Market में उतार-चढ़ाव का खेल, अमेरिका की चेतावनी और ट्रंप के गुड सिग्नल ने बढ़ाई निवेशकों की टेंशन

मुंबई  शेयर मार्केट में सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को भारी कन्फ्यूजन देखने को मिला है. सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स की चाल बदली-बदली नजर आई. शुरुआती कारोबार के दौरान कभी ये ग्रीन जोन में ट्रेड करते हुए दिखाई दिए, तो अचानक ही गिरावट के साथ रेड जोन में आ गए. हालांकि, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 77000 के पार, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 24,000 के पार बना हुआ है।  सेसेंक्स-निफ्टी की बदली-बदली चाल  शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने पर बीएसई का सेंसेक्स अपने गुरुवार को अपने पिछले बंद 77,155 की तुलना में मामूली गिरावट लेकर 77,131 के लेवल पर खुला और फिर अचानक रेड जोन से ग्रीन जोन में छलांग लगाकर 77,281 पर कारोबार करता नजर आया. ये तेजी भी अगले ही पल चली गई और सेंसेक्स गिरकर 77,044 पर ट्रेड करने लगा।  बात 50 शेयरों वाले इंडेक्स NSE Nifty की करें, तो इसकी चाल भी सेंसेक्स के जैसे ही देखने को मिली है. अपने पिछले बंद 24,085 की तुलना में गिरकर निफ्टी 24,073 पर ओपन हुआ और फिर कभी रेड तो कभी ग्रीन जोन में कारोबार करता दिखा।  बाजार में कन्फ्यूजन की वजह क्या?  शेयर बाजार में भारी कन्फ्यूजन की वजह पर गौर करें, तो अमेरिका से आई Good Or Bad News को माना जा सकता है. दरअसल अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) ने नीतिगत ब्याज दरों (US Fed Rate) को बिना किसी बदलाव के 3.50% से 3.75% पर स्थिर रखा है. फेड के नए चेयरमैन केविन वार्श की अध्यक्षता वाली पहली बैठक में ये फैसला लिया गया है और उन्होंने किसी तरह की राहत नहीं दी है. इसके बाजार का सेंटीमेंट बिगड़ा है।  वहीं दूसरी ओर गुड न्यूज ये आई है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता डन हो गया है और दोनों के बीच एग्रीमेंट पर साइन भी कर दिए गए हैं. इसका असर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के रूप में दिखा है, जो महंगाई का जोखिम कम होने का संकेत है और बाजार को इसका सपोर्ट मिल सकती है।  उथल-पुथल के बीच ये 10 शेयर चमके  शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच जो शेयर अपने निवेशकों को फायदा कराते हुए नजर आए. उनमें बीएसई लार्जकैप कंपनियों में शामिल टाटा ग्रुप की Trent Share (1.50%), BEL Share (1.20%), HDFC Bank Share (1.10%) की बढ़त में ट्रेड कर रहे थे।  इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में देखें, तो Nykaa Share (1.20%), Yes Bank Share (1.10%) की बढ़त में कारोबार करता हुआ दिखाई दिया. स्मॉलकैप सेक्शन में शामिल शेयरों की बात करें, तो यहां पर Carboruniv Share (7%), Redington Share (5.50%), ABREL Share (2.50%), WockPharma Share (2.10%), HSCL Share (1.90%) की बढ़त में कारोबार कर रहा था।  

Tata Sierra.ev की धमाकेदार एंट्री तय, लंबी रेंज और लग्जरी फीचर्स से EV बाजार में मचाएगी हलचल

मुंबई Tata Motors अपनी सबसे आइकॉनिक SUV Sierra को बिल्कुल नए अवतार में वापस ला रही है. कंपनी 30 जून 2026 को अपनी मोस्ट-अवेडेट 'Tata Sierra.ev' के प्रोडक्शन मॉडल को पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है. साल 2020 और 2023 के ऑटो एक्सपो में कॉन्सेप्ट के तौर पर दिखने के बाद से ही फैंस इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. आइए जानते हैं कि इस नए जमाने की सिएरा में आपको क्या कुछ खास मिलने वाला है।  नई Tata Sierra.ev का बाहर का लुक नई टाटा सिएरा ईवी बेहद मॉडर्न और फ्यूचरिस्टिक नजर आएगी. इसके फ्रंट लुक में ईवी-स्पेसिफिक बदलाव किए गए हैं जैसे इसमें पूरी तरह से बंद फ्रंट ग्रिल और एक नया स्पोर्टी बंपर देखने को मिलेगा. इसके अलावा कार के चारों तरफ खास '.ev' की बैजिंग दी जाएगी जो इसे इसके पेट्रोल-डीजल मॉडल से अलग बनाएगी।  केबिन के अंदर स्क्रीन की भरमार इसके टॉप-स्पेक वेरिएंट्स में कंपनी Triple-Screen Layout सेटअप दे सकती है. इसमें ड्राइवर के लिए 10.25-इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, बीच में 12.3-इंच का मुख्य टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम और सबसे मजेदार बात यह है कि आगे बैठने वाले पैसेंजर के लिए भी अलग से 12.3-इंच का डिस्प्ले दिया जा सकता है. इसके निचले वेरिएंट्स में ग्राहकों को ड्यूल-स्क्रीन के साथ हेड-अप डिस्प्ले का ऑप्शन मिलेगा।  नई सिएरा ईवी के अंदर एक बड़ा पैनोरमिक सनरूफ, वेंटिलेटेड और इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल फ्रंट सीट्स, कई सारे ड्राइविंग मोड्स और एक प्रीमियम ऑडियो सिस्टम मिलेगा. इसका केबिन स्पेस और कम्फर्ट इस तरह डिजाइन किया गया है कि लंबी दूरी के सफर में भी आपको थकान का अहसास नहीं होगा।  बैटरी, पावर और धांसू परफॉर्मेंस यह दमदार इलेक्ट्रिक एसयूवी टाटा के एडवांस्ड 'acti.ev+' प्लेटफॉर्म पर बेस्ड है जिस पर हैरियर ईवी को भी तैयार किया जा रहा है. ताकत के लिए इसमें ग्राहकों को 65 kWh और 75 kWh के दो बड़े बैटरी पैक के विकल्प मिल सकते हैं।  सबसे बड़ी बात यह है कि टाटा ने पुष्टि की है कि सिएरा ईवी रियर-व्हील-ड्राइव (RWD) और ऑल-व्हील-ड्राइव (AWD) दोनों कॉन्फिगरेशन में आएगी. हालांकि इसका ऑल-व्हील-ड्राइव (4X4) वर्जन सिर्फ बड़े बैटरी पैक के साथ ही उपलब्ध कराया जाएगा।  नई Tata Sierra.ev की कीमत उम्मीद जताई जा रही है कि इसकी एक्स-शोरूम कीमत ₹18 लाख से शुरू होकर ₹25 लाख के बीच हो सकती है. भारतीय बाजार में कदम रखते ही इसका सीधा मुकाबला Mahindra BE 6, हुंडई क्रेटा इलेक्ट्रिक, एमजी जेडएस ईवी, टोयोटा एबेला और मारुति की आने वाली e Vitara जैसी दिग्गज गाड़ियों से होने वाला है। 

ग्लोबल मार्केट में निवेश करने वालों के लिए खुशखबरी, ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स को मिली हरी झंडी

मुंबई  विदेश के शेयर बाजारों में निवेश करने की चाहत रखते हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, भारत के चार बड़े रिटेल ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म जेरोधा, ग्रो, एंजल वन और Upstox को GIFT सिटी के जरिए अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी शेयरों में निवेश की सुविधा शुरू करने की मंजूरी मिल गई है। इन कंपनियों को इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) से जरूरी मंजूरी मिली है। बता दें कि IFSCA, GIFT सिटी के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) में काम करने वाले फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स, सेवाओं और संस्थानों के लिए रेगुलेटर है। कब से शुरू होगी सुविधा? मनीकंट्रोल की एक खबर के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी शेयरों में निवेश की सुविधा अगले दो से तीन महीनों में शुरू होने की उम्मीद है। जानकारी के मुताबिक ब्रोकरेज कंपनियां टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन, टेस्टिंग और कंप्लायंस की प्रक्रियाएं पूरी कर रही हैं। इसी के साथ ये ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म उन कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे जो GIFT सिटी के जरिए विदेशी इक्विटी में निवेश की सुविधा देती हैं। रिपोर्ट के अनुसार जेरोधा और Upstox ब्रोकर-डीलर के तौर पर काम करेंगे जबकि ग्रो और एंजेल वन ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर (GAP) फ्रेमवर्क के तहत यह सेवा देंगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जेरोधा और Upstox के विदेशी पार्टनर्स – जैसे ViewTrade इंटरनेशनल, Interactive ब्रोकर्स और Alpaca सिक्योरिटीज के जरिए ट्रेड करने की उम्मीद है। धन को मिल चुकी है मंजूरी ये मंजूरी धन (Dhan) द्वारा US स्टॉक में निवेश की सुविधा शुरू करने के कुछ दिनों बाद मिली है, जो यह दिखाता है कि भारतीय निवेशकों को ग्लोबल मार्केट तक एक्सेस देने में ब्रोकरेज फर्मों की दिलचस्पी बढ़ रही है। ब्रोकरेज कंपनियां अगले कुछ महीनों में इसे लॉन्च करने की तैयारी कर रही हैं। बता दें कि स्मॉलकेस, INDmoney और HDFC सिक्योरिटीज जैसे कई प्लेटफॉर्म पहले से ही अलग-अलग तरीकों से अंतरराष्ट्रीय स्टॉक तक एक्सेस दे रहे हैं। अब जेरोधा, ग्रो, एंजल वन और Upstox के आने से रिटेल निवेशकों की विदेशी बाजारों तक एक्सेस और बढ़ सकती है। बता दें कि हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय निवेश की मांग बढ़ी है क्योंकि भारतीय निवेशक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर में निवेश करना चाहते हैं। GIFT सिटी क्या है? गुजरात में स्थित GIFT सिटी भारत के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर का घर है, जो एक खास फाइनेंशियल जो है और इसे सीमा-पार फाइनेंशियल सेवाओं और ट्रांजैक्शन को आसान बनाने के लिए बनाया गया है। विदेशी सिक्योरिटीज तक एक्सेस बढ़ाने के लिए IFSCA ने ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर (GAP) फ्रेमवर्क शुरू किया है। इसके तहत, GIFT सिटी से काम करने वाली रेगुलेटेड कंपनियां निवेशकों को भारत-आधारित रेगुलेटरी स्ट्रक्चर के जरिए विदेशी स्टॉक, दूसरी अंतरराष्ट्रीय सिक्योरिटीज तक एक्सेस दे सकती हैं।

ईंधन संकट रोकने की तैयारी, केंद्र ने तेल कंपनियों पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाया

नई दिल्ली ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है. इसी बीच भारत में सरकार ने डीजल और हवाई ईंधन के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफाल टैक्स को बढ़ा दिया है. हालांकि आम नागरिकों के लिए राहत की बात ये है कि मार्केट में पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार स्थिर बने हुए हैं. वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेश के अनुसार ये नए रेट्स मंगलवार से लागू हो चुके हैं।  सरकार हर 15 दिन में विंडफाल टैक्स रेट का रिव्यू करती है. अब इन बदलाव के बाद डीजल के एक्सपोर्ट पर स्पेशन एडिशनल एक्साइज ड्यूटी को 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. वहीं दूसरी तरफ हवाई ईंधन के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 12.5 रुपये रुपये प्रति लीटर हो गई है. हालांकि पेट्रोल के एक्सपोर्ट ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं हुआ।  ड्यूटी बढ़ाने का फैसला क्यों? दरअसल मिडिल ईस्ट क्राइसिस से वैश्विक मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें महंगी हो गईं. जब इंटरनेशनल मार्केट में तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो लोकल तेल कंपनियां मुनाफा कमाने के लिए ऑयल को देश के बाहर एक्सपोर्ट करने लगती हैं. इसे रोकने के लिए सरकार विंडफाल टैक्स लगाती है. इस टैक्स के जरिए देश के अंदर पेट्रोल-डीजल की सप्लाई को कंट्रोल किया जाता है।  आम आदमी पर इसका क्या असर? देखिए, अगर आप सोच रहे हैं कि ये टैक्स बढ़ जाने की वजह से आपके लिए फ्यूल महंगा हो जाएगा, तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. सरकार ने साफ किया है कि देश के अंदर बिकने वाले पेट्रोल-डीजल की ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं हुआ. यानी आपकी जेब पर इसका सीधा कोई असर नहीं पड़ेगा. हां, हवाई ईंधन पर टैक्स बढ़ने से एयरलाइन कंपनियों के खर्च जरूर बढ़ सकते हैं।  देश में पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं महीनो से चल रहे अमेरिका-ईरान के बीज जंग पर आखिरकार विराम लगता दिखा रहा है. इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतें लगातार नीचे आ रही हैं. सप्लाई सुधरने की उम्मीद से मंगलवाल को ब्रेंट क्रूड पुराने सेशन से 5% टूटकर 81 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर आया गया. ऐसे में भारतीय तेल कंपनियों ने 16 जून को पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं किया है. देश के बड़े शहरों में ईंधन के दाम पुराने लेवल पर ही स्टेबल बने हुए हैं।  देश में ईंधन की कोई कमी नहीं पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की पर्याप्त उपलब्धता है तथा किसी प्रकार की ईंधन कमी की स्थिति नहीं है। मंत्रालय ने नागरिकों और उद्योगों से ऊर्जा का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने की अपील की है। अंतर-मंत्रालयी प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि, औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्र के बड़े उपभोक्ता डीजल की खरीद अपने उपभोक्ता पंपों (कंज्यूमर पंप) से करें, ताकि खुदरा पेट्रोल पंपों पर दबाव कम किया जा सके। ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य… सुजाता शर्मा ने बताया कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह स्थिर है। सभी रिफाइनरियां अपनी क्षमता के अनुसार सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं और कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का पर्याप्त भंडार भी उपलब्ध है।उन्होंने कहा कि, हाल में कुछ स्थानों पर आपूर्ति संबंधी दबाव इसलिए देखा गया क्योंकि मई महीने में लगभग 42 करोड़ लीटर डीजल, जो पहले बड़े उपभोक्ताओं या कंज्यूमर पंपों के माध्यम से वितरित होता था, वह खुदरा पेट्रोल पंपों से उठाया जाने लगा। इससे कुछ क्षेत्रों में अस्थायी दबाव की स्थिति बनी। खुदरा बिक्री पर अस्थायी सीमा लागू… सामान्य उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सरकार ने 11 जून को एक अस्थायी अधिसूचना जारी की है। इसके तहत खुदरा पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 200 लीटर तक सीमित कर दी गई है। औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति सीधे अपने उपभोक्ता पंपों से करें।सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था लगभग 90 दिनों के लिए लागू की गई है और इसका उद्देश्य केवल आम उपभोक्ताओं को परेशानी से बचाना है। उन्होंने दोहराया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। एलपीजी आपूर्ति भी हुई सामान्य… मंत्रालय के अनुसार, एलपीजी आपूर्ति की स्थिति भी अब पूरी तरह संतुलित हो गई है। पिछले चार दिनों के दौरान देशभर में 1.66 करोड़ एलपीजी बुकिंग प्राप्त हुईं, जबकि 1.84 करोड़ सिलेंडरों की डिलीवरी की गई। इससे लंबित बुकिंग का समय घटकर केवल 3.3 दिन रह गया है।इसी अवधि में 24,184 टन वाणिज्यिक एलपीजी की बिक्री हुई। इसके अलावा 2.18 लाख पांच किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर बेचे गए, जिनमें से 14,500 सिलेंडर विशेष शिविरों के माध्यम से वितरित किए गए। पीएनजी नेटवर्क का तेजी से विस्तार… मंत्रालय ने बताया कि, मार्च से अब तक 9.76 लाख घरेलू पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शनों में गैस आपूर्ति शुरू की जा चुकी है। इसके अलावा 3.19 लाख नए कनेक्शनों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है और 9.72 लाख नए उपभोक्ताओं का पंजीकरण किया गया है। अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई… पेट्रोलियम मंत्रालय ने ईंधन और एलपीजी से जुड़ी अवैध गतिविधियों के खिलाफ भी अभियान तेज कर दिया है। मार्च से अब तक एलपीजी से जुड़े मामलों में 1,330 एफआईआर दर्ज की गई हैं, 311 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 75,960 सिलेंडर जब्त किए गए हैं।वहीं, 27 मई से अब तक 12,303 लीटर पेट्रोल और 91,263 लीटर डीजल जब्त किया गया है। इस संबंध में 50 एफआईआर दर्ज की गईं और 49 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। उद्योगों को सीधे आपूर्ति की सलाह… सुजाता शर्मा ने कहा कि यह कदम पूरी तरह अस्थायी है और इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोपहिया वाहन चालकों, कार मालिकों और किसानों को खुदरा पंपों पर आसानी से ईंधन उपलब्ध हो सके।उन्होंने बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं से अपील की कि वे फिर से सीधे आपूर्ति व्यवस्था का उपयोग करें, जिससे खुदरा ईंधन केंद्रों पर भीड़ और दबाव कम हो सके।

शेयर बाजार में दूसरे दिन भी हरियाली, सेंसेक्स 262 अंक उछला, डॉलर के मुकाबले रुपया चमका

मुंबई  अमेरिका-ईरान में शांति समझौता होने का असर लगातार दूसरे दिन भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा है और दोनों इंडेक्स ने तेजी के साथ ओपनिंग की है. कच्चे तेल का तेल निकलते ही शेयर मार्केट का जोश भी हाई नजर आ रहा है. मंगलवार को कारोबार की शुरुआत होते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 76,500 का स्तर पार कर दिया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी 24,000 के करीब ओपन हुआ।  सेंसेक्स-निफ्टी की तेज शुरुआत  शेयर मार्केट में सप्ताह के लगातार दूसरे कारोबार स्टार्ट होते ही BSE Sensex अपने पिछले बंद 76,264 के मुकाबले तेज रफ्तार के साथ खुला और 76,586 के लेवल पर पहुंच गया. NSE Nifty की चाल भी सेंसेक्स के जैसी ही रही और ये अपने सोमवार के बंद 23,853 की तुलना में उछाल के साथ 23,944 पर पहुंच गया।  शेयर मार्केट के लिए ये हफ्ता शानदार रहा है. अमेरिका-ईरान के बीच जंग खत्म होते देख बाजार में लगातार लिवाली का दौर बना हुआ है. सोमवार के बाद लगातार हफ्ते के दूसरे दिन बढ़त के साथ बाजार की शुरुआत हुई. सेंसेक्स जहां 262 अंकों की तेजी के साथ 76,526 पर खुला, वहीं निफ्टी में 70 अंकों की ग्रोथ के साथ 23,923 पर रहा. बीते दिन सोमवार को कारोबारी सत्र के आखिर में सेंसेक्स और निफ्टी शानदार बढ़त के साथ बंद हुए थे।  बैंक निफ्टी का आगाज शानदार रहा है. 57,198 के मुकाबले आज 57,320 अंक पर खुला. नतीजन बैंकिंग शेयरों में लगातार तेजी दिख रही है. सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी आईटी 28,237 और निफ्टी एफएमसीजी 49,158 के लेवल पर खुला है. पिछले सेशन के मुकाबले इसमें लगातार ग्रोथ कायम है।  बड़े इंडेक्स में लगातार हो रही खरीदारी मार्केट के शुरुआती समय में एचसीएल टेक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फाइनेंस और एलटी जैसे शेयर कमाल का प्रदर्शन करते दिखाई दिए. हलांकि दूसरी तरफ टाटा स्टील, पावर ग्रिड और एक्सिस बैंक के शेयर प्रेशर में दिखाई दे रहे हैं. कहा जा सकता है कि दूसरे दिन मार्केट का आगाज पॉजिटिव रहा है. और बड़े इंडेक्स में निवेशक खरीदारी कर रहे हैं।  गिफ्ट निफ्टी ने दिए थे अच्छे संकेत शुरुआत में GIFT Nifty भी 23,894 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था, जिसने पहले ही संकेत दे दिए थे कि बाजार में तेजी का रुख बना रहेगा. दो दिन में बाजार के पॉजिटिव रुखने निवेशकों की जमकर कमाई कराई है।  इधर क्रैश, उधर बाजार का सुधरा मूड  शेयर बाजार में लगातार जारी इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चा तेल है, जिसका दो दिन में ही 'तेल' निकल गया. डोनाल्ड ट्रंप ने जैसे ही ईरान के साथ शांति समझौते पर सहमति बनने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने का ऐलान किया, अंतरराष्ट्री बाजार में क्रूड का दाम भरभराकर क्रैश होने लगा और ये सिलसिला मंगलवार को भी जारी है।  ब्रेंट क्रूड की कीमत (Brent Crude Price) 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रही है, तो वहीं WTI Crude Oil Price गिरते हुए इसी स्तर के आसपास आ गया है. मर्बन क्रूड (Murban Crude Oil Price) की अगर बात करें, तो ये मंगलवार को करीब 7 फीसदी की गिरावट के साथ 77 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।  कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई का जोखिम कम हुआ है. दुनिया की कुल तेल जरूरत के करीब 20 फीसदी की आपूर्ति के लिए जरूरी समुद्री रूट होर्मुज स्ट्रेट ओपन होने से तेल-गैस संकट कम होता नजर आने लगा है और इनसे शेयर बाजार निवेशकों की धारणा में अचानक बदलाव देखने को मिला है।   इन शेयर ने खुलते ही लगाई छलांग  मंगलवार को शेयर मार्केट में कारोबार शुरू होने के साथ ही जिन स्टॉक्स में जोरदार तेजी देखने को मिली. उनमें बीएसई लार्जकैप कैटेगरी में शामिल HCL Tech Share (3%), Bajaj Finance Share (2.10%), Bajaj Finance Share (2%) शामिल हैं. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में Suzlon Share (3%), GMR Airport Share (3%), Dixon Share (2.10%), Yes Bank Share (1.90%) शुरुआती कारोबार में सबसे तेज भागते हुए नजर आए. वहीं स्मॉलकैप कैटेगरी में शामिल Lal Path Lab Share (7%), PGEL Share (4%) और IIFL Share (3.60%) उछला।  तेल फिसला, तो रुपया भी मजबूत  कच्चे तेल की कीमतें क्रैश (Crude Oil Price Crash) होने से सिर्फ शेयर बाजार में ही तेजी नहीं देखने को मिल रही है, बल्कि भारतीय करेंसी रुपया की स्थिति में भी सुधार हुआ है और ये मजबूत हुआ है. मंगलवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 8 पैसे बढ़त के सात 94.63 पर खुला, जबकि सोमवार को यह 94.71 पर बंद हुआ था। 

पेट्रोल को रिप्लेस करेगा E100 Fuel? किसानों के लिए वरदान, लेकिन राह में कई बड़ी चुनौतियां

  नई दिल्ली E100 Fuel Explained- Pros & Cons: पेट्रोल महंगा है, डीजल का भविष्य धुंधला है और इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर अभी भी रेंज एंजायटी का साया मंडरा रहा है. ऐसे में सरकार ने अब एक नया दांव चला है. E100 फ्यूल को मंजूरी मिल गई है और दावा किया जा रहा है कि यह भारत की तेल आयात पर निर्भरता कम कर सकता है. लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई प्योर इथेनॉल पर चलने वाली गाड़ियां पेट्रोल को रिप्लेस कर पाएंगी, या फिर यह भी लंबा प्रयोग साबित होगा? आइए समझते हैं कि E100 फ्यूल आखिर है क्या, इसके फायदे क्या हैं और इसकी राह में कौन-कौन सी बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं।  केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में बड़ी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि, E100 फ्यूल के लिए नियमों को मंजूरी दे दी गई है. इसके लिए उन्होंने रात 8 बजे फाइल पर हस्ताक्षर किए और अब E100 फ्यूल कानूनी रूप से देश में इस्तेमाल होने के लिए तैयार है।  सरकार के इस फैसले के बाद एक बार फिर इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल चर्चा में है. केंद्रीय मंत्री का कहना है कि, आने वाले डेढ़-दो महीनों में हुंडई, टोयोटा और एमजी मोटर जैसी कंपनियां भी अपनी फ्लेक्स फ्यूल कारों को पेश करेंगी. हाल ही में उन्होंने मारुति सुजुकी की लोकप्रिय कार वैनगआर के फ्लेक्स फ्यूल वर्जन को पेश किया था. जिसे शुरुआत में फ्लीट ऑपरेटर्स (कैब सर्विस प्रोवाइडर्स) के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. आगे चलकर कंपनी इसे प्राइवेट व्हीकल के तौर पर भी पेश कर सकती है।  क्या है E100 फ्यूल? E100 एक ऐसा फ्यूल है जिसमें लगभग 100 प्रतिशत इथेनॉल होता है और इसमें पारंपरिक पेट्रोल नहीं मिलाया जाता. इथेनॉल एक ऐसा फ्यूल है, जिसे गन्ना, मक्का, चावल और और कृषि अपशिष्ट जैसी चीजों से तैयार किया जाता है. भारत में अभी E20 पेट्रोल का इस्तेमाल पहले से ही हो रहा है. जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है. E100 इसी दिशा में अगला कदम है, जिसे पूरी तरह इथेनॉल पर चलने के लिए तैयार किया गया है।  E20 फ्यूल के इस्तेमाल को लेकर पहले ही तमाम शिकायतें सामने आ चुकी हैं. कई वाहन मालिकों ने कहा है कि, E20 फ्यूल के इस्तेमाल के बाद उनके वाहनों का माइलेज गिरा है और साथ ही मेंटनेंस कॉस्ट भी बढ़ी है. इस बात से सरकार भी इंकार नहीं कर रही है, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने सोशल नेटवर्किंग साइट 'X' पर अपने एक बयान में कहा है कि, "रेगुलर पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी कम होने के कारण, माइलेज में मामूली कमी आती है. जो E10 के लिए डिज़ाइन किए गए और E20 के लिए कैलिब्रेट किए गए चार पहिया वाहनों के लिए अनुमानित 1-2%, और अन्य वाहनों के लिए लगभग 3-6% है।  E100 फ्यूल पर इतना जोर क्यों? सरकार की मानें तो भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में विदेशों से आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. ऐसे में सरकार E100 फ्यूल के जरिए इंपोर्टेड तेल पर निर्भरता कम करना चाहती है. देश में तैयार होने वाला इथेनॉल के जरिए तेल आयात पर होने वाला खर्च भी घट सकता है।  बताया जा रहा है कि, इसका एक बड़ा फायदा किसानों को भी मिलेगा. इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सकती है. सरकार के अनुसार इथेनॉल प्रोग्राम की वजह से अब तक कच्चे तेल के आयात में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है और किसानों को करीब 80,000 करोड़ रुपये की एक्स्ट्रा इनकम हुई है।  क्या E100 फ्यूल पेट्रोल की जगह ले सकता है? अब एक बड़ा सवाल ये है कि, क्या E100 फ्यूल पूरी तरह से पेट्रोल को रिप्लेस कर सकता है. सैद्धांतिक रूप से E100 फ्यूल पेट्रोल की जगह ले सकता है, लेकिन यह बदलाव तुरंत संभव नहीं है. इसके लिए स्पेशली डिजाइन किए गए वाहनों की जरूरत होगी. मौजूदा समय में भारत की सड़कों पर चल रही करोड़ों पेट्रोल कारें, बाइक और स्कूटर E100 फ्यूल पर चलने के लिए तैयार नहीं हैं. ये वाहन रेगुलर पेट्रोल या E20 फ्यूल के लिए बनाए गए हैं।  इन वाहनों में एक बड़ी संख्या उनकी भी है, जो पूरी तरह से E20 फ्यूल के लिए भी तैयार नहीं है. यही कारण है कि, पुराने वाहन मालिकों को नए फ्यूल के इस्तेमाल के बाद तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. एक अनुमान है कि, आने वाले सालों में E20 और E100 फ्यूल दोनों साथ-साथ मौजूद रहेंगे. धीरे-धीरे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या बढ़ने के बाद ही E100 का इस्तेमाल बड़े स्तर पर संभव हो पाएगा।  किन वाहनों में इस्तेमाल होगा E100? E100 फ्यूल हर वाहन में नहीं डाला जा सकता. इथेनॉल का गुण और व्यवहार पेट्रोल से बिल्कुल अलग होता है, इसलिए इंजन, फ्यूल पंप, इंजेक्टर और फ्यूल लाइन में विशेष बदलाव करने पड़ते हैं. इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले वाहन जरूरी होते हैं. मारुति सुजुकी ने वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप पेश किया है, जिसे E100 जैसे हाई इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल पर चलाया जा सकता है. दोपहिया सेगमेंट में हीरो मोटोकॉर्प ने स्प्लेंडर और HF डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन भी पेश किए हैं. इसके अलावा सुजुकी के पोर्टफोलियो में भी एक मॉडल है और होंडा ने भी अपनी सीबी 350 के फ्लेक्स फ्यूल मॉडल को पेश किया था, जिसे अब डिस्कंटीन्यू किया जा चुका है।  फ्लेक्स-फ्यू वाले वाहन और उनकी कीमत वाहन     कीमत (एक्स-शोरूम) HF Deluxe Flex Fuel     72,792 रुपये  Splendor+ Flex Fuel     82,710 रुपये  Suzuki Gixxer SF 250 Flex Fuel     2,26,382 रुपये Maruti Wagon R Flex Fuel     बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं  E100 फ्यूल के बड़े फायदे E100 फ्यूल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे भारत की विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम हो सकती है. चूंकि इथेनॉल देश में ही तैयार किया जा सकता है, इसलिए इसका इसका इस्तेमाल बढ़ा कर पेट्रोल की कीमतों में भी कमी आने की उम्मीद की जा रही … Read more

अनिल अग्रवाल का मेगा प्लान, वेदांता के विभाजन से बनीं 4 नई कंपनियां; निवेशकों के लिए क्या है मतलब?

 नई दिल्ली अरबपति अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली वेदांता लिमिटेड के डिमर्जर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. इसके तहत अब चार नई कंपनियां बनी हैं, इनमें वेदांता एल्युमिनियम, वेदांता आयरन एंड स्टील, वेदांता ऑयल एंड गैस और वेदांता पावर शामिल हैं, जिन्हें लिस्ट किया गया है. इस तहत वेदांता लिमिटेड को मिलाकर ग्रुप की पांच लिस्टेड कंपनियां हो गई हैं. इस मौके पर Anil Agarwal ने कहा कि भारत में बड़े अवसर मौजूद हैं और इन कंपनियों आगे बढ़कर और भी बहुत कुछ करना होगा।  वेदांता रिसोर्सेज के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का कहना है कि ये सभी सेक्टर्स रोमांचक हैं और इनमें अपार संभावनाएं हैं. हम डिविडेंड देने वाली कंपनी होने और कंपनियों के लिए वैल्यू क्रिएशन को लेकर बहुत सचेत हैं।  हर कंपनी में इतनी क्षमता Anil Agarwal ने भारत में मौजूद संभावनाओं पर जोर दिया. उन्होंने अगले पांच सालों में 20 अरब डॉलर के निवेश की रूपरेखा बताई. अग्रवाल ने कहा कि हमारी हर एक कंपनी में 100 अरब डॉलर का रेवेन्यू हासिल करने की क्षमता है. शेयरधारकों को लेकर वेदांता चेयरमैन ने आगे कहा कि उनके हित से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है और पिछले पांच सालों में वेदांता ने 300% का रिटर्न दिया है।   आयात पर निर्भरता कम करना जरूरी  Vedanta Chairman के मुताबिक, भारत अपने नेचुरल रिसोर्सेज की 50% जरूरतों का आयात करता है, इसे कम करना जरूरी है. उन्होंने बताया कि भारत में थोरियम के विशाल भंडार हैं, और हमें आत्मनिर्भर बनने के लिए इस अवसर का लाभ उठाने पर काम करना चाहिए।  उन्होंने कहा कि वेदांता के सभी बिजनेस ग्रोथ के लिए तैयार हैं. मैंगनीज, निकेल, फेरोक्रोम और तांबे में मौजूद संभावनाओं को देखकर यह साफ संकेत मिलता है कि कितना कुछ किया जा सकता है।  'हम ग्रोथ के लिए तैयार' नई कंपनियों की लिस्टिंग के मौके पर अनिल अग्रवाल ने स्ट्रेटजी में टेक की अहम भूमिका भूमिका का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, AI हमारी रगों में बसा है और हम इसका इस्तेमाल अपने सभी व्यवसायों में करते हैं.  योजना के तहत वेदांता रिसोर्सेज को भविष्य में दोबारा लिस्ट किया जाएगा और ग्रुप और इससे जुड़े व्यवसायों को आगे बढ़ना है, वे विकास के लिए पूरी तरह तैयार हैं।  अनिल अग्रवाल का दिलचस्प सफर  अपने दम पर कारोबारी साम्राज्य खड़ा करने वाले कारोबारियों का जिक्र होता है, तो फिर वेदांता (Vedanta Ltd) के अनिल अग्रवाल (Anil Agawal) का नाम लिस्ट में शामिल रहता है. साधारण परिवार में पैदा होने के बाद अनिल अग्रवाल ने अपनी मेहनत से माइनिंग व मेटल बिजनेस (Mining And Metal Business) का साम्राज्य खड़ा किया।  बिहार से शुरू हुआ उनका सफर मुंबई से होते हुए लंदन तक पहुंच गया. इतना ही नहीं, इस सफर के दरम्यान कई शानदार मुकाम हासिल हुए और लंदन स्टॉक एक्सचेंज (London Stock Exchange) पर पहली भारतीय कंपनी वेदांता की लिस्टिंग उनमें से एक है. संपत्ति की बात करें, तो अनिल अग्रवाल की नेटवर्थ (Anil Agarwal Networth) फोर्ब्स बिलेनियर्स इंडेक्स के मुताबिक, 4.6 अरब डॉलर है। 

बाजार में जश्न का माहौल! लगातार 4 पॉजिटिव संकेतों से आई जबरदस्त उछाल, अब नजर अगली बड़ी खबर पर

 नई दिल्ली कारोबारी हफ्ते के पहले दिन शेयर बाजार में जश्न का माहौल है, सेंसेक्स 860 अंक और निफ्टी 260 अंक उछलकर कारोबार कर रहा है. दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच पिछले साढ़े तीन महीने से जारी संघर्ष आखिरकार समाप्त होने जा रहा है. दोनों देशों के बीच एक शांति समझौता हो गया है. फिलहाल बाजार में तेजी के पीछे ये 4 बड़े कारण हैं, जिसने निवेशकों के सेंटिमेंट को सुधार दिया है. वहीं, बाजार अब 5वीं बड़ी खबर का इंतजार कर रहा है।  आइए एक-एक कर जानते हैं कि बाजार में तेजी के पीछे क्या कारण हैं.. 1. होर्मुज का खुलना पिछले तीन महीनों से पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण होर्मुज रूट बाधित चल रहा था. रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक ऐतिहासिक शांति समझौते और नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की घोषणा के बाद, इस रूट को पूरी तरह से व्यापार के लिए खोल दिया गया है. वैश्विक व्यापार के लिए यह इस साल की सबसे बड़ी राहत है. दुनिया का 20% से अधिक कच्चा तेल और LNG इसी रास्ते से गुजरता है, इसके खुलने से सप्लाई चेन ठप होने का डर पूरी तरह खत्म हो गया है. जिसने भारतीय बाजार में चौतरफा लिवाली को बढ़ावा दिया है।  2. कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट होर्मुज संकट टलने का सीधा असर कमोडिटी मार्केट पर देखने को मिला है. अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतें 5% से अधिक टूटकर $83 प्रति बैरल के पास आ गई हैं. भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में तेल का सस्ता होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी बूस्टर डोज से कम नहीं है. इससे देश का आयात बिल घटेगा, चालू खाता घाटा (CAD) नियंत्रण में आएगा।  3. डॉलर के मुकाबले रुपये की रिकॉर्ड मजबूती कच्चे तेल में गिरावट और वैश्विक बाजार में डॉलर इंडेक्स के सुस्त पड़ने से भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जबरदस्त मजबूती का प्रदर्शन कर रहा है. रुपया मजबूत होकर 94.50 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है. रुपये की इस मजबूती से विदेशी निवेशकों (FIIs) का भरोसा भारतीय बाजार में फिर से लौट आया है, क्योंकि इससे उन्हें करेंसी डेप्रिसिएशन (मुद्रा के अवमूल्यन) का जोखिम कम हो जाता है. साथ ही, आयात होने वाली जरूरी वस्तुओं की लागत घटने से घरेलू स्तर पर महंगाई को रोकने में मदद मिलेगी।  4. बॉन्ड टैक्स कटौती से FII की बिकवाली थमी घरेलू मोर्चे पर सरकार और नीति निर्माताओं द्वारा बॉन्ड मार्केट पर टैक्स ढांचे में किए गए हालिया सुधार और कटौती का बड़ा असर दिख रहा है. पिछले कुछ महीनों से विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसे निकाल रहे थे, लेकिन बॉन्ड टैक्स में राहत मिलने के बाद फिक्स्ड इनकम और इक्विटी मार्केट दोनों में विदेशी फंड्स का आउटफ्लो न के बराबर रह गया है. FIIs अब आक्रामक शॉर्ट-कवरिंग कर रहे हैं।  अब इस एक खबर का इंतजार (भारत-अमेरिका ऐतिहासिक ट्रेड डील) बाजार में आई इस शुरुआती तेजी के बीच अब निवेशकों की नजरें उस पांचवें और सबसे निर्णायक ट्रिगर पर टिकी हैं, जो इस रैली को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकता है. भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Pact) के अंतिम मसौदे को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है।  ट्रेड डील से बाजार को क्या उम्मीद? इस समझौते के तहत अमेरिका में भारतीय निर्यात खासकर टेक्सटाइल, फार्मा, आईटी सर्विसेज और इंजीनियरिंग सामान पर लगने वाली भारी ड्यूटी को कम किया जाना है, जिससे भारतीय कंपनियों को वियतनाम और मेक्सिको जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बड़ा एडवांटेज मिलेगा। 

Gold Price Today: सोने-चांदी में जबरदस्त उछाल, 24 कैरेट गोल्ड 1.50 लाख के पार पहुंचा

इंदौर  भारतीय सर्राफा बाजार में सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, आज फिर 24 कैरेट वाले 10 ग्राम सोने की कीमत 1 लाख 50 हजार रुपये के पार पहुंच गई है, जो बीते कारोबारी दिन शुक्रवाक यानी 12 जून की शाम को 147800 रुपये प्रति 10 ग्राम थी।  ibjarates.com पर 15 जून 2026 की सुबह जारी किए गए रेट के मुताबिक, 995 शुद्धता वाले यानी 23 कैरेट सोने का रेट 149568 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जबकि 916 शुद्धता वाले यानी 22 कैरेट गोल्ड का रेट 137555 रुपये प्रति 10 ग्राम है. वहीं, बीते कारोबारी दिन की तुलना में चांदी की कीमत में भी भारी उछाल आया है।  बता दें कि इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की अधिकारिक वेबसाइट ibjarates.com पर सोमवार से शुक्रवार रोज सुबह और शाम गोल्ड और सिल्वर के रेट जारी होते हैं. आइए जानते हैं बीते कारोबारी दिन यानी शुक्रवार (12 जून) शाम की तुलना में आज कितना महंगा हुआ 22-24 कैरेट सोना।  15 June Gold-Silver Prices: सोना-चांदी आज कितने रुपये हुआ महंगा?   शुद्धता शुक्रवार सुबह का रेट शुक्रवार शाम का रेट सोमवार सुबह का भाव कितने बदले रेट सोना (प्रति 10 ग्राम) 999     147609 147800 150169  2369 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 995      147018 147208 149568  2360 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 916      135210 135385 137555  2170 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 750      110707 110850 112627  1777 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 585      86351 86463 87849  1386 रुपये महंगा चांदी (प्रति 10 ग्राम) 999      242295 242582 251011   8429 रुपये महंगी चांदी का रेट क्या है? चांदी की कीमत आज 251011 रुपये किलो है, जो बीते कारोबारी दिन यानी शुक्रवार शाम को 242582 रुपये किलो थी. बता दें कि इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की अधिकारिक वेबसाइट ibjarates.com पर जारी कीमतों में जीएसटी एड नहीं होता और ज्वैलरी खरीदने पर मेकिंग चार्ज अलग से देने होते हैं.