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ट्रंप के बयान से बाजार की गिरावट, ब्रेंट क्रूड 4% चढ़ा, पॉवेल बने नफरत का कारण

मुंबई  शेयर बाजार में कमजोरी के साथ 30 अप्रैल को कारोबार की शुरुआत हुई है. सुबह 9:30 बजे पर सेंसेक्स 902.35 अंक गिरकर 76,594 पर ट्रेड करते हुए नजर आया. निफ्टी 277 अंक उछलकर 23,900 पर कारोबार करते हुए दिखा. सभी सेक्टर्स में बिकवाली देखी जा रही है. मेटल, ऑटो और बैंकिंग सेक्टर्स में सबसे ज्यादा गिरावट आई है. इस गिरावट के पीछे कई वजह शामिल हैं।  सबसे पहली वजह मानी जा रही है कि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा कि वह अपनी स्थिति संभाल नहीं पा रहा और बिना परमाणु हथियार वाले समझौते पर फैसला लेने में भी असमंजस में है. सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने साफ चेतावनी दी कि ईरान को जल्द समझदारी दिखानी होगी, वरना हालात और बिगड़ सकते हैं. उनके इस सख्त रुख के बाद ग्लोबल मार्केट में असर दिखा और कच्चे तेल की कीमत बढ़कर करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।  डोनाल्ड ट्रंप का बयान डोनाल्ड ट्रंप का ‘नो मोर मिस्टर नाइस गाय’ बयान सिर्फ एक सामान्य कमेंट नहीं, बल्कि उनकी रणनीति का संकेत माना जा रहा है. इसका मतलब है कि अब वह कूटनीतिक नरमी छोड़कर ज्यादा आक्रामक रुख अपनाने के पक्ष में हैं. यूएस और ईरान के बीच बढ़ता टेंशन और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई बाधित होने का खतरा, ग्लोबल डर बढ़ा रहा है।  डोनाल्ड ट्रंप के कट्टर दुश्मन माने जाने वाले फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने US Fed की अपनी आखिरी बैठक में एक बार फिर से अमेरिकी पॉलिसी रेट्स को स्थिर रखने को फैसला किया है. यानी इनमें किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है. वेस्ट एशिया संषर्ष और इससे महंगाई के खतरे का हवाला देते हुए फेड ने US Policy Rates Unchanged रखे हैं. इसका असर अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट के रूप में दिखा, तो भारत समेत एशियाई शेयर मार्केट क्रैश हो गए।  Sensex-Nifty खुलते ही बिखरे ग्लोबल शेयर बाजारों में मचे कोहराम के बीच भारतीय शेयर मार्केट में आई इस बड़ी गिरावट के बीच BSE Sensex ने अपने पिछले बंद 77,496 के मुकाबले तेज गिरावट लेकर 77,014 पर ओपन हुआ और फिर ये लगातार फिसलता चला गया. कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा का गोता लगाकर 76,502 के लेवल पर आ गिरा।  भारतीय रुपया में गिरावट डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर करीब 95.21 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया है, जो रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब माना जा रहा है. रुपये में यह गिरावट विदेशी निवेशकों (FII) के लिए चिंता बढ़ाती है, क्योंकि इससे निवेश का रिटर्न कम हो सकता है, और इसी वजह से शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है।  यूएस फेड का फैसला ग्लोबल संकेत भी फिलहाल नेगेटिव बने हुए हैं. यूएस फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को भले ही स्थिर रखा है, लेकिन बढ़ती महंगाई और जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण 2026 में रेट कट की उम्मीदें कम हो गई हैं. वहीं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड खासकर 10 साल की करीब 4.4% पर पहुंचने से अमेरिका में निवेश ज्यादा आकर्षक हो गया है, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों से कैपिटल आउटफ्लो का खतरा बढ़ सकता है।  निफ्टी लगातार गिरते हुए करीब 23,900 के स्तर पर पहुंच गया है और बाजार में पैनिक सेलिंग जैसा माहौल देखने को मिल रहा है. India VIX करीब 4% उछलकर कारोबार कर रहा है, जो इस बात का संकेत है कि भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव (वॉलिटिलिटी) बढ़ रहा है और निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. अब निवेशकों की नजर Q4 नतीजों पर टिकी है, जहां ACC, Adani Ports, Hindustan Unilever और Bajaj Finserv जैसी बड़ी कंपनियां अपने रिजल्ट्स जारी करेंगी, जो बाजार की आगे की दिशा तय करने में अहम फैक्टर रहेगा। 

क्रूड ऑयल के दाम 111 डॉलर पार, पेट्रोल 393 रुपये पर, कई देशों में तेल संकट बढ़ा

मुंबई यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) के फैसले से दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. ब्रेंट क्रूड करीब 2.8% बढ़कर 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI भी लगभग 100 डॉलर के आसपास है. इसी बीच UAE ने 1 मई से OPEC और OPEC+ छोड़ने का बड़ा फैसला लिया है.इससे पूरी दुनिया के तेल बाजार, कीमतों और सप्लाई सिस्टम पर असर पड़ सकता है।  OPEC और OPEC+ क्या है? ओपेक यानी ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) एक ऐसा ग्रुप है जिसमें बड़े तेल उत्पादक देश शामिल हैं. इसमें सऊदी अरब, इराक, ईरान, कुवैत जैसे देश शामिल हैं और हाल तक यूएई भी इसका हिस्सा था.इसका मुख्य काम तेल उत्पादन को कंट्रोल करके कीमतों को मैनेज करना है।  OPEC कैसे काम करता है?  ओपेक तरराष्ट्रीय तेल बाजार  में बैलेंस बनाए रखने की कोशिश करता है.जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें गिरने लगती हैं, तो ओपेक देश मिलकर तेल की सप्लाई (उत्पादन) में कटौती कर देते हैं, ताकि मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होने से कीमतें फिर से स्थिर हो सकें.इसके विपरीत, जब तेल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं और दुनिया भर में ऊर्जा संकट का खतरा मंडराने लगता है, तो ओपेक उत्पादन बढ़ाकर बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ा देता है.इससे सदस्य देशों की कमाई  सुरक्षित बनी रहती है और और ग्लोबल मार्केट में कीमतों में  ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता।  OPEC क्या है और क्यों इतना ताकतवर है? ओपेक+ में ओपेक के साथ कुछ और देश भी जुड़े हैं, जैसे रूस.यह 2016 में तब बना जब तेल की कीमतें गिर गई थीं और ओपेक अकेले बाजार को संभाल नहीं पा रहा था.आज ओपेक+ दुनिया के करीब 40-50% तेल उत्पादन को कंट्रोल करता है।  ओपेक+ (OPEC+) की असली ताकत इस बात में छिपी है कि यह संगठन दुनिया के तेल सप्लाई के एक बहुत बड़े हिस्से को कंट्रोल करता है.जब भी ओपेक+ के सदस्य देश कोई फैसला लेते हैं, तो उसका असर तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दिखाई देता है और तेल की कीमतें पलक झपकते ही ऊपर-नीचे होने लगती हैं.चूंकि दुनिया की इकोनॉमी तेल पर टिकी है, इसलिए इनके फैसलों का सीधा असर हर देश की महंगाई, ट्रांसपोर्ट की लागत और पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.यही वजह है कि ओपेक+ को इतना ताकतवर माना जाता है, क्योंकि यह पूरी दुनिया की जेब और बाजार की दिशा बदल सकती है।  यूएई ने ओपेक क्यों छोड़ा? जान लें वजह इसके अलावा, यूएई को भविष्य की भी चिंता है क्योंकि रिन्यूएबल एनर्जी(Renewable Energy) के बढ़ते चलन के कारण आने वाले समय में तेल की मांग घट सकती है. ऐसे में यूएई की सोच यह है कि आज का तेल भविष्य की तुलना में ज्यादा कीमती हो सकता है, इसलिए वह अभी अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करके ज्यादा से ज्यादा कमाई करना चाहता है. ओपेक की पाबंदियों से बाहर निकलकर वह अपनी इकोनॉमी को और मजबूत करने और भविष्य के जोखिमों से निपटने की तैयारी कर रहा है।  घरेलू वायदा बाजार में गिरावट जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी दिखी, वहीं घरेलू स्तर पर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। क्रूड ऑयल करीब 0.88% यानी 84 रुपये गिरकर 9,401 रुपये पर कारोबार करता दिखा।  होरमुज जलडमरूमध्य बना चिंता का कारण Strait of Hormuz को लेकर बनी अनिश्चितता भी कीमतों में तेजी की बड़ी वजह है। यह अहम समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और LNG सप्लाई का लगभग 20% संभालता है, और यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर बाजार पर पड़ सकता है। भारत पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से उत्पादन को लेकर मतभेद थे.इसके अलावा कोटा सिस्टम से यूएई संतुष्ट नहीं था.वह अपनी मार्केट शेयर बढ़ाना चाहता है।  यूएई के बाहर निकलने का असर क्या होगा? यूएई के ओपेक से बाहर निकलने का असर काफी गहरा हो सकता है, जिससे सबसे पहले ओपेक की वैश्विक ताकत कमजोर पड़ सकती है.यूएई उन गिने-चुने देशों में शामिल था जिसके पास जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त तेल उत्पादन करने की बड़ी क्षमता थी, और उसके जाने से संगठन का दबदबा कम होना तय है.दूसरा बड़ा असर तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के रूप में दिख सकता है. चूंकि अब सप्लाई को एक सुर में कंट्रोल करना मुश्किल होगा, इसलिए बाजार पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा वोलाटाइल हो सकता है. अंत में, इससे तेल बाजार पूरी तरह बिखर सकता है. जब हर देश संगठन की एकजुटता के बजाय अपने निजी फायदे और रणनीति के हिसाब से फैसले लेने लगेगा, तो इससे एकजुटता कम होगी और भविष्य में ग्लोबल मार्केट को संतुलित करना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।  क्यों बढ़ रही हैं तेल की कीमतें? क्या आगे भी जारी रहेगी तेजी इस समय सबसे बड़ा कारण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है.ईरान युद्ध के कारण सप्लाई बाधित है और निर्यात कम हो गया है.इसी वजह से कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं.अगर हालात सामान्य होते हैं और यूएई ज्यादा उत्पादन शुरू करता है:सप्लाई बढ़ सकती है कीमतें फिर नीचे आ सकती हैं.लेकिन अभी बाजार अनिश्चित है कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।  भारत पर क्या असर पड़ेगा? क्या पेट्रोल-डीजल होगा महंगा?  ग्लोबल ऑयल मार्केट में होने वाली इस हलचल का भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर सीधा और बड़ा असर पड़ता है. कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से न केवल पेट्रोल-डीजल महंगा होने का डर रहता है, बल्कि इससे माल ढुलाई की लागत बढ़ती है, जिससे सीधे तौर पर महंगाई में इजाफा होता है और देश का व्यापार घाटा भी बढ़ सकता है।  हालांकि, आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि केंद्र सरकार ने फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी की किसी भी संभावना से इनकार किया है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ किया है कि पेट्रोल … Read more

शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 609 अंक चढ़ा, निफ्टी 24,177 पर बंद

मुंबई   बुधवार (29 अप्रैल) को शेयर बाजार में दिनभर तेजी का माहौल रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,056 अंक उछला, वहीं निफ्टी 24,329.30 के स्तर पर था। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 609.45 अंक की तेजी के साथ 77,496.36 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी 181.95 अंक की बढ़त के साथ 24,177.65 के स्तर पर बंद हुआ।    शेयर बाजार में तेजी के कारण…. कच्चे तेल की कीमत में गिरावट वैश्विक बाजारों से मिले संकेतों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी हल्की नरमी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड 0.21% की गिरावट के साथ 111 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इससे महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। तेल सस्ता होने से इंपोर्ट बिल घटता है, व्यापार घाटा कम करने में मदद मिलती है और रुपए पर दबाव भी कम होता है। साथ ही ट्रांसपोर्ट, एविएशन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स की लागत भी घटती है। ग्लोबल मार्केट्स का हाल एशियाई बाजारों में मजबूती का असर भी भारतीय बाजारों पर देखने को मिला है। हेंग सेंग, कोस्पी, सेट कंपोजिट, शंघाई कंपोजिट और जकार्ता कंपोजिट में बढ़त रही, जबकि निक्केई 225 और ताइवान वेटेड में गिरावट दर्ज हुई। अमेरिकी बाजार मंगलवार को कमजोरी के साथ बंद हुए थे। घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने भी बाजार को सहारा दिया है। विदेशी निवेशकों (FII) ने मंगलवार को 2,103.74 करोड़ रुपए की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 1,712.01 करोड़ रुपए की खरीदारी की, जिससे बाजार में गिरावट सीमित रही।  

Honda City का नया फेसलिफ्ट मॉडल और नई SUV भारत में होगी लॉन्च, तारीख जानें

मुंबई  कार निर्माता कंपनी Honda Cars India आगामी 22 मई 2026 को अपनी फेसलिफ़्टेड Honda City और एकदम नई Honda ZR-V SUV को लॉन्च करने वाली है. जहां Honda City को अपनी मौजूदा पांचवीं जेनरेशन में दूसरा फेसलिफ़्ट मिलेगा, वहीं Honda ZR-V की बात करें तो इसके साथ भारत में एक नई नेमप्लेट की एंट्री होगी. खास बात यह है कि इस कार को कम्प्लीटली बिल्ट यूनिट (CBU) के तौर पर लाया जाएगा और उम्मीद है कि यह Honda की लाइनअप में ज़्यादा प्रीमियम सेगमेंट में अपनी जगह बनाएगी।  नई Honda ZR-V SUV का डिजाइन दुनिया भर में, Honda ZR-V को Honda HR-V और Honda CR-V के बीच रखा गया है. डिजाइन की बात करें तो इसमें पतले LED हेडलैंप दिए गए हैं, जिनके साथ एक बड़ी ग्लॉस ब्लैक ग्रिल दी गई है. वहीं पीछे की तरफ, इसमें हॉरिजॉन्टल तरीके से लगे टेल-लैंप दिए गए हैं, जो टेलगेट में ही इंटीग्रेटेड हैं।  आकार की बात करें तो, Honda ZR-V की लंबाई 4,568 mm, चौड़ाई 1,840 mm और ऊंचाई 1,620 mm रखी गई है, और इसका व्हीलबेस 2,657 mm मिलता है।  नई Honda ZR-V SUV का इंटीरियर इसके इंटीरियर की बात करें तो, इसमें Apple CarPlay और Android Auto के साथ एक 9-इंच की फ्री-स्टैंडिंग टचस्क्रीन और एक डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है. इसके अलावा, कार में हेड-अप डिस्प्ले, वायरलेस चार्जिंग और पावर्ड टेलगेट जैसी अन्य दिलचस्प फीचर भी इसमें शामिल हैं. दूसरी पंक्ति की सीटें लगी होने पर, इसकी बूट कैपेसिटी 370 लीटर है।  सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो Honda ZR-V में Honda का Sensing suite दिया गया है, जिसमें कोलिजन मिटिगेशन ब्रेकिंग, लेन कीप असिस्ट, अडैप्टिव क्रूज़ कंट्रोल और ऐसे ही कई फ़ीचर्स शामिल हैं।  नई Honda ZR-V SUV का पावरट्रेन Honda ZR-V को दुनिया भर में Honda के e:HEV हाइब्रिड सिस्टम के साथ पेश किया गया है. इसमें 2.0-लीटर पेट्रोल इंजन के साथ दो इलेक्ट्रिक मोटर लगाई गई हैं, जो मिलकर 181 bhp की पावर और 315 Nm का टॉर्क जेनरेट करते हैं. यह सिस्टम इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और इंजन ड्राइव मोड के बीच स्विच कर सकता है।  Honda City फेसलिफ्ट वहीं, Honda City की बात करें तो यह इसके मौजूदा पांचवीं जनरेशन के मॉडल का दूसरा अपडेट होगा, जिसे पहली बार 2023 में फ़ेसलिफ़्ट मिला था. इस बार, बाहरी हिस्से में होने वाले बदलावों के सीमित रहने की उम्मीद है. ये बदलाव शायद हेडलाइट्स, टेल-लैंप्स, बंपर्स और अलॉय व्हील्स जैसे हिस्सों में किए गए छोटे-मोटे सुधारों तक ही सीमित रहेंगे।  ज़्यादा ध्यान इसके अंदरूनी हिस्से पर दिया जा सकता है. इसमें ड्राइवर की सीट को पावर से एडजस्ट करने का फीचर, आगे की सीटों में वेंटिलेशन, एक बड़ा इंफोटेनमेंट सिस्टम और पूरी तरह से डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर जैसे फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं।  इसके अलावा, पावरट्रेन की बात करें तो यहां पर कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा. Honda City फेसलिफ्ट में मौजूदा 1.5-लीटर पेट्रोल इंजन ही बरकरार रखा जाएगा, जो 6-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन और CVT ऑटोमैटिक, दोनों विकल्पों के साथ उपलब्ध है।  वहीं कीमत पर नजर डालें तो, मौजूदा मॉडल की कीमतें 12 लाख रुपये से 16.07 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच रखी गई हैं, जबकि इसके हाइब्रिड वर्जन की कीमत 20 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि फेसलिफ्ट की कीमत इससे थोड़ी ज़्यादा होगी। 

चांदी के भाव में ₹5000 की गिरावट, सोने के रेट में भी बड़ी गिरावट, जानिए आज का 10 ग्राम गोल्ड प्राइस

इंदौर   शादियों के सीजन में बड़ी खबर सोने-चांदी के भाव को लकर आ रही है। आज सर्राफा बाजारों में सोना-चांदी के रेट में भारी गिरावट है। 28 अप्रैल को 24 कैरेट गोल्ड का भाव 1629 रुपये सस्ता हो गया है। आज यह 159557 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। चांदी 5381 रुपये सस्ती होकर 238339 रुपये प्रति किलो पर आ गई है। 22 कैरेट गोल्ड और 18 कैरेट के रेट आईबीजेए के मुताबिक आज 10 ग्राम 22 कैरेट गोल्ड के भाव 1492 रुपये सस्ता होकर 136994 रुपये पर आ गया है। इस पर 3 प्रतिशत जीएसटी नहीं लगा है। जीएसटी समेत यह 141103 रुपये का पड़ेगा। 18 कैरेट गोल्ड का रेट भी आज 1222 टूटकर बिना जीएसटी 112168 रुपये हो गया है। जीएसटी के साथ इसका भाव 115533 रुपये हो जाएगा। 14 और 23 कैरेट गोल्ड के रेट सर्राफा बजारों में आज 23 कैरेट गोल्ड की कीमत 1623 रुपये गिरकर 148958 रुपये पर पहुंच गई है। जबकि, 14 कैरेट गोल्ड की कीमत 953 रुपये कम होकर 87491 रुपये प्रति 10 ग्राम है। आईबीजेए दिन में दो बार रेट जारी करता है। एक बार दोपहर 12 या सवा 12 बजे के करीब दूसरा 5 बजे के आसपास। अभी यह रेट दोपहर सवा 12 बजे वाला है। IBJA रेट के मुताबिक अब सोना सर्राफा मार्केट के अपने ऑल टाइम हाई 176121 से 26564 रुपये सस्ता हो गया है। जबकि, चांदी के भाव में ऑल टाइम हाई से 1447594 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। अगर युद्ध के बीच की बात करें तो सोना अबतक 9540 रुपये और चांदी 29561 रुपये गिर चुकी है। क्यों गिरे सोने-चांदी के दाम युद्ध के बीच सर्राफा बाजार में सोने-चांदी गिरती की कीमतों के कारणों के बारे में केडिया कमोडिटिज के प्रेसीडेंट अजय केडिया ने बताया कि बाजार नियामकों ने सोने के कारोबार में मार्जिन की दरें बढ़ा दी हैं, जिसका सीधा असर छोटे निवेशकों पर पड़ा है। ऊंची मार्जिन के चलते सट्टेबाजी करने वालों की संख्या में कमी आई है। कीमतों में अब नरमी है। शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर जिन निवेशकों को शेयरों में नुकसान उठाना पड़ता है, वे अक्सर अपने दूसरे निवेश को बेचकर पैसा निकालने लगते हैं। सोना-चांदी उनकी पहली पसंद बनता है, क्योंकि यह मुनाफे में होता है। इस बिकवाली के दबाव ने भी सोने और चांदी की कीमतों को नीचे लाने में अहम भूमिका निभाई है। दूसरी ओर अब गोल्ड में इन्वेस्टमेंट की रफ्तार ठंडी पड़ गई है। यही वजह है कि बाजार में अब बड़ी तेजी के आसार फिलहाल नहीं दिख रहे। डॉलर की मजबूती ने डाला दबाव अमेरिकी डॉलर में हालिया मजबूती ने भी सोने की कीमतों को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरी मुद्राओं वाले देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग घट जाती है।

US-ईरान वार्ता में अड़चन, शेयर बाजार में सुस्ती, सेंसेक्स-निफ्टी कमजोर

मुंबई  शेयर मार्केट (Share Market) में मंगलवार को सुस्ती के साथ कारोबार की शुरुआत हुई. अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर से लेकर होर्मुज स्ट्रेट खोलने तक पर बात अटकी है और इसे लेकर सेंसेक्स-निफ्टी (Sensex-Nifty) भी कन्फ्यूज नजर आए हैं. विदेशी शेयर बाजारों से मिले निगेटिव सिग्नल ने भी भारतीय स्टॉक मार्केट पर दबाव बढ़ाया है. इन सबके बीच दोनों इंडेक्स कभी रेड, तो कभी ग्रीन जोन में कारोबार करते दिखे।  बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स खुलने के साथ ही पहले 200 अंक से ज्यादा फिसल गया, फिर अचानक ग्रीन जोन में ट्रेड करता नजर आया. तो वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 इंडेक्स भी सेंसेक्स की तरह ही ओपनिंग के साथ फिसला और फिर अचानक ग्रीन जोन में आ गया. इस सुस्ती के बीच SBI, IndiGo, Adani Power जैसे शेयर धड़ाम दिखाई दिए।  ऐसी रही सेंसेक्स-निफ्टी की ओपनिंग  शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत के साथ बीएसई का सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले बंद 77,303.63 की तुलना में गिरावट के साथ 77,094 के लेवल पर ओपन हुआ और फिर अचानक फिसलकर 76,973.54 के लेवल पर आ गया. कुछ देर गिरावट में कारोबार करने के बाद इसने ग्रीन जोन में छलांग लगाई और BSE Sensex 77,335 पर ट्रेड करता दिखा और फिर अगले ही पल टूट भी गया।  NSE Nifty की चाल पर नजर डालें, तो ये भी सेंसेक्स की तरह ही बदली-बदली नजर आई. अपने सोमवार के बंद 24,092 की तुलना में ये इंडेक्स फिसलकर 24,049 पर खुला था और फिर मिनटों में ये फिसलकर 23,999 के लेवल पर आ गया. हालांकि, 24 हजार के नीचे फिसलने के बाद अचानक ये मामूली रिकवरी लिए हुए भी दिखाई दिया।  गिरावट में कारोबार कर रहे ये शेयर  शेयर बाजार में सुस्ती के बीच Eternal, IndiGo, SBI जैसे लार्जकैप स्टॉक गिरावट के साथ रेड जोन में कारोबार कर रहे थे. वहीं मिडकैप में शामिल Phoenix, TIIndia, Laurus Labs और IDFC First Bank जैसे शेयरों में गिरावट देखने को मिली. बीएसई की स्मॉलकैप कैटेगरी में शामिल शेयरों पर नजर दौड़ाएं, तो KIMS Share, Wockpharma Share, APAR India Share के साथ ही FSL Stock फिसले हुए नजर आए।  इन कारणों से बाजार पर दबाव शेयर बाजार पर दबाव के प्रमुख कारणों की बात करें, तो अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर सेंसेक्स-निफ्टी पर भी है. दोनों देशों के बीच न तो सीजफायर को लेकर और न ही होर्मुज खोलने को लेकर कोई सहमति बन पा रही है. Hormuz Strait को लेकर ईरान का प्रपोजल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रास नहीं आ रहा है, दूसरी ओर क्रूड की कीमतों में उछाल ने टेंशन बढ़ाने का काम किया है। 

क्रिसिल की रिपोर्ट: भारत में कमर्शियल व्हीकल मार्केट 2027 में 12.4 लाख यूनिट्स की रिकॉर्ड बिक्री के लिए तैयार

मुंबई  क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, भारत की कमर्शियल व्हीकल इंडस्ट्री फिस्कल साल 2027 में रिकॉर्ड 12.4 लाख यूनिट्स की बिक्री तक पहुंचने वाली है, जो वित्त वर्ष 2019 के पिछले पीक को पार कर जाएगी, लेकिन वित्त वर्ष 2026 में 13 परसेंट की मज़बूत वापसी के बाद ग्रोथ 5-6 प्रतिशत तक कम होने की उम्मीद है।  वित्त वर्ष 2026 में इंडस्ट्री की घरेलू रिकवरी कई वजहों से हुई, जिसमें सितंबर 2025 में GST रेट को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करना भी शामिल है, जिससे परचेज़ इकोनॉमिक्स में सुधार हुआ और डेफर्ड डिमांड अनलॉक हुई. इंटरेस्ट रेट में कमी, बेहतर फ्रेट यूटिलाइजेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर और माइनिंग एक्टिविटी में बढ़ोतरी ने भी वॉल्यूम को सपोर्ट किया।  वित्त वर्ष 2027 में घरेलू डिमांड सपोर्टिव रहने की उम्मीद है, जिसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित एक्टिविटी, लगातार रिप्लेसमेंट डिमांड और बेहतर अफोर्डेबिलिटी का सपोर्ट मिलेगा. हालांकि, क्रिसिल ने कहा कि वेस्ट एशिया में चल रहे संकट की वजह से एक्सपोर्ट में जल्द ही रुकावट आ सकती है, जिससे डिमांड खत्म होने के बजाय डिस्पैच में देरी होने की संभावना है।  मार्केट ज़्यादातर घरेलू है, जिसमें लगभग 92 प्रतिशत वॉल्यूम भारत से आता है और बाकी एक्सपोर्ट से आता है. यह इंडस्ट्री मोटे तौर पर हल्के कमर्शियल व्हीकल (LCVs) में बंटी हुई है, जो वॉल्यूम का 60 प्रतिशत हिस्सा हैं, और मीडियम और भारी कमर्शियल व्हीकल (MHCVs) हैं, जिनमें बसें हर एक में एक सब-सेगमेंट के तौर पर हैं।  ई-कॉमर्स और लास्ट-माइल डिलीवरी की मांग की वजह से LCV की ग्रोथ 5-6 प्रतिशत रहने का अनुमान है. इस सेगमेंट में, 2 टन से ज़्यादा ग्रॉस व्हीकल वेट (GVW) वाली गाड़ियां अब LCV सेल्स का 73 प्रतिशथ हिस्सा हैं, जो वित्त वर्ष 2020 में 60 प्रतिशत था, क्योंकि फ्लीट ऑपरेटर ज़्यादा यूनिट जोड़ने के बजाय पेलोड एफिशिएंसी को प्राथमिकता दे रहे हैं।  MHCV वॉल्यूम में 4-5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने का अनुमान है, जिसे माल ढुलाई और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च से मदद मिलेगी. बेहतर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद से ज़्यादा टन वाले व्हीकल की तरफ़ झुकाव, वॉल्यूम ग्रोथ को कम कर सकता है, भले ही अंदरूनी डिमांड स्थिर रहे।  दोनों डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर – लुधियाना से सोननगर तक पूर्वी DFC और दादरी से JNPT तक पश्चिमी DFC, जो अप्रैल 2026 में पूरी तरह चालू हो जाएंगे – के पूरा होने से लंबी दूरी के माल के लिए रेल से कॉम्पिटिशन भी शुरू होगा, जिससे रिप्लेसमेंट डिमांड पर असर पड़ सकता है।  बस सेगमेंट की बात करें तो इसमें वित्त वर्ष 2027 में 3-4 प्रतिशत की ग्रोथ होने की उम्मीद है, जिसे रिप्लेसमेंट डिमांड और सरकार की तरफ से इलेक्ट्रिक बस खरीदने से सपोर्ट मिलेगा. हालांकि यह अभी भी एक छोटा सब-सेगमेंट है, लेकिन यहां इलेक्ट्रिफिकेशन दूसरी CV कैटेगरी के मुकाबले तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, हालांकि इसकी पहुंच अभी भी कम सिंगल डिजिट में है।  एक्सपोर्ट की बात करें तो, क्रिसिल को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में ग्रोथ तेज़ी से घटकर 2-4 प्रतिशत हो जाएगी, जो वित्त वर्ष 2026 में 17 प्रतिशत थी. वेस्ट एशिया, जो एक्सपोर्ट का लगभग एक चौथाई हिस्सा है, शिपिंग में रुकावटों की वजह से मुख्य रुकावट है. फिर भी, टॉप MHCV बनाने वाले देशों में से एक के तौर पर भारत की बढ़ती स्थिति एक मज़बूत बेस देती है, और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ ट्रेड एग्रीमेंट को फ़ाइनल करने से मीडियम टर्म में एक्सपोर्ट बढ़ सकता है।  सोच-समझकर कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से रेवेन्यू ग्रोथ, वॉल्यूम ग्रोथ से थोड़ी ज़्यादा रहने की संभावना है. लेकिन जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण स्टील, एल्युमीनियम और फ्यूल की बढ़ती इनपुट कॉस्ट से ऑपरेटिंग मार्जिन वित्त वर्ष 2026 के 12 प्रतिशत से 40-50 बेसिस पॉइंट कम होकर 11.5-11.6 प्रतिशत हो सकता है. अगर एग्रेसिव प्राइस पास-थ्रू से डिमांड पर असर पड़ता है, तो कॉस्ट में ज़्यादा बढ़ोतरी से मार्जिन और खराब हो सकता है।  इंडस्ट्री को बढ़ते कम्प्लायंस कॉस्ट का भी सामना करना पड़ रहा है. नए मॉडल्स के लिए एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम मैंडेट अप्रैल 2026 से और सभी प्रोडक्शन के लिए अक्टूबर 2026 से लागू होंगे, इसके बाद अप्रैल 2027 से कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी-III नॉर्म्स और उसके तुरंत बाद प्रपोज़्ड भारत स्टेज VII लागू होंगे।  R&D, टूलिंग और सर्टिफिकेशन में इन्वेस्टमेंट से वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2028 तक गाड़ियों की कीमतें बढ़ने की संभावना है, जिससे जल्द ही रिप्लेसमेंट डिमांड बढ़ सकती है. वॉल्यूम और मार्जिन प्रेशर में कमी के बावजूद, क्रिसिल ने कहा कि इंडस्ट्री का क्रेडिट प्रोफ़ाइल स्टेबल बना हुआ है, जिसे मज़बूत कैश फ़्लो और हेल्दी बैलेंस शीट का सपोर्ट मिला है।  इस फ़ाइनेंशियल ईयर में सालाना कैपिटल खर्च 5,500 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है, जो पिछले साल के हिसाब से मॉडर्नाइज़ेशन और रेगुलेटरी कम्प्लायंस पर फ़ोकस करेगा. कैपेक्स-टू-EBITDA रेश्यो 0.3x से नीचे रहने की उम्मीद है. क्रिसिल ने चेतावनी दी है कि कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, महंगाई, ब्याज दरें और लॉजिस्टिक्स लागत पर असर डालने वाले जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट पर नज़र रखने लायक मुख्य बातें बनी हुई हैं, क्योंकि इनसे डिमांड और मार्जिन के नज़रिए में बड़ा बदलाव आ सकता है। 

अमेरिका की दिग्गज कंपनी का भारत में बड़ा कदम, 1.10 लाख करोड़ में फर्म खरीदी, शेयर बने रॉकेट

मुंबई  भारत की बड़ी फार्मा कंपनी ने अमेरिका की एक बड़ी कंपनी को खरीदने का ऐलान किया है. यह कंपनी अमेरिका के स्‍टॉक एक्‍सचेंज में लिस्‍ट भी है. इस डील के बाद भारत की कंपनी सन फार्मा की ग्‍लोबल स्‍तर पर पकड़ और भी मजबूत हो जाएगी. इस ऐलान के बाद जैसे ही शेयर बाजार खुला, सन फर्मा के शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली।  सन फार्मा ने जिस अमेरिकी कंपनी को खरीदने का फैसला किया है, उसका नाम ऑर्गेनॉन है. यह कोई छोटी डील नहीं है, बल्कि  11.75 अरब डॉलर या करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये की डील है. यह भारतीय फार्मा सेक्‍टर के इतिहा की सबसे बड़ी विदेशी खरीद में से एक मानी जा रही है।  सन फार्मा इस कंपनी की 100 फीसदी हिस्‍सेदारी खरीदेगी, जिसके तहत अमेरिकी कंपनी के शेयर होल्‍डर्स को 14 डॉलर प्रति इक्विटी कैश मिलेगा. यह कीमत ऑर्गेनॉन के शुक्रवार के बंद भाव से करीब 24% प्रीमियम पर है. यानी सन फार्मा कंपनी को बाजार भाव से ज्यादा कीमत देकर खरीद कर रही है।  शेयर में आई धांसू तेजी सन फार्मा के शेयर सोमवार को शानदार तेजी पर कारोबार करते हुए दिखाई दिए. कंपनी के शेयर 4.85% चढ़कर 1,699 रुपये पर पहुंच गए. हालांकि, एक साल, छह महीने और एक महीने के दौरान शेयर ने मामूली निगेटिव रिटर्न दिया है. लेकिन पांच सालों के दौरान इस शेयर में 160 फीसदी की तेजी आई है।  क्‍यों खास मानी जा रही ये डील?  सन फार्मा की ये डील कई स्‍तरों पर खास मानी जा रही है. अभी तक यह जेनेरिक दवाओं के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन इस डील के बाद इसे एक नई ताकत मिलेगी. यह कई और स्‍तर पर अपनी पहचान बना सकता है और कारोबार का विस्‍तार कर सकता है. ग्‍लोबल स्‍तर पर भी इसकी पकड़ मजबूत होने वाली है।  महिला स्‍वास्‍थ्‍य: ऑर्गेनॉन दुनिया की टॉप 3 महिला स्वास्थ्य कंपनियों में गिनी जाती है. इसका एक बड़ा नेटवर्क अब सनफार्मा को मिलेगा।  बायोसिमिलर में एंट्री: सन फार्मा की बायोसिमिलर में मौजूदगी सीमित थी. अब यह डील कंपनी को दुनिया का सातवां सबसे बड़ा बायोसिमिलर प्‍लेयर बन सकता है।  ग्लोबल स्केल बढ़ेगा: दोनों कंपनियों की कुल आमदानी 12.4 अरब डॉलर या करीब 1.16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। 

नर्चर वेल इंडस्ट्रीज बना मल्टीबैगर स्टॉक, 5 साल में 24970% रिटर्न

नई दिल्ली शेयर बाजार में कई ऐसे स्टॉक हैं जिन्होंने लॉन्ग टर्म में निवेशकों को मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। ऐसा ही एक स्टॉक-नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड है। इस स्टॉक की कीमत पांच साल पहले 14 पैसे थी, जो अब 35 रुपये के स्तर पर है। इस पांच साल की अवधि में शेयर ने 24970% से अधिक का रिटर्न दिया है। रकम के हिसाब से इस रिटर्न की बात करें तो अगर किसी निवेशक ने पांच साल पहले एक लाख रुपये निवेश किया था तो अब उसकी रकम लगभग 2.50 करोड़ रुपये हो गई होगी। शेयर का परफॉर्मेंस नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयर की बात करें तो 34.08 रुपये की पिछली क्लोजिंग के मुकाबले करीब ढाई पर्सेंट चढ़कर 34.90 रुपये पर पहुंच गया। ट्रेडिंग के दौरान शेयर 35.69 रुपये पर पहुंच गया। 17 फरवरी 2026 को शेयर 46 रुपये पर था, जो 52 हफ्ते का हाई भी है। सिंतबर 2025 में शेयर 17 रुपये पर था। यह शेयर के 52 हफ्ते का लो है। बता दें कि नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने साल 2024 में स्टॉक स्प्लिट और बोनस इश्यू का ऐलान किया था। स्प्लिट के तहत एक शेयर को 10 टुकड़ों में बांटा गया था तो एक शेयर के बदले एक बोनस शेयर मिलेगा। शेयरहोल्डिंग पैटर्न FY26 की मार्च तिमाही में नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रमोटर की हिस्सेदारी 53.81 प्रतिशत पर स्थिर रही। विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FIIs की हिस्सेदारी साल-दर-साल (YoY) 4.25 प्रतिशत से गिरकर 0.18 प्रतिशत रह गई जबकि घरेलू निवशकों यानी DIIs की हिस्सेदारी 0.07 प्रतिशत पर बनी रही। पब्लिक शेयरहोल्डिंग 41.86 प्रतिशत से बढ़कर 45.94 प्रतिशत हो गई, जो कंपनी में रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी को दिखाता है। हाल ही में नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अपने बोर्ड की बैठक में बड़े बदलाव की घोषणा की। कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) अनिल कुमार ने व्यक्तिगत व्यस्तताओं के कारण अपना इस्तीफा दे दिया है, जो 20 अप्रैल 2026 को कारोबार समाप्त होने के साथ प्रभावी हो गया। उनके स्थान पर बोर्ड ने नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति की सिफारिश पर शीतल सोनी को 21 अप्रैल 2026 से कंपनी की नई CFO नियुक्त कर दिया है। यह जानकारी सेबी (LODR) रेगुलेशन 30 के तहत स्टॉक एक्सचेंज को दी गई है। कैसे रहे तिमाही नतीजे FY26 की दिसंबर तिमाही में परिचालन से राजस्व 1.04 प्रतिशत बढ़कर 290 करोड़ रुपये हो गया और परिचालन मार्जिन आधार पर 11 प्रतिशत पर स्थिर रहा। इसके साथ ही, नेट प्रॉफिट 31 करोड़ रुपये हो गया। EPS (प्रति शेयर आय) में 3.9 प्रतिशत की वृद्धि होकर यह 1.06 रुपये हो गया।

एक्सपर्ट्स की सलाह,IRFC, पॉलीकैब और बजाज फाइनेंस में सोमवार को खरीदारी के संकेत

नई दिल्ली सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवर को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी हलचल हो सकती है। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता बरकरार है। इस माहौल के बीच कुछ शेयर पर निवेशकों की नजर रहेगी। ये शेयर- इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्प यानी आईआरएफसी, पॉलीकैब इंडिया, बजाज फाइनेंस, एसबीआई, कोल इंडिया और ग्रासिम हैं। एक्सपर्ट ने खरीदने की दी सलाह आनंद राठी में टेक्निकल रिसर्च के सीनियर मैनेजर गणेश डोंगरे ने इन तीनों शेयर को सोमवार को खरीदने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्प के शेयर को ₹103-106 पर खरीदा जा सकता है। इस शेयर का टारगेट प्राइस ₹111 और स्टॉप लॉस ₹98 रखने की सलाह दी गई है। इसी तरह, पॉलीकैब इंडिया के शेयर को ₹8040-8070 रेंज पर खरीदने की सलाह दी गई है। शेयर के लिए टारगेट प्राइस ₹8300 और स्टॉप लॉस ₹7900 तय किया है। वहीं, बजाज फाइनेंस की बात करें तो ₹921 पर खरीदने और टारगेट प्राइस ₹965 तय किया है। इस शेयर के लिए स्टॉप लॉस ₹900 तय है। बाजार पर क्या बोले? गणेश डोंगरे ने कहा कि हाल के जियो पॉलिटिक्स के हालात ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। आने वाला सप्ताह बहुत अहम होगा, क्योंकि निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत से जुड़ी अपडेट्स पर नजर रखेंगे। ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे सोच-समझकर दांव लगाएं, रिस्क मैनेजमेंट में अनुशासन बनाए रखें और खबरों से होने वाली उतार-चढ़ाव के प्रति सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि ग्लोबल स्तर पर किसी भी तरह के तनाव या समाधान का बाजार की दिशा पर बड़ा असर पड़ सकता है। Nifty 50 के आउटलुक पर डोंगरे ने कहा कि लगातार तीसरे सप्ताह इस इंडेक्स ने अपनी रिकवरी जारी रखी, जो घरेलू बाजारों में बेहतर होते सेंटिमेंट को दिखाता है। हालांकि, इंडेक्स ने 25,000 के मनोवैज्ञानिक रूप से अहम स्तर के पास कुछ हिचकिचाहट दिखाई। टेक्नीकल नजरिए से Nifty के लिए तुरंत सपोर्ट 23,500–23,800 की रेंज में है जबकि 24,800–25,000 का जोन एक अहम रेजिस्टेंस बैंड बना हुआ है। किसी भी करेक्शन के दौर में 23,000–23,500 का जोन एक मजबूत डिमांड एरिया के तौर पर काम करने की उम्मीद है। एसबीआई, कोल इंडिया और ग्रासिम एक अन्य एक्सपर्ट और चॉइस ब्रोकिंग के कार्यकारी निदेशक सुमीत बगड़िया ने भी तीन शेयरों पर दांव लगाने की सलाह दी है। सुमीत बगड़िया ने SBI, कोल इंडिया और ग्रासिम इंडस्ट्रीज के शेयर खरीदने की सलाह दी। एक्सपर्ट ने SBI के लिए ₹1101 पर खरीदने की सलाह दी है। शेयर के लिए टारगेट ₹1180 और स्टॉप लॉस ₹1048 रखा है। वहीं, कोल इंडिया को ₹456 पर खरीदने की सलाह दी गई है। इस शेयर का टारगेट ₹488 और स्टॉप लॉस ₹440 है। इसके अलावा, ग्रासिम इंडस्ट्रीज के शेयर को ₹2739 पर खरीदने की सलाह है। शेयर का टारगेट ₹2915 और स्टॉप लॉस ₹2626 तय किया गया है।