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भारत में लॉन्च हुआ Range Rover Sport, 242Kmph स्पीड, रेफ्रिजरेटर जैसी अनोखी सुविधाओं के साथ

  नई दिल्ली Land Rover (लैंड रोवर) ने भारत में असेंबल हुई रेंज रोवर स्पोर्ट ऑटोबायोग्राफी (Range Rover Sport Autobiography) को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस कार को भारतीय बाजार में लॉन्च किया है. ये पहला मौका है जब लोकली प्रोड्यूस रेंज रोवर स्पोर्ट को ऑटोबायोग्राफी ट्रिम में ऑफर किया गया है।  कार की बुकिंग शुरू हो गई है. ऑटोबायोग्राफी ट्रिम में स्टैंडर्ड वेरिएंट के मुकाबले कई सारे अपग्रेड्स देखने को मिलते हैं. इस कार में 22 इंच एक एलॉय व्हील्स दिए गए हैं. आइए जानते हैं इस कार के कीमत और क्या कुछ खास मिलेगा।  कितनी है कीमत?  लैंड रोवर ने भारत में असेंबल हुई रेंज रोवर स्पोर्ट ऑटोबायोग्राफी ट्रिम को 1.60 करोड़ रुपये की एक्स शोरूम की कीमत पर लॉन्च किया है. इस कार की बुकिंग शुरू हो चुकी है. ऑटोबायोग्राफी ट्रिम के लोकल प्रोडक्शन से कार के टॉप वेरिएंट की कीमत मेनस्ट्रीम डायनामिक एचएसई के क्लोज आ गई है।  डिजाइन की बात करें तो इस वेरिएंट में स्टैंडर्ड वेरिएंट के मुकाबले कई सारे अपग्रेड्स मिलते हैं. कार में 22 इंच के फ्रोज्ड एलॉय व्हील्स मिलते हैं, जो स्टेन ब्लैक फिनिश के साथ आते हैं. इसमें रेड ब्रेक कैलिपर्स और ऑटोबायोग्राफी की बैजिंग मिलती है. एसयूवी में फ्लश डोर हैंडल्स मिलते हैं।  इसके अलावा गेस्चर कंट्रोल टेलगेट, पावर फोल्डिंग मिरर्स मिलते हैं, जो मेमोरी फंक्शन के साथ आते हैं. कार कई कलर ऑप्शन में मिलेगी. ऑटोबायोग्राफी ट्रिम में हायर लेवल इंटीरियर और एक्सटीरियर डिटेलिंग मिलती हैं. कार में लेदर अपहोल्स्ट्री, एम्बिएंट लाइटिंग, वेंटिलेटेड सीट्स, फ्रंट सेंटर कंसोल रेफ्रिजरेटर और कई दूसरे फीचर्स मिलेंगे. फ्रंट सीट को 22 तरीके से एडजस्ट किया जा सकता है।  इंजन और पावर  चूंकि अब इस कार को भारत में असेंबल किया जा रहा है, इसलिए कई पावरट्रेन का विकल्प मिल जाता है. इसमें 3.0 लीटर का पेट्रोल और डीजल वर्जन मिलता है. कार में 4.4 लीटर का वी8 इंजन भी मिलेगा. बात करें 3.0 लीटर वाले इंजन की तो इसमें 8 स्पीड ऑटोमेटिक गियरबॉक्स मिलता है।  डी350 डीजल इंजन 351 एचपी की पावर और 700 एनएम का टॉर्क ऑफर करता है. कार 0 से 100 Kmph की स्पीड सिर्फ 5.8 सेकंड में पकड़ लेती है. वहीं कार की मैक्सिमम स्पीड 234 किलोमीटर प्रति घंटे की है. जबकि पी400 पेट्रोल इंजन 400 एचपी की पावर और 550 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है।  ये वेरिएंट सिर्फ 5.5 सेकंड में 0 से 100 Kmph की स्पीड पकड़ लेती है. कार की टॉप स्पीड 242 किलोमीटर प्रति आवर की है. 4.4 लीटर वाला वी8 इंजन इंपोर्टेड वर्जन में मिलेगा। 

पेट्रोल-डीजल के बाद खाने और नहाने की चीज़ों के बढ़े दाम, मुसीबत कहां से आ रही है?

नई दिल्ली  ईरान युद्ध की वजह से भारत में तेल का एक और बड़ा संकट खड़ा हो सकता है. पेट्रोल-डीज़ल नहीं. वो तो अलग मसला है. एक और मसला जो खड़ा हो रहा है वो है पाम ऑयल का. दुनिया में सबसे ज़्यादा पाम ऑयल भारत इंपोर्ट करता है. भारत हर साल लगभग 95 लाख टन पाम ऑयल इस्तेमाल करता है. और भारत में पाम ऑयल पैदा होता 4 लाख टन से भी कम. यानी सारा बाहर से ही आता है. क्योंकि पाम के पेड़ जिनसे पाम ऑयल बनता है उनको लगातार बारिश चाहिए होती है, बहुत पानी चाहिए होता है. तो ये दक्षिण पूर्व एशिया में बहुत ज़्यादा होते हैं पाम के पेड़. उनसे तेल निकाल कर पाम ऑयल बनाया जाता है. और दुनिया भर में भेजा जाता है. भारत भी वहीं से लेता है. ज़्यादातर इंडोनेशिया से और मलेशिया से. हम कोई 90 लाख टन पाम ऑयल वहां से मंगाते हैं।   भारत में कुल खाने का तेल जो इस्तेमाल होता है उसका 40% ये पाम ऑयल ही है. क्योंकि एक तो ये बाक़ी खाने के तेलों से सस्ता पड़ता है और लंबे टाइम तक ख़राब नहीं होता. तो कई परिवारों में सस्ते पाम ऑयल का इस्तेमाल होता है खाना पकाने के लिए।  पाम ऑयल से देश में क्या-क्या बनता है? अनुमान है कि देश के आधे परिवारों में खाना पाम ऑयल से बनता है. या ऐसे तेलों से बनता है जिनमें पाम ऑयल मिलाया हुआ होता है. औऱ ये जो चिप्स, नमकीन, भुजिया, समोसे, वड़े, फ्रेंच फ्राइज़, डोनट वगैरह जो डीप फ़्राई होते हैं बाज़ार में ये सब कंपनियां पाम ऑयल ही इस्तेमाल करती हैं. क्योंकि ये गर्म होने पर स्थिर भी रहता है और चीज़ें लंबे समय तक खस्ता रहती हैं।      बिस्किट, कुकीज़, केक, पेस्ट्री, बाक़ी बेकरी की चीज़ें, ये सब भी पाम ऑयल से बनती हैं. इंस्टेंट नूडल्स, चॉकलेट, आइसक्रीम,सब पाम ऑयल से बनाई जा रही हैं आजकल.     सारा रेडी-टू-ईट खाना, सॉस, ग्रेवी, ब्रेड, पीत्ज़ा, इन सब में भी पाम ऑयल ही इस्तेमाल किया जा रहा है. कुल मिलाकर ये समझ लीजिये कि खाद्य उद्योग में 70% से ज्यादा पाम ऑयल जाता है.     होटेल हों, रेस्ट्रॉन्ट हों या छोटी खाने-पीने की दुकानें, ढाबे, स्ट्रीट फ़ूड वाले, सब लोग फ्राई करने के लिए, तड़का लगाने के लिए बड़े पैमाने पर पाम ऑयल का ही इस्तेमाल करते हैं. और त्योहारों में तो मिठाइयों और तले हुए खाने की मांग बढ़ने से पाम ऑयल की खपत बहुत बढ़ जाती है।      खाने की चीज़ों की ही बात नहीं है. साबुन, शैम्पू, बॉडी वॉश, इन सब में जो झाग बनता है वो झाग बनाने का काम इनमें मिला हुआ पाम ऑयल करता है।      क्रीम में पाम ऑयल है, लोशन में पाम ऑयल है, मॉइश्चराइजर में पाम ऑयल है, आपकी लिपस्टिक में पाम ऑयल है. टूथपेस्ट तक में पाम ऑयल होता है. और कपड़े धोने के साबुन पाउडर भी पाम ऑयल से बनते हैं. पेंट में भी पाम ऑयल डलता है।  मतलब पाम ऑयल भारत की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हर जगह घुसा हुआ है. सुबह की पूड़ी से लेकर शाम के बिस्किट, साबुन और शैम्पू तक. खाने की चीजों में इसका 70-90% इस्तेमाल होता है, बाकी साबुन-कॉस्मेटिक्स वगैरह और दूसरी चीज़ों में।  भारत अपनी पाम ऑयल जरूरत का बड़ा हिस्सा इंडोनेशिया से मंगाता है।  पाम ऑयल का इतना इस्तेमाल क्यों? मुख्य कारण ये हैं कि ये सस्ता होता है. पाम ऑयल समझ लो अगर थोक में 125 रुपये लीटर होता है तो बाक़ी तेल 150-175 रुपये लीटर होते हैं. दाम ऊपर नीचे होते रहते हैं लेकिन मुख्य वजह पाम ऑयल की इस्तेमाल की यही है कि ये सस्ता पड़ता है और बड़ी मात्रा में मिल जाता है और भारत में इतना खाने के तेल का उत्पादन होता नहीं तो हमें तो ये बाहर से ही मंगाना पड़ता है।  साबुन, शैम्पू, बिस्किट और चिप्स जैसे प्रोडक्ट्स में पाम ऑयल का भारी इस्तेमाल होता है. सप्लाई घटने से अब इन सबकी कीमतें आसमान छू सकती हैं।  सवाल ये कि ईरान युद्ध का इससे क्या लेना-देना? ये अगर दक्षिण-पूर्व एशिया से आ रहा है, यानी इंडोनेशिया, मलेशिया वगैरह से आ रहा है, तो उधर से आने पर स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मूज़ तो पड़ता नहीं. तो इसमें कौनसी दिक़्क़त आ गई कि अब इसका भी संकट आने वाला है? तो वो दिक़्क़त ये है कि इंडोनेशिया ने बोल दिया कि वो अब इसको बाहर बेचने पर कंट्रोल लगाएगा. ख़ुद ही इस्तेमाल करेगा।      इंडोनेशिया ये कर रहा है तो बाक़ी देशों से भी ऐसे ही संकेत आ रहे हैं कि वो सब भी अब पाम ऑयल ज़्यादा बाहर भेजने पर कंट्रोल लगाने वाले हैं. लेकिन वो क्यों? क्या करेंगे वो पाम ऑयल का? वो इसका डीज़ल बनाएंगे. जी. पाम ऑयल से बायो-डीज़ल भी बनाया जाता है. और इंडोनेशिया में तो डीज़ल में इसको मिलाया भी जाता है. 40% तक पाम ऑयल वाला डीज़ल मिलाते हैं वो।      मलेशिया में भी बनाते हैं पाम ऑयल से डीज़ल. लेकिन अभी तक क्या था कि इससे डीज़ल बनाने से सस्ता ओरिजिनल डीज़ल पड़ रहा था. तो वो सोचते थे कि डीज़ल तो खाड़ी देशों से मंगा लो, और इसको खाने के तेल के रूप में एक्सपोर्ट कर दो. बारिश बेहिसाब होती ही है वहां पर तो खेती बढ़िया हो रही थी. लेकिन ईरान युद्ध ने सारी तस्वीर ही बदल दी है।      कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं. और सबसे बड़ी बात अनिश्चितता बढ़ गई है. कि आगे क्या होगा, कब तक युद्ध चलेगा और युद्ध बंद भी हो गया तब भी हॉर्मूज़ पर टोल की बातें हो रही है, तो पेट्रोल-डीज़ल का मामला तो बहुत ऊपर-नीचे होता रहेगा ये दिख ही रहा है. तो इन देशों ने सोचा कि अपना तेल ख़ुद बनाने का हमारे पास तो रास्ता है ही. हम ये खाड़ी देशों के सहारे क्यों बैठे रहें?     इंडोनेशिया ने ऐलान कर दिया है कि वो जुलाई से अपने देश में डीज़ल में 50% पाम ऑयल मिलाकर बायोडीज़ल बनाने जा रहे हैं. मतलब, पहले वो डीजल में 40% पाम ऑयल मिलाता था, उसको कहते हैं B40, अब इसे बढ़ाकर … Read more

बिखरे बाजार और 2 बड़े कारण: सेंसेक्स में 1000 अंक की गिरावट, भारी नुकसान

मुंबई  24 अप्रैल का दिन भारतीय शेयर बाजारों के लिए ब्लैक फ्राइडे साबित हुआ। लगातार तीसरे दिन गिरावट झेलते हुए बाजार लाल निशान में बंद हुआ। सेंसेक्स लगभग 1000 अंकों की गिरावट के साथ 76,664.21 पर और निफ्टी 275.10 अंकों की गिरावट के साथ 23,897.95 पर बंद हुआ। निफ्टी पर सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में हैं। सबसे ज्यादा 5 प्रतिशत निफ्टी आईटी टूटा है। फार्मा इंडेक्स लगभग 2 प्रतिशत और हेल्थकेयर व रियल्टी इंडेक्स 1 प्रतिशत से ज्यादा नीचे आए हैं। बाजार की गिरावट में निवेशकों के 4.90 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। गुरुवार, 23 अप्रैल को मार्केट बंद होने पर सेंसेक्स पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,66,39,864.88 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को बाजार बंद होने पर यह घटकर 4,61,49,758.18 करोड़ रुपये पर आ गया। यानि कि 4,90,106.7 करोड़ रुपये की कमी। शुक्रवार को सेंसेक्स लाल निशान में 77,483.80 पर खुला। फिर पिछली क्लोजिंग से 1260.13 अंकों तक लुढ़ककर 76,403.87 के लो तक गया। इसी तरह निफ्टी भी गिरावट के साथ 24,100.55 पर खुला और फिर पिछली क्लोजिंग से लगभग 359.4 अंक गिरकर 23,813.65 के लो तक गया। क्यों फिसल रहा है बाजार अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर को लेकर बातचीत रुकने से कच्चा तेल एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 105.97 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से माहौल और अनिश्चित हो गया है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार में लगातार सेलर बने हुए हैं। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को उन्होंने 3,254.71 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। रुपये में जारी गिरावट भी एक वजह है। शुक्रवार को घरेलू मुद्रा में लगातार पांचवें सत्र में गिरावट रही।रुपया 22 पैसे गिरकर 94.23 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण घरेलू मुद्रा पर दबाव कायम है। वैश्विक बाजारों की कमजोरी भी भारतीय बाजारों को प्रभावित कर रही है। अमेरिकी बाजार गुरुवार को लाल निशान में बंद हुए। भारत के अलावा कई अन्य एशियाई बाजारों में भी शुक्रवार को गिरावट है। जकार्ता कंपोजिट 3 प्रतिशत गिरा है। शंघाई कंपोजिट, सेट कंपोजिट में भी गिरावट है। हालांकि निक्केई, हेंग सेंग और ताइवान वेटेड हरे निशान में हैं।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25-28 रुपए तक बढ़ोतरी का अनुमान, आम जनता को होगा बड़ा असर

मुंबई   पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर बड़ी अपडेट सामने आ रही है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद ईंधन की कीमतों में बड़ा इजाफा हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल और डीजल के दाम 25 से 28 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ाए जा सकते हैं। यह अनुमान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के आधार पर लगाया गया है, जो फिलहाल करीब 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। तमिलनाडु में आज सभी सीटों के लिए मतदान हो रहा है जबकि पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 सीटों के लिए वोटिंग हो रही है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने वाली रिपोर्ट्स को खारिज किया केंद्र सरकार ने गुरुवार को उन रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि वर्तमान में चल रहे विधानसभा चुनावों के बाद, देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25-28 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसे फेक न्यूज बताते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की बात कही जा रही है। यह स्पष्ट किया जाता है कि सरकार के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।" इस तरह की खबरें नागरिकों में भय और दहशत पैदा करने के उद्देश्य से फैलाई जाती हैं और ये शरारतपूर्ण और भ्रामक होती हैं। पोस्ट में अंत में लिखा, "भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां पिछले चार वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई है। भारत सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भारतीय नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाली तीव्र वृद्धि से बचाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं।" इससे पहले दैनिक प्रेस ब्रीफिंग में बुधवार को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि देश में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और लोगों से अपील की है कि पेट्रोल-डीजल या गैस की जल्दबादी में खरीदारी न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। सरकार के मुताबिक, देश भर में घरेलू एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी की 100 प्रतिशत सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है। 23 मार्च 2026 से अब तक 20 लाख से ज्यादा 5 किलो वाले छोटे गैस सिलेंडर (एफटीएल) बेचे जा चुके हैं, जो खासकर प्रवासी मजदूरों के लिए राहत का काम कर रहे हैं। सरकार ने इन सिलेंडरों की सप्लाई भी दोगुनी कर दी है ताकि जरूरतमंदों तक आसानी से गैस पहुंच सके। क्यों बढ़ सकते हैं दाम? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं, जबकि भारत में उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम कीमत पर ईंधन मिल रहा है। इस अंतर का बोझ तेल कंपनियां उठा रही हैं। ऐसे में नुकसान की भरपाई के लिए कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। अगर अनुमान के मुताबिक बढ़ोतरी होती है, तो पेट्रोल की कीमत कई शहरों में 120 रुपए प्रति लीटर के करीब पहुंच सकती है। इसका असर ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। कंपनियों पर बढ़ता दबाव रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने करीब 27,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। यह नुकसान कच्चे तेल की ऊंची कीमत और कम रिटेल कीमत के बीच के अंतर की वजह से हो रहा है। लंबे समय तक इस स्थिति को बनाए रखना कंपनियों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। सरकार के राहत कदम सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती और विंडफॉल टैक्स जैसे कदम उठाए हैं। हालांकि, ये उपाय आंशिक राहत ही दे पा रहे हैं और मूल समस्या अब भी बनी हुई है। अभी क्या है भाव? फिलहाल राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपए प्रति लीटर पर मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो ब्रेंट क्रूड करीब 102.4 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है, जबकि WTI क्रूड लगभग 93.56 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर है।

शेयर बाजार में ₹3 लाख करोड़ की गिरावट, अंत तक नहीं संभला, जानिए इसके कारण

मुंबई  भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को दिनभर गिरावट जारी रही. खुलने के साथ ही क्रैश हुआ शेयर बाजार (Stock Market Crash), अंत तक संभल नहीं सकता. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 852 अंक फिसलकर बंद हुआ, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी इंडेक्स ने 205 अंक का गोता लगाकर क्लोजिंग की. बाजार के भूचाल में Tata की ट्रेंट लिमिटेड के शेयर समेत Infosys, M&M से लेकर Tech Mahindra, HDFC Bank तक तेज गिरावट लेकर बंद हुए।  शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के बीच मार्केट इन्वेस्टर्स को तगड़ा घाटा हुआ है और उनके करीब 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूब गए. शेयर मार्केट में ये लगातार दूसरा दिन है, जबकि सेंसेक्स-निफ्टी बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए।  सेंसेक्स-निफ्टी दिनभर टूटते रहे   BSE Sensex ने गुरुवार को शेयर बाजार में ट्रेडिंग स्टार्ट होने पर अपने पिछले बंद 78,516 की तुलना में फिसलकर 77,983 के लेवल पर शुरुआत की और इसके बाद ये गिरावट लगातार बढ़ती चली गई. बाजार में कारोबार खत्म होने पर 30 शेयरों वाला ये इंडेक्स 852.49 अंक फिसलकर 77,664 के लेवल पर क्लोज हुआ।  सेंसेक्स की तरह ही NSE Nifty भी गिरावट के साथ रेड जोन में ओपन होने के बाद अंत तक लाल निशान पर ही कारोबार करता रहा. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने बुधवार के बंद 24,378 की तुलना में टूटकर 24,202 के स्तर पर खुला था और इसने 205 अंक की गिरावट के साथ 24,173.05 पर क्लोजिंग की।  निवेशकों को हो गया इतना घाटा  सेंसेक्स-निफ्टी के फिसलने के बीच तमाम दिग्गज कंपनियों के शेयर बुरी तरह बिखरे हुए नजर आए. इस गिरावट के चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का मार्केट कैप (BSE Mcap) गिरकर 4,66,35,326 करोड़ रुपये पर आ गया, जो बीते कारोबारी दिन क्लोजिंग के समय 4,69,36,824 दर्ज किया गया था. इस हिसाब से देखें, तो शेयर मार्केट में निवेश करने वालों को एक ही दिन में 3,01,498 करोड़ रुपये का झटका लगा है।  सबसे ज्यादा बिखरे ये 10 शेयर  Share Market में मची भगदड़ के बीच सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयरों की बात करें, तो बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Trent Share (4.21%), M&M Share (3.30%), Bajaj Finserv Share (2.93%), Tech Mahindra Share (2.90%), Infosys Share (2.04%), HDFC Bank Share (1.93%) की गिरावट लेकर बंद हुए. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल Ashok Leyland Share (4.61%), Dixon Share (3.65%) और MFSL Share (2.35%) फिसलकर बंद हुआ. स्मॉलकैप में सबसे ज्यादा IIFL Share (10.12%) टूटकर बंद हुआ।  शेयर मार्केट में गिरावट के बड़े कारण स्टॉक मार्केट में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे के कारणों की बात करें, तो अमेरिका-ईरान में होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी तनातनी के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से उछाल आना शुरू हो गया है, जिससे महंगाई का जोखिम गहरा गया है. गुरुवार को Brent Crude Oil Price 103 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया।  इसके अलावा विदेशी बाजारों से मिले निगेटिव सिग्नल ने भी भारतीय शेयर मार्केट के सेंटीमेंट को खराब करने में बड़ी भूमिका निभाई. शुरुआत से ही Japan Nikkei, Honkong HangSeng, South Korea KOSPI इंडेक्स समेत गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) रेड जोन में कारोबार करते दिखे थे। 

मजबूत डॉलर के असर से सोने और चांदी की कीमतों में 1.6 प्रतिशत तक गिरावट

मुंबई सोने और चांदी की कीमतों में मजबूत डॉलर के चलते गुरुवार को दबाव देखा जा रहा है और दोनों कीमती धातुओं में करीब 1.6 प्रतिशत तक की गिरावट है।मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सुबह सोने का 05 जून 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 9:56 पर 0.36 प्रतिशत या 546 रुपए की कमजोरी के साथ 1,52,111 रुपए पर था।अब तक के कारोबार में सोने ने 1,51,719 रुपए का न्यूनतम स्तर और 1,52,200 रुपए उच्चतम स्तर बनाया है। चांदी का 05 मई, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 1.61 प्रतिशत की गिरावट या 3,987 रुपए की कमजोरी के साथ 2,44,377 रुपए पर था।अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,42,220 रुपए का न्यूनतम स्तर और 2,44,730 रुपए का उच्चतम स्तर बनाया है।अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमत में कमजोरी कमजोरी देखी जा रही है। कॉमेक्स पर गोल्ड की कीमत 0.68 प्रतिशत कम होकर 4,720 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 2.43 प्रतिशत कम होकर 76 डॉलर प्रति औंस हो गया है। सोने और चांदी में कमजोरी की वजह मजबूत डॉलर इंडेक्स को माना जा रहा है, जो कि 0.11 प्रतिशत बढ़कर 98.50 के ऊपर कारोबार कर रहा था।आमतौर पर जब भी डॉलर इंडेक्स में मजबूती देखी जाती है तो सोने और चांदी में दबाव देखने को मिलता है।डॉलर इंडेक्स के तेजी का कारण कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी होना है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 1.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 103 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.36 प्रतिशत की मजबूती के साथ 94 डॉलर प्रति बैरल पर है। डॉलर इंडेक्स दुनिया की छह बड़ी मुद्रओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की स्थिति को दिखाता है, जिसमें यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग,कैनेडियन डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक शामिल हैं।

सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट का कारण: US से जापान तक आर्थिक भूचाल, क्रूड $100 तक पहुंचा

मुंबई  जिसका डर था वही हुआ, भारतीय शेयर बाजार खुलते ही क्रैश (Stock Market Crash) हो गया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद के मुकाबले ओपनिंग के साथ ही 800 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स 200 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया. होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका-ईरान में टेंशन के साथ ही क्रूड ऑयल की कीमतों में आए उछाल ने एक बार फिर बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ दिया है. विदेशों से भी सेंसेक्स-निफ्टी के लिए रेड सिग्नल मिल रहे थे।  सेंसेक्स ने लगाया तगड़ा गोता  BSE Sensex ने गुरुवार को शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत होने के साथ अपने पिछले बंद 78,516 की तुलना में फिसलकर 77,983 के लेवल पर शुरुआत की. इसके कुछ ही मिनटों में इंडेक्स की गिरावट तेज होती चली गई और सेंसेक्स 823 अंक फिसलकर 77,693 पर कारोबार करता नजर आया।  न सिर्फ सेंसेक्स, बल्कि NSE Nifty भी ऐसी ही चाल के साथ आगे बढ़ता दिखा. 50 शेयरों वाला ये इंडेक्स अपने पिछले बंद 24,378 की तुलना में गिरावट लेकर 24,202 के स्तर पर खुला और फिर फिसलते हुए 24,134 के लेवल पर आ गया।  विदेशों से मिल रहे थे खराब सिग्नल  कमजोर ग्लोबल संकेतों के चलते पहले से ही शेयर बाजार में गिरावट की आशंका जताई जा रही थी. बीते कारोबारी दिन जहां अमेरिका शेयर मार्केट रेड जोन में बंद हुए थे, तो वहीं गुरुवार को खुलने के साथ ही एशियाई बाजार बिखरे हुए नजर आए थे।  जापान का निक्केई इंडेक्स खुलने के साथ ही फिसल गया और खबर लिखे जाने तक 650 अंक की गिरावट लेकर 58,952 पर ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स करीब 300 अंक की गिरावट लेकर 25,889 पर कारोबार करता नजर आ रहा था. अन्य एशियाई शेयर बाजारों में साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 1 फीसदी फिसला था।  Crude Price से सहमा बाजार  शेयर मार्केट में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे का एक बड़ा कारण अमेरिका-ईरान तनाव के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक आया बड़ा उछाल भी है, जिसने न सिर्फ भारत, बल्कि दुनियाभर के शेयर बाजारों का सेंटीमेंट खराब किया है।  दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बार फिर से कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार निकल गई है. Brent Crude Price करीब 8 फीसदी उछलकर 104 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था।  सबसे ज्यादा बिखरे ये शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 1095 शेयरों की शुरुआत गिरावट के साथ रेड जोन में हुई थी और निफ्टी पर इंटरग्लोब एविएशन, SBI लाइफ इंश्योरेंस, एशियन पेंट्स, M&M के शेयर तगड़ी गिरावट में नजर आए थे।  खबर लिखे जाने तक Tech Mahindra Share (2.60%), M&M Share (2.20%), Eternal Share (2.15%) फिसलकर ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल Ashok Leyland Share (3.10%), Dixon Tech Share (2%) की गिरावट में नजर आया।  US से जापान तक भूचाल विदेशों से मिल रहे हैं. दरअसल, अमेरिका से लेकर जापान तक दुनियाभर के शेयर बाजारों में भूचाल देखने को मिल रहा है. US Stock Market बुधवार को रेड जोन में बंद हुए, तो एशियाई बाजारों में से अधिकतर में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है।  Japan Nikkei 600 अंक से ज्यादा, जबकि Hongkong HangSeng करीब 300 अंक टूटा दिखाई दे रहा है. इस बीत भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख संकेतक माना जाने वाला गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) भी गिरावट में ट्रेड कर रहा है, जो सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट का संकेत दे रहा है।  गौरतलब है कि बीते कारोबारी दिन बुधवार को शेयर बाजार में दिनभर गिरावट देखने को मिली थी. बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद 79,273 की तुलना में 756 अंकों की गिरावट लेकर 78,516 पर क्लोज हुआ था, तो वहीं एनएसई का निफ्टी भी दिनभर टूटने के बाद अंत में 198 अंक फिसलकर 24,378 पर बंद हुआ था।  Gift Nifty दे रहा ये संकेत  जहां एशियाई शेयर बाजार भारतीय शेयर बाजार में भगदड़ के संकेत दे रहे हैं, तो वहीं गिफ्ट निफ्टी से भी रेड सिग्नल मिल रहे हैं. दरअसल, Gift Nifty ओपनिंग के साथ ही गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है. खबर लिखे जाने तक भारतीय शेयर मार्केट के लिए संकेतक माना जाने वाला गिफ्ट निफ्टी 170 अंक की गिरावट में कारोबार कर रहा था।  क्रूड की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन  अमेरिका और ईरान युद्ध में भले ही सीजफायर हो गया हो, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों में अभी भी टेंशन बरकरार है. ईरान होर्मुज खोलने को तैयार नहीं, तो अमेरिका की ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी है. इस टेंशन के चलते कच्चे तेल की कीमतों में फिर से उछाल देखने को मिला है और Brent Crude Price 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है. इससे शेयर बाजारों में दबाव बढ़ा है। 

टेस्ला की भारत में असफलता: 10% टारगेट भी पूरा नहीं हुआ, क्या 6-सीटर से बदल पाएगा हालात?

मुंबई  दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार कंपनी भारत आई, धमाका करने की कोशिश की, लेकिन हकीकत की जमीन पर उसे तगड़ा झटका लगता है. जी हां, हम बात कर रहे हैं एलन मस्क की कंपनी टेस्ला की. आज 22 अप्रैल 2026 को टेस्ला ने अपनी नई Model Y L (6-सीटर, लॉन्ग व्हीलबेस) को भारत के बाजार में उतारा है, जिसकी कीमत 62 लाख रुपये तय की गई है. यह सिर्फ एक नई लॉन्चिंग नहीं है, बल्कि एक तरह का 'डैमेज कंट्रोल' है, क्योंकि भारत में टेस्ला का अब तक का सफर काफी संघर्ष भरा और उम्मीद से कहीं ज्यादा फीका रहा है।   टेस्ला के भारत में संघर्ष की सबसे बड़ी वजह इसकी आसमान छूती कीमतें रही हैं. भारत में बाहर से आने वाली गाड़ियों पर सरकार 70% से 110% तक का भारी-भरकम इम्पोर्ट टैरिफ लगाती है. इसका नतीजा यह हुआ कि Model Y की कीमत 60 लाख से 68 लाख रुपये के बीच पहुंच गई. इतनी महंगी होने के कारण यह आम आदमी की पहुंच से दूर होकर Mercedes EQB, BMW iX1 और Volvo EC40 जैसी लग्जरी गाड़ियों की कैटेगरी में खड़ी हो गई. भारत जैसे देश में, जहां लोग गाड़ी खरीदने से पहले उसकी कीमत और वैल्यू पर सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं, टेस्ला कभी भी 'मास मार्केट' को आकर्षित नहीं कर पाई।  आंकड़ों की बात करें तो टेस्ला का प्रदर्शन काफी बुरा रहा है. साल 2025 में कंपनी ने पूरे साल के दौरान सिर्फ 227 गाड़ियां ही बेचीं, जबकि उनका लक्ष्य कम से कम 2,500 यूनिट्स का था. स्थिति इतनी खराब हो गई कि कंपनी को अपने स्टॉक को निकालने के लिए 2 लाख रुपये तक का डिस्काउंट देना पड़ा. यह दिखाता है कि सिर्फ ब्रांड नाम के भरोसे भारतीय बाजार को जीतना इतना आसान नहीं है, खासकर तब जब ग्राहक को हर कदम पर पैसे की कीमत वसूलनी हो।  कीमत के अलावा चार्जिंग की समस्या ने भी टेस्ला की राह मुश्किल की है. भारत में फिलहाल केवल 25,000 चार्जिंग स्टेशन हैं, जो जरूरत के हिसाब से बहुत कम हैं. कई बार तो ऐसा होता है कि जो स्टेशन मैप पर दिखते हैं, वे असल में खराब मिलते हैं. टेस्ला की सबसे बड़ी ताकत उसका 'सुपरचार्जर नेटवर्क' माना जाता है, जिसने अमेरिका और यूरोप में धूम मचा रखी है, लेकिन भारत में यह नेटवर्क अभी नाममात्र का ही है. बिना मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के कोई भी EV यूजर लंबी दूरी के सफर पर निकलने से कतराता है।  भारतीय बाजार में टाटा मोटर्स जैसी घरेलू कंपनियों का दबदबा भी टेस्ला के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. टाटा की इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में करीब 60% हिस्सेदारी है, जिसके बाद महिंद्रा और JSW MG मोटर्स का नंबर आता है. ये कंपनियां भारतीय ग्राहकों की नब्ज पहचानती हैं. टाटा नेक्सन EV और महिंद्रा की नई गाड़ियां टेस्ला के मुकाबले बहुत सस्ती हैं और भारतीय परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं. ऐसे में टेस्ला के लिए इन दिग्गजों के बीच अपनी जगह बनाना लोहे के चने चबाने जैसा रहा है।  एक और कड़वा सच यह है कि भारत में लग्जरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों का बाजार बहुत ही छोटा है. 16.5 लाख रुपये यानी करीब 20,000 डॉलर से ऊपर की गाड़ियों की कुल बिक्री में हिस्सेदारी सिर्फ 6.6% है. इस छोटे से हिस्से में भी मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, किआ और ऑडी जैसे पुराने और जमे-जमाए खिलाड़ी पहले से मौजूद हैं. टेस्ला को न सिर्फ इन ब्रांड्स से लड़ना पड़ रहा है, बल्कि भारतीय सड़कों की चुनौतियों से भी जूझना पड़ रहा है. टेस्ला की गाड़ियों का ग्राउंड क्लीयरेंस कम है, जो भारत के बड़े स्पीड ब्रेकर्स और गड्ढों के लिए सही नहीं बैठता. इसे ठीक करने के लिए गाड़ी के डिजाइन में बड़े बदलाव की जरूरत है, जिसमें काफी खर्च आता है।  सर्विस नेटवर्क के मामले में भी टेस्ला काफी पीछे छूट गई है. टेस्ला के शोरूम और सर्विस सेंटर सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित हैं, जबकि टाटा और महिंद्रा का नेटवर्क गांव-कस्बों तक फैला है. अगर किसी छोटे शहर के ग्राहक को गाड़ी में कोई दिक्कत आए, तो उसके पास कोई आसान रास्ता नहीं होता. इसके अलावा एलन मस्क की अपनी वैश्विक छवि और उनकी राजनीतिक गतिविधियों का असर भी कहीं न कहीं कंपनी की सेल्स पर पड़ा है, जिसे पूरी दुनिया में महसूस किया गया है।  अब सवाल यह है कि आगे क्या होगा? नई 6-सीटर Model Y L के जरिए टेस्ला भारत के उस प्रीमियम सेगमेंट को लुभाना चाहती है जो बड़ी और आरामदायक SUVs पसंद करता है. यह एक अच्छी कोशिश तो है, लेकिन जानकारों का मानना है कि जब तक टेस्ला भारत में अपनी फैक्ट्री नहीं लगाती और यहीं पर गाड़ियां बनाना शुरू नहीं करती, तब तक ऊंची कीमतों का यह सिलसिला नहीं थमेगा. लोकल मैन्युफैक्चरिंग ही वो एकमात्र रास्ता है जिससे टेस्ला भारतीय बाजार में लंबी रेस का घोड़ा बन सकती है।   

KTM ने लॉन्च किया 390 Duke और 390 Adventure का 350cc वेरिएंट, कीमत जानें

मुंबई   इस महीने की शुरुआत में प्रीमियम मोटरसाइकिल निर्माता कंपनी Triumph Motorcycle ने कम क्षमता वाली 400 रेंज के लॉन्च के बाद, अब KTM ने अपनी 390 Duke और 390 Adventure लाइन-अप का विस्तार करते हुए नए 350cc वेरिएंट बाजार में उतारे हैं, जिनका मकसद शुरुआती कीमत को कम करना है. हालांकि, Triumph के छोटे मॉडलों के विपरीत KTM के ये नए वेरिएंट मौजूदा 399cc वर्जन के साथ ही बेचे जाएंगे।  नई 390 Duke और 390 Adventure के इंजन इसके इंजन की बात करें तो नया 349.32cc इंजन 8,600rpm पर 41.5hp की पावर और 7,000rpm पर 33.5Nm का टॉर्क जनरेट करता है, यह इंजन 399cc इंजन के मुकाबले 4.5hp का पावर और 5.5Nm कम टॉर्क प्रदान करता है. कंपनी का कहना है कि व्हीलबेस, ग्राउंड क्लीयरेंस, टेक्नोलॉजी (TFT कंसोल सहित) और राइडिंग एर्गोनॉमिक्स जैसे मुख्य पहलू पहले जैसे ही रहेंगे।  खास बात यह है कि मौजूदा सभी 399cc वेरिएंट, नए मॉडल्स के साथ-साथ आने वाले समय तक उपलब्ध रहेंगे. इन्हें अलग दिखाने के लिए इनके नामों में बदलाव किया गया है. ध्यान देने वाली बात यह है कि अब 390 Duke को 390 Duke R के नाम से बेचा जाएगा, जबकि 390 Adventure के नाम के साथ 'S' जोड़ा गया है।  कीमत की बात करें तो नए 350cc KTM 390 Duke की कीमत 2.77 लाख रुपये रखी गई है, जो इसे 390 Duke R से 62,000 रुपये सस्ता बनाती है. वहीं 390 Adventure की कीमत में भी ऐसा ही अंतर देखने को मिलता है।  जहां इसके नए 350cc इंजन वाले वर्जन की कीमत 2.81 लाख रुपये रखी गई है, जोकि 399cc वाले सबसे सस्ते वेरिएंट, 390 Adventure X से लगभग 62,000 रुपये कम है. जब इसकी तुलना ज़्यादा बेहतर स्पेसिफिकेशन वाले 390 Adventure S और R वेरिएंट से की जाती है, तो यह अंतर और भी ज़्यादा नजर आता है। 

चांदी के दाम में 4500 रुपये की बढ़ोतरी, सोने की कीमत भी 2000 रुपये से अधिक बढ़ी

मुंबई  भारतीय बाजार में सोने-चांदी के भाव में जोरदार उछाल आया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के भाव ₹2,000 (1.3%) से अधिक चढ़कर ₹1,53,699 प्रति 10 ग्राम हो गए। वहीं, चांदी के रेट में ₹4,700 (2%) की तेजी आई और यह ₹2,49,423 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। दूसरी ओर इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने की कीमतें बढ़ीं। स्पॉट गोल्ड 0.8% चढ़कर 4,755 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गया। इससे पिछले सत्र में इसमें 2% से अधिक की गिरावट आई थी। क्या हैं आज के टिप्स: भारतीय निवेशकों के लिए एमसीएक्स गोल्ड पर ₹1,52,800 – ₹1,51,500 का सपोर्ट और ₹1,54,850 – ₹1,55,500 का रेजिस्टेंस माना जा रहा है। आज क्यों उछले सोने-चांदी के भाव सीजफायर का असर सोने-चांदी के भाव में आज की उछाल के पीछे कई कारण हैं। इनमें से एक कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ संघर्ष विराम को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान कोई नया प्रस्ताव नहीं लाता और बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक और हमले नहीं किए जाएंगे। हालांकि, होर्मूज स्ट्रेट अब भी व्यापार के लिए बंद है। ईरान ने साफ किया है कि जब तक अमेरिका उसके जहाजों पर अपनी नाकाबंदी जारी रखेगा, वह इस जलमार्ग को नहीं खोलेगा। यह जलडमरूमध्य दुनिया के 20% तेल की सप्लाई का रास्ता है। क्रूड ऑयल में तेजी, डॉलर में कमजोरी का असर क्रूड तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब बने हुए हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा बना हुआ है। वहीं, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में 0.1% की गिरावट आई, जिससे सोना दूसरी मुद्राओं वालों के लिए सस्ता हो गया। कमजोर डॉलर से सोने की कीमतों को आमतौर पर सपोर्ट मिलता है। फेड के नए चेयरमैन का बयान: ब्याज दरों पर सख्त रुख अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले अध्यक्ष के लिए नामित केविन वार्श ने सीनेट में कहा कि वह स्वतंत्र रूप से काम करेंगे। उन्होंने ब्याज दरों में जल्दी कटौती करने के बजाय महंगाई पर नियंत्रण के लिए नई रूपरेखा बनाने की बात कही। निवेशकों को उम्मीद है कि वार्श ब्याज दरें धीरे-धीरे कम करेंगे, जिससे सोने पर दबाव बना रह सकता है। ट्रंप के फैसले का असर ग्लोबल मार्केट यानी कॉमैक्स पर आज सुबह सोने की कीमत करीब 1 पर्सेंट बढ़कर 4768 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है। इससे पिछले सेशन में सोने की कीमतों में 2 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट आई थी, जिससे निवेशक थोड़े डरे हुए थे। चांदी की बात करें तो एशियाई ट्रेडिंग घंटों के दौरान चांदी की कीमतों में 1.8 पर्सेंट का सुधार हुआ और यह 77.80 डॉलर प्रति औंस के लेवल पर पहुंच गई। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक सोने की कीमतों में 10 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है, जबकि चांदी इस दौरान करीब 17 पर्सेंट तक टूट चुकी है। आज की बढ़त ने निवेशकों को थोड़ी राहत दी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट बाजार में इस बदलाव की एक बड़ी वजह सप्लाई में आ रही रुकावट भी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता अभी भी जहाजों की आवाजाही के लिए बंद है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका उसके जहाजों पर लगी पाबंदी नहीं हटाता, तब तक वह इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को नहीं खोलेगा। इस रास्ते के बंद होने से पूरी दुनिया में एनर्जी सप्लाई में भारी दिक्कत आ रही है। सप्लाई चेन प्रभावित होने की वजह से महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो गया है। यही वजह है कि निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर फिर से सोने की तरफ रुख कर रहे हैं। फेड रिजर्व और डॉलर का दबाव कीमतों में रिकवरी के बावजूद कुछ ऐसे फैक्टर भी हैं जो सोने और चांदी पर लगातार दबाव बना रहे हैं। डॉलर इंडेक्स में पिछले सेशन के दौरान 0.4 पर्सेंट की मजबूती देखी गई है। डॉलर महंगा होने से सोना उन लोगों के लिए महंगा हो जाता है जो दूसरी करेंसी में निवेश करते हैं। इसके अलावा फेडरल रिजर्व के अगले संभावित चेयरमैन केविन वारश के एक बयान ने भी बाजार में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने कहा है कि अगर वे चेयरमैन बनते हैं, तो वे पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम करेंगे। इसका मतलब है कि सेंट्रल बैंक ब्याज दरों को ऊंचे लेवल पर रख सकता है, जो सोने जैसे एसेट के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता। भारतीय बाजार यानी एमसीएक्स पर सोने और चांदी के रेट में आज थोड़ा बदलाव देखा गया है। 21 अप्रैल के डेटा के मुताबिक, एमसीएक्स पर सोने का भाव 1,51,698 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था। वहीं चांदी की बात करें तो यह 2,44,916 रुपये प्रति किलोग्राम के लेवल पर देखी गई। ग्लोबल मार्केट में आई रिकवरी के बाद अब निवेशकों की नजर आने वाले समय में होने वाली शांति वार्ता पर टिकी है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे तब तक कोई नया हमला नहीं करेंगे जब तक ईरान की तरफ से कोई नया और ठोस प्रस्ताव नहीं आ जाता। बड़े बदलाव का इंतजार विश्लेषक अहमद असिरी के अनुसार, बुलियन मार्केट अब जियो-पॉलिटिकल रिस्क को पचा चुका है। पिछले कुछ हफ्तों में सोने की कीमतें सीमित दायरे में चल रही हैं। अब बाजार या तो स्थितियों के और बिगड़ने या फिर मैक्रो इकोनॉमी में बड़े बदलाव का इंतजार कर रहा है।