samacharsecretary.com

Oracle के को-फाउंडर की नेटवर्थ में भारी गिरावट, 17,94,485Cr साफ, एलन मस्क से भी थे ज्यादा अमीर

नई दिल्‍ली ओरेकल इन दिनों खूब चर्चा का विषय बना हुआ है, क्‍योंकि कंपनी ने बड़ी छटनी का फैसला लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ओरेकल ने ओरेकल ने 31 मार्च को ग्‍लोबल स्‍तर पर 20 से 30 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है. यह एक बड़ी छंटनी है, क्‍योंकि कंपनी ने अपने कुल वर्कफोर्स में से 18 फीसदी कर्मचारियों को निकाला है।  कई कर्मचारियों को बिना फोन और मीटिंग या पहले से जानकारी दिए बगैर ही सिर्फ एक ईमेल के जरिए नौकरी से निकाल दिया. कर्मचारियों को सुबह-सुबह ईमेल के माध्यम से जानकारी दी गई कि ओरेकल की वर्तमान व्यावसायिक आवश्यकताओं पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद, हमने एक व्यापक संगठनात्मक परिवर्तन के हिस्से के रूप में आपकी भूमिका को समाप्त करने का फैसला लिया है।  इस बीच, खबर है कि ओरेकल के को-फाउंडर लैरी एलिसन की नेटवर्थ 193 अरब डॉलर (लगभग 17,94,485 करोड़ रुपये) से ज्‍यादा कम हो गए हैं. संपत्ति में इतनी बड़ी गिरावट सिर्फ 6 महीने में ही हुई है. इस गिरावट से पहले ओरेकल के को-फाउंडर लैरी एलिसन कुछ समय के लिए दुनिया के सबसे अमीर व्‍यक्ति थे।  एलन मस्‍क को भी छोड़ा था पीछे  साल 2025 में लैरी एलिसन ने मौजूदा सबसे अमीर व्‍यक्ति एलन मस्‍क को पीछे छोड़ दिया था, लेकिन फिर नेटवर्थ में गिरावट होते ही लैरी एिलसन ने नंबर वन का ताज खो दिया. अभी एलन मस्‍क की कुल संपत्ति 636 अरब डॉलर है और लैरी एलिसन की नेटवर्थ 195 अरब डॉलर रह गई है।  ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, एलिसन की कुल संपत्ति 22 सितंबर, 2025 तक 388 बिलियन डॉलर से घटकर 3 अप्रैल, 2026 तक 195 बिलियन डॉलर हो गई. लगभग 200 बिलियन डॉलर की इस गिरावट ने वैश्विक रैंकिंग में भी फेरबदल किया है, जिससे वह छठे स्थान पर खिसक गए हैं।  लैरी एलिसन की नेटवर्थ में इतनी गिरावट क्‍यों आई?  अब सबसे बड़ा सवाल है कि लैरी एलिसन की नेटवर्थ में इतनी बड़ी गिरावट क्‍यों आई है? दरअसल, प‍िछले कुछ समय से ओरेकल की वित्तीय स्थिति में गिरावट आई है, जिसका असर कंपनी के शेयरों पर दिखाई दिया है और कंपनी के शेयर तेजी से नीचे आए हैं. शेयरों के गिरावट के साथ ही लैरी एलिसन की नेटवर्थ भी गिरी है।  इसके शेयर सितंबर 2025 में $345.72 के उच्चतम स्तर से शेयरों में लगभग 58% की गिरावट आई है और 2 अप्रैल, 2026 को यह $146.38 पर बंद हुआ. एलिसन की ओरेकल में करीब 41% हिस्सेदारी है, इसी कारण कंपनी के बाजार प्रदर्शन से काफी हद तक प्रभावित हैं। 

टाटा की Safari EV: 600Km रेंज और ऑल व्हील ड्राइव, कब आएगी?

मुंबई  टाटा मोटर्स देश की एक प्रमुख इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी है. कंपनी की पंच ईवी उन चुनिंदा कार्स में से एक है, जिन पर वेटिंग चल रही है. ऐसे में कंपनी ने एक नई इलेक्ट्रिक कार लाने पर विचार कर रही है, जो साइज में बड़ी और लुक्स में दमदार होगी. हम बात कर रहे हैं टाटा सफारी की, जो ईवी अवतार में आ रही है।  अभी तक ब्रांड की फ्लैगशिप ईवी हैरियर है, लेकिन जल्द ही ये ताज हैरियर की बड़ी बहन सफारी को मिल जाएगा. कंपनी इस साल ही अपनी सफारी ईवी को लॉन्च करने पर विचार कर रही है. ये कार 7-सीटर अवतार में आएगी. इसका सीधा मुकाबला महिंद्रा एक्सईवी 9एस (Mahindra XEV 9S) और विनफास्ट वीएफ एमपीवी 7 (Vinfast VF MPV 7) से होगा।  कब लॉन्च होगी कार? टाटा मोटर्स इस कार को फेस्टिव सीजन में लॉन्च कर सकती है. उम्मीद है कि कंपनी इस कार को दीवाली पर लॉन्च कर सकती है. जहां हैरियर 5-सीटर सेटअप में आती है. वहीं सफारी को कंपनी 7 सीटर सेटअप में लॉन्च कर सकती है. लॉन्च होने के बाद ये कंपनी की पहली थ्री रो इलेक्ट्रिक व्हीकल होगी।  इस कार का प्रोडक्शन अगस्त 2026 में शुरू हो सकता है. इंटरनली इस कार को Tayrona कहा जा रहा है. माना जा रहा है कि कंपनी इस कार को उसी प्लेटफॉर्म पर तैयार कर सकती है, जिस पर टाटा हैरियर ईवी को डेवलप किया गया है. कार का डिजाइन भी हैरियर ईवी की तरह ही रहेगा.  क्या कुछ मिल सकता है?  टाटा सफारी ईवी में भी हैरियर ईवी वाला ही बैटरी पैक और मोटर सेटअप मिल सकता है. ये कार 65kWh और 75kWh बैटरी पैक के साथ आ सकती है. रियर व्हील ड्राइव कॉन्फिग्रेशन में एक सिंगल मोटर मिलेगी, जो रियर साइड में लगी होगी. वहीं ऑल व्हील ड्राइव में डुअल मोटर सेटअप दिया जा सकता है।  रेंज की बात करें, तो हैरियर ईवी 75kWh बैटरी के साथ रियर व्हील ड्राइव वेरिएंट में 627 किलोमीटर की रेंज क्लेम करती है. वहीं ऑल व्हील ड्राइव वेरिएंट में रेंज घटकर 622 किलोमीटर हो जाती है. बात करें, 65kWh वाले मॉडल की तो इसमें 538 किलोमीटर की रेंज मिलती है. सफारी में कंपनी 100 किलोवॉट का डीसी चार्जिंग सपोर्ट दे सकती है। 

चांदी ₹2.06 लाख सस्ती, सोना ₹53,000 घटा, जानें ताजे भाव

मुंबई  सोना-चांदी की कीमतें (Gold-Silver Rates) बीते सप्ताह भारी उतार-चढ़ाव के बाद भी बढ़त में रहीं. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,49,650 रुपये पर क्लोज हुआ, तो वहीं चांदी का भीव 2,32,600 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया. इन रेट्स की तुलना दोनों कीमती धातुओं के हाई लेवल से करें, तो ये अभी भी क्रैश (Gold-Silver Price Crash From High) नजर आ रही हैं. जी हां, चांदी जहां हाई से 2 लाख रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती है, तो वहीं सोना 53000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता मिल रहा है।        हाई छूने के बाद क्रैश होती गई चांदी  चांदी की कीमत एमसीएक्स पर अपने हाई को छूने के बाद से संभली नजर नहीं आई है. इस साल जनवरी महीने में इतिहास में पहली बार 1 Kg Silver Price 4 लाख रुपये के पार पहुंचा था और 4,39,337 रुपये के लेवल छू लिया था. इसके बाद इसमें तेज गिरावट देखने को मिली. हालांकि, बीच-बीच में उछाल भी आया, लेकिन वर्तमान 2,32,600 रुपये प्रति किलो के भाव के आधार पर कैलकुलेशन करें, तो चांदी 2,06,737 रुपये प्रति किलो सस्ती मिल रही है।  सोना भी फिर न छू सका हाई न सिर्फ चांदी, बल्कि सोना भी अपने लाइफ टाइम हाई को फिर से नहीं छू सका. चांदी की तरह ही जनवरी महीने में Gold Rate ने एमसीएक्स पर 2 लाख रुपये का लेवल पार किया था और रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए 2,02,984 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था. वहीं बीते गुरुवार को ये गिरावट के साथ 1,49,650 रुपये पर क्लोज हुआ. ऐसे में अपने हाई से 10 Gram 24 Karat Gold Rate 53,334 रुपये कम हो गया है।          बीते हफ्ते ऐसा था हाल  बात सिर्फ बीते सप्ताह सोना-चांदी की कीमतों में आए चेंज की करें, तो एमसीएक्स पर 2 अप्रैल को  5 जून की एक्सपायरी वाला सोना 1,49,650 रुपये पर बंद हुआ था, जबकि 27 मार्च को ये 1,47,255 रुपये था. यानी हफ्तेभर में ये कीमती पीली धातु 2395 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगी हुई है. चांदी का भाव देखें, तो ये 2,27,954 रुपये से चढ़कर बीते सप्ताह 2,32,600 रुपये प्रति किलो पर क्लोज हुई यानी इसमें 4646 रुपये की तेजी आई।                   घरेलू मार्केट में सोना-चांदी  MCX के बाद घरेलू मार्केट में सोना-चांदी की कीमतों को देखें, तो पिछले सप्ताह महज तीन कारोबार दिन में ट्रेड हुआ. इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक 24 कैरेट सोना 27  मार्च को 24 कैरेट सोना 1,42,942 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जबकि 2 अप्रैल को ये 1,46,608 रुपये पर क्लोज हुआ यानी यहां भी Gold Rate में 3666 रुपये प्रति 10 ग्राम का उछाल आया. चांदी को देखें, तो घरेलू मार्केट में ये कीमती धातु 2,21,647 रुपये से बढ़कर 2,27,813 रुपये प्रति किलो हो गई. यानी 1 किलो चांदी की कीमत 6166 रुपये बढ़ गई।             घरेलू मार्केट में GST+Making Charge गौरतलब है कि आईबीजेए द्वारा अपडेट किए जाने वाले गोल्ड-सिल्वर रेट्स देशभर में समान रहते हैं, लेकिन जब सर्राफा दुकान पर ज्वेलरी खरीदने के लिए जाते हैं, तो उस पर तय 3 फीसदी जीएसटी के साथ मेकिंग चार्ज भी देना होता है. ये मेकिंग चार्ज विभिन्न शहरों में अलग-अलग हो सकता है और इनके जुड़ने से सोना-चांदी की कीमत बढ़ जाती है।  विदेशों में भी सोना-चांदी सस्ता, ये हैं कारण इंटरनेशनल मार्केट में भी सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट जारी है. COMEX पर सोना करीब 2 फीसदी गिरकर 4317 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) पर आ गया, तो चांदी की कीमत गिरकर 66.89 डॉलर प्रति औंस पर नजर आई।   Gold-Silver Rates में जारी गिरावट के पीछे के कारणों की बात करें, तो मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के चलते महंगाई बढ़ने का खतरा लोगों को सता रहा है. दूसरी ओर अमेरिकी फेड रिजर्व द्वारा बीते सप्ताह ब्याज दरों में कटौती न करने के फैसले ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है. ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर जारी अनिश्चितता ने भी इस गिरावट को रफ्तार देने का काम किया है. इसके अलावा मंगलवार को भी अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, जिसका दबाव सोना-चांदी पर पड़ा। 

महिंद्रा की इलेक्ट्रिक कार्स का धमाल, 1 साल में बेचीं हजारों यूनिट्स, कंपनी ने हासिल किया नया रिकॉर्ड

नई दिल्ली महिंद्रा की इलेक्ट्रिक कार्स मार्केट में बेहतरीन परफॉर्म कर रही है. खासकर कंपनी की बॉर्न इलेक्ट्रिक कार्स. यहां परफॉर्मेंस की बात सड़कों पर नहीं बल्कि नंबर्स के मामले में हो रही है. कंपनी ने अपने सभी इलेक्ट्रिक मॉडल्स की कुल 50 हजार यूनिट्स को बेच दिया है. इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर लोगों में मन में जो सवाल रहते हैं उसे देखते हुए ये नंबर बेहतरीन हैं।  सेल्स की ये संख्या महिंद्रा की बीई6, एक्सईवी 9ई और एक्सईवी 9एस की हैं. ये सभी गाड़ियां कंपनी की इलेक्ट्रिक कार्स के प्लेटफॉर्म INGLO पर बेस्ड हैं. इन गाड़ियों की ये संख्या एक अलग कहानी कह रही है. कंपनी को 30 हजार यूनिट्स बेचने में लगभग 7 महीनों का वक्त लगा था।  कैसा रहा इलेक्ट्रिक कार्स का सफर? नवंबर 2025 में महिंद्रा की बॉर्न इलेक्ट्रिक कार्स की सेल 30 हजार पार पहुंची थी. वहीं फरवरी 2026 तक कंपनी 41 हजार के सेल्स नंबर तक पहुंच गई थी, जबकि 41 हजार से 50 हजार का सफर तय करने में कंपनी को सिर्फ 6 हफ्तों का वक्त लगा है. साल 2025 में कंपनी औसतन हर महीने 5 हजार इलेक्ट्रिक कार्स बनाई हैं।  मार्च 2026 से उस लिमिट को बढ़ाकर 8000 यूनिट किया गया है. ये एक्सपेंशन बहुत ही महत्वपूर्ण है, जो दिखाता है कि कंपनी कितनी जल्दी अपनी वेटिंग लिस्ट को क्लियर करेगी. जिन लोगों ने महिंद्रा की इलेक्ट्रिक कार्स को महीनों पहले ऑर्डर किया था, उन्हें अब इसकी डिलीवरी जल्दी मिलेगी।  कितनी है कीमतें? सिर्फ मार्च 2026 की बात करें, तो कंपनी ने 5,217 बॉर्न इलेक्ट्रिक कार्स को बेचा है, जो पिछले साल की मार्च के मुकाबले 141 परसेंट ज्यादा है. ब्रांड की सबसे सस्ती बॉर्न इलेक्ट्रिक कार बीई6 है, जिसकी कीमत 18.90 लाख रुपये से शुरू होती है. वहीं एक्सईवी 9एस की कीमत 19.95 लाख रुपये से शुरू होती है. जबकि एक्सईवी 9ई की कीमत 21.90 लाख रुपये से शुरू होती है।  ये तीनों ही गाड़ियां INGLO स्टेकबोर्ड आर्किटेक्चर पर बेस्ड हैं. इनमें 59 kWh या 79 kWh का बैटरी पैक मिलता है. 79 kWh वाले बैटरी पैक की रेंज 650 किलोमीटर से ज्यादा है. कंपनी की मानें, तो इन गाड़ियों में हायर बैटरी पैक की डिमांड ज्यादा है. कुल प्रीऑर्डर में से 73 परसेंट प्रीऑर्डर हायर बैटरी पैक का है।     

Maruti, Tata और Mahindra के बाद इन कंपनियों ने छेड़ी सफलता की धारा, Toyota टॉप-5 से बाहर, मार्च 2026 सेल्स रिपोर्ट देखें

मुंबई  भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार निर्माता है. सितंबर 2025 में हुए बड़े GST Cut के बाद इंडस्ट्री में एकदम से बड़ा बूस्ट आया है. इंडियन कार कंपनियों ने घटे हुए टैक्स का फायदा उठाते हुए पिछले महीने भी दनादन सेल की हैं।  हमेशा की तरह पिछले महीने भी Maruti Suzuki देश की सबसे ज्यादा कारें बेचने वाली कंपनी रही. वहीं, Tata और Mahindra ने भी धमाकेदार बढ़ोतरी दर्ज की है. इसके अलावा, Skoda-VW, Mercedes और JLR जैसी कंपनियों ने सेल के मामले में गिरावट देखी है. आइए, कंपनी-वाइज सेल्स रिपोर्ट पर एक नज़र डालते हैं।  सेल के मामले में पहले नंबर पर मारुति है. पिछले महीने इस कार कंपनी को कुल 1,72,919 नए ग्राहक मिले हैं. ये आंकड़ा मार्च 2025 में बिकी इसकी कुल 1,34,784 यूनिट के मुकाबले सालाना स्तर पर आई 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।  बिक्री के मामले में दूसरे नंबर पर टाटा मोटर्स है. पिछले महीने इनकी कुल 67,268 यूनिट बिकी हैं. ये आंकड़ा मार्च 2025 में बिकी इसकी कुल 51,237 यूनिट के मुकाबले सालाना स्तर पर आई 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।  लिस्ट में तीसरे नंबर पर महिंद्रा है. मार्च 2026 में इनकी कुल 61,032 यूनिट बिकी हैं. ये आंकड़ा मार्च 2025 में सेल की गईं महिंद्रा की कुल 49,428 यूनिट के मुकाबले सालाना स्तर पर आई 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।  सेल के मामले में चौथे नंबर पर हुंडई ने पैर जमा रखे हैं. पिछले महीने इनको कुल 48,623 नए ग्राहक मिले. ये आंकड़ा मार्च 2025 में बिकी हुंडई की कुल 43,969 यूनिट के मुकाबले सालाना स्तर पर आई 9.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।  सेल में बढ़ोतरी के दम पर किआ ने टॉप-5 कंपनियों की लिस्ट में अपना नाम दर्ज करा लिया है. पिछले महीने इसको कुल 27,987 नए ग्राहक मिले. ये आंकड़ा मार्च 2025 में बिकी इसकी कुल 22,820 यूनिट के मुकाबले सालाना स्तर पर आई 18.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।  ऊपर बताई गई मार्च 2025 की टॉप-5 कंपनियों के अलावा पिछले महीने Toyota की 27,479 यूनिट, Skoda VW की 8,676 यूनिट, MG की 6,233 यूनिट, Honda की 5,507 यूनिट, Renault की 3,588 यूनिट, Nissan की 2,538 यूनिट, BMW की 1,559 यूनिट, Mercedes-Benz की 1,320 यूनिट, Citroen की 758 यूनिट, VinFast की 688 यूनिट, JLR की 430 यूनिट, BYD की 413 यूनिट, Jeep की 210 यूनिट, Volvo की 122 यूनिट, Isuzu की 72 यूनिट और Tesla की मात्र 49 यूनिट बिकी हैं। 

Rupee vs Dollar: RBI का बड़ा फैसला, रुपये में आई 12 साल की सबसे बड़ी तेजी

नई दिल्‍ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को लेकर कुछ कड़े फैसले लिए हैं, जिस कारण रुपये में गिरावट सिर्फ थमी ही नहीं, बल्कि बड़ी उछाल आई है. RBI द्वारा करेंसी में अस्थिरता को कम करने के लिए अतिरिक्‍त उपाय पेश करने के लिए एक दिन बाद यह तेजी आई है।  2 अप्रैल को डॉलर की तुलना में रुपये में 12 सालों से ज्‍यादा समय में सबसे अधिक तेजी देखी गई है, जबकि बैंक अपने ऑफशोर लॉन्ग डॉलर पोजीशन को कम करना जारी रखे हुए थे. करेंसी मार्केट खुलने के बाद करेंसी ट्रेड फिर से शुरू होने पर रुपया डॉलर के मुकाबले 1.8 प्रतिशत तक बढ़कर 93.17 पर पहुंच गया, जो सितंबर 2013 के बाद सबसे ज्‍यादा है।  क्‍यों आई इतनी बड़ी तेजी?  1 अप्रैल को, RBI ने फॉरेक्‍स मार्केट के नियम को कड़ा किया है. आरबीआई ने बैंकों को रेजिडेंस और नॉन-रेजिडेंस कस्‍टमर्स को रुपये के नॉन-डिलीवर फॉरवर्ड (एक तरह का फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट) जारी करने से रोक दिया. नॉन-डिलीवर फॉरवर्ड एक तरह का कॉन्‍ट्रैक्‍ट है, जो  फ्यूचर में रुपया का स्‍तर क्‍या होगा? उस आधार पर खरीदारी करने की अनुमति देता है. एक तरह से आप इसे करेंसी में डेरिवेटिव ट्रेडिंग भी कह सकते हैं. बस इसी कॉन्‍ट्रैक्‍ट को जारी करने से आरबीआई ने रोक लगा दी है. आरबीआई ने यह भी कहा कि कंपनियां रद्द किए गए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्‍ट्रैक्‍ट को दोबारा बुक नहीं कर सकतीं।  रुपये में गिरावट के कई कारण  सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्‍थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली रही है. मार्च महीने में ही विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने 1.11 लाख करोड़ रुपये की सेलिंग कर डाली थी. इसके साथ ही जंग के शुरू होने से दुन‍िया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है. साथ ही होमुर्ज के रास्‍ते के बंद होने की वजह से कच्‍चे तेल के दाम में लगातार तेजी रही है, जिस कारण रुपये में लगातार गिरावट रही है।  वहीं रुपये पर बैंकों के शुद्ध खुले पदों के जोखिम को सीमित करने के लिए आरबीआई द्वारा कदम उठाए जाने के बावजूद, 30 मार्च को करेंसी में 95 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया. हालांकि, ट्रंप के ईरान वॉर को लेकर दिए गए संबोधन के बाद कच्‍चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।   कच्‍चे तेल के भाव में उछाल  ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान जंग को लेकर अपने लक्ष्‍यों को लगभग हासिल कर ही लिया है. 2 से 3 हफ्तों के दौरान हम एक बड़ा कदम उठाएंगे. हालांकि उन्‍होंने जंग को समाप्‍त करने की कोई समयसीमा नहीं बताई, जिस कारण कच्‍चे तेल के भाव में तगड़ी उछाल देखने को मिली और यह 106 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया। 

तेल के दामों में फिर बढ़ोतरी, डीजल ₹25 और पेट्रोल ₹7.4 महंगा, नायरा के बाद इस कंपनी ने भी बढ़ाए रेट

नई दिल्‍ली  नायरा के बाद निजी क्षेत्र की कंपनी शेल इंडिया (Shell India) ने भी पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है. कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आए उछाल के कारण तेल के दाम बढ़ाए गए हैं. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, शेल ने डीजल की कीमतों में सीधे ₹25.01 प्रति लीटर की वृद्धि की है. पेट्रोल की कीमतों में ₹7.41 प्रति लीटर की बढोतरी की गई है. इस वृद्धि के बाद सामान्य डीजल की कीमत शेल इंडिया के पंपों पर ₹123.52 और प्रीमियम वेरिएंट की कीमत ₹133.52 प्रति लीटर तक पहुंच गई है।  वहीं, बेंगलुरु में अब सामान्य पेट्रोल ₹119.85 और पावर वेरिएंट ₹129.85 प्रति लीटर की दर से बिक रहा है. स्थानीय करों (VAT) और परिवहन लागत के कारण अलग-अलग राज्यों और शहरों में इन कीमतों में मामूली अंतर हो सकता है, लेकिन कुल मिलाकर पूरे देश में शेल के आउटलेट्स पर अब ग्राहकों को जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है।  सरकारी कंपनियों ने नहीं बढ़ाए दाम जहां सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद सरकार के हस्तक्षेप के कारण खुदरा कीमतों को स्थिर रखे हुए हैं, वहीं निजी कंपनियों को ऐसा करने पर सरकार से कोई वित्तीय मुआवजा या सब्सिडी नहीं मिलती. घाटे से बचने के लिए निजी कंपनियों के पास कीमतों को बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।  कच्‍चे तेल की कीमतों में वृद्धि ईंधन की कीमतों में इस अभूतपूर्व वृद्धि के पीछे मुख्य कारण कच्‍चे तेल के बढ़े दाम हैं. फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से कच्चे तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 60 फीसदी तक का उछाल आया है. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चा तेल $100 प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है. भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 फीसदी आयात करता है। 

Gold-Silver Prices Crash: चांदी 13,000 रुपये सस्ती, सोने में भी भारी गिरावट, जानें 3 मुख्य कारण

इंदौर  अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के संबोधन के बाद सोने-चांदी के भाव में भारी गिरावट आई है. ट्रंप के बयान से यह क्लियर होता हुआ दिख रहा है कि दो से तीन हफ्तों में कुछ बड़ा एक्‍शन हो सकता है. वहीं ट्रंप ने होर्मुज को लेकर कहा कि हम उस रास्‍ते से तेल लेकर नहीं आते हैं, जो देश उस रास्‍ते से तेल लेकर गुजरते हैं, वे चिंता करें और आगे आएं. अमेरिका मदद कर सकता है।  इस बयान के बाद डॉलर में काफी मजबूती देखने को मिली, जिस कारण ग्‍लोबल से लेकर MCX पर सोने-चांदी के भाव में बड़ी गिरावट आई. 5 मई वायदा के लिए चांदी का भाव करीब 13,000 रुपये टूटकर 2,29,888 रुपये प्रति किलो पर आ गया।  इसी तरह, सोने के भाव में भी भारी गिरावट रही. मल्‍टी कमोडिटी मार्केट में सोने का भाव 2200 रुपये टूटकर 1,51,161 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।  इंटरनेशनल मार्केट में भी बड़ी गिरावट ग्‍लोबल मार्केट में भी सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई है. इंटरनेशनल मार्केट में सोने का भाव 2.15 फीसदी टूटकर 4,710.95 डॉलर प्रति औंस पर आ गए. इसकी के साथ चांदी के भाव में भी तेज गिरावट आई और यह 5.20 फीसदी गिरकर 72.108  डॉलर प्रति औंस पर आ गया।  सोने-चांदी के गिरावट के साथ ही भारतीय शेयर बाजार में भी भारी गिरावट आई है. सेंसेक्‍स में 1500 अंकों से ज्‍यादा की गिरावट आई, जबकि निफ्टी 420 अंको से ज्‍यादा टूटा है।  क्‍यों आई सोने-चांदी के भाव में इतनी बड़ी गिरावट     ट्रंप के संबोधन से बाजार का मूड बिगड़ा है. ट्रंप ने कहा है कि हम 2 से 3 हफ्तों में बड़ी कार्रवाई करेंगे. इस बयान के बाद जंग के हालात और बिगड़ते हुए दिख रहे हैं, जिस कारण सोने-चांदी के भाव में भी गिरावट देखी जा रही है।        कच्‍चे तेल के दाम में भी भारी तेजी आई है. कल की तुलना में कच्‍चे तेल का भाव 8 डॉलर प्रति बैरल से ज्‍यादा चढ़कर 106 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया है।      डॉलर इंडेक्‍स में तेजी देखी जा रही है, जो अब करीब 100 के करीब पहुंच रहा है. वहीं रुपया डॉलर की तुलना में 94 लेवल के करीब है. डॉलर की मजबूती से सोने-चांदी के भाव में भारी गिरावट है।    

ईरान युद्ध का असर: शोरूम में धूल खा रही रोल्स-रॉयस से लेकर फेरारी तक लग्जरी कारें

 नई दिल्ली ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे जंग के बीच पश्चिमी एशिया इस समय बारूद की गंध के साये में सांस ले रहा है. आसमान तक उठती आग की लपटें और धुएं के गुबार सिर्फ खबरों तक सीमित नहीं हैं, उनका असर सीधे बाजारों और लोगों के भरोसे पर दिख रहा है. जिन सड़कों पर कभी दौलत का रौब और लग्जरी कारों की चमक नजर आती थी, वहां अब ठहराव और खामोशी है. करोड़ों की गाड़ियां बेचने वाले शोरूमों में आज वीरानी छाई हुई है. कारोबारी हर गुजरते दिन के साथ बढ़ती चिंता गिन रहे हैं. यह जंग सिर्फ सरहदों की नहीं है, यह उस चमक-दमक पर भी वार है जिसने मिडिल ईस्ट को दुनिया का सबसे मुनाफे वाला बाजार बना दिया था।  दुनिया की सबसे महंगी और शाही कार बनाने वाली कंपनियों के लिए पश्चिमी एशिया हमेशा से सोने की खान रहा है. लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं. जंग के चलते यहां का लग्जरी कार बाजार हिल गया है और करोड़ों रुपये की कारें भी शोरूम में खड़ी रह जा रही हैं. हाल ही में रोल्स-रॉयस ने दुबई के एक ग्राहक के लिए बेहद शानदार स्पेशल “फैंटम अरबेस्क” मॉडल पेश किया था, लेकिन इसके कुछ ही समय बाद हालात ऐसे बदले कि पूरी इंडस्ट्री चिंता में आ गई है।  शाही कारों में खास डिजाइन का जलवा रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रोल्स-रॉयस के इस स्पेशल मॉडल में अरब आर्किटेक्चर से इंस्पायर्ड लेजर-एंग्रेव्ड बोनट और ख़ास वुडेन मेड (लकड़ी से बना हुआ) इंटीरियर दिया गया था. यह कार खास तौर पर अमीर ग्राहकों के लिए बनाई गई थी. आम तौर पर रोल्स-रॉयस फैंटम की कीमत करीब 5.7 लाख डॉलर (लगभग 5.36 करोड़ रुपये) से शुरू होती है, लेकिन खास कस्टमाइजेशन के बाद इसकी कीमत दोगुनी या तिगुनी हो जाती है।  मिडिल ईस्ट का बाजार कुल बिक्री का 10% से भी कम होता है, लेकिन मुनाफे के मामले में यह मार्केट बड़ा कॉन्ट्रिब्यूशन देता है. ऐसे में ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे जंग के बाद बाजार पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. जंग शुरू होने के बाद कई लग्जरी कार शोरूम अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं. फेरारी और मासेराती जैसी कंपनियों ने कुछ समय के लिए डिलीवरी भी रोक दी है।  30% तक गिरा कारोबार रिपोर्ट के अनुसार, दुबई की मशहूर लग्जरी कार डीलरशिप फर्स्ट मोटर्स का कहना है कि, जंग के बाद कारोबार में करीब 30% की गिरावट आई है. ये डीलरशिप दुबई में फेरारी और बुगाटी की लग्ज़री स्पोर्ट कारें बेचता है. जब युद्ध शुरू हुआ तो शोरूम को बंद करना पड़ा था. हालांकि कुछ दिनों के बाद शोरूम को फिर से खोला गया लेकिन लोगों की आवाजाही बेहद कम है और बमुश्किल कारोबार करने की कोशिश की जा रही है. डीलरशिप के डायरेक्टर क्रीस बुल ने मीडिया को बताया कि, कुछ ग्राहक तो 70 लाख डॉलर की कार को दूसरे देश भेजने के लिए 30 हजार यूरो तक खर्च करने को तैयार हैं।  लैंबॉर्गिनी, बेंटले, फेरारी, जगुआर लैंड रोवर और पोर्श जैसी कंपनियां इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. उनका कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका सीधा असर उनके मुनाफे पर पड़ेगा. मिडिल ईस्ट में स्पेशल एडिशन और कस्टम कारों पर कंपनियां काफी ज्यादा कमाई करती हैं, जो अब लगभग रुक गई है।  कंपनियों के लिए क्यों जरूरी ये बाजार पश्चिमी एशिया की खास बात यह रही है कि यहां ग्राहक लिमिटेड एडिशन और खास डिजाइन वाली कारों पर भारी रकम खर्च करते हैं. इसके अलावा ग्राहक गाड़ियों में स्पेसिफिक कस्टमाइजेशन भी कराते हैं, जिनके बाद कारों की कीमत काफी बढ़ जाती है. इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि, 2024 में रेंज रोवर स्पोर्ट के “Sadaf” एडिशन की सिर्फ एक एसयूवी 3.3 लाख पाउंड (लगभग 4.09 करोड़ रुपये) में बेची गई थी. इस दौरान कंपनी ने इसके कुल 20 यूनिट बेचे थे. जो इसकी रेगुलर प्राइसिंग से तकरीबन 3 गुना ज्यादा थी. लेकिन अब ऐसे ऑर्डर लगभग बंद हो चुके हैं।  पहले ही अमेरिका में टैरिफ और चीन-यूरोप में गिरती मांग से जूझ रही लग्जरी कार कंपनियों के लिए मिडिल ईस्ट आखिरी बाजार था. अब वहां भी हालात खराब हो रहे हैं. कुछ कंपनियां तो प्रोडक्शन घटाने तक पर विचार कर रही हैं. ऑटो इंडस्ट्री के दिग्गजों का कहना है कि मौजूदा हालात बेहद चिंताजनक हैं. उनके मुताबिक, खासकर प्रीमियम और लग्जरी कार बनाने वाली कंपनियों के लिए यह स्थिति किसी बड़े संकट से कम नहीं है. अगर जल्द शांति नहीं बनी, तो आने वाले समय में इसका असर और गहरा हो सकता है। 

MG की नई पावरफुल SUV, Tata और Mahindra को देगी कड़ी टक्कर

 नई दिल्ली जेएसडब्लू-एमजी मोटर साल 2026 में कई लॉन्चिंग करने वाले हैं. कंपनी भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक व्हीकल, इंटरनल कंबस्चन इंजन और प्लग-इन हाइब्रिड कार्स को लॉन्च कर सकती है. इसमें से एक वूलिंग स्टारलाइट 560 (Wuling Starlight 560) हो सकती है. इस कार का भारत में पेटेंट फाइल हुआ है।  हाल के दिनों में इसे भारत में टेस्टिंग के दौरान देखा भी गया है. ये कार एमजी की ब्रांडिंग के साथ आएगी. पेटेंट फाइल होने से पहले ही इसे कई बार टेस्ट करते हुए पाया गया है. ये दोनों ही पॉइंट्स इसकी भारत में एंट्री का साफ संकेत दे रहे हैं. ध्यान रखें कि एमजी और वूलिंग दोनों की ब्रांड का मालिकाना अधिकार चीन की SAIC मोटर के पास है।  एक्सटीरियर और इंटीरियर  Starlight 560 चार मीटर से लंबी कार है. इसकी लंबाई 4745 एमएम, चौड़ाई 1850 एमएम और हाइट 1750 एमएम है. कार का व्हीलबेस 2810 एमएम का है. एक्सटीरियर की बात करें, तो इसमें फुल एलईडी लाइटिंग का सेटअप मिलता है. स्टारलाइट 560 में रूफ रेल, स्किड प्लेट्स, 18-इंच के डुअल टोन एलॉय और स्प्लिट टेल लैम्प मिलता है।  वहीं इंटीरियर की बात करें, तो इसमें टू-स्पोक स्टीयरिंग व्हील, 3.5 इंच का इंस्ट्रूमेंट डिस्प्ले और 12.8 इंच का टच स्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलता है, जो वायरलेस कनेक्टिविटी के साथ आता है. कैबिन में लेदर अपहोल्स्ट्री मिलेगी. भारतीय बाजार में कंपनी इसे कुछ बदलाव के साथ लॉन्च कर सकती है।  इंजन और पावर  इस SUV में मल्टीपल पावरट्रेन का विकल्प मिलता है. इसमें 1.5 लीटर का टर्बो पेट्रोल इंजन आता है, जो 174 बीएचपी की पावर ऑफर करता है, जो मैन्युअल या सीवीटी गियरबॉक्स के साथ आएगा. मैन्युअल गियरबॉक्स के साथ ये इंजन 260 एनएम का और ऑटोमेटिक के साथ 290 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है।  इसके अलावा ये एसयूवी 1.5 लीटर के इंजन के साथ हाइब्रिड में भी आती है. कार में प्लग-इन हाइब्रिड सिस्टम मिलता है, जो 194 बीएचपी की पावर और 230 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है. इसका ऑल इलेक्ट्रिक वर्जन भी आता है, जो 134 बीएचपी की पावर और 200 एनएम का टॉर्क ऑफर करता है।  भारत में इस कार का सीधा मुकाबला टाटा हैरियर और महिंद्रा एक्सयूवी 7एक्स0 से होगा. हालांकि, इसका कंपटीशन पूरी तरह से निर्भर करता है कि ये कार किस पावरट्रेन के साथ आती है. ज्यादा संभावना है कि कंपनी इसे प्लगइन हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वर्जन में लॉन्च कर सकती है।