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FD vs KVP vs Mutual Fund: ₹1 लाख निवेश पर कौन देगा बेस्ट रिटर्न?

नई  दिल्ली  बचत बढ़ने के साथ ही निवेश को लेकर लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है कि आखिर पैसा कहां लगाया जाए, जिससे सुरक्षा भी बनी रहे और अच्छा रिटर्न भी मिल सके। मौजूदा समय में बैंक FD, पोस्ट ऑफिस की स्कीम्स और इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेश के सबसे लोकप्रिय विकल्प बने हुए हैं। मार्च 2026 के मौजूदा रेट्स के आधार पर अगर कोई व्यक्ति ₹1 लाख का निवेश 10 साल के लिए करता है, तो इन तीनों विकल्पों में रिटर्न का अंतर काफी बड़ा हो सकता है। बैंक FD: सुरक्षित निवेश, लेकिन सीमित कमाई State Bank of India जैसे बड़े बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट को सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।     ब्याज दर: करीब 6.05% सालाना     10 साल में ₹1 लाख — करीब ₹1.8 लाख     फायदा: गारंटीड रिटर्न, कोई मार्केट रिस्क नहीं हालांकि, इसमें रिटर्न सीमित होता है, इसलिए यह कम जोखिम लेने वाले निवेशकों के लिए उपयुक्त है। पोस्ट ऑफिस KVP: पैसा दोगुना करने का भरोसेमंद तरीका Kisan Vikas Patra एक सरकारी योजना है, जिसमें निवेश तय समय में दोगुना हो जाता है।     ब्याज दर: करीब 7.5%     मैच्योरिटी: 115 महीने (करीब 9 साल 7 महीने)     10 साल में ₹1 लाख — ₹2 लाख या उससे अधिक यह विकल्प उन लोगों के लिए बेहतर माना जाता है, जो गारंटीड रिटर्न चाहते हैं और पैसा लंबे समय तक लॉक कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड: सबसे ज्यादा रिटर्न, लेकिन जोखिम के साथ Equity Mutual Fund में निवेश करने पर लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना रहती है।     औसत अनुमानित रिटर्न: करीब 12% सालाना     10 साल में ₹1 लाख — लगभग ₹3 लाख या उससे अधिक हालांकि, यह बाजार पर निर्भर करता है और इसमें उतार-चढ़ाव का जोखिम भी बना रहता है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार अगर सुरक्षा प्राथमिकता है तो FD बेहतर विकल्प है। अगर गारंटीड रिटर्न चाहिए तो KVP सही है। अगर ज्यादा मुनाफा चाहते हैं और जोखिम ले सकते हैं तो म्यूचुअल फंड चुनना फायदेमंद हो सकता है।     निवेश से पहले रखें इन बातों का ध्यान     अपने वित्तीय लक्ष्य स्पष्ट रखें     जोखिम सहने की क्षमता का आकलन करें     लंबी अवधि के लिए ही बाजार आधारित निवेश करें। ₹1 लाख का निवेश कहां करना है, यह पूरी तरह निवेशक की जरूरत और सोच पर निर्भर करता है। जहां FD सुरक्षा देती है, वहीं KVP स्थिर रिटर्न देता है और म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में अधिक कमाई का मौका प्रदान करता है।

Tata Harrier EV का नया डुअल-मोटर AWD वेरिएंट पेश, जानिए कीमत, पावर और रेंज की पूरी डिटेल

नई दिल्ली Tata Motors (टाटा मोटर्स) ने भारत में Harrier EV (हैरियर ईवी) का नया वेरिएंट लॉन्च किया है। इस नए वेरिएंट का नाम Fearless+ QWD 75 है। और इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 25 लाख रुपये से ऊपर रखी गई है। इस अपडेट के साथ अब ग्राहकों को डुअल-मोटर ऑल-व्हील-ड्राइव (QWD) तकनीक कम कीमत में उपलब्ध हो गई है। इस नए वेरिएंट में क्या खास है? Harrier EV का यह नया वेरिएंट टाटा मोटर्स की Acti.ev+ प्लेटफॉर्म पर आधारित है। इस ईवी के अहम फीचर्स की बात करें तो इसमें ये शामिल हैं:     डुअल-मोटर सेटअप (ऑल-व्हील ड्राइव)     504 Nm टॉर्क     0-100 किमी प्रति घंटा: 6.3 सेकंड इसके साथ ही इस एसयूवी में बेहतर ड्राइविंग कंट्रोल के लिए:     6 टेरेन मोड्स     ऑफ-रोड असिस्ट     बूस्ट मोड जैसे फीचर्स दिए गए हैं। बैटरी और रेंज कितनी है? इस वेरिएंट में बड़ा 75 kWh बैटरी पैक दिया गया है।     MIDC रेंज: 627 किमी     रियल-वर्ल्ड रेंज: लगभग 480-505 किमी यह ड्राइविंग रेंज इसे अपने सेगमेंट की लंबी रेंज वाली इलेक्ट्रिक एसयूवी में शामिल करता है। फीचर्स और कम्फर्ट में क्या मिलता है? Fearless+ QWD 75 वेरिएंट में कई प्रीमियम फीचर्स दिए गए हैं:     पावर्ड फ्रंट सीट्स (मेमोरी फंक्शन के साथ)     वेंटिलेटेड सीट्स     360-डिग्री कैमरा     10-स्पीकर JBL साउंड सिस्टम     19-इंच अलॉय व्हील्स     ड्यूल-जोन क्लाइमेट कंट्रोल (वॉयस सपोर्ट के साथ) अन्य फीचर्स:     एम्बिएंट लाइटिंग     रियर सनशेड्स     बेहतर कम्फर्ट के लिए रियर हेडरेस्ट   सेफ्टी और वारंटी कैसी है?     Bharat NCAP में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग     बैटरी पर लाइफटाइम वारंटी (कुछ शर्तों के साथ) जो इसे एक सुरक्षित और भरोसेमंद ईवी बनाता है। Harrier EV के सभी वेरिएंट्स और कीमत क्या हैं? अब Harrier EV कुल 7 वेरिएंट्स में उपलब्ध है। जिनकी एक्स-शोरूम कीमत करीब 20 लाख रुपये से कुछ ज्यादा से शुरू होती है। और टॉप वेरिएंट की कीमत करीब 30 लाख रुपये से कम है। इसमें चार्जर और इंस्टॉलेशन की कीमत अलग है। AC फास्ट चार्जर 49,000 रुपये में उपलब्ध है। क्या नए कलर ऑप्शन भी आए हैं? हां, टाटा मोटर्स ने हैरियर ईवी के नए वेरिएंट के साथ एक नया कलर ऑप्शन पेश किया है:     सीवीड ग्रीन इसके अलावा:     प्रिस्टीन व्हाइट     प्योर ग्रे     एम्पावर्ड ऑक्साइड     नैनीताल नॉक्टर्न कम कीमत में ज्यादा खूबियां Tata Harrier EV का नया Fearless+ QWD 75 वेरिएंट उन ग्राहकों के लिए खास है जो बेहतर परफॉर्मेंस, AWD क्षमता और लंबी रेंज चाहते हैं। लेकिन पहले की तुलना में कम कीमत पर। यह लॉन्च Harrier EV को और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाता है और भारतीय ईवी बाजार में इसकी पकड़ मजबूत करता है। 

शेयर बाजार में हलचल: राधाकिशन दमानी ने 100 साल पुरानी कंपनी के शेयर खरीदे, ₹1100 करोड़ लगाए

नई दिल्ली बढ़ती ब्याज दरों के दौर में जहां कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ रहा है, वहीं निवेशक अब सुरक्षित और मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों की तलाश में हैं। ऐसे माहौल में दिग्गज निवेशक राधाकिशन दमानी ने एक बार फिर अपनी रणनीति से बाजार का ध्यान खींचा है। उन्होंने कर्ज-मुक्त, स्थिर मुनाफा देने वाली और मजबूत डिविडेंड वाली कंपनी VST Industries Ltd में बड़ा निवेश कर रखा है, जो मौजूदा बाजार में आकर्षक विकल्प बनकर उभर रही है। 100 साल पुरानी और मजबूत विरासत VST Industries Ltd की स्थापना 1930 में ‘वजीर सुल्तान टोबैको कंपनी’ के रूप में हुई थी। यह कंपनी British American Tobacco Plc की सहयोगी है और भारत के सिगरेट बाजार में तीसरी सबसे बड़ी कंपनी मानी जाती है। ‘टोटल’ ब्रांड इसकी पहचान है। दमानी का दशक पुराना भरोसा राधाकिशन दमानी ने मार्च 2016 से इस कंपनी में निवेश बनाए रखा है। वर्तमान में उनकी करीब 29% हिस्सेदारी है, जिसकी वैल्यू 1000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। यह उनके लॉन्ग-टर्म निवेश दृष्टिकोण को दर्शाता है। कर्ज-मुक्त कंपनी और मजबूत डिविडेंड कंपनी की सबसे बड़ी ताकत इसकी ‘जीरो डेब्ट’ स्थिति है, जिससे ब्याज दरों का असर नहीं पड़ता। लगभग 21% ROCE और 4.5% डिविडेंड यील्ड इसे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाती है। यह इंडस्ट्री के औसत से काफी बेहतर है। गिरावट के बावजूद वैल्यूएशन आकर्षक शेयर कीमत मार्च 2021 के 302 रुपये से गिरकर मार्च 2026 में करीब 222 रुपये तक आ गई है। यह अपने ऑल-टाइम हाई से लगभग 56% नीचे ट्रेड कर रहा है। 17x पीई पर यह स्टॉक अपने ऐतिहासिक और इंडस्ट्री औसत से सस्ता नजर आता है।  

Skoda Kushaq Facelift लॉन्च, 10.69 लाख कीमत और मसाज सीट्स का शानदार फीचर

मुंबई  स्कोडा ऑटो इंडिया ने अपनी नई कार लॉन्च कर दी है. कंपनी ने कुशाक फेसलिफ्ट (Skoda Kushaq Facelift) को लॉन्च किया है, जो दमदार फीचर्स के साथ आती है. कार पांच वेरिएंट्स- क्लासिक प्लस, सिग्नेचर, स्पोर्टलाइन, प्रेस्टीज और मोंटे कार्लो में आती है. इसमें 1 लीटर का टीएसआई और 1.5 लीटर का टीएसआई टर्बो पेट्रोल इंजन मिलता है।  अपडेटेड कुशाक में पूरे लाइनअप में वैल्यू को बेहतर किया गया है. कुशाक फेसलिफ्ट में कंपनी ने ज्यादा फीचर्स जोड़े हैं,  बेहतर सेफ्टी इक्विपमेंट्स को इस्तेमाल किया है और ड्राइविंग एक्सपीरियंस को बेहतर करने पर काम किया है. आइए जानते हैं इसकी कीमत और दूसरी खास बातें।  कितनी है कीमत?  नई कुशाक 10.69 लाख रुपये की शुरुआती एक्स शोरूम कीमत पर आती है. इसमें आपको 1 लीटर का टर्बो पेट्रोल इंजन मिलेगा. वहीं 1 लीटर वाले इंजन का टॉप मॉडल 16.79 लाख रुपये (एक्स शोरूम) में आता है. कार के ऑटोमेटिक वेरिएंट्स की कीमत 12.69 लाख रुपये एक्स शोरूम से शुरू हो जाती है।  ऐसे कंज्यूमर्स जो ज्यादा वैल्यू चाहते हैं, उनके लिए कार का 1.5 लीटर टीएसआई डीएसजी वेरिएंट है. इसकी कीमत 18.79 लाख रुपये से शुरू होती है. स्कोडा कुशाक फेसलिफ्ट का टॉप वेरिएंट 18.99 लाख रुपये का है।  इंजन और पावर  कुशाक फेसलिफ्ट में पुराने ही इंजन ऑप्शन मिलते हैं. 1 लीटर वाले टीएसआई इंजन में 114 बीएचपी और 178 एनएम का टॉर्क मिलता है. ये वेरिएंट 6-स्पीड मैन्युअल या 8-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमेटिक गियरबॉक्स के साथ आता है. वहीं 1.5 लीटर वाला इंजन 150 बीएचपी की पावर और 250 एनएम का टॉर्क ऑफर करती है. इसमें 7-स्पीड डीएसजी गियरबॉक्स दिया गया है. बेहतर एफिशिएंसी के लिए एक्टिव सिलेंडर टेक्नोलॉजी दी गई है।  एक्सीरियर में क्या है नया  कार में आपको स्कोडा की लेटेस्ट डिजाइन लैंग्वेज नजर आएगी. कुशाक फेसलिफ्ट का फ्रंट फेस कंपनी की मॉडर्न डिजाइन लैंग्वेज को फॉलो करता है. इसमें स्लिम एलईडी हेडलैम्प्स दिए गए हैं, जो आईब्रो जैसे डीआरएलएस के साथ आते हैं. कार में एल-शेप्ड लाइट्स मिलती हैं।  बंपर को रिडिजाइन किया गया है. इसमें स्लिवर स्किड प्लेट दी गई है. मोंटे कार्लो ट्रिम में क्रोम को ग्लॉसी ब्लैक से रिप्लेस किया गया है. साथ ही दो रेड ग्रील स्ट्रिप जोड़ी गई हैं और यूनिक बैजिंग मिलती है. साइड से कार में कोई बड़ा बदलाव नहीं है. इसमें 16-इंच और 17-इंच के एलॉय का विकल्प मिलता है. रियर में एलईडी लाइट बार दिया गया है, जिसमें SKODA लिखा हुआ है।  इंटीरियर और फीचर्स  कार का इंटीरियर ब्लैक और बेज कलर थीम में है. मोंटे कार्लो एडिशन में थीम थोड़ी अलग मिलेगी. कार में अब 10.25 इंच का डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले और 10.1 इंच का इंफोटेनमेंट टचस्क्रीन सिस्टम दिया गया है. इसमें डुअल कलर एंबिएंट लाइटिंग और पैनोरोमिक सनरूफ मिलता है।  कार में 491 लीटर का बूट स्पेस मिलता है. रियर में मजास सीट्स का फीचर दिया गया है, जो 6-वे वेंटिलेटेड पावर फ्रंट सीट के साथ आती है. इसके अलावा फ्रंट पार्किंग सेंसर, लेदर अपहोल्स्ट्री, आटोमेटिक क्लाइमेट कंट्रोल, वायरलेस ऐपल कारप्ले और एंड्रॉयड ऑटो, 6 स्पीकर ऑडियो सिस्टम और वायरलेस चार्जिंग पैड के साथ आता है।  सेफ्टी फीचर्स स्कोडा कुशाक फेसलिफ्ट में 6 एयरबैग्स, एबीएस, ईबीडी, ईएससी, ट्रैक्शन कंट्रोल और इलेक्ट्रिक डिफरेंशियल लॉक, हिल होल्ड असिस्ट जैसे फीचर्स मिलते हैं. बता दें कि कार के पिछले वेरिएटं को ग्लोबल एनकैप में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली थी. ये वेरिएंट भी 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग हासिल कर सकता है। 

तेल-गैस के कुओं से निकला क्रूड बनाता है ये 50 आम चीजें: प्लास्टिक से लेकर वैसलीन तक

 नई दिल्ली ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जंग से सिर्फ तेल और गैस का संकट ही नहीं बढ़ा है. इस जंग से हमारी रोजमर्रा की जरूरतों के समान पर भी संकट मंडराने लगा है. क्योंकि, हम हर दिन, हर वक्त कोई न कोई ऐसी चीज का इस्तेमाल करते रहते हैं, जो पेट्रो केमिकल्स या पेट्रोलियम मैटेलियल से बना होता है. ऐसे में जानते हैं कि  पेट्रोलियम बेस्ड उन छोटी-छोटी चीजों के बारे में, जिनका हम हर रोज इस्तेमाल करते हैं।   हम हर जो रोज जिस बोतल से पानी पीते हैं, उसकी प्लास्टिक या फिर जिस गाड़ी से चलते हैं, उसके टायर की रबड़ या जो लोशन चेहरे और शरीर पर लगाते हैं, उसमें मिला केमिकल कहां से आता है. ये सब पेट्रो केमिकल उत्पाद हैं और मिडिल ईस्ट की जंग से  सिर्फ गैस और तेल ही नहीं, पेट्रोलियम से बनने वाले इन छोटे-छोटे प्रोडक्ट्स पर भी संकट गहरा रहा है।   हमारी सुबह की शुरुआत ही पेट्रोकेमिकल से बने टूथपेस्ट ट्यूब से होती है. इसके बाद बाथरूम में मौजूद शैम्पू , शैम्पू की बोतलें, साबुन, लोशन, बॉडी वॉश और सिंथेटिक कपड़ों की बारी आती है. पेट्रोलियम का मतलब सिर्फ पेट्रोल, डीजल और गैस नहीं होता है. इससे और भी कई तरह की चीजें निकलती है, जो हमारी कई छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करती है।  1. प्लास्टिक और पैकेजिंग मैटेरियल पानी की बोतलें फूड कंटेनर, टिफिन बॉक्स पॉलिथीन बैग, रैपर मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान की पैकेजिंग नोट – इन सबमें ज्यादातर प्लास्टिक, पॉलिथीन और पॉलीप्रोपेलीन पेट्रोकेमिकल से बनते हैं.  पेट्रो केमिकल्स​ 2. कपड़े और टेक्सटाइल पॉलिएस्टर  नायलॉन  स्पोर्ट्स वियर क्लोथिंग मैटेरियल कारपेट और परदे नोट- ये सभी  सिंथेटिक कपड़े हैं और  पूरी तरह पेट्रोकेमिकल बेस्ड हैं. 3. पर्सनल केयर और कॉस्मेटिक्स साबुन, शैम्पू क्रीम, लोशन टूथपेस्ट परफ्यूम नोट – इन प्रोडक्ट्स को बनाने में ग्लीशरीन और दूसरे पेट्रो केमिकल्स यूज होते हैं. पेट्रो केमिकल्स​ 4. घरेलू सामान डिटर्जेंट और क्लीनिंग लिक्विड प्लास्टिक फर्नीचर किचन के कुछ नॉन स्टीक बर्तन  फोम, मैट्रेस और कुशन 5. ऑटोमोबाइल और ट्रांसपोर्ट टायर (Synthetic rubber) कार के डैशबोर्ड, सीट कवर लुब्रिकेंट (Engine oil) पेंट और कोटिंग नोट – इन उत्पादों का निर्माण विशुद्ध पेट्रो केमिकल्स से होता है. 6. इलेक्ट्रॉनिक्स मोबाइल फोन के पार्ट्स लैपटॉप/टीवी का बॉडी वायर और केबल (इंसुलेशन) 7. दवाइयां और मेडिकल प्रोडक्ट कई दवाओं के केमिकल कंपोनेंट सिरिंज, बैग मेडिकल प्लास्टिक उपकरण 8. कंस्ट्रक्शन मैटेलियल PVC पाइप पेंट और वार्निश इन्सुलेशन मटेरियल फ्लोरिंग विनायल 9. खिलौने और स्पोर्ट्स मैटेलियल प्लास्टिक टॉय फुटबॉल, हेलमेट जिम इक्विपमेंट 10. फूड पैकेजिंग मैटेलियल फूड पैकेजिंग फिल्म बोतलें और कैन फूड स्टोरेज कंटेनर पेट्रो केमिकल्स​ कच्चे तेल और गैस को रिफाइन करने के दौरान अलग-अलग स्टेज पर उससे अलग-अलग कैमिकल निकलते हैं और उनका इस्तेमाल कई तरह की जरूरी चीजों को बनाने में होता है. कच्चे तेल और गैस का शोधन या डिस्टिलेशन के अलग-अलग चरणों में होता है और हर स्टेज में अलग-अलग पेट्रो केमिकल्स या हाईड्रोकार्बन प्राप्त होते हैं.  पहले चरण में ही इससे एथेन, मीथेन, प्रोपेन, ब्यूटेन जैसे गैस निकलते हैं. इनमें से प्रोपेन और ब्यूटेन से एलपीजी, पीएनजी और अन्य गैस बनाए जाते हैं,जिनका इस्तेमाल किचन से लेकर ऑटोमोबाइल तक में होता है.  इसके साथ ही ब्यूटाडाइन, बेंजीन, टोल्यून, मेथनॉल, ग्लिसरीन जैसे तत्व निकलते हैं, जिससे प्लास्टिक, पेंट, रबर, फॉर्मास्यूटिकल उत्पाद, कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स, लोशन, क्रीम जैसी चीजें बनती हैं. आगे के स्टेज में एथिलीन, प्रोपिलीन, ब्यूटिलीन जैसे पदार्थ निकलते हैं, जिनसे प्लास्टिक, पॉलिथीन, रबड़ और ऐसे ही अन्य मैटेरियल बनाए जाते हैं.  शोधन प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ती जाती है – एक्रिलोनाइट्राइल और आइसोब्यूटिलीन जैसे पेट्रो केमिकल प्राप्त होते हैं, जिससे फोम, रेजिन, पेंट और कोटिंग्स जैसे मेटेलियल बनते हैं. इन हाईड्रोकार्बन का इस्तेमाल पैकेजिंग मैटेरियल, चिपकने वाले पदार्थ, विस्फोटक, गोंद, औद्योगिक रसायन, सिंथेटिक रबर, टायरों, साबुन और डिटर्जेंट, रंग, दवाई, क्लीनिंग मैटेरियल और कई तरह के मेडिकल उपकरणों बनाने में होता है. पेट्रोलियम को रिफाइन करने के दौरान ही अमोनिया और यूरिया जैसे उर्वरक बनाने वाले तत्व भी निकलते हैं. 

भारत में लॉन्च हुई Mini Cooper S Victory Edition, कीमत और डिजाइन पर एक नजर

मुंबई   कार निर्माता कंपनी Mini India ने भारतीय बाजार में अपनी MINI Cooper S Victory Edition लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस कार को 57.50 लाख रुपये की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत पर उतारा है।  गौरतलब है कि इस मॉडल की बुकिंग फरवरी के आखिर में शुरू हुई थी, और इसे भारत में पूरी तरह से CBU इम्पोर्ट के तौर पर सीमित संख्या में लाया जा रहा है. इस स्पेशल एडिशन का डिजाइन 1965 की Monte Carlo Rally जीतने वाली Mini Cooper S से प्रेरित है।  MINI Cooper S Victory Edition का डिजाइन MINI Cooper S John Cooper Works Pack पर आधारित, नया Victory Edition विशेष रूप से Chili Red कलर स्कीम में पेश किया गया है, जिसमें रूफ का कलर ब्लैक रखा गया है और कार की पूरी लंबाई में एक सफ़ेद धारी बनी हुई है. वहीं इसके किनारों पर '52' नंबर के ग्राफ़िक्स भी बने हुए हैं, जो रैली जीतने वाली कार के रेस नंबर को दर्शाते हैं।  वहीं रियर प्रोफाइल की बात करें तो, इस एडिशन में रूफ पर लगा हुआ एक स्प्लिट स्पॉइलर और बीच में लगा एग्जॉस्ट दिया गया है. कार में बाहर की तरफ, इसमें C-पिलर पर '1965' की बैजिंग, व्हाइट कलर के हब कैप और JCW Lap Spoke 2-tone डिज़ाइन वाले 18-इंच के अलॉय व्हील्स जैसे अतिरिक्त फ़ीचर्स भी दिए गए हैं।  MINI Cooper S Victory Edition का इंटीरियर केबिन के इंटीरियर पर नजर डालें तो, यहां ब्लैक और रेड कलर की थीम दी गई है, और इसमें ड्राइवर-साइड के दरवाज़े पर 'Rallye Monte-Carlo' का स्टिकर, Victory Edition के दरवाज़े की सिल्स, और स्टीयरिंग व्हील के रिम और बीच के स्टोरेज बॉक्स पर '1965' की बैजिंग जैसे एलिमेंट्स दिए गए हैं।  MINI Cooper S Victory Edition का पावरट्रेन मैकेनिकल तौर पर नए Victory Edition में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसमें पहले की तरह ही 2.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन इस्तेमाल किया गया है, जो 201 bhp की पावर और 300 Nm का टॉर्क जेनरेट करता है. इस इंजन को डुअल-क्लच ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है। 

Meta के मेटावर्स पर ₹6.5 लाख करोड़ का नुकसान, पाकिस्तान का साल भर का बजट इससे कम है

 नई दिल्ली Meta ने अपने मेटावर्स प्लेटफॉर्म Horizon Worlds को लेकर बड़ा फैसला लिया है. कंपनी अब इसे बंद करने जा रही है. साथ ही वीआर एक्सपीरियंस पर नए इन्वेस्टमेंट और डेवलपमेंट को भी लिमिट किया जा रहा है।  यह फैसला सिर्फ एक प्रोडक्ट बंद करने का नहीं है, बल्कि यह इस बात का इशारा है कि Meta धीरे-धीरे अपने उसी मेटावर्स विजन से पीछे हट रही है, जिसे कभी मार्क जकबरबर्ग इंटरनेट का फ्यूचर बताया गया था।  मेटावर्स को फ्यूचर बता कर जकरबर्ग ने Facebook को Meta कर दिया साल 2021 में फेसबुक सीईओ मार्क जकरबर्ग ने दुनिया को बताया था कि सोशल मीडिया का दौर खत्म होने वाला है और अगला मेटावर्स अगला बड़़ा प्लेटफॉर्म होगा. मेटावर्स यानी एक वर्चुअल दुनिया ।  हाइप इतनी बनी की मार्क जकरबर्ग ने फेसबुक का नाम बदलकर Meta कर दिया गया. यह टेक इंडस्ट्री में एक बड़ा मोड़ था. पहली बार किसी बड़ी कंपनी ने खुले तौर पर कहा कि वह इंटरनेट के अगले रूप को खुद बनाएगी ।  उस समय यह सिर्फ एक कंपनी का फैसला नहीं था, बल्कि पूरी इंडस्ट्री के लिए एक सिग्नल था. माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, ऐपल, सबने इस दिशा में काम तेज कर दिया. वर्चुअल रियलिटी, ऑगमेंटेड रियलिटी और डिजिटल दुनिया को लेकर एक नई दौड़ शुरू हो गई।  पांच साल बाद अब तस्वीर बिल्कुल अलग है Meta धीरे-धीरे अपने उसी मेटावर्स विजन से पीछे हटती दिख रही है. Horizon Worlds, जिसे कंपनी ने अपने वर्चुअल सोशल प्लेटफॉर्म के रूप में पेश किया था, वह उम्मीद के मुताबिक नहीं चला. अब कंपनी वर्चुअल रिएलिटी पर फोकस कम कर रही है और मोबाइल और AI पर ज्यादा ध्यान दे रही है।  यह सिर्फ एक प्रोडक्ट का फेल होना नहीं है. यह उस पूरे आइडिया की कमजोरी दिखाता है, जिसे इंटरनेट का भविष्य बताया गया थ।  80 अरब डॉलर का दांव, लेकिन यूजर नहीं आए Meta ने अपने Reality Labs डिवीजन के जरिए मेटावर्स पर 80 से 85 अरब डॉलर तक खर्च कर दिए. इसमें वीआर हेडसेट्स, सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म, चिप डिजाइन, डेटा सेंटर, और डेवलपर टूल्स तक सब शामिल था।  इतना बड़ा निवेश करने के बाद भी कंपनी उस स्तर का यूजर एडॉप्शन नहीं ला पाई, जो इस पूरे मॉडल को टिकाऊ बना सके।  Horizon Worlds पर एक्टिव यूजर्स की संख्या लाखों में ही सीमित रही. कई रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि ज्यादातर यूजर्स प्लेटफॉर्म पर कुछ ही समय के लिए आते थे और फिर वापस नहीं लौटते थे. यानी यूजर रिटेंशन में फेल हो गए।  टेक इंडस्ट्री में किसी भी प्लेटफॉर्म की सफलता सिर्फ यूजर्स से नहीं, बल्कि उनके बार-बार लौटने से तय होती है. मेटावर्स इस कसौटी पर कमजोर साबित हुआ।  टेक्नोलॉजी तैयार नहीं थी, या यूजर तैयार नहीं थे? मेटावर्स की असफलता को समझने के लिए यह सवाल जरूरी है. पहली नजर में लगता है कि समस्या टेक्नोलॉजी की थी. वीआर (VR) हेडसेट अभी भी महंगे हैं, भारी हैं, और लंबे समय तक पहनना आसान नहीं है. बैटरी लाइफ लिमिटेड है, और हाई क्वालिटी ग्राफिक्स के लिए ज्यादा कंप्यूटिंग पावर चाहिए।  लेकिन असली समस्या इससे भी गहरी है. यूजर्स को जरूरत ही महसूस नहीं हुई. लोग अपने फोन और लैपटॉप पर पहले से ही सोशल मीडिया, गेमिंग और वीडियो कॉल कर रहे हैं. मेटावर्स ने इन्हीं चीजों को एक नए फॉर्म में पेश किया, लेकिन ऐसा कुछ नया नहीं दिया जो लोगों को मजबूर करे कि वे अपनी आदतें बदलें यही वजह है कि मेटावर्स एक ऐसी टेक्नोलॉजी बन गया, जो मौजूद तो थी, लेकिन जरूरी नहीं थी. मेटावर्स कोनॉमी का सपना भी नहीं चला Meta का प्लान था कि मेटावर्स के अंदर एक पूरी डिजिटल इकोनॉमी बनेगी. लोग वर्चुअल जमीन खरीदेंगे, डिजिटल सामान लेंगे, और क्रिएटर्स पैसे कमाएंगे।  लेकिन यह मॉडल भी जमीन पर नहीं उतर पाया. यूजर्स के पास ऐसा कोई ऐसी वजह नहीं थी कि वे वर्चुअल चीजों पर पैसा खर्च करें।  जहां गेमिंग में लोग पैसे खर्च करते हैं, वहां भी एक स्ट्रॉन्ग गेम प्ले और कम्युनिटी होती है. मेटावर्स में वह दोनों चीजें कमजोर थीं. क्रिएटर्स के लिए भी कमाई का रास्ता साफ नहीं था, जिससे पूरा इकोसिस्टम धीमा पड़ गया।  फेसबुक से Meta बनना: एक बड़ा जोखिम जब फेसबुक ने अपना नाम बदलकर Meta किया, तब उसने अपने फ्यूचर को एक ही डायरेक्शन  में बांध दिया. यह एक साहसी बोल्ड मूव था, लेकिन रिस्की भी था।  कंपनी ने अपने मेन बिजनेस, जैसे विज्ञापन और सोशल प्लेटफॉर्म, से ध्यान हटाकर एक लंबे समय वाले विजन पर ज्यादा खर्च करना शुरू किया. इससे इन्वेस्टर्स का भरोसा डगमगाया और कंपनी को कई बार अपनी स्ट्रैटिजी भी बदलनी पड़ी।  बाद में Meta को लागत कम करनी पड़ी, कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी और नए फोकस की तलाश करनी पड़ी।  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने  पूरा खेल बदल दिया 2022 के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने टेक इंडस्ट्री का फोकस पूरी तरह बदल दिया. जहां मेटावर्स को भविष्य माना जा रहा था, वहीं एआई ने तुरंत असर दिखाया. कंटेंट बनाना, ऑटोमेशन, कोडिंग, कस्टमर सर्विस और हर जगह एआई का इस्तेमाल बढ़ गया।  कंपनियों को यहां तुरंत फायदा दिखा, जबकि मेटावर्स में फायदा दूर का सपना था. Meta ने भी यह बदलाव समझा और अब वह तेजी से एआई पर काम कर रहा है. इससे साफ है कि कंपनी ने अपनी प्रायॉरिटी बदल दी है।  क्या मेटावर्स को खत्म समझा जाए?  मेटावर्स पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन उसका बड़ा सपना फिलहाल रुक गया है. अब जो दिशा दिख रही है, वह ज्यादा प्रैक्टिकल है। पूरी वर्चुअल दुनिया बनाने के बजाय, अब कंपनियां असली दुनिया में डिजिटल चीजें जोड़ने पर काम कर रही हैं. ऑगमेंटेड रियलिटी, एआई और मोबाइल बेस्ड एक्सपीरिएंस इस डायेरक्शन में आगे बढ़ रहे हैं।  गेमिंग, ट्रेनिंग और कुछ खास इंडस्ट्री में मेटावर्स का इस्तेमाल जारी रहेगा, लेकिन यह आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा अभी नहीं बन पाया है।  Meta ने क्या खोया, क्या पाया? Meta ने इस पूरे एक्सपेरिमेंट में बहुत बड़ा पैसा खोया, समय खोया और कुछ हद तक भरोसा भी खोया. लेकिन इसके साथ ही कंपनी ने बहुत कुछ सीखा भी. वीआर और एआर टेक्नोलॉजी में उसकी पकड़ मजबूत हुई है. उसने नए प्लेटफॉर्म, नए चिप्स और नई तकनीकों पर … Read more

डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी बने सीआईआई मध्य प्रदेश के चेयरमैन

सीआईआई एमपी स्टेट एनुअल मीटिंग 2026 में उद्योग, संस्थागत निर्माण और समावेशी विकास पर हुआ मंथन भोपाल भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा मध्य प्रदेश स्टेट एनुअल मीटिंग 2026 का आयोजन इंदौर स्थित ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में किया गया। इस महत्वपूर्ण आयोजन में राज्यभर से उद्योगपतियों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास के भविष्य पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण सीआईआई मध्य प्रदेश के नए नेतृत्व की घोषणा रही। आईसेक्ट लिमिटेड के निदेशक डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी को वर्ष 2026–27 के लिए सीआईआई मध्य प्रदेश का चेयरमैन नियुक्त किया गया है, जबकि कृति न्यूट्रिएंट्स लिमिटेड के निदेशक श्री सौरभ सिंह मेहता को वाइस चेयरमैन नियुक्त किया गया है। शिक्षा, कौशल विकास और उद्योग-सरकार समन्वय के क्षेत्र में अपने व्यापक अनुभव के साथ डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी का नेतृत्व मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास, नवाचार और सहयोगात्मक पहल को नई दिशा देगा। उनके नेतृत्व में सीआईआई एमपी राज्य में नीति संवाद, उद्योग वृद्धि, कौशल विकास और समावेशी आर्थिक प्रगति को गति देने के लिए कार्य करेगा। यह सम्मेलन “India’s Moment: Enterprise, Institution Building and Inclusive Growth” थीम पर आयोजित किया गया, जो विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप है। इस दौरान उद्योग की भूमिका, संस्थागत मजबूती और साझेदारी आधारित विकास मॉडल पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम के पब्लिक सेशन में “Advancing Industry, Powering Growth, Encouraging Collaboration” विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें राज्य में औद्योगिक विकास के नए अवसरों और संभावनाओं पर चर्चा की गई। इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण फायरसाइड चैट रहा, जिसमें भारती एंटरप्राइजेज के वाइस चेयरमैन श्री राकेश भारती मित्तल ने “India’s Moment: Enterprise, Institution Building and Inclusive Growth” विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने उद्योग नेतृत्व, संस्थागत विकास और वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका पर महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। यह वार्षिक बैठक इस बात का प्रमाण रही कि मध्य प्रदेश उद्योग, नवाचार और सहयोग के माध्यम से देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देने की दिशा में अग्रसर है।

सोना-चांदी में गिरावट के बाद तेजी से रिकवरी, जानें अभी कितने सस्ते हुए हैं

भोपाल सोने और चांदी के बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। ब्लैक थर्सडे की भारी गिरावट के बाद आज शुक्रवार को दोनों कीमती धातुओं में जोरदार रिकवरी देखने को मिली, जिससे निवेशकों के चेहरे पर राहत की मुस्कान लौट आई है। आज भारतीय सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना ₹1,47,660 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। यह पिछले दिन के मुकाबले ₹2,737 की तेजी दर्शाता है। हालांकि, सोना अभी भी ₹1.5 लाख के अहम स्तर से नीचे बना हुआ है, जिसे बाजार में खरीदारी का सुनहरा मौका माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, चांदी ने आज सबसे बड़ा धमाका किया है। चांदी की कीमत ₹2,37,678 प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो कल के मुकाबले ₹6,387 महंगी है। खास बात यह है कि चांदी अभी भी अपने ऑल टाइम हाई से करीब ₹1.80 लाख सस्ती मिल रही है, जिससे इंडस्ट्रियल डिमांड में तेजी की उम्मीद और मजबूत हो गई है। बाजार में अचानक क्यों लौटी तेजी? निचले स्तर पर जबरदस्त खरीदारी: कल की भारी गिरावट के बाद निवेशकों ने मौके का फायदा उठाया ग्लोबल टेंशन: खाड़ी देशों में तनाव ने सोने को फिर से सेफ हेवन बना दिया फेड के संकेत: अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद डॉलर-रुपया अस्थिरता: कमजोर रुपये ने घरेलू कीमतों को सपोर्ट दिया एक्सपर्ट्स की राय मार्केट विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बना रहेगा, तब तक सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। ऐसे में लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह समय “Buy on Dip” यानी गिरावट पर खरीदारी का बेहतरीन अवसर माना जा रहा है। क्या करें निवेशक? शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है लॉन्ग टर्म के लिए यह खरीदारी का अच्छा मौका हो सकता है निवेश से पहले बाजार की चाल पर नजर रखना जरूरी कुल मिलाकर: गिरावट के बाद सोना-चांदी ने जबरदस्त वापसी की है, लेकिन बाजार अभी भी अस्थिर है — ऐसे में समझदारी से निवेश ही मुनाफे की कुंजी है।

तेल बाजार में हलचल, ईरान संकट से पावर पेट्रोल के दाम उछले

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के बाद बनी ईंधन संकट की स्थिति का पहली बार पेट्रोल की कीमतों पर असर पड़ा है। देश में प्रीमियम यानी पावर पेट्रोल की कीमतें बढ़ा दी गई हैं। जानकारी के मुताबिक, प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में 2.30 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल डीलरों ने इस बात की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल यह कीमतें सिर्फ पावर पेट्रोल की कीमतों पर लागू होंगी और रेगुलर पेट्रोल की कीमत नहीं बढ़ाई गई है। इस बढ़ोतरी का असर मुख्य रूप से उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो हाई-ऑक्टेन या प्रीमियम पेट्रोल का इस्तेमाल करते हैं। बता दें कि प्रीमियम पेट्रोल का इस्तेमाल आमतौर पर बेहतर इंजन परफॉर्मेंस और ज़्यादा माइलेज के लिए किया जाता है। फिलहाल तेल कंपनियों की ओर से कीमतों में बढ़ोतरी का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। हालांकि जानकारों का मानना ​​है कि ईरान युद्ध के चलते ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और लॉजिस्टिक्स खर्च में बदलाव कीमत में बढ़ोतरी की मुख्य वजह हो सकती हैं।