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BMW ने भारत में लॉन्च की नई M2 CS, जानिए इसकी कीमत और शानदार फीचर्स

मुंबई लग्जरी कार निर्माता कंपनी BMW India ने भारतीय बाजार में अपनी ऑल-न्यू BMW M2 CS को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने परफॉर्मेंस कार को 1.66 करोड़ रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर उतारा है, जोकि स्टैंडर्ड BMW M2 से लगभग 65 लाख रुपये ज़्यादा है. इस अतिरिक्त कीमत के बदले, यह अब तक की सबसे पावरफुल M2 है, जिसमें एक अपग्रेडेड मोटर, हल्का कंस्ट्रक्शन और ऐसी परफॉर्मेंस मिलती है, जो बेमिसाल है।  आपकी जानकारी के लिए बता दें कि CS का मतलब 'Competition Sport' है. इसे एक स्टैंडर्ड M कार और हार्डकोर CSL मशीनों के बीच रखा गया है. खास बात यह है कि यह एक ऐसी रेस कार के सबसे करीब है जिसे आप सड़क पर चलाने के लिए खरीद सकते हैं।  BMW M2 CS का इंजन इस कार में मिलने वाले इंजन की बात करें तो यह काफी जाना-पहचाना है, लेकिन कहीं ज्यादा दमदार है. कार में एक 3.0-लीटर ट्विन-टर्बो स्ट्रेट-सिक्स इंजन लगाया गया है, जो जो BMW M4 GT3 Evo रेस कार को भी पावर देता है. यह इंजन ज़बरदस्त 530bhp की पावर और 650Nm का अधिकतम टॉर्क प्रदान करता है, जो स्टैंडर्ड BMW M2 से 50bhp और 50Nm ज़्यादा है. यह M4 Competition के लगभग बराबर ही है।  कंपनी का दावा है कि यह कार 0 से 100 km/h की रफ़्तार सिर्फ़ 3.8 सेकंड में पकड़ सकती है. अगर आप 'वन-फ़ुट रोलआउट' तरीके को भी शामिल करते हैं, तो यह समय घटकर लगभग 3.5 सेकंड हो जाता है. इसके बाद यह 0 से 200 km/h की रफ़्तार सिर्फ़ 11.7 सेकंड में हासिल कर लेती है, हालांकि इसकी टॉप स्पीड 302 km/h दर्ज की गई है।  खास बात यह है कि इसमें कोई मैनुअल गियरबॉक्स नहीं इस्तेमाल किया गया है, बल्कि इसकी जगह BMW का आठ-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन लगाया गया है. इसका इंजन कार के पिछले व्हील्स को पावर पहुंचाता है, जिसके लिए पिछले एक्सल पर रेसिंग से प्रेरित एक डिफ़रेंशियल का इस्तेमाल किया गया है।  BMW M2 CS का एक्सटीरियर खास बात यह है कि नई CS, स्टैंडर्ड M2 से लगभग 30 किलोग्राम हल्की है. इसकी रूफ, बूट लिड (जिसमें एक इंटीग्रेटेड डकटेल स्पॉइलर भी लगा है), रियर डिफ्यूज़र, मिरर कैप्स और यहां तक कि सेंटर कंसोल पर भी CFRP, यानी कार्बन फाइबर रीइन्फोर्स्ड प्लास्टिक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है।  BMW M2 CS का इंटीरियर इसके इंटीरियर में सबसे बड़ा अपग्रेड M कार्बन बकेट सीट्स के रूप में देखने को मिलता है. इसके अलावा, कार में CS की ब्रांडिंग पूरे केबिन में भी दिखाई देती है, और दरवाज़ों पर, सेंटर कंसोल पर और यहां तक कि Alcantara लेदर से लिपटे स्टीयरिंग व्हील पर भी CS बैजिंग मिलती है. स्टीयरिंग व्हील में खुद भी हल्के कार्बन-फाइबर पैडल शिफ्टर्स लगाए गए हैं। 

महिंद्रा ने Batman Edition को लेकर ग्राहकों के दबाव में वापस किए पैसे

 नई दिल्ली देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी महिंद्रा ने हाल ही में अपनी मशहूर इलेक्ट्रिक कार BE 6 का नया स्पेशल Batman Edition का दूसरा बैच लॉन्च किया था. लेकिन यह कदम कंपनी के लिए परेशानी का कारण बन गया. जहां नए ग्राहकों ने इसे उत्साह के साथ लिया, वहीं पहले बैच के खरीदार इस फैसले से नाराज हो गए. अब ग्राहकों की नाराजगी को देखते हुए कंपनी ने बड़ा फैसला लेते हुए बायबैक ऑफर पेश किया है। क्यों देना पड़ा बायबैक ऑफर दरअसल, कंपनी ने अगस्त 2025 में BE 6 बैटमैन एडिशन को 'लिमिटेड रन' मॉडल बताते हुए लॉन्च किया था और इसकी सिर्फ 999 यूनिट्स ही बनाने की बात कही थी. खास बात यह रही कि ये सभी यूनिट्स कुछ ही मिनटों में बिक गई थीं. लेकिन इसके करीब 7 महीने बाद, 6 मार्च 2026 को कंपनी ने इसी स्पेशल एडिशन का दूसरा बैच भी लॉन्च कर दिया. इससे पहले बैच के ग्राहकों को लगा कि कंपनी ने लिमिटेड एडिशन के नाम पर उनके साथ धोखा किया है. जिसके बाद सोशल मीडिया पर ग्राहकों ने इस फैसले की जमकर आलोचना की। ग्राहकों की नाराजगी के बावजूद, BE 6 बैटमैन एडिशन का दूसरा बैच भी लॉन्च होते ही मिनटों में बिक गया. इस बार कीमत में करीब 70,000 रुपये की बढ़ोतरी भी की गई थी, फिर भी डिमांड में कोई कमी नहीं दिखी. हालांकि, पहले खरीदारों का गुस्सा लगातार बढ़ता रहा। कंपनी का बड़ा फैसला ग्राहकों के रिस्पांस को देखते हुए महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अब पहले बैच के ग्राहकों के लिए फुल बायबैक ऑफर की घोषणा की है. यानी अगर कोई ग्राहक अपनी कार वापस करना चाहता है, तो वह कंपनी से संपर्क कर सकता है. इसके लिए ग्राहकों को अपने नजदीकी डीलरशिप से संपर्क करना होगा. कंपनी ने साफ किया है कि यह ऑफर 18 मार्च 2026 से सिर्फ 30 दिनों के लिए ही वैलिड रहेगा। Batman Edition में क्या है ख़ास BE 6 Batman Edition में डार्क नाइट थीम दी गई है, जो इसे एक यूनिक लुक देती है. कार के एक्सटीरियर पर Batman के बैज दिए गए हैं, वहीं केबिन के अंदर भी इसी थीम को फॉलो किया गया है. हालांकि, इसके पावरट्रेन में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसमें 79 kWh का बैटरी पैक मिलता है, जो एक बार चार्ज करने पर 682 किलोमीटर तक की रेंज देने में सक्षम है. इसमें रियर माउंटेड इलेक्ट्रिक मोटर दी गई है, जो 286 hp की पावर और 380 Nm का टॉर्क जनरेट करती है।

बाजार में उथल-पुथल और सप्लाई संकट से बढ़े दबाव, क्या क्रूड $200 तक जाएगा?

मुंबई ईरान के साथ चल रहे युद्ध और मिडिल ईस्ट में तनाव की वजह से ब्रेंट क्रूड ऑयल $110 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है. यूएस क्रूड (WTI) करीब $100 के आसपास आ गया है. मार्च 2026 में ब्रेंट की कीमत $113 से $116 तक पहुंच चुकी है, जो पिछले कुछ हफ्तों में 50-60% की बढ़ोतरी दिखाती है. ईरान-इजराइल तनाव ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज  में जहाजों की आवाजाही रोक दी है, जहां दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है. इससे वेस्ट एशिया से तेल निर्यात 60% से ज्यादा घट गया है. फिलहाल दोपहर 3 बजे ब्रेंट क्रूड की कीमत 8 फीसदी उछलकर 117 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है।  सीएनबीसी आवाज की रिपोर्ट में एनालिस्ट ने बताया है कि भले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब खुल जाए, लेकिन बाजार की स्थिति सामान्य होने में अभी काफी समय लगेगा. सिटीग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार, Q2 CY26 में ब्रेंट क्रूड की कीमत औसतन 130 डॉलर प्रति बैरल हो सकती है. ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या फिलहाल तेल $200 प्रति बैरल तक जा सकती है? चलिए जानते हैं. क्या तेल $200 प्रति बैरल तक जा सकता है? कई विशेषज्ञ कहते हैं कि यह अब असंभव नहीं रहा. ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाकारी ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो तेल $200 तक पहुंच सकता है, क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा बिगड़ रही है. ईरान ने कहा है कि अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगियों के लिए एक भी लीटर तेल नहीं गुजरेगा. होर्मुज सबसे बड़ा खतरा है क्योंकि यहां अगर ब्लॉकेज हुआ तो सप्लाई तुरंत टूट जाएगी।  विशेषज्ञ अमृता सेन (एनर्जी एस्पेक्ट्स) का कहना है, “यह अब सिर्फ रिस्क प्रीमियम नहीं है, असली सप्लाई डिसरप्शन हो रहा है.” बॉब मैकनैली और हेलिमा क्रॉफ्ट जैसे एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर बड़ा डिसरप्शन हुआ तो कीमतें तेजी से उछल सकती हैं, क्योंकि स्पेयर कैपेसिटी बहुत कम है. कुछ एनालिस्ट्स कहते हैं कि $150-$200 तक जाना अब “अनथिंकेबल” नहीं रहा. हालांकि अमेरिकी एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट ने कहा है कि $200 “अनलाइकली” है, लेकिन पूरी तरह नामुमकिन नहीं।  करेंसी पर दबाव बढ़ेगा अगर होर्मुज बंद रहा तो ग्लोबल सप्लाई चेन बिगड़ जाएगी, महंगाई बढ़ेगी और आर्थिक मंदी आ सकती है. भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, करेंसी पर दबाव बढ़ेगा और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आएगा. भारत ने अपने टैंकरों को सुरक्षित रखने के लिए कदम उठाए हैं और डिप्लोमैसी से जहाजों को पास करवाया है. लेकिन अगर युद्ध लंबा चला तो गैसोलीन $6-7 प्रति गैलन तक जा सकती है, जो आम आदमी पर बोझ डालेगा।  इतिहास में 2008 में ब्रेंट $147 तक पहुंचा था (आज के मुताबिक $211 के बराबर), और 1973-74 के ऑयल क्राइसिस में भी कीमतें कई गुना बढ़ी थीं. आज का बाजार पहले से ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि कई जगहों पर डिसरप्शन एक साथ हो सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार अब अनिश्चितता नहीं, बल्कि असली शॉक प्राइस कर रहा है. डिप्लोमेसी, स्ट्रैटेजिक रिजर्व रिलीज या मिलिट्री एक्शन से राहत मिल सकती है, लेकिन अगर तनाव बढ़ा तो $200 तेल दुनिया को अलग ही दौर में ले जाएगा. ऐसे में महंगाई, मंदी और ग्लोबल पावर बैलेंस बदल सकता है। 

FASTag यूजर्स को झटका: 1 अप्रैल से बढ़ेगा एनुअल पास का दाम, अभी ₹3000 में मौका

मुंबई नेशनल हाईवे के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने FASTag एनुअल पास शुरू किया था। इसे 6 महीने के अंदर 50 लाख से ज्यादा यूजर्स ने एक्टिव कराया हैं। इस दौरान 26.55 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड किए गए हैं। NHAI ने बताया था कि नेशनल हाईवे (NH) नेटवर्क पर होने वाले कुल कार ट्रांजैक्शन में से लगभग 28% अब FASTag एनुअल पास के जरिए किए जा रहे हैं, जो नेशनल हाईवे यूजर्स के बीच FASTag एनुअल पास की बढ़ती पसंद को दिखाता है। हालांकि, लोगों की यही पसंद आप उनकी जेब पर थोड़ी सी भारी पड़ेगी। दरअसल, NHAI ने 2026-27 फाइनेंशियल ईयर के लिए इस पास की कीमत बढ़ाकर 3,075 रुपए करने का फैसला किया है। यह बदलाव 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा। अभी इस पास की कीमत 3,000 रुपए है।   यह नई कीमत 'राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम 2008' में बताए गए टोल रिवीजन मैकेनिज्म के अनुसार तय की गई है। यही नियम राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल शुल्क को नियंत्रित करता है। FASTag एनुअल पास नॉन-कमर्शियल व्हीकलके लिए है और इसका इस्तेमाल भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के नेटवर्क पर मौजूद लगभग 1,150 टोल प्लाजा पर किया जा सकता है। व्हीकल में एक वैलिड FASTag लगा होना जरूरी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 56 लाख से ज्यादा वाहन चालक पहले ही इस एनुअल पास प्रोग्राम में अपना रजिस्ट्रेशनकरवा चुके हैं। FASTag एनुअल पास क्या है? सबसे पहले समझते हैं कि FASTag एनुअल पास क्या है? तो ये सालाना टोल पास एक तरह की प्रीपेड टोल स्कीम है, जिसे खास तौर से कार, जीप और वैन जैसे नॉन-कमर्शियल प्राइवेट व्हीकल के लिए तैयार किया गया है। नए पास की घोषणा करते समय नितिन गडकरी ने कहा था कि इसका उद्देश्य 60 किलोमीटर के दायरे में स्थित टोल प्लाजा से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करना और सिंगल, अफॉर्जेबल लेनदेन के माध्यम से टोल भुगतान को सरल बनाना है। टोल प्लाजा पर वेटिंग टाइम को कम करके, भीड़भाड़ को कम करके और विवादों को कम करके, वार्षिक पास का उद्देश्य लाखों प्राइवेट व्हीकल ओनर्स के लिए एक फास्ट और आसान यात्रा का अनुभव देना है। खास बात ये है कि इसके लिए लोगों को नया टैग खरीदने के की जरूरत नहीं है, बल्कि ये आपके मौजूदा FASTag से जुड़ जाएगा। इसकी कंडीशन ये है कि आपका मौदूजा FASTag एक्टिव होना चाहिए और आपके व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर से जुड़ा हो। यह योजना केवल NHAI और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर लागू होगा। इसके लिए बार-बार ऑनलाइन रिचार्ज करने की आवश्यकता नहीं है, जिससे यह डेली पैसेंजर्स के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। यह पास नॉन-ट्रांसफरेबल है। इसे सिर्फ रजिस्टर्ड व्हीक के साथ ही इस्तेमला कर पाएंगे। FASTag एनुअल पास कहां काम करेगा? FASTag एनुअल पास केवल NHAI द्वारा ऑपरेटेड राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (NE) पर स्थित टोल प्लाजा पर ही काम करता है। जैसे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, मुंबई-नासिक, मुंबई-सूरत और मुंबई-रत्नागिरी मार्ग आदि। राज्य राजमार्गों या नगरपालिका टोल सड़कों पर आपका FASTag सामान्य रूप से काम करेगा और टोल सामान्य रूप से वसूला जाएगा। जैसे, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे (समृद्धि महामार्ग), अटल सेतु, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे और अहमदाबाद-वडोदरा एक्सप्रेसवे। ये सभी राज्य प्राधिकरणों द्वारा संचालित होते हैं। ऐसे एक्टिवेट करें फास्टैग एनुअल पास FASTag एनुअल पास एक्टिवेट करने को लेकर इंडियन हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (IHMCL) की तरफ एक नोटिफिकेशस जारी किया गया है। IHMCL ने नोटिफिकेशन में इस एनुअल पास से जुड़े सभी सवालों के जवाब दिए गए हैं। साथ ही, फास्टैग के एनुअल पास को एक्टिवेट करने का तरीका भी बताया है। IHMCL के मुताबिक, FASTag एनुअल पास को सिर्फ Rajmargyatra (राज मार्ग यात्रा) मोबाइल ऐप और NHAI पोर्टल पर जाकर ही एक्टिवेट किया जा सकेगा। इस पास को एक्टिवेट करने के लिए कार चालक को पहले अपने व्हीकल और उसके ऊपर लगे FASTag की एलिजिबिलिटी को वेरिफाई करना होगा। एक बार वेरिफिकेशन्स कंप्लीट होने के बाद 3000 रुपए का पमेंट करना होगा। यूजर द्वारा किया गया 3000 रुपए की पेमेंट कंफर्मेशन होने के बाद 2 घंटे के अंदर FASTag एनुअल पास एक्टिवेट हो जाएगा। यह एक्टिवेशन आपके मौजूदा फास्टैग पर ही होगा। FASTag एनुअल पास के लिए आपको न्यू फास्टैग खरीदने की जरूरत नहीं है। फास्टैग एनुअल पास पर पेमेंट करने से अगले 1 साल तक या फिर 200 टोल पाल करने तक की वैलिडिटी मिलेगी। 7000 रुपए की बचत होगी इस पास की कीमत 3000 रुपए रखी गई है, जिसमें 200 यात्राएं शामिल हैं। एक यात्रा का मतलब एक बार टोल प्लाजा पार करना है। यानी प्रति टोल खर्च सिर्फ 15 रुपए ही खर्च होंगे। अभी 200 बार टोल पार करने पर करीब 10,000 रुपए खर्च होते हैं, लेकिन नई स्कीम में यह काम सिर्फ 3000 रुपए ही लगेंगे। इसका मतलब है कि पैसेंजर व्हीकल चलाने वालों की करीब 7000 रुपए की सीधी बचत होगी।

बढ़ती ईंधन कीमतों पर लगाम: Italy ने पेट्रोल-डीजल टैक्स कम कर दी बड़ी राहत

मुंबई ग्लोबल लेवल पर बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच इटली सरकार ने आम नागरिकों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों से बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी में कटौती की घोषणा की है। यह फैसला मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण बढ़ी ऊर्जा लागत के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। फ्यूल महंगा होने पर सरकार का एक्शन इटली के उप प्रधानमंत्री माटेओ साल्विनी ने बताया कि हाल के हफ्तों में ग्लोबल ऑयल प्राइस में आई तेजी का सीधा असर देश के नागरिकों पर पड़ा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कर में राहत देने का फैसला किया है, ताकि आम लोगों के खर्च का बोझ कम किया जा सके। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है , जब ऊर्जा कीमतों में उछाल ने पूरे यूरोप में महंगाई को बढ़ा दिया है। कैबिनेट बैठक में राहत पैकेज पर चर्चा प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सैकड़ों करोड़ यूरो के राहत पैकेज पर विचार किया गया। यह पैकेज सीमित समय के लिए लागू किया जाएगा और इसका मकसद परिवारों और उपभोक्ताओं को ऊर्जा लागत के झटके से बचाना है। सरकार का मानना है कि यह कदम घरेलू खर्च को नियंत्रित करने और आर्थिक दबाव को कम करने में मदद करेगा। तेल कंपनियों से कीमतें नियंत्रित रखने की अपील सरकार ने कर कटौती के साथ-साथ तेल कंपनियों से भी सहयोग मांगा है। उप प्रधानमंत्री साल्विनी ने बताया कि सरकार ने डीजल के लिए अधिकतम कीमत करीब 1.90 यूरो (करीब ₹203.28) प्रति लीटर तय करने का सुझाव दिया है, ताकि बाजार में अनियंत्रित बढ़ोतरी को रोका जा सके। इसके जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कर राहत का फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचे। ईंधन कीमतों में क्यों आया उछाल? मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बाद वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी आई है। इटली के उद्योग मंत्रालय के अनुसार यहां डीजल की औसत कीमत 2.10 यूरो प्रति लीटर और पेट्रोल 1.87 यूरो प्रति लीटर पर पहुंच गया है। यह स्तर आम लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है। निगरानी और सट्टेबाजी पर नजर सरकार ने फ्यूल सप्लाई चेन पर निगरानी भी तेज कर दी है। एनी एसपीए और तमोइल इटालिया जैसी प्रमुख तेल कंपनियों के साथ बैठक में यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि कीमतों में बढ़ोतरी का कारण वास्तविक लागत हो, न कि सट्टेबाजी। इसके साथ ही सरकार कीमतों की नियमित समीक्षा कर रही है, ताकि किसी तरह की अनियमितता को रोका जा सके। अतिरिक्त मुनाफे पर टैक्स की तैयारी सरकार ऊर्जा कंपनियों के अतिरिक्त मुनाफे पर टैक्स लगाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। हालांकि, फिलहाल उम्मीद जताई जा रही है कि स्थिति नियंत्रण में रहेगी और इस कदम की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्यों ज्यादा प्रभावित है इटली? इटली यूरोप के उन देशों में शामिल है जहां फ्यूल पर टैक्स पहले से ही ज्यादा है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो इसका असर यहां ज्यादा तेजी से दिखता है। यही वजह है कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा। कुल मिलाकर, इटली सरकार का यह फैसला बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच आम लोगों को राहत देने की दिशा में अहम कदम है। वैश्विक तनाव और महंगे तेल के दौर में ऐसे उपाय अन्य देशों के लिए भी उदाहरण बन सकते हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह कदम महंगाई को काबू में रखने में सफल होता है या नहीं।

एक अटैक और मचा हड़कंप: यूरोप में गैस 35% महंगी, वैश्विक चिंता बढ़ी

 मुंबई मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों की ऊर्जा इकाइयों पर ईरान के हमलों के मद्देनजर वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी उछाल आया। गुरुवार को यूरोपीय गैस के बेंचमार्क फ्यूचर्स में करीब 35% तक की तेजी देखने को मिली, जिससे बाजार में हड़कंप मच गया। बता दें कि तेल के अंतरराष्ट्रीय मानक 'ब्रेंट क्रूड' की कीमत युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 60 प्रतिशत बढ़ गई है। क्या है ताजा उछाल की वजह? दरअसल, ईरान ने कतर के रास लाफान औद्योगिक क्षेत्र सहित पड़ोसी देशों के ऊर्जा केंद्रों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किये, जिससे वहां की एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस फैसलिटीज को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। यह प्लांट वैश्विक एलएनजी आपूर्ति का लगभग 20% उत्पादन करता है, इसलिए इसका प्रभावित होना पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। इससे पहले भी इसी महीने ड्रोन हमले के बाद इस प्लांट से सप्लाई रोक दी गई थी लेकिन ताजा हमलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। आपको बता दें कि रास लाफान, कतर का प्रमुख एलएनजी उत्पादन केंद्र है, जहां गैस प्रसंस्करण, शोधन एवं बिजली उत्पादन की प्रमुख फैसलिटीज स्थित हैं। इसका बंदरगाह विश्व के सबसे बड़े औद्योगिक ऊर्जा परिसरों में से एक है और दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यात टर्मिनल शामिल है। इसके अलावा, अबुधाबी के हबशान गैस प्लांट भी एक हमले में मलबे के गिरने से क्षतिग्रस्त हो गए और उन्हें बंद करना पड़ा। इससे आपूर्ति पर और दबाव बढ़ गया है। यूरोप के लिए टेंशन विशेषकर यूरोप के लिए, यह तनाव ऐसे समय में आया है जब इसके स्टोरेज टैंक खाली हो चुके हैं। इसका मतलब है कि उसे इन टैंकों को फिर से भरने के लिए इस गर्मी में और अधिक एलएनजी कार्गो खरीदना होगा, जिससे उसे कम उपलब्ध आपूर्ति के लिए एशिया के खरीदारों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ेगी। ग्लोबल रिस्क मैनेजमेंट के मुख्य विश्लेषक अर्ने लोहमान रासमुसेन ने कहा- कतर से एलएनजी की आपूर्ति सैद्धांतिक रूप से महीनों तक और सबसे खराब स्थिति में, वर्षों तक बंद रह सकती है। गैस बाजार के लिए संकट केवल युद्ध समाप्त होने और होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से खत्म नहीं हो जाएगा। ट्रंप की चेतावनी ताजा हमलों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर कतर पर दोबारा हमला हुआ तो वे उसका पूरा गैस फील्ड को उड़ा देंगे जो ईरान ने कभी सोचा नहीं होगा। ट्रंप ने कहा-मैं इस पैमाने की हिंसा और विनाश की अनुमति नहीं देना चाहता क्योंकि इसका ईरान के भविष्य पर लॉन्ग टर्म में असर पड़ेगा। इस बीच, खबर है कि ट्रंप प्रशासन तेल आपूर्ति बढ़ाने के उपाय तलाश रहा है। इसी कड़ी में अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों में ढील देते हुए कहा कि अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला की सरकारी तेल एवं गैस कंपनी के साथ कारोबार करने की अनुमति होगी।  

कीमती धातुओं में भूचाल: चांदी में भारी गिरावट, सोने के दाम भी धड़ाम

नई दिल्ली सोने और चांदी के भाव में आज गुरुवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, आज 24 कैरेट के सोने का भाव 151,637 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर मिल रहा है। इससे पहले बीते बुधवार को यह 1,54,879 रुपये प्रति 10 ग्राम पर मिल रहा था। यानी आज यह 3242 रुपये सस्ता हुआ है। 22 कैरेट के गोल्ड के भाव की बात करें तो आज यह 1,51,030 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है और इसमें 3,229 रुपये की गिरावट देखी गई है। बता दें कि बुधवार को इसकी कीमत 1,54,259 रुपये थी। वहीं, 18 कैरेट वाला गोल्ड आज गुरुवार को 138,899 रुपये प्रति 10 गाम के भाव पर बिक रहा है। इसका पिछला बंद प्राइस 1,41,869 रुपये प्रति 10 ग्राम था। यानी आज यह 2,970 रुपये सस्ता हुआ है। वहीं, bullions.co.in के मुताबिक, आज 24 कैरेट के सोने के दाम में 4350 रुपये की गिरावट देखी गई है और यह 149,450 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। आज का चांदी का भाव आईबीजेए के मुताबिक, अगर चांदी की कीमत की बात करें तो आज एक किलो चांदी की कीमत 2,36,809 रुपये है। इससे पहले बीते बुधवार को यह 2,49,907 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही थी। यानी आज चांदी के दाम में 13,098 रुपये प्रति किलो की गिरावट देखी गई है। वहीं, बुलियंस.को पर चांदी 235,050 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही है। इसमें 13120 रुपये की गिरावट आई है। बता दें कि आईबीजेए दिन में दो बार सोने- चांदी के रेट जारी करता है। MCX पर सोने-चांदी के रेट गुरुवार के कारोबारी सत्र में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का ऐलान और वैश्विक निवेशकों की सतर्कता रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड की कीमत करीब 1.22% गिरकर 4,836 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जबकि चांदी की कीमत 2.25% से ज्यादा टूटकर 75.75 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। मार्च महीने में अब तक सोना करीब 4% कमजोर हुआ है, वहीं चांदी में लगभग 16% की बड़ी गिरावट देखी गई है। फेड के फैसले का असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने लगातार दूसरी बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। 18 मार्च को हुई फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक में यह फैसला लिया गया। फिलहाल फेडरल फंड्स रेट 3.5% से 3.75% के दायरे में बना हुआ है। यह फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा, क्योंकि मध्य-पूर्व में जारी तनाव के चलते महंगाई बढ़ने का खतरा बना हुआ है। इससे पहले सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर 2025 में फेड लगातार तीन बार 0.25% की दर से कटौती कर चुका था। निवेशकों की नजर फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल की टिप्पणियों पर भी टिकी रही, जिसने बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई। मध्य-पूर्व तनाव और कच्चे तेल की कीमतें मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष भी बुलियन बाजार को प्रभावित कर रहा है। United States और Israel द्वारा Iran पर हमले और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के चलते तनाव तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है। इस कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है और निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। घरेलू बाजार का हाल भारतीय वायदा बाजार MCX पर सोना लगभग ₹1,55,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि चांदी ₹2,50,000 प्रति किलोग्राम के करीब बनी हुई थी। विशेषज्ञ की राय लेमोन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च एनालिस्ट Gaurav Garg के अनुसार, “कीमती धातुओं में हालिया उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण फेड की नीति से पहले निवेशकों की सतर्कता और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते ऊंची तेल कीमतों से जुड़ी महंगाई की चिंता है।” फिलहाल बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और निवेशक आगे फेड की नीति संकेतों और वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं।  

निवेशकों को बड़ा झटका: बाजार धड़ाम, सेंसेक्स-निफ्टी में रिकॉर्ड गिरावट

मुंबई ईरान की ओर से कतर के बड़े एलएनजी प्लांट पर हमले और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी ने ग्लोबल टेंशन को बढ़ा दिया है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा है। हालात इतने बिगड़े कि गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 2,496.89 अंक का गोता लगाकर 74,207.24, एनएसई निफ्टी 775.65 अंक की गिरावट के साथ 23,002.15 अंक पर बंद हुआ। दिग्गज स्टॉक्स भी धराशायी भारतीय शेयर में आए भूचाल के बीच गुरुवार को कई प्रमुख और मिडकैप शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। बड़े-बड़े दिग्गज स्टॉक्स भी धराशायी हो गए। सेंसेक्स पर इटरनल 5.46, बजाज फाइनेंस 5.34, महिंद्रा एंड महिंद्रा 4.86, एलएंडटी 4.57, एचडीएफसी बैंक 4.35, इंडिगो 4.21, बजाज फिनसर्व 4.08 प्रतिशत लुढ़क गए। केमिकल सेक्टर की कंपनी Camlin Fine Sciences में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज हुई, जिसका शेयर करीब 6.87% टूटकर ₹120.60 पर आ गया। वहीं राम-कृष्ण Forgings में 3.92% और सोलर इंडस्ट्री में 3.65% की गिरावट देखी गई। इस गिरावट का असर बड़े और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर भी पड़ा है। हनीवेल करीब 2.05% टूटा, जबकि फार्मा सेक्टर की दिग्गज कंपनी सिप्ला में भी 2% से अधिक गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट की आंधी में शुगर सेक्टर के कुछ शेयर डटे रहे। अवध शुगर एंड एनर्जी (2.52% ऊपर) और बलरामपुर चीनी मिल्स (1.90% ऊपर) हैं। शेयर मार्केट में चौतरफा गिरावट है। बीएसई का 30 शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स 2164 अंको का गोता लगाकर 74,539 पर आ गया है। निफ्टी 672 अंकों के नुकसान के साथ 23,105 पर पहुंच गया है। निफ्टी मिड कैप, स्मॉल कैप इंडेक्स में 2 फीसद से अधिक की गिरावट है। निफ्टी के 50 शेयरों में से केवल एक ओएनजीसी ही हरे निशान पर है। सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान पर हैं।  शेयर मार्केट में आए भूचाल से सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश हो गए हैं। बाजार में चौतरफा गिरावट है। निफ्टी मिड कैप, स्मॉल कैप इंडेक्स में 2 फीसद से अधिक की गिरावट है। निफ्टी के 50 शेयरों में से केवल एक ओएनजीसी ही हरे निशान पर है। इसमें 1.15 प्रतिशत की तेजी है। सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान पर हैं। निफ्टी में श्रीराम फाइनेंस 6.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ टॉप लूजर है। इटरनल में 5.22, बजाज फिनसर्व में 4.71, एलएंडटी में 4.27 और टाटा मोटर्स में 4.20 प्रतिशत की गिरावट है। शेयर मार्केट की गाड़ी गिरावट की पटरी से उतरने का नाम ही नहीं ले रही। सेंसेक्स अभी 1808 अंकों की गिरावट के साथ 74895 पर है। जबकि, निफ्टी 587 अंकों का गोता लगाकर 23190 पर ट्रेड कर रहा है। सेंसेक्स में अभी भी सभी स्टॉक्स लाल निशान पर हैं और अब इटरनल 5.15 पर्सेंट की गिरावट के साथ टॉप लूजर। बजाज फाइनेंस में 4.55 पर्सेंट और एलएंडटी में 4.16 प्रतिशत का नुकसान है। एचडीएफसी बैंक में गिरावट अब 3.71 प्रतिशत की रह गई है। जबकि, महिंद्रा एंड महिंद्रा और बजाज फिनसर्व भी करीब 4 फीसद लुढ़क गए हैं। शेयर मार्केट में अभी भी गिरावट बड़ी है। सेंसेक्स अभी 1664 अंकों की गिरावट के साथ 75039 पर है। जबकि, निफ्टी 530 अंकों का गोता लगाकर 23247 पर ट्रेड कर रहा है। सेंसेक्स में अभी भी सभी स्टॉक्स लाल निशान पर हैं और अब इटरनल 5.26 पर्सेंट की गिरावट के साथ टॉप लूजर। शेयर मार्केट में हाहाकार के बीच बैंक निफ्टी में 2.70 प्रतिशत की गिरावट है। फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में भी 2.86% का नुकसान है। निफ्टी ऑटो इंडेक्स 2.65 प्रतिशत नीचे है। आईटी में 2.38 और एफएमसीजी में 1.80% की गिरावट है। मीडिया में 0.94, मेटल में 1.61 प्रतिशत का नुकसान है। पीएसयू बैंक 2.09, प्राइवेट बैंक 2.77, फार्मा 1.48, हेल्थ केयर 1.61, कंज्यूमर ड्यूराबेल्स 2.86 प्रतिशत लुढ़का है। सेंसेक्स अभी 1741 अंकों की गिरावट के साथ 74963 पर है। जबकि, निफ्टी 534 अंकों का गोता लगाकर 23241 पर ट्रेड कर रहा है। शेयर मार्केट में हाहाकार के बीच सेंसेक्स अभी 1716 अंकों की गिरावट के साथ 74988 पर है। जबकि, निफ्टी 516 अंकों का गोता लगाकर 23261 पर ट्रेड कर रहा है। एनएसई पर केवल 400 स्टॉक्स ही ग्रीन जोन में हैं। 2303 शेयरों में गिरावट है। जबकि, सेंसेक्स ब्लड बाथ कर रहा है। सभी शेयर लाल हैं और एचडीएफसी बैंक टॉप लूजर। शेयर मार्केट में आज भूचाल है। सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश हो गए हैं। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1953 अंकों की गिरावट के साथ 74751 पर खुला। जबकि, निफ्टी 589 अंकों का गोता लगाकर 23198 पर खुला।

चांदी में आई बड़ी गिरावट, सोने में भी मंदी, क्या आर्थिक संकट का संकेत है?

 नई दिल्ली शेयर बाजार में भारी गिरावट के बीच गुरुवार को सोने-चांदी की कीमतें भी धाराशायी हो गईं हैं. MCX पर चांदी की कीमतों में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी जा रही है. सोना भी करीब 2.50 फीसदी तक फिसल गया है। गुरुवार दोपहर साढ़े 12 बजे अचानक चांदी की कीमतें टूटने लगीं, और देखते ही देखते 12000 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई. जबकि सोने के भाव में करीब 4500 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई है। दरअसल, मिडिल ईस्ट का संकट गहाराता जा रहा है, पहले ईरान के तेल इंफ्रा पर अमेरिका ने हमला किया, अब बदले में ईरान ने भी कतर से बड़े ऑयल रिफाइनरी प्लांट पर हमला कर दिया है. जिससे भारी नुकसान का अनुमान  लगाया जा रहा है. इस बीच कच्चे तेल क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। चांदी में बड़ी गिरावट के पीछे ये कारण सोने-चांदी में गिरावट के कई कारण हैं. लेकिन मुख्यतौर पर अमेरिका का एक फैसला है. बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला लिया, फेडरल रिजर्व ने संकेत दिए कि इस साल अब ब्याज दरों में कटौती की संभावना सीमित है. फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि ग्लोबल तनाव के चलते आर्थिक स्थिति काफी खराब है, इस फैसले के बाद ग्लोबल मार्केट में सोने-चांदी की जमकर पिटाई हुई। बता दें, पिछले करीब दो साल से सोने-चांदी में एकतरफा रैली देखी गई थी. 29 जनवरी 2026 को चांदी (Silver) की कीमत रिकॉर्ड 4.20 लाख रुपये प्रति किलो पहुंच गई थी. लेकिन उसके बाद लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. 2 फरवरी 2026 चांदी की कीमत गिरकर 2.25 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी. इसके पीछे मुनाफावसूली कारण थे। युद्ध के बीच सोने-चांदी में भी बिकवाली हावी  लेकिन अब एक बार फिर चांदी इसी कीमत के आसपास पहुंच गई है. चांदी अब 29 जनवरी की हाई से करीब 1.90 लाख रुपये प्रति किलो सस्ती हो चुकी है. फिलहाल चांदी की कीमत MCX पर 2.35 लाख प्रति किलो के आसपास बनी हुई है. जबकि सोना गुरुवार को ट्रेड के दौरान 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे से फिसल गया है। बता दें, अक्सर ये देखा गया है कि ग्लोबल संकट के दौरान खासकर जब युद्ध चल रहा हो तो निवशक ऐसे माहौल में सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश मानते हैं, लेकिन इस बार थोड़ी उल्टी तस्वीर देखने को मिल रही है।

तेल की जंग ने मचाया Stock Market Crash, सेंसेक्स में 1900 अंक की बड़ी गिरावट, जापान से कोरिया तक असर

मुंबई  शेयर बाजार में बीते तीन दिन से जारी तेजी पर ब्रेक (Stock Market Crash) लग गया है. मिडिल-ईस्ट में जारी जंग अब एक बड़े तेल युद्ध (Oil War) का रूप लेती जा रही है. खाड़ी देशों में मौजूद तेल-गैस फील्ड्स पर दनादन मिसाइल अटैक होने से इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम में आग लग गई है और अचानक Brent Crude Price 113 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. इसके चलते एशियाई शेयर बाजारों में कोहराम मचा नजर आया, तो भारतीय शेयर बाजार खुलने के साथ ही क्रैश हो गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स (BSE Sensex) गुरुवार को ओपनिंग के साथ ही 1900 अंक का गोता लगा गया. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) भी 550 अंक से ज्यादा टूटकर ओपन हुआ। खुलते ही क्रैश हुए सेंसेक्स-निफ्टी  सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने पर बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,704 की तुलना में फिसलकर 74,750 पर ओपन हुआ और फिर शुरुआती कुछ मिनटों में ही ये गिरकर 74,685 तक टूट गया. सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते एनएसई निफ्टी का भी ऐसा ही बुरा हाल नजर आया और ये अपने पिछले बंद 23,777 की तुलना में बड़ी गिरावट लेकर 23,197 पर खुला। विदेशी बाजारों में भी मचा कोहराम भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के संकेत पहले से ही विदेशों से मिल रहे थे. दरअसल, ईरान के कतर में स्थित सबसे बड़े एलएनजी प्लांट पर हमले और खाड़ी देशों के काउंटर अटैक के चलते अचानक क्रूड की कीमत तेज रफ्तार से भागते हुए 113 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. इससे बाजारों की चिंता बढ़ी और एशियाई बाजारों में कोहराम मच गया। जापान का निक्केई इंडेक्स 1500 अंक से ज्यादा टूटकर कारोबार कर रहा था, तो हांगकांग का हैंगसेंग 500 अंक से ज्यादा की गिरावट लिए नजर आया. साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी 1.50 फीसदी से ज्यादा फिसला. इसके अलावा अन्य विदेशी बाजार भी लाल रंग में रंगे हुए नजर आए। सबसे ज्यादा बिखरे ये 10 शेयर लंबी गिरावट के बाद शेयर बाजार में बीते तीन दिनों से रौनक देखने को मिल रही थी, लेकिन मिडिल ईस्ट युद्ध में वो भी साफ हो गई और फिर से निवेशकों में भगदड़ नजर आई. गुरुवार को शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा बिखरने वाले शेयरों को देखें, तो बीएसई लार्जकैप में शामिल HDFC Bank Share (4.50%), LT Share (3.50%), Eternal Share (3%), Bajaj Finance Share (2.80%), Axis Bank Share (2.75%), Asian Paints Share (2.60%), Kotak Bank Share (2.56%), M&M Share (2.40%), Adani Ports Share (2.35%) और IndiGo Share (2.30%) टूटकर कारोबार कर रहे थे। उछल पड़ा बाजार के डर का पैमाना शेयर बाजार में गुरुवार को आई इस बड़ी गिरावट के बीच सबसे ज्यादा बैंकिंग और ऑटो शेयर बिखरे हुए नजर आए हैं. Nifty Bank अपनी ओपनिंग के साथ ही करीब 3 फीसदी के आसपास टूट गया, तो वहीं निफ्टी ऑटो में भी लगभग इतनी ही गिरावट देखने को मिली है। खात बात ये है कि मिडिल-ईस्ट में Oil War तेज होने के चलते शेयर बाजार के डर के पैमाने यानी India VIX में अचानक उछाल आया है, जो बीते तीन दिनों से लगातार गिर रहा था. इसमें एकदम से 15% के आसपास का उछाल आ गया, जो बाजार में आने वाले दिनों में तगड़े उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।