samacharsecretary.com

लीजेंडरी Tata Sierra भारत में लॉन्च, 22 साल बाद हुई वापसी और कीमत भी हुई घोषित

 नई दिल्ली Tata Sierra Launch Price & Features: नब्बे के दशक में SUV का मतलब ताकत, स्टाइल और शोहरत था, और सिएरा ने हर हिंदुस्तानी को वही एहसास दिया था. साल बीत गए, तकनीक बदली, लेकिन दिल के किसी कोने में सिएरा की वो चौकोर खिड़कियाँ, दमदार बॉडी और स्ट्रेट स्टांस आज भी जिंदा है. किसी भी भारतीय कंपनी द्वारा तैयार की गई पहली देसी एसयूवी 'टाटा सिएरा' ने आज एक बार फिर से वापसी की है. टाटा मोटर्स ने आज मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम Tata Sierra को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया है.  कीमत और बुकिंग आकर्षक लुक और दमदार इंजन से लैस इस एसयूवी की शुरुआती कीमत 11.49 लाख रुपये, (एक्स-शोरूम) तय की गई है. कंपनी ने इसे इंट्रोडक्ट्री प्राइस के साथ लॉन्च किया है, यानी भविष्य में इसकी कीमत में इजाफा होगा. कंपनी का कहना है कि, इसकी बुकिंग आगामी 16 दिसंबर से शुरू होंगी और एसयूवी की डिलीवरी 15 जनवरी 2026 से शुरू की जाएगी.  22 साल बाद लीजेंड की वापसी टाटा सिएरा को कंपनी ने पहली बार 1991 में लॉन्च किया था. स्टाइलिश लुक, कर्व्ड ग्लॉस बॉडी, पावरफुल इंजन के साथ आने वाली सिएरा के लिए उस वक्त शायद भारत तैयार नहीं था. साल 2003 आते-आते इसे डिस्कंटीन्यू कर दिया गया. कहा जाता है कि, ये एसयूवी अपने समय से कहीं आगे थी. टाटा मोटर्स के सीईओ शैलेश चंद्रा ने भी आज लॉन्च इवेंट के दौरान कहा कि, "अब इंडिया टाटा सिएरा के लिए तैयार है. ये महज एक एसयूवी नहीं बल्कि एक लीजेंड की वापसी है, जो मॉडर्न तकनीक के साथ फिर से बाजार में एंट्री करने जा रहा है." तो आइये देखें कैसी है नई टाटा सिएरा-  लुक और डिज़ाइन नई Tata Sierra का स्टांस दमदार और ऊँचा है, जो इसे सड़क पर एक प्रीमियम और पावरफुल लुक देता है. फ्रंट में एलईडी डीआरएल पूरी चौड़ाई में फैला हुआ है, जबकि ग्रिल को क्लोज्ड रखा गया है जिस पर टाटा का लोगो उभरकर दिखता है. हेडलाइट्स नीचे की ओर लगाए गए हैं और सिल्वर फिनिश वाले स्किड प्लेट के साथ फ्रंट प्रोफाइल को एक एडवेंचरस टच देते हैं. एसयूवी के साइड प्रोफाइल पर गौर करें तो सिएरा अपनी पुरानी पहचान कायम रखे हुए है. जैसा कि नब्बे के दशक में पेश किए गए मॉडल में देखने को मिलता था. बॉक्सी डिज़ाइन और पीछे की ओर मौजूद ग्लास पैनल पुराने सिएरा मॉडल की याद दिलाते हैं. नई अलॉय व्हील डिज़ाइन, फ्लश डोर हैंडल्स और मजबूत शोल्डर लाइन इसे और भी सॉलिड लुक देते हैं. टाटा सिएरा का रियर प्रोफाइल यानी का पीछे का हिस्सा इसे एक प्रॉपर एसयूवी डिज़ाइन देता है. इसके पिछले हिस्से में 'एंड टू एंड' कनेक्टेड एलईडी टेललैंप्स और ‘SIERRA’ बैजिंग दी गई है. जो एसयूवी को मॉडर्न और प्रीमियम अपील दे रही है. कंपनी का दावा है कि, इस एसयूवी में केबिन के साथ-साथ बूट में भी बेहतर स्पेस दिया गया है. ये एसयूवी 622 लीटर के लगेज स्पेस (डिग्गी) के साथ आती है. कैसा है एसयूवी का केबिन इसका इंटीरियर किसी भी मौजूदा टाटा कार से अलग और ज़्यादा लग्ज़रीयस दिखता है. टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के वाइस प्रेसिडेंड और चीफ प्रोडक्शन ऑफिसर, मोहन सावरकर ने बताया कि "नई सिएरा में केबिन स्पेस का पूरा ख्याल रखा गया है. ये एसयूवी कमांड सीटिंग पोजिशन के साथ आती है. जहां मिड-साइज एसयूवी में ग्राउंड से ड्राइवर का आई प्वाइंट 1305 मिमी उंचा होता है वहीं सिएरा में ये हाईट 1344 मिमी है." सावरकर आगे बताते हैं कि, "सिएरा का सेकेंड-रो यानी दूसरी पंक्ति का स्पेस लग्ज़री एसयूवी मॉडलों से भी कहीं आगे है. इसमें बिना बूट स्पेस से कोई समझौता किए बिना आगे और पीछे की सीट के बीच में 316 मिमी का गैंगवे स्पेस दिया गया है. जिससे पीछे वाली सीट पर बैठे व्यक्ति को पर्याप्त लेगरूम मिलता है." टाटा सिएरा के केबिन में ट्रिपल-स्क्रीन सेटअप दिया गया है. जिसमें एक ड्राइवर डिस्प्ले, दूसरा इंफोटेनमेंट के लिए और तीसरी पैसेंजर स्क्रीन के रूप में दी गई है. लेयर्ड डैशबोर्ड पर ब्लैक ट्रिम और क्रोम फिनिश एसी वेंट्स इसे प्रीमियम फील देते हैं. ब्लैक-व्हाइट कलर थीम इसके प्रीमियम अपील को और भी बढ़ा देती है. वहीं, 4-स्पोक स्टीयरिंग व्हील, गियर लीवर और क्लाइमेट कंट्रोल पैनल अन्य टाटा मॉडलों से लिया गया है. इंजन और परफॉर्मेंस टाटा सिएरा को कंपनी ने 3 इंजन के साथ 6 पावरट्रेन ऑप्शन में पेश किया है. जिसमें 1.5 लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल डायरेक्ट इंजेक्शन (TGDi) हाईपेरियन इंजन, 1.5 लीटर नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल रेवोट्रॉन इंजन, 1.5 लीटर टर्बोचार्ज्ड डीजल कायरोजेट इंजन दिया गया है. इसका 1.5 लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन 160 पीएस की पावर और 255 न्यूटन मीटर का टॉर्क जेनरेट करता है. वहीं 1.5 लीटर नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन 104 पीएस की पावर और 145 न्यूटन मीटर का टॉर्क जेनरेट करता है. इसके अलावा 1.5 लीटर टर्बोचार्ज्ड कायरोजेट डीजल इंजन 118 पीएस की पावर और 200 न्यूटन मीटर का टॉर्क जेनरेट करता है.  इंजन और परफॉर्मेंस टाटा सिएरा को कंपनी ने 3 इंजन के साथ 6 पावरट्रेन ऑप्शन में पेश किया है. जिसमें 1.5 लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल डायरेक्ट इंजेक्शन (TGDi) हाईपेरियन इंजन, 1.5 लीटर नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल रेवोट्रॉन इंजन, 1.5 लीटर टर्बोचार्ज्ड डीजल कायरोजेट इंजन दिया गया है. इसका 1.5 लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन 160 पीएस की पावर और 255 न्यूटन मीटर का टॉर्क जेनरेट करता है. वहीं 1.5 लीटर नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन 104 पीएस की पावर और 145 न्यूटन मीटर का टॉर्क जेनरेट करता है. इसके अलावा 1.5 लीटर टर्बोचार्ज्ड कायरोजेट डीजल इंजन 118 पीएस की पावर और 200 न्यूटन मीटर का टॉर्क जेनरेट करता है.  इंजन ऑप्शन-  इंजन             फ्यूल        क्षमता        पावर (पीएस)     टॉर्क (एनएम)  हाईपेरियन     पेट्रोल       1.5 लीटर      160                  255 रेवोट्रॉन         पेट्रोल       1.5 लीटर      104                  145 कायरोजेट     डीजल      1.5 लीटर       118                  200 मिलते हैं ये फीचर्स टाटा सिएरा का केबिन इसके एक्सटीरियर की तरह ही फीचर्स से भरपूर … Read more

अक्टूबर 2025 में Mahindra XUV 3XO और XUV300 की बिक्री पार की 4 लाख यूनिट्स का आंकड़ा

मुंबई  स्वदेशी एसयूवी निर्माता कंपनी Mahindra & Mahindra ने अक्टूबर 2025 में घरेलू बाज़ार में Mahindra XUV 3XO और XUV300 (प्री-फेसलिफ्ट मॉडल) की कुल बिक्री 4,00,000 के आंकड़े को पार कर गई है. जानकारी के अनुसार, घरेलू कार निर्माता कंपनी ने अक्टूबर में 12,237 यूनिट्स के साथ XUV 3XO की अब तक की सबसे ज़्यादा मंथली बिक्री हासिल की है. Mahindra ने पहली जेनरेशन की XUV300 को 14 फरवरी, 2019 को पेश की थी, जिसके बाद इसका फेसलिफ्ट वर्जन Mahindra XUV 3XO, 29 अप्रैल, 2024 को लॉन्च किया गया था. Mahindra 3XO के लॉन्च से लेकर अक्टूबर 2025 के आखिर तक, इस कॉम्पैक्ट SUV की 1,57,542 यूनिट्स बिक ​​चुकी हैं, जिससे कुल 4,06,569 यूनिट्स की बिक्री में इसका 39 प्रतिशत हिस्सा है. Mahindra XUV 3XO की बिक्री वित्त वर्ष 2025 Mahindra मॉडल का अब तक का सबसे अच्छा साल रहा है, जिसमें 1,00,905 यूनिट्स की बिक्री हुई, जो पिछले साल इसी समय में बेची गई 54,726 यूनिट्स से 84 प्रतिशत से ज़्यादा है. असल में, Mahindra 3XO पिछले फाइनेंशियल ईयर में Mahindra Scorpio के बाद दूसरी सबसे ज़्यादा बिकने वाली महिंद्रा SUV थी, और Bolero, XUV700 और Thar से आगे थी. लेकिन मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में, Mahindra XUV 3XO की सेल्स रैंकिंग दो पायदान गिरकर चौथे नंबर पर आ गई है. इसमें Mahindra Scorpio N और Scorpio Classic (1,02,514 यूनिट्स), Thar और Thar Roxx (71,351 यूनिट्स) और Bolero (57,512 यूनिट्स) शामिल हैं. वित्त वर्ष 2025 के पहले सात महीनों के बाद, Mahindra SUV की सेल्स में XUV 3XO का हिस्सा 15 प्रतिशत है, जो पिछले साल इसी समय के 20 प्रतिशत से कम है.

ब्रिटेन छोड़ने की तैयारी में भारतीय अरबपति लक्ष्मी निवास मित्तल, सुपर रिच टैक्स बना कारण

नई दिल्ली भारतीय अरबपतियों (Indian Billionaires) का दुनिया में दबदबा है, अमेरिका से लंदन तक इनके कारोबार फैले हुए हैं. ऐसे ही भारतीय मूल के स्टील टाइकून अरबपति लक्ष्मी एन मित्तल (Lakshmi Mittal), जो अब तक ब्रिटेन में रहकर कारोबार कर रहे थे और वहां के सबसे अमीरों की लिस्ट में शामिल थे, उन्होंने ब्रिटेन (UK) छोड़ने का फैसला किया है. इसके पीछे बड़ी वजह देश में सुपर-रिच टैक्स (Britain Super Rich Tax) को बताया जा रहा है.  Dubai में हो सकता है नया ठिकाना पीटीआई की रिपोर्ट में  द संडे टाइम्स के हवाले से ये जानकारी शेयर की गई है. इसमें बताया गया है कि राजस्थान में जन्मे लक्ष्मी निवास मित्तल के यूके छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं. ब्रिटिश लेबर पार्टी की लीडरशिप वाली सरकार द्वारा सुपर-रिच लोगों के लिए जिस टैक्स बदलाव की आशंका जता रही थी, वह करीब आ रहा है. रिपोर्ट में ये भी कहा जा रहा है कि स्टील टाइकून Lakshmi N Mittal का नया ठिकाना अब दुबई हो सकता है.  ब्रिटेन के आठवें सबसे अमीर मित्तल 2025 की 'संडे टाइम्स रिच लिस्ट' पर नजर डालें, तो आर्सेलर मित्तल स्टीलवर्क्स के फाउंडर लक्ष्मी निवास मित्तल के पास अनुमानित संपत्ति (Lakshmi Niwas Mittal Networth) 15.4 अरब पाउंड (करीब 1.90 लाख करोड़ रुपये) की संपत्ति है और नेटवर्थ का ये आंकड़ा उन्हें ब्रिटेन का आठवां सबसे अमीर इंसान बनाता है. रिपोर्ट में 75 साल के अरबपति इंडस्ट्रियलिस्ट के करीबी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि वह बुधवार को चांसलर रेचल रीव्स के बजट से पहले UK छोड़ने वाले नए अरबपति बन गए हैं. ब्रिटेन पर अमीरों पर Tax का बोझ लक्ष्मी मित्तल के ब्रिटेन छोड़कर जाने की खबर देश में अमीर लोगों पर टैक्स बढ़ने की उम्मीद से पहले आई है, क्योंकि चांसलर रीव्स UK के फाइनेंस में 20 अरब पाउंड के गैप को भरने के प्रयास में हैं. बीते साल लेबर की आम चुनाव जीत के बाद पेश किए गए उनके पहले बजट में कैपिटल गेन टैक्स में बढ़ोतरी, अपने वेंचर बेचने वाले एंटरप्रेन्योर्स के लिए टैक्स रिलीफ में कमी और फैमिली कंपनियों को आने वाली पीढ़ियों को सौंपने के तरीके पर नए टैक्स शामिल थे. वहीं अगले हफ्ते चांसलर के तौर पर उनके दूसरे बजट में और लेवी की अफवाहों से वहां रह रहे अरबपतियों और सबसे अमीर लोगों में खलबली मची है, जिसमें UK छोड़ने वालों पर संभावित 20% एग्जिट टैक्स भी शामिल है. ये है देश छोड़ने की बड़ी वजह  रिपोर्ट के मुताबिक, इनहेरिटेंस टैक्स (उत्तराधिकार टैक्स) में बदलाव की खबरों ने भी रईसों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी की है. संडे टाइम्स के मुताबिक, एक एडवाइजर ने बताया कि लक्ष्मी मित्तल के ब्रिटेन छोड़ने की तैयारी के पीछे सिर्फ इनकम टैक्स या कैपिटल गेन टैक्स समस्या नहीं है, बल्कि असली वजह इनहेरिटेंस टैक्स है. उन्होंने कहा कि ऐसी  स्थिति में लोगों को लगता है कि उनके पास छोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं है. ब्रिटेन में डेथ ड्यूटी 40 फीसदी है यानी मरने के बाद संपत्ति पर टैक्स, जबकि दुबई और स्विट्जरलैंड में कोई इनहेरिटेंस टैक्स लागू नहीं है. मित्तल के पास दुबई में हवेली संडे टाइम्स का दावा है कि अरबपति लक्ष्मी मित्तल के पास पहले से ही दुबई में एक हवेली है और अब उन्होंने यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) में पास नाया आइलैंड पर एक  डेवलपमेंट प्रोजेक्स में बड़े हिस्से खरीदे हैं. इसके अलावा बिलियनेयर्स-रो कहे जाने वाले केंसिंग्टन पैलेस गार्डन्स में उनकी संपत्तियां देश के सबसे महंगे घरों में शामिल हैं.  Lakshmi Mittal 1995 में लंदन चले गए थे और जल्द ही ब्रिटेन के सबसे प्रमुख भारतीय व्यवसायियों में से एक बन गए. वैश्विक स्तर पर लक्ष्मी मित्तल को 'King Of Steel' के रूप में भी पहचाना जाता है. उन्होंने अपनी संपत्ति आर्सेलर मित्तल के माध्यम से बनाई, जो विश्व की दूसरी सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी है. इसमें Lakshmi Mittal और उनके परिवार के पास लगभग 40% की हिस्सेदारी है. बता दें 2021 में लक्ष्मी मित्तल ने सीईओ की भूमिका अपने बेटे आदित्य मित्तल को सौंप दी थी, लेकिन कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में काम करना जारी रखा है.   

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ, जस्टिस सूर्यकांत बने 53वें चीफ जस्टिस; 15 महीने का होगा कार्यकाल

नई दिल्ली  जस्टिस सूर्यकांत आज भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) की शपथ ग्रहण की है। CJI के रूप में उनका कार्यकाल 15 महीनों का होगा। वो CJI भूषण आर गवई की जगह लेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जस्टिस सूर्यकांत को CJI की शपथ दिलाई है। CJI भूषण आर गवई ने संविधान के अनुच्छेद 124 की धारा 2 के तहत अगले CJI के लिए जस्टिस सूर्यकांत का नाम सामने रखा था। राष्ट्रपति ने इसपर मुहर लगाते हुए जस्टिस सूर्यकांत को देश का 53वां CJI नियुक्त कर दिया है। पीएम मोदी भी रहे मौजूद राष्ट्रपति भवन में आयोजित जस्टिस सूर्यकांत के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल भी मौजूद थे। जस्टिस सूर्यकांत को 30 अक्टूबर 2025 को CJI नियुक्त किया गया था और वो 9 फरवरी 2027 तक इस पद पर रहेंगे। दरअसल CJI बी आर गवई 65 साल के पूरे हो गए हैं, जिसके चलते अब वो सेवानिवृत्त हो जाएंगे। ऐसे में CJI का पद छोड़ने से पहले उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज को अगला CJI बनाने की परंपरा जारी रखी और जस्टिस सूर्यकांत को अपना उत्तराधिकारी चुना है।  

अब अंतिम समय पर कैंसिलेशन में भी 80% रिफंड, हवाई टिकट पर मेडिकल इमरजेंसी कवरेज

नई दिल्ली नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने हवाई किरायों के रिफंड से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। नई ड्राफ्ट गाइडलाइन में कहा गया है कि अगर किसी यात्री को मेडिकल इमरजेंसी के कारण टिकट रद्द करनी पड़े, तो एयरलाइन को पूरा पैसा लौटाना होगा या फिर क्रेडिट नोट देना होगा। ट्रैवल एजेंट के जरिए खरीदे टिकट का रिफंड भी अब सीधे एयरलाइन की जिम्मेदारी होगी। यानी ऑनलाइन पोर्टल या एजेंट से खरीदे टिकट के मामले में भी यात्री को एयरलाइन ही रिफंड देगी। इसके लिए 21 कार्यदिवस की समय सीमा तय की गई है। ड्राफ्ट नियमों पर स्टेकहोल्डर्स से सुझाव 30 नवंबर 2025 तक मांगे गए हैं। टिकट बदलने का समय बढ़ेगा डीजीसीए ने एक और राहत देने का प्रस्ताव रखा है, अब यात्री 48 घंटे के भीतर टिकट में बदलाव मुफ्त में कर सकेंगे, बशर्ते ये बदलाव:- घरेलू उड़ान के लिए- प्रस्थान से कम से कम पांच दिन पहले और अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए- प्रस्थान से 15 दिन पहले किया जाए। पहले यह सुविधा सिर्फ 24 घंटे और सभी उड़ानों के लिए सात दिन पहले तक सीमित थी। व्हीलचेयर और सुविधा नियमों में बदलाव डीजीसीए ने दिव्यांग यात्रियों के यात्रा मानकों को भी अपडेट किया है। व्हीलचेयर अब केवल दिव्यांग यात्रियों के लिए प्राथमिकता में रहेगी। सक्षम यात्री व्हीलचेयर का उपयोग करेंगे तो उन पर शुल्क लगेगा। एयरपोर्ट पर अम्बुलिफ्ट, एरोब्रिज या टोवेबल रैंप उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है। जहां इनमें से कुछ भी न हो, वहां अंतिम विकल्प के रूप में स्टेप-लैडर की अनुमति दी गई है- हालांकि इसे लेकर विकलांग अधिकार समूहों ने नाराजगी जताई है। एयरपोर्ट को दिव्यांग यात्रियों के लिए स्पष्ट साइन बोर्ड, अलग ड्रॉप-ऑफ जोन और पर्याप्त स्टाफ सुनिश्चित करना होगा। जरूरत पड़ने पर यात्रियों को डिजिटल मैप भी उपलब्ध कराने की सलाह दी गई है। हवाई टिकटों में इंश्योरेंस जोड़ने की तैयारी सरकार हवाई टिकटों में ऐसा इनबिल्ट इंश्योरेंस जोड़ने की तैयारी कर रही है, जिससे उड़ान से कुछ ही घंटे पहले टिकट रद्द करने पर भी 80% तक रिफंड मिल सकेगा। यह पूरी कवरेज यात्रियों से कोई अतिरिक्त शुल्क लिए बिना दी जाएगी, प्रीमियम एयरलाइंस और बीमा कंपनियों की साझेदारी से भरा जाएगा। अभी की व्यवस्था के अनुसार, उड़ान के तीन घंटे के भीतर रद्द करने पर टिकट नो-शो माना जाता है और कोई रिफंड नहीं मिलता। मेडिकल इमरजेंसी साबित करने पर एयरलाइन कभी-कभी रिफंड दे देती हैं, लेकिन यह पूरी तरह उन्हीं के विवेक पर निर्भर है। कैसे काम करेगा नया प्लान? सरकार और एयरलाइंस मिलकर ऐसा मॉडल लाने जा रही हैं जिसमें लगभग ₹50 प्रति टिकट के हिसाब से बीमा लागत निकाली जा सकती है। इससे उड़ान से चार घंटे पहले तक रद्द टिकटों पर 80% रिफंड दिया जा सकेगा। कुछ एयरलाइंस पहले ही बीमा कंपनियों से बातचीत शुरू कर चुकी हैं। ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियां (ओटीए) अभी भी यात्रियों को अलग से इंश्योरेंस खरीदने का 'नज' देती हैं, लेकिन सरकार चाहती है कि बेस किराए में ही सुरक्षा शामिल हो, ताकि 'पैसा डूब जाने' का डर न रहे। क्यों जरूरी हुआ यह बदलाव और कब लागू होगा? अथॉरिटीज के मुताबिक रिफंड से जुड़ी शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। इसमें रिफंड मिलने में देरी, रिफंड राशि में कटौती, या फिर पैसा न देकर फ्यूचर क्रेडिट थमा देना – जो सीमित अवधि तक ही मान्य रहता है। इसीलिए डीजीसीए ने भी अपने रिफंड नियमों में बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया है ताकि यात्रियों की परेशानी कम की जा सके और प्रक्रिया पारदर्शी बने। सरकारी अधिकारी कह रहे हैं कि यह इनबिल्ट इंश्योरेंस मॉडल दो से तीन महीनों में लागू किया जा सकता है, बशर्ते एयरलाइंस और बीमा कंपनियों की गणना संतुलित बैठ जाए।  

8th Pay Commission लागू होने पर बड़ा अपडेट: ToR के संकेतों से कर्मचारियों में बढ़ी टेंशन

नई दिल्ली  सरकार ने 3 नवंबर को 8वें वेतन आयोग के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी कर दिए। हालांकि, इसके साथ ही एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कर्मचारी और पेंशनर यूनियन का आरोप है कि ToR में उस तारीख का जिक्र ही नहीं है, जिस दिन से आयोग की सिफारिशें लागू होंगी, जबकि 4th से 7th वेतन आयोग तक सभी की सिफारिशें हर 10 साल में 1 जनवरी से लागू होती रही हैं। यही कारण है कि अब आशंका जताई जा रही है कि 1 जनवरी 2026 से 8वें वेतन आयोग को लागू करने की परंपरा टूट भी सकती है। 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रही है। अब तक माना जा रहा था कि 8वां वेतन आयोग स्वाभाविक रूप से 1 जनवरी 2026 से लागू हो जाएगा। लेकिन ToR में यह तारीख शामिल न होने से प्रश्न उठने लगे हैं। यूनियन और पेंशनर समूहों का कहना है कि भले ही सिफारिशें देरी से आई हों, लेकिन लागू होने की प्रभावी तारीख हमेशा 1 जनवरी ही रही है। इस बार तारीख का उल्लेख न होना एक संभावित नीतिगत बदलाव या देरी का संकेत माना जा रहा है। कौन कर रहा है विरोध? ToR जारी होते ही कई कर्मचारी और पेंशनर संगठन सक्रिय हो गए हैं, जिनमें प्रमुख हैं- ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF), कन्फेडरेशन ऑफ़ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज ऐंड वर्कर्स (CCGEW) और भारत पेंशनर्स समाज (BPS)। इन संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर ToR में मौजूद 'कमियों' पर आपत्ति जताई है और संशोधन की मांग की है। BPS की 7 बड़ी आपत्तियां और मांगें 17 नवंबर को भेजे गए विस्तृत पत्र में भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने कई अहम मुद्दे उठाए। मुख्य मांगें इस प्रकार हैं— 1. 1 जनवरी 2026 की तारीख स्पष्ट तौर पर शामिल की जाए BPS चाहता है कि ToR में साफ लिखा जाए कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू होंगी। 2. 'Unfunded Cost' शब्द हटाया जाए BPS का कहना है कि इस शब्द से लगता है कि पेंशन सरकार पर बोझ है, जबकि सुप्रीम कोर्ट पेंशन को पहले ही संवैधानिक अधिकार घोषित कर चुका है। 3. पेंशन समानता और संशोधन के स्पष्ट नियम सभी पेंशनरों के लिए तिथि की परवाह किए बिना संशोधन का एकसमान सिद्धांत लागू किया जाए, ताकि पुराने और नए पेंशनरों का अंतर खत्म हो सके। 4. OPS–NPS–UPS की समीक्षा 2004 के बाद नियुक्त हुए 26 लाख से अधिक कर्मचारी NPS खत्म कर OPS बहाल करने की मांग कर रहे हैं। BPS चाहता है कि 8वां वेतन आयोग इन सभी प्रणालियों की समीक्षा करे और बेहतर विकल्प दे। 5. GDS और स्वायत्त निकायों को 8वें वेतन आयोग में शामिल किया जाए ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) को डाक तंत्र की रीढ़ बताते हुए BPS ने उन्हें 8th CPC में शामिल करने की मांग की। साथ ही स्वायत्त और सांविधिक निकायों को भी दायरे में लाने की अपील की। 6. 20% अंतरिम राहत महंगाई को देखते हुए BPS चाहता है कि कर्मचारियों और पेंशनरों को तत्काल राहत के रूप में 20% अंतरिम राहत दी जाए। 7. CGHS में सुधार की मांग BPS ने इन सुधारों की मांग की— • CGHS को सभी स्वायत्त कर्मचारियों तक बढ़ाया जाए • जिला स्तर पर नए CGHS केंद्र खोले जाएं • इलाज कैशलेस और प्रक्रिया आसान हो • लंबित संसदीय समिति की सिफारिशें लागू हों BPS ने कहा कि ये सभी मांगें 'जनहित' में हैं। AIDEF और CCGEW: पेंशनरों को दायरे से बाहर रखने पर कड़ा विरोध AIDEF ने 4 नवंबर को वित्त मंत्री को पत्र लिखा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 30 साल सेवा दे चुके 69 लाख पेंशनर 8वें वेतन आयोग के दायरे से बाहर कर दिए गए हैं।” CCGEW ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा़, “ToR के कई हिस्सों में तुरंत संशोधन की जरूरत है, ताकि कर्मचारियों और पेंशनरों के हित सुरक्षित रहें।” क्या सरकार 10 साल के वेतन आयोग चक्र में बदलाव की तैयारी में है? सबसे बड़ा सवाल यही है। कर्मचारी और पेंशनरों को लगता है कि तारीख का गायब होना, “Unfunded Cost” का उल्लेख और पेंशनरों को प्राथमिकता न देना…ये संकेत हो सकते हैं कि सरकार पारंपरिक 10-वर्षीय वेतन आयोग चक्र में बदलाव पर विचार कर रही है। सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन विरोध बढ़ता जा रहा है। इससे साफ है कि 8वें वेतन आयोग को 2026 से लागू किया जाएगा या नहीं, इसे लेकर अभी भी भ्रम बरकरार है।  

भारत का UPI जल्द यूरोप में लॉन्च: यात्रियों को मिलेगी कैशलेस और झंझट-फ्री पेमेंट सुविधा

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और एनपीसीआई इंटरनेशनल ने यूरोपीय सेंट्रल बैंक के साथ मिलकर ऐतिहासिक पहल की है जो भविष्य में यूरोपीय देशों की यात्रा पर जाने वाले पर्यटकों या वहां कारोबार करने वालों को काफी सहूलियत देगी। इसके तहत अब भारत का यूपीआई जल्द ही यूरोप के इंस्टैंट पेमेंट सिस्टम टिप्स यानी टार्गेट इंस्टैंट पेमेंट सेटलमेंट से जुड़ जाएगा। दोनों पक्षों ने इसके “रियलाइजेशन फेज'' को शुरू करने पर सहमति दे दी है। इसके लागू होने के बाद फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, नीदरलैंड आदि देशों में घूमने गए भारतीय पर्यटक सीधे अपने फोन से यूपीआई स्कैन करके खरीदारी कर सकेंगे।   इन जगहों पर मिलेगी यूपीआई की सुविधा रेस्तरां, होटल, दुकानें, टैक्सी हर जगह भारतीय यूपीआई काम करेगा, बिना विदेशी क्रेडिट/डेबिट कार्ड या नकदी के झंझट के। साथ ही पैसा तुरंत व बहुत ही कम फीस में ट्रांसफर होगा। साथ ही यूरोप से आने वाले लोग भी भारत में आसानी से पेमेंट कर सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे छोटे-मध्यम उद्यमियों को खास तौर पर फायदा होगा क्योंकि लेन-देन सस्ता, तेज और पारदर्शी हो जाएगा। कब से चालू होगी यह सुविधा वर्तमान में भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) की बातचीत अपने अंतिम चरण में है। विशेषज्ञों का कहना है कि यूपीआई-टिप्स लिंकेज इस समझौते को तेजी से अमलीजामा पहनाने में बड़ी भूमिका निभाएगा, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच वित्तीय एकीकरण की जमीन पहले से ही तैयार होगी। आरबीआई और एनपीसीआई तकनीकी एकीकरण, रिस्क मैनेजमेंट और सेटलमेंट व्यवस्था पर तेजी से काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि 2026 की पहली छमाही तक यह सुविधा चालू हो जाएगी। आरबीआई की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक यह कदम जी-20 दिशानिर्देशों के तहत उठाया गया है जिसके सभी सदस्य देशों ने आपस में वित्तीय लेन-देन को सुविधाजनक बनाने की सहमति दी है।  

भारत में आई Himalayan 450 Manna Black Edition, क्या-क्या मिला है नए मॉडल में?

रॉयल एनफील्ड ने भारत में हिमालयन 450 माना ब्लैक एडिशन लॉन्च किया है। जिसकी एक्स-शोरूम कीमत 3,37,000 रुपये रखी गई है। यह नया एडिशन मोटोवर्स 2025 में पेश किया गया। और इससे पहले इसका ग्लोबल डेब्यू EICMA में हुआ था। माना ब्लैक एडिशन का मकसद हिमालयन लाइनअप में एक ऐसा मॉडल शामिल करना है जो कठिन और चुनौतीपूर्ण रास्तों पर चलने वाले सवारों के लिए पहले से अधिक तैयार और सक्षम हो। बुकिंग डिटेल्स माना ब्लैक एडिशन की बुकिंग अब सभी रॉयल एनफील्ड स्टोर्स, आधिकारिक मोबाइल एप और वेबसाइट पर शुरू हो चुकी है। ग्राहक किसी भी अधिकृत डीलरशिप पर टेस्ट राइड भी शेड्यूल कर सकते हैं। शेरपा 450 इंजन पावर हिमालयन 450 माना ब्लैक एडिशन में वही शेरपा 450 इंजन दिया गया है, जो नए-जेनरेशन हिमालयन 450 में इस्तेमाल किया गया है। यह इंजन लो-एंड टॉर्क, स्मूदनेस और हाई-एल्टीट्यूड एडैप्टेबिलिटी के संतुलन के लिए जाना जाता है। जिससे यह बाइक दैनिक सवारी और ऊंचाई वाले टूर दोनों के लिए उपयुक्त बनती है। माना पास से प्रेरित डिजाइन थीम इस एडिशन का नाम हिमालय के माना पास से लिया गया है। माना पास भारत और चीन सीमा पर स्थित एक हिमालयी दर्रा है, जो उत्तराखंड के चमोली जिले में है। यह दुनिया के सबसे कठिन और ऊंचाई वाले रास्तों में से एक है, जो 18,478 फीट (5,632 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है। रॉयल एनफील्ड ने इस एडवेंचर-थीम को मोटरसाइकिल के डिजाइन में उतारते हुए ऑल-ब्लैक पेंट स्कीम और मैट फिनिश का इस्तेमाल किया है। ताकि उस क्षेत्र की कठोरता और सादगी को दर्शाया जा सके। फैक्ट्री-फिटेड एडवेंचर गियर माना ब्लैक एडिशन की सबसे बड़ी विशेषता है इसके स्टैंडर्ड एडवेंचर एक्सेसरीज, जो इसे सीधे शोरूम से ही ट्रेल-रेडी बनाती हैं। इस पैकेज में शामिल हैं:     ब्लैक रैली हैंड गार्ड्स     बेहतर ग्रिप और कम्फर्ट के लिए ब्लैक रैली सीट     ऑफ-रोड सतहों के लिए रैली फ्रंट मडगार्ड     ट्यूबलेस स्पोक्ड व्हील्स, जो अधिक टिकाऊ हैं और पंक्चर में आसानी से संभाले जा सकते हैं इन सभी फीचर्स के साथ यह मॉडल कठिन रास्तों पर बेहतर स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करता है।

नए वेज कोड का असर: हाथ में आएगी कम सैलरी, लेकिन PF-ग्रैच्युटी बढ़ेगी

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने नए लेबर लॉ नोटिफाई कर दिए हैं। लेबर लॉ के लागू होने के बाद अब कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड (PF) और ग्रैच्युटी में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। हालांकि, इन हैंड सैलरी में कमी आ सकती है। नए लेबर लॉ के तहत कर्मचारियों की बेसिक सैलरी उनके कुल कॉस्ट-टू-कंपनी (CTC) का कम से कम 50% होनी चाहिए या उतनी प्रतिशतता जो सरकार आगे नोटिफाई करेगी। इसका सीधा असर PF और ग्रैच्युटी पर पड़ेगा। बता दें कि पीएफ और ग्रैच्युटी की गणना बेसिक सैलरी के आधार पर होती है। बेसिक सैलरी बढ़ने की स्थिति में स्वाभाविक रूप से PF और ग्रैच्युटी का योगदान भी बढ़ जाएगा, जिससे कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग्स मजबूत होंगी। हालांकि, एक पहलू यह भी है कि बढ़े हुए PF और ग्रेच्युटी योगदान के चलते कर्मचारियों के हाथ में आने वाली इन-हैंड सैलरी घट जाएगी। एक ही CTC में से बड़ी रकम PF और ग्रैच्युटी में चली जाने के कारण टेक-होम सैलरी पर दबाव बढ़ेगा। बता दें कि सरकार अगले 45 दिनों में वेज कोड के विस्तृत नियम अधिसूचित करेगी। इसके बाद कंपनियों को अपनी सैलरी संरचना में बड़े स्तर पर फेरबदल करना होगा। अभी कितना होता है PF का योगदान PF का योगदान बेसिक वेतन का 12% होता है और ग्रेच्युटी की गणना अंतिम बेसिक सैलरी और कंपनी में पूरे किए गए वर्षों के आधार पर होती है। बेसिक वेतन में बढ़ोतरी के साथ दोनों योगदान स्वाभाविक रूप से बढ़ेंगे। वहीं, यह बदलाव उन कंपनियों पर रोक लगाएगा जो कर्मचारी के रिटायरमेंट फंड में योगदान कम करने के लिए बेसिक सैलरी को बेहद कम रखती थीं। क्या कहते हैं एक्सपर्ट ईटी को इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुचिता दत्ता ने बताया कि रिटायरमेंट सुरक्षा बेहतर होगी लेकिन खर्च संतुलित करने की कोशिश के कारण कर्मचारियों की हाथ में आने वाली सैलरी कम हो सकती है। EY इंडिया के पुनीत गुप्ता के अनुसार, श्रम संहिताओं के लागू होने से ग्रेच्युटी बढ़ना तय है, क्योंकि अब ग्रेच्युटी की गणना वेजेज पर होगी, जिसमें बेसिक के साथ अधिकांश भत्ते भी शामिल होंगे, HRA और कन्वेयंस अलाउंस को छोड़कर। हालांकि, कर्मचारियों के हाथ में आने वाली सैलरी घटने को लेकर चिंता बनी हुई है।  

भारत में बढ़ी iPhone मैन्युफैक्चरिंग, घरेलू बाजार में बिक्री भी रही मजबूत

नई दिल्ली   दुनिया में बनने वाला हर पांच में एक आईफोन भारत में मैन्युफैक्चर किया जा रहा है। साथ ही, कंपनी की ग्लोबल प्रोडक्शन वैल्यू में देश का योगदान 12 प्रतिशत हो गया है। यह जानकारी एप्पल की फाइलिंग में दी गई। फाइलिंग के मुताबिक, एप्पल की भारतीय इकाई (एप्पल इंडिया) की घरेलू बिक्री वित्त वर्ष 25 में बढ़कर 9 अरब डॉलर हो गई है। एनालिस्ट की ओर से कहा गया कि एप्पल की कुल वैश्विक आय 416.1 अरब डॉलर है। इसमें भारत की हिस्सेदारी केवल 2 प्रतिशत के करीब है। हालांकि, आईफोन के उत्पादन में भारत की भूमिका बढ़ रही है। कंपनी की ओर से अब भारत में पहली बार हाई-एंड प्रो और प्रो मैक्स मॉडल का उत्पादन भी शुरू कर दिया है। फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि 2025 में अमेरिकियों 178.4 अरब डॉलर के एप्पल प्रोडक्ट्स खरीदे थे, जो कि कंपनी की कुल आय का 43 प्रतिशत है। वहीं, भारत की ओर से यूएस को आईफोन शिपमेंट में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। एप्पल की आय में यूरोप 26.7 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ दूसरे और ग्रेटर चीन 15.4 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है। पिछले दस सालों में कंपनी की भारतीय इकाई की आय लगभग आठ गुना बढ़ी है, जिसमें मुख्य रूप से आईफोन, मैकबुक, आईपैड, एयरपोड्स और एक्सेसरीज का योगदान है, जबकि सर्विसेज का कुल बिक्री में योगदान काफी कम है। वित्त वर्ष 25 में एप्पल के इंडिया-बेस्ड प्रोडक्शन की फ्रेट-ऑन-बोर्ड वैल्यू 22 अरब डॉलर थी, जिसमें से 7.5 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट किया गया। लोकल मैन्युफैक्चरिंग पूरी तरह से आयातित फोन पर लगने वाली 16 प्रतिशत की कस्टम ड्यूटी को बचाकर कंपनी की घरेलू बिक्री को बढ़ाने में मदद कर रही है। कंपनी की अर्निंग्स कॉल में, एप्पल के सीईओ टिम कुक ने कहा कि जब रिटेल की बात आती है, तो “हम अपने अब तक के सबसे अच्छे लाइनअप के साथ साल के सबसे बिजी समय में जा रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में, हमने इंडिया और यूएई जैसे इमर्जिंग मार्केट्स में नए स्टोर और यूएस और चीन में नए स्टोर्स खोले हैं।”