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शानदार मार्केट डेब्यू: टाटा की नई कंपनी 335 रुपये पर लिस्ट, निवेशकों की बल्ले-बल्ले

मुंबई  टाटा मोटर्स के डिमर्जर (Tata Motors Demerger) के बाद ग्रुप की नई कंपनी टाटा कॉमर्शियल व्हीकल के शेयर स्टॉक मार्केट में बुधवार को लिस्ट हो गए. Tata Commercial Vehicle Share का मार्केट डेब्यू उम्मीद से बेहतर और धमाकेदार रहा है. ये टाटा शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर 330.25 रुपये पर लिस्ट हुआ है, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर इसने 335 रुपये के साथ एंट्री मारी है. 

स्मार्ट टायर का नया अनुभव: JK Tyre का इन-हाउस विकसित टायर अब बाजार में

 नई दिल्ली  इंडियन ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री अब ‘इंटेलिजेंट मोबिलिटी’ के नए युग में प्रवेश कर चुकी है. जेके टायर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने देश का पहला एंबेडेड स्मार्ट टायर्स लॉन्च किया है. पैसेंजर वाहनों (PV) के लिए पेश किया गया यह इनोवेशन केवल एक टायर नहीं, बल्कि एक ‘स्मार्ट मशीन’ की तरह काम करेगा. जिसको लेकर कंपनी का दावा है कि ये टायर वाहन के परफॉर्मेंस, सेफ्टी और फ्यूल 'एफिशिएंसी' को रीयल टाइम में मॉनिटर करती है.  सेंसर से लैस टायर खुद करेंगे अलर्ट JK Tyre का कहना है कि, ये स्मार्ट टायर पूरी तरह से इन-हाउस डेवपल किया गया है. कंपनी इसका प्रोडक्शन मध्य प्रदेश के बनमोर स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में कर रही है. इन टायरों के भीतर ही एडवांस्ड सेंसर लगाए गए हैं, जो लगातार एयर प्रेशर, टेम्परेचर और संभावित एयर लीक जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों पर निगरानी रखते हैं. ये डेटा रीयल टाइम में ड्राइवर को अलर्ट करता है, जिससे सड़क पर सेफ्टी, हैंडलिंग और फ्यूल एफिशिएंसी में सुधार होता है. पारंपरिक टायर जहां केवल रोटेट करते हैं, वहीं ये ‘इंटेलिजेंट टायर’ हर पल वाहन की स्थिति को समझते हुए उसे अधिक सुरक्षित और सक्षम बनाते हैं. यह तकनीक टायर की लाइफ बढ़ाने, फ्यूल एफिशिएंसी में सुधार करने और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में भी मददगार साबित होगी. ‘मेड इन इंडिया’  JK Tyre की यह सफलता केवल एक प्रोडक्ट इनोवेशन नहीं, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ (Make in India) का एक शानदार उदाहरण भी है. कंपनी ने इस अत्याधुनिक तकनीक को पूरी तरह इन-हाउस डिजाइन और डेवलप किया है. जो घरेलू रिसर्च एंड डेवलपमेंट क्षमताओं की परिपक्वता को भी दर्शाता है. लॉन्च के मौके पर कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक डॉ. रघुपति सिंघानिया ने कहा, “एम्बेडेड स्मार्ट टायर का यह लॉन्च JK Tyre की इनोवेशन जर्नी का निर्णायक माइलस्टोन है. हमारी मजबूत रिसर्च एंड डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं के बल पर हम देश की ड्राइविंग को अधिक स्मार्ट और सेफ बना रहे हैं. यह डेवलपमेंट हमारे तकनीकी क्षमता और कनेक्टेड मोबिलिटी के भविष्य को नया विज़न देगा.” इन साइज में मिलेंगे स्मार्ट टायर कंपनी ने बताया कि ये स्मार्ट टायर शुरुआती चरण में आफ्टरमार्केट के लिए लॉन्च किए गए हैं. ये स्मार्ट टायर्स 14 इंच से लेकर 17 इंच तक के साइज में उपलब्ध होंगे. इन टायरों का इस्तेमाल कॉम्पैक्ट कारों से लेकर प्रीमियम सेडान तक के वाहनों में किया जा सकेगा. फिलहाल अभी इनकी कीमतों के बारे में कंपनी द्वारा कोई जानकारी साझा नहीं की गई है.  दरअसल, जेके टायर की ये स्मार्ट इनोवेशन जर्नी 2019 में शुरू हुई थी. जब कंपनी ने TREEL सेंसर के माध्यम से ‘SMART Tyre’ तकनीक पेश की थी. यह भारत की पहला ऐसा सिस्टम था जिसमें टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) को क्लाउड-बेस्ड एनालिटिक्स के साथ जोड़ा गया था. यह तकनीक अब देशभर के डीलर नेटवर्क और फ्लीट ऑपरेटर्स के बीच व्यापक रूप से अपनाई जा चुकी है. ये नए स्मार्ट उसी जर्नी का अगला पड़ाव है, जो टायर को ‘कनेक्टेड डिवाइस’ में बदलते हुए वाहन और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने में मदद करता है.

निवेश रणनीति में बदलाव: LIC ने घटाई निजी बैंकों में हिस्सेदारी, सरकारी बैंकों पर बड़ा दांव

नई दिल्ली  देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी और संस्थागत निवेशक, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने सितंबर तिमाही में अपने निवेश पोर्टफोलियो में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। करीब ₹16 लाख करोड़ के शेयर पोर्टफोलियो वाले LIC ने इस दौरान निजी क्षेत्र के बड़े बैंकों—एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाई है। वहीं, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और प्राइवेट सेक्टर के यस बैंक में निवेश बढ़ाया गया है। क्यों किया बदलाव प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के अनुसार, LIC ने SBI में 6.41 करोड़ शेयर खरीदे, जिनकी अनुमानित कीमत करीब ₹5,285 करोड़ है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया जब सरकारी बैंकों के वित्तीय नतीजे मजबूत और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार दिखा रहे हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा इन शेयरों में बढ़ा है। वहीं यस बैंक में हिस्सेदारी को चार गुना तक बढ़ाना यह संकेत देता है कि LIC को बैंक की रिकवरी और भविष्य की विकास संभावनाओं पर भरोसा है। निजी क्षेत्र के बड़े बैंकों में हिस्सेदारी कम करने को जोखिम प्रबंधन की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। एलआईसी का यह कदम यह स्पष्ट करता है कि वह पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखना चाहती है और संभावित लाभ के अवसरों पर ध्यान दे रही है। सितंबर तिमाही के नतीजे LIC का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 32 प्रतिशत बढ़कर 10,053 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह 7,621 करोड़ रुपये था। इस दौरान कंपनी की कुल आय बढ़कर 2,39,614 करोड़ रुपये हुई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 2,29,620 करोड़ रुपये थी। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में शुद्ध प्रीमियम आय बढ़कर 1,26,479 करोड़ रुपये हुई, जबकि नवीकरण प्रीमियम 64,996 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि, प्रथम वर्ष का प्रीमियम 10,836 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल 11,201 करोड़ रुपये था। इसमें सरकार द्वारा 22 सितंबर से व्यक्तिगत जीवन बीमा प्रीमियम पर 18 प्रतिशत GST छूट देने के बावजूद गिरावट देखी गई।  

Maruti Suzuki की इलेक्ट्रिक SUV e-Vitara जल्द भारत में, लॉन्च डेट का खुलासा

मुंबई  स्वदेशी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki अपनी इलेक्ट्रिक एसयूवी Maruti Suzuki e-Vitara भारतीय बाजार में लॉन्च करने के लिए पूरी तरह से तैयार है. इस इलेक्ट्रिक एसयूवी को आगामी 2 दिसंबर, 2025 को लॉन्च किया जाएगा. पिछले साल वैश्विक स्तर पर इस एसयूवी का खुलासा किया गया था और इसके बाद Bharat Mobility Expo 2025 में इस कार को फिर से पेश किया गया. Maruti Suzuki अपनी इस इलेक्ट्रिक एसयूवी का उत्पादन भारत में ही करेगी, जिसका उत्पादन अगस्त के अंत से Maruti Suzuki के गुजरात स्थित प्लांट में शुरू किया जा चुका है और इसकी यूनिट्स मौजूदा समय में यूरोपियन बाजार में भेजी जा रही हैं. Maruti e-Vitara का डिज़ाइन Maruti Suzuki EVX कॉन्सेप्ट से लिया गया है, और इस कॉन्सेप्ट कार का ज़्यादातर डिज़ाइन प्रोडक्शन मॉडल में भी मौजूद है. Maruti Suzuki e-Vitara का डिजाइन इसके डिजाइन की बात करें तो एसयूवी में Y-आकार के डीआरएल के साथ कोणीय हेडलैंप क्लस्टर दिए गए हैं, साथ ही व्हील आर्च, आगे और पीछे के बंपर और दरवाज़ों के निचले हिस्से पर क्लैडिंग का भी व्यापक इस्तेमाल किया गया है. इसमें कनेक्टेड टेल लैंप भी दिए गए हैं, जो EVX कॉन्सेप्ट वाले लैंप से मिलते जुलते हैं. Maruti Suzuki e-Vitara का इंटीरियर इसके इंटीरियर की बात करें तो इलेक्ट्रिक एसयूवी में ब्राउन और ब्लैक कलर वाला डुअल-टोन इंटीरियर दिया जाएगा. कार के डैशबोर्ड में एक नया टू-स्पोक स्टीयरिंग व्हील मिलता है. इसके अलावा, यहां पर 10.1-इंच का इंफोटेनमेंट डिस्प्ले और 10.25-इंच का इंस्ट्रूमेंट पैनल लगाया गया है. कार में लेदरेट सीटिंग और एक फिक्स्ड ग्लास रूफ को भी शामिल किया गया है. Maruti Suzuki e-Vitara के फीचर्स इसमें मिलने वाले फीचर्स की बात करें तो Maruti Suzuki e-Vitara में वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, 10-वे एडजस्टेबल ड्राइवर सीट, स्लाइडिंग और रिक्लाइनिंग रियर सीट्स, 7 एयरबैग, लेवल-2 ADAS, 360 डिग्री कैमरा, वायरलेस चार्जिंग पैड, कीलेस एंट्री, राइड-बाय-वायर सिस्टम और एम्बिएंट लाइटिंग मिलती हैं. Maruti Suzuki e-Vitara की बैटरी और रेंज Maruti e-Vitara दो बैटरी विकल्पों के साथ बाजार में उतारी जाएगी, जिनमें 49 kWh और 61 kWh के बैटरी पैक शामिल हैं. जहां इसका छोटा बैटरी 346 किमी की WLTP रेंज प्रदान करता है, जबकि बड़े बैटरी पैक के सिंगल-मोटर वर्नज में 428 किमी की रेंज प्रदान कर सकता है. वहीं 61 kWh बैटरी पैक से लैस डुअल-मोटर वर्जन की रेंज 412 किमी तक हो सकती है. Maruti Suzuki e-Vitara का पावरट्रेन इसमें मिलने वाले पावरट्रेन की बात करें तो e-Vitara का सिंगल-मोटर 49 kWh मॉडल 142 bhp की पावर उत्पन्न करता है, जबकि 61 kWh वाला वेरिएंट 172 bhp की ज़्यादा पावर देता है. हालांकि दोनों ही मॉडल 192.5 Nm का अधिकतम टॉर्क जनरेट करते हैं। वहीं, ऑल-व्हील-ड्राइव वेरिएंट, जो डुअल मोटर सेटअप के साथ आता है, वह 178 bhp की पावर और 300 Nm का टॉर्क उत्पन्न करता है.

LIC का 10,000 करोड़ मुनाफा, प्रीमियम की कमाई और निवेश का पूरा हाल

 नई दिल्ली देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC यानी भारतीय जीवन बीमा निगम (Life Insurance Corporation of India) ने दूसरी तिमाही के नतीजे पेश कर दिए हैं. सालाना आधार पर कंपनी के कंसॉलिडेटेड शुद्ध लाभ में करीब 30.7 फीसदी का उछाल देखने को मिला है. पिछले साल समान अवधि में कंपनी का प्रॉफिट करीब 7,728 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 10,098 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.  साथ ही, कंपनी की नेट प्रीमियम आय भी बढ़ी है, Q2 में यह 1,26,930 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 1,20,326 करोड़ रुपये थी, यानी आय में करीब 5.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. हालांकि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के मुकाबले दूसरी तिमाही में LIC का लाभ करीब 8 फीसदी कम रहा. अब आइए जानते हैं कि LIC का बिजनेस कैसे चलता है और उसे कमाई कैसे होती है.  LIC की स्थापना 1956 में हुई थी, जब सरकार ने 245 से ज्यादा प्राइवेट बीमा कंपनियों का विलय करके एक सरकारी बीमा संस्था बनाई. LIC का मुख्य काम लोगों से बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) लेकर बदले में इंश्योरेंस और निवेश पर रिटर्न देना है. LIC का बिजनेस तीन हिस्सों में बंटा है…  1. लाइफ इंश्योरेंस (Life Insurance): यह LIC का मुख्य बिजनेस है. लोग LIC से बीमा पॉलिसी खरीदते हैं. जैसे जीवन बीमा, एंडोमेंट प्लान, टर्म प्लान, पेंशन प्लान और चाइल्ड पॉलिसी. हर महीने या सालाना प्रीमियम देने पर LIC पॉलिसी मैच्योर होने पर या मृत्यु की स्थिति में बीमा राशि (Sum Assured) देती है. इसी प्रीमियम से LIC की सबसे बड़ी आय होती है.  2. निवेश (Investment Income): LIC अपने पास जमा करोड़ों ग्राहकों का पैसा सरकारी बॉन्ड, शेयर बाजार, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और कंपनियों में निवेश करती है. इन निवेशों पर मिलने वाला ब्याज, डिविडेंड और पूंजीगत लाभ (Capital Gains) LIC की दूसरी बड़ी कमाई है.  LIC का निवेश पोर्टफोलियो 45 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है, ये रकम LIC ने देश की बड़ी कंपनियां जैसे Reliance, ITC, HDFC Bank, Infosys, TCS और SBI में निवेश किया है.  3. Loan और Service Income: LIC अपने पॉलिसीधारकों को पॉलिसी क अगेन्स लोन (Policy Loan) भी देती है. उस पर मिलने वाला ब्याज भी LIC की अतिरिक्त कमाई होती है. इसके अलावा LIC कुछ सेवाओं और फीस (जैसे एजेंट कमीशन या प्रोसेसिंग चार्ज) से भी आमदनी करती है.  LIC का प्रॉफिट कैसे बनता है? LIC हर साल अपनी आय में से खर्च (कर्मचारियों की सैलरी, क्लेम पेमेंट, एजेंट कमीशन) घटाकर जो बचता है, वही उसका मुनाफा (Profit) होता है. यह मुनाफा सरकार (जो LIC की सबसे बड़ी शेयरधारक है) और पॉलिसीधारकों में बांटा जाता है.  इस बीच अक्सर लोगों के मन में ये भ्रम होता है कि LIC शेयर बाजार में निवेश करता है, तो क्या वह हमारे बीमा के पैसे लगाता है या म्यूचुअल फंड के? आइए समझते हैं.  LIC के पास दो बड़े फंड्स होते हैं… पॉलिसीधारकों का फंड- यह वो पैसा होता है, जो ग्राहक अपनी बीमा पॉलिसी के प्रीमियम के रूप में जमा करते हैं. LIC इस पैसे को सरकार द्वारा तय नियमों के तहत निवेश करता है. भारतीय बीमा नियामक (IRDAI) के अनुसार LIC को अपने निवेश का एक तय हिस्सा अलग-अलग जगहों पर लगाना होता है. नियम के मुताबिक सरकारी बॉन्ड में 50 फीसदी से अधिक, कॉरपोरेट बॉन्ड में 15–20 फीसदी, शेयर बाजार में करीब 20–25 फीसदी, इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल प्रोजेक्ट पर 5–10% निवेश किया जाता है. यानी LIC अपने निवेश का 20-25% हिस्सा ही शेयर बाजार में लगाता है, बाकी पैसों को सुरक्षित जगहों पर लगाया जाता है. LIC की एक अलग सहायक कंपनी  LIC Mutual Fund है, यह कंपनी म्यूचुअल फंड स्कीम चलाती है. (जैसे LIC MF Large Cap Fund, LIC MF Flexi Cap Fund वगैरह). लेकिन इसका पैसा निवेशकों (Mutual Fund investors) से आता है, न कि बीमा पॉलिसीधारकों से.  सवाल- क्या LIC बीमा का पैसा शेयर बाजार में लगाता है?     जवाब- हां, लगभग 20–25% पैसा शेयरों में निवेश किया जाता है. सवाल- क्या म्यूचुअल फंड का पैसा LIC के पास जाता है? जवाब- नहीं, LIC Mutual Fund अलग संस्था है.    सवाल- क्या सरकार इस निवेश को रेगुलेट करती है?     जवाब- हां, IRDAI और वित्त मंत्रालय इसकी निगरानी करते हैं. 

सिद्धांत अवस्थी ने छोड़ा टेस्ला साइबरट्रक प्रोग्राम, इंटर्न से हेड तक का सफर

नई दिल्ली   टेस्ला के साइबरट्रक प्रोग्राम के हेड सिद्धांत अवस्थी ने इस्तीफ दे दिया है। वे करीब आठ वर्ष पहले एक इंटर्न के तौर पर कंपनी में शामिल हुए थे। यह जानकारी अवस्थी की ओर से एक सोशल मीडिया पोस्ट में सोमवार को दी गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में अवस्थी ने अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए कहा, "टेस्ला में अपने शानदार प्रदर्शन के बाद, हाल ही में इसे छोड़ने का फैसला किया है, जो कि मेरी जिंदगी के अब तक के सबसे कठिन फैसलों में से एक है। आठ साल पहले, जब मैंने यहां एक इंटर्न के तौर पर शुरुआत की थी, तो कभी नहीं सोचा था कि मुझे साइबरट्रक प्रोग्राम का नेतृत्व करने का मौका मिलेगा।" उन्होंने आगे पोस्ट में एलन मस्क और सभी टेस्ला के लीडर्स (पूर्व और वर्तमान), मेंटर्स और सभी ग्राहकों का धन्यवाद किया। अवस्थी ने बताया कि टेस्ला में अपने आठ वर्षों के कार्यकाल के दौरान, उन्होंने मॉडल 3 को बेहतर बनाने, गीगा शंघाई पर काम करने, नए इलेक्ट्रॉनिक्स और वायरलेस आर्किटेक्चर विकसित करने और साइबरट्रक पर काम करने का मौका मिला। उन्होंने पोस्ट में आगे कहा कि यह फैसला आसान नहीं था, तब जब आपके सामने ग्रोथ के इतने सारे अवसर मौजूद हो। टेस्ला की गाड़ियों काफी जटिल हैं, लेकिन उन्हें वह क्रेडिट नहीं मिलता है, जो मिलना चाहिए, लेकिन ये गाड़ियां लोगों की जिंदगी को बदलने में सफल रही हैं। अवस्थी ने पोस्ट के अंत में कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि टेस्ला अपने मिशन में जरूर कामयाब होगा और मैं अपनी जिंदगी के अगले अध्याय के लिए रोमांचित हूं। टेस्ला भारत में भी कदम रख चुकी है, लेकिन कंपनी अब तक कुछ खास कमाल दिखाने में कामयाब नहीं रही है। बीते महीने कंपनी की बिक्री मजह 40 यूनिट्स थी, जिससे कंपनी की देश में संचयी बिक्री 104 यूनिट्स हो गई है।

24K और 22K के बाद अब 9 कैरेट गोल्ड की एंट्री, जानें क्या होगा कीमतों पर असर

नई दिल्ली सोने की कीमतों में लगातार उछाल के चलते अब 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के गहने आम लोगों के बजट से बाहर होते जा रहे हैं। ऐसे में 9 कैरेट गोल्ड, जिसमें केवल 37.5% शुद्ध सोना होता है, धीरे-धीरे ज्वैलरी मार्केट में किफायती और फैशनेबल विकल्प के रूप में उभर रहा है। सरकार ने हाल ही में 9 कैरेट गोल्ड को हॉलमार्किंग की मंजूरी दे दी है, जिससे यह औपचारिक रूप से भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानक के तहत आता है। इसका मतलब है कि अब उपभोक्ताओं को इस गोल्ड की शुद्धता और गुणवत्ता की आधिकारिक गारंटी मिलती है। हर हॉलमार्क वाले गहने पर BIS का लोगो, सोने की शुद्धता का ग्रेड (375) और 6 अंकों का यूनिक HUID कोड अंकित होगा, जिससे मिलावट की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी। आज 9 कैरेट गोल्ड का भाव प्रति ग्राम ₹4,332.79 दर्ज किया गया, जो पिछले स्तर की तुलना में ₹57.75 (1.35%) की बढ़त को दर्शाता है। 9 कैरेट गोल्ड की खासियत: इस गोल्ड में शेष 62.5% मिश्र धातुएं—जैसे तांबा और चांदी—इसे मजबूत और टिकाऊ बनाती हैं। हल्का होने के कारण यह रोजमर्रा पहनने के लिए सुरक्षित और आरामदायक है। युवा वर्ग और फैशन-प्रेमी अब इसे ट्रेंडी हार, पेंडेंट, ब्रेसलेट और इयररिंग्स में प्राथमिकता दे रहे हैं। बाजार पर असर: हॉलमार्किंग की मंजूरी से 9 कैरेट गोल्ड की विश्वसनीयता बढ़ी है। ज्वैलरी उद्योग में नए ग्राहक आकर्षित होंगे, खासकर पहली बार गोल्ड खरीदने वाले और हल्की, मॉडर्न ज्वैलरी पसंद करने वाले लोग। साथ ही यह भारतीय ज्वैलरी को निर्यात बाजार में भी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने के बढ़ते दामों और युवा वर्ग के हल्के गहनों की बढ़ती मांग के बीच 9 कैरेट गोल्ड एक सस्ता, सुरक्षित और स्टाइलिश विकल्प साबित होगा।  

अब बच्चों के सपने होंगे पूरे, LIC की नई स्कीम देगी सुरक्षित भविष्य

हर माता-पिता की यही इच्छा होती है कि वे अपने बच्चों के लिए एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा तैयार करें ताकि भविष्य में उनकी पढ़ाई, करियर या शादी जैसी जरूरतें पैसों की कमी से प्रभावित न हों। आमतौर पर लोग इसके लिए बैंक की एफडी या आरडी  का सहारा लेते हैं, लेकिन इन पर मिलने वाला ब्याज अब पहले जैसा आकर्षक नहीं रह गया है। ऐसे में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की नई स्कीम ‘अमृत बाल’ बच्चों के लिए एक बेहतर निवेश विकल्प बनकर उभर रही है। क्या है LIC अमृत बाल स्कीम? LIC अमृत बाल एक नॉन-लिंक्ड लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी है, जिसे खासतौर पर बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इस स्कीम में माता-पिता अपने बच्चे के नाम पर निवेश कर सकते हैं, जिससे उन्हें एक साथ बीमा सुरक्षा और बेहतर रिटर्न का फायदा मिलता है। इस पॉलिसी के तहत बच्चे की उम्र निवेश के समय कम से कम 30 दिन और अधिकतम 13 वर्ष होनी चाहिए। यह पॉलिसी तब मैच्योर होती है जब बच्चा 18 से 25 वर्ष की उम्र तक पहुंचता है, जिससे उस समय उसकी पढ़ाई, करियर या उच्च शिक्षा की जरूरतें आसानी से पूरी की जा सकें। प्रीमियम भुगतान के लचीले विकल्प LIC अमृत बाल स्कीम में निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार मासिक, तिमाही, छमाही या वार्षिक रूप से प्रीमियम का भुगतान कर सकते हैं। इसके अलावा सिंगल प्रीमियम या सीमित अवधि (5, 6 या 7 साल) तक प्रीमियम जमा करने का विकल्प भी उपलब्ध है। इस स्कीम के तहत न्यूनतम बीमा राशि ₹2 लाख रखी गई है, जबकि अधिकतम राशि की कोई सीमा नहीं है। अगर पॉलिसी ऑनलाइन खरीदी जाती है, तो ग्राहकों को प्रीमियम पर डिस्काउंट भी मिलता है। गारंटीड बेनिफिट और बंपर रिटर्न इस पॉलिसी की खासियत यह है कि इसमें हर साल के अंत में पॉलिसीधारक को ₹80 प्रति हजार मूल बीमा राशि के हिसाब से गारंटीड अतिरिक्त लाभ  मिलता है, बशर्ते पॉलिसी सक्रिय हो। अगर बच्चे की उम्र पॉलिसी लेते समय 8 साल से कम है, तो जोखिम कवर पॉलिसी लेने के दो साल बाद या उसकी सालगिरह से शुरू होता है। यह सुविधा सुनिश्चित करती है कि माता-पिता के साथ किसी भी अनहोनी की स्थिति में भी बच्चे का भविष्य सुरक्षित रहे। अन्य सुविधाएं और फायदे LIC अमृत बाल में प्रीमियम वेवर बेनिफिट राइडर का विकल्प दिया गया है। यानी अगर माता-पिता किसी कारणवश प्रीमियम नहीं भर पाते, तो भी बच्चे की पॉलिसी चालू रहती है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर लोन की सुविधा भी मिलती है। क्यों है यह बच्चों के लिए बेस्ट स्कीम? LIC अमृत बाल स्कीम उन माता-पिता के लिए बेहद उपयोगी है जो अपने बच्चों के भविष्य को लेकर गंभीर हैं। यह न केवल एक लाइफ इंश्योरेंस सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि साथ ही बचत और निवेश का भरोसेमंद विकल्प भी देती है। जहां बैंक एफडी या आरडी जैसी पारंपरिक योजनाओं में रिटर्न सीमित होता है, वहीं LIC अमृत बाल स्कीम में गारंटीड एडिशन के साथ बेहतर रिटर्न और सुरक्षा दोनों मिलते हैं। यही कारण है कि यह योजना बच्चों के भविष्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का एक संतुलित और सुरक्षित विकल्प मानी जा रही है।  

PF निकासी में बदलाव: नए नियम जानें, कर्मचारियों को अब होंगे ये लाभ

नई दिल्ली  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने नौकरी छोड़ने के बाद पीएफ निकासी और ब्याज से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के अनुसार अब नौकरी छोड़ने के बाद 75% राशि तुरंत निकाली जा सकती है, जबकि शेष राशि निकालने के लिए एक साल का इंतजार करना होगा। इसके साथ ही EPF खाता नौकरी छोड़ने के बाद भी सक्रिय रहता है और तीन साल तक ब्याज मिलता रहेगा। क्या नौकरी छोड़ने के बाद EPF खाता बंद होता है? EPFO के नियमों के अनुसार, एक बार सदस्य बनने के बाद आपकी सदस्यता समाप्त नहीं होती। यानी नौकरी छोड़ने के बाद भी आपकी EPF सदस्यता जारी रहती है और आपका खाता निष्क्रिय नहीं होता। केवल योगदान बंद हो जाता है। तीन साल तक ब्याज यदि नौकरी छोड़ने के बाद खाते में कोई योगदान नहीं हो रहा है, तो खाते पर तीन साल तक ब्याज मिलता रहेगा। लगातार तीन साल तक कोई योगदान न होने पर खाता “निष्क्रिय” माना जाएगा और उसके बाद ब्याज मिलना बंद हो जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई कर्मचारी जून 2022 में नौकरी छोड़ देता है और उसके बाद कोई योगदान नहीं होता, तो जून 2025 तक खाते पर ब्याज मिलेगा। EPFO के नियमों के अनुसार, ब्याज मिलने पर रोक का मतलब यह नहीं कि आपका पैसा समाप्त हो गया है। आपका मूलधन और पूर्व में जमा ब्याज सुरक्षित रहेगा और आप जब चाहें ऑनलाइन दावा दायर करके इसे निकाल सकते हैं। नई नौकरी में जुड़ने पर क्या होगा? यदि आप नई नौकरी शुरू करते हैं और नया EPF खाता खोलते हैं, तो आपका पुराना PF खाता UAN के माध्यम से नए खाते में ट्रांसफर किया जा सकता है। ट्रांसफर के बाद आपकी सदस्यता और योगदान फिर से सक्रिय हो जाएंगे, जिससे न केवल आपकी सेवा अवधि निरंतर मानी जाएगी बल्कि खाते पर ब्याज भी मिलता रहेगा।

ATM कार्ड भूल गए? कोई दिक्कत नहीं, अब ऐसे मिलेगा पैसा

नई दिल्ली  बैंकिंग सिस्टम तेज़ी से डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ रहा है। पहले लोग ATM से पैसे निकालते थे, लेकिन अब डेबिट कार्ड या ATM कार्ड की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। देश के कई बैंकों ने मोबाइल और UPI-बेस्ड कैश विड्रॉल शुरू कर दिया है। इसका मतलब है कि अब आप सिर्फ़ अपने मोबाइल फ़ोन और UPI ऐप का इस्तेमाल करके ATM से कैश निकाल सकते हैं। यह सर्विस उन लोगों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है जो अक्सर अपने कार्ड भूल जाते हैं या कार्ड खो जाने पर भी कैश निकालना चाहते हैं।   कार्डलेस कैश विड्रॉल एक नई बैंकिंग सुविधा है जो कस्टमर्स को बिना ATM कार्ड के ATM से पैसे निकालने की सुविधा देती है। यह फ़ीचर UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस) प्लेटफ़ॉर्म पर आधारित है और देश के ज़्यादातर बड़े बैंकों के ATM पर उपलब्ध है। कस्टमर अपने UPI ऐप, जैसे PhonePe, Paytm, Google Pay, या BHIM को स्कैन करके कैश निकाल सकते हैं। यह तरीका पूरी तरह से सुरक्षित और सुविधाजनक है क्योंकि इसमें कार्ड या PIN शेयर करने की ज़रूरत नहीं होती।  अगर आप अपने मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करके ATM से पैसे निकालना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने नज़दीकी ATM पर जाएं। स्क्रीन पर दिखाए गए ऑप्शन में से QR कैश या स्कैन टू विड्रॉ चुनें। इसके बाद, अपने मोबाइल में कोई भी UPI ऐप खोलें और ATM स्क्रीन पर दिखाए गए QR कोड को स्कैन करें। अपने UPI ऐप में वह अमाउंट डालें जो आप निकालना चाहते हैं। फिर, अपना UPI PIN डालकर ट्रांज़ैक्शन कन्फर्म करें। आपका कैश कुछ ही सेकंड में ATM से निकल जाएगा। यह प्रोसेस पारंपरिक कार्ड ट्रांज़ैक्शन से ज़्यादा तेज़ और आसान है।