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अन्नामलाई का बड़ा बयान, सीट बंटवारे से नाराज होकर चुनाव नहीं लड़ने का संकेत, BJP को तमिलनाडु में झटका

  चेन्नई तमिलनाडु में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है. तमिलनाडु बीजेपी के कद्दावर नेता और राज्य के पूर्व अध्यक्ष अन्नामलाई ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. सूत्रों के अनुसार तमिलनाडु बीजेपी के नेता के. अन्नामलाई ने चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच सीट-बंटवारे के तौर तरीकों पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने दिल्ली में पार्टी आलाकमान को चिट्ठी लिखी है।  अन्नामलाई कुछ चुनिंदा सीटों को AIADMK को दिए जाने पर नाराजगी जाहिर की है. सूत्रों के अनुसार अन्नामलाई ने दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को पत्र लिखकर गठबंधन समझौते के तहत BJP को मिली सीटों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं।  बताया जा रहा है कि वह इस बात से नाराज हैं कि AIADMK ने उन सीटों को BJP को नहीं दिया जिन्हें BJP के लिए जीत के लिहाज से आसान माना जा रहा था. इसमें किनाथुकडावु सीट भी शामिल है. अन्नामलाई ने निर्वाचन क्षेत्रों का विश्लेषण करने के बाद कथित तौर पर चुनाव न लड़ने का फैसला किया है।  पलानीस्वामी AIADMK का प्लान राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सीट शेयरिंग में एडापड्डी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) ने अपनी शर्तें मनवाई। तमिलनाडु में AIADMK को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर ईपीएस ने सीटों के बंटवारे पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। इसी के चलते यहां तक ​​कि एक ऐसी सीट जिसे बीजेपी की तमिलनाडु इकाई के पूर्व प्रमुख के. अन्नामलाई के लिए एक संभावित सीट माना जा रहा था। बीजेपी को वह सीट भी नहीं मिली। सूत्रों की मानें तो उन्हें बीजेपी की कई मांगें भी ठुकरा दीं। बीजेपी ने तमिलनाडु के लिए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को प्रभारी नियुक्त किया है। राज्य में बीजेपी की कमान नैनार नागेंद्रन के हाथाें में है। एनडीए के अन्य प्रमुख नेताओं में ए. रामदास और दिनाकरण हैं। सीट शेयरिंग में किसे कितनी सीटें?  4-25 मार्च को फाइनल हुए तमिलनाडु एनडीए सीट शेयरिंग के तहत एआईएडीएमके को राज्य की 234 विधानसभा सीटों में से 169 सीटें मिली हैं, जबकि शेष 65 सीटें उसके सात एनडीए सहयोगियों को आवंटित की गई हैं। बीजेपी को 27 सीटें, पट्टाली मक्कल काची (PMK) को 18 सीटें और अम्मा मक्कल मुनेत्र कझगम (AMMK) को 11 सीटें दी गई हैं। बाकी सीटें छोटी पार्टियों जैसे तमिल मनीला कांग्रेस (मूपनार), इंडिया जननायक काची (IJK), तमिलगा मक्कल मुनेत्र कझगम (TMMK) और पुराची भारतम के बीच बांटी गई हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने एआईएमडीएके के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से लिखा है कि यह बंटवारा एक ऐसी बातचीत को दिखाता है जिसमें पार्टी ने अपनी निर्णायक पकड़ बनाए रखी। भले ही यह गठबंधन बीजेपी नेतृत्व के दबाव में बना हुआ माना जाता हो। सिर्फ प्रचार कर सकते हैं अन्नामलाई अन्नामलाई से उम्मीद की जा रही थी कि वे पूरे राज्य में एनडीए गठबंधन के लिए प्रचार करेंगे। इस साल की शुरुआत में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या वे चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने जवाब दिया था कि मैं कोई भी फैसला लेने से पहले नेतृत्व से बात करूंगा। तमिलनाडु में चुनाव आयोग ने एक ही चरण में चुनाव रखा है। 23 अप्रैल को राज्य की सभी सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे मतों की गिनती 4 मई को होगी। राज्य विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को खत्म हो रहा है। राज्य में 9 अप्रैल तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। ऐसे में आने वाले एक हफ्ता तमिलनाडु की राजनीति के लिए काफी अहम माना जा रहा है। बीजेपी और एआईएडीएमके की दोस्ती अन्नामलाई की आक्रामक और मीडिया फ्रेंडली छवि से अलग नागेंद्रन एक व्यावहारिक, संतुलित और अलग तरह के नेता हैं. वो अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) छोड़कर बीजेपी में आए हैं. वो जे जयललिता और ओ पनीरसेल्वम की सरकारों में मंत्री रहे हैं. वो ओबीसी के थेवर समुदाय से आते हैं. उनकी राजनीति द्रविड़ परंपरा से गहराई से जुड़ी रही है.उनकी नियुक्ति एआईएडीएमके को संतुष्ट करने और मुक्कुलाथोर वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा थी. बीजेपी के इस कदम से यह संकेत भी मिला कि बीजेपी बीजेपी फिलहाल एआईएडीएमके के साथ गठबंधन के तहत ही काम कर रही है. वह एक तरह से एआईएडीएमके से आए नेताओं के नेतृत्व को स्वीकार कर रही है।  नागेंद्रन के अलावा,तमिलनाडु में बीजेपी का नेतृत्व पुराने नेताओं के हाथों में है. इन नेताओं की जड़ें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में हैं. तमिलसाई सुंदरराजन, सीपी राधाकृष्णन और एल मुरुगन जैसे नेता संगठनात्मक रूप से मजबूत हैं. लेकिन वे अब अपने राजनीतिक शिखर पर नहीं हैं. उनमें द्रविड़ राजनीति की स्थापित धारणाओं को चुनौती देने के लिए जरूरी करिश्मा की कमी है. यहीं पर अन्नामलाई की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. उन्होंने, भले ही अपनी ही पार्टी के कई शक्तिशाली नेताओं को नाराज किया हो, लेकिन वे बीजेपी के लिए एक अलग पहचान पेश करते हैं. तमिलनाडु की राजनीति में उन्होंने एक 'कल्ट फॉलोइंग' बनाने की कोशिश की, हालांकि कभी-कभी वे इसमें जरूरत से ज्यादा आक्रामक हो गए। 

मंत्री के किन्नर संग अश्लील हरकत का वीडियो वायरल, विपक्ष ने मांगा इस्तीफा

मुंबई  महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता नरहरी झिरवल एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर उनका ट्रांसपर्सन (किन्नर) के साथ एक कथित वीडियो सामने आया है, जिसके बाद उनके इस्तीफे या बर्खास्तगी की मांग तेज हो गई है। कांग्रेस ने उनके इस कृत्य को अश्लील और अनैतिक बताते हुए मुख्यमंत्री से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वीडियो और मंत्री का बचाव कांग्रेस नेताओं के अनुसार, यह वीडियो मंत्री के आधिकारिक आवास का है, जिसमें वह किन्नर के साथ आपत्तिजनक स्थिति में नजर आ रहे हैं। हालांकि, गुरुवार को एक मराठी समाचार चैनल से बात करते हुए झिरवल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। झिरवल ने दावा किया कि यह एक 'डॉक्टर्ड' (छेड़छाड़ किया हुआ) और असेंबल किया गया वीडियो है, जिसे केवल उन्हें ब्लैकमेल करने की नीयत से लीक किया गया है। मंत्री ने यह माना कि वह वीडियो में दिख रहे किन्नर को पिछले पांच सालों से जानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि इस ब्लैकमेलिंग के पीछे किसी ऐसे व्यक्ति का हाथ है जो उस ट्रांसपर्सन को जानता है। वीडियो में शराब की बोतलें दिखने के सवाल पर झिरवल ने स्पष्ट किया कि वह शराब नहीं पीते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक किसी ने उनसे इस्तीफा नहीं मांगा है। विपक्ष का तीखा हमला और बर्खास्तगी की मांग इस घटना को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस (विजय वडेट्टीवार): कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने इसे बीजेपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के भीतर चल रहा गैंग वॉर करार दिया। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल एक-दूसरे को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। वडेट्टीवार ने दावा किया कि ट्रांसपर्सन के भाई ने ही ब्लैकमेल करने के लिए यह वीडियो वायरल किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (हर्षवर्धन सपकाल): उन्होंने इसे महाराष्ट्र की राजनीति में नैतिक पतन का ज्वलंत उदाहरण बताया। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि जनता के भरोसे और टैक्सपेयर्स के पैसे पर बैठे एक जनप्रतिनिधि का ऐसा व्यवहार बेहद निंदनीय है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से झिरवल को तुरंत कैबिनेट से हटाने की मांग की। आम आदमी पार्टी (प्रीति शर्मा मेनन): आप की मुंबई अध्यक्ष ने सीएम फडणवीस द्वारा अब तक कार्रवाई न किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह वास्तव में 'कलयुग' है, जहां यौन अपराधी हमारे शासक हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि झिरवल जैसे वरिष्ठ मंत्री को अपनी मर्यादाओं और पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए था। उन्होंने माना कि यह वीडियो ब्लैकमेल करने के इरादे से बनाया और वायरल किया गया है, और मामले की गहन जांच की मांग की। भ्रष्टाचार के पुराने विवादों से भी जुड़ा है नाम नासिक जिले के डिंडोरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले आदिवासी नेता नरहरि झिरवल पिछले महीने भी सुर्खियों में थे, जब उनके ही विभाग में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया था। 12 फरवरी को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने FDA विभाग के क्लर्क राजेंद्र ढेरंगे को राज्य सचिवालय (मंत्रालय) के भीतर 35,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। रिश्वतखोरी से जुड़े एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद झिरवल के निजी सचिव, डॉ. रामदास गाडे को भी उनके पद से हटाकर उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया था।

आम आदमी पार्टी का जन समर्थन देख डरी भाजपा रोज हमारे कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करा रही- केजरीवाल

भाजपा के दमन के खिलाफ ‘‘आप’’ के साथ पूरा गुजरात, करने जा रहा बदलाव- केजरीवाल – आम आदमी पार्टी का जन समर्थन देख डरी भाजपा रोज हमारे कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करा रही- केजरीवाल – इस बार लोग खेती-घर की बिजली मुफ्त, महिलाओं को एक हजार, 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा और अच्छे स्कूल के लिए वोट करेंगे- केजरीवाल – हर साल आदिवासी समाज के लिए अरबों रुपए आते हैं, लेकिन कांग्रेस-भाजपा वाले मिलकर खा जाते हैं- केजरीवाल – 30 साल में भाजपा सरकार अच्छे स्कूल-अस्पताल और खेती के लिए पानी तक नहीं दे पाई, इनकी नीयत ही खराब है- केजरीवाल – गुजरात की जनता अपने बारे में सोचे और पंजाब की तरह भाजपा-कांग्रेस पर झाड़ू चलाकर अपनी सरकार बनाए- केजरीवाल – कांग्रेस-भाजपा एक ही हैं, कांग्रेस को वोट देते हैं तो वह भी चुनाव बाद भाजपा में चला जाता है- भगवंत सिंह मान – ‘‘आप’’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत मान ने दाहोद में ‘विजय विश्वास सभा’ कर भाजपा-कांग्रेस के गठजोड़ पर बोला हमला नई दिल्ली/गुजरात गुजरात दौरे पर आए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत सिंह मान ने दाहोद में ‘विजय विश्वास सभा’ कर भाजपा और कांग्रेस के गुप्त गठजोड़ पर करारा हमला बोला। सभा में उमड़े जन समूह को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गुजरात की जनता भाजपा के दमन के खिलाफ खड़ी हो चुकी है और आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर बदलाव करने जा रही है। आम आदमी पार्टी का बढ़ता जन समर्थन देख भाजपा डर गई है और रोज हमारे कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करा रही है। उन्होंने कहा कि 30 साल में भाजपा सरकार अच्छे स्कूल-अस्पताल और खेती के लिए पानी तक नहीं दे पाई, क्योंकि इनकी नीयत ही खराब है। इस बार जनता खेती-घर की बिजली मुफ्त, महिलाओं को एक हजार, 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा और अच्छे स्कूल के लिए वोट करेगी। भाजपा सरकार ने सबसे ज्यादा आदिवासी समाज को लूटा और उन पर अत्याचार किया- केजरीवाल अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले 30 साल में भाजपा ने कांग्रेस के साथ मिलकर गुजरात को लूट लिया। इन्होंने सबसे ज्यादा आदिवासियों को लूटा है और उनके उपर अत्याचार किया है। गुजरात में सबसे पिछड़ा और शोषित आदिवासी समाज है। बच्चों के शिक्षा, रोजगार का इंतजाम नहीं है। मजबूरी में बच्चे किसानी करते हैं लेकिन भाजपा सरकार ने किसानों का भी बुरा हाल कर दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार हर साल अरबों-खरबों आदिवासी समाज के कल्याण के लिए भेजती है। पिछले 30 साल में आदिवासी समाज के कल्याण के जितना पैसा आया, अगर ये पैसा एक-एक व्यक्ति को सीधे दे देते तो हर व्यक्ति करोड़पति बन जाता। लेकिन आदिवासी समाज के नाम पर आने वाला पैसा भाजपा और कांग्रेस वालों की जेब में चला जाता है।  भाजपा वाले नरेगा का पैसा भी खा गए, हमारे विधायक ने आवाज उठाई तो उसे जेल भेज दिया- केजरीवाल अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नरेगा में सबसे गरीब व्यक्ति भीषण गर्मी में पसीना बहाकर मजदूरी करता है। सिर्फ 100 रोजगार के पैसे मिलते हैं। ये लोग मजदूरों के नाम की इंट्री कर मनरेगा का भी पैसा खा गए। मजदूरों का इसकी जानकारी ही नहीं होती है कि उनके नाम का अंगूठा लग गया है। ‘‘आप’’ विधायक ने मनरेगा के पैसे की लूट के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने रजिस्टर दिखाने को कहा तो भाजपा सरकार ने उन्हें पकड़ कर जेल में डाल दिया। नरेगा का पैसा चोरी करने वाले भाजपा सरकार के मंत्री को जेल में नहीं डाला गया, क्योंकि वह उपर तक पैसा पहुंचाता है। गरीबों का हक दिलाने के लिए चैतर वसावा तीन महीने जेल में रहे। इसी तरह, नल से जल योजना में अरबों-खरबों रुपए आता है, लेकिन किसी के घर में नल से पानी नहीं आया। भाजपा वाले इसका भी सारा पैसा खा गए। हमारे वोट से ये लोग विधायक-मंत्री बन जाते हैं, लेकिन हमारे बच्चों के लिए एक स्कूल तक नहीं बनवाते- केजरीवाल अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम लोगों के वोट से भाजपा-कांग्रेस वाले विधायक और मंत्री बन जाते हैं, इनके बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं और आम लोगों के बच्चों के लिए ढंग के सरकारी स्कूल भी नहीं है। ये बीमार होने पर विदेशों में इलाज कराने जाते हैं और इन्हीं के बच्चों को विधायकी का टिकट भी मिलता है, लेकिन एक आम आदमी के बच्चों का कोई भविष्य नहीं है। आम आदमी वोट अपने लिए देता है, ना कि इनके लिए देता है। भाजपा सरकार ने सबसे ज्यादा अत्याचार आदिवासी समाज के साथ किया। इन्होंने आदिवासी समाज का जल, जंगल और जमीन छीन लिया। पुलिस और वन विभाग वाले भी परेशान करते हैं। आज सबसे ज्यादा एफआईआर आदिवासी समाज के लोगों पर दर्ज है। पंजाब की गुजरात के पास भी झाड़ू चलाकर कांग्रेस-भाजपा का सफाया करने का अच्छा मौका है- केजरीवाल अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 2022 से पहले पंजाब में भी गुजरात जैसा ही हाल था। पंजाब में कांग्रेस, भाजपा और अकाली गठबंधन की दो ही पार्टियां थी। दोनों पार्टियां 5-5 साल बारी-बारी से सरकार बनाते थे और दोनों मिलकर लूटते थे। गुजरात की तरह पंजाब में भी कांग्रेस-भाजपा के संयुक्त धंधे थे। पंजाब के लोग तंग आ गए। इसी दौरान पंजाब में आम आदमी पार्टी एक उम्मीद लेकर आई। पंजाब के लोगों ने तय कि पुरानी पार्टियों पर झाड़ू चलाकर उन्हें उखाड़ फेंकना है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पंजाब की जनता ने 117 में 92 सीटें आम आदमी पार्टी को देकर कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल को पूरी तरह से साफ कर दिया। अब गुजरात के पास भी झाड़ू चलाकर कांग्रेस और भाजपा को साफ करने का अच्छा मौका है। पंजाब में खेती की बिजली मुफ्त है, जबकि गुजरात में किसानों को भारी-भरकम बिल देने पड़ते हैं- केजरीवाल अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले चार साल से पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। हमारी पार्टी बड़े-बड़े वादे नहीं करती है, बल्कि गारंटी देती है। बाकी पार्टियां झूठे वादे करती हैं। हम बड़े-बड़े दावे नहीं करेंगे, बल्कि पंजाब में जो करके दिखाया है, वही काम गुजरात में भी करेंगे। पंजाब में किसानों की सरकार है और किसान का … Read more

पिछलग्गू BJP ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए कैसे बनाई चुनौती, जानें उनकी रणनीति

कोलकाता  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच दो-तरफा मुकाबला देखा जा रहा है. 2021 के चुनाव के बाद राज्य में इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच सीधी टक्कर दिख रही है. लंबे समय तक पश्चिम बंगाल में राज करने वाले वामदल और कांग्रेस की ताकत जहां लगातार सिमटती जा रही है, वहीं उस खाली हुए स्पेस को बीजेपी भरती दिख रही है. कभी टीएमसी के साथ गठबंधन में सहयोगी रही बीजेपी मौजूदा वक्त में उसकी सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी बन चुकी है।  पिछले कुछ सालों में, भारतीय जनता पार्टी साइडलाइन से हटकर पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्ष के तौर पर उभरी है. बीजेपी ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को चुनौती देने की सबसे मज़बूत उम्मीद बन चुकी है. 2016 में सिर्फ़ तीन विधानसभा सीटें जीतने से लेकर 2021 के चुनाव में 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष के तौर पर उभरने तक, BJP ने राज्य में काफ़ी बढ़त बनाई है. बंगाली बोलने वाले राज्य में नेशनल पार्टी की बढ़त लोगों को अचंभित कर रही है।  बंगाल में लगातार बढ़ रहा बीजेपी का वोट शेयर 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के एक भी उम्मीदवार नहीं जीते थे. उस चुनाव में पूरे राज्य में केवल चार फीसदी वोट मिले थे. 2014 के लोकसभा चुनावों में, पार्टी ने 18 फीसदी वोट शेयर के साथ दो सीटें जीती थीं. 2016 में, उसे लगभग 10 फीसदी वोट के साथ तीन विधानसभा सीटें मिली थीं. 2021 में 77 सीटों और 38 फीसदी से ज़्यादा वोट शेयर तक पहुंची. इसके साथ ही बीजेपी ने दिखा दिया कि वह बंगाल जैसे राज्य में भी मजबूत राजनीतिक ताकत बन सकती है. बेहद कुछ सालों में ही बीजेपी ने लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस की जगह ले ली, जो दशकों से बंगाल की राजनीति पर हावी थे. इस तरह बीजेपी राज्य की मुख्य विपक्षी ताकत बन गई।  2021 में, BJP के लिए एक अहम पल तब आया जब नंदीग्राम में मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी पर सुवेंदु अधिकारी की जीत हुई. सुवेंदु, जो कभी ममता के करीबी थे, 1,956 वोटों के बहुत कम अंतर से जीते. यह मुकाबला एक हाई-प्रोफाइल मुकाबले में बदल गया था जब CM ने खुद अधिकारी को उनके घरेलू मैदान पर चुनौती देने का फैसला किया, जिससे यह नतीजा पार्टी के लिए एक सिंबॉलिक जीत बन गया।  उत्तर बंगाल के जरिए बीजेपी ने मजबूत की पकड़ BJP की बढ़त ज़्यादातर स्ट्रेटेजिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों में केंद्रित रही है. उत्तर बंगाल, जिसमें दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूच बिहार और मालदा और दिनाजपुर के कुछ हिस्से में 54 विधानसभा क्षेत्र हैं, पार्टी का गढ़ बन गया है. दार्जिलिंग हिल्स में, BJP ने दार्जिलिंग, कुर्सेओंग और माटीगारा-नक्सलबाड़ी जैसी सीटों पर दबदबा बनाया, जिससे उसे गोरखा समुदाय का समर्थन मिला. डुआर्स और तराई बेल्ट – जिसमें जलपाईगुड़ी, राजगंज, डाबग्राम-फूलबाड़ी, माल, अलीपुरद्वार और कुमारग्राम शामिल हैं- में आदिवासी और राजबंशी वोटरों का दबदबा है, जबकि सिलीगुड़ी जैसे शहरी केंद्र भी BJP की तरफ झुके हुए हैं।  2021 में, BJP ने अलीपुरद्वार की सभी पांच सीटों पर जीत हासिल की, जबकि उसने कूचबिहार की नौ में से सात सीटें जीतीं. जलपाईगुड़ी में, BJP ने सात में से चार सीटें और हिल्स की छह में से पांच सीटें जीतीं, जिसमें सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग टाउन शामिल हैं, जबकि कलिम्पोंग एक निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गया।  2019 के लोकसभा चुनावों ने न केवल बीजेपी को केंद्र में अब तक का सबसे बड़ा जनादेश दिया, बल्कि राज्य में पार्टी का सबसे मजबूत प्रदर्शन भी दिखाया. बीजेपी ने 18 पार्लियामेंट्री सीटें जीतीं, जो टीएमसी की 22 सीटों से पीछे थीं, जबकि कांग्रेस सिर्फ़ 2 सीटें ही जीत पाई. 2019 के लोकसभा चुनावों में भी BJP ने नॉर्थ बंगाल की 8 में से 7 पार्लियामेंट्री सीटें जीतीं. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनावों में, BJP ने 12 सीटें जीतीं, जबकि TMC ने 29 सीटों के साथ दबदबा बनाया।  BJP की बढ़ती पकड़ के पीछे की रणनीति क्या है?       राज्य में BJP की बढ़त कई वजहों से हो सकती है. 2014 से, पार्टी ने RSS के सपोर्ट वाले एक मज़बूत ज़मीनी नेटवर्क के ज़रिए अपनी ऑर्गनाइज़ेशनल पहुंच को मज़बूत किया है. इसने पहचान की राजनीति का कामयाबी से फ़ायदा उठाया, राजबंशी, आदिवासी और शहरी समुदायों के बीच हिंदू वोटों को मज़बूत किया, साथ ही तृणमूल के ख़िलाफ़ क्षेत्रीय शिकायतों को भी सामने लाया।      पिछले कुछ सालों में टीएमसी और कांग्रेस के कई बड़े नेता भी बीजेपी में शामिल हो गए, जिससे बंगाल में पार्टी की लीडरशिप का दबदबा बढ़ा.     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दूसरे सीनियर नेताओं के बार-बार दौरों से भी पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं की उपलब्धता बढ़ी, जिससे क्रेडिबिलिटी और वोटर अपील बढ़ी।      साथ ही, तृणमूल की कमज़ोरियों, जिसमें कथित कुशासन और एंटी-इनकंबेंसी भावना शामिल है. खासकर नॉर्थ बंगाल में BJP को पूरे राज्य में अपनी पकड़ बढ़ाने का मौका दिया।   

दिग्विजय सिंह अयोध्या में करेंगे रामलला के दर्शन, संकल्प पूरा करने का लिया निर्णय

भोपाल  मध्यप्रदेश के कद्दावर कांग्रेस नेता, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह के संबंध में बड़ी खबर सामने आई है। वे रामलला के दर्शन करने जाएंगे। राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह अयोध्या जाकर राम मंदिर जाएंगे और दर्शन के साथ विधिवत पूजा अर्चना करेंगे। वे अयोध्या की विख्यात हनुमानगढ़ी भी जाएंगे और दर्शन-पूजन करेंगे। अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने के बाद दिग्विजय सिंह Digvijaya Singh का यह पहला दौरा है। इसी के साथ वे अपना संकल्प भी पूरा करेंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह राम मंदिर के मुद्दे पर बीजेपी व हिंदूवादी संगठनों के निशाने पर रहे हैं। उनपर श्रीराम विरोधी व सनातन विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि दिग्विजय सिंह ने ऐसे आरोपों को हमेशा नकारा है। उनका कहना है कि वे बीजेपी व अन्य संगठनों द्वारा राम मंदिर के मामले का राजनीतिकरण किए जाने का विरोध करते हैं। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार दिग्विजय सिंह 26 मार्च यानि गुरुवार को अयोध्या जाएंगे। वे राम मंदिर जाकर राम लला के दर्शन करेंगे। दिग्विजय सिंह अयोध्या में हनुमानगढ़ी भी जाएंगे। यहां वे हनुमानजी के दर्शन कर विधिविधान से पूजन करेंगे। मंदिर का निर्माण पूरा हो जाने पर राम लला के दर्शन करने का संकल्प लिया था अयोध्या में श्रीराम मंदिर में राम लला के दर्शन करने के साथ ही दिग्विजय सिंह अपना एक प्रण भी पूरा करेंगे। उन्होंने राम मंदिर का निर्माण पूरा हो जाने पर राम लला के दर्शन करने का संकल्प लिया था। 26 मार्च को अयोध्या में राम लला के दर्शन के साथ ही दिग्विजय सिंह का यह प्रण पूरा हो जाएगा। राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में दर्शन पूजन के बाद वे अयोध्या से लखनऊ के लिए रवाना हो जाएंगे। बता दें कि दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार 111 रु की निधि समर्पित की थी। दिग्विजय सिंह का कहना है कि उन्होंने खुद को हमेशा राम भक्त ही कहा है लेकिन राजनीति और आस्था को अलग रखते हैं। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का अयोध्या का आधिकारिक दौरा कार्यक्रम घोषित हो गया है। वे 26 मार्च (गुरूवार) को दिल्ली से अयोध्या के लिए रवाना होंगे। दिग्विजय सिंह का अयोध्या का आधिकारिक कार्यक्रम 8.10 प्रस्थान – दिल्ली (BY AIR INDIA EXPRESS, IX – 1285) 9.40 आगमन – अयोध्या, उत्तरप्रदेश श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दर्शन 13.30 प्रस्थान – अयोध्या (कार से दूरी लगभग 135 किमी) 16.00 आगमन – लखनऊ, उत्तरप्रदेश स्थानीय कार्यक्रम 19.40 प्रस्थान – लखनऊ (BY AIR INDIA EXPRESS, IX – 1618) 21.00 आगमन – दिल्ली रात्रि विश्राम दिल्ली।  

AAP का महिला कार्ड: गुजरात में सत्ता आई तो हर महिला के खाते में ₹1000 – केजरीवाल

अमरेली आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुजरात में आप की जीत होने पर महिलाओं को 1000 रुपये देने का ऐलान किया है। अमरेली में विजय विश्वास सभा को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा- "आम आदमी पार्टी की सरकार बनाओ, गुजरात में भी सभी महिलाओं के खाते में हजार-हजार रुपये आने शुरू हो जाएंगे।" केजरीवाल ने गिनाईं पंजाब की उपलब्धियां सभा को संबोधित करते समय अरविंद केजरीवाल गुजरात में लोगों को मिलने वाली उपलब्धियां गिना रहे थे। तभी उन्होंने बताया- पंजाब के अंदर हर महीने 18 साल से ऊपर की महिला के अकाउंट में 1000 रुपये जाया करेंगे। अगर एक घर में मां, बहू और बेटी है, तो तीन हजार रुपये महीने उस परिवार को मिला करेंगे। इन विपक्षी पार्टियों ने इतना गालियां दीं कि महिलाएं तो बिगड़ जाएंगी। 'आप' की सरकार बनने पर महिलाओं को देंगे 1000 रुपये मैंने कहा- तुम इतना करोड़ों रुपये डकार गए, तुम नहीं बिगड़े महिलाएं बिगड़ जाएंगी। इसके बाद केजरीवाल ने ऐलान करते हुए कहा- आम आदमी पार्टी की सरकार बनाओ, गुजरात में भी सभी महिलाओं के खाते में हजार-हजार रुपये आने शुरू हो जाएंगे।" केजरीवाल ने कहा- जिला परिषद का चुनाव एक तरह से सेमीफाइनल है। अगले दो-डेढ साल के बाद विधानसभा का चुनाव है। उससे पहले आप लोग आम आदमी की सरकार बनाएं।

‘शीशमहल’ विवाद गरमाया: महंगे पर्दों के पीछे छुपी हकीकत पर रेखा गुप्ता का तंज

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा में बजट सत्र के दौरान सीएजी पर चर्चा करते हुए सीएम रेखा गुप्ता ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह चर्चा उस सुनियोजित धोखे की है जिस रिपोर्ट को केजरीवाल ने रोके रखा। आम आदमी बनकर उन्होंने दिल्ली के लोगों को ठगा। रेखा गुप्ता ने शायराना अंदाज में तंज कसा- दिल्ली वाले कह रहे होंगे कि वो जहर देता तो सबकी नजरों में आ जाता, उसने दवा देना बंद कर दिया। सीएम रेखा गुप्ता ने 'शीशमहल' को लेकर केजरीवाल को निशाने पर लिया। आरोप लगाया कि वे शीला दीक्षित के घर के 10 एसी वाले घर पर हंगामा करते थे। आज उनके 'शीशमहल' में 50 एसी और 70 पंखे मिले। एक करोड़ के पर्दे और 18 लाख की कॉफी मशीन मिली। दिल्लीवासियों को बेवकूफ बनाया रेखा गुप्ता ने विधानसभा में सीएजी पर चर्चा के दौरान कहा कि वास्तव में वह (अरविंद केजरीवाल) राजा बनकर दिल्ली वालों को दास समझते थे। दिल्ली की जानता को बेवक़ूफ बनाते थे। शीला दीक्षित के घर में लगे दस एसी को लेकर वह ताने मारते थे, आज अपने घर में पचास एसी लगाने को लेकर वह क्या कहेंगे। जब लोग मर रहे थे, केजरीवाल बना रहे थे शीशमहल अरविंद केजरीवाल कहते थे कि उन्हें कुछ नहीं चाहिए लेकिन वास्तव में उन्हें सब कुछ चाहिए था। देश में जब लाखों लोग मार रहे थे, दिल्ली में हजारों लोग मार रहे थे, तब अरविंद केजरीवाल अपना शानदार घर बना रहे थे। उन्होंने अस्पताल बनाना प्राथमिकता नहीं लगी। उनके यहाँ खाना नीचे से ऊपर ले जाने के लिए लिफ्ट लगाई। 18 लाख की कॉफ़ी मशीन लगाई। मुझे प्रवेश एक दिन घर दिखाने के लिए ले गए। वहाँ घूमकर मुझे लगा कि मैं धर्मशाला में रहती हूं। दिल्ली को सड़क, फ्लाईओवर चाहिए थे, केजरीवाल ने महल बनाया मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि दिल्ली को फ्लाईओवर, सड़क, अस्पताल, स्कूल चाहिए थे, लेकिन केजरीवाल ने अपना घर बनाने पर ज़्यादा ध्यान दिया। करोड़ों रुपये सलाहकार को दिए गए। ठेकेदार को चुनकर काम सौंपा गया। उन्हें पता था चीफ इंजीनियर की शक्ति दस करोड़ की है। इसलिए ऊपर अनुमति के लिए गए ही नहीं। आठ करोड़ का टेंडर कैसे 62 करोड़ में बदल गया। और नेताओं ने भी अपने यहां करोड़ों रुपये खर्च किए। सचिवालय में बना मुख्यमंत्री कार्यालय भी एक महल के समान है। जो अरविंद केजरीवाल ने बनवाया है। जानता के साथ उन्होंने गुनाह किया है। रेखा गुप्ता आगे कहा कि मनीष सिसोदिया, राजेंद्र पाल गौतम, रामनिवास गोयल, इमरान हुसैन, राखी बिदकना आदि ने भी अपने घरों पर करोड़ों रुपये खर्च किए। इस रिपोर्ट पर सख्त करवाई की मांग मुख्यमंत्री ने की। इसके साथ ही उन्होंने इसे पीएसी में भेजने की माँग की है।

BJP विधायक को तलब किया गया, सरकार के खिलाफ धरना देने पर CM और प्रदेश अध्यक्ष ने भोपाल बुलाया

भोपाल भिंड जिले की लहार विधानसभा सीट से भाजपा विधायक अंबरीश शर्मा 'गुड्डू' ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह और प्रशासन के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलते हुए भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात की है। बीजेपी विधायक अमरीश शर्मा को पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व ने बुलाया और सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मुलाकात की। एक फूंक मारेंगे तो पाकिस्तान जाकर गिरोगे बताया जा रहा है बीजेपी विधायक के प्रदर्शन से पार्टी के ऊपर कई सवाल खड़े हो रहे थे। प्रदर्शन के दौरान विधायक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते नजर आए। वहीं बीजेपी विधायक ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा था कि एक फूंक मारेंगे तो पाकिस्तान जाकर गिरोगे। बीजेपी विधायक का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। 550 दिनों से धरने पर बैठे लोग, क्या वजह विधायक शर्मा का आरोप है कि कांग्रेस नेता गोविंद सिंह की कोठी की वजह से दलित बस्ती का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है और प्रशासन विपक्षी दबाव में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।गौरतलब है कि इस रास्ते को खुलवाने के लिए स्थानीय लोग पिछले 550 दिनों से धरने पर बैठे हैं, जिनके समर्थन में रविवार को खुद विधायक भी धरने पर बैठ गए थे। बिजली कटौती, रेत खनन की समस्या भी उठाई मुख्यमंत्री ने इस मामले में दखल देते हुए न केवल जांच के आदेश दिए हैं, बल्कि क्षेत्र में रेत खनन शुरू करने और बिजली कटौती की समस्या को तुरंत खत्म करने के निर्देश भी जारी किए हैं। विधायक अंबरीश शर्मा ने साफ कर दिया है कि जब तक दलितों को उनका हक और रास्ता नहीं मिल जाता, उनकी यह कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी रहेगी। अब देखने की बात होगी कि आगे क्या कार्यवाही होती है।

मस्जिद पर तीर वाले बयान के बाद फिर सुर्खियों में माधवी, एयरपोर्ट पर क्या किया ऐसा?

नई दिल्ली केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नेता और 2024 में हैदराबाद लोकसभा सीट से असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ चुनाव लड़ चुकीं कोम्पेला माधवी लता एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। इस बार, विवाद की वजह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वह वीडियो है, जिसे उन्होंने नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रार्थना कक्ष में रिकॉर्ड किया है और वहीं से शेयर किया है। उन्होंने इस वीडियो को इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI Airport) को भी टैग किया है। इस वीडियो में कोम्पेला माधवी लता को एयर पोर्ट के प्रार्थना घर में "दुर्गा सूक्तम" का पाठ करते हुए देखा जा सकता है। कैमरे के फ्रेम में कमरे में बुर्का पहने कुछ महिलाएं भी दिखाई देती हैं। हवाई अड्डा के प्रेयर रूम में रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो ने अब सियासी और सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है। वीडियो में दिख रहा है कि वीडियो समाप्त होते ही माधवी लता बिना किसी संवाद के बाहर चली जाती हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में किसी तरह का प्रत्यक्ष विवाद या टकराव नहीं दिखता, लेकिन इसके बावजूद इसने एक बड़ा विमर्श खड़ा कर दिया है। कोम्पेला माधवी लता द्वारा साझा किए गए इस वीडियो पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रहीं हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी से कार्रवाई की मांग रिपोर्ट के मुताबिक, आलोचकों का कहना है कि एयरपोर्ट के प्रेयर रूम ‘शांत ध्यान और प्रार्थना’ के लिए बनाए जाते हैं, जहाँ ऊँची आवाज़ में मंत्रोच्चार और वीडियो रिकॉर्डिंग नियमों के खिलाफ है। कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने इस मुद्दे को उठाते हुए एयरपोर्ट प्राधिकरण से कार्रवाई की मांग की है। वहीं, समर्थकों का तर्क है कि भारत एक बहुधर्मी देश है और प्रेयर रूम सभी धर्मों के लोगों के लिए खुले होते हैं। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को अपनी आस्था के अनुसार प्रार्थना करने का पूरा अधिकार है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को किया टैग कांग्रेस के सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के राष्ट्रीय समन्वयक, मोहम्मद वसीम ने एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) और पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को टैग करते हुए कहा, "कृपया कार्रवाई करें, क्योंकि प्रार्थना कक्ष केवल मौन प्रार्थना और ध्यान के लिए है। यह महिला नियमों को तोड़ रही है और आवाज और कैमरे के साथ प्रार्थना करके दूसरे लोगों को असहज कर रही है।" अभी मौजूदा केंद्र सरकार में TDP सांसद किंजरापु राम मोहन नायडू केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हैं। 2024 में भी हुआ था विवाद बता दें कि ये वही माधवी लता हैं, जिन्होंने 2024 के चुनावों में AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ हैदराबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत नहीं पाईं, उन्हें विपक्षी नेताओं ने BJP के सबसे ज़्यादा ध्रुवीकरण करने वाले चेहरों में से एक कहा है। लोकसभा चुनावों से पहले 2024 में लता उस वक्त सुर्खियों और विवादों में आईं थी, जब वह हैदराबाद के पुराने शहर में राम नवमी की रैली में हिस्सा लेते हुए एक मस्जिद की तरफ तीर चलाने का इशारा करती हुई नजर आई थीं। बाद में उन्होंने मस्जिद की तरफ निशाना लगाने की बात से इनकार किया था और इस मामले में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।  

उत्तर से दक्षिण तक सियासी हलचल: ममता और अभिषेक की जोड़ी क्या बदलेगी खेल?

कोलकाता पश्चिम बंगाल में चुनाव अभियान तेज हो गया है। भाजपा और टीएमसी दोनों ने ही अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। आमतौर पर भाजपा उम्मीदवारों के चयन में देरी करती रही है, लेकिन इस बार उसने चुनाव का शेड्यूल आते ही कैंडिडेट्स घोषित कर दिए हैं। वहीं टीएमसी ने भी 291 उम्मीदवारों की पूरी लिस्ट जारी कर दी है और तीन सीटें गठबंधन साथी को दी हैं। इसके अलावा ममता बनर्जी की पार्टी ने चुनाव अभियान में भी तेजी लाने का फैसला लिया है। इसके तहत ममता बनर्जी खुद उत्तर बंगाल की कमान संभालेंगी, जबकि उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी साउथ बंगाल में कैंपेन को आगे बढ़ाएंगे। ममता बनर्जी 24 मार्च यानी आज से ही उत्तर बंगाल में कैंपेन शुरू करने जा रही हैं। उनके भतीजे और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी साउथ बंगाल के जिलों पर फोकस करते हुए प्रचार पर निकलेंगे। टीएमसी के सूत्रों का कहना है कि उत्तर बंगाल में भाजपा मजबूत है। ऐसे में सीएम खुद चाहती है कि वह उन इलाकों पर फोकस करते हुए कैंपेन करें। एक सीनियर नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद अलीपुरद्वार से प्रचार आगे बढ़ाएंगी। इससे स्पष्ट है कि वह उत्तर बंगाल में भाजपा की चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। अलीपुरद्वार के परेड ग्राउंड में ममता बनर्जी एक रैली को संबोधित करेंगी। इसके बाद फिर दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी में वह 25 तारीख को बैठकें करनी वाली हैं। इन इलाकों के अलावा फुलबारी और नक्सलबारी में भी वह प्रचार करेंगी। यही नहीं 26 मार्च को भी ममता बनर्जी का पुरुलिया, बांकुरा, बीरभूम, पश्चिम बर्धमान इलाकों में भी वह कैंपेन करेंगी। इसके बाद ही वह दक्षिण के इलाकों में जाएंगी। मुख्य तौर पर साउथ बंगाल की जिम्मेदारी अभिषेक बनर्जी को ही दी गई है। परंपरागत रूप से भाजपा नॉर्थ बंगाल में मजबूत मानी जाती रही है। इस बार ममता बनर्जी की कोशिश है कि उसके इसी गढ़ को टारगेट किया जाए। यही कारण है कि वह खुद यहां की कमान संभाल रही हैं और भतीजे अभिषेक को साउथ की कमान दी गई है। 2019 के लोकसभा चुनाव में नॉर्थ बंगाल से भाजपा ने कई सीटें जीती थीं और 2021 के विधानसभा चुनाव में भी वह यहां मजबूत थी। इस बीच भाजपा की कोशिशें भी कम नहीं हैं। नए बने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी य़हां पहुंच रहे हैं। सिलीगुड़ी और दुर्गापुर में वह बैठकें करने वाले हैं। इस बैठक में बंगाल के प्रभारी सुनील बंसल और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव भी मौजूद रहेंगे। इस बैठक में आसपास के जिलों के नेताओं, प्रत्याशियों और अन्य महत्वपूर्ण लोगों को बुलाया गया है। भाजपा की रणनीति यह है कि गली-गली में घूमकर कैंपेन किया जाए। बड़े नेताओं को भी जमीनी प्रचार में उतारा जाए। बूथ लेवल मैनेजमेंट और केंद्रीय योजनाओं के प्रचार पर फिलहाल ज्यादा फोकस किया जा रहा है।