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ममता की प्रत्याशी संचिता प्रधान ने वापस लिया नाम, शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद बदला फैसला

कोलकाता ममता बनर्जी की पार्टी, ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नंदीग्राम सीट से अपना नामांकन वापस ले लिया है. ये ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. नामांकन प्रक्रिया अब खत्म हो चुकी है, ऐसे में अब ममता टीएमसी नंदीग्राम उपचुनाव नहीं लड़ पाएगी। बीजेपी के सूत्रों ने बताया कि ममता गुट की नंदीग्राम उम्मीदवार संचिता प्रधान डे नेशाम कोलकाता में सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी, जिसके बाद उम्मीदवार ने अपना नाम वापस ले लिया।  उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने पर ममता बनर्जी ने कहा कि ये लोकतंत्र के लिए एक काला दिन है. उद्धव ठाकरे की पार्टी को भी ऐसे ही तोड़ा गया. चुनाव आयोग का फैसला असंवैधानिक है. राजनीतिक बदले की भावना से ये कार्रवाई की गई है. बीजेपी ने चुनाव को हाइजैक किया है. बीजेपी का काम संविधान को खत्म करने का है. लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन नहीं किया गया।  ममता ने कहा कि बीजेपी ने मेरी पार्टी को खत्म करने की बात कही थी. उन्होंने SIR के नाम पर शुरुआत की और फिर चुनावों को हाईजैक कर लिया. बीजेपी ने AI के ज़रिए वोटरों के नाम हटा दिए. बिहार, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में वोट लूटे. बीजेपी एक 'जुमला पार्टी' है. ममता ने कहा कि उन्होंने उद्धव ठाकरे की पार्टी के साथ भी ऐसा ही किया था।  हालांकि, संचिता ने किस वजह से अपनी उम्मीदवारी वापस ली, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. ऐसे में नंदीग्राम की सियासत में इस फैसले के मायने तलाशे जा रहे हैं।  टीएमसी के बंटवारे के बीच नंदीग्राम में नया मोड़ यह पूरा घटनाक्रम टीएमसी के दोनों गुटों को नाम और सिंबल आवंटन के बीच आया है. चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'Mamata All India Trinamool Congress' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न दिया है. वहीं, अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को 'Democratic Trinamool Congress' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न मिला है।  आयोग ने दोनों गुटों को आगामी उपचुनाव के लिए पुराने 'All India Trinamool Congress' नाम और 'जोड़ा घास फूल' वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया था।  नंदीग्राम उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था. 13 सितंबर को उनके नाम का ऐलान किया गया था. वहीं बीजेपी ने नंदीग्राम से हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है. वह शुभेंदु अधिकारी के पूर्व निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हैं. ऋतब्रत गुट की ओर से मोहम्मद एतेशामुल हक मैदान में हैं. कांग्रेस और वाम मोर्चे ने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं।  उपचुनाव के लिए 6 अक्टूबर को होना है मतदान बता दें कि राज्य की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है. नतीजे 9 अक्टूबर हो जारी होंगे. राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी. बाद में उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ने का फैसला किया, जिससे यह सीट रिक्त हुई. वहीं एजेयूपी (AJUP) नेता हुमायूं कबीर ने नौदा और रेजीनगर दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी, जिसके बाद उन्होंने रेजीनगर सीट से इस्तीफा दे दिया था. इसके चलते नंदीग्राम और रेजीनगर सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है। 

ममता गुट की प्रत्याशी के नाम वापस लेने के बाद बड़ा ऐलान, नंदीग्राम में कांग्रेस के साथ आईं ममता

कोलकाता पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला है. ममता बनर्जी गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात करने के बाद अपना नामांकन वापस ले लिया. इसको लेकर अब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. साथ ही इस सीट पर होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन का ऐलान किया है।  संचिता प्रधान डे के उम्मीदवारी वापस लिए जाने के बाद ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. उन्होंने ऐलान किया कि उनका गुट नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन करेगा और अब इस सीट पर अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगा।  उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उन्हें गुरुवार को फोन किया था. ममता ने INDIA गठबंधन के प्रति पूरी एकजुटता जताते हुए कहा कि सभी मिलकर लड़ेंगे. उन्होंने अरविंद केजरीवाल के ट्वीट का भी जिक्र किया और कहा कि सभी मिलकर लड़ाई लड़ेंगे।  बता दें कि नंदीग्राम उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था. 13 सितंबर को उनके नाम का ऐलान किया गया था. वहीं बीजेपी ने नंदीग्राम से हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है. वह शुभेंदु अधिकारी के पूर्व निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हैं. ऋतब्रत गुट की ओर से मोहम्मद एतेशामुल हक मैदान में हैं. कांग्रेस ने मिलन प्रधान को टिकट दिया है. वहीं वाम मोर्चे ने भी अपना उम्मीदवार उतारा है।  चुनाव आयोग पर बरसीं ममता ममता बनर्जी ने मौजूदा घटनाक्रम पर चुनाव आयोग और बीजेपी पर कई आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि आज लोकतंत्र के इतिहास में काला दिन है. ममता ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी को हराने के लिए SIR का इस्तेमाल किया गया और EVM को हाईजैक किया गया. उन्होंने चुनाव आयोग पर बीजेपी के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए काम करने का आरोप लगाया।  ममता ने यह भी आरोप लगाया कि बंगाल चुनाव में मतगणना का काम CRPF के जरिए कराया गया. उन्होंने कहा कि टीएमसी 29 साल पुरानी पार्टी है और इसके बावजूद पार्टी का बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया।  ममता ने दावा किया कि पुलिस उनके कार्यकर्ताओं पर बीजेपी में शामिल होने का दबाव बना रही है और करीब 14 हजार कार्यकर्ता जेल में हैं. उनके पार्टी कार्यकर्ताओं को उनसे मिलने की इजाजत नहीं दी जा रही है और वह खुद भी हाउस अरेस्ट में हैं।  'इंटरिम ऑर्डर है, लड़ाई जारी रखेंगे' टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले पर ममता ने कहा कि यह अंतिम फैसला नहीं है और उनकी पार्टी इसे कानूनी तौर पर चुनौती देगी. उन्होंने कहा कि वह सिर नहीं झुकाएंगी और पार्टी फिर वापसी करेगी।  वह अपनी आखिरी सांस तक ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नहीं छोड़ेंगी. उन्होंने खुद को टीएमसी की संस्थापक चेयरपर्सन बताया।  उन्होंने यह भी कहा कि चार महीने पहले जिन लोगों ने एक चुनाव चिह्न पर जीत हासिल की थी, वे अब उसी के खिलाफ कैसे खड़े हो सकते हैं. ममता ने बागी गुट पर निशाना साधते हुए कहा कि अब यह सामने आ गया है कि असली तृणमूल कौन है और कौन लोग पार्टी के नाम पर फायदा उठा रहे थे. ममता ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का नाम लिए बिना उन पर भी हमला बोला. उन्होंने कहा कि वह योगी से भी बदतर हो गए हैं और सभी को धमका रहे हैं।  टीएमसी के नाम-सिंबल की लड़ाई के बीच नया मोड़ यह पूरा घटनाक्रम टीएमसी के दोनों गुटों को नाम और सिंबल आवंटन के बीच आया है. चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'Mamata All India Trinamool Congress' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न दिया है. वहीं, अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को 'Democratic Trinamool Congress' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न मिला है. आयोग ने दोनों गुटों को आगामी उपचुनाव के लिए पुराने 'All India Trinamool Congress' नाम और 'जोड़ा घास फूल' वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया था।  6 अक्टूबर को दो विधानसभा सीटों पर होना है उपचुनाव बता दें कि राज्य की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है. नतीजे 9 अक्टूबर हो जारी होंगे. राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी. बाद में उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ने का फैसला किया, जिससे यह सीट रिक्त हुई. वहीं एजेयूपी (AJUP) नेता हुमायूं कबीर ने नौदा और रेजीनगर दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी, जिसके बाद उन्होंने रेजीनगर सीट से इस्तीफा दे दिया था. इसके चलते नंदीग्राम और रेजीनगर सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है। 

तमिलनाडु में थलपति विजय की राजनीति से कांग्रेस में हलचल, गठबंधन पर उठे सवाल

नई दिल्ली लोकसभा चुनाव 2029 अभी दो साल दूर है, लेकिन तमिलनाडु में इसे लेकर पेच फंसा हुआ है। कुछ महीने पहले ही सत्ता में आए तमिलनाडु सीएम सी. जोसेफ विजय को उनकी पार्टी लगातार पीएम फेस प्रोजेक्ट करने की कोशिश कर रही है। इससे साथी दल कांग्रेस असहज नजर आ रहा है। पिछल कई दिनों से चले आ रहे इस विवाद को दोबारा हवा उस वक्त मिली जब कांग्रेस के पूर्व राज्य प्रमुख के. सेल्वापेरुंथगाई ने तमिलझा वेट्री कड़गम (TVK) के साथ कांग्रेस के गठबंधन पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि कोई भी पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन करती है, उसे एक बाद पर सहमत होना चाहिए कि 2029 में राहुल गांधी की पीएम पद के उम्मीदवार होंगे। कांग्रेस की तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष ने टीवीके के साथ पार्टी के गठबंधन को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि अगर वह पीएम फेस को लेकर राहुल गांधी को स्वीकार नहीं करते हैं, फिर उनके साथ गठबंधन करने का मतलब ही क्या है। सेल्वापेरुंथगाई ने साफ किया कि प्रधानमंत्री पद के लिए राहुल गांधी ही दावेदार हैं। पूर्व कांग्रेस राज्य अध्यक्ष के इस बयान सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने टिप्पणी की। हालांकि, उन्होंने थलपति विजय की पार्टी को लेकर नरम रुख अपनाया। उन्होंने मतभेदों को कमतर बताते हुए आने वाले समय में गठबंधन को मजबूत रखने पर सहमति जताई। तमिलनाडु के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष पर सांसद का निशाना पूर्व तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष की बात का जवाब देते हुए सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने कहा कि पार्टी के पूर्व राज्य प्रमुख को फिलहाल गठबंधन पर बोलने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और TVK के रिश्ते को लेकर कोई अनिश्चितता नहीं है और बताया कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत दोस्ताना रही है। कांग्रेस और टीवीके के बीच में असमंजस की स्थिति गौरतलब है दोनों पार्टियों के बीच यह विवाद उस समय शुरू हुआ था, जब विजय की पार्टी से बड़े नेताओं ने इस तरह के दावे किए थे कि वह अब मुख्यमंत्री नहीं बल्कि प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं। इससे दोनों पार्टियों के बीच में थोड़ी असहज करने वाली स्थिति बनी थी। हालांकि, बाद में दोनों पक्षों की तरफ से सब कुछ ठीक होने का संकेत दिया गया। राहुल गांधी की होंगे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार- मणिकम टैगौर अभी कुछ दिन पहले तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी ने अपने गठबंधन के नाम पर मुहर लगाने के लिए सभी गठबंधन साथियों को बुलाया था। इस बैठक में कांग्रेस पार्टी के नेता भी पहुंचे थे। इस दौरान तमिलनाडु का कांग्रेस के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने दोनों पक्षों के बीच में सब कुछ ठीक होने के संकेत दिए। इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि राहुल गांधी की 2029 में कांग्रेस पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। हालांकि, इसके बाद भी दोनों पार्टियों के बीच में एक असहज करने वाली स्थिति बनी हुई है। दोनों पार्टियों के बीच में यह मतभेद इसलिए भी अहम माने जा रहे हैं। क्योंकि तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी डीएमके का साथ छोड़कर टीवीके के साथ आ चुकी है। ऐसे में आने वाले लोकसभा चुनाव में भी वह विजय की पार्टी के साथ ही खड़ी नजर आ सकती है।

नंदीग्राम में ममता बनर्जी को घेरने की BJP की रणनीति, क्या बदलेगा चुनावी गणित?

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की हाई प्रोफाइल नंदीग्राम सीट पर होने वाले उपचुनाव ने सियासी पारा चढ़ा दिया है. बीजेपी ने पूर्व पीए स्वर्गीय चंद्रनाथ रथ की मां हासीरानी रथ को टिकट देकर बड़ा इमोशनल दांव चला है. टीएमसी में बगावत, कांग्रेस के अलग लड़ने और हुमायूं कबीर के तेवरों से ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ गई हैं. वहीं शुभेंदु अधिकारी ने 2 करोड़ की सुपारी के आरोप लगाकर नया बवंडर खड़ा कर दिया है. पश्चिम बंगाल में दो विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव ने सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. इस पूरे सियासी घमासान में सबसे ज्यादा चर्चा हाई प्रोफाइल नंदीग्राम सीट की हो रही है. इस सीट को लेकर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टेंशन अलग ही लेवल पर पहुंच चुकी है।  भवानीपुर सीट अपने पास रखने के बाद नंदीग्राम सीट खाली हुई थी. अब इसी सीट पर बीजेपी ने एक ऐसा चौंकाने वाला नाम सामने रख दिया है, जिसने तृणमूल कांग्रेस के खेमे में खलबली मचा दी है. पार्टी के लिए अब इस सीट को बचाना एक बहुत बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुका है।  नंदीग्राम में बीजेपी ने किस इमोशनल कार्ड से बढ़ाई ममता की बेचैनी? बीजेपी ने नंदीग्राम उपचुनाव के लिए हासीरानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया है. हासीरानी रथ खुद एक सक्रिय बीजेपी कार्यकर्ता हैं. वे शुभेंदु अधिकारी के पूर्व पीए रहे स्वर्गीय चंद्रनाथ रथ की मां हैं. 6 मई 2026 को विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद उत्तर 24 परगना में चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।  बीजेपी ने हासीरानी रथ को टिकट देकर साफ संदेश दिया है कि पार्टी अपने हर एक कार्यकर्ता के साथ मजबूती से खड़ी है. इससे पहले आरजी कर केस के दौरान भी बीजेपी ने पीड़ित महिला डॉक्टर की मां को चुनावी मैदान में उतारा था।  जनता ने उस भावुक अपील पर मुहर लगाई और उन्होंने जीत दर्ज की. अब पार्टी ने उसी रणनीति और इमोशन के साथ हासीरानी रथ को नंदीग्राम के रण में उतारा है. हासीरानी रथ के नामांकन के दौरान खुद शुभेंदु अधिकारी मौजूद रहे।  क्या टीएमसी की आपसी फूट ने नंदीग्राम में मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है?     नंदीग्राम में इस बार राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं. मुकाबला सिर्फ बीजेपी और टीएमसी के बीच सीमित नहीं रह गया है. इस बार जमीनी स्तर पर टीएमसी बनाम टीएमसी की जंग देखने को मिल रही है.     पार्टी दो गुटों में बंट चुकी है और दोनों ही खेमों ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं. टीएमसी ने संचिता प्रधान को अधिकृत उम्मीदवार बनाया है।  वहीं बागी धड़े ने मोहम्मद एतेशामुल हक के नाम का ऐलान कर दिया है.     वोटों के इसी संभावित बंटवारे को देखते हुए शायद ममता बनर्जी खुद इस बार नंदीग्राम से नहीं उतरीं. हालांकि बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने यह पेशकश की थी कि अगर ममता खुद चुनाव लड़ेंगी तो वे अपना उम्मीदवार वापस ले लेंगे. ममता के चुनाव न लड़ने से 15 साल में पहली बार ऐसा होगा जब वे विधानसभा में मौजूद नहीं रहेंगी।  शुभेंदु अधिकारी का कितना बड़ा फैक्टर रहेगा इस उपचुनाव में? नंदीग्राम सीट पर बीजेपी की स्थिति लगातार मजबूत मानी जा रही है. साल 2021 के मुकाबले 2026 के आम चुनाव में जीत का अंतर काफी बड़ा रहा था. उपचुनाव में सत्ता पक्ष का दबदबा रहने के बावजूद शुभेंदु अधिकारी की मजबूत पकड़ यहां गेमचेंजर साबित हो सकती है।  शुभेंदु अधिकारी का पूरा समर्थन और संगठन की ताकत हासीरानी रथ के पीछे खड़ी है. शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि इस बार बीजेपी यहां 50 हजार से ज्यादा के बड़े अंतर से जीत दर्ज करेगी. इसके साथ ही हासीरानी रथ को मिलने वाले सहानुभूति के वोट ममता बनर्जी के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं।  कांग्रेस ने कैसे फेरा ममता बनर्जी की चुनावी उम्मीदों पर पानी? नंदीग्राम की मुश्किलों के बीच ममता बनर्जी को कांग्रेस से भी कोई राहत नहीं मिली है. सूत्रों के मुताबिक उपचुनाव को लेकर टीएमसी ने कांग्रेस को एक खास फॉर्मूले की पेशकश की थी. प्रस्ताव यह था कि कांग्रेस नंदीग्राम से लड़े और रेजीनगर की सीट टीएमसी के लिए छोड़ दे।  कांग्रेस हाईकमान ने इस फॉर्मूले को सीधे तौर पर ठुकरा दिया. राहुल गांधी की पार्टी ने दोनों ही सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है. वामदलों की मौजूदगी के साथ कांग्रेस के अलग लड़ने से पूरा मुकाबला मल्टी-कॉर्नर हो चुका है. इसका सीधा नुकसान सत्ताधारी पार्टी को उठाना पड़ सकता है।  रेजीनगर में हुमायूं कबीर ने दीदी के लिए क्या नया चक्रव्यूह रचा है? उपचुनाव की दूसरी सीट रेजीनगर भी ममता बनर्जी के लिए आसान नहीं रहने वाली है. यह सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी. यहां भी टीएमसी के बागी गुट ने अपना अलग उम्मीदवार मैदान में उतार दिया है।  हुमायूं कबीर ने अपने बेटे को निर्दलीय मैदान में उतारकर मुकाबले को बेहद पेचीदा बना दिया है. रेजीनगर में हुमायूं कबीर का अपना मजबूत जनाधार है. ऐसे में टीएमसी के लिए अपने परंपरागत वोटों को एकजुट रखना बहुत मुश्किल नजर आ रहा है।  2 करोड़ की सुपारी वाले आरोप से बंगाल की सियासत में कैसे आया उबाल? चुनावी माहौल के बीच चंद्रनाथ रथ की हत्या को लेकर शुभेंदु अधिकारी ने एक बहुत बड़ा और सनसनीखेज खुलासा किया है. शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि उनके पूर्व पीए की हत्या कोई सामान्य वारदात नहीं थी. इसके लिए बाकायदा 2 करोड़ रुपये की सुपारी दी गई थी।  शुभेंदु अधिकारी ने सीधे तौर पर निशाना साधते हुए कहा कि यह रकम भाईपो गैंग की तरफ से दी गई थी. शुभेंदु ने कहा, ‘मैं जितना जानता हूं, ये पैसा विपुल को दो करोड़ रुपये देने के लिए दिया गया है, संद्रा को खत्म करने के लिए. इसमें आपके भतीजे का गैंग जुड़ा हुआ है. इसका CBI इन्वेस्टिगेशन करे, ये मेरा विश्वास है. लेकिन CBI अब तक बहुत दूर है। 

BJP सांसद का दावा- कारगिल, POK और सर क्रीक पाकिस्तान को देने की थी तैयारी

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने बुधवार को जुलाई 2006 में मुंबई ट्रेन बम धमाकों के बाद सीमा पार आतंकवाद से निपटने के तरीके को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। एक्स पर एक पोस्ट में दुबे ने पिछली यूपीए सरकार के डिप्लोमैटिक रुख की तुलना मौजूदा सरकार के रुख से किया। उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन पर आरोप लगाया कि उसने निर्णायक सैन्य कार्रवाई करने के बजाय अमेरिकी डिप्लोमैटिक दबाव के आगे घुटने टेक दिए। दुबे ने दावा किया कि कांग्रेस ने हवाना बैठक में कारगिल, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और सर क्रीक को पाकिस्तान को सौंपने का फैसला कर लिया था। कांग्रेस अमेरिकी दबाव में काम कर रही थी दुबे ने 16 सितंबर 2006 को हवाना में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक का जिक्र करते हुए इसे विदेशी दबाव में की गई कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के बीच अमेरिकी दबाव में बैठक हुई थी। जुलाई 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे, जिनमें कम से कम 200 लोगों की जान चली गई थी। हजारों लोग विकलांग और घायल हो गए थे। पूरे भारत में पाकिस्तान के खिलाफ हमले का माहौल बन गया था। लेकिन, सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस कमजोर, बेबस और अमेरिकी दबाव में काम कर रही थी। पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने के बजाय सोनिया गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने अपनी अगस्त की बैठक में यह फैसला किया कि बातचीत के जरिए समझौता किया जाएगा। विकिलीक्स के खुलासों का हवाला विकिलीक्स के खुलासों का हवाला देते हुए दुबे ने आरोप लगाया कि यूपीए नेतृत्व व्यापक कूटनीतिक समझौतों के तहत कारगिल, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और सर क्रीक के मामले में रियायतें देने के लिए तैयार था। 22 सितंबर 2006 को वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश और दक्षिण एशियाई नेताओं के बीच हुई बैठकों के ऐतिहासिक रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए दुबे ने दावा किया कि द्विपक्षीय बातचीत की जानकारी भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के तहत सौंपी गई थी। पूरी जानकारी राष्ट्रपति बुश को सौंप दी भाजपा सांसद ने कहा कि यह सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे कि हमने 2006 की हवाना बैठक में ही कारगिल, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और सर क्रीक को पाकिस्तान को सौंपने का फैसला कर लिया था। इस बैठक के ठीक बाद 22 सितंबर 2006 को पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अमेरिका पहुंचे और बातचीत की पूरी जानकारी राष्ट्रपति बुश को सौंप दी। हमने परमाणु समझौते में ही अपनी संप्रभुता अमेरिका को सौंपने का फैसला कर लिया था और बदले में अपना कारगिल और कश्मीर भी। राहुल गांधी से जवाब मांगा दोनों दौर की तुलना करते हुए दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से 2006 में पाकिस्तान के साथ हुई कूटनीतिक बातचीत और 2025 के पहलगाम आतंकी हमले पर मौजूदा सरकार की प्रतिक्रिया के बीच के अंतर पर जवाब मांगा। पहलगाम हमले के बाद सेना ने सीमा पार आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था। दुबे ने कहा कि राहुल गांधी को जनता को 2025 की पहलगाम घटना और उसके बाद हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' की तुलना 2006 के मुंबई धमाकों और उसके बाद पाकिस्तान के साथ हुई गले मिलने की घटनाओं को समझाना चाहिए।

TMC के बागी 20 सांसदों में बड़ा खेला, 17 थामेंगे BJP का हाथ; तीन सांसद रहेंगे बाहर

नई दिल्ली काबा-मदीना गाने वालीं पश्चिम बंगाल से लोकसभा सांसद सायोनी घोष समेत तृणमूल कांग्रेस (TMC) के जिन 20 सांसदों ने कुछ महीने पहले TMC में बगावत कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थामा था, अब उस NCPI में भी फूट पड़ने की खबरें आ रही हैं। सायोनी घोष की ही तरह बगावत करने वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता और कूचबिहार से लोकसभा सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने सोमवार को बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि कि NCPI के 20 में से 17 सांसद अक्टूबर में दुर्गा पूजा से पहले या उसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने वाले हैं। बसुनिया ने संवाददाताओं से कहा कि इन 17 सांसदों ने एक साथ भाजपा में शामिल होने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है और दावा किया कि सामूहिक रूप से दल बदलने पर वे दल-बदल रोधी कानून के दायरे में नहीं आएंगे। उन्होंने कहा, ''हम 17 सांसद एकसाथ भाजपा में जा रहे हैं। चूंकि 20 सदस्यों में से दो-तिहाई से अधिक सांसद दल बदल रहे हैं, इसलिए दलबदल रोधी कानून हम पर लागू नहीं होगा।'' '20 में 14 आए साथ तो दल-बदल नहीं होगा लागू' बता दें कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी की अगुवाई वाली TMC में बड़े पैमाने पर बगावत हो गई थी और 14 जून को तृणमूल के 20 असंतुष्ट सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की घोषणा की थी और सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का ऐलान किया था। इन 20 बागी सांसदों में से कम से कम 14 सांसदों का दो-तिहाई का आंकड़ा पूरा करने के लिए साथ जाना जरूरी है, ताकि उन्हें अयोग्यता का सामना ना करना पड़े। तीन मुस्लिम सांसदों की BJP को ना बसुनिया ने कहा कि हालांकि, इन 20 सांसदों में से अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले तीन सांसद औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियां इसके अनुकूल नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि सांसद अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान बाहर से NDA को समर्थन देंगे। बसुनिया ने कहा, ''वे राजग का समर्थन करेंगे और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां या विभाग दिए जा सकते हैं।'' बसुनिया के घर और दफ्तर में आगजनी बसुनिया का यह बयान उनके और उनकी पत्नी एवं तृणमूल विधायक संगीता रॉय के कूचबिहार के सिताई स्थित पैतृक घर लौटने पर विरोध प्रदर्शन का सामना किये जाने के कुछ दिन बाद आया है। बसुनिया के राजनीतिक रुख में बदलाव की आलोचना के बीच स्थानीय लोगों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने दंपति के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इस दौरान उनके आवास के पास स्थित तृणमूल के एक कार्यालय में भी कथित तौर पर आग लगा दी गई थी। बसुनिया लगातार यह कहते रहे हैं कि अब उनका तृणमूल से कोई संबंध नहीं है और वह NDA के साथ हैं।

हिमाचल सरकार पर सिकंदर कुमार का बड़ा हमला, बोले- केंद्र की मदद बंद होते ही ठप हो जाएगा काम

लाहौल-स्पीति   हिमाचल प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार के बीच वित्तीय सहायता को लेकर चल रही सियासी खींचतान के बीच भाजपा के राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार ने राज्य सरकार पर पलटवार किया है। उन्होंने दावा किया है कि पिछले 10 सालों में केंद्र सरकार ने हिमाचल में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। हिमाचल की कांग्रेस सरकार लगातार आरोप लगा रही है कि केंद्र से उसे पर्याप्त वित्तीय मदद नहीं मिल रही है। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद सिकंदर कुमार ने कहा कि यह बहुत पुराना मुद्दा है और इसे उठाए लगभग एक साल हो गया है। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "अगर केंद्र सरकार अपना समर्थन बंद कर दे, तो राज्य सरकार एक दिन भी काम नहीं कर पाएगी। ये बताइए, किस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने राज्य का साथ नहीं दिया? हर मामले में, जिसमें हमारे राज्य को प्रभावित करने वाली आपदा भी शामिल है, केंद्र ने मदद की है।" सांसद ने कहा कि पिछले 10 सालों में हुए विकास कार्यों को अगर देखा जाए तो केंद्र ने प्रदेश की तस्वीर बदल दी है। उन्होंने कहा, "पिछले 10 सालों में केंद्र सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। पिछले 10 सालों में केंद्र ने हिमाचल प्रदेश में हालात और विकास की दिशा, दोनों को बदल दिया है।" केंद्र के सहयोग को गिनाते हुए सिकंदर कुमार ने कहा कि सड़क, रेल, स्वास्थ्य और शिक्षा, हर सेक्टर में बीते 10 सालों में अभूतपूर्व काम हुए हैं। उन्होंने कहा, "रोड इंफ्रास्ट्रक्चर देखो, रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर देखो, आप हेल्थ देखो, आप एजुकेशन देखो, हर एक सेक्टर में ऐसे अभूतपूर्व और अकल्पनीय कार्य 10 वर्षों में हुए हैं। हमें तो केंद्र सरकार का आभारी होना चाहिए।" कांग्रेस के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "मैं पूछना चाहता हूं कि जब प्रदेश में 35 वर्ष कांग्रेस ने राज किया और केंद्र में 55 से 60 वर्ष इन्होंने राज किया। जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और प्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार थी, यह मुझे एक हजार रुपये का कोई प्रोजेक्ट बता दें जो केंद्र की तत्कालीन सरकार ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार को दिया हो।" सांसद सिकंदर कुमार ने कहा कि आपदा के समय भी केंद्र सरकार ने हमेशा हिमाचल का साथ दिया है, चाहे वह आर्थिक पैकेज हो या राहत सामग्री। राज्य सरकार को आरोप लगाने की बजाय केंद्र के सहयोग के लिए आभार जताना चाहिए।

अभिजीत दीपके का नया आंदोलन शुरू, इस बार किसके पीछे पड़े ‘कॉकरोच’?

मुंबई  कॉकरोच जनता पार्टी के चीफ अभिजीत दीपके ने नया ऐलान कर दिया है। दीपके अब एक बार फिर छात्रों के साथ आंदोलन करेंगे। दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के बाद दीपके ने अपने साथियों के साथ एक बार फिर मैदान में उतरने की घोषणा की है। इस बार निशाने पर महाराष्ट्र की भाजपा नीत सरकार होगी। बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी बीते कुछ दिनों से अलग-अलग मुद्दों को लेकर लगातार फडणवीस सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। अब पार्टी आंदोलन पर भी बैठेगी। CJP ने रविवार को इस सिलसिले में एक प्रेस रिलीज जारी की है। पार्टी ने इसमें बताया कि CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके और अन्य नेता महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) द्वारा आयोजित अलग-अलग ऑनलाइन परीक्षाओं में पेपर लीक के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन में साथ शामिल होंगे। इससे पहले एमपीएससी के कुछ अभ्यर्थियों ने छत्रपति संभाजीनगर के वालुज इलाके स्थित दीपके के घर पर उनसे मुलाकात भी की थी। दे दिया अल्टीमेटम CJP ने विज्ञप्ति में कहा कि MPSC के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन आगे भी जारी रखा जाएगा। अगर 24 सितंबर तक मांग पूरी नहीं हुई, तो एमपीएससी अभ्यर्थियों से बातचीत करने के लिए राज्यव्यापी दौरा भी किया जाएगा। MPSC अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद दीपके ने एक वीडियो संदेश में कहा, ''मैं और CJP MPSC अभ्यर्थियों की इस लड़ाई में उनके साथ हैं। हम अभ्यर्थियों के साथ तब तक खड़े रहेंगे, जब तक इस्तीफा नहीं हो जाता।'' क्या मामला? यह पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब MPSC की परीक्षाओं की तैयारी में जुटे 28 वर्षीय प्रथमेश देशमुख ने पुणे में खुदकुशी ली थी। पास से बरामद एक सुसाइड नोट में उस पर करीब 2.5 लाख रुपये के कर्ज का जिक्र था। इसके बाद CJP फडणवीस सरकार पर हमलावर हो गई। CJP ने कहा है कि देशमुख ने व्यवस्था, बेरोजगारी और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं की आर्थिक स्थिति से परेशान होकर यह कठोर कदम उठाया। अभिजीत दीपके ने इस सप्ताह प्रथमेश देशमुख के घरवालों से मुलाकात भी की थी। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान दीपके ने कहा कि देशमुख नौकरी पाने और अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकालने के सपने के साथ पुणे गया था। उन्होंने कहा, ''उसने अपने खर्चों को पूरा करने के लिए दोस्तों से पैसे उधार लिए थे। लेकिन पेपर लीक और परिणामों में देरी के कारण छात्रों पर दबाव बढ़ता गया। यह व्यवस्था की गलती है और यह व्यवस्था द्वारा की गई हत्या है।'’ सीजन-2 लॉन्च? गौरतलब है कि इससे पहले अभिजीत दीपके ने करीब एक महीने पहले कहा था कि जंतर-मंतर आंदोलन का सीजन 2 जल्द आने वाला है। एक बयान में उन्होंने कहा था कि भाजपा देश के युवाओं से डरी हुई है। उन्होंने देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं का हवाला देते हुए कहा था कि जल्द ही एक बार फिर आंदोलन शुरू किया जा सकता है। जरांगे को भी किया सपोर्ट इस बीच अभिजीत दीपके ने फडणवीस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे मनोज जरांगे को भी समर्थन दिया था। अभिजीत दीपके बीते शुक्रवार को जरांगे से मिलने पहुंचे थे। मुलाकात के बाद उन्होंने एक बयान में सरकार पर निशाना साधा। दीपके ने कहा, ''सरकार को उनकी मांगों को समझने के लिए उनसे बातचीत करनी चाहिए…।'' दीपके ने कहा, ''मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री क्या कर रहे हैं? वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिए विदेश भेजते हैं, वहीं यहां के स्कूलों का स्तर ठीक नहीं हैं।'' दीपके ने यह भी सवाल किया कि क्या सरकार जरांगे को सोनम वांगचुक की तरह 26 दिनों तक भूखा रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं के पास हास्य कलाकारों से मिलने का समय है, लेकिन जरांगे से बातचीत करने कोई नहीं आ रहा। दीपके ने कहा, ''जैसा उन्होंने सोनम वांगचुक के मामले में किया, वैसा मनोज जरांगे के साथ करने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए। लेकिन यह महाराष्ट्र है और यहां यह नहीं चलेगा। अगर किसी ने मनोज जरांगे को छुआ, तो पूरा महाराष्ट्र यहां आ जाएगा।''

मोदी सरकार के मुरीद हुए यशवंत सिन्हा, जमकर की तारीफ; चीन के सामने भारत को लेकर दिया बयान

हजारीबाग पिछले कई सालों से नरेंद्र मोदी सरकार के कट्टर आलोचक रहे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने लंबे समय बाद केंद्र सरकार के किसी काम की तारीफ की है। यशवंत सिन्हा ने कई वजहें गिनाते हुए दिल्ली में हुए ब्रिक्स सम्मेलन को बहुत सफल बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने चीन के सामने खुलकर अपनी बातें रखीं, जिसकी वजह से शी जिनपिंग के नाराज होने की खबरें हैं। गौरतलब है कि मोदी सरकार की नीतियों और कामकाज से नाराज होकर पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने अप्रैल 2018 में भाजपा से नाता तोड़ लिया था। बाद में वह टीएमसी का हिस्सा बने थे। लेकिन 2021 में विपक्षी एकता के लिए काम करने की बात कहते हुए ममता बनर्जी की पार्टी से भी अलग हो गए थे। 2022 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में वह विपक्षी दलों की ओर से उम्मीदवार बनाए गए थे, हालांकि जीत हासिल नहीं कर सके। आईएएस रहने के बाद राजनीति में आए सिन्हा अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में ताकतवर मंत्री रहे। वह देश के वित्त मंत्रालय के साथ विदेश मंत्रालय भी संभाल चुके हैं। सफलता की तीन वजहें क्या गिनाईं अब लंबे समय बाद उन्हें मोदी सरकार के नेतृत्व में हुए किसी काम की तारीफ करते हुए देखा गया है। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान सिन्हा ने ब्रिक्स सम्मेलन को सफल बताते हुए भारत की भूमिका की तारीफ की। उन्होंने तीन वजहें गिनाते हुए कहा, ‘इसको सफल इसलिए माना जाएगा क्योंकि जितने राष्ट्राध्यक्षों को निमंत्रण दिया गया था, वे सभी लोग आए। रूस से पुतिन आए, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आए, जिनको लेकर आशंका रहती थी कि आएंगे या नहीं, वह आए। यह पहली सफलता इसी को मानते हैं। दूसरी सफलता यह है कि मीटिंग होने के बाद कल शाम को साझा घोषणापत्र जारी हुआ। जब मई महीने में दिल्ली में विदेश मंत्रियों की मुलाकात हुई थी तो साझा बयान नहीं हो पाया क्योंकि इतने मतभेद थे। लेकिन इस बात हमको लगता है कि पदाधिकारियों ने कड़ी मशक्कत की और सर्वसम्मति से साझा बयान जारी हुआ। तीसरा- यह कि जब इस तरह के सम्मेलन होते हैं तो द्वीपक्षीय वार्ताएं होती हैं। सब लोगों के साथ द्वपीक्षीय बैठकें हुईं. सबसे महत्वपूर्ण शी जिनपिंग के साथ हुई।’ ईरान पर स्टैंड भी पसंद आया पूर्व विदेश मंत्री ने ईरान को लेकर भारत के स्टैंड को भी पसंद किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का स्टैंड बदलता हुआ दिखा था, लेकिन अब पुराने रुख पर आ गए हैं। उन्होंने कहा, ‘ब्रिक्स में ईरान के राष्ट्रपति आए। इतने महत्वपूर्ण लोगों के बीच में होने के बावजूद उनका काफी प्रभाव देखने को मिला इस सम्मेलन में जो मैं मानता हूं कि बहुत अच्छी बात है। जब इजरायल और अमेरिका का ईरान पर हमला हुआ था तो भारत थोड़ा अलग दिख रहा था। जब उनके सर्वोच्च नेता मारे गए तो भारत ने कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई थी। उन सब बातों को देखकर मुझे लगता है कि ईरान के राष्ट्रपति का आना और बहुत भागीदारी निभाना, इसमें हम लोगों की जो परंपरागत पोजिशन रही है फिलिस्तीन और इजरायल को लेकर, वह लगा कि मोदी जी के 12 साल में उससे अलग हट रहे हैं। लेकिन इस सम्मेलन को हमें उसी स्टैंड पर लाया। इजरायल जो गाजा, लैबनान में कर रहा है उसकी आलोचना की गई है। यह संतोष का विषय है।’ यशवंत सिन्हा बोले- चीन के साथ मजबूती से उठाए मुद्दे इससे पहले कई बात मोदी सरकार की विदेश नीतियों की आलोचना कर चुके यशवंत सिन्हा ने कहा है कि भारत ने चीन के सामने अपने मुद्दों को मजबूती से उठाया और इस वजह से शी जिनपिंग नाराज तक हो गए। उन्होंने कहा, ‘जहां तक द्वीपक्षीय बैठकों का मामला है, जबसे महत्वपूर्ण था जो चीन के साथ हुई। मेरा मानना है कि हम चीन पर भरोसा नहीं कर सकते हैं। चीन ने बराबर भारत को परेशान किया है, खंजर खोंपा है। इसलिए बातचीत हो, पर भरोसा नहीं करना चाहिए। जो खबरें आ रही हैं द्वीपक्षीय बातचीत में भारत ने मजबूती से अपने मुद्दे उठाए। चीन के जो मुद्दे थे उनको भी उठाए। इसलिए शायद तल्खी आई, टेंशन हुआ। कुछ लोगों का मानना है कि जो रात्रिभोज में जिनपिंग नहीं आए वह इसीलिए नहीं आए, क्योंकि वह खुश नहीं थे।’ सिन्हा ने भारत की भूमिका की तारीफ करते हुए कहा, ‘मोटामोटी मैं मानता हूं कि इसको देखने का जो नजरिया है कि कोई कह सकता है कि गिलास आधा भरा हुआ है या आधी खाली है। पूरे गिलास को देखिए। आधा भरा हुआ है और आधा खाली भी है, लेकिन भारत ने बहुत सफलता के साथ अपनी भूमिका निभाई, अध्यक्षता की। जो बहुत सारी चीजों को लेकर आशंकाएं थी, उसको इस भाषा में डाला कि सब लोग स्वीकार करें।’

BRICS गाला डिनर में शाकाहारी खाना बना सियासी मुद्दा, राहुल गांधी ने साधा निशाना

 नई दिल्ली नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के भव्य रात्रिभोज (गाला डिनर) में परोसे गए पूरी तरह शाकाहारी मेनू को लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल ने कहा कि भारत में 80 फीसदी लोग मांसाहारी हैं और भारतीय मांसाहारी खाना स्वादिष्ट होता है। राहुल की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर विदेशी मेहमानों को परोसे गए भोजन का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और कहा कि ब्रिक्स नेताओं ने भारतीय शाकाहारी व्यंजनों का भरपूर आनंद लिया है। क्या कहा था राहुल गांधी ने ? दरअसल, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित एक भव्य भोज में परोसे गए विस्तृत शाकाहारी भोजन के एक दिन बाद राहुल गांधी ने भारत के मांसाहारी भोजन की तारीफ की। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर छोले भटूरे की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "जानकारी के लिए बता दूं, 80% भारतीय मांसाहारी हैं। भारतीय मांसाहारी भोजन स्वादिष्ट होता है। और मेरी बहन के छोले भटूरे भी लाजवाब हैं। रिजिजू ने किया पलटवार राहुल गांधी की इस टिप्पणी के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बिना किसी का नाम लिए कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे गए भोजन को मुद्दा बना रही है। रिजिजू ने कहा, "मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि कांग्रेस पार्टी ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे जाने वाले भोजन के मेनू में भी राजनीति कर रही है। हमारे मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी व्यंजनों का भरपूर आनंद लिया, जो स्वाद और पोषण से भरपूर होने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रीय परंपराओं से परिपूर्ण हैं।" ब्रिक्स गाला डिनर में क्या परोसा गया था? स्टार्टर्स     खांडवी मिले- सरसों, नारियल और करी पत्तों के तड़के के साथ भाप में तैयार किया गया बेसन रोल।     खुम्ब गलौटी- पुदीने के दानों के साथ परोसे जाने वाले पैन-ग्रिल्ड मशरूम कबाब। मेन कोर्स-     पनीर लबाबदार।     गुच्ची मार्मिक: हिमालयी मोरेल मशरूम और कोमल शतावरी से तैयार विशेष व्यंजन।     गाजर बीन पोरियल। इसके साथ 'थक्कली बेले सारू' (हल्का दाल का शोरबा), बाजरा पुलाव, चुकंदर रायता और विभिन्न प्रकार की भारतीय ब्रेड्स शामिल की गईं। वहीं मिठाई के रूप में वीवीआईपी मेहमानों के लिए 'ओल्ड दिल्ली फ्रूट क्रीम विद जलेबी' और 'शाहतूत फिरनी' परोसी गई।