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दयानिधि मारन का विवादित बयान: ‘साउथ में लड़कियां शिक्षित, नॉर्थ में गुलाम की तरह रहती हैं’

 चेन्नई DMK सांसद दयानिधि मारन ने उन राज्यों की कड़ी आलोचना की है, जो छात्रों को सिर्फ़ हिंदी पढ़ने के लिए बढ़ावा देते हैं और इंग्लिश एजुकेशन को सेकेंडरी मान रहे हैं. उन्होंने ऐसी नीतियों को खराब रोज़गार के अवसरों और दक्षिणी राज्यों में पलायन से जोड़ा है. एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, दयानिधि मारन ने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में छात्रों को पढ़ाई करने से रोका जा रहा है और उन्हें सिर्फ़ हिंदी पर ध्यान देने के लिए कहा जा रहा है. उन्होंने कहा, "आपसे कहा जाता है कि इंग्लिश मत पढ़ो और अगर पढ़ोगे तो बर्बाद हो जाओगे. आपको गुलाम बनाकर रखा जाएगा."  सांसद का ये बयान हिंदी थोपने को लेकर बहस को फिर से भड़का सकती हैं. उन्होंने उत्तरी राज्यों से दक्षिण की ओर लोगों के पलायन का कारण इन एजुकेशनल तरीकों को बताया, और तर्क दिया कि तमिलनाडु द्वारा शिक्षा पर ज़ोर देने से ही उसकी आर्थिक ग्रोथ हुई है. 'टॉप ग्लोबल कंपनियां पढ़े-लिखे…' दयानिधि ने कहा, "आज, सभी टॉप ग्लोबल कंपनियां पढ़े-लिखे लोगों की वजह से तमिलनाडु आ रही हैं." उन्होंने कहा कि एजुकेशन को सिर्फ़ हिंदी तक सीमित रखने से दूसरे क्षेत्रों में बेरोज़गारी बढ़ती है, जबकि तमिलनाडु का द्रविड़ मॉडल लड़कियों और लड़कों दोनों के लिए शिक्षा तक समान पहुँच को बढ़ावा देता है. डीएमके सांसद ने कहा कि इससे राज्य में साक्षरता का स्तर बढ़ा है और महिलाओं की वर्कफोर्स में भागीदारी भी बढ़ी है. उन्होंने आगे तर्क दिया कि इंग्लिश एजुकेशन को हतोत्साहित करने से छात्रों के अवसरों और भविष्य की संभावनाएं सीमित होती हैं, भाषा-आधारित प्रतिबंध विकास और रोज़गार में बाधा बनते हैं. बीजेपी ने DMK सांसद दयानिधि मारन की टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए कहा कि उनमें 'कॉमन सेंस' की कमी है और देश से, खासकर हिंदी भाषी समुदायों से माफ़ी मांगने की मांग की. बीजेपी नेता तिरुपति नारायणन ने न्यूज़ एजेंसी ANI से कहा, "मुझे नहीं लगता कि दयानिधि मारन में कोई कॉमन सेंस है. यही समस्या है. मैं उनके बयानों की कड़ी निंदा करता हूं, और उन्हें भारत के लोगों से, खासकर हिंदी बोलने वालों से माफ़ी मांगनी चाहिए, जिन्हें उन्होंने अनपढ़ और असभ्य बताया है." मारन के बचाव में आते हुए, DMK नेता टी.के.एस. एलंगोवन ने इस मुद्दे पर कहा, "उत्तर में महिलाओं के लिए लड़ने वाला कोई नहीं है." उन्होंने आगे कहा, "यह उस पार्टी पर निर्भर करता है, जो राज्य में शासन कर रही है. अब कांग्रेस महिलाओं को सशक्त बना रही है. इसमें कोई शक नहीं कि जहां भी कांग्रेस शासन कर रही है, वे महिलाओं की शिक्षा के लिए अच्छा काम कर रहे हैं. तमिलनाडु में, हमने महिलाओं के लिए लड़ाई लड़ी और उन्हें सशक्त बनाया. हमने उन्हें शिक्षा और रोज़गार दिया और सरकारी नौकरियों में सीटें भी रिजर्व कीं. हम शुरू से ही महिलाओं के अधिकारों की उन्नति के लिए काम कर रहे हैं."

बीजेपी अध्यक्ष चुनाव में नितिन नबीन के प्रस्तावक बनेंगे पीएम मोदी, निर्विरोध जीत की संभावना

 नई दिल्ली बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन अब पार्टी के स्थायी अध्यक्ष बनने जा रहे हैं. वो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की जगह कार्यकार संभालेंगे. मकर संक्रांति के बाद बीजेपी के नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. नितिन नबीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे. नितिन नबीन के नामांकन में प्रस्तावकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री भी नितिन नबीन के नामांकन में प्रस्तावक होंगे. सूत्रों की माने तो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए सिर्फ नितिन नबीन ही अपना नामांकन दाखिल करेंगे और उनके के खिलाफ कोई भी नेता नामांकन नहीं भरेगा. ऐसे में नितिन नबीन का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है. मकर संक्रांति के बाद अध्यक्ष का चुनाव मकर संक्रांति गुरुवार को है, उसके बाद बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. माना जा रहा है कि मकर संक्रांति के दो-तीन के बाद बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा. इसके बाद नितिन नबीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे. इस दौरान पीएम मोदी से लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह सहित बीजेपी के तमाम बड़े नेता उनके प्रस्तावक होंगे. केंद्रीय मंत्री, बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय पदाधिकारी, प्रदेश इकाइयों के अध्यक्ष और पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी चुनाव नतीजे की घोषणा के दौरान अध्यक्ष पद का चुनाव होगा. नितिन नबीन के लिए प्रस्तावकों और उसका समर्थन करने वाले लोगों के हस्ताक्षरों के साथ नामांकन पत्र के कई सेट बनाने की तैयारियां चल रही हैं.

आर-पार के मूड में सिद्धारमैया, कर्नाटक की सियासत में फिर उबाल

 बेंगलुरु कर्नाटक में सत्ता की लड़ाई फिर से जोर पकड़ती नजर आ रही है. हफ्तेभर पहले ही सबसे अधिक समय तक कर्नाटक की बागडोर संभालने वाले मुख्यमंत्री का नया रिकॉर्ड सेट करने वाले सिद्धारमैया भी अब कुर्सी को लेकर खींचतान के बीच आर-पार के मूड में आ गए हैं. सिद्धारमैया ने हर रोज हो रहे नए कनफ्यूजन को लेकर कांग्रेस आलाकमान से स्थिति स्पष्ट करने की डिमांड की है. सूत्रों के मुताबिक सीएम सिद्धारमैया ने राहुल गांधी से स्थिति स्पष्ट करने की डिमांड की है. सिद्धारमैया का कहना है कि मुख्यमंत्री के मुद्दे पर हर रोज नया-नया कनफ्यूजन हो रहा है. मैं कैबिनेट का विस्तार भी करना चाहता हूं. उन्होंने आलाकमान से यह भी कहा है कि मुझे नई नियुक्तियां करने की भी जरूरत है. सिद्धारमैया ने राहुल गांधी से सॉल्यूशन की डिमांड की है, जिससे कनफ्यूजन की स्थिति समाप्त हो. कर्नाटक की कुर्सी को लेकर पिछले कुछ महीनों से चल रही खींचतान के बीच सीएम सिद्धारमैया ने एक दिन पहले ही राहुल गांधी से मुलाकात की थी. यह मुलाकात राहुल गांधी के गुडालूर दौरे के दौरान रास्ते में हुई थी. सीएम सिद्धारमैया की यह मुलाकात तब हुई थी, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी गुडालूर जा रहे थे. इस दौरान सीएम सिद्धारमैया, राहुल गांधी से बात करते नजर आए थे. हालांकि, सीएम ने पावर शेयरिंग को लेकर बनी कनफ्यूजन की स्थिति के सवाल पर स्पष्ट कहा था कि पार्टी के भीतर ऐसा कोई झगड़ा नहीं है. सीएम सिद्धारमैया ने यह भी कहा था कि राहुल गांधी से उनकी कोई राजनीतिक बातचीत नहीं हुई है. बता दें कि कर्नाटक की सियासत में सिद्धारमैया सरकार बनने के बाद से ही पावर शेयरिंग फॉर्मूले की चर्चा रही है. चर्चा के मुताबिक सरकार गठन के समय ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर सहमति बनी थी. हालांकि, इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान या जानकारी नहीं दी गई कभी. कर्नाटक में कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल 20 नवंबर को पूरे हो गए थे और इसके बाद कर्नाटक कांग्रेस में कुर्सी की खींचतान नए सिरे से तेज हो गई थी. बात इतनी बढ़ गई थी कि कांग्रेस नेतृत्व को दखल देना पड़ा था. सिद्धारमैया समर्थक भी कांग्रेस नेतृत्व से कनफ्यूजन दूर करने की डिमांड करते रहे हैं.

दिग्विजय सिंह का बड़ा फैसला, राज्यसभा सीट छोड़कर फिर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश की सियासी हवा का रूख जल्द बदल सकता है, क्योंकि राज्यसभा सांसद और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह एक बार फिर से प्रदेश की राजनीति में एक्टिव हो सकते हैं। वह दो बार के राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, अब तीसरी बार वह राज्यसभा नहीं जाएंगे। वह प्रदेश स्तरीय राजनीति में सक्रिय होकर कांग्रेस की जमीन को मजबूत करेंगे। प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होंगे राजा साहब साल 2028 में विधानसभा चुनाव और साल 2029 में लोकसभा चुनाव हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो दिग्विजय सिंह की नर्मदा यात्रा का साल 2018 के विधानसभा चुनावों में गहरा प्रभाव था। जिसमें उन्होंने गांव-गांव पैदल यात्रा की थी। उस दौरान कांग्रेस की सत्ता में वापसी भी हो पाई थी। इन्हीं कारणों को देखते हुए पार्टी आलाकमान से दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह प्रदेश की राजनीति में अपना पूरा समय देना चाहते हैं। जिस पर पार्टी आलाकमान ने भी मुहर लगा दी है। हालांकि, अभी औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है। कांग्रेस को मजबूत करनी होगी जमीन पिछले महीने ही दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में दिग्विजय सिंह प्रजेंटेशन दे चुके हैं। जिसमें उन्होंने सुझाव दिया था कि कांग्रेस की जमीन को मजबूत करने के लिए बूथ, मंडल, ब्लॉक और जिला स्तर पर मजबूत होना होगा। इस दौरान उन्होंने बताया था कि बूथ से जिला स्तर तक एक्टिव होने पर सीधा कार्यकर्ताओं से जुड़ाव होगा। राज्यसभा की रेस में कमलनाथ समेत ये नेता दिग्विजय सिंह की जगह राज्यसभा जाने की रेस में कमलनाथ, अरूण यादव, मीनक्षी नटराजन और कमलेश्वर पटेल समेत कई नेता रेस में हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो प्रबल संभावना है कि कमलनाथ को दिग्विजय सिंह की जगह राज्यसभा भेजा जा सकता है। साथ ही उन्हें सक्रिय भूमिका भी दी जा सकती है। बता दें कि, मार्च में राज्यसभा सीट खाली हो रही है। कमलनाथ छिंदवाड़ा से नौ बार के सांसद रह चुके हैं। वह 2018 से मार्च 2020 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, केंद्रीय शहरी विकास मंत्री, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री, केंद्रीय पर्यावरण एवं वन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और केंद्रीय पर्यटन मंत्री (अतिरिक्त प्रभार) कई महत्तवपूर्ण पद संभाल सकते हैं। दिग्विजय सिंह से मांगी राज्यसभा सीट प्रदेश कांग्रेस एससी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष ने दिग्विजय सिंह को पत्र लिखते हुए कि यह सर्वविदित है कि आपके मुख्यमंत्रित्व काल को सामाजिक न्याय और दलित उत्थान के लिए सदैव याद किया जाएगा। आगे मिथुन अहिरवार ने कहा कि मध्यप्रदेश की लगभग 17 प्रतिशत अनुसूचित जाति आबादी की भावना और अपेक्षा को आपके समक्ष रखते हुए मैं आपसे यह आग्रह करता हूँ कि इस बार राज्यसभा में अनुसूचित जाति वर्ग से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। यह न केवल सामाजिक संतुलन और संवैधानिक भावना के अनुरूप होगा, बल्कि दलित समाज के आत्मसम्मान और राजनीतिक सहभागिता को भी सुदृढ़ करेगा।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर बड़ी खबर, पीएम मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह प्रस्तावक बनेंगे

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के संबंध में नई जानकारी सामने आई है. सूत्रों से जानकारी के मुताबिक बीजेपी (BJP) के नेताओं ने आज मंगलवार को इसको लेकर एक बैठक की. यह बैठक इसलिए की गई ताकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुनने के प्रॉसेस की रूपरेखा को तय किया जा सके. ऐसी उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इसकी आधिकारिक तौर पर घोषणा की जाएगी. बता दें, यह बैठक भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय में हुई. इस बैठक में मीटिंग में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए बनी कमिटी के संयोजक के. लक्ष्मण शामिल हुए. इनके अलावा सह संयोजक संबित पात्रा और नरेश बंसल ने भी हिस्सा लिया. सूत्रों से यह भी पता चला है कि कमेटी ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी खास बातों पर चर्चा की, जिसमें प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं, समयसीमा और संगठनात्मक समन्वय शामिल हैं. चर्चा का मकसद पार्टी के संवैधानिक ढांचे के हिसाब से एक आसान, पारदर्शी और समय पर चुनाव पक्का करना है. सूत्रों से पता चला है कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव सोमवार 19 जनवरी को हो सकता है. अगले दिन 20 तारीख को चुनाव कराए जाएंगे. पार्टी के वर्किंग प्रेसिडेंट नितिन नबीन 19 जनवरी को अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करेंगे. वहीं, यह भी पता चला है कि पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत पार्टी के सीनियर नेता प्रस्तावक बनेंगे. पार्टी के सीनियर नेता इस बैठक पर करीब से नजर रख रहे हैं, और बातचीत खत्म होने के बाद इसकी आधिकारिक बातचीत या घोषणा होने की उम्मीद है. बीजेपी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव एक अहम संगठनात्मक कदम खासकर पार्टी के भविष्य के राजनीतिक और चुनावी रोडमैप के तौर पर देखा जा रहा है. इससे पहले दिसंबर में, बीजेपी ने बिहार के पांच बार के विधायक नितिन नबीन को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था. अभी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा नेशनल पार्टी की कमान संभाल रहे हैं. नवीन की नियुक्ति को पार्टी के युवा लीडरशिप पर फोकस करने के तौर पर देखा जा रहा है. बीजेपी हेडक्वार्टर में मीटिंग जारी है, इसलिए आगे की जानकारी का इंतजार है. ऐसे होता है भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव जानकारी के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी के संविधान और नियम की धारा-19 के मुताबिक राष्ट्रीय और प्रदेश परिषद के सदस्यों का एक इलेक्टोरल कॉलेज बनाया जाता है. यही पूरा चुनाव संपन्न कराता है. चुनाव पार्टी के नियमों और कार्यकारिणी के अनुसार ही कराया जाता है. इसके लिए दो शर्ते होती हैं. पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के लिए कम से कम 15 साल से प्राथमिल सदस्य होना आवश्यक है. इलेक्टोरल कॉलेज के कम से कम 20 सदस्यों का प्रस्तावक होना जरूरी है.     बात चुनाव की करें तो पहले नामांकर फॉर्म भरना होता है.     इसके बाद वोटिंग की जाती है.     बैलेट बॉक्स की गिनती होती है.     सबसे आखिरी में नए अध्यक्ष को चुना जाता है.     सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को 3 साल के लिए चुना जाता है. यह कार्यकाल बढ़ाया भी जाता है.   

10-मिनट डिलीवरी ब्रांडिंग पर यू-टर्न, राघव चड्ढा बोले— ‘सत्यमेव जयते, जनता की जीत’

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से '10-मिनट डिलीवरी' ब्रांडिंग को हटाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम डिलीवरी राइडर्स और सड़कों पर चलने वाले सभी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा। सांसद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "सत्यमेव जयते। साथ मिलकर हमने जीत हासिल की है। मैं केंद्र सरकार का बहुत आभारी हूं कि उन्होंने क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से '10-मिनट डिलीवरी' ब्रांडिंग को हटाने के लिए समय पर निर्णायक और संवेदनशील कदम उठाया। यह एक बहुत जरूरी कदम था, क्योंकि जब राइडर की टी-शर्ट, जैकेट और बैग पर '10 मिनट' लिखा होता है और ग्राहक की स्क्रीन पर टाइमर चलता है तो दबाव असली, लगातार और खतरनाक होता है।" उन्होंने आगे लिखा, "पिछले कुछ महीनों में मैंने सैकड़ों गिग वर्कर्स से बात की है। उनमें से कई ज्यादा काम करते हैं, कम पैसे मिलते हैं और एक अवास्तविक वादे को पूरा करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं। मैं हर उस नागरिक को धन्यवाद देता हूं जो हमारे साथ खड़ा रहा। आप इंसान की जिंदगी, सुरक्षा और गरिमा के पक्ष में मजबूती से खड़े रहे।" उन्होंने गिग वर्कर्स से कहा, "आप अकेले नहीं हैं, हम सब आपके साथ हैं।" इससे पहले, केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्हें गिग वर्कर्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सख्त डिलीवरी टाइम लिमिट को हटाने की सलाह दी। कंपनियों ने भी सरकार को आश्वासन दिया कि वे डिलीवरी टाइम लिमिट को अपने विज्ञापनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटा देंगे। ब्लिंकिट ने तत्काल प्रभाव के कदम उठाते हुए 10-मिनट डिलीवरी क्लेम को अपने ब्रांड प्लेटफॉर्म से हटाया। बता दें कि राघव चड्ढा ने पिछले कुछ दिनों में लगातार गिग वर्कर्स के लिए आवाज उठाई है। वर्कर्स के सामने आने वाली चुनौतियों को समझने के लिए राज्यसभा सांसद ने सोमवार को पूरा दिन एक वर्कर के साथ बिताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी शेयर किया।

BRICS 2026: भारत की अध्यक्षता में ‘कमल’ बनेगा प्रतीक, दुनिया में मजबूत होगी भारत की आवाज

नई दिल्ली भारत की अध्यक्षता में 2026 में ब्रिक्स का मंच कमल से सजने से जा रहा है। दरअसल विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को ब्रिक्स 2026 के लिए आधिकारिक लोगो और वेबसाइट लॉन्च की है। इस लोगो में मौजूद कमल सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। लॉन्च के बाद विदेश मंत्री ने कहा है कि भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स समूह के जरिए वैश्विक कल्याण को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा, खासकर ऐसे समय में जब समूह अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है।   बता दें कि दुनिया की पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाएं ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स समूह की अगुवाई करती हैं। इसकी स्थापना साल 2006 में हुई थी। बीते कुछ सालों में समूह का तेजी से विस्तार हुआ जहां मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया भी पूर्ण सदस्य के रूप में ब्रिक्स में शामिल हो गए। क्या कहता है नया लोगो? अधिकारियों के मुताबिक नए लोगो की प्रेरणा कमल से ली गई है। यह भारत की गहरी सांस्कृतिक विरासत और मजबूती का प्रतीक है। लोगो की पंखुड़ियों में ब्रिक्स देशों के रंग दिखाए गए हैं, जो अलग अलग आवाजों को एक साझा मकसद के साथ जोड़ने का संदेश देते हैं। वहीं लोगो के बीच में नमस्कार का चिन्ह है, जो सम्मान और सहयोग की भावना को दर्शाता है। इसके साथ एक टैगलाइन भी रखी गई है, “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण।” वेबसाइट भी लॉन्च जयशंकर ने इस दौरान ब्रिक्स की नई वेबसाइट भी लॉन्च की। इसका मकसद ब्रिक्स से जुड़ी सभी जानकारियों के लिए एक केंद्रीय मंच बनाना है। अधिकारियों ने बताया कि इसमें ब्रिक्स की पहल, प्रोजेक्ट, कार्यक्रम और आधिकारिक दस्तावेजों की जानकारी उपलब्ध होगी। ब्रिक्स की मजबूती से तिलमिलाया है अमेरिका शुरूआत के बाद से ही ब्रिक्स एक अहम वैश्विक मंच के तौर पर उभरकर सामने है। फिलहाल इसमें कुल 11 सदस्य देश शामिल हैं, जो दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी और करीब 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं भारत की 2026 की अध्यक्षता में ब्रिक्स से वैश्विक स्तर पर सहयोग और प्रभाव और बढ़ने की उम्मीद है। समूह ने समय समय पर अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को सीधी चुनौती देने की भी कोशिश की है, जिससे अमेरिका तिलमिलाया हुआ है।  

तमिल संस्कृति पर हमला या सियासी फैसला? ‘जन नायकन’ विवाद में विजय के साथ राहुल गांधी

नई दिल्ली कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अभिनेता विजय की फिल्म 'जन नायकन' को रोकने की केंद्र सरकार की कोशिश तमिल संस्कृति पर हमला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिल लोगों की आवाज दबाने में कभी कामयाब नहीं होंगे। राहुल का यह बयान तमिल फिल्म जन नायकन के निर्माता के सुप्रीम कोर्ट में मद्रास उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को चुनौती देने के एक दिन बाद आया है। एचसी ने फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाण बोर्ड (CBFC) से मंजूरी मिलने के एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी थी। मद्रास हाई कोर्ट ने 9 जनवरी को एकल न्यायाधीश के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें सीबीएफसी को जन नायकन को तुरंत सेंसर प्रमाणपत्र देने का निर्देश दिया गया था, जिससे अभिनय की दुनिया से राजनीति में आए विजय की फिल्म का भविष्य अधर में लटक गया। राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘सूचना और प्रसारण मंत्रालय की जन नायकन को रोकने की कोशिश तमिल संस्कृति पर हमला है।’ लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि मिस्टर मोदी, आप तमिल लोगों की आवाज दबाने में कभी कामयाब नहीं होंगे। फिल्म जन नायकन के सर्टिफिकेट पर बवाल केवीएन प्रोडक्शंस एलएलपी ने पिछले शुक्रवार को उच्च न्यायालय की खंडपीठ के आदेश के खिलाफ अपील की है, जिसने बोर्ड को फिल्म का प्रमाणपत्र तुरंत जारी करने के एकल पीठ के निर्देश पर रोक लगा दी थी। विजय ने कुछ महीने पहले अपना राजनीतिक दल तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) बनाया है और जन नायकन को विजय के राजनीति में पूरी तरह से प्रवेश से पहले उनकी आखिरी फिल्म के तौर पर बड़े पैमाने पर प्रचारित किया जा रहा है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार फिल्म पोंगल के अवसर पर 9 जनवरी को रिलीज होने वाली थी। हालांकि, सीबीएफसी के समय पर प्रमाणपत्र जारी नहीं करने के बाद फिल्म को आखिरी समय में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।  

नितिन नवीन के शपथ समारोह को BJP बनाएगी शक्ति प्रदर्शन, PM मोदी की मौजूदगी के मायने

नई दिल्ली भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन 20 जनवरी को पार्टी के पूर्णकालिक अध्यक्ष बन जाएंगे। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह मौजूद रहेंगे। इसके अलावा कैबिनेट के तमाम मंत्रियों, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, भाजपा के पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा कई राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष भी दिल्ली आएंगे। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि नितिन नवीन की ताजपोशी धूमधाम के साथ और एक गरिमामय आयोजन में की जाए। ऐसा इसलिए ताकि नितिन नवीन का पार्टी अध्यक्ष के तौर पर इकबाल कायम हो सके। नितिन नवीन भाजपा की नई पीढ़ी के नेताओं में से हैं और उन्हें पार्टी ने जिम्मेदारी देकर भविष्य की तैयारियों के संकेत दिए हैं। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं के बीच भी उनका कद स्थापित हो सके। इसके लिए खुद पीएम नरेंद्र मोदी उनकी ताजपोशी में मौजूद रहेंगे और पूरी कैबिनेट भी रहेगी। इसके जरिए एक संदेश देने का प्रयास किया जाएगा कि भाजपा अध्यक्ष का पद संगठन में शीर्ष पर है और भले ही कोई भी नेता उस जिम्मेदारी को संभाल रहा हो। कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद से नितिन नवीन ने भाजपा के तमाम नेताओं से मुलाकात की है। माना जा रहा है कि उन्होंने संगठन में फेरबदल के लिहाज से भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। 20 जनवरी को उनकी ताजपोशी के बाद वह अपनी टीम तय करेंगे और कई नए चेहरों की भाजपा के संगठन में एंट्री हो सकती है। केंद्र सरकार में भी फेरबदल की है तैयारी, कई नए चेहरों को एंट्री इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार में भी फेरबदल दिख सकते हैं। वजह यह है कि पंकज चौधरी अब यूपी के प्रदेश अध्यक्ष हैं। वह मोदी सरकार की कैबिनेट में भी हैं। ऐसे में उनका कैबिनेट से हटना तय माना जा रहा है। इसके अलावा कुछ और नेताओं को संगठन से सरकार में लाया जा सकता है। वहीं आरएसएस से जुड़े कुछ लोगों को पार्टी में अहम पद दिए जा सकते हैं। 46 साल के नितिन नवीन भाजपा के अब तक के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। अकेले ही नामांकन करेंगे नितिन, पहले दिन नॉमिनेशन और दूसरे दिन ऐलान भाजपा सूत्रों का कहना है कि नितिन नवीन अकेले ही अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करेंगे और चुनाव होने की संभावना न के समान है। माना जा रहा है कि वह 18 या 19 जनवरी को नामांकन दाखिल करेंगे। फिर उनके निर्वाचन की घोषणा होगी और उनके पदभार ग्रहण करने के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी समेत तमाम दिग्गज नेता मौजूद रहेंगे। भाजपा फिलहाल खरमास की समाप्ति का इंतजार कर रही है, जो मकर संक्रांति के साथ खत्म होगा।  

राउत के ‘मुंबई बंद’ बयान पर फडणवीस का पलटवार, शिंदे का जिक्र कर दिया करारा जवाब

मुंबई शिवसेना यूबीटी से राज्यसभा सांसद संजय राउत के 'मुंबई बंद कराने' के दावे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पलटवार किया है। उन्होंने राउत की बात को गीदड़ भभकी करार दिया है। साथ ही कहा है कि दिवंगत बाला साहब ठाकरे के समय में ऐसा हो सकता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। 15 जनवरी को होने वाले BMC यानी बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव को लेकर सियासी माहौल गरमाया हुआ है। मीडिया के एक कार्यक्रम में पहुंचे राउत ने कहा था, 'संगठन मजबूत है हमारा। आज भी हम मुंबई बंद कर सकते हैं 10 मिनट में।' उन्होंने कहा, 'यह सबसे बड़ा अचीवमेंट है हमारे लिए। … समझ लो धमकी ही है।' खास बात है कि कुछ समय बाद चैनल के ही कार्यक्रम में मुख्यमंत्री फडणवीस भी पहुंचे थे, जहां उन्होंने राउत के इस बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'देखिए पहली बात तो, गीदड़ भभकियों से डरने वाले लोग हम हैं नहीं। दूसरा, अगर आपकी ताकत इतनी थी तो आपने चैलेंज दिया था कि जिस समय एकनाथ शिंदे जी मुंबई में आएंगे, हम उनको एंट्री नहीं करने देंगे। मुंबई में कदम नहीं रख पाएंगे। मुंबई में वह आगे नहीं बढ़ पाएंगे।' फडणवीस ने कहा, 'एकनाथ शिंदे जी मुंबई में आए। 50 विधायकों के साथ आए। इसी मुंबई के रास्ते से हम चलते हुए राज भवन गए। हमने सरकार स्थापित की। मुंबई बंद करना छोड़ दीजिए, इनके घर के आसपास भी ये लोग बंद नहीं कर पाए। ये सारी बोलने वाली बाते हैं। देखिए, जिस समय बाला साहब ठाकरे थे, तब की शिवसेना की ताकत थी कि बाला साहब ठाकरे के एक इशारे पर दो घंटे में मुंबई बंद हो सकती थी। अब इनमें किसी में दम नहीं है।' बीएमसी चुनाव में राज और उद्धव ठाकरे का गठबंधन खास बात है कि बीएमसी चुनाव के लिए ठाकरे बंधु राज और उद्धव ने गठबंधन किया है। इस पर राउत ने कहा, 'उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे भाई हैं। उनकी माताएं बहने हैं। यह परिवार का मामला है। मैं दोनों का मित्र हूं। अगर उनके एक होने में मेरी कोई भी भूमिका है, तो मैं खुद को भाग्यशाली मानूंगा।'