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स्वचालित परीक्षण स्टेशन के लिए नवीन राज्य नीति-2026 को मंजूरी

स्वचालित परीक्षण स्टेशन के लिए नवीन राज्य नीति-2026 को मंजूरी हर जिले में खुल सकेंगे तीन स्वचालित परीक्षण केंद्र, मशीनें करेंगी वाहनों की फिटनेस जांच एटीएस के लिए जमीन और नेटवर्थ की शर्तों में बड़ी राहत, योगी सरकार ने निवेश का रास्ता किया आसान लखनऊ उत्तर प्रदेश की सड़कों पर चलने वाले वाहनों की सेहत (फिटनेस) को बेहतर करने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के भीतर 'स्वचालित परीक्षण स्टेशन' (ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन-एटीएस) स्थापित करने की मंजूरी दे दी गई है। अब गाड़ियों की जांच मशीनों से की जाएगी, जिससे सटीक रिपोर्ट मिलेगी। इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने के लिए सरकार ने 2 अगस्त 2023 के पुराने सरकारी आदेश को खत्म कर दिया गया है और उसकी जगह एक नई नीति 'राज्य नीति-2026' को पास किया है। परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में तीन एटीएस सेंटर खोले जा सकते हैं। हर सेंटर पर 24 हजार गाड़ियों तक जांच की जाएगी। वहीं पूर्व में सेंटर के लिए 2.5 एकड़ जमीन की शर्तों में भी छूट दी गई है, अब यह 1 एकड़ कर दिया गया है। वहीं एटीएस सेंटर खोलने के लिए पहले 6 करोड़ रुपये की नेटवर्थ की अनिवार्यता थी, जिसे अब हटा दिया गया है। इसके अलावा इन सेंटरों को सुचारु रूप से संचालित होने के लिए 6 महीने तक कार्रवाई में भी छूट मिलेगी। सरकार पर कोई अतिरिक्त भार नहीं दरअसल, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की 23 सितंबर 2021, 31 अक्टूबर 2022, 14 मार्च 2024 और 8 मई 2024 की अधिसूचनाओं के माध्यम से केंद्रीय मोटर यान नियमावली 1989 में अध्याय-11 के तहत स्वचालित परीक्षण स्टेशन (एटीएस) का विनियमन एवं नियंत्रण जोड़ा गया है। इन्हीं नवीनतम दिशा-निर्देशों और परिपत्रों को पूर्व में जारी राज्य नीति (2 अगस्त 2023) में समाहित करते हुए नई संशोधित राज्य नीति का ड्राफ्ट तैयार कर मंत्रिपरिषद के सामने रखा गया था। योगी कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्ताव स्वीकृत होने से उत्तर प्रदेश राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त व्यय भार यानी वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। प्रस्तावित राज्य नीति अधिसूचित होने की तिथि से ही तत्काल प्रभावी हो जाएगी। हर जनपद में एटीएस की स्थापना संभव नई नीति के प्रभावी होने के बाद प्रदेश के प्रत्येक जनपद में स्वचालित परीक्षण स्टेशन की जल्द स्थापना संभव होगी। इससे राज्य में निजी निवेश बढ़ेगा। यानी एटीएस की स्थापना के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ावा मिलने का रास्ता खुलेगा। रोजगार के नए अवसर मिलेंगे एटीएस के संचालन के लिए तकनीकी और गैर-तकनीकी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस तरह स्वचालित परीक्षण स्टेशन की स्थापना से रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। वहीं नई व्यवस्था में वाहनों का फिटनेस परीक्षण बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वचालित मशीनों के माध्यम से पूरी तरह पारदर्शी ढंग से होगा। इसके साथ ही सड़कों पर केवल पूरी तरह से फिट वाहनों का संचालन सुनिश्चित होने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

वर्ल्डफिश के साथ एमओयू को मंजूरी, मछली पालन को मिलेगा बढ़ावा

वर्ल्डफिश के साथ एमओयू को मंजूरी, मछली पालन को मिलेगा बढ़ावा लखनऊ,   प्रदेश में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसकी संभावनाओं को विस्तार देने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में पूर्वी उत्तर प्रदेश में वर्ल्डफिश उत्तर प्रदेश फिशरीज प्रोजेक्ट सेंटर के संचालन के लिए राज्य सरकार, मत्स्य विभाग और वर्ल्डफिश के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) को मंजूरी दी गई। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 13.31 लाख टन मत्स्य उत्पादन हो रहा है। एमओयू के जरिए पूर्वी उत्तर प्रदेश में मत्स्य पालन को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तौर-तरीकों से बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ मत्स्य पालकों की आय और रोजगार के अवसरों में वृद्धि करना है।

17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा ‘सेवा संकल्प अभियान’, प्रदेशभर में होंगे कार्यक्रम

प्रदेश में आगामी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा 'सेवा संकल्प अभियान' सीएम योगी के निर्देश पर एक माह तक होंगे 12 प्रमुख कार्यक्रम सभी जनपदों में प्रत्येक कार्यक्रम के लिए नोडल अधिकारी नामित होगा जनकल्याणकारी योजनाओं की उपलब्धियां जनता तक पहुंचाने पर जोर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों को निर्देशित किया है कि आगामी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर, 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आयोजन किया जाएगा। अभियान के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा पिछले वर्षों में हुए विकास कार्यों से जनजीवन में आए सकारात्मक बदलावों को आमजन तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही प्रत्येक नागरिक को ‘विकसित भारत-2047’ के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित विभागों को अपनी महत्वपूर्ण परियोजनाओं, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं का विधानसभा क्षेत्रवार, विकासखंडवार तथा ग्राम पंचायतवार विस्तृत विवरण तैयार करने को कहा गया है। इस अभियान के दौरान लाभार्थियों की जानकारी भी विधानसभा, ब्लॉक और ग्राम पंचायतवार तैयार की जाएगी। विकास कार्यों के ‘पहले और बाद’ के फोटो, वीडियो, ड्रोन फुटेज तथा रील्स का डाटा बैंक तैयार किया जाएगा, ताकि विकास कार्यों के प्रभाव को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया जा सके। CMIS पोर्टल पर प्रतिदिन दर्ज होगी प्रगति अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रमों और विकास कार्यों की प्रगति का विवरण फोटो एवं वीडियो सहित राज्य स्तरीय CMIS पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसकी प्रगति प्रतिदिन दर्ज की जाएगी, जिससे अभियान की गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित हो सके। अभियान शुरू होने से पहले सभी विभागों एवं जनपदों को कार्यक्रमों की समय-सारणी निर्धारित करने, लाभार्थियों का डेटाबेस तैयार करने, कार्यक्रम स्थलों का चिन्हांकन, यात्रा रूट तय करने, व्यवस्थापन टीमों का गठन, नोडल अधिकारियों की तैनाती तथा आवश्यक बजट की समय से व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। 12 प्रमुख कार्यक्रमों का होगा आयोजन अभियान के अंतर्गत 12 प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनके लिए कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य, गतिविधियां, क्रियान्वयन एवं संबंधित विभागों की जिम्मेदारियों का विस्तृत विवरण तैयार किया गया है। संबंधित विभागों और जनपदों को निर्धारित समय-सारणी के अनुसार इन कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संपादित करने के निर्देश दिए गए हैं। साप्ताहिक समीक्षा से होगी निगरानी अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यवस्था की गई है। विभागीय अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव स्तर पर संबंधित कार्यक्रमों की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी। मंडलायुक्त मंडल के समस्त जनपदों की तथा जिलाधिकारी अपने-अपने जनपद के सभी कार्यक्रमों की साप्ताहिक समीक्षा करेंगे। इसके अलावा मंडल प्रभारियों द्वारा भी अभियान की तैयारियों की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। सभी प्रशासनिक विभागों को विभागीय नोडल अधिकारी नामित कर विस्तृत कार्ययोजना एवं समय-सारणी तत्काल तैयार करने को कहा गया है। जिलों में प्रत्येक कार्यक्रम के लिए नोडल अधिकारी नामित कर जिला स्तरीय कैलेंडर तैयार किया जाएगा तथा मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से दैनिक अनुश्रवण सुनिश्चित किया जाएगा।

किराये पर मकान-दुकान लेना या देना होगा आसान

किराये पर मकान-दुकान लेना या देना होगा आसान दो लाख रुपये तक के सालाना किराये पर 1,000 रुपये और छह लाख रुपये तक सालाना किराये पर 3,000 रुपये शुल्क 10 लाख रुपये तक सालाना किराये पर 4,500 रुपये शुल्क लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में प्रदेश में किरायेदारी व्यवस्था को आसान बनाने के लिए अहम फैसला लिया गया। सालाना 10 लाख तक के किराए पर यह बदलाव किया गया है। 10 वर्ष तक की अवधि के किरायेदारी/पट्टा विलेखों पर प्रभावी स्टांप शुल्क एवं पंजीयन फीस में छूट को संशोधित करते हुए शुल्क व्यवस्था को सरल और किफायती बनाया गया है। इससे मकान, दुकान या गोदाम किराये पर लेने-देने वालों को बड़ी राहत मिलेगी। स्टांप तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि अभी किसी व्यक्ति द्वारा मकान, दुकान या गोदाम किराये पर देने अथवा लेने पर स्टांप शुल्क की गणना सर्किल रेट के आधार पर होती थी। इससे किरायानामा तैयार कराकर उसका पंजीयन कराने में लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता था। योगी सरकार ने अब इस व्यवस्था को सरल करते हुए निर्धारित शुल्क की व्यवस्था की है। इसके तहत दो लाख रुपये तक की सालाना किराया राशि पर 1,000 रुपये, छह लाख रुपये तक 3,000 रुपये और 10 लाख रुपये तक 4,500 रुपये वार्षिक शुल्क निर्धारित किया गया है।

कोटेदारों को योगी सरकार की बड़ी सौगात, अब हर कुंतल पर 125 रुपये लाभांश

कोटेदारों को योगी सरकार की बड़ी सौगात, अब हर कुंतल पर 125 रुपये लाभांश 100 रुपये के आधारभूत लाभांश के बाद अब 25 रुपये और मिलेंगे आजीविका होगी आसान, राशन वितरण व्यवस्था को मिलेगी मजबूती लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में प्रदेश के उचित दर विक्रेताओं यानी राशन कोटेदारों के हित में बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत वितरित होने वाले खाद्यान्न पर कोटेदारों को 25 रुपये प्रति कुंतल अतिरिक्त राज्य मार्जिन देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से प्रदेश के राशन विक्रेताओं को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा और उनकी आजीविका को मजबूती मिलेगी। 100 रुपये के आधारभूत लाभांश के बाद और 25 रुपये वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि इससे पहले 1 सितंबर 2026 के आदेश के तहत उचित दर विक्रेताओं के आधारभूत लाभांश को 90 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये प्रति कुंतल किया था। अब इसके अतिरिक्त 25 रुपये प्रति कुंतल का राज्य मार्जिन दिए जाने से कोटेदारों की आय में और बढ़ोतरी होगी।  वितरण खर्च से घट रही थी कोटेदारों की बचत वर्तमान व्यवस्था में खाद्यान्न की सिंगल स्टेज डोर-स्टेप डिलीवरी के चलते राशन वितरण की प्रक्रिया में कोटेदारों को विभिन्न खर्च वहन करने पड़ते हैं। इसके कारण उनकी मासिक बचत अत्यंत सीमित रह जाती थी। ऐसे में अतिरिक्त राज्य मार्जिन मिलने से उन्हें प्रत्यक्ष वित्तीय राहत मिलेगी और परिवार का भरण-पोषण पहले की तुलना में आसान होगा। जुलाई से लागू होगा फैसला, 9 माह में 168.75 करोड़ का खर्च कैबिनेट के इस फैसले को जुलाई 2026 से प्रभावी माना जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई 2026 से मार्च 2027 तक 9 माह के लिए राज्य सरकार पर 168.75 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार आएगा। पूरे वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित व्यय करीब 225 करोड़ रुपये होगा। प्रदेश में सालाना औसतन 90 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न वितरित किया जाता है।

योगी सरकार की पहल से आसान होगी पूर्व सैनिकों की इलाज की राह, 13 जिलों में ECHS विस्तार

पूर्व सैनिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की राह आसान, 13 जिलों में ईसीएचएस पॉलीक्लीनिक के लिए मुफ्त जमीन योगी सरकार की बड़ी पहल, 18 लाख पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य लाभ के लिए बढ़ेगा ईसीएचएस नेटवर्क लखनऊ  योगी सरकार ने पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के तहत प्रदेश के 13 जिलों में पॉलीक्लीनिक की स्थापना/निर्माण के लिए ग्राम पंचायतों और स्थानीय प्राधिकरणों की भूमि स्थानीय सैन्य प्राधिकरण (एलएमए), सेंट्रल कमांड और भारत सरकार को नि:शुल्क हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को सीएम योगी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने मंजूरी दी है। इससे संबंधित पॉलीक्लीनिक के निर्माण की राह आसान होगी और पूर्व सैनिकों को अपने नजदीक बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। करीब 18 लाख पूर्व सैनिकों को मिलेगा स्वास्थ्य सुविधा का लाभ उत्तर प्रदेश में करीब 18 लाख भूतपूर्व सैनिक हैं। ईसीएचएस के माध्यम से इन्हें बेहतर चिकित्सा लाभ शीघ्र प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध होगी। योजना में लाभार्थियों को कैशलेस उपचार प्रदान करने का प्रयास है। ऐसे में प्रदेश में नए पॉलीक्लीनिक स्थापित होने से पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ेगा। 13 जिलों में पॉलीक्लीनिक के लिए भूमि की जरूरत ईसीएचएस पॉलीक्लीनिक की स्थापना/निर्माण के लिए प्रदेश के 13 जिलों में भूमि की आवश्यकता बताई गई है। इनमें इटावा, जालौन, लखीमपुर खीरी, बिजनौर, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, बांदा, गाजीपुर, मिर्जापुर, देवरिया, सुल्तानपुर, आजमगढ़ और गोंडा शामिल हैं। इन जिलों में ग्राम पंचायतों अथवा स्थानीय प्राधिकरणों की उपलब्ध भूमि को पॉलीक्लीनिक निर्माण के लिए नि:शुल्क हस्तांतरित किए जाने की योजना है। केंद्र सरकार की ईसीएचएस योजना से कैशलेस इलाज पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना, भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग की प्रमुख योजना है। इसे 1 अप्रैल 2003 को शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य ईसीएचएस पॉलीक्लीनिकों, सशस्त्र सेना चिकित्सा सुविधाओं, सरकारी और पैनलबद्ध निजी अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से भूतपूर्व सैनिक पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों को नि:शुल्क बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना है। जमीन मिलने से निर्माण प्रक्रिया होगी आसान पॉलीक्लीनिकों के निर्माण के लिए स्थानीय स्तर पर भूमि उपलब्ध कराने की व्यवस्था से परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। प्रस्ताव के तहत ग्राम पंचायतों और स्थानीय प्राधिकरणों की भूमि को स्थानीय सैन्य प्राधिकरण (एलएमए), सेंट्रल कमांड, भारत सरकार को नि:शुल्क हस्तांतरित किया जाना है। इससे चिन्हित जिलों में ईसीएचएस स्वास्थ्य ढांचे को विस्तार देने का रास्ता तैयार होगा।

अयोध्या में NSG सेंटर को मिली मंजूरी, 26 हेक्टेयर भूमि निशुल्क आवंटित होगी

अयोध्या में बनेगा एनएसजी का क्षेत्रीय केंद्र, योगी कैबिनेट ने 26 हेक्टेयर भूमि निशुल्क देने को दी मंजूरी 16.90 करोड़ की भूमि निशुल्क गृह मंत्रालय को हस्तांतरित होगी, राम मंदिर ही नहीं पूरे यूपी की बढ़ेगी सुरक्षा आवंटित भूमि का अगले तीन वर्षों में करना होगा उपयोग, किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं होगी उपयोग देश-विदेश से बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं, अतिथियों और पर्यटकों की सुरक्षा से जुड़ा अहम फैसला लखनऊ अयोध्या धाम-राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में अयोध्या की तहसील मिल्कीपुर में 26 हेक्टेयर यानी करीब 65 एकड़ बंजर भूमि राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना के लिए गृह मंत्रालय को निशुल्क हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इससे अयोध्या में किसी भी संभावित सुरक्षा चुनौती से निपटने और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि राम मंदिर निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख सांस्कृतिक, धार्मिक एवं सामरिक केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, विशिष्ट अतिथियों और पर्यटकों का लगातार आना हो रहा है। ऐसे में क्षेत्र की सुरक्षा संवेदनशीलता भी काफी बढ़ी है। इसी को देखते हुए अयोध्या में एनएसजी क्षेत्रीय केंद्र की स्थायी तैनाती जरूरी हो गई है। कैबिनेट ने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के उपयोग के लिए एनएसजी क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने के लिए गृह मंत्रालय के पक्ष में मिल्कीपुर तहसील के ग्राम पूरे लालखां की 26 हेक्टेयर बंजर भूमि निशुल्क हस्तांतरित करने की औपचारिक स्वीकृति प्रदान की है। संबंधित भूमि का बाजार मूल्य 16.90 करोड़ रुपये बताया गया है। केवल एनएसजी क्षेत्रीय केंद्र के लिए होगा भूमि का उपयोग हस्तांतरित की जाने वाली भूमि का उपयोग केवल एनएसजी क्षेत्रीय हब की स्थापना के लिए किया जाएगा। इसका किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। भूमि आवंटन को लेकर राजस्व विभाग के शासनादेश में निर्धारित प्रावधानों के तहत अयोध्या की विशेष सुरक्षा संवेदनशीलता और राष्ट्रीय सुरक्षा के सर्वोच्च महत्व को देखते हुए अपवादस्वरूप शिथिलता प्रदान की गई है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि आवंटित भूमि का अगले तीन वर्षों की अवधि में प्रस्तावित उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किए जाने या भविष्य में इसकी आवश्यकता समाप्त होने की स्थिति में भूमि स्वत: उत्तर प्रदेश राजस्व विभाग के निवर्तन पर वापस आ जाएगी। यानी भूमि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप सुनिश्चित किया जाएगा। अयोध्या समेत पूरे प्रदेश की सुरक्षा को मिलेगा मजबूत कवच अयोध्या में एनएसजी क्षेत्रीय हब की स्थापना से सिर्फ श्रीराम मंदिर परिसर और अयोध्या क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था ही मजबूत नहीं होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश और आस-पास के अति-संवेदनशील एवं सामरिक प्रतिष्ठानों की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को भी एक मजबूत सुरक्षा कवच मिलेगी।

UP Election 2027: संघ और बीजेपी बनाएंगे प्रांतवार रोडमैप, 4800 शक्ति केंद्र संयोजकों पर नजर

लखनऊ यूपी विधानसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी भाजपा के साथ कदमताल करने की कवायद तेज कर दी है। इसके लिए प्रांतवार रोडमैप बनाने की तैयारी है। इसी क्रम में संघ परिवार और भाजपा की समन्वय बैठक बुधवार को राजधानी लखनऊ में होगी। इस बैठक में संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष सहित अन्य पदाधिकारी भाग लेंगे। वहीं, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन भी यूपी आ रहे हैं। वह 20 को सहारनपुर में बूथों की नब्ज टटोलेंगे। संघ की समन्वय बैठक लखनऊ के बंथरा स्थित रिजार्ट में होगी। इस बैठक में अवध और कानपुर प्रांत के संघ, भाजपा और विचार परिवार के सदस्य संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। दरअसल संघ और भाजपा ने संगठनात्मक रूप से प्रदेश को छह प्रांतों में बांट रखा है। इसके जरिए जहां एक ओर संघ और अखिल भारतीय पदाधिकारी जमीनी फीडबैक लेंगे, वहीं समन्वय पर भी जोर दिया जाएगा। इस दौरान विचार परिवार के सदस्य संगठनों के पदाधिकारी सरकार और संगठन से जुड़े विषय साझा करेंगे। समन्वय बैठक में भाजपा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष व केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी व प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, अवध और कानपुर क्षेत्र के अध्यक्ष और प्रभारी शामिल होंगे। बैठक में भाग लेने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष मंगलवार की रात ही लखनऊ पहुंच गए। एयरपोर्ट पहुंचने पर पार्टी पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। वहां से वे पार्टी के राज्य मुख्यालय पहुंचे। गोरक्ष-अवध और काशी क्षेत्र को मथेंगे तावड़े भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और यूपी प्रभारी विनोद तावड़े छह दिनी प्रवास पर आएंगे। वे बुधवार को राजधानी लखनऊ पहुंचेंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार वे 17 और 18 सितंबर को गोरखपुर में गोरक्ष क्षेत्र की बैठकें करेंगे। उसके बाद अवध क्षेत्र की बैठकें अयोध्या में प्रस्तावित है। फिर काशी क्षेत्र की बैठकें तावड़े प्रयागराज में करेंगे। इन संगठनात्मक बैठकों के जरिए वे जहां क्षेत्रवार जमीनी फीडबैक लेंगे, वहीं चुनावी तैयारियों की रणनीति पर चर्चा भी करेंगे। 20 को सहारनपुर में नितिन नवीन वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए भाजपा अब संगठन की सबसे निचली कड़ी को सीधे सक्रिय करने की तैयारी में है। जिले में होने वाला शक्ति केंद्र संयोजकों का प्रस्तावित सम्मेलन महज संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बूथ स्तर पर पार्टी की तैयारियों को परखने और चुनावी रणनीति को जमीन तक पहुंचाने का बड़ा सियासी मंच माना जा रहा है। 20 सितंबर को सहारनपुर में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की मौजूदगी में पश्चिमी यूपी के करीब 4800 शक्ति केंद्र संयोजकों का जुटना भाजपा के संगठनात्मक नेटवर्क की ताकत का बड़ा प्रदर्शन होगा। भाजपा ने बूथ संगठन को मजबूत करने के लिए छह से आठ बूथों को मिलाकर शक्ति केंद्र बनाए हैं। प्रत्येक शक्ति केंद्र का संयोजक बूथ कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय, मतदाता संपर्क और पार्टी के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में सम्मेलन के जरिए पार्टी नेतृत्व को जमीनी फीडबैक हासिल करने का अवसर मिलेगा। बैठक में संगठन की सक्रियता, मतदाता संपर्क और बूथ प्रबंधन की स्थिति पर चर्चा संभावित है। साथ ही कमजोर क्षेत्रों और संगठन की कमियों को चिन्हित कर उन्हें दुरुस्त करने की रणनीति भी बनाई जा सकती है। कार्यक्रम का स्थान और समय अभी तय नहीं हुआ है, जिस पर पार्टी स्तर पर मंथन जारी है। 4800 शक्ति केंद्र, मजबूत बूथ नेटवर्क पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा ने बूथों को शक्ति केंद्रों में संगठित किया है। एक शक्ति केंद्र के अंतर्गत करीब छह से आठ बूथ आते हैं। इन केंद्रों की जिम्मेदारी संभालने वाले संयोजक पार्टी और बूथ कार्यकर्ताओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सम्मेलन में इनकी सक्रियता और जिम्मेदारियों की समीक्षा भी अहम रहेगी। जमीनी फीडबैक पर रहेगा जोर शक्ति केंद्र संयोजकों से भाजपा नेतृत्व को सीधे जमीनी स्थिति की जानकारी मिलने की उम्मीद है। मतदाता संपर्क, बूथ की सक्रियता और संगठनात्मक कमजोरियों का फीडबैक चुनावी रणनीति के लिए महत्वपूर्ण होगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की मौजूदगी में होने वाला सम्मेलन संगठन को नीचे तक और सक्रिय करने का संदेश भी देगा।

किसानों को 6% ब्याज पर मिलेगा 6 लाख तक का लोन, जानें पूरी जानकारी

किसानों को छह प्रतिशत ब्याज पर लंबी अवधि के लिए छह लाख तक का ऋण  राज्य सरकार द्वारा कृषकों को वितरित ऋणों पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान प्रदान किया जाएगा ऋण की किस्तों का भुगतान नियत तिथि पर करने वाले किसानों को ही मिलेगा ब्याज अनुदान लखनऊ,   मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत लघु एवं सीमांत किसानों को रियायती ब्याज दर पर दीर्घकालिक ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के माध्यम से किसानों को छह लाख रुपये तक का ऋण छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर लंबी अवधि के लिए दिया जाएगा। इससे किसानों को कृषि एवं ग्रामीण जरूरतों के लिए कम ब्याज पर वित्तीय सहायता मिल सकेगी। दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराये जाने हेतु राज्य सरकार द्वारा कृषकों को वितरित ऋणों पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान प्रदान किया जाएगा। इसका आकलन प्रतिवर्ष कृषकों को विगत वर्ष (योजना आरम्भ होने के पश्चात) में दिये गये ऋणों के अवशेष मूलधन व आगामी वर्षों में वितरित ऋणों के आधार पर किया जाएगा। प्रस्तावित योजना में देय 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान उन्हीं ऋणी कृषकों को अनुमन्य होगा, जो नियत देय किस्तों का भुगतान नियत तिथि को करेंगे।

UP में शिक्षक भर्ती का बड़ा मौका, 15,012 पदों पर निकली वैकेंसी

योगी सरकार में शिक्षक बनने का सुनहरा मौका, यूपी में 15,012 पदों पर भर्ती शुरू माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक से लेकर पीजीटी तक के पदों पर विज्ञापन जारी 897 सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी, 11,508 सहायक अध्यापक शहरी और 2,607 प्रवक्ता पदों पर होगी भर्ती लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक भर्ती का बड़ा अवसर उपलब्ध कराया है। आयोग ने सहायक अध्यापक और प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) के कुल 15,012 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए दो महत्वपूर्ण विज्ञापन जारी किए हैं। इससे प्रदेश के हजारों शिक्षित युवाओं को शिक्षक बनने का अवसर मिलेगा। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि आयोग द्वारा माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी के 897 रिक्त पदों तथा बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक अध्यापक, शहरी के 11,508 रिक्त पदों का विज्ञापन जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त माध्यमिक शिक्षा विभाग के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) के 2,607 रिक्त पदों के लिए भी विज्ञापन प्रकाशित किया गया है। 15,012 पदों के लिए दो विज्ञापन, आवेदन प्रक्रिया अलग-अलग आयोग द्वारा जारी विज्ञापन के अंतर्गत सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी और सहायक अध्यापक, शहरी के पदों पर भर्ती की जाएगी। इन दोनों श्रेणियों में कुल 12,405 पद शामिल हैं। वहीं विज्ञापन संख्या-06/2026 के तहत प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) के 2,607 पदों पर भर्ती होगी। इस प्रकार दोनों विज्ञापनों के माध्यम से कुल 15,012 रिक्त पदों को भरा जाएगा। 12,405 सहायक अध्यापक पदों के लिए 16 सितंबर से आवेदन सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी एवं सहायक अध्यापक, शहरी के पदों के लिए विज्ञापन के तहत 15 सितंबर, 2026 को विज्ञापन जारी किया गया है। ऑनलाइन पंजीकरण एवं आवेदन की प्रक्रिया 16 सितंबर, 2026 से शुरू होगी। अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर, 2026 निर्धारित की गई है। ऑनलाइन आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 19 अक्टूबर, 2026 होगी। इन पदों के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन 3 एवं 4 दिसंबर, 2026 को प्रस्तावित है। भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत 897 सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी तथा बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत 11,508 सहायक अध्यापक शहरी के पदों पर चयन किया जाएगा। पीजीटी के 2,607 पदों के लिए 18 सितंबर से आवेदन अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) के 2,607 रिक्त पदों के लिए आयोग ने विज्ञापन जारी किया है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन पंजीकरण एवं आवेदन प्रक्रिया 18 सितंबर, 2026 से प्रारम्भ होगी। पीजीटी भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर, 2026 निर्धारित की गई है। ऑनलाइन आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 21 अक्टूबर, 2026 होगी। प्रवक्ता संवर्ग के पदों के लिए परीक्षा 15 एवं 16 दिसंबर, 2026 को आयोजित की जाएगी। वन टाइम रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए आयोग ने वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) व्यवस्था लागू की है। संबंधित पदों के लिए आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों को ओटीआर प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी। इसके बाद ही वे विज्ञापित पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आयोग की ओर से अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन की अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय से पंजीकरण और आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें। विस्तृत विज्ञापन पढ़कर ही करें आवेदन आयोग अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने अभ्यर्थियों से अपील की कि आवेदन करने से पूर्व आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध विस्तृत विज्ञापन एवं निर्देश पुस्तिका का सावधानीपूर्वक अध्ययन कर अपनी पात्रता सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग द्वारा विज्ञापित पदों की अर्हता एवं पात्रता के संबंध में अलग से कोई परामर्श नहीं दिया जाएगा। अभ्यर्थी भर्ती से संबंधित विस्तृत विज्ञापन, आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, परीक्षा कार्यक्रम एवं अन्य आवश्यक निर्देशों के लिए आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upessc.up.gov.in का अवलोकन कर सकते हैं।