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रोली-चंदन का तिलक, पुष्पवर्षा और स्वागत गीतों के साथ बच्चों का किया गया आत्मीय स्वागत

स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण में 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों में हुआ भव्य प्रवेशोत्सव – रोली-चंदन का तिलक, पुष्पवर्षा और स्वागत गीतों के साथ बच्चों का किया गया आत्मीय स्वागत – शत-प्रतिशत नामांकन, आउट ऑफ स्कूल बच्चों की विद्यालय वापसी और नियमित उपस्थिति पर रहेगा विशेष फोकस – जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, विद्यालय प्रबंधन समितियों और समुदाय की सहभागिता से अभियान को मिला जन आंदोलन का स्वरूप लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के  सहारनपुर से स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण का शुभारंभ करने के साथ ही उत्तर प्रदेश के लगभग 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों में नए शैक्षिक सत्र का उत्साहपूर्ण शुभारंभ हुआ। विद्यालय पहुंचे नन्हे विद्यार्थियों का रोली-चंदन का तिलक लगाकर, पुष्पवर्षा, स्वागत गीतों और तालियों की गूंज के बीच आत्मीय अभिनंदन किया गया। प्रवेशोत्सव के माध्यम से बच्चों और अभिभावकों के लिए विद्यालयों में उत्सव जैसा वातावरण तैयार किया गया, जिससे नए सत्र की शुरुआत उत्साह और आत्मीयता के साथ हो सके। योगी सरकार द्वारा चलाये जा रहे स्कूल चलो अभियान का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित एवं प्रेरक शिक्षण वातावरण तथा सीखने के समान अवसर उपलब्ध कराना है। अभियान के दूसरे चरण में विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान, उनका नामांकन, ड्रॉपआउट बच्चों की पुनर्वापसी तथा नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य शिक्षा को जनभागीदारी का अभियान बनाते हुए यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा विद्यालय और शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। नए शैक्षिक सत्र के साथ शुरू हुआ यह अभियान उसी संकल्प को धरातल पर साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के स्कूल अभियान के शुभारंभ के साथ ही सभी जनपदों के परिषदीय विद्यालयों में प्रवेशोत्सव आयोजित किए गए। शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों, विद्यालय प्रबंधन समितियों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सहभागिता से बच्चों का स्वागत किया गया। अनेक विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रेरक गतिविधियां, पौधरोपण, पुस्तक वितरण और परिचय सत्र आयोजित किए गए, जिससे बच्चों का विद्यालय से भावनात्मक जुड़ाव मजबूत हो सके। हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने का संकल्प अभियान के दूसरे चरण में विशेष रूप से ऐसे बच्चों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जो अभी तक विद्यालय से नहीं जुड़े हैं या बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं। घर-घर संपर्क, अभिभावकों से संवाद और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से प्रत्येक पात्र बच्चे को विद्यालय तक लाने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और बेहतर अधिगम वातावरण सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष प्रयास किए जाएंगे। पहले चरण में 20 लाख से अधिक नए नामांकन स्कूल चलो अभियान के पहले चरण में प्रदेशभर में 20 लाख से अधिक बच्चों का नया नामांकन कराया गया। अभियान के अंतर्गत तीन वर्ष आयु के बच्चों का बाल वाटिका तथा छह वर्ष आयु के बच्चों का कक्षा एक में नामांकन कराया जाएगा। साथ ही विद्यालय छोड़ चुके बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। प्रत्येक पात्र बच्चे तक पहुंचने के लिए व्यापक जनजागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। बच्चों के सर्वांगीण विकास को गति विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार, समय पर निःशुल्क पाठ्य सामग्री का वितरण तथा बालिकाओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण अभियान जैसे प्रयास बच्चों के सर्वांगीण विकास को गति दे रहे हैं। अभियान का लक्ष्य प्रत्येक बच्चे को विद्यालय तक पहुंचाकर उसे सीखने, आगे बढ़ने और विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनाना है।

दिल्ली को मिली मेगा टनल परियोजना, यूपी में बनेगा नया हाईवे; जानिए कैबिनेट की अहम मंजूरियां

नई दिल्ली  पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बड़े फैसले हुए हैं. सरकार ने कुल 14,115 करोड़ रुपये के दो प्रमुख हाईवे और टनल प्रोजेक्ट्स पर मुहर लगा दी है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ब्रीफिंग के दौरान इन अहम प्रोजेक्ट्स की पूरी डिटेल शेयर की. दिल्ली में लंबे समय से भयंकर जाम से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए यह एक बहुत बड़ी खुशखबरी है. सरकार ने दिल्ली के अंदर 6 लेन वाले आधुनिक द्वारका टनल के निर्माण को अपनी मंजूरी दे दी है. इस बड़े प्रोजेक्ट पर कुल 6,970 करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च आएगा. इसके अलावा उत्तर प्रदेश राज्य को भी विकास का एक बड़ा तोहफा मिला है. यूपी में कानपुर से कबरई तक एक बिल्कुल नया 4 लेन हाईवे बनाया जाएगा. इस एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे प्रोजेक्ट की कुल लागत 7,145 करोड़ रुपये तय की गई है. अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘ये फैसले देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देंगे’. दोनों प्रोजेक्ट्स को मिलाकर सरकार कुल 14,115 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है।  क्या है दिल्ली के द्वारका टनल प्रोजेक्ट की पूरी डिटेल और खासियत?     दिल्ली के इस नए प्रोजेक्ट के तहत नेशनल हाईवे 148AE पर 6 लेन का टनल बनाया जाएगा. यह शिवमूर्ति इंटरचेंज को वसंत कुंज के नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ेगा. शिवमूर्ति इंटरचेंज द्वारका एक्सप्रेसवे (NH-248 BB) का एक बहुत अहम हिस्सा है. इस टनल के बनने से वेस्ट और साउथ दिल्ली के बीच सफर काफी तेज हो जाएगा।      इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 8.1 किलोमीटर होगी. सबसे खास बात यह है कि इसमें से 3.1 किलोमीटर लंबा टनल साउदर्न रिज फॉरेस्ट के नीचे से गुजरेगा।      सरकार ने इस मेगा प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 5 साल का समय तय किया है. इसका सीधा मतलब है कि दिल्लीवासियों को अगले कुछ सालों में जाम से बड़ी राहत मिल जाएगी. यह एक आधुनिक ग्रीनफील्ड अलाइनमेंट प्रोजेक्ट है. इसे हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के आधार पर डेवलप किया जाएगा।  यूपी वालों की बल्ले-बल्ले: 242 किलोमीटर लंबे हाईवे से फर्राटे भरेंगी गाड़ियां यूपी को मिले 7,145 करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट से विकास को तेज रफ्तार मिलेगी. सरकार ने कानपुर से कबरई तक 242 किलोमीटर लंबे 4 लेन हाईवे को मंजूरी दे दी है. यह अहम प्रोजेक्ट भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का एक बड़ा हिस्सा है. इसे बीओटी मोड यानी टोल के आधार पर डेवलप किया जाएगा।  इस हाईवे के बनने से कानपुर, हमीरपुर और महोबा जैसे जिलों को सीधा फायदा पहुंचेगा. महोबा एक एस्पिरेशनल जिला है और वहां विकास की नई किरण पहुंचेगी. सरकार ने इस पूरे काम को सिर्फ ढाई साल में खत्म करने का लक्ष्य रखा है. कबरई में एग्रीगेट माइनिंग का बड़ा काम होता है. वहां से कानपुर और भोपाल तक माल की सप्लाई के लिए इस हाईवे की सख्त जरूरत थी।  नए हाईवे से कानपुर, घाटमपुर, हमीरपुर और कबरई में ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी. सबसे बड़ी बात यह है कि कानपुर से कबरई का सफर अब साढ़े तीन घंटे की बजाय सिर्फ डेढ़ घंटे में पूरा होगा. सफर के समय में सीधे 58 प्रतिशत की भारी कमी आएगी।  इस हाईवे पर गाड़ियां 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की शानदार स्पीड से दौड़ सकेंगी. यह प्रोजेक्ट पीएम गति शक्ति के 4 इकोनॉमिक नोड्स और 10 लॉजिस्टिक नोड्स को भी आपस में जोड़ेगा। 

अब राज्य में मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन से कम नहीं होगी, योगी सरकार ने बढ़ी हुई मजदूरी देने के लिए कर रखे हैं प्रबंध

लखनऊ  उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश की ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में 1 जुलाई 2026 से बड़ा बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) योजना को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है। इस नई योजना के तहत अब प्रदेश के पात्र ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों की रोजगार गारंटी मिलेगी। इस योजना के समुचित कार्यान्वयन के लिए योगी सरकार ने कमर कस ली है। करीब 20 वर्षों तक ग्रामीण रोजगार की रीढ़ रहे मनरेगा की जगह अब यह नया ढांचा ले रहा है। यह कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, रोजगार बढ़ाएगा और गांवों में स्थायी विकास कार्यों को गति देगा। यूपी के ग्रामीण परिवारों को होगा फायदा उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े ग्रामीण आबादी वाले राज्यों में शामिल है, जहां लाखों परिवार रोजगार के लिए मनरेगा पर निर्भर रहे हैं। नई योजना लागू होने के बाद यूपी के ग्रामीण मजदूरों को कई बड़े लाभ मिलने वाले हैं। अब प्रदेश के पात्र ग्रामीण परिवारों को सालाना 100 दिनों के बजाय 125 दिनों की रोजगार गारंटी मिलेगी। साथ ही नई व्यवस्था के तहत अब राज्य में मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन से कम नहीं होगी। इससे राज्य के लाखों ग्रामीण मजदूरों को सीधा फायदा मिलेगा। राष्ट्रीय औसत मजदूरी 298.8 रुपये प्रतिदिन से बढ़कर 327.4 रुपये प्रतिदिन हो गई है। योगी सरकार ने बढ़ी हुई मजदूरी देने के लिए सारे प्रबंध पहले से कर रखे हैं।  वैज्ञानिक तरीके से विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी  मनरेगा की तुलना में सबसे बड़ा बदलाव जियोस्पेशियल प्लानिंग को लेकर देखा जा रहा है। पहले जहां स्थानीय मांग के आधार पर कार्यों को मंजूरी दी जाती थी, वहीं अब गांवों में सैटेलाइट डेटा, भूमि रिकॉर्ड और बुनियादी ढांचे की जरूरतों के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी। इन्हीं योजनाओं के अनुसार तय होगा कि सरकारी धन कहां और किस कार्य पर खर्च किया जाएगा। वहीं अब पहले की तरह केवल मांग के आधार पर रोजगार नहीं मिलेगा। प्रदेश के गांवों में पहले से तैयार विकास योजनाओं के आधार पर काम तय किए जाएंगे। निगरानी जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल प्लानिंग टूल्स के जरिए होगी  अब यूपी के गांवों में विकास कार्यों की योजना और निगरानी जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल प्लानिंग टूल्स के जरिए होगी। इससे काम की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने का दावा किया जा रहा है। वीबी-जी राम जी एक्ट के तहत उत्तर प्रदेश में ऐसे कार्यों को प्राथमिकता मिलेगी जो लंबे समय तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करें। इसमें सड़क निर्माण, सिंचाई व्यवस्था, जल संरक्षण परियोजनाएं और स्थायी सामुदायिक इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है। अब विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं को आपस में जोड़कर परियोजनाओं को लागू किया जा सकेगा। इससे कार्यों के दोहराव को रोका जा सकेगा, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विकास कार्यों की दक्षता में सुधार आएगा।

विकास के लिए प्रदेश का कोना-कोना मथ रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अनवरत पांचवें महीने सहारनपुर पहुंचे

सहारनपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पश्चिम उत्तर प्रदेश समेत समूचे प्रदेश के विकास को लेकर निरंतर प्रयासरत हैं। शासकीय दायित्वों की व्यस्तताओं के बीच वे निरंतर जनसंवाद करते हैं। मुख्यमंत्री जुलाई के पहले दिन सहारनपुर पहुंचे और यहां स्कूल चलो अभियान के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया। यही नहीं, सीएम ने यहां 613 करोड़ से अधिक की विकास योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री पांच महीने में सहारनपुर पांचवीं बार पहुंचे और हर बार उन्होंने जनता से जुड़े संवेदनशील मुद्दों की समीक्षा की। समस्याओं का निराकरण किया और विकास की गंगा बहाने में योगदान दिया।  पांच महीने में पांच दौरे कर सीएम ने बताई सहारनपुर की अहमियत  पिछली सरकारों की उपेक्षा झेल रहे सहारनपुर को योगी आदित्यनाथ ने प्रगति पथ पर दौड़ाया। पिछली सरकार के मुखिया ने पांच वर्ष में सहारनपुर का एकाध बार ही दौरा किया, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच महीने में पांच बार सहारनपुर पहुंचकर यहां की अहमियत बताई। सीएम योगी ने मार्च, अप्रैल, मई, जून व जुलाई में सहारनपुर पहुंचकर यहां अनेक विकास कार्यों को गति दी। गति को प्रगति का आधार मानने वाले सीएम योगी ने सहारनपुर समेत सभी 75 जनपदों में समान रूप से विकास की गंगा बहाई और निरंतर दौरे भी किए। सहारनपुर को मिली स्पोर्ट्स कॉलेज की सौगात, पहली बार किसी कॉलेज में शुरू हुआ भारोत्तोलन  सहारनपुर में खिलाड़ियों को भी बड़ी सौगात मिली। योगी सरकार ने दो नए स्पोर्ट्स कॉलेजों को शुरू करने का फैसला लिया है। इनमें से एक सहारनपुर स्पोर्ट्स कॉलेज भी है। इसका शैक्षणिक सत्र 2026-27 से संचालन शुरू हो गया। 2011 से लंबित सहारनपुर स्पोट्र्स कॉलेज के निर्माण को योगी सरकार ने पूरा कराया। यहां खिलाड़ियों के लिए 80 सीट आरक्षित है। इस कॉलेज में एथलेटिक्स रनर (बालक) के लिए 8, एथलेटिक्स जंपर (बालक) के लिए 6, एथलेटिक्स थ्रोवर (बालक) 6, हॉकी खिलाड़ी (बालक) 21, हॉकी गोलकीपर (बालक) के लिए 4, जूडो (बालक) 10, बॉक्सिंग (बालक) 15 और भारोत्तोलन (बालक वर्ग) के लिए 10 सीटें तय की गई हैं। भारोत्तोलन अभी तक किसी भी स्पोर्ट्स कॉलेज में नहीं था। यह सहारनपुर स्पोर्ट्स कॉलेज से पहली बार शुरू हो रहा है।  बॉक्स मार्च से जुलाई तक मुख्यमंत्री का सहारनपुर दौरा 14 मार्चः शाकुम्भरी माता मंदिर व बाबा भूरादेव मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री, परिक्षेत्र में चल रही पर्यटन परियोजनाओं का भी किया निरीक्षण 14 अप्रैलः दिल्ली-बागपत-सहारनपुर-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के शुभारंभ अवसर पर सहारनपुर पहुंचे सीएम  7 मईः मुख्यमंत्री ने सहारनपुर के देवबंद में 2131 करोड़ रुपये की 325 परियोजना का लोकार्पण/ शिलान्यास किया। साथ ही 1600 से अधिक लाभार्थियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी दिया। 1 जूनः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां शाकुम्भरी देवी सिद्धपीठ में दर्शन-पूजन किया और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक भी की। 1 जुलाईः स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ व 613 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण/ शिलान्यास तथा विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र का वितरण किया।

केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच एमओयू, ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचेगी अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधा

लखनऊ  योगी सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ और तकनीक आधारित बनाने क दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेशवासियों को अत्याधुनिक एवं निःशुल्क डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश सरकार के बीच प्रधानमंत्री निधि के तहत एआई-सक्षम पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन, 1.5 टेस्ला एमआरआई एवं डिजिटल मैमोग्राफी टोमोसिंथेसिस (डीबीटी) मशीनों की आपूर्ति, स्थापना एवं संचालन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता जून-26 से मार्च-36 तक प्रभावी रहेगा। इससे प्रदेश के नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके निकट ही आधुनिक रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग सेवाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान संभव होगी, उपचार में होने वाली देरी कम होगी तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा। एआई आधारित आधुनिक इमेजिंग तकनीक से कैंसर और हृदय रोग की सटीक हो सकेगी पहचान  अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने बताया कि यह पहल उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित आधुनिक इमेजिंग तकनीक के उपयोग से कैंसर, क्षय रोग (टीबी), हृदय रोग सहित अन्य गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) का प्रारंभिक चरण में सटीक निदान संभव हो सकेगा। समय पर बीमारी की पहचान होने से मरीजों का उपचार अधिक प्रभावी होगा और मृत्यु दर में कमी लाने में भी सहायता मिलेगी। एमओयू का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं पहुंचाना है। विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां अब तक उन्नत जांच सुविधाएं सीमित रही हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में क्षेत्रीय असमानता भी कम होगी और लोगों को बड़े शहरों के अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एमओयू के अनुसार भारत सरकार मशीनों की केंद्रीकृत खरीद, आपूर्ति, स्थापना, कमीशनिंग तथा प्रारंभिक अनुरक्षण की जिम्मेदारी निभाएगी। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करेगी, साइट की तैयारी सुनिश्चित करेगी, सभी आवश्यक नियामकीय अनुमतियां प्राप्त करेगी तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता के साथ उपकरणों के प्रभावी संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी। इस समन्वित व्यवस्था से परियोजना का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। मशीनों की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए विकसित किया जाएगा रीयल टाइम आईटी पोर्टल  एमओयू के अनुसार, सभी मशीनों की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए एक अत्याधुनिक रीयल टाइम आईटी पोर्टल विकसित किया जाएगा। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रत्येक मशीन की कार्यशीलता, उपयोग की स्थिति, उपलब्ध कराई गई सेवाओं, जांच कराने वाले लाभार्थियों की संख्या तथा उपकरणों के प्रदर्शन की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, उपकरणों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और आवश्यकतानुसार त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई भी संभव हो सकेगी। उपकरणों के दीर्घकालिक संचालन को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री निधि के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली सभी मशीनों पर एक वर्ष की वारंटी के बाद अगले नौ वर्षों तक व्यापक वार्षिक अनुरक्षण की व्यवस्था भी की गई है। इससे मशीनों के रखरखाव में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी तथा मरीजों को लगातार गुणवत्तापूर्ण जांच सेवाएं उपलब्ध होती रहेंगी।

₹464 करोड़ से 22 एकड़ में विकसित डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी का नया परिसर तैयार

लखनऊ उत्तर प्रदेश में सुशासन, दक्ष प्रशासन और लोकसेवा की गुणवत्ता को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 3 जुलाई को ₹464 करोड़ से अधिक की लागत से 22 एकड़ क्षेत्रफल में निर्मित डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के अत्याधुनिक नवीन परिसर का लोकार्पण करेंगे।  आधुनिक प्रशासनिक प्रशिक्षण की वैश्विक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित यह परिसर अधिकारियों और कर्मचारियों के क्षमता निर्माण, नेतृत्व विकास तथा तकनीक-सक्षम प्रशिक्षण का यह प्रमुख केंद्र बनेगा। यह अत्याधुनिक परिसर राज्य में क्षमता निर्माण की संस्कृति को मजबूत करेगा। कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्डिंग एवं कोर्स कम्प्लीशन जैसे कार्यक्रमों को भी इससे नई गति मिलने की उम्मीद है। प्रशासनिक दक्षता, जवाबदेही और बेहतर लोकसेवा के लक्ष्य को प्राप्त करने में यह अकादमी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विश्वस्तरीय प्रशिक्षण अवसंरचना से लैस होगा परिसर जी.जी.सी.टी., सुल्तानपुर रोड, लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के अत्याधुनिक नवीन परिसर को इस प्रकार विकसित किया गया है कि यहां राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा सके। आधुनिक प्रशिक्षण कक्ष, डिजिटल शिक्षण संसाधन, उन्नत ज्ञान सुविधाएं तथा अत्याधुनिक अधोसंरचना प्रशासनिक प्रशिक्षण को नई दिशा देंगी। क्षमता निर्माण और नेतृत्व विकास पर रहेगा विशेष जोर अकादमी में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सुशासन, नीति क्रियान्वयन, नेतृत्व विकास, नवाचार, डिजिटल प्रशासन और जनसेवा जैसे समकालीन विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के साथ नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था को और प्रभावी बनाना है। तकनीक-सक्षम शिक्षण और आवासीय सुविधाएं परिसर में विश्वस्तरीय आवासीय सुविधाओं के साथ तकनीक-सक्षम शिक्षण एवं ज्ञान संसाधनों की व्यवस्था की गई है। सुरक्षित, हरित और सुव्यवस्थित वातावरण में प्रशिक्षणार्थियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। प्रशासनिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता को मिलेगी नई दिशा डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी का नया परिसर राज्य में प्रशासनिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता को नई दिशा देगा। आधुनिक संसाधनों और वैश्विक मानकों से युक्त यह संस्थान सुशासन, नवाचार और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्ध, दक्ष एवं संवेदनशील प्रशासनिक नेतृत्व तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। महानिदेशक, एम. देवराज

मुख्यमंत्री ने सहारनपुर से किया राज्यव्यापी स्कूल चलो अभियान के द्वितीय चरण का शुभारंभ

सहारनपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उच्च प्राथमिक विद्यालय इस्माइलपुर (कंपोजिट) से राज्यव्यापी स्कूल चलो अभियान के द्वितीय चरण (1 से 15 जुलाई) का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को स्कूल अवश्य भेजें। शिक्षा व्यक्ति, समाज व राष्ट्र की सुदृढ़ आधारशिला है। अच्छी शिक्षा ही सभ्य, संस्कारित नागरिक बनाती है और सही मार्ग दिखाती है। अच्छी शिक्षा से ही अच्छे समाजसेवी, शिक्षक, प्रधानाचार्य, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, उद्यमी, इंजीनियर, चिकित्सक, न्यायिक अधिकारी आदि निकलेंगे। देश के भविष्य को बनाने वाली भावी पीढ़ी जिस भी क्षेत्र में आगे बढ़े, शिक्षा के कारण वह आत्मविश्वास से भरपूर होकर समाज व राष्ट्र के निर्माण में अपनी भूमिका का प्रभावी निर्वहन कर सकेगी। नीयत साफ थी तो परिणाम भी अच्छे आए सीएम ने कहा कि 2017 में पीएम मोदी जी के मार्गदर्शन व प्रेरणा से प्रदेश सरकार ने स्कूल चलो अभियान प्रारंभ किया। सरकार की नीयत साफ थी तो परिणाम भी अच्छे आए। शिक्षा के उन्नयन के लिए सरकार की नीति स्पष्ट थी। सरकार बिना भेदभाव हर बच्चे तक योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ बढ़ी थी। 2017 में बेसिक शिक्षा परिषद में केवल 36 फीसदी विद्यालय ही पूरी तरह संतृप्त माने जा रहे थे। उस समय टॉयलेट, पेयजल, फर्नीचर, लाइब्रेरी, लाइट, मिड डे मील आदि की समुचित व्यवस्था नहीं थी। तब ऑपरेशन कायाकल्प चलाकर मैंने जनप्रतिनिधियों, उद्यमियों, अधिकारियों से अपील की कि बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में व्यापक रूप से सुविधाएं उपलब्ध कराकर संतृप्तिकरण के लक्ष्य को पूरा किया जाए और उसके पैरामीटर तय किए जाएं।  5 वर्ष में 96 फीसदी से अधिक विद्यालयों का संतृप्तिकरण सीएम ने कहा कि हमने तय किया कि हर स्कूल में बालक/बालिकाओं के लिए अलग टॉयलेट, पेयजल और मिड डे मील में प्रतिदिन का भोजन तय हो। स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, सरकार की ओऱ से हर बच्चे को यूनिफॉर्म, बैग, किताबें आदि देकर सभी सुविधाओं से आच्छादित किया जाए। विद्यार्थियों व शिक्षकों के अनुपात को ठीक किया जाए। इसके लिए अभियान प्रारंभ किया गया। इसका असर हुआ कि बेसिक शिक्षा विद्यालयों का 36 फीसदी का संतृप्तिकरण बढ़कर अगले पांच वर्ष में 96 फीसदी से अधिक हो गया। हर बच्चे को बैग, बुक, जूते-मोजे, स्वेटर, यूनिफॉर्म आदि मिलना प्रारंभ हुआ, परिणामस्वरूप नामांकन बढ़ा। 9 वर्ष में 60 लाख से अधिक बच्चे बेसिक शिक्षा परिषद में बढ़े और ड्राप आउट रेट 19-20 फीसदी से घटकर 3-4 फीसदी तक रह गया। बच्चा स्कूल नहीं गया तो समाज व राष्ट्र की क्षति मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ समाज के लिए आवश्यक है कि कोई भी बच्चा स्कूल से जाने से वंचित न रहे। कोई भी बच्चा यदि शिक्षा से वंचित है तो यह केवल परिवार की ही नहीं, बल्कि समाज व राष्ट्र की भी क्षति है। इन्हीं बच्चों को समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में नेतृत्व देना है। यहां बैठे जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक आदि भी कभी छात्र थे। सभी ने पढ़ाई की तो इस स्तर तक पहुंचे। यदि बच्चा पढ़ा-लिखा नहीं है तो समाज व राष्ट्र की अपूर्णीय क्षति करेगा और दिग्भ्रमित हो जाएगा। हमें ऐसी पीढ़ी खड़ी करनी है, जो राष्ट्र के कर्तव्यशील नागरिक के रूप में दायित्वों का निर्वहन कर सके। हर तबके का दायित्व- कोई भी बच्चा स्कूल जाने से न छूटे सीएम ने विकसित भारत की संकल्पना को पूरा कर समृद्ध समाज बनाने वाले जागरूक नागरिकों से अपील भी की। उन्होंने कहा कि यह दायित्व केवल उन्हीं परिवारों का नहीं है, जिन परिवारों में बच्चे हैं। राजनेता, सांसद, विधायक, पार्षद, ब्लाक प्रमुख, प्रधान, जिला पंचायत अध्य़क्ष, अधिकारी, शिक्षक, अधिवक्ता, व्यापारी, चिकित्सक समेत हर तबके का दायित्व है कि आसपास अवलोकन करें कि कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रहने पाए। हर बच्चे को स्कूल पहुंचाना है, क्योंकि यह हमारा सामाजिक दायित्व व राष्ट्रीय कर्तव्य भी है। राष्ट्रीय कर्तव्य जब सामूहिकता के साथ निर्वहन होता है तो राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है।  स्कूल चलो अभियान को जनांदोलन का हिस्सा बनाएं सीएम ने स्कूल चलो अभियान को अच्छी शुरुआत बताया। सीएम ने समाज के हर वर्ग से भी अपील की कि स्कूल चलो अभियान को जनांदोलन का हिस्सा बनाएं और हर बच्चे को स्कूल पहुंचाएं। बेसिक शिक्षा परिषद के प्रधानाचार्यों व शिक्षकों का दायित्व है कि जिन बच्चों का एडमिशन हुआ है, उन्हें समय पर यूनिफॉर्म का पैसा, बैग, बुक्स, जूता-मोजा समेत आवश्यक सुविधाएं प्राप्त हों और पठन-पाठन का बेहतरीन माहौल हो।  हर विद्यालय में सुविधाएं उपलब्ध करा रही सरकार सीएम योगी ने सरकार द्वारा बच्चों के लिए प्रारंभ किए गए विशेष अभियान का भी जिक्र किया। कहा कि सरकार हर विद्यालय में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, शिक्षकों को टैबलेट आदि तमाम सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। बेसिक शिक्षा परिषद में डेढ़ लाख से अधिक दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण भी दिए गए। गत वर्ष 13 हजार से अधिक गंभीर व बहुदिव्यांग बच्चों को छह हजार रुपये प्रतिवर्ष एस्कॉर्ट अलाउंस, 23 हजार से अधिक दिव्यांग बालिकाओं को प्रतिवर्ष दो हजार रुपये स्टाइपेंड भी उपलब्ध कराया गया है।    शिक्षा क्षेत्र में यूपी सरकार सतत कार्यरत मुख्यमंत्री ने बताया कि पीएम मोदी जी ने 2020 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की है। 26 वर्ष के पश्चात भारत ने यह नीति घोषित की। लर्निंग बाई डूइंग कार्यक्रम के माध्यम से प्रारंभिक स्तर पर ही बच्चों को कौशल आधारित शिक्षा देना प्रारंभ किया गया है। प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय को 10 हजार से बढ़ाकर 18 हजार तथा अनुदेशकों के मानदेय को 9 हजार प्रतिमाह से बढ़ाकर 17 हजार किया है। हर शिक्षामित्र, शिक्षक, प्रधानाचार्य, रसोइया, अनुदेशक को पांच लाख रुपये वार्षिक कैशलेस इलाज की सुविधा घोषित की है।  शिक्षकों से बोले सीएम- अगले 15 दिन खूब मेहनत कीजिए सीएम ने शिक्षकों से अपील की कि अगले 15 दिन जमकर मेहनत कीजिए। ग्राम पंचायत, वार्ड में जाकर हर परिवार से मिलिए, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कीजिए कि किस स्कूल में अधिक से अधिक बच्चे आ सकते हैं। स्कूल में बेहतरीन माहौल दीजिए। बच्चों को प्यार से कविताओं, गानों, मुहावरों, लोकोक्तियों के माध्यम से सिखाने की नई पद्धति को जन्म देना होगा। यह शिक्षा बच्चों को जीवन भर याद रहेगी।  मां शाकंभरी की बरस रही विशेष कृपा  सीएम ने कहा कि स्कूल चलो अभियान के द्वितीय चरण का शुभारंभ मां शाकंभरी … Read more

अयोध्या प्रकरण में एसआईटी जांच की समय-सीमा बढ़ाई गई

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या तीर्थ क्षेत्र में दान प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) की समय-सीमा 15 जुलाई तक बढ़ा दी है। मामले के विभिन्न पहलुओं की गहन छानबीन के लिए एसआईटी ने मुख्यमंत्री से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार करते हुए उन्होंने एसआईटी को आगामी 15 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि एसआईटी इस प्रकरण में हर पहलू की सघनता और निष्पक्षता से जांच करते हुए दूध का दूध और पानी का पानी करेगी। दोषियों को किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। गत 23 जून को एसआईटी के प्रमुख सदस्य लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने अपना प्रारंभिक प्रतिवेदन गृह विभाग को सौंपा था, जिसमें कठोर संस्तुतियां की गई थीं। इन संस्तुतियों के आधार पर गत 25 जून को ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में पहली एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें 8 नामजद व अन्य अज्ञात व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया था। सभी नामजद अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

योगी सरकार ने एआई डायग्नोस्टिक सुविधाओं के लिए केंद्र संग एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

लखनऊ  योगी सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ और तकनीक आधारित बनाने क दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेशवासियों को अत्याधुनिक एवं निःशुल्क डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश सरकार के बीच प्रधानमंत्री निधि के तहत एआई-सक्षम पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन, 1.5 टेस्ला एमआरआई एवं डिजिटल मैमोग्राफी टोमोसिंथेसिस (डीबीटी) मशीनों की आपूर्ति, स्थापना एवं संचालन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता जून-26 से मार्च-36 तक प्रभावी रहेगा। इससे प्रदेश के नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके निकट ही आधुनिक रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग सेवाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान संभव होगी, उपचार में होने वाली देरी कम होगी तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा। एआई आधारित आधुनिक इमेजिंग तकनीक से कैंसर और हृदय रोग की सटीक हो सकेगी पहचान अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने बताया कि यह पहल उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित आधुनिक इमेजिंग तकनीक के उपयोग से कैंसर, क्षय रोग (टीबी), हृदय रोग सहित अन्य गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) का प्रारंभिक चरण में सटीक निदान संभव हो सकेगा। समय पर बीमारी की पहचान होने से मरीजों का उपचार अधिक प्रभावी होगा और मृत्यु दर में कमी लाने में भी सहायता मिलेगी। एमओयू का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं पहुंचाना है। विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां अब तक उन्नत जांच सुविधाएं सीमित रही हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में क्षेत्रीय असमानता भी कम होगी और लोगों को बड़े शहरों के अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एमओयू के अनुसार भारत सरकार मशीनों की केंद्रीकृत खरीद, आपूर्ति, स्थापना, कमीशनिंग तथा प्रारंभिक अनुरक्षण की जिम्मेदारी निभाएगी। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करेगी, साइट की तैयारी सुनिश्चित करेगी, सभी आवश्यक नियामकीय अनुमतियां प्राप्त करेगी तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता के साथ उपकरणों के प्रभावी संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी। इस समन्वित व्यवस्था से परियोजना का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। मशीनों की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए विकसित किया जाएगा रीयल टाइम आईटी पोर्टल एमओयू के अनुसार, सभी मशीनों की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए एक अत्याधुनिक रीयल टाइम आईटी पोर्टल विकसित किया जाएगा। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रत्येक मशीन की कार्यशीलता, उपयोग की स्थिति, उपलब्ध कराई गई सेवाओं, जांच कराने वाले लाभार्थियों की संख्या तथा उपकरणों के प्रदर्शन की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, उपकरणों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और आवश्यकतानुसार त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई भी संभव हो सकेगी। उपकरणों के दीर्घकालिक संचालन को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री निधि के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली सभी मशीनों पर एक वर्ष की वारंटी के बाद अगले नौ वर्षों तक व्यापक वार्षिक अनुरक्षण की व्यवस्था भी की गई है। इससे मशीनों के रखरखाव में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी तथा मरीजों को लगातार गुणवत्तापूर्ण जांच सेवाएं उपलब्ध होती रहेंगी।

योगी सरकार का निर्णय, 2, 3 और 4 जुलाई को यूपीटीईटी में शामिल होने वाले सेवारत शिक्षकों को दी जाएगी विशेष छुट्टी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षकों के व्यावसायिक विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2026 में सम्मिलित होने वाले बेसिक शिक्षा विभाग के सेवारत शिक्षकों को परीक्षा तिथि पर विशेष अवकाश स्वीकृत किया जाएगा। शासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र शिक्षक सेवा संबंधी दायित्वों के कारण शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल होने से वंचित न रहे।  विशेष सचिव अवधेश कुमार तिवारी द्वारा शिक्षा निदेशक (बेसिक) को जारी पत्र में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा 2, 3 एवं 4 जुलाई, 2026 को उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2026 आयोजित की जा रही है। परीक्षा में बेसिक शिक्षा विभाग के बड़ी संख्या में सेवारत शिक्षक भी अभ्यर्थी के रूप में सम्मिलित होंगे। इसे देखते हुए शासन स्तर पर विचारोपरांत निर्णय लिया गया है कि परीक्षा में प्रतिभाग करने वाले शिक्षकों को संबंधित परीक्षा दिवस पर विशेष अवकाश प्रदान किया जाए। साथ ही शिक्षा निदेशक (बेसिक) को इस निर्णय का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।  शासनादेश की प्रति स्कूल शिक्षा महानिदेशक, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव तथा सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित की गई है, ताकि पात्र शिक्षकों को समय पर विशेष अवकाश उपलब्ध कराया जा सके और परीक्षा आयोजन के दौरान किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा न आए।