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CM योगी शुक्रवार को करेंगे उत्तर प्रदेश आम महोत्सव का शुभारंभ, किसानों और बागवानों को मिलेगा बड़ा मंच

सीएम योगी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश आम महोत्सव का करेंगे शुभारंभ  इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होगा आयोजन, 3 से 5 जुलाई तक चलेगा 04 जुलाई को 'जन भवन' में किया जाएगा आम क्रेता-विक्रेता सम्मेलन: उद्यान मंत्री महोत्सव में 07 श्रेणियों और 56 वर्गों में लगभग 800 से अधिक आम की प्रजातियां की जाएंगी प्रदर्शित यूपी से आम और पल्प के निर्यात में भारी उछाल, वर्ष : 2025-26 में ₹12.67 करोड़ मूल्य के 3563 मीट्रिक टन आम का हुआ रिकॉर्ड निर्यात  लखनऊ, 'उत्तर प्रदेश आम महोत्सव -2026' का आयोजन 3 से 5 जुलाई तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर में होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को त्रिदिवसीय महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। महोत्सव में 07 श्रेणियों और 56 वर्गों में लगभग 800 से अधिक आम की प्रजातियों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह जानकारी उद्यान,कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि 4 जुलाई को 'जन भवन', लखनऊ में आम क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।  मेजबान उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के प्रतिनिधि व निर्यातक लेंगे हिस्सा उद्यान मंत्री ने बताया कि महोत्सव में मेजबान उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, उत्तराखण्ड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के उ‌द्यान विभाग के प्रतिनिधि, प्रगतिशील बागवान एवं निर्यातक हिस्सा लेंगे। उद्यान मंत्री ने बताया कि महोत्सव में प्रदर्शन के लिए रखे गए आम के पौधे बिक्री के लिए भी उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने अपील की कि महोत्सव में आए नागरिक अपने साथ कम से कम एक पौधा ले जाकर अवश्य रोपित करें।  बच्चों के लिए होंगी प्रतियोगिताएं उद्यान मंत्री ने बताया कि महोत्सव में बच्चों के लिए आम खाने की प्रतियोगिता और आम से बने व्यंजनों (पकवानों) की प्रतियोगिता मुख्य आकर्षण होगी। साथ ही बागवानों के लिए उन्नत तकनीक, तुड़ाई उपरान्त प्रबन्धन, कीट-व्याधि नियंत्रण और विपणन पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित होंगी। बागवानों को सीधा बाजार देने के लिए पहली बार 04 जुलाई को 'जन भवन', लखनऊ में आम क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।  आम उत्पादन में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश आम उत्पादन के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर है। प्रदेश के 3.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगभग 61.96 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है, जो पूरे देश के कुल आम उत्पादन का लगभग 26.22 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश के दशहरी, लंगड़ा, चौसा, गौरजीत, लखनऊ सफेदा, रटौल और आम्रपाली जैसी प्रजातियां दुनिया भर में विख्यात हैं। इनका लखनऊ, सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज मण्डलों में बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। विदेशों में भी निर्यात किया जाता है उप्र का आम एपीडा (APEDA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश से आम के निर्यात में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। वर्ष 2024-25 में जहां ₹2.63 करोड़ मूल्य का 404 मीट्रिक टन आम व पल्प निर्यात हुआ था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर ₹12.67 करोड़ मूल्य का 3,563 मीट्रिक टन हो गया है। उत्तर प्रदेश का आम यूनाइटेड किंगडम (लंदन), यूएई, सऊदी अरब, मलेशिया, सिंगापुर, कुवैत, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, जापान, इटली, कतर और रूस जैसे विकासशील व विकसित देशों को निर्यात किया जा रहा है। इस वर्ष भी महोत्सव के अवसर पर प्रदेश से अन्य देशों को आम का निर्यात किया जाएगा। कई जनपदों में स्थापित किए गए मैंगो पैक हाउस लखनऊ, सहारनपुर, वाराणसी और अमरोहा में आधुनिक मैंगो पैक हाउस स्थापित किए गए हैं, जहाँ अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के तहत आम की प्रीप्रोसेसिंग और उपचार किया जा रहा है। जेवर एयरपोर्ट के पास फलों की टेस्टिंग एवं ट्रीटमेंट सेंटर का निर्माण किया जा रहा है, जिससे भविष्य में औद्यानिक निर्यात को और अधिक रफ्तार मिलेगी। आम को कीटों/रोगों से बचाने, उनका आकार, स्वाद और चमक सुधारने के लिए इस वर्ष विभाग द्वारा किसानों को लगभग 1.50 करोड़ फल बैग वितरित किए गए हैं। अनुत्पादक और पुराने पड़ चुके बागों के कैनोपी प्रबन्धन हेतु प्रति हेक्टेयर इकाई लागत पर 40 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है।

2017 तक एक भी जिला ओडीएफ नहीं, योगी सरकार ने बनवाए 3.31 करोड़ से अधिक शौचालय

योगी सरकार आने पर पकड़ी केंद्रीय योजनाओं ने रफ्तार  2017 तक एक भी जिला ओडीएफ नहीं, योगी सरकार ने बनवाए 3.31 करोड़ से अधिक शौचालय खाली सिलेंडरों के दौर से निकलकर अब होली-दिवाली पर मुफ्त रिफिल का तोहफा लखनऊ,   प्रदेश में डबल इंजन सरकार बनने के बाद आमजन को सभी केंद्रीय योजनाओं का लाभ मिल रहा है। वर्ष 2017 से पहले ऐसा नहीं था, क्योंकि पिछली सरकारें राजनीतिक कारणों से केंद्रीय योजनाओं को लागू करने में रोड़े अटकाती थीं। इतना ही नहीं, कई योजनाओं के मिलते-जुलते नाम रखकर लोगों को बरगलाने की भी चेष्टा की जाती थी। नतीजा यह कि उत्तर प्रदेश की जनता मोदी सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रहती थी। लेकिन, जैसे ही 2017 में योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, केंद्र सरकार की योजनाओं पर लगे ताले खुल गए। इससे केंद्र व राज्य, दोनों सरकारों की योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचा।          प्रधानमंत्री आवास योजना से गरीबों को मिला सहारा केंद्र सरकार ने देश के हर गरीब को पक्का मकान देने के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की थी। हालांकि प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार ने इस योजना को उत्तर प्रदेश में गति देने के बजाय अपनी समाजवादी आवास योजना और लोहिया ग्रामीण आवास योजना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया था। इसके बाद आरोप लगे कि पूर्ववर्ती सरकार ने केंद्र को लाभार्थियों की सूची भेजने और मैचिंग ग्रांट (राज्य का हिस्सा) जारी करने में ढिलाई बरती। स्थिति यह थी कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2014 से 2017 तक वह सरकार 50 हजार आवास भी नहीं बना पाई। बाद में योगी सरकार आने पर इस कार्य को 'डबल इंजन' की रफ्तार दी गई। योगी सरकार ने 9 वर्षों में 62 लाख से अधिक परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराया है। पीएम फसल बीमा योजना में 6,283 करोड़ से अधिक भुगतान  किसानों को सूखे, बाढ़ या ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए केंद्र ने 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) लॉन्च की थी। इस योजना में राज्य सरकार की ओर से भी प्रीमियम का एक हिस्सा दिया जाना था और राज्य की एजेंसियों को सक्रिय भूमिका निभानी थी। हालांकि 2017 से पहले की सरकार की उदासीनता के कारण करीब 3 प्रतिशत किसानों का ही बीमा हो सका था, जिससे यूपी के किसान केंद्रीय मुआवजे से वंचित रह गए। वहीं उस समय के दौरान भाजपा शासित राज्यों में जहां 60-70 प्रतिशत किसानों को इसका लाभ मिल चुका था। योगी सरकार में इस योजना के तहत पिछले 9 वर्षों में 79 लाख से अधिक कृषकों को 6,283 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान किया जा चुका है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 100 प्रतिशत लक्ष्य 2014 में शुरू हुआ स्वच्छ भारत मिशन पीएम मोदी के सबसे बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट्स में एक था, जिसका उद्देश्य देश को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाना था। इस योजना के तहत शौचालयों के निर्माण के लिए केंद्र से फंड जारी होना था, लेकिन इसके लिए राज्य को उपयोगिता प्रमाण पत्र देना था और अपनी हिस्सेदारी तय करनी थी। पूर्ववर्ती सरकार ने इस योजना के प्रचार-प्रसार और क्रियान्वयन में रुचि नहीं दिखाई। वह इस योजना की ब्रांडिंग के खिलाफ थी, क्योंकि वह इसे भाजपा की योजना मानती थे। नतीजा यह हुआ कि 2014-2017 के बीच यूपी में शौचालय निर्माण की गति बेहद धीमी रही और राज्य ओडीएफ रैंकिंग में काफी पीछे छूट गया। मार्च 2017 तक उत्तर प्रदेश का ग्रामीण स्वच्छता दायरा महज 35 प्रतिशत के आस-पास ही पहुंच पाया था। वहीं प्रदेश का एक भी जिला पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त घोषित नहीं हो सका था। दूसरी तरफ वर्ष 2017 के बाद योगी सरकार के आने पर अब तक प्रदेशभर में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत 3.31 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है। इसके बाद स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत उत्तर प्रदेश 100 प्रतिशत ओडीएफ राज्य घोषित किया गया। वहीं 94 हजार से अधिक गांव ठोस तरल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों के साथ ओडीएफ प्लस घोषित किए गए। यह सब 2017 में लगभग नामुमकिन लग रहा था। उज्जवला योजना में घर-घर पहुंचे गैस सिलेंडर पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान बेहद कम संख्या में महिलाओं को मुफ्त कनेक्शन (सिलेंडर व रेगुलेटर) मिले। इनमें भी लगभग 35-40 प्रतिशत परिवारों ने पहला सिलेंडर खत्म होने के बाद दूसरा सिलेंडर नहीं भरवाया, क्योंकि उस वक्त रिफिलिंग पर राज्य सरकार की तरफ से कोई अतिरिक्त वित्तीय मदद या सब्सिडी टॉप-अप नहीं मिलता था। दूसरी तरफ योगी सरकार और केंद्र सरकार ने मिलकर पिछले 9 वर्षों में प्रदेश की लगभग 1.86 करोड़ से अधिक महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन का लाभ दिया। इसके साथ ही होली और दीपावली पर दो सिलिंडर मुफ्त रिफिल किए जा रहे हैं।

विदेशी नागरिकों से ठगी करने वाला लखनऊ साइबर रैकेट पकड़ा गया

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अमरिका, कनाडा समेत कई अन्य देशों के नागरिकों को झांसे में लेकर अरबों की ठगी करने वाले साइबर अपराधियों के अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का कमिश्नरेट पुलिस ने खुलासा किया। गिरोह विभूतिखंड इलाके में स्थित समिट बिल्डिंग के 11वें तल पर दो कार्यालय (कॉल सेंटर खोलकर) करीब सवा साल से ठगी कर रहे थे। गिरोह, विदेशी नागरियों को डिजिटल अरेस्ट, ब्लैकमेलिंग, ई-वॉलेट में समस्या होने पर मदद करने और खरीदारी का झांसा देकर ठगी करते थे। गिरोह के लोग मुख्य रूप से डॉलर एप और आईबीम सॉफ्टवेयर के माध्यम से ठगी करते थे। पुलिस ने कॉल सेंटर के 27 लड़कियां, दो प्रोग्राम मैनेजर समेत 119 लोगों को हिरासत में ले लिया। साइबर, क्राइम ब्रांच और पुलिस की टीमें अलग-अलग पूछताछ कर गिरोह का नेटवर्क खंगाल रही हैं। पुलिस टीम ने मंगलवार देर रात कार्यालय में छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान कॉल सेंटर के दोनों कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस टीम ने गेट को लाक कर दिया, जिससे कोई भाग न पाए। कार्रवाई के दौरान समिट बिल्डिंग के गेट पर भी बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। पकड़े गए आरोपियों में गुजरात के अहमदाबाद जनपद का रहने वाला ललित खैराजानी (हाल पता गोमतीनगर विस्तार) और उसका साथी विक्रम सिंह परमार है। दोनों कार्यालय में ऑपरेशन मैनेजर के पद पर तैनात थे। बरामद इलेक्ट्रानिक गैजेट्स को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा इसके अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और आसाम व अन्य राज्यों की 27 लड़कियां व 92 लड़के हैं। सभी टीमों से पूछताछ की जा रही है। शहर में इतना बड़ा कॉल सेंटर पकड़े जाने की सूचना पर संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था बबलू कुमार, डीआईजी साइबर क्राइम, पुलिस उपायुक्त पूर्व डॉ. दीक्षा शर्मा, अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव समेत अन्य अफसर मौके पर पहुंचे। बरामद इलेक्ट्रानिक गैजेट्स को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। बरामदगी : 100 लैपटॉप, 178 मोबाइल फोन, कालिंग डेटा, हजारों बैंकों की ई-वॉलेट डिटेल व अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पकड़े गए 119 लोगों से पूछताछ की जा रही संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था बबलू कुमार ने बताया कि कॉल सेंटर के लोग मुख्य रूप से अमेरिकन नागरिकों को ठगते थे। गिरोह डिजिटल अरेस्ट, ब्लैकमेलिंग, ई-वॉलेट करेप्ट होने का भय दिखाकर और कई अन्य तरीके से ठगी करते थे। पकड़े गए 119 लोगों से पूछताछ की जा रही है। गिरोह का नेटवर्क खंगाला जा रही है। जालसाजों से पूछताछ कर अन्य साक्ष्य एकत्रित किए जा रहे हैं।

गृह विभाग का बड़ा फेरबदल: 125 डिप्टी एसपी का ट्रांसफर, सीएम सुरक्षा टीम में भी बदलाव

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने गुरुवार को दिन में 125 डिप्टी एसपी को नई तैनाती दी हैं। इनमें से अधिकांश वे हैं, जिनको हाल ही में निरीक्षक से पुलिस उपाधीक्षक के पद पर प्रोन्नत किया गया था। सरकार की ओर से जारी आदेश में सभी को तत्काल प्रभाव से नई तैनाती पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। इन ट्रांसफर में मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात अफसरों को भी बदला गया है। मुरादाबाद के कमलेश कांत को नोएडा और अशोक सिंह को जीआरपी गोरखपुर ट्रांसफर किया गया है। इंस्पेक्टर से डिप्टी एसपी पद पर प्रमोशन के बाद मुरादाबाद के कमलेश कांत को नोएडा कमिश्नरेट और सहारनपुर से शिव ठाकुर को मेरठ भेजा गया है। नोएडा प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक और हाई-प्रोफाइल कमिश्नरेट माना जाता है। यहां कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर होगी। मंजरी राव को प्रमोशन के बाद बलिया में ही पुलिस उपाधीक्षक बनाया गया है। शिल्पा वर्मा को कन्नौज भेजा गया है। इसके अलावा, अशोक कुमार सिंह को डिप्टी एसपी संत कबीरनबगर से डिप्टी एसपी रेलवे गोरखपुर के पद पर तैनाती मिली है। इमरान खान को ललितपुर से प्रयागराज पीएसी में सहायक सेनानायक नियुक्त किया गया है। लखनऊ पीएसी से धर्मेंद्र सिंह यादव को मुरादाबाद पुलिस अकादमी भेजा गया है। मुख्यमंत्री सुरक्षा में लखनऊ कमिश्नरेट से सुधाकर द्विवेदी और भानु प्रताप सिंह को तैनात कर दिया गया है। इनको भी प्रमोशन मिला था। मुख्यमंत्री सुरक्षा में तैनात रहे जितेंद्र कुमार-2 को आगरा कमिश्नरेट में सहायक पुलिस आयुक्त बनाया गया है। पहले उनका तबादला शाहजहांपुर किया गया था, लेकिन संशोधित आदेश में उन्हें आगरा भेजा गया। वीवीआईपी सुरक्षा का अनुभव रखने वाले जितेंद्र कुमार अब पर्यटन नगरी आगरा में कानून-व्यवस्था संभालेंगे। मुजफ्फरनगर में डिप्टी एसपी विनय कुमार द्विवेदी को वाराणसी कमिश्नरेट का एससीपी बनाया गया है। धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से हमेशा व्यस्त रहने वाले वाराणसी में सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन उनकी प्रमुख जिम्मेदारी होगी। मुजफ्फरनगर से विश्वजीत सिंह को जीआरपी मुरादाबाद में डिप्टी एसपी के पद पर तैनाती मिली है। बाराबंकी से राम किशन को अब गाजियाबाद कमिश्नरेट में एसीपी बनाया गया है। दिल्ली से सटे एनसीआर क्षेत्र में आने वाले गाजियाबाद में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण माना जाता है। अयोध्या से संदीप कुमार राय का तबादला प्रयागराज कमिश्नरेट में एसीपी के पद पर किया गया है। प्रयागराज में बड़े धार्मिक आयोजनों, कानून-व्यवस्था और छात्र गतिविधियों को देखते हुए उनकी नई तैनाती को अहम माना जा रहा है। अयोध्या के बाद संदीप कुमार राय दूसरी धार्मिक नगरी प्रयागराज पहुंचे हैं।

पीसीएस के बाद पीपीएस अफसरों को भी प्रमोशन का तोहफा, यूपी को मिले 28 नए आईपीएस अधिकारी

लखनऊ  यूपी में पीसीएस अफसरों के प्रमोशन के बाद पीपीएस अधिकारियों की प्रोन्नति हो गई है। इस प्रोन्नति से यूपी पुलिस को 28 और आईपीएस अधिकारी मिल गए हैं। डीपीसी के बाद संघ लोक सेवा आयोग ने पीपीएस संवर्ग से आईपीएस संवर्ग में पदोन्नति प्रदान किए जाने का आदेश जारी कर दिया है। इनमें पीपीएस संवर्ग के 1997, 1998, 1999 व 2000 बैच के अधिकारी शामिल हैं। इससे पहले मंगलवार को पीसीएस से आईएएस बने अफसरों की सूची जारी हुई थी। 29 पीसीएस को आईएएस बनाया गया है। आईपीएस संवर्ग में पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों में कमल किशोर, सुरेश चंद्र रावत, शोएब इकबाल, राहुल मिठास, आलोक कुमार शर्मा, राजकुमार, महेश सिंह अत्रि, विनीत भटनागर, जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, शशि शेखर सिंह, कुलदीप सिंह, ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद, हरेंद्र प्रताप यादव, बंशराज सिंह यादव, कृष्ण गोपाल, मधुबन कुमार सिंह, कपिल देव सिंह, बलवंत कुमार चौधरी, राहुल श्रीवास्तव, राजेश कुमार पांडेय, प्रीति बाला गुप्ता, विकास चंद्र त्रिपाठी, पुर्णेन्दु सिंह, हरेंद्र कुमार, मार्तंड प्रकाश सिंह, अभय नाथ त्रिपाठी, पवित्र मोहन त्रिपाठी व देवेश कुमार शर्मा शामिल हैं। 2010 से 2012 बैच के अफसरों का प्रमोशन इससे पहले जिन वर्ष 2010 से लेकर 2012 बैच के पीसीएस अधिकारियों को आईएएस में प्रमोशन दिया गया। कुल 29 पीसीएस अधिकारी अब आईएएस बन गए हैं। अब इनकी नई तैनाती का इंतजार है। माना जा रहा है कि जल्द ही इनकी तैनाती की लिस्ट जारी होगी। इसके साथ ही आईएएस अफसरों के तबादलों का भी एक दौर फिर से शुरू होगा। यह अफसर बने आईएएस अपर आयुक्त मीरजापुर मंडल डा. विश्राम, संयुक्त निदेशक युवा कल्याण अशोक कुमार कनौजिया, सचिव गोरखपुर विकास प्राधिकरण पुष्प राज सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रशासन मुजफ्फरनगर संजय कुमार सिंह, अपर आयुक्त विंध्याचल मंडल राज कुमार द्विवेदी, अपर आयुक्त लखनऊ मंडल राकेश कुमार पटेल, अपर आयुक्त कानपुर मंडल सुशीला, अपर जिलाधिकारी (वि/रा) कुशीनगर वैभव मिश्रा, लखनऊ विकास प्राधिकरण के सचिव विवेक श्रीवास्तव, सहारनपुर के अपर नगर आयुक्त प्रदीप कुमार यादव, अपर जिलाधिकारी (नगर) अयोध्या योगा नंद पांडेय, अपर आयुक्त मेरठ मंडल अमित कुमार व उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग प्रयागराज की उपसचिव पूनम निगम शामिल हैं। इनको भी मिला प्रमोशन का तोहफा अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) रामपुर डा. नितिन मदान, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के परीक्षा नियंत्रक हर्ष देव पांडेय, विशेष कार्याधिकारी यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण शैलेन्द्र कुमार सिंह, अपर जिलधिकारी (वि/रा) लखीमपुर खीरी नरेन्द्र बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) सहारनपुर संतोष बहादुर सिंह, मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के सचिव पंकज वर्मा, मुख्य राजस्व अधिकारी एवं डीडीसी देवरिया विजय कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त मुरादाबाद अतुल कुमार, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी अमित सिंह, सेंट्रल सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट लखनऊ की कमांडेंट प्रियंका सिंह, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) कानपुर देहात अमित कुमार, अपर आयुक्त राज्य कर लखनऊ डा. सुनील कुमार वर्मा, विशेष कार्याधिकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय गरिमा स्वरूप, अपर जिलाधिकारी (वि/रा) हापुड़ संदीप कुमार व अपर जिलाधिकारी (वि/रा) लखनऊ राकेश कुमार सिंह की भी पदोन्नति आइएएस संवर्ग में हो गई है।

लखनऊ में 808 परिवारों को मिला आशियाना, एलडीए की अटल नगर योजना का लकी ड्रा संपन्न

लखनऊ  एलडीए ने बुधवार को अटल नगर योजना के 808 फ्लैटों का लाटरी से आवंटन किया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्स आडिटोरियम में लाटरी ड्रा में 4469 आवेदकों के मध्य फ्लैटों की पर्चियां निकाली गई। नायरा ने बताया कि उन्होंने बड़ी उम्मीद से आवेदन किया था और उनका नाम आ गया। ऐसे ही कैलाश मिश्रा भी गदगद दिखे। एलडीए के अपर सचिव सीपी त्रिपाठी ने बताया कि देवपुर पारा में लांच की गयी अटल नगर आवासीय योजना में वन बीएचके और टू बीएचके के 2,496 फ्लैट्स हैं। 30 वर्गमीटर से लेकर 54.95 वर्गमीटर क्षेत्रफल के इन फ्लैटों की कीमत 9.82 लाख रुपये से शुरू है। एलडीए ने इस अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम में लिफ्ट के साथ स्वच्छ जल व विद्युत आपूर्ति, पावर बैकअप, सुरक्षा व्यवस्था, ग्रीन एवं किड्स प्ले एरिया व पार्किंग की सुविधा का प्रविधान किया है। उन्होंने बताया कि योजना में वन बीएचके के 135 और टू बीएचके के 673 फ्लैट शेष थे। जिसके लिए 18 अप्रैल से 18 मई के मध्य आनलाइन पंजीकरण खोला गया था। इसमें वन बीएचके के भवनों के लिए 1666 और टू बीएचके के भवनों के लिए 2803 आवेदकों ने पंजीकरण कराया था। अपर सचिव ने बताया, इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्स आडिटोरियम में 4469 आवेदकों के मध्य फ्लैटों का लकी ड्रा हुआ। जिसमें खुले मंच पर आवेदकों को बुलाकर उन्हीं के हाथों से ही लाटरी ड्रा की पर्चियां निकलवायी गयी। 808 परिवारों को हाउसिंग स्कीम में अपने सपनों का आशियाना मिल गया है। वेलनेस सिटी के 59 किसानों को 125 भूखंड आवंटित एलडीए ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के वीआइपी लाज में वेलनेस सिटी योजना के लिए किसानों को 125 भूखंड आवंटित किया। यह योजना लैंड पूलिंग के माध्यम से आकार लेगी। वेलनेस सिटी के लिए 59 किसानों ने जमीन दिया था, उन्हें 125 भूखंड दिए गए। किसानों को 288 वर्ग मीटर के 86, 200 वर्ग मीटर के चार, 162 वर्ग मीटर के पांच, 128 वर्ग मीटर के नौ, 72 वर्ग मीटर के सात और 35 वर्ग मीटर के 14 आवेदकों के मध्य लाटरी का आयोजन किया गया था। 1200 एकड़ की योजना में जमीन 5100 रुपये प्रति वर्ग फीट एलडीए की सुलतानपुर रोड स्थित 1200 एकड़ की वेलनेस सिटी में भूमि का दाम तय हो गया है। यह योजना सबसे महंगी होगी। एलडीए ने आवासीय भूखंडों के 5100 रुपये प्रति वर्ग फीट के हिसाब से दाम तय किया है, जबकि बीकेटी स्थित नैमिष नगर योजना में 2800 रुपये प्रति वर्ग फीट और आगरा एक्सप्रेस-वे स्थित वरुण विहार योजना में 3200 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से भूखंड बिक्री किए जाएंगे। इसी तरह से सीतापुर रोड स्थित शिया पीजी कालेज के पास कब्जा मुक्त कराई 16 हजार वर्गमीटर भूमि पर चंद्रिका अपार्टमेंट में 900 फ्लैट बनेंगे।  

आस्था के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं, जनता को सपा-कांग्रेस के बहकावे में आने की आवश्यकता नहीं

दंगाइयों के मुकदमे वापस लेने का प्रयास करती थी सपा सरकार:  सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया सहारनपुर नगर एवं सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्रों के लिए ₹620 करोड़ से अधिक लागत वाली विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास आस्था के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं, जनता को सपा-कांग्रेस के बहकावे में आने की आवश्यकता नहीं कांग्रेस व सपा सरकारें रोकती थीं कांवड़ यात्रा,  जन्माष्टमी व दुर्गा पूजा जैसे आयोजनों पर लगता था प्रतिबंध 2017 से पहले दंगा व पलायन, लेकिन आज विकास और निवेश बना है सहारनपुर की पहचान सहारनपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, अलीगढ़ व मथुरा दंगों और कर्फ्यू की आग में झुलसते थे। कैराना व कांधला से पलायन की स्थिति थी, बेटियां और व्यापारी असुरक्षित थे। तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार दंगाइयों और उपद्रवियों के मुकदमे वापस लेने का कुत्सित प्रयास करती थी। लेकिन डबल इंजन सरकार ने कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया और हाल में मुरादाबाद के उपद्रवियों को कड़ी सजा भी दिलवाई है। अब उत्तर प्रदेश में दंगे नहीं होते, बल्कि विकास की योजनाएं धरातल पर उतरती हैं। मुख्यमंत्री बुधवार को सहारनपुर नगर एवं सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्रों के लिए ₹620 करोड़ से अधिक लागत वाली विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विपरीत मौसम व बारिश की चुनौतियों के बावजूद कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों, किसानों, मातृशक्ति व स्थानीय जनप्रतिनिधियों का हृदय से आभार व अभिनंदन किया। सीएम ने जनपदवासियों को विकास की इन सौगातों के लिए बधाई भी दी। इस दौरान उन्होंने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए। आस्था के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं सीएम ने कहा कि जाति व क्षेत्र के नाम पर बांटने वाले लोग आपको कमजोर कर रहे हैं। इनके बहकावे में आने की आवश्यकता नहीं। वे कभी मां शाकंभरी के दर्शन करने के लिए नहीं गए। वे काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन, श्रीराम मंदिर का विरोध कर रहे थे। इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में कह दिया कि भगवान राम व श्रीकृष्ण हुए ही नहीं। रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाले  आस्था पर उपदेश दे रहे हैं! आस्था के साथ कोई खिलवाड़ स्वीकार नहीं है, जो अपराधी होगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। वैश्विक पटल पर चमक रही अयोध्या सीएम ने कहा कि कभी संकरी गलियों व अव्यवस्था की पहचान बन चुकी अयोध्या में आज चारों ओर से फोर लेन कनेक्टिविटी है। ब्रॉडगेज की डबल लाइन, इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन गया है। सपा को चार बार सरकार बनाने का मौका मिला, लेकिन उसने अयोध्या धाम के लिए कुछ नहीं किया। आज प्रधानमंत्री मोदी जी के यशस्वी नेतृत्व में अयोध्या धाम त्रेतायुग की दिव्यता व भव्यता के साथ वैश्विक पटल पर चमक रहा है। संत रविदास, महर्षि वाल्मीकि व बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर जैसे महापुरुषों की विरोधी समाजवादी पार्टी व कांग्रेस ने सिर्फ अपने परिवार का नाम आगे बढ़ाने का काम किया।  2017 से पहले दंगा-पलायन थी पहचान सीएम योगी कहा कि 2017 से पहले दंगा, कर्फ्यू हमारी नियति बन गई थी। कैराना व कांधला से पलायन होता था। ये सभी क्षेत्र हिंदू विहीन कर दिए गए थे। बेटी व व्यापारी सुरक्षित नहीं थे। कानून-व्यवस्था तहस नहस हो चुकी थी। 2011 में मुरादाबाद में डीआईजी पर हमला किया गया। उपद्रवी उन्हें मरा हुआ समझ छोड़कर चले गए। सपा सरकार ने उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, बल्कि उनके केस वापस लेने का कुत्सित प्रयास कर रही थी। हमारी सरकार ने उन सभी उपद्रवियों को सजा दिलाई। मजबूत कानून-व्यवस्था अब यूपी की नई पहचान है। कब्रिस्तान की बाउंड्री बनाने में लगता था पैसा मुख्यमंत्री ने कांग्रेस व समाजवादी पार्टी के नेताओं के दोहरे चरित्र पर सवाल उठाते हुए पूछा कि उनकी आस्था तब कहां थी जब कांवड़ यात्राओं, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और दुर्गा पूजा के पंडालों पर प्रतिबंध लगाए जाते थे और विकास का पैसा या तो सपा के गुर्गों द्वारा खा लिया जाता था या कब्रिस्तान की बाउंड्री बनाने में खर्च हो जाता था। आज वही पैसा मां शाकंभरी कॉरिडोर, इकोनॉमिक कॉरिडोर, फोर व टू लेन सड़क, पुल, विश्वविद्यालय, स्पोर्ट्स कॉलेज, सरसावा में सिविल टर्मिनल निर्माण, रनवे की लंबाई बढ़ाने और वुड कार्विंग के कारीगरों का जीवन स्तर उठाने में खर्च हो रहा है। यह दृष्टिकोण का अंतर है। सपा को केवल सैफई की चिंता होती थी, जबकि डबल इंजन सरकार सभी 75 जनपदों, 1,07,000 गांवों, 57,000 ग्राम पंचायतों, 825 विकास खंडों, 12,000 वार्डों और 762 नगर निकायों की चिंता करती है। कनेक्टिविटी व इंफ्रास्ट्रक्चर से अर्थव्यवस्था को नई उड़ान सहारनपुर की बदलती तस्वीर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने ₹12,000 करोड़ की लागत से बने दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (ग्रीन फील्ड कॉरिडोर) का विशेष जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस कॉरिडोर के शुरू होने से दिल्ली व सहारनपुर के बीच की दूरी महज डेढ़ घंटे की रह गई है। अब सहारनपुर एयर कनेक्टिविटी के लिए भी पूरी तरह तैयार हो रहा है। सरसावा में सिविल टर्मिनल के निर्माण और रनवे के विस्तार का कार्य तेजी से चल रहा है, जिससे जल्द ही सहारनपुर का अपना चालू एयरपोर्ट होगा और यहां के नागरिकों को दिल्ली या देहरादून जाने की बाध्यता नहीं रहेगी।   मां शाकंभरी देवी का भव्य एलिवेटेड कॉरिडोर धार्मिक व सांस्कृतिक धरोहरों के पुनरुद्धार पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि मां शाकंभरी देवी के दरबार में श्रद्धालुओं की सुगमता के लिए एक भव्य एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण युद्ध स्तर पर चल रहा है। पिछले दिनों शिवालिक की पहाड़ियों में अचानक हुई भारी वर्षा के दौरान प्रशासनिक मुस्तैदी और समय पर जारी अलर्ट के कारण जन-धन की हानि रोकने में सफलता मिली थी। भविष्य में मौसम चाहे कैसा भी हो, श्रद्धालुओं का आवागमन बाधित न हो, इसके लिए एलिवेटेड कॉरिडोर और बेहतरीन फैसिलिटेशन सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है, जो पहले की सरकारों के लिए सपना था। सहारनपुर के कारीगरों व हस्तशिल्पियों ने विपरीत परिस्थितियों में भी वुड कार्विंग की परंपरा को जीवित रखा। यहां से 600 करोड़ रुपये से अधिक के वुड कार्विंग उत्पादों का निर्यात किया गया है। सहारनपुर में सुनिश्चित किया चौतरफा विकास मुख्यमंत्री ने कहा कि सहरानपुर का अपना मेडिकल कॉलेज भी बन गया है। इसके प्रथम चरण का काम पूरा हो चुका है … Read more

UPTET 2026 परीक्षा 2 से 4 जुलाई तक, 60 जिलों के 955 केंद्रों पर 19.94 लाख अभ्यर्थी देंगे परीक्षा

यूपीटीईटी-2026 की परीक्षा 2 से 4 जुलाई तक, 60 जनपदों के 955 केंद्रों पर 19.94 लाख से अधिक अभ्यर्थी होंगे शामिल एआई सीसीटीवी और इंटीग्रेटेड कमांड रूम से होगी निगरानी, परीक्षा केंद्रों के आसपास निषेधाज्ञा लागू पारदर्शी, निष्पक्ष और शुचितापूर्ण परीक्षा के लिए आयोग कृत संकल्पित लखनऊ,  उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी-2026) की लिखित परीक्षा 02 व 03 जुलाई 2026 को दो-दो पालियों तथा 04 जुलाई 2026 को एक पाली, इस प्रकार कुल 05 पालियों में प्रदेश के 60 जनपदों में 955 परीक्षा केंद्रों पर संपन्न होगी। इस परीक्षा में कुल 19,94,661 पंजीकृत परीक्षार्थी प्रतिभाग करेंगे। आयोग के अनुसार 02 जुलाई की दोनों पालियों एवं 03 जुलाई की प्रथम पाली में उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) के अभ्यर्थियों की परीक्षा होगी, जबकि 03 जुलाई की द्वितीय पाली एवं 04 जुलाई की प्रथम पाली में प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) के अभ्यर्थियों की परीक्षा आयोजित की जाएगी। आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशान्त कुमार (सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक, उ.प्र.) ने बताया कि सभी 60 जनपदों के 955 परीक्षा केंद्रों पर तैयारियों की गहन समीक्षा कर ली गई है। सभी केंद्रों पर परीक्षा संबंधी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गईं हैं। परीक्षा केंद्रों के सभी कक्षों एवं महत्वपूर्ण हिस्सों को एआई सीसीटीवी से आच्छादित कर जनपद के कंट्रोल रूम तथा आयोग में स्थापित अत्याधुनिक एआई कैमरों से लैस इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से जोड़ा गया है। आयोग के कंट्रोल रूम से सभी केंद्रों की कनेक्टिविटी का परीक्षण कर लिया गया है। आयोग स्तर से प्रत्येक जनपद के लिए एक-एक सदस्य, सेवानिवृत्त आईएएस व सेवानिवृत्त आईपीएस को प्रेक्षक के रूप में नामित किया गया है, जो अपने आवंटित जनपद में पहुंचकर व्यवस्थाओं की समीक्षा कर चुके हैं। शासन के निर्देशों के अनुसार परीक्षा केंद्रों के आसपास निषेधाज्ञा लागू रहेगी। जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारीगण तथा उनकी निगरानी टीमों द्वारा परीक्षा केंद्रों पर लगातार भ्रमण किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा केंद्रों पर पर्याप्त फोर्स की तैनाती की जा रही है। संदिग्ध व असामाजिक तत्वों पर विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सतर्क दृष्टि रखी जा रही है। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि नकल कराने अथवा परीक्षा की शुचिता व गोपनीयता को प्रभावित करने वाले व्यक्ति, संस्था या संबंधित के विरुद्ध उ.प्र. सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों द्वारा किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, मोबाइल फोन आदि का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। शिक्षक पात्रता परीक्षा में प्रतिभाग करने वाले अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए जिला प्रशासन द्वारा आगमन, प्रवास व प्रस्थान के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। आकस्मिक स्थिति हेतु समुचित सुरक्षा एवं चिकित्सीय प्रबंध के निर्देश भी शासन द्वारा दिए गए हैं। आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने सभी परीक्षार्थियों से अपील की है कि वे समय से परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे तथा प्रवेश पत्र में मुद्रित निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन करें। शासन के निर्देशों के अनुरूप केंद्रों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं उनके हित में सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थी किसी अफवाह अथवा बहकावे में न आएं और सूचनाओं की पुष्टि आयोग की वेबसाइट www.upessc.up.gov.in एवं 'X' हैंडल @upesscprayagraj से कर लें। अध्यक्ष ने कहा कि शासन एवं आयोग इस परीक्षा को पूरी तरह से पारदर्शी, निष्पक्ष तथा शुचितापूर्ण ढंग से कराने के लिए कृत संकल्पित है। उन्होंने सभी परीक्षार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

योगी सरकार का बड़ा कदम: 10 जिलों में आधुनिक रजिस्ट्री कार्यालय और अभिलेखागार बनेंगे

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के दस जिलों में फ्लैट, मकान, प्लाट वगैरह की रजिस्ट्री और आसान होने वाली है। इन जिलों में दस उप निबंधक कार्यालयों और अभिलेखागारों का शिलान्यास किया गया है। योगी सरकार में स्टांप और पंजीयन राज्य मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बुधवार को लखनऊ से ही इनका वर्चुअल शिलान्यास किया। मथुरा, कुशीनगर, झांसी, गोण्डा, मुरादाबाद, अमरोहा, सीतापुर, हरदोई, लखनऊ और बाराबंकी जनपदों में विभिन्न जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा कि प्रदेश की डबल इंजन सरकार रजिस्ट्री कार्यालयों में आने वाले आमजन को हर अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इन नए और विस्तारित भवनों के निर्माण से संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों को विलेखों के पंजीकरण और शासकीय अभिलेखों के सुरक्षित रख-रखाव में अत्यधिक सुगमता होगी। सभी दस जिलों में भव्य कार्यक्रम आयोजित इस वर्चुअल शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के सभी 10 शिलान्यास स्थलों पर भव्य स्थानीय समारोहों का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों ने गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। आगरा मंडल के मथुरा जनपद के सदर में आयोजित कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य तेजवीर सिंह, सांसद हेमामालिनी, विधान परिषद सदस्य योगेश चौधरी, विधान परिषद सदस्य ओमप्रकाश सिंह तथा विधायक श्रीकान्त शर्मा उपस्थित रहे। गोरखपुर मंडल वहीं गोरखपुर मंडल के कुशीनगर जनपद के कप्तानगंज में आयोजित समारोह में सांसद विजय कुमार दूबे तथा विधायक विनय प्रकाश गोंड ने सहभागिता की। झांसी मंडल के झांसी जनपद के सदर में आयोजित कार्यक्रम में सांसद अनुराग शर्मा, विधायक राजीव  सिंह पारीछा तथा विधायक रवि शर्मा मौजूद रहे। देवीपाटन मंडल देवीपाटन मंडल के गोण्डा जनपद के सदर में आयोजित शिलान्यास कार्यक्रम में विधायक प्रतीक भूषण सिंह, विधान परिषद सदस्य अवधेश कुमार सिंह (मंजू सिंह) तथा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह ने हिस्सा लिया। मुरादाबाद मंडल मुरादाबाद मंडल के अंतर्गत मुरादाबाद जनपद के सदर में आयोजित कार्यक्रम में विधायक रितेश कुमार गुप्ता उपस्थित रहे, जबकि इसी मंडल के अमरोहा जनपद के हसनपुर में आयोजित समारोह में सांसद श्री कवंर सिंह तंवर, विधायक महेन्द्र सिंह खड़गवंशी तथा विधान परिषद सदस्य डा० हरि सिंह ढिल्लो ने भागीदारी की। लखनऊ मंडल के सीतापुर जनपद के सदर में आयोजित भव्य कार्यक्रम में राज्य मंत्री कारागार सुरेश राही, राज्य मंत्री नगर विकास राकेश राठौर तथा विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान सम्मिलित हुए। लखनऊ मंडल लखनऊ मंडल के ही हरदोई जनपद के सदर में आयोजित समारोह में सांसद जय प्रकाश, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल तथा विधान परिषद सदस्य अशोक कुमार अग्रवाल ने सहभागिता की। लखनऊ जनपद के मोहनलालगंज में आयोजित शिलान्यास कार्यक्रम में विधायक अमरेश कुमार रावत मौजूद रहे। अयोध्या मंडल अयोध्या मंडल के बाराबंकी जनपद के सदर में आयोजित कार्यक्रम में विधान परिषद सदस्य अंगद कुमार सिंह उपस्थित रहे। इन सभी जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में रजिस्ट्री कार्यालयों के सुदृढ़ीकरण के लिए राज्य सरकार के इस जनहितैषी प्रयास की सराहना की।

कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे को मिली मंजूरी, सीएम योगी ने पीएम मोदी का जताया आभार

कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे को मंजूरी मिलने पर सीएम योगी ने पीएम मोदी का जताया आभार बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और कानपुर रिंग रोड को मिलेगी निर्बाध कनेक्टिविटी 117.7 किमी लंबे हाईवे पर खर्च किए जाएंगे 7,145 से अधिक करोड़ रुपये लखनऊ,   उत्तर प्रदेश को बेहतर सड़क संपर्क और औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ी सौगात मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने कानपुर-कबरई एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे के निर्माण को मंजूरी दे दी है।  7,145 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाली इस परियोजना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि 'विकसित उत्तर प्रदेश' के संकल्प को नई शक्ति देने वाले इस दूरदर्शी निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का हार्दिक आभार। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पोस्ट में लिखा कि भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और कानपुर रिंग रोड को निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इससे आवागमन सुगम होगा, निवेश को नई गति मिलेगी और क्षेत्र के औद्योगिक विकास को सुदृढ़ आधार प्राप्त होगा। डेढ़ घंटे में पूरा होगा सफर राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के अंतर्गत बनने वाला यह 117.7 किलोमीटर लंबा चार लेन का एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे भविष्य में छह लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इस हाईवे के बनने के बाद कानपुर से कबरई तक का सफर, जो अभी करीब साढ़े तीन घंटे में पूरा होता है, वह घटकर करीब डेढ़ घंटे रह जाएगा। बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश को मिलेगा फायदा यह हाईवे कानपुर, कबरई, सागर, भोपाल और मध्य प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के बीच तेज और सुगम संपर्क उपलब्ध कराएगा। इससे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों का जुड़ाव मध्य प्रदेश के खनिज, कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों से और मजबूत होगा। इससे व्यापार, उद्योग और माल परिवहन को भी गति मिलेगी। रोजगार के नए अवसर इस परियोजना के निर्माण से बड़ी संख्या में रोजगार का भी सृजन होगा। अनुमान है कि निर्माण कार्य के दौरान करीब 1.2 करोड़ मानव-दिवस प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी।